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‘तुरंत बताओ…कैसे कहा ‘अटैक’ करा सकती है सरकार’: IT मंत्रालय ने माँगा Apple कंपनी से जवाब, विपक्षी दलों ने अलर्ट आने पर उठाया था सवाल

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में राजनेताओं एवं अन्य लोगों को भेजे गए ‘सरकार प्रायोजित हैकरों से सावधान’ वाले मैसेज पर एप्पल (Apple) से जवाब माँगा है। आईटी मंत्रालय ने गुरुवार (2 नवंबर 2023) को Apple को एक नोटिस भेजकर इस दावे का सबूत पेश करने को कहा गया। मंत्रालय ने इस नोटिस पर एप्पल से तुरंत जवाब माँगा है।

जानकारी के मुताबिक, आईटी मंत्रालय ने एप्पल प्रतिनिधियों से पूछा है कि उन्होंने कैसे फैसला किया कि हमला ‘राज्य प्रायोजित’ था। मंत्रालय ने एप्पल से ये भी सवाल किया है कि उसने ये फैसला किस आधार पर किया कि फोन को दूर से एक्सेस किया जाएगा और संवेदनशील डेटा लीक हो जाएगा।

गौरतलब है कि मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को एप्पल के आईफोन का इस्तेमाल करने वाले कई लोगों के पास कंपनी की तरफ से चेतावनी का नोटिफिकेशन गया था। इसमें एप्पल का डिवाइस इस्तेमाल करने वाले विपक्षी पार्टियों के सांसदों भी शामिल थे। आई मैसेज (iMessage) और एप्पल मेल में भेजे इस मैसेज में लिखा था कि सरकार के स्पॉन्सर्ड हैकर्स आपके आइफोन पर हमला कर सकते हैं।

बस फिर क्या था, इसको लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर ब्लेम गेम शुरू कर दिया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल, शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, आप सांसद राघव चड्ढा, AIMIM चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी मोदी सरकार पर हमलावर हो उठे।

केंद्र सरकार और खासकर केंद्रीय गृह मंत्रालय इनके निशाने पर आया। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा तो एप्पल मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर कर ये तक कह गए, “मोदी सरकार, आप ऐसा क्यों कर रहे हो।” यही नहीं इन सांसदों और नेताओं ने अपने संबंधित एक्स हैंडल पर एप्पल की ओर से आए कथित नोटिफिकेशन के स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए। विपक्ष ने बुधवार (1 नवंबर 2023) को एप्पल अलर्ट मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की।

महुआ मोइत्रा ने इसको लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा। उन्होंने इसकी जाँच के लिए आईटी की स्थायी संसदीय समिति की बैठक बुलाने की माँग की। इसको लेकर इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और निजता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से संजीदा है। उन्होंने इस मामले की जाँच कराने की बात कही थी।

अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया था कि एप्पल ने ऐसे मैसेज अलर्ट्स को लेकर 150 देशों में एडवाइजरी जारी की है। अब इसी बात पर कायम रहते हुए उनके मंत्रालय ने एप्पल से जवाब तलब किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक राजनीतिक सहयोगी और संघीय गृह मंत्रालय के दो अधिकारियों के मुताबिक, राजनेताओं की तरफ से जताई गई सभी साइबर सुरक्षा चिंताओं की जाँच की जा रही है।

भाजपा ने विपक्ष की बात को सिरे से नकारते हुए जॉर्ज सोरोस के फंडिंग वाले एक्सेस नाउ और आईफोन नोटिफिकेशन के बीच लिंक होने का इशारा किया था। बीजेपी ने कहा था कि इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी सब कुछ छोड़कर इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने को उतावले हो गए। वहीं कॉन्ग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम और सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आईटी के लिए संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखा।

गौरतलब है कि गुरुवार (1 नवंबर 2023) को आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा था कि विपक्षी दलों के सांसदों ने एप्पल की तरफ से भेजे गए अलर्ट मैसेज का जो मुद्दा उठाया था, उसके लिए भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम यानी सीईआरटी-एन (CERT-N) जाँच करेगा। ये देश की कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़े मामलों पर जवाब देने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।

IIT कैंपस में घूम रही थी छात्रा, बाइक सवारों ने रोक कर कपड़े उतारे, वीडियो बनाया: नाराज छात्र BHU में धरने पर बैठे

आईआईटी बीएचयू में छेड़खानी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला बुधवार (1 नवंबर, 2023) का है। जहाँ कैम्पस में ही रात करीब 2 बजे साथी संग घूम रही छात्रा को पहले बाइक सवार युवकों ने रोका, उनके साथी से मारपीट की और छात्रा को अलग ले जाकर उनसे छेड़खानी करके उसका वीडियो बना लिया। आरोप है कि उन मनबढ़ बदमाशों ने महिला स्टूडेंट के कपड़े फाड़े और फिर उसे सड़क किनारे आपत्तिजनक हालत में छोड़ गए। आरोपितों की संख्या 3 बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छेड़खानी की इस घटना की खबर गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को जैसे ही परिसर में हुई, पूरे परिसर के छात्र इकट्ठा होकर धरने पर बैठ गए। धरना आज भी जारी है। छात्र IIT के गेट पर आरोपितों की गिरफ्तारी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धरने पर बैठे हैं। धरनारत छात्रों की माने तो परिसर में ऐसी घटनाएँ अक्सर होती हैं लेकिन सुरक्षा को लेकर यहाँ पर किसी तरह का कोई इंतजाम नहीं है।

छेड़खानी की घटना की खबर सुनकर प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। ऑपइंडिया ने डीन ऑफ़ स्टूडेंट अफेयर्स IT BHU से भी बात की। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए अभ ज्यादा जानकारी होने से इनकार किया। कहा मामले में छात्रा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। वहीं इस बड़ी घटना के बाद आईआईटी बीएचयू में सुबह से ही छात्र-छात्राएँ सड़कों पर हैं। इतना ही नहीं संस्थान के सभी डिपार्टमेंट के सभी क्लासेस भी बंद हैं।

दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने छात्रा के कपड़े उतारे और किस किया। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया। जिससे छात्र भड़के हुए हैं। बड़ी संख्या में छात्र धर्मराज हॉस्टल चौराहे पर इकट्ठा होकर धरना दे रहे हैं। साथ ही हाथ में हैशटैग Campus Closed और हैशटैग जस्टिस लिखी हुई तख्तियाँ हाथ में लिए हुए कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि कैम्पस में लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं। कैम्पस में ज्यादातर जगहों पर सुरक्षाकर्मी नहीं रहते और कैम्पस में लगे सीसीटीवी भी खराब पड़े हैं।  

छात्रा का बनाया आपत्तिजनक वीडियो, एफआईआर दर्ज

एफआईआर में छात्रा ने बताया, “मैं अपने हस्टल न्यू गर्ल्स IIT BHU से निकली थी। जैसे ही गाँधी स्मृति छात्रावास चौराहे के पास पहुँची, वहीं पर मेरा दोस्त मुझे मिला। हम दोनों साथ में जा रहे थे कि रास्ते में कर्मन बाबा मन्दिर से करीब 300-400 मीटर के बीच एक बाइक आई, जिस पर तीन लोग बैठे हुए थे। वे लोग अपनी बाइक वहीं खड़ी करके मुझे और मेरे दोस्त को अलग कर दिए। मेरा मुँह पूरी तरह से दबा लिए।

वे यहीं नही रुके मुझे एक कोने में लेकर गए। पहले मुझे किस किया। उसके बाद मेरे सारे कपड़े निकालकर विडियो और फोटो बनाया। जब मैं बचाव के लिए चिल्लाई तो मुझे मारने की धमकी दी। मेरा फोन नंबर भी लिया और 10-15 मिनट तक मुझे बंधक बनाए रखा। फिर आपत्तिजनक हालत में छोड़ गए।”

आरोपित छात्रा का मोबाइल भी अपने साथ ले गए एवं जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी है। वहीं छात्रा ने घटना के बाद पास के ही एक प्रोफेसर घर मदद के लिए गई। प्रोफ़ेसर ने छात्रा को सुरक्षकर्मियों के पास पहुँचाया। जहाँ से बाद में लंका थाना में शिकायत की गई। छात्रा की शिकायत पर लंका थाने में धारा 354 , 506 IPC और IT एक्ट की धारा 66 E के तहत FIR दर्ज की गई है। 

घटना में 3 युवक थे शामिल

बताया जा रहा है घटना में 3 युवक शामिल थे। जो बाहरी बताए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पहचान नहीं हो पाई है।  इस वारदात के बाद मौके पर लंका थाना के SO सहित कई पुलिस अधिकारी धरनास्थल पर मौजूद हैं। भेलूपुर एसीपी प्रवीण सिंह ने बताया कि इस मामले में छात्रों से बातचीत की जा रही है। उनके शिकायत के आधार पर आगे पुलिस कार्रवाई करेगी। 

गौरतलब है कि बीएचयू में 2017 में भी छेड़खानी की बड़ी घटना सामने आई थी। तब भी खूब बवाल हुआ था। 

बस नाम रख लिया INDI गठबंधन, काम कुछ हो नहीं रहा: कॉन्ग्रेस पर कुपित हुए नीतीश कुमार, अब किसके तरकश में बैठेगा तीर?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेसी नेता बिजी हैं, गठबंधन पर कोई काम नहीं हो रहा है। नीतीश कुमार का साफ कहना है कि अभी गठबंधन को लेकर कोई बात नहीं हो रही है, न ही कोई काम चल रहा है, क्योंकि कॉन्ग्रेस के नेता पाँच राज्यों के चुनाव में व्यस्त हैं। चुनाव खत्म होने के बाद ही इस गठबंधन को लेकर कोई बातचीत होगी।

नीतीश कुमार ने खुद को सभी को साथ लेकर चलने वाला नेता बताया। वह गुरुवार (2 नवंबर 2023) को सीपीआई और वामदलों द्वारा पटना में आयोजित एक रैली में शामिल हुए। इस दौरान मंच से उन्होंने कॉन्ग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया। नीतीश कुमार ने कहा है कि अभी कॉन्ग्रेस पार्टी गठबंधन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उसका ध्यान सिर्फ 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव पर है।

नीतीश कुमार का ये बयान कुछ-कुछ अखिलेश यादव के बयान से मिलता जुलता है कि अभी तक इस गठबंधन को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। अखिलेश यादव ने एमपी विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस से मिली दुत्कार के बाद कहा था कि उन्हें अगर पता होता कि ये गठबंधन एमपी चुनाव के लिए नहीं है तो वो यहाँ बैठक के लिए आते ही नहीं। अब नीतीश कुमार ने भी कुछ ऐसी ही बात कही है।

कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए नीतीश कुमार ने इंडी गठबंधन से निकलने की बात तो नहीं कही, हाँ ये जरूर कह दिया कि वो सभी को लेकर चलना चाहते हैं। तभी सभी को एकजुट कर रहे हैं। उन्होंने खुद को सोशलिस्ट बताते हुए कहा कि सीपीआई से पुराना रिश्ता है। कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट को एक होकर आगे चलना है। अब एक बार पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो जाए, उसके बाद इस गठबंधन के भविष्य पर चर्चा होगी।

नीतीश कुमार के रोल को हाईजैक कर रहे राहुल गाँधी?

भाजपा के खिलाफ गठबंधन खड़ा करने में नीतीश कुमार का सबसे बड़ा रोल रहा, लेकिन मौका मिलते ही कॉन्ग्रेस ने उन्हें किनारे कर दिया। राहुल गाँधी ने पूरा गठबंधन हाईजैक कर लिया है। यहाँ तक कि इस गठबंधन को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार से पूछे बिना ही गठबंधन का नामकरण I.N.D.I. Alliance कर दिया था। इस बात से नीतीश कुमार काफी नाराज हुए थे और गठबंधन की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिए बगैर ही लौट आए थे।

हालाँकि, उन्होंने नाराजगी की बातों को नकार दिया था, लेकिन उसके बाद से नीतीश कुमार के बयान बताते हैं कि उन्हें ही इस गठबंधन में कोई भाव नहीं दिया जा रहा है, जबकि उनके दम पर ही ये खड़ा हुआ। वहीं, अखिलेश यादव को साफ कह चुके हैं कि एमपी में उनके 40 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जब लोकसभा चुनाव आएगा तब देखा जाएगा।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने भाजपा के खिलाफ सभी दलों को इकट्टा करने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। उनकी मेजबानी में इस गठबंधन की घोषणा से पहले ही पटना में एक बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद बैठक मुंबई और फिर बेंगलुरु में हुई। इसी बैठक के दौरान उनकी मर्जी पूछे बगैर राहुल गाँधी ने गठबंधन के नाम की घोषणा कर दी थी, जिसके बाद गठबंधन की ओर से साझा बयान जारी किया गया था।

इस बयान में भी नीतीश कुमार को किनारे करने की झलक दिखी थी, जब उनके द्वारा एजेंडा के तौर पर शामिल कराई गई जातीय जनगणना की माँग पर सभी दल सहमत नहीं हो सके थे। बाद में साझे बयान के दौरान इस मुद्दे को ही गायब कर दिया गया। इसके बाद राहुल गाँधी ने गठबंधन की तरह ही जातीय जनगणना की माँग को भी हाईजैक करने की कोशिश की है और वो लगातार जातीय जनगणना पर मुखर होकर बयानबाजी कर रहे हैं।

इंडी गठबंधन के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह!

इस गठबंधन का हिस्सा डीएमके पार्टी ने सनातन पर हमले किए, तब भी इंडी गठबंधन की ओर से उनका न तो समर्थन किया गया और न ही विरोध। ये जरूर हुआ कि उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद इंडी गठबंधन की भोपाल में जो रैली होने वाली थी, वो चुनावों की वजह से कॉन्ग्रेस के दबाव में रद्द कर दी गई। वहीं, आरजेडी के नेताओं की सनातन और हिंदू विरोधी बयानबाजी पर भी नीतीश कुमार समेत सभी दल खामोश रहे हैं।

इसके बाद अखिलेश यादव ने खुलेआम इस गठबंधन के खिलाफ बयान दिए तो अब नीतीश कुमार के तेवर भी सामने आ गए। इस बीच, अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया है कि वो इंडी गठबंधन में होकर भी उत्तर प्रदेश की 80 में से 65 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे। उन्हें किसी दल के साथ की जरूरत नहीं।

इसी तरह पंजाब से लेकर दिल्ली तक आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस की खींचतान सामने आ ही चुकी है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ काम करने को इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में बहुत कम जगहें ऐसे बची हैं, जहाँ ये इंडी गठबंधन बिना विवादों के हों। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा को रोकने के लिए बना इंडी गठबंधन शायद ही कोई कमाल कर पाए।

सड़क पर खून से लथपथ तड़प रहा था फिल्ममेकर, लोग बनाते रहे Video, चुरा लिया सामान: 2 घंटे बाद मिला इलाज, अस्पताल में मौत

दिलवालों की दिल्ली की बेदर्दी का नमूना शनिवार (28 अक्टूबर,2023) को देखने को मिला। यहाँ सड़क पर हादसे का शिकार हुए एक युवा फिल्म मेकर पीयूष पाल बाइक हादसे में घायल होकर काफी देर सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन कोई उन्हें अस्पताल नहीं लेकर गया।

दो घंटे बाद जाकर उन्हें ट्रीटमेंट मिला। मगर, तब तक देर हो गई थी। गंभीर चोटों की वजह से वो दुनिया को अलविदा कह गए। अगर घटना के वक्त वहाँ खड़े लोग थोड़ी इंसानियत दिखाकर वीडियो- फोटो छोड़ उनकी मदद करने आगे आते तो शायद आज वो जिंदा होते।

कुछ लोग तो इस कदर बेदर्द निकले कि वो हादसे के शिकार युवक को खून से लथपथ देखकर भी उनका सारा सामान लूट कर ले गए।

पोस्टमार्टम के बाद कल बुधवार (1 नवंबर, 2023) देर शाम निगमबोध घाट पर पीयूष का अंतिम संस्कार हुआ, लेकिन पीयूष का इस तरह जाना हमारे इंसान होने पर कई सवाल छोड़ गया।

ये वाकया साउथ दिल्ली की बिजी रोड का है। शनिवार की रात 9.45 बजे 30 साल के फिल्म मेकर पीयूष पाल अपनी नई बाइक पर कालका जी जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक,उनकी बाइक की पंचशील एनक्लेव के पास एक दूसरी बाइक से टक्कर हो गई।

पाल इस हादसे के बाद आधे घंटे तक खून से लथपथ सड़क पर पड़े रहे, मगर दिल्ली वालों को दिल नहीं पसीजा। पीयूष की साँसे पल-पल उखड़ रही थीं, पर वहाँ से गुजरने और वहाँ खड़े लोग इंसानियत को दरकिनार कर इस हादसे का वीडियो बनाने और सेल्फी लेने में मशगूल रहे।

इस युवा फिल्म मेकर के चेहरे और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। उन्हें तुरंत मदद की जरूरत थी, लेकिन लोगों को इससे क्या लेना-देना था। उन्हें तो बस हादसे को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके व्यूज और लाइक बढ़ाने की जल्दी थी। जब-तक पीयूष को मदद पहुँचती बहुत देर हो चुकी थी। सड़क हादसे के दो घंटे बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक, ये हादसा आउटर रिंग रोड पर आईआईटी क्रॉसिंग से नेहरू प्लेस को जाने वाले रास्ते पर रात करीबन 9.45 बजे हुआ। ये खुलासा पंचशील एंक्लेव के पेट्रोल पंप पर लगे एक सीसीटीवी की फुटेज से हुआ। इस सड़क पर सारा दिन वाहनों का ताँता लगा रहता है।

इस हादसे के 30 मिनट बाद वहाँ से गुजर रहे पंकज जैन और कुछ लोग वहाँ हंगामा होता देख रुके। जैन ने टीओआई को बताया कि लोग वहाँ खड़े थे जिन्होंने बताया कि पीयूष लगभग आधे घंटे से यहाँ पड़ा है और इसका बहुत खून बह चुका है।

जैन ने बताया,”मैंने दो-तीन लोगों से उसको उठाने में मदद माँगी। हम उसे ऑटोरिक्शा में नजदीक के क्लीनिक में ले गए थे, लेकिन वो इस केस को हैंडल नहीं कर पाया।” उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद घायल पीयूष को वहाँ से हेवी ट्रैफिक के बीच चार किलोमीटर दूर प्रेस एंक्लेव मार्ग के PSRI म्यूनिसिपलिटी अस्पताल ले गए। रात के करीब 11 बजे पीयूष को मेडिकल ट्रीटमेंट मिल पाया।

उधर पुलिस के मुताबिक उन्हें इस हादसे की सूचना पीसीआर कॉल पर रात के 10.11 बजे मिली। कॉल करने वाले ने कहा कि दो लोग घायल हैं। लेकिन पुलिस जब तक मौके पर पहुँची तब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जा चुका था।

हादसे को लेकर डीसीपी साउथ चंदन चौधरी का कहना है कि मौका-ए-वारदात पर कोई भी आई विटनेस नहीं मिला। घायलों में से एक को PSRI अस्पताल तो दूसरे को AIIMS के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।

उन्होंने आगे कहा की सीसीटीवी फुटेज में मृतक पाल की बाइक 26 साल के बंटी की बाइक को हिट करते दिखी। हालाँकि इसे लेकर पाल के दोस्तों ने ऐतराज जताया है। जहाँ हादसे में मारे गए पाल गुरुग्राम में फ्रीलांसर फोटोग्राफर का काम करते थे तो बंटी ड्राईवर हैं और गुरुग्राम रहते हैं।

मृतक पाल के दोस्त स्वर्णेंदु बोस दिल्ली वालों की बेरहमी पर गुस्सा है। वो कहते हैं कि हादसे के बाद कोई भी देर तक उनके दोस्त की मदद को आगे नहीं आया। वो आगे कहते हैं कि इससे भी शर्म की बात है कि उसका मोबाइल फोन और लैपटॉप लोग ले गए।

उसके पेरेंट्स मोबाइल फोन करते रहे, लेकिन पाल का मोबाइल लेकर गया शख्स फोन काटता रहा और बाद में उसने फोन स्विच ऑफ कर दिया। बोस आगे कहते हैं कि किसी ने उसके पेरेंट्स की कॉल उठा ली होती शायद जो हुआ वो नहीं होता।

बोस ने बताया कि उनके दोस्त पाल ने नई हीरो एक्स पल्स बाइक खरीदी थी और शायद वो आरके पुरम के फिटनेस सेंटर से लौट रहे थे। सड़क हादसे में घायल होने से पहले पाल अपने घर से कुछ ही किलोमीटर दूर थे। मृतक के परिवार की चितरंजन पार्क में पूजा सामग्री की दुकान है।

PSRI अस्पताल के न्यूरो इंटरवेंशन चीफ और न्यूरो सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट्स डॉ सुमित गोयल के मुताबिक, लगभग रात 11 बजे पीयूष को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं। उसे तुंरत वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन गंभीर चोटों की वजह से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और मंगलवार (31,अक्टूबर,2023) सुबह उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

चुनाव का बहाना बना केजरीवाल ने छोड़ी दिल्ली, खुद को बताया स्टार प्रचारक: ED से दिल्ली के CM ने पूछा- किस ‘हैसियत’ से मुझे बुलाया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष आज पेश होने से मना कर दिया है। उन्होंने इस मामले में ED को एक पत्र लिखकर बताया है कि जारी विधानसभा चुनावों में वे AAP के स्टार प्रचारक हैं और उनको कार्यकर्ताओं को सिखाना होता है। इसलिए वह पेश नहीं हो सकते। वह तीन दिन के दौरे पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ निकल गए हैं।

ED ने 30 अक्टूबर 2023 को एक समन भेजकर CM केजरीवाल को शराब घोटाले में पूछताछ के लिए 2 नवम्बर 2023 को बुलाया था। इसको लेकर आम आदमी पार्टी ने नेताओं ने शोर मचाया था कि प्रवर्तन निदेशालय उन्हें 2 नवंबर को गिरफ्तार कर लेगी। अब केजरीवाल ने ED को दो पन्नों का एक पत्र भेजकर केंद्र सरकार पर ही आरोप लगा दिए हैं।

केजरीवाल ने कहा कि है उन्हें यह पता नहीं चल रहा है कि ED उन्हें इस मामले गवाह के तौर पर बुला रही है या फिर संदिग्ध के तौर पर बुला रही है। उन्हें अपने बुलाए जाने का कारण भी नहीं बताया गया है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें यह भी पता नहीं है कि उन्हें AAP के मुखिया या दिल्ली के मुख्यमंत्री या फिर एक सामान्य व्यक्ति के तौर पर बुलाया जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने समन को प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन समन जारी हुए उसी दिन मनोज तिवारी जैसे भाजपा के नेताओं ने कहना चालू किया कि ‘मैं गिरफ्तार किया जाऊँगा’। उन्होंने आरोप लगाया कि समन को भाजपा नेताओं को लीक किया गया था। केजरीवाल की गिरफ्तारी को आप सरकार में मंत्री आतिशी ने भी कहा था कि 2 नवम्बर को ED अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार कर लेगी।

अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया हैं, जिसकी दिल्ली और पंजाब में सरकार है। केजरीवाल ने दावा किया कि वह अपनी पार्टी के स्टार प्रचारक हैं और उनकी पार्टी पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भाग ले रही है। इसलिए उन्हें प्रचार के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में वह ED के साथ पूछताछ में सहयोग नहीं कर सकते।

हालाँकि, वह बात अलग है कि आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश में एक तिहाई से भी कम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। राजस्थान में उसने अभी 200 सीटों में से मात्र 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और छत्तीसगढ़ में 57 प्रत्याशी उतारे हैं। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री होने के चलते भी व्यस्तता का हवाला दिया है। इन सब कारणों को देते हुए केजरीवाल ने ED से अपने समन वापस लेने की माँग की है।

केजरीवाल के इस जवाब पर दिल्ली के भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हर गुनाहगार की अंतरात्मा जानती है कि कानून की नजरों में आने पर वह बच नही पाएगा, परन्तु बौने दुर्योधन अरविन्द केजरीवाल जी विक्टिम कार्ड खेलकर गरीब और सीधे लोगों की सहानुभूति लूटने में माहिर हैं। वाह क्या बहाना है – चुनाव प्रचार से मुझे रोकना। कानून से कब तक भागोगे, जवाब तो देना पड़ेगा।”

भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने केजरीवाल के ED की पूछताछ में ना जाने पर लिखा है, “अरविंद केजरीवाल जी अगर शराब घोटाला नहीं किया तो आप जाँच एजेंसियों के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे?” गौरतलब है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

स्वच्छता भी, कमाई भी: सरकारी दफ्तरों का कबाड़ बेच 30 दिन में आए ₹500 करोड़, 154 लाख वर्ग फुट स्पेस खाली; 4.75 लाख पेडिंग केस भी निपटे

इस साल गाँधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने कार्यालयों की सफाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया था। 31 अक्टूबर 2023 तक चले इस अभियान के दौरान सरकारी दफ्तरों का कबाड़ बेचकर 500 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी है।

सरकारी दफ्तरों में इस तरह का स्वच्छता अभियान लगातार तीसरे साल चलाया गया है। इससे पूर्व दो साल में रद्दी बेचने से करीब 1100 करोड़ रुपए आए थे। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये खास अभियान 3.0 स्वच्छता को संस्थागत बनाने और सरकारी दफ्तरों में लंबित मामलों को कम करने की दिशा में भारत का सबसे बड़ा अभियान था। इस दौरान कई बेहतरीन कार्यप्रणाली और उपलब्धियाँ भी हासिल हुई।

राज्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्‍वच्‍छता के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए देश भर के 2.53 लाख से अधिक दफ्तरों में यह अभियान चलाया गया था। बता दें कि पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 में महात्मा गाँधी की जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य साल 2019 में महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर स्वच्छ भारत बनाना था।

इस अभियान के पहले चरण में भारत में खुले में शौच की आदत को खत्म करना था। इसका दूसरा चरण साल 2020-21 से लेकर 2024-24 तक मिशन मोड में चलाया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण का उद्देश्य महज खुले में शौच की आदत को खत्म करना और गाँवों के लिए बुनियादी ढाँचे बनाना ही नहीं, बल्कि बेहतर सफाई और निजी साफ-सफाई की आदतों के लिए जनता के व्यवहार में बदलाव लाना भी है।

राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि हर गुजरते साल के साथ ये अभियान बढ़ता ही जा रहा है। गौरतलब है कि इस सफाई अभियान के जरिए केंद्र सरकार की अच्छी खासी कमाई भी हुई है। जहाँ 2021-23 तक सरकार के चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत स्क्रैप के निपटारे से 1100 करोड़ रूपए कमाए गए। वहीं तीसरे सफाई अभियान के तहत महज 30 दिन में 500 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है।

फोटो साभार: पीआईबी

इस स्वच्छता अभियान से सरकारी दफ्तरों में इस्तेमाल के लिए 154 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई। इस दौरान 46 लाख फाइलों की समीक्षा की गई। 4.75 लाख पेंडिंग केस का निपटारा किया गया।

इस खास अभियान 3.0 की समीक्षा भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, कैबिनेट सचिव और सचिवों ने की। उनके ही दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन में इस काम को अंजाम दिया गया है। इस अभियान पर पोर्टल (https://scdpm.nic.in) के जरिए लगातार निगरानी की गई। इसके लिए रोजाना बैठकें भी की गई।

इस अभियान के लिए सरकार के मंत्रालयों और विभागों ने 75,000 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट की। यही नहीं इसके लिए डीएआरपीजी हैंडल से 800 ट्वीट्स, SpecialCampaign3.0 पर 1100 इन्फोग्राफिक्स और पीआईबी ने 258 बयान जारी किए गए। यही वजह रही कि ये अभियान सोशल मीडिया पर खासा लोकप्रिय हुआ।

‘1984 का दंगा सिख नरसंहार, RSS है इसका जिम्मेदार’: कनाडा के खालिस्तानी MP का प्रलाप, लोगों ने दिलाई याद कैसे स्वयंसेवकों ने बचाई थी जान

कनाडा की गठबंधन सरकार में शामिल NDP के खालिस्तान समर्थक मुखिया जगमीत सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर नया प्रोपगैंडा फैलाने की कोशिश की है। जगमीत सिंह ने इसे सिखों का नरसंहार करार देते हुए इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को जिम्मेदार बताया है।

जगमीत सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आज सिख नरसंहार की 39वीं बरसी है। पहले से राज्य प्रायोजित हिंसा में हजारों सिखों को मार दिया गया था। इस वर्ष हमें पता चला है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट शामिल थे। इसने पुराने जख्मों को फिर हरा कर दिया है।”

जगमीत सिंह ने आगे लिखा, “अब सिखों के घावों पर मरहम लगाने के प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कनाडा की NDP 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार मानता है और इसको देखते हुए कनाडा में RSS और इससे जुड़े हुए संगठनों को प्रतिबंधित करने की माँग की है।”

खालिस्तान समर्थक जसमीत सिंह का ये कहना कि सिख विरोधी दंगों के जवाब में वह RSS को कनाडा में प्रतिबंधित करने की माँग कर हैं दिखाता है कि वह सच्चाई से कोसों दूर हैं और इतिहास की जानकारी नहीं रखते हैं। यह भी स्पष्ट होता है कि वह RSS और भारत सरकार के विरुद्ध प्रोपगैंडा फैलाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की उनके ही सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके पश्चात दिल्ली समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में दिख विरोधी दंगे भड़क गए थे। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इन दंगों में 3350 सिखों की हत्या कर दी गई थी।

दंगों की जाँच में सामने आया था कि इनका नेतृत्व कई जगहों पर कॉन्ग्रेस के नेताओं ने किया था। कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाईटलर, सज्जन कुमार और कमलनाथ पर इन दंगों को भड़काने का आरोप लगा था। इसमें सज्जन कुमार को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले में जहाँ कमलनाथ को अदालत ने बरी कर दिया था।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर हत्या और दंगा भड़काने के मामले में दोष सिद्ध हुई थी। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद देश के प्रधानमंत्री बने उनके पुत्र राजीव गाँधी ने इन दंगों को लेकर कहा था, “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है।” उन्होंने इस बयान के जरिए दंगों को सही ठहराने की कोशिश की थी।

भाजपा और RSS इस दौरान दिल्ली समेत अन्य जगहों पर सिखों को दंगाइयों से बचा रहे थे। इस बात की पुष्टि जाने-माने सिख लेख खुशवंत सिंह ने स्वयं की थी। हालाँकि, गूगल पर उपलब्ध यह जानकारी खालिस्तानी जगमीत सिंह को नहीं मिली। उसने अपना प्रोपगैंडा चलाने के लिए सिख दंगों के कारण RSS और इसके आनुषांगिक संगठनों को कनाडा में प्रतबंधित करने की माँग कर दी।

जगमीत सिंह के इस कृत्य पर लोगों ने उसे कसकर लताड़ लगाई। एक्स पर एक यूजर संदीप गंडोत्रा ने लिखा, “मेरे पिता, जो कि एक आरएसएस कार्यकर्ता थे, उन्होंने कम-से-कम 200 सिखों की जान इस दंगे के दौरान बचाई थी, लेकिन तुम सिख और सिखी के नाम पर एक धब्बा हो। तुम्हारा सच से कोई लेना-देना नहीं है।”

कार्तिकेय नाम के एक यूजर ने लिखा, “तुम लोग इतिहास से नावाकिफ हो, इसीलिए तुमने एक नाजी को अपनी संसद में बुलाकर सम्मान दिया।”

पत्रकार प्रदीप भंडारी ने लिखा, “अगर हम इस नमूने की बात का भरोसा करें तो उस हिसाब से राजीव गाँधी सरसंघचालक (RSS का मुखिया) थे और जगदीश टाइटलर जैसे लोग स्वयंसेवक थे।”

कभी डॉक्टर, कभी मरीज, कभी घायल बच्चे का बाप… कौन है हमास का ‘मुस्लिम विक्टिम कार्ड’ ऑनलाइन बेचने वाला ‘Mr. Fafo’

इस्लामी आतंकी संगठन हमास और इजरायल के युद्ध के बीच हमास और फिलीस्तीन के प्रोपगेंडा की पोल खुल रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक ऐसे ही वीडियो क्रिएटर की कलई खुली है जो कि एक दिन आतंकी, दूसरे दिन पीड़ित और तीसरे दिन डॉक्टर बन लेता है। उसे सोशल मीडिया ने ‘Mr. Fafo’ की संज्ञा दी है।

दरअसल, 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर हमले के तुरंत बाद आतंकियों की करतूतों को मिटाने और फिलिस्तीनियों के लिए सहानुभूति बटोरने का दौर चालू हो गया था। इसी कड़ी में सालेह अलजफारवी नाम के एक व्यक्ति जो कि गाजा का रहने वाला है, ने कई वीडियो सोशल मीडिया पर डाले।

सालेह पैलीवुड (Pallywood) का अभिनेता है। Pallywood दरअसल, फिलीस्तीन और हॉलीवुड के वुड शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। इस Pallywood का मुख्य कार्य इजरायल के विरुद्ध प्रोपगेंडा कंटेंट बनाना है।

सालेह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं जिनमें वह एक में गंभीर रूप से घायल मरीज बना हुआ है और उसे मरते हुए दिखाया गया है। दूसरे वीडियो में वह एक घायल बच्चे का बाप बन लेता है, तीसरे में एक डॉक्टर और चौथे में एक गायक बन लेता है।

सबसे पहले सालेह की एक ऐसी वीडियो वायरल हुई जिसमें वह इजरायल पर हुए आतंकी हमले के बाद जश्न मना रहा था। इसके बाद दूसरी वीडियो में वह इजरायल के हवाई हमलों से भागता हुआ दिखा। इसी के चलते लोगों ने एक्स (पहले ट्विटर) पर उसका मजाक उड़ाना चालू किया।

उसकी इन हरकतों के चलते उसे Mr. FAFO नाम दिया गया है। दरअसल, FAFO एक अंग्रेजी चलताऊ कहावत F@*k Around, Find Out के पहले अक्षरों को मिलाकर बनाया गया है इसका अर्थ होता है कि गड़बड़ करो और नतीजा देखो।

सालेह की सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रही हैं। डॉ एली डेविड नाम के एक अकाउंट ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इसी कड़ी में सालेह का एक वीडियो डाला जिसमें उन्होंने लिखा कि Mr. Fafo जो कि सुबह तक एक रेडियोलाजिस्ट था,अब गायक बन गया है।

किंगडम ऑफ़ इजरायल नाम के एक अकाउंट ने सालेह के कुछ फोटो वीडियो डाले जिसमें एक में वह हमास का आतंकी बनते हुए गाना गाता है, एक में किसी मरीज का एक्सरे मशीन पर इलाज करते हुए दिखता है जबकि दूसरी फोटो में उसका वही मीम है जिसने उसे Mr. Fafo के तौर पर ‘ख्याति’ दिलाई है।

एक्स पर ही याकोव कापलान द्वारा डाले गए एक वीडियो में सालेह मीडिया रिपोर्टर बना हुआ है। एक वीडियो में वह गाजा में अपने फिल्म स्टाफ के साथ भी दिखता है, जिसमें कुछ लोग उसके साथ किसी शूटिंग के लिए जा रहे हैं।

ओली लन्दन द्वारा डाले गए एक वीडियो में सालेह हँसता हुआ दिखता है जबकि वह कई ऐसे वीडियो बना चुका है जिसमें वह खुद को इजरायली हवाई हमलों में मारे गए बच्चों का बाप बताता है या फिर हवाई हमले में बर्बाद इमारतों पर क्रन्दन करता है। उसके प्रोपगेंडा के चलते मेटा ने उसका इन्स्टाग्राम अकाउंट उड़ा दिया था लकिन उसने अपने बैकअप अकाउंट से स्टोरी दुबारा डालनी चालू कर दी हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर फिलीस्तीन के लोगों द्वारा इस तरह का प्रोपगेंडा कोई नई बात नहीं है। लगातार इजरायल को एक दमनकारी शक्ति दिखाने के लिए ऐसी कई फोटो वीडियो वायरल की जाती रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया था कि गाजा से एक बच्ची का फोटो वायरल किया जा रहा है जो कुछ ही दिनों के अंतर पर तीन अलग-अलग हवाई हमलों में घायल हुई।

अमरोहा का भैंसा… पहले दूध पियूँगी, फिर मीट खाऊँगी: मोहम्मद शमी की बीवी ने किया पोस्ट, लोग बोले- तुझे डॉक्टर की जरूरत

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की बीवी हसीन जहाँ आजकल इंस्टाग्राम में एक भैंसे के साथ फोटो डालने से चर्चा में हैं। हसीन ने पोस्ट में शमी का मजाक उड़ाने की कोशिश की, जिसके बाद शमी के फैंस ने पोस्ट के नीचे उन्हें खरी-खरी सुनाई।

शमी की बीवी ने पोस्ट में भैंसा दिखाते हुए लिखा- “मैं और अमरोहा का भैंसा। अभी तो इसका दूध ले रही हूँ कुछ दिन बाद इसका मीट खाऊँगी। अमरोहा का भैंसा।”

उनके पोस्ट में जिस तरह से बार-बार अमरोहा पर जोर दिया गया, उससे यूजर्स को पता चल गया कि वो मोहम्मद शमी को निशाना बना रही हैं, क्योंकि शमी भी अमरोहा के ही हैं।

इस पोस्ट को देख यूजर्स ने कहा, “भैंसे ही सही हैं आपके लिए। शमी को आप डिजर्व भी नहीं करते थे।”

एक यूजर्स ने मजाक उड़ाते हुए पूछा- भैंसा कब से दूध देने लगा। वहीं एक ने कहा कि भैंसा का दूध कैसे निकला ये बता दो।

एक फैन तो नाराज होकर बोला कि इसने मोहम्मद शमी को भैंसा बोला है। सरकार को इसे गिरफ्तार करना चाहिए। ये पागल है।

वहीं दीपक राज सिंधिया ने लिखा इस पोस्ट के बाद विश्वास हो गया कि तू साइको है, तुझे डॉक्टर की जरूरत है।

बता दें कि मोहम्मद शमी और उनकी बीवी के बीच विवाद 2018 से सामने आया था। हसीन जहाँ ने शमी पर न सिर्फ अपनी प्रताड़ना, बल्कि मैच फिक्सिंग का भी आरोप लगाया था। उस समय शमी ने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि उनकी बीवी को कौन भड़का रहा है। मैच फिक्सिंग के आरोपों पर शमी ने कहा था कि वे देश से गद्दारी के बजाए मरना पसंद करेंगे। बाद में शमी और हसीन जहाँ अलग-अलग हो गए थे। कोलकाता की अलीपुर जिला अदालत ने 23 जनवरी 2023 को अपने निर्णय में मोहम्मद शमी को आदेश दिया था कि वो हर महीने हसीन जहाँ को 50 हजार रुपए गुजारा भत्ता के तौर पर दें।

इसके बाद हसीन ने दोबारा शमी की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया कि भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी वेश्याओं के साथ संबंध बनाते हैं। विदेशी दौरों पर होटल रूम में वेश्याओं को लेकर आते हैं। हसीन जहाँ के अनुसार, शमी ने वेश्याओं के संपर्क में रहने और उनसे अवैध संबंध बनाने के लिए अपने दूसरे मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। उस फोन को कोलकाता की लाल बाजार पुलिस ने जब्त कर लिया है। याचिका में यह भी कहा गया है, “शमी अभी भी वेश्याओं के साथ यौन गतिविधियों में शामिल हैं। पिछले 4 साल से इस मामले में सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है। शमी निचली अदालत में पेश नहीं हुए और जमानत के लिए आवेदन भी नहीं किया।”

साफ हवा में साँस लेना अधिकार, प्रदूषण के लिए आप जिम्मेदार: दिल्ली की जहरीली हवा पर हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

दिल्ली-एनसीआर फिर दमघोंटू प्रदूषण की चपेट में है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 343 है। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदूषण की स्थिति के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही कहा है कि साफ हवा में साँस लेना दिल्ली वालों का अधिकार है।

हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वन विभाग के प्रमुख सचिव से कहा है कि आपकी वजह से हम ऐसी खराब हवा में साँस लेने के लिए मजबूर हैं। यह आपकी जिम्मेदारी है कि AQI का स्तर नीचे आए। न्यायाधीश जसमीत सिंह ने दिल्ली में नया वन क्षेत्र विकसित करने और विभाग के खाली पड़े पदों को भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण बच्चे अस्थमा से जूझ रहे हैं। उन्हें साँस लेने में समस्य हो रही है। दिल्ली सरकार की नाक की नीचे रिज क्षेत्र में अतिक्रमण हो रहा है।

गौरतलब है कि ठंड का मौसम आते ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता फिर से खराब हो गई है। हवा में प्रदूषण को मापने वाले AQI पर दिल्ली के अधिकांश इलाके लगातार खराब स्थिति में हैं। दिल्ली की हवा का AQI स्तर औसतन 300 के ऊपर बना हुआ है जो कि स्वास्थ्य के लिए घातक है।

दिल्ली के आनंद विहार इलाके में AQI का स्तर 400 से ऊपर है, जबकि पटपड़गंज जैसे इलाकों में यह 350 से अधिक है। इस तरह की हवा केवल साँस के रोगियों के लिए ही नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्यों के फेफड़ों के लिए भी काफी खतरनाक है।

दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। (चित्र साभार: Google Maps)

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP_ सरकार प्रदूषण की इस समस्या से निपटने में अब तक नाकाम रही है। पहले वह दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का जिम्मा पंजाब-हरियाणा या फिर दिल्ली की एमसीडी पर डाल देती थी .लेकिन अब एमसीडी और पंजाब, दोनों में ही आम आदमी पार्टी सत्ता में है। दिल्ली सरकार ने अब प्रदूषण को नियंत्रित करने में हाथ खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली की तरह पंजाब में भी हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में पंजाब की भगवंत मान की सरकार अक्षम है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में इस सीजन अब तक पराली जलाने की 9594 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इसी कड़ी 1 नवम्बर 2023 ही 1921 पराली जलाने की घटनाएँ सामने आईं।

संगरूर, तरनतारन, फजिल्का और संगरूर जैसे जिलों में लगातार पराली जलाने की घटनाएँ हो रही हैं। लेकिन पंजाब सरकार उन्हें रोक नहीं पा रही है। बठिंडा, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों में AQI 200 के पार हो गया है।