Home Blog Page 1428

ग्रुप- पटियाला पैग, जाल पाकिस्तानी हुस्न का… सेना की जानकारी लीक करता था मेजर, राष्ट्रपति ने किया बर्खास्त

भारतीय सेना के एक अधिकारी को पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्त अधिकारी मेजर के पद पर तैनात था, जो स्ट्रैटजिक फोर्स कमांड (SFC) विंग में तैनात था। हनीट्रैप में फँसकर सेना की खुफिया जानकारियाँ लीक करने वाले मेजर के खिलाफ विभागीय जाँच मार्च 2022 से चल रही थी। मेजर के अलावा ब्रिगेडियर रैंक तक के कुल 18 डिफेन्स स्टाफ की भी जाँच जारी है। ये सभी ‘पटियाला पैग’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में मेजर, लेफ्टिनेंट कर्नल और ब्रिगेडियर रैंक के 18 सैन्य अधिकारियों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़े होने का खुलासा हुआ था। जब इसकी जाँच की गई तो पता चला कि पटियाला पैग ग्रुप में कुछ पाकिस्तानी जासूस भी मौजूद हैं। विषय की गंभीरता को देखते हुए मामले में जाँच बैठा दी गई। इस जाँच के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ ऑफिसर्स’ का पैनल बनाया गया।

मार्च 2022 में शुरू हुई इस जाँच पर अधिकारी अक्टूबर 2023 में निष्कर्ष पर पहुँच गए। उन्होंने पटियाला पैग ग्रुप के मेजर को हनीट्रैप के जाल में फँसे होने का दोषी पाया। मेजर जिस महिला के हनीट्रैप में फँसा था, उसका संबंध पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी से पाया गया। जाँच में यह भी निकलकर सामने आया कि मेजर ने महिला को भारतीय सेना के बारे में कई ख़ुफ़िया सूचनाएँ दीं।

रक्षा मंत्रालय ने आखिरकार मेजर की बर्खास्तगी की संस्तुति की। फाइल अंत में तीनों सेनाओं के सुप्रीम राष्ट्रपति के टेबल पर भेजी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मेजर की बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी। फ़िलहाल पटियाला पैग ग्रुप के अभी 18 अन्य ऐसे सैन्य अधिकारी है, जिनके खिलाफ जाँच चल रही है। माना जा रहा है कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद बाकी अधिकारियों पर भी एक्शन हो सकता है।

मीट की दुकान खोलने के लिए इमाम से लेनी होगी अनुमति, मस्जिदों के आसपास नहीं बिकेंगे सूअर के मांस: AAP शासित MCD का फैसला, शराब के बाद अब मीट पॉलिसी

अब दिल्ली में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों सहित सभी धार्मिक स्थलों के आसपास मीट की दुकानें नहीं दिखाई देंगी। दरअसल, ‘दिल्ली नगर निगम’ (MCD) की मंगलवार (31अक्टूबर, 2023) की बैठक हुई। इसमें सदन के लाए किए गए 58 में से 54 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें से मीट की दुकानों के लिए नई लाइसेंस पॉलिसी भी शामिल रही।

इसमें एमसीडी ने राजधानी में धार्मिक स्थलों के नजदीक मीट की दुकानों को लेकर नई लाइसेंस पॉलिसी को मंजूरी दे दी। एमसीडी के 12 जोन में ये पॉलिसी लागू होगी। मीट की दुकानों के लिए इस नई लाइसेंस पॉलिसी को लेकर एमसीडी सदन में खासा हंगामा भी हुआ।

सदन में पेश एजेंडे के मुताबिक, प्रस्तावित नई पॉलिसी में मीट की दुकानों, मीट प्रोसेसिंग यूनिट्स, पैकेजिंग या स्टोर प्लांट्स और ऐसे अन्य प्रतिष्ठानों के लिए नया लाइसेंस और लाइसेंस का नवीनीकरण शामिल होगा।

MCD के अधिकार क्षेत्र में मीट की दुकानों के लिए नए लाइसेंस देने की पॉलिसी पशु चिकित्सा सेवा विभाग की अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होगी और अन्य सभी मौजूदा पॉलिसीज की जगह लेगी। गौरतलब है कि इससे पहले एमसीडी के उत्तर, दक्षिण और पूर्वी निगम में मीट की दुकानों की लाइसेंस फीस और नियम एक नहीं थे। नई लाइसेंस पॉलिसी में एमसीडी के पहले के उत्तर, दक्षिण और पूर्वी निगमों में मांस की दुकानों के लिए लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए दुकानों के लिए 18,000 रुपए और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 1.5 लाख रुपए तक की फीस तय की गई है।

मीट स्टोर के लिए एक साल के लिए लाइसेंस रिन्यू करने की फीस 7000 रुपए, दो साल के लिए 12,000 रुपए और तीन साल के लिए 18,000 रुपए होगी। इसके अलावा 500 रुपए की प्रोसेसिंग फीस भी ली जाएगी। मीट की दुकान के लाइसेंसी की मौत होने पर कानूनी वारिस को लाइसेंस ट्रांसफर होने के लिए 5500 रुपए चार्ज लिया जाएगा।

मीट की दुकान के लाइसेंसी की मौत होने पर कानूनी वारिस को लाइसेंस ट्रांसफर करने के लिए 5500 रुपए चार्ज लिया जाएगा। पहली बार नियमों का उल्लंघन करने से मीट की दुकान या परिसर बंद होने से 20 हजार रुपए की प्रोसेसिंग फीस लिए जाएगी। इसके बाद नियमों को लगातार तोड़ने पर 50,000 रुपए लिए जाएँगे।

इसमें कहा गया है कि लाइसेंस दिए जाने की तारीख से हर तीन वित्तीय वर्षों के बाद सभी शुल्क और जुर्माने में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। दिल्ली के साल 2021 के मास्टर प्लान के मुताबिक, आवासीय क्षेत्र में मांस की दुकान का आकार कम से कम 20 वर्ग मीटर है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में दुकानों के आकार पर कोई रोक लागू नहीं होगी। प्रोसेसिंग यूनिट्स प्लांट्स के मामले में कम से कम जरूरी आकार 150 वर्ग मीटर है।

नई पॉलिसी के तहत सदन में पास प्रस्ताव के मुताबिक, मीट की दुकान और मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या अन्य धार्मिक स्थलों के बीच कम से कम 150 मीटर की दूरी की शर्त रखी गई है। नई पॉलिसी के तहत मीट की दुकान और धार्मिक स्थल या श्मशान घाट के बीच न्यूनतम दूरी 150 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।

इस नई पॉलिसी को लेकर एमसीडी के प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि मीट की दुकान लाइसेंस मिलने के बाद पूजा स्थल बनता है तो प्रशासन दुकान और धार्मिक स्थल के बीच की दूरी पर आपत्ति नहीं जताएगा। यदि मीट की दुकान खोलने वाला मस्जिद समिति या इमाम से NOC लेता है, तो एमसीडी उसे मस्जिद के आसपास सूअर के मांस को छोड़कर स्वीकृत नस्लों के जानवरों का मीट बेचने वाली दुकान खोलने की मंजूरी देता है।

‘9 साल में हमने किया जितना काम, वो दशकों में नहीं हुआ’ : PM मोदी के प्रयासों से जगमगाएगा बांग्लादेश भी, ₹13300 करोड़ सिर्फ थर्मल पावर प्लांट के लिए दिए

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तीन बड़े ऊर्जा और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया है। दोनों ने वर्चुअल माध्यम से एक कॉन्फ्रेंस में उपस्थित होकर इन प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया।

जिन तीन परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है उनमें भारत के अगरतला से बांग्लादेश के अखौरा के बीच रेल लाइन, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लिंक लाइन और मैत्री थर्मल पॉवर प्लांट का दूसरा फेज शामिल हैं। यह सभी कार्य भारत द्वारा दी गई वित्तीय सहायता से किए गए हैं।

इनमें से अगरतला-अखौरा रेल लाइन 12.24 किलोमीटर लम्बी है। इसे भारत सरकार द्वारा बांग्लादेश को दी गई ₹392 करोड़ की मदद के अंतर्गत बनाया गया है। इस ब्रॉड गेज रेल लाइन का 6.78 किलोमीटर हिस्सा बांग्लादेश जबकि 5.46 किलोमीटर हिस्सा भारत के त्रिपुरा में है।

वहीं खुलना मोंगला पोर्ट रेल लिंक लाइन को भी भारत द्वारा दिए गए लगभग ₹3,231 करोड़ के आसान कर्ज अंतर्गत बनाया गया है। यह 65 किलोमीटर लम्बी ब्रॉडगेज रेल परियोजना है जो बांग्लादेश के दूसरे सबसे बंदरगाह मोंगला को खुलना के रेल नेटवर्क से जोड़ती है।

इन दोनों रेल परियोजनाओं के अतिरिक्त, भारत ने बांग्लादेश के खुलना में 1,320 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट को बनाने के लिए भी लगभग ₹13,300 करोड़ की सहायता दी है। यह भारतीय कंपनी NTPC और बांग्लादेश की कंपनी BPDB के बीच 50:50 की साझेदारी के अंतर्गत बनाया है। इसके दूसरे चरण का लोकार्पण आज किया गया है।

इसके पहले चरण का लोकार्पण 1 सितम्बर 2022 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान भारत बांग्लादेश के बढ़ते रिश्तों और दोनों के बीच स्थापित की गई गई परियोजनाओं के विषय में भी बात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें पिछले 9 वर्षों में भारत-बांग्लादेश के बीच तीन नई बसें और तीन नई ट्रेनें चलाई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 के बाद से दोनों देशों के बीच पार्सल ट्रेन भी चल रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 9 वर्षों में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार तीन गुना हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को G20 सम्मेलन में आने के लिए धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा, “हमने जितना काम पिछले 9 वर्षों में किया है उतना काम कई दशकों में नहीं हुआ था।” उन्होंने बांग्लादेश को आगे भी सहायता देते रहने का वादा किया।

वहीं, परियोजनाओं के उद्घाटन पर पीएम शेख हसीना ने कहा, ”…मैं हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करने की आपकी प्रतिबद्धता के लिए अपना आभार व्यक्त करती हूँ।”

‘मत करो हिंदुओं को बाँटने का घिनौना काम’: बिहार के चाचा-भतीजा को स्वामी रामभद्राचार्य ने समझाया, कहा- जो राम-कृष्ण की बात करेगा, वही राज करेगा

चित्रकूट स्थित तुलसी धाम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य बिहार में रामकथा कह रहे हैं। पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर कस्बे में स्थित अर्जुन विक्रम शाह स्टेडियम में इस रामकथा का आयोजन हो रहा है। अपनी कथा के पहले ही दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि बिहार का विकास करने से ही गद्दी मिलेगी, न कि हिंदुओं को बाँटने से। हिंदू समाज को बाँटने का घिनौना काम बंद होना चाहिए।

हिंदुओं को बाँटने से नहीं मिलेगा वोट

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने रामकथा के दौरान कहा, “नीतीश जी और तेजस्वी बाबू को अब कौन समझाए कि ऐसा घिनौना काम न करें, जिससे हिन्दू बँटे। अब जो असली काम करेगा, वोट उसी को मिलेगा। जातिगत भेदभाव से बढ़ाने से वोट नहीं मिलने वाला है।” उन्होंने आगे कहा, “राम और कृष्ण की जो बात करेगा, भारत पर वही राज करेगा।”

नीतीश कुमार को निशाने पर लिया

अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना का जो दाँव खेला है, वो पूरे देश में बड़ा मुद्दा बन गया। हालाँकि, स्वामी रामभद्राचार्य ने इसे सीधे तौर पर हिंदुओं को बाँटने की चाल कहकर नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है।

रामकथा सुनने हजारों की संख्या में पहुँचे भक्तों के सामने उन्होंने कहा कि कोई ऐसा घिनौना काम नहीं करना चाहिए, जिससे की हिंदू बँटे। उन्होंने कहा, “जो राम और कृष्ण की जो बात करेगा, वही भारत पर राज करेगा।”

8 नवंबर तक चलेगी रामकथा

स्वामी रामभद्राचार्य रामनगर में 9 दिन की रामकथा सुनाने पहुँचे हैं। 31 अक्टूबर 2023 से शुरू हुई रामकथा 8 नवंबर 2023 तक चलेगी। यहाँ कथा के पहले ही दिन उन्होंने जो राजनीतिक टिप्पणी की है, उससे सियासी माहौल गरमा गया है। चूँकि नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना कराई है, इसके शुरुआती आँकड़े भी जारी कर दिए गए हैं।

इस जातिगत जनगणना में सभी जातियों और धर्मों का उल्लेख किया गया है। हालाँकि, इस जातिगणना में कई तरह की खामियाँ हैं, जिनका विपक्षी दल सुधार की माँग कर रहे हैं। बिहार की जातिगत जनजणना के बाद पूरे देश में इसे कराए जाने की माँग राजनीतिक दल कर रहे हैं, जिसमें राहुल गाँधी ने तो बाकायदा ऐलान भी कर दिया है कि कॉन्ग्रेस की सरकार आते ही जातिगत जनगणना कराई जाएगी।

‘पढ़ी-लिखी महिलाएँ ये क्यों करती हैं’ से लेकर ‘मैं उस दिन खूब खाऊँगी’ तक, नसीरुद्दीन-सैफ की बीवियों ने उड़ाया था हिन्दू आस्था का मजाक, एक बार फिर निशाने पर पति-पत्नी का पर्व

प्रेम के पर्व पर प्रहार परंतु प्रेम की विजय हर बार होती है। एक बार फिर से करवा चौथ आया है और एक बार फिर से पति-पत्नी के प्रेम का पर्व निशाने पर है। यह इसीलिए निशाने पर है क्योंकि इसमें पत्नी अपने पति के लिए भूखी रहकर उपवास करती है। मात्र एक दिन का यह पर्व निशाने पर रहता है और यह कहा जाता है कि यह पितृसत्ता को बढ़ाने वाला है। क्या यह वास्तव में पितृसत्ता को बढ़ाने वाला है या यह मात्र पति के प्यार को समर्पित पर्व है?

हालाँकि, इस बार शोर कम है और इस बार वह सेलेब्रिटी भी यह नहीं कह रहे हैं कि हम करवा चौथ नहीं रखेंगे, जिनका दूर-दूर तक कोई रिश्ता इस पर्व के साथ नहीं होता था। यह बहुत ही हास्यास्पद था कि मुस्लिम अभिनेत्रियाँ या फिर मुस्लिम परिवार में गईं अभिनेत्रियाँ करवा चौथ पर प्रश्न उठाती थीं, जबकि फ़िल्मी कलाकारों में यह पर्व मनाना बहुत आम है। हर वर्ष नव विवाहित अभिनेत्रियों के साथ कई अभिनेत्रियों की तस्वीरें साझा की जाती हैं और इसी बात को लेकर नसीरुद्दीन शाह की बीवी रत्ना पाठक शाह ने यह तक कह दिया था कि अब लोग उनसे पूछते हैं कि वह करवा चौथ रखती हैं?

उन्होंने इसे पिछड़ेपन से जोड़ते हुए कहा था, “एक बार मुझसे किसी ने पूछा था कि आप करवा चौथ का व्रत क्यों रखती। तो मैंने यही सोचा कि मैं क्या पागल हूँ क्या? ये बहुत ही अजीब है कि पढ़ी-लिखी महिलाएँ भी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही हैं।” और उन्होंने यह भी कहा था कि इससे पता चलता है कि असहिष्णुता कितनी बढ़ गई है कि करवा चौथ तक का प्रश्न किया जाता है? और सैफ अली खान से निकाह करने वाली अभिनेत्री करीना कपूर ने एक बार कहा था, ‘जब बाकी औरतें भूखी रहेंगी, मैं खूब खाऊँगी। क्योंकि मुझे अपना प्यार साबित करने के लिए भूखे रहने की कोई भी जरूरत नहीं है।”

वहीं अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने भी यही कहा था कि अब जब 40 वर्ष की आयु में लोग दूसरी शादी कर लेते हैं तो करवा चौथ का फायदा क्या? ऐसे तमाम लोग हैं जो इस पर्व का उपहास उड़ाते हुए उन महिलाओं की आस्था का मजाक उड़ाते हैं जो महिलाएँ अपने जीवनसाथी को अपने प्रेम, आस और विश्वास की डोर में बाँध कर व्रत रखती हैं। वह चाहती हैं कि वह अपने प्रेम को दिखाएँ, अपने जीवनसाथी के प्रति विश्वास को प्रदर्शित करें और उन तक अपना संदेश पहुँचाएँ।

एक बार एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमें सीमा पर तैनात पति की तस्वीर को देखकर एक महिला व्रत खोल रही है। उस महिला को विश्वास रहा होगा कि उसका व्रत सीमा पर उसके पति की रक्षा करेगा।
विश्वास की डोर को मजबूत करने वाला यह पर्व कई झंझावातों को झेलकर प्रेम और उल्लास के साथ बढ़ता जा रहा है और इसके साथ ही उन शक्तियों का रोना भी बढ़ता जा रहा है जो परिवार को तोड़ने के लिए जी-जान से लगी हुई हैं, मगर भारतीय संस्कृति और यह पर्व नित नए रूपों में बढ़ता जा रहा है।

कश्मीर में 7 बेटियों के अब्बा को आतंकियों ने सीने में मारी 5 गोलियाँ, DSP ऑफिस में तैनात थे कॉन्स्टेबल मसरूर अहमद: अब घर में नहीं बचा कोई मर्द

जम्मू-कश्मीर के बारामुला में आतंकियों ने पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल की हत्या कर दी है। बलिदानी सिपाही का नाम गुलाम अहमद डार है। डार को उनके घर के ही आगे अज्ञात आतंकियों ने गोली मार दी। गुलाम अहमद डार फ़िलहाल श्रीनगर में डिप्टी SP के रीडर के रूप में तैनात थे। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और हमलावरों की तलाश जारी है। घटना मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बारामूला जिले के वेलू क्रालपोरा इलाके की है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के DSP श्रीनगर ऑफिस में रीडर के तौर पर नियुक्त हेड कॉन्स्टेबल गुलाम मोहम्मद डार अपने घर छुट्टी पर आए थे। मंगलवार की शाम 7 बजे वो अपने घर के बाहर खड़े थे, तभी हथियार लेकर आए 2 अज्ञात लोगों ने डार को गोली मार दी। इस हमले में गुलाम मोहम्मद डार बुरी तरह से जख्मी हो गए। गोली मारने के बाद हमलावर फरार हो गए।

गंभीर रूप से घायल हेड कॉन्स्टेबल को उनके परिवार वालों ने तंगमार्ग के एक अस्पताल में भर्ती कराया। हालाँकि, तमाम कोशिशों के बाद भी डार को बचाया नहीं जा सका। वहीं, सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों तरफ से घेरकर हमलावरों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया है। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बलिदानी सिपाही का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

बलिदान हुए हेड कॉन्स्टेबल के सीने में 5 गोलियाँ दागी गई थीं। कुछ अन्य गोलियाँ निशाने पर न लगकर आसपास लगी हैं। गुलाम मोहम्मद डार 6 बच्चियों के पिता थे। पिता की हत्या की खबर सुनकर बेटियाँ बेसुध हो गई हैं। आसपास के लोग पीड़ित परिवार को हिम्मत बँधाते दिखे। अब उनके घर में कोई मर्द नहीं बचा है। गुलाम अहमद की बेटियों ने सरकार से कातिलों को खोजकर सजा देने की माँग की है।

बताते चलें कि 29 अक्टूबर 2023 को भी आतंकियों ने श्रीनगर में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर मसरूर अहमद को गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल इंस्पेक्टर का अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हमले के दौरान इंस्पेक्टर मशरूर कुछ बच्चों के साथ मैदान में क्रिकेट खेल रहे थे।

अब्बा ने क्रिश्चियन से, भाई ने सिख से की शादी, पर सारा और सचिन के विवाह में ‘मजहब’ आ गया था आड़े: लंदन वाली लव स्टोरी तलाक तक क्यों पहुँची

सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला दोनों ही राजनीतिक रसूख वाले परिवारों से आते हैं, लेकिन दोनों को इस डोर ने नहीं, बल्कि प्यार ने एक साथ किया। एक-दूसरे के प्यार में गिरफ्तार इस प्यारी से जोड़ी के अलग होने की खबरें मीडिया में आते ही जैसे सब कह रहे हों आखिर क्यों? दरअसल सचिन ने अपनी हमसफर सारा से तलाक ले लिया है।

ये खुलासा राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए पायलट ने टोंक से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 31 अक्टूबर 2023 को अपना पर्चा दाखिल करते हुए किया। उनके बीवी वाले कॉलम में तलाकशुदा लिखा गया था। सारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी हैं और उमर अब्दुल्ला की बहन हैं।

पायलट के 2018 के चुनावी हलफनामे में सारा का उल्लेख बतौर उनकी पत्नी था। बीते पाँच साल के अंदर क्या हुआ कि सचिन की सारा उनसे अलग हो गई हैं। इसे लेकर कोई साफ तारीख नहीं बताई गई है और न ही कोई साल…। बस पता है तो ये कि सचिन-सारा अब साथ में नहीं हैं।

19 साल पहले जब सारा ने गैर मजहब के सचिन पायलट से शादी की थी तो उस समय परिवार ने उनका साथ नहीं दिया था। शादी में सारा के अब्बा तो क्या उनका पूरा परिवार नहीं आया था।

कहते हैं कि दिसंबर 2018 में सचिन पायलट के डिप्टी सीएम की शपथ लेने के दौरान सारा वहाँ मौजूद थीं, लेकिन तभी से उनके अलग होने के कयास लगने लगे थे।

राजस्थान के एक्स डिप्टी सीएम सचिन सारा और की इश्क की दास्तां राजनीति से भी ज्यादा मशहूर थी, तभी तो इस रिश्ते की टूटने की आवाज ने हर तरफ शोर मचा दिया। वो तो प्यार में पड़े सचिन और सारा ही जानते होंगे कि जिस रिश्ते के लिए हर दीवार तोड़ डाली, उससे अलग होना कैसा दर्द देता होगा।

पढ़ाई के वक्त की दोस्ती जो इश्क तक परवान चढ़ी

सिमी ग्रेवॉल को दिए साल 2012 के एक इंटरव्यू में सचिन और सारा ने अपने दिल के राज खोले। सारा का कहना था कि 12 साल की उम्र के बाद वो इंग्लैंड चली गई थी। दोनों ने ही माना कि उनके परिवारों में एक चीज सामान्य थी और वो थी राजनीति थी। सारा कहती हैं, “राजनीति मेरे खून में हैं, लेकिन मैं समझती हूँ सचिन मेरे से बेहतर तरीके से राजनीति समझते हैं और इस मामले में स्मार्ट है। मैं अभी भी भोली हूँ। ये समझते हैं कि कोई कुछ कह रहा है तो मैं लोगों की फैस वैल्यू देख बात समझती हूँ।”

दोनों पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में हायर एजुकेशन लेने के दौरान एक-दूसरे से मिले थे। गौरतलब है कि 15 जनवरी 2004 को शादी के बंधन में बंधे थे। सचिन कहते हैं, “शादी होने से पहले ही मैं इसकी फैमिली को बहुत सालों से जानता था, लेकिन मैं सारा को निजी तौर पर नहीं जानता था। हम शादी से पाँच साल पहले मिले थे और एक-दूसरे से टच में रहे। मैं अपनी मास्टर कर रहा था। सारा इंग्लैंड के कॉलेज में थी मास्टर पूरी करने के बाद में दिल्ली आ गया।”

इसके बाद करीबन तीन साल तक दोनों एक-दूसरे से दूर से ही रिश्ता निभाते रहे। दूरी ने उन्हें प्यार का एहसास कराया। इस पर सारा बताती हैं, “मैं इंग्लैंड में थी। हमने फोन ईमेल्स से एक दूसरे को जाना, हमारी लंबी बातचीत होती थी। फोन के बिल की सीमा नहीं होती थी।”

सचिन के राजनीति में जाने के बारे में सारा को यकीन था। वो कहती हैं, “वो भी नहीं जानता था कि वो राजनीति में जाएगा, लेकिन मुझे विश्वास था वो जाएगा। मैं उससे बहुत पहले ही पूछने लगीं थी, मैंने उससे कहा सुनो, मैं राजनीति और ही न ही किसी राजनेता से शादी के बारे निश्चित नहीं हूँ।”

सारा आगे बताती हैं, “तो इसने (सचिन) कहा सुनो मैं अपना एमबीए कर रहा हूँ, मैं इतनी मेहनत तुरंत राजनीति में जाने के लिए नहीं कर रहा हूँ, शायद कुछ वक्त बाद जाऊँ, तब मैंने कहा ठीक है… शादी होने के कुछ ही महीनों बाद ये राजनीति में थे, मैं इनकी च्वॉइस से सहमत थी मैंने उसका सम्मान किया।” पायलट 26 साल की उम्र में 13 मई 2004 को 14वीं लोकसभा के लिए दौसा सीट से चुने गए।

मुश्किल थी राह-ए- मोहब्बत

सचिन जहाँ राजस्थानी गुज्जर परिवार से हैं, वहीं सारा कश्मीरी मुस्लिम हैं। दोनों की शादी को लेकर भी खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालाँकि कुछ वक्त के बाद से मामला सुलझ गया, लेकिन जब सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला ने पहली बार शादी करने का फैसला किया तो जैसे उनकी जिंदगियों में तूफान आ गया था।

सचिन के किरदार और मुस्कान के सारा के घरवाले कायल थे, लेकिन इसके बाद भी सबकुछ बेहद आसान नहीं था। सचिन ने अपनी माँ को इस रिश्ते के बारे में बताया तो उनके परिवार की तरफ से इस रिश्ते के लिए हामी नहीं थी।

सचिन ने अपने परिवार को सारा के साथ शादी करने के लिए मना लिया, लेकिन जहाँ सारा के परिवार की बात की जाए तो वहाँ से इस रिश्ते पर मुश्किलें ही अधिक थी। सबसे अधिक एतराज सारा के पिता जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम रहे फारूक अब्दुल्ला को था। वो शादी के लिए तैयार ही नहीं थे।

सारा पिता की दुलारी थी तो उन्हें लगता था कि कुछ वक्त बाद शायद उनके पिता इस शादी के लिए तैयार हो जाएँ, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सारा की चुनौतियाँ कम होने का नाम नहीं ले रही थी वो अब्बा को मनाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन फारूक अब्दुल्ला का दिल नहीं पसीजा।

वो सचिन पायलट को पसंद तो करते थे और उनसे बेहतर दामाद शायद उन्हें नहीं मिलता, मगर उन पर शायद सामाजिक और राजनीतिक दबाव हावी था। जब प्यार में पड़े सारा और सचिन के रिश्ते के बारे में चर्चाएँ जोरों पर थी तो वहाँ कश्मीर में इस रिश्ते को लेकर बवाल मचा।

फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कैंपेन चलाए गए। यहाँ तक कि उनकी ही पार्टी जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायक उनके खिलाफ हो गए। कुछ महीने तक दोनों प्रेमियों ने माहौल के ठंडा होने का इंतजार किया, लेकिन उन्हें महसूस हो गया कि हालात ऐसे ही बने रहेंगे।

इसके बाद सारा ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर सचिन पायलट से शादी रचा ली। दोनों किस्मत और परिवार के दबाव पर अपने दिल के रिश्ते को तरजीह दी। सादे से एक समारोह में दोनों एक- दूसरे को हो गए।

नहीं आए बेटी को विदा करने फारूक

अंतर-धार्मिक शादी और राजनीति की वजह से सारा के पिता फारूक अब्दुल्ला, भाई उमर अब्दुल्ला और बाकी परिवार 2004 दिल्ली में हुई इस शादी में शामिल नहीं हुए। दिलचस्प बात है कि उमर अब्दुल्ला ने खुद एक सिख लड़की से शादी की और अब्बा फारूक अब्दुल्ला ने एक क्रिश्चियन से। लेकिन दोनों ने सारा के हिंदू लड़के से शादी करने पर ऐतराज जताया।

हालाँकि वक्त बीतने के साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने अपनी दुलारी बेटी के साथ दामाद को भी गले लगा लिया। दोनों के प्यार का सफर रफ्ता -रफ्ता गुजर रहा था। प्यार को मुकम्मल करने के लिए आरान और विहान दो बेटे सारा और सचिन की जिंदगी में आए, लेकिन फिर ऐसा जाने क्या हुआ कि दोनों ने रास्ते एक-दूसरे से अलग हो गए कुछ इस तरह से जैसे कह रहे हों- “हजार राहें मुड़के देखी कहीं से कोई सदा न आई, तुम्हें ये जिद थी कि हम बुलाते, हमें ये उम्मीद वो पुकारें..है नाम होंठों पे अब भी लेकिन आवाज़ में पड़ गई दरारें”

ईडन गार्डेंस में चल रहा था पाकिस्तान-बांग्लादेश का मैच, स्टेडियम के बाहर 4 लोग फहरा रहे थे फिलिस्तीनी झंडा: कोलकाता पुलिस ने हिरासत में लिया

कोलकाता के ईडन गार्डेंन्स क्रिकेट मैदान पर पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच मैच खेला गया। इस दौरान फिलिस्तीनी झंडा लहराने वाले 4 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ये मामला मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) का है। हिरासत में लिए गए लोगों में से दो झारखंड के रहने वाले हैं, तो दो लोग कोलकाता के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि ये लोग इजरायल-हमास युद्ध पर लोगों का ध्यान खींचना चाहते थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट विश्वकप में पाकिस्तान-बांग्लादेश के मुकाबले के दौरान इन लोगों ने फिलिस्तीनी झंडे को लहराया। इसमें से 2 लोगों को गेट नंबर 6 के पास से पकड़ा गया, तो दो लोगों को ब्लॉक जी-1 के पास पकड़ा गया। एक आईपीएस अधिकारी ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि हमनें 4 लोगों को 2-2 के ग्रुप में हिरासत में लिया है। ये लोग फिलिस्तीनी झंडा लहरा रहे थे। हालाँकि, नारेबाजी से उन्होंने इनकार कर दिया है।

हिरासत में लिए गए चारों लोगों को मैदान पुलिस थाना ले जाया गया, जहाँ से उन्हें जाने दिया गया। इन लोगों से पूछताछ में पता चला है कि वो फिलिस्तीन समस्या पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे।

चूँकि पाकिस्तान-बांग्लादेश का मैच देखने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों की भीड़ आने वाली थी, इसलिए उन्होंने मैच के दौरान प्रदर्शन का फैसला लिया था। हिरासत में लिए गए लोग आस-पास ही रहते हैं। हालाँकि पुलिस जाँच कर रही है कि इस मामले का कहीं कोई बाहरी कनेक्शन तो नहीं।

बता दें कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की ओर से हैदराबाद में शतक जमाने वाले मोहम्मद रिजवान ने अपना शतक गाजा के लोगों को समर्पित किया था, इसके बाद अफगानिस्तानी खिलाड़ी ने अपना मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड उन अफगानियों के नाम समर्पित किया था, जिन्हें पाकिस्तान जबरन अपने देश से निकाल रहा है।

इस घटना के बाद टीमों की तरफ से तो कोई विवाद सामने नहीं आया, लेकिन दर्शकों का इस तरह का व्यवहार परेशान करने वाला है। हालाँकि क्रिकेट मैचों के दौरान राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शनों पर रोक है।

‘30% कमीशन दो, पाकिस्तानी टीम में जगह पाओ’: इंजमाम ही नहीं, बाबर, रिजवान और शाहीन भी जुड़े थे PR कंपनी से, वर्ल्ड कप ही नहीं PCB में भी टेंशन

मौजूदा वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के सेमीफाइनल से बाहर होने के चांस हैं, ऐसे में वहाँ की क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के मुख्य चयनकर्ता इंजमाम उल हक़ को लेकर खुलासा हुआ है कि वो एक प्राइवेट कंपनी के लिए काम करते थे और उन्होंने उसी के हिसाब से टीम भी चुनी। खुलासे के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। फिर PCB ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाई। अब जाँच में बोर्ड को पता चला है कि इसी एजेंसी के लिए पाकिस्तानी टीम के कई खिलाड़ी जुड़े हुए थे।

मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) को समिति की पहली बैठक हुई। ये सारा विवाद UK की कंपनी Yazoo इंटरनेशनल लिमिटेड को लेकर है। इस कंपनी के बोर्ड में इसके मुखिया तल्हा रहमानी के साथ-साथ पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक़ भी शामिल थे। अब पता चला है कि तल्हा रहमानी ही ‘साया कॉर्पोरेशन’ नामक कंपनी का भी प्रबंधन करते हैं, जो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आज़म, विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान और मुख्य पेसर शाहीन शाह अफरीदी का भी प्रतिनिधित्व करती है।

पाकिस्तानी अख़बार ‘डॉन’ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि PCB की अंतरिम मैनेजमेंट कमिटी के अध्यक्ष ज़का अशरफ के समक्ष ये जाँच समिति रिपोर्ट रखेगी। ये उनके 4 महीने के कार्यकाल का भी अंतिम दिन होने वाला है। हालाँकि, ये साफ़ नहीं है कि उनके इस्तीफे के बाद फिर से चुनाव होगा या फिर उनका ही कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। इंजमाम उल हक़ कमिटी के सामने पेश नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि जाँच में अगर वो पाक साफ़ निकल जाते हैं तो फिर वापस अपने पद पर लौटेंगे।

साथ ही ये कमिटी ‘साया कॉर्पोरेशंस’ के साथ जुड़े खिलाड़ियों से भी पूछताछ नहीं कर पाएगी, क्योंकि वो सभी विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हुए हैं। PCB से अनुमति लेनी होती है कि कौन सा खिलाड़ी किस एजेंट को रखे हुए हैं, या किन कंपनियों को अपने प्रबंधन के रूप में रखे हुए है। हालाँकि, PCB के पास इसकी कोई डिटेल्स नहीं हैं कि कौन सी कंपनी किस खिलाड़ी का काम देख रही है। बोर्ड के मीडिया हेड उम्र कलसन भी एशिया कप के दौरान श्रीलंका में एक कसीनो में दिखे थे, और भारत भी वो आए हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

ये भी सामने आया है कि पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों को टीम में जगह दिलाने की एवज में ये कंपनी 30 प्रतिशत का कमीशन लिया करती थी। बता दें कि बाबर आजम की एक व्हाट्सएप्प चैट भी लीक हुई थी। इसके बाद PCB अध्यक्ष को बयान जारी करना पड़ा था। इसी तरह कुछ दिनों पहले बाबर आजम और शाहीन अफरीदी के भी झगड़े की खबर बीच में आई थी। अब देखना ये है कि पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में जगह बनाती है या नहीं।

अमेरिका के इंडियाना में भारतीय छात्र वरुण पर चाकू से जानलेवा हमला, अस्पताल में तोड़ा दम

अमेरिका के इंडियाना में एक 24 वर्षीय भारतीय छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को इंडियाना के वालपराइसो शहर के एक जिम में हुई। वहीं घटना के बाद आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। 

द टाइम्स ऑफ नॉर्थवेस्ट इंडियाना की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की सुबह इंडियाना के वालपराइसो शहर के एक पब्लिक जिम में 24 वर्षीय हमलावर जॉर्डन एंड्रॉड (Jordan Andrade ) ने भारतीय छात्र वरुण की कनपटी पर चाकू से हमला कर दिया था। घटना के बाद हमलावर जॉर्डन को गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर घातक हथियार से हमला करने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी मामले में अभी भी जाँच कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एंड्रॉड ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी रक्षा के लिए प्लेनेट फिटनेस के मसाज रूम में वरुण पर हमला किया। जब पुलिस ने उससे पूछा कि उसने वरुण को कहाँ चाकू मारा, तो एंड्रॉड ने कहा, “मैंने अभी-अभी यह किया है। मुझे यह कहना नहीं चाहिए लेकिन मैंने उसके दिमाग में मारा था.”

क्या है पूरा मामला

पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, हमलावर जॉर्डन मसाज लेने के लिए गया था वहाँ उसने देखा कि एक आदमी थोड़ा अजीब बर्ताव कर रहा है। इस वजह से ही जॉर्डन ने बचाव में उसपर हमला किया। पुलिस ने कहा कि जॉर्डन एंड्रैड  को उस आदमी (वरुण) से खतरा महसूस हुआ इसलिए उसने बचने के लिए हमला किया। 

पुलिस ने जॉर्डन एंड्रॉड से पूछा कि तुमने चाकू का इस्तेमाल कैसे किया? एंड्रॉड ने बताया कि उसने बस चाकू पकड़ा और वरुण के आर-पार कर दिया। जब पुलिस ने पूछा कि  शरीर के किस अंग पर वार किया तो एंड्रॉड ने कहा कि वह इस बारे में बात नहीं करना चाहता है। जॉर्डन एंड्रॉड ने कहा कि उसने अपनी जेब से चाकू निकाला था जिसका इस्तेमाल वह मेनार्ड्स स्टोर में काम के दौरान बक्से खोलने के लिए करता था।

वहीं वालपराइसो पुलिस ने कहा कि जिम के अन्य सदस्यों ने उन्हें 1270 स्ट्रांगबो सेंटर ड्राइव पर प्लेनेट फिटनेस क्लब में बुलाया था। रविवार (स्थानीय समय) सुबह 9 बजे के आसपास वरुण पर हमला किया और मसाज कुर्सी पर बैठा दिया था। पुलिस ने कहा कि उन्हें काउंटर पर काफी मात्रा में खून और एक फोल्डिंग चाकू मिला।

बता दें कि एंड्रॉड को पोर्टर सुपीरियर कोर्ट के न्यायाधीश जेफरी क्लिमर के सामने बुधवार (1 नवंबर, 2023) को पेश होना है। 

आरोपित पूर्व हाई स्कूल फुटबॉल खिलाड़ी 

गौरतलब है कि हमलावर जॉर्डन एंड्रॉड ने वरुण को “छोटा” बताया और दावा किया कि वह एक पूर्व हाई स्कूल फुटबॉल खिलाड़ी है जो 117 किलो वजन उठाने में सक्षम है। फिलहाल हत्या के इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।