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भारत-पाकिस्तान विभाजन के 76 साल बाद मिले भाई बहन… एक का नाम सुरिंदर कौर और एक ‘मोहम्मद इस्माइल’: बताइए कौन सीमा के इस तरफ और कौन उस पार

भारत-पाकिस्तान विभाजन को लगभग आठ दशक हो चुके हैं लेकिन अभी भी लाखों लोगों को विभाजन की विभीषिका के दौरान छूटे हुए अपनों के मिलने की आशा है। ऐसा ही एक मामला पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर से सामने आया है जहाँ 76 वर्षों के बाद विभाजन में अलग हुए भाई-बहन फिर से मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पंजाब के जालंधर की रहने वाली सुरिंदर कौर और पाकिस्तानी पंजाब के साहीवाल के रहने वाले मोहम्मद इस्माइल वर्ष 1947 में हुए विभाजन में अलग हो गए थे। वह एक बार फिर से 2023 में पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर में मिले हैं।

इस्माइल का कहना था कि वह विभाजन से पहले जालन्धर के शाहकोट कस्बे में रहते थे। सुरिंदर कौर उनकी चचेरी बहन थीं, विभाजन में दोनों परिवार अलग हो गए थे। दोनों मिलने पर भावुक हो गए और उनकी आँखों में आँसू थे। इन दोनों का मिलना करतारपुर कॉरिडोर और सोशल मीडिया के कारण संभव हो पाया है। इस्माइल ने बताया कि कुछ समय पहले एक स्थानीय यूट्यूबर द्वारा उनका वीडियो बनाया गया था जो कि वायरल हो गया।

इसके पश्चात ऑस्ट्रेलिया से सरदार मिशन सिंह ने सीमा के दोनों तरफ दोनों परिवारों से संपर्क किया और उन्हें मिलाने के प्रयास किए। हालाँकि, दोनों देशों के बीच राजनीतिक समस्याओं के कारण वीजा मिलने में समस्याएं आ रही थीं।

इसके लिए करतारपुर कॉरिडोर का रास्ता निकाला गया जहाँ भारतीय भी पाकिस्तान के भीतर करतारपुर साहिब में बिना वीजा जा सकते हैं। जालन्धर से सुरिंदर कौर इसी सुविधा का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान पहुँची जहाँ इस्माइल भी पहुँचे थे। दोनों के परिवार भी इस दौरान मौजूद थे।

हालाँकि, यह बात ध्यान देने वाली है कि सुरिंदर कौर जहाँ सिख हैं वहीं मोहम्मद इस्माइल मुस्लिम। इसका कारण यह हो सकता है कि पाकिस्तान में जाने के बाद इस्माइल को अपना सिख धर्म छोड़कर मुस्लिम बनना पड़ा हो क्योंकि पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना सदैव चरम पर रही है। करतारपुर में सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने अंतिम साँस ली थी। यहाँ एक भव्य गुरुद्वारा बना हुआ है। यह भारतीय सीमा से काफी निकट है। इस गुरूद्वारे में भारतीय श्रद्धालु जा सकें इसके लिए पाकिस्तान की सहायता से वर्ष 2019 में कॉरिडोर स्थापित किया गया था।

चेहरे पर जड़े मुक्के, बुजुर्ग सिख को मार डाला: अमेरिका के न्यूयॉर्क में फिर से हेट क्राइम, इससे पहले सिख युवक को पीट-पीट कर की थी पगड़ी उतारने की कोशिश

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक 66 वर्षीय सिख बुजुर्ग जसमेर सिंह की हत्या कर दी गई है। जसमेर सिंह की गाड़ी एक 30 वर्षीय युवक गिल्बर्ट ऍगस्टीन की गाड़ी से लड़ गई थी। जिसके बाद गिल्बर्ट ने जसमेर सिंह पर हमला कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, जसमेर सिंह और गिल्बर्ट की गाड़ी न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में बृहस्पतिवार (18 अक्टूबर, 2023) को आपस में टकरा गईं थी। इस टक्कर में दोनों गाड़ियों को क्षति पहुँची थी। जसमेर सिंह ने इसके पश्चात 911 डायल करके पुलिस को बुलाने की कोशिश की। गिल्बर्ट ने पुलिस को बुलाने से रोक किया और जसमेर सिंह से उनका फोन छीन लिया। जसमेर सिंह अपनी गाड़ी से निकल कर उसके पीछे गए और अपना फोन वापस लेकर आने लगे। हालाँकि, गिल्बर्ट ने सुमेर जसमेर सिंह को फोन करने से रोकने के लिए उनके चेहरे पर तीन बार मुक्के जड़ दिए।

इस चोट से उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद गिल्बर्ट वहाँ से अपनी फोर्ड मुस्तांग गाड़ी में बैठ कर भाग गया। मौके पर पहुँची मेडिकल टीम ने जसमेर सिंह को बचाने का प्रयास किया लेकिन चेहरे पर तेज लगी चोट के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

जसमेर सिंह की मृत्यु पर न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम्स ने दुःख जताया और कहा कि जसमेर सिंह न्यूयॉर्क शहर को प्रेम करते थे और इस पीड़ादायक मौत के हक़दार नहीं थे। मेयर एरिक एडम्स ने शहर में सिखों की रक्षा को लेकर भी बात की। गिल्बर्ट ऍगस्टीन को शुक्रवार को न्यूयॉर्क पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसका ड्राइविंग लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका था। उसकी गाड़ी की नम्बर प्लेट फर्जी थी। ऍगस्टीन के ऊपर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

न्यूयॉर्क में सिख समुदाय के व्यक्ति पर एक सप्ताह के भीतर हुआ यह दूसरा हमला है। पिछले सप्ताह एक 19 वर्षीय सिख युवक को एक बस में मारा पीटा गया था जब वह गुरुद्वारे जा रहा था। सिख युवक कि पगड़ी भी उतारने की कोशिश भी की गई थी और नस्लवादी टिप्पणियाँ की गई थीं।

फसलों में विविधता लाइए, सरकार से पैसा पाइए… हरियाणा की खट्टर सरकार का किसानों को तोहफा: 42000 करोड़ लीटर पानी भी बचेगा, पर्यावरण की होगी रक्षा

हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार प्रदेश के किसानों को फसलों में विविधता लाने पर सहायता उपलब्ध करवाएगी। इससे राज्य में भूजल स्तर को गिरने से रोकने में सहायता मिलेगी और साथ ही पर्यावरण के अन्य आयामों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। हरियाणा सरकार ने इस योजना का नाम ‘मेरा पानी- मेरी विरासत’ रखा है। इस योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 42,480 करोड़ लीटर पानी बचाया जाएगा। इस योजना को सबसे पहले वर्ष 2020 में चालू किया गया था।

किसानों को इसके तहत कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने पर 7000 रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वर्ष 2020 में प्रदेश के 41 हजार से अधिक किसानों ने इस योजना का लाभ लिया था। तब राज्य सरकार ने किसानों को 45 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी थी। इस पूरी कवायद में 22 हजार करोड़ लीटर से अधिक पानी की बचत की गई थी।

इस बार लक्ष्य है कि प्रदेश में 1.2 लाख एकड़ भूमि पर फसलों में विविधता लाई जाए। लगभग 84 करोड़ रुपए के बजट से इस बार 42 हजार करोड़ लीटर पानी बचाने की कवायद इस बार ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत की जाएगी। गौरतलब है कि हरियाणा और पंजाब में धान जैसी फसलों की खेती की अधिकता की वजह से कृषि भूमि का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यह समस्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी है। हरियाणा सरकार ने इससे निपटने के लिए अब फसल विविधता का निर्णय लिया है।

एक रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा के अंदर 60% गाँवों में भूजल की स्थिति गंभीर है। जितना पानी हर साल बारिश के कारण नीचे जमीन में रिचार्ज हो रहा है उससे कहीं अधिक सिंचाई में उपयोग हो जा रहा है। भविष्य में यह बहुत बड़ी दिक्कत पैदा कर सकता है। इससे मात्र खेती ही नहीं बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा असर पड़ेगा। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 61% जल स्रोतों से आवश्यकता से अधिक भूजल निकाला जा चुका है। इन्हीं सब चुनौतियों से लड़ने के लिए अब राज्य सरकार इन योजनाओं का सहारा ले रही है।

इस्लामी मुल्क में 2 महिला पत्रकारों को सज़ा, गुनाह – पुलिस हिरासत में मौत वाली खबर कवर की: महसा अमीनी की हत्या के बाद पूरे ईरान में हुआ था हिजाब विरोधी आंदोलन

ईरानी रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने बीते साल 2022 में कुर्दिश-ईरानी महिला महसा अमिनी की हिरासत में हुई मौत की कवरेज के लिए दो महिला पत्रकारों को वर्षों की जेल की सजा सुनाई। ये जानकारी इस मुल्क की सरकारी मीडिया समाचार एजेंसी आईआरएनए ने रविवार (22 अक्टूबर,2023) को दी।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, निलोफर हामेदी और इलाहे मोहम्मदी को अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने के आरोपों में 13 और 12 साल जेल की सजा सुनाई गई। हालाँकि, दोनों पत्रकारों और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

बीते 16 सितंबर 2022 में कथित तौर पर इस्लामी ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 साल की अमिनी की मौत ने पूरे ईरान में कई महीनों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये दशकों में ईरान के मौलवी नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

सज़ा पाई दोनों महिला पत्रकारों ने पुलिस हिरासत में कुर्द छात्रा महसा अमीनी की मौत की रिपोर्टिंग में अहम भूमिका निभाई थी। छात्रा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही सितंबर 2022 में पत्रकारों, निलोफ़र हमीदी और इलाहे मोहम्मदी को गिरफ्तार किया गया था। उनका ट्रायल इस साल 2023 मई आखिर में शुरू हुआ।

बीते 13 महीनों तक दोनों पत्रकारों को हिरासत में रखने के बाद, तेहरान की क्रांतिकारी अदालत के 15वें चैंबर ने आखिरकार 22 अक्टूबर को अपनी सजा का ऐलान किया। हाम मिहान (Ham Mihan) की रिपोर्टर इलाहे मोहम्मदी के लिए 12 साल की जेल और शार्घ डेली (Shargh Daily) की रिपोर्टर निलोफर हामेदी के लिए 13 साल की जेल सुनाई।

इस अदालत ने उन्हें उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का दोषी पाया। मोहम्मदी को संयुक्त राज्य अमेरिका की शत्रुतापूर्ण सरकार के साथ सहयोग करने के लिए छह साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध करने की साजिश रचने और मिलीभगत करने के लिए पाँच साल और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ प्रचार के लिए एक साल की सजा सुनाई गई थी। इस तरह से उन्हें कुल 12 साल की सजा मिली।

उधर हामेदी को इन्हीं आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन उनकी जेल की कुल सज़ा 13 साल थी, क्योंकि उन्हें दुश्मन अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग करने के लिए सात साल की सजा मिली। इसमें उन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने’ के लिए पाँच साल की अतिरिक्त जेल और प्रचार के लिए एक साल की सजा दी गई।

इसके अलावा, हामेदी को राजनीतिक दलों या समूहों की सदस्यता, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने या मीडिया में काम करने पर दो साल के प्रतिबंध की सजा सुनाई गई थी। वहीं ईरानी न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार वेबसाइट ने रविवार को कहा कि हामेदी और मोहम्मदी को क्रमशः 13 साल और 12 साल की जेल हुई, लेकिन उन्हें पूरी सजा नहीं काटनी होगी।

न्यायपालिका की वेबसाइट में कहा गया है, “दोनों महिला पत्रकारों के मामलों में, अमेरिकी सरकार से जुड़ी कुछ संस्थाओं और लोगों के साथ संबंधों के सिद्ध सबूत हैं, जो जानबूझकर और सुरक्षा-विरोधी नीतियों को दरकिनार करते हुए किया गया काम है।”

वेबसाइट के मुताबिक, दोनों महिला पत्रकारों की सज़ाओं को संभावित रूप से कम किया जा सकता है। प्रारंभिक सज़ा के ख़िलाफ़ तेहरान की अदालत में 20 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है। यदि अपील अदालत अपने फैसले को बरकरार रखती है, तो हामेदी को कम से कम सात साल जेल की सजा काटनी होगी, और मोहम्मदी को कम से कम छह साल की सजा काटनी होगी।

हामेदी के पत्रकार के पति ने एक्स पर पोस्ट किया गया था, हामेदी को उसके जन्मदिन पर एक पारिवारिक सफर पर जाने के दौरान इस फैसले की सूचना मिली थी। हामेदी और मोहम्मदी 22 सितंबर, 2022 से प्री ट्रायल हिरासत में हैं, क्योंकि उन्होंने 16 सितंबर को 22 साल की महिला महसा अमिनी की मौत की सूचना दी थी। वे अमिनी के अस्पताल में भर्ती होने पर खबर देने वाले पत्रकारों में से थीं।

पत्रकारों की सुरक्षा करने वाली समिति (CPJ) ने पत्रकार नीलोफर हमीदी को 13 साल और इलाहे मोहम्मदी को दी गई 12 साल की जेल की सजा के फैसले की निंदा की है और उनकी तत्काल रिहाई की माँग की है।

गौरतलब है कि सीपीजे की 2022 जेल जनगणना में बताया गया है कि ईरान की जेलों में सबसे ज़्यादा पत्रकार बंद हैं। इसमें 1 दिसंबर तक सलाखों के पीछे बंद लोगों का दस्तावेजीकरण किया गया है। कुल मिलाकर, ईरानी अधिकारियों को अमीनी की मौत के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर कम से कम 95 पत्रकारों को हिरासत में लेने के लिए जाना जाता है।

वहीं रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ईरानी रिवोल्यूशनरी कोर्ट के इस झूठे केस में दो महिला पत्रकारों को दी गई 12 और 13 साल की अपमानजनक जेल की सजा से खौफ और फिक्र में हैं। सीपीजे के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम समन्वयक शेरिफ मंसूर ने कहा, “नीलोफर हामेदी और इलाहे मोहम्मदी की सजा एक मजाक है और अभिव्यक्ति की आजादी के क्षरण और पत्रकारिता को अपराधीकरण करने के ईरानी सरकार की हताश कोशिशों का एक साफ सबूत है।”

मैच छोड़ दिया लेकिन बेईमानी के आगे सरेंडर नहीं किया, जब बिशन सिंह बेदी ने वापस बुला लिए अपने दोनों बल्लेबाज: भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान का निधन

भारत के पूर्व स्पिन गेंदबाज बिशन सिंह बेदी का 23 अक्टूबर, 2023 को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह जाने-माने पूर्व क्रिकेटर थे और अपने समय के प्रख्यात गेंदबाजों में से एक थे। बिशन सिंह बेदी की मृत्यु के साथ ही उनके क्रिकेट करियर के किस्से कहानी भी सामने आ रहे हैं। बिशन सिंह बेदी भारत के कप्तान भी रहे हैं। उनको अपनी टीम के लिए सदैव खड़ा रहने वाला कप्तान माना जाता था। इसी से जुड़ा एक किस्सा उनकी टीम के 1978 के पाकिस्तान दौरे का है जब उन्होंने जीता-जिताया मैच पाकिस्तानी अंपायरों की बेईमानी के चलते छोड़ दिया।

बिशन सिंह बेदी की कप्तानी और अंशुमान गायकवाड़, चेतन चौहान, कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ जैसे सितारों से सजी टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई हुई थी। यह तीन एकदिवसीय (ODI) मैचों की एक श्रृंखला थी। पाकिस्तान की टीम में इमरान खान, जावेद मियाँदाद और ज़हीर अब्बास जैसे खलाड़ी शामिल थे।

3 नवम्बर, 1978 को खेला गया यह मुकाबला श्रृंखला का अंतिम मैच था। इससे पहले श्रृंखला 1-1 से बराबर हो चुकी थी। पहला मैच जो कि क्वेटा में खेला गया था वह भारत ने जबकि सियालकोट में खेला गया मैच पाकिस्तान ने जीता था।

तीसरा मुकाबला साहीवाल में हो रहा था। इस मैच में टॉस पाकिस्तान ने जीता और उनके कप्तान मुश्ताक मुहम्मद ने निर्णय लिया कि वह पहले बैटिंग करेंगे। भारतीय बॉलर्स के सामने आसिफ इकबाल (62) और माजिद खान (37) के अलावा अन्य कोई पाकिस्तानी बल्लेबाज चले नहीं।

इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा अन्य कोई भी बल्लेबाज 30 रन के आँकड़े को पार नहीं कर सका। भारतीय गेंदबाजों कपिल देव, मोहिंदर अमरनाथ और वेंकटराघवन की कसी हुई गेंदबाजी के कारण तीनों को 2-2 विकेट मिले। इन सब की बदौलत पाकिस्तान 40 ओवर में 205 रन ही बना सका।

भारत के लिए यह लक्ष्य कोई बहुत मुश्किल नहीं था। ओपनर बल्लेबाज चेतन चौहान और अंशुमान गायकवाड़ ने पाकिस्तानी गेंदबाजों को खूब छकाया। अंशुमान गायकवाड़ ने 78 रन बनाए जबकि चेतन चौहान ने दूसरे छोर से उनका साथ देते हुए 23 रन जोड़े। चेतन के विकेटकीपर वसीम बार के हाथों कैच गँवा बैठने पर सुरिंदर अमरनाथ ने 75 गेंदों में 62 रनों की धुआँधार पारी खेली। उनके आउट होने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ आकर खेल रह थे, जब 38वें ओवर की शुरुआत हुई।

तीन ओवर शेष रहने पर भारत को मात्र 23 रन बनाने थे और अंशुमान गायकवाड़ अब भी बल्लेबाजी कर रहे थे और पाकिस्तानी गेंदबाजों की पिटाई कर रहे थे। 38वें ओवर में पाकिस्तानी गेंदबाज सरफराज नवाज गेंदबाजी करने आए। यहीं से पाकिस्तानी बेईमानी चालू हो गई। सरफराज नवाज ने एक बाउंसर फेंका जो कि किसी भी तरीके से वाइड थी। हालाँकि, पाकिस्तानी अंपायरों ने से वाइड करार नहीं दिया।

इसके बाद लगातार अगली तीन गेंदों तक यही हुआ। सरफराज ऊँची गेंद फेंकते, वह बल्लेबाज की पहुँच से बाहर होती और अंपायर उन्हें वाइड मानने से मना कर देता। पाकिस्तानी टीम और अंपायरों की इस बेईमानी को बिशन सिंह बेदी पवेलियन से देख रहे थे।

चार गेंदों के बाद उन्होंने अपने दोनों बल्लेबाज अंशुमान गायकवाड और गुंडप्पा विश्वनाथ को वापस बुला लिया। उन्होंने पाकिस्तानी बेईमानी के विरोध में अपने बल्लेबाज खिलाने से मना कर दिया। यह मैच और सीरीज पाकिस्तान जीत गया लेकिन बिशन सिंह बेदी अपनी टीम के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे।

एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौक़ा था जब किसी कप्तान ने मैच ने अपने बल्लेबाज वापस बुला लिए हों। हालाँकि, बिशन सिंह बेदी ही टेस्ट में ऐसा काम पहले कर चुके थे। वर्ष 1976 में बेदी ने वेस्टइंडीज के विरुद्ध किंग्स्टन मैदान पर अपने 5 बल्लेबाजों को दूसरी पारी में उतारने से मना कर दिया था क्योंकि वेस्टइंडीज के गेंदबाज खतरनाक गेंदबाजी कर रहे थे और लगातार उनकी टीम के सदस्य चोटिल हो रहे थे।

बिशन सिंह बेदी को उनकी तगड़ी गेंदबाजी के अलावा इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है। उनकी टीम के पीछे लगातार खड़े रहने की आदत आगे चल कर भारतीय टीम का सूत्र बन गई। बिशन सिंह बेदी की मृत्यु पर तमाम क्रिकेट खिलाड़ियों समेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

‘टाइमपास है लिव इन रिलेशनशिप’: परिवार की मर्जी के खिलाफ सोहिल के साथ भागी थी हिन्दू लड़की, याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने से किया इनकार

इलाहबाद हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में लिव इन रिलेशनशिप जैसे रिश्तों को अस्थाई और नाजुक बताते हुए टाइम पास जैसा कहा है। न्यायाधीशों ने एक मुस्लिम युवक के साथ लिव इन रिलेशन में रहने की दलील दे कर पुलिस सुरक्षा चाह रही हिन्दू लड़की की माँग को अस्वीकार कर दिए। 25 सितंबर, 2023 को दिए गए इस फैसले में हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को जीवन को कठिनाइयों से भरा बताते हुए इसे फूलों का बिस्तर न समझने की भी नसीहत दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला मथुरा जिले के रिफायनरी थाना क्षेत्र का है। 17 अगस्त, 2023 को यहाँ एक हिन्दू महिला ने पुलिस ने अपनी भतीजी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 366 के तहत दर्ज करते हुए सोहिल नाम के युवक को नामजद किया। पीड़िता ने अपनी भतीजी के साथ किसी अनहोनी की भी आशंका जताई थी। यह FIR दर्ज कर के पुलिस ने सोहिल की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच आरोपित सोहिल ने रिश्तेदार एहसान फ़िरोज़ के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

इसी याचिका में वह लड़की भी शामिल है जिसके अपहरण की जाँच मथुरा पुलिस कर रही थी। लड़की ने कोर्ट को बताया कि वह 20 साल की बालिग है और अपना भला-बुरा सोचने में सक्षम है। साथ ही वो सोहिल के साथ अपनी मर्जी से गई है। लड़की ने सोहिल के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने की इच्छा जताते हुए अपने ही परिवार से खुद को खतरा बताया था और पुलिस सुरक्षा की माँग की थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह भी माँग की गई थी कि हाईकोर्ट पुलिस को निर्देश दे कि सोहिल पर दर्ज FIR निरस्त की जाए। साथ ही इन सभी प्रक्रियाओं के दौरान सोहिल को गिरफ्तार न किया जाए।

हालाँकि, लड़की के परिजनों ने इस माँग का विरोध किया। लड़की के परिवार की तरफ से एडवोकेट श्रवण कुमार ने बहस की। उन्होंने आरोपित सोहिल को FIR में किसी भी राहत देने की माँग का विरोध किया। एडवोकेट श्रवण ने अदालत को बताया कि आरोपित सोहिल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उस पर साल 2017 में मथुरा के छाता थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत केस भी दर्ज हुआ था। पीड़ित परिजनों ने अदालत से बताया कि सोहिल के साथ लड़की का भविष्य सुरक्षित नहीं है।

इस केस की सुनवाई न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी और मोहम्मद अज़हर हुसैन इदरीसी की बेंच ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतर्धार्मिक जोड़े को लिव इन रिलेशनशिप के दौरान पुलिस सुरक्षा देने की माँग को अस्वीकार कर दिया। अपनी टिप्पणी ने हाईकोर्ट ने कहा कि जीवन कठिनता से भरा है जिसे फूलों का बिस्तर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मौकों पर लिव इन रिलेशनशिप को सही माना है पर ऐसे रिश्तों में अक्सर ईमानदारी से अधिक एक दूसरे का मोह होता है।

इसी टिप्पणी में न्यायाधीशों ने कहा कि 22 साल की उम्र में महज 2 माह के अंदर किसी रिश्ते की परिपक्वता नहीं आँकी जा सकती है। ऐसे रिश्तों को नाजुक और अस्थाई बताते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी का कोई गलत अर्थ न लगाया जाए। अंतिम फैसले में हाईकोर्ट ने जाँच जारी होने की स्थिति में प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश से इनकार कर दिया।

शशि थरूर के लिए ‘बच्ची’ जैसी हैं महुआ मोइत्रा: कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा- वह मेरे से 20 साल छोटी, फोटो सीक्रेट मीटिंग की नहीं

पैसा लेकर संसद में सवाल पूछने को लेकर विवादों में घिरी तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की पिछले दिनों कुछ तस्वीरें वायरल हुईं थी। इनमें वह कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ जाम से जाम टकराती और सिगार को फूँक मारती नजर आईं थी। सोशल मीडिया में इन तस्वीरों को शेयर करते हुए यूजर्स ने पूछ था कि दोनों के बीच क्या पक रहा है।

तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर की इन तस्वीरों पर सफाई सामने आई हैं। उन्होंने कहा है कि ये तस्वीरें एक बर्थडे पार्टी की है। महुआ मोइत्रा उनके लिए बच्ची जैसी हैं। तस्वीरों को गलत नीयत और क्रॉप करके फैलाया जा रहा है। उन्होंने इसे घटिया राजनीति करार दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केरल के कोट्टायम में थरूर ने कहा, “जो फोटो वायरल की जा रही हैं, वे महुआ मोइत्रा के जन्मदिन पर आयोजित पार्टी की है। यह फोटो उसी समय खींची गई थी। अब इस फोटो को लेकर कहा जा रहा है कि यह सीक्रेट मीटिंग की है, जोकि सरासर गलत है। महुआ मुझसे 10 से 20 साल छोटी हैं। उस पार्टी में 15 लोग मौजूद थे। मेरी बहन भी इस पार्टी में आई हुई थी। लेकिन कुछ लोगों ने तस्वीरों से दूसरे लोगों को निकालकर इसे ऐसे पेश किया जैसे कोई सीक्रेट मीटिंग हो।”

कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा, “यह सिर्फ एक घटिया राजनीति है। उस बच्ची की जन्मदिन पार्टी थी। खैर, वह एक बच्ची नहीं हैं, लेकिन मेरे लिए वह एक तरह से बच्ची ही हैं, क्योंकि वह (महुआ मोइत्रा) मुझसे करीब 20 साल छोटी हैं।” थरूर ने यह भी कहा कि वह ऑनलाइन ट्रोल को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं और उनका मुख्य फोकस जनता के लिए काम करना है।

इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद महुआ मोइत्रा ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि बीजेपी की ट्रोल सेना द्वारा मेरी कुछ निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। मुझे सफेद ब्लाउज की तुलना में हरे रंग की पोशाक अधिक अच्छी लगती है। और क्रॉप करने की जहमत क्यों उठानी है – रात के खाने में बाकी लोगों को भी दिखाओ। बंगाल की महिलाएँ जीवन जीती हैं। झूठ नहीं।”

गौरतलब है कि इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे थे। आरोप है कि उन्होंने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महंगे गिफ्ट लेकर अडानी समूह के विरुद्ध संसद में प्रश्न पूछे। यह भी सामने आया कि उन्होंने प्रश्न पूछने के लिए संसद के पोर्टल का लॉगइन भी हीरानंदानी को दिया हुआ था। इस संबंध में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत के मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को सदन की आचार समिति के पास भेज दिया था।

हीरानंदानी ने माना है कि महुआ मोइत्रा उनसे दुबई में आकर मिलती थीं। उन्हें ब्लैकमेल करती थीं। उनका गलत फायदा उठाती थीं। हालाँकि इसको लेकर टीएमसी सांसद का कहना है कि पीएमओ ने जबरन यह हलफनामा हीरानंदानी से दिलवाया है।

नवमी पर CM योगी ने किया कन्या पूजन, गोरखनाथ मंदिर में पखारे कन्याओं के पाँव; दुर्गा पूजा को बताया मातृशक्ति के सशक्तिकरण और सम्मान का पर्व

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को गोरखपुर के श्री गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर हवन के साथ शक्ति-स्वरूपा कन्याओं का पूजन किया।

सीएम योगी इस मौके पर माँ भगवती का रूप में पूजी जाने वाली कन्याओं के सामने याचक बने नजर आए। उन्होंने कन्याओं के चरण पखार कर उनका आर्शीवाद लिया और उन्हें अपने हाथों से प्रसाद खिलाया।

कन्या पूजन के इस पावन अनुष्ठान में सोमवार सुबह सीएम ने मठ के पहले तल पर भोजन कक्ष में श्रद्धा के साथ पीतल की परात में चाँदी के लोटे में जल भरकर नौ कुंवारी कन्याओं के चरण धोए। फिर उनके माथे पर रोली, चंदन, दही, अक्षत, दूर्वा का टीका लगाया और उनकी आरती की। इसके साथ ही चुनरी ओढ़ाकर, उपहार और दक्षिणा दी।

इस अवसर सीएम योगी ने प्रार्थना की कि शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माँ भगवती की कृपा संपूर्ण चराचर जगत पर बनी रहे और सभी का कल्याण हो। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म ने सदैव मातृशक्ति के सम्मान और उनके सशक्तिकरण पर जोर दिया और इसलिए कुँवारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।

सीएम योगी ने कहा, “ये मेरा सौभाग्य है कि कन्या पूजन के इस अनुष्ठान को संपन्न करने का मुझे अवसर मिला। ये मातृशक्ति के सम्मान और उनके सशक्तिकरण का बहुत अच्छा और सशक्त माध्यम भी है। जहाँ पूरे प्रदेश में नव दुर्गा के पूजन के कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं वहीं शासन के स्तर पर भी मिशन शक्ति का कार्यक्रम भी बहुत प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है।”

सीएम ने 100 से अधिक कन्याओं और छोटे बालकों को मंदिर की रसोई में पका भोजन अपने हाथों से परोसा। इस तरह से गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपीठ की परंपरा का निर्वाह किया। इस दौरान उन्होंने नाथ संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक बटुक पूजन भी किया। जानकारी के मुताबिक, सीएम 24 अक्‍टूबर को भाजपा की परंपरागत शोभायात्रा में भी शामिल होंगे।

घोड़ी की लगाम पकड़कर खड़ा जीशान, सेक्स करता उसका साथी… Video वायरल होने के बाद 4 गिरफ्तार, बरेली की घटना

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक घोड़ी के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में कुल 5 लोगों को नामजद किया गया है। इनके नाम जीशान, रिज़वान, आमिर, भगवत और देवेंद्र हैं। इनमें से 4 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक पुलिसकर्मी पर भी पैसे ले कर आरोपितों को छोड़ने के आरोप लगे हैं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारी सभी मामलों की जाँच करवा रहे हैं। मामले में शनिवार (21 अक्टूबर, 2023) को FIR दर्ज हुई है।

यह मामला बरेली के हाफिजगंज थानाक्षेत्र का है। इस मामले में शिकायत पुलिस की ही तरफ से दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता सब इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि वीडियो में कुछ लोग एक घोड़ी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते दिख रहे हैं। इस दौरान बरेली के ही अलीजान का बेटा जीशान घोड़ी की लगाम को पकड़े हुए है। भगवत नाम का आरोपित घोड़ी से यौन संबंध बना रहा है। घोड़ी को काबू करने में आमिर, देवेंद्र और रिज़वान सहयोग कर रहे हैं।

सब इंस्पेक्टर गजेंद्र के मुताबिक पाँचों आरोपितों की इस हरकत से क्षेत्र के स्थानीय निवासी काफी नाराज हैं। उन्होंने सभी आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर हाफिजगंज थाने में भगवत शरण, जीशान, देवेंद्र, रिज़वान और आमिर के खिलाफ IPC की धारा 377 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत FIR दर्ज हुई है।

ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। वहीं बरेली पुलिस ने अब तक कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पाँचवा आरोपित जीशान फरार है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

वायरल वीडियो 2 मिनट 31 सेकेंड का है। वीडियो में सभी आरोपितों ने एक घोड़ी को एक सुनसान जगह बाँध रखा है और एक टोपी लगाया व्यक्ति उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। गैंगरेप के इन्हीं आरोपितों में एक व्यक्ति ने यह वीडियो बनाई है जो बाद में वायरल हो गई। ऑपइंडिया के पास वीडियो मौजूद है।

इस मामले में आरोपितों की बातचीत का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में एक आरोपित 15 हजार रुपए में खुद को एक पुलिसकर्मी द्वारा छोड़ देने की बात कह रहा है। ऑपइंडिया के पास ऑडियो मौजूद है। बरेली पुलिस के मुताबिक आरोपितों पर कार्रवाई के साथ अन्य आरोपों की भी जाँच की जा रही है।

बच्चों की देह पर टैटू गुदवा रहे फिलिस्तीनी, ताकि मरने के बाद पहचान सकें: इस्लाम में हराम है ये, हदीस में भी आदेश – अल्लाह के बनाए शरीर को बदलना गलत

इजरायल-हमास युद्ध सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया। हमास के इजरायल पर हमले के बाद यहूदी मुल्क की जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी में नागरिकों को खतरा बना हुआ है। यहाँ के अधिकतर लोग इजरायल की सलाह के बाद भी गाजा के उत्तरी हिस्से को खाली करके दक्षिणी हिस्से में जाने में नाकाम रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि गाजा में कई परिवार अपने बच्चों के शरीर पर उनके नाम के टैटू गुदवा रहे हैं, ताकि हमले में मारे जाने या घायल होने पर उनकी पहचान आसानी से की जा सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माता-पिता बच्चों के हाथ-पैरों पर अरबी भाषा में नाम गुदवा रहे हैं। सोशल मीडिया पर बच्चों की लाशों और उनके अंगों पर नाम लिखे हुए कुछ वीडियो सामने आने के बाद ये खुलासा हुआ है। इस्लाम को मानने वाले फिलिस्तीनी पहचान के निशान के तौर पर टैटू बनवा रहे हैं, हालाँकि उनका मजहब इस प्रथा की इजाजत नहीं देता है।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए भयंकर आतंकवादी हमले के बाद इजरायल गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। इसमें अब तक 1400 से अधिक इजरायली और अन्य नागरिकों की जान चली गई थी। अब तक दोनों तरफ से 6000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में दोनों तरफ जान माल का नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हो रही हैं।

ऐसे में हमले में मारे गए अपने परिवारों को खोजने में लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि गाजा पट्टी में लोग अपने बच्चों की पहचान करने के लिए उनके शरीर के अंगों पर टैटू गुदवा रहे हैं। अक्सर कई इस्लामी स्कॉलर और मौलवी शरीर पर टैटू बनवाने को हराम बताते हैं। उनका तर्क है कि इस्लाम शरीर को सुधारने या बदलने की मंजूरी नहीं देता क्योंकि ये अल्लाह ने बनाया है।

यह मनाही इस्लाम की मजहबी पुस्तकों, खास तौर से हदीस की व्याख्याओं पर आधारित है। भगोड़े इस्लामी मुबल्लिग़ जाकिर नाइक के मुताबिक, साहिह अल-बुखारी, हदीस 5943 में लिखा है, “अल्लाह ने उन औरतों को श्राप दिया है जो टैटू गुदवाती हैं या अपने लिए बनवाती हैं, और जो अपने चेहरे से बाल हटाती हैं, और जो खूबसूरत दिखने के लिए अपने दाँतों के बीच कृत्रिम तरीके से जगह बनाती है। ये औरतें ऐसा कर अल्लाह की बनाए नैन-नक्शों को बदल देती हैं।”

इसके अलावा, हदीस में गोदने के बारे में कई अन्य जिक्र भी हैं। साहिह अल-बुखारी, पुस्तक 72, हदीस 823 की हदीस के मुताबिक, पैगंबर मुहम्मद ने टैटू बनाने वालों और टैटू बनवाने वालों को श्राप दिया था। खास तौर से, साहिह अल-बुखारी हदीस के सबसे भरोसेमंद संग्रहों में से एक है। IIUM के साहिह अल-बुखारी से हदीस के संग्रह के मुताबिक, ऊपर जिक्र किए हदीस में लिखा है, “पैगंबर ने उस महिला को श्राप दिया है जो अपने बालों को कृत्रिम तौर से लंबा करती है और जो उसके बालों इस तरह से लंबा करता है, और उस महिला को भी जो टैटू बनाती है (खुद को या दूसरों को) ) और वह जो खुद टैटू बनवाती है।

साहिह मुस्लिम की हदीस के मुताबिक, एक और भरोसेमंद हदीस टैटू के मनाही के बारे में बताती है। हदीस संग्रह वेबसाइट के मुताबिक, साहिह मुस्लिम, पुस्तक 24, हदीस 5300 में लिखा है, “किसी के सिर पर नकली बाल लगाना या भौंहें उखाड़ना या दाँत अलग करना मना है। इब्न उमर ने बताया है कि अल्लाह के दूत ने उस महिला को श्राप दिया था जिसने नकली बाल लगाए थे और उस महिला को जिसने टैटू बनवाने के लिए कहा था।”

खासतौर से मेहंदी या अन्य किसी रंग के बने अस्थायी टैटू बनाने की इस्लाम में मंजूरी दी गई है, लेकिन केवल तभी जब उसका डिजाइन शरिया कानून का पालन करता हो।