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‘गाना – प्रभु का नाम, सेक्सी ड्रेस में लड़कियाँ, बैकग्राउंड में लिंगनुमा आकृतियाँ’: सलमान खान के ‘Tiger 3’ के सॉन्ग को देख कर भड़के लोग, पूछा – ‘अल्लाह का नाम क्यों नहीं?’

सलमान खान की नई फिल्म ‘Tiger 3’ का एक गाना आया है। प्रोडक्शन कंपनी ‘यशराज फिल्म्स (YRF)’ द्वारा इस गाने को रिलीज किए जाने के बाद से ही ये विवादों में घिर गया है। इस गाने का नाम है – ‘लेके प्रभु का नाम’। हालाँकि, समस्या इससे नहीं है। असल में ‘लेके प्रभु का नाम’ गाने में अभिनेत्री कैटरीना कैफ सेक्सी कपड़ों में दिख रही हैं और साथ ही कई अन्य लड़कियाँ भी इसी तरह की ड्रेस में नाचती हुई दिख रही हैं।

संगीत निर्देशक प्रीतम द्वारा तैयार किए गए इस गाने को अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखा है और अरिजीत सिंह और निकिता गाँधी ने इसे आवाज़ दी है। मनीष शर्मा द्वारा निर्देशित ‘टाइगर 3’ में इमरान हाशमी मुख्य विलेन की भूमिका में हैं। गाने का वीडियो शेयर करते हुए ‘सब लोकतंत्र’ नामक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने लिखा, “क्या इस गाने में जो मुझे आपत्तिजनक दिख रहा है, वो केवल मुझे दिख रहा है, या आपको भी? याद रहे, काराचीवुड में कुछ संयोग नहीं होता!”

कई लोगों ये भी सवाल उठाया कि इस तरह के गाने में आखिर ‘प्रभु’ का नाम लेने की बात ही क्यों हो रही है, इस्लाम के ‘खुदा’ का नाम लेने की बात क्यों नहीं की जा रही?

कुछ लोग इससे भी नाराज़ दिखे कि इस गाने के बैकग्राउंड के लिए ‘लिंगनुमा आकृतियों’ का इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि गाना किसी खण्डहर में फिल्माया गया लगता है, जिसके खम्भों और दीवारों को देख कर लोगों ने ये बातें कही।

बता दें कि इस गाने को तुर्की के कप्पाडोसिया में शूट किया गया है। हालाँकि, कई लोग इस गाने की तारीफ़ करते हुए भी दिखे। सलमान खान और अरिजीत सिंह के बीच खटपट की खबरें आई थीं, ऐसे में फैंस को दोनों के साथ आने का इंतज़ार था। सलमान खान की ‘Tiger 3’ में शाहरुख़ खान का भी कैमियो होगा। YRF की टाइगर सीरीज, ‘वॉर’ और ‘पठान’ के क्रम में ही ये फिल्म आ रही है, जिसे ‘स्पाई यूनिवर्स’ भी कहा जा रहा है।

‘प्रोटीन नहीं मिल रहा, इसीलिए नहीं मार पा रहे छक्के’: इमाम उल हक़ के अजीबोगरीब तर्क के बाद उड़ा पाकिस्तान टीम का मजाक, लोग बोले – खेल पर ध्यान दो, खाना पर नहीं

पाकिस्तानी बल्लेबाज इमाम उल हक ने मैच से पहले होने वाली कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनकी टीम के बल्लेबाज प्रोटीन नहीं खा रहे हैं इसलिए छक्के नहीं मार पा रहे। उन्होंने अजीबोगरीब तक दिया कि हमें अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की जगह प्रोटीन को शामिल करना होगा ताकि हम पावरप्ले के ओवर में छक्के मार पाएँ।

इमाम उल हक ने यह हास्यास्पद बातें रविवार (22 अक्टूबर 2023) को टीम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं जब टॉप आर्डर के बल्लेबाजों को लेकर उनसे प्रश्न पूछा गया। 23 अक्टूबर को पाकिस्तान को पड़ोसी अफगानिस्तान का सामना करना है। उनके इस बयान को लेकर अब ट्रोल किया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में अगानिस्तान के खिलाफ मैच से पहले पाकिस्तान के बल्लेबाज शुरुआती दस ओवर में छक्के नहीं मार पाए हैं और लगातार उनकी टीम बड़े स्कोर बनाने से चूक रही है। इमाम उल हक के इस बयान पर एक्स (पहले ट्विटर) पर लोगों ने उनका ख़ूब मजाक उड़ाया। हमजा नाम के एक अकाउंट ने लिखा कि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट खाने की बात वह व्यक्ति कर रहा है जो कि मैदान पर तीन रन नहीं दौड़ पाता है।

मिक्कू नाम के एक यूजर ने लिखा कि खाने के अलावा भी और कोई बात सोच लिया करो।

एक मारवाड़ी नाम के अकाउंट ने लिखा कि परफॉरमेंस पर ध्यान दो खाने पर नहीं।

‘क्रिकेट फ्रीक’ नाम के अकाउंट लिखा कि आपको रोहित शर्मा से कोचिंग लेने की आवश्यकता है।

माइकल मखाल ने लिखा कि भारत के आधे से ज्यादा क्रिकेटर शाकाहारी हैं लेकिन फिर भी पाकिस्तान की टीम से अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहावत याद की – “नाच ना जाने, आँगन टेढ़ा”

विक्रम नायक ने लिखा कि पिज़्ज़ा-बर्गर खाएँगे तो और क्या होगा?

इमाम उल हक की इस बात का जवाब देते हुए ‘सुनील द क्रिकेटर’ नाम के एक यूजर ने भारतीय बल्लेबाज और कप्तान रोहित शर्मा का पुराना वीडियो डाला जिसमें वह अपना पसंदीदा खाना दाल-चावल बता रहे हैं।

इमाम उल हक को ट्रोल करने के लिए एक यूजर ने लिखा कि हैदराबादी बिरयानी खाना बंद कर दोगे या नहीं।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम लगातार खाने-पीने को लेकर ट्रोल की जाती रही है। इससे पहले भी कई बार ऐसे वीडियो चर्चा में आते रहे हैं जिनमें उनके फैन्स टीम की खाने-पीने की आदतों को लेकर उन पर तंज करते रहे हैं।

‘पंजाब में हलीउल्लाह वालों को नहीं रहने देना चाहते’: धर्मांतरण पर बागेश्वर बाबा के प्रहार से भड़के ईसाई संगठन, दर्ज कराई शिकायत

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पंजाब के पठानकोट में अपना दरबार लगाया। इस दौरान उन्होंने पंजाब में सक्रिय ईसाई मिशनरियों को आड़े हाथों लिया। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने पंजाब को धर्मान्तरण से मुक्त कराने की मुहिम चलाने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने धर्म परिवर्तन करवाने वाली ताकतों के खिलाफ और अधिक कड़ा कानून बनाने की भी वकालत की। हालाँकि, ईसाई संगठनों ने पंजाब पुलिस में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ अपनी भावनाओं को आहत करने की शिकायत दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब के पठानकोट में रविवार को लगे अपने दरबार में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने लोगों से धर्म परिवर्तन की साजिश के खिलाफ जागरूकता की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें मंदिरों और गुरुद्वारों में घुसना बंद करें। उन्होंने पंजाब में सक्रिय मिशनरियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वो भोले भाले हिन्दुओं को बरगलाना बंद करें। भारत को बाबर नहीं बल्कि रघुवर का देश बताते हुए धीरेन्द्र शास्त्री ने सरकार से अपील की है कि वो धर्मान्तरण के खिलाफ बने कानून को और सख्त करें।

धीरेन्द्र शास्त्री ने भारत में हो रहे धर्मान्तरण के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया। पंजाब को गुरुओं और वीरों की धरती बताते हुए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने वहाँ जाना अपना सौभाग्य बताया। पंजाब की जनता को प्यार और बड़े दिलवाले बता कर धीरेन्द्र शास्त्री ने लोगों को गुरुनानक के दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की।

एक वायरल वीडियो में उन्होंने कहा कि वो पंजाब में ‘हलीउल्लाह’ वालों को नहीं रहने देना चाहते हैं। ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्मपरिवर्तन को पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने सनातन को मिटाने की साजिश करार दिया।

बता दें कि बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर की पठानकोट में 3 दिवसीय भागवत कथा है जहाँ वो 21 से 23 अक्टूबर तक रहेंगे। इस दौरे पर वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और दुर्गियाना मंदिर भी गए और पूजा अर्चना की।

ईसाई समुदाय द्वारा पुलिस में शिकायत

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के इस बयान पर पंजाब के ईसाई संगठनों ने नाराजगी जताई है। ऑल इंडिया क्रिश्चियन कमेटी ने इस मामले में अजनाला पुलिस में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।

विरोध करने वालों का कहना है कि पंडित शास्त्री ने उनके ‘हालेलुइया’ को ‘हलीउल्लाह’ कहा है जिस से उनकी भावनाएँ आहत हुईं हैं। शिकायत में पंडित शास्त्री के बयान को ईसाईयों का अपमान बताया गया है। साथ ही 2 दिन की समयसीमा देते हुए धीरेन्द्र शास्त्री को माफ़ी माँगने और बयान वापस लेने के लिए कहा गया है। 2 दिनों के बाद बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया गया है।

मध्य प्रदेश की 22 सीटों पर मुस्लिम निर्णायक, इनके ही सहारे नैया पार लगाने की जुगत में कॉन्ग्रेस: 2018 में इनके साथ से ही आगे बढ़ी थी हाथ

मध्य प्रदेश की सत्ता में कॉन्ग्रेस की वापसी की आस मुस्लिम मतदाताओं पर टिकी हुई है। राज्य में 17 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए वोट पड़ेंगे। नतीजे 3 दिसंबर को राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के साथ ही आने हैं।

2018 के विधानसभा चुनावों में जीतने के बावजूद कॉन्ग्रेस लंबे समय तक सत्ता पर काबिज नहीं रह सकी थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उसके दो दर्जन विधायक बागी होकर बीजेपी में शामिल हो गए थे। पिछले चुनावों में बीजेपी को 41.02 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 40.89 फीसदी वोट पाकर भी कॉन्ग्रेस ने 230 में से 114 सीटें जीतने में कामयाब रही थी।

समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कॉन्ग्रेस ने सरकार बनाई थी। लेकिन यह सरकार मात्र 15 महीने ही चल पाई। कॉन्ग्रेस को उम्मीद है कि इस बार वह मध्य प्रदेश में सत्ता हासिल कर सकती है। लेकिन इस उम्मीद के केंद्र में ज्यादातर ‘मुस्लिम मतदाता’ ही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 22 सीटें मुस्लिमों के प्रभाव वाली हैं।

मध्य प्रदेश में बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहा है। इस द्विदलीय राजनीति में जीत का अंतर हमेशा 20 सीटों से कम रहा है। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने में लगी है। साल 2018 में कॉन्ग्रेस की जीत में भी मुस्लिम वोटर अहम थे। इनकी मदद से ही पार्टी अपना वोट शेयर 3-4 फीसदी तक बढ़ाने में कामयाब रही थी।

कॉन्ग्रेस से संबद्ध मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के समन्वयक मोहम्मद माहिर ने बताया कि अल्पसंख्यक वोटों में इजाफे से कॉन्ग्रेस को 2018 में मामूली अंतर से चुनाव जीतने में मदद मिली थी। दिलचस्प यह है कि कॉन्ग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने भी 2018 में कहा था कि अगर 90 फीसदी अल्पसंख्यक वोट कॉन्ग्रेस के पक्ष में हो, तो वे सरकार बना सकते हैं।

उनकी इस अपील ने कॉन्ग्रेस के पक्ष में काम भी किया था। इसके कारण ही 2008 और 2013 के चुनावों में हारने वाली 10-12 सीटें भी 2018 में कॉन्ग्रेस के हाथ लग गई थी।

2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में मुस्लिम आबादी 7 फीसदी है। अनुमान के मुताबिक अब इनकी संख्या बढ़कर 9-10 फीसदी हो गई है। एमपी की विधानसभा की 230 सीटों में 47 विधानसभा सीटों पर उनकी अच्छी खासी संख्या हैं। इनमें से 22 सीटों के नतीजे वे किसी के भी पक्ष में झुका सकते हैं।

राज्य में अल्पसंख्यकों की ये 22 सीटें किस पार्टी को जाएँगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि मुस्लिम वोट कैसे करते हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि इन 22 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 15,000 से 35,000 तक हैं, जो करीबी मुकाबले के हालात में उन्हें अहम बनाता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में से कुछ महत्वपूर्ण सीटों में भोपाल, इंदौर, बुरहानपुर, जावरा, जबलपुर और अन्य शामिल हैं।

हाल ही में कॉन्ग्रेस को राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ कथित विश्वासघात को लेकर भाजपा की आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालाँकि कॉन्ग्रेस का लक्ष्य मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा हासिल करना है, लेकिन उसने विधानसभा चुनाव 2023 में सीमित संख्या में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि बैतूल जिले की आलमपुर सीट को छोड़कर कॉन्ग्रेस सभी सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है।

दूसरी तरफ, भाजपा ने न केवल अल्पसंख्यकों को उम्मीदवार बनाया है, बल्कि मुस्लिम आबादी के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया है। दोनों अहम राजनीतिक दल बीजेपी और कॉन्ग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में अल्पसंख्यक वोटरों का समर्थन हासिल करने के लिए एक-दूसरे को टक्कर देने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे आम आदमी पार्टी भी विधानसभा चुनाव में हिस्सा ले रही है, लेकिन उसकी मौजूदगी से बीजेपी या कॉन्ग्रेस में से किसी के भी वोट प्रतिशत पर असर पड़ने की उम्मीद कम ही है।

‘मर्दों से औरतें कमतर’: पाकिस्तान के प्रोफेसर से मौलानाओं ने कहलवाया, डार्विन का सिद्धांत पढ़ाने पर मँगवाई माफी

पाकिस्तान के बन्नू शहर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सरकारी स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेज के जीव विज्ञान के एक सहायक प्रोफेसर को स्टाम्प पेपर पर माफ़ीनामा देने के लिए मजबूर किया गया। सहायक प्रोफेसर शेर अली को ये माफीनामा जीव विज्ञान की एक बुनियादी अवधारणा चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने की वजह से देना पड़ा।

यही नहीं उन्हें मिश्रित-लिंग वाली यानी मर्द और औरतों के साथ होने वाली मीटिंग की निंदा करने और यह ऐलान करने के लिए भी मजबूर किया गया कि महिलाएँ पुरुषों से निम्नतर (नीचे) हैं। सहायक प्रोफेसर शेर अली को लेकर ये सब विवाद महज इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में डोमेल क्षेत्र में संविधान और कानून के मद्देनजर औरतों के हकों पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित किया था।

सेमिनार के दौरान उनकी टिप्पणियाँ स्थानीय मौलवियों को अच्छी नहीं लगीं। इन लोगों ने प्रोफेसर शेर अली पर अय्याशी फैलाने और इस्लाम और स्थानीय संस्कृति के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया और अधिकारियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर डाली।

हालाँकि, इसके इसके तुरंत बाद, प्रोफेसर अली ने पाठ्यक्रम के हिस्से के तौर पर डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ की। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने उनके हवाले से कहा, “जीव विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का अध्याय 24 डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत पर चर्चा करता है और अगर किसी को इस विषय से परेशानी है, तो उन्हें पाठ्यक्रम से इस अध्याय को हटाने के लिए सरकार से संपर्क करना चाहिए।”

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि अगर वह इस विषय को नहीं पढ़ाएँगे तो उनके छात्र उनकी पढ़ाने की काबिलियत पर सवाल उठाएँगे। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने छात्रों की सहमति लेने के बाद डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत को पढ़ाया है।

जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डॉन को बताया कि शेर अली ने मौलवियों से कहा कि पर्दा या औरतों के हकों पर सोशल मीडिया पोस्ट उनके नहीं थे, उन्हें एडिट किया गया था।

सहायक प्रोफेसर शेर अली ने बन्नू डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय को तीन पन्नों का हलफनामा दिया कि डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत सहित सभी वैज्ञानिक और तर्कसंगत विचार, जो इस्लामी शरिया का विरोध करते हैं वो झूठ हैं।

कट्टरपंथी मौलानाओं के दबाव में प्रोफेसर शेर अली को ये भी ऐलान करना पड़ा कि औरतें मर्दों से कमतर हैं और ऐलान किया कि महिलाओं को पुरुषों के साथ गैरजरूरी तौर पर घुलने-मिलने की मंजूरी नहीं है।

ये तब है जब सहायक प्रोफेसर शेर अली के पास पेशावर विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री है। वो इस्लामाबाद में कायद-ए-आज़म विश्वविद्यालय से ह्यूमन जेनेटिक्स में एमफिल हैं।

‘द कर्स ऑफ गॉड-व्हाई आई लेफ्ट इस्लाम’ किताब के लेखक हैरिस सुल्तान ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर डाला था। इसके बाद ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के साथ सुल्तान ने कैप्शन लिखा, “यही वजह है कि पाकिस्तान तीसरी दुनिया का नरककुंड बना रहेगा। अच्छी दाढ़ी रखने वाले ये कट्टरपंथी मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेर अली को विकासवाद के सिद्धांत की निंदा करने और रिकॉर्ड पर यह कहने के लिए मजबूर करते हैं कि कुरान और हदीस के मुताबिक, महिलाएँ पुरुषों के मुकाबले ‘बौद्धिक रूप से कमतर’ हैं।”

लेखक हैरिस सुल्तान ने आगे लिखा, “हालाँकि मौलवी ग़लत नहीं हैं। कुरान और पैगंबर मुहम्मद ने कहा था “औरतें मूर्ख हैं”।

गौरतलब है कि जीव विज्ञान के एक प्रोफेसर शेर अली का डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के लिए सार्वजनिक माफी माँगने का मामला पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक विचारों में इस्लामिक कट्टरपंथियों की दखलअंदाजी का उदाहरण हैं।

केमिकल हमले के बाद तबाह हो जाता पूरा इजरायल? हमास आतंकियों की अलकायदा वाली साजिश, तैयार था सायनाइड से बम बनाने का पूरा खाका

दक्षिणी इजरायल पर 7 अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकी निर्दोष नागरिकों पर सायनाइड वाले केमिकल हथियारों का उपयोग करने वाले थे। यह खुलासा आतंकियों के पास मिली सामग्री में हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली ख़ुफ़िया एजेंसियों को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ USB पेन ड्राइव बरामद हुई हैं। इन पेन ड्राइव में आतंकी संगठन अलकायदा की तरह सायनाइड वाले केमिकल हथियार बनाने की विधि बताई गई है।

इस यूएसबी डिवाइस में पूरी तरीके से समझाया गया था कि सायनाइड वाले केमिकल बम कैसे बनाए जाएँ और उन्हें लगा कर ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाई जाए। इजरायली सुरक्षा बलों ने पता लगाया है कि हमास आतंकियों के पास मिली यह जानकारी असल में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा वर्ष 2003 में तैयार की गई थी।

गौरतलब है कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर सबसे पहले दक्षिणी हिस्से में हमला किया था। इस इलाके में बसे गाँवों और मुहल्लों में आतंकियों ने घर-घर जाकर बच्चों, महिलाओं समेत एक-एक व्यक्ति को मार दिया था। इसी इलाके में आयोजित किए जा रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में 260 से अधिक लोगों को मार दिया था। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हेर्जोग ने आतंकियों के पास से केमिकल बम की जानकारी मिलने पर कहा, “यह अलकायदा की सामग्री है। हम अल कायदा, ISIS और हमास का मुकाबला कर रहे हैं।”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातर यह कहते आए हैं कि हमास भी ISIS की तरह ही खतरनाक है और इसका खात्मा ISIS की तरह होना चाहिए। वह लगातार हमास का समर्थन करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निष्कासित करने की मांग भी करते रहे हैं।

इजरायल की सरकार ने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भेजे गए केबल में भी इन केमिकल हथियारों के विषय में जानकारी दी है। उन्होंने अपने दूतावासों को बताया है कि हमास ISIS की तरह ही हमले करना चाहता था। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या अब बढ़ कर 1400 के पार हो चुकी है। इजरायल ने भी इस के जवाब में हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 4400 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।

‘बस एक ट्वीट दिखा दो, जिसमें तुमने भारत या भारतीय संस्कृति की प्रशंसा की’: आरफा खानम की ‘इस्लामी गिल्ली’ विदेशी क्रिकेटर ने उड़ाई

भारत और हिन्दू धर्म को लेकर अक्सर नफरत फैलाने वाली ‘The Wire’ की तथाकथित पत्रकार आफरा खानम शेरवानी ने इस बार गलत पंगा ले लिया। लोग इसीलिए ऐसा कह रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर उनके हर प्रोपेगंडा को ध्वस्त कर रहे हैं। जब आरफा खानम ने ऑनलाइन आलोचना को ‘लिंचिंग’ बता कर उन पर निशाना साधा, तो दानिश कनेरिया ने साफ़ कर दिया कि इन शब्दों का इस्तेमाल कर के उनके खिलाफ प्रोपेगंडा नहीं चलेगा।

आरफा खानम शेरवानी का ‘विक्टिम कार्ड’

असल में, जब आरफा खानम शेरवानी ने खुद के भारतीय होने पर शर्मिंदगी जताई तो दानिश कनेरिया ने कह दिया कि वो पाकिस्तान आ जाएँ। इसे आरफा सांप्रदायिक बताने लगीं। जवाब मिलने पर उन्होंने कहा कि उस ट्वीट का हर एक शब्द कम्युनल था। आरफा खानम शेरवानी का मानना है कि किसी भारतीय मुस्लिम को पाकिस्तान जाने के लिए कहना उतना ही सांप्रदायिकता और बहुसंख्यकवादी है, जितना किसी पाकिस्तानी हिन्दू को धर्मांतरण के लिए कहना।

उन्होंने लिखा कि इसका अर्थ हुआ किसी अल्पसंख्यक को ये कहना कि तुम यहाँ से संबंध नहीं रखते हो, जब तक कि तम बहुसंख्यक धर्म में कन्वर्ट नहीं हो जाते। हालाँकि, ये अलग बात है कि भारत में मुस्लिमों की जितनी जनसंख्या है, लगभग 190 देशों की कुल आबादी भी उतनी नहीं है। भारत में मुस्लिम दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक हैं, अल्पसंख्यक नहीं। सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, यहूदी या फिर ईसाई समाज तक की तरफ से इस तरह से अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक वाला प्रोपेगंडा नहीं चलाया जाता रहा है, जबकि इस्लामी गिरोह के लिए ये आम हथियार है।

दानिश कनेरिया ने आरफा खानम शेरवानी को जवाब देते हुए लिखा, “मैं धर्मांतरण, बहुसंख्यकवाद, हिन्दुओं, भारतीय मुस्लिमों या धर्म/मजहब की बात ही नहीं कर रहा हूँ। मैं सीधे-सीधे तुम्हारी वफादारी के बारे में बात कर रहा हूँ। चलो, एक स्पष्ट जवाब के साथ इस बहस को खत्म करते हैं – मुझे सिर्फ एक ट्वीट ऐसा दिखा दो जिसमें तुमने भारत या इसकी संस्कृति की प्रशंसा की है।” आरफा खानम शेरवानी अब लगातार अपने समर्थन में गिरोह विशेष के लोगों द्वारा किए जा रहे ट्वीट्स को रीट्वीट कर रही हैं।

आरफा खानम शेरवानी आज धर्मांतरण की बात कर रही हैं, लेकिन पाकिस्तान में हर महीने 20-25 हिन्दू लड़कियों के अपहरण, इस्लामी धर्मांतरण और निकाह की घटनाएँ होती हैं तो वो चुप रहती हैं। पाकिस्तान के ही ‘औरत फाउंडेशन’ और ‘मूवमेंट फॉर सॉलिडेरिटी एन्ड पीस’ का कहना है कि हर साल 1000 लड़कियों के साथ ऐसी क्रूरता होती है। हाल ही में रजीता मेघवार कोल्हि नामक दलित लड़की के साथ यही हुआ।अपहरण के बाद के पास जाने के लिए वो रोती रहीं, लेकिन पाकिस्तान की पुलिस या न्यायपालिका भी हिन्दू विरोधी ही है। आरफा इस पर भी चुप रहती हैं।

दानिश कनेरिया ने अब भी स्पष्ट कहा है कि उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ, उन्होंने क्रिकेट पाकिस्तान के लिए खेला और आज भी वो एक पाकिस्तानी के रूप में गौरव महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तुच्छ लोगों ने उनके साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया, लेकिन इसके लिए वो सभी को दोष नहीं दे सकते। उन्होंने साफ़ कहा कि वो अपने देश को गाली नहीं दे सकते। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि उनके समुदाय के साथ कुछ गलत होता है तो वो चुप भी नहीं रहेंगे, बल्कि आवाज़ उठाएँगे।

दानिश कनेरिया ने कर दिया है ‘इलाज’

अब आपको बताते हैं कि ये सब शुरू कैसे हुआ। असल में आरफा खानम शेरवानी ने ट्वीट कर के लिखा, “विश्व कप के मैचों के दौरान कई फैंस के निंदनीय व्यवहार से एक भारतीय के रूप में मुझे शर्म महसूस हो रही है, मैं इससे लज्जित हूँ। खेल का उद्देश्य था लोगों को एक साथ लाना, लेकिन इसे लेकर गंदा, असुरक्षित भावना और बहुसंख्यकवाद मोदी-RSS द्वारा पिछले 10 साल में बनाए गए माहौल का प्रतीक है।” उनका इशारा भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान अहमदाबाद में फैंस द्वारा ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को लेकर था।

हालाँकि, अरफ़ा खानम शेरवानी पाकिस्तानी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान द्वारा मैदान पर ही नमाज पढ़े जाने को लेकर खामोश रहती हैं। पाकिस्तान के हिन्दू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने इस बार उन्हें जवाब देते हुए कहा, “अगर तुम एक भारतीय के रूप में शर्म महसूस कर रही हो तो मेरे देश पाकिस्तान में आ जाओ। भारत को तुम्हारे जैसे लोगों की ज़रूरत ही नहीं है। मैं आश्वस्त हूँ कि भारत में कई लोगों को तुम्हें पाकिस्तान भेजना का खर्च उठाने में ख़ुशी होगी।”

जैसे ही लोगों ने आरफा खानम शेरवानी को जवाब देना शुरू किया, उन्होंने ‘विक्टिम कार्ड’ निकाल लिया। उन्होंने दावा किया कि दानिश कनेरिया ने उनकी ‘ऑनलाइन लिंचिंग’ के लिए भीड़ छोड़ दी है और वो ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दुःख है कि कई धर्मों के फैंस द्वारा जिस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को प्यार किया गया वो अब एक सांप्रदायिक ट्रोल बन गया है। इसके बाद आरफा ने पाकिस्तान जाने से भी इनकार कर दिया और कहने लगीं कि ‘अपने देश’ को छोड़ कर दुनिया में कहीं नहीं जाएँगी।

इसके बाद दानिश कनेरिया ने आरफा खानम शेरवानी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों (भीड़, लिंच, धार्मिक, ट्रोल) पर कटाक्ष किया। उन्होंने साफ़ कहा कि उनके खिलाफ इन प्रोपेगंडा शब्दों का इस्तेमाल न किया जाए। दानिश कनेरिया ने पूछा कि क्या उन्होंने अपने ट्वीट में कहीं भी सांप्रदायिकता की बात की? दानिश ने कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद दानिश कनेरिया ने उनसे स्पष्ट जवाब माँगा है कि क्या उन्होंने कभी भारत या उसकी संस्कृति की तारीफ की है, एक बार भी?

दुर्गा पूजा करने पर कट्टर मुस्लिमों ने दानिश कनेरिया को दी गाली =

याद दिलाते चलें कि दानिश कनेरिया द्वारा नवरात्रि के दिनों में देवी माँ के साथ फोटो डालने पर इस्लामी ट्रोल गाली-गलौज पर उतर आए। देवी माँ की पूजा करने पर मुस्लिम अकाउंट उन्हें वतन गद्दार बता रहे हैं। एक यूजर ने उन्हें ‘सूअर’ की भी गाली दी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दानिश कनेरिया पाकिस्तान में रह कर भी अपने हिन्दू रीति रिवाजों को मान रहे हैं। दानिश ने देवीमंत्र के साथ एक फोटो एक्स पर डाली तो आमिर खान ने लिखा, “आप सूअर जैसे लगते हो!”

फैसी मलिक नाम के एक अकाउंट ने लिखा, “एक बार फ़िक्सर, हमेशा फ़िक्सर!” आमिर खान ने ही लिखा कि यदि दानिश अब भी क्रिकेट खेल रहे होते सबसे गन्दी शकल उन्हीं की होती। अरशद नाम के एक ट्रोल ने लिखा कि फ़िक्सर भगवान से माँग रहा है। फैसी मलिक ने कनेरिया द्वारा देवी की आरती की वीडियो ट्विटर पर डालने पर उन्हें वतन गद्दार बता दिया। ‘मिस्टर रेजर’ नाम के अकाउंट ने हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए लिखा कि क्या बूतों की पूजा कर रहा है, मुस्लिम बन जा, जिद छोड़ दे।

शहजादी का होना था निकाह, बाल-बच्चेदार अजहरुद्दीन ने होटल में बुलाकर मार डाला: घरवालों को कॉल कर लाश ले जाने को कहा

23 साल की शहजादी का निकाह तय था। 35 साल के आशिक अजहरुद्दीन ने आखिरी बार मिलने के बहाने होटल में बुलाया और हत्या कर दी। फिर शहजादी के घरवालों को कॉल कर लाश ले जाने को कहा। घटना 22 अक्टूबर 2023 की है। मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का है।

हत्या के बाद से बाल बच्चेदार अजहरुद्दीन फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना गाजियाबाद के वेबसिटी थाना क्षेत्र की है। हापुड़ के धौलाना इलाके की रहने वाली शहजादी लगभग 4 साल पहले गाजियाबाद के अजहरुद्दीन से मिली थी। उम्र में लगभग 13 साल का फर्क होने के बावजूद थोड़े समय की मुलाकात के बाद दोनों में प्यार हो गया। कुछ दिनों तक दोनों लिव इन रिलेशन में भी रहे। अजहरुद्दीन पहले से शादीशुदा और बाल-बच्चेदार था। शहजादी से मिलने के बाद उसने अपनी बीवी और बच्चों को छोड़ दिया था।

इस बीच शहजादी के घर वालों ने उसका निकाह तय कर दिया। शहजादी का निकाह 14 नवंबर 2023 को दिल्ली के एक युवक से होना तय था। पहले से नशीले पदार्थों की तस्करी में नामजद रहा अजहरुद्दीन इससे नाराज था। वहीं शहजादी अपने नए रिश्ते से खुश थी। अजहरुद्दीन ने लड़की को अंतिम बार मिलने के बहाने 20 अक्टूबर को डासना स्थित होटल अनंत में बुलाया।

अजहरुद्दीन की बातों में शहजादी आ गई। अपने घर में बिना किसी को बताए अजहरुद्दीन से मिलने निकल पड़ी। घर में उसने अपनी किसी सहेली से मिलने की बात कही थी। रविवार (22 अक्टूबर) की सुबह अजहरुद्दीन ने शहजादी के घर पर कॉल किया। फोन पर उसने कहा, “सब खत्म हो गया है। शहजादी की लाश डासना के अनंत होटल में पड़ी है। उसे ले जाना।” इस कॉल पर जब लड़की के घर वाले होटल पहुँचे तो कमरे में शहजादी की लाश पड़ी मिली।

मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस होटल में पहुँच कर जाँच-पड़ताल में जुट गई। मृतका के मुँह से झाग आ रहा था। पुलिस को आशंका है कि शहजादी की हत्या या तो गला दबा कर की गई है या जहर दे कर। मृतका के भाई की तहरीर पर पुलिस ने अजहरुद्दीन को नामजद करते हुए हत्या की FIR दर्ज कर ली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद हत्या की असल वजह की जानकारी मिल पाएगी। फरार अजहरुद्दीन की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही है।

स्कूल-कॉलेज में हिन्दू धर्म को अपमानित करने के पीछे कैसी मानसिकता: जय श्री राम का नारा भारत में नहीं तो क्या पाकिस्तान में लगाया जाएगा?

भारत में और वह भी उत्तर प्रदेश में जहाँ पर एक योगी मुख्यमंत्री का शासन है, क्या वहाँ पर भी यह हो सकता है कि जय श्री राम के नारे लगाने पर बच्चों के विरुद्ध कार्यवाही हो जाए? क्या जय श्री राम का नारा लगाने पर बच्चों को कॉलेज के किसी प्रोग्राम में स्टेज से उतारा जा सकता है? क्या जय श्री राम का नारा लगाने को लेकर कॉलेज के प्रोफेसर द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी भी की जा सकती है? और क्या अगर ऐसा कहीं हुआ भी है, तो फिर उसे ठीक भी ठहराया जा सकता है?

यदि यह कहा जाए कि यह सब हुआ और उत्तर प्रदेश में हुआ, तो सहज विश्वास नहीं होगा क्योंकि यह हमारी अपेक्षा से परे है। लेकिन सच यही है कि यह हुआ है गाज़ियाबाद के एबीईएस कॉलेज में। यहाँ पर एक बच्चे ने मंच पर चढ़कर साथियों का अभिवादन करते हुए जय श्री राम कह दिया। और उसके ऐसा करते ही उसे एक शिक्षिका द्वारा मंच से नीचे उतार दिया गया।

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर शोर मचा, वैसे ही लोगों ने विरोध करना आरम्भ कर दिया। प्रश्न जायज भी है कि आखिर क्यों प्रभु श्री राम का नारा लगाने पर विरोध हो? और ऐसा क्या गलत कह और कर दिया था?

लोगों ने शोर मचाया और उसके बदले में आरोपी शिक्षिका ममता गौतम ने वीडियो जारी करके अपनी सफाई दी। यह सफाई कम और उस विद्यार्थी पर आक्षेप अधिक थी। इसमें उन्होंने कहा कि चूँकि वह सनातनी परम्परा को मानने वाली हैं और शारदीय नवरात्रि में वह विधि-विधान से पूजा करती हैं, अत: प्रभु श्री राम को लेकर न ही उन्हें कोई समस्या है और न ही होगी।

परन्तु यह सफाई क्या उस पीड़ा को कम कर सकती है, जो लाखों हिन्दू लोगों को हुई कि लड़के को जय श्री राम बोलने को लेकर मंच से नीचे उतार दिया गया? हालाँकि जब मामला बढ़ा तो कॉलेज की ओर से जाँच की गई और जाँच के बाद 2 शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया गया।

बात सिर्फ एबीईएस कॉलेज तक सीमित नहीं है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में आधुनिक इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर विक्रम हरिजन ने तो यहाँ तक कह दिया कि वो भगवान राम और भगवान कृष्ण यदि अभी होते तो दोनों को जेल भेज देते। अब ऐसे में प्रश्न कई उठते हैं। सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी कुछ प्रश्न हैं:

  1. क्या कथित पढ़ाई का झंडा उठाने वाले लोग हिन्दू जड़ों से कटे हुए लोग होते हैं?
  2. क्या जैसे-जैसे इंसान किताबें पढ़ता जाता है, वह अपनी हिन्दू पहचान से विमुख होता जाता है?
  3. यदि ऐसा नहीं है तो क्या कारण है कि स्कूल और कॉलेज जैसे शिक्षा के संस्थानों में बहुसंख्यक हिन्दू धर्म को निरंतर अपमानित किया जाता है?
  4. आखिर क्यों ऐसी घटनाएँ होती हैं, जिनके चलते हिन्दू समाज को न्याय के लिए शोर मचाना पड़ता है?

एक और प्रश्न: जय श्री राम का नारा भारत में नहीं तो क्या पाकिस्तान में लगाया जाएगा?

वाघ-बकरी चाय के मालिक पराग देसाई की मौत, सड़क पर कुत्तों ने कर दिया था हमला: ब्रेन हेमरेज के कारण वेंटीलेटर पर थे

गुजरात की मशहूर ‘वाघ बकरी’ चाय कंपनी के मालिक और कार्यकारी निदेशक पराग देसाई का रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 49 वर्षीय देसाई ब्रेन हेमरेज के कारण अस्पताल में भर्ती थे। वह काफी दिनों से वेंटीलेटर पर थे। वह उस समय घायल हो गए थे जब स्ट्रीट डॉग्स ने उनपर हमला कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर को जब वह सड़क पर कुत्तों से बचने की कोशिश कर रहे थे, तब देसाई अपने घर के बाहर गिर गए और उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया। एक सुरक्षा गार्ड ने परिवार को घटना के बारे में सूचना दी और देसाई को इलाज के लिए पास के शेल्बी अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन की निगरानी के बाद उन्हें सर्जरी के लिए ज़ाइडस अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। वह पिछले एक हफ्ते से अस्पताल में वेंटीलेटर पर थे। वहीं रविवार देर रात स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी मौत हो गई। 

वाघ-बकरी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक पराग देसाई परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य थे, जो 1892 में नारनदास देसाई द्वारा स्थापित कंपनी के व्यवसायों को सँभालते थे। देसाई के परिवार में उनकी पत्नी विदिशा और बेटी परीशा हैं।

चाय के स्वाद के विशेषज्ञ थे पराग देसाई

पराग और उनके चचेरे भाई पारस 1990 के दशक में पारिवारिक व्यवसाय में शामिल हुए थे। पराग, लॉन्ग आइलैंड यूनिवर्सिटी, यूएसए से एमबीए करने के बाद वाघ बकरी टी ग्रुप के बोर्ड में दो कार्यकारी निदेशकों में से एक थे। वह कंपनी की बिक्री, विपणन और निर्यात को संभालते थे। बताया जाता है कि देसाई को चाय की काफी अच्छी परख थी। वह एक कुशल कारोबारी होने के साथ ही चाय के विशेषज्ञ भी थे।