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बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘हामून’, ‘तेज’ ने यमन-ओमान के तटों को पार किया: भारत के मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी, जानें दोनों के बारे में सब कुछ

‘भारतीय मौसम विज्ञान विभाग’ (IMD) के मुताबिक, भारत से लगे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक साथ दो चक्रवाती तूफानों ‘तेज’ और ‘हामून ‘का साया मंडरा रहा है। आईएमडी ने इन दोनों चक्रवाती तूफानों को गंभीर बताते हुए चेतावनी जारी की है।

गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में तब्दील हुआ ‘हामून’

चक्रवाती तूफान ‘हामून’ बंगाल की उत्तर-पश्चिमी खाड़ी के ऊपर ‘गंभीर’ चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। इसे ये नाम ईरान ने दिया है। आईएमडी की मंगलवार (24 अक्टूबर, 2023 ) सुबह 11 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान हामून बीते 6 घंटों के दौरान 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ गया है।

वहीं मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफान ‘हामून’ को लेकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मिजोरम और मेघालय सहित सात राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक, ‘हामून’ की वजह से केरल में भारी बारिश हुई। इस तूफान के 25 अक्टूबर की शाम तक खेपूपारा और चटगाँव के बीच बांग्लादेश तक को पार करने की संभावना है। इससे ओडिशा के तटीय इलाकों, मिजोरम और मणिपुर में भारी बारिश होने की आशंका है।

इसके साथ ही 25 अक्टूबर को नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा में भी तेज बारिश हो सकती है। हालाँकि, इसे लेकर आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र का कहना था कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर मंगलवार सुबह तक हवा की रफ्तार 80-90 प्रतिघंटे से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने से हामून का ओडिशा पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।

यमन-ओमान के तटों को पार कर गया चक्रवाती तूफान ‘तेज’

उधर दूसरी तरफ हिंद महासागर के दूसरी ओर अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान ‘तेज’ काफी वक्त से ओमान और यमन की सीमा के पास रुका हुआ था है। मौसम विभाग के मुताबिक, गंभीर चक्रवाती तूफान तेज के 24 अक्टूबर की दोपहर के करीब अल गैदाह (यमन) और सलालाह (ओमान) के बीच यमन-ओमान तटों को पार करने का अनुमान जताया गया।

इस दौरान इसकी रफ्तार 115- 125 किलोमीटर प्रति घंटे से 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। मौसम एजेंसी ने कहा कि चक्रवात के 25 अक्टूबर की सुबह यमन में अल ग़ैदा और ओमान में सलालाह के बीच यमन-ओमान तट को पार करने की संभावना है।

चक्रवात तेज के मद्देनजर आईएमडी ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है और समुद्र में गए मछुआरों को तुरंत तट पर लौटने के लिए कहा है। उन्हें 25 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में और 25 अक्टूबर की रात तक समुद्र के पश्चिम-मध्य हिस्से में न जाने की सलाह दी गई है।

शनिवार (21 अक्टूबर, 2023 ) को समाचार एजेंसी PTI ने मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती के हवाले से खबर दी कि चक्रवात तेज का गुजरात पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने कहा, “गुजरात में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा।”

तमिलनाडु के सब-इंस्पेक्टर ने कूड़ेदान में फेंका तिरंगा झंडा, फैंस को अंदर नहीं ले जाने दिया गया राष्ट्रध्वज: वायरल वीडियो के आधार पर आरोप, पाकिस्तान का था मैच

तमिलनाडु के चेन्नई से एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा तिरंगे झंडे को कूड़ेदान में फेंकने और उसका अनादर करने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अब सब-इंस्पेक्टर को ट्रांसफर कर दिया गया है।

सबसे पहले तमिल न्यूज ’24×7′ नाम के एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ने एक वीडियो डाला जिसमें एक पुलिस वाला दो तिरंगों को एक कूड़ेदान से निकाल कर अपनी गाड़ी में डाल कर जाता हुआ दिखता है। हालाँकि, इस अकाउंट ने कुछ देर के बाद यह वीडियो हटा दी।

सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों ने यह वीडियो डाउनलोड कर ली थी और उन्होंने इस मामले को उठाना चालू किया। मामले में सामने आया कि 23 अक्टूबर को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में आयोजित अफगानिस्तान बनाम पाकिस्तान मैच के दौरान ड्यूटी पर लगे इस पुलिसकर्मी ने भारतीय तिरंगा अंदर ले जाने से मना किया था।

उसने तिरंगा कूड़ेदान में भी फेंका लेकिन आसपास मौजूद लोगों के विरोध के पश्चात उन्हें उठा कर लाया और अपनी गाड़ी में रख लिया। कई फैन्स ने यह भी आरोप लगाए कि उन्हें इस मैच के दौरान तिरंगा स्टेडियम के अंदर नहीं ले जाने दिया गया।

पुलिसकर्मी द्वारा तिरंगे के अपमान के इस मामले ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश मंत्री एसजी सूर्या ने इस मामले पर ट्वीट किया और कहा कि एक तो पुलिसकर्मी ने तिरंगा ले जाने नहीं दिया और फिर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस मामले पर कार्रवाई करने को कहा।

तमिलनाडु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इस मामले पर ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि पहले उदय स्टालिन को मैच के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारों से दिक्कत थी और अब ‘तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन’ ने एक कदम आगे बढ़ कर तिरंगे का अपमान किया। अन्नामलाई ने इस पर कार्रवाई ना होने पर कड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी।

क्रिकेट फैन्स और भाजपा नेताओं के इन आरोपों पर डीएमके समर्थक सफाई पेश करने लगे। ट्विटर पर मौजूद एक पेज ‘द्रविड़ियन इनसाइट्स’ ने दावा किया कि BCCI ने स्टेडियम के अंदर डंडे में लगा हुआ तिरंगा ले जाने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। इसी पेज ने भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष विनोद नेता का फोटो डाला जिसमें वह स्टेडियम के अन्दर झंडा पकड़े हुए खड़े हैं।

हालाँकि, लोगों ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेता वहाँ पुलिसकर्मी वाले कांड के बाद पहुँचे थे। इस मामले में पुलिसकर्मी की पहचान कर उस पर कार्रवाई भी की गई है। भाजपा नेता एसजी सूर्या ने बताया कि पुलिसकर्मी की पहचान सब-इंस्पेक्टर नागार्जुन के रूप में हुई है। उन्होंने तिरंगे का अपमान करने वाले का मात्र ट्रांसफर करने और कोई कड़ी कार्रवाई न करने पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर प्रश्न भी उठाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पुलिसकर्मी को कंट्रोल रूम में ट्रांसफर कर दिया गया है। तमिलनाडु पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टेडियम के अन्दर तिरंगा ले जाने पर कोई रोकटोक नहीं थी। फैन्स को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत का झंडा ले जाने की अनुमति दी गई थी।

‘इतने-इतने मुँह हो रखे हैं, रोज आठ-आठ किलो खा रहे हैं’: वर्ल्ड कप में हार रही पाकिस्तान टीम की फिटनेस पर वसीम अकरम ने उठाए सवाल, फैंस कर रहे थू-थू

पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज और टीम के कप्तान रहे वसीम अकरम ने पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन की जम कर आलोचना की है। चेन्नई में विश्व कप टूर्नामेंट के तहत आयोजित मुकाबले में पाकिस्तान की अफगानिस्तान से हार के बाद उन्होंने पाकिस्तानी टीम की फिटनेस पर सवाल उठाए।

इस मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अफगानिस्तान को 283 रन का लक्ष्य दिया जो कि अफगानिस्तान ने मात्र 2 विकेट खो कर 1 ओवर शेष रहते हुए पा लिया। इस मैच के बाद पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन की चारों तरफ आलोचना हो रही है।

मैच के बाद एक प्रोग्राम के दौरान पूर्व गेंदबाज वसीम अकरम ने कहा, “आज का यह मैच बड़ा शर्मनाक था। 280-90 का बड़ा स्कोर होता है। फिटनेस लेवल आप देखें, हम चीखें मार रहे हैं तीन हफ्ते से। अब मैं लड़कों के इंडिविजुअली नाम लूँ, इतने-इतने इनके मुँह हो गए हैं, लगता है रोज कोई आठ-आठ किलो कढ़ाइयाँ खा रहे हैं, निहारियाँ खा रहे हैं।”

गौरतलब है कि पाकिस्तानी टीम की शारीरिक क्षमताओं पर लगातार प्रश्न उठते आए हैं। टीम की फील्डिंग की भी आलोचना हुई है। अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान पाकिस्तानी गेंदबाज अफगान बल्लेबाजों के सामने बेबस नजर आए और ऐसे कोई मौके नहीं निकाल सके जिससे मैच में वो दबदबा बना पाएँ।

वसीम अकरम ने पाकिस्तानी टीम में फिटनेस को लेकर होने वाली लापरवाही को भी इंगित किया। उन्होंने कहा, “कोई टेस्ट होना चाहिए, आप अपने देश के लिए खेल रहे हैं। कोई क्राइटेरिया तो होना चाहिए। इस मामले में मैं मिस्बाह (मिस्बाह-उल-हक) के साथ हूँ, जब वो कोच था तब उसने क्राइटेरिया रखा था।”

इसी प्रोग्राम के दौरान पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मोईन खान ने भी पाकिस्ताई टीम और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट बोर्ड में आने वालों को क्रिकेट का कुछ नहीं पता होता। उन्होंने पाकिस्तान के श्रीलंका में हाइब्रिड मॉडल में एशिया कप खेलने की आलोचना की। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक ने बाबर आजम से कप्तानी छोड़ने की अपील की।

पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी पाकिस्तानी टीम की आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान की हार को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास पाकिस्तान की हार को बताने के लिए उनके पास शब्द नहीं है।

अफगानिस्तान से पाकिस्तान की हार के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूटा। पाकिस्तानियों ने कहा कि इस कप्तान (बाबर आजम) को जेल भेज दो और इसकी जगह जेल में बंद कप्तान (पूर्व क्रिकेटर इमरान खान) को लेकर आओ।

एक ने भारतीय क्रिकेट फैन्स के सामने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी टीम लूजर है।

‘भारत की उन्नति का आधार बनेगा राम मंदिर’: विजयादशमी पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कट्टरपंथ को बताया वैश्विक समस्या, स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भरता का दिया नारा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मंगलवार (24 अक्तूबर, 2023) को विजयादशमी मौके पर महाराष्ट्र के नागपुर में अपना सम्बोधन दिया। इस सम्बोधन में उन्होंने ने दुनिया भर में बढ़ रही भारत की साख पर ख़ुशी जताई। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को उन्होंने भारत के लिए उन्नति का आधार बताया। भारतीयों से आपसी एकता बनाए रखने की अपील के साथ डॉ मोहन भागवत ने देश को विदेशी ताकतों के दम पर तोड़ने वाली ताकतों से भी सावधान रहने की अपील की।

डॉ मोहन भागवत ने अपने सम्बोधन की शुरुआत देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामना देते हुए की। आगे उन्होंने न सिर्फ दुनिया भर में बल्कि अंतरिक्ष जगत में बढ़ती भारत की ताकत की चर्चा भी की। मोहन भगवत ने G-20 सम्मेलन की मेजबानी, एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन और चंद्रयान की सफलता का खासतौर पर जिक्र किया। डॉ भगवत के मुताबिक इन अभूतपूर्व कार्यों से न सिर्फ देशवासियों को अपार ख़ुशी मिली है बल्कि सभी वर्गों का आत्मबल भी बढ़ा है।

अपने सम्बोधन के अगले क्रम में मोहन भागवत ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का जिक्र किया। 22 जनवरी, 2024 को मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समय उन्होंने कहा कि उस मौके पर अयोध्या में लोगों की संख्या सीमित और मर्यादित होनी चाहिए। मोहन भागवत ने अयोध्या आने वाले लोगों से भक्तिभाव को मन में रखने के साथ आने में असमर्थ लोगों से अपने-अपने स्थानों पर भी छोटे-छोटे आयोजन करने की भी अपील की। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा देख पाना उन्होंने सौभाग्य बताते हुए इसे देश के आध्यात्मिक विकास का प्रतीक कहा।

अपने इसी संबोधन में आगे डॉ भागवत ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 350वें राज्याभिषेक दिवस, महावीर स्वामी के 2550 वें परिनिर्वाण दिवस, महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200 वीं, छत्रपति साहू जी महराज की 150वीं व महारानी दुर्गावती की 500वीं जन्मजयंती को याद किया। उन्होंने इन सभी विभूतियों के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए लोगों से इनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।

डॉ मोहन भागवत ने अपने इसी सम्बोधन के अगले चरण में दुनिया के आगे मौजूद चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कट्टरपंथ, आतंकवाद, उन्माद और जलवायु परिवर्तन को वैश्विक समस्या बताया। इसी सम्बोधन में यूक्रेन और गाजापट्टी में चल रहे युद्धों को भी शामिल किया गया और उसके समाधान के मार्ग निकालने पर जोर दिया गया। भारतवासियों से उन्होंने सनातन मूल्यों पर कायम रहने और दुनिया को एक नई राह दिखाने की भी आशा जताई। डॉ भागवत के मुताबिक, चीन जैसे देशों से भारत की सीमाओं की रक्षा हमारी प्रमुखता में होना चाहिए।

सम्बोधन की समाप्ति से पहले डॉ मोहन भागवत ने सभी भारतीयों से स्वदेशी अपनाने और उसके ही प्रचार-प्रसार की अपील की। उन्होंने कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में भारत को अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। आधुनिकता के नाम पर विदेशी चीजों को अपनाने की प्रथा को मोहन भागवत ने जड़ता के समान बताया जो कि लोगों को धीरे-धीरे पतन की तरफ ले जाता है। देश में उन्माद और विभाजन फैला कर अस्थिरता की साजिश रचने वालों से उन्होंने विशेष तौर पर सावधान रहने की अपील की। डॉ भागवत के अनुसार, ऐसे विभाजनकारी तत्व विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करते हैं।

मणिपुर में घटी हिंसक घटनाओं पर भी डॉक्टर मोहन भागवत ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने की साजिश जिसने भी रची हो उसकी जाँच होनी चाहिए। मोहन भागवत के अनुसार मणिपुर में दोनों पक्ष शांति चाहते हैं लेकिन कुछ साजिशकर्ता इस मामले को परोक्ष तौर पर तूल दे रहे हैं। देश के कई हिस्सों में भड़की हिंसा के पीछे उन्होंने टूल किट्स का हाथ बताया और उनसे सावधान रहने की अपील की। सम्बोधन का समापन उन्होंने मंदिर से ले कर श्मशान तक हिन्दू समाज में समरसता की अपील के साथ किया।

‘इजरायली महिलाओं की लाशों से करो बलात्कार, जिस्म ही तो है’: वीडियो में सामने आई हमास आतंकियों की क्रूरता, हर एक बंधक पर ₹8 लाख का वजीफा

गाजा पट्टी से इजरायल पर हमले करने वाला आतंकी संगठन कितना खतरनाक और वहशी है, इसका खुलासा खुद उसके ही आतंकियों ने कर डाला है। पकड़े गए इन आतंकियों ने कबूल किया कि उन्हें इजरायली बच्चों, औरतों और मर्दों पर ऐसे जुल्म ढाने के निर्देश थे कि इंसानियत की रूह काँप उठे।

‘इज़राइल सिक्योरिटीज अथॉरिटी‘ (आईएसए) ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023 ) को एक वीडियो क्लिप जारी किया। इसमें कथित तौर पर हमास आतंकवादियों को 7 अक्टूबर को दक्षिणी इज़राइल में घातक आतंकवादी हमलों में अपनी सक्रिय भागीदारी कबूल करते हुए दिखाया गया है।

इस वीडियो को लेकर ISA ने कहा है कि उसके कम्युनिकेशन सेल को की दी गई एक वीडियो फ़ाइल 7 अक्टूबर के हमलों में शामिल हमास आतंकवादियों के बयानों के साथ पूछताछ के दौरान की है। वीडियो में हमास के आतंकवादी यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि उन्हें नागरिक बंधकों को इजरायल से गाजा ले जाने के लिए वजीफा का वादा किया गया था।

हमास के एक आतंकवादी को वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है,”जो कोई बंधक का अपहरण करेगा और उन्हें गाजा लाएगा, उसे 10,000 अमेरिकी डॉलर का वजीफा और एक अपार्टमेंट मिलेगा।”

उन्हें यह कहते हुए भी सुना जाता है कि उनके आकाओं ने उन्हें खास तौर से बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों का अपहरण करने का निर्देश दिया था। आतंकवादियों में से एक ने कहा, “हमें घरों में लूटपाट करने और जितना संभव हो सके उतने लोगों को बंधक बनाने के लिए अपहरण करने के लिए भी कहा गया था।”

आतंकवादी को वीडियो में आगे कहते हुए सुना जा सकता है, “उसका (पीड़ित का) कुत्ता बाहर आया और मैंने उसे गोली मार दी।” वीडियो में हमास आतंकी आगे कहता है, “उसका शरीर फर्श पर पड़ा था, मैंने उसे भी गोली मार दी।”

उसने बताया कि इस पर कमांडर ने मुझ पर चिल्लाते हुए कहा (कि) मैं एक लाश पर गोलियाँ बर्बाद कर रहा हूँ।” हमास के एक अन्य आतंकवादी ने कहा कि अपने आका की आज्ञा का पालन करने के बाद, उसने दो घरों को जला दिया। उसने कहा, “हम जो करने आए थे उसे पूरा किया और फिर दो घरों को जला दिया।”

हमास के एक आतंकी ने कहा, “हम किबुत्ज में जीप से आए। हमने घरों के कमरों को खोला और बारी-बारी से एक के बाद वहाँ हमले की कार्रवाई को तब-तक अंजाम दिया जब तक की सब खत्म नहीं कर दिया। हमने ग्रेनेड फेंके, गोलियाँ चलाईं। हमारा मकसद एक ही था – सबको खत्म कर देना। हमें साफ निर्देश मिले थी कि घर में कोई भी हो बच्चा, बूढ़ा, जवान, औरत सबको जान से मारना है।”

आतंकी ने आगे बताया, “बटालिन कमांडर ने हमसे कहा था कि उनके सिर कुचलो, काट दो। तुम उनके साथ जो चाहो करो, उनके पैर काट दो। हमास ISIS बन गया है। उनका दिमाग नहीं है। वो इंसान नहीं जानवर बन गए है, क्योंकि कोई इंसान ये नहीं कर सकता है। हमें मारी गई युवा इजरायली महिलाओं की लाशों के साथ सेक्स करने के लिए कहा गया, क्योंकि वो केवल जिस्म भर हैं, इंसान नहीं।”

इस दौरान आईएसए ने अपने बयान में कहा कि 7 अक्टूबर की हत्याओं के मामले में चल रही जाँच के दौरान कई बातें (अपराधों की प्रकृति और तौर-तरीके) बार-बार सामने आई हैं। कथित तौर पर वीडियो क्लिप में आतंकवादियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों को मारने और अपहरण करने के लिए हमास के खुले और साफ निर्देशों को स्वीकार कर इस हमले को अंजाम दिया।

हमास आतंकियों ने इस दौरान दक्षिणी इजरायल में 7 अक्टूबर के नरसंहार के कई खौफनाक और दर्द भरे वाकयों के बारे में भी बताया है। इस बीच, आईएसए ने कहा कि हमास के मिलिट्री विंग के सीनियर कमांडर ने अपने बंदूकधारियों को इज़रायल में लड़ने, मरने या गिरफ्तार होने के लिए भेजते वक्त सुरक्षित रहने के लिए घरों में छुपने के लिए आदेश दिए थे।

इज़रायल सुरक्षा बलों ने नरसंहार में शामिल सभी आतंकवादियों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बयान में कहा गया है, “इज़रायल के सुरक्षा बल 7/10 को नरसंहार में शामिल आतंकवादियों के साथ सभी हिसाब-किताब बराबर करेंगे।”

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर के हमास के इस भयंकर और संगठित हमले में अनुमान के मुताबिक 2500 हमास आतंकवादी जमीन, आसमान और समुद्र के रास्ते इज़रायल में घुसे थे। यहाँ उन्होंने दक्षिणी इज़रायल में नागरिकों पर आतंक की दिल दहला देने वाली वारदातों को अंजाम दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में 1400 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे। ‘द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल’ के मुताबिक, इनमें से कुछ आतंकवादियों ने कम से कम 222 नागरिकों को बंधक बना लिया और उन्हें गाजा ले आए।

खालिस्तानियों को वीजा, आतंकियों को समर्थन, किसान आंदोलन की फंडिंग: कनाडा के राजनयिकों को इसलिए भेजा गया वापस

कनाडा चाहे भारत से उसके डिप्लोमैट्स को वापस भेजने को लेकर कितना ही हो हल्ला मचा ले, सच तो ये है कि भारत सरकार के पास उसके डिप्लोमेट्स के गलत कामों में जुड़े होने के सबूत हैं। कनाडा के डिप्लोमैट्स ने भारत के आतंरिक मामलों में दखलअंदाजी की है, जिसके पुख्ता सुबूत हैं। इसी आधार पर भारत ने उन्हें देश छोड़कर जाने को कहा।

न्यूज़18 ने टॉप सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि कनाडा के राजनयिक चंडीगढ़ और पंजाब के अन्य क्षेत्रों में विभिन्न वाणिज्य दूतावासों में अपनी शक्तियों का बेजा इस्तेमाल कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई राजनयिक वीजा देने के मामले में “बेहद नरम” थे और जानबूझकर ऐसे लोगों को वीजा देते थे, जो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जानते थे और खालिस्तानी आतंकियों का समर्थन करते थे। उन्होंने खालिस्तानी मुद्दे के लिए समर्थन बढ़ाने के लिए उन्हें वीजा दिया।

सूत्रों ने कहा, “कई मौकों पर कनाडाई राजनयिक वीज़ा प्रक्रिया को लेकर बहुत नरम रहे। जाँच के दायरे में आए कुछ लोगों को और जिन्हें एजेंसियों की तरफ से कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था, उन्हें जानबूझकर कनाडा भेजने के लिए वीजा दिया गया था।”

न्यूज़18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा, “उन्होंने लोगों को उनकी पृष्ठभूमि जानने के बावजूद वीजा दिया। ऐसे वीजा पाने वाले कई लोग कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। ये वीज़ा सिर्फ खालिस्तानी उद्देश्य के समर्थन के लिए दिए गए थे ताकि आंदोलन को अधिक से अधिक मजबूती मिल सके।”

कथित तौर पर भारत सरकार के पास इस बात के सबूत हैं कि कैसे कनाडाई सरकार ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि यह उन विषयों में से एक था, जहाँ वे (कनाडाई पक्ष का जिक्र करते हुए) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से शामिल थे और उन्होंने इसे लेकर कनाडा में प्रवासी भारतीयों और भारत में किसानों को भड़काया था।

सूत्रों ने कहा, “प्रवासी भारतीयों को भड़का कर उन्होंने भारत में आंदोलन के लिए फंडिंग का इंतजाम किया। यह बिल्कुल वैध लग रहा था, लेकिन अगर हम एक परिवार के लिए आने वाले नियमित पैसे को देखें तो अचानक वो 10 से 20 गुना बढ़ गया था।”

बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के कार्यालयों के साथ उनकी (कनाडाई राजनयिकों की) बैठकें लगातार होती थीं, जो गलत थीं। कुछ मौकों पर, कुछ लोगों ने कनाडाई अधिकारियों की मंशा के बारे में एजेंसियों को औपचारिक और अनौपचारिक तौर से जानकारी भी दी थी।

सूत्रों ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने काफी सोचने-विचारने, भारतीय खुफिया एजेंसियों के पेश सुबूतों की जाँच और जमीनी कार्रवाई के बाद ही कनाडाई सरकार से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के लिए कहा।

सूत्रों के मुताबिक, कनाडा कुछ मामलों में भारत को प्रत्यर्पण में मदद करने से भी इनकार करता रहा है। इसके अलावा वो भारत को उन लोगों की जाँच करने में मदद नहीं कर रहा था, जिन्होंने कनाडा में जाकर शरण ली थी।

यहाँ ध्यान देने कि बात यह है कि 22 अक्टूबर 2023 को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बताया था कि भारत के पास कनाडा सरकार के भारत के मामलों में लगातार हस्तक्षेप के सबूत हैं। भारतीय मामलों में कनाडाई राजनयिक हस्तक्षेप के बारे में उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मात्रा में जानकारी अभी तक जनता के साथ साझा नहीं की गई है। उनके अनुसार, समय के साथ और अधिक जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जिससे जनता को समझ में आ जाएगा कि भारत को ये कदम क्यों उठाना पड़ा।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ”हमने उसमें से बहुत कुछ सार्वजनिक नहीं किया है। मेरा मानना है कि वक्त के साथ और भी चीजें सामने आएँगी और जो हमने किया, लोग समझेंगे कि हमें उनमें से कई लोगों के साथ उस तरह की असुविधा क्यों हुई।”

‘फ़ौरन लगाओ ताला, वरना रोज भरो ₹10000 का जुर्माना’: मुजफ्फरनगर के 1 दर्जन मदरसों को शिक्षा विभाग का नोटिस, विरोध में उतरा जमीयत और मदरसा बोर्ड

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस भेजी जा रही है। इन नोटिसों में अवैध मदरसों को फ़ौरन बंद करने की हिदायत दी गई है। नोटिस में आदेश का पालन न करने वाले मदरसा संचालकों पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। अनुमान के मुताबिक, जिले में अवैध मदरसों की तादाद लगभग 100 है। शुरुआती चरण में अब तक 12 मदरसों को चिह्नित कर के नोटिस भेजी गई है। ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ ने इस आदेश की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी फंडिंग से चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर जिले में भी बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का डाटा जिले के अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिले में अब तक लगभग 100 ऐसे मदरसे ऐसे चिह्नित हुए है जिनके कागजात सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें से प्रशासन द्वारा 12 मदरसा संचालकों को नोटिस भेज कर कहा गया है कि अगर उन्होंने मदरसा फ़ौरन बंद नहीं किया तो उन पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को मुजफ्फरनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुर्माने वाली नोटिस ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी किए गए हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जिले में गैर-पंजीकृत पाए गए 100 मदरसों के बारे में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, ‘उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेशन बोर्ड’ इस नोटिस का विरोध कर रहा है। मदरसा बोर्ड साल 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार के उस प्रावधान का जिक्र कर रहा है जिसमें मदरसों को स्कूलों की बनाई नियमावली से अलग कर दिया गया था। बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक मदरसा मामलों में शिक्षा विभाग समेत किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मदरसों को आम स्कूल न समझने की बात कहते उन्हें अल्पसंख्यक विभाग के अधीनस्थ बताया।

मदरसों को मिली नोटिस के मामले में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपने विरोध के सुर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। जमीयत के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली। इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आदेश को संविधान द्वारा मिली धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों को नोटिस मिली है उनमे मज़हबी शिक्षा फ्री में दी जाती है और वहाँ क्लास नहीं चलते। मदरसा बोर्ड की तरह जमीयत भी इन मदरसों को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है।

दिमाग अंडकोष में, मा$रचो# बॉलिंग, RSS से खौफ… अफगानिस्तान से हार के बाद पाकिस्तान में टूटी TV, बीवी चली गई होटल और मिल रही गालियाँ

विश्वकप क्रिकेट 2023 में हुए एक बड़े उलटफेर में सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को चेन्नई में अफगानिस्तान की टीम ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हरा दिया। इस जीत के हीरो रहे अफगानी बल्लेबाज इब्राहिम जारदान ने खुद को मिला प्लेयर ऑफ़ द मैच इनाम पाकिस्तान से निकाले गए अपने देश के शरणार्थियों को समर्पित किया है। इस उलटफेर के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के मीम्स शेयर हो रहे हैं। कई नेटिज़ेंस पाकिस्तान टीम का मजाक अलग-अलग तरीके से उड़ा रहे हैं।

X हैंडल @YearOfTheKraken ने 23 अक्टूबर को पाकिस्तानी यूजर्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों और खास कर बाबर आज़म को वहाँ के खेल प्रेमी गाली तक देते दिखाई दे रहे हैं। फिलिस्तीन का झंडा लगाए एक यूजर जेद (@angrybirdd__) ने लिखा कि उन्होंने 40 दर्शकों के आगे अपनी TV तोड़ डाली। इस घटना से नाराज होकर उनकी बीवी अपने बच्चों को लेकर हफ्ते भर के लिए होटल में रहने चली गई है।

वहीं एक अन्य यूजर @ahmeds4ys ने पाकिस्तानी टीम की खराब दशा की वजह खिलाडियों की नेतागीरी में रूचि को बताया है। उन्होंने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरों के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। इन तस्वीरों में पाकिस्तानी खिलाड़ी अलग-अलग मौकों पर खेल के अतिरिक्त अलग-अलग गतिविधियों में शामिल होते दिख रहे हैं। अपनी टीम की करारी हार से आहत अब्दुल्लाह ने अपने स्पिनरों को डूब मरने की नसीहत दी है। उन्होंने लिखा, “हमारे स्पिनर एक विकेट भी नहीं ले पाए। अफगानिस्तान हम तुमको पाला हूँ रे। किसी को हँसाना सवाब (पुण्य) का नाम है और हमने वही किया।”

वहीं वेरिफाइड हैंडल वाली हरीन शाह का दावा है कि उनको विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खाने में नींद की गोलियाँ मिला रहा है। हरीन शाह ने इसकी गहराई से जाँच करवाने की भी माँग की है।

पाकिस्तान की शहर शिनवारी ने अपने देश की हार की वजह खिलाड़ियों के सुरक्षा की चिंता बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी चारों तरफ से RSS के लोगों से घिरे थे, जिससे उनमें डर बैठा था। हालाँकि कुछ ही देर बाद अपने किए गए एक अन्य ट्वीट में उन्होंने U टर्न लिया और अपने देश के सभी खिलाड़ियों को पूरी कौम की तरफ से लानत भेजी।

यामिना ने लिखा कि बाबर आज़म का दिमाग उसके अंडकोष में है और अंडकोष उनके दिमाग में। यामिना के मुताबिक अफगानिस्तान से इतनी बुरी हार की यही वजह है। वहीं नामालूम फराद ने हार के बाद अफगानी खिलाड़ियों को गले लगाने पर बाबर की निंदा की है। उन्होंने लिखा, “ये हमारा कैप्टन है या मोहब्बतें शाहरुख़ खान। भाई तो वहाँ वर्ल्ड कप खेलने गया है या गुरुकुल की हवाओं का रुख बदलने।”

एक अन्य यूजर @gayomarlic ने तो बाबर आज़म को इमरान खान के साथ जेल में डालने की अपील कर डाली है। उन्होंने कहा कि जेल में बाबर इमरान खान से कप्तानी के गुण सीखें। वहीं अहमद सलीम ने लिखा, “आधे टूर्नामेंट में ही कप्तानी छोड़ो बाबर आज़म। लं$ पर चढ़ाओ सबको। अपने लिए ही खेलो। इस मा$रचो* बॉलिंग से घंटा कुछ नहीं होगा।”

अजय यादव ने एक वीडियो शेयर करते हुए तालिबानियों को डांस करते दिखाया है। इस वीडियो के बैकग्राउंड में अफगान जलेबी गाने को मिक्स किया गया है। डांस करने वाले तालिबानियों के हाथों में बंदूकें दिखाई दे रही हैं।

इसके साथ सोशल मीडिया पर हैशटैग #PAKvsAFG लगातार ट्रेंड भी कर रहा है। इस ट्रेंड में कई अन्य लोगों ने भी अफगानिस्तान की जीत के बाद अलग-अलग तरह के मीन्स शेयर किए हैं।

New York Times = तवायफ फिल्म का गाना (हुजूर आते आते बहुत देर कर दी): इस्लामी आतंकियों के साथ फैलाई 500 लोगों के फर्जी मौत की खबर, अब दे रहा ज्ञान

हुजूर आते आते बहुत देर कर दी… तवायफ फिल्म का यह गाना ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर सही बैठ रहा है। पहले पूरी दुनिया में सैकड़ों लोगों की मौत की झूठी खबर फैलाई, अब कई दिनों के बाद ‘पत्रकारिता के आदर्श’ बाँच एक संपादकीय नोट जारी कर दिया।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने सोमवार (23 अक्टूबर,2023) को एक नोट प्रकाशित कर ये स्वीकार किया है कि गाजा के अस्पताल पर हुए हमले पर उनकी शुरुआती कवरेज हमास के दावों पर अधिक केंद्रित थी। उन्होंने माना (हालाँकि शब्द चयन ऐसा है, जिससे लग रहा कि आधे-अधूरे मन से माना) कि इसका कवरेज पत्रकारीय मानकों पर खरा होना चाहिए था।

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान 17 अक्टूबर 2023 को गाजा शहर के अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल पर रॉकेट से हमला हुआ था। इसमें 500 लोगों के मारे जाने और कई के घायल होने का दावा किया गया था। यह दावा हमास के इस्लामी आतंकियों ने सोशल मीडिया पर खूब फैलाया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने आतंकी हमास के इस दावे को बार-बार और अहमियत के साथ छापा था कि अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल में हुआ विस्फोट इजरायली हवाई हमले की वजह से हुआ। इस तरह की रिपोर्ट तब प्रकाशित की जा रही थी, जब इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) बार-बार सबूतों सहित कहती रही कि ये हमला फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकियों के इजरायल की तरफ फेंके गए रॉकेट के मिसफायर होने से हुआ।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक हफ्ते तक 500 लोगों की मौत की फेक न्यूज फैला कर अब माना कि 17 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में संपादकीय गड़बड़ी हुई थी। ऐसा शायद इसलिए करना पड़ा होगा न्यूयॉर्क टाइम्स को क्योंकि अमेरिकी और अन्य अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने कहा है कि सबूत बताते हैं कि रॉकेट फिलिस्तीनी लड़ाकू ठिकानों से आया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 17 अक्टूबर 2023 को हुए विस्फोट की उसकी शुरुआती कवरेज और उसके साथ हेडलाइन्स, न्यूज अलर्ट और सोशल पोस्ट हमास के दावों पर बहुत अधिक निर्भर थे। उन्होंने माना कि इस रिपोर्ट ने पाठकों को इस हमले की जानकारी को लेकर गलत धारणा दी।

फोटो साभार: न्यूयॉर्क टाइम्स

वेबसाइट के संपादकों ने माना कि संघर्ष के दौरान खबर की संवेदनशील प्रकृति और इसे मिले अहम प्रचार को देखते हुए टाइम्स संपादकों को शुरुआती न्यूज देने में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। इसके साथ ही इस बारे में अधिक सतर्क और साफ होना चाहिए था कि किस जानकारी को सत्यापित किया जा सकता है।

वो बल्लेबाज जिसने पाकिस्तान को दिया दोहरा दर्द: पहले गेंदबाजों को धोया, फिर ‘इस्लाम/मुस्लिम ब्रदरहुड’ करने वालों पर रगड़ा नमक

वर्ल्ड कप 2023 में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को हरा कर बड़ा उलटफेर कर दिया। इस जीत में अफगानिस्तान की पूरी टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में एक यूनिट की तरह खेली। इसके उलट पाकिस्तान की टीम बैटिंग और बोलिंग दोनों ही मामले में फिसड्डी साबित हुई।

अफगान टीम के बल्लेबाज इब्राहिम जादरान ने सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को अपने देश को जीत दिलाने में 87 रन बना कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस जीत के बाद प्लेयर ऑफ़ द मैच बने अफगानी ओपनर इब्राहिम जादरान ने अपना इनाम उन अफगानी शरणर्थियों को समर्पित किया है, जिन लोगों को पाकिस्तान ने वापस लौटा दिया था।

पाकिस्तान पर जीत के बाद मैच अफगानिस्तान के बल्लेबाज इब्राहिम जादरान ने ये बातें कहीं। जारदान ने पाकिस्तान पर मिली जीत और खुद को मिले इनाम को अपने व अपने देश के लिए बेहद ख़ुशी का पल बताया। इब्राहिम ने कहा:

“मैं इस मैन ऑफ द मैच पुरस्कार को उन लोगों को समर्पित करना चाहता हूँ, जिन्हें पाकिस्तान से अफगानिस्तान वापस भेजा गया है।”

मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियाँ बजा कर इस बयान का समर्थन किया। जादरान के इस बयान का 10 सेकेंड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसी के साथ इब्राहिम ने गुरबाज के साथ हुई 130 रनों की साझेदारी को सकारात्मकता के साथ रनों का पीछा करने की सोच बताया। इब्राहिम ने बताया कि वो गुरबाज के साथ पहले भी काफी क्रिकेट खेल चुके हैं।

बताते चलें कि चेन्नई में हुए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 283 रनों का लक्ष्य दिया था। अफगानिस्तान ने यह लक्ष्य महज 2 विकेट गँवा कर 49 ओवरों में ही हासिल कर लिया। इससे पहले अफगान टीम इंग्लैंड को भी शिकस्त दे चुकी है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के शरणार्थियों को देश से बाहर करने का फैसला किया था। इस दौरान पाकिस्तान सरकार ने आदेश दिया था कि वो अपने देश में मौजूद बिना वीजा व वैध कागजात वाले अफगान नागरिकों को उनके देश वापस लौटाएगा। पाकिस्तान अब तक लगभग 13 लाख अफगानियों को वापस लौटा चुका है। मानवाधिकार आयोग के लोगों की अपील भी पाकिस्तान सरकार अनसुना कर रही है। पाकिस्तान एक इस्लामी मुल्क है, अफगानिस्तान से आए शरणार्थी भी इस्लाम को मानने वाले, ऐसे में ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ वाली बातें एक ढकोसले के अलावे शायद कुछ नहीं।