Home Blog Page 1451

‘यहाँ ब्लैक में कच्ची कलियाँ मँगाई जा रही, $डी पहचानने के 330 नुस्खे…’: कॉमेडियन ने वेश्यावृत्ति को बताया ‘कूल’, बोलीं – यहाँ फ्रेशर्स चाहिए

सोशल मीडिया के दौर में गंभीरता की आशा ना करें! इस बात को पूरी तरीके से ‘कूल’ कॉमेडियन विदुषी स्वरूप ने चरितार्थ किया है। कॉमेडियन विदुषी स्वरूप ‘वेश्यावृत्ति’ को कूल मानती हैं। वह इसे अन्य किसी भी नौकरी-धंधे से तुलना कर रही हैं।

कॉमेडियन विदुषी स्वरूप की एक क्लिप वायरल हो रही है, इसमें वह वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर मुद्दे का मजाक उड़ाती दिखती हैं। वह वीडियो में कहती हैं, “मुझे ना वेश्यावृत्ति बड़ा कूल प्रोफेशन लगता है। मैं प्रूव करूँगी कैसे! वेश्यावृत्ति में एक्सपीरियंस (अनुभव) को लेकर कोई पक्षपात नहीं है।” इस वीडियो में वो शुरू में कहती हैं – “यहाँ बैठीं सभी वेश्याएँ चीयर करें। $डी पहचानने के 330 नुस्खे।”

आगे विदुषी छोटी बच्चियों के वेश्यावृत्ति में धकेले जाने को लेकर संवेदनहीनता से कहती हैं, “उनको फ्रेशर्स चाहिए, वो ब्लैक में कच्ची कलियाँ मँगवा रहे हैं। वेश्यावृत्ति अकेला ऐसा धंधा है जहाँ सीईओ से ज्यादा इंटर्न कमा रहे हैं।” यहाँ उन्होंने वेश्यावृत्ति में मानव तस्करी के जरिए धकेली जाने वाली बच्चियों को ‘ब्लैक में मँगाई जाने वाली कच्ची कलियाँ’ बता दिया है।

उनका कहना है कि वेश्यावृत्ति करने वालों को शेखों के साथ दुबई ट्रिप मिल रही हैं। हालाँकि, विदुषी का यह ‘कूल’ दावा सच्चाई से कोसों दूर है जहाँ हजारों बच्चियों और महिलाओं को जीविकोपार्जन के लिए देह बेचनी पड़ती है।

एक अन्य वीडियो में विदुषी इंजीनियरों के काम को वेश्यावृत्ति से भी खराब बताया है। विदुषी का कहना है कि वेश्यावृत्ति का धंधा गाली नहीं है लेकिन यदि कभी किसी धंधे को गाली देनी हो तो यह इंजीनियर होने चाहिए।

विदुषी की इस संवेदनहीनता को लेकर अब उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। इन्स्टाग्राम पर गौतम नाम के एक यूजर ने लिखा, “इस देश में महिला कॉमेडियन आखिर फनी क्यों नहीं होती हैं?”

कुछ अन्य यूजर्स ने इंजीनियरिंग पर मजाक बनाने को लेकर अपना गुस्सा जताया और कहा कि विदुषी स्वरुप अपने खुद के धंधे का बचाव कर रही हैं। एक यूजर ने लिखा कि कॉमेडी करना आपका हिडेन टैलेंट है, इसे छुपा कर ही रखें।

वेश्यावृत्ति को कूल बताने को लेकर एक यूजर हिमांशु सिंह ने इन्स्टाग्राम पर लिखा कि आप फिर इसे शुरू कर दें, कॉमेडी आपसे हो नहीं रही हैं।

ट्विटर पर एक यूजर ने विदुषी को मानसिक रूप से विक्षिप्त बता दिया।

सरकारी परीक्षाओं में हिजाब की अनुमति, कुर्ता पर प्रतिबंध: कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का फैसला, स्कूल-कॉलेजों में बुर्के के लिए राज्य भर में हुई थी हिंसा

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद अब हिजाब और बुर्के की एंट्री भी हो गई है। कर्नाटक में मई 2023 में कॉन्ग्रेस की जीत हुई थी और सरकार बदलने के बाद सिद्दारमैया मुख्यमंत्री बने थे। अब जानकारी दी गई है कि ‘कर्नाटक एग्जामिनेशंस अथॉरिटी’ द्वारा विभिन्न भर्तियों के लिए ली जाने वाली परीक्षाओं में हिजाब की अनुमति होगी। कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री MC सुधाकर ने कहा है कि हिजाब या बुर्के पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लगाने से लोगों के व्यक्तिगत अधिकरण का हनन होगा।

कर्नाटक में स्कूल-कॉलेजों में बुर्का पहनने की अनुमति के लिए भाजपा सरकार के समय भी उपद्रव हुआ था और इस्लामी कट्टरपंथियों ने जम कर प्रदर्शन किया था। वो यूनिफॉर्म को धता बता कर बुर्के में कक्षाओं में बैठने की अनुमति चाहते थे। अब KEA ने कहा है कि हिजाब वाली छात्राएँ परीक्षा केंद्र पर तय समय से 1 घंटे पहले पहुँच जाएँ, ताकि उनकी अच्छी तरह जाँच की जा सके। 2021 में उडुपी से शुरू हुए हिजाब विवाद के बाद भाजपा को मुस्लिम महिलाओं की विरोधी पार्टी साबित करने की कोशिश हुई थी।

बता दें कि विभिन्न सरकारी संस्थाओं में कर्नाटक में 670 वैकेंसी आई है और उनमें भर्ती के लिए परीक्षाएँ होने वाली हैं। 28-29 अक्टूबर, 2023 को इसके लिए परीक्षाएँ आयोजित की जाएँगी। वहीं पुरुष अभ्यर्थियों को हाफ स्लीव वाले शर्ट और प्लेन ट्राउजर पहनने के लिए कहा गया है। उनमें पॉकेट नहीं होने चाहिए। फुल स्लीव शर्ट, कुर्ता-पायजामा और जींस पर प्रतिबन्ध है। हालाँकि, हिजाबी छात्राओं के लिए भी कुछ दिशानिर्देश तय किए गए हैं।

हिजाब पहन कर आने वाली महिला अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया है कि वो जींस या फुल स्लीव वाले शर्ट पहनने से बचें। इसके बाद आलोचना भी हो रही है कि अगर कुर्ता-पायजामा पर प्रतिबंध है तो फिर हिजाब की अनुमति क्यों दी गई है? जिस तरह बुर्के के लिए राज्य में तनाव का माहौल बनाया गया था और चुनाव से पहले मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए मंच तैयार किया गया था, उसके बाद इस तरह के निर्णय पर सवाल उठना लाजिमी है।

हाथ-पाँव तोड़ कर बिठा दो… आजम खान को सताया एनकाउंटर का डर, बीच में बैठने से भी किया इनकार: अलग-अलग जेल में शिफ्ट किए गए बाप-बेटे

दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में  समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फातिमा को कोर्ट ने सात-सात साल की सजा सुनाई है। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर तीनों को सीधे रामपुर जेल भेजा गया था। जहाँ से रविवार (22 अक्टूबर, 2023)  को आजम खान और उनके बेटे को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया गया। उनकी शिफ्टिंग के आदेश प्रशासन को शनिवार को ही मिल गए थे।

वहीं सपा नेता आजम खान को जेल जाते वक्त एनकाउंटर का डर सता रहा था। उन्होंने कहा, “हमारा एनकाउंटर भी हो सकता है।”

हरदोई शिफ्ट किए गए अब्दुल्ला आज़म

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल्ला आजम को आज सुबह भारी सुरक्षा के बीच जिला कारागार हरदोई में शिफ्ट किया गया है। इस बीच जब अब्दुल्ला से पत्रकारों ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं इस मामले में जेलर संजय सिंह ने बताया कि अब्दुल्ला को रामपुर से सुबह हरदोई जेल लाया गया है। दरअसल, आजम खान की ससुराल हरदोई के बिलग्राम में है इसलिए उनके बेटे को उनके ननिहाल वाले जनपद की जिला कारागार में शिफ्ट किया गया है। हरदोई में हाई सिक्योरिटी बैरक नहीं है इसलिए उन्हें आम बंदियों की तरह सामान्य बैरक में रखा गया है। 

सीतापुर जेल दोबारा पहुँचे आजम खान को सता रहा एनकाउंटर का डर 

सपा नेता आजम खान को रविवार की सुबह सीतापुर की जेल ले जाया गया। आजम खान 17 माह बाद एक बार फिर से सीतापुर जेल पहुँचे हैं। बता दें इसी जेल में वह 27 माह तक बंद रहने के बाद 20 मई 2022 को रिहा हुए थे और एक बार फिर से उन्हें यहा लाया गया है।

वहीं सुबह जब उन्हें रामपुर जेल से सीतापुर के लिए शिफ्ट किया जा रहा था तब आजम खान ने एनकाउंटर की आशंका जताते हुए कहा था कि कुछ भी हो सकता है। यहाँ तक कि उन्होंने पुलिस की गाड़ी में बीच में बैठने से भी मना कर दिया। इससे कुछ देर के लिए पुलिस अधिकारी भी सकते में आ गए। उन्होंने कहा कि हाथ पैर तोड़कर बैठा दो, ऐसे नहीं बैठूँगा। हालाँकि, बाद में वह किनारे ही बैठकर गए। 

रामपुर जेल में ही रहेंगी तंजीन फातिमा 

रामपुर जेल में अपने पति और बेटे के साथ रह रहीं डा. तंजीन फातिमा अब जेल में अकेले ही रहेंगी। शासन ने उनको रामपुर की जेल में ही रखने का फैसला लिया है।

क्या है पूरा मामला 

गौरतलब है कि दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में एमपीएलए कोर्ट ने बुधवार को सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तजीन फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने तीनों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट ने उनको जेल भेजने के आदेश कर दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने उनको रामपुर जेल में भेज दिया था। 

दरअसल, बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में सपा नेता आजम खान के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मामला दर्ज कराया था। जिसमें सपा नेता आजम खान और उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा को भी आरोपित बनाया गया था। 

चार्जशिट के अनुसार, रामपुर नगर पालिका द्वारा जारी एक जन्म प्रमाणपत्र में, अब्दुल्ला आजम की जन्म तिथि एक जनवरी, 1993 बताई गई थी तो दूसरे प्रमाणपत्र के अनुसार उनका जन्म 30 सितंबर, 1990 को लखनऊ में हुआ था। इस मामले में आजम खान और उनकी पत्नी पर आरोप था कि अब्दुल्ला ने अपने दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाए हैं, जिनमें एक रामपुर नगरपालिका परिषद से, जबकि दूसरा प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से बनवाया और इनका समय-समय पर गलत इस्तेमाल किया। 

सियाचिन में पहले ‘अग्निवीर’ का बलिदान, अक्षय लक्ष्मण को पूरे सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई: सेना प्रमुख ने भी जताया दुःख, राजनीति कर अफवाह फैला रहा था विपक्ष

सियाचिन में देश का पहला ‘अग्निवीर’ बलिदान हुआ है। गवाते अक्षय लक्ष्मण ने विश्व की सबसे ऊँची युद्धभूमि सियाचिन में अपना बलिदान दिया है। भारतीय सेना ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को विदाई दी है। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट उपेन्द्र द्विवेदी और सभी ने ‘अग्निवीर’ अक्षय लक्ष्मण के इस बलिदान और पराक्रम को सलाम किया है। उनकी यूनिट ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने गवाते को सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी है।

गौरतलब है कि सेना में सेवाएँ देने के लिए ‘अग्निपथ’ योजना को जून 2022 में लाया गया था। गवाते अक्षय लक्ष्मण इसी के तहत सेना का हिस्सा बने थे। उनकी सियाचिन जैसे कठिन युद्धक्षेत्र में तैनाती थी। उनकी एक ऑपरेशन के दौरान जान चली गई।

उनकी यूनिट ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के सभी जवान और अधिकारी कठिन चोटियों में अपनी सेवा के दौरान अग्निवीर गवाते अक्षय लक्ष्मण के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं और उनके परिवार से संवेदना व्यक्त करते हैं।”

सेना के उत्तरी कमान के ट्विटर हैंडल ने लिखा कि वह पीड़ा की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं। गवाते के शव विदाई देते समय सैन्य सलामी देने की तस्वीरें भी ट्विटर पर साझा की हैं। गौरतलब है कि हाल ही में एक अन्य ‘अग्निवीर’ सैनिक की दुखद मृत्यु पर काफी बवाल हुआ था। ‘अग्निवीर’ अमृतपाल सिंह की मौत पर विरोधी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि ‘अग्निवीरों’ को सैन्य सम्मान नहीं दिया जाएगा।

सेना ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि सेवा के दौरान बलिदान देने वाले सभी सैनिकों को सम्मान दिया जाता है चाहे वह अग्निवीर हो या अन्य सैनिक। अमृतपाल सिंह के मामले में यह पाया गया था कि उनकी मृत्यु खुद से चलाई गई गोली के कारण हुई।

अमृतपाल सिंह जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में अपनी यूनिट 10-जम्मू और कश्मीर राइफल्स के साथ तैनात थे। 10 अक्टूबर, 2023 को सिर में गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोप लगाया गया था कि उनके शव को एक निजी एम्बुलेंस में उनके घर ले जाया गया था। भारतीय सेना ने उनकी मृत्यु पर दुःख जताते हुए परिवार और सेना के लिए भी इसे क्षति करार दिया था।

मदरसों की विदेशी फंडिंग में गड़बड़ी पर वक्र हुई योगी सरकार की दृष्टि: एक-एक पाई का हिसाब लगाने के लिए बनाई गई SIT, धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों में जा रहे पैसे?

उत्तर प्रदेश में विदेशों से फंड लेकर अवैध गतिविधियों का संचालन करने और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले मदरसों पर योगी सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इन मदरसों को मिलने वाली फंडिंग की जाँच के लिए एक विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया है।

यह SIT इस बात की जाँच करेगी कि जिन मदरसों को विदेशों से फंड मिल रहा है वह उसका उपयोग कैसे कर रहे हैं और कितने अवैध मदरसे अब भी चल रहे हैं। प्रदेश में अवैध मदरसों की पहचान के लिए बीते दिनों एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे से सामने आया था कि प्रदेश के भीतर 16,513 मान्यता प्राप्त जबकि 8500 अवैध मदरसे चल रहे हैं। अवैध मदरसों के ऊपर विदेशों से फंड लेने का आरोप लगा था। इस फंडिंग की जाँच अब एडीजी मोहित अग्रवाल वाली SIT करेगी।

विदेशों से फंड लेने में उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में बने मदरसों का नाम सबसे आगे है। यह मदरसे नेपाल की सीमा पर बने हुए हैं। इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ी है। इन मदरसों के विरुद्ध पहले भी शिकायतें मिल चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत – नेपाल सीमा पर 1500 से अधिक अवैध मदरसे पाए गए थे जिनके विदेशी फंडिंग लेने की आशंका जताई गई थी। यह मदरसे कैसे फंडिंग ले रहे थे उर इनका संचालन कैसे हो रह था इसकी जांच की भी कवायद की गई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जैसे जिलों की सीमा नेपाल से लगती है। यह सीमा पूरी तौर से खुली हुई है और केवल पिलर के माध्यम से अलग की गई है। कई रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इस इलाके में नो मेंस लैंड पर भी मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है जो कि चिंता का विषय है। इसी इलाके में मदरसे भी बड़ी संख्या में खोले गए हैं। नवगठित टीम इनकी ही जाँच करेगी।

नवगठित SIT 4000 से अधिक मदरसों की जाँच करेगी। विदेशी फंडिंग को जाँच के फोकस में रखा जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं इस पैसे का उपयोग धर्म-परिवर्तन तथा देश विरोधी गतिविधियों में नहीं हो रहा।

कुरान को पाँव तले रौंदा, चूम लिया इजरायली झंडा: हमास के विरोध में स्वीडन में प्रदर्शन, वीडियो वायरल

इजरायल और हमास के बीच दो सप्ताह से चल रहे युद्ध के बीच एक्टिविस्ट सलवान मोमिका (Salwan Momika) ने कुरान पर पैर रखकर और इजरायली झंडा लहराकर यहूदी राष्ट्र के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।

यह घटना शनिवार (21 अक्टूबर, 2023 ) को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई। स्वीडन में रहने वाले इराकी शरणार्थी सलवान मोमिका को भी इजरायली झंडे को चूमते और कुरान की एक प्रति को अपने पैर से रौंदते देखा गया।

घटना का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। 

एक दिन पहले ही शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को सलवान मोमिका ने घोषणा की थी, “कल मैं इजरायल का झंडा उठाऊँगा, इजरायल के साथ अपनी एकजुटता की घोषणा करूँगा और स्टॉकहोम में कुरान और फिलिस्तीनी झंडे को जलाऊँगा।”

गौरतलब है कि इस साल 28 जून को स्वीडिश पुलिस ने इराकी शरणार्थी को स्टॉकहोम की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर एक प्रदर्शन में कुरान जलाने की अनुमति दी थी। यह घटनाक्रम ईद-अल-अधा से पहले सामने आया था जब स्वीडिश अदालत ने कुरान जलाने वाले प्रदर्शनों पर पुलिस के प्रतिबंध को हटा दिया था। 

परिणामस्वरूप, यमन में हूती विद्रोहियों ने स्वीडन से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित टीवी चैनल अल मसीरा ने व्यापार मंत्री के हवाले से कहा, “यमन पहला इस्लामिक देश है जिसने मुस्लिमों के पाक किताब के अपमान के बाद स्वीडिश सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।”

उन्होंने अन्य इस्लामिक देशों से भी इस स्कैंडिनेवियाई देश से आयात पर प्रतिबंध लगाने की अपील की। हालाँकि, हूती व्यापार मंत्री ने कहा कि स्वीडन से आयात सीमित था और प्रतिबंध का एक प्रतीकात्मक मूल्य ही था। उन्होंने यह भी कहा कि कुरान जलाने के विरोध में यह सबसे छोटी चीज थी जो वे कर सकते थे।

इससे पहले जनवरी 2023 में डेनिश राजनेता रासमस पालुदान (Rasmus Paludan) ने भी देश की राजधानी में तुर्की दूतावास के बगल में कुरान की एक प्रति जला दी थी, जिससे तुर्की को अपनी नाटो सदस्यता के बारे में स्वीडन के साथ चर्चा रोकनी पड़ी थी।

BJP ने वापस लिया विधायक T राजा सिंह का निलंबन: लगातार तीसरी बार हैदराबाद से मैदान में उतारा, पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल

भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना की गोशमहल विधनसभा सीट से अपने विधायक टी राजा सिंह का निलंबन वापस ले लिया है। पार्टी की ‘केंद्रीय अनुशासन कमेटी’ के सचिव ओम पाठक ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर के इस आशय की जानकारी सार्वजनिक की। पत्र में राजा सिंह द्वारा खुद को जारी की गई ‘कारण बताओ नोटिस’ पर दिया गया जवाब संतोषजनक माना गया है। विधायक राजा सिंह ने भी इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं का आभार प्रकट किया है।

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने अपने निलंबन की समाप्ति का पत्र 22 अक्टूबर को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। इस पत्र के साथ MLA राजा सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, संगठन सचिव बी एल संतोष, तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी, ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ के लक्ष्मण, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार और पी मुरलीधर राव का धन्यवाद किया है।

इसी के साथ राजा सिंह ने भाजपा के सभी सदस्यों सहित अपने विधानसभा क्षेत्र गोशामहल की जनता का भी आभार प्रकट किया है। उन्होंने कैप्शन के तौर पर ‘संगठन सर्वोपरि और जय भाजपा, विजय भाजपा’ लिखा है। ऑपइंडिया ने राजा सिंह के नंबर पर कॉल की तो फोन उनके सहयोगी अर्जुन ने उठाया। अर्जुन ने बताया कि निलंबन हटाए जाने की ख़ुशी में राजा सिंह के कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े हैं और मिठाइयाँ बाँटी हैं।

गोशामहल से ही लड़ेंगे चुनाव

ऑपइंडिया से बात करते हुए MLA राजा सिंह के सहयोगी अर्जुन ने हमें बताया कि भाजपा ने गोशमहल से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस बार भी राजा सिंह को गोशमहल से टिकट दिया गया है। राजा सिंह इस सीट से 2 बार लगातार विधायक हैं और वो तीसरी बार इसी सीट से अपनी दावेदारी ठोंकेंगे।

अगस्त में हुआ था निलंबन

बताते चलें कि अगस्त 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना प्रदेश से अपने एकलौते विधायक को निलंबित कर दिया था। मुस्लिम संगठनों ने तब उन पर अपने पैंगबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इस मामले में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच भाजपा विधायक की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालाँकि ऑपइंडिया से बातचीत में टी राजा सिंह के धर्म के मामले में कोई भी समझौता न करने का एलान किया था।

मस्जिद जाता था, फिर नमाज पढ़ने लगा पवन तिवारी का इकलौता बेटा, अब बन गया ‘नासिर हुसैन’: परिवार बोला – 40 बीघा जमीन पर मुस्लिमों की नज़र

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अधेड़ उम्र के एक हिन्दू व्यक्ति के धर्मांतरण का मामला सामने आया है। धर्मांतरित व्यक्ति का नाम रामबाबू तिवारी है जो मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है। रामबाबू का नाम अब नासिर हुसैन रख दिया गया है। पीड़ित परिवार ने इस हरकत को को गाँव के ही छोटा मास्टर, रज्जू खान, अफ़ज़ल और महबूब द्वारा अपनी प्रॉपर्टी पर कब्ज़े की रची गई साजिश बताया है। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार (19 अक्टूबर, 2023) को FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बांदा जिले के थानाक्षेत्र गिरवाँ की है। यहाँ के गाँव जखनी में पवन तिवारी अपने परिवार के साथ रहते हैं। सांप्रदायिक दृष्टि से गाँव की आबादी मिश्रित है। पवन तिवारी ने आरोप लगाया है कि मानसिक तौर पर कमजोर उनका एकलौता बेटा रामबाबू अक्सर गाँव में बनी मस्जिद में जाया करता था। कुछ दिनों बाद रामबाबू के हावभाव में बदलाव आने लगा। थोड़े समय बाद उसने मस्जिद में जा कर नमाज़ भी पढ़ना शुरू कर दिया।

इस बीच पवन तिवारी के घर वालों को जानकारी मिली कि रामबाबू ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी मर्जी से धर्म-परिवर्तन की अर्जी भी लगाई है। पड़ताल करने पर पता चला कि रामबाबू तिवारी ने अपना नया नाम नासिर हुसैन रख लिया है। इस मामले की जानकारी मिलते ही पीड़ित परिवार ने पुलिस में अपने बेटे के धर्मांतरण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने गाँव के ही छोटा मास्टर, रज्जू खान, अफ़ज़ल और महबूब को नामजद किया है। एहतियातन गाँव में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

पवन तिवारी के मुताबिक, उनकी सड़क के किनारे करोड़ों की कीमत की लगभग 40 बीघा जमीन है। इस जमीन पर गाँव के मुस्लिम लोगों की नजर है। इसी जमीन को हड़पने के लिए आरोपितों ने उनके एकलौते बेटे रामबाबू को निशाने पर लिया। पवन को आशंका है कि उनके बेटे का निकाह किसी मुस्लिम लड़की से करवा कर जमीन उसके नाम करवाने की साजिश रची जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी चंद्रमोहन बेदी ने भी पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि नासिर बना रामबाबू पहले जुए में 50 लाख रुपया हार चुका है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह जमातियों के साथ 40 दिनों की यात्रा भी कर आया है। बकौल चंद्रमोहन रामबाबू को पुलिस ने खोज निकला है और फिलहाल वह सुरक्षा के मद्देनजर थाने में है। उनका दावा है कि रामबाबू अभी तक खुद को मुस्लिम ही बता रहा है।

जिहाद का बचाव, इस्लामी झंडे पर सफाई और उपद्रवी भीड़ से कोई दिक्कत नहीं: हमास समर्थकों को मिला लंदन पुलिस का साथ, लेस्टर में हिन्दुओं के साथ हुई थी क्रूरता

इंग्लैंड की राजधानी लंदन की पुलिस कट्टरपंथी इस्लामी जिहादियों पर कार्रवाई करने की बजाय लोगों को जिहाद का मतलब समझाने में जुटी हुई है। वह अलग अलग तरह के स्पष्टीकरण देकर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के समर्थकों का बचाव कर रही है।

ताजा मामला एक आतंक समर्थक संगठन ‘हिज्ब-उत-तहरीर’ से जुड़ा हुआ है जिसके सदस्यों ने लंदन के अंदर प्रदर्शन करके इजरायल के खलाफ ‘जिहाद’ के नारे लगाए हैं। इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल है। वीडियो में इस्लामी भीड़ चिल्लाती है, “फिलीस्तीन के बंदी कैम्प से लोगों को आजाद कराने का रास्ता क्या है?” इसके बाद लोग इसका जवाब देते हैं, “जिहाद! जिहाद! जिहाद!”

लंदन के भीतर इस्लामी आतंकी संगठन हमास से हमदर्दी दिखा रहे कट्टरपंथियों पर कार्रवाई करने की बजाय लंदन की पुलिस इस वीडियो पर सफाई पेश करने लगी। लंदन की पुलिस ने वायरल वीडियो के नीचे रिप्लाई करके इसके बचाव की कोशिश की।

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने लिखा, “जिहाद के कई अर्थ हैं लेकिन आम जनता इसे सामान्यतः आतंक के साथ जोड़ती है। हमारे पास यहाँ ऑपरेशन रूम में काउन्टर टेरिरिज्म अफसर हैं जिन्हें इस इलाके की जानकारी है। उन्होंने हिज्ब उर तहरीर के इस वीडियो का आकलन किया है और इस वीडियो से कोई समस्या नहीं पैदा होती है।”

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने इस मामले का पटाक्षेप करने के लिए कहा कि ऐसे कृत्यों से आम जनता में विभाजनकारी प्रभाव पड़ेगा इसलिए प्रदर्शन में शामिल व्यक्ति से पुलिस अधिकारी बातचीत करेंगे। गौरतलब है कि जिस जिहाद शब्द का लंदन पुलिस बचाव कर रही है वह अरबी शब्द है। अरबी भाषा में इसका अर्थ ‘लड़ाई’ या ‘संघर्ष’ होता है जिसके जरिए इस्लाम का प्रसार किया जाए।

मेट्रोपोलिटन पुलिस जिहाद पर स्पष्टीकरण देने के बाद इस्लामिक झंडों पर भी ज्ञान देने लगी। लंदन पुलिस ने एक जिहादी द्वारा हमास के समर्थन में लहराए जा रहे इस्लामी झंडे पर भी ट्वीट किया – “इस फोटो में दिख रहे झंडे ISIS के नहीं हैं। ये ‘शहादा’ हैं जो कि इस्लाम में आस्था जाहिर करने का प्रतीक हैं। ISIS के झंडे दिखने में ऐसे ही होते हैं लेकिन दोनों समान नहीं हैं। हमारे पास इस मामले के विशेषज्ञ अफसर हैं जिनके पास झंडों के विषय में जानकारी है।”

यह बात अलग है कि लोगों ने चिंता ISIS जैसे झंडे दिखने की नहीं बल्कि हमास के लिए उभरते समर्थन को लेकर जताई थी। हालाँकि, मेट्रोपोलिटन पुलिस के इस्लामिक कट्टरपंथियों के बचाव को लोगों ने आड़े हाथों लिया।

उन्होंने मेट्रोपोलिटन पुलिस के ट्वीट के नीचे एक ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ कर कहा कि यह झंडा ISIS का नहीं है लेकिन खिलाफत और अल कायदा द्वारा उपयोग किया जाता रहा है। झंडा लहराने वाला “अल्लाह यहूदियों का नाश करे”, “इस्लामिक स्टेट” जैसे नारे अरबी में लगाते हुए सुना जा सकता है।

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस का इस्लामिक कट्टरपंथ के बचाव का यह कोई पहला मामला नहीं है। वह लंदन के भीतर हमास जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों के समर्थन में होने वाली रैलियों को रोकने में असफल रहे हैं। लंदन पुलिस के अलावा इंग्लैंड की ही लेस्टर पुलिस भी इस्लामी कट्टरपंथियों का साथ देती आई है। हाल ही में लेस्टर पुलिस के एक अधिकारी मोहम्मद अहद ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की कथा में जाने वालों को रोका था। उसने गणेश पूजा में शामिल होने वाले वृद्ध पुजारियों से भी बदतमीजी की थी।

लेस्टर पुलिस के अधिकारी ने इससे पहले 2022 में यह फर्जी दावा किया था कि हिन्दुओं ने पाकिस्तान और मुस्लिमों के विरुद्ध नारे लगाए। इसके पश्चात इस इलाके में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं को काफी परेशान किया था।

मस्जिद के अंदर गोला-बारूद, तहखाने में क्रेन भी, बच्चों के खेलने की जगह में बम-बोरियाँ: इजरायल ने उड़ा डाली अल अंसार मस्जिद

इजरायली सुरक्षा बलों ने फिलीस्तीन के वेस्ट बैंक इलाके में स्थित अल अंसार मस्जिद को एक हवाई हमले में उड़ा दिया है। इजरायली सुरक्षा बलों ने बताया है कि इस मस्जिद के नीचे बने तहखाने में इस्लामी आतंकी संगठन हमास और फिलीस्तीनी इस्लामी जिहाद के आतंकी इजरायल पर बड़े हमले की योजना बना रहे थे।

इजरायली सुरक्षा बलों ने हमले को लेकर जारी किए गए बयान में इसे इस्लामी आतंकी सगठन हमास का कमांड सेंटर बताया है। उनके अनुसार बताया गया है कि यह मस्जिद इजरायल पर हमले करने के लिए जुलाई 2023 के बाद से बेस की तरह उपयोग की जा रही थी।

इजरायली सुरक्षा बलों ने इस संबंध में कई तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं। इन तस्वीरों में से कुछ में मस्जिद के भीतर रखा गया गोला-बारूद जबकि एक तस्वीर में तहखाने का रास्ता दिखता है।

बच्चों के खेलने के मैदान के पास गोला बारूद छुपाया गया था (चित्र साभार: @IAFSite/X)

इजरायली सुरक्षा बलों ने तस्वीरों में दिखाया है कि मस्जिद के अंदर बच्चों के खेलने की जगह की आड़ में दो मंजिलों पर गोला-बारूद-बोरियाँ रखे थे। तहखाने से गोला-बारूद ऊपर लाने के लिए छोटी क्रेन भी मस्जिद के अंदर लगाई गई थी। फिलीस्तीनी एजेंसियों ने इस हमले में एक व्यक्ति के मौत की पुष्टि की है।

आतंकी तहखाने में जाने का रास्ता (चित्र साभार: @IAFSite/X)
आतंकियों द्वारा बनाया गया तहखाने का रास्ता और क्रेन (चित्र साभार: @IAFSite/X)

गौरतलब है कि यह मस्जिद उस इलाके में मौजूद है, जो इजरायल और हमास के बीच लड़ाई चालू होने के बाद भी तुलनात्मक रूप से शांत रहा है। इजरायल ने अपने सभी हमलों का मुख्य निशाना अभी गाजा पट्टी को बनाया है, जबकि यह हमला वेस्ट बैंक में हुआ है।

इजरायली सुरक्षा बलों ने कहा है कि उन्होंने इस हमले में ऐसे आतंकियों को मार गिराया है, जो कि उसके निर्दोष नागरिकों पर हमले में शामिल थे। यह हमला एक ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर किया गया। हालाँकि, इजरायल ने मारे जाने वाले आतंकियों की सँख्या या उनके नाम आदि की जानकारी नहीं दी है।

इजरायल के इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिसमें मस्जिद के आसपास मलबा बिखरा दिखता है और लोग एम्बुलेंस की तरफ भागते हैं।

7 अक्टूबर को इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले में अब तक 1,400 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में अब तक 4,300 से अधिक फिलीस्तीनी आतंकी मारे जा चुके हैं। दोनों तरफ घायलों की संख्या भी हजारों में है।

इजरायल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में अपने हमलों में और तेजी लाएगा और इसके लिए उसने गाजा के नागरिकों को दक्षिण दिशा में जाने को कहा है। इजरायल के जल्द ही गाजा के भीतर सेना भेजने की बात भी कही जा रही है।