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‘राजधानी में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह पराली जलाना’: पंजाब के मुख्य सचिव को NGT का नोटिस, इस साल 63% बढ़ गए मामले

पंजाब में पराली जलाने के कारण दिल्ली-एनसीआर में वायु की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। इसको देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने स्वत: संज्ञान लिया है और पंजाब के मुख्य सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया है।

एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो पंजाब में खेतों में आग लगाने की घटनाओं में वृद्धि को उजागर करने वाली एक मीडिया रिपोर्ट के बाद स्वत: संज्ञान से शुरू हुई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक जाड़े के मौसम के शुरुआत में पंजाब में पराली जलाना है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट पर भी गौर किया। इसमें पंजाब के उन इलाकों के तीन साल के आँकड़ों का तुलनात्मक विवरण दिया गया था, जो पराली जलाने के हॉटस्पॉट जिले के रूप में जाने जाते हैं। दरअसल, रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

पीठ ने शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को कहा, “राज्य में पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए विभिन्न उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है। जिस अवधि में पराली जलाई जाती है वह मुख्य रूप से 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच होती है। इसलिए, इस अवधि के दौरान संबंधित अधिकारियों को उल्लंघनकर्ताओं की पहचान करने और जुर्माना लगाने सहित उपचारात्मक उपाय करने में सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।”

एनजीटी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की एक रिपोर्ट भी रिकॉर्ड में ली है। इसमें साल 2022 में पराली जलाने की घटनाओं की वास्तविक गणना और चालू वर्ष में उन्हें कम करने के लक्ष्य बताए गए थे। ट्रिब्यूनल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को क्षेत्रानुसार फसल अवशेष प्रबंधन योजना तैयार करने और रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

ट्रिब्यूनल ने कहा, “हम मुख्य सचिव और सदस्य सचिव, सीपीसीबी को नोटिस जारी करना भी उचित समझते हैं।” ट्रिब्यूनल ने पीपीसीबी और सीएक्यूएम से कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी है। इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 नवंबर 2023 को सूचीबद्ध किया गया है।

अमेरिका में सिख किशोर की पगड़ी नोची, चेहरे और सिर पर जड़े कई घूसे: अश्वेत को न्यूयॉर्क पुलिस ने किया गिरफ्तार, डकैती के लिए भी जा चुका है जेल

अमेरिका में एक 26 वर्षीय व्यक्ति को हेट क्राइम के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उक्त किशोर पगड़ी पहन कर बस में यात्रा कर रहा था, जिसे देख कर क्रिस्टोफर फिलिपॉक्स नामक शख्स भड़क गया। ये घटना न्यूयॉर्क के क्वींस स्थित लाइब्रेरी एवेन्यू और 118वीं गली के पास हुई। MTA बस में यात्रा कर रहे 19 वर्षीय किशोर के पास जाकर अश्वेत समाज के आरोपित ने कहा, “हम अपने देश में ये सब नहीं पहनते हैं।” उसने उसकी पगड़ी की तरफ इशारा करते हुए हुए ये बातें कही।

उसने सबसे पहले किशोर से उसका मास्क उतारने के लिए कहा, फिर उसके चेहरे पर जोर से मुक्का मारा। उसकी पीठ और सिर को निशाना बना कर भी उसने मुक्के मारे। इसके बाद उसने उसकी पगड़ी निकालने की कोशिश की। इस दौरान पीड़ित के कई जगह जख्म हो गया और खून बहने लगा। पीड़ित दर्द से कराहने लगा। क्रिस्टोफर फिलिपॉक्स को जुलाई 2021 में पैरोल पर रिहा किया गया था। वो 2 साल जेल में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुआ था।

उसे मैनहटन में डकैती का दोषी पाया गया था। हालाँकि, वो डकैती में सफल नहीं हो पाया था और पकड़ा गया था। फिर उसे स्टेट प्रिजन में भेज दिया गया था। उसे सरकारी अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने के लिए गिरफ्तार किया गया था। वहीं ताज़ा घटना को लेकर सिख पीड़ित ने कहा कि वो गुस्से में है और अंदर तक हिल गया है। उसने कहा कि किसी को भी इस आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए कि वो कैसा दिखता है।

स्थानीय सिख कार्यकर्ता जपनीत सिंह ने कहा कि फ़िलहाल पीड़ित सदमे में है और उसका परिवार उसे लेकर काफी भयभीत है। MTA के एक्टिंग चीफ कस्टमर ऑफिसर ने कहा कि उन्होंने उस वीडियो को देखा है और वो आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ये ठीक नहीं लगा और इसने उन्हें हिला दिया है। उन्होंने न्यूयॉर्क में सबका स्वागत होने की बात कहते हुए कहा कि ये पीड़ित भी 1 साल से शहर में था। NYPD (पुलिस विभाग) ने आरोपित का वीडियो भी जारी किया था जिसमें वो पीले रंग की जैकेट में दिख रहा है। गिरफ़्तारी के बाद ‘हेट क्राइम टास्क फ़ोर्स’ उससे पूछताछ कर रही है।

‘ऐ अल्लाह के बंदों, एक-एक यहूदी को मार डालो’: फिलिस्तीन के ‘मंत्रालय’ ने अब मस्जिदों के मुल्ले-मौलवियों को सौंपी हिंसा की जिम्मेदारी, ऐलान- जेरुसलम होगी हमारी राजधानी

इजरायल पर हमास के आतंकी हमलों की निंदा करने और फिर कुछ ही घंटों में पीछे हटने की घटना के कुछ दिन बाद ही फिलिस्तीनी राष्ट्रीय अथॉरिटी ने कथित तौर पर “यहूदियों की हत्या” करने का फरमान जारी किया है।

फिलिस्तीनी अथॉरिटी के इस्लामी मामलों के मंत्रालय द्वारा 18 अक्टूबर, 2023 को एक पेज का फरमान जारी किया गया था। जिसमें मस्जिदों के इमामों और मौलियों को जारी किए गए फरमान में जुमा की नमाज के बाद मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाने के निर्देश दिए गए हैं। इस फरमान में मुस्लिमों द्वारा सभी यहूदियों की हत्या का आह्वान किया गया है। हदीस का हवाला देते हुए यहूदियों को मार डालने के लिए उकसाया गया है।

दस्तावेज़ में गाजा के अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल पर हमले, जिसमें कथित तौर पर 500 से अधिक लोग मारे गए थे, को “क्राइम ऑफ़ द एरा” अर्थात सबसे भयंकर अपराध करार दिया है और इस हमले के लिए इजरायल को दोषी ठहराया गया है जबकि यह तथ्य पहले भी सामने आ चुका है कि यह हमास का एक फेल रॉकेट था जिसकी वजह से अस्पताल में ब्लास्ट हुआ और लोगों की जाने गई।

प्राधिकरण के दस्तावेज़ में दावा किया गया है कि फ़िलिस्तीन तब तक सफ़ेद झंडा नहीं उठा सकता यानी शांत नहीं हो सकता जब तक कि इजरायल की हार न हो जाए और फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना न हो जाए। इसमें इजरायल को हराने के बाद यरूशलेम को फ़िलिस्तीनी राज्य की राजधानी बनाने का भी जिक्र है।

अथॉरिटी द्वारा अरबी में जारी दस्तावेज में लिखा है, “मृतक बच्चों और माताओं के अवशेष उन लोगों के लिए शर्म से डूब मरने की बात है जिन्होंने गाजा पर कब्जे की बात कही… हमारे फिलिस्तीनी लोग, जख्मों और त्रासदियों के बावजूद इजरायल की हार तक सफेद झंडा नहीं उठा सकते। एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना होगी, जिसकी राजधानी यरूशलेम होगी, उसके बाद ही अमन की बात होगी”

यहूदियों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए लोगों को उकसाने वाले फरमान में कुरान की आयतों और हदीसों का हवाला दिया गया है, उनमें से एक साहिह अल बुखारी से है, जिसमें लिखा है, “वह समय तब तक नहीं आएगा जब तक मुस्लिम यहूदियों से नहीं लड़ते और उन्हें मार नहीं डालते। जब तक यहूदी पत्थरों और पेड़ों के पीछे छिप न जाएँ और पत्थर या पेड़ न कहें, हे मुसलमान, हे अल्लाह के बंदे, यह मेरे पीछे एक यहूदी छिपा है, आओ और उसे मार डालो।”

प्राधिकरण के इस फरमान का खुलासा एनजीओ रेगाविम मूवमेंट ने किया है, जिसमें कहा गया कि यह सबूत है कि हमास और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के बीच कोई अंतर नहीं है। रेगाविम मूवमेंट ने कहा, “यह फरमान इस बात का सबूत है कि हमास और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के लक्ष्यों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है, दोनों का एक ही निशाना है, यहूदियों की हत्या, चाहे वे कहीं भी हों, और पूरे इजरायल से यहूदियों का खात्मा।”

गौरतलब है कि फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास ने पिछले हफ्ते इजरायल पर आतंकी हमले के लिए हमास की आलोचना की थी, जिसमें 1400 से अधिक इजरायली नागरिक मारे गए थे। हालाँकि, फिलिस्तीनी प्राधिकरण की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAFA (विकलात अल-अनबा अल-फिलास्टिनिजा) ने 15 अक्टूबर को ही इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास के बारे में उनकी टिप्पणियों के सभी संदर्भ हटा दिए थे।

अपने वेनेजुएला समकक्ष निकोलस मादुरो के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अब्बास ने कहा था कि हमास फिलिस्तीनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) फिलिस्तीनी लोगों का एकमात्र प्रतिनिधि है।

इसके अलावा, अब्बास ने दोनों पक्षों के नागरिकों की हत्या की भी निंदा की थी और कैदियों और बंदियों की रिहाई की माँग की थी। हालाँकि, कुछ घंटों बाद ही हमास के सभी संदर्भ बिना किसी स्पष्टीकरण के हटा दिए गए।

बता दें कि फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण ने पहले हमास की निंदा की, फिर चुपचाप आतंकवादी समूह के संदर्भ हटा दिए और अब मुस्लिमों को “यहूदियों की हत्या” करने के लिए उकसा रहा है।

जिसने बनाई लश्कर-ए-जब्बार, उसकी हत्या कर निकल गए अज्ञात बंदूकधारी: बालाकोट एयर स्ट्राइक में बच निकला था दाऊद मलिक, अब क्लिनिक में भून डाला गया

पाकिस्तान में छिपकर बैठे भारत के एक और मोस्ट वॉन्टेड आतंकी की हत्या हो गई है। इस आतंकी का नाम दाऊद मलिक बताया जा रहा है, जो वैश्विक आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के सरगना मसूद अजहर का करीबी है। ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के अलावा दाऊद मलिक लश्कर-ए-जब्बार का संस्थापक भी था। वह लश्कर-ए-झांगवी से भी जुड़ा हुआ था।

बता दें कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में छिपे भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की हत्या का सिलसिला जारी है। अभी हाल ही में शाहिद लतीफ नाम के एक आतंकी की हत्या कर दी गई थी। लतीफ को पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। वहीं, दूसरा आतंकी ISI का एजेंट मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज है। उसे भी अज्ञात लोगों ने गोली मार दी।

दरअसल, भारत में आतंकी गतिविधियों में वांछित कई आतंकी पाकिस्तान, कनाडा एवं अन्य देशों में छिपे बैठे हैं। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि कनाडा एवं ब्रिटेन में छिपकर बैठे आतंकियों की किन्हीं कारणों हत्या हो रही है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तो भारत और कनाडा के संबंध भी खराब हो गए हैं।

पाकिस्तान के उत्तरी वजीरीस्तान में दाऊद मलिक को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी वजीरीस्तान के मिराली एरिया में कुछ नकाबपोश बंदूकधारियों ने दाऊद मलिक को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी, जब वह एक क्लिनिक में गया था। नकाबपोश वहाँ पहले से ही उसका इंतजार कर रहे थे।

पुलवामा हमले के बाद जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की थी तो दाऊद मलिक वहाँ मौजूद था, लेकिन वह बचकर भागने में कामयाब रहा था। ये सभी आतंकी पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की हिफाजत में रहते हैं। इसके बावजूद ये निशाना बन जा रहे हैं।

इससे पहले मारा गया आतंकी शाहिद लतीफ पाकिस्तान के गुजरांवाला का रहने वाला था। उसे अज्ञात हमलावरों ने बहुत करीब से गोली मारी थी। साल 2016 के पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ आईएसआई से खास ट्रेनिंग मिली थी। लतीफ को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने सियालकोट सेक्टर के प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी थी।

वहीं, मारा गया दूसरा आतंकी मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज है। उसे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे बलूचों के इलाके बलूचिस्तान में गोली मारी गई थी। कहा जाता है कि बाहौर ने ही कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा करके आईएसआई के हवाले किया था। भारतीय नौसेना से रिटायर हुए कुलभूषण जाधव इस वक्त पाकिस्तान की जेल में हैं।

उससे पहले पिछले माह ‘लश्कर ए तैयबा’ के प्रमुख हाफिज सईद के करीबी अबु कासिम को रावलकोट में गोली मारी गई थी। खालिस्तान कमांडो फोर्स का दुर्दांत आतंकी और भारत में मोस्ट वॉन्टेड परमजीत सिंह पंजवाड़ की भी पाकिस्तान में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की थी।

जैश का खूंखार आतंकी जहूर मिस्त्री की भी हत्या हुई थी। जहूर मिस्त्री कंधार विमान अपहरण कांड में शामिल था। वहीं, आतंकी बशीर अहमद मीर उर्फ इम्तियाज आलम को रावलपिंडी में गोली मार दी गई थी। हिजबुल मुजाहिदीन ने उसे लॉन्च पैड सँभालने की जिम्मेदारी थी और वह पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराता था।

‘इजरायल के जालिमों फिलिस्तीन खाली करो’: धरने पर बैठीं महबूबा मुफ़्ती ने दी ‘बंदूक उठाने’ वाली धमकी, बोलीं – जुल्म बंद नहीं हुआ तो…

इजरायल पर हमास द्वारा किए गए आतंकी हमले के जवाब में इजरायल-हमास के बीच 15वें दिन भी युद्ध जारी है। इजरायली सेना लगातार गाजा में हमास के ठिकानों को निशाना बना रही है। इसी बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी खुलेआम फिलिस्तीन के समर्थन में उतर आई हैं। 

महबूबा मुफ़्ती ने श्रीनगर में सड़क पर उतरकर फिलिस्तीन का झंडा लिए हुए विरोध-प्रदर्शन किया। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें वह इजरायल का विरोध और फिलिस्तीन का समर्थन करती नजर आती हैं। हालाँकि, पूरे प्रदर्शन में उन्होंने हमास के आतंकियों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह फिलिस्तीन का झंडा लिए सड़क पर बैठ कर विरोध-प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने इजरायल गो बैक के नारे लगाते हुए कहा, “फिलिस्तीन में 1500 बच्चे मारे गए हैं और पूरी दुनिया तमाशा देख रही है। अगर इजरायल को फिलिस्तीन पर जुल्म करने से नहीं रोका गया तो नतीजा खतरनाक होगा। पूरी दुनिया को इजरायल पर दबाव बना, जंगबंदी को लागू कराना चाहिए।”

गो बैक इजरायल गो बैक के नारेबाजी कर रहे पीडीपी के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इजरायल को गाजा पट्टी पूरी तरह से खाली कर फिलिस्तीनियों को उनका हक दे देना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल महबूबा मुफ्ती ने कहा कि फिलिस्तीन के हालात अत्यंत गंभीर हैं। और पूरी दुनिया तमाशा देख रही है। किसी को भी फिलिस्तीन में 1500 बच्चों की मौत नजर नहीं आ रही है।

इतना ही नहीं महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में पीडीपी कार्यकर्ताओं ने भी आज पार्टी मुख्यालय के बाहर फिलिस्तीन के समर्थन में धरना दिया। धरने पर बैठे पीडीपी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीनियों के समर्थन में लिखे नारों वाले बैनर और तख्तियाँ ले रखी थी। 

वहीं महबूबा मुफ्ती ने रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि जब यूक्रेन में दो वर्ष के भीतर 500 बच्चे मारे गए तो पूरा विश्व चीखने लगा था। आज फिलिस्तीन में हजारों की संख्या में लोग मारे जा रहे हैं तो कोई बात नहीं कर रहा है। हम दुनिया भर के देशों से अपील करते हैं कि इजरायल पर दबाव बनाकर सीजफायर कराओ। अगर इजरायल का यह जुल्म बंद नही कराया गया तो इसके नतीजे बहुत खतरनाक होंगे।

इतना ही नहीं उन्होंने लगभग धमकी देते हुए कहा कि यदि इजरायल का यह जुल्म बंद नहीं हुआ तो और भी लोग बन्दूक उठाएँगे। इससे दुनिया में और भी अधिक हालात खराब होंगे। इसलिए हम कहते हैं कि इजरायल के जालिमों फिलिस्तीन को खाली करो। 

गौरतलब है कि हमास द्वारा इजरायल पर किए गए आतंकी हमले में जहाँ करीब 1400 लोग मारे गए हैं वहीं 200 से अधिक के बंधक बनाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद गाजा पर इजरायल द्वारा की गई कार्रवाई में सैकड़ों बच्चों सहित करीब 4,137 लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। जबकि दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इसके अलावा 13,000 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

‘इस्लाम कबूल करो या मौत चुनो’: 17 साल की हिन्दू लड़की ने की आत्महत्या, कुछ दिन पहले ही जेल से छूट कर आए थे अदनान और अब्दुल, हिजाबी अन्नू सिंह भी धराई

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की ने आत्महत्या कर लिया है। मृतका के पिता ने अदनान आफ़ताब, अब्दुल कयूम के साथ अन्नू सिंह नाम की एक लड़की पर अपनी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) की है।

यह घटना सीतापुर जिले के थाना क्षेत्र कोतवाली देहात की है। मृतका के पिता ने इस मामले में थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वो अपनी नौकरी करने चले गए थे। इसी दौरान उनकी पत्नी बच्चों को लाने स्कूल चली गई। सुबह लगभग 10:45 पर जब मृतका की माँ घर लौटी तो पाया कि उनकी 17 साल की बेटी फाँसी के फंदे से लटकी हुई है। जब तक लड़की को फंदे से उतारा गया तब तक उसकी जान निकल चुकी थी।

शिकायत में मृतका के पिता का आरोप है कि उनकी नाबालिग बेटी को लम्बे समय से अदनान आफ़ताब, अब्दुल कयूम के साथ अन्नू नाम की एक लड़की परेशान कर रही थी। इन सभी ने मिल कर पीड़िता पर कई बार इस्लामी धर्मांतरण का दबाव दिया जिस से वो अक्सर मानसिक तनाव में रहती थी। पीड़ित परिवार की तरफ से अदनान और कयूम पर 14 अगस्त, 2023 को छेड़खानी की FIR भी दर्ज करवाई गई थी। तब दोनों आरोपितों ने स्कूल से लौट रही पीड़िता से छेड़छाड़ की थी।

इस मामले में दोनों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई भी हुई थी। पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि उनके द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में दोनों आरोपित जेल चले गए थे। कुछ दिनों बाद दोनों जेल से छूट कर आए तो वो लड़की पर केस में समझौते का दबाव बनाने लगे। जब लड़की ने इनकार किया तो उसकी एडिटेड फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकियाँ दी जाने लगीं। लड़की के पिता के मुताबिक, उसको आरोपितों ने 2 रास्ते दिए थे – पहला इस्लाम कबूलने का और दूसरा मौत का।

अपनी बेटी को इन धमकियों से काफी परेशान बता कर मृतका के पिता ने आत्महत्या की वजह इसी दबाव को बताया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आखिरकार 20 अक्टूबर को लड़की ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर अदनान आफ़ताब, अन्नू और अब्दुल कय्यूम पर IPC की धारा 306 और 506 के तहत FIR दर्ज कर लिया। तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

ऑपइंडिया के पास अरोपिता अन्नू की तस्वीरें मौजूद हैं। तस्वीरों में वह हिजाब में दिख रही है। एक अन्य तस्वीर में वह किसी इस्लामी इबादतगाह के आगे खड़ी दिखाई दे रही है। सीतापुर जिले के पत्रकार अभिमन्यु सिंह ने ऑपइंडिया के मृतका के पिता से बातचीत की वीडियो भेजी। वीडियो में पीड़िता के पिता ने बताया कि तीनों आरोपित लगातार उनकी बेटी को फोन कर के तनाव दे रहे थे। मृतका के पिता ने तीनों आरोपितों के घर पर बुलडोजर चलवाने की भी माँग की है।

मृतका द्वारा की गई पहली FIR में लड़की के वकील ने बताया कि आरोपित अब्दुल कय्यूम और आफ़ताब अक्सर हिन्दू बन कर छेड़छाड़ की घटनाओं को अंजाम दिया करते थे। ये सभी कलावा आदि बाँधा करते थे। उन्होंने बताया कि लड़की द्वारा आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में दिए गए बयान के बाद ही सभी आरोपित उसके पीछे पड़ गए थे। वकील ने इस घटना को ‘लव जिहाद’ बताया और शासन-प्रशासन से कठोर कार्रवाई की आशा जताई।

वकील ने दावा किया कि सीतापुर और आसपास के जिलों में कम से कम 5 से 10 हजार लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ की शिकार बनी हैं जो एक गैंग द्वारा टारगेट की गईं हैं। उन्होंने कहा कि इसमें से कई लड़कियों ने तो धर्म परिवर्तन भी कर डाला है।

कॉन्ग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष से भिड़ेंगे महाराणा प्रताप के वंशज! BJP की सूची में वसुंधरा राजे का भी नाम, कॉन्ग्रेस ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट को मैदान में उतारा

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की पहली और भाजपा की दूसरी सूची आ गई है। सबसे रोचक मुकाबला मेवाड़ के नाथद्वारा में होने वाला है, जहाँ महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह और कॉन्ग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी भिड़ेंगे। विश्वराज हाल ही में भाजपा में आए हैं। जहाँ भाजपा ने 83 प्रत्याशियों की सूची जारी की है, वहीं कॉन्ग्रेस ने 33 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम बताए हैं। खास बात ये है कि भाजपा की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी लड़ने वाली हैं। उन्हें झालरापाटन से चुनावी मैदान में उतारा गया है।

वो 5वीं बार इस झालावाड़ जिले में स्थित इस सीट से चुनाव लड़ने वाली हैं। इसे भाजपा का अभेद्य दुर्ग भी कहा जाता है। वहीं कॉन्ग्रेस की सूची में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम भी शामिल है। जहाँ अशोक गहलोत सरदारपुरा से उतरेंगे, वहीं सचिन पायलट को उनके गृह क्षेत्र टोंक से लड़ने के लिए उतारा गया है। राजस्थान की 200 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान होने वाला है। मतगणना 3 दिसंबर को होगी।

भाजपा इससे पहले 1 अक्टूबर को ही 41 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है। हालाँकि, भाजपा की नई सूची में किसी भी सांसद का नाम नहीं है। मध्य प्रदेश में 3 केंद्रीय मंत्रियों समेत 7 सांसदों को पार्टी ने टिकट दिया है। पहली लिस्ट में राजस्थान में भी 7 सांसदों को टिकट दिया गया था, लेकिन इनमें से कइयों का विरोध भी हुआ। नई सूची में वसुंधरा राजे गुट के कई नेताओं का नाम न होने की बात भी कही जा रही है। हाल ही में स्थिति का निरीक्षण करने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी राजस्थान पहुँचे थे।

चित्तौड़गढ़ के विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का टिकट काटा गया है। भाजपा ने नरपत सिंह राजवी को चित्तौरगढ़ से उतारा है, जो विद्याधर नगर से हैट्रिक लगा चुके हैं। वहाँ से अब जयपुर राजघराना की दीया कुमार को उतारा गया है, जो फ़िलहाल सांसद हैं। मालवीय नगर से चौथी बार कालीचरण सराफ को टिकट दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की सीट बदल कर चूरू की जगह तारा नगर कर दिया गया है। उपनेता प्रतिपक्ष सतीश पूनियाँ फिर से आमेर से ही लड़ेंगे।

राहुल गाँधी पागल, मंदबुद्धि और वंशहीन: समाजवादी पार्टी ने नीतीश कुमार का लिया पक्ष, कहा- मुलायम सिंह कॉन्ग्रेस को बताते थे दुश्मन नंबर-1

मध्य प्रदेश में वादा करके समाजवादी पार्टी को एक भी सीट नहीं देने से अखिलेश यादव और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से शुरू हुई बयानबाजी अब राहुल गाँधी तक जा पहुँची है। समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री आईपी सिंह ने राहुल गाँधी के कई अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

आईपी सिंह ने कॉन्ग्रेस और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए X पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “महागठबंधन की पहल बिहार के 8 बार के यशस्वी CM अति सरल पटेल नीतीश कुमार जी ने की। एक एक पार्टियों को जोड़े और उन्हें महागठबंधन का नेता बनाने के बजाय कॉन्ग्रेस खेल पर उतर आयी।”

उन्होंने आगे कहा, “2019 में चौकीदार चोर है उस पागल मंदबुद्धि राहुल गाँधी के सहारे कॉन्ग्रेस अपने बलबूते चली है मोदी जी को हराने असंभव। जो व्यक्ति अपने सगे भाई वरुण गाँधी जी को नहीं जोड़ पाया वह झूठा मोहब्बत बाँट रहा है। कॉन्ग्रेस की सात पुश्तें समाजवादी पार्टी की कभी कुछ बिगाड़ नहीं पायेंगी। वैसे राहुल गाँधी वंशविहीन हैं। ननिहाल वैसे उनके लिए मुफीद जगह है।”

समाजवादी पार्टी के संस्थापक समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम यादव का जिक्र करते हुए आईपी सिंह ने कहा, “श्रद्धेय नेता जी कहते थे कॉन्ग्रेस दुश्मन नम्बर एक पार्टी है। उसे कॉन्ग्रेसी बार-बार अपने आचरण से साबित करते हैं। 2004-2014 तक सहयोगी दलों के साथ क्या बर्ताव किया सारा हिन्दुस्तान जानता है। 2004 में बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता श्रद्धेय नेता जी ने 39 सीटें जीतकर दिखाया। बीजेपी 8 सीट पर यूपी में सिमट गयी और 10 वर्ष खड़ी नहीं हो पायी।”

उन्होंने आगे कहा, “सत्ता मिलते ही नेता जी का उत्पीड़न कॉन्ग्रेस ने शुरू कर दिया। केंद्र सरकार से राहुल गाँधी ने समाजवादियों को दूर रखा। माननीय लालू यादव जी को मुसीबत में इसी राहुल गाँधी ने अपनी नादानी से डाला। उसके बाद मोदी ने उन्हें जेल में डाल दिया, जहाँ उनकी किडनी खराब हो गयी। तबसे वे बेचारे जीवन और मौत से जूझ रहे हैं, क्योंकि वे पिछड़े वर्ग के बड़े नेता हैं।”

सपा नेता ने कहा, “बिना PDA के कॉन्ग्रेस कुछ नहीं कर पायेगी। देश में तुम्हारे पैदल यात्रा से उत्तर भारत में कोई फर्क नहीं पडने वाला। जातिगत जनगणना परिवर्तन का मूल आधार बन रहा है, जिसे कॉन्ग्रेस ने भी बीजेपी के साथ रोक रखा था। बिहार ने उसकी पहल कर दी। अब कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्सेदारी।”

इससे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस पर तंज कसा था। उन्होंने हरदोई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आज कॉन्ग्रेस पिछड़ा वर्ग (OBC) का राग अलाप रही है, लेकिन ये वही कॉन्ग्रेस है जिसने जाति जनगणना के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे।

अखिलेश यादव ने कहा, “कॉन्ग्रेस अब मुखर हुई है। ये वही कॉन्ग्रेस पार्टी है जिसने जाति जनगणना के आँकड़े नहीं दिए, जाति जनगणना नहीं होने दिए। ये चमत्कार है, क्योंकि अब सबको अहसास हो गया है कि जब तक पिछड़े-दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक भाइयों का साथ नहीं लोगे, आप कामयाब नहीं होगे।”

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री जी खुद कहते हैं कि हम पिछड़े हैं। पिछड़े, दलित, आदिवासी और कुछ अगड़े जाति जनगणना की माँग कर रहे हैं तो उसमें क्या बात है। ये चमत्कार है कि कॉन्ग्रेस भी चमत्कार में आ गई कि उन्हें भी जाति जनगणना चाहिए, क्योंकि वो जानते हैं कि वो वोट जो उनसे जुड़ते थे अब वो उनके साथ नहीं है।”

अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ के ‘अखिलेश-वखिलेश’ वाले बयान पर भी सीधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिसके नाम में ही कमल हो तो वो वखिलेश ही कहेंगे, अखिलेश तो नहीं कहेंगे। कमलनाथ को छोटा नेता बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं से अपील करूँगा कि अपने छोटे नेताओं से इस तरह के बयान न दिलवाएँ।”

समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कहा, “ये बात तो ठीक कही उन्होंने… वखिलेश कौन है… अखिलेश तो है ना… तो अगर ये बातें कहेंगे तो समाजवादी पार्टी भी इन बातों को कह सकती है, लेकिन हम उन उलझनों में नहीं फँसना चाहते हैं। कमलनाथ जी से हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। नाम देखो उनका कितना अच्छा है। जिनके नाम में ही कमल हो तो वो वखिलेश ही कहेंगे, अखिलेश तो नहीं कहेंगे ना।” 

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सारे सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने वहाँ समाजवादी पार्टी को 6 सीटें देने की बात कही थी, लेकिन सारे सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। अखिलेश कहा था, “अगर उन्हें पता होता कि राज्यों के स्तर पर गठबंधन नहीं है तो वो कभी किसी बैठक में जाते ही नहीं।”

कॉन्ग्रेसियों ने फूँका दिग्विजय सिंह और कमलनाथ का पुतला: MP में मतदान से पहले ही पार्टी में कलह, पूर्व CM के बँगले के सामने ही कार्यकर्ताओं ने कराया मुंडन

कॉन्ग्रेस में टिकट वितरण से दुखी कई नेताओं ने शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को भोपाल में प्रदेश कॉन्ग्रेस कार्यालय और कमल नाथ के बंगले के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया। कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के बंगले के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं बोंडगाँव में कमलनाथ का पुतला दहन भी किया गया।

दरअसल, जब से कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में 88 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है, उसके बाद से ही कॉन्ग्रेसी भड़के हुए हैं। उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में बैरसिया से उम्मीदवार बनाई गईं जयश्री हरिकरण के विरोध में कॉन्ग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले के सामने मुंडन कराकर विरोध जताया। साथ ही कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का पुतला भी फूँका।

मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों की सूचि से कॉन्ग्रेस नेता ही खुश नजर नहीं आ रहे। विधानसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची आने के बाद भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय के बाहर भड़का विरोध अब कमल नाथ के बंगले तक पहुँच गया है। बैरसिया से आए कार्यकर्ताओं ने बंगले के गेट पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बैरसिया के प्रत्याशी का टिकट बदलने की माँग की। वहीं पीसीसी के सामने दिग्विजय सिंह का पुतला भी जलाया गया

मौके पर विरोध प्रदर्शन को इकट्ठे कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता बंगले में घुसना चाह रहे थे, लेकिन वहाँ मौजूद गार्डों ने उन्हें रोक दिया। हालाँकि, प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह के समर्थक बताए जा रहे हैं। और यह आरोप लगाया जा रहा है कि टिकट वितरण में कमल नाथ ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवा दिया। इसी बात से कार्यकर्ता नाराज हैं। वहीं, दतिया जिले की सेवड़ा विधानसभा से आए नेताओं ने भी कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का पुतला फूँका। 

वहीं विधानसभा क्षेत्र हरदा-खिरकिया क्रमांक 135 में कॉन्ग्रेस द्वारा डॅा. रामकिशोर दोगने को प्रत्याशी घोषित करने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता मंजीत सिंह ने शुक्रवार को अपने गृह ग्राम बोंडगाँव में कमल नाथ और हरदा प्रत्याशी डॅा. दोगने का पुतला दहन किया।

कॉन्ग्रेस नेता मंजीत सिंह ने राजपूत समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हरदा विधानसभा क्षेत्र का घोषित प्रत्याशी बदलने की माँग की है। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता मंजीत सिंह बघेल ने हरदा विधानसभा क्षेत्र से राजपूत समाज के व्यक्ति को टिकट देने की माँग की थी।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में राजपूत समाज के कई नेताओं ने कहा कि राजपूत समाज के नेता को टिकट देने की माँग वाली फेसबुक पोस्ट मंजीत सिंह की व्यक्तिगत सोच है, समाज का उस पोस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ तक कि राजपूत समाज का राजनीतिक पार्टियों से कोई लेना-देना नहीं है।

महुआ मोइत्रा देश में, लेकिन संसद में लॉगिन दुबई से? – आरोपों के बाद जानिए लोकसभा में कैसे पूछे जाते हैं सवाल: कितने तरह के होते हैं, क्या होता है इनका असर

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर न सिर्फ घूस लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे हैं, बल्कि कुत्ता चोरी की शिकायत भी उनके खिलाफ हुई है। अब झारखंड के गोड्डा से भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि महुआ मोइत्रा के संसद वाले अकाउंट में दुबई से लॉगिन होता था। उन्होंने कहा कि कुछ पैसे के लिए एक सांसद ने देश की सुरक्षा को गिरवी रखा, दुबई से संसद की आईडी खोले गए और उस वक़्त कथित सांसद भारत में ही थीं।

निशिकांत दुबे ने कहा, “इस NIC पर पूरी भारत सरकार है – देश के प्रधानमंत्री, वित्त विभाग, केन्द्रीय एजेंसी सभी। क्या अब भी TMC व विपक्षियों को राजनीति करनी है, निर्णय जनता का, NIC ने यह जानकारी जॉंच एजेंसी को दिया।” इसके बाद कई लोग इसे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं। सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर विदेशी धरती से किसी और को भारत के संसद की वेबसाइट पर लॉगिन कैसे करवाया जा सकता है?

बता दें कि कारोबारी दर्शन हीरानंदानी ने भी एक पत्र के माध्यम से अपने बयान में बताया था कि वो अक्सर महुआ मोइत्रा की संसद वाली आईडी से लॉगिन करते थे, क्योंकि सांसद ने उन्हें अपना पासवर्ड दिया हुआ था। उन्होंने बताया था कि वो संसद में महुआ मोइत्रा की तरफ से सवाल भी अपलोड करते थे। आरोप है कि इन सवालों के माध्यम से उद्योगपति गौतम अडानी और उनकी कंपनी समूह पर निशाना साधा जाता था। महुआ मोइत्रा पर ये खुलासे उनके पूर्व व्यक्तिगत दोस्त वकील जय अनंत देहाद्राई के एक पत्र के बाद हुआ था।

संसद में सांसदों के सवाल: जानिए इसके बारे में सब कुछ

अब आपको बताते हैं कि आखिर संसद में सवाल कैसे पूछे जाते हैं। ‘रूल्स ऑफ प्रोसीजर एन्ड कंडक्ट ऑफ बिजनेस इन लोकसभा’ के नियम 32-54 के तहत और ‘डायरेक्शन बाय स्पीकर, लोकसभा’ के के दिशानिर्देश 10-18 के तहत लोकसभा में सांसद सवाल पूछ सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को नोटिस देनी होती है। इसमें बताया जाता है कि वो सवाल पूछना चाहते हैं। इसमें सवाल के साथ-साथ जिस मंत्री से सवाल पूछा गया है, उनके पद एवं विभाग का नाम होता है।

इसमें तारीख़ भी लिखी होती है, जब जवाब चाहिए। अगर एक ही दिन में एक से अधिक सवाल कोई सांसद पूछ रहा है तो उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ प्रेफरेंस’ का जिक्र भी करना होता है, यानी किस सवाल को पहले प्राथमिकता दी जाए। मौखिक या लिखित रूप से जवाब के लिए कोई सांसद एक दिन में अधिकतम 5 सवाल पूछ सकता है। लोकसभा में ‘क्वेश्चन ऑवर’ में इसका जवाब दिया जाता है। सवाल के नोटिस की अवधि सामान्यतः 15 दिन से कम नहीं रहती है।

सांसदों को अगर सवाल पूछने हैं तो इसके 2 तरीके हैं – ऑनलाइन तरीका है ‘मेंबर्स’ पोर्टल का इस्तेमाल करना। वहाँ आईडी-पासवर्ड डाल कर लॉगिन करना होता है। दूसरा तरीका है – संसद के नोटिस ऑफिस से फॉर्म खरीदना। इसके बाद लोकसभा के स्पीकर निर्णय लेते हैं कि कौन से सवाल जाएँगे और कौन से नहीं। सवाल में 150 से अधिक शब्द नहीं होने चाहिए। इसमें किसी के लिए अपमानजनक बात नहीं होनी चाहिए। हाँ, देश की सुरक्षा या अखंडता को कमजोर करने वाली कोई सूचना नहीं माँगी जा सकती है।

साथ ही न्यायपालिका के समक्ष जो मुद्दे विचाराधीन हैं, उन्हें लेकर भी सवाल नहीं उठाए जा सकते। सवाल 4 तरह के होते हैं – स्टार्ड (Starred), अनस्टार्ड (Unstarred), शॉर्ट नोटिस क्वेश्चन और प्राइवेट मेंबर्स को संबोधित किए हुए सवाल। स्टार्ड सवाल के जवाब मंत्री मौखिक रूप से देते हैं। हर सांसद एक दिन में एक स्टार्ड सवाल ही पूछ सकता है और इसके लिए 15 दिन पहले नोटिस देना होता है। 1 दिन में ऐसे 20 सवालों के ही अधिकतम जवाब दिए जा सकते हैं। इसमें फिर सप्लीमेंट्री सवाल भी पूछे जा सकते हैं, मौखिक जवाब के बाद।

अनस्टार्ड सवालों पर मंत्रालय से लिखित जवाब आता है। 1 दिन में ऐसे 230 सवालों के जवाब दिए जाते हैं। इन्हें भी 15 दिन पहले पूछना होता है। हाँ, इसमें फॉलोअप सवाल की अनुमति नहीं होती। इसमें अधिकतर डेटा या रिसर्च को लेकर सवाल होते हैं, जबकि स्टार्ड में सरकारी नीतियों या सरकार के दृष्टिकोण को लेकर। शॉर्ट नोटिस सवाल 10 दिन एडवांस में पूछे जाते हैं और इनका जवाब मौखिक होता है। अगर कोई महत्वपूर्ण या त्वरित मुद्दा है तो उस पर ये सवाल पूछे जाते हैं।

प्राइवेट मेंबर वाले सवाल सांसद से ही पूछे जाते हैं। किसी मुद्दे में अगर वो सांसद शामिल है तो उस पर उससे सवाल पूछे जा सकते हैं। सवाल पूछना सांसदों का अधिकार है और इससे शासन-प्रशासन में भी मदद मिलती है। इन सवालों के जवाबों का इस्तेमाल सरकार किसी मुद्दे पर जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिए भी कर सकती है। सरकार की कमियाँ भी इनसे उजागर होती हैं। कई बार इन सवालों के बाद संसदीय समितियाँ भी बनाई जाती हैं।

इस बातचीच में संसदीय आचार समिति अध्यक्ष विनोद सोनकर ने कहा था कि अगर किसी ने सांसद के लॉग-इन आईडी का इस्तेमाल किया है तो ये बहुत गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा, “संसद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। यह बहुत ही अजीबोगरीब और गंभीर मामला है।” भाजपा सांसद विनोद सोनकर ने कहा कि संसदीय आचार समिति 26 अक्टूबर, 2023 को सभी सबूतों की जाँच करेगी। इसके लिए सभी शिकायतकर्ताओं को सबूत के साथ मौजूद रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई दोनों पक्षों के समिति को दिए गए सबूतों पर निर्भर करेगी।