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सियाचिन में पहले ‘अग्निवीर’ का बलिदान, अक्षय लक्ष्मण को पूरे सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई: सेना प्रमुख ने भी जताया दुःख, राजनीति कर अफवाह फैला रहा था विपक्ष

सियाचिन में देश का पहला ‘अग्निवीर’ बलिदान हुआ है। गवाते अक्षय लक्ष्मण ने विश्व की सबसे ऊँची युद्धभूमि सियाचिन में अपना बलिदान दिया है। भारतीय सेना ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को विदाई दी है। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट उपेन्द्र द्विवेदी और सभी ने ‘अग्निवीर’ अक्षय लक्ष्मण के इस बलिदान और पराक्रम को सलाम किया है। उनकी यूनिट ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने गवाते को सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी है।

गौरतलब है कि सेना में सेवाएँ देने के लिए ‘अग्निपथ’ योजना को जून 2022 में लाया गया था। गवाते अक्षय लक्ष्मण इसी के तहत सेना का हिस्सा बने थे। उनकी सियाचिन जैसे कठिन युद्धक्षेत्र में तैनाती थी। उनकी एक ऑपरेशन के दौरान जान चली गई।

उनकी यूनिट ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के सभी जवान और अधिकारी कठिन चोटियों में अपनी सेवा के दौरान अग्निवीर गवाते अक्षय लक्ष्मण के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं और उनके परिवार से संवेदना व्यक्त करते हैं।”

सेना के उत्तरी कमान के ट्विटर हैंडल ने लिखा कि वह पीड़ा की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं। गवाते के शव विदाई देते समय सैन्य सलामी देने की तस्वीरें भी ट्विटर पर साझा की हैं। गौरतलब है कि हाल ही में एक अन्य ‘अग्निवीर’ सैनिक की दुखद मृत्यु पर काफी बवाल हुआ था। ‘अग्निवीर’ अमृतपाल सिंह की मौत पर विरोधी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि ‘अग्निवीरों’ को सैन्य सम्मान नहीं दिया जाएगा।

सेना ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि सेवा के दौरान बलिदान देने वाले सभी सैनिकों को सम्मान दिया जाता है चाहे वह अग्निवीर हो या अन्य सैनिक। अमृतपाल सिंह के मामले में यह पाया गया था कि उनकी मृत्यु खुद से चलाई गई गोली के कारण हुई।

अमृतपाल सिंह जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में अपनी यूनिट 10-जम्मू और कश्मीर राइफल्स के साथ तैनात थे। 10 अक्टूबर, 2023 को सिर में गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोप लगाया गया था कि उनके शव को एक निजी एम्बुलेंस में उनके घर ले जाया गया था। भारतीय सेना ने उनकी मृत्यु पर दुःख जताते हुए परिवार और सेना के लिए भी इसे क्षति करार दिया था।

मदरसों की विदेशी फंडिंग में गड़बड़ी पर वक्र हुई योगी सरकार की दृष्टि: एक-एक पाई का हिसाब लगाने के लिए बनाई गई SIT, धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों में जा रहे पैसे?

उत्तर प्रदेश में विदेशों से फंड लेकर अवैध गतिविधियों का संचालन करने और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले मदरसों पर योगी सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इन मदरसों को मिलने वाली फंडिंग की जाँच के लिए एक विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया है।

यह SIT इस बात की जाँच करेगी कि जिन मदरसों को विदेशों से फंड मिल रहा है वह उसका उपयोग कैसे कर रहे हैं और कितने अवैध मदरसे अब भी चल रहे हैं। प्रदेश में अवैध मदरसों की पहचान के लिए बीते दिनों एक सर्वे करवाया था। इस सर्वे से सामने आया था कि प्रदेश के भीतर 16,513 मान्यता प्राप्त जबकि 8500 अवैध मदरसे चल रहे हैं। अवैध मदरसों के ऊपर विदेशों से फंड लेने का आरोप लगा था। इस फंडिंग की जाँच अब एडीजी मोहित अग्रवाल वाली SIT करेगी।

विदेशों से फंड लेने में उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में बने मदरसों का नाम सबसे आगे है। यह मदरसे नेपाल की सीमा पर बने हुए हैं। इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ी है। इन मदरसों के विरुद्ध पहले भी शिकायतें मिल चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत – नेपाल सीमा पर 1500 से अधिक अवैध मदरसे पाए गए थे जिनके विदेशी फंडिंग लेने की आशंका जताई गई थी। यह मदरसे कैसे फंडिंग ले रहे थे उर इनका संचालन कैसे हो रह था इसकी जांच की भी कवायद की गई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जैसे जिलों की सीमा नेपाल से लगती है। यह सीमा पूरी तौर से खुली हुई है और केवल पिलर के माध्यम से अलग की गई है। कई रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इस इलाके में नो मेंस लैंड पर भी मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है जो कि चिंता का विषय है। इसी इलाके में मदरसे भी बड़ी संख्या में खोले गए हैं। नवगठित टीम इनकी ही जाँच करेगी।

नवगठित SIT 4000 से अधिक मदरसों की जाँच करेगी। विदेशी फंडिंग को जाँच के फोकस में रखा जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं इस पैसे का उपयोग धर्म-परिवर्तन तथा देश विरोधी गतिविधियों में नहीं हो रहा।

कुरान को पाँव तले रौंदा, चूम लिया इजरायली झंडा: हमास के विरोध में स्वीडन में प्रदर्शन, वीडियो वायरल

इजरायल और हमास के बीच दो सप्ताह से चल रहे युद्ध के बीच एक्टिविस्ट सलवान मोमिका (Salwan Momika) ने कुरान पर पैर रखकर और इजरायली झंडा लहराकर यहूदी राष्ट्र के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।

यह घटना शनिवार (21 अक्टूबर, 2023 ) को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई। स्वीडन में रहने वाले इराकी शरणार्थी सलवान मोमिका को भी इजरायली झंडे को चूमते और कुरान की एक प्रति को अपने पैर से रौंदते देखा गया।

घटना का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। 

एक दिन पहले ही शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को सलवान मोमिका ने घोषणा की थी, “कल मैं इजरायल का झंडा उठाऊँगा, इजरायल के साथ अपनी एकजुटता की घोषणा करूँगा और स्टॉकहोम में कुरान और फिलिस्तीनी झंडे को जलाऊँगा।”

गौरतलब है कि इस साल 28 जून को स्वीडिश पुलिस ने इराकी शरणार्थी को स्टॉकहोम की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर एक प्रदर्शन में कुरान जलाने की अनुमति दी थी। यह घटनाक्रम ईद-अल-अधा से पहले सामने आया था जब स्वीडिश अदालत ने कुरान जलाने वाले प्रदर्शनों पर पुलिस के प्रतिबंध को हटा दिया था। 

परिणामस्वरूप, यमन में हूती विद्रोहियों ने स्वीडन से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित टीवी चैनल अल मसीरा ने व्यापार मंत्री के हवाले से कहा, “यमन पहला इस्लामिक देश है जिसने मुस्लिमों के पाक किताब के अपमान के बाद स्वीडिश सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।”

उन्होंने अन्य इस्लामिक देशों से भी इस स्कैंडिनेवियाई देश से आयात पर प्रतिबंध लगाने की अपील की। हालाँकि, हूती व्यापार मंत्री ने कहा कि स्वीडन से आयात सीमित था और प्रतिबंध का एक प्रतीकात्मक मूल्य ही था। उन्होंने यह भी कहा कि कुरान जलाने के विरोध में यह सबसे छोटी चीज थी जो वे कर सकते थे।

इससे पहले जनवरी 2023 में डेनिश राजनेता रासमस पालुदान (Rasmus Paludan) ने भी देश की राजधानी में तुर्की दूतावास के बगल में कुरान की एक प्रति जला दी थी, जिससे तुर्की को अपनी नाटो सदस्यता के बारे में स्वीडन के साथ चर्चा रोकनी पड़ी थी।

BJP ने वापस लिया विधायक T राजा सिंह का निलंबन: लगातार तीसरी बार हैदराबाद से मैदान में उतारा, पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल

भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना की गोशमहल विधनसभा सीट से अपने विधायक टी राजा सिंह का निलंबन वापस ले लिया है। पार्टी की ‘केंद्रीय अनुशासन कमेटी’ के सचिव ओम पाठक ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर के इस आशय की जानकारी सार्वजनिक की। पत्र में राजा सिंह द्वारा खुद को जारी की गई ‘कारण बताओ नोटिस’ पर दिया गया जवाब संतोषजनक माना गया है। विधायक राजा सिंह ने भी इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं का आभार प्रकट किया है।

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने अपने निलंबन की समाप्ति का पत्र 22 अक्टूबर को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। इस पत्र के साथ MLA राजा सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, संगठन सचिव बी एल संतोष, तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी, ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ के लक्ष्मण, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार और पी मुरलीधर राव का धन्यवाद किया है।

इसी के साथ राजा सिंह ने भाजपा के सभी सदस्यों सहित अपने विधानसभा क्षेत्र गोशामहल की जनता का भी आभार प्रकट किया है। उन्होंने कैप्शन के तौर पर ‘संगठन सर्वोपरि और जय भाजपा, विजय भाजपा’ लिखा है। ऑपइंडिया ने राजा सिंह के नंबर पर कॉल की तो फोन उनके सहयोगी अर्जुन ने उठाया। अर्जुन ने बताया कि निलंबन हटाए जाने की ख़ुशी में राजा सिंह के कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े हैं और मिठाइयाँ बाँटी हैं।

गोशामहल से ही लड़ेंगे चुनाव

ऑपइंडिया से बात करते हुए MLA राजा सिंह के सहयोगी अर्जुन ने हमें बताया कि भाजपा ने गोशमहल से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस बार भी राजा सिंह को गोशमहल से टिकट दिया गया है। राजा सिंह इस सीट से 2 बार लगातार विधायक हैं और वो तीसरी बार इसी सीट से अपनी दावेदारी ठोंकेंगे।

अगस्त में हुआ था निलंबन

बताते चलें कि अगस्त 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना प्रदेश से अपने एकलौते विधायक को निलंबित कर दिया था। मुस्लिम संगठनों ने तब उन पर अपने पैंगबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इस मामले में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच भाजपा विधायक की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालाँकि ऑपइंडिया से बातचीत में टी राजा सिंह के धर्म के मामले में कोई भी समझौता न करने का एलान किया था।

मस्जिद जाता था, फिर नमाज पढ़ने लगा पवन तिवारी का इकलौता बेटा, अब बन गया ‘नासिर हुसैन’: परिवार बोला – 40 बीघा जमीन पर मुस्लिमों की नज़र

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अधेड़ उम्र के एक हिन्दू व्यक्ति के धर्मांतरण का मामला सामने आया है। धर्मांतरित व्यक्ति का नाम रामबाबू तिवारी है जो मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है। रामबाबू का नाम अब नासिर हुसैन रख दिया गया है। पीड़ित परिवार ने इस हरकत को को गाँव के ही छोटा मास्टर, रज्जू खान, अफ़ज़ल और महबूब द्वारा अपनी प्रॉपर्टी पर कब्ज़े की रची गई साजिश बताया है। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार (19 अक्टूबर, 2023) को FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बांदा जिले के थानाक्षेत्र गिरवाँ की है। यहाँ के गाँव जखनी में पवन तिवारी अपने परिवार के साथ रहते हैं। सांप्रदायिक दृष्टि से गाँव की आबादी मिश्रित है। पवन तिवारी ने आरोप लगाया है कि मानसिक तौर पर कमजोर उनका एकलौता बेटा रामबाबू अक्सर गाँव में बनी मस्जिद में जाया करता था। कुछ दिनों बाद रामबाबू के हावभाव में बदलाव आने लगा। थोड़े समय बाद उसने मस्जिद में जा कर नमाज़ भी पढ़ना शुरू कर दिया।

इस बीच पवन तिवारी के घर वालों को जानकारी मिली कि रामबाबू ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी मर्जी से धर्म-परिवर्तन की अर्जी भी लगाई है। पड़ताल करने पर पता चला कि रामबाबू तिवारी ने अपना नया नाम नासिर हुसैन रख लिया है। इस मामले की जानकारी मिलते ही पीड़ित परिवार ने पुलिस में अपने बेटे के धर्मांतरण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने गाँव के ही छोटा मास्टर, रज्जू खान, अफ़ज़ल और महबूब को नामजद किया है। एहतियातन गाँव में फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

पवन तिवारी के मुताबिक, उनकी सड़क के किनारे करोड़ों की कीमत की लगभग 40 बीघा जमीन है। इस जमीन पर गाँव के मुस्लिम लोगों की नजर है। इसी जमीन को हड़पने के लिए आरोपितों ने उनके एकलौते बेटे रामबाबू को निशाने पर लिया। पवन को आशंका है कि उनके बेटे का निकाह किसी मुस्लिम लड़की से करवा कर जमीन उसके नाम करवाने की साजिश रची जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी चंद्रमोहन बेदी ने भी पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि नासिर बना रामबाबू पहले जुए में 50 लाख रुपया हार चुका है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह जमातियों के साथ 40 दिनों की यात्रा भी कर आया है। बकौल चंद्रमोहन रामबाबू को पुलिस ने खोज निकला है और फिलहाल वह सुरक्षा के मद्देनजर थाने में है। उनका दावा है कि रामबाबू अभी तक खुद को मुस्लिम ही बता रहा है।

जिहाद का बचाव, इस्लामी झंडे पर सफाई और उपद्रवी भीड़ से कोई दिक्कत नहीं: हमास समर्थकों को मिला लंदन पुलिस का साथ, लेस्टर में हिन्दुओं के साथ हुई थी क्रूरता

इंग्लैंड की राजधानी लंदन की पुलिस कट्टरपंथी इस्लामी जिहादियों पर कार्रवाई करने की बजाय लोगों को जिहाद का मतलब समझाने में जुटी हुई है। वह अलग अलग तरह के स्पष्टीकरण देकर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के समर्थकों का बचाव कर रही है।

ताजा मामला एक आतंक समर्थक संगठन ‘हिज्ब-उत-तहरीर’ से जुड़ा हुआ है जिसके सदस्यों ने लंदन के अंदर प्रदर्शन करके इजरायल के खलाफ ‘जिहाद’ के नारे लगाए हैं। इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर वायरल है। वीडियो में इस्लामी भीड़ चिल्लाती है, “फिलीस्तीन के बंदी कैम्प से लोगों को आजाद कराने का रास्ता क्या है?” इसके बाद लोग इसका जवाब देते हैं, “जिहाद! जिहाद! जिहाद!”

लंदन के भीतर इस्लामी आतंकी संगठन हमास से हमदर्दी दिखा रहे कट्टरपंथियों पर कार्रवाई करने की बजाय लंदन की पुलिस इस वीडियो पर सफाई पेश करने लगी। लंदन की पुलिस ने वायरल वीडियो के नीचे रिप्लाई करके इसके बचाव की कोशिश की।

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने लिखा, “जिहाद के कई अर्थ हैं लेकिन आम जनता इसे सामान्यतः आतंक के साथ जोड़ती है। हमारे पास यहाँ ऑपरेशन रूम में काउन्टर टेरिरिज्म अफसर हैं जिन्हें इस इलाके की जानकारी है। उन्होंने हिज्ब उर तहरीर के इस वीडियो का आकलन किया है और इस वीडियो से कोई समस्या नहीं पैदा होती है।”

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने इस मामले का पटाक्षेप करने के लिए कहा कि ऐसे कृत्यों से आम जनता में विभाजनकारी प्रभाव पड़ेगा इसलिए प्रदर्शन में शामिल व्यक्ति से पुलिस अधिकारी बातचीत करेंगे। गौरतलब है कि जिस जिहाद शब्द का लंदन पुलिस बचाव कर रही है वह अरबी शब्द है। अरबी भाषा में इसका अर्थ ‘लड़ाई’ या ‘संघर्ष’ होता है जिसके जरिए इस्लाम का प्रसार किया जाए।

मेट्रोपोलिटन पुलिस जिहाद पर स्पष्टीकरण देने के बाद इस्लामिक झंडों पर भी ज्ञान देने लगी। लंदन पुलिस ने एक जिहादी द्वारा हमास के समर्थन में लहराए जा रहे इस्लामी झंडे पर भी ट्वीट किया – “इस फोटो में दिख रहे झंडे ISIS के नहीं हैं। ये ‘शहादा’ हैं जो कि इस्लाम में आस्था जाहिर करने का प्रतीक हैं। ISIS के झंडे दिखने में ऐसे ही होते हैं लेकिन दोनों समान नहीं हैं। हमारे पास इस मामले के विशेषज्ञ अफसर हैं जिनके पास झंडों के विषय में जानकारी है।”

यह बात अलग है कि लोगों ने चिंता ISIS जैसे झंडे दिखने की नहीं बल्कि हमास के लिए उभरते समर्थन को लेकर जताई थी। हालाँकि, मेट्रोपोलिटन पुलिस के इस्लामिक कट्टरपंथियों के बचाव को लोगों ने आड़े हाथों लिया।

उन्होंने मेट्रोपोलिटन पुलिस के ट्वीट के नीचे एक ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ कर कहा कि यह झंडा ISIS का नहीं है लेकिन खिलाफत और अल कायदा द्वारा उपयोग किया जाता रहा है। झंडा लहराने वाला “अल्लाह यहूदियों का नाश करे”, “इस्लामिक स्टेट” जैसे नारे अरबी में लगाते हुए सुना जा सकता है।

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस का इस्लामिक कट्टरपंथ के बचाव का यह कोई पहला मामला नहीं है। वह लंदन के भीतर हमास जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों के समर्थन में होने वाली रैलियों को रोकने में असफल रहे हैं। लंदन पुलिस के अलावा इंग्लैंड की ही लेस्टर पुलिस भी इस्लामी कट्टरपंथियों का साथ देती आई है। हाल ही में लेस्टर पुलिस के एक अधिकारी मोहम्मद अहद ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की कथा में जाने वालों को रोका था। उसने गणेश पूजा में शामिल होने वाले वृद्ध पुजारियों से भी बदतमीजी की थी।

लेस्टर पुलिस के अधिकारी ने इससे पहले 2022 में यह फर्जी दावा किया था कि हिन्दुओं ने पाकिस्तान और मुस्लिमों के विरुद्ध नारे लगाए। इसके पश्चात इस इलाके में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं को काफी परेशान किया था।

मस्जिद के अंदर गोला-बारूद, तहखाने में क्रेन भी, बच्चों के खेलने की जगह में बम-बोरियाँ: इजरायल ने उड़ा डाली अल अंसार मस्जिद

इजरायली सुरक्षा बलों ने फिलीस्तीन के वेस्ट बैंक इलाके में स्थित अल अंसार मस्जिद को एक हवाई हमले में उड़ा दिया है। इजरायली सुरक्षा बलों ने बताया है कि इस मस्जिद के नीचे बने तहखाने में इस्लामी आतंकी संगठन हमास और फिलीस्तीनी इस्लामी जिहाद के आतंकी इजरायल पर बड़े हमले की योजना बना रहे थे।

इजरायली सुरक्षा बलों ने हमले को लेकर जारी किए गए बयान में इसे इस्लामी आतंकी सगठन हमास का कमांड सेंटर बताया है। उनके अनुसार बताया गया है कि यह मस्जिद इजरायल पर हमले करने के लिए जुलाई 2023 के बाद से बेस की तरह उपयोग की जा रही थी।

इजरायली सुरक्षा बलों ने इस संबंध में कई तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं। इन तस्वीरों में से कुछ में मस्जिद के भीतर रखा गया गोला-बारूद जबकि एक तस्वीर में तहखाने का रास्ता दिखता है।

बच्चों के खेलने के मैदान के पास गोला बारूद छुपाया गया था (चित्र साभार: @IAFSite/X)

इजरायली सुरक्षा बलों ने तस्वीरों में दिखाया है कि मस्जिद के अंदर बच्चों के खेलने की जगह की आड़ में दो मंजिलों पर गोला-बारूद-बोरियाँ रखे थे। तहखाने से गोला-बारूद ऊपर लाने के लिए छोटी क्रेन भी मस्जिद के अंदर लगाई गई थी। फिलीस्तीनी एजेंसियों ने इस हमले में एक व्यक्ति के मौत की पुष्टि की है।

आतंकी तहखाने में जाने का रास्ता (चित्र साभार: @IAFSite/X)
आतंकियों द्वारा बनाया गया तहखाने का रास्ता और क्रेन (चित्र साभार: @IAFSite/X)

गौरतलब है कि यह मस्जिद उस इलाके में मौजूद है, जो इजरायल और हमास के बीच लड़ाई चालू होने के बाद भी तुलनात्मक रूप से शांत रहा है। इजरायल ने अपने सभी हमलों का मुख्य निशाना अभी गाजा पट्टी को बनाया है, जबकि यह हमला वेस्ट बैंक में हुआ है।

इजरायली सुरक्षा बलों ने कहा है कि उन्होंने इस हमले में ऐसे आतंकियों को मार गिराया है, जो कि उसके निर्दोष नागरिकों पर हमले में शामिल थे। यह हमला एक ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर किया गया। हालाँकि, इजरायल ने मारे जाने वाले आतंकियों की सँख्या या उनके नाम आदि की जानकारी नहीं दी है।

इजरायल के इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिसमें मस्जिद के आसपास मलबा बिखरा दिखता है और लोग एम्बुलेंस की तरफ भागते हैं।

7 अक्टूबर को इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले में अब तक 1,400 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में अब तक 4,300 से अधिक फिलीस्तीनी आतंकी मारे जा चुके हैं। दोनों तरफ घायलों की संख्या भी हजारों में है।

इजरायल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में अपने हमलों में और तेजी लाएगा और इसके लिए उसने गाजा के नागरिकों को दक्षिण दिशा में जाने को कहा है। इजरायल के जल्द ही गाजा के भीतर सेना भेजने की बात भी कही जा रही है।

लखनऊ के सरकारी स्कूल में नमाज: इंचार्ज मीरा यादव सस्पेंड, सहायक अध्यापिका तहजीब फातिमा, शिक्षामित्र ममता मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं को नमाज़ पढ़ाने का मामला सामने आया है। इस मामले में हुई विभागीय जाँच में 3 कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। स्कूल की इंचार्ज मीरा यादव को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं सहायक अध्यापिका तहजीब फातिमा और शिक्षामित्र ममता मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। शनिवार (21 अक्टूबर 2023) को इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला लखनऊ के ठाकुरगंज थानाक्षेत्र का है। यहाँ के नेपियर रोड पर एक सरकारी प्राइमरी स्कूल है, जहाँ लगभग 106 छात्र-छात्राएँ पढ़ाई करते हैं। स्कूल के आसपास मिश्रित आबादी है। विद्यालय में मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने का भी दावा किया जा रहा है। शनिवार को यहाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वायरल वीडियो में दीवार के पास कुछ छात्राएँ हिजाब में दिख रही हैं। वो एक जगह खड़ी हो कर नमाज़ पढ़ती दिख रही हैं।

यह वीडियो एक दिन पहले शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को हुई जुमे की नमाज़ का बताया जा रहा। इसे स्कूल की बॉउंड्री से बाहर खड़े होकर किसी व्यक्ति ने बनाया था। वीडियो बनाने वाले ने ये नजारा पहली बार देखने का दावा किया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्कूल में हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया। हिन्दू संगठन के लोग जब स्कूल पहुँचे, तब उन लोगों की इंचार्ज मीरा यादव से बहस भी हुई। इस बहस का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

मीरा यादव तो विरोध कर रहे लोगों को ही हड़काती नजर आईं। उन्होंने कॉल करके अधिकारियों को बुलाने की धमकी भी दी थी। साथ ही स्कूल में नमाज़ का विरोध कर रहे लोगों से कहा था, “दिमाग खराब कर रखा है। खाला जी का घर समझ रखा है क्या, जो चले आए।” इंचार्ज मीरा यादव ने विरोध करने वाले लोगों पर बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब करने का आरोप लगाया और 3 बजे के बाद आने के लिए कहा।

विवाद बढ़ने के बाद यह मामला लखनऊ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार के संज्ञान में आया। उन्होंने फ़ौरन ही इस मामले में जाँच कमिटी का गठन करते हुए जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। जाँच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) को सौंप दी। इस रिपोर्ट में स्कूल की इंचार्ज मीरा यादव के साथ सहायक अध्यापिका तहजीब फातिमा और शिक्षामित्र ममता मिश्रा को भी दोषी बताया गया।

जाँच रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया दोषी पाने पर अधिकारियों ने इंचार्ज मीरा यादव को निलंबित करते हुए ममता मिश्रा और तहजीब फातिमा को चेतावनी जारी की है। मामले की विस्तृत जाँच अभी जारी है। जाँच अधिकारी खंड शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार को यह रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए 15 दिनों में अधिकारियों के पास भेजनी है। निलंबित मीरा यादव को उनके पद से हटा कर ब्लॉक संसाधन केंद्र अटैच कर दिया गया है।

‘गाजा से रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह (अल्लाह के अलावे किसी की पूजा/इबादत नहीं)’ – मुंबई में चिल्लाई मुस्लिम भीड़, सपा नेता अबू आज़मी का है रोल

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को फिलिस्तीन के समर्थन में कट्टर मुस्लिम भीड़ ने प्रदर्शन किया। इस भीड़ का नेतृत्व समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी कर रहे थे। इस दौरान मौजूद लोगों ने इजरायल के विरोध में नारेबाजी की। इसी के साथ AMU की तरह यहाँ भी ‘लब्बैक या अक्सा’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह’ के नारे लगे। इसी कार्यक्रम में अबू आज़मी ने राम मंदिर पर भी टिप्पणी की।

सोशल मीडिया के X प्लेटफॉर्म पर अफ़जाल ने अपने हैंडल @afzalstxr से इस प्रर्दशन के वीडियो 20 अक्टूबर को रात लगभग 11:40 पर शेयर किया है। इस वीडियो में कैप्शन के तौर पर उन्होंने मुंबई वालों को एकजुट होकर फिलिस्तीन के साथ खड़ा बताया है। साथ ही उन्होंने 2 बार फ्री फिलिस्तीन लिखते हुए ट्विटर पर गाजापट्टी से जुड़े वायरल टैग भी लगाए हैं। इन टैग में बमबारी में ध्वस्त अस्पताल का भी जिक्र है, जिसके लिए इजरायल ने हमास को जिम्मेदार ठहराया है।

18 सेकंड लम्बे इस वीडियो में भीड़ में कई लोग फिलिस्तीन के झंडे लहराते दिखाई दे रहे। पहले काफी देर तक नारेबाजी में ‘लब्बैक या अक्सा’ बोला जाता है। इसका हिंदी में अर्थ है कि ‘अल अक्सा मस्जिद, मैं तुम्हारे लिए हाजिर हूँ।’ वहीं इसी वीडियो के अंत में भीड़ ने ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह’ का नारा लगाया।

नीचे लगे दूसरे वीडियो में और भी स्पष्ट सुना जा सकता है। इसमें बोला जा रहा है: “तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह… गाजा से है रिश्ता क्या, ला इलाह इल्ललाह।”

ला इलाह इल्ललाह मुस्लिमों के कलमा तय्यब से ली गई एक लाइन है। इसका मतलब है कि अल्लाह के सिवाय कोई और पूजा या इबादत करने योग्य नहीं है। इस नारेबाजी का अर्थ होता है कि ‘हम कलमे की बुनियाद पर एक हैं।’

3 दिन पहले ही किया था प्रदर्शन का एलान

फिलिस्तीन के समर्थन में नारेबाजी के साथ हुए इस प्रर्दशन की घोषणा सपा नेता अबू आज़मी ने 17 अक्टूबर को ही कर दी थी। तब उन्होंने अपने X हैंडल पर पोस्टर शेयर करते हुए मुंबई के मरीन लाइन क्षेत्र में शाम 7 बजे सभी से इस्लाम जिमखाना पर जमा होने की अपील की थी। अबू आज़मी द्वारा शेयर हुए पोस्टर का स्लोगन था, “फिलिस्तीन के लिए दुआ करें।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रदर्शन में अबू आज़मी ने भगवान राम के मंदिर पर टिप्पणी की और अपनी आस्था मस्जिद में दिखाई। साथ ही आज़मी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के खिलाफ भी बयानबाजी की थी।

AMU से लेकर झारखंड तक एक जैसे नारे

इससे पहले फिलिस्तीन के समर्थन में मुस्लिम भीड़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और झारखंड के जमशेदपुर में नारेबाजी कर चुकी है। AMU में भी इसी तरह ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या ला इलाह इल्ललाह’ के नारे लगे थे। वहीं ‘लब्बैक या अक्सा’ का नारा न सिर्फ मुंबई, AMU और झारखंड में लग रहा बल्कि इसे दुनिया के कई देशों में हो रहे प्रदर्शनों में सुना जा सकता है।

4 साल की बच्ची से केरल में रेप: CCTV में पीड़िता को कारखाने के पीछे ले जाते दिखा असम का सजालल, बच्ची की माँ के साथ करता था काम

केरल के पेरम्बवूर से 4 वर्ष की एक बच्ची के साथ यौन दुष्कर्म का मामला सामने आया है। बच्ची लकड़ी के प्लाईवुड कारखाने पर काम करने वाली एक प्रवासी महिला की है, जिसके साथ यौन अपराध किया गया।

इस मामले में पाँच लोगों को हिरासत में लिया गया था और पूछताछ के बाद एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है जिसका संबंध असम से है। जानकारी के अनुसार, बच्ची ने अपनी माँ से दर्द की शिकायत की, जिसके पश्चात वह उसे अस्पताल लेकर पहुँची। अस्पताल में बच्ची के साथ यौन दुष्कर्म का मामला खुला।

बताया गया कि बच्ची स्कूल से वापस आने के बाद अपनी माँ के पास प्लाईवुड कारखाने पर जाती थी। इसी दौरान शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को आरोपित ने बच्ची को फैक्ट्री के पीछे ले जाकर दुष्कर्म किया। मीडिया रिपोर्ट में पहले 2 लोगों के गिरफ्तारी की खबर आई थी – सजालल और उबैदुल्लाह। बाद की मीडिया रिपोर्ट में एक की गिरफ्तारी कंफर्म हुई है।

जिस व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उसका नाम सजालल है और वह पीड़िता की माँ के साथ ही काम करता है। पुलिस द्वारा सीसीटीवी खँगालने पर वह घटना के समय बच्ची को कारखाने के पीछे ले जाते हुए दिखता है। उसने दो सप्ताह पहले ही इस फैक्ट्री में काम करना चालू किया था।

इस मामले में बच्ची का मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के पश्चात पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। एर्नाकुलम ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने इस मामले में बताया कि बच्ची ने आरोपित की पहचान फोटो से की है। बच्ची का बयान भी दर्ज कर लिया गया है।

विवेक कुमार ने यह भी बताया कि इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। इस घटना में भी पीड़िता और आरोपित दोंनों ही प्रवासी हैं। इलाके में प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण करवाया जा रहा है और अब तक 1.2 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण किया जा चुका है। इससे उनके आपराधिक रिकॉर्ड आदि को जानने में मदद मिलेगी।