हमास के आतंकी हमले में इजरायल में जो लोग मारे गए हैं उनमें भारतीय मूल की यहूदी टीवी एक्ट्रेस मधुरा नायक की बहन और बहनोई भी हैं। दोनों की उनके बच्चों के सामने ही बेरहमी से हत्या कर दी गई। टीवी सीरियल ‘नागिन’ से पहचान बनाने वाली मधुरा ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार का दर्द साझा किया है।
उन्होंने पोस्ट कर बताया है कि इस बेरहम हत्या से उनका पूरा परिवार सदमे और दुख में है। उन्होंने बताया कि रविवार (8 अक्टूबर 2023) को उन्हें अपनी चचेरी बहन और उनके पति की हत्या की सूचना मिली थी।
कई डेली सोप ओपेरा में नेगेटिव रोल से भारतीय टीवी इंडस्ट्री में अपनी पहचान कायम कर चुकी मधुरा नायक ने बताया कि यह घटना 7 अक्टूबर की है। उन्होंने इंस्टा वीडियो में कहा है, “मैं, मधुरा नाइक, भारतीय मूल की यहूदी हूँ। अब भारत में हमारी संख्या केवल 3000 है। 7 अक्टूबर को हमने अपने परिवार से एक बेटी और एक बेटे को खो दिया। मेरी चचेरी बहन ओदाया और उसके पति की उनके दो बच्चों के सामने बेरहमी से हत्या कर दी गई। आज मुझे और मेरे परिवार को जिस दुख और दर्द की भावनाओं का सामना करना पड़ रहा है, उसे लफ्जों में बयाँ नहीं किया जा सकता है। आज तक, इजरायल दर्द में है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और कमजोरों को निशाना बनाया जा रहा है।”
इस दौरान मधुरा ने यह भी बताया कि फिलिस्तीन समर्थकों ने उन्हें उनकी एक अन्य पोस्ट पर बेइज्जत किया था। इन लोगों ने उन्हें यहूदी होने के वजह से जलील किया। उन्हें कोसा। एक्ट्रेस ने वीडियो में कहा, “अपना दर्द शेयर करने के लिए मैंने अपनी बहन और परिवार की एक फोटो पोस्ट की और यह देखकर हैरान रह गई कि फिलिस्तीन समर्थक दुष्प्रचार कितना गहरा है। यहूदी होने के वजह से मुझे अपमानित किया गया। आज मैं अपनी भावनाओं को आवाज देना चाहताी हूँ। अपने फॉलोवर्स, दोस्तों, शुभचिंतकों और उन लोगों से जिन्हें मैं प्यार करती हूँ, को ये सब बताना चाहती हूँ।”
दरअसल 9 अक्टूबर को मधुरा ने अपनी चचेरी बहन के फोटो के साथ लिखा था, “आतंकवादी हमले में अपनी प्यारी कजन को खोने से गहरे दुख में हूँ। उसकी गर्मजोशी, दयालुता और प्यार हमेशा याद रखा जाएगा। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ उनके और सभी पीड़ितों के साथ है। उन्हें चिरशांति मिले। इस मुश्किल वक्त में हमारे और इजरायल के लोगों के साथ खड़े रहें। अब वक्त आ गया है कि लोग इन आतंकवादियों की वास्तविकता देखें और देखें कि वे कितने अमानवीय हो सकते हैं। ये बेहद हृदयविदारक है।”
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकवादी समूह हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया था। हमले में अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2,800 से अधिक लोग घायल हैं। हमास ने बड़ी संख्या में इजरायलियों को बंधक भी बनाया हुआ है। हमास ने इस हमले में एक जर्मन महिला को मार कर उसका नग्न शव गाजा की गलियों में प्रदर्शित किया था।
इस्लामी आतंकी संगठन हमास की बर्बरता ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। ज्यादातर देश इजरायल के साथ इस मुश्किल घड़ी में खड़े हैं। लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो मजहबी कट्टरपंथ के कारण फिलिस्तीन और हमास का भी समर्थन कर रहा है। इनमें भारत के भी मुस्लिम कट्टरपंथी शामिल हैं।
फेसबुक पर ‘राजधर्म पूर्वांचल’ नाम के पेज पर यह वीडियो अपलोड किया गया है। करीब 13 मिनट का यह वीडियो है। वीडियो में एक पत्रकार कुछ लोगों से इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया पूछ रहा है। पत्रकार पूछता है कि इजरायल-फिलिस्तीन में आप किसके साथ खड़े हैं। यह सवाल आप वीडियो में 4:00 मिनट से सुन सकते हैं।
नारंगी टीशर्ट पहने हुए एक युवक तुरंत जवाब देता है कि हम तो फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं। इस युवक के साथ बाकी टोपी पहने एक युवा उसकी बात का समर्थन करता है। अन्य युवा भी उसका समर्थन करते हैं।
इस पर पत्रकार पूछता है कि आखिर आप फिलिस्तीन के साथ क्यों खड़े हैं? इस प्रश्न के उत्तर में टोपी वाला युवक कहता है, “वो हमारे मियाँ भाई हैं। हम तो अपने मियाँ भाइयों के साथ खड़े हैं। वहाँ पर जुल्म हो रहा है।” टोपी वाले युवक की इस बात का वहाँ मौजूद अन्य मुस्लिम युवक भी समर्थन करते हैं।
टोपी वाला युवक इसके बाद कहता है कि फिलिस्तीन में बच्चा जीने के लिए नहीं, बल्कि मरने के लिए पैदा होता है। वहाँ बच्चा अल्लाह के लिए शहीद होने के लिए पैदा होता है। वहाँ बच्चा-बच्चा क्रिकेट-गुल्ली डंडा नहीं खेलता, वहाँ शहीद-शहीद खेलता है कि शहीद कौन होगा, शहीद कौन होगा?
गौरतलब है कि इजरायल पर हमास के हमले में अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2,800 से अधिक लोग घायल हैं। हमास ने बड़ी संख्या में इजरायलियों को बंधक भी बनाया हुआ है। हमास ने इस हमले में एक जर्मन महिला को मार कर उसका नग्न शव गाजा की गलियों में प्रदर्शित किया था।
हमास ने इजरायल के भीतर हमले के दौरान 40 बच्चों को भी मार दिया। उनकी लाशें इजरायली सुरक्षा बलों को बरामद हुई हैं। इस्लामी आतंकियों ने लकवाग्रस्त महिला तक को नहीं छोड़ा और उसकी भी हत्या कर दी।
Photos have emerged from Israel of charred bodies of Jewish children and women who were burnt alive by Hamas Islamist terrorists. Inhuman beasts. There are no rules of war when you are dealing with terrorists. Hamas should be eliminated soon. pic.twitter.com/3N2zCIXo8Y
इजरायल ने भी इसके जवाब में गाजा पट्टी पर हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 800 फिलिस्तीनियों की भी मौत हो चुकी है। कहा जा रहा है कि इजरायल जमीन के रास्ते अपनी सेना भेजने की तैयारी कर रहा है।
दिल्ली के उप-राज्यपाल विजय कुमार सक्सेना ने लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ अभियोग चलाने को मंज़ूरी दे दी है। ये मामला 2010 में दिए गए भड़काऊ भाषण का है। राज निवास के अधिकारियों ने मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) को इसकी जानकारी दी। अरुंधति रॉय के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के एक प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन के खिलाफ भी अभियोग चलाए जाने को मंज़ूरी दे दी गई है। नई दिल्ली स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद इन दोनों के विरुद्ध FIR दर्ज की गई थी।
शेख शौकत हुसैन ‘सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर’ में इंटरनेशनल लॉ का प्रोफेसर रहा है। उप-राज्यपाल ने पाया कि दोनों के खिलाफ मामला चलाए जाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। दोनों के खिलाफ IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (धर्म, नस्ल, स्थान या भाषा के आधार पर 2 समुदायों में नफरत पैदा करना, शांति भंग करना), 153B (राष्ट्रीय अखंडता के विरुद्ध बातें करना) और 505 (भड़काऊ बयान देना) के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है।
दिल्ली में ही एक भाषण के दौरान इन दोनों ने इस तरह की बयानबाजी मंच से की थी। दोनों के खिलाफ IPC की धारा-124A (राजद्रोह) के तहत भी मुकदमा चलाया जाना था, लेकिन ये संभव नहीं हो सका क्योंकि इस धारा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उसकी संवैधानिक पीठ की सुनवाई पूरी होने तक सारे मामले रोक दिए जाएँ। इस मामले में 2 अन्य अभियुक्त अलगाववादी सैयस अली शाह गिलानी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेक्चरर रहे अब्दुल रहमान गिलानी की मौत हो चुकी है।
Delhi LG V K Saxena has sanctioned for prosecution of Arundhati roy for an FIR registered in 2010.
Arundhati Roy had said, “Kashmir is not an integral part of India, and it never was.”
28 अक्टूबर, 2010 को कश्मीरी कार्यकर्ता सुशील पंडित ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। ‘आज़ादी – द ओनली वे’ के बैनर तले इस कार्यक्रम को आयोजित किया गया था और इसमें ‘सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त करने के लिए कमिटी (CRPP)’ ने इसे आयोजित किया था। इसमें कश्मीर को शेष भारत से अलग करने की बात की गई थी। अरुंधति रॉय ने कहा था कि कश्मीर कभी भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने झूठा दावा किया था कि भारतीय अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र में इसे स्वीकार किया है।
भारत विरोधी अरुंधति रॉय ऐसे ही झूठ फैलाने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी न केवल पीएम केयर्स फंड के बारे में झूठ बोला, बल्कि भारत के टीकाकरण अभियान और SII और भारत बायोटेक द्वारा विकसित COVID-19 टीकों के बारे में भी गलत सूचनाएँ फैलाई थीं। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार मुस्लिमों का नरसंहार करने के लिए कोरोनावायरस के प्रकोप का उपयोग कर रही है।कश्मीर में आतंकवाद निरोधी अभियानों को उन्होंने लगातार ‘सरकार प्रायोजित’ आतंकवाद के रूप में संदर्भित किया था।
हमास के आतंकवादियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल में घुसकर नरसंहार किया है। 40 से ज्यादा बच्चों समेत दर्जनों लोगों को एक गाँव में ही मार डाला है। टाइम्स ऑफ इजरायल में प्रकाशित खबर के अनुसार एक रिपोर्टर को आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्स) कमांडर ने परिवार सहित दर्जनों बच्चों के नरसंहार की बात बताई। निकोल जेडेक नाम की इस रिपोर्टर ने यह भी बताया कि कमांडर के बताए अनुसार 40 बच्चों की हत्या वाली संख्या बढ़ सकती है क्योंकि इजरायली सैनिक घर-घर जाकर अभी भी तलाशी कर रहे हैं।
Soldiers told me they believe 40 babies/children were killed. The exact death toll is still unknown as the military continues to go house to house and find more Israeli casualties. https://t.co/PEGSFXgb9x
कुछ मीडिया ने 40 बच्चों का गला काटे जाने वाली घटना को अफवाह बताया है। प्रेस एजेंसी एन्डोलू (Anadolu) ने ट्वीट कर बताया है कि इजरायली सेना से जब उन्होंने संपर्क किया तो हमास द्वारा बच्चों के गला काटे जाने वाली बात की पुष्ट जानकारी होने से इनकार किया।
#BREAKING Israeli army tells Anadolu that they have no information confirming allegations that ‘Hamas beheaded babies’ pic.twitter.com/fQJA7ui9bE
प्रेस एजेंसी एन्डोलू के उलट i24 न्यूज इंग्लिश के वीडियो ट्वीट में एक इजरायली सैनिक को स्पष्ट सुना जा सकता है कि हमास आतंकियों ने महिलाओं और बच्चों का गला-सिर काटा है।
"They chopped heads of children and women," says David Ben Zion, Deputy Commandee of Unit 71 to our @Nicole_Zedek, while reporting from the massacre in Kfar Aza in southern Israel pic.twitter.com/IHSB0ywMbF
जिस गाँव में हमास आतंकियों ने नरसंहार मचाया, 4 दिन बाद भी वहाँ मारे गए लोगों के घरों के दरवाजे खुले हैं, हर तरफ पूरे गाँव में लाशें बिखरी पड़ी हैं। ये भयावह खबरें तब सामने आई, जब इजरायली सेना ने फिर से उस गाँव का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और हमास के आतंकियों को अपने देश से खदेड़ा, या फिर उसी गाँव में उन्हें मार डाला।
इस गाँव में जहाँ-तहाँ हमाज के आतंकियों की लाशें भी अब बिखरी पड़ी दिखाई दे रही हैं। यहाँ एक ऐसी महिला का शव मिला है, जिसका बच्चा गोलियों की बौछार की वजह से पेट से निकल गया और वो अभी भी गर्भनाल से जुड़ा हुआ है। दोनों की जानें जा चुकी हैं।
पूरे गाँव में नरसंहार, 40 से ज्यादा बच्चों का कल्तेआम
हमास के आतंकियों ने गाजा पट्टी से महज 400 मीटर दूर स्थित किबुत्ज़ कफ़र अज़ा में मौत का नंगा-नाच किया है। यहाँ हर तरफ मौत ही मौत है। 100 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। इन गाँव पर अभी-अभी इजरायली सेना ने वापस कब्जा किया है। लोगों के घर खुले हुए हैं। बड़े, बुजुर्ग, बच्चे सब मारे जा चुके हैं, तो जवान लोगों को संभवत: बंदी बनाकर गाजा पट्टी ले जाया गया है। किबुत्ज़ कफ़र अज़ा में 40 से अधिक नवजातों/बच्चों को हमास के आतंकवादियों ने कसाइयों की तरह मारा, काट डाला है।
आई24 की रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ रेस्क्यू अभियान में पहुँचे रिजर्व सैनिकों को भयावह हालात का सामना करना पड़ रहा है। 100 से अधिक शवों को निकालने के क्रम में उन्हें 40 से अधिक बच्चों, जिसमें कुछ दुधमुँहे बच्चे भी हैं, उनके भी शव मिले हैं, कईयों के सिर धड़ से अलग किए जा चुके हैं। पहली बार इजरायल ने हमास के कब्जे में गए इलाकों में मीडिया को जाने दिया है, मीडिया के कैमरों में जो कुछ भी कैद हो रहा है, वो बेहद भयावह है।
i24NEWS Correspondent @Nicole_Zedek reports from Kibbutz Kfar Aza, a quarter-mile from the Gaza border, and recounts the atrocities that were committed in the small community which remains an active scene as soldiers clear booby traps and recover the bodies of dozens of victims pic.twitter.com/J4ZfWZQYHp
इस पूरे गाँव में खड़ी कारों को जलाया जा चुका है। ये तो विनाश का महज एक छोड़ा सा हिस्सा है। अभी तक सभी शव निकाले नहीं जा सके हैं। मृतकों का आंकड़ा कहीं ज्यादा बढ़ सकता है, क्योंकि और शव अभी घरों से निकाले जा रहे हैं। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, हमास के हमले में अब तक 900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
येरुशलम पोस्ट के संपादक एवी मेयर ने भयावह जानकारी दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दक्षिणी इज़राइल की कहानियाँ प्रति घंटे बदतर होती जा रही हैं। एक महिला की हत्या कर दी गई और उसके बगल में एक भ्रूण था, जो अभी भी गर्भनाल से जुड़ा हुआ था। एक बुजुर्ग महिला खून से लथपथ मिली, उसके शरीर पर गोलियों के निशान थे। पूरे परिवार अपने घरों में जलकर मरे हुए पाए गए।”
The stories from southern Israel get worse by the hour.
A woman found murdered with a fetus next to her, still attached to its umbilical cord.
An elderly woman found in a pool of blood, her body riddled with bullet holes.
Entire families found burned to death in their homes.
हमास के आतंकवादियों के इस हमले के चार दिन बाद आईडीएफ मेजर जनरल इताई वेरुव भी उस जगह पहुँचे। उन्होंने हमास की ज्यादतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि घरों में घुसकर हमले किए गए हैं। पूरे के पूरे परिवार खत्म कर दिए गए हैं। कफ़र अज़ा में ये युद्ध नहीं है, बल्कि ये नरसंहार है।
'It's not a war, it's not a battle. It's a massacre'
Journalists are let into Kfar Aza for the first time, four days after the community came under the shock attack by Hamas terrorists
IDF Major General Itai Veruv describes the scene of brutal violence, where whole families… pic.twitter.com/HJzoMKj2Ta
हमास के आतंकी शनिवार (7 अक्टूबर, 2023) से ही इजरायल में कत्लेआम मचा रहे हैं। हर तरफ लोगों की लाशें बिखरी मिलीं। हमास के आतंकवादी जल, थल, वायु मार्ग से इजरायल में घुसे और जो भी सामने आया, उसे मारते गए। दर्जनों लोगों को बंदी बनाकर हमास के आतंकी गाजा पट्टी ले गए। शाम होते-होते इजरायल ने पलटवार किया। इजरायल ने योम किंपुर युद्ध के बाद पहली बार युद्ध की आधिकारिक घोषणा कर दी, और तब से लेकर अब तक उसने गाजा पट्टी का सीज तो डाला ही है, सैकड़ों हमास के लड़ाकों को मार डाला है।
इजरायल-हमास युद्ध को लेकर दुनिया दो खेमों में बँट गई है। फिलिस्तीन के समर्थन में सबसे ज्यादा हल्ला मचाने वाले देशों में पाकिस्तान भी एक है, जो खुद हजारों फिलिस्तीनियों की हत्याओं में भागीदार रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि पाकिस्तान तो फिलीस्तीन का समर्थन करता है? वो तो इजरायल को मान्यता भी नहीं देता। ऐसे में वो फिलीस्तीनियों को कैसे मार सकता है? तो इसका जवाब छिपा है ‘ब्लैक सितंबर’ के दो शब्दों में।
इसमें पाकिस्तान से ट्रेनिंग पाकर जॉर्डन की सेनाओं ने PLO (पलेस्टाइन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन) के लड़ाकों को तहस-नहस कर दिया था और अपनी जमीन पर उनका सफाया करते हुए अपनी सीमा से बाहर खदेड़ दिया था। ‘ब्लैक सितंबर’ की घटना 1970 की है, जब ‘फिलीस्तीन मुक्ति संगठन’ को जॉर्डन की जगह लेबनान शिफ्ट करना पड़ा था। आइए, बताते हैं कि किस तरह से पाकिस्तान ने हजारों फिलिस्तीनियों के कल्तेआम में अहम भूमिका निभाई।
क्या है ‘ब्लैक सितंबर’?
‘ब्लैक सितंबर’ 1970 में जॉर्डन में हुआ एक गृहयुद्ध था, जिसमें जॉर्डन की सेना और ‘फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन’ के बीच लड़ाई हुई थी। यह युद्ध 6-27 सितंबर तक चला और इसमें हजारों लोग मारे गए। युद्ध की शुरुआत तब हुई जब पीएलओ ने जॉर्डन की सरकार को चुनौती देने और जॉर्डन को एक फिलिस्तीनी राज्य बनाने की कोशिश की। पीएलओ ने जॉर्डन में कई हमले किए, जिसमें कई बेगुनाह लोग मारे गए। बता दें कि 2015 की जनगणना में कहा गया है कि देश की 9.5 मिलियन आबादी में से लगभग 6,34,000 फ़िलिस्तीनी हैं।
जॉर्डन की सेना ने पीएलओ के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया। 17 सितंबर को, जॉर्डन की सेना ने पीएलओ के ठिकानों पर हमला करना शुरू कर दिया। पीएलओ ने भी जवाबी हमले किए, जिसमें कई नागरिक मारे गए। युद्ध के अंत में, जॉर्डन की सेना ने पीएलओ को हराया। पीएलओ को जॉर्डन से निकाल दिया गया और फिलिस्तीनियों को अपने ठिकानों से हटने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद पीएलओ ने लेबनान को अपना ठिकाना बनाया। ‘ब्लैक सितंबर’ जॉर्डन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस युद्ध ने फिलिस्तीनियों और जॉर्डन के बीच संबंधों को खराब कर दिया और मध्य-पूर्व में संघर्ष को बढ़ावा दिया।
पाकिस्तान ने जॉर्डन की सेना को दी थी ट्रेनिंग
‘ब्लैक सितंबर’ के लिए जॉर्डन की सेना को प्रशिक्षण पाकिस्तान ने दिया था। पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक ने जॉर्डन के शासक शाह हुसैन को युद्ध में निर्णायक सलाह दी थी। उन्हीं की सलाह से जॉर्डन की सेना को युद्ध जीतने में मदद मिली। जिया-उल-हक उस समय ओमान में पाकिस्तानी दूतावास में डिफेंस अटैचे के रूप में तैनात थे। उन्होंने शाह हुसैन से संपर्क किया और उन्हें सलाह दी कि जॉर्डन की सेना को पीएलओ के खिलाफ लड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। जिया-उल-हक ने जॉर्डन की सेना को गश्ती, हवाई हमलों और शहरी युद्ध में प्रशिक्षण दिया।
इस प्रशिक्षण ने जॉर्डन की सेना को पीएलओ के खिलाफ लड़ने में काफी मदद की। 17 सितंबर को, जॉर्डन की सेना ने पीएलओ के ठिकानों पर हमला करना शुरू कर दिया। पीएलओ ने भी जवाबी हमले किए, लेकिन जॉर्डन की सेना ने अंततः पीएलओ को हराया। जिया-उल-हक की सलाह और प्रशिक्षण ने जॉर्डन की सेना को ब्लैक सितंबर युद्ध जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस युद्ध ने जॉर्डन और पाकिस्तान के बीच संबंधों को मजबूत किया।
ब्रिटिश-पाकिस्तानी लेखक तारिक अली ने अपनी पुस्तक ‘द ड्यूएल: पाकिस्तान ऑन द फ़्लाइट पाथ ऑफ़ अमेरिकन पावर’ में ब्लैक सितंबर के महत्व पर प्रकाश डाला है। वह एक इजरायली सैन्य कमांडर मोशे दयान का हवाला देते हैं, जिन्होंने कहा था कि इजरायल 20 वर्षों में जितने फिलिस्तीनियों को नहीं मार सकता था, उससे अधिक फिलिस्तीनियों को राजा हुसैन ने 11 दिनों में मरवा डाला था।”
‘ब्लैक सितंबर’ की घटना के पीछे की वजह क्या थी?
इजरायल पर 1948 में अरब देशों ने हमला कर दिया था। इस युद्ध में जॉर्डन की सेनाओं ने ‘वेस्ट बैंक’ का हिस्सा जीत लिया। जॉर्डन ने आधिकारिक तौर पर साल 1950 में वेस्ट बैंक को अपने देश में शामिल कर लिया और सभी फिलिस्तीनियों को अपने देश की नागरिकता दे दी। जॉर्डन ने फिलीस्तीन की आबादी को ध्यान में रखते हुए अपनी असेंबली में भी सीटें दे दी। इसके बाद इलाके में तनाव धीरे-धीरे फैलता गया।
फिलिस्तीनियों का रहनुमा बनने के चक्कर में मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, इराक सभी ने अपनी-अपनी ताकत झोंक दी। इसके बाद आया साल 1967, जिसमें ‘सिक्स डे वॉर’ में इजरायल ने जॉर्डन की पूरी सेना को नष्ट करते हुए वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया। फिलीस्तीनी भागकर जॉर्डन के अंदरुनी हिस्से में आ गए। वो फिर से इजरायल को खत्म करने के लिए एकजुट होने लगे।
साल 1968 में करामेह की लड़ाई हुई, जिसमें इजरायली सेना ने पीएलओ के ट्रेनिंग कैंपों पर धावा बोल दिया था। जॉर्डन की सेना ने पूरा सहयोग दिया, इसके बावजूद इजरायल ने पीएलओ के सारे कैंप नष्ट कर दिए, दर्जनों पीएलओ लड़ाकों को उन्होंने बंदी बना लिया। करामेह की लड़ाई में इजरायल को सैनिकों की संख्या की दृष्टि से काफी नुकसान हुआ। जॉर्डन और अरब देशों ने इसे फिलीस्तीन की जीत के तौर पर दिखाया।
जॉर्डन के शाह ने भी इस जीत का कोई क्रेडिट लेने की जगह ‘फिलीस्तीनी मुक्ति संगठन’ को ही क्रेडिट दिया। ये उनकी भूल साबित हुई, क्योंकि इसके बाद शुरू हुआ पीएलओ ( तब दुनिया का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन) की हिंसाओं का दौर, जिसमें कई बार प्लेन भी हाईजैक किए।
यही नहीं, अब फिलीस्तीन के लड़ाके जॉर्डन को ही फिलीस्तीन बनाने पर अड़ गए। उन्होंने जॉर्डन के शाह की दो बार हत्या की नाकाम कोशिश की। इस दौरान इराक, सीरिया और जॉर्डन में पीएलओ से जुड़े संगठनों के 20 हजार से ज्यादा लड़ाके तैयार हो गए। लेबनान से लेकर कतर तक में लोगों पर लेवी लगाई गई, वसूली की गई और फिलीस्तीन के लड़ाकों को फंड दिया गया। इस दौरान पीएलओ में शामिल फतह के लड़ाकों (जिसकी अगुवाई खुद यासिर अराफात करते थे) ने जॉर्डन के शाह को हटाने की कोशिश की और जॉर्डन के शहरों पर ही कब्जे जमाने शुरू कर दिए। वो आम लोगों से टैक्स तक की वसूली करने लगे।
इन सबके बीच साल 1970 में 1 सितंबर को पीएलओ के लोगों ने तीन प्लेन हाईजैक किए और उनपर से यात्रियों को उतार कर उन्हें पूरी दुनिया की प्रेस के सामने धमाकों से उड़ा दिया। अब ये तय हो गया था कि जॉर्डन के शाह की कुर्सी चली जाएगी और पीएलओ पूरे देश पर कब्जा जमा लेगा, तो जॉर्डन के शाह ने पीएलओ के सफाए का अभियान चलाया। सितंबर 1970 में चले इसी अभियान को ‘ब्लैक सितंबर’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें हजारों पीएलओ लड़ाकों की जान गई और उन्हें लेबनान में भागकर जाना पड़ा।
पाकिस्तान ने दी थी जॉर्डन की सेना को ट्रेंनिंग
1967 के छह दिवसीय युद्ध के बाद जॉर्डन की कमर टूट गई थी। उसने पाकिस्तान से अपनी सेना के पुनर्गठन में मदद माँगी थी। सिर्फ जॉर्डन ही नहीं, बल्कि सीरिया, इराक ने भी ऐसी ही मदद माँगी थी। पाकिस्तान ने जॉर्डन की सेना को पूरी ट्रेनिंग दी। जिया उल हक उसी दस्ते में शामिल अधिकारी थे।
खास बात ये है कि जब जॉर्डन की सेना पीएलओ के सफाए का अभियान चला रही थी, तभी सीरिया के इबलिस शहर से जॉर्डन पर धावा बोलने की तैयारी कर रहे पूरे दस्ते की जाँच के लिए जिया उल हक को जॉर्डन के शाह ने भेजा। उन्होंने शाह को जो सलाह दी, वो निर्णायक साबित हुई। शाह से उन्होंने एयरफोर्स की तैनाती के लिए कहा था और सीरिया से आने वाले दस्ते को रोकने के लिए खुद जॉर्डन की सेना की अगुवाई की थी। इस बात की तस्दीक सीआईए के अधिकारी जैक ओ’कॉनेल ने अपनी किताब में की है।
‘ब्लैक सितंबर’ की वजह से जिया उल हक को मिला ईनाम, बाद में बने तानाशाह
‘ब्लैक सितंबर’ की घटना के बाद जॉर्डन के शाह हुसैन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के सामने जिया उल हक की जमकर तारीफ की। जिया-उल-हक की ‘ब्लैक सितंबर’ युद्ध की उपलब्धियों के बारे में पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के बारे में बताया, जिसके बाद भुट्टो ने जिया-उल-हक को ब्रिगेडियर से मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत कर दिया।
जुल्फिकार अली भुट्टो के पूर्व सलाहकार राजा अनवर ने अपनी किताब ‘द टेररिस्ट प्रिंस’ (पेज नंबर -11) में प्रधानमंत्री भुट्टो के ग़लत फ़ैसलों के बारे में लिखा, कि अगर शाह हुसैन उस अवसर पर जिया-उल-हक की सिफ़ारिश न करते तो निश्चित रूप से जिया-उल-हक का सैन्य कैरियर ब्रिगेडियर के रूप में ही समाप्त हो जाता। उन्होंने लिखा है, “कहा जाता है कि जिया-उल-हक ने ‘ब्लैक सितंबर’ नरसंहार में भाग लिया था और अपनी सैन्य और राजनयिक ज़िम्मेदारियों की उपेक्षा की और नियमों का उल्लंघन किया था। लेकिन, शाह हुसैन की सिफ़ारिश ने शायद प्रधानमंत्री भुट्टो को यह संकेत दिया कि जिया-उल-हक उनके प्रति अपनी वफ़ादारी साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।”
फोटो साभार: The Terrorist Prince किताब का पेज नंबर-1
इस गलती की सजा भुट्टो को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी और पाकिस्तान आज जिस कट्टरपंथी युग में पूरी तरह से धँस चुका है, वो भी इसी गलती की वजह से ही है। क्योंकि भुट्टो को अंदाजा नहीं था कि जिस जिया उल हक को वो अपने ‘वफादार’ के तौर पर आगे बढ़ा रहे थे, वही उनकी बर्बादी का कारण बनेगा। जिया उल हक ने बाद में तख्तापलट करके भुट्टो को जेल में डलवा दिया और फिर फाँसी लगवा दी, ऐसा उन्होंने तानाशाह और राष्ट्रपति बनकर किया।
महाराष्ट्र पुलिस ने भगवान राम का भजन बजाने पर अमित परदेशी नाम के एक युवक पर बेरहमी से हमला करने के आरोप में सोमवार (9 अक्टूबर, 2023) को अदनान शेख, मोबिन शेख, शाहबाज़ शेख और अब्दुल सैय्यद पर केस दर्ज किया।
चारों आरोपितों पर ये केस भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 324, 323, 452, 504, 506, 141, 143, 147, 149 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया। इसके अलावा इनके खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की 37 (1), 37 (3) सहित धारा 135 भी लगाई गई है।
आरोपितों ने पीड़ित को धमकी दी थी और उसे लोहे की छड़ों से मारा था। इस वजह से वो गंभीर रूप से घायल हो गया। हमले के बाद पीड़ित युवक के सिर पर चोटें आईं और वह बेहोश हो गया और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उसका इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना महाराष्ट्र के पुणे जिले के मुंडवा क्षेत्र में हुई।
ये वारदात रविवार (8 अक्टूबर, 2023) की शाम की है। ऑपइंडिया को एक्सक्लूसिव तौर पर मिली एफआईआर कॉपी के मुताबिक, पीड़ित रात करीब 11:30 बजे अपने दोस्तों के साथ स्विफ्ट कार में जा रहा था। कार के स्पीकर पर हिंदू भक्ति गीत बज रहे थे, तभी आरोपित बाइक पर आया और कार रोक दी। फिर उन्होंने पीड़ित को धमकाया और चेतावनी दी कि वे ‘उनके’ इलाके में श्रीराम के गाने न बजाएँ।
ऑपइंडिया को मिली FIR कॉपी
गौरतलब है कि मुंडवा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ित के दोस्त 24 साल के रामकृष्णा मचारला ने कहा, “घटना के वक्त मैं और अमित साथ थे। हम पूरे दिन साथ रहे थे। शाम को मेरी माँ ने मुझे फ़ोन किया कि मेरे घर पर कुछ इमरजेंसी है और उन्हें मेरी ज़रूरत है। इसलिए मैं और अमित उसकी कार में कैंप से बालाजीनगर इलाके की ओर चल दिए।”
मचारला ने आगे बताया, “मेरा एक दोस्त भी हमारे साथ था। जैसे ही हम बालाजीनगर इलाके में पहुँचे, आरोपित बाइक पर आए और उलटी तरफ से आकर कार रुकवा दी। उन्होंने अमित को रामधुन बजाने पर धमकाया और फिर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। हमने मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन आरोपितों ने अमित के सिर पर लोहे की छड़ से हमला कर दिया। इसकी वजह से उसके सिर पर गंभीर चोटें आई।”
एफआईआर कॉपी के मुताबिक, पीड़ित ने सबसे पहले दोस्त के घर पर इमरजेंसी होने से आरोपित से अपनी कार के लिए रास्ता बनाने के लिए कहा था, हालाँकि, इसके बाद भी आरोपित ने कार रोककर कहा, “कहाँ जा रहे हो और यहाँ राम भजन क्यों बजा रहे हो।”
इसके बाद पीड़ित कार से बाहर आया और उनसे चले जाने का अनुरोध किया। इसी बीच आरोपी के और साथी मौके पर पहुँचे और पीड़ित के साथ गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी देते हुए कहा, “अब से इस इलाके में इतनी तेज़ आवाज़ में ऐसे गाने मत बजाओ। वरना गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। अपनी हद में रहना सीखो।”
ऑपइंडिया ने मामले पर अपडेट के लिए मुंडवा पुलिस स्टेशन के पीआई विष्णु तम्हाने से संपर्क किया। उन्होंने घटना की पुष्टि की और कहा, “पीड़ित और उसके दोस्तों पर आरोपितों ने इलाके में तेज संगीत बजाने को लेकर हमला किया था। पीड़ित को चोटें आई हैं और वह अस्पताल में भर्ती है। आरोपित और पीड़ित एक ही इलाके में रहते थे, इसलिए वे एक-दूसरे परिचित थे। आरोपितों पर मामला दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया है। फिलहाल इलाके में शांति है। जाँच चल रही है।”
हिन्दुओं के लिए पवित्र श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में एक महिला ने डांस कर के रील बनाई। अयोध्या में स्थित राम की पैड़ी के सरयू घाट पर एक महिला ने बॉलीवुड गाने की धुन पर ठुमके लगाए और रील बनाई। वीडियो में महिला को ‘जीवन में जाने-जाना, एक बार है होता प्यार’ गाने पर ठुमके लगाते हुए देखा जा सकता है।
रील के वायरल होने के बाद अब लोग इस पर गुस्सा जता रहे हैं और कह रहे हैं कि महिला ने धार्मिक स्थल का अपमान किया है। पुलिस से महिला पर कार्रवाई की अपील की जा रही है। अयोध्या पुलिस ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस बात जानकारी दी है कि मामले की जाँच की जा रही है।
अयोध्या- राम की पैड़ी बनी रील प्रेमियों का शूटिंग का अड्डा
➡धर्म नगरी की मर्यादा तारतार कर रहे हैं रील प्रेमी ➡आए दिन सरयू की जलधारा में रील बनाते हैं लोग ➡सरयू की जलधारा में रील बनाने का वीडियो वायरल.#Ayodhyapic.twitter.com/rtyN2TGDi8
वायरल वीडियो में गुलाबी रंग का सूट पहनी एक महिला बॉलीवुड के गाने पर बालों को झटक कर और इशारे करते हुए रील बना रही है। यह रील कब बनाई गई इसकी अभी जानकारी नहीं है। लोगों का कहना है कि हिन्दुओं के धार्मिक केन्द्रों को अश्लीलता का केंद्र क्यों बनाया जा रहा है? इस पर रोक लगाई जाए। इससे पहले भी अयोध्या से ही ऐसे कुछ मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले जून महीने में ही राम की पैड़ी पर एक युवती ने रील बनाई थी।
ऐसे लोगो पर कार्यवाही करनी चाहिए जो कही भी शुरू हो जाते है.
इस युवती ने ‘पानी में आग लगानी है’ गाने पर सरयू नदी में नहाते हुए रील बनाई थी जिसके पश्चात लोगों इस मामले में सोशल मीडिया से लेकर संत समाज ने काफी विरोध किया था। इस युवती की पुलिस ने तलाश की थी। लोगों ने इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया था। उनका कहना था कि रील बनाने जाने के चलन को श्रीराम की नगरी से बाहर रखा जाना चाहिए।
धार्मिक स्थानों में रील बनाने को लेकर कई बार विवाद हुआ है। इसको लोग धार्मिक आचरण के विरुद्ध और मान्यताओं का मजाक उड़ाने के तौर पर देखते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में भी ऐसी ही एक रील बनाई गई थी जिस पर लोगों ने अपना विरोध दर्ज करवाया था। उत्तराखंड के केदारनाथ बदरीनाथ मंदिर समिति ने जुलाई में एक आदेश जारी कर के मंदिर परिसर में धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध रील बनाने वालों पर वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही है।
इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमलों में अब तक 900 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इन हमलों के पीछे हमास के अल कासम ब्रिगेड (al Qassam Brigades) का हाथ है। इस दस्ते का सरगना मोहम्मद दाइफ (Mohammed Deif) है।
उसका पूरा नाम मोहम्मद दिआब इब्राहिम अल मसरी (Mohammed Diab Ibrahim al Masri) है। उसे मोहम्मद मसरी, मोहम्मद दाइफ जैसे नामों से भी जाना जाता है। माना जा रहा है कि इजरायल पर हमले के पीछे की पूरी प्लानिंग उसकी ही है।
लगातार 3 दशक से मोहम्मद दाइफ इजरायल में आतंक फैला रहा है। रिपोर्टों के अनुसार इजरायल के एक एयर स्ट्राइक में वह अपनी एक आँख, एक हाथ और एक पैर गँवा चुका है। अब वह व्हीलचेयर से ही हमास के आतंकी दस्ते को लीड करता है।
इजरायल पर हुए हमले को मोहम्मद दाइफ ने बदला बताया है। कहा है कि यह गाजा को 16 साल तक दुनिया से काटने, वेस्ट बैंक में इजरायली पुलिस के घुसने और अल अक्सा में हुई हिंसा का बदला है।
कौन है मोहम्मद दाइफ उर्फ मोहम्मद मसरी?
मोहम्मद दाइफ उर्फ मोहम्मद मसरी का जन्म वर्ष 1965 में गाजा के खान यूनिस इलाके में हुआ था। खान यूनिस वही इलाका है, जहाँ इस समय इजरायल आतंकी ठिकानों पर बम बरसा रहा है। मसरी 25 साल की उम्र में ही हमास से जुड़ गया था। उससे पहले वह मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा हुआ था।
मसरी एक स्नातक है जो कॉलेज के समय से ही फिलीस्तीनी लड़ाई में जुड़ गया था। उसको वर्ष 1989 में इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार भी किया था। लेकिन फिर 16 महीने के बाद उसे छोड़ दिया गया।
मोहम्मद दाइफ को कासम ब्रिगेड से हमास का ‘इंजीनियर’ कहे जाने वाला याहया अयाश ने जोड़ा था। अयाश बम बनाने में एक्सपर्ट था। दाइफ उसका शागिर्द था। 1996 तक उसने अयाश के इशारों पर काम करते हुए इजरायल में कई घटनाओं को अंजाम दिया।
वर्ष 1996 में इजरायल के सुरक्षा बलों ने अयाश को मार गिराया था। इसके बाद बदला लेने के मोहम्मद दाइफ ने इजरायल में कई आत्मघाती हमले करवाए, जिनमें एक सप्ताह के भीतर करीब 50 लोगों की मौत हुई।
दाइफ रॉकेट बनाने, आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने और सुरंग बनाकर हमले करने का विशेषज्ञ माना जाता है। कहा जाता है कि वह अपने आसपास बहुत सीमित लोगों को रखता है और हमेशा सामान्य नागरिक की तरह रहता है। वर्ष 2002 में उसे अल कासम दस्ते का सरगना बनाया गया था। वर्ष 2014 में उसने इजरायल पर बड़े हमलों की धमकी दी थी।
कई बार आया इजरायल के टारगेट पर, लेकिन हर बार बच निकला
रिपोर्टों के अनुसार इजरायली सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसी मोसाद के टारगेट पर मोहम्मद दाइफ कम से कम सात बार आ चुका है। लेकिन हर बार वह जिंदा बचने में सफल रहा। साल 2002 में उसकी कार को इजरायल ने मिसाइल से टारगेट किया था। इसमें उसके दो साथियों की मौत हो गई थी। पर वह खुद बच निकला था।
वर्ष 2004 में भी इजरायल ने एक हवाई हमला कर कर दाइफ को टारगेट किया। लेकिन इस हमले में वह बच गया और उसका खासमखास मोहम्मद अदनान-अल-गौल मारा गया। अदनान हमास का रॉकेट एक्सपर्ट कहा जाता था।
वर्ष 2006 में एक खुफिया जानकारी के आधार पर एक घर पर हवाई हमला किया गया था। इजरायली सुरक्षा बलों को पता चला था कि दाइफ अपने कुछ और आंतकियों के साथ एक इमारत में बैठक कर रहा था। इस हमले में उसकी रीढ़ में चोट आई थी।
2014 में मसरी के घर पर एक बार और हमला हुआ। इस हमले में मसरी का एक पैर और एक हाथ उड़ गया था। उसने एक आँख भी गँवा दी थी। कहा जाता है कि इसके बाद से वह व्हीलचेयर पर चलता है।
दिल्ली की अदालत ने दिल्ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत शुक्रवार (13 अक्टूबर, 2023) तक बढ़ा दी है।AAP नेता को राष्ट्रीय राजधानी में उनके आवास पर तलाशी के बाद ईडी ने 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। इस मामले में गिरफ्तार होने वाले सिंह तीसरे AAP नेता हैं।
अदालत परिसर में संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्रताड़ित करवा रहे हैं। कोर्ट के दरवाजे तक पहुँचते हुए उन्होंने पीएम मोदी की आलोचना जारी रखी। जबकि इससे पहले कोर्ट ने उन्हें मीडिया से बात न करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी मेरे साथ बच्चों का खेल खेल रहे हैं। जिन्होंने देश को लूटा है वो पीएम मोदी के साथ हैं, वहीं जो ईमानदार हैं वो उनके खिलाफ। अगर मेरा एनकाउंटर हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?”
दरअसल, बीते हफ्ते संजय सिंह की 5 दिनों की ED हिरासत का वक्त खत्म होने पर मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज एमके नागपाल के समक्ष पेश किया गया। गौरतलब है कि जज ने इससे पहले AAP के अन्य नेताओं मनीष सिसौदिया और सत्येन्द्र जैन को ईडी और सीबीआई के दर्ज मामलों में जमानत देने से इनकार कर दिया था।
यही नहीं, AAP के इन नेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों एफआईआर में जमानत देने से भी इनकार कर दिया था। इस केस में ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में सरकारी गवाह बने आरोपित कारोबारी दिनेश अरोड़ा के संजय सिंह का नाम लेने पर के बाद ईडी ने सिंह के आवास पर छापेमारी की थी। ईडी का आरोप है कि दिनेश अरोड़ा के एक कर्मचारी ने संजय सिंह के घर पर दो बार में 2 करोड़ रुपए पहुँचाए। जाँच एजेंसी को डिजिटल सबूतों के साथ AAP नेता का सामना कराना है। ईडी का ये भी आरोप है कि कुछ निजी कंपनियों को थोक कारोबार में 12 फीसदी का मुनाफा देने की साजिश के तहत उत्पाद शुल्क नीति लागू की गई।
इसमें कहा गया है कि मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठकों के मिनटों में ऐसी किसी शर्त का जिक्र नहीं किया गया था। एजेंसी का यह भी आरोप है कि थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ मार्जिन देने के लिए साउथ ग्रुप के साथ विजय नायर और अन्य लोगों के साथ एक साजिश रची गई थी।
यह तर्क दिया गया कि नायर सिसौदिया की तरफ से काम कर रहे थे। इसके साथ ही कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार आप सांसद संजय सिंह को मीडिया से बात न करने का निर्देश भी दिया।
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म ‘मिशन रानीगंज’ के रिलीज के बाद एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री आपने चुना है और अब आप उन्हें फॉलो करिए। इस दौरान उन्होंने कनाडा की नागरिकता लेने और खुद के हिंदू होने पर भी बात की। गौरतलब है कि उन्हें कनाडा की नागरिकता को लेकर खासा ट्रोल किया गया था।
इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को ही उन्हें भारत की नागरिकता मिली है। ‘न्यूज 24’ में फिल्म ‘मिशन रानीगंज’ को लेकर बात करने के दौरान एक्टर अक्षय कुमार ने अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कनाडा की नागरिकता उन्होंने केवल अपने काम के सिलसिले में ली थी।
‘कोई पीएम नहीं देखा जिसने लाल किले से शौचालय की बात की’
जब अक्षय से पूछा गया कि जैसे पीएम मोदी जैसे ही सोशल मैसेज देने की कोशिश करते हैं आप भी अपनी फिल्मों के जरिए ऐसा करते हैं और आप के लिए कहा जाता है कि पीएम के बेहद करीब हैं। आप उन्हें बेहद पसंद करते हैं। क्या आप भी इलेक्शन लड़ने की सोच रखते हैं?
इस पर अक्षय कुमार ने कहा कि न तो वो इलेक्शन लड़ने जा रहे हैं और न ही राजनीति में जाने का उनका कोई विचार है, लेकिन अगर प्रधानमंत्री शौचालय के बारे में बात करें और अगर उन्हें मौका मिलता है तो वो फिल्म क्यों न बनाएँ।
उन्होंने आगे कहा, “कोई अच्छा काम होता है तो उस पर मैं फिल्म बनाता हूँ जैसे ‘एयरलिफ्ट’ मैंने फिल्म बनाई थी वो तो कॉन्ग्रेस के टाइम पर था वो अच्छा काम हुआ था, तो मैंने फिल्म बनाई। तब तो कोई कुछ नहीं बोला। ये ‘मिशन रानीगंज’, भी कॉन्ग्रेस के वक्त था अब तो कोई कुछ नहीं कह रहा कि आप उनके करीब थे। अच्छे काम पर फिल्म बनाना राजनीति नहीं है। मैंने किसी पीएम को लाल किले पर खड़े होकर शौचालय के बारे में बात करते नहीं देखा। मुझे अच्छा लगा, असली कहानी मिली, मैंने बनाई।”
जब उनसे पूछा गया कि पीएम मोदी से प्रभावित होने का नुकसान आपको होता है क्योंकि समाज दो विचारधाराओं में बँट गया है एक उनके विरोध में है तो दूसरे उनके पक्ष में। इस पर एक्टर ने जवाब दिया, “जी मैं तो हर चीज के अंदर पॉजिटिविटी देखता हूँ। मुझे तो काफी चीज पॉजिटिव नजर आती हैं, इसलिए मैं उन्हें फॉलो करता हूँ। मैं ये नहीं देखता कि नेगेटिव क्या है। हर चीज का तरीका होता है देखने का। बचपन में हम कहते थे न कि आधा ग्लास खाली होता है और आधा भरा। या तो आप खाली देख लो या भरा।” इस बात को आप वीडियों में 14:31 से लेकर 18: 19 सुन सकते हैं।
‘पीएम आपने चुना, उन्हें फॉलो करिए’
उन्होंने पीएम मोदी के विरोध को लेकर कहा, “मैं तो ये मानता हूँ आपने पीएम चुना है अब आप फॉलो करिए और ऐसा होना चाहिए। वैसे ही जैसे सेट पर डायरेक्टर आता है तो हम उन्हें फॉलो करते हैं। अभी वो ‘कैप्टन ऑफ द शिप’ हैं, हमें उन्हें फॉलो करना चाहिए।”
एक्टर ने आगे कहा कि आज इकोनॉमी बढ़ रही है, बहुत सारी चीजे हैं इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है। इसकी पॉजिटिव साइड की तरफ देखिए। हो सकता है कोई काम गलत भी हो रहा हो, लेकिन बड़ी चीजों के लिए एक साथ आएँ। ये हमारा देश हैं। हमें एक दूसरे की गलतियाँ निकालने के बदले बड़ी तस्वीर के लिए काम करना चाहिए और ये पिक्चर भारत की है। एक्टर के इस बयान को आप वीडियो में 18:19 से लेकर 19:23 तक सुन सकते हैं।
मेरा पासपोर्ट पर लिखा – रिपब्लिक ऑफ इंडिया भारत
जब उनसे कहा गया कि आपको इस पर भी ट्रोल किया जा सकता है तो एक्टर ने जवाब दिया, “मेरे पासपोर्ट ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ और ‘भारत’ दोनों दिखा है तो फिर पासपोर्ट को भी ट्रोल करें। मुझे एक इंसान बताइए जो ट्रोल नहीं होता, सब ट्रोल होते हैं, लेकिन खुशी किसी को नहीं मिलती।” उन्होंने आगे कहा, “ऐसे में खुद के माइंडसेट को फॉलो करना चाहिए मुझे फर्क नहीं पड़ता, इसलिए न बाएँ देखे न दाएँ जिस इंसान को जहाँ पहुँचना है उसे सीधे वहीं देखना चाहिए। सोशल मीडिया बना ही इसके लिए है ताकि आपकी रफ्तार कम हो जाए।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं ट्रोलिंग को सकारात्मकता के साथ लेता हूँ, न्यूजर्सी में बहुत बड़ा अक्षरधाम मंदिर बना, मुझे अच्छा लगा तो मैंने इसे ट्वीट किया। मैं ट्वीट करने के बाद भूल जाता हूँ, 10 में से 2-3 ट्रोल कर रहे होंगे, कर लो भाई ट्रोल, तू पैसे कमा लें, फॉलोवर्स ले ले ठीक है, भाई सब काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर पैसे कमाने के लिए ही सब है। ये आपका हक है बस गलत काम मत करो।” इसे वीडियो में 19:38 से लेकर 22:20 तक सुना जा सकता है।
‘मैं हिंदू हूँ…’
कनाडा की नागरिकता और उस पर ट्रोल होन को लेकर अक्षय कुमार ने कहा, “मैंने कनेडियन बनने का फैसला इसलिए लिया कि भारत में मेरी फिल्में नहीं चल रही थीं। मुझे वहाँ बिजनेस का काम मिल रहा था। भारत से कितने लोग बाहर काम करते हैं, उन्हीं की तरह में भी गया। सच्चाई ये है कि वहाँ कॉर्गो में एक बिजनेस मिल रहा था तो मैं वहाँ चला गया। इस दौरान ही लास्ट की दो-तीन फिल्में चल गईं, लेकिन तब तक कनाडा का पासपोर्ट आ गया था।”
उन्होंने कहा, “लेकिन मैंने ये नहीं सोचा था तब कि वापस भारत जाना है, लेकिन फिर मैं वापस आ गया। उसके बाद काम करने लगा और फिल्में मिलीं और चलीं, ऐसा चलता रहा। बस दिमाग से निकल गया कि कनाडा का पासपोर्ट है। मैं टैक्स सबसे अधिक यहीं भरता हूँ। हिंदुस्तानी हूँ, हिंदुस्तानी खाना खाता हूँ, हिंदुस्तान के हिसाब से सोचता हूँ और हिंदू हूँ। दस्तावेज से ये साबित होता है तो मैंने वो भी बदल लिया।” उनकी बातचीत के इस अंश को वीडियो में 23:00 से लेकर 24:40 तक सुना जा सकता है।