Home Blog Page 1475

देवरिया में बच्चों को खींचकर लाई दुबे परिवार पर हमला करने आई भीड़ और मार दिया: पड़ोसी ने उकसाया था, प्रेमचंद यादव की पत्नी का झूठ भी आया सामने

उत्तर प्रदेश के देवरिया में हुए जघन्य हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। इस हत्याकांड में आरोपित पक्ष के प्रेमचन्द यादव की पत्नी ने पाँच लोगों की हत्या के आरोपितों को बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की है। वहीं, जाँच में यह भी खुलासा हुआ है कि रामायण पाल ने उग्र भीड़ को हमले के लिए उकसाया था। बच्चों को एक जगह घसीट कर लाया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई।

प्रेमचंद यादव की पत्नी शीला यादव ने कहा था कि जब वह 2 अक्टूबर 2023 को सुबह चाय लेकर पहुँची तो उनके पति प्रेमचन्द यादव के फोन पर किसी का कॉल आया। इसके बाद वे उठकर चले गए। अब पुलिस जाँच में सामने आया है कि कथित समय पर प्रेमचन्द को कोई फ़ोन नहीं आया था। मृतक की पत्नी झूठ बोल रही हैं।

पुलिस ने इस दावे की पड़ताल के लिए प्रेमचन्द यादव के नम्बर की CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकलवाया है। इसमें यह स्पष्ट हो गया कि प्रेमचन्द यादव के फ़ोन पर 1 अक्टूबर 2023 की रात से 2 अक्टूबर 2023 की सुबह तक कोई फ़ोन नहीं आया था। पुलिस ने प्रेमचन्द का फोन अभी बरामद नहीं किया है, नम्बर की जाँच में यह जानकारी सामने आई है।

पड़ोसी रामायण ने उकसाया, बच्चों को घसीट लाए

दैनिक जागरण के अनुसार, जाँच में यह बात भी सामने आई है कि सत्य प्रकाश दुबे के पड़ोसी रामायण पाल के ललकारने पर आरोपित उग्र हुए थे और घर में घुसकर सत्य प्रकाश और उनके परिवार की हत्या की थी। नरसंहार के मुख्य आरोपित फतेहपुर के टोला अभयपुर के रहने वाले नवनाथ मिश्रा ने पुलिस को यह जानकारी दी है।

सत्यप्रकाश के घर पहुँची भीड़ ने उनके पूरे परिवार पर ईंट-पत्थर और धारदार हथियारों से हमला किया था। मरने वालों में सत्य प्रकाश दुबे, उनका बेटा गाँधी, बेटी सलोनी, बेटी नंदिनी और पत्नी किरण शामिल है। सत्य प्रकाश के पुत्र अनमोल को भीड़ ने मरा समझ कर छोड़ दिया था। अभी उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि सत्य प्रकाश दुबे के दरवाजे पर प्रेमचंद यादव क्या करने गया था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेमचंद की हत्या के बाद पड़ोसी रामायण ने फोन करके अभयपुर के लोगों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद भारी संख्या में पहुँचे लोग सत्य प्रकाश दुबे के घर पर पहुँचे और शव को देखकर 15 मिनट तक रोते रहे।

इसी दौरान पड़ोसी रामायण पाल ने कहा कि ‘क्या रो रहे हो, दुबे परिवार के सभी आरोपित घर में ही छिपे हैं’। इतना सुनते ही लोग भड़क उठे और फिर सत्य प्रकाश के मकान पर पथराव और तोड़फोड़ करने लगे। इसके बाद घर में घुसकर दुबे के परिजनों की हत्या करने लगे। जब बच्चों ने छिपने का प्रयास किया तो उन्हें खींच एक जगह लाया गया और फिर मार दिया गया।

क्या है मामला

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को देवरिया जनपद के रुद्रपुर के फतेहपुर लेहड़ा गाँव में हत्याकांड हुआ था, जहाँ एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या दबंग पक्ष के लोगों ने जमीन विवाद में मार दिया था। इसके पहले दबंग परिवार में एक हत्या कर दी गई थी। इस तरह पूरी घटना में कुल 6 लोग मारे गए।

जानकारी के अनुसार, दबंग पक्ष प्रेमचन्द यादव और पीड़ित परिवार सत्य प्रकाश दुबे के बीच लम्बे समय से जमीन का विवाद चल रहा था। प्रेमचन्द 2 अक्टूबर को सुबह सत्य प्रकाश के घर पहुँचे थे, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी, मारपीट हुई और फिर हत्या की बात कही जा रही है।

प्रेमचन्द की हत्या की खबर सुनकर उनका छोटा भाई रामजी यादव, पिता रामभवन यादव और ड्राईवर नवनाथ मिश्रा उर्फ़ पट्टू समेत बड़ी संख्या में भीड़ सत्य प्रकाश के घर पर पहुँच गई थी। नवनाथ मिश्रा ने दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी। मिश्रा ने दुबे की बेटी सलोनी को भी गोली मारी थी, जिससे उसकी मौत हो गई।

इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करके 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार होने वालों में मृतक प्रेमचन्द यादव का छोटा भाई रामजी यादव, उसका पिता रामभवन यादव और ड्राइवर एवं हत्याकांड का मुख्य आरोपित नवनाथ मिश्रा भी शामिल हैं।

इस कांड के बाद प्रेमचन्द यादव की दबंगई की बातें सामने आई थीं। यह भी सामने आया था कि उनका घर जमीन पर कब्जा करके बनवाया गया है। प्रेमचन्द यादव का घर बुलडोजर से गिराने की माँग की गई थी। इसको लेकर पुलिस और राजस्व विभाग ने उसके घर की दो बार पैमाइश भी की थी।

इस पैमाइश का सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध भी किया है। सपा कार्यकर्ताओं के इस विरोध के कारण पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा था। इस घटना के बाद अब फतेहपुरा गाँव में जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने धारा 144 लागू कर दी है।

‘वन्दे भारत’ के बाद अब भगवा ‘साधारण’ एक्सप्रेस ट्रेन, डिजाइन वही लेकिन किराया होगा कम: जल्द होगा ट्रायल, जानिए इंजन से लेकर डिब्बों तक के बारे में

भारतीय रेलवे जल्द ही आम आदमी के लिए नई ‘वन्दे साधारण एक्सप्रेस’ चलाने वाला है। इस ट्रेन को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में तैयार किया जा रहा है। जल्द ही यह ट्रेन आपको पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी।

प्रीमियम ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चालू करने के बाद भारतीय रेलवे ने साधारण ट्रेनों में यात्रा करने वालों के लिए जुलाई में घोषणा की थी। बताया गया था कि इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ जैसा ही बनाया जाएगा। यह नॉन-AC ट्रेन होंगी और इनका किराया भी ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से कम होगा। इन ट्रेनों को अभी ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन कहा जा रहा है।

अब इन ट्रेनों के बारे में और जानकारी सामने आई है। सबसे पहली ट्रेन की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया गया है कि इन ट्रेनों में कुल 22 डिब्बे होंगे। 22 में से 12 डिब्बे स्लीपर, 8 डिब्बे द्वितीय श्रेणी (बैठने वाले) और 2 डिब्बे लगेज रैक के होंगे।

इस ट्रेन में दोनों तरफ एक-एक इंजन लगाया जाएगा। ट्रेन को पुश-पुल तकनीक पर चलाया जाएगा ताकि यह ज्यादा रफ़्तार में चले। पुश-पुल के अंतर्गत आगे वाला इंजन गाड़ी को खींचता है जबकि पीछे लगा हुआ इंजन धक्का लगाता है। यह ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से अलग तकनीक है। वन्दे भारत में इंजन के लिए अलग से कोई कोच नहीं होता बल्कि सभी डिब्बे ‘सेल्फ-प्रोपेल्ड’ (खुद से चलने वाले/स्वचालित) होते हैं।

इस ट्रेन के दोनों इंजन WAP-5 सीरीज के होंगे। यह इंजन भारतीय रेलवे की मध्यम दूरी की तेज चलने वाली गाड़ियों में लगाए जाते हैं। इस ट्रेन की अधिकतम रफ़्तार 130 किलोमीटर/घंटा होगी जबकि ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ 160 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार से चलने में सक्षम हैं।

इस ट्रेन का डिजाइन भी अभी चलने वाली अन्य ट्रेनों से अलग होगा। इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत’ की तरह ही अलग तरीके से डिजाइन किया जाएगा। अभी सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि पहली ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन को भगवा और ग्रे रंग में रंगा गया है।

भगवा रंग का इस्तेमाल इससे पहले केरल के कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस‘ में किया गया था। इसकी सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी तारीफ़ की थी। इस ट्रेन का ट्रायल अक्टूबर माह के अंत तक शुरू हो जाने की आशा की जा रही है।

इंजन और ट्रेन के सभी डिब्बों के तैयार होने के बाद इसका ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल में सब कुछ सही रहने पर इसको आम जनता के लिए चलाया जा सकता है। अभी यह पक्का नहीं है कि इसका नाम ‘वन्दे साधारण’ ही होगा या फिर ट्रेन को चालू करते समय कोई बदलाव किया जाएगा।

‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों को चलाने के बाद लगातार यह माँग की जा रही थी कि कम पैसे में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी रेलवे अच्छी सुविधाओं वाली आरामदायक ट्रेन लेकर आए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेन बनाई गई हैं।

भारत में पहली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ फरवरी 2019 में नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलाई गई थी। इसके पश्चात ट्रेन में और सुधार करके ‘वन्दे भारत 2.0’ लाई गई थी। अब तक 34 ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जा चुकी हैं। अभी चलाई जाने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ में केवल चेयरकार (कुर्सीयान) ही होते हैं जबकि भविष्य में इसमें स्लीपर डिब्बे भी होंगे। रेलवे ने यह योजना बनाई है कि आने वाले समय में देश में 200 नई ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जाएँ। इसके लिए निविदाएँ भी जारी कर दी गई हैं।

चीनी एजेंट न्यूज़क्लिक पर अब CBI ने दर्ज किया केस, 2 ठिकानों पर मारी रेड: 10 दिन बढ़ाई गई प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती की हिरासत अवधि

चीनी फंडिग केस के कारण विवादों में आए डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म न्यूजक्लिक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार (11 अक्टूबर, 2023) को उसके खिलाफ ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम’ (FCRA) का उल्लंघन का केस दर्ज किया है। CBI के सूत्रों के मुताबिक, इस सिलसिले में दिल्ली में न्यूजक्लिक के दो ठिकानों पर सीबीआई की तलाशी चल रही है।

गौरतलब है कि मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) को ही दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने न्यूजक्लिक के फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को 10 दिन की हिरासत में भेज दिया है।

दोनों पर चीन के पक्ष में खबरें चलाने के लिए चीनी कंपनियों के जरिए से 38 करोड़ रुपए की फंडिंग का गंभीर आरोप है। इस न्यूज पोर्टल पर लगे आरोपों के बाद दोनों के खिलाफ आतंक विरोधी गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) केस दर्ज किया गया था। इसी के तहत पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनवाई की थी।

दरअसल, पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने पुरकायस्थ और चक्रवर्ती की पाँच दिनों की पुलिस हिरासत खत्म होने पर उन्हें कोर्ट में पेश किए जाने के बाद ये आदेश दिया। इस दौरान पुरकायस्थ की तरफ से पेश वकील अर्शदीप सिंह खुराना ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की FIR को पढ़ने से पता चलता है कि कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है, यूएपीए मामला तो दूर की बात है। उन्होंने आगे कहा कि यूएपीए की धारा 13 और 16 के तहत एफआईआर में कथित अपराध बिल्कुल भी नहीं बनता है क्योंकि कोई आतंकवादी कार्य या गैरकानूनी गतिविधि नहीं है।

सिंह ने अपने मुवक्किल की तरफ से दलील देते हुए कहा, “ऐसा कोई आरोप नहीं है कि मैंने बम या डायनामाइट का इस्तेमाल किया है जिससे मौत और संपत्ति का नुकसान हुआ है। पूरी एफआईआर में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि मैंने किसी आपराधिक बल का इस्तेमाल किया हो। अपहरण, हिरासत या अपहरण का कोई कृत्य नहीं है। मेरे किए गए किसी भी कृत्य में यूएपीए के धारा 15 का कोई तत्व नहीं है।”

दूसरी तरफ आरोपित चक्रवर्ती की तरफ से पेश वकील रोहित शर्मा ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में आरोपित के तौर पर दर्ज नहीं है और वह पीपीके न्यूज़क्लिक के केवल 0.1% शेयरधारक हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक के फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के आवास पर कई घंटे की छापेमारी की थी। इसके बाद ही प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया था। दोनों को कोर्ट में पेश कर हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक के खिलाफ कई संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

झूठ है इस्लाम में ‘भाईचारा’, आपस में मारकाट करनी हो तो भाई ही होता है ‘चारा’: बस काफिरों के खिलाफ जगता है मुस्लिमों का ‘उम्माह’

फिलिस्तीन स्थित इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हजारों आतंकवादियों ने इजरायल में घुसकर सैकड़ों निर्दोषों की जान ले ली और कुछ को बंधक बनाकर गाजा पट्टी ले गए। उन्होंने हर तरफ तबाही मचाई। इजरायल ने जैसे ही हमास के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, वैसे ही अधिकांश मुस्लिम मुल्क फिलिस्तीन के समर्थन में एकजुट हो गए। इन देशों का फिलिस्तीन को समर्थन देने का एक लंबा इतिहास है।

हालाँकि, उनका समर्थन दीनी या सामान्य भाईचारे की कथित धारणा से उत्पन्न नहीं होता है, जिसे सामान्यतया ‘उम्माह‘ कहा जाता है। यह भाईचारा गैर-इस्लामी लोगों के प्रति घृणा से प्रेरित है। गैर-इस्लामी लोगों को मुस्लिमों द्वारा अपमानजनक रूप से ‘काफिर’ कहा जाता है। इन्हें ही वो साझा तौर पर ‘शत्रु’ के तौर पर देखते हैं।

गैर-इस्लामी लोगों पर मुस्लिमों के अत्याचारों पर अरब जगत चुप्पी साधे रहता है, लेकिन जैसे ही कोई पलटवार करता है ये ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने लगते हैं। इस लेख के माध्यम से हम ये समझाने की कोशिश करेंगे कि कैसे फिलिस्तीनियों की या अन्य मुस्लिमों की जान का इस्तेमाल दुनिया को ‘दार-उल-इस्लाम‘ बनाने के उपकरण के रूप में किया जाता है।

फिलिस्तीन को अरब जगत का समर्थन मुस्लिमों के लिए नहीं, ‘यहूदी’ देश से लड़ने के लिए है

इजरायल-फिलिस्तीन के पड़ोसी देश सीरिया, मिस्र और जॉर्डन ने फिलिस्तीनियों के मुद्दे का हवाला देते हुए इजरायल से लड़ाइयाँ लड़ी हैं। ये तो सत्य है, लेकिन ये भी उतना ही सत्य है कि इन देशों ने अपनी जमीनों पर फिलिस्तीनियों का ही कत्लेआम किया है। इजरायल पर फिलिस्तीनी मुस्लिमों के कत्लेआम का आरोप लगाने वाले इन देशों का अपना एक काला अध्याय है।

इनमें से एक घटना जॉर्डन की है। सितंबर 1970 में जॉर्डन ने पाकिस्तान की मदद से हजारों फिलिस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया था। ये घटना इतिहास में ‘ब्लैक सितंबर‘ के नाम से जानी जाती है। करीब 53 साल पहले हुए इस भयावह नरसंहार में फिलिस्तीनियों को जॉर्डन से भागकर लेबनान में शरण लेना पड़ा था।

इस घटना में जॉर्डन के शाह हुसैन ने अपनी सेना से राजधानी अम्मान के आसपास स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविरों को तबाह करने और सभी फिलीस्तीनियों को मारने का आदेश जारी किया था। इसमें जॉर्डन की सेना ने पीएलओ (फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन) के कब्जे वाले इलाकों को खाली करा लिया था और उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

साल 2015 की जनगणना के मुताबिक, जॉर्डन की कुल आबादी 95 लाख थी, जिसमें से 6.34 लाख लोग फिलिस्तीनी हैं। हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि जॉर्डन की आधी आबादी फिलिस्तीनी है। जॉर्डन के सत्तारूढ़ ‘हशमत सल्तनत’ को डर है कि फिलिस्तीनियों की बढ़ती आबादी उन्हें सत्ता से बेदखल कर सकती है। ये डर 1970 में करीब-करीब सच होने जा ही रहा था कि उन्होंने फिलिस्तीनियों को मार डालने का आदेश दे दिया था।

इस मामले में पाकिस्तान ने जॉर्डन की सेना को ट्रेनिंग से लेकर पूरी ताकत से समर्थन दिया था, वो भी तब, जब पाकिस्तान खुद को फिलिस्तीन का पक्का समर्थक साबित करता है। ब्लैक सितंबर की घटनाओं में पाकिस्तान की सेना का सीधा हाथ था। उस समय जॉर्डन की सेना की अगुवाई करने वाले जियाउल हक को पाकिस्तान में तरक्की मिली और फिर वो इन्हीं तरक्कियों की वजह से पाकिस्तान का तानाशाह बनकर कई सालों तक बतौर राष्ट्रपति राज करता रहा।

फिलिस्तीन का एक अन्य पड़ोसी सीरिया, जो हमास की मदद करता था। उसने फिलिस्तीनी नेताओं को आश्रय दिया। हालाँकि, साल 2011 में जब सीरिया के गृहयुद्ध में फिलिस्तीनियों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया तो सीरिया ने फिलिस्तीनी लीडरशिप को देश से निकाल दिया, लेकिन वह आम फिलिस्तीनियों के लिए काल बन गया। सीरिया ने आम फिलिस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया।

सीरिया में फिलिस्तीनियों के लिए काम कर रहे एक्शन ग्रुप (Action Group for Palestinians of Syria- AGPS) के आँकड़ों के मुताबिक, सीरिया में युद्ध के दौरान 4,013 फिलिस्तीनियों की मौत की बात कही गई है। इनमें से 614 लोगों को जेलों में टॉर्चर करके मारा गया तो 205 लोगों की जान दमिश्क के यरमौक शिविर में यातना और चिकित्सकीय देखभाल में चली गई।

इजरायली राजनीतिज्ञ गोल्डा मेर ने एक बार कहा था, “अरबों के साथ हमारी शांति तब होगी, जब वे हमसे नफरत करने की तुलना में अपने बच्चों को अधिक प्यार करेंगे”। यह बात सिर्फ इस्लामी देशों पर ही लागू नहीं होती, यह हमास (हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया) पर भी लागू होती है, जो यहूदियों के प्रति नफरत के चलते गाजा के नागरिकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल करता है।

ऐसा खासकर तब होता है, जब हमास के रॉकेट हमलों के जवाब में इजरायल अपने तोपखाने और मिसाइलों से हमले करता है। चूँकि हमास के आतंकी अस्पतालों, मस्जिदों, स्कूलों का इस्तेमाल इजरायल पर रॉकेट हमले के लिए करता है। ऐसे में जवाबी हमले वाली मिसाइलों का शिकार आम मुस्लिम जनता होती है।

हाल ही में इजरायली सेना ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि आतंकवादी किन जगहों से हमला करते हैं और कैसे वो मस्जिदों की आड़ लेकर इजरायल पर हमले को अंजाम दे रहे हैं। हमास के हमले के जवाब में इजरायल ने उस मस्जिद को ही उड़ा दिया था। अगर हमास के हमलावर वहाँ से भाग निकले थे तो फिर मिसाइलों का निशाना कौन बना? जाहिर है आम जनता।

गाजा की नाकेबंदी करने पर मिस्र की सेना पर फिलिस्तीनियों के आतंकी हमले

राफा बॉर्डर क्रॉसिंग को राफा क्रॉसिंग पॉइंट के रूप में भी जाना जाता है। यह मिस्र और गाजा पट्टी के बीच एकमात्र क्रॉसिंग पॉइंट है। यह गाजा-मिस्र की सीमा पर स्थित है, जिसे 1979 की मिस्र-इजरायल शांति संधि द्वारा मान्यता दी गई है।

हालाँकि, मिस्र लंबे समय से अपने देश में गाजा के लोगों को घुसने नहीं देता, क्योंकि वो इस चेक प्वॉइंट की वजह से अपने देश में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों के हमलों को झेल चुका है। आईएस या दाएश के आतंकी गाजा के निवासियों की आड़ लेकर मिस्र में घुसपैठ करते हैं।

इस बार भी हमास के आतंकियों ने जब इजरायल पर हमला किया तो मिस्र ने तुरंत राफा बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया। दरअसल, हमास पर हमला करने से पहले इजरायल ने गाजा के लोगों से कहीं और चले जाने के लिए कहा था। बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों के आवग को देखते हुए मिस्र ने क्रॉसिंग को बंद कर दिया।

बता दें कि जून 2007 में जब हमास ने गाजा पट्टी पर कब्जा किया था, तभी से मिस्र ने राफा क्रॉसिंग को बंद कर रखा है। हालाँकि, मिस्र यहाँ से मेडिकल हेल्प के लिए लोगों को अपने देश आने देता है। जिन लोगों के पास मिस्र आने-जाने का परमिट होता है, वे भी आ-जा सकते हैं। मिस्र और गाजा की 12 किलोमीटर लंबी सीमा है।

चूँकि हमास के आतंकी बॉर्डर क्रॉसिंग पर ही हमला करके उसकी दीवार को उड़ा चुके हैं और मिस्र के सुरक्षाकर्मियों पर हमले कर चुके हैं, ऐसे में मिस्र इस क्रॉसिंग को बंद ही रखता है, ताकि उसके देश में आतंकी न घुस जाएँ। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमास के आतंकियों ने 2003 में राफा बॉर्डर क्रॉसिंग की दीवार को धमाके करके उड़ा दिया था। इस समय गाजा के लोग पूरी तरह से कैद हो चुके हैं, क्योंकि इजरायल ने चारों तरफ से नाकाबंदी कर दिया है।

वैसे, हमास के आतंकी सुरंगों के जरिए मिस्र से होने वाले सामानों की तस्करी से हर महीने 1.20 करोड़ डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपए) की रकम उगाहते थे, लेकिन साल 2013 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने इन सुरंगों को नष्ट करने के आदेश दे दिया। इससे हमास की यह कमाई भी खत्म हो गई। अल-सीसी हमास को मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे आतंकी संगठन का विस्तार मानते थे। मिस्र ने मुस्लिम ब्रदरहुड पर बैन लगा रखा है।

इस्लामी देशों ने ही मुस्लिम शरणार्थियों को शरण देने से किया इनकार

जॉर्डन, जिसने ‘मुस्लिम भाईचारे’ के नाम पर अब तक लाखों विदेशी नागरिकों, चाहे वो फिलिस्तीनी रहे हों या फिर सीरियाई या ईराकी, उन्हें निकालने की तैयारी कर रहा है। मई 2023 में ‘जॉर्डन इनीशिएटिव’ लागू होने के बाद अब तक जो जॉर्डन मुस्लिम शरणार्थियों का स्वागत करता था, वो विदेशी मुस्लिमों का विस्थापन करने की तैयारी कर रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताई है।

इसी तरह से लेबनान और तुर्किये ने अपने ‘उम्माह समर्थक’ देश की छवि को बदलने की कोशिश की है। अप्रैल 2023 से इन देशों। ने सीरियाई शरणार्थियों को जबरन उनके देश भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

इस तरह, उम्माह का कट्टर समर्थक पाकिस्तान भी अपना रंग बदल चुका है। तालिबान का कब्जा होने के बाद अफगानिस्तान छोड़कर भागे लाखों मुस्लिम अफगानियों को कुछ दिनों में अपने देश लौटने या फिर जबरन निर्वासित करने का फैसला सुना दिया है। इसके लिए उसने महज 4 सप्ताह का ही समय दिया है।

वैसे, उम्माह के आधार पर युद्धग्रस्त यमन के लोगों को भी मुस्लिम देशों में शरण मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि मुस्लिम देशों के बीच उन्हें पीड़ित नहीं दिखाया जा सकता। पीड़ित वो तब होते हैं, जब मामला दूसरे धर्म के लोगों से जुड़ा हो।

सीरियाई, सूडानी और लीबियाई शरणार्थियों के लिए भी यही बात लागू होती है। अफ्रीका और अन्य जगहों पर आतंकवाद द्वारा सताए जा रहे मुस्लिमों को समर्थन देने की कोई सुगबुगाहट भी नहीं मिलती, क्योंकि वो ‘साझे दुश्मन’ नहीं हैं। वे आपस में लड़ने वाले सभी मुस्लिम ही हैं। यमन के हालात पर भी किसी मानवाधिकार संगठनों ने मुँह नहीं खोला।

हकीकत ये है कि पाकिस्तान, ईरान, तुर्किये, फ़िलिस्तीन, लेबनान आदि जैसे इस्लामी राष्ट्रों ने मुस्लिमों की ही हत्याएँ की हैं। पाकिस्तान में स्थानीय मुस्लिम संप्रदायों – अहमदिया, बलूच और सिंधियों पर बेहिसाब अत्याचार किए जा रहे हैं। गाजा पट्टी में हमास ने खुद से असहमत मुस्लिमों और फ़तह पार्टी से जुड़े नेताओं की हत्याएँ कीं। साथ ही इन कुकृत्यों को दबा भी दिया गया।

इसके उलट, गैर-इस्लामी लोगों को निशाना बनाने के लिए मुस्लिमों को ट्रेनिंग दी गई। यहूदियों से घृणा में सारे मुस्लिम देश एक साथ खड़े हैं। ईरानी संसद में यहूदियों के होलोकास्ट की माँग और अमेरिका के खात्मा का ऐलान किया जाता है तो पाकिस्तान में खुलेआम हिंदुओं को सताया जाता है। ‘साझा दुश्मन’ की धारणा इन मुस्लिमों देशों में इतनी मजबूत है कि हमास ने सैकड़ों इजरायली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को मौत के घाट उतार डाला, लेकिन एक भी अरब देश ने अब तक हमास की निंदा नहीं की।

बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने रॉकेट हमले के साथ ही इजरायल में घुसकर खुलेआम यहूदियों का खून बहाया। उन्होंने गाँव के गाँव तबाह कर दिए। महिलाओं का बलात्कार किया और उन्हें बंधक बनाकर गाजा पट्टी ले गए। उस दौरान बच्चों के सिर कलम कर दिए गए और बुजुर्गों को गोली मार दी गई। ये हमला उस दिन किया गया, जब यहूदियों का त्यौहार था।

निष्कर्ष

दुनिया भर में हमास के लिए झकझोर कर रख देने वाला समर्थन सामने आया है। पूरी दुनिया के मुस्लिमों ने हमास द्वारा किए गए महिलाओं, बच्चों और सैकड़ों नागरिकों की क्रूर हत्याओं का समर्थन किया। ये मुस्लिम पश्चिमी देशों में लोकतंत्र का मजा लेते हुए अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का गजब मजा उठा रहे हैं और इजरायल के खात्मे का ऐलान कर रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर ये मुस्लिम यमन के युद्ध पीड़ितों, अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चियों की हालत की कभी परवाह नहीं की, क्योंकि वो साझे दुश्मन यानि हिंदू-ईसाई-यहूदी नहीं हैं। ये तभी इकट्ठे होते हैं, जब उनके सामने ये विधर्मी लोग होते हैं।

इस बीच, राजनीतिक तौर पर भी देखें तो पूरी दुनिया दुनिया आतंकवादी संगठन हमास के समर्थन में खड़ी है तो भारत-अमेरिका समेत तमाम गैर-इस्लामी देश इजरायल के साथ खड़े हैं। फर्क आपको भी समझ में आ रहा होगा कि इन मुस्लिम देशों के लिए मुस्लिम उम्माह नाम की बात सिर्फ ढकोसला भर है।

‘युवाओं का नरसंहार, महिलाओं से बलात्कार… जवाब देना इजरायल का कर्तव्य’: खुलकर साथ आए बायडेन, युद्धपोत के बाद अमेरिका ने गोला-बारूद भेजे

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का अमेरिका ने खुले तौर पर समर्थन किया है। ​अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि जिस तरह की बर्बरता हुई है, उसका जवाब देना इजरायल का कर्तव्य है। अमेरिका का एक विमान गोला-बारूद लेकर भी इजरायल पहुँचा है।

इन हमलों में 14 अमेरिकी नागरिकों की मौत की पुष्टि भी बायडेन ने की है। साथ ही बताया है कि बंधकों में भी अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। देश को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमास के हमलों को ‘बर्बर’ बताया है।

उन्होंने कहा कि हमास का यह हमला इस्लामिक स्टेट की बर्बरता की याद दिलाता है। इजरायल में लोगों को काटा गया। बच्चों को बचाने के लिए लोगों ने अपने जान कुर्बान कर दिए। परिवारों का कत्लेआम किया गया। युवाओं का नरसंहार हुआ। म्यूजिक फेस्टिवल में महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। उन्होंने कहा कि इजरायल को ना केवल यह अधिकार है कि वह इन हमलों का जवाब दे, बल्कि यह उसका कर्तव्य भी है।

बायडेन ने कहा कि हमले के बाद इस इलाके में अमेरिका ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाया है। साथ ही इजरायल को भी सैन्य मदद दी जा रही है। अमेरिका ने अपने सबसे बड़े विमानवाहक युद्धपोत USS फोर्ड को इजरायल भेजा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका से गोला-बारूद लेकर एक विमान भी इजरायल पहुँचा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा यह एकदम स्पष्ट है कि हम इजरायल के साथ खड़े हैं। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इस संकट में इजरायल के पास वह सब हो जो उसे अपने नागरिकों की देखभाल करने, अपनी सुरक्षा करने और इस हमले का जवाब देने के लिए जरूरी है। गौरतलबी है कि हमलों के बाद से राष्ट्रपति बायडेन तीन बार इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर चुके हैं। दो बार देश को संबोधित कर चुके हैं।

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन 11-13 अक्टूबर तक इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया था। इन हमलों में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 3000 लोग घायल हुए हैं। 150 के करीब लोगों को हमास ने गाजा के भीतर बंधक बनाकर रखा है।

जवाबी कार्रवाई में इजरायल लगातार गाजा पट्टी पर हवाई हमले कर रहा है। इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 2,294 आतंकी पनाहगाहों को निशाना बनाया गया है। इजरायल ने अपने 3 लाख रिजर्व सैनिकों को भी वापस बुला लिया है। माना जा रहा है कि वह जल्द ही गाजा में अपनी सेना भी भेजेगा।

जिस हमास ने 1200 को मार डाला, उसके समर्थन में पाकिस्तानी खिलाड़ी: श्रीलंका पर जीत गाज़ा को किया समर्पित, हैदराबाद के ग्राउंड में मोहम्मद रिजवान ने ग्राउंड में पढ़ी दुआ

पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने इजरायल-हमास युद्ध पर प्रतिक्रिया दी है। मोहम्मद रिजवान क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत आई पाकिस्तानी टीम का हिस्सा हैं। जहाँ इधर ODI विश्व कप चल रहा है, उधर इजरायल में हमास के आतंकियों ने घुस कर 1200 लोगों का कत्लेआम मचाया है। यहाँ तक कि एक गाँव में 40 से अधिक बच्चों को काट डाला गया। कई बच्चों को जला दिया गया। गाँव में हर तरफ लाशें ही लाशें मिलीं। फिलिस्तीन की तरफ से इजरायल पर 5000 रॉकेट दागे जाने के बाद इस युद्ध की शुरुआत हुई है।

मोहम्मद रिजवान ने नमाज़ पढ़ते हुए हाथ की इमोजी शेयर करते हुए इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “ये (श्रीलंका के खिलाफ जीत) गाज़ा में रहने वाले हमारे भाई-बहनों के लिए है। इस जीत में योगदान देकर मैं प्रफुल्लित हूँ। पूरी टीम को इसका क्रेडिट जाता है, खासकर अब्दुल्लाह शफ़ीक़ और हसन अली को, जिन्होंने इसे आसान बना दिया। अद्भुत मेजबानी और लगातार समर्थन के लिए हैदराबाद के लोगों का धन्यवाद।” बता दें कि मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) को मोहम्मद रिजवान श्रीलंका के खिलाफ पाकिस्तान की जीत के हीरो बने।

वर्ल्ड कप के इस मैच में श्रीलंका ने 344 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था और स्कोर का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम 37 रनों के स्कोर पर 2 विकेट खो चुकी थी, लेकिन ऐन वक्त पर मोहम्मद रिजवान ने 121 गेंदों मर 131 रनों की पारी खेली। उनका साथ दिया सलामी बल्लेबाज अब्दुल्लाह शफीक ने, जिन्होंने 103 गेंदों पर 113 रन जड़े। पाकिस्तान के दोनों शतकवीरों कुशल मेंडिस और समारा विक्रमा को तेज़ गेंदबाज हसन अली ने आउट किया था। मोहम्मद रिजवान ने इस मैच में विकेट के पीछे 3 कैच भी लपके।

मोहम्मद रिजवान ग्राउंड में नमाज़ पढ़ने के लिए भी जाने जाते हैं। ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के पहले मैच में भी उन्होंने नीदरलैंड्स के खिलाफ 68 रनों की पारी खेली थी और वो मैच भी पाकिस्तान जीता था। उसी मैच के दौरान 31 वर्षीय मोहम्मद रिजवान ग्राउंड पर नमाज़ पढ़ते नजर आए थे। मैच की दूसरी पारी में अफगानिस्तान की बैटिंग के दौरान ड्रिंक्स के समय का उनका ये वीडियो वायरल हुआ था। वहीं जून 2023 में उन्होंने अमेरिका में सड़क किनारे नमाज़ पढ़ी थी।

हालिया मैच की बात करें तो उसमे भी मोहम्मद रिजवान ने दुआ पढ़ी। हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल स्टेडियम में पाकिस्तान की मैच के दौरान जम कर उसके समर्थन में नारे भी लगे। इसमें जीत पाकिस्तान की हुई लेकिन वीडियो जो वायरल हुआ, वो किसी प्लेयर का नहीं बल्कि “जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” के नारे लगाती भीड़ का। इन नारों से वहाँ बैठे आम भारतीय भी आश्चर्य में पड़ गए। भारत में रहने वाले कुछ हिंदुस्तानी नागरिक पाकिस्तानी टीम के जबरदस्त फैन हैं। इतने बड़े वाले प्रशंसक कि 850 किलोमीटर दूर भोपाल से गाड़ी चलाकर हैदराबाद आ गए।

हिम्मत मत हारो, बस डटे रहो मोर्चे पर… हमास आतंकियों से लड़ने के लिए ज़ंग में उतरा 95 साल का इजरायली बुजुर्ग, बढ़ा रहे हैं सैनिकों का मनोबल

उम्र महज एक नंबर है और ये साबित कर दिखाया है ‘इजरायली डिफेंस फोर्स’ (IDF) के सबसे उम्रदराज रिजर्विस्ट 95 साल के एजरा याचिन ने। यरूशलम के रहने वाले इस बुजुर्ग फाइटर को हमास के खिलाफ चल रही इजरायल की मौजूदा जंग में सैनिकों के संग बात कर के उनका मनोबल बढ़ाने के लिए रिजर्व में शामिल किया गया है।

यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि यरूशलम के दंगों और परेशान करने वाले हादसों से भरा एक मुश्किल बचपन जीने के बावजूद उन्होंने और उनके दोस्तों ने कभी हार नहीं मानी। वो देश के लिए हमेशा सीना ताने डटे रहे और इजरायल को महान राष्ट्र बनाने में अहम योगदान दिया।

उनका एक संदेश इजरायली सेना में जोश भरने के लिए काफी है। वो कहते हैं कि हिम्मत हारो, मत अभी भी नहीं। उम्रदराज एजरा मिशन में ऐसे वक्त में शामिल हुए हैं जब इजरायल और फिलिस्तीन में यद्ध चल रहा है, हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर भयंकर कत्लेआम मचाया है। अपने ‘X’ हैंडल पर पत्रकार हनन्या नफ्ताली ने उनकी तस्वीर कैप्शन के साथ पोस्ट की है।

हालाँकि, एजरा याचिन का मिशन एक सैनिक के पारंपरिक कर्तव्यों से परे है। उन्हें प्रतिकूल हालातों का सामना करने वाले रवैये, उम्मीदों और अदम्य भावना से भरी अपनी जिंदगी की अविश्वसनीय कहानी सैनिकों के बीच साझा करके उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया है, जिसने इज़रायल के इजरायल बनने में मदद की थी।

इजरायली सेना रिजर्व क्या है?

हमास समूह के कई तरह के हमले का मुकाबला करने के लिए इज़रायल ने अपनी थल सेना और वायु सेना की संयुक्त ताकत के साथ गाजा को मलबे में तब्दील करने के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कसम को पूरा करने के लिए 3 लाख रिजर्व जुटाए हैं। दरअसल इस देश में युद्ध के दौरान 18 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को लिंग या जातीयता की परवाह किए बगैर सेना में सेवा देना जरूरी है। वहीं पुरुषों और महिलाओं दोनों को कम से कम 24 से 32 महीने तक सेना में सेवा देना जरूरी है।

हालाँकि, इमरजेंसी के हालात वाली इस ज़रूरी सेवा में कुछ लोगों का शामिल होना कतई जरूरी नहीं है। इन अपवादों में धार्मिक महिलाएँ, शादीशुदा शख्स और मानसिक या शारीरिक विकलांगता वाले लोग आते हैं। इस ज़ंग के बीच दुनिया भर की विदेशी सरकारें यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उनके कितने नागरिक मारे गए, लापता हैं, उन्हें मेडिकल हेल्प या घर वापसी की जरूरत हैं। इस दौरान कई देशों ने भी इस जंग को खत्म करने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है।

इस हालिया शुरू हुई जंग में पहले ही कम से कम 1800 लोग मारे जा चुके हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका हैं, क्योंकि इज़रायल ने गाजा पट्टी पर किए तेज हवाई हमलों ने फिलिस्तीनियों को संयुक्त राष्ट्र आश्रयों में भागने के लिए मजबूर कर दिया। वहीं दूसरी तरफ रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय कमेटी के एक अधिकारी के मुताबिक, उनका संगठन कैदियों तक पहुँच के लिए हमास और इजरायली अधिकारियों दोनों के संपर्क में है, लेकिन अभी तक उन तक पहुँच नहीं हो पाई है।

हमास-इजरायल युद्ध ने बुधवार (11 अक्टूबर, 2023) को पाँचवा दिन है। IDF ने कहा कि इजरायल में आतंकवादी संगठन हमास के रॉकेट और घात लगाकर किए गए हमलों मृतकों की संख्या 1000 को पार कर गई हैं। वहीं 2800 से अधिक घायल है। वहीं 50 के लापता होने या बंधक बनाए जाने की पुष्टि हुई है। IDF के मुताबिक, गाजा से अब तक 5000 से अधिक रॉकेट दागे गए हैं।

उधर दूसरी तरफ गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय मुताबिक, चल रहे जवाबी हमले के तहत हवाई हमलों में 770 से अधिक फिलिस्तीनी भी मारे गए हैं। इसके साथ ही 4000 अन्य घायल हुए हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक, मृतकों में 140 बच्चे और 120 महिलाएँ शामिल हैं।

जिसके इशारे पर पठानकोट में बहा भारतीय जवानों का लहू, उसे मस्जिद में घुस कर ‘अज्ञात हमलावरों’ ने मार डाला, मनमोहन की सरकार में छोड़ दिया गया था जैश आतंकी

जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ़ की पाकिस्तान के सियालकोट में ‘अज्ञात हमलावरों’ ने हत्या कर दी। वह भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में से एक था और उसके विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका था। पठानकोट हमले में ‘डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स’ के 5 जवान, IAF के एक गार्ड और NSG के एक कमांडो बलिदान हो गए थे।

सियालकोट की एक मस्जिद के भीतर शाहिद लतीफ़ की हत्या बुधवार सुबह (11 अक्टूबर, 2023) को हो गई। शाहिद सियालकोट इलाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का बड़ा कमांडर था। उसको ‘छोटा शाहिद भाई’ और नूरु अल दीन के नाम से जाना जाता था। एक और जानने वाली बात है कि 2010 में कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘गुडविल गेस्चर’ दिखाते हुए उसे पाकिस्तान को प्रत्यर्पित कर दिया था।

लतीफ़ को एक बार वर्ष 1994 में भारत में भी UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और वर्ष 2010 में सज़ा पूरी होने पर पाकिस्तान प्रत्यर्पित कर दिया गया था। वह पाकिस्तान जाकर दोबारा भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में भाग लेने लगा था। वर्ष 2020 में भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा UAPA के अंतर्गत आतंकी घोषित किए जाने वालों की लिस्ट में उसका भी नाम था। लतीफ़ वर्ष 1999 में हुई इंडियन एयरलाइन्स के विमान की हाईजैकिंग में भी आरोपित था।

वर्ष 2016 में पंजाब की सीमा से सटे पठानकोट में स्थित भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण एयरबेस पर हमला हुआ था। एयरबेस के अंदर पाकिस्तानी आतंकी घुस आए थे और छुप कर हमला करने लगे थे। शाहिद लतीफ़ इस हमले का साजिशकर्ता था। उसने ही यह हमला करने वाले चारों आतंकियों को पठानकोट भेजा था।

1 जनवरी, 2016 को हुए पठानकोट एयरबेस पर हुए इस हमले में 7 सुरक्षाकर्मियों समेत 8 लोगों की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में 4 आतंकी मारे गए थे। भारतीय जाँच एजेंसियों ने इस आतंकी हमले के पीछे जैश-ए-मुहम्मद के आतंकियों का हाथ बताया था।

पाकिस्तान में ‘अज्ञात हमलावरों’ द्वारा मारे जाने वाले आतंकियों की सूची में शाहिद सबसे नया नाम है। इससे कुछ ही दिन पहले कराची में लश्कर के एक आतंकी मुफ़्ती कैसर फारूक की भी अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। पाकिस्तान में ही रहने वाले खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पंजवार की भी अप्रैल 2023 में इसी तरह हत्या हुई थी।

इंजीनियर फिरोज शेख ने प्लेन में निकाला गुप्तांग, हिलाने लगा… बगल में बैठी महिला टीचर को दिखाया: पिता के अंतिम संस्कार में जा रही थी पीड़िता

अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए पुणे से नागपुर जा रही 40 साल की एक महिला शिक्षक से फ्लाइट में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर नागपुर की सोनेगाँव पुलिस ने 32 साल के फिरोज शेख नूर मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया है। वह पेशे से इंजीनियर है।

रिपोर्ट के अनुसार फिरोज शेख पीड़ित महिला की बगल की सीट पर बैठा और अपने गुप्तांग हिला रहा था। शुरुआत में महिला ने उसकी हरकत को नजरंदाज कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि वह खुजली कर रहा है। यह घटना 9 अक्टूबर 2023 की है। विमान लैंड करने के बाद एयरपोर्ट से शेख को गिरफ्तार किया गया। फिरोज शेख पुणे के कोंढवा का रहने वाला है और अगले महीने उसकी निकाह होनी है। पुलिस के मुताबिक पीड़ित महिला चंद्रपुर की रहने वाली है और पिता के अंतिम संस्कार के लिए नागपुर आ रही थी।

पुलिस के मुताबिक पीड़ित महिला चंद्रपुर की रहने वाली है और पिता के अंतिम संस्कार के लिए नागपुर आ रही थी। पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि पहले तो उन्हें लगा कि आरोपित खुजली रहा है। ये सोचकर उन्होंने उसकी हरकत को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब उसने ऐसा करना जारी रखा और अश्लील तरीके से उन्हें केहुनी मारते हुए इशारा किया तब वह भौंचक रह गईं।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि विमान के नागपुर हवाई अड्डे पर लैंड करने के बाद महिला ने आरोपित की शिकायत की। शेख पर यौन उत्पीड़न समेत IPC की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें आईपीसी की धारा 354 (स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न) और 509 (आपराधिक इरादे से छूकर महिला की लज्जा भंग करने की कोशिश) शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट में सवार केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक जवान ने महिला से छेड़खानी के दौरान आरोपित फिरोज शेख को रोका था। पीड़ित महिला केबिन क्रू को बुलाना चाहती थी, लेकिन तब तक फ्लाइट लैंड हो चुकी था। जैसे ही प्लेन के दरवाजे खुले कथित तौर पर शेख ने पीछे के निकास की तरफ से भागने की कोशिश की। कथित तौर पर शेख ने ​एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग के समय भी अश्लील हरकत की थी।

‘जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा’: भीड़ में हैदराबादी और भोपाली भी… यूँ ही नहीं रिजवान को मिली भारत में रावलपिंडी वाली मोहब्बत और दुआ

पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच वर्ल्ड कप 2023 का एक मैच खेला गया। हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल स्टेडियम में। इसमें जीत पाकिस्तान की हुई लेकिन वीडियो जो वायरल हुआ, वो किसी प्लेयर का नहीं बल्कि “जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” के नारे लगाती भीड़ का।

वर्ल्ड कप 2023 के पाकिस्तान बनाम श्रीलंका मैच के दौरान हैदराबाद के स्टेडियम में जब “जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” के जोरदार नारे लगे तो वहाँ बैठे आम भारतीय भी आश्चर्य में पड़ गए। जब इसका वीडियो वायरल हुआ तो सोशल मीडिया पर कई यूजर्स भी आर्श्चय से सवाल पूछने लगे।

“जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” का यह नारा जिस भीड़ ने लगाया, दिल से लगाया। दिल से क्यों और कैसे लगाया, इसका प्रमाण यह है कि इसकी शुरुआत एक डीजे ने की। डीजे ने इसे ऐसे शुरू किया – “जीतेगा भाई जीतेगा”। डीजे के इतना बोलते ही भीड़ ने उसके बाद नारे को पूरा करते हुए कहा – “…पाकिस्तान जीतेगा”।

X पर एक यूजर ने लिखा कि हैदराबाद भले ही श्रीलंका से भौगोलिक तौर पर नजदीक है लेकिन पाकिस्तान के साथ हैदराबादी लोगों के दिल की नजदीकियाँ हैं, डेमोग्राफी के स्तर पर ये दोनों साथ-साथ हैं।

सवाल उठता है कि क्या जिस भीड़ ने “जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” का नारा लगाया, वो सिर्फ हैदराबादी भीड़ थी? जवाब है – नहीं। भारत में रहने वाले कुछ हिंदुस्तानी नागरिक पाकिस्तानी टीम के जबरदस्त फैन हैं। इतने बड़े वाले प्रशंसक कि 850 किलोमीटर दूर भोपाल से गाड़ी चलाकर हैदराबाद आ गए

“ऐसा लग रहा था, जैसे मैं रावलपिंडी में खेल रहा हूँ। जिस तरह से भीड़ ने हमें मोहब्बत दी, वह अद्भुत था। यह हमारे लिए घरेलू मैच जैसा लगा।”

131 रन बना कर नाबाद रहने वाले मोहम्मद रिजवान ने यूँ ही नहीं इतनी बड़ी बात कह दी। कुछ हिंदुस्तानियों की भीड़ ने जो प्यार पाकिस्तानी टीम पर बरसाई, वो वायरल वीडियो में तो देख-सुन सकते ही हैं… अगर आपने टीवी पर लाइव मैच देखा है तो आप उस क्लिप को भी याद कर सकते हैं जब “जीतेगा भाई जीतेगा, पाकिस्तान जीतेगा” के नारों को सुन कर पवेलियन में बैठे बाबर आजम भी आश्चर्यचकित होकर मुस्कुराने लगे थे।

मोहब्बत के माहौल में, रावलपिंडी जैसा रोमांच और श्रीलंका के खिलाफ मैच में रिकॉर्ड जीत के बाद पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने हैदराबाद स्टेडियम के ग्राउंड स्टाफ को अपनी जर्सी तक दे दी। साथ में फोटो-सेल्फी सब भी किया गया। खिलाड़ियों और ग्राउंड स्टाफ के बीच बने स्पेशल बॉन्ड तक भी जिक्र किया गया।

भारत के साथ परोक्ष-प्रत्यक्ष युद्ध लड़ने, आतंकियों को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान का समर्थन करने वाले लोग कौन हैं? भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता, भीड़ का कोई नाम नहीं होता। इसलिए इसकी जाति-मजहब-उम्र आदि अमूमन छिप जाती है। गौर करने लायक बात यह है कि अपने समय के मशहूर पाकिस्तानी क्रिकेटर मुश्ताक अहमद ने भारत में पाकिस्तानियों के समर्थक भीड़ पर कुछ कहा था। मुश्ताक ने कहा था कि हैदराबाद और अहमदाबाद में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, इसलिए इन जगहों पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को समर्थन मिलेगा।