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जातीय गणना: लालू ने बताया संपूर्ण क्रांति तो राहुल गाँधी ने जनसंख्या के हिसाब से भागीदारी का लिया प्रण, गिरिराज सिंह बोले- सब भ्रम है

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़े जारी कर दिए हैं। बिहार सरकार द्वारा आँकड़े जारी करने के बाद तमाम बड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। राहुल गाँधी ने तो पूरे देश में जातिगत जनगणना की माँग कर डाली है। वहीं, लालू प्रसाद ने जेपी के संपूर्ण क्रांति को याद किया है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाएँ कुछ ऐसी रहीं।

नीतीश कुमार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था। बिहार विधानसभा के सभी 9 दलों की सहमति से निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराएगी। दिनांक 02-06-2022 को मंत्रिपरिषद से इसकी स्वीकृति दी थी। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराई है।”

उन्होंने आगे लिखा है, “जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है, बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी और जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा।”

बिहार की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहे आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “जातीय जनगणना से ही जेपी का संपूर्ण क्रांति का सपना पूरा होगा, 2015 में भी मैंने यह बात कही थी।”

लालू प्रसाद यादव ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “आज गाँधी जयंती पर इस ऐतिहासिक क्षण के हम सब साक्षी बने हैं। बीजेपी की अनेकों साजिशों, कानूनी अड़चनों और तमाम षड्यंत्र के बावजूद आज बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वे को रिलीज किया। ये आँकड़े वंचितों, उपेक्षितों और गरीबों के समुचित विकास और तरक़्क़ी के लिए समग्र योजना बनाने एवं हाशिए के समूहों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने में देश के लिए नज़ीर पेश करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी हो। हमारा शुरू से मानना रहा है कि राज्य के संसाधनों पर न्यायसंगत अधिकार सभी वर्गों का हो। केंद्र में 2024 में जब हमारी सरकार बनेगी तब पूरे देश में जातिगत जनगणना करवायेंगे और दलित, मुस्लिम, पिछड़ा और अति पिछड़ा विरोधी भाजपा को सता से बेदखल करेंगे।”

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने कहा कि बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहाँ OBC + SC + ST 84% हैं। केंद्र सरकार के 90 सचिवों में सिर्फ 3 OBC हैं, जो भारत का मात्र 5% बजट सम्भालते हैं। इसलिए, भारत के जातिगत आँकड़े जानना जरूरी है। जितनी आबादी, उतना हक। ये कॉन्ग्रेस का प्रण है।

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, “कम समय में जाति आधारित सर्वे के आँकड़े एकत्रित एवं उन्हें प्रकाशित कर बिहार आज फिर एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। दशकों के संघर्ष ने एक मील का पत्थर हासिल किया। इस सर्वेक्षण ने ना सिर्फ वर्षों से लंबित जातिगत आँकड़े प्रदान किए हैं, बल्कि उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति का भी ठोस संदर्भ दिया है। अब सरकार त्वरित गति से वंचित वर्गों के समग्र विकास एवं हिस्सेदारी को इन आंकड़ों के आलोक में सुनिश्चित करेगी।”

उन्होंने आगे लिखा, “इतिहास गवाह है भाजपा नेतृत्व ने विभिन्न माध्यमों से कितनी तरह इसमें रूकावट डालने की कोशिश की। बिहार ने देश के समक्ष एक नजीर पेश की है और एक लंबी लकीर खींच दी है सामाजिक और आर्थिक न्याय की मंज़िलों के लिए। आज बिहार में हुआ है कल पूरे देश में करवाने की आवाज उठेगी और वो कल बहुत दूर नही है। बिहार ने फिर देश को दिशा दिखाई है और आगे भी दिखाता रहेगा।”

भाजपा ने बताया दिखावा

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है, “जाति जनगणना राज्य के गरीबों और जनता के बीच ‘भ्रम’ फैलाने से ज्यादा कुछ नहीं करेगी। उन्हें एक रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए था कि नीतीश कुमार ने 18 साल तक राज्य पर शासन किया और लालू यादव ने 15 वर्षों तक राज्य पर शासन किया, लेकिन राज्य का विकास नहीं किया। जाति जनगणना का रिपोर्ट कार्ड सिर्फ दिखावा है…।”

बिहार में आए जातिगत जनगणना के आंकड़े

बता दें कि बिहार में हुई जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी हो गई है। बिहार के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने इन आँकड़ों को जारी करते हुए बताया कि बिहार में पिछड़ा वर्ग 27.13%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01%, सामान्य वर्ग 15.52% है। बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ से अधिक है। इन आँकड़ों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जाति की कुल आबादी तीन प्रतिशत से भी कम है।

शिवभक्त उजमा शुद्धिकरण के बाद बनी उर्मिला, भागीरथ से की शादी: परिजनों से बताया जान का खतरा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में उजमा नाम की मुस्लिम महिला ने घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। उजमा का नया नाम उर्मिला रखा गया है। उर्मिला ने अगत्स्य मुनि आश्रम में वैदिक विधि-विधान से भागीरथ नाम के युवक से विवाह किया। उजमा और भागीरथ मूल रूप से पीलीभीत जिले के निवासी हैं। यह विवाह रविवार (1 अक्टूबर 2023) को सम्पन्न हुआ।

भागीरथ मूल रूप से पीलीभीत के नेओरीया थाना क्षेत्र के हुल्करी ढकिया के निवासी हैं। उजमा इसी जिले के हुसैनपुर क्षेत्र की। इस शादी को संपन्न करवाने वाले पंडित केके शंखधर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि उजमा का ननिहाल भागीरथ के गाँव में है। 2 साल पहले उजमा अपनी नानी के घर गई थीं।

उजमा कुछ सामान लेने के लिए गाँव की ही एक परचून दुकान पर गई थीं, जहाँ उनकी मुलाकात भागीरथ से हुई। दोनों पहली ही मुलाकात में एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए। वे दोनों फोन पर बातें करने लगे। कुछ दिनों बाद दोनों में प्यार की गहराई में उतर गए और शादी की तैयारी करने लगे।

पंडित शंखधर ने हमें आगे बताया कि जब उजमा ने अपने अब्बा इकबाल से भागीरथ के साथ रिश्ते के बारे में बताया वो वो आग-बबूला हो गए। उजमा को जान से मारने की धमकी दी गई। साथ ही उस पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए। उजमा के घर वाले उसका निकाह कहीं और करने की तैयारी करने लगे।

हालाँकि, उजमा किसी भी हाल में भागीरथ से ही शादी करना चाहती थी। इसी मकसद से लगभग 5 माह पहले वो भागीरथ के साथ घर छोड़ कर कहीं चली गई और दोनों छिपकर रहने लगे। इस बीच उजमा और भगीरथ रजिस्टर्ड शादी के लिए कई वकीलों से सम्पर्क करते रहे।

इन्हीं में से बरेली के एक वकील ने उन्हें अगत्स्य मुनि आश्रम जाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों सभी कागजातों के साथ बरेली अगत्स्य मुनि आश्रम आए। यहाँ पंडित केके शंखधर ने दोनों के कागजातों की जाँच करवाई। पेपर सही पाए जाने और उजमा के बालिग होने की पुष्टि के आगे की प्रक्रिया पूरी की गई।

रविवार (1 अक्टूबर 2023) को विवाह से पहले उजमा का गोमूत्र और गंगाजल से शुद्धिकरण हुआ और उसे हिंदू धर्म में घरवापसी करवाई गई। इसके बाद नाम बदलकर उजमा से उर्मिला किया गया। फिर दोनों का विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अगत्स्य मुनि आश्रम में विवाह सम्पन्न हुआ।

भगीरथ पेशे से ड्राइवर हैं। वो और उनकी बीवी उजमा शादी से काफी खुश हैं। विवाह के बाद भगीरथ उजमा से उर्मिला बनी अपनी पत्नी को अपने साथ घर ले गए। लोगों ने दोनों को सुखी दाम्पत्य जीवन की शुभकामना दी हैं।

उजमा ने बताया कि उसे हिंदू धर्म में बहुत विश्वास है। उसने कहा कि वह भगवान भोलेनाथ की भक्त है। शादी के बाद अब उसने अपने घरवालों से जान का खतरा भी बताया है। उजमा ने पुलिस से अपने अपने पति भागीरथ के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की है।

GPS देखकर चला रहे थे कार, सड़क की जगह उफान मार रही नदी में समा गए: केरल में जन्मदिन की शॉपिंग से लौट रहे दो डॉक्टर की मौत

अक्सर हम रास्ता खोजने के लिए जीपीएस की मदद लेते हैं। जीपीएस के बताए रास्ते पर बेफ्रिक होकर चल पड़ते हैं। लेकिन केरल के एर्नाकुलम में जीपीएस की मदद से सफर कर रहे दो डॉक्टरों की नदी में डूबने से मौत हो गई।

दरअसल रविवार (1 अक्टूबर 2023) की देर रात 29 साल के डॉ. अद्वैत अपने जन्मदिन की शॉपिंग कर कोडून्गाल्लुर से कोच्चि लौट रहे थे। उनके साथ कार में चार अन्य लोग भी सवार थे। भारी बारिश के बीच वे लोग जीपीएस के सहारे आगे बढ़ रहे थे। लेकिन उनकी कार नदी में समा गई। हादसे में डॉ. अद्वैत और डॉ. अजमल आसिफ की मौत हो गई। तीन अन्य लोग समय रहते कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ये सभी लोग एक हौंडा सिविक कार में सवार थे। रात का समय और बारिश होने के कारण उन्हें रास्ता नहीं पता चल रहा था। रास्ता का पता लगाने के लिए डॉक्टर अद्वैत ने अपने फ़ोन में जीपीएस चालू किया। जीपीएस उनको जिस रास्ते पर ले गया उस पर पानी भरा हुआ था। उन्होंने सड़क समझ कर गाड़ी आगे बढ़ा दी। लेकिन वह सड़क न होकर बारिश के कारण उफान मार रही नदी थी।

इसी नदी के वेग में डॉक्टर अद्वैत और डॉक्टर आसिफ अजमल बह गए। गाड़ी में पीछे बैठे तीन अन्य व्यक्ति निकलने में सफल रहे। स्थानीय सूत्रों ने अंग्रेजी समाचार वेबसाइट डेक्कन हेराल्ड को बताया कि गाड़ी चला रह व्यक्ति ने गलत मोड़ ले लिया और कार नदी में समा गई।

हादसे में जीवित बचे डॉक्टर गाजिक तब्शीर ने बताया, “हाँ, हम उस दौरान जीपीएस का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन मैं गाड़ी नहीं चला रहा था, इसलिए मै यह नहीं बता सकता कि उन्हें जीपीएस ने गलत रास्ता बताया या फिर यह कोई मानवीय भूल थी।” हादसे में बचे दो अन्य लोग जिस्मन (नर्स) और तमन्ना (MBBS छात्रा) हैं। हादसे में मारे गए डॉक्टर अजमल थ्रिसुर जिले के जबकि अद्वैत कोल्लम के निवासी थे। उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

राजस्थान में ‘वन्दे भारत’ को पलटाने की साजिश: पटरियों के बीच रखे पत्थर, लोहे की रॉड और लकड़ियाँ, पत्थर न गिरें इसका भी किया था इंतजाम

राजस्थान के भीलवाड़ा में उदयपुर से जयपुर के बीच चलने ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस को पटरी से पलटाने की साजिश का खुलासा हुआ है। ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस के आने से पहले पटरी पर पत्थर, लोहे की रॉड और लकड़ियाँ रख कर इसे पलटने की साजिश की गई थी।

उदयपुर से जयपुर के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत’ सोमवार (2 अक्टूबर, 2023) को सुबह 7:50 पर उदयपुर से रवाना होकर दोपहर 2:10 मिनट पर जयपुर पहुँचती है। यह ट्रेन भीलवाड़ा दिन में 10:20 बजे पहुँचती है। इसी समय ट्रेन की पटरी पर यह पत्थर पाए गए। वीडियो में देखा जा सकता है कि ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस रुकी हुई है और रेलवे के कर्मचारी पटरी पर से पत्थर हटा रहे हैं। पटरी पर कई जगह एक के ऊपर एक कई पत्थर रखे गए हैं। इस वजह से ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस पत्थरों के हटने तक खड़ी रही।

ट्रेन के चलने के कारण पटरी पर होने वाले कम्पन के कारण पत्थर नीचे ना गिरे इसके लिए भी साजिशकर्ताओं ने इंतजाम किया था। ऐसी जगह पर पत्थर रखे गए थे जहाँ दो पटरियाँ आपस में मिलती हैं। इन पटरियों के बीच में लोहे की रॉड लगा कर पत्थर रखे गए थे जिससे ट्रेन इसके ऊपर चढ़े और पलट जाए।

हालाँकि, पटरी पर नजर रखने के कारण लोको पायलट ने सही समय पर ट्रेन रोक दी और हादसा होने से बच गया। लोको पायलट ने ट्रेन रोक कर रेलवे के अन्य स्टाफ को सूचना दी और पटरी पर से पत्थर हटवाए।

इस ट्रेन को 24 सितम्बर को ही चलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन 9 वन्दे भारत ट्रेनों को एक साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरी झंडी दिखाई थी, उनमें से एक यह भी थी। यह राजस्थान की चौथी ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस है। इस घटना पर अभी तक रेलवे ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालाँकि, रेलवे पुलिस को इस मामले की जाँच के लिए लगाया गया है। इससे पहले भी देश भर में ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों पर कई बार पत्थर फेंके जा चुके हैं।

सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल आफताब अहमद, बच्चों से पकड़वाता था अपना लिंग: अभिभावकों से बोला- जो उखाड़ना हो उखाड़ लो

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल द्वारा छात्र-छात्राओं का यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित प्रिंसिपल का नाम आफताब अहमद है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित अभिभावकों ने बताया है कि वह बच्चों से अपना लिंग पकड़वाता था।

ताजा मामला 1 अक्टूबर 2023 का है। जब अभिभावकों ने इसके बारे में प्रिंसिपल से पूछा तो वह उनसे गाली गलौच पर उतर आया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र का है। यहाँ के कटघर गाँव के कम्पोजिट विद्यालय में 55 साल का आफताब अहमद प्रिंसिपल है।

पीड़ित छात्रों के परिजनों का आरोप है कि आफताब अहमद उनके बच्चों से स्कूल में अपना प्राइवेट पार्ट पकड़वाता था। कुछ साल पहले भी उसके द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने का मामला सामने आया था। लेकिन उस समय आफताब ने माफी माँग कर मामला निपटा लिया था। कुछ समय बाद उसने दोबारा बच्चों का यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया।

इसी क्रम में एक अक्टूबर को उसने 13 साल के एक अनुसूचित जाति के छात्र के साथ गंदी हरकत की। छात्र ने घर आ कर पूरी बात अपनी माँ को बताई। छात्र की माँ के स्कूल पहुँचने के बाद आफताब की हरकतों से पीड़ित अन्य बच्चों के अभिभावक भी वहाँ पहुँच गए। पीड़ित छात्रों और छात्राओं की संख्या करीब 1 दर्जन बताई गई है। इनकी उम्र 10 से 13 साल के बीच है।

स्कूल में अभिभावकों के पहुँचने पर आफताब नाराज हो गया। पीड़ित छात्र की माँ के अनुसार आफताब ने अपनी गलती मानने के बजाय झगड़ा शुरू कर दिया। उसने अभिभावकों को गंदी-गंदी गालियाँ दी। उनसे कहा, “जो उखाड़ना हो उखाड़ लो। तुम सब कुछ नहीं कर पाओगे।” सभी पीड़ित छात्र-छात्रों के परिजनों ने शिकायत पर गवाह के तौर पर दस्तखत किए हैं और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने आफताब के खिलाफ IPC की धारा 354, 294 और 504 के साथ SC/ST व पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इस मामले में आजमगढ़ जिले के SP सिटी ने बताया कि शिकायत मिलने पर क्षेत्र के DSP को जाँच सौंपी गई थी। जाँच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपित प्रिंसिपल के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आफ़ताब अहमद को हिरासत में ले लिया गया है।

‘ट्रांसजेंडर से हार गई मेडल’: एशियन गेम्स में गई भारत की महिला खिलाड़ी ने सनसनीखेज दावे के बाद डिलीट किया ट्वीट, नंदिनी बोलीं – मुझे पता है मैं कौन हूँ

चीन के हांगझाऊ शहर में चल रहे एशियन गेम्स के खेल हेप्टेथलॉन में मैडल ना जीतने पर भारतीय एथलीट ने एक सनसनीखेज दावा किया है। स्वप्ना बर्मन ने कहा है कि वह अपना मेडल एक ट्रांसजेंडर से हार गईं। स्वप्ना ने यह दावा एक्स (पहले ट्विटर) पर किया।

स्वप्ना ने लिखा, “मै हांगझाऊ में आयोजित 19वें एशियन गेम्स का अपना कांस्य पदक एक ट्रांसजेंडर से हार गई। मैं अपना मेडल वापस चाहती हूँ क्योंकि यह ओलम्पिक के नियमों के विरुद्ध है। कृपया मेरी सहायता करें।” स्वप्ना ने यह ट्वीट सुबह 9:15 पर किया और कुछ देर बाद हटा भी दिया।

स्वप्ना का ट्वीट, जो उन्होंने बाद में हटा दिया (चित्र साभार: YearOfTheKraken/X)

स्वप्ना बर्मन और नंदिनी हेप्टेथलॉन की खिलाड़ी हैं। यह एक ट्रैक एंड फील्ड खेल है। इसके अंतर्गत 100 मीटर की बाधा दौड़, ऊँची कूद, शॉट पुट, 200 मीटर दौड़, लम्बी कूद, जैवेलिन थ्रो और 800 मीटर की दौड़ शामिल होती है। सभी में मिलाकर जिस खिलाड़ी के सबसे अधिक अंक बनते हैं उसे ही मेडल मिलता है।

हांगझाऊ में आयोजित हो रहे एशियन खेलों में इस खेल की प्रतियोगिता 1 अक्टूबर को भारत की ही खिलाड़ी नंदिनी अगासरा ने कांस्य पदक जीता है और स्वप्ना इस प्रतियोगिता में चौथे नम्बर पर रहीं। स्वप्ना ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिखा, लेकिन कांस्य पदक नंदिनी ने जीता है इसलिए यह स्पष्ट हो गया कि वह किसको लेकर बात कर रहीं थी।

इस प्रतियोगिता में चीन की खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जबकि उज्बेकिस्तान की खिलाड़ी ने रजत पदक जीता। स्वप्ना भी रजत पदक जीतने के लिए जोर लगा रही थीं लेकिन वह कुछ प्रतियोगिताओं में पिछड़ गईं और पदक नहीं जीत सकीं। स्वप्ना के कुल 5708 पॉइंट थे जबकि नंदिनी के 5712 पॉइंट थे। स्वप्ना ने वर्ष 2018 में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार भी उनसे काफी उम्मीदें थी। हालाँकि, इस बीच वह काफी चोटों का शिकार हुई थीं और उनसे उबर कर अपना अंतिम प्रयास देने इस प्रतियोगिता में आई थी।

गौरतलब है कि खेलों में ट्रांसजेंडरों की सहभागिता को लेकर काफी विवाद होता आया है। महिला खिलाड़ियों का कहना है कि यह ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता अधिक होती है, इसीलिए वो महिलाओं से आगे निकल जाते हैं और वह महिलाओं के खेल में सहभागिता कर के उनके हिस्से के पदक भी ले जाते हैं। मार्च 2023 में विश्व एथलेटिक्स ने महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर महिलाओं के भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी यदि उनका यौवनारम्भ (Puberty) पुरुष के तौर पर हुआ है। कुछ अन्य नियम भी इस संबंध में लाए गए थे।

स्वप्ना के ट्रांसजेंडर वाले इस इस दावे को नंदिनी ने खारिज किया है। नंदिनी ने स्वपना के इस दावे पर ‘इंडिया टुडे‘ से कहा, “मुझे पता है मैं कौन हूँ। उनसे (स्वप्ना) से कहिए कि सबूत दिखाएँ। मैं यह भी दिखाऊँगी कि मैंने देश के लिए पदक जीता है। मैं केवल देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूँ।”

आगे नंदिनी ने कहा, “अब जबकि मैं जीत गई हूँ तो लोगों ने इस सम्बन्ध में बात करना चालू कर दिया है। मैं इस मामले को भारतीय एथलेटिक फेडरेशन तक लेकर जाऊँगी। मैं इस लम्हे का आनंद लेना चाहती थी लेकिन अब मैं भारत वापस जा रही क्योंकि मेरी माँ की तबीयत ख़राब है।”

खेलों के समाचार देने वाली वेबसाइट ‘स्पोर्ट्सस्टार‘ के अनुसार, स्वप्ना ने पहले कहा था, “मैं इस खेल की तैयारी पिछले 13 वर्षों से कर रही हूँ और मुझे पता है कि कितनी तैयारी कहाँ तक ले जा सकती है। सबको पता है कि यह मुकाम चार महीने में हासिल नहीं किया जा सकता। उन्हें (नंदिनी) को एशियन चैम्पियनशिप के लिए चयनित नहीं किया गया था और मुझे लगता था इस बार भी यही होगा लेकिन यहाँ मैंने उन्हें प्रतियोगिता में देखा।”

हांगझाऊ में चल रहे एशियन खेलों में भारत अब तक 56 पदक जीत कर चौथे स्थान पर है। भारत ने अभी तक 13 स्वर्ण पदक जीते हैं। एशियन खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2018 में था जब 16 स्वर्ण पदक के साथ भारत ने कुल 70 पदक जीते थे।

बेटी का नाम रखने पर माँ-बाप में चल रहा था झगड़ा, हाईकोर्ट ने 3 साल की बच्ची का नाम रखा ‘पुण्या’: जानिए क्यों पारिवारिक विवादों में लैंडमार्क साबित हो सकता है ये केस

केरल हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2023 को एक फैसला सुनाया, जिसमें तीन साल की एक बच्ची का नाम ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर’ रखने की अनुमति दी गई। बच्ची के माता-पिता अलग हो चुके हैं और वे अपनी बेटी के नाम को लेकर सहमत नहीं हो पा रहे थे। बच्ची के पिता अपनी बेटी का नाम ‘पद्मा नैयर’ रखना चाहते थे, जबकि माँ ‘पुण्या नैयर’ रखना चाहती थी।

पिता का नाम शामिल करने पर कोर्ट ने दिया जोर

केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे के नाम को लेकर माता-पिता के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के नाम में देरी से उसके भविष्य पर असर पड़ रहा है। साथ ही वह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़ रही है।

कोर्ट ने कहा कि बच्चे का हित माता-पिता की लड़ाई से ज्यादा जरूरी है। बच्ची की माँ के साथ रह रही है। इसलिए उसकी माँ के सुझाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि पिता का नाम भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि समाज पितृसत्तात्मक है। इसलिए कोर्ट ने माँ का दिया नाम पुण्या और पिता का बालगंगाधरन नैयर नाम जोड़ दिया।

माता-पिता रहते हैं अलग, नामकरण पर विवाद बढ़ा

दरअसल, बच्ची के माता-पिता अलग रहते हैं। माँ बच्ची के एडमिशन के लिए उसे स्कूल ले गई। स्कूल की ओर से बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र माँगा गया, लेकिन इस पर कोई नाम नहीं था। स्कूल ने बिना नाम के जन्म प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया और उस पर नाम दर्ज कराने के लिए कहा।

माँ जब रजिस्ट्रार ऑफिस नाम दर्ज कराने पहुँची तो रजिस्ट्रार ने पिता की सहमति के बिना कोई नाम लिखने से मना कर दिया। इसी मामले में दोनों ने कोर्ट का रुख किया, क्योंकि दोनों ही एक नाम पर सहमत नहीं थे। अंत में, कोर्ट ने बच्ची का नाम ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर‘ रख दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्ची को ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर’ या ‘पुण्या बी. नैयर’ के नाम से भी जाना जाएगा।

अच्छा उदाहरण बन सकता है ये फैसला

यह मामला एक महत्वपूर्ण फैसला है, क्योंकि यह बताता है कि माता-पिता के बीच सहमति नहीं बनने पर कोर्ट बच्चे के नाम को लेकर हस्तक्षेप कर सकता है। यह फैसला यह भी बताता है कि बच्चे के नाम को चुनते समय बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने भी इस बारे में टिप्पणी की है कि बच्चे के कल्याण से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।

एक अक्टूबर से हर काम के लिए जरूरी हुआ जन्म प्रमाण पत्र

बता दें कि 1 अक्टूबर 2023 से बर्थ सार्टिफिकेट यानी कि जन्म प्रमाण पत्र का रोल बढ़ चुका है। मोदी सरकार द्वारा जारी नए नियम के अनुसार यदि आपके पास सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट है, तब भी स्कूल में एडमिशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी, वोटर आईडी, पासपोर्ट, आधार कार्ड, विवाह पंजीयन करा सकते हैं।

वेरिफिकेशन के लिए इसका उपयोग सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर होगा। इस बारे में केन्द्र सरकार ने 13 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कहा गया है कि बर्थ सर्टिफिकेट को सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर पर लागू किया जा रहा है, ताकि केंद्र और राज्य स्तर पर जन्म व मृत्यु डेटाबेस तैयार किया जा सके।

नीतीश कुमार की जाति पर बहुते भारी पड़ी तेजस्वी यादव की जाति: बिहार ने जारी किए जाति जनगणना के नंबर्स, सोशल मीडिया में रार देख अल्प आबादी वाले सहमे

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के बीच सरकार के फैसलों को राजनीति से हटकर मानना थोड़ा मुश्किल होता है। बिहार सरकार का जातिगत आँकड़े कुछ ऐसे ही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार द्वारा आज सोमवार (2 अक्टूबर 2023) को जातिगत आँकड़े पेश किए गए। इनको लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गया है।

जारी किए गए आँकड़ों के मुताबिक, बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 310 है। इसमें हिंदू आबादी 81.99 प्रतिशत है, जबकि 17.70 प्रतिशत जनसंख्या के साथ मुस्लिम आबादी दूसरे नंबर पर है। प्रदेश में ईसाइयों 0.05 प्रतिशत, सिख 0.011 प्रतिशत, बौद्ध 0.0851 प्रतिशत और जैन 0.0096 प्रतिशत है। इस बिहार में बौद्धों की आबादी 1,11,226, जैनों की जनसंख्या 12,523 और सिखों की जनसंख्या 14753 है। इनमें 2146 लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने कहा कि उनका कोई धर्म नहीं है।

अगर संविधानिक संरचना के अनुसार आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश की कुल जनसंख्या में सामान्य वर्ग, जिसे अगड़ा भी कहा जाता है, की जनसंख्या 15.52 प्रतिशत है। वहीं पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.12 प्रतिशत और अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (SC) 19.65 और अनुसूचित जनजाति (ST) 1.68 प्रतिशत हैं।

अगर हिंदुओं की जाति आधारित संख्या की बात करे तो सबसे अधिक जनसंख्या यादव लिखने वाले अहीर/गोप/ग्वाला जाति की है। उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत है। वहीं, दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत आबादी के साथ कुशवाहा (कोइरी) दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राह्मण, चौथे स्थान पर क्षत्रिय यानी राजपूत और पाँचवे स्थान पर मुसहरों की आबादी है।

अगर सामान्य वर्ग में जाति आधारित जनसंख्या की बात की जाए तो इसमें सबसे अधिक आबादी ब्राह्मण और उससे थोड़ा सा ही नीचे क्षत्रिय आबादी है। बिहार में ब्राह्मणों की आबादी 3.65 प्रतिशत, क्षत्रिय (राजपूत) की 3.45 प्रतिशत और भूमिहार की 2.87 प्रतिशत है। वहीं, बनिया की आबादी 2.31 प्रतिशत और कायस्थ की आबादी 0.60 प्रतिशत है।

उसी तरह, अगर पिछड़ों, अतिपिछड़ों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में बात की जाए तो यादव जाति की आबादी सबसे अधिक 14 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत के साथ कुशवाहा (कोइरी) हैं। तीसरे स्थान पर 3.08 प्रतिशत के साथ मुसहर है। इसके बाद कुर्मी 2.87 प्रतिशत, मल्लाह 2.6086, बढ़ई 1.45 प्रतिशत, पासी 0.98 प्रतिशत और राजभर 0.17 प्रतिशत हैं।

जातिगत आँकड़ें जारी होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई दी है। उन्होंने कहा, “आज गाँधी जयंती के शुभ अवसर पर बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना के आँकड़े प्रकाशित कर दिए गए हैं। जाति आधारित गणना के कार्य में लगी हुई पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई ! जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी तथा जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा।”

इस जाति आधारित जनगणना का उद्देश्य क्या था, इसकी झलक मिलने लगी है। सोशल मीडिया पर 15 प्रतिशत वाले सवर्णों को नजरअंदाज करने की बात कही जाने लगी है। वहीं, अपनी विभाजनकारी नीति और ‘भूरा बाल (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला) साफ करो’ का नारा देने वाले लालू यादव ने अपनी राजनीतिक पैंतरेबाजी शुरू कर दी है।

लालू ने ट्वीट किया, “सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी हो। हमारा शुरू से मानना रहा है कि राज्य के संसाधनों पर न्यायसंगत अधिकार सभी वर्गों का हो। केंद्र में 2024 में जब हमारी सरकार बनेगी तब पूरे देश में जातिगत जनगणना करवाएँगे और दलित, मुस्लिम, पिछड़ा और अति पिछड़ा विरोधी भाजपा को सता से बेदखल करेंगे।”

2 ही बच्चे पैदा करो, बेटियों को स्कूल भेजो, कट्टरता छोड़ो, बाल विवाह रोको: बोले असम के CM हिमंता – 4 शर्तें पूरी करें मियाँ, वरना नहीं चाहिए वोट

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि भाजपा को ‘चार क्षेत्रों में’ अगले 10 साल तक मुस्लिमों के वोट की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम भाजपा और पीएम मोदी के समर्थन में नारे रहे हैं तो वह लगा सकते हैं। लेकिन ‘परिवार नियोजन’ अपनाने और कट्टरता छोड़ने के बाद ही मुस्लिम भाजपा को वोट दें। बता दें कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी व उसकी सहायक नदियों के आसपास के रेतीले क्षेत्र को ‘चार’ क्षेत्र कहा जाता है।

असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने यह बात रविवार (2 अक्टूबर, 2023) को गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। सीएम हिमंता ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा, “बीजेपी लोक कल्याण करेगी और मुस्लिम हमारा समर्थन करेंगे। लेकिन मियाँ लोगों को हमें वोट देने की जरूरत नहीं है। हमारा समर्थन करने में कोई समस्या नहीं है। वे हिमंता बिस्वा सरमा, नरेंद्र मोदी और बीजेपी जिंदाबाद के नारे लगाते हैं तो लगाने दीजिए।”

इस दौरान CM सरमा ने यह भी बताया कि वह मुस्लिमों से वोट माँगने कब जाएँगे। उन्होंने कहा, “जब चुनाव आएँगे तो मैं खुद उनसे अनुरोध करूँगा कि वे हमें वोट न दें। अगर वे परिवार नियोजन अपनाते हैं, बाल विवाह को रोकते हैं और कट्टरता छोड़ देते हैं तो हमें वोट दें। हालाँकि, इन चीजों का पूरा करने में 10 साल लग जाएँगे। इसलिए हम अभी नहीं, 10 साल बाद वोट माँगेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा को वोट देने वालों को दो या तीन से अधिक बच्चे नहीं पैदा करने चाहिए। अपनी बेटियों को स्कूल भेजना चाहिए। बाल विवाह नहीं करना चाहिए और कट्टरता छोड़कर सूफीवाद अपनाना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि जब ये सभी शर्तें पूरी हो जाएँगी तो वो खुद वोट माँगने ‘चार’ क्षेत्र जाएँगे।

इस दौरान पत्रकारों ने उन्हें बताया कि ‘चार’ के कुछ इलाकों जहाँ बंगाली मुस्लिम रहते हैं, वहाँ स्कूल नहीं है। इस पर सीएम हिमंता ने कहा कि वे जल्द ही इन स्थानों में पढ़ाई के लिए व्यवस्था करेंगे। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि अल्पसंख्यक छात्रों को पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। हम आने वाले दिनों में अल्पसंख्यक क्षेत्रों में सात कॉलेज खोलेंगे।”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब सीएम हिमंता ने मुस्लिमों से वोट लेने के लिए मना किया हो। इससे पहले इसी साल अगस्त में भी उन्होंने कहा था कि फिलहाल उन्हें मुस्लिमों के वोट नहीं चाहिए। सभी समस्याएँ वोट बैंक की राजनीति के चलते होती हैं। वह हर महीने एक मुस्लिम इलाके में जाते हैं और उनके कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। लेकिन वह यह सब वोट के लिए नहीं करते। वह चाहते हैं कि मुस्लिमों को यह पता चले कि कॉन्ग्रेस और मुस्लिमों का रिश्ता सिर्फ वोट बैंक से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा था कि मुस्लिम उन्हें वोट न दें। अगले 10 साल तक वह विकास करेंगे। वह चाहते हैं कि बाल विवाह पूरी तरह से खत्म हो और लोग मदरसों की जगह कॉलेजों में पढ़ने जाएँ। सीएम सरमा ने यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम इलाकों में स्कूल नहीं बनाए। लेकिन वे उनका विकास करना चाहते हैं। 10-15 साल तक विकास करेंगे। फिर मुस्लिमों से वोट माँगेंगे।

भारत की Indri दुनिया की बेस्ट व्हिस्की: 2 साल के भीतर जीत चुकी है 14 इंटरनेशनल अवॉर्ड, जानिए ‘इंद्रीसुख’ की क्या है कीमत

क्या आप शराब पीते हैं? व्हिस्की लवर हैं? जवाब हाँ है तो फिर यह खबर आपके लिए है। भारत की स्वदेशी ब्रांड इंद्री (Indri Whisky) ने ‘व्हिस्की ऑफ द वर्ल्ड अवॉर्ड्स’ में दुनिया की सबसे बेहतरीन व्हिस्की का खिताब जीता है। भारतीय सिंगल मॉल्ट को ‘बेस्ट इन शो, डबल गोल्ड’ के अवॉर्ड से नवाजा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘व्हिस्की ऑफ द वर्ल्ड अवॉर्ड्स’ में खुद को सबसे बेहतरीन व्हिस्की कंपनी साबित करने के लिए हर साल दुनियाभर की कई बड़ी कंपनियाँ हिस्सा लेती हैं। यह प्रतियोगिता कई राउंड तक चलती है। शराब के स्वाद को परखने वाले शीर्ष लोगों और इंफ्लूएंसर्स का एक पैनल इन व्हिस्की को टेस्ट करता है। इसके बाद प्रतियोगिता में शामिल हुई व्हिस्की में से सबसे अच्छी व्हिस्की का चयन किया जाता है।

‘मेड इन इंडिया’ इंद्री व्हिस्की सिंगल माल्ट ने स्कॉच, बोरबॉन, कैनेडियन, ऑस्ट्रेलियाई और ब्रिटिश सिंगल माल्ट समेत सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को हराकर खुद को सर्वश्रेष्ठ व्हिस्की साबित किया है। ‘व्हिस्की ऑफ द वर्ल्ड अर्ड्स’ में ‘इंद्री दिवाली कलेक्टर एडिशन 2023’ को ‘बेस्ट इन शो, डबल गोल्ड’ के खिताब से नवाजा गया है। इंद्री की यह जीत भारतीय व्हिस्की की गुणवत्ता और दुनिया भर में तेजी से बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा सबूत है।

व्हिस्की ब्रांड इंद्री को लॉन्च हुए अभी मात्र 2 ही साल हुए हैं। इसके बावजूद यह अब तक 14 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है। पिकाडिली डिस्टिलरीज ने इसे साल 2021 में हरियाणा में लॉन्च किया था। अपनी पहली सीरीज में इंद्री ने ट्रिपल-बैरल सिंगल माल्ट लॉन्च किया था। इसे जमकर पसंद किया गया।

सबसे बेहतरीन व्हिस्की होने का खिताब जीतने के बाद पिकाडिली डिस्टिलरीज के संस्थापक सिद्धार्थ शर्मा ने एक बयान में कहा, “यह भारत के लिए रोमांचक समय है। भारतीय व्हिस्की अब पीछे नहीं हैं। भारत की कहानी में हम अपनी भूमिका निभा रहे हैं।”

देश के अलग-अलग राज्यों में इंद्री व्हिस्की की कीमत अलग-अलग है। महाराष्ट्र में इसकी कीमत 5100 रुपए है। वहीं हरियाणा, गोवा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक में इसकी कीमत 3100 रुपए के आसपास है। फिलहाल इंद्री दुनियाभर के 17 देशों के अलावा भारत के 19 राज्यों में उपलब्ध है। इसके अलावा इसी साल नवंबर से अमेरिका और यूरोप के कुछ राज्यों में इसकी सप्लाई शुरू होने जा रही है।