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बच्ची का बलात्कार, फेंक आया 7 माह का भ्रूण: अल्ताफ ने अपनी बेटी की सहेली के साथ की हैवानियत, कहता था – बेटी की तरह हो, बेटी नहीं

मध्य प्रदेश के विदिशा में 50 साल के आरोपित अल्ताफ ने 15 साल की नाबालिग लड़की से रेप किया और गर्भवती होने उसका गर्भपात करा दिया। उसने 7 माह के भ्रूण को फेंक आया। उसने पीड़िता को धमकी भी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया तो वह उसकी और उसके परिवार की हत्या कर देगा।

नाबालिग डर से इस बात को छिपाए रही। हालाँकि, जब परिजनों को पता चला तो वे पीड़िता को लेकर थाने गए और वहाँ उन्होंने शिकायत दर्ज करा दी। इस दौरान आरोपित के रिश्तेदार वहाँ पहुँचकर धमकाने लगे। उन्होंने लड़की के परिजनों पर पैसे लेकर समझौता करने का दबाव बनाया।

जब पीड़ित परिवार दबाव में नहीं आया तो आरोपितों ने धमकी दी कि वे अब गाँव में नहीं रह पाएँगे। इसके बाद आरोपित का परिवार डर के साए में जीने को मजबूर है। आरोपितों की धमकी के बाद गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। वहीं, इस मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने पुलिस से जवाब भी माँगा है।

दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता का गाँव की आबादी लगभग 1,000 है। इनमें मुस्लिम, कुर्मी, कोईरी समेत दलित एवं अन्य समाज के लोग रहते हैं। आसपास का पूरा इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। इसलिए गाँव में भी मुस्लिमों का वर्चस्व रहता है। गाँव का सरपंच भी मुस्लिम है।

दुष्कर्म के आरोपित अल्ताफ के बारे में गाँव के लोगों ने बताया कि वह 4 भाई है और इनमें से 2 भाई भी महिला से जुड़े अपराधों में जेल जा चुके हैं। अल्ताफ की 4 बेटी और एक बेटा है। इनमें से 2 की शादी हो चुकी है। उसकी सबसे बेटी की उम्र भी लगभग 15 साल की है और वह पीड़िता की सहेली भी है। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार ने अपनी जमीन बंटाई पर आरोपित अल्ताफ को दी थी। इस वजह से उसके परिवार का घर पर आना-जाना लगा रहता था।

पीड़िता ने बताया कि अल्ताफ की बेटी की सहेली होने के कारण वह अक्सर उसके साथ अल्ताफ के घर जाती थी और अल्ताफ की बेटी भी उसके घर आती थी। करीब डेढ़ साल पहले वह घर में अकेली थी, तभी अल्ताफ वहाँ आया और कहा कि उसकी बेटी उसे बुला रही है। जब पीड़िता वहाँ पहुँची तो घर में कोई नहीं थी।

इसी दौरान अल्ताफ पीड़िता का हाथ पकड़कर घर के अंदर ले गया और मुँह दबाकर उसका रेप किया। इस दौरान छुरा दिखाकर बोला कि अगर किसी को बताया तो ‘इसी छुरे से तेरा गला काट दूँगा’। उसने परिवार को भी मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता रोती रही, लेकिन डर से किसी को कुछ बताया नहीं।

पीड़िता ने बताया कि इसके बाद से जब भी उसके घर पर कोई नहीं होता तो उसके ब्लैकमेल करके उससे रेप करता था। इसी बीच उसका उसका गर्भ ठहर गया तो आरोपित ने उसे गोलियाँ खिला दीं। पीड़िता ने बताया कि इसके बाद भी अल्ताफ ने उससे रेप करना नहीं छोड़ा। उसने मार्च में बुलाकर फिर रेप किया।

पीड़िता ने बताया कि वह अल्ताफ के आगे मिन्नत करती कि उसे छोड़ दे, वह उसकी बेटी की तरह है। इस पर अल्ताफ कहता कि बेटी की तरह हो, बेटी नहीं हो ना। वह अक्सर हत्या की धमकी देता था। अंतिम बार जब अल्ताफ ने मार्च में उसका रेप किया तो इससे तंग आ चुकी पीड़िता ने कहा कि इसके बाद गलत किया तो वह सबको बता देगी या अपनी जान दे देगी।

पीड़िता का कहना है कि इसके बाद आरोपित ने उससे दुष्कर्म नहीं किया, लेकिन उसका गर्भ एक बार फिर ठहर गया था। मई में पीड़िता ने यह बात आरोपित को बताई तो उसने कहा कि वह सब कुछ ठीक कर देगा। एक दिन जब पीड़िता के घर में कोई नहीं था तो वह पीड़िता के घर गया और गोलियाँ खिला दी। इससे गर्भपात हो गया और वह पॉलिथिन में बच्चा ले जाकर गाँव में फेंक आया।

पीड़िता ने कहा कि उससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। वह घर में पड़ी रही। 24 सितंबर 2023 को गाँव में भ्रूण मिलने की खबर फैल गई। इसके बाद उसने अपनी माँ को सब कुछ बता दिया। इसके उसके परिजन उसे थाने लेकर गए और केस दर्ज करा दिया।

वहीं, पीड़िता की माँ ने कहा, “जिस पर हम इतना भरोसा करते थे उसी ने हमारी पीठ पर छुरा घोंप दिया। वह बेटी को जान से मारने के धमकी देता था। अल्ताफ ऐसी घिनौनी हरकत करेगा, हमने सोचा भी नहीं था।​​​​​​” वहीं, पीड़िता के भाई ने कहा कि थाने में शिकायत देते वक्त अल्ताफ का समधी और सरपंच अफशीस खान आ गया और धमकाने लगा।

एशियन गेम्स में गोल्फ में मेडल जीतने वाली पहली महिला बनी भारत की अदिति, ट्रैप शूटिंग में पुरुषों को गोल्ड तो महिलाओं को सिल्वर: अब तक 41 मेडल

एशियन गेम्स 2023 (Asian Games) में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। अब, भारतीय शूटर्स ने ट्रैप-50 मेंस टीम इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। वहीं वीमेंस टीम ने भी भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। इसके अलावा स्टार गोल्फर अदिति अशोक ने इतिहास रचते हुए सिल्वर मेडल जीता। भारत के खाते में अब तक 41 मेडल आ चुके हैं।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स के 8वें दिन यानी 1 अक्टूबर को भी भारतीय शूटर्स ने एक बार फिर गोल्ड पर निशाना साधा। शूटिंग के ट्रैप-50 मेंस टीम इवेंट में पृथ्वीराज टोंडाइमैन, जुरावर सिंह और किनान चेनाई की तिकड़ी ने 361 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीता। इस इवेंट में 359 अंकों के साथ कुवैत ने सिल्वर और 354 के स्कोर के साथ चीन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

वहीं विमेंस के ट्रैप इवेंट में मनीषा कीर, प्रीति रजक और राजेश्वरी कुमारी ने 337 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस गेम में चीनी खिलाड़ियों ने 357 का स्कोर कर गोल्ड तो वहीं कजाकिस्तान की टीम ने 336 के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

गोल्फ में भी भारत के हाथ आया मेडल

भारत की स्टार गोल्फर अदिति अशोक ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत को मेडल दिलाया है। अदिति अशोक एशियन गेम्स के इतिहास में भारत के लिए गोल्फ में मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। इस इवेंट में थाईलैंड को गोल्ड तो वहीं कोरिया को ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसके अलावा, भारतीय बॉक्सर परवीन ने 57 किलोग्राम वर्ग में उज्बेकिस्तान की बॉक्सर को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इससे भारत के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया है। यदि वह फाइनल जीत तो हैं उन्हें गोल्ड मेडल भी मिल सकता है।

एशियन गेम्स में भारत के नाम 10 गोल्ड


एशियन गेम्स 2023 में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 41 मेडल जीते हैं। इसमें से 11 गोल्ड, 16 सिल्वर और 14 ब्रॉन्ज मेडल हैं। भारत को शूटिंग में सबसे अधिक 21 मेडल मिले हैं। इसमें 7 गोल्ड, 9 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज शामिल हैं। रैंकिंग की बात करें तो भारत चौथे नंबर है। वहीं, 114 गोल्ड के साथ चीन पहले, 29 गोल्ड के साथ जापान दूसरे और 28 गोल्ड के साथ कोरिया तीसरे नंबर पर है।

Asian games 2023 india wins gold in shooting aditi ashok silver golf

रेल की पटरी पर रील बना रहा था फरमान, इंजन की ठोकर से दूर जाकर गिरा शव: पैगंबर मुहम्मद की जयंती पर जुलूस देखने निकला था, वीडियो में दिखा मंजर

रील बनाने के फैशन के कारण उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक किशोर की जान चली गई। बाराबंकी के जहाँगीराबाद कस्बे में नाई की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति मुन्ना के पुत्र फरमान की रेल पटरी पर रील बनाने के दौरान ट्रेन से टक्कर होने के कारण मौत हो गई।

मृतक किशोर का शव काफी दूर जाकर गिरा। समाचार वेबसाइट के अनुसार, बाराबंकी के जहाँगीराबाद कस्बे का एक 16 वर्षीय किशोर फरमान बारावफात की छुट्टी के दिन पास की ही रेल पटरी पर रील बनाने के लिए गया हुआ था।

इस पूरी घटना का वीडियो भी मोबाइल में रिकॉर्ड हो गया। वीडियो में दिखता है कि फरमान बिना इधर उधर देखे सीधे पटरी की तरफ बढ़ता है और इतने ही देर में ट्रेन का इंजन उसे ठोकर मारकर आगे फेंक देता है। बताया गया है कि उसे दरभंगा एक्सप्रेस ट्रेन से टक्कर लगी, जिसके कारण उसकी तुरंत ही मौत हो गई।

किशोर के साथ वीडियो बनाने गए युवक भी इस घटना के कारण डर गए और उन्होंने फरमान को टक्कर लगने के बाद शोर मचाया जिससे पास पड़ोस के लोग वहाँ पर पहुँचे और पुलिस को सूचना दी जिन्होंने शव को कब्जे में ले लिया। मृतक किशोर के घरवालों ने कहा है कि वह बारावफात का जुलूस देखने के लिए घर से निकला था और इस बीच वह पटरी पर कैसे पहुँच गया उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। पुलिस इस मामले में और जानकारियाँ निकालने के लिए मृतक फरहान के साथ उपस्थित अन्य लड़कों से पूछताछ कर रही है।

मालदीव के नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ु, कर्जे के जाल में फँसाएगा चीन: PM मोदी ने दी जीत की बधाई

भारत के पड़ोसी देश मालदीव में हुए राष्ट्रपति चुनावों में पीपल्स नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मुम्मद मुइज़्ज़ु की जीत हुई है। मुइज़्ज़ु ने वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को पराजित किया है। मुइज़्ज़ु अभी तक मालदीव की राजधानी माले के मेयर थे।

मालदीव में प्रत्येक पाँच वर्ष पर राष्ट्रपति चुनाव होते हैं। वर्ष 2018 में इब्राहिम सोलिह, अब्दुल्ला यामीन को हरा कर राष्ट्रपति बने थे। मुइज़्ज़ु, यामीन की ही पार्टी के उम्मीदवार हैं। यामीन को चीन का समर्थक जबकि सोलिह को भारत का समर्थक माना जाता रहा है।

मुइज़्ज़ु की इस जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने भारत को मालदीव के साथ रिश्ते मजबूत करने और हिन्द महासागर में दोनों देशों के सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध बताया है।

कौन हैं मालदीव के नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ु?

मुहम्मद मुइज़्ज़ु 45 वर्ष के हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में राजनीति की शुरुआत तब की थी, जब वह मालदीव के पाँचवे राष्ट्रपति मुहम्मद वहीद की सरकार में आवासन मंत्री का कार्यभार संभाला था।

वर्ष 2013 में मालदीव में सरकार बदलने पर वह अब्दुल्ला यामीन सत्ता में आए थे। मुइज़्ज़ु को यामीन की सरकार में भी यही मंत्रिपद दिया गया था। उन्हें 2019 में पीपल्स नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वह पार्टी का चुनाव प्रबन्धन भी देखते थे। यामीन ने इस पार्टी का गठन अपने पुराने दल प्रोग्रेसिव पार्टी से अलग होने के बाद किया था।

पेशे से सिविल इंजीनियर मुइज़्ज़ु वर्ष 2021 में मालदीव की राजधानी माले के मेयर बने थे। उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तबसे बढ़ रहा था। मुइज़्ज़ु को अब्दुल्ला यामीन की अनुपस्थिति के कारण राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था क्योंकि वह भ्रष्टाचार के कारण जेल में हैं।

5 लाख की आबादी वाले देश मालदीव में हुए इन चुनावों में 85% वोट पड़े थे। मुइज़्ज़ु को इन चुनावों में 54% वोट मिले जबकि इब्राहिम सोलिह को 43% वोट मिले। सोलिह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी हार स्वीकार कर ली है और मुइज़्ज़ु को बधाई दी है।

भारत और चीन को मुइज़्ज़ु के जीतने से क्या फर्क?

मालदीव में चीन अपना प्रभाव जमाना चाहता है कि जबकि भारत उसे चीन के कर्जे के जाल में नहीं फँसने देना चाहता। भारत मालदीव में लोकतंत्र की बढ़त के लिए काम करता आया है और उसे काफी मदद भी देता है। मुइज़्ज़ु चीन के समर्थक माने जाते हैं।

अभी तक राष्ट्रपति रहे इब्राहिम मोहम्मद सोलिह भारत के समर्थक माने जाते थे। उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध नई ऊँचाई पर पहुँचे थे। इसे पहले अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल के दौरान मालदीव पर चीन का प्रभाव बढ़ गया था।

चीन लगातार प्रयास करता रहा है कि वह मालदीव में अपना प्रभाव बढ़ा कर वहाँ सैन्य अड्डा स्थापित करे। चीन के हिन्द महासागर में सैन्य अड्डा बनाने से भारत की सुरक्षा को खतरा है, इसलिए वह लगातार उसका प्रभाव कम करने के प्रयास करता आया है।

मुइज़्ज़ु लगातार भारत के विरोध में बोलते रहे हैं। मुइज़्ज़ु मालदीव में भारतीय सैनिकों को लेकर मुखर रहे हैं। भारत ने मालदीव को दो हेलीकाप्टर और एक डोर्नियर विमान दिए हैं। इनके रख रखाव और अन्य कार्यों के लिए ही मालदीव में लगभग 75 भारतीय सैनिक उपस्थित हैं।

मुइज़्ज़ु अपनी चुनावी रैलियों में इन भारतीय सैनिकों को देश से बाहर निकालने पर जोर देते रहे हैं। हालाँकि यह सैनिक ना ही किसी सुरक्षा रोल में हैं और ना ही अन्य किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधियों में शामिल हैं परन्तु चीन का समर्थन करने वाले मुइज़्ज़ु तथा अन्य नेताओं को इनसे समस्या है। मुइज़्ज़ु के चुनाव का बड़ा मुद्दा भारत का विरोध रहा है।

मालदीव के नए चुने गए राष्ट्रपति को यह याद करना चाहिए कि भारतीय सेना ने ही वर्ष 1988 में समय पर पहुँच कर मालदीव में सत्ता का तख्तापलट होने से रोका था। भारतीय सेना ऑपरेशन कैक्टस चलाकर मालदीव से लिट्टे और मालदीव के विद्रोहियों को सत्ता पर काबिज होने से रोका था।

मुइज़्ज़ु के सत्ता में आने से मालदीव में भारत के हित अधिक प्रभावित नहीं होंगे लेकिन चीन का प्रभाव बढ़ने की आशंका है।

मालदीव को कर्जे के जाल में फँसाना चाहता है चीन

मालदीव विश्व के सबसे छोटे देशों में से एक है और कुछ द्वीपों को मिलाकर बना हुआ है। 5.2 लाख की आबादी वाला यह देश चारों तरफ से सागर से घिरा हुआ है और पर्यटन ही यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है।

मालदीव में विकास संबंधी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए उसे भारत या चीन जैसे बड़े सहयोगी देशों की आवश्यकता पड़ती है। इसी का फायदा उठा कर अब्दुल्ला यामीन के शासन के दौरान चीन ने मालदीव को कर्जे में फँसाना चालू कर दिया था।

भारत लगातार मालदीव को बड़ी सहायता देता आया है और मालदीव को चीन के कर्जे से जाल में फँसने से बचाता रहा है। भारत ने वर्ष 2023-24 के बजट में भी मालदीव के लिए 400 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी।

बीबीसी की वर्ष 2020 की एक रिपोर्ट बताती है कि मालदीव को चीन ने लगभग 3.3 बिलियन डॉलर (लगभग 2.7 खरब) का कर्ज दिया था जबकि मालदीव की खुद की पूरी अर्थव्यवस्था ही वर्तमान में लगभग 6.5 बिलियन डॉलर(5.3 खरब) है।

कर्ज ना चुकाने की स्थिति में चीन उन प्रोजेक्ट पर कब्ज़ा कर सकता है, जिनके लिए उसने कर्ज दिया था। श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह में यही हुआ था और अब चीन ने उसे 99 वर्षों के लिए लीज पर ले लिया है, जिससे श्रीलंकाई संप्रुभता खतरे में है। मालदीव के साथ ऐसा होने की आशंका जताई जा रही।

इब्राहीम इब्राहीम सोलिह की सरकार द्वारा चीन से दूरी बनाना और कई प्रोजेक्ट को चीन के हाथों से निकाल कर भारत को देने से यह स्थिति हालाँकि नहीं आई। अब आने वाले समय में देखना होगा कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु भारत और चीन से रिश्तों में कैसा रुख अपनाते हैं।

नाम: भरत सोनी, आरोप: उज्जैन पीड़िता से रेप, पिता ने कहा- ‘फाँसी हो, सीधे गोली मार दो’… नाम जब हो अफजल गुरु तो उसे बताया जाता है ‘शहीद’

मध्य प्रदेश के उज्जैन में नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले ऑटो रिक्शा ड्राइवर भरत सोनी के परिजनों ने उसके लिए मौत की सजा की माँग की है। आरोपित के पिता ने कहा कि पीड़िता भी किसी की बेटी है। मीडिया से बात करके हुए पिता भभक कर रो पड़े। उन्होंने कहा कि बेटे की करतूत की वजह से पूरा परिवार शर्मिंदा है।

आरोपित के पिता राजू सोनी ने कहा, “अगर मैं होता तो पुलिस की हिरासत में नहीं आता। मैं मर गया होता… उसे उसके अपराध के लिए फाँसी दी जानी चाहिए। वह (पीड़िता) भी एक बेटी है, वह एक इंसान है… वह हमारी भी बेटी है।” उन्होंने कहा, “उसे पकड़ना नहीं चाहिए था, सीधे गोली मार देना चाहिए थी। अगर मुझसे ऐसा गुनाह होता तो मैं सुसाइड कर लेता।”

उन्होंने कहा, “अगर उस पीड़िता की जगह मेरी बच्ची होती तो मैं भी तो यही चाहता। इस प्रकार का गुनाह जो भी करता है, उसे जीने का अधिकार नहीं है। बच्चा मेरा हो या किसी का, इस प्रकार के गुनाह करने वाले को फाँसी दे देनी चाहिए और गोली मार देनी चाहिए।”

उन्होंने अपने बेटे का जिक्र करते हुए कहा, “ऐसे इंसान को और क्या सजा दी जानी चाहिए? यदि आप ऐसे लोगों को मौत की सज़ा देंगे तो ही यह एक उदाहरण स्थापित करेगा और लोगों को इस तरह का अपराध करने से पहले कम से कम 50 बार सोचने पर मजबूर करेगा।”

राजू सोनी ने कहा, “ऐसा होने के बाद से मैं खाना नहीं खा पा रहा हूँ। हम सब बहुत तनाव में हैं। हमें घर से बाहर निकलने में भी बहुत शर्म महसूस होती है…। मैं पुलिस स्टेशन या अदालत भी नहीं जाऊँगा। मैंने अपने बेटे को कभी ये सब नहीं सिखाया और न ही मैंने कभी कोई अपराध किया है।”

राजू सोनी ने कहा कि अपने आरोपित बेटे को देखने अस्पताल भी नहीं गए थे। दरअसल, पुलिस जब भरत को गिरफ्तार कर घटनास्थल पर ले जा रही थी तो उसने भागने की कोशिश की। उसने पुलिस वालों पर पथराव भी किया और भागते वक्त गड्ढे में गिर गया था। इससे उसे चोट लगी है और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था।

टाइम्स नाऊ से बातचीत करते हुए ऑटो रिक्शा चालक पिता ने कहा, “उसने तो हमें जीते जी मार डाला। कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। अब हम किसी के सामने कैसे जाएँगे? कैसे जिएँगे? हम दूध लाने तक नहीं जा रहे हैं। मैं जिंदगी भर उसकी शक्ल नहीं देखूँगा। इस घर में मौत भी होगी तो उसे यहाँ नहीं आने दूँगा। मैं जज साहब और मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूँ कि उसे गोली मार दें। इससे कोर्ट का समय भी बचेगा।”

भरत सोनी के खिलाफ पहले भी दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह तीसरा मामला है, जो POCSO तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है। उसने नाबालिग पीड़िता को अकेली देखकर उसका यौन शोषण किया था। इसके बाद उसे एक जगह छोड़ दिया था।

इसके बाद खून से लथपथ पीड़िता लगभग 8 किलोमीटर पर भूखे प्यासे और दर्द से बेचैन होकर अधनंगी हालत में सड़कों पर घूमती रही। इस दौरान उसने कई लोगों पानी और अन्य मदद भी माँगी, लेकिन किसी ने नहीं दी। आखिरकार एक मठ के महंत ने उसे खाना-पानी और कपड़े दिए और फिर पुलिस को फोन करके इस मामले की जानकारी दी थी।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित को पकड़ने का अभियान तेज कर दिया और पाँच ऑटो चालकों को पकड़ कर थाने में कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस ने भरत सोनी को गुरुवार (28 सितंबर 2023) को फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया था। आरोपित भरत सीसीटीवी फुटेज में उज्जैन रेलवे स्टेशन के पास लड़की के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दिया था। वहीं, पुलिस ने सबूत को मिटाने के आरोप में एक दूसरे ऑटोरिक्शा चालक राकेश मालवीय को भी गिरफ्तार किया है।

सतना के एडिशनल पुलिस अधीक्षक शिवेश सिंह बघेल ने कहा, “वायरल वीडियो को देखकर हमने लड़की की पहचान की। उसके खिलाफ सोमवार (25 सितंबर) को जैतवारा पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गई थी। इसके बाद उज्जैन पुलिस को सूचित किया। नाबालिग के दादा ने उसकी पहचान की पुष्टि की।”

इस तरह अगर सामाजिक संरचना और उसमें घटित होने वाली बलात्कार जैसी वीभत्स घटनाओं को ध्यान दें तो बेटे की करतूत पर लज्जित पिता और उसका परिवार स्वयं को घनघोर अपमानित महसूस कर रहा है। यह हिंदू समाज का प्रच्छन्न व्यवहार है जो सामाजिकता को बचाए हुए है, जबकि ऐसी अनुभूति दूसरे जगहों पर देखने को आमतौर पर नहीं मिलती है, बल्कि अपने परिजनों को बचाने की कोशिश की जाती है। जैसे की निकिता तोमर हत्याकांड में हुआ।

इसी तरह की बात आतंकी घटनाओं में भी देखने को मिलती है, जब घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति के परिजन उसे सजा दिलाने के बजाय आरोपित को बचाने के लिए तमाम तर्क और कुतर्क देते हैं। जैसा का गोरखपुर में ISIS आतंकी घटना वाले मामले में उसके परिजनों ने किया। परिजनों ने उसे बचाने के लिए मानसिक विक्षिप्त जैसी झूठी कहानी तक गढ़ दी।

यहाँ आतंकी घटना को अंजाम देने वाले अफजल गुरु जैसों को फाँसी दी जाती है तो उसे शहीद बताया जाने लगता है। अगर कोई लड़का किसी की हत्या करता है तो पूरा कट्टरपंथी समाज उसे बचाने में लग जाता है। उसके लिए कठोर सजा की माँग करना तो दूर की बात है। इसके अनेक उदाहरण हैं।

ग्लासगो गुरुद्वारे ने खालिस्तानियों की खोली पोल, भारतीय उच्चायुक्त के बाद वहाँ के सिखों को कर रहे थे परेशान: फिरंगी मंत्री ने जताई चिंता

स्कॉटलैंड के ग्लासगो गुरुद्वारा ने एक सार्वजनिक बयान जारी करके भारत के ब्रिटेन में उच्चायुक्त विक्रम दुरईस्वामी को अन्दर घुसने से रोके जाने की निंदा की है। 29 सितम्बर को दुरईस्वामी को इस गुरूद्वारे में जाने से कुछ खालिस्तानियों ने रोका था।

गुरुद्वारे ने बयान जारी करके कहा है कि 29 सितम्बर को भारतीय उच्चायुक्त ग्लासगो गुरूद्वारे में स्कॉटलैंड के एक सासंद के आमंत्रण पर आए थे। इस दौरान ग्लासगो इलाके से बाहर के कुछ शरारती तत्वों ने उनके सामने बाधाएँ उत्पन्न की और उन्हें गुरूद्वारे में प्रवेश करने से रोका, जिसके कारण उच्चायुक्त ने गुरूद्वारे में ना जाने का निर्णय लिया।

गुरुद्वारे ने कहा कि उच्चायुक्त के जाने के बाद भी खालिस्तानी लोग गुरुद्वारे के स्टाफ को परेशान करते रहे। ग्लासगो पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है। ग्लासगो गुरुद्वारा सिख धार्मिक स्थल पर इन तत्वों के आचरण की निंदा करता है। गुरुद्वारा सभी समुदायों से आने वाले लोगों का स्वागत करता है।

इस मामले पर लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी कल बयान जारी किया था। उच्चायोग ने कहा था कि गुरूद्वारे में उच्चायुक्त और काउंसलर जनरल को गुरुद्वारा कमिटी द्वारा आमंत्रित किया गया था ताकि स्कॉटलैंड में रहने वाले सिखों को वीजा/पासपोर्ट से सम्बंधित समस्याओं का निदान किया जा सके।

आगे उच्चायोग ने कहा कि इसी दौरान स्कॉटलैंड से बाहर के तीन व्यक्तियों ने उच्चायुक्त और काउंसलर जनरल की इस यात्रा में खलल डाला। इनमें से एक ने उच्चायुक्त की गाड़ी के दरवाजे को खोलने की कोशिश की। एक ने भारतीय उच्चायुक्त और काउंसलर जनरल को धमकाया गया और गालियाँ दी गई। हालाँकि गुरुद्वारा प्रबन्धन के व्यक्तियों द्वारा उस व्यक्ति को हटा लिया गया, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना होने से रोकी जा सकी।

भारतीय उच्चयोग ने इस मामले को ब्रिटेन की पुलिस के संज्ञान में लाया है। इस मामले पर ब्रिटेन की विदेश और कामनवेल्थ मामलों की मंत्री ऐनी मेरी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है कि हम ग्लासगो घटना से चिंतित हैं और राजनयिकों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

हुआ यह कि उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी जब अल्बर्ट ड्राइव पर स्थित ग्लासगो गुरुद्वारा के पास पहुँचे तो कट्टरपंथी ब्रिटिश खालिस्तानियों के एक समूह ने घेर लिया। इस दौरान उन्होंने ‘आपका स्वागत नहीं है (You are not welcome) के नारे लगाए। कुछ देर रुकने के बाद दुरईस्वामी वहाँ से चले गए।

खालिस्तानियों में से एक का कहना था, “मुझे नहीं लगता कि जो कुछ हुआ, उससे गुरुद्वारा समिति बहुत खुश है। हालाँकि, ब्रिटेन के किसी भी गुरुद्वारे में भारतीय अधिकारियों का स्वागत नहीं है।” उसने आगे कहा, “हम यूके-भारत की मिलीभगत से तंग आ चुके हैं। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से हालिया तनाव के कारण ब्रिटिश सिखों को निशाना बनाया जा रहा है। अवतार सिंह खंडा और जगतार सिंह जोहल के साथ भी ऐसा ही हुआ है।”

आपको बता दें कि इससे पहले भी ब्रिटेन में भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर चिताएँ जताई जाती रही हैं। इसी वर्ष मार्च में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानियों ने हमला किया था और तिरंगा फाड़ने का प्रयास किया था। लंदन पुलिस ने इस मामले पर कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं की। इसके बाद भारत ने अपना असंतोष जाहिर करने के लिए नई दिल्ली स्थिति ब्रिटेन के दूतावास के बाहर से सुरक्षा हटा ली थी।

‘एनकाउंटर में पुलिस की कोई गलती नहीं’: योगी सरकार ने विकास दुबे और अतीक के मामले में यूपी पुलिस का किया बचाव, बोली- SC के दिशा-निर्देशों का पालन हुआ

प्रदेश के दुर्दांत अपराधियों के एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। अपनी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि अतीक अहमद और उसके भाई अशराफ की हत्या में पुलिस की कोई गलती नहीं है। सरकार ने कहा की उसके दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में साल 2017 के बाद हुए लगभग 183 एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से इसकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इन मुठभेड़ों में से एक विकास दुबे की एनकाउंटर पर भी सवाल उठाया गया था।

इस याचिका को वकील विशाल तिवारी ने दाखिल की थी। तिवारी ने याचिका में विभिन्न आयोगों की सिफारिशों के अनुपालन की भी बात कही थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब माँगा था। बताते चलें कि 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशराफ को अस्पताल ले जाते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में दिए जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि अतीक और उसके भाई की हत्या के मामले में तीन आरोपितों को पहले ही पकड़ा जा चुका है और उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। सरकार ने कहा कि जाँच का विवरण देते हुए कहा कि मामला निचली अदालत में लंबित है और कुछ बिंदुओं पर जाँच अभी जारी है।

सरकार ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में जिन सात घटनाओं का जिक्र किया है, उनमें से प्रत्येक की अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत राज्य सरकार द्वारा जाँच की गई। इन मामलों में जाँच पूरी हो गई है और उनमें पुलिस की कोई गलती नहीं पाई गई है।

तिवारी की याचिका में बिकरू कांड के तहत गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर की बात कही गई है। सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगता है कि याचिकाकर्ता बिकरू में हुए एनकाउंटर में मारे गए अपराधियों की मौत से चिंतित है। बता दें कि कानपुर के बिकरू गाँव में गैंगस्टर विकास दुबे ने साल 2020 में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने जिन 7 सात एनकाउंटर का जिक्र अपनी याचिका में की थी उनमें विकास दुबे, अतुुल दुबे, अमर दुबे, प्रवीण प्रेम प्रकाश पांडेय और प्रकाश मिश्रा का एनकाउंटर शामिल है। इसके अलावा, अतीक और उसके भाई अशराफ की हत्या का जिक्र था। इस मामले में तिवारी के अलावा, अतीक की बहन आयशा नूरी ने भी सवाल उठाते हुए याचिका दाखिल की थी।

याचिकाकर्ता तिवारी ने न्यायमूर्ति बीएस चौहान आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ भी आपत्ति दर्ज कराई है। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत बीएस चौहान के नेतृत्व में गठित आयोग ने उसके एनकाउंटर की जाँच की थी।

‘नमाज पढ़ना है तो मस्जिद जाओ’: एयरपोर्ट पर अलग कमरा बनाने की माँग पर हाईकोर्ट ने फटकारा, पूछा – संविधान में कहाँ लिखा है?

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अलग कमरा बनवाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है। किसी एक समुदाय की माँग पर ऐसी व्यवस्था नहीं जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद है, जिसको पढ़ना है वह वहाँ जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राणा सुदैर जमान नामक व्यक्ति ने गुवाहाटी एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अलग कमरा बनाने की माँग रखते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस सुस्मिता फूकन खौंद की पीठ ने 29 सितंबर को सुनवाई की। इस दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि संविधान में इस अधिकार का जिक्र कहाँ है कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर एक ‘प्रेयर रूम’ होना चाहिए?

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने कुछ एयरपोर्ट पर प्रेयर रूम बनवाए हैं। क्या इसका मतलब यह है कि हर कोई यह कहे कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर प्रेयर रूम होना चाहिए? कोर्ट ने आगे पूछा कि फिर सिर्फ एयरपोर्ट पर ही क्यों? हर सार्वजनिक स्थल पर क्यों नहीं? क्या इस तरह की माँग करना मौलिक अधिकार है? यदि तुम्हें नमाज पढ़नी है तो उसके लिए मस्जिद है। वहाँ जाओ और पढ़ो।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि धूम्रपान, स्पा और रेस्टोरेंट बनाने के लिए नियम है। नमाज के लिए भी एक अलग कमरा होना चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि धूम्रपान के लिए अलग कमरा इसलिए बनाया जाता है ताकि उसे अन्य लोग प्रभावित न हों। रेस्टॉरेंट से कमाई होती है। इसलिए ये तो खोला ही जाएगा। लेकिन लोग नमाज पढ़ने जाएँगे तो कमाई नहीं होगी।

इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि ज्यादातर फ्लाइट नमाज के समय ही होती हैं, इसलिए एक अलग कमरा जरूरी है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि किसी भी यात्री के पास फ्लाइट का टाइम चुनने का ऑप्शन होता है। यह तो यात्री की मर्जी है जिस टाइम पर फ्लाइट चाहिए उस टाइम की बुकिंग करे।

प्रिंसिपल रिजवान अहमद ने छात्रा को नग्न किया, फिर करने लगा अश्लील हरकतें: स्कूल में छुट्टी के बाद बंधक बनाया, कमरा बंद कर के यौन शोषण

उतर प्रदेश के अयोध्या में एक स्कूली छात्रा के यौन शोषण के मामला सामने आया है। ये घटना किसी और ने नहीं बल्कि स्कूली शिक्षक ने ही अंजाम दिया। स्कूल के प्रधानाचार्य रिजवान अहमद ने लड़की को अकेले देख कर उसके साथ हैवानियत की। वो उसे जबरदस्ती एक कमरे में लेकर गया और कमरे को अंदर से बंद कर लिया। उसकी जोर-जबरदस्ती के कारण बच्ची रोने लगी। प्रधानाध्यापक रिजवान अहमद ने बच्ची को उसके कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया।

साथ ही उसने छात्रा को धमकी भी दी कि वो किसी को भी इस घटना के बारे में कुछ न बताए। पीड़िता 5वीं कक्षा में पढ़ती है और मात्र 10 साल की है। ये घटना रुदौली तहसील क्षेत्र के बाबा बाजार थाने के अंतर्गत आने वाले इलाके की है। मामला कुछ यूँ है कि शनिवार (16 सितंबर, 2023) को नाबालिग छात्रा प्राइमरी विद्यालय भूलामऊ द्वितीय में पढ़ने के लिए गई थी। छुट्टी के बाद जब वो सभी बच्चों के साथ घर जाने लगी तो प्रधानाध्यापक रिजवान अहमद ने उसे रोक लिया।

जब सभी शिक्षक और छात्र-छात्राएँ स्कूल से चले गए तो रिजवान अहमद ने बच्ची के साथ गलत हरकतें करनी शुरू कर दी। बच्ची विरोध करती रही, लेकिन इसने उसके कपड़े उतरवा दिए। बच्ची को निर्वस्त्र करने के बाद वो अश्लील हरकतें करने लगा। इस घटना और उसकी धमकियों से बच्ची इतनी डर गई कि वो गुमसुम रहने लगी और किसी से इसका कोई जिक्र नहीं किया। परिवार वालों को शक हुए तो उन्होंने काफी पूछताछ की, तब जाकर इस घटना का भेद खुला।

इसके बाद परिजन उसे बाबा बाजार थाने लेकर गए और वहाँ उसकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई। CO ने फिर घटनास्थल का दौरा किया। पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल रिजवान अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। उसे जेल भेज दिया गया है। शिक्षा विभाग ने भी उसे निलंबित कर के विभागीय जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सज़ा दिलाने का आश्वासन दिया है। उसके खिलाफ पॉक्सो की धारा भी लगाई गई है।

‘घरों तक नहीं पहुँचने देंगे TOI’: हिन्दू विरोधी कार्टून के बाद भड़के लोगों ने जलाई अख़बार की प्रतियाँ, उज्जैन रेप केस के नाम पर प्रोपेगंडा का विरोध

मध्य प्रदेश के उज्जैन में नाबालिग बच्ची के साथ हुए बलात्कार को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया ने हिंदू धर्म को निशाने बनाते हुए एक कार्टून बनाया था। इसको लेकर हिंदू संगठन गुस्से में हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में हिंदू संगठन ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के अखबार को प्रतियाँ जलाकर विरोध जताया।

शनिवार (30 सितंबर, 2023) को ‘हिंदू चेतना सेवा समिति’ के कार्यकर्ता विदिशा के माधवगंज रेलवे स्टेशन पर इकट्ठा हुए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के संपादक और उसके मुख्य कार्टूनिस्ट संदीप अध्वर्यु के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। ‘हिंदू चेतना समिति’ ने कहा कि यदि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो वो उसके अखबार लोगों के घरों में नहीं पहुँचने देंगे।

विरोध कर रही समिति के संस्थापक रामपाल सिंह राजपूत ने कार्टून गलत तरीके से बनाने और हिंदूफोबिक होने को लेकर कार्टूनिस्ट की आलोचना की। साथ ही कहा यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो उनका संगठन पूरे प्रदेश में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के खिलाफ प्रदर्शन करेगा। वहीं हिं’दू चेतना सेवा समिति’ के जिला अध्यक्ष नितिन सिरभैया ने कार्टूनिस्ट संदीप अध्वर्यु के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की माँग की। सिरभैया ने यह भी कहा कि इस कृत्य के लिए ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के डायरेक्टर को माफी माँगनी चाहिए।

मध्य प्रदेश के विदिशा में ‘हिंदू चेतना सेवा समिति’ के कार्यकर्ताओं ने जलाई TOI की प्रतियाँ

बता दें कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में 15 साल की बच्ची के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था। इसके बाद ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुख्य कार्टूनिस्ट संदीप अध्वर्यु ने एक विवादित कार्टून पोस्ट किया था। इस कार्टून में दिखाया गया था कि पीड़ित लड़की लोगों से मदद माँगते हुए भटक रही है, वहीं हिंदू गाय की पूजा कर रहे हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के लोगो वाला कार्टून

TOI के कार्टूनिस्ट ने अपने कार्टून में लड़की की पीड़ा या उसके प्रति समाज की उदासीनता को दिखाने की जगह अपने हिंदूफोबिक होने का प्रदर्शन किया था। उसने यह दिखाने की कोशिश की थी कि हिंदू जिस गाय को अपनी माँ मानते हैं उसकी पूजा कर रहे हैं। वहीं उनकी बेटी यानी एक हिंदू लड़की दर्द के साथ खून से लहूलुहान हो दर-दर भटक रही है।

वास्तव में यदि कार्टूनिस्ट को पीड़िता का दर्द और समाज की उदासीनता को दिखाना ही था तो वह सामान्य लोगों को भी दिखा सकते थे। इसके अलावा उज्जैन में अन्य मजहबों की भी बड़ी आबादी रहती है। वह उन्हें दिखा सकते थे। लेकिन सच्चाई यह है कि सबका और सॉफ्ट टारगेट हिंदू ही हैं।

उल्लेखनीय है कि बलात्कार पीड़िता की मदद करने वाला कोई अन्य नहीं बल्कि गाय की पूजा करने वाले एक गुरुकुल के आचार्य राहुल शर्मा थे। लेकिन कार्टूनिस्ट ने अपने कार्टून में उनका भी जिक्र नहीं किया था।

गौरतलब है कि बलात्कार पीड़िता मदद माँगने के लिए उज्जैन शहर में करीब 8 किलोमीटर तक पैदल चलती रही। वह लगातार लोगों से मदद माँग रही थी। लेकिन लोग सिर्फ मूक दर्शक बने देखते रहे। हालाँकि, जब वह उज्जैन के ही बड़नगर रोड स्थित दांडी आश्रम के पास पहुँची तो वहाँ के आचार्य राहुल शर्मा ने उसे कपड़े पहनाए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने उसे हॉस्पिटल पहुँचाया।

बता दें कि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के कार्टून सामने आने के बाद ही इसको लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा शुरू हो गया था। इसके बाद कार्टूनिस्ट संदीप अध्वर्यु ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि यह उसका व्यक्तिगत कार्टून था, इसका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, कार्टून में साफ तौर पर TOI और उसके रेगुलर स्टाइल में ‘लाइन ऑफ नो कंट्रोल’ लिखा हुआ था। कार्टूनिस्ट ने दावा किया, “मेरी पिछली पोस्ट में गलती से TOI लिखा रह गया था। मैं पोस्ट करने से पहले इसे फ्रेम के स्टैंटर्ड फॉर्मेट से हटाना भूल गया था।”