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जस्टिन ट्रूडो को आखिरकार माँगनी पड़ी माफी, कहा- यह बड़ी गलती थी, इसने कनाडा को बहुत शर्मिंदा किया

खालिस्तानी आतंकियों का हमदर्द बन भारत के साथ रिश्तों में तल्खी लाने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को नाजी सैनिक को सम्मानित करने के लिए माफी माँगनी पड़ी है। इस विवाद के बाद कनाडा की संसद के अध्यक्ष एंथनी रोटा को भी इस्तीफा देना पड़ा था। विवाद का ठीकरा रोटा पर फोड़ते हुए ट्रूडो ने कहा कि यह एक भारी गलती थी। इसने संसद और कनाडा को बहुत शर्मिंदा किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रूडो ने बुधवार (27 सितंबर 2023) को हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रवेश करने से पहले कहा, “हम सभी जो शुक्रवार को सदन में थे, हमें खड़े होकर तालियाँ बजाने पर गहरा अफसोस है, भले ही हम इसके बारे (नाजी सैनिक यारोस्लाव हुंका) में अनजान थे।” उन्होंने कहा, “यह यहूदी नरसंहार (होलोकॉस्ट) में मारे गए लाखों लोगों की यादों का एक भयानक अपमान था और यहूदी लोगों के लिए बेहद दर्दनाक था।”

उन्होंने ये भी कहा, “यह सोचना बेहद परेशान करने वाला है कि यूक्रेन जिस मकसद से जंग लड़ रहा है, उसका गलत तरह से प्रचार किया जा रहा है। रूस और उसके समर्थक इस गंभीर गलती (यारोस्लाव हुंका को सम्मान देना) का राजनीतिकरण कर रहे हैं।”

दरअसल यूक्रेन के राष्ट्रपति ने शुक्रवार (22 सितंबर) को कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भाषण दिया था। इसके बाद स्पीकर एंथनी रोटा ने वहाँ मौजूद यारोस्लाव हुंका की तरफ सब का ध्यान दिलाया था। इस पर कनाडाई सांसदों ने 98 साल के यारोस्लाव हुंका का खड़े होकर दो बार अभिनंदन किया।

इस दौरान हुंका को द्वितीय विश्वयुद्ध में फर्स्ट यूक्रेनी डिवीजन के लिए लड़ने वाले एक युद्ध नायक के तौर पर पेश किया गया था। वे फर्स्ट यूक्रेनी डिवीजन को वेफेन-एसएस गैलिसिया डिवीजन या एसएस 14वें वेफेन डिवीजन में तैनात थे। ये एक स्वैच्छिक इकाई थी जो नाजियों की कमान के अधीन थी।

हुंका के सम्मान पर रूस की गंभीर प्रतिक्रिया के बाद हाउस ऑफ कॉमन्स के पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद सदन के स्पीकर एंथनी रोटा ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। हाउस में सरकार की नेता करीना गोल्ड ने कहा कि रोटा ने सरकार या यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल को सूचना दिए बगैर हुंका को आमंत्रित किया और मान्यता दी। इस मामले में पूरी तरह से तत्परता न बरत कर रोटा ने सांसदों का विश्वास तोड़ दिया है।

इससे पहले रविवार (24 सितंबर) को रोटा ने कहा कि हुंका को आमंत्रित करने और पहचानने के लिए वह अकेले जिम्मेदार थे। दरअसल हुंका उसी जिले से हैं, जिसका प्रतिनिधित्व रोटा करते हैं। स्पीकर कार्यालय के मुताबिक, हुंका के बेटे ने रोटा के स्थानीय कार्यालय में यह पता करने के लिए संपर्क किया था कि क्या यह संभव है कि उनके पिता यूक्रेनी राष्ट्रपति के भाषण में शामिल हो सके।

सलमान और उसके अब्बा रहीश ने घर पर लगाया पाकिस्तानी झंडा, मुरादाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक घर के ऊपर पाकिस्तानी झंडा फहराने का मामला सामने आया है। पाकिस्तान का यह झंडा रहीश नाम के व्यक्ति की छत पर लगाया गया है। इस मामले में रहीश के बेटे सलमान को भी आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपित बाप-बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना बुधवार (27 सितंबर 2023) की है।

मामला मुरादाबाद जिले के भरतपुर थाना क्षेत्र के बुरहानपुर गाँव का है। मामले में शिकायतकर्ता खुद पुलिस है। वादी सब-इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने अपनी तहरीर में कहा है कि वह 27 सितंबर 2023 को साथी सिपाही के साथ गश्त कर रहे थे। इस दौरान वे बुढ़ानपुर अलीगंज गाँव के सरकारी स्कूल पहुँचे। वहाँ उन्हें गाँव का चौकीदार सूरजपाल मिला।

सूरजपाल ने पुलिस को बताया कि उनके गाँव के रहीश ने अपनी छत पर पाकिस्तान का झंडा लगा रखा है। चौकीदार ने इस घटना में रहीश के बेटे सलमान की भी संलिप्तता बताई। सब इंस्पेक्टर कुलदीप के मुताबिक, इस सूचना की तस्दीक करने वो बुधवार की शाम लगभग 5:15 बजे गाँव बुढ़ानपुर अलीगंज पहुँचे। पुलिस अधिकारी का कहना है कि सूचना सही पाई गई और रहीश के घर पर पाकिस्तान का झंडा फहराता मिला।

पुलिस ने बाकायदा उस झंडे की वीडियोग्राफ़ी करवाई और नीचे उतरवाया। बाद में 45 वर्षीय रहीश और 25 साल के सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर IPC की धारा 153A और 153B के तहत FIR दर्ज की गई है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया है।

रहीश और सलमान की करतूत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सब इंस्पेक्टर कुलदीप के मुताबिक, रहीश और सलमान की इस हरकत के चलते 2 समुदायों के बीच सौहार्द्र पर नकारात्मक असर पड़ा और वैमनस्यता की भावना पैदा हुई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपितों ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि जिस झंडे को वो फहरा रहे हैं, वो पाकिस्तान का है। हालाँकि पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि झंडे को फहराने के पीछे उनका मूल मकसद किया था। जाँच में यह पहलू भी देखा जा रहा है कि दोनों ने पाकिस्तानी झंडा अपनी मर्जी से लगाया था या किसी और के कहने पर।

उज्जैन में खून से लथपथ जिस बच्ची को भटकते सबने देखा, उसके शरीर को गुरुकुल के आचार्य ने अपने वस्त्र से था ढका: पर हिंदू घृणा पर उतारू हो गया गिरोह

12 साल की वह बच्ची मध्य प्रदेश के उज्जैन में अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ कई किलोमीटर तक भटकती रही। सबने उसे देखा पर मदद एक गुरुकुल के आचार्य राहुल शर्मा ने की। अपने वस्त्र से उसके तन को ढका। लेकिन लिबरल-सेकुलर गैंग ने इस हृदयविदारक घटना का इस्तेमाल भी अपनी हिंदू घृणा को दिखाने के लिए किया।

नीचे देखिए सोशल मीडिया में उज्जैन हैशटैग के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया के कार्टूनिस्ट संदीप द्वारा शेयर किया गया कार्टून देखिए;

टीओआई के कार्टूनिस्ट द्वारा शेयर किया गया हिंदूफोबिक कार्टून

मध्य प्रदेश पुलिस इस बच्ची से दरिंदगी करने वालों की पहचान करने की कोशिश में लगी है। हिरासत में 4 संदिग्ध लिए गए हैं। इनमें से एक ऑटो ड्राइवर है। उसके DNA परीक्षण की तैयारी चल रही है। CCTV फुटेज सहित अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं। बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है।

इस बच्ची को पुलिस के पास राहुल शर्मा ने पहुँचाया था। वे दंडी सेवा आश्रम, बड़ा नगर उज्जैन स्थित एक गुरुकुल में आचार्य हैं। बच्चों को वेद और शास्त्रों की शिक्षा देते हैं।

आचार्य शर्मा ने बताया कि 25 सितंबर 2023 की सुबह करीब 9:30 बजे वे काम से गुरुकुल से बाहर निकले थे। इसी दौरान उन्होंने इस लड़की को बदहवास हालत में पैदल जाते हुए देखा। वह अर्धनग्न थी। उसकी कमर के नीचे वस्त्र नहीं थे। आचार्य राहुल शर्मा ने सबसे पहले अपने अंग वस्त्र (पुजारियों की पोशाक का ऊपरी भाग) से उसका शरीर ढका। उसे हिम्मत बँधाई।

उन्होंने बताया, “मैंने एक लड़की को दर्द से कराहते देखा। वह फटे हुए कपड़े से अपने निजी अंगों को ढकने की कोशिश कर रही थी। पहले तो मैं कुछ समझ नहीं सका। फिर मैंने अपना अंग वस्त्र उतारकर उसके शरीर को ढका।” उन्होंने कहा कि उसके पैर खून से लथपथ थे, मैं उसे देखकर बर्दाश्त नहीं कर सका।

आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि जब बच्ची खुद को सुरक्षित महसूस करने लगी तब उन्हें उसे आश्रम में खाना खिलाया। इस दौरान उन्होंने पीड़िता से कई बार उसके निवास, माता-पिता आदि के बारे में जानना चाहा। लेकिन बच्ची ठीक से कुछ बता नहीं पा रही थी। उन्होंने एक पेन-डायरी ले कर बच्ची से सब कुछ लिखने के लिए कहा। बच्ची यह भी नहीं कर पाई। आखिरकार आचार्य शर्मा ने पुलिस को बुलाने के लिए 100 नंबर पर कॉल किया पर फोन काट दिया गया। इसके बाद उन्होंने महाकाल मंदिर के प्रशासनिक अधिकारीयों से सम्पर्क किया जहाँ से घटना की सूचना स्थानीय थाने को दी गई। पुलिस ने पहुँच कर बच्ची को अपने कब्ज़े में लिया।

DNA सैम्पल के होंगे परीक्षण

इस बीच इंदौर के अस्पताल से आ रही खबरों के मुताबिक बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है। हिरासत में लिए गए ऑटो ड्राइवर का नाम राकेश बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पहले पुलिस कस्टडी में उसने दुष्कर्म की बात कबूली थी। हालाँकि बाद में वो इस बयान से मुकर गया और घटना में अपनी संलिप्तता से साफ़ इनकार कर रहा है। पुलिस अब राकेश के DNA सैम्पल की जाँच करवा सकती है। पुलिस के मुताबिक उसके ऑटो में खून के छींटे भी मिले हैं, जिनका परीक्षण करवाया जा रहा है।

घटना के ही दिन भोर में 3 बजे पीड़िता का एक और CCTV फुटेज हाथ लगा है। इस फुटेज में वह सड़क के किनारे स्कूल की ड्रेस पहने खड़ी है। बाद में 5:52 बजे सुबह के एक अन्य फुटेज में पीड़िता अर्धनग्न हालत में दिखाई पड़ी। ऐसा माना जा रहा है कि पीड़िता के साथ भोर के 3 बजे से 5:52 के बीच दुष्कर्म हुआ। उधर अन्य संदिग्धों की तलाश में पुलिस लगातर जाँच जारी रखे हुए है। CCTV फुटेज खँगालने के साथ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर भी काम चल रहा है। बच्ची द्वारा अपनी माँ के साथ भी किए गए दुष्कर्म के दावों की जाँच पुलिस कर रही है।

अब तक कुल 4 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। ये सभी घटना के दौरान पीड़िता के आसपास दिखाई दिए थे।

कपड़े फाड़ कर, दौड़ा-दौड़ा कर, झोंटा खींचते हुए लड़की को मारते रहा मोहसिन: वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

एक वीडियो वायरल है। इसमें एक लड़की को जान बचाकर भागने की कोशिश करते और एक युवक को दौड़ा-दौड़ाकर उसे पीटते देखा जा सकता है। युवक लड़की के कपड़े फाड़ देता है। बाल खींचता है। उसे थप्पड़ मारता है। यह वीडियो गुजरात के अहमदाबाद का है। इसमें दिख रहे युवक की पहचान मोहसिन के तौर पर हुई है।

मोहसिन एक स्पा का संचालक है। जिस लड़की को वह पीट रहा है, वह उसकी बिजनेस पाटर्नर है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़िता से संपर्क किया। इसके बाद मोहसिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अहमदाबाद के सिंधु भवन रोड पर स्थित गैलेक्सी स्पा का है। 25 सितंबर, 2023 को पीड़िता ने स्पा में ही काम करने वाली लड़की को डाँट दिया था। इसी बीच मोहसिन वहाँ आ गया और पीड़िता से बहस करने लगा। बहस इतनी बढ़ गई कि मोहसिन ने बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में लड़की खड़ी दिखाई दे रही है। इसके बाद मोहसिन उसके पास आता है। लड़की कुछ बोलने की कोशिश करती है, लेकिन इससे पहले ही मोहसिन उसे थप्पड़ मार देता है। इसके बाद लड़की मोहसिन को धक्का देकर वहाँ से भागने की कोशिश करती है। लेकिन मोहसिन उसका पीछा करते हुए उसके पास जाता है। जहाँ लड़की एक बार फिर उसे धक्का देकर वहाँ से जाने की कोशिश करती है।  

वीडियो में आगे बढ़ने पर लड़की मोहसिन से दूर जाती हुई नजर आ रही है। वहीं मोहसिन भी लौटता हुआ दिखाई देता है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती है। इस बार मोहसिन दौड़ता हुआ पीड़िता के पास जाता है और उसका हाथ पकड़कर घसीटता हुआ वापस ले आता है। इस बीच एक अन्य युवक बीच-बचाव की कोशिश करते हुए लड़की को मोहसिन से छुड़वा देता है।

लेकिन मोहसिन एक बार फिर पीड़िता के पास जाता है। इस बार वह लड़की का बाल पकड़कर उसे खींचता हुआ दिखाई देता है। फिर वह लड़की पर लगातार थप्पड़ बरसाता हुआ नजर आता है। वीडियो वायरल होने के बाद लोग पुलिस से कार्रवाई की माँग रहे थे। इस पर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए लड़की की तलाश शुरू कर उससे संपर्क किया। लेकिन उसका कहना था कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती।

पुलिस की काउंसिलिंग के बाद पीड़िता आरोपित मोहसिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को तैयार हुई। इस मामले में पुलिस ने मोहसिन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A, 294B, 323 के तहत एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित लड़की का बयान भी सामने आया है। पीड़िता का कहना है कि वह और मोहसिन बिजनेस पार्टनर हैं। स्पा में चार-पाँच हजार रुपए का नुकसान होने के बाद उसने वहाँ काम करने वाली एक लड़की को डाँट दिया था।

पीड़िता ने आगे कहा कि इसी दौरान मोहसिन वहाँ आ गया और उस पर गुस्सा करने लगा। इसके बाद दोनों के बीच बहस हुई और मोहसिन मारपीट पर उतर गया। उसने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना देने की कोशिश की थी। लेकिन मोहसिन ने उसका मोबाइल छीन लिया था। इसके बाद उसने भागकर खुद को बचा लिया था। पीड़िता किसी भी प्रकार की शिकायत करती इससे पहले ही मोहसिन ने उससे माफी माँग ली थी। इसलिए वह FIR नहीं कराना चाहती थी। लेकिन पुलिस के समझाने के बाद उसने FIR दर्ज कराई है। पीड़िता ने सपोर्ट करने के लिए मीडिया को धन्यवाद दिया है।

‘विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता’: भगत सिंह ने लिखा था, समझाया भी था… काश उनकी टीशर्ट पहने लोग, ‘लाल-सलाम’ वाली भीड़ इसे पढ़ लेते!

“सम्पदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे न भीरुत्वम्।
तं भुवन त्रयतिलकं जनयति जननी सुतं विरलम्।।”
-हितोपदेश-सुभाषित-श्लोकाः- १.३४

अर्थात: जिसको सुख सम्पत्ति में प्रसन्नता न हो, संकट विपत्ति में दु:ख न हो, युद्ध में भय अथवा कायरता न हो, तीनों लोकों में महान ऐसे किसी पुत्र को माता कभी-कभी ही जन्म देती है।

उक्त श्लोक को चरितार्थ करते हुए 28 सितंबर 1907, पंजाब के जिला लायलपुर, बंगा गाँव (वर्तमान पाकिस्तान) में एक राष्ट्रभक्त सिख परिवार में उत्कृष्ट देशभक्त सरदार भगत सिंह के रूप में वीर बालक का जन्म हुआ। उन्होंने न केवल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई अपितु मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष 6 माह की अल्पायु में ही शहीद होकर सदा सर्वदा के लिए अमर हो गए।

युवता के योग्यतम प्रतीक सरदार भगत सिंह के इस महान बलिदान और त्याग ने देश के जन मानस में आजादी की ऐसी तड़प पैदा कर दी, एक ऐसी क्रांति की अलख जगा दी कि परिणाम स्वरूप देश का हर व्यक्ति आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए, बलिदान होने के लिए स्वेच्छा से आगे आने लगा। भगत सिंह केवल एक नाम ही नहीं अपितु एक श्रेष्ठ विचारधारा हैं, जिसने विभिन्नता वाले इस विशाल भारत देश को संगठित कर डाला। भारत माँ के इस सच्चे सपूत को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार भले न मिला हो परन्तु वे अपने आप में ही किसी अनमोल रत्न से कम भी नहीं। उनकी क्रांति की ज्वाला की तपिश आज भी हर भारतवासी के हृदय में कायम है।

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी भगत सिंह एक अप्रतिम लेखक, पत्रकार, वक्ता, दार्शनिक, कुशल रणनीतिकार और भारतीय क्रांति के दार्शनिक भी थे। ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ रूपी ऊर्जावान उद्घोष के जनक ने अपने एक पत्र में क्रांति के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था:

“क्रांति का अर्थ अनिवार्य रूप से स्वतंत्र आंदोलन नहीं होता है, विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता यद्यपि यह हो सकता है कि विद्रोह का अंतिम परिणाम क्रांति हो।”

22 अक्टूबर 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ भगत सिंह संयुक्त रूप से लाहौर के विद्यार्थियों के नाम लिखते हैं, “इस समय हम नौजवानों से यह नहीं कह सकते कि वे बम और पिस्तौल उठाएँ। आज विद्यार्थियों के सामने सर्व-महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी राष्ट्र सेवा एवं समर्पण है, राष्ट्रीय त्याग के अंतिम क्षणों में नौजवानों को क्रांति का यह संदेश, देश के कोने-कोने में पहुँचाना है।”

उनके इस पत्र के माध्यम से देश भर में चल रहे जन आंदोलनों के प्रति उनके विचार स्पष्ट हो जाते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य था कि कल-कारखानों से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों तक क्रांति की ज्वाला भड़क उठे, जिससे अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें हिल जाएँ और कोई भी अंग्रेज किसी भी रूप में भारतीयों का शोषण ना कर पाए।

मनुष्य स्वयं ही अपना भाग्य निर्माता

“मानवः स्वयस्य भाग्यस्य विधाता स्वयमेव हि। तथ्यमेतद् विजानन्ति ये ते तु निज चिंतनम्।”
प्रज्ञा पुराण २/४०

अर्थात: मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं ही होता है, जो इस तथ्य को समझते हैं, वे अपने चिंतन और प्रयास को श्रेष्ठ उद्देश्यों में ही नियोजित करते हैं।

यदि सरदार भगत सिंह चाह लेते तो कभी भी अंग्रेजों के हाथ न आते। परन्तु आजादी के मतवाले ने पूर्व नियोजित योजना के प्रतिकूल, राष्ट्रहित में स्वयं को उत्सर्ग करना ही श्रेयस्कर समझा। भारत को दासता की बेड़ियों से मुक्त करवाना ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था। उन्होंने अंग्रेजों के अमानुषिक अत्याचार सहे, अनगिनत यंत्रणाएं झेली! किन्तु न धन का लोभ, न परिवार का मोह ही उन्हें कभी अपने लक्ष्य से डिगा पाया।

भारतवर्ष की आज़ादी का उनका दृढ़ संकल्प अटूट था और यही कारण था कि जिनका आधिपत्य दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर था, एक ऐसा साम्राज्य, जिसके बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, इतनी शक्तिशाली हुकूमत, मात्र 23 वर्ष के एक नौजवान से भयभीत हो गई थी। आज का आधुनिक युवा वर्ग जो छोटी से छोटी समस्याओं में भी हताश हो जाता है, मनोविकार से घिर जाता, जिसे थोड़े से संघर्ष से डिप्रेशन होने लगता है, उस युवा वर्ग को भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने एक पत्र में लिखा था:

“जो नौजवान दुनिया में तरक्की करना चाहते हैं, उन्हें वर्तमान युग में महान और उच्च विचारों का अध्ययन करना चाहिए।” (भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज, अराजकतावाद-1)

साम्राज्यवाद का विरोध

तत्कालीन भारतीय समाज तमाम अंध-विश्वास, कुरीतियों, छूत-अछूत, ऊँच-नीच जैसे संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित था। ऐसी सामाजिक व्यवस्था उत्पन्न कर दी गई थी कि समाज में अकारण ही असमानता व्याप्त हो गई थी। धनिक वर्ग मासूमों का शोषण कर रहा था। अंग्रेजों के पश्चात इन काले अंग्रेजों से मुक्ति दिलवाना ही भगत सिंह का दूसरा मुख्य उद्देश्य था।

उनके सिद्धांतों के अनुसार क्रान्ति का अर्थ अंततोगत्वा एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है, जिसमें सर्वहारा वर्ग का आधिपत्य सर्वमान्य होगा। जब तक मनुष्य द्वारा मनुष्य का तथा एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण, जिसे साम्राज्यवाद कहते हैं, समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक मानवता शर्मसार होती ही रहेगी। वे कहते थे, “क्रांति से हमारा अभिप्राय अन्याय पर आधारित मौजूदा समाज-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन है।”

63 दिनों का अनशन

यह जेल के दौरान एक अभूतपूर्व घटना है। यद्यपि अनशन पर गाँधीजी की सत्ता स्वीकारी जाती है तथापि भगत सिंह ने भी जेल में निरंतर 63 दिनों तक अनशन किया था। उन्हें असेंबली बम कांड में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। इधर जतीन्द्रनाथ दास सहित कई और क्रांतिकारियों को भी हिरासत में लिया गया! जेल में उन्हें बहुत खराब (सड़ा) भोजन दिया जाता था। जेलों में राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार, साफ़ जगह, अच्छे भोजन, पढ़ने के लिए अखबार एवं किताबों के लिए यह भूख हड़ताल आरम्भ हुई। जेल के अधिकारियों ने सबके अनशन तुड़वाने के लिए तरह-तरह के पशुवत व्यवहार किए और अशोभनीय हथकंडे अपनाए।

क्रांतिकारी जतीन्द्रनाथ के शरीर में जबरन रबड़ की नली से दूध डालने का प्रयास किया गया, इस प्रयास में दूध उनके फेफड़ों में चला गया! वह पीड़ा से भर उठे! मगर उन्होंने हार नहीं मानी! अनशन के 63वें दिन वे शहीद हो गए और अंग्रेज़ी सरकार ने जन आक्रोश से बचने के लिए क्रान्तिकारी दल की सभी माँगे मान ली और इस घटना के पश्चात राजनीतिक कैदियों के साथ भविष्य में उचित व्यवहार किए गए। अपने व्यक्तिगत सुख की परवाह न कर साथियों के हित के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने की तीव्र समर्पण भावना वास्तव में किसी महान नायक के व्यक्तित्व में ही समाहित हो सकती है।

प्रखर लेखक और पत्रकार

भगत सिंह हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बांग्ला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक थे। उन्होंने ‘अकाली’ और ‘कीर्ति’ दो अखबारों का संपादन भी किया। अपने ज्वलंत विचारों को लेखनी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया। उनके लिए पत्रकारिता एक मिशन थी, वे लेख लिखते थे, ताकि लोगों को जागृत किया जा सके, उन्हें यह बताया जा सके कि अंग्रेजों के खिलाफ यदि संगठित नहीं हुए तो ताउम्र कुचले जाते रहेंगे।

भगत सिंह ने आखिरी सांस तक अपने अंदर के पत्रकार और लेखक को मरने नहीं दिया। जेल में बैठकर भी वे लगातार लिखते और पढ़ते रहे थे। शहीद-ए-आजम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से आजादी की लड़ाई में भाग लिया। एक तरफ जहाँ वे क्रांतिकारी भावना से ओतप्रोत अपने भाषणों से नौजवानों की रगो में दौड़ रहे खून को खौलने पर विवश किया करते थे। वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग नामों से लेख लिखकर अपनी बातों को क्षेत्रीय सीमाओं के बंधन से मुक्त रखते थे।

परतंत्रता के उस अत्यंत ही पीड़ादायक और घोर यातनाओं के दौर में, भगत सिंह के अलावा भी अनगिनत देशभक्तों ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दे दी। उन पूज्य हुतात्माओं के अथक परिश्रम, निरंतर प्रयास, त्याग, तपस्या और बलिदान का ही परिणाम है कि हम स्वतंत्र संवैधानिक राष्ट्र में स्वाँस ले पा रहे हैं। परन्तु आज के आधुनिक दौर में हम कहीं न कहीं उनके महत्वपूर्ण बलिदानों का मोल समझ पाने में असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं। आज जब हमारी वाणी और चेतना, सबकुछ स्वतंत्र है तो हम राष्ट्र को अधिक से अधिक देने की भावना से कोसों दूर बस ‘मैं और मेरा’ के प्रपंच में उलझ कर, अपने मूल कर्त्तव्यों से विमुख होते चले जा रहे हैं।

आज का आधुनिक समाज परिवर्तनशील है। परिवर्तन की इस बेला में आज प्राचीन विचारों एवं आदर्शों के समन्वय की महती आवश्यकता है ताकि भारत का पुनरुत्थान हो सके। हमारे समाज को न सिर्फ एक शहीद भगत सिंह अपितु ऐसे अनेक ऐतिहासिक एवं प्रेरणात्मक व्यक्तित्व से शिक्षा ग्रहण कर, नवीन एवं प्राणवान प्रतिभाओं को एकत्र कर सर्वसामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए नए भारत के निर्माण की अत्यन्त आवश्यकता है।

अंत में इस महान युवा क्रांतिकारी का संदेश आज के युवाओं के नाम:

“किसी ने सच ही कहा है, सुधार वृद्ध नहीं कर सकते। वे तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं, वे हमारा उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। सुधार तो होते हैं युवाओं के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा से, जिनको भयभीत होना आता ही नहीं और जो विचार कम और अनुभव अधिक करते हैं।”

90% भिखारी पाकिस्तानी: बोला सऊदी अरब- जायरीन के नाम पर जेबकतरों को भेजना बंद करो, हमारी जेल तुम्हारे कैदियों से भर गईं

विदेशों में पकड़े जाने वाले 90 प्रतिशत भिखारी पाकिस्तान (Pakistani Beggars) से हैं। दिलचस्प यह है कि इनमें से अधिकतर पाकिस्तानी जायरीन बनकर अरब देश में आते हैं और वहाँ पॉकेटमारी करने लगते हैं। सऊदी अरब ने कहा है कि इन पाकिस्तानी जेबकतरों की व​जह से उसकी जेलें भर गई हैं।

सऊदी अरब ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में पाकिस्तान को अपने हज कोटा से जायरीनों का चयन करने में सावधानी बरतने को कहा है। प्रवासी पाकिस्तानियों पर सीनेट की स्थायी समिति को बुधवार (27 सितंबर 2023) को सूचित किया गया कि पाकिस्तान से बड़ी संख्या में भिखारी विदेश जा रहे हैं, जिससे ‘मानव तस्करी’ को बढ़ावा मिला है।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रवासी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव जुल्फिकार हैदर ने कुशल और अकुशल श्रमिकों के पाकिस्तान छोड़ने के मुद्दे पर सीनेट पैनल में एक चर्चा के दौरान यह खुलासा किया। इस दौरान हैदर ने समिति को सूचित किया कि अन्य देशों में गिरफ्तार किए गए ’90 फीसदी भिखारी’ पाकिस्तानी मूल के थे। उन्होंने बताया कि कई भिखारियों ने सऊदी अरब, ईरान और इराक की यात्रा के लिए उमराह वीजा का फायदा उठाया था।

उन्होंने ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि मक्का में मस्जिद अल-हरम जैसे पाक स्थलों पर पकड़े गए जेबकतरों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भी थे। इस दौरान सीनेट पैनल में मध्य-पूर्व को ‘जेबकतरों’ का मुख्य ठिकाना बताया गया।

सऊदी अरब इस बात से खासा नाराज है कि पाकिस्तान से भिखारी और जेबकतरे उमराह वीजा पर पहुँचते हैं। इसके पीछे की वजह ये है कि उन्हें इस देश की तरफ से रोजगार के लिए वहाँ नहीं बुलाया जाता, क्योंकि कुशल कामगारों के तौर पर अरबियों को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं होता है।

इसके लिए ये देश भारतीय और बांग्लादेशी कामगारों पर अधिक निर्भर रहते हैं। इस बात की तस्दीक खुद पाकिस्तान सीनेट पैनल में चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रवासी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव जुल्फिकार हैदर ने की है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अब अकुशल लोगों की जगह कुशल कामगारों को तरजीह देता है।

सीनेट पैनल में चर्चा के के दौरान सीनेटर राणा महमूद-उल-हसन ने जापान जैसे देशों में कुशल श्रमिकों के बीच पाकिस्तान के तुलनात्मक रूप से कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि विदेशों में पकड़े गए भिखारियों में से अधिकांश पाकिस्तान से थे। उन्होंने बताया कि इराक और सऊदी अरब के राजदूतों ने सूचित किया था कि इनकी गिरफ्तारियों से उनके यहाँ बदमाशों को कैद में रखने तक की जगह नहीं बची है। इस वजह से मानव तस्करी का खतरा पैदा हो गया है।

एशियाड में अब तक 24 मेडल: भारतीय शूटर्स ने जीता गोल्ड, मणिपुर की रोशिबिना देवी की वुशु में चाँदी; पदक उनको किया स​मर्पित जिन्हें चीन ने नहीं दिया वीजा

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स (Asian Games) में भारतीय शूटर्स ने एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। यह मेडल 10 मीटर मेंस एयर पिस्टल में मिला है। भारतीय शूटर सरबजोत सिंह, अर्जुन सिंह चीमा और शिवा नरवाल ने यह कारनामा किया। इसके अलावा मणिपुर की रोशिबिना देवी नाओरेम ने वुशु में सिल्वर मेडल जीता है। भारत के नाम अब तक 6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज मेडल सहित कुल 24 पदक हो गए हैं।

एशियन गेम्स में भारतीय शूटर्स का लाजवाब प्रदर्शन जारी है। पाँचवे दिन गुरुवार (28 सितंबर, 2023) को मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल में भारतीय शूटर्स की तिकड़ी ने 1734 प्वाइंट के साथ गोल्ड पर निशाना साधा। गेम में चीनी शूटर्स 1733 प्वाइंट के साथ दूसरे नंबर पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। वहीं वियतनाम के शूटर्स ने 1730 प्वाइंट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। एशियन गेम्स में भारतीय शूटर्स अब तक 4 गोल्ड मेडल समेत 13 पदक जीत चुके हैं।


वुशु में मिला सिल्वर

भारतीय वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने महिलाओं की 60 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता। एशियन गेम्स के इतिहास में इस खेल में यह भारत का दूसरा सिल्वर मेडल है। नाओरेम को फाइनल में चीन की जियाओवेई वू के हाथों हार का सामना करना पड़ा। नाओरेम ने अपना यह मेडल अरुणाचल प्रदेश के वुशु खिलाड़ियों न्येमन वांगसू, ओनिलु तेगा, मेपुंग लामगु को समर्पित किया। बता दें कि इन तीनों खिलाड़ियों को चीन ने वीजा देने से इनकार कर दिया था।

इससे पहले एशियन गेम्स के चौथे दिन यानी 27 सितंबर को भारतीय शूटर सिफ्ट कौर सामरा ने 50 मीटर एयर राइफल 3 पोजिशन में गोल्ड मेडल अपने किया था। वहीं, मनु भाकर, ईशा सिंह और रिदम सांगवान की तिकड़ी ने 25 मीटर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा मेंस स्कीट में भारतीय शूटर अनंतजीत सिंह नरुका ने सिल्वर मेडल जीता था। वहीं वीर सिंह बाजवा और गुरजोत खांगुरा और अनंतजीत सिंह नरुका की तिकड़ी ने भी शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके अलावा, 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन के टीम इवेंट में आशी, माणिनी और सिफ्ट की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता।

एशियन गेम्स में भारत ने जीते 24 मेडल

भारत को एशियन गेम्स में अब तक 6 गोल्ड सहित 24 मेडल मिल चुके हैं। भारतीय शूटर्स ने 4, घुड़सवारी में 1, और महिला क्रिकेट टीम ने 1 गोल्ड मेडल जीता है। इसके अलावा भारत को अब तक 8 सिल्वर मेडल मिले हैं। शूटिंग में 4, रोइंग में 2, सेलिंग में 1 और वुशु में 1 सिल्वर मिला है। ब्रॉन्ज की बात करें तो भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 10 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। रोइंग में 3, शूटिंग में 5 और सेलिंग में 2 ब्रॉन्ज मेडल मिले हैं।

बॉयफ्रेंड के लिए सड़क पर बुर्का वाली लड़कियों के बीच झोटा-झोटी, बिहार के सीवान का Video वायरल: इस्लामिया कॉलेज की बताई जा रही छात्राएँ

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बुर्का पहने कुछ लड़कियों को सड़क पर आपस में लड़ाई करते देखा जा सकता है। पीछे दूर खड़ी कुछ अन्य लड़कियाँ हँसते हुए वीडियो बना रही हैं। यह वीडियो बिहार के सीवान का बताया जा रहा है। लड़कियों के आपसी झगड़े के पीछे बॉयफ्रेंड का विवाद बताया जा रहा है। वीडियो रविवार (24 सितंबर 2023) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना सीवान के सिसवन ढला इलाके की है। वायरल वीडियो में दिख रहीं लड़कियाँ सीवान के इस्लामिया कॉलेज की छात्राएँ बताई जा रहीं हैं। माना जा रहा है कि रविवार को क्लास में पढ़ाई के दौरान दोनों का झगड़ा बॉयफ्रेंड के मुद्दे पर हुआ था। थोड़ी तनातनी के बाद क्लास में अस्थायी तौर पर दोनों खामोश हो गईं। बाद में कॉलेज बंद होने पर दोनों सड़क पर फिर से उसी बात पर झगड़ने लगी। इस दौरान दोनों के बीच लात-घूँसे चलने लगे। वायरल वीडियो में लाल रंग का बुर्का पहने लड़की ने काले बुर्के वाली छात्रा को खूब पीटा।

सीवान न्यूज़ के मुताबिक वीडियो में हमलावर की भूमिका में दिख रही लाल रंग के बुर्के वाली लड़की का एक लड़के से अफेयर चल रहा था। इस दौरान दोनों के बीच एक अन्य लड़की की इंट्री हो जाती है। वह अन्य लड़की वीडियो में काले रंग के बुर्के में दिख रही है जो पिटाई का शिकार हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच क्लासरूम में हुए विवाद का भी वीडियो बनाया गया है। यह वीडियो 8 सेकेंड का है, जबकि सड़क पर हो रही मारपीट का वीडियो 14 सेकेंड का है।

इस वीडियो को बनाने वाली भी इस्लामिया कॉलेज की छात्राएँ बताई जा रही हैं। झगड़े के दौरान वो हँस रही हैं। एक ने कहा, “ओ तेरे की।” आसपास कई दुकानें आदि दिख रहीं हैं जहाँ मौजूद दुकानदार और ग्राहक सिर्फ दर्शक की भूमिका में खड़े दिख रहे। हालाँकि ऑपइंडिया की वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

इस वायरल वीडियो पर नेटिज़ेंस भी तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। फर्स्ट बिहार द्वारा 25 सितंबर 2023 को शेयर किए गए इस वीडियो पर सत्येंद्र सिंह नाम के यूजर ने इस लड़ाई को ‘इश्क में बौराई हसीनाओं की जंग’ बताया। मोहम्मद रेहान कुरैशी ने लिखा, “बुर्का पहिनी हैं। कमर अलग दिख रहा। इसी को बोलते हैं WWE बुर्का वाली।” शाश्वत ने सवाल किया कि जब सब एक जैसी दिख रहीं हैं तो लड़ते समय कन्फ्यूजन नहीं होता क्या ? वहीं अशोक कांत का दावा है कि एक बार उनके लिए भी 3 लड़कियाँ आपस में भिड़ गईं थी तब वो बाइक से भाग निकले थे।

चित्र साभार- @firstbiharnews ट्विटर पोस्ट पर आए कमेंट

फ़िलहाल इस मामले में अभी तक किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।

अब CBI करेगी ‘शीशमहल’ घोटाले की जाँच: कोरोना काल में अरविंद केजरीवाल के घर पर खर्च हुए थे करोड़ों, जाँच एजेंसी ने मँगाई फाइलें

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास ‘शीशमहल’ के रेनोवेशन मामले में सीबीआई ने शुरुआती एफआईआर दर्ज कर ली है। सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सभी संबंधित फाइलें माँगी हैं। सीबीआई ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है।

सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दिल्ली के भाजपा नेता टीना शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज की है। शर्मा ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल के आवास के रेनोवेशन में नियमों का उल्लंघन किया गया है और इसमें सरकारी धन का गबन किया गया है।

CBI ने इस मामले में PWD से सभी संबंधित फाइलें माँगी हैं, जिसमें रेनोवेशन की लागत, ठेकेदार के नाम और रेनोवेशन के लिए किए गए काम की जानकारी शामिल है। सीबीआई इन फाइलों की जाँच के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।

भाजपा ने बोला केजरीवाल पर हमला

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘केजरीवाल के अवैध बंगले के मामलें में CBI ने केस दर्ज किया कोरोना के काल में दिल्ली की जनता के पैसों से गैर कानूनी शीशमहल बनाने का पाप केजरीवाल ने किया है, इस अपराध की सजा से केजरीवाल बच नहीं सकते।’

कैग जांच की हुई थी सिफारिश

इस मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से जाँच के लिए केंद्र सरकार ने सिफारिश की थी। राजभवन की ओर से जाँच के आदेश की जानकारी दी गई थी। राजभवन की ओर से कहा गया था कि गृह मंत्रालय को 24 मई को एक पत्र मिलने के बाद स्पेशल कैग ऑडिट की सिफारिश की गई थी। यह पत्र एलजी ऑफिस की ओर से मिला था। जिसमें दावा किया गया था कि सीएम केजरीवाल के सरकारी बंगले के रेनोवेशन में वित्तीय गड़बड़ी पाई गईं। आम आदमी पार्टी और सीएम ऑफिस की ओर से कोई भी एक्शन नहीं लिया गया।

नाजी, इस्लामी और खालिस्तानी: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही आतंकियों का पनाहगार बना कनाडा, संसद अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद फिर जस्टिन ट्रूडो की बेइज्जती

पिछले कुछ दिन कनाडा और खासकर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए विशेष रूप से शर्मनाक रहे हैं। एक खालिस्तानी आतंकवादी (हरदीप सिंह निज्जर) की हत्या पर भारत के साथ राजनयिक विवाद में उलझने, जिसका सबूत ट्रूडो अभी तक दे नहीं पाए हैं, के बाद कनाडा को हिटलर के लिए लड़ने वाले एक नाजी सैनिक का सम्मान करने की बदनामी का सामना करना पड़ा।

इस घटना पर दुनिया भर के देशों और यहूदी समुदाय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसने कनाडा और पीएम जस्टिन ट्रूडो पर एक ऐसे व्यक्ति के लिए सेलिब्रेट करने के लिए यहूदी विरोधी भावना का आरोप लगाया, जो उस शासन का हिस्सा था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लाखों यहूदियों को बेरहमी से मार डाला था। इस शर्मिंदगी के बावजूद, जिसमें संसद ने माफी माँगी और संसद अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया, ट्रूडो ने इसके लिए ‘रूसी दुष्प्रचार’ की आड़ ली और खुद को इससे अलग करने की कोशिश की।

वहीं, इससे पहले ट्रूडो कनाडा की संसद में भारत पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं और भारत के साथ राजनयिक तनातनी मोल ले चुके हैं, जबकि उनके पास इस बात से जुड़े कोई सबूत नहीं है, सिवाय खोखले दावे के। उनके दावे पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है और ‘जैसे को तैसा’ नीति के तहत ही कनाडा को जवाब दिया है।

हालाँकि, आम नजरिए से देखें तो दोनों ही मामले एक-दूसरे से अलग लगते हैं, लेकिन गंभीर तौर पर देखें और कनाडा के अतीत में झाँके, तो इन बातों को कई चीजें जोड़ती दिख रही हैं। खास कर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और अन्य देशों की संवेदनशीलता के प्रति कनाडा का असम्मान भरा रवैया। चूँकि वो दुनिया भर के चरमपंथियों, आतंकवादियों के लिए आश्रय स्थल रहा है, चाहे वो खालिस्तानी आतंकी हों या नाजी हत्यारे। कनाडा ही वो देश है, जो भारत को तोड़कर खालिस्तान बनाने का सपना देखने वालों को शरण देता है, तो लाखों यहूदियों का नरसंहार करने वाले नाजी हत्यारों को भी। उन्हें न सिर्फ कनाडाई सरकार का संरक्षण मिला, बल्कि संसद तक में सम्मानित किया गया।

वैसे, आतंकवादियों और चरमपंथियों को कनाडा द्वारा समर्थन कोई नई घटना नहीं है, ये उसकी पुरानी आदत है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है। खासकर वर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के राज में, जिसमें कनाडा वांटेड आतंकियों को बचाने की न सिर्फ कोशिश करता है, बल्कि अलगाववादी कार्यों के लिए जमीन भी उपलब्ध कराता है।

लॉस एंजिल्स हवाई अड्डे को उड़ाने वाले आतंकी को शरण देना

1990 के दशक में कनाडा ने अल्जीरियाई आतंकवादी अहमद रेसम को आश्रय दिया था , जिसने बाद में दिसंबर 1999 के अंत में लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बमबारी की नाकाम साजिश को अंजाम दिया था। रेसम और अन्य इस्लामिक आतंकवादी 1992 में अल्जीरिया छोड़कर फ्रांस चले गए, जहां वह 1994 तक अवैध रूप से रहे। 1994 में, वह जाली पासपोर्ट पर कनाडा के लिए रवाना हो गए। आव्रजन अधिकारियों को रेसम पर फर्जी पासपोर्ट रखने का संदेह था। लेकिन रेसम ने अपने शपथपूर्ण बयान में आरोप लगाते हुए राजनीतिक शरण का अनुरोध किया कि उसे आतंकवाद के फर्जी मामले में फंसाया गया और अल्जीरिया में यातनाएं दी गई। कनाडा में आव्रजन अधिकारियों ने अल्जीरिया, फ्रांस या इंटरपोल से इसकी पुष्टि किए बिना उसकी कहानी को मान लिया और उसकी शरणार्थी स्थिति पर सुनवाई लंबित रहने तक उसे रिहा कर दिया।

कनाडा के तत्कालीन आप्रवासन मंत्री एलिनोर कैपलान ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि कनाडा में प्रवेश करने के लिए झूठे पासपोर्ट का उपयोग करना गंभीर अपराध नहीं माना जाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई वास्तविक शरणार्थी अक्सर इस रणनीति का सहारा लेते हैं।

रेसम चार साल की अवधि के लिए मॉन्ट्रियल में रहे। उन्होंने एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में अपना निवास स्थापित किया, जिसे बाद में कनाडाई और अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन द्वारा ओसामा बिन लादेन नेटवर्क से जुड़े आतंकवादी सेल के संचालन के मॉन्ट्रियल अड्डे के रूप में मान्यता दी गई। यह सेल विशेष रूप से एक अल्जीरियाई आतंकवादी संगठन से जुड़ा था जिसे सशस्त्र इस्लामी समूह या जीआईए के नाम से जाना जाता है।

मार्च 1998 में, रेसम ने जिहादी प्रशिक्षण लेने के लिए अफगानिस्तान की यात्रा की। एक साल बाद, 1999 में, वह पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और लॉस एंजिल्स के माध्यम से कनाडा लौट आए, जब उन्हें लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बमबारी करने की प्रेरणा मिली। मॉन्ट्रियल में वापस आकर और बम बनाने के ज्ञान से लैस होकर, उन्हें रसायन और उपकरण मिले, जिनसे उन्हें इमारतों को विस्फोट करने के लिए डिज़ाइन किए गए विस्फोटक बनाने में मदद मिली। बाद में उसी वर्ष, उसे लॉस एंजिल्स अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बमबारी करने के रास्ते में अमेरिकी शहर सिएटल के पास गिरफ्तार कर लिया गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाजियों की कनाडा में एंट्री

कनाडा द्वारा हत्यारओं को शेल्टर देने का ये इकलौता मामला नहीं है, बल्कि वो नाजियों के सैन्य संगठन, यूक्रेनी वेफेन-एसएस गैलिसिया डिवीजन के साथ भी एक घिनौना इतिहास साझा करता है। इसी डिवीजन के हुंका को कुछ दिन पहले कनाडा की संसद में सम्मानित किया गया था, जिसके बाद ये कहानी फिर से दुनिया के सामने आ गई।

गैलिसिया डिवीजन के अनुभवी नाजी हत्यारे यारोस्लाव हुंका को संसद में सम्मानित किए जाने पर कनाडा ने आँखें बंद करके रखी। कैसे, एक नाजी वेटरन को संसद में एंट्री मिली और वो यूक्रेनी राष्ट्रपति के सामने सम्मानित हो गया। वो भी तब, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के खुद के रिश्तेदार नाजियो द्वारा यहूदियों के होलोकास्ट में मारे गए थे। यही नहीं, कनाडा में तो एसएस की नाजी बटालियन 14वीं वेफेन ग्रेनेडियर डिवीजन को ये कहते हुए क्लीन चिट दे दिया गया, कि उसका नाजियों द्वारा किए गए नरसंहार से कोई लेना देना नहीं। जबकि ये बटालियन नाजियों द्वारा ही संचालित होती थी और पूरी तरह से नाजियों के उद्देश्य ही आगे बढ़ाती थी।

गैलिसिया डिवीजन, जिसे आधिकारिक तौर पर एसएस के 14वें वेफेन ग्रेनेडियर डिवीजन कहा जाता था, वो नाजियों द्वारा स्थापित स्वयंसेवकों का समूह था। ये नाजियों की मूल सेना से अलग, लेकिन उन्हीं द्वारा चलाई जाने वाली स्पेशल बटालियन थी, जिसके दम पर यूक्रेन के क्षेत्रों पर नाजी राज करते थे। नाजियों ने ऐसी ही डिवीजन फ्रांस, नॉर्वे, डच और अमेरिकी नागरिकों को मिलाकर भी बना थी। यूक्रेन की बटालियन को नाजियों ने 1943 में बनाया था, ताकि सोवियत संघ से कब्जाई जमीन पर वो राज कर सके।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गैलिसिया डिवीजन के सदस्यों को कनाडा में शरण मिली, जबकि आधिकारिक आप्रवासन नीति के तहत कनाडा में जर्मन वेहरमाच या एसएस से जुड़े लोगों के कनाडा में घुसने पर रोक थी। साल 1986 में युद्ध अपराधियों की संघीय सार्वजनिक जांच से पता चला कि गैलिसिया डिवीजन के लोगों को कनाडा में आने के बाद साल 1950 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी।

साल 1986 में जब ये खुलासा हुआ, तो पूरा कनाडा सन्न रह गया। खासकर के वो यहूदी समुदाय, जो नाजियों की बर्बरता का शिकार बना था। उस समय कनाडाई यहूदी कॉन्ग्रेस ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। हालाँकि, उसकी आपत्ति को इस आधार पर खारिज कर दिया गया, कि इस डिवीजन के सैनिकों ने “जर्मनों के प्रति निष्ठा के कारण नहीं, बल्कि रूसियों और कम्युनिस्ट शासन के प्रति उनकी शत्रुता के कारण” स्वेच्छा से काम किया था।

दरअसल, 1980 के दशक की शुरुआत में एक मशहूर नाजी हत्यारे साइमन विसेन्थल ने कनाडाई सरकार को 217 नामों की एक सूची सौंपी थी। इस सूची में गैलिसिया डिवीजन के पूर्व अधिकारियों के नाम थे, जो ‘यूरोप से बाहर रह रहे थे।’ इसकी जाँच के बाद पता चला कि इनमें से कम से कम 11 लोग कनाडा में रहते हुए रिटायर हुए और उनकी कनाडा में ही मौत हो गई। हालाँकि, 1986 में एक सार्वजनिक जाँच में अंततः घोषित किया गया कि डिवीजन के खिलाफ ‘युद्ध अपराध के आरोप’ कभी भी प्रमाणित नहीं हुए थे। नतीजतन, शीर्ष अधिकारियों ने गैलिसिया डिवीजन से जुड़े नाजियों को देश से बाहर निकालने की योजना रद्द कर दी, जबकि कनाडाई सरकार को इनके नाजियों से जुड़ाव के बारे में पूरी जानकारी थी।

खालिस्तानी आतंकियों को बढ़ावा दे रहा है कनाडा

कनाडा अब लोकतांत्रिक राष्ट्र की जगह खालिस्तानी आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। जो कनाडा में रहकर भारत के पंजाब राज्य को खालिस्तान के नाम से अलग देश बनाना चाहते हैं। ऐसे खालिस्तान समर्थक तत्व न सिर्फ कनाडा की नागरिकता लेकर मौज कर रहे हैं, बल्कि कनाडा की राजनीति में भी दखल बढ़ाकर सरकारी संरक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं। ये सब तब हो रहा है, जब भारत की सरकारों ने कनाडा से लगातार अपील की है कि वो खालिस्तानी आतंकियों को संरक्षण देना बंद करे और भारत के विरुद्ध काम कर रहे अलगाववादियों पर शिकंजा कसे।

हाल ही में कनाडा में मारे गए हरदीप सिंह निज्जर के अलावा प्रतिबंधित आतंकवादी गिरोह ‘सिख फॉर जस्टिस’ का मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू भी कनाडा में रहकर भारत विरोधी गतिविधियों को पूरी आजादी के साथ अंजाम दे रहा है। वो अक्सर भारतीय राजनयिकों, हिंदुओं और भारत सरकार के खिलाफ धमकियाँ जारी करता है और खालिस्तान की माँग करता है। इस माह की शुरुआत में पन्नू कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया पहुँचा था, जहाँ एक गुरुद्वारे में जनमत संग्रह की माँग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। यहाँ उसने भड़काऊ भाषण भी दिया था।

गौरतलब है कि कनाडा में उसी दिन जनमत संग्रह का आयोजन किया गया था, जब कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी ने कनाडा में चरमपंथी तत्वों की जारी भारत विरोधी गतिविधियों के बारे में भारत की कड़ी चिंताओं से अवगत कराया था।

उस कार्यक्रम से जुड़े वीडियो में प्रमुख खालिस्तानी आतंकवादी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के गुर्गे गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अपने करीबी सहयोगी खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या के लिए पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर को जिम्मेदार ठहराया था। बता दें कि खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में दो अज्ञात व्यक्तियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

खालिस्तानी आतंकवादियों पर दबाव बना, तो कनाडा में मंदिरों पर हमलों की बाढ़ आ गई। 8 सितंबर को खालिस्तानी आतंकवादियों ने कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में श्री माता भामेश्वरी दुर्गा देवी सोसायटी में तोड़फोड़ की। सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिनमें हिंदू मंदिर की दीवारों पर ‘पंजाब भारत नहीं है’ नारे के साथ भारत विरोधी पोस्टर चिपकाए गए थे।

कनाडा में मंदिरों और राष्ट्रवादी भारतीयों के खिलाफ इस तरह के बर्बरतापूर्ण हमलों की घटनाएं कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी हैं। जो ये दिखाती हैं कि कनाडाई अधिकारी और सरकार किस तरह से खालिस्तानी आतंकियों को पाल-पोस रही हैं। चूँकि जस्टिन ट्रूडो की पार्टी को सत्ता में बने रहने के लिए जगमीत सिंह की राजनीतिक पार्टी से महत्वपूर्ण समर्थन मिलता है, इसी वजह से ट्रूडो शांत रहते हैं और खालिस्तानियों को अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को बेखौफ होकर अंजाम देने का हौसला मिलता है।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में जिनित जैन द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।