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‘सिख दिख रहे 6 हमलावर आए, खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या कर चले गए’: रिपोर्ट से कनाडा की पोल खुली, CCTV फुटेज में घेरकर गोली मारते दिखे

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की प्लानिंग बड़े स्तर पर की गई थी। इसमें कम से कम 6 लोग और दो कारें शामिल थीं। हत्यारे सिखों जैसी भेषभूषा में थे जिन्होंने मात्र 90 सेकंड में 34 गोलियाँ निज्जर के शरीर में उतार दीं। 18 जून, 2022 को सरे में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में वाशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट से कनाडा द्वारा भारत पर लगाए जा रहे आरोपों और जाँच पर सवाल खड़ा हो गया है। वहीं वाशिंगटन पोस्ट की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह भी दावा है कि हत्या के 20 मिनट बाद पहुँची पुलिस टीमों के बीच जाँच को लेकर विवाद भी हुआ था। 

दरअसल, वाशिंगटन पोस्ट ने 90 सेकंड की CCTV रिकॉर्डिंग के आधार पर बड़ा खुलासा किया है। जिसे गुरुद्वारा के सुरक्षा कैमरे ने कैद किया था। जिससे हत्या पूरी तरह से योजनाबद्ध नजर आ रही है। रिपोर्ट में निज्जर की हत्या की घटनाओं में पंजाब और कनाडा दोनों जगहों पर सामूहिक हिंसा के मामलों में हत्या का एक समान पैटर्न देखा गया है। वाशिंगटन पोस्ट में अपने रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और घटना के वक्त आस-पास मौजूद लोगों के इंटरव्यू के आधार पर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। 

द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, निज्जर का ग्रे रंग का पिकअप ट्रक पार्किंग स्थल से बाहर निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। बगल में एक सफेद सेडान दिखाई देती है  वहीं आगे एक दूसरी कार भी नजर आती है। आरोपितों ने 2 कारों से निज्जर के पिकअप ट्रक का पीछा किया था। निज्जर ने जब अपने ट्रक की स्पीड बढ़ाई तो हत्यारों ने भी तेजी से उसका पीछा करना जारी रखा। थोड़ी देर में एक सिल्वर कलर की टोयोटा कैमरी कार ट्रक के सामने आ जाती है। इस पर निज्जर ने ट्रक रोक दिया। तुरंत ही कार से 2 लोग काली स्वेटशर्ट पहनकर बाहर निकले। उन्होंने निज्जर पर कई राउंड फायर किए और फिर कार में बैठकर फरार हो गए।

निज्जर को लगी 34 गोलियाँ 

रिपोर्ट में यह दावा है कि हत्यारों ने लगभग 50 गोलियाँ चलाईं थीं। इसमें से निज्जर को 34 गोलियाँ लगी। जब यह सब हुआ तब पास में ही गुरुद्वारे के स्वयंसेवक भूपिंदरजीत सिंह पार्क में फुटबॉल खेल रहे थे। पहले उसने पटाखों की आवाज सुनकर नजरअंदाज किया लेकिन जब काफी देर तक आवाजें आती रहीं तो उसे शक हुआ।

जैसे ही वह भागकर घटनास्थल पर पहुँचा और ट्रक में ड्राइवर साइड का दरवाजा खोला तो अंदर निज्जर खून से लथपथ नजर आया और इतनी ही देर में उसकी मौत हो चुकी थीं। 

हुडी पहने सिख गेटअप में भागते दिखे हत्यारे 

रिपोर्ट में घटना के दूसरे चश्मदीद और गुरुद्वारा समिति के सदस्य मलकीत सिंह ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि उसने दो काली हुडी पहने लोगों को भागते देखा। उन्होंने उनका पीछा भी किया। वे दोनों पार्क के बाहर एक पुलिया की ओर भागे और वहाँ मौजूद एक सिल्वर कार में बैठकर भाग गए। उस कार में पहले से ही 3-4 लोग मौजूद थे। मलकीत सिंह ने बताया कि गोली चलाने वाले दोनों हत्यारों ने छोटी पगड़ी जिसे पग कहा जाता है, वो पहनी थी। उसे हुड से ढका हुआ था। हत्यारों ने चेहरे पर भी काला मास्क लगाया हुआ था। 

20 मिनट में पहुँची पुलिस में भी जाँच को लेकर हुई बहस 

निज्जर की हत्या के गवाहों ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि सूचना देने के बाद कनाडा पुलिस को घटनास्थल पर आने में करीब 20 मिनट का समय लगा था। वहीं लोगों ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि पुलिस के पहुँचने में इतना समय लगना थोड़ा चौंकाने वाला था क्योंकि आमतौर पर पुलिस उस इलाके में ही गश्त करती रहती है।

कहा जा रहा है कि इसके बाद काफी देर तक सरे की पुलिस और रॉयल कनाडाई माउंटेड पुलिस (RCMP) में इस बात को लेकर विवाद होता रहा कि मामले की जाँच कौन करेगा। वहीं हत्या के करीब एक महीने बाद 21 जुलाई को अधिकारियों ने लोगों से आरोपितों की पहचान करने में मदद माँगी थी। इसके साथ ही कनाडा पपुलिस की जाँच को लेकर इस वजह से भी सवाल उठ रहे हैं कि हत्या के रास्ते में आने वाले मकानों और लोगों से किसी भी जाँच अधिकारी ने संपर्क नहीं किया और अपनी रिपोर्ट में सीधे निष्कर्ष तक पहुँच गई। 

वहीं इस मामले में निज्जर के बेटे ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि उसके पिता और सिख समुदाय के दूसरे लोगों को पहले से हमले की आशंका थी। इसी की वजह से निज्जर एक बुलेट प्रूफ कार लेना चाहता था। हालाँकि, ब्रिटिश कोलंबिया में इसकी इजाजत नहीं दी गई। 

आतंकियों का सुरक्षित पनाहगाह बना कनाडा 

गौरतलब है कि भारत के मोस्ट वांटेड इनामी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत पर आरोप लगाकर इंटरनेशल स्तर पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा कनाडा आतंकियों-गैंगस्टरों की सुरक्षित पनाहगार बना हुआ है। जहाँ पहले आतंकी-गैंगस्टर भारत में हमला करने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भागते थे, वहीं अब फर्जी दस्तावेजों के दम पर सीधे कनाडा भाग रहे हैं।

बता दें कि कनाडा में बैठे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों और गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार ने पिछले 10 सालों में 26 बार रिक्वेस्ट भेजी है, लेकिन कनाडा ने भारत की एक भी रिक्वेस्ट पर गौर नहीं किया। कनाडा की खालिस्तानियों की ही पार्टी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) से समर्थन प्राप्त जस्टिन ट्रूडो सरकार, खालिस्तानियों के प्रभाव में इतनी है कि उसने प्रत्यर्पण को लेकर भारत की एजेंसियों से चर्चा तक नहीं की।

‘दुनिया को बदलने में बड़ी भूमिका निभा रहा भारत, गुटबंदी नहीं बल्कि विश्व मित्र की पहचान’: UNGA में बोले विदेश मंत्री S जयशंकर – सुरक्षा परिषद का हो विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 78वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। उन्होंने मंगलवार (26 सितंबर, 2023) को यूएनजीए को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने वैश्विक तनाव के समय में जी-20 की अध्यक्षता सफलतापूर्वक की और महत्वपूर्ण बदलाव का नेतृत्व किया। जी-20 के नतीजे पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की कोशिशों से अफ्रीकी संघ इसका स्थायी सदस्य बन गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत अब गुटनिरपेक्षता से निकलकर विश्व मित्र की भूमिका में पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।

भारत ने शानदार तरीके से की जी-20 की मेजबानी

अपने संबोधन के दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट बुलाकर जी-20 की अध्यक्षता की शुरुआत की, यह मानते हुए कि वृद्धि और विकास को सबसे कमजोर लोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया असाधारण उथल-पुथल का दौर देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने असाधारण जिम्मेदारी की भावना के साथ G-20 की अध्यक्षता संभाली। हमने ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ का दृष्टिकोण अपनाया, जिसकी वजह से कुछ देशों के संकीर्ण हितों से हम बाहर निकले।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार से उसी का भला

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपना संबोधन ”भारत की ओर से नमस्ते!” के साथ शुरू किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार की माँग फिर से दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत की अगुवाई में हमने जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किया और अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार हो, ताकि वो प्रासंगिक बना रह सके।

गुटनिरपेक्षता से विश्व मित्र की पहचान

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत गुटनिरपेक्षता के युग से बाहर निकल कर “विश्व मित्र के युग” या दुनिया के मित्र के युग में बदल चुका है। भारत अपने तमाम साझेदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। अब हम गुटनिरपेक्षता के युग से आगे ‘विश्व मित्र – दुनिया के लिए एक मित्र’ के रूप में खुद को बदल चुके हैं।

दुनिया पर कोरोना से 20 गुना खतरनाक महामारी का साया: ‘Disease X’ को लेकर WHO की चेतावनी, वैज्ञानिक भी माथापच्ची में लगे

दुनिया पर कोविड-19 से भी 20 गुना अधिक घातक बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेताया है कि डिजीज एक्स (Disease X) को लेकर पहले से सावधानी नहीं बरती गई तो ये कहर बरपाएगी।

एक पुरानी कहावत है कि ‘रोकथाम इलाज से बेहतर है’ और ये डिज़ीज़ एक्स पर सटीक बैठती है। डिजीज एक्स इस बात का प्रतिनिधित्व करता है कि एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी एक रोगज़नक़ (Pathogen) की वजह से हो सकती है। हालाँकि, वर्तमान में इंसानों में बीमारी पैदा करने वाला ये रोगजनक अज्ञात है। आइए इसी खतरनाक बीमारी के बारे में यहाँ जानने की कोशिश करते हैं।

डिज़ीज़ X ने हिला दिया मेडिकल जगत को

कॉलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रिचर्ड हैचेट ने डिजीज एक्स के बारे में कहा, “यह साइंस फिक्शन की तरह लग सकता है, लेकिन डिजीज एक्स एक ऐसी चीज है जिसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए।”

उन बीमारियों की सूची में जिन्हें WHO अनुसंधान और विकास के मामले में सबसे अधिक प्राथमिकता देता है उन रोगों में डिजीज एक्स ने इबोला, जीका और कोरोनो वायरस 2019 (कोविड-19) जैसी बीमारियों के बीच अपनी जगह पक्की कर ली है। संक्रामक रोग (डिज़ीज़ एक्स) के अप्रत्याशित प्रकोप ने बार-बार चिकित्सा जगत के विश्वास को हिलाने के साथ ही हैरानी में डाल दिया है।

कुछ विशेषज्ञों ने यहाँ तक कहा है कि गंभीर सांस के रोग वाला कोरोना वायरस, वायरस-2 (SARS-CoV-2) की वजह से होने वाला COVID-19, पहली डिजीज X.4 के मानकों पर खरा उतरता है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये जीका डिजीज X.5 है। ऐसे में एक संभावना यह भी है कि COVID-19 और अन्य हालिया महामारियों में डिजीज X सबसे खतरनाक होने जा रही है।

तीन साल से अधिक की छोटी और बड़ी लहरों के साथ कोरोनो वायरस अब काफी कम हो गया है और एक जानी पहचानी सेहत संबंधी फिक्र वाली लिस्ट में आ गया है।

ऐसा माना जाता है कि डिजीज X “डिजीज X” की वजह से होता है। ऐसा रोगज़नक़ एक ज़ूनोसिस होने की उम्मीद है यानी ऐसी बीमारी जो जानवरों से इंसानों में फैल सकती है। सबसे अधिक संभावना इसके एक आरएनए वायरस होने की है।

आरएनए वायरस ऐसा वायरस होता है जिसके अनुवांशिक जीनोम का निर्माण आरएनए नाभिकीय अम्ल से हुआ हो। यह नाभिकीय अम्ल आमतौर पर एक रेशे में संगठित होता है।

यही वजह है कि आरएनए वायरस की उत्परिवर्तन दर (Mutation Rate) डीएनए वायरस के मुकाबले काफी अधिक होती है। जिसकी वजह से इसमें आनुवंशिक विविधता आ जाती है और इसके खिलाफ प्रभावी टीके का निर्माण करना काफी मुश्किल हो जाता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि कोरोना वायरस में आनुवंशिक तौर से एक “प्रूफरीडिंग मेकनिज़्म” (Proofreading Mechanism) पाया जाता है जो प्रतिकृति (Replication) के दौरान की गई कुछ गलतियों को ठीक कर म्यूटेट होता रहता है।

उभरते हुए ज़ूनोटिक रोगज़नक़ एक खतरा हैं जिनकी निगरानी करने की जरूरत है। इस महामारी रोगज़नक़ की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

डिज़ीज़ एक्स जैसे रोगज़नक़ों की रिलीज या तो प्रयोगशाला दुर्घटनाओं के जरिए से या जैव आतंकवाद के तौर पर विनाशकारी हो सकती है। इस वजह से भी डीजीज एक्स को एक वैश्विक विनाशकारी जोखिम के तौर पर मार्क किया गया है।

डीएनए वायरस में एक जीनोम होता है जो डीऑक्सीराइबोन्यक्लिक अम्ल से बना होता है। ये वायरस में आमतौर पर डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए (डीएसडीएनए) और शायद ही कभी सिंगल-स्ट्रैंडेड डीएनए (एसएसडीएनए) होता है। ये वायरस डीएनए-निर्भर डीएनए पोलीमरेज़ का इस्तेमाल करके कॉपी बनाते हैं।

यही वजह है कि अब, यूनाइटेड किंगडम में स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर संभावित नई महामारी ‘डिज़ीज़ एक्स’ के लिए तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये नया वायरस कोविड-19 से भी अधिक घातक हो सकता है और इसका असर स्पैनिश फ़्लू की तरह हो सकता है।

‘डिज़ीज़ एक्स’ क्या है?

डब्ल्यूएचओ ने संभावित अगली महामारी को डिजीज एक्स करार दिया और कहा कि ये पहले से ही फैलने की राह पर हो सकती है। साल 2020 में मई से दिसंबर तक यूके के वैक्सीन टास्कफोर्स की अध्यक्षता करने वाली स्वास्थ्य विशेषज्ञ केट बिंघम के मुताबिक, डिजीज एक्स में कोविड-19 के मुकाबले 20 गुना अधिक मौत (लगभग 50 मिलियन यानी 5 करोड़ मौत) की क्षमता हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा, “1918-19 फ्लू महामारी ने दुनिया भर में कम से कम 50 मिलियन लोगों की जान ले ली, जो प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तुलना में दोगुना है।”

बिंघम ने कहा, “दुनिया को बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान के लिए तैयार होना होगा और रिकॉर्ड समय में खुराक देनी होगी। कल्पना करें कि रोग एक्स इबोला (67 फीसदी) की मृत्यु दर के साथ खसरे जितना ही संक्रामक है। दुनिया में कहीं न कहीं ये रूप ले रहा रहा है और देर-सबेर इससे कोई न कोई बीमार महसूस करने लगेगा।”

बिंघम का कहना है कि मौजूदा वक्त में ‘डिज़ीज़ एक्स’ के लिए कोई स्वीकृत टीका नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा प्रत्येक खतरनाक वायरस परिवार के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप टीकों का एक संग्रह विकसित करने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि घातक वायरस के लिए टीकों पर एक शुरुआत ही इसकी विशिष्ट विशेषताओं को टारगेट करने में मदद कर सकती है।

केट ने उस खतरे के बारे में बात की जो करीब दस लाख अनदेखे वायरस इंसानों पर डाल सकते हैं। उनके के अनुसार, वैज्ञानिकों ने 25 वायरस परिवारों की पहचान की है, जिसमें हजारों व्यक्तिगत वायरस शामिल हैं जबकि लाखों अन्य वायरस अभी भी खोजे जाने बाकी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा कि इससे बचने के लिए उठाए जाने वाले शुरुआती कदमों में से एक जरूरी चीज वित्तीय संसाधनों का निर्धारण करना है।

उनका कहना था कि अगर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया तो इसकी मौद्रिक लागत भूकंप से होने वाले नुकसान के बराबर होगी। जब डिज़ीज़ एक्स से भी हल्का वायरस कोविड-19 अन्य नुकसानों के साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च दोनों में 16 डॉलर ट्रिलियन का बिल बैठाने में कामयाब रहा है तो डिज़ीज़ एक्स से होने वाला नुकसान उससे भी कई गुना अधिक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ केट बिंघम ने जानवरों से मनुष्यों में वायरस के फैलने पर भी प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया, “एक वायरस का पूरा उद्देश्य जितना संभव हो उतने मेजबानों में जितनी बार संभव हो अपनी कॉपी बनाना है। इसलिए वे लगातार म्यूटेशन कर रहे हैं और अलग-अलग जानवरों पर हमला कर रहे हैं। वास्तव में, कुछ सबसे खतरनाक वायरस – जैसे कि चेचक, खसरा, इबोला और एचआईवी जानवरों में उत्पन्न हुए और बाद में मनुष्यों के बीच अत्यधिक संक्रामक हो गए।”

क्यों बढ़ रही हैं महामारियाँ?

केट बताती हैं कि वैश्वीकरण के साथ शहरीकरण और प्रकृति का विनाश महामारी की बढ़ती घटनाओं में योगदान दे रहा है। वह इस बात पर जोर देती हैं कि वनों की कटाई, आधुनिक कृषि विधियों का उपयोग और आर्द्रभूमि का विनाश जानवरों से मनुष्यों में संक्रामक रोगों के फैलने के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि जानवरों के आवासों का नुकसान उनको मानव बस्तियों के करीब जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

करणवीर बना इंटरपोल का वॉन्टेड, पन्नू के खिलाफ डोजियर: खालिस्तानियों की कुंडली निकाल रही भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियाँ, ‘उर्दुस्तान’ बनाना चाहते हैं आतंकी

भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ ठोस काम कर रही हैं। इसी कड़ी में बबर खालसा इंटरनेशनल के दुर्दांत आतंकी करणवीर का नाम इंटरपोल की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कराया गया है, तो प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ के कथित मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू खिलाफ एक डोजियर तैयार किया गया है। इस डोजियर में उसके काले कारनामों को दर्ज किया गया है, जिसमें बताया गया है कि पन्नू के ऊपर 5 से अधिक राज्यों में 16 मामले दर्ज हैं, जिसमें से 9 मामले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं और उनमें उसे UAPA कानून के तहत आरोपित बनाया गया है।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पन्नू के खिलाफ भारत के विभिन्न राज्यों में 16 मामले दर्ज हैं, जो उसके भारत-विरोधी कामों की गंभीरता को दिखाता है। पन्नू के खिलाफ ये मामले दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में दर्ज हैं।

डोजियर में पन्नू के खतरनाक मंसूबों का खुलासा

इस डोजियर में बताया गया है कि पन्नू भारत को धार्मिक आधार पर कई टुकड़ों में बाँटना चाहता है। उसका मंसूबा सिर्फ खालिस्तान ही सीमित नहीं है, बल्कि वो ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ उर्दुस्तान‘ नाम से मुस्लिम देश भी भारत में बनाना चाहता है। उसकी कोशिश है कि वो कश्मीरियों को भारत के खिलाफ भड़काए और उन्हें भारत के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार करे। कुछ समय पहले ही जी-20 की मीटिंग के दौरान उसने कश्मीरियों से अपील की थी कि वो दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत अहम जगहों पर प्रदर्शन करें और प्रदर्शन करें।

अमृतसर का रहने वाला है पन्नू

गुरपतवंत सिंह पन्नू का जन्म अमृतसर में हुआ और उसने पंजाब यूनिवर्सिटी से ही कानून की डिग्री ली है। उसके पिता पंजाब की कंपनी में काम करते थे। पन्नू का एक भाई भी है, उसका नाम मगवंत सिंह है, वो भी विदेश में रहता है। वहीं, गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में एक कानूनी फर्म चलाता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका से ही ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) चलाता है, जो पंजाब को अलग खालिस्तान देश बनाने का मंसूबा पाले है। गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत सरकार आतंकवादी घोषित कर चुकी है और उसके संस्थान को भी प्रतिबंधित कर चुकी है।

बब्बर खालसा के आतंकी के खिलाफ इंटरपोल नोटिस

इस बीच, इंटरपोल ने खालिस्तानी आतंकवादी समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य करणवीर सिंह के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। रेड कॉर्नर नोटिस में इंटरपोल ने सदस्य देशों से उसकी खोज करने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब का रहने वाला करणवीर सिंह फिलहाल पाकिस्तान में छिपा हुआ माना जा रहा है। करणवीर सिंह को बब्बर खालसा संगठन के भीतर एक प्रमुख व्यक्ति माना जाता है, जो आतंकवादियों वाधवा सिंह और हरविंदर सिंह रिंदा के राइट हैंड के तौर पर काम करता है।

20 साल बाद वापस लौटी अनाथ राखी, 3 साल की उम्र में गोद लेकर अमेरिका ले गई थी चरसी महिला: देती थी यौन प्रताड़ना, फिर घर से निकाला

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से एक अमेरिकी महिला द्वारा प्रताड़ित अनाथ 20 वर्षों के बाद अपने शहर वापस लौटी है। पीड़िता को 2000 में एक अमेरिकी महिला ने लखनऊ के एक अनाथाश्रम से गोद लिया था। पीड़िता का नाम राखी है।

वह लखनऊ के चारबाग में अनाथ के रूप में मिली थी, जिसे एक अनाथाश्रम भेज दिया गया था। उस समय पीड़िता की आयु मात्र 3 वर्ष थी। वह दो वर्षों तक इसी अनाथाश्रम में रही। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, उसे 2 वर्षों के बाद अमेरिका के मिनिसोटा राज्य से आई एक महिला कैरोल ब्रांड ने गोद ले लिया। कैरोल ने राखी को फर्जी पहचान के सहारे गोद लिया था।

इसके पश्चात राखी का जीवन नरक बन गया। यह पता चला कि कैरोल ड्रग्स की आदी थी। उसने भारत से ले जाते ही राखी को प्रताड़नाएँ देना प्रारंभ कर दिया। राखी ने बताया कि उसे 12 वर्ष की आयु से ही अपना जीवन चलाने के लिए काम करना पड़ा। राखी को कैरोल के साथ रहने के लिए भी किराया देना पड़ता था जिसे वह दूसरों के बच्चों की देखभाल करके इकट्ठा करती थीं। 18 वर्ष की होने के पश्चात राखी को कैरोल ने घर से भी निकाल दिया जिसके कारण राखी को अपने विश्वविद्यालय में रहना पड़ा।

राखी ने ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को बताया, “कैरोल एक बीमा कम्पनी में जाँचकर्ता थी। उसने मुझे बचपन में मानसिक, शारीरिक और यौन प्रताड़नाएँ दीं। स्कूल में भी अन्य बच्चे कैरोल के स्वभाव के कारण मेरे पास नहीं आते थे और मुझे सभी दुखों को अकेले झेलना पड़ा।”

राखी ने बताया कि कैरोल के इस बर्ताव की शिकायत उसने उसकी बहन नैंसी से की लेकिन वहाँ भी उसे कोई मदद नहीं मिली। राखी ने अब अपना नाम बदल कर महोगनी एम्बर्काई (Mahogany Emberkai) कर लिया है। राखी ने कहा है कि कैरोल कभी भी बच्चों को गोद लेने के लायक नहीं थी परन्तु इसलिए उसने राखी को भारत से गोद लिया क्योंकि उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके घरवालों ने एक बच्चा गोद लेने को कहा था।

राखी को वर्ष 2016 में अपने गोद लिए जाने का पता चला जब कैरोल ने आत्महत्या की और उसके पश्चात राखी को एक कागज मिला जिसमें इस बात की जानकारी थी। राखी ने इसके पश्चात अपनी पढ़ाई पूरी की और वर्तमान में एक कैफे में मैनेजर हैं। वह लखनऊ अब अपने असली माता-पिता को ढूँढने आई हैं। राखी ने बताया है कि उन्होंने चारबाग पुलिस थाना और वह अनाथाश्रम भी गईं जहाँ से उसे गोद लिया गया था। हालाँकि, उन्हें अपने विषय में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

राखी अब लगातार सीमित सूचनाओं के सहारे अपनी जानकारी इकट्ठा करने में हुई हैं। राखी के साथ उसके एक फोटोग्राफर मित्र क्रिस्टोफ़र भी माता-पिता को ढूँढने में उसकी सहायता कर रहे हैं।

200 गाड़ियाँ फूँकी, 700 पर FIR: सपा विधायक और बसपा सांसद ने ‘गुर्जर महाकुंभ’ के नाम पर भड़काई हिंसा, MP में चुनाव से पहले बवाल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को गुर्जर महाकुंभ का आयोजन हुआ, जिसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा जैसे कई राज्यों से गुर्जर पहुँचे और अपनी माँगों को रखा। इन माँगों में प्रमुख माँग सम्राट मिहिरभोज की मूर्ति के आसपास लगी टिन शेड को हटाने की तो थी ही, भाजपा और कॉन्ग्रेस से जनसंख्या के अनुपात में टिकटों की माँग भी शामिल थी। शुरू में भले ही गुर्जर महाकुंभ राजनीतिक रहा हो, लेकिन कलेक्टरी में ज्ञापन देने के दौरान ये हिंसक हो गया। और भारी संख्या में वाहनों को जलाने के साथ तोड़-फोड़ की घटना भी सामने आई है।

करीब दो दर्जन बलवाई गिरफ्तार

वहीं उपद्रवी बन चुके गुर्जरों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। गुर्जरों ने करीब दो सौ गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया, अधिकांश गाड़ियों को फूँक देने की बात सामने आई है। अब एफआईआर दर्ज हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक हिंसा से जुड़े 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 5 एफआईआर में 20-25 नामजद लोगों के अलावा 700 अज्ञात लोगों के नाम जोड़े गए हैं। इन नामजद लोगों में कुछ नाम चौंकाने वाले हैं। जिसमें दिल्ली से सटे मेरठ के सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान और बिजनौर से बसपा के सांसद मलूक नागर जैसे नेताओं के भी नाम हैं।

बलबा करने और शासकीय कार्य में बाधा डालने का केस

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इन लोगों ने भड़काऊँ भाषण दिए और लोगों को हिंसा के लिए उकसाया। अब इनके नाम से एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। उल्लेखनीय बात ये है कि ये दोनों ही नेता दिल्ली के पास के हैं और विपक्षी दलों के हैं। इन लोगों ने अपने साथ गए समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया था। बताया जा रहा है कि इनके खिलाफ बलवा करने, शासकीय कार्य मे बाधा पहुँचाने जैसे मामलों में केस दर्ज हुए हैं।

सोमवार की शाम को जमकर हुआ बवाल

गौरतलब है कि सोमवार को गुर्जर महाकुंभ के बाद भीड़ ने कलेक्ट्रेट में हंगामा कर उपद्रव मचाया था। भीड़ ने पुलिस अफसरों से मारपीट कर पथराव किया। फूलबाग मैदान में आयोजित गुर्जर महाकुंभ में भड़काऊ भाषण के बाद दोपहर 1.30 बजे करीब 2000 युवा फूलबाग चौराहे पर आ गए और जबरदस्त हंगामा किया। इसके बाद शाम 4.30 बजे के लगभग गुर्जर युवाओं ने कलेक्ट्रेट में उपद्रव मचाया। हंगामे के दौरान शहर भर में 200 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, जिसमें अधिकारियों के साथ ही आम लोगों की संपत्तियों, गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।

हिंसा का चुनावी कनेक्शन?

गुर्जर महाकुंभ में हुई हिंसा को चुनावी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चूँकि, महाकुंभ के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान में गुर्जरों के लिए राजनीतिक पार्टियों से सीटों की माँग भी की गई। और ये महाकुंभ गुर्जरों की सियासी ताकत को दिखलाने के लिए भी थी। ऐसे में बसपा और सपा नेताओं का पहुँचना और भाजपा शासित राज्य में हिंसा का फैलना कहीं न कहीं चुनावी राजनीति की तरफ ही इशारा कर रहा है।

दुपट्टा खींचा, घसीट कर ले गए, चलती कार में गैंगरेप किया… यूपी पुलिस ने कयामुद्दीन, जहाँगीर और सिकंदर को दबोचा, सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था वीडियो

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में चलती कार के अंदर एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। मामले में कयामुद्दीन, जहाँगीर और सिकंदर को नामजद किया गया है। सोमवार (25 सितंबर, 2023) को तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपितों ने रेप चाकू की नोक पर किया। लापरवाही बरतने के आरोप में SHO सहित एक सब इंस्पेक्टर व एक महिला सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है।

चाकू की नोक पर किया गैंगरेप

यह मामला कुशीनगर जिले के थाना क्षेत्र कप्तानगंज का है। नाबालिग पीड़िता के पिता ने थाने में रविवार (24 सितंबर, 2023) को शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 9 सितंबर, 2023 को उनके ही गाँव के खुर्शीद के बेटे क्यामुद्दीन ने दोपहर 1:30 पर उनकी बेटी को घर के बगल किसी काम के बहाने बुलाया। जब पीड़िता वहाँ गई तो कयामुद्दीन चाकू निकाल कर पीड़िता को पास की एक झोपड़ी में ले गया। यहाँ उसने नाबालिग से बलात्कार किया। रेप के बाद कयामुद्दीन ने फिर से पीड़िता को चाकू का डर दिखाया और अपने साथ पास की हाटा बाजार ले गया।

शिकायत कॉपी

शिकायत में आगे बताया गया है कि हाटा में पहले से मौजूद जहाँगीर, सिकंदर व एक अन्य अज्ञात व्यक्ति ने पीड़िता का दुपट्टा खींचा। वो लड़की को जबरन घसीटते हुए एक कार में ले गए। चलती कार में उन सभी ने बारी-बारी से पीड़िता के साथ रेप किया। शिकायत में पीड़िता के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि वो 24 सितंबर से पहले भी 2 बार अलग-अलग मौकों पर इस घटना की शिकायत करने थाना कप्तानगंज गए थे लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता के पिता ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की थी। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

तीनों आरोपित गिरफ्तार

इस शिकायत पर पुलिस ने क्यामुद्दीन, सिकंदर अली और जहाँगीर के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया था। यह केस IPC की धारा 365, 442, 376 डी के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 सितंबर को तीनों नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। घटना में किसी अन्य की संलिप्तता सहित बाकी आरोपों पर पुलिस की जाँच अभी जारी है। बताते चलें कि पीड़ित और आरोपित पक्ष एक ही समुदाय से हैं।

3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

कुशीनगर जिले के पुलिस अधीक्षक IPS धवल जायसवाल ने पीड़िता की पहली 2 शिकायतों को अनदेखा करने के आरोप में सोमवार (25 सितंबर, 2023) को 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड होने वाले स्टाफ में SHO कप्तानगंज इंस्पेक्टर विनय कुमार सिंह, सब इंस्पेक्टर मंगेश मिश्रा और महिला कॉन्स्टेबल अंतिमा सिंह शामिल हैं। तीनों के खिलाफ जाँच सीनियर अधिकारियों को सौंपी गई है।

निलंबन का आदेश

सैलून और जनसेवा केंद्र चलाते हैं आरोपित

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में पीड़िता की बड़ी बहन से बात की। उन्होंने हमें बताया कि तीनों आरोपित उनके ही गाँव के हैं। इन सभी में सिकंदर अली सैलून चलाता है जबकि जहाँगीर जनसेवा केंद्र का संचालन करता है। क्यामुद्दीन को ही मुख्य आरोपित बताते हुए पीड़िता की बहन ने बताया कि वो कोई काम नहीं करता और दिन भर गाँव में घूम-घूम पर लफंगई करता रहा है। पीड़िता की बहन ने तीनों आरोपितों के खिलाफ शासन और प्रशासन से कठोर कार्रवाई करने की माँग की। हमसे यह भी दावा किया गया कि आरोपितों से उनकी कोई पुरानी रंजिश नहीं है।

अब पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट

पीड़िता के परिजनों ने पढ़ने के लिए कभी उन्हें स्कूल भी नहीं भेजा। हमसे बातचीत के दौरान पीड़िता की बहन ने आगे बताया कि उनको नहीं पता कि उनकी बहन की घटना के दौरान कार के अंदर की वीडियो किसने वायरल कर दी। उन्होंने कहा कि उनके मोबाइल में भी वो वीडियो आई है लेकिन उन्हें नहीं पता कि किसने इसे बनाया और किस ने वायरल किया। जिस कार के अंदर की यह वीडियो है वो किसकी है इसकी भी जानकारी पीड़ित परिजनों को नहीं है। हालाँकि, पीड़िता की बहन ने अब खुद को कुशीनगर पुलिस की चल रही कार्रवाई से संतुष्ट बताया।

प्रेमिका ने चबाया शादीशुदा बॉयफ्रेंड का गुप्तांग: कह रही थी – मेरी सहेली के साथ भी सेक्स करो, इनकार करने पर दोनों ने कर दिया हमला

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 2 सहेलियों ने मिल कर एक युवक के प्राइवेट पार्ट पर हमला कर दिया। आरोप है कि दोनों ने मिल कर युवक के गुप्तांग को चबा लिया जिस से पीड़ित घायल हो गया। हमले की वजह युवक द्वारा गर्लफ्रेंड की सहेली के साथ सेक्स करने से इनकार करना बताई जा रही है। युवक ने अस्पताल में अपना इलाज करवाया और फिर घर चला गया। मामले में अभी तक किसी भी पक्ष से पुलिस में शिकायत नहीं दी गई है। घटना रविवार (24 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र का है। यहाँ रौतापुर में लगभग डेढ़ साल पहले एक महिला शादी कर के आई थी। महिला का गाँव के ही रहने वाले एक शादीशुदा युवक से पहले परिचय हुआ जो बाद में अवैध संबंधों तक पहुँच गया। युवक का महिला के यहाँ आना-जाना भी शुरू हो गया। रविवार को एक बार फिर से युवक महिला के बुलाने पर उसके घर गया। महिला ने उस दिन अपनी सहेली को भी घर पर बुला रखा था। युवक ने अपनी प्रेमिका से सहेली की मौजूदगी में ही शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए।

बताया जा रहा है कि थोड़ी देर बाद महिला की सहेली ने भी युवक से अपने साथ सेक्स करने को कहा। युवक ने ऐसा करने से मना कर दिया। युवक की प्रेमिका भी उस पर अपनी सहेली के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने लगी। हालाँकि, बावजूद इसके युवक इनकार करता रहा। थोड़ी ही देर की बहस के बाद दोनों सहेलियाँ भड़क गईं। उन्होंने युवक पर हमला कर दिया। इस झगड़े के बीच दोनों में से किसी ने युवक का प्राइवेट पार्ट अपने दाँतों से चबा लिया। इस अप्रत्याशित घटना से घायल युवक दर्द से कराहने लगा।

घायल अवस्था में ही पीड़ित युवक अर्धनग्न हालत में घर पहुँचा। पत्नी ने चोट की वजह पूछी तो युवक ने सारी बात बता दी। पीड़ित की बीवी ने 112 नंबर डायल कर के पुलिस बुलाई। पुलिस ने घायल को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया। हालत ठीक न होने के चलते युवक को बेहतर इलाज के लिए हैलट अस्पताल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि हैलट में प्राथमिक चिकित्सा के बाद युवक अपने घर चला गया है।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि अभी तक घटना में पीड़ित की तरफ से कोई तहरीर नहीं मिली है। चौबेपुर थाने के इंस्पेक्टर संजय चौबे के अनुसार शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शिव मंदिर के सामने तीन मुस्लिम युवकों ने पढ़ी नमाज, गुजरात के विश्वविद्यालय की घटना: वीडियो वायरल

गुजरात के शहर वड़ोदरा के महाराजा सयाजी राव विश्वविद्यालय का एक वीडियो वायरल हो रहा है, वायरल वीडियो में तीन मुस्लिम युवक पैजामा-कुर्ता पहने नमाज पढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि, वीडियो वायरल होने के बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया है।

देशगुजरात के अनुसार, विश्वविद्यालय में बने शिव मंदिर के पास तीन युवकों का शाम को 4:45 मिनट पर नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल सामने आया है। यह मंदिर विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के पास बना हुआ है।

यह जानकारी सामने आई है कि नमाज पढ़ने वाले तीनों छात्र बी कॉम में पढ़ते हैं और पहले वर्ष के छात्र हैं। छात्र नेता संजय जायसवाल ने इस घटना को गंभीर बताकर इसकी भी आशंका जताई है कि यह पूरा वाकया प्रायोजित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नमाज मंदिर के सामने नहीं बल्कि मस्जिद में पढ़ी जानी चाहिए।

अब इस मामले में विश्वविद्यालय के प्रवक्ता का कहना है कि एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाकर इसकी जाँच की जाएगी। इस विश्वविद्यालय में नमाज को लेकर यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले जनवरी 2023 में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी जिसमें एक छात्र वनस्पति विज्ञान विभाग में नमाज पढ़ रहा था। शिवसेना नेता ने इस मामले की है।

इसके अतिरिक्त, 25-26 दिसम्बर को दो बार बाहरी छात्रों को यहाँ नमाज पढ़ते देखा गया था। एक घटना में एक युवक युवती के साथ नमाज पढ़ रहा था जबकि दूसरी घटना में दो युवक नमाज पढ़ रहे थे। तब इन युवकों को विश्वविद्यालय के छात्रों ने रोका था। इन मामलों में पुलिस में भी शिकायत दर्ज की गई थी।

10 महीनों के भीतर छात्रों के नमाज पढ़ने की यह चौथी घटना है। हालाँकि, इस बार छात्रों का नमाज पढ़ना तुंरत किसी के संज्ञान में नहीं आया। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

5 पुलिसकर्मी निलंबित, एस्कॉर्ट टीम से माँगा स्पष्टीकरण: मनीष कश्यप के वीडियो पर बिहार सरकार का एक्शन, कहा था – ‘चारा चोर का बेटा नहीं हूँ, नहीं झुकूँगा’

बिहार पुलिस ने 22 सितंबर को ‘सच तक न्यूज़’ यूट्यूब चैनल के संस्थापक मनीष कश्यप को राजधानी पटना में स्थित कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान मनीष ने मीडिया से बात की थी। इसको लेकर अब प्रशासन ने 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, मनीष कश्यप ने RJD सुप्रीमो लालू यादव और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह चारा चोर के बेटे नहीं हैं। इसलिए डरेंगे नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पटना SSP राजीव मिश्रा ने 5 पुलिसकर्मियों के सस्पेंशन की पुष्टि की है। साथ ही कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। साथ ही मनीष कश्यप को बेऊर जेल से कोर्ट लाने और ले जाने वाली एस्कॉर्ट टीम में शामिल पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण माँगा गया है। मनीष कश्यप का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस पर संज्ञान लिया है।

वहीं ‘आर्थिक अपराध शाखा’ के एडीजी नैयर हसनैन खान ने कहा कि जुडिसियल कस्टडी के दौरान मनीष कश्यप ने जो बातें कहीं थीं, उस पर पटना एसएसपी को जाँच करने के लिए कहा गया था।

क्या बोले थे मनीष कश्यप?

दरअसल 22 सितंबर, 2023 को मनीष कश्यप ने पटना कोर्ट के बाहर मीडिया से बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था, “फौजी का बेटा हूँ, चारा चोर का नहीं। मर जाऊँगा लेकिन मैं इन लोगों के सामने झुकूँगा नहीं।” इस दौरान मनीष कश्यप ने कहा था कि वो जेल से निकलने के बाद सरकार चला कर बताएँगे कि सरकार कैसे चलाई जाती है।

मनीष कश्यप ने अपनी हथकड़ी दिखाते हुए कहा था कि ये इस बार एक ईमानदार आदमी के हाथ में लगी है। उन्होंने कहा कि वो 6 महीने से कुछ नहीं बोल रहे, चुपचाप कोर्ट में आते हैं और चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वो नहीं डरेंगे। उन्होंने बताया कि उनके दादाजी ने चीन के खिलाफ युद्ध लड़ा था, उनके पिता ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने पूछा कि बिहार पुलिस के पास हिम्मत है उन लोगों के खिलाफ केस करने की जिन्होंने तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों को पीटा?

अपनी माँ से मिलते हुए मनीष कश्यप ने कहा था कि उनकी माँ रो रही हैं, लेकिन जब वह जेल से बाहर आएँगे तो दूसरों की माँओं के आँसू पोछेंगे। मनीष कश्यप बोले, “मैं इतने दिन से चुप हूँ। आज बोलूँगा। NSA से मैं डरने वाला नहीं हूँ। मैं नशा के विरोध में अभियान चलता हूँ, लेकिन जेल में पुलिस अधिकारी स्मैक, गाँजा और सिगरेट वगैरह पहुँचवाते हैं। कॉन्स्टेबल नहीं, ये स्टार वाले। वहाँ गाँजा-सिगरेट पीकर मेरे मुँह पर फूँक दिया जाता है। सुरक्षा का कोर्ट में कोई इंतजाम नहीं रहता है। पत्रकार की स्वतंत्रता की बात करने वाले नीतीश कुमार चेक कराएँ जेल में। 2 ग्राम स्मैक से सालों की सज़ा हो जाती है, लेकिन जेल में इतना स्मैक आता है और कुछ नहीं होता।”

उन्होंने यह भी कहा था अधिकतर कॉन्स्टेबल ईमानदार हैं और उन्हें निलंबित कर दिया जाता है, जबकि अधिकतर अधिकारी भ्रष्ट हैं और वो कार्रवाई से बच जाते हैं। बता दें कि तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए वीडियो बनाने के कारण मनीष कश्यप को गिरफ्तार कर तमिलनाडु पुलिस को सौंप दिया गया था, अब वो बिहार की जेल में बंद हैं। हाल ही में उनकी माँ ने पीड़ित मजदूरों से मिल कर उन्हें वित्तीय मदद भी दी थी।