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राबड़ी देवी का घर, बगल में बेटा तेजप्रताप और ‘लौंडा नाच’ देख रहे ‘बीमार लालू’… मंच पर लगे थे गाँधी-लोहिया-अंबेडकर के पोस्टर: आप भी देखिए Video

दिनांक: 19 सितंबर 2019, जगह: राबड़ी देवी-लालू प्रसाद यादव का पटना स्थित बंगला। बंगले के हॉल में शानदार सोफा-कुर्सियाँ। सामने मंच सजा है। मंच पर लगी हैं महात्मा गाँधी, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, लोहिया, जेपी, विनोबा भावे जैसे महापुरुषों की तस्वीरें और उस मंच पर चल रहा है लौंडा नाच। सामने बैठे हैं लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेज प्रताप यादव, आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी के अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अन्य छोटे-बड़े नेता और छुटभैये कार्यकर्ता।

लालू यादव की पसंद की कायल हुई मीडिया

मेडिकल ग्राउंड पर जेल से बाहर निकले लालू यादव के ‘राजसी’ ठाठ पर आरजेडी के कार्यकर्ता क्यों न मर-मिट जाएँ। हर तरफ वाह-वाह वाला माहौल है। मीडिया में शानदार कवरेज है। कई मीडिया वालों ने खबरें बनाई हैं। लालू यादव की ‘पसंद’ के लोग कायल हुए जा रहे हैं। हों भी क्यों न? लालू प्रसाद यादव बिहार के ‘लौंडा नाच’ का आयोजन जो करा रहे हैं। बगल में बेटा बैठा है, वो भी ‘लौंडा नाच’ का लुत्फ उठा रहा है। विधायक हों या पार्टी पदाधिकारी, सब लोटपोट हुए जा रहे हैं।

मीडिया में वाह-वाह, पुराने अंदाज वाले लालू की वापसी!

आजतक अपनी रिपोर्ट में लिखता है, “किडनी ट्रांसप्लांट के बाद स्वस्थ होने पर लालू यादव अपने पुराने अंदाज में दिख रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से उनको अलग-अलग अवतार में देखा जा रहा है। हाल ही में वो पटना के एक रेस्टोरेंट में राजस्थानी थाली का आनंद लेते दिखाई दिए थे। इससे पहले वो मुंबई के मरीन ड्राइव पर देखे गए। लालू पटना के बाहर कई मंदिरों में जाकर माथा भी टेक रहे हैं।” अब इस पर कुछ कहने की जरूरत ही क्या है, ये लालू प्रसाद यादव का अंदाज भी रहा है।

भाजपा ने बोला हमला

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता लिखते हैं, “ये बढ़िया राजनीति है… महात्मा गाँधी, बाबासाहेब अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया की तस्वीर लगाकर लौंडा नाच करवाइए और बेटे के साथ बैठकर देखिए… गाँधीजी और अंबेडकर जी आज होते तो शर्म से आँखें नीची कर लेते, लेकिन परिवारवादियों और भ्रष्टाचारियों के लिए ये सब ठीक काम है?”

उत्तर प्रदेश की भाजपा नेता रिचा राजपूत लिखती हैं, “लालू यादव के घर पर आयोजित हुआ भव्य लौंडा नाच सांस्कृतिक कार्यक्रम… सैफई महोत्सव से प्रेरित कार्यक्रम में अंबेडकर सहित कई महान हस्तियों की फोटो लगी हुई थी लालू जी राबड़ी के और तेज प्रताप यादव पूरा आनंद लेते हुए …”

लालू प्रसाद यादव के लौंडा नाच के आयोजन के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहे हैं। लोग भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। अजीत कुमार लिखते हैं, “लालू यादव का ये वीडियो 19 सितंबर 2023 का बताया जा रहा है। कहा जा रहा कि 19 सितंबर को राबड़ी आवास पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। फिलहाल ‘लौंडा डांस’ का आनंद लीजिए…”

पारंपरिक लोक नृत्य है लौंडा नाच

बिहार में लौंडा नाच एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो पुरुषों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में पुरुष कलाकार महिलाओं के कपड़े पहनते हैं और महिलाओं की तरह नाचते और गाते हैं। लौंडा नाच एक मनोरंजक और आकर्षक नृत्य है। यह नृत्य बिहार की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है।

लौंडा नाच बिहार में काफी मशहूर है। ये मुख्य रूप से बिहार के भोजपुरी क्षेत्र में लोकप्रिय है। यह नृत्य अक्सर त्योहारों और समारोहों के दौरान किया जाता है। लौंडा नाच के कई कलाकार हैं, जो इस नृत्य को पेशेवर रूप से करते हैं। हालाँकि इसका चलन अब तेजी से कम होता जा रहा है।

वैसे, लौंडा नाच को लेकर कुछ विवाद भी हैं। कुछ लोग इस नृत्य को अश्लील और अपमानजनक मानते हैं और कुछ लोग इसे लोक कला बताकर इसका प्रचार-प्रसार करते हैं। ज्यादातर लोग इस नृत्य को बिहार की एक अनूठी और समृद्ध संस्कृति का हिस्सा मानते हैं।

खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से हर सप्ताह दो बार मिलता था हरदीप सिंह निज्जर: खालिस्तानी आतंकी के बेटे का खुलासा, फर्जी पासपोर्ट पर आया फिर भी कनाडा ने दी नागरिकता

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जून 2023 में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर मढ़ा था। ट्रूडो ने निज्जर को कनाडाई नागरिक बताते हुए हत्या को कनाडा के आंतरिक मामलों में भारत का हस्तक्षेप बताया था। इसके कनाडा ने भारत के एक राजनयिक को भी कनाडा से निष्कासित कर दिया था। इसका भारत ने भी कड़ा जवाब दिया था।

इस प्रकरण के कारण भारत और कनाडा के राजनयिक सम्बन्ध खराब हो गए हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रूडो ने भारत और कनाडा के रिश्तों को एक ऐसे खालिस्तानी आतंकी के लिए ताक पर रख दिया, जिसके प्रत्यर्पण की माँग भारत लंबे समय से कर रहा था। अब निज्जर के बेटे ने कहा है कि उसका पिता सप्ताह में दो-तीन बार कनाडा की ख़ुफ़िया एजेंसियों के अधिकारियों से मिलता था।

दैनिक ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हरदीप सिंह निज्जर के पुत्र बलराज निज्जर ने यह भी स्वीकार किया है कि अपनी हत्या से एक-दो दिन पहले भी उसके पिता कनाडा की ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारियों से मिला था। बलराज ने बताया कि कनाडा की पुलिस ने निज्जर को चेताया था कि उसकी जान को खतरा है।

कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों का खालिस्तानी आतंकी निज्जर के साथ मिलकर काम करना दिखाता है कि कनाडा की सरकार भारत विरोधी तत्वों को शरण प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट हो रहा है कि कनाडा भारत के वांछित अपराधी की लगातार सेवा कर रहा था।

ये बात भी सामने आई है कि कनाडा ने निज्जर को नागरिकता तब दी थी, जब उसके विरुद्ध वर्ष 2014 में इन्टरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इस बात की पुष्टि कनाडा सरकार में मंत्री मार्क मिलर ने की है। मार्क मिलर ने ट्वीट करके यह करके जानकारी दी कि निज्जर को 3 मार्च 2015 में कनाडा की नागरिकता दी गई थी।

गौरतलब है कि निज्जर के विरुद्ध वर्ष नवम्बर 2014 में पहला रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दैनिक ट्रिब्यून ने यह जानकारी दी है कि यह रेड कॉर्नर नोटिस उसके विरुद्ध पटियाला में पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में जारी किया गया था।

निज्जर को नागरिकता दिए जाने के एक वर्ष बाद यानी साल 2016 में भी उसके विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दोनों ही मौकों पर कनाडा ने भारत को कोई सहयोग नहीं दिया और हरदीप निज्जर समेत अन्य खालिस्तानी आतंकियों को बचाता रहा।

हरदीप निज्जर का नाम वर्ष 2018 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा ट्रूडो को सौंपी गई सूची में भी था, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब जबकि उसकी हत्या बेनाम हत्यारों ने कर दी तो ट्रूडो भारत पर आरोप लगा रहे हैं।

निज्जर वर्ष 1997 में भारत से भाग कर कनाडा गया था। उसने इसके ‘रवि शर्मा’ नाम के एक फर्जी पासपोर्ट का उपयोग किया था। उसने कनाडा में पहुँच कर नागरिकता के लिए भी आवेदन किया था जो कि रद्द हो गया था।

निज्जर ने इसके रद्द होने के पश्चात एक कनाडाई महिला से शादी की थी, इसी महिला ने निज्जर को कनाडा आने में सहायता की थी। हालाँकि इस आधार पर उसकी नागरिकता रद्द कर दी गई थी। इसके पश्चात वह कनाडा में बिना नागरिकता के कई वर्षों तक रहा है।

कनाडा के मंत्री मार्क मिलर ने निज्जर को वर्ष 2015 में नागरिकता दिए जाने वाली बात को लेकर बाद में स्पष्टीकरण जारी किया है। मार्क मिलर ने अब एक ट्वीट में कहा है कि उनसे गलती से वर्ष 2015 की तारीख निकल गई, निज्जर को असल में नागरिकता 2007 में दी गई थी।

इन सब प्रकरणों से स्पष्ट है कि कनाडा भारत पर आरोप लगाकर अब स्वयं ही समस्या में फंस गया है। उसके ऊपर खालिस्तानियों को शरण देने, उन्हें कानूनी रूप से बचाने और भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित करने में सहायता करने के आरोप लगातार दृढ़ होते जा रहे हैं।

इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कनाडा को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि उसकी छवि आतंकियों, गैंगस्टर और चरमपंथियों की शरणस्थली के रूप में बन रही है।

रात ‘कुली’ एक ख्वाब में आया, आँख खुली तो बिल्ला पहन ‘बोझा’ उठाते पाया: बस 30 नंबर से चूक गए राहुल गाँधी; क्योंकि चच्चा अमिताभ ने बाँध लिया था 786

मैडम (इटली वाली) की कसम! मैं मधुशाला नहीं गया था। मैंने मधुपान भी नहीं किया। बस मधुशाला पढ़ते-पढ़ते आँख लग गई। सपनों में हरिवंश राय बच्चन के पुत्र अमिताभ ही अवतरित हो गए। वो भी ‘कुली’ वाले अंदाज में। कानों में गूँजने लगा उनका वह डॉयलॉग जो सलीम-जावेद ने लिखा था;

बाजू पर 786 का बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूँ, काम करता हूँ कुली का और नाम है इकबाल

अमिताभ से याद आ गए उनके दोस्त राजीव। वही राजीव जिनके 53 वर्षीय ‘युवा’ बेटे हैं राहुल गाँधी। खयाल आया कि अगर अमिताभ की जगह राहुल कुली होते तो उनके लिए सलीम-जावेद कुछ इस तरह डॉयलॉग लिखते;

बाजू पर 756 का बिल्ला, वायनाड का खाता हूँ, काम है परदेश में देश की बुराई करना और नाम है जननायक

लौंडो को स्वप्न में दोष होता है। मेरे सपनों में कैलेंडर बदलता है। सो मैं सोते-सोते ही जून, 2024 में पहुँच गया। पाया कि लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की बड़ी जीत के बाद नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं। भाजपा की जीत की आँधी में विपक्ष के बड़े-बड़े दिग्गज चुनाव हार चुके हैं। क्या कॉन्ग्रेस, क्या TMC, क्या सपा, बसपा, AAP और डीएमके सभी को मुँह की खानी पड़ी है।

पत्रकार होने के नाते शपथ ग्रहण समारोह कवर करने के लिए मुझे अचानक ट्रेन से दिल्ली के निकलना पड़ रहा है। अल सुबह मेरी ट्रेन आनंद विहार स्टेशन पहुँच चुकी है और मैं कुली की तलाश कर रहा हूँ। सैकड़ों की तादात में मौजूद कुली यात्रियों से सामान उठाने के लिए बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान सफेद कुर्ता और पायजामा पहने कुछ लोग झुंड बनाकर एक कुली को घेर कर खड़े हैं। ‘कॉन्ग्रेस जिंदाबाद…राहुल गाँधी जिंदाबाद…’ जैसे नारे गूँज रहे होते हैं।

मुझे लगा कि कॉन्ग्रेस का कोई बड़ा नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने आया होगा। इसलिए उनके समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं। यह मेरे लिए भी अच्छे मौके की तरह था। शपथ ग्रहण समारोह कवर करने आया था और विपक्ष के बड़े नेता का बयान भी मिल जाए, इससे बेहतर क्या ही हो सकता है। मैंने फट से माइक निकाला और मोबाइल का कैमरा चालू कर चल दिया भीड़ की ओर…।

हाथ में कॉन्ग्रेस का झंडा लिए कई खलिहर अब भी एक कुली को घेरे खड़े थे। कुछ अति खलिहर उसके साथ सेल्फी ले रहे थे। करीब पहुँचते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। ये कुली सिर्फ एक कुली नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस के ‘चिर युवा’ राहुल गाँधी थे। काला पैंट, दाग-धब्बे लगी हुई सफेद टीशर्ट और उस पर कुली की पहचान बताती लाल शर्ट पहने राहुल एक सूटकेस पर बैठे हुए थे।

राहुल गाँधी अपने चिर परिचित अंदाज में कॉन्ग्रेस समर्थकों के बीच अडानी और अंबानी को कोस रहे थे। लोकतंत्र पर हमला, संविधान बदलने की कोशिश और चीन ने जमीन हड़प ली जैसे वाक्यों का बार-बार दौरा पड़ रहा था। सीधे शब्दों में कहूँ तो राहुल के शब्द और लहजा पुराना था। बस कपड़े दूसरे थे।

मैं मन ही मन राहुल की इस स्थिति के लिए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहरा रहा था। तभी पिताजी की जोरदार लात से मेरी नींद खुल जाती है। पिताजी जोरदार फटकार लगाते हुए कहते हैं, “रे नालायक घड़ी देखी 11 बज गए हैं। अब भी सोता ही रहेगा, उठा जा।” विपक्षी पार्टी के बड़े नेता का बयान लेने का मेरा सपना, असल में स्वप्न दोष निकला, क्योंकि घर के कैलेंडर में भी तारीख 21 सितंबर 2023 की थी।

मायूस हो टीवी ऑन किया। अरे ये क्या! क्या टीवी वाले भी स्वप्न दोष में चल रहे हैं!! ये क्या देख लिया रे बाबा!!! थोबड़े पर झट से एक मग पानी डाला। आँखें चियार कर टीवी पर देखा। टीवी पर तो सपना ही हकीकत था। राहुल गाँधी कुली बने हुए थे। सोशल मीडिया पर भी उनकी सिर पर ट्रॉली बैग उठाए फोटो वायरल थी। चक्के वाली वही ट्रॉली जो हम खींचकर ले जाते हैं, राहुल ‘बोझे’ की तरह उठाकर चल रहे थे।

बोझ उठाए राहुल की चाल कोई ‘कुली नंबर वन’ वाली नहीं थी। यह हर उस कॉन्ग्रेसी की चाल थी जो 2014 से ‘राहुल बोझा’ उठाकर चल रहे हैं। जिनके स्वप्न में हर रात दोष आता है और वे लाल किले से राहुल को देश को संबोधित करते दिखते हैं। काश चच्चा अमिताभ ने 786 वाला बिल्ला न बाँधा होता… आज भतीजे की बाँह पर 756 नहीं होता। यह केवल 30 नंबर से चूकना नहीं है। यह 2024 में कॉन्ग्रेस के गिरकर 30 पर आने के लक्षण तो नहीं!

ST का दर्जा क्यों माँग रहे हैं झारखंड-ओडिशा-पश्चिम बंगाल के कुड़मी, अंग्रेजों ने पहले रखा-फिर हटाया; स्वतंत्र भारत में भी नहीं हुई सुनवाई: जानिए बिहार के कुर्मी कैसे हैं अलग

झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुड़मी समाज के लोग खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग (ST) में शामिल करने की माँग कर रहे हैं। इसके लिए कुड़मी समुदाय के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने 20 सितंबर 2023 को प्रस्तावित रहे ‘रेल रोको अभियान’ को असंवैधानिक बताते हुए प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। वहीं झारखंड-ओडिशा में इस आंदोलन से 150 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित हुईं।

हालाँकि, ओडिशा और झारखंड में ‘रेल टेका, डहर छेका (रेल रोको-रास्ता रोको)’ आंदोलन का असर खूब दिखा। अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद आंदोलन को दो घंटे में खत्म कर दिया गया। बातचीत के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि इसको लेकर सरकार 25 सितंबर को उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसमें आगे का रास्ता निकाला जाएगा।

वहीं, प्रदर्शकारियों ने चेतावनी दी है कि 25 सितंबर को होने वाली बैठक में अगर कोई रास्ता नहीं निकला तो कुड़मी समुदाय पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेगा। अब सवाल ये उठता है कि आखिर कुड़मी समुदाय ये आंदोलन कर क्यों रहा है? किस आधार पर ये खुद को ST समुदाय में शामिल करने की माँग कर रहे हैं। अब तक सरकारों का इस माँग पर क्या रुख रहा है।

आखिर क्यों आंदोलनरत हैं कुड़मी समुदाय के लोग

झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुड़मी समाज की अच्छी खासी आबादी है। कुड़मी समाज का कहना है कि वो झारखंड के मूलनिवासी हैं और यहाँ इनकी आबादी करीब 22 प्रतिशत है। झारखंड में करीब 32 विधानसभा और 6 लोकसभा सीटों पर इनकी आबादी निर्णायक भूमिका में है।

मौजूदा समय में दो लोकसभा सांसद और कम-से-कम 10 विधायक कुड़मी समुदाय से हैं। कुड़मी समुदाय की माँग है कि उनकी अपनी भाषा कुरमाली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय में जो गलतियाँ की गईं, उन्हें जल्द से जल्द सुधारा जाए।

पंडित नेहरू के समय में क्या गलतियाँ हुईं?

देश की आजादी के मिलने के बाद स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना साल 1951 में हुई थी। उस जनगणना में कुड़मी को अनुसूचित जनजाति के दायरे से बाहर रखा गया था। वहीं, झारखंड की 13 में से 12 जातियों को इस वर्ग में शामिल किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि जवाहरलाल नेहरू से जब इस बात की शिकायत की गई तो उन्होंने कहा था कि ये महज एक गलती है और इसे आगे सुधार लिया जाएगा। हालाँकि, ऐसा नहीं हो सका। तब से ही कुड़मी समाज के लोग इस भूल को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

अभी ओबीसी में शामिल, बिहार के कुर्मी-कुनबी से अलग

झारखंड का कुड़मी समाज खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का मानता है। उसकी परंपरा-बोली सब कुछ बिहार के कुर्मी एवं कोयरी (कुनबी) समाज से अलग है। खुद को द्रविड़ियन बताने वाले कुड़मी कहते हैं कि अंग्रेजों के समय में अंग्रेजी की स्पेलिंग एक KURMI होने की वजह से ये गलफहमी शुरू हुई थी।

झारखंड का ये इलाका छोटा नागपुर के पठारों पर बसा है और अंग्रेजों के समय में ये कोलकाता प्रेसीडेंसी का हिस्सा यानि बंगाल का हिस्सा था, जिसे बाद में बिहार से जोड़ दिया गया। झारखंड का हिस्सा दक्षिणी बिहार हो गया। वहाँ अनुसूचित जनजाति की संस्कृति से जुड़े समुदाय बहुलता में हैं, तो उत्तरी बिहार में आर्यन जातियाँ बहुमत में रहीं।

बिहार का हिस्सा होने की वजह से झारखंड के मूल निवासियों की आवाज दबी ही रही। हालाँकि, अंग्रेजों के बिहार में कुर्मी-कुनबी गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वाली खेतिहर जातियाँ थी, तो कुड़मी (महतो, महन्ता, मोहंत उपनाम वाले) खुद को अनुसूचित जनजाति बताते हैं।

अंग्रेजों के समय कभी आदिवासी, कभी गैर आदिवासी

कुड़मी समाज के लोग टोटेमवाद का पालन करते हैं। ऐसे में वो खुद को द्रविड़ कहते हैं। उनका कहना है कि हर्बर्ट होप रिस्ले द्वारा लिखित पुस्तक ‘द ट्राइब्स एंड कास्ट्स ऑफ बंगाल’ (1891) में भी इस बात का जिक्र है। वहीं, साल 1913 में अंग्रेज सरकार ने कुड़मियों को अनुसूचित जनजाति माना था।

हालाँकि, अंग्रेजों ने इसमें एक वर्गीकरण भी कर दिया था कि कुड़मी समाज पहले से इस लिस्ट में शामिल नहीं था। साल 1931 तक उनकी पहचान अनुसूचित जनजाति से हटा दी गई थी। इसके बाद 1951 की जनगणना में भी जारी रही। इस बात का जिक्र ऊपर किया जा चुका है।

अन्य आदिवासियों के साथ समानता

जनजातीय समुदाय की सबसे बड़ी पहचान है उनका प्रकृति पूजक होना। इसे टोटेमिक व्यवस्था कहते हैं। दुनिया की हरेक जनजाति समुदाय की पहचान उनके टोटम से होती है। कुड़मी जनजाति में काड़ुआर, हिंदइआर, बंसरिआर, काछुआर, केटिआर, डुमरिआर, केसरिआर, बानुआर, पुनअरिआर, डुंगरिआर जैसी 81 मूल टोटेम है, इसके अलावा सब-टोटम को मिलाकर कुल 120 टोटम होते हैं। हरेक टोटम की अलग पहचान और प्रतीक चिन्ह होता है।

यही नहीं, इनकी सामाजिक व्यवस्था भी अन्य जनजातीय लोगों की तरह ही होती है, जिसमें गाँव के मुखिया को महतो और परगना के मुखिया को परगनैत जैसी पहचान दी जाती है। यही लोग आपसी विवादों का निपटारा भी करते हैं। इसी तरह संथाल, मुंडा, उरांव की तरह उनकी खुद की स्वायत्त भाषा है, जिसे कुड़माली कहा जाता है। इस समुदाय की शादी विवाह की व्यवस्था भी बिहार के कुर्मियों-कुनबियों जैसी नहीं, बल्कि जनजातियों जैसी है।

कुड़मियों की माँग पर राजनीतिक दलों का रूख क्या है?

झारखंड में करीब 20 फीसदी की आबादी वाले कुड़मियों को नजरअंदाज करने की हिम्मत किसी भी राजनीतिक दल में नहीं है। हालाँकि, भाजपा की सरकारों में इस बारे में गंभीर प्रयास किए गए। अर्जुन मुंडा अभी आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्र सरकार को साल 2004 में प्रस्ताव भेजा था, जिसे उस समय केंद्र की यूपीए सरकार ने ठुकरा दिया था। इसके अलावा भी कई बार सांसदों, विधायकों ने अपनी माँग प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से की है।

झारखंड में रघुवर दास की अगुवाई वाली भाजपा सरकार में भी कुड़मियों को उनका हक दिलाने के लिए कुछ कदम उठाए गए थे। इसका विपक्ष के विधायकों ने भी साथ दिया था। इसके अलावा, इस मामले में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के राँची दौरे के समय उन्हें ज्ञापन भी सौंपा गया था। सत्ता पक्ष हों या विपक्ष, सभी एक सुर में कुड़मियों के साथ खड़े होने की बात करते हैं, लेकिन गंभीर प्रयास होते नहीं दिख रहे हैं।

25 सितंबर को बात नहीं बनी तो यलगार होगा!

कुड़मी समाज के लोगों का कहना है कि अर्जुन मुंडा अब केंद्रीय मंत्री हैं तो भी ये माँग पूरी नहीं की जा रही है, क्योंकि ट्राइबल्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट उनके खिलाफ आ जाती है। साल 2015 में मोदी सरकार ने इसी रिपोर्ट के आधार पर झारखंड सरकार की माँग को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, पिछले दिनों जब भोगता और पुरान जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने के लिए सदन में संविधान संशोधन बिल पेश किया गया तो कुड़मी समुदाय में भी उम्मीद की किरण जगी थी। उन्हें लगा था कि उनकी बातें भी सुनी जाएँगी। हालाँकि, उनकी माँगों को सही जगह रखा ही नहीं गया।

अब कुड़मी आंदोलन के नेताओं ने कहा कि 25 सितंबर को राँची में अगर उनकी माँगों पर सही फैसला नहीं हुआ तो कुड़मी समुदाय के लोग अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि उन्हें और उनके आंदोलन को कमजोर न समझा जाए। उनका जो हक है, वो दिया जाए।

‘पन्नू की धमकी के बाद कनाडा में डरे हुए हैं हिंदू’: जस्टिन ट्रूडो पर अपनी ही पार्टी के MP बरसे, पूछा- आतंकवाद का महिमामंडन क्यों

भारत पर आरोप लगाने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चौतरफा घिर गए हैं। एक तरह सहयोगी देशों ने उनसे पल्ला झाड़ लिया है। दूसरी तरफ कनाडा के विपक्ष के नेताओं के बाद अब वे अपनी ही लिबरल पार्टी के नेता के निशाने पर भी आ गए हैं। कनाडा की लिबरल पार्टी के सांसद चंद्र आर्य ने कहा है कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की धमकी के बाद हिंदू भयभीत हैं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री ट्रूडो से पूछा है कि आतंकवाद के महिमामंडन की इजाजत कैसे दी गई है।

आर्य ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में कहा है कि पन्नू ने कनाडा में रहने वाले हिंदुओं को भारत वापस जाने की धमकी दी थी। इसके बाद से कई कनाडाई हिंदुओं से उन्होंने डरे हुए होने की बात सुनी है। सांसद आर्य ने हिंदू समुदाय से शांत और सर्तक रहने की अपील भी की है।

हिंदू-कनाडाई हैं खौफ में

सांसद चंद्र आर्य ने कहा है, “कुछ दिन पहले कनाडा में खालिस्तानी आतंकी और कथित जनमत संग्रह का आयोजन करने वाले सिख फॉर जस्टिस के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हिंदू-कनाडाई लोगों पर हमले की धमकी दी। उन्हें कनाडा छोड़कर भारत वापस जाने के लिए कहा।”

उन्होंने कहा, “मैंने कई हिंदू-कनाडाई लोगों से सुना है जो इस धमकी के बाद से भयभीत हैं। मैं हिंदू-कनाडाई लोगों से शांत, लेकिन सतर्क रहने का आग्रह करता हूँ। कृपया हिंदूफोबिया की किसी भी घटना की सूचना स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें।”

एमपी आर्य ने कहा कि खालिस्तानियों के सरगना कनाडा में हिंदू-कनाडाई लोगों को प्रतिक्रिया देने और हिंदू और सिख समुदायों को बाँटने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं साफ तौर पर कहता हूँ कि हमारे अधिकांश कनाडाई सिख भाई-बहन खालिस्तान का समर्थन नहीं करते हैं। अधिकांश सिख कनाडाई कई कारणों से खालिस्तान की सार्वजनिक तौर से निंदा नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे हिंदू-कनाडाई समुदाय से गहराई से जुड़े हुए हैं।”

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कनाडाई हिंदू और सिख पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक और सांस्कृतिक साझेदारी के तहत एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

पीएम जस्टिन ट्रूडो पर भी उठाया सवाल

लिबरल पार्टी के एमपी आर्य ने अपने ही प्रधानमंत्री ट्रूडो के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहा, “कनाडा में उच्च नैतिक मूल्य हैं और हम पूरी तरह से कानून के शासन का समर्थन करते हैं। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवाद का महिमामंडन या किसी धार्मिक समूह को निशाना बनाकर किए जाने वाले घिनौने अपराध की मंजूरी कैसे दी जाती है।”

उन्होंने कहा कि हिंदू-विरोधी तत्व हिंदू-कनाडाई लोगों की कामयाबी को पचा नहीं पा रहे हैं। दो सुसंगठित समूह जो अपने धर्मों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं वे हिंदू-कनाडाई समुदाय के नेताओं, हिंदू संगठनों और यहाँ तक कि उन पर भी हमला कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 10 महीने से अधिक वक्त से उन पर केवल इसलिए हमले किए जा रहे हैं कि संसद भवन पर उन्होंने पवित्र हिंदू धार्मिक प्रतीक ओम् के साथ झंडा फहराया था।

मुस्लिम महिला ने ‘बिस्मिल्लाह’ कह खाया सुअर का मांस, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा: टिकटॉकर की हरकत से भड़क गए थे इंडोनेशिया के कट्टरपंथी, 20 लाख हैं फॉलोअर

इंडोनेशिया की एक अदालत ने टिकटॉक इन्फ्लुएंसर को सुअर का मांस खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहने पर 2 वर्ष की सजा सुनाई है। इन्फ्लुएंसर का नाम लीना मुखर्जी उर्फ लीना लुत्फियावती है। लीना के टिकटॉक पर 20 लाख से अधिक फॉलोवर हैं।

लीना लुत्फियावती को ईशनिंदा के आरोप में यह सजा सुनाई गई है। वह हिंसा भड़काने की दोषी पाई गई हैं। दरअसल, लीना ने टिकटॉक पर एक वीडियो डाला था, जिसमें वह ‘क्रिस्पी स्किन पोर्क’ खाने से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ कहा।

इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल राष्ट्र है, जहाँ सुअर का मांस खाने पर प्रतिबंध है। मुस्लिम धर्म मानने वाली लीना का यह वीडियो इस साल मार्च में वायरल हुआ था। इसके बाद इस पर बखेड़ा खड़ा हो गया। बिस्मिल्लाह अरबी का शब्द है, जिसका अर्थ ‘अल्लाह के नाम पर’ होता है।

लीना ने अपना नाम बॉलीवुड से प्रभावित होकर लीना मुखर्जी रख लिया था। वह भारत में अपना व्यापार भी करती हैं। इसके अतिरिक्त वह लगातार अलग अलग जगह पर घूमते हुए विडियो भी डालती हैं। बताया जा रहा है कि उनकी यह वीडियो इंडोनेशिया के बाली का है।

लीना को मई में इंडोनेशिया की एक अदालत ने घृणापूर्ण जानकारी फैलाने का दोषी माना था। कोर्ट ने कहा कि यह धर्म, जातीय समूह और नस्ल के प्रति घृणा का कार्य है। लीना की इस वीडियो को लेकर इंडोनेशिया के कट्टरपंथी मुस्लिमों ने खूब शोर मचाया था।

कोर्ट ने लीना को 2 वर्ष की सजा के साथ ही 250 मिलियन रुपियाह ($16,245 डॉलर अथवा 13.48 लाख रुपए) का जुर्माना भी लगाया है। यदि लीना यह जुर्माना नहीं भर्ती हैं तो उन्हें तीन महीने अतिरिक्त जेल भी काटनी पड़ेगी।

इंडोनेशिया में बीते कुछ वर्षों में इस्लामी कानून लगातार सख्त हो रहे हैं। बीते वर्ष इंडोनेशिया में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों पर आरोप था कि होलीविंग्स नाम के एक बार में मोहम्मद नाम के आदमी को मुफ्त शराब देने का प्रचार किया था। बताते चलें कि सुअर की तरह शराब भी इस्लाम में हराम है।

इंडोनेशिया में सामान्य व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों को भी ईशनिंदा का दोषी ठहराया गया है। वर्ष 2017 में इंडोनेशिया के जकार्ता के ईसाई गवर्नर बासुकी पूर्णमा को ईशनिंदा का दोषी पाते हुए 2 वर्ष की सजा सुनाई थी।

सलामत अंसारी ने चॉकलेट का लालच दे 6 साल की बच्ची से रेप किया, फिर मारकर बाल्टी में डाल दिया: महाराष्ट्र की घटना, बिहार से पकड़ा गया

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में 6 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या करने का आरोपित सलामत अली अंसारी पकड़ा गया है। उसे बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार किया गया है। 32 साल के सलामत को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने रिमांड पर लिया है। मुंबई पुलिस ने 20 सितंबर 2023 को यह जानकारी दी।

बच्ची का शव अंसारी के भिवंडी स्थित कमरे में एक बाल्टी में रखा मिला था। रिपोर्टों के अनुसार उसने चॉकलेट का लालच देकर बच्ची से रेप किया। फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद से अंसारी फरार था।

कपड़ों-सैंडल से हुई थी बच्ची की पहचान

13 सितंबर को कामतघर के फेनेगांव की छह साल की लड़की लापता हो गई थी। उसके माता-पिता ने 14 सितंबर को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था। बच्ची की तलाश में पुलिस की तीन टीम बनाई गई। तलाशी अभियान के दौरान एक स्थानीय निवासी ने पुलिस को एक बंद कमरे से दुर्गंध आने की सूचना दी। कमरे का ताल तोड़ जब पुलिस दाखिल हुई थी बाल्टी में लाश मिली।

पुलिस के मुताबिक, मृतक बच्ची की पहचान उसके कपड़े और सैंडल से की गई थी। पंचनामा पूरा करने के बाद बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए जेजे अस्पताल भेज दिया गया। रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि हुई। इस आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 376 (बलात्कार) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से संबंधित धारा 4, 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया।

भिवंडी नौकरी के लिए आया था सलामत अंसारी

भिवंडी के डीसीपी नवनाथ धवले ने बताया कि जिस कमरे में लाश मिली थी वह किराए पर लिया गया था। सलामत अंसारी यहां डेढ़ महीने से रह रहा था। वह मजदूरी करता था। लेकिन घटना के बाद से फरार था। उसकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम बिहार भेजी गई। इस टीम ने स्थानीय मुखबिरों की मदद से घर-घर सर्वेक्षण किया और सलामत अंसारी को पकड़ने में सफलता पाई।

डीसीपी धवले के मुताबिक, “अंसारी को मंगलवार (19 सितंबर) को भिवंडी लाया गया। पूछताछ के दौरान बच्ची को चॉकलेट देने के अपने कमरे पर ले जाने और उसका यौन उत्पीड़न करने का खुलासा किया। उसने बताया कि गला दबाकर हत्या करने के बाद बच्ची की लाश बाल्टी में डाल दी और मौके से भाग गया।”

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जाँच में ये भी सामने आया कि अंसारी शादीशुदा था और उसके दो बच्चे हैं। वह हाल ही में भिवंडी नौकरी के लिए आया था और मृतक बच्ची के कमरे के पीछे कामतघर के फेनेगांव की चॉल में रहने लगा था। वो कमरे में अकेला रहता था।

3 इडियट्स के लाइब्रेरियन दुबे का निधन, गिरने से हुई मौत; बोलीं पत्नी सुजैन- जीवनसाथी के जाने से मेरा दिल टूट गया

आमिर खान स्टारर फिल्म 3 इडियट्स में लाइब्रेरियन का किरदार निभाने वाले अभिनेता अखिल मिश्रा का निधन हो गया है। वह 58 वर्ष के थे। उनकी मौत की वजह एक्सीडेंट बताया जा रहा है। अखिल के निधन पर उनकी पत्नी सुजैन बर्नर्ट ने कहा कि जीवनसाथी के जाने से वह टूट गई हैं।

अखिल मिश्रा के निधन को लेकर अब तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि वे हैदराबाद में एक प्रोजेक्ट की शूटिंग कर रहे थे। इसी दौरान बिल्डिंग से गिर गए थे। वहीं, कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि किचन में पैर फिसलने से वह गिर गए। इससे उनका निधन हुआ है। 

हादसे के समय उनकी पत्नी सुजैन बर्नर्ट हैदराबाद में शूटिंग कर रहीं थीं। घटना की जानकारी मिलते ही वह अपने घर लौट आईं। पति के निधन की खबर सुजैन के लिए बहुत बड़ा झटका है। सुजैन ने कहा, “मेरा जीवनसाथी चला गया है। इससे मेरी दिल टूट गया है।” अखिल के शव को फिलहाल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद उनकी मौत के कारण की पुष्टि हो जाएगी।

अखिल मिश्रा को छोटे और बड़े पर्दे में काम करने का लंबा अनुभव था। उन्होंने ‘भँवर’, ‘उतरन’, ‘उड़ान’, ‘सीआईडी’, ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘भारत एक खोज’ जैसे कई सीरियल्स में काम किया था। इसके अलावा, फिल्मों में उन्होंने ‘डॉन अब्बा’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसीं’ और ‘3 इडियट्स’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था। अखिल मिश्रा ने ‘3 इडियट्स’ में लाइब्रेरियन दुबे का किरदार निभाया था। इस किरदार ने उन्हें काफी लोकप्रियता दी थी।

बता दें कि अखिल मिश्रा की पत्नी सुजैन बर्नर्ट भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हुई हैं। ‘कर्म और ‘दिल दीवाना’ जैसी फिल्मों में अखिल और सुजैन ने साथ काम किया था। सुजैन अखिल मिश्रा की दूसरी पत्नी हैं। उन्होंने साल 2009 में अखिल से शादी की थी। अखिल की पहली पत्नी मंजू मिश्रा थीं। साल 1983 में शादी के बाद साल 1997 में तलाक हो गया था।

G20 में भी जस्टिन ट्रूडो ने दिखाए थे नखरे, प्रेसिडेंशियल सुइट में रहने से कर दिया था इनकार: विमान में छेड़छाड़ की बात से कनाडा के रक्षा मंत्री पलटे

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सुरक्षा टीम ने 9-10 सितम्बर के बीच नई दिल्ली में हुई G-20 बैठक के दौरान होटल को लेकर खूब ड्रामा किया था। एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि उनके लिए प्रेसिडेंशियल सुइट का प्रबंध किया गया था, लेकिन उनकी सुरक्षा टीम ने प्रधानमंत्री को साधारण होटल कमरे में रुकवाया।

इस बात का दावा अंग्रेजी समाचार वेबसाइट टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट में किया गया है। TOI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है गया है कि ट्रूडो के लिए दिल्ली के होटल ललित में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रबंध किया था। उनके रुकने के कमरों में बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने समेत तमाम सुरक्षा प्रबंध किये गए थे।

हालाँकि, ट्रूडो की सुरक्षा टीम ने इस सुइट को लेने से इंकार कर दिया और उसकी जगह होटल के साधारण कमरों में ट्रूडो के रुकने पर जोर दिया। इस दौरान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कनाडाई अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें, लेकिन उन्होंने बहस करते हुए इससे मना कर दिया।

दरअसल, किसी भी विदेशी मेहमान की सुरक्षा जिम्मेदारी उसके मेजबान राष्ट्र की होती है। ऐसे में भारत ने G-20 के लिए आने वाले विश्व के नेताओं के लिए विशेष इंतजाम किए थे, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और उन्हें कोई समस्या ना हो। हालाँकि, ट्रूडो की जिद के आगे भारतीय एजेंसियों को पीछे हटना पड़ा।

ट्रूडो के ईमान को लेकर भी बवाल

ट्रूडो की इस यात्रा के दौरान उनका आधिकारिक हवाई जहाज भी खराब हो गय था, जिसके कारण वह अपने निर्धारित समय से लगभग 36 घंटे देरी से वापस कनाडा गए थे। उनके विमान में आई तकनीकी खराबी के कारण उन्हें दो अतिरिक्त दिन रुकना पड़ा था और G-20 से सबसे आखिर में जाने वाले नेता थे।

हालाँकि, भारत सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक विमान एयर इंडिया-1 का उपयोग करने के लिए कहा था, जिसके लिए उन्होंने मना कर दिया था। अब ट्रूडो के इस विमान को लेकर भी एक नया विवाद सामने आया है।

कनाडा के रक्षा मंत्री बिल ब्लेयर ने कहा था कि इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री ट्रूडो के विमान के साथ नई दिल्ली में जानबूझकर कोई गड़बड़ी की गई। उन्होंने मीडिया द्वारा इस बाबत पूछे गए प्रश्न पर कोई भी उत्तर देने से मना कर दिया था।

बिल ब्लेयर ने इसके 10 ही घंटों बाद अपने पुराने बयान से पलटते हुए विमान में जानबूझकर की गई किसी भी खराबी की आशंका को ख़ारिज किया। बिली ब्लेयर ने कहा था कि विमान को जाँचा गया था और इसमें स्पष्ट हुआ था कि उसमें तकनीकी खराबी थी ना कि इसे जानबूझकर खराब किया गया था।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मारा खालिस्तानी आतंकी सुखदूल सिंह ‘सुक्खा’ को: ली जिम्मेदारी, खालिस्तानी अर्शदीप का था दायाँ हाथ

कनाडा के विनिपिग शहर में बुधवार (20 सितंबर 2023) को मारे गए खालिस्तानी गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ़ सुक्खा दुनेके को मारने की जिम्मेदारी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग ने ली है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने यह जिम्मेदारी एक फेसबुक पोस्ट के जरिए ली है। लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल दिल्ली की मांडोली जेल में बंद है।

सुक्खा की हत्या गैंगवार का परिणाम बताया जा रहा है। विनिपिग शहर में 15 सितंबर की रात को उसे 15 गोलियाँ मारी गईं। सुक्खा की किसने हत्या की, उसके बारे में अभी तक कोई पता नहीं लगा है। सुक्खा पंजाब के दविंदर बंबीहा गैंग का सदस्य था, जो साल 2017 में जाली कागजों के सहारे कनाडा भाग गया था।

बंबीहा गैंग और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बीच पुरानी दुश्मनी है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने और अपने फेसबुक पोस्ट में और भी अपराधियों की हत्या करने की बात कही है। बता दें कि सुक्खा खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला का राइट हैंड था। वह कनाडा में बैठकर अपने गुर्गों के जरिए भारत में वारदात को अंजाम देता था।

फेसबुक पोस्ट में कहा गया है, “सत श्री अकाल, सभी को राम-राम। ये सुक्खा दुनेके जो बंबीहा ग्रुप का इंचार्ज बना फिरता था और जिसका मर्डर कनाडा के विनिपेग में हुआ है, उसकी जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ले रहा है। ये हीरोइन एडिक्टेड नशेड़ी ने सिर्फ नशे को पूरा करने के लिए पैसे की खातिर बहुत से घर उजाड़ दिए। हमारे भाई गुरलाल बराड़ और विक्की मिद्दुखेडा के मर्डर में भी इन्होंने ही सब कुछ बाहर बैठकर किया है।”

लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा की गई पोस्ट
लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा की गई पोस्ट (साभार:आजतक)

इसके आगे पोस्ट में लिखा गया है, “संदीप नंगल अम्बिया की हत्या भी इसी ने करवाई, पर अब इसके द्वारा किए गए पापों की सजा इसे मिल गई। बस एक ही बात कहनी है कि यहाँ जो भी छोटे मोटे रह गए हैं, चाहे जहाँ भी भाग लो दुनिया के किसी भी देश में चले जाओ, लेकिन ये मत सोचना कि हमसे दुश्मनी लेकर बच जाओगे। समय थोड़ा बहुत जरूर कम ज्यादा लग सकता है, लेकिन एक एक को उसके किए कामों की सजा जरूर मिलेगी।”

यह लॉरेंस बिश्नोई गैंग का तरीका रहा है कि वह हत्या करने के बाद फेसबुक पर पोस्ट करके उसकी जिम्मेदारी लेता है। इससे पहले वर्ष 2022 में हुई सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी भी बिश्नोई गैंग ने फेसबुक पर पोस्ट करके ली थी।

सुक्खा दुनेके पर भारत में 7 मामले दर्ज थे और वह कनाडा में अब खालिस्तानी गैंगस्टर अर्शदीप दल्ला के संरक्षण में रह रहा था। अर्शदीप भी पंजाब से भागा हुआ गैंगस्टर है। इन दोनों को भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ तलाश कर रही हैं।