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स्पर्म डोनेट कीजिए और पाइए ₹70 हजार: यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए चीन ने शुरू की अजीब प्रतियोगिता, घटती जन्मदर से परेशान है ड्रैगन

चीन तेजी से घटती जन्म दर समस्या से जूझ रहा है। इससे निजात पाने के लिए एक स्पर्म बैंक ने एक प्रतियोगिता आयोजित कर यूनिवर्सिटी के छात्रों को इसमें शामिल होने के लिए कहा गया। इसके लिए स्पर्म बैंक ने छात्रों को नकद पैसे देने की बात कही है।

साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट ने जियुपाई न्यूज के हवाले से रिपोर्ट किया है कि चीन के हेनान प्रान्त में स्थित स्पर्म बैंक ने यह प्रतियोगिता आयोजित की है। 10 सितंबर से शुरू हुई इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सबसे अधिक और सबसे तेज स्पर्म वाले पुरुषों की तलाश करना है।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र 50 दिन के भीतर 20 बार स्पर्म दान कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक छात्र को 6,100 युआन यानी करीब 70 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा। यही नहीं स्पर्म डोनेट करने वालों को आने जाने में हुए खर्च समेत अन्य खर्चों का भी भुगतान किया जाएगा।

हालाँकि, इस प्रतियोगिता में भाग लेने वालों के लिए शर्त यह है कि उनकी उम्र 20-45 साल के बीच और कम से कम 1.65 मीटर यानी करीब 165 सेमी हाइट होनी चाहिए। इसके अलावा उन्हें धूम्रपान और शराब का आदी नहीं होना चाहिए। साथ ही नशीली दवाओं का सेवन करने वाला भी नहीं होना चाहिए।

चीनी सोशल साइट वीबो पर एक पोस्ट कर स्पर्म बैंक ने कहा, “पर्यावरण प्रदूषण और काम के दबाव के कारण लोगों के स्पर्म की गुणवत्ता खराब हो गई है। इससे कई विवाहित जोड़ों में बाँझपन आ गया है। इसके चलते उनके परिवार और समाज में असंतोष की भावना पैदा हो गई है। ब्लड की तरह ही लोगों को स्पर्म भी दान करना चाहिए। स्पर्म दान विवाहित जोड़ों के लिए अच्छी खबर ला सकता है। इसलिए, हम विश्वविद्यालय के छात्रों से समाज में योगदान देने के लिए शुक्राणु दान करने का आह्वान करते हैं।”

गौरतलब है कि चीन ने घटती जन्म दर से परेशान होकर साल 2015 में अपनी दशकों पुरानी एक बच्चे की नीति को खत्म कर दिया था। इससे सभी दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद साल 2021 में इस सीमा को बढ़ाकर तीन कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी चीन में प्रजनन दर में गिरावट ही देखने को मिल रही है।

शकील, नसीम, आसिफ, इरफान… अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि पर आतंकी हमले में काट रहे थे आजीवन कारावास, हाईकोर्ट ने दी जमानत

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर हमला करने के दोषी 4 आतंकियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। ये सभी दोषी पिछले 18 वर्षों से जेल में बंद थे और ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर 5 जुलाई 2005 को आतंकी हमला हुआ था। इसमें पाँच आतंकी तुरंत मारे गए थे, जबकि 1 नागरिक की भी मौत हो गई थी। ये सभी इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

जिन दोषियों को जमानत दी गई है, उनका पता मारे गए आतंकियों के फोन से मिला था। उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने मोबाइल फोन के IMEI नम्बर से इनके बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके बाद कोर्ट ने इन लोगों को साजिश रचने का दोषी पाया था।

इन चारों दोषियों को न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद अफताब हुसैन रिजवी की खंडपीठ ने जमानत दी। जमानत पाने वाले व्यक्तियों के नाम शकील अहमद, मोहम्मद नसीम, आसिफ इकबाल और इरफ़ान हैं। ये वर्ष 2005 से ही जेल में बंद हैं।

कोर्ट ने इन दोषियों को सप्ताह में एक बार स्थानीय थाने में हाजिरी लगाने और जुर्माने की राशि जमा कराने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि इनमें से किसी के पास पासपोर्ट है तो उन्हें जमा करवा दिया जाए, ताकि कोई देश छोड़कर भाग ना सके।

दोषियों के वकील ने कोर्ट के सामने कहा कि इन चारों के विरुद्ध पहले से कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और जब से यह केस चालू हुआ है, तब से वे 18 वर्ष पहले ही जेल में काट चुके हैं। अब इनकी अपील सुनने में और देरी होगी, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालाँकि, पुलिस के वकील ने इसका विरोध किया।

कौन हैं ‘भारत माता की जय’ पर बखेड़ा कर चुके दानिश अली, जिन्हें ‘मुल्ला आतंकवादी’ कहकर घिर गए हैं रमेश बिधूड़ी

संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को लोकसभा में भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी चंद्रयान पर बात रख रहे थे। इसी दौरान वो टोकाटाकी से सांसद कुँवर दानिश अली पर उखड़ गए। उन्होंने सांसद दानिश अली को निशाने पर लेते हुए उग्रवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। रमेश बिधूड़ी ने लोकसभा में दानिश अली को ‘ओए भड़&*’, ‘ओए उग्रवादी’, ओए कट&*, ‘ये आतंकवादी है, ये उग्रवादी है’, ‘ये मुल्ला उग्रवादी है’, ‘बाहर देखूँगा इस मुल्ले को’ जैसे संबोधनों से नवाजा।

हालाँकि, इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खेद जताया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रमेश बिधूड़ी को चेतावनी भी दी। बाद में रमेश बिधूड़ी के बयान को लोकसभा की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया गया। संसद की कार्यवाही का वो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

संसद से शुरू हुए इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं दानिश अली। दानिश अली कौन हैं? उनका राजनीतिक इतिहास क्या रहा है? वो किस पार्टी से आते हैं और किस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में उठ रहे होंगे, जिसका जवाब हम विस्तार से दे रहे हैं।

बसपा के सांसद हैं कुँवर दानिश अली

दानिश अली बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर साल 2019 का लोकसभा चुनाव अमरोहा से जीतकर संसद पहुँचे हैं। वो पहली बार सांसद बने हैं। बहुजन समाज पार्टी में वो पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही शामिल हुए थे, वो भी अपनी पुरानी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) के मुखिया से आशीर्वाद लेकर।

जी हाँ, कुँवर दानिश अली पहले जनता दल (सेक्युलर) के नेता थे। वो पार्टी में महासचिव के पद पर थे। उन्होंने कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) और कॉन्ग्रेस के बीच तालमेल बिठाकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने साल 2019 में भाजपा के कँवर सिंह तँवर को हराकर मोदी लहर के बावजूद सपा-बसपा-कॉन्ग्रेस की जुगलबंदी का फायदा उठाकर जीत हासिल की थी।

विवादों से रहा है पुराना नाता

दानिश अली कई बार विवादों में रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी जहरीले बयान दे चुके हैं। हालाँकि इस साल वो दो बार विवादों में आए। इस साल फरवरी माह में उन्होंने टीपू सुल्तान की कब्र का दौरा किया। उन्होंने कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष को ललकारते हुए खुद को टीपू सुल्तान का ‘प्राउड फॉलोवर’ बताया था।

‘भारत माता की जय’ का मंच से किया था विरोध

बीते अगस्त माह में ही कुँवर दानिश अली ने अमरोहा में ‘भारत माता की जय‘ के नारे पर आपत्ति जताई थी। यही नहीं उन्होंने एक कार्यक्रम में भारत माता की जय का नारा लगाने पर आपत्ति करते हुए जमकर हंगामा किया था। उन्होंने कहा कि चूँकि ये सरकारी कार्यक्रम है, इसलिए ‘भारत माता की जय’ का नारा न लगाया जाए। उनकी इस हरकत पर गुस्साई भाजपा ने उन्हें जिहादी करार दिया था।

हापुड़ में जन्म, दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक राजनीति

कुँवर दानिश अली का जन्म साल 1975 में हापुड़ में हुआ था। दानिश अली ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पढ़ाई की है और उनके तीन बच्चे हैं। कुँवर दानिश अली खुद को सेक्युलर विचारधारा का बताते हैं। उन्होंने कर्नाटक की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) से अपनी राजनीति शुरू की और जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के करीबी हो गए। उन्होंने देवेगौड़ा का आशीर्वाद लेकर ही बहुजन समाज पार्टी ज्वॉइन की थी। उन्हें बसपा ने अपने संसदीय दल का नेता भी बनाया था, लेकिन दो साल के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया था। इस समय वो गृह मंत्रालय की एक समिति के सदस्य भी हैं।

उज्जैन में आकार लेगा 1000 साल पुराना परमार काल का मंदिर, 37 फीट होगी ऊँचाई: खुदाई में मिले थे अवशेष

मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकाल लोक की खुदाई के दौरान 2020 में एक हजार साल पुराने मंदिर का अवशेष मिला था। जाँच के बाद यह बात सामने आई है कि यह मंदिर परमार वंश के क्षत्रिय काल का है। अब इसे भव्य रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2020 में महाकाल मंदिर का विस्तार कर महाकाल लोक बनाने के लिए मंदिर परिसर में खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान करीब 25 फीट नीचे जीर्ण-शीर्ण अवस्था मे प्राचीन मंदिर मिला था। मंदिर के अवशेष में प्राचीन शिवलिंग, भगवान गणेश, नंदी, माँ चामुण्डा समेत अन्य प्रतिमाएँ मिलीं थीं। मंदिर और प्रतिमाओं की जाँच के बाद पुरातत्वविदों ने इसे परमार कालीन बताया है।

खुदाई के दौरान मिले इस मंदिर के अवशेषों से अब एक नया भव्य एवं दिव्य मंदिर बनाया जाना है। इस मंदिर की ऊँचाई 37 फ़ीट होगी और इसे बनाने में करीब 65 लाख रुपए की लागत आएगी। पुरातत्वविद डॉ. रमेश यादव का कहना है कि बारिश का सीजन खत्म होने के बाद मंदिर का आधार स्तंभ फिर से खोला जाएगा। इसके बाद नींव बनाने का काम शुरू होगा।

पुरातत्वविद यादव ने यह भी कहा कि मंदिर बनने में 6 महीने से 1 साल तक का समय लगने का अनुमान है। हालाँकि यह पूरा समय पत्थरों की उपलब्धता पर निर्भर है। वैसे तो 90% पत्थर उपलब्ध हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ेगी तो बाहर से भी पत्थर मँगवाए जाएँगे। मंदिर किस देवता का है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

यदि मंदिर के सिर दल पर गणेश जी की प्रतिमा है तो वह शिव मंदिर होगा। यदि सिर दल पर गरुड़ जी हैं तो वह विष्णु मंदिर होगा। मंदिर के आधार भाग को देखने पर स्पष्ट हो जाएगा कि यह प्राचीन मंदिर किस देवता का है। वैसे, अभी तक यहां से मिले अवशेष से यह शिव मंदिर ही हो सकता है।

बता दें कि मंदिर में मिले अवशेषों की विशेषज्ञों की निगरानी में नंबरिंग की गई है। इन नंबर्स के जरिए मंदिर निर्माण के समय जो भाग जिस स्थान का है। वहीं पर सेट यानि कि स्थापित किया जाएगा। पुरातत्व विभाग मंदिर के आधार से लेकर शिखर तक के भाग को जोड़कर प्राचीन मंदिर के स्वरूप में ही नए मंदिर के निर्माण का प्लानिंग कर रहा है।

‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो…’: राजस्थान में कॉन्ग्रेस विधायक दानिश अबरार के खिलाफ कॉन्ग्रेसियों ने ही लगाए नारे, बुजुर्गों ने कसम देकर शांत करवाया

सवाई माधोपुर के कॉन्ग्रेस विधायक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार दानिश अबरार को पायलट समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। समर्थकों ने ‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो, दानिश अबरार मुर्दाबाद-मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाए। इससे माहौल बिगड़ता देख गुर्जर समाज के बड़े-बुजुर्गों ने किसी तरह मामले को शांत करवाने की कोशिश की। मामला गुरुवार 21 सितम्बर, 2023  का है। 

भगवान देवनारायण के वार्षिकोत्सव समारोह में लगे नारे 

दरअसल, विधायक दानिश अबरार को भगवान देवनारायण के वार्षिकोत्सव समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था। इस दौरान जैसे ही वे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे, वहाँ पहले से मौजूद पायलट समर्थकों ने ‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो’, ‘दानिश अबरार मुर्दाबाद’ का शोर मचाते हुए नारेबाजी करना शुरू कर दिया।

यह नारेबाजी गुर्जर समाज के युवाओं द्वारा की जा रही थी। जिसकी वजह से थोड़े देर के लिए तो कार्यक्रम स्थल पर ही अफरा तफरी मच गई। इसके बाद बड़े-बुजुर्गों ने युवाओं को भगवान देवनारायण की कसम देकर किसी तरह से शांत कराया।

नारेबाजी के बीच भी मंच पर बैठे रहे विधायक दानिश अबरार 

गुर्जर समाज के भगवान देवनारायण मंदिर के वार्षिकोत्सव समारोह में पहुँचे विधायक अबरार का जमकर विरोध हुआ। बता दें कि सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद में प्रदेश कॉन्ग्रेस भी दो खेमों में बँटी नजर आ रही है। विधायक दानिश अबरार के गहलोत खेमे में होने के कारण सचिन पायलट समर्थक उनके खिलाफ हैं। इसलिए कार्यक्रम की उनकी उपस्थिति का विरोध करने के लिए गुर्जर समाज के युवाओं ने अबरार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध किया। 

उल्टे पाँव लौटे विधायक

गौरतलब है कि गुर्जर समाज के युवाओं के विरोध के कारण विधायक दानिश अबरार पहले तो थोड़ी देर मंच पर बैठे रहे। लेकिन थोड़ी ही देर में माहौल बिगड़ने की आशंका के चलते वह कार्यक्रम से चले गए। वही उनके जाने के बाद युवाओं ने वापस से उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

खालिस्तानियों से दूरी बनाएँ, अखंड भारत का करें समर्थन: सिखों से कंगना रनौत की अपील, कहा- आतंकवादियों से पूरे समुदाय की छवि खराब होती है

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने सिख समुदाय खुद को खालिस्तानियों से अलग रहने की अपील की है। उनसे अखंड भारत का समर्थन करने का आग्रह किया है। साथ ही कहा है कि खालिस्तानी आतंकवादी पूरे समुदाय की छवि खराब कर रहे हैं।

कंगना ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर कहा है, “सिख समुदाय को अपने आप को खालिस्तानियों से अलग करना चाहिए और अधिकाधिक संख्या में अखंड भारत के समर्थन में आना चाहिए। खालिस्तानी आतंकवादियों का विरोध करने के कारण मेरी फिल्मों का पंजाब में हिंसक रूप से विरोध होता है और सिख समुदाय मेरा विरोध करता है। यह अच्छा संकेत नहीं है।”

कंगना ने आगे लिखा, “खालिस्तानी आतंकवाद उनको (सिखों को) गलत रूप में दर्शाता है और इससे पूरे समुदाय की छवि खराब होती है। खालिस्तानियों ने पहले भी सिख समुदाय की छवि को खराब किया है। मेरी सिख समुदाय से अपील है कि धर्म के नाम पर उत्तेजित होकर खालिस्तानी आतंकियों का समर्थन ना करें।”

कंगना ने इन्स्टाग्राम पर एक स्टोरी लगाकर भी खालिस्तान का विरोध किया। उन्होंने खालिस्तान समर्थक गायक शुभ का भारत में शो रद्द होने पर लिखा, “पंजाब का यही हाल है, जब मैंने खालिस्तानियों के विरुद्ध लिखा तो उन्होंने पूरे सिख समुदाय को समझाया कि मैं उनके खिलाफ हूँ। मेरी फ़िल्में पंजाब में आज भी प्रतिबंधित हैं, उनको उत्तेजित करके मिसगाइड करना सबसे आसान काम है।”

कंगना रनौत द्वारा लगाई गई स्टोरी
कंगना रनौत द्वारा लगाई गई स्टोरी

कंगना के इस ट्वीट की राष्ट्रवादी तबके ने सराहना की है। वहीं लिबरल गैंग उनसे प्रश्न पूछने लगा है। खालिस्तानी आतंकियों का विरोध करने के बजाय कुछ लिबरल पत्रकारों ने कंगना से हिन्दू राष्ट्र बनाने की माँग करने वालों पर भी ऐसी ही टिप्पणी करने की माँग की।

कंगना ने यह ट्वीट और पोस्ट खालिस्तान समर्थक गायक शुभनीत सिंह के शो भारत में रद्द होने पर किए थे। पंजाबी मूल के कनाडाई गायक शुभ ने भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा इन्स्टाग्राम पर साझा किया था, जिसके पश्चात उनका भारी विरोध हुआ।

23-25 सितम्बर के बीच भारत में शुभ का स्टिल रोलिन नाम से कॉन्सर्ट होना था जिसके अंतर्गत उसके कई शहरों में शो होने थे। सबसे पहला शो मुंबई में होना था, जिसके आयोजन स्थल पर भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने पोस्टर भी फाड़ दिए थे। कंगना इससे पहले भी भारत विरोधी शक्तियों के विरुद्ध लगातार बोलती रही हैं।

एशियन गेम्स के लिए भारत के तीन खिलाड़ियों को चीन ने नहीं दिया वीजा, विदेश मंत्रालय ने बताया खेल भावना के खिलाफ: खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने रद्द की यात्रा

चीन ने अरुणाचल प्रदेश से सम्बन्ध रखने वाले भारतीय खिलाड़ियों को एशियन खेलों के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर भारत ने कड़ा प्रतिरोध जताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन से अपना विरोध दर्ज किया है। इसके साथ ही युवा एवं खेल तथा सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने विरोध में अपनी चीन यात्रा भी रद्द कर दी है।

दरअसल, 19वें एशियन खेलों का आयोजन चीन के हांगझाऊ शहर में 23 सितम्बर 2023 से आयोजित हो रहा है। यह खेल 8 अक्टूबर 2023 तक चलेंगे। इसमें भारतीय खिलाड़ियों का दल भी हिस्सा लेने के लिए जा रहा है। यह एशियन खेल एक साल की देरी से हो रहे हैं।

चीन ने इन खेलों में जाने वाले भारतीय दल के कुछ खिलाड़ियों को वीजा देने से मना कर दिया था। यह खिलाड़ी अरुणाचल प्रदेश से संबंध रखते हैं और वुशु खेल (मार्शल आर्ट) से जुड़े हैं। इन खिलाड़ियों के नाम न्येमान वान्ग्सू, ओनिलू तेगा और मेपुंग लाम्गु बताए जा रहे हैं।

दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोकता रहता है और उसे तिब्बत का हिस्सा बताता है। इसको लेकर वह तरह-तरह के ड्रामे करता रहता है। कभी वह स्टेपल वीजा देने की बात कहता है तो कभी वीजा नहीं देने की बात करता है। चीन का कहना है कि अरुणाचल उसका भूभाग है, इसलिए वहाँ के लोगों को चीन आने के लिए वीसा की जरूरत नहीं है।

चीन की इस कारस्तानी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास और बीजिंग में अपने दूतावास के जरिए विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में अपना बयान जारी कर कहा, “अरुणाचल हमेशा ही भारत का भूभाग था, है और रहेगा।”

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन का यह व्यवहार एशियन खेलों की भावना और उनके नियमों का उल्लंघन करता है। यह नियम एशियन खेलों के भाग लेने वाले देशों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के पक्षपात को रोकते हैं।

एशियन ओलम्पिक काउंसिल (AOC) के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर सिंह ने कहा है, “हमने इस मामले को वर्किंग ग्रुप के सामने उठाया है और वह इस मामले को चीन की सरकार के सामने उठा रहे हैं। हम जो कर रहे हैं, वह उससे अलग है जो दोनों सरकारों के बीच हो रहा है।”

वहीं एशियन ओलंपिक्स काउंसिल की एथिक्स कमेटी के प्रमुख वेई जिझोंग ने दावा किया है कि इन भारतीय खिलाड़ियों को वीजा दिए जा चुके हैं। चीन ने किसी भी खिलाड़ी को भी वीजा के लिए मना नहीं किया है। इन खिलाड़ियों ने वीजा स्वीकार नहीं किए हैं।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान में जानकारी दी गई है कि चीन से अपना प्रतिरोध दर्ज करवाने के लिए भारत के युवा एवं खेल तथा सूचना प्रसारण मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी अपनी चीन की यात्रा रद्द कर दी है। अनुराग ठाकुर इन खेलों के लिए ही चीन जा रहे थे।

चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को नत्थी वीजा देता आया है। इसका भारत ने विरोध किया है। नत्थी वीजा, पासपोर्ट से पिन करके लगाया जाने वाला एक बिना मुहर का कागज होता है। जहाँ सामान्य वीजा पासपोर्ट पर मुहर लगा कर या प्रिंट करके दिए जाते हैं, वहीं यह एक अलग कागज होता है।

नत्थी वीजा देने के मामले में ही भारत ने जुलाई में चीन में आयोजित हुए यूनिवर्सिटी खेलों में से अपने 8 सदस्यीय वुशु खिलाड़ियों के दल को नहीं भेजा था। इस 8 सदस्यीय दल में से 3 सदस्य अरुणाचल प्रदेश से थे जि,नके वीजा को नत्थी करके दिया गया था। वुशु, मार्शल आर्ट को कहते हैं।

सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्री उदयनिधि पर FIR दर्ज नहीं कर रही थी तमिलनाडु पुलिस, सुप्रीम कोर्ट पहुँचे वकील: सरकार और DGP सहित 14 को नोटिस

तमिलनाडु के युवा एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि और उनकी पार्टी डीएमके तथा तमिलनाडु सरकार, तमिलनाडु के DGP, डीएमके सांसद ए राजा समेत 14 पक्षकारों को नोटिस जारी करके जवाब माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई के वकील बी जगन्नाथ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से कहा कि उन्हें हाईकोर्ट जाना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे सीधे सुप्रीम कोर्ट कैसे आ गए? क्या वह सुप्रीम कोर्ट को पुलिस स्टेशन बनाना चाहते हैं? इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए मजबूर थे। उदयनिधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन मंत्री होने के चलते FIR दर्ज नहीं हो सकी।

उन्होंने अपना तर्क देते हुए यह भी कहा कि यदि कोई खास समुदाय या लोगों का समूह सनातन धर्म के खिलाफ चिल्लाए तो समझ आता है, लेकिन जब कोई सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर स्कूली विद्यार्थियों को एक धर्म के खिलाफ बोलने के लिए कहता है तो मामला चिंताजनक हो जाता है। वकील ने सवाल किया कि क्या कोई संवैधानिक पद में रहते हुए इस तरह के बयान दे सकता है?

याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करने पर अपनी सहमति दी। सुनवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और उदयनिधि सहित विभिन्न पक्षकारों से जवाब माँगा है।

क्या है मामला

दरअसल, उदयनिधि ने सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है। हम केवल उसका विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

वहीं, डीएमके सांसद ए राजा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म की तुलना एचआईवी और कुष्ठ रोग जैसी सामाजिक कलंक वाली बीमारियों से की जानी चाहिए।

भिखारी ठाकुर ने दिलाई प्रसिद्धि, रामचंद्र माँझी बने चेहरा: जानिए क्या है लौंडा नाच, जिसे बिहार के थिएटरों की अश्लीलता निगल गई

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का ‘लौंडा नाच’ देखते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। उनके साथ ही बेटे तेज प्रताप, पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, श्याम रजक जैसे लोग भी लौंडा नाच का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। ये वीडियो वायरल हुआ, तो भोजपुरी क्षेत्रों का मशहूर ‘लौंडा नाच’ फिर से चर्चा में आ गया। लोग इसके बारे में जानकारी ढूँढने लगे।

ऐसे में मेरे एक जागरुक मित्र ने वॉट्सऐप पर वायरल हो रहा वीडियो भेजा और पूछा कि ये ‘लौंडा नाच’ आखिर होता क्यों है? क्या उसने जो सुना है कि इसमें नाचने वाले लोग ‘किन्नर’ होते हैं, ये सही बात है? चूँकि, सवाल का जवाब देना ही था, तो हमने सोचा कि क्यों न ‘लौंडा नाच’ के बारे में जानकारी विस्तार से दी जाए और आज की पीढ़ी में ‘लौंडा नाच’ को लेकर फैली भ्रांतियाँ भी दूर कर दी जाए।

क्या है लौंडा नाच, कैसे मिली सांस्कृतिक पहचान

लौंडा नाच एक लोक नृत्य है जो बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और नेपाल के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। इस नृत्य में पुरुष कलाकार महिलाओं के कपड़े पहनकर और महिलाओं की तरह नृत्य करके मनोरंजन करते हैं। लौंडा नाच का आयोजन आमतौर पर शादी, जन्मदिन और अन्य समारोहों के अवसर पर किया जाता है। लौंडा नाच में विभिन्न तरह के पारंपरिक नाच-गान जैसे ठुमरी, कजरी, दादरा और चैती शामिल हैं। हालाँकि, लौंडा नाच पर बिहार के थिएटरों की अश्लीलता ने खूब असर डाला है।

वैसे लौंडा नाच का इतिहास काफी पुराना है और यह कई तरह के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों से प्रभावित रहा है। लौंडा नाच की शुरुआत के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि यह नृत्य प्राचीन काल से प्रचलित है। कुछ विद्वानों का मानना है कि लौंडा नाच की शुरुआत राजा-महाराजाओं के दरबारों में हुई थी, जहाँ पुरुष नर्तक महिलाओं के कपड़े पहनकर मनोरंजन करते थे। अन्य विद्वानों का मानना है कि लौंडा नाच की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों के रूप में हुई थी, जहाँ पुरुष नर्तक देवी-देवताओं के रूप में नृत्य करते थे। हालाँकि, लौंडा नाच की बड़ी पहचान को सभी भिखारी ठाकुर से जोड़कर ही देखते हैं।

लौंडा नाच को भिखारी ठाकुर ने दिलाई वैश्विक पहचान

भिखारी ठाकुर भोजपुरी के एक महान लोक कलाकार, रंगकर्मी, लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर भी कहा जाता है। उन्होंने भोजपुरी में कई नाटक, गीत और कविताएँ लिखीं। भिखारी ठाकुर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया। उन्होंने लौंडा नाच को एक लोक नृत्य से एक व्यावसायिक रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों में लौंडा नाच को एक आकर्षक और मनोरंजक रूप में प्रस्तुत किया। भिखारी ठाकुर के नाटकों के माध्यम से लौंडा नाच बिहार और अन्य क्षेत्रों में लोकप्रिय हो गया। उन्होंने लौंडा नाच को एक सम्मानजनक कला रूप के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने नाटकों में लौंडा नाच के कलाकारों को एक सम्मानजनक भूमिका दी, जिसके कलाकारों को समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त हुआ।

भिखारी ठाकुर के बिना लौंडा नाच की वर्तमान स्थिति शायद ही संभव हो पाती। भिखारी ठाकुर ने ‘बिदेसिया, भाई-विरोध, बेटी-बियोग, कलयुग प्रेम, गबरघिचोर, गंगा असनान, बिधवा-बिलाप, पुत्रबध, ननद-भौजाई, बहरा बहार’ जैसे नाटक लिखे और उनका मंचन किया। उनके योगदान के कारण ही भोजपुरी भाषा और संस्कृति को एक नई पहचान मिली।

रामचंद्र माँझी भी रहे बड़ा नाम, मोदी सरकार ने दिया पद्मश्री

भिखारी ठाकुर के शिष्य रहे और उनकी मंडली के अंतिम सदस्य रहे रामचंद्र माँझी का निधन 96 वर्ष की उम्र में पिछले साल सितंबर माह में हुआ। उन्हें भारत सरकार ने साल 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया। रामचंद्र माँझी ने इसे कला के साथ ही भिखारी ठाकुर का भी सम्मान बताया था। बता दें कि रामचंद्र माँझी 95 वर्ष की उम्र तक लौंडा नाच का मंचन करते रहे।

महज 10 वर्ष वर्ष की उम्र में भिखारी ठाकुर की मंडली में शामिल होकर अगले तीन दशक से अधिक समय तक उन्हीं के शागिर्द रहे रामचंद्र माँझी ने बाद में गौरीशंकर ठाकुर, रामदास राही, प्रभुनाथ ठाकुर, दिनकर ठाकुर, शत्रुघ्न ठाकुर की मंडलियों में काम किया और आखिर समय में वो जैनेंद्र दोस्त की रंगमंडली में भी रहे।

लौंडा नाच को लेकर फैली भ्रांतियाँ

दरअसल, ‘लौंडा नाच’ बिहार ही नहीं, पूर्वी यूपी, बंगाल और यहाँ तक कि नेपाल में भी प्रचलित है। हो सकता है कि नाम अलग-अलग हों। इसे बिहार की सांस्कृतिक कला का हिस्सा भी माना जाता है। शादी-विवाह, मुंडन, तिलक जैसे कार्यक्रमों में लौंडा नाच का आयोजन होता रहा है। इस नाच को करने वाले लोग प्रोफेशनल होते हैं। हालाँकि, लौंडा नाच को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ फैली हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। क्योंकि, इन भ्रांतियों के कारण ही लौंडा नाच के कलाकारों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। वे समाज में एक सम्मानजनक स्थान पाने के लिए संघर्ष करते हैं।

अश्लीलता

‘लौंडा नाच’ को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति है इसका अश्लील और भ्रष्ट होना। जबकि यह सच नहीं है। लौंडा नाच एक लोक नृत्य है जो बिहार और अन्य क्षेत्रों की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस नृत्य में महिलाओं के कपड़े पहनकर पुरुष नर्तक नृत्य करते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य मनोरंजन करना है, अश्लीलता फैलाना नहीं।

कलाकारों का समलैंगिक होना

ये एक आम भ्रांति है कि लौंडा नाच के कलाकार समलैंगिक होते हैं। लौंडा नाच के कलाकार समलैंगिक हो सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है। ज़्यादातर लौंडा नाच के कलाकार सामान्य होते हैं और वे महिलाओं के कपड़े पहनकर सिर्फ मनोरंजन के लिए नृत्य करते हैं।

कुछ समय से लोकप्रियता में गिरावट

पिछले कुछ समय से लौंडा नाच की लोकप्रियता में गिरावट आई है। इसका कारण सिनेमा और आर्केस्ट्रा का उदय है, जिन्होंने लौंडा नाच के स्थान को ले लिया है। हालाँकि, कुछ कलाकारों और संगठनों ने लौंडा नाच को जीवित रखने के लिए प्रयास किए हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो लौंडा नाच एक समृद्ध लोक कला रूप है जो बिहार और अन्य क्षेत्रों की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नृत्य सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों से प्रभावित रहा है। वहीं लौंडा नाच को लेकर कई तरह के विवाद भी रहे हैं, लेकिन यह एक लोक कला रूप है जिसे संरक्षित करने और बढ़ावा देने की जरूरत है।

कहने को कॉमेडियन पर काम नफरती, झूठी कहानियाँ सुनाई ताकि मुस्लिम दिखे विक्टिम: कौन हैं हसन मिन्हाज जिसे ओबामा तक दे चुके हैं इंटरव्यू

अमेरिका के भारतवंशी कॉमेडियन हसन मिन्हाज मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। हसन मिन्हाज द्वारा अमेरिका में सुनाई गई भेदभाव की कहानियाँ अब झूठी सिद्ध हो रही हैं। मिन्हाज अमेरीका में खुद के मुस्लिम और अश्वेत होने को लेकर कहानियाँ सुनाकर सहानुभूति बटोरते रहे हैं।

अमेरिका की प्रख्यात मैगजीन ‘द न्यूयॉर्कर’ ने हसन मिन्हाज की इन कहानियों की सच्चाई सामने रखी है। मैगजीन ने हसन की कहानियों की जाँच करके बताया है कि वह लोगों की सहानुभूति बटोरने के लिए ऐसी कहनियाँ सुनाते थे जिनका कोई सर पैर ही नहीं होता था।

कौन हैं हसन मिन्हाज?

हसन मिन्हाज का जन्म अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में हुआ था। उनके माता-पिता उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से अमेरिका गए थे। इस समय हसन की उम्र 37 वर्ष की है। वह अमेरिका के प्रख्यात स्टैंडअप कॉमेडियन और टीवी कलाकार हैं।

हसन अमेरिका में काफी ज्यादा पॉपुलर हैं और उनके लाखों-करोड़ों फैन्स हैं। हसन को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साक्षात्कार तक दिया है। हसन के यूट्यूब पर 16 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वह वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर ‘पैट्रियाट एक्ट’ नाम से एक शो करते थे।

नेटफ्लिक्स पर उनके इस शो की काफी माँग थी। यह शो वर्ष 2018 में चालू हुआ था, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान बंद हो गया था। इस शो के बंद होने पर इसके दर्शकों ने काफी दुख जताया था। मिन्हास अश्वेत और मुस्लिमों के साथ होने वाले अन्याय की कहानी भी बना कर पेश करते हैं।

मिन्हास की अधिकांश कॉमेडी उनके भारतीय मूल के होने, उनके अश्वेत होने और अमेरिकी राजनीति से सम्बंधित होती हैं। हसन इस कॉमेडी को दुःख भरी कहानियों की तरह पेश करते हैं, जिसमें हर बार उनके साथ अश्वेत और मुस्लिम होने के कारण भेदभाव होता है।

क्या-क्या दावे किए हसन ने?

हसन प्रधानमंत्री मोदी के धुर विरोधी हैं और हिंदू राष्ट्रवाद (Hindutva Nationalism) की आलोचना करते हैं। भारत द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने को लेकर साल 2019 के स्वतंत्रता दिवस के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने का प्रयास किया था। इसको लेकर हसन की आलोचना भी हुई थी।

हसन ने मार्च 2019 में भारतीय चुनावों पर एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध प्रोपगैंडा फैलाया था। इसका भारत में काफी विरोध हुआ था और इसे हिन्दू विरोधी करार दिया गया था।

हसन ने एक शो में एक कहानी सुनाते हुए कहा था कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और सऊदी अरब द्वारा पत्रकार जमाल खासोज्जी की हत्या पर बात की तो उन्हें लोगों ने धमकियाँ दीं। इस वीडियो में दिखाया गया था कि उनके घर पर किसी ने एक लिफ़ाफ़े में कुछ पाउडर भेजा था।

हसन ने दावा किया था कि उनको भेजा गया पाउडर जहरीला था और वह खोलने के बाद धोखे से उनकी बेटी पर गिर गया, जिससे उनकी बेटी को अस्पताल ले जाना पड़ा था। हसन मिन्हास के इस दावे की अब पोल खुल गई है।

हसन के दावे की खुल गई पोल

हसन के इस दावे की जाँच अमेरिकी पत्रिका द न्यूयॉर्कर के पत्रकार क्लेयर मलोन ने की है। उन्होंने हसन से कई बार इस विषय में मुलाक़ात भी की और उनसे उनकी कहानियों के बारे में पूछा है।

क्लेयर मलोन से एक मुलाकात में मिन्हाज ने स्वीकार किया कि उनके घर पर जो पाउडर भेजा गया था वह हानिकारक नहीं था और बेटी पर उसके गिरने की कहानी भी फर्जी थी। मिन्हाज ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी बेटी को अस्पताल नहीं ले जाना पड़ा था।

हसन मिन्हाज के खुद को पीड़ित एवं शोषित दिखाकर सांत्वना एवं लोकप्रियता बटोरने के मामले में मलोन ने खुलासा किया है। मिन्हाज से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह कहानी सुनाने के लिए अपने पास से व्यक्तियों और घटनाओं की कल्पना कर लेते हैं।

ऐसी ही एक अन्य कहानी पर भी मिन्हाज की पोल खुली है। मिन्हाज ने दावा किया था कि पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या के दिन वह सऊदी अरब के दूतावास में गए हुए थे और वहाँ के कर्मचारियों ने उनसे कहा था कि एक कॉमेडियन द्वारा आलोचना उन्हें पसंद नहीं आ रही।

मिन्हाज ने यह दावा किया था कि इस दौरान उन्हें दोस्तों और सहकर्मियों की ओर से लगातार मैसेज आ रहे थे कि वह ठीक तो हैं। इस घटना की सच्चाई भी अब सामने आ गई है।

क्लेयर मलोन द्वारा अब मिन्हाज के एक ऐसे करीबी व्यक्ति से पूछताछ की गई तो उसने सच बता दिया। इस व्यक्ति को मिन्हाज के कार्यक्रमों की जानकारी थी। उसने बताया कि मिन्हाज खशोज्जी की हत्या के एक महीने पहले सऊदी अरब के दूतावास गए थे।

गौरतलब है कि सऊदी मूल के अमेरिकी पत्रकार जमाल खसोज्जी की 2 अक्टूबर 2018 को तुर्की के शहर इस्तांबुल के सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या हो गई थी। उन्हें सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों के एजेंट्स ने मार दिया था।

मिन्हाज के इस शो पर यह भी आरोप लगे कि इसमें महिलाओं के साथ भेदभाव होता था। इस शो को बनाने में सहायता करने वाली टीम के कुछ लोगों ने कहा कि मिन्हाज के शो में तथ्यों को जाँचा नहीं जाता था।

मिन्हाज की सच्चाई खुलने के बाद अब उनकी आलोचना हो रही है। कहा जा रहा है कि मिन्हाज ने अपनी झूठी दुःख भरी कहानियाँ सुना कर लोकप्रियता बटोरी है जो कि गलत है।