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रात में आयशा के घर में घुसे आसिम-सलमान, 70 साल के दादा ने पकड़ा तो चाकू घोंपकर मार डाला: गुस्साई भीड़ ने पीट-पीटकर कर दी एक की हत्या

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में मोहम्मद आसिम ने 70 साल के गुलाम अहमद की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। घटना से नाराज लोगों ने पीट-पीटकर उसे भी मार डाला। मंगलवार (19 सितंबर 2023) की देर रात आसिम अपने साथी सलमान के साथ गुलाम अहमद की पोती आयशा से मिलने के लिए उसके घर में घुस गया था।

मामला हंसवर थाना क्षेत्र के झझवा गाँव का है। रिपोर्टों के अनुसार 25 साल के आसिम और 20 साल की आयशा प्रेम संबंध में थे। लेकिन पिछले महीने निकाह तय होने के बाद आयशा ने उससे ब्रेकअप कर लिया था। बावजूद आसिम ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

इसी क्रम में वह मंगलवार की देर रात आयशा के घर में अपने साथी सलमान के साथ घुस गया। उस पर निकाह का दबाव डालने लगा। इसी दौरान आयशा के दादा गुलाम अहमद ने उसे पकड़ लिया और डांट लगाई। इससे भड़के आसिम ने चाकू से उन पर हमला कर दिया। बुजुर्ग की चीख सुनकर लोग मौके पर जुट गए और आसिम की पिटाई कर दी। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गुलाम अहमद के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का कोशिश) और 324 (खतरनाक हथियार के इस्तेमाल से चोट पहुँचाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आसिम के साथी सलमान की तलाश जारी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अयोध्या रेंज के आईजी प्रवीण कुमार और अंबेडकर नगर के एसपी एके सिन्हा ने झझवा गाँव का दौरा किया है। दोहरे हत्‍याकांड के बाद गाँव में तनाव को देखते हुए पीएसी तैनात कर दी गई है।

हंसवर थाना प्रभारी अरुण सरोज के मुताबिक, “आसिम ने गुलाम को चाकू मारा था। उनकी चीख सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी।” उन्होंने बताया कि हमले में आयशा, उसकी माँ तहसीब फातिमा और पिता हिलाल अहमद भी घायल हुए हैं। उनका इलाज चल रहा है।

एफआईआर के मुताबिक, आयशा से निकाह का आसिम दबाव डाल रहा था। जब गुलाम अहमद ने इनकार कर दिया तो उसने कई बार चाकू से वार किया। उनके शोर मचाने पर सलमान भाग निकला, लेकिन आसिम ने परिवार के अन्य सदस्यों पर भी हमला कर दिया।

UN में भारतीय पत्रकार ने पूछा सवाल, जवाब दिए बिना ही भाग निकले जस्टिन ट्रूडो: भारत ने कनाडा के नागरिकों के लिए वीजा सेवा बंद की

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने पहुँचे कनाडा के प्रधानमंत्री भारतीय पत्रकार के सवालों से बचते नजर आए। पत्रकार ने कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो से उनके द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को लेकर सवाल किया था। वहीं, भारत ने रिश्तों में आई खटास के बीच कनाडाई नागरिकों को वीजा देना बंद कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक में शामिल होने पहुँचे ट्रूडो से भारतीय समाचार एजेंसी PTI की महिला पत्रकार योषिता सिंह ने सवाल किया था। योषिता ने भारत द्वारा उनके आरोपों को खारिज करने को लेकर दो बार प्रश्न पूछा, लेकिन खिसियाये ट्रूडो ने कोई उत्तर नहीं दिया।

जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितम्बर 2023 को कनाडा की संसद में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। निज्जर की इस साल जून में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ट्रूडो के लगाए गए आरोपों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था और कनाडा की आलोचना की थी।

पत्रकार योषिता सिंह ने दो बार ट्रूडो से उनके हालिया बयानों और भारत के जवाब को लेकर प्रश्न पूछा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और हँसते हुए अपने अधिकारियों के साथ आगे बढ़ गए। गौरतलब है कि ट्रूडो पर अब यह दबाव है कि वह भारत के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के साक्ष्य सामने रखें।

जस्टिन ट्रूडो की इस बचकाना हरकत के बाद कनाडा और भारत के सम्बन्ध काफी निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। दोनों देशों ने एक दूसरे के देश में जाने वाले अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनियाँ जारी की हैं।

भारत कनाडा के नागरिकों को नहीं देगा वीजा

भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक लड़ाई के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने बड़ा निर्णय लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा के नागरिकों को वीजा देने पर रोक लगा दी है। यह रोक अनिश्चितकाल के लिए लगाई गई है। अभी इस बात की विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में वीजा सेवाएँ देने वाली कम्पनी BLS इंटरनेशनल ने अपनी वेबसाइट पर इस संबंध में जानकारी दी है। BLS ने लिखा है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए भारत का वीजा देने पर रोक लगा दी है।

इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयान के बाद नई दिल्ली स्थित कनाडाई दूतावास ने अपने यहाँ काम करने से भारतीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया था। उन्हें इसके लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं बताए गए थे।

भारत और कनाडा ने एक दूसरे से अपने दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया है। हालाँकि, बीते कुछ समय में कनाडा स्थित भारतीय दूतावासों के बाहर खालिस्तानी प्रदर्शन हुए हैं और कनाडाई सुरक्षा एजेंसियाँ मूकदर्शक बनी रही हैं, जबकि भारत में ऐसा मामला सामने नहीं आया है।

कनाडाई नागरिकों को भारत सरकार कब वीजा देना शुरू करेगी, इसकी अभी कोई तारीख नहीं बताई गई है। किसी भी देश का दूसरे देश के नागरिकों को वीजा देने पर रोक लगाना कूटनीतिक स्तर पर बड़ा कदम माना जाता है।

स्विट्जरलैंड में बुर्का बैन पर संसद की मुहर, चेहरा ढकने पर लगेगा ₹92000 जुर्माना: फ्रांस सहित कई यूरोपीय देश पहले ही लगा चुके हैं प्रतिबंध

स्विट्जरलैंड में बुर्का या नकाब पहनने पर प्रतिबंध (Switzerland Burqa Ban) लगा दिया गया है। 20 सितंबर 2023 को स्विस संसद के निचले सदन ने इस पर मुहर लगाई है। इसके मुताबिक स्विट्जरलैंड में सार्वजनिक स्थानों पर नाक, मुँह और आँखों को ढकने वाले नकाब या बुर्के को पहनना गैर कानूनी माना जाएगा। ऐसा करने पर एक हजार स्विस फ्रैंक यानी करीब 92 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा।

इसके साथ ही स्विट्जरलैंड उन यूरोपीय देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने बुर्का या नकाब को प्रतिबाधित कर रखा है। इससे पहले फ्रांस, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड जैसे देश इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। यूरोप के बाहर चीन और श्रीलंका में भी बुर्के पर प्रतिबंध है।

स्विटज़रलैंड की संसद के निचले सदन में बुर्का एवं नकाब प्रतिबंधित करने को लेकर हुए मतदान में 151 सांसदों ने इसके पक्ष में मत दिया, जबकि 29 सांसद इसके विरोध में रहे। इस प्रस्ताव को स्विट्जरलैंड का उच्च सदन पहले ही स्वीकार कर चुका है।

विश्व के अमीर देशों में शामिल स्विट्जरलैंड में अधिकांश निर्णय जनमत द्वारा लिए जाते हैं। देश भर में सार्वजनिक स्थानों तथा ऐसी निजी इमारतों जहाँ लोगों का आना-जाना है, में बुर्का पर प्रतिबंध को लेकर वर्ष 2021 में जनमत संग्रह किया गया था। इस जनमत संग्रह में 51% लोगों ने बुर्का पर बैन को लेकर अपना मत दिया था।

सार्वजनिक स्थानों में बुर्का और निकाब प्रतिबंधित करने को लेकर स्विटज़रलैंड के एक समूह एगरकिनजेन कमिटी ने वर्ष 2016 में प्रयास चालू किए थे। इसके बाद वर्ष 2021 में वोटिंग हुई थी। जनमत संग्रह के नतीजों को स्विट्जरलैंड की राष्ट्रवादी स्विस पार्टी ने कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध एक बड़ी जीत बताया था।

स्विट्जरलैंड में प्रांतीय व्यवस्था को कम्यून कहा जाता है। यह अपने निर्णय लागू करने के लिए स्वतंत्र होती हैं। यहाँ की दो कम्यून दक्षिणी तिचिनो और उत्तरी सेंट गैलन में पहले ही बुर्का को प्रतिबंधित कर चुका है। संसद से पास कानून का आशय यह है कि कोई भी महिला या पुरुष चेहरा ढक कर अपनी पहचान न छिपा पाए। हालाँकि नए नियम में कुछ छूट भी दी गई हैं। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू के अनुसार यह छूट मजहबी आयोजनों, स्थानीय रीति-रिवाज से जुड़े कार्यक्रमों और थिएटर आदि में किए जाने वाले अभिनय आदि पर लागू होगी।

स्विटज़रलैंड की कुल जनसंख्या लगभग 89 लाख होने का अनुमान है। इसमें 62.6% ईसाई और 5.4% मुस्लिम हैं। देश में लगभग 30% लोग ऐसे हैं जो कि किसी धर्म को नहीं मानते।

कनाडा में अब गैंगस्‍टर सुखदूल सिंह मारा गया, NIA की लिस्‍ट में था शामिल: एक दिन पहले ही एजेंसी ने जारी की थी 43 वांछितों की सूची

कनाडा में अब गैंगस्टर सुखदूल सिंह मारा गया है। अज्ञात बंदूकधारियों ने पंजाब के इस क्रिमिनल की हत्या की है। वह एनआईए की वांटेड लिस्ट में शामिल था। उसकी हत्या की खबर एजेंसी द्वारा 43 वांछितों की सूची जारी करने के एक दिन बाद आई है।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा दुनिके 2017 में भारत से भाग गया था। वह पंजाब के मोगा जिले का रहने वाला था। देविंदर बांबीहा के गिरोह से उसके तार जुड़े थे। 20 सितंबर की रात उसे करीब 15 राउंड गोली मारी गई।

सुक्खा की हत्या की खबर ऐसे समय में आई है जब खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा और भारत के संबंधों में तल्खी आ गई है। कनाडा ने इस हत्या का दोष भारत के मत्थे मढ़ने की कोशिश की थी।

सुक्खा दुनुके की हत्या कनाडा के विनिपेग शहर में हुई। हत्या उसी तरीके से की गई जैसे निज्जर को मारा गया था। खालिस्तानी गैंगस्टर अर्शदीप सिंह दल्ला के चहेते रहे सुक्खा के खिलाफ सात मामले दर्ज थे। एनआईए ने जो 43 वांछितों की लिस्ट जारी की थी उनमें से 29 पंजाब से ही हैं। इस लिस्ट में 33वें नंबर पर सुक्खा का नाम था।

इंडिया टुडे के अनुसार, वह वर्ष 2017 में जाली कागजों के सहारे कनाडा गया था। इसमें उसकी दो पुलिस अधिकारियों ने सहायता की थी। इन पुलिस वालों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था।

कनाडा में हुई इस हत्या के बीच यह भी जानकारी आ रही है कि पंजाब में स्थित उसके घर पर पुलिस पहुंची है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सुखदूल सिंह अपराधी बनने से पहले कलेक्टर ऑफिस में काम करता था। वह ‘A’ कैटेगरी का गैंगस्टर था और कई हत्याओं में शामिल था। वह फरीदकोट जेल में भी लंबे समय तक बंद रहा था।

गौरतलब है कि जिस बांबीहा गिरोह से सुक्खा संबंध रखता था, उसकी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी चलती है। इन दो गैंगों की आपसी लड़ाई में ही पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या हुई थी। सिद्धू मूसेवाला को बांबीहा गैंग का समर्थक माना जाता था और उसने ‘बांबीहा बोले’ नाम से एक गाना भी गाया था।

लोकसभा में महिला आरक्षण के विरोध में पड़े केवल दो वोट, एक ओवैसी दूजे जलील: जानिए AIMIM ने समर्थन नहीं करने का क्या खोजा बहाना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण बिल, 20 सितंबर 2023 को लोकसभा में पास हो गया। पक्ष में 454 वोट पड़े। केवल दो सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। दोनों ही सांसद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के हैं।

बिल के विरोध में वोट देने वाले सांसदों में से एक एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी और दूसरे उनकी पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील थे। औवेसी का कहना है कि बिल में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं का कोटा नहीं होने के कारण उन्होंने इसका विरोध किया।

इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में ओवैसी ने कहा, “भारत में ओबीसी की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है, लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 22 फीसदी है। भारत में मुस्लिम महिलाओं की आबादी 7 फीसदी है, जबकि लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 0.7 फीसदी है। क्या आप उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं देंगे?”

संसद में बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के दौरान ओवैसी ने कहा था कि यह बिल केवल ‘सवर्ण महिलाओं’ को आरक्षण देगा। उन्होंने कहा, “इस विधेयक के पीछे का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना है। लेकिन ओबीसी और मुस्लिम महिलाएँ, जिनका प्रतिनिधित्व कम है, क्या आप उन्हें आरक्षण नहीं देंगे?”

उन्होंने संसद के बाहर कहा था, “क्या आप उन लोगों को प्रतिनिधित्व नहीं देंगे जिनके लिए आप कानून ला रहे हैं? हमने इसके खिलाफ वोट दिया ताकि उन्हें (महिलाओं) पता चले कि दो सांसद थे जो ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं को शामिल करने के लिए लड़ रहे थे।”

इससे पहले ओवैसी ने कहा था, “मोदी सरकार सवर्ण महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती है। वे ओबीसी महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व नहीं चाहते हैं। लोकसभा में 690 महिला सांसद चुनी गई हैं और उनमें से केवल 25 ही मुस्लिम समुदाय से आई हैं।” ओवैसी ने ये भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं को दोहरे भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा पर मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं को उनका उचित हिस्सा देने से इनकार करने का आरोप लगाया।

महिला कोटा बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। 21 सितंबर को यह बिला राज्यसभा में आएगा।

सांस्कृतिक जगत की महान उपलब्धि है ओंकारेश्वर का एकात्म धाम, ओंकार पर्वत पर आदि शंकराचार्य की विराट प्रतिमा ने लिया आकार

प्रायः समझा जाता है कि साधु-संन्यासियों का काम निर्जन वनों और पर्वत कन्दराओं में एकान्त साधना करना है। किन्तु आदि शंकराचार्य ने संन्यास की जिस नई चेतना से समाज का दिशा-दर्शन किया, वह सामाजिक जीवन के सांस्कृतिक प्रवाह को अमर और अक्षय बनाने का नया विधान रचती है।

भारतवर्ष के जिस सुविशाल भू-भाग को उसकी विविधताओं के कारण राजनीति संगठित रखने में बार-बार विफल होती रही है, उस भारत-वसुन्धरा को शंकराचार्य अपनी अद्भुत प्रज्ञा से सांस्कृतिक-धार्मिक सूत्र में युग-युग के लिए एकता सिखा गए। वेश, भाषा, भोजन आदि अनेक भिन्नताओं के मध्य अद्वैत-दर्शन की सुचिन्तित एकात्मता आचार्य शंकर के बाद सदा अविच्छिन्न रही है। चार धामों की यात्रा युग-युगान्तर से देश को जोड़कर रखे है।

शंकराचार्य का धार्मिक सांस्कृतिक नेतृत्व इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि संन्यास जीव के ब्रह्म से मिलन की एकान्त साधना मात्र नहीं है, वह सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन की गहन समस्याओं के समाधान का सुचिन्तित प्रयत्न भी है। शंकराचार्य के परवर्ती युग में गोस्वामी तुलसीदास, समर्थ गुरु रामदास, स्वामी प्राणनाथ और सिख गुरुओं से लेकर स्वामी विवेकानन्द, महर्षि दयानन्द, योगी अरविन्द आदि का संन्यासी जीवन आदि शंकराचार्य की लोकमंगलमुखी साधना-दृष्टि से ही अनुप्राणित है। इसलिए आदि शंकराचार्य भारतवर्ष की संन्यास परम्परा में अति विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण हैं।

कृषि और ऋषि इस देश की सनातन परम्परा के सुदृढ़ आधार हैं। जहाँ कृषि ने जीवन की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर मनुष्य को भौतिक समृद्धि दी, उसके तन को पुष्ट किया, वहीं ऋषि-परम्परा ने उसके मन की सहज दुर्बलताएँ दूर कर उसे शिष्ट बनाया, उसमें मानव मूल्यों को विकसित किया। आज नारद, भृगु, याज्ञवल्क्य, वशिष्ठ, व्यास आदि संन्यासी महर्षि पुराणों के विषय हैं, किन्तु उनकी यशस्वी परम्परा के संवाहक आदि शंकराचार्य ऐतिहासिक धरातल पर उनके जीवन्त साक्ष्य हैं।

विक्रम की आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य का अवतरण भारतीय सांस्कृतिक जगत की सर्वथा अपूर्व घटना है, जिसने भारतवर्ष की सामाजिक-सांस्कृतिक विश्रृंखलता को दूर कर राष्ट्रीय संदर्भों में स्थायी एकता की सुदृढ़ आधारशिला स्थापित की। हमारे राष्ट्रमंदिर का स्वर्ण शिखर आचार्य शंकर की अलौकिक चिन्तन-चेतना से ही सतत आलोकित है।

यदि उन्होंने चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय समाज को सूत्रबद्ध न किया होता तो बहुत संभव था कि मध्यकाल में इस्लामिक धर्मान्तरण की काली आँधी सब कुछ उड़ाकर ले जाती और बिखरा हुआ भारतीय समाज अपनी सनातन पहचान ही खो बैठता। आदि शंकराचार्य के अवतरण ने एक बार फिर हमारे पौराणिक अवतारवाद की अवधारणा को पुष्ट करके आधे-अधूरे दार्शनिक निष्कर्षों के मकड़जाल से मुक्त कर समाज को निर्भान्त अद्वैत दर्शन दिया।

मनुष्य विचारशील प्राणी है। इसलिए विश्व में अपनी देशकाल परिस्थितियों के अनुरूप निरन्तर चिन्तन करता रहा है और इसलिए पूरब से लेकर पश्चिम तक अनेक दार्शनिक विचारधाराएँ प्रचलित हैं। भारतवर्ष में चार्वाक और यूरोप में कार्ल मार्क्स के दार्शनिक विचार वैश्विक स्तर पर समाज में सर्वत्र सर्वाधिक व्यवहत हो रहे हैं, किन्तु ये तथाकथित दर्शन सामाजिक समस्याओं के समाधान देने के स्थान पर सामाजिक संघर्ष की भीषण ज्वालाओं को भड़काने में ही अधिक व्यस्त मिलते हैं।

चार्वाक की निर्बाध भोगवादी दृष्टि शोषण की अनन्त श्रृंखला उत्पन्न करती है, क्योंकि उसमें दान, दया, परोपकार के लिए कोई स्थान नहीं, वहाँ तो केवल अपने पोषण और स्वार्थ सिद्धि के लिए ही मानव का पतन-पथ खुला है। चार्वाक दर्शन में श्रम और उत्पादन की प्रेरणा शून्य है, जबकि औरों के श्रम पर आत्मपोषण की दृष्टि प्रधान है। विश्वस्तर पर भ्रष्टाचार और शोषण का अभिशाप इसी कथित दर्शन की देन हैं।

कार्ल मार्क्स की वर्गवादी जीवन दृष्टि भी समाज को पूँजीवादी और सर्वहारा वर्ग में बाँटकर समाज में हिंसक संघर्ष को ही उत्पन्न कर रही है। माओवाद, नक्सलवाद जैसे हिंसक संगठन भोले-भाले निर्दोष जनजीवन को क्षत-विक्षत कर रहे हैं, क्योंकि इनमें कहीं भी ‘सर्व’ का भाव नहीं है।

आदि शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन इस दृष्टि से विशिष्ट है। शंकराचार्य संसार में सर्वत्र एक ही ईश्वरीय सत्ता का निर्देश कर मनुष्य को मनुष्य से ही नहीं प्रत्युत समस्त जीव जगत और वनस्पति जगत से भी जोड़ देते हैं। आज जिस ‘बॉयोडायवर्सिटी’ के संरक्षण की बात वैज्ञानिक करते हैं उसकी मूल प्रेरणा शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन में सन्निहित है। इसलिए लोक कल्याण की सिद्धि के लिए अद्वैत दर्शन सर्वथा विशिष्ट और शाश्वत महत्त्व का है।

सभी प्राणियों में एक ही ब्रह्म की सत्ता का दर्शन कर अद्वैत वेदांत का निरुपण करने वाले आदि शंकराचार्य ने भारत को जिस सांस्कृतिक धरातल पर एक सूत्र में पिरोया वह युग-युगांतर के लिए उनका अद्भुत प्रदेय है। एकात्म धाम की स्थापना आचार्य शंकर के महान व्यक्तित्व और कृतित्व के अनुरूप मप्र शासन का साकार कृतज्ञता ज्ञापन है।

समाज शंकराचार्य जी के प्रति जिस श्रद्धा से समृद्ध है, उसी का रूपाकार ओंकारेश्वर का एकात्म धाम है। ओंकार पर्वत पर आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊँची प्रतिमा का होना है। मध्य प्रदेश गौरवान्वित है कि उसकी धरती पर आध्यात्मिक जगत की इस अप्रतिम विभूति ने ज्ञान प्राप्त कर राष्ट्र को एकात्मता के दिव्य भाव से भर दिया।

भावी पीढ़ियाँ इस अपूर्व स्मारक का दर्शन कर युग-युगांतर तक शंकराचार्य जी के महान अवदान से परिचित होती रहेंगी। इस विश्वास के साथ इस विराट प्रतिमा का राष्ट्र को सादर समर्पण निश्चय ही भारतवर्ष के सांस्कृतिक जगत की महान ऐतिहासिक उपलब्धि है।

(लेखक डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र, मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम् स्थित शासकीय नर्मदा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हैं)

इधर खालिस्तान को हवा, उधर क्यूबेक में ‘आजादी-आजादी’ का नारा: जानिए क्या है कनाडा की दुखती रग, जिस पर हाथ रखते ही बिलबिला उठेंगे ट्रूडो

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा और भारत के बीच इस समय तनाव है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ठोस सबूत सार्वजनिक किए बगैर भारत पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव चरम पर पहुँच गया है।

कनाडा ने भारतीय राजनयिक को अपने देश से निकलने का आदेश दिया तो जवाब में भारत ने भी ऐसा ही किया। कनाडा ने कश्मीर की यात्रा करने वाले कनाडाई नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधित एडवायजरी जारी की तो भारत सरकार ने भी कनाडा में रहने वाले भारतीयों के लिए ऐसी ही एडवायजरी जारी की। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष और चार बार के सांसद बैजयंत जय पांडा ने कनाडा की दुखती रग पर हाथ रख दिया है।

भाजपा के उपाध्यक्ष ने रखा कनाडा की दुखरी रग पर हाथ

बैजयंत जय पांडा ने कनाडा की ओर से खालिस्तानी आतंकियों के बचाव और उन्हें मिल रहे समर्थन पर क्यूबेक (Quebec) जैसी दुखती रग पर हाथ रख दिया। पांडा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कनाडा के साथ दोस्ती को देखते हमें भारत में क्यूबेक की स्वतंत्रता के मुद्दे पर एक ऑनलाइन जनमत संग्रह कराने की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए (खालिस्तानी अलगाववादियों को कनाडा की धरती पर ऐसा करने की अनुमति देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए)।”

उन्होंने आगे लिखा, “शायद हमें क्यूबेक स्वतंत्रता आंदोलन के आयोजनों के लिए उनके बलिदानों, बमबारी और हत्या के प्रयासों (फिर से, जैसे कनाडा खालिस्तानियों को अनुमति देने के लिए इतना विचारशील रहा है) के लिए भारतीय जमीन की पेशकश भी करनी चाहिए।” यहाँ उनका तात्पर्य अलगाववादियों को शरण देने से है।

जय पांडा ने कनाडा को निशाना बनाते हुए आगे लिखा, “ऐसा करने से हम दोनों ही देशों में ‘फ्री स्पीच’ जैसी साझे उद्देश्य को बढ़ा सकेंगे और स्वतंत्र क्यूबेक के लिए भी समर्थन बढ़ाया जा सकेगा (जैसा कि इस साल मीडिया में बताया गया है)।”

भाजपा नेता ने कहा, “चूँकि, क्यूबेक की स्वतंत्रता को समर्थन देने वाले कनाडाई नेता लगातार दुनिया भर की यात्रा कर रहे हैं। यूरोपीय नेताओं से मिल रहे हैं। ऐसे में हमें भी उनसे मिलना चाहिए और उनके विचारों को समझना चाहिए। भारत-कनाडा की दोस्ती और सहयोग की साझा भावना के तहत हम दोनों पक्षों की दिल्ली में बैठक की मेजबानी भी कर सकते हैं।”

क्या है क्यूबेक? क्यों माँगी जा रही आजादी?

दरअसल, क्यूबेक ही असली कनाडा (फ्रेंच कब्जे के समय) है। कनाडा को चार राज्यों के संघ के तौर पर बनाया गया था, जिसका प्रमुख स्तंभ है क्यूबेक। ये बाकी कनाडा से अलग इसलिए भी है, क्योंकि क्यूबेक में अंग्रेजी नहीं, बल्कि फ्रेंच भाषी लोग बहुमत में हैं।

क्यूबेक में 94 प्रतिशत लोग फ्रेंच भाषी (लिखना-पढ़ना-बोलना) हैं और वो बाकी के अंग्रेजी भाषी कनाडा से खुद को अलग देखते हैं। क्यूबेक की आजादी के लिए 1980 और 1995 में दो बार जनमत संग्रह भी हो चुका है। साल 1995 में जनमत संग्रह के नतीजों में सिर्फ 1 प्रतिशत का अंतर था।

दरअसल, अलगाव ना चाहने वाले 50.06 प्रतिशत के मुकाबले अलगाव चाहने वालों की संख्या 49.04 प्रतिशत रही। इस थोड़़े से अंतर के कारण ये जनमत संग्रह गिर गया था और क्यूबेक स्वतंत्र देश बनते-बनते रह गया था। बाद में क्यूबेक को अधिक स्वायत्तता दे दी गई। हालाँकि, अलग देश की माँग अभी भी जारी है।

कनाडा के कई हिस्सों में अलगाववादी आंदोलन

क्यूबेक कनाडा में आबादी और क्षेत्रफल, दोनों के मामले में क्रमश: पहले और दूसरे नंबर का राज्य है। कनाडा से क्यूबेक के निकलने का मतलब होगा, कनाडा की कमर टूट जाना। वैसे, कनाडा में सिर्फ क्यूबेक ही नहीं, बल्कि कस्काडिया, वेस्टर्न कनाडा, अल्बर्टा और सस्केचेवान जैसे राज्य भी आजादी की माँग करते रहे हैं। ऐसे में अगर भारत ने कनाडा के अलगाववादियों की माँग को हवा दी, तो कनाडा कहीं का नहीं रहेगा।

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे USA के राष्ट्रपति जो बायडेन? अमेरिकी राजदूत ने बताया – G20 के दौरान PM मोदी ने दिया न्योता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 जनवरी, 2024 को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को निमंत्रित किया है। जो बायडेन को यह निमंत्रण हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दिया गया है।

वर्ष 2024 में भारत के संविधान लागू होने के 74 वर्ष पूरे होंगे एवं वह पूर्ण लोकतंत्र के 75वें वर्ष में प्रवेश करेगा। इससे पहले यह कयास लगाए गए थे कि भारत 2024 में QUAD के नेताओं को 26 जनवरी पर बुलाएगा। जो बायडेन को निमंत्रित किए जाने की पुष्टि भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गारसेट्टी ने की है। राष्ट्रपति बायडेन को प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत आने का न्यौता दिया है। यह जानकारी समाचार वेबसाइट ANI ने दी है।

QUAD भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का समूह है। कूटनीतिक तौर पर यह समूह चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए बनाया गया है। भारत में QUAD नेताओं को इकट्ठा करने से इसकी एकता दर्शाई जाती और साथ ही यह सभी देश विश्व में लोकतंत्र की मजबूती का सन्देश देते।

जो बायडेन यदि यह निमंत्रण स्वीकार करते हैं तो यह उनकी 6 महीनों के भीतर दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। भारत-अमेरिका संबंधों में यह एक बड़ा पल था।

इसके पश्चात वर्ष 2018 में भी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को 26 जनवरी के कार्यक्रमों के लिए निमंत्रित किया गया था लेकिन वह भारत नहीं आ सके थे। उनकी जगह पर फिर आसियान (ASEAN) देशों के नेताओं को गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में शामिल किया गया था। वर्ष 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तेह अल अल सीसी भारत के मुख्य अतिथि बने थे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को भारत में बुलाने को लेकर अभी विदेश मंत्रालय ने कोई अधिकारिक सूचना जारी नहीं की है।

भारत और अमेरिका के सम्बन्ध बीते कुछ समय में काफी मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जून माह में आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका गए थे और इसके पश्चात G20 के लिए जो बायडेन भारत। इन दोनों ही यात्राओं के दौरान दोनों नेताओं में कई मुद्दों पर अहम बातचीत हुई है।

गणेश आरती करने पर सलमान और छोटू खान ने साथियों संग किया हमला, माँ-बेटे समेत 4 को तलवार-लाठियों से मारा

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भगवान की आरती करना एक हिंदू परिवार को महंगा पड़ गया। हिंदू परिवार के पड़ोसी सलमान और छोटू खान ने भजन और आरती बजाने पर हमला कर दिया। इस हमले में हिंदू परिवार के कई सदस्य घायल हो गए हैं।

हिंदू परिवार की उर्मिला यादव ने गणेश पंडाल में आरती के लिए साउंड सिस्टम ऑन किया तो सलमान खान, छोटू खान तलवार और लाठियाँ लेकर आ धमके।इस हमले में माँ-बेटे समेत 4 लोग घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

गली में गणेश प्रतिमा, आरती बजाया तो तलवार से हमला

मामला जनकगंज थाना इलाके के गेंडे वाली सड़क स्थित प्रजापति मोहल्ले का है। मोहल्ले में उर्मिला यादव ने गणेश प्रतिमा की स्थापना की है। ये पूरा विवाद वहीं से जुड़ा है। सलमान, छोटू को इस पूजा-पाठ से दिक्कत हो रही थी। साउंड सिस्टम ऑन करने की वजह से ये हमला किया गया।

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि 19 सितंबर 2023 की रात 9 बजे के बाद जब आरती करने के लिए साउंड सिस्टम चलाया गया, तभी पड़ोस में रहने वाले सलमान खान और छोटू खान ने अपने साथियों संग आकर उनके साथ गाली-गलौच करने लगे।

आरोपितों ने उनसे सिस्टम बंद करने के लिए कहा। उर्मिला यादव का कहना है कि जब उन्होंने साउंड सिस्टम को बंद करने से मना किया तो इन लोगों ने उन पर तलवार और लाठियों से हमला बोल दिया। इस दौरान उर्मिला यादव और उनके बेटे के साथ ही चार लोग घायल हो गए।

सलमान-छोटू के साथ इरफान-परवेज समेत कई लोग

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि हमलावरों की संख्या ज्यादा थी। न्यूज मेल टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों में सलमान खान और छोटू खान के अलावा इरफान, परवेज और अन्य लोग भी थे। इनमें सलमान खान तलवार लिए हुए था।

इस मामले में जनकगंज थाना प्रभारी विपेंद्र सिंह चौहान ने बताया है कि पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर जवानों को तैनात किया गया है, ताकि कोई अन्य घटना न हो।

जिस इलाके में यह घटना हुई है। वह शहर का संवेदनशील इलाका है। यहाँ गणेश उत्सव, नवरात्रि उत्सव और ताजिया के दौरान जरा-सा विवाद इलाके में तनाव का बड़ा कारण बन जाता है। पुलिस घटनास्थल के पास का फुटेज जुटाने की कोशिश कर रही है।

‘हमारे देश में ही बनाया जाए खालिस्तान’: कनाडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने ट्रुडो को परेशानी में डाला, नेता प्रतिपक्ष भी बोले – बिना सबूत-तथ्य के बात कर रहे ट्रूडो

कनाडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री उज्जल दोसांझ ने कहा है कि कनाडा में खालिस्तान बनाया जाना चाहिए। वहीं कनाडा के नेता प्रतिपक्ष पियरे पोलिवर ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को परेशानी में डाल दिया है।

उज्जल पंजाबी मूल के हैं और उनका जन्म जालंधर में हुआ था। वह वर्ष 2004 से 2005 के बीच कनाडा के स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं। कनाडा की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे नेता उज्जल दोसांझ ने कहा है कि यदि सिख खालिस्तान चाहते हैं तो उसे कनाडा में ही बनाया जाना चाहिए। उज्जल ने अंग्रेजी समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ को दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि सिख कनाडा की जनसंख्या में मात्र 2% है, यदि इस छोटे से समुदाय का एक हिस्सा खालिस्तान चाहता है तो उनको अल्बर्टा या ससकतच्वन में बनाने दिया जाए। इससे भारत को क्या खतरा होगा?

उज्जल ने कहा है कि जस्टिन ट्रूडो ने कोई भी साक्ष्य इस सम्बन्ध में सामने नहीं रखे हैं। यह अच्छा होता कि वह तब सारी बात सामने रखते जब कनाडा की पुलिस अपनी जाँच पूरी कर लेती और आरोपों की पुष्टि कर लेती। उज्जल ने यह भी कहा है कि इस बात में कुछ सच हो सकता है कि ट्रूडो के खालिस्तानियों के साथ सम्बन्ध हैं।

उज्जल ने खालिस्तान के प्रश्न पर कहा कि कनाडा में खालिस्तान माँग रहे सिख भारत को नहीं तोड़ेंगे और जो भारत में हैं वह खालिस्तान की माँग नहीं कर रहे हैं। खालिस्तान की माँग करने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो कि कभी भारत नहीं गए।

कनाडा की जनता के सामने साक्ष्य रखें ट्रूडो: पियरे

कनाडा के नेता प्रतिपक्ष पोलिवर पियरे ने कहा है कि जस्टिन ने उन्हें खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार से जुड़े व्यक्तियों को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दिखाए हैं।

जस्टिन ट्रूडो ने 19 सितम्बर को कनाडा की संसद में जून माह में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत सरकार पर मढ़ा था और कहा था कि हमारे पास इसको लेकर विश्वसनीय सबूत हैं। पियरे कनाडा के प्रमुख विपक्षी दल कंजरवेटिव के नेता हैं। इसी को लेकर पियरे ने ट्रूडो से इस मामले को लेकर और जानकारी सामने रखने को कहा है। पियरे का कहना है कि ट्रूडो को विश्वसनीय जानकारी सामने रखनी चाहिए जिससे कनाडाई नागरिक सही निर्णय ले सकें। पियरे का कहना है कि ट्रूडो ने अभी इस मामले तथ्य उपलब्ध नहीं कराए हैं।

जहाँ कनाडा के विपक्ष ने ट्रूडो के दावे पर प्रश्न उठाए हैं वहीं भारत के विपक्ष ने सरकार के स्टैंड का समर्थन किया है। कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा दिए गए जवाब और कार्रवाई पर अपना समर्थन दिया है और कनाडा की बचकानी कूटनीतिक हरकत की आलोचना की है। ट्रूडो के बयान पर विपक्ष के प्रश्न और अन्य देशों का समर्थन नहीं मिलने के कारण अब कनाडा, भारत के विरुद्ध परेशानी में पड़ता दिखाई दे रहा है।