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सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्री उदयनिधि पर FIR दर्ज नहीं कर रही थी तमिलनाडु पुलिस, सुप्रीम कोर्ट पहुँचे वकील: सरकार और DGP सहित 14 को नोटिस

तमिलनाडु के युवा एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बात कही थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि और उनकी पार्टी डीएमके तथा तमिलनाडु सरकार, तमिलनाडु के DGP, डीएमके सांसद ए राजा समेत 14 पक्षकारों को नोटिस जारी करके जवाब माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई के वकील बी जगन्नाथ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से कहा कि उन्हें हाईकोर्ट जाना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे सीधे सुप्रीम कोर्ट कैसे आ गए? क्या वह सुप्रीम कोर्ट को पुलिस स्टेशन बनाना चाहते हैं? इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए मजबूर थे। उदयनिधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन मंत्री होने के चलते FIR दर्ज नहीं हो सकी।

उन्होंने अपना तर्क देते हुए यह भी कहा कि यदि कोई खास समुदाय या लोगों का समूह सनातन धर्म के खिलाफ चिल्लाए तो समझ आता है, लेकिन जब कोई सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर स्कूली विद्यार्थियों को एक धर्म के खिलाफ बोलने के लिए कहता है तो मामला चिंताजनक हो जाता है। वकील ने सवाल किया कि क्या कोई संवैधानिक पद में रहते हुए इस तरह के बयान दे सकता है?

याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करने पर अपनी सहमति दी। सुनवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और उदयनिधि सहित विभिन्न पक्षकारों से जवाब माँगा है।

क्या है मामला

दरअसल, उदयनिधि ने सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है। हम केवल उसका विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

वहीं, डीएमके सांसद ए राजा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म की तुलना एचआईवी और कुष्ठ रोग जैसी सामाजिक कलंक वाली बीमारियों से की जानी चाहिए।

भिखारी ठाकुर ने दिलाई प्रसिद्धि, रामचंद्र माँझी बने चेहरा: जानिए क्या है लौंडा नाच, जिसे बिहार के थिएटरों की अश्लीलता निगल गई

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का ‘लौंडा नाच’ देखते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। उनके साथ ही बेटे तेज प्रताप, पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, श्याम रजक जैसे लोग भी लौंडा नाच का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। ये वीडियो वायरल हुआ, तो भोजपुरी क्षेत्रों का मशहूर ‘लौंडा नाच’ फिर से चर्चा में आ गया। लोग इसके बारे में जानकारी ढूँढने लगे।

ऐसे में मेरे एक जागरुक मित्र ने वॉट्सऐप पर वायरल हो रहा वीडियो भेजा और पूछा कि ये ‘लौंडा नाच’ आखिर होता क्यों है? क्या उसने जो सुना है कि इसमें नाचने वाले लोग ‘किन्नर’ होते हैं, ये सही बात है? चूँकि, सवाल का जवाब देना ही था, तो हमने सोचा कि क्यों न ‘लौंडा नाच’ के बारे में जानकारी विस्तार से दी जाए और आज की पीढ़ी में ‘लौंडा नाच’ को लेकर फैली भ्रांतियाँ भी दूर कर दी जाए।

क्या है लौंडा नाच, कैसे मिली सांस्कृतिक पहचान

लौंडा नाच एक लोक नृत्य है जो बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और नेपाल के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। इस नृत्य में पुरुष कलाकार महिलाओं के कपड़े पहनकर और महिलाओं की तरह नृत्य करके मनोरंजन करते हैं। लौंडा नाच का आयोजन आमतौर पर शादी, जन्मदिन और अन्य समारोहों के अवसर पर किया जाता है। लौंडा नाच में विभिन्न तरह के पारंपरिक नाच-गान जैसे ठुमरी, कजरी, दादरा और चैती शामिल हैं। हालाँकि, लौंडा नाच पर बिहार के थिएटरों की अश्लीलता ने खूब असर डाला है।

वैसे लौंडा नाच का इतिहास काफी पुराना है और यह कई तरह के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों से प्रभावित रहा है। लौंडा नाच की शुरुआत के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि यह नृत्य प्राचीन काल से प्रचलित है। कुछ विद्वानों का मानना है कि लौंडा नाच की शुरुआत राजा-महाराजाओं के दरबारों में हुई थी, जहाँ पुरुष नर्तक महिलाओं के कपड़े पहनकर मनोरंजन करते थे। अन्य विद्वानों का मानना है कि लौंडा नाच की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों के रूप में हुई थी, जहाँ पुरुष नर्तक देवी-देवताओं के रूप में नृत्य करते थे। हालाँकि, लौंडा नाच की बड़ी पहचान को सभी भिखारी ठाकुर से जोड़कर ही देखते हैं।

लौंडा नाच को भिखारी ठाकुर ने दिलाई वैश्विक पहचान

भिखारी ठाकुर भोजपुरी के एक महान लोक कलाकार, रंगकर्मी, लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर भी कहा जाता है। उन्होंने भोजपुरी में कई नाटक, गीत और कविताएँ लिखीं। भिखारी ठाकुर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया। उन्होंने लौंडा नाच को एक लोक नृत्य से एक व्यावसायिक रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों में लौंडा नाच को एक आकर्षक और मनोरंजक रूप में प्रस्तुत किया। भिखारी ठाकुर के नाटकों के माध्यम से लौंडा नाच बिहार और अन्य क्षेत्रों में लोकप्रिय हो गया। उन्होंने लौंडा नाच को एक सम्मानजनक कला रूप के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने नाटकों में लौंडा नाच के कलाकारों को एक सम्मानजनक भूमिका दी, जिसके कलाकारों को समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त हुआ।

भिखारी ठाकुर के बिना लौंडा नाच की वर्तमान स्थिति शायद ही संभव हो पाती। भिखारी ठाकुर ने ‘बिदेसिया, भाई-विरोध, बेटी-बियोग, कलयुग प्रेम, गबरघिचोर, गंगा असनान, बिधवा-बिलाप, पुत्रबध, ननद-भौजाई, बहरा बहार’ जैसे नाटक लिखे और उनका मंचन किया। उनके योगदान के कारण ही भोजपुरी भाषा और संस्कृति को एक नई पहचान मिली।

रामचंद्र माँझी भी रहे बड़ा नाम, मोदी सरकार ने दिया पद्मश्री

भिखारी ठाकुर के शिष्य रहे और उनकी मंडली के अंतिम सदस्य रहे रामचंद्र माँझी का निधन 96 वर्ष की उम्र में पिछले साल सितंबर माह में हुआ। उन्हें भारत सरकार ने साल 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया। रामचंद्र माँझी ने इसे कला के साथ ही भिखारी ठाकुर का भी सम्मान बताया था। बता दें कि रामचंद्र माँझी 95 वर्ष की उम्र तक लौंडा नाच का मंचन करते रहे।

महज 10 वर्ष वर्ष की उम्र में भिखारी ठाकुर की मंडली में शामिल होकर अगले तीन दशक से अधिक समय तक उन्हीं के शागिर्द रहे रामचंद्र माँझी ने बाद में गौरीशंकर ठाकुर, रामदास राही, प्रभुनाथ ठाकुर, दिनकर ठाकुर, शत्रुघ्न ठाकुर की मंडलियों में काम किया और आखिर समय में वो जैनेंद्र दोस्त की रंगमंडली में भी रहे।

लौंडा नाच को लेकर फैली भ्रांतियाँ

दरअसल, ‘लौंडा नाच’ बिहार ही नहीं, पूर्वी यूपी, बंगाल और यहाँ तक कि नेपाल में भी प्रचलित है। हो सकता है कि नाम अलग-अलग हों। इसे बिहार की सांस्कृतिक कला का हिस्सा भी माना जाता है। शादी-विवाह, मुंडन, तिलक जैसे कार्यक्रमों में लौंडा नाच का आयोजन होता रहा है। इस नाच को करने वाले लोग प्रोफेशनल होते हैं। हालाँकि, लौंडा नाच को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ फैली हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। क्योंकि, इन भ्रांतियों के कारण ही लौंडा नाच के कलाकारों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। वे समाज में एक सम्मानजनक स्थान पाने के लिए संघर्ष करते हैं।

अश्लीलता

‘लौंडा नाच’ को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति है इसका अश्लील और भ्रष्ट होना। जबकि यह सच नहीं है। लौंडा नाच एक लोक नृत्य है जो बिहार और अन्य क्षेत्रों की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस नृत्य में महिलाओं के कपड़े पहनकर पुरुष नर्तक नृत्य करते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य मनोरंजन करना है, अश्लीलता फैलाना नहीं।

कलाकारों का समलैंगिक होना

ये एक आम भ्रांति है कि लौंडा नाच के कलाकार समलैंगिक होते हैं। लौंडा नाच के कलाकार समलैंगिक हो सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है। ज़्यादातर लौंडा नाच के कलाकार सामान्य होते हैं और वे महिलाओं के कपड़े पहनकर सिर्फ मनोरंजन के लिए नृत्य करते हैं।

कुछ समय से लोकप्रियता में गिरावट

पिछले कुछ समय से लौंडा नाच की लोकप्रियता में गिरावट आई है। इसका कारण सिनेमा और आर्केस्ट्रा का उदय है, जिन्होंने लौंडा नाच के स्थान को ले लिया है। हालाँकि, कुछ कलाकारों और संगठनों ने लौंडा नाच को जीवित रखने के लिए प्रयास किए हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो लौंडा नाच एक समृद्ध लोक कला रूप है जो बिहार और अन्य क्षेत्रों की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नृत्य सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों से प्रभावित रहा है। वहीं लौंडा नाच को लेकर कई तरह के विवाद भी रहे हैं, लेकिन यह एक लोक कला रूप है जिसे संरक्षित करने और बढ़ावा देने की जरूरत है।

कहने को कॉमेडियन पर काम नफरती, झूठी कहानियाँ सुनाई ताकि मुस्लिम दिखे विक्टिम: कौन हैं हसन मिन्हाज जिसे ओबामा तक दे चुके हैं इंटरव्यू

अमेरिका के भारतवंशी कॉमेडियन हसन मिन्हाज मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। हसन मिन्हाज द्वारा अमेरिका में सुनाई गई भेदभाव की कहानियाँ अब झूठी सिद्ध हो रही हैं। मिन्हाज अमेरीका में खुद के मुस्लिम और अश्वेत होने को लेकर कहानियाँ सुनाकर सहानुभूति बटोरते रहे हैं।

अमेरिका की प्रख्यात मैगजीन ‘द न्यूयॉर्कर’ ने हसन मिन्हाज की इन कहानियों की सच्चाई सामने रखी है। मैगजीन ने हसन की कहानियों की जाँच करके बताया है कि वह लोगों की सहानुभूति बटोरने के लिए ऐसी कहनियाँ सुनाते थे जिनका कोई सर पैर ही नहीं होता था।

कौन हैं हसन मिन्हाज?

हसन मिन्हाज का जन्म अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में हुआ था। उनके माता-पिता उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से अमेरिका गए थे। इस समय हसन की उम्र 37 वर्ष की है। वह अमेरिका के प्रख्यात स्टैंडअप कॉमेडियन और टीवी कलाकार हैं।

हसन अमेरिका में काफी ज्यादा पॉपुलर हैं और उनके लाखों-करोड़ों फैन्स हैं। हसन को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साक्षात्कार तक दिया है। हसन के यूट्यूब पर 16 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वह वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर ‘पैट्रियाट एक्ट’ नाम से एक शो करते थे।

नेटफ्लिक्स पर उनके इस शो की काफी माँग थी। यह शो वर्ष 2018 में चालू हुआ था, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान बंद हो गया था। इस शो के बंद होने पर इसके दर्शकों ने काफी दुख जताया था। मिन्हास अश्वेत और मुस्लिमों के साथ होने वाले अन्याय की कहानी भी बना कर पेश करते हैं।

मिन्हास की अधिकांश कॉमेडी उनके भारतीय मूल के होने, उनके अश्वेत होने और अमेरिकी राजनीति से सम्बंधित होती हैं। हसन इस कॉमेडी को दुःख भरी कहानियों की तरह पेश करते हैं, जिसमें हर बार उनके साथ अश्वेत और मुस्लिम होने के कारण भेदभाव होता है।

क्या-क्या दावे किए हसन ने?

हसन प्रधानमंत्री मोदी के धुर विरोधी हैं और हिंदू राष्ट्रवाद (Hindutva Nationalism) की आलोचना करते हैं। भारत द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने को लेकर साल 2019 के स्वतंत्रता दिवस के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने का प्रयास किया था। इसको लेकर हसन की आलोचना भी हुई थी।

हसन ने मार्च 2019 में भारतीय चुनावों पर एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध प्रोपगैंडा फैलाया था। इसका भारत में काफी विरोध हुआ था और इसे हिन्दू विरोधी करार दिया गया था।

हसन ने एक शो में एक कहानी सुनाते हुए कहा था कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और सऊदी अरब द्वारा पत्रकार जमाल खासोज्जी की हत्या पर बात की तो उन्हें लोगों ने धमकियाँ दीं। इस वीडियो में दिखाया गया था कि उनके घर पर किसी ने एक लिफ़ाफ़े में कुछ पाउडर भेजा था।

हसन ने दावा किया था कि उनको भेजा गया पाउडर जहरीला था और वह खोलने के बाद धोखे से उनकी बेटी पर गिर गया, जिससे उनकी बेटी को अस्पताल ले जाना पड़ा था। हसन मिन्हास के इस दावे की अब पोल खुल गई है।

हसन के दावे की खुल गई पोल

हसन के इस दावे की जाँच अमेरिकी पत्रिका द न्यूयॉर्कर के पत्रकार क्लेयर मलोन ने की है। उन्होंने हसन से कई बार इस विषय में मुलाक़ात भी की और उनसे उनकी कहानियों के बारे में पूछा है।

क्लेयर मलोन से एक मुलाकात में मिन्हाज ने स्वीकार किया कि उनके घर पर जो पाउडर भेजा गया था वह हानिकारक नहीं था और बेटी पर उसके गिरने की कहानी भी फर्जी थी। मिन्हाज ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी बेटी को अस्पताल नहीं ले जाना पड़ा था।

हसन मिन्हाज के खुद को पीड़ित एवं शोषित दिखाकर सांत्वना एवं लोकप्रियता बटोरने के मामले में मलोन ने खुलासा किया है। मिन्हाज से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह कहानी सुनाने के लिए अपने पास से व्यक्तियों और घटनाओं की कल्पना कर लेते हैं।

ऐसी ही एक अन्य कहानी पर भी मिन्हाज की पोल खुली है। मिन्हाज ने दावा किया था कि पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या के दिन वह सऊदी अरब के दूतावास में गए हुए थे और वहाँ के कर्मचारियों ने उनसे कहा था कि एक कॉमेडियन द्वारा आलोचना उन्हें पसंद नहीं आ रही।

मिन्हाज ने यह दावा किया था कि इस दौरान उन्हें दोस्तों और सहकर्मियों की ओर से लगातार मैसेज आ रहे थे कि वह ठीक तो हैं। इस घटना की सच्चाई भी अब सामने आ गई है।

क्लेयर मलोन द्वारा अब मिन्हाज के एक ऐसे करीबी व्यक्ति से पूछताछ की गई तो उसने सच बता दिया। इस व्यक्ति को मिन्हाज के कार्यक्रमों की जानकारी थी। उसने बताया कि मिन्हाज खशोज्जी की हत्या के एक महीने पहले सऊदी अरब के दूतावास गए थे।

गौरतलब है कि सऊदी मूल के अमेरिकी पत्रकार जमाल खसोज्जी की 2 अक्टूबर 2018 को तुर्की के शहर इस्तांबुल के सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या हो गई थी। उन्हें सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों के एजेंट्स ने मार दिया था।

मिन्हाज के इस शो पर यह भी आरोप लगे कि इसमें महिलाओं के साथ भेदभाव होता था। इस शो को बनाने में सहायता करने वाली टीम के कुछ लोगों ने कहा कि मिन्हाज के शो में तथ्यों को जाँचा नहीं जाता था।

मिन्हाज की सच्चाई खुलने के बाद अब उनकी आलोचना हो रही है। कहा जा रहा है कि मिन्हाज ने अपनी झूठी दुःख भरी कहानियाँ सुना कर लोकप्रियता बटोरी है जो कि गलत है।

ट्रेन में देख रहे थे ब्लू फिल्म, महिला कॉन्स्टेबल के उतारे कपड़े… UP पुलिस ने अनीस खान को मार गिराया: जानिए सरयू एक्सप्रेस में उस रात क्या हुआ था

सरयू एक्सप्रेस में महिला कांस्टेबल पर जानलेवा हमले में शामिल मुख्य आरोपित अनीस खान को यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। वहीं उसके दो अन्य साथी भी घायल हुए हैं। इस मुठभेड़ में एसओ पूराकलंदर रतन शर्मा व दो अन्य सिपाहियों के घायल होने की भी सूचना है। ये मुठभेड़ थाना पूराकलंदर के छतरिवा पारा कैल मार्ग पर हुई। इसी मामले में थाना इनायत नगर से अनीस खान के दो अन्य साथियों आजाद और विशंभर दयाल उर्फ लल्लू को भी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं इस मामले पर जानकारी देते हुए स्पेशल डीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया, “सरयू एक्सप्रेस में महिला कांस्टेबल पर जानलेवा हमला करने वाले मुख्य आरोपित अनीस को थाना पूरा कलंदर पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है। उसके दो साथियों को इनायत नगर से मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है।”

क्या है पूरा मामला 

अयोध्या में सावन मेले के दौरान सरयू एक्सप्रेस में मुख्य महिला आरक्षी पर जानलेवा हमला हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना के दिन अनीस खान ने महिला कांस्टेबल से छेड़खानी की कोशिश की थी।  जब कांस्टेबल ने इसका विरोध करते हुए उसे पटक दिया तो अनीस और उसके साथियों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया था। बदमाशों ने ट्रेन की खिड़की से सिर लड़ाकर महिला कांस्टेबल को घायल कर दिया और मनकापुर से पहले ही जब ट्रेन थोड़ी धीमी हुई तो तीनों बदमाश ट्रेन से कूदकर फरार हो गए थे। 

30 अगस्त, 2023 की रात को जो घटना घटी, उसने न सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे पुलिस महकमें को हिला कर रख दिया था। क्योंकि मामला महिला पुलिसकर्मी से जुड़ा था और वह भी उत्तर प्रदेश में। इस घटना में अपराधियों ने योगी सरकार के महिला सुरक्षा के दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। 

यूपी पुलिस ने किया मुख्य आरोपित अनीस खान को ढेर 

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स ने शुक्रवार (22 सितम्बर, 2023) को बड़ा एक्शन लिया। यूपी एसटीएफ ने अयोध्‍या पुलिस के साथ मिलकर एनकाउंटर में मुख्‍य आरोपित अनीस खान को मार गिराया। वहीं उसके दो साथियों को घायल कर पकड़ लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, मारे जाने से पहले मुख्य आरोपित अनीस खान ने पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश की। जिसका जवाब देते यूपी पुलिस ने गोली चलाई।

यह एनकाउंटर अयोध्या के पूराकलंदर के छतरिवा पारा कैल रोड पर हुई। रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को घटी इस वारदात के बाद से ही, पिछले 23 दिनों से यूपी पुलिस इस मामले की जाँच में जुटी थी। लगातार आरोपितों को पकड़ने की कोशिश की जा रही थी। मनकापुर स्टेशन पर बदमाशों के उतरने की संभावनाओं को देखते हुए एसटीएफ ने घटना की टाइमिंग को लेकर जाँच की तो मनकापुर स्टेशन पर एक साथ तीन मोबाइल स्विच ऑफ होने की जानकारी मिली। यहीं से जाँच तेज हुई और इसी कड़ी में साइंटिफिक सर्विलांस और कॉल ट्रेसिंग के जरिए पुलिस को आरोपितों के बारे में पक्की जानकारी मिली थी। जिस पर बिना समय गवाए पुलिस ने एक्शन लेते हुए मुख्य आरोपित को ढेर कर दिया वहीं उसके दोनों साथी पकड़े गए हैं। दोनों साथियों को भी पैर में गोली लगी है। 

क्या हुआ था वारदात की रात 

दरअसल, अनीस खान, आजाद और विशंभर को चोर बताया जा रहा है। जो ट्रेनों में चोरी करते हैं। एसटीएफ का कहना है कि 30 अगस्त की रात सरयू एक्सप्रेस में ये तीनों चोरी करने के इरादे से चढ़े थे। अयोध्या स्टेशन आने वाली थी। बोगी खाली हो चुकी थी। तीनों सीट पर बैठकर ब्लू फिल्म देख रहे थे। सामने महिला कान्स्टेबल बैठी हुई थीं। उन्होंने अपराधियों के इरादे भाँपकर अपनी सीट बदली। महिला कान्स्टेबल जैसे ही दूसरी सीट पर गई। पीछे से तीनों भी आ गए। जब अयोध्या स्टेशन पर बचे पैसेंजर भी उतर गए थे। तब बोगी में तीनों के अलावा केवल महिला सिपाही थीं। जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ी, तीनों ने महिला सिपाही से बदतमीजी करना शुरू कर दिया।

महिला सिपाही ने भी अपने बचाव में हाथ-पाँव चलाए। इसी दौरान एक बदमाश ने महिला कांस्टेबल के चेहरे पर धारदार हथियार से हमला कर दिया और महिला सिपाही के सिर को खिड़की से टकरा दिया। महिला कान्स्टेबल के सिर से खून निकल रहा था। चेहरा कट चुका था। इसके बाद भी वह तीनों अपराधियों से लड़ रही थी। तीनों मिलकर भी महिला सिपाही पर हावी नहीं हो पा रहे थे। जिसके बाद तीनों ने एक साथ उसे पकड़ने की कोशिश छोड़कर उसे पीटना शुरू दिया। सिपाही बेसुध हो गई। ट्रेन के फर्श पर गिर पड़ी। तभी तीनों बदमाशों ने उसके कपड़े उतार दिए। इसी बीच मनकापुर स्टेशन आने से पहले ही पकडे जाने के डर से तीनों ट्रेन के धीमी होते ही कूदकर भाग गए। 

रात भर सीट के नीचे बेहोश पड़ी रही

भागने से पहले आरोपितों ने बेहोश महिला कांस्टेबल को सीट के नीचे धकेल दिया था। महिला सिपाही बेहोश होने के कारण सीट के नीचे पड़ी रही। वहीं वापसी में रात करीब 3 बजे ट्रेन मनकापुर से प्रयागराज के लिए खुली। उस समय तक महिला सिपाही को होश नहीं आया था। सुबह 3:40 बजे तक ट्रेन अयोध्या स्टेशन पहुँची तो पूरा मामला खुला। महिला सिपाही को लोगों के ट्रेन में चढ़ने के बाद होश आया। वह जब खून से लथपथ ट्रेन से नीचे उतरी तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। सभी हैरान रह गए थे। आनन-फानन में महिला सिपाही को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद जाँच शुरू हुई।

‘हम कुत्ते हैं, हमें हमारी पहचान दो’: रेलवे स्टेशन के बाहर डॉगी जैसे कपड़ों में जमा हुए सैकड़ों लोग, लगे भौंकने; जानिए जर्मनी में क्यों हुआ अजीबोगरीब जमावड़ा

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहाँ एक रेलवे स्टेशन के बाहर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और फिर कुत्तों की तरह भोंकना शुरू कर दिया। ये लोग खुद को एक कुत्ते के रूप में पहचान दिलाने के लिए इकट्ठा हुए थे। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वायरल वीडियो बर्लिन के पोट्सडेमर प्लाट्ज रेलवे स्टेशन का है। यहाँ ‘कैनाइन बीइंग्स’ ग्रुप द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह ग्रुप खुद को कुत्ता समझने वाले लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता है।

वायरल वीडियो में लोगों को कुत्तों की तरह आवाज निकलाते और भोंकते सुना जा सकता है। साथ ही लोग कुत्तों की तरह दिखने के लिए नकली मुँह, पूँछ व कपड़े पहने दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में करीब 1000 लोग शामिल हुए थे।

हालाँकि, कार्यक्रम के वीडियो को लेकर एक्स कम्युनिटी (पूर्व में ट्विटर) एक अलग ही कहानी बता रहा है। एक्स कम्युनिटी का कहना है कि वीडियो फोल्सम यूरोप का है। इसमें समलैंगिक पुरुष शामिल हुए थे। इसमें शामिल हुए लोग खुद को कुत्ता नहीं समझते, लेकिन लोगों ने कुत्तों की तरह दिखने वाले कपड़े पहने हुए थे।

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बर्लिन में यह कार्यक्रम जापान में एक आदमी के कुत्ता बनने की खबर सामने आने के बाद आयोजित किया गया। दरअसल, जापान में रहने वाले एक व्यक्ति ने खुद को कुत्ते की तरह दिखाने के लिए 22,000 डॉलर यानि करीब 18 लाख रुपए खर्च किए थे। यह व्यक्ति आम लोगों से दूर रहना पसंद करता है और इसे टोको के नाम से जाना जाता है।

टोको का यूट्यूब पर ‘आई वॉन्ट टू बी एनिमल’ (I want to be animal) नामक चैनल है। इसके 56,000 से अधिक सब्सक्राइबर हैं। टोको ने करीब 1 साल पहले एक वीडियो शेयर कर बताया था कि वह बचपन से ही कुत्ता बनना चाहता था। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स में टोको के कुत्ता बनने के सपने को लेकर बताया गया है।

टोको ने अपना यह सपना पूरा करने के लिए जापानी कंपनी ज़ेपेट से एक क्रूड कॉली आउटफिट यानि कुत्ते की तरह दिखने वाला कपड़ा खरीदा था। जेपेट आमतौर पर टीवी विज्ञापनों और फिल्मों के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन और मैन्यूफैक्चरिंग का काम करती है।

गौरतलब है कि साल 2016 में ‘द सीक्रेट लाइफ ऑफ ह्यूमन पिप्स’ नामक एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की गई थी। इस डॉक्यूमेंट्री में ऐसे लोगों के जीवन को दिखाया गया था, जो कुत्तों की तरह कपड़े पहनकर रहना पसंद करते हैं। इसमें यूरोप भर से कई सारे लोग शामिल हुए थे। इन लोगों ने अपना नाम भी कुत्तों की तरह रख लिया था। 

खालिस्तान का ‘रहनुमा’ बन जस्ट्रिन ट्रूडो ने भारत से बिगाड़े संबंध, कनाडा को भारी पड़ रही ये तल्खी: जानिए क्या कहते हैं आँकड़े

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितम्बर 2023 को कनाडाई संसद में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का जिमेदार भारत को बताया था। इसके पश्चात भारत ने इसका कड़ा विरोध किया है। भारत के कड़े रुख के बाद अब पीएम ट्रूडो के तेवर नरम पड़ गए हैं। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर कनाडा की छिछालेदर और व्यावसायिक कारण भी हैं।

अब पीएम ट्रूडो ने कहा है कि वह भारत को नाराज नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि भारत विश्व की उभरती हुई महाशक्ति है। हालाँकि, कनाडा के आरोपों पर भारत ने कई कड़े कदम उठाए। इनमें कनाडाई राजनयिक का निष्कासन और कनाडाई नागरिक की वीजा पर रोक प्रमुख हैं।

भारत और कनाडा के बीच खराब होते रिश्तों का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार पर भी पड़ेगा। इसके अलावा पर्यटन, पढ़ने के लिए जाने वाले छात्रों और प्रवासी लोगों के जरिए होने वाली कमाई आदि का असर भी दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाला है।

कनाडा-भारत के द्विपक्षीय व्यापार पर क्या असर?

ग्लोब्लाइज्ड दुनिया के सन्दर्भ में किन्हीं दो देशों के अच्छे रिश्तों का अर्थ उनके बीच बढ़ता हुआ व्यापार और अन्य सहयोग होता है। भारत और कनाडा विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश हैं। ऐसे में उनके बीच व्यापारिक संबंधों की काफी अहमियत है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, भारत-कनाडा के बीच वित्त वर्ष 2022-23 में कुल 8.16 बिलियन डॉलर (लगभग 67,632 करोड़ रुपए) का व्यापार हुआ। इसमें भारत ने कनाडा को 4.1 बिलियन डॉलर (लगभग 33,978 करोड़ रुपए) के निर्यात किए, जबकि 4.05 बिलियन डॉलर (लगभग 33,577 करोड़ रुपए) के आयात किए।

दोनों देशों के व्यापार में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 2022-23 में 12.55% की वृद्धि देखी गई। दोनों देशों के व्यापार में भारत का पक्ष मजबूत रहा और कनाडा को 2022-23 में 58.4 मिलियन डॉलर (लगभग 484 करोड़ रुपए) का व्यापार घाटा हुआ। इसका अर्थ है कि भारत ने जितना सामान कनाडा से खरीदा, उससे अधिक कनाडा को बेचा।

यदि खराब संबंधों के चलते कनाडा से भारत का व्यापार बंद होता है या फिर इसमें कमी आती है तो भी भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। भारत का वित्त वर्ष 2022-23 में कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार 1.6 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 1.33 लाख अरब रुपए) रहा है।

कनाडा से किया गया व्यापार भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मात्र 0.5% है। ऐसे में इसके कम होने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला। हालाँकि, कनाडा को इससे नुकसान हो सकता है, क्योंकि भारत उसका 9वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

भारत और कनाडा के पर्यटन क्षेत्र में क्या असर?

भारत और कनाडा के बीच भारी संख्या में पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 80,437 कनाडाई नागरिक भारत आए। भारत में आने वाले पर्यटकों की संख्या में कनाडा चौथे स्थान पर है।

इनमें से अधिकांश ऐसे थे, जो कि भारत में अपने रिश्तेदारों या दोस्तों से मिलने आए। कनाडा से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ा हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है, जिन्हें अप्रवासी भारतीय (NRI) कहा जाता है।

वर्ष 2021 में कनाडाई पर्यटकों ने भारत में 93 मिलियन डॉलर (लगभग 771 करोड़ रुपए) खर्च किए, जबकि इसी दौरान कनाडा पहुँचे भारतीयों ने 3.4 बिलियन डॉलर (28,175 करोड़ रुपए) खर्च किए। यह रकम किसी भी पर्यटक समूह का सर्वाधिक रकम है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 के शुरुआती छह माह में ही भारत से 2.99 लाख पर्यटक कनाडा पहुँचे। ऐसे में भारत में कनाडा से आने वाले पर्यटकों की तुलना में कनाडा जाने वाले भारतीयों से कनाडा को बड़ा फायदा होता है।

भारत और कनाडा के बीच यदि रिश्ते खराब होते हैं तो इसका सीधा असर इस पर पड़ेगा। चूँकि भारत ने भी कनाडाई नागरिकों को वीजा देना बंद किया है, ऐसे में अब कनाडा की तरफ से भी ऐसा ही कोई कदम उठाए जाने की आशंका है। कनाडा अगर भारत से आने वाले पर्यटकों पर रोक लगाता है तो उसे बड़ा घाटा होगा।

भारत से जाने वाले छात्रों से होती है कनाडा को बड़ी कमाई

कनाडा में लाखों की संख्या में भारतीय छात्र पढ़ते हैं। इससे कनाडा के कालेजों को बड़ी कमाई होती है। इसके साथ ही जहाँ यह कॉलेज अवस्थित हैं, वहाँ की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी ये बहुत बड़ा योगदान देते हैं।

वर्ष 2022 में भारत से रिकॉर्ड 2.26 लाख छात्र कनाडा पढ़ने के लिए गए। यह कनाडा में पढ़ने के लिए जाने वाले कुल विदेशी छात्रों का 41% था। इनमें से अधिकांश छात्र कनाडा में पढ़ने जाते हैं, ताकि उन्हें पढ़ाई के पश्चात कनाडा में स्थायी रूप से रहने का अवसर और कनाडाई नागरिकता मिल सके।

कनाडा में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 3.19 लाख से अधिक है। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र कनाडा में पढ़ने के साथ ही पार्ट टाइम नौकरियाँ करते हैं। इस तरह वे कनाडा में श्रमिकों की कमी को भी पूरा करते हैं।

इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्रों ने वर्ष 2021 में कनाडा की अर्थव्यवस्था में लगभग 5 बिलियन डॉलर (41,000 करोड़ रुपए) का योगदान दिया। छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ यह धनराशि और भी बढ़ चुकी है।

भारत से राजनयिक लड़ाई मोल लेकर यदि कनाडा, भारत से आने वाले छात्रों को वीजा देना बंद कर देता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। भारतीय छात्र अपनी प्रतिभा के सहारे अन्य देशों में इसके विकल्प तलाश करेंगे।

हालाँकि, भारत को इस परिस्थिति का लाभ हो सकता है। भारत से जाने वाले छात्रों को उनके परिवार के लोग बड़ी धनराशि भेजते हैं, जो कि भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ाती है। वह कम छात्रों के जाने से घट सकता है। इसके अतिरिक्त, जो प्रतिभाशाली छात्र कनाडा चले जाते हैं वे भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान दे पाएँगे।

विदेश से आने वाले पैसे का क्या?

कनाडा का पक्ष लेने वालों का तर्क है कि भारत को कनाडा से अपने रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए और कनाडा द्वारा लगाए आरोपों पर नरमी बरतनी चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि कनाडा हर महीने एक बड़ी धनराशि भारत भेजी जाती है, जो कि रिश्ते खराब होने पर नहीं आ सकेगी।

केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में विदेश से भारत भेजी गई कुल धनराशि में मात्र 0.6% हिस्सा कनाडा का था। भारत में 2021-22 में 89.12 बिलियन डॉलर (7,386 अरब रुपए) की धनराशि बाहर के देशों से भेजी गई।

भारत को वर्ष 2022-23 में बाहरी देशों से आने वाली धनराशि 100 बिलियन डॉलर (लगभग 8.2 लाख करोड़ रुपए) को पार कर गई। भारत से कनाडा जाने वाले कामगार अधिकांश धनराशि स्वयं पर ही खर्च करते हैं। ऐसे में यह कहना कि कनाडा से रिश्ते बिगड़ने पर भारत को आर्थिक नुकसान होगा, इस बात में कोई ख़ास दम नहीं है।

भारत का कद विश्व में लगातार बढ़ रहा है। भारत, 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। कनाडा, भारत से लड़ाई लेकर नई विश्व व्यवस्था में खुद का मजाक बनवा रहा है, जबकि भारत को इससे कोई अधिक समस्या नहीं आने वाली है।

भारत को J&K-पंजाब के बिना दिखाया, टूर रद्द होते ही ‘विक्टिम’ बना खालिस्तान समर्थक सिंगर शुभ: सिखों और देशभक्ति की दे रहा है दुहाई  

खालिस्तान समर्थक पंजाबी कनाडाई सिंगर शुभनीत सिंह को शायद अपनी गलती का अहसास हो गया है। हालाँकि उनके ये सुर उनके ‘स्टिल रोलिन इंडिया टूर’ रद्द होने के बाद बदले हैं। उन्होंने गुरुवार, 21 सितंबर, 2023 को इंस्टाग्राम पर इसे लेकर पोस्ट लिखी है। उन्होंने लिखा है कि वो अपने आने वाले भारत दौरे के रद्द होने से खासे निराश हैं।

बता दें कि भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद के बीच कनाडाई सिंगर शुभ की भारत के नक्शे पर सोशल मीडिया पर डाली गई विवादास्पद पोस्ट पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ आई थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर ही उन्होंने अपने को पाक-साफ साबित करने के लिए पोस्ट लिखी है। दरअसल, खालिस्तान मुद्दे के समर्थन की वजह से ही रैपर का इंडिया टूर रद्द किया गया था।

‘अपना टूर रद्द होने से निराश हूँ’

इंस्टाग्राम पर अपने पेज पर रैपर ने पोस्ट किया, “भारत के पंजाब से आने वाले यंग रैपर-सिंगर के तौर अपने संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखना मेरी जिंदगी का सपना था। लेकिन हाल की घटनाओं ने मेरी कड़ी मेहनत और प्रगति पर असर डाला है और मैं अपनी निराशा और दुख बताने के लिए कुछ शब्द कहना चाहता था।”

उन्होंने लिखा, “मैं भारत में अपना दौरा रद्द होने से बेहद निराश हूँ। मैं अपने देश में, अपने लोगों के सामने परफॉर्मेंस के लिए ऊर्जा से भरा हुआ और बेहद उत्साहित था। तैयारियाँ जोरों पर थीं और मैं पिछले दो महीनों से पूरे मन और आत्मा से प्रैक्टिस कर रहा था। और मैं बहुत उत्साहित, खुश था। लेकिन, मुझे लगता है कि नियति की कुछ और ही योजनाएँ थीं।”

‘हर पंजाबी को अलगाववादी कहने से बाज आएँ’

शुभनीत में अपनी पोस्ट में आगे जोड़ा, “भारत मेरा भी देश है। मैं यहाँ पैदा हुआ हूँ। ये मेरे गुरुओं और पूर्वजों की धरती है, जिन्होंने अपनी देश की आजादी, वैभव और देश के परिवारों के लिए बलिदान देने में पलक तक नहीं झपकाई थी। और पंजाब मेरी आत्मा है, पंजाब मेरे खून में है। जो भी मैं आज हूँ, मैं पंजाबी होने की वजह से हूँ।

उन्होंने लिखा, “पंजाबियों को देशभक्ति का सबूत पेश करने की जरूरत नहीं है। इतिहास के हर मोड़ पर देख लें, पंजाबियों ने इस देश की धरती की आजादी के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है। इसलिए ये मेरा विनम्र निवेदन है कि हर एक पंजाबी को देश विरोधी और अलगाववादी का नाम देने से बाज आएँ।”

‘मैं तो पंजाब के लिए प्रार्थना कर रहा था’

खालिस्तान समर्थक पंजाबी कनाडाई सिंगर शुभनीत सिंह ने अपनी पुरानी पोस्ट पर सफाई देते हुए इंस्टा पर लिखा, “मेरी स्टोरी पर इस पोस्ट को दोबारा शेयर करने के पीछे का मेरा मकसद केवल पंजाब के लिए प्रार्थना करने का है क्योंकि ऐसी रिपोर्ट है कि पूरे राज्य में बिजली और इंटरनेट बंद है।”

उन्होंने लिखा, “मेरा ऐसा करने के पीछे और किसी भी तरह का विचार नहीं था और पक्के तौर मैं किसी भी तरह से किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहता था। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों ने मुझे गहरे तक प्रभावित किया है, लेकिन मेरे गुरु ने मुझे सिखाया है कि सभी इंसान एक जात और एक ही है। और मुझे सिखाया है कि डरना नहीं है, धमकाने में नहीं आना है यहीं पंजाबियत है। मैं कड़ी मेहनत करना जारी रखूँगा। मैं और मेरी टीम जल्द ही बड़े और मजबूत सपने के साथ आएगी।”

क्या है शुभ से जुड़ा मामला?

‘बुकमायशो’ नामक वेबसाइट ने बुधवार 20 सितंबर को ऐलान किया कि शुभनीत का ‘स्टिल रोलिन टूर फॉर इंडिया’ रद्द कर दिया गया है। एक्स की अपनी पोस्ट में, बुकमायशो ने कहा, “गायक शुभनीत सिंह का भारत के लिए स्टिल रोलिन टूर रद्द कर दिया गया है। इसके लिए, बुकमायशो ने उन सभी कस्टमर के लिए टिकट के पूरे पैसे की वापसी शुरू कर दी है, जिन्होंने शो के लिए टिकट खरीदे थे। रिफंड कस्टमर के मूल लेनदेन अकाउंट में 7-10 वर्किंग डे के अंदर दिखाई देगा।”

इससे पहले इस टिकट-बुकिंग ऐप को अपनी पहली पोस्ट के मद्देनजर खालिस्तानी समर्थक सिंगर शुभ की मेजबानी करने पर सोशल मीडिया पर खासी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इससे पहले, बुधवार (20 सितंबर 2023) को एक्स पर #UninstallBookMyShow ट्रेंड करने लगा था। कुछ यूजर्स ने शुभ को ‘खालिस्तानी’ कहा था। कथित तौर पर, भारत के टॉप क्रिकेटर विराट कोहली ने भी शुभनीत को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया।

ये शो खास तौर 23 से 25 सितंबर तक मुंबई के कॉर्डेलिया क्रूज़ में होने थे। इससे पहले 19 सितंबर को एक अन्य भारतीय ब्रांड बोट (boAt) ने शुभ के भारत दौरे से अपनी स्पॉन्सरशिप वापस लेने का ऐलान किया था।

शुभ का साझा किया गया भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा

शुभनीत सिंह ने 23 मार्च 2023 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी “पंजाब के लिए प्रार्थना करें” टाइटल से पोस्ट की थी। इसमें भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा दिखाया गया था। ये नक्शा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर-पूर्वी राज्यों के बगैर था।

यह पोस्ट भारत की संप्रभुता को चुनौती देने और खालिस्तान को बढ़ावा देने की एक कोशिश थी। कनाडाई सिंगर ने ऐसा उस वक्त किया था जब पंजाब पुलिस खालिस्तानी आतंकवादी अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए उसकी तलाश में थी। शुभ ने उस समय खालिस्तानियों का खुलकर समर्थन किया था।

गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के वहाँ के संसद में सोमवार (18 सितंबर) को भारत पर वांछित खालिस्तानी आंतकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत में हाथ होने का आरोप लगाया था। इसके बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक रिश्ते खराब हो गए। हालाँकि, भारत ने ट्रूडो के लगाए गए इन आरोपों को “बेतुका” और “प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया था।

2024 ओलंपिक का टिकट कटाने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं अंतिम पंघाल, विनेश फोगाट की ‘डायरेक्ट एंट्री’ इनके लिए ही बनी थी बाधा

भारत की युवा पहलवान अंतिम पंघाल ने विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। अंतिम ने दो बार की यूरोपियन चैंपियन एम्मा मालमग्रेन को हराकर यह जीत दर्ज की। इसके साथ ही उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल कर लिया है। ऐसा करने वाली पहली भारतीय पहलवान हैं।

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए मैच में अंतिम पंघाल ने 53 किग्रा कैटेगरी में स्वीडन की एमा मालमग्रेन को 16-6 के बड़े अंतर से मात दी। 19 वर्षीय अंतिम पंघाल ने चैंपियनशिप पहले मैच में गत चैम्पियन को डोमिनिक ओलिविया को 3-2 से हराकर नेक्स्ट राउंड में जगह बनाई थी।

इसके बाद दूसरे राउंड में अंतिम ने पोलैंड की रोकसाना मार्टा जसिना को टेक्निकल सुपिरियॉरिटी के आधार पर हराया था। फिर क्वार्टर फाइनल में रूस की नैटली मलेशेवा से हुए मुकाबले में 9-6 के अंतर से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। हालाँकि इसके बाद सेमीफाइनल में अंतिम पंघाल को बेलारुस की वेनेसा कालजिन्सकाया के हाथों 4-5 के करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया है।

बता दें कि अंतिम पंघाल वही पहलवान हैं जिन्हें नेशनल ट्रायल जीतने के बाद भी एशियन गेम्स के लिए स्टैंड बाय पर रखा गया था। उनकी जगह विनेश फोगाट को बिना ट्रायल ही एशियन गेम्स में डायरेक्ट एंट्री दी गई थी। इसके बाद अंतिम पंघाल हाई कोर्ट भी गईं थीं। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। बाद में विनेश फोगाट ने चोट के कारण अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद कुश्ती संघ ने अंतिम पंघाल का नाम एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा गया था।

गौरतलब है कि विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का अब तक का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। लेकिन अब अंतिम पंघाल के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद कुछ और पदकों की उम्मीदें जाग गई है। इससे पहले पुरुष वर्ग में गुरप्रीत सिंह, अजय सजन और मेहर सिंह क्वालिफिकेशन राउंड में ही हार कर बाहर हो गए था। वहीं अभिमन्यु को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। अब वह ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेलेंगे। इससे भारत को एक और पदक मिलने की उम्मीद है।

मानसी को चाकुओं से गोदा और नदी में फेंक दिया: सीरियल किलर ब्रदर्स गैंग के सलमान और अरशद गिरफ्तार, सराफा कारोबारी को जा रहे थे लूटने

यूपी की स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने सीरियल किलर ब्रदर्स सलीम रुस्तम सोहराब गैंग के दो गुर्गों को लखनऊ से दबोचा है। इन्हें पकड़ कर एसटीएफ ने न केवल एक सराफा कारोबारी को लूट से बचाया है, बल्कि मानसी हत्याकांड का भी खुलासा हो गया है।

गिरफ्तार गुर्गों की पहचान सलमान उर्फ आफताब मलिक और अरशद सिद्दीकी के तौर पर सामने आई है। पूछताछ में इन्होंने चाकू मारकर मानसी की हत्या करने और उसका शव नदी में फेंकने की बात भी कबूली है। मानसी की हत्या 4 सितंबर को की गई थी।

लखनऊ एसटीएफ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सीरियल किलर ब्रदर सलीम रूस्तम सोहराब गैंग के सदस्य अरशद और सलमान को लखनऊ के गुडंबा क्षेत्र में है। ये वहाँ स्कार्पियो क्लब के पास कुर्सी रोड पर सराफा कारोबारी को लूटने के पहुँचे थे। सूचना पर तुरंत एक्शन लेकर एसटीएफ ने आरोपितों को धर दबोचा। पुलिस ने आरोपितों के पास से पिस्टल, तमंचा, पाँच कारतूस, मोबाइल और कार बरामद की।

पूछताछ में दोनों ने 4 सितंबर को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पास से मानसी नाम की युवती को अगवा कर उसकी हत्या की बात भी कबूली। साथ ही बताया कि हत्या के बाद उसकी लाश बहराइच रोड पर घाघरा नदी में फेंक दी थी।

अरशद ने पूछताछ के दौरान यह भी दावा किया कि मानसी का उसके भाई से प्रेम संबंध था। घरवालों के कई बार समझाने के बाद भी दोनों मान नहीं रहे थे और निकाह की जिद पर अड़े थे।

अरशद ने बताया कि उसका भाई पहले से शादीशुदा है। अरशद ने बताया कि मानसी के वजह से उनके घर में तनाव चल रहा था। उनकी बदनामी भी हो रही थी। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि मानसी की हत्या का प्लान उसने ही बनाया था।

प्लान बनाने के बाद अरशद ने इसमें सलमान को भी शामिल किया। दोनों घटना वाली रात स्विफ्ट कार से मानसी के किराए के कमरे इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पास पहुँचे। उसे कार में बिठाकर साथ ले गए। करीब पाँच किलोमीटर के सफर के बाद अरशद और सलमान ने मानसी पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों ने उसकी लाश, मोबाइल और चाकू को बहराइच रोड पर घाघरा पुल से नदी में फेंक दिया।

अब युवती की लाश की बरामदगी के लिए बहराइच पुलिस से संपर्क साधा जा रहा है। एसटीएफ के डिप्टी एसपी धर्मेश शाही के मुताबिक, उन्हें सूचना मिली थी कि सीरियल किलर ब्रदर्स सलीम रुस्तम सोहराब गैंग के गुर्गे कुर्सी रोड पर सराफा कारोबारी को लूटने जा रहे हैं। दोनों को पकड़ा गया और पूछताछ में दोनों ने अपना नाम सलमान उर्फ आफताब मलिक और मो. अरशद सिद्दीकी बताया।

खालिस्तानी आतंकी पन्नू को ABP के पत्रकार ने दिया ऑफर- आप भारत आओ, पंजाब में रेफरेंडम कराने मैं चलूँगा: मोदी सरकार ने कहा- आतंकियों का मंच न बने TV चैनल

केंद्र की मोदी सरकार ने टीवी चैनलों को सलाह दी है कि वे ऐसे लोगों को मंच न दें जिन पर गंभीर अपराध, आतंकवाद के आरोप हैं या फिर वे भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए हैं। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब खालिस्तानी आतंकियों के मुद्दे पर भारत और कनाडा के बीच तनाव है। इस तनाव के बीच ही एबीपी न्यूज (ABP News) पर आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannun) नजर आया था।

बातचीत में आतंकवादी पन्नू को एबीपी न्यूज के पत्रकार जगविंदर पटियाल बार-बार ‘आप’ कहकर संबोधित कर रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने उससे यह भी कहा कि यदि वह भारत आए तो वे उसके साथ जनमत संग्रह करवाने पंजाब जाएँगे। एबीपी न्यूज ने अब इस इंटरव्यू का वीडियो और इससे जुड़ी खबर डिलीट कर दी है।

दरअसल, ABP न्यूज ने ऑपरेशन ‘गद्दार’ टाइटल के साथ गुरपतवंत सिंह पन्नू का इंटरव्यू लिया था। इसमें एबीपी के एग्जीक्यूटिव एडिटर जगविंदर पटियाल ने पन्नू से बात की थी। इसमें पन्नू लगातार खालिस्तान के समर्थन की बात कर रहा है। साथ ही पंजाब को एक अलग देश बताने का राग अलाप रहा था। बावजूद जगविंदर पटियाल आतंकी को बार-बार ‘आप’ और ‘मिस्टर पन्नू’ कहकर संबोधित कर रहे थे।

यही नहीं जब पन्नू ने रेफरेंडम यानी जनमत संग्रह की बात की तो पटियाल ने पहले तो उससे कहा कि पंजाब में चुनाव होता है। वहाँ के लोग वोटिंग कर सरकार चुनते हैं। लेकिन जब पन्नू ने रेफरेंडम की बात की तो पटियाल के सुर बदल गए। उन्होंने कहा, “आप यहाँ आओ। अगर लोग आपके साथ खड़े हो जाएँगे आपको वहाँ का मुख्यमंत्री बना देंगे तो आप बातचीत करना। मैं आपसे कहता हूँ आप यहाँ आइए। मैं आपके साथ चलूँगा और पंजाब में रेफरेंडम करवाऊँगा। अगर लोग कहेंगे कि आपका एजेंडा ठीक है तो आप मुख्यमंत्री बन जाइएगा।”

दिलचस्प बात यह है कि जगविंदर पटियाल ने ऐसा एक बार नहीं, बल्कि कई बार किया। पटियाल ने तो पन्नू से यह भी कहा कि वह भारत में जनमत संग्रह करवाए। इसके बाद उसे जो एजेंडा चलाना है चलाए। यही नहीं इस इंटरव्यू के दौरान पन्नू ने कई बार देश के संविधान से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक पर कीचड़ उछालने की कोशिश की। लेकिन एबीपी न्यूज का पत्रकार से पूरे इंटरव्यू में आप-आप कहते रहे।

आतंकियों के प्लेटफॉर्म न बनें टीवी चैनल

केंद्र सरकार ने गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को एक एडवाइजरी जारी कर कहा है कि टीवी चैनल ऐसे व्यक्तियों को कोई मंच प्रदान करने से बचें जिन पर आतंकवाद या अन्य किसी प्रकार के गंभीर आरोप हैं या फिर वे प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित हैं। बयान में आगे कहा गया है कि हाल ही में एक टीवी चैनल ने ऐसे व्यक्ति का इंटरव्यू किया है, जिस पर आतंकवाद सहित अपराध के गंभीर मामले हैं। साथ ही वह एक ऐसे संगठन से संबंधित है, जिसे भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी बयान में यह भी कहा गया है कि इस इंटरव्यू के दौरान व्यक्ति ने कई ऐसे कमेंट किए गए थे, जो देश की संप्रभुता/अखंडता, भारत की सुरक्षा तथा अन्य देश के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए हानिकारक हैं। साथ ही इससे देश में सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होने की भी आशंका है।