14 सितंबर को हिंदी दिवस था। दुनिया भर इस मौके पर शुभकामना संदेश आए। इसी कड़ी में इजरायल और ऑस्ट्रेलिया के दूतावास ने शुभकामनाओं के साथ वीडियो शेयर किए। इजरायली दूतावास के वीडियो को रीपोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि यह प्रयास अभिभूत करने वाला है।
दरअसल, इजरायली दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो शेयर कर लिखा था, “लाइट्स, कैमरा, एक्शन। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। हिंदी सीखने का सबसे मनोरंजक तरीका हैं हिंदी सिनेमा। इस मौके पर इजरायली दूतावास ने हिंदी सिनेमा के अपने पसंदीदा डायलॉग्स को अदाकारी के तरीके से प्रस्तुत किया है। कौन सा डायलॉग आपको सबसे ज्यादा पसंद आया?”
परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन… ये इस इजराइल एम्बेसी के तीन स्तंभ हैं।
भारतीय फिल्मों के डायलॉग के जरिए हिन्दी को लेकर इजराइली दूतावास का यह प्रयास अभिभूत करने वाला है। https://t.co/akaRyHYbaN
इस वीडियो में सबसे पहले इजराइली राजदूत नाओर गिलोन ‘परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन ये इस इजराइली दूतावास एम्बेसी के तीन स्तंभ हैं’, कहते नजर आ रहे हैं। इसके बाद इजराइली राजनयिक हगार स्पीरो ताल, ‘एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो ओरी बाबू’ कहती नजर आ रहीं हैं। फिर एक अन्य इजरायली राजनयिक ओहाद नकश कयनार, फिल्म हेराफेरी के बाबू राव (परेश रावल) के डॉयलॉग की मिमिक्री करते नजर आ रहे हैं। इसी तरह अन्य राजनयिक भी हिंदी फिल्मों के डायलॉग बोलते नजर आ रहे हैं।
इजरायली दूतावास के इस वीडियो को PM मोदी ने रीपोस्ट किया। साथ ही लिखा, “परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन… ये इस इजरायली दूतावास के तीन स्तंभ हैं। भारतीय फिल्मों के डायलॉग के जरिए हिंदी को लेकर इजरायली दूतावास का यह प्रयास अभिभूत करने वाला है।” बता दें कि ‘परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन…’ अमिताभ बच्चन स्टारर साल 2000 में आई फिल्म मोहब्बतें का डॉयलॉग है। इसमें अमिताभ बच्चन ने गुरुकुल के प्राध्यापक नारायण शंकर की भूमिका निभाई थी।
वहीं ऑस्ट्रेलियाई राजदूत फिलिप ग्रीन ने भी एक वीडियो शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, “हिंदी न केवल ऑस्ट्रेलिया में, बल्कि दिल्ली स्थित हमारे राजनयिकों के बीच भी लोकप्रिय है। आज हिंदी दिवस के अवसर पर हमारे राजनयिक अपनी पसंदीदा हिंदी कहावतें, जो उन्हें प्रेरित करती हैं आपसे साझा कर रहे हैं।”
आपके ये दोहे और मुहावरे मंत्रमुग्ध करने वाले हैं! ऑस्ट्रेलिया के राजनयिकों का हिन्दी के प्रति ये लगाव बेहद ही दिलचस्प है। https://t.co/N9DCdtk6cd
इस वीडियो में ऑस्ट्रेलियाई राजदूत हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते देखे जा सकते हैं। इसके बाद दूतावास के कर्मचारी हिंदी की कहावतें और दोहे कहते नजर आ रहे हैं। इनमें सबसे पहले एक कर्मचारी, ‘काल करे सो आज करे, आज करे सो अब। पल में परलय होएगी बहुरि करेगा कब’ दोहा सुनाते नजर आ रहे हैं। इसके बाद अन्य कर्मचारी, ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’, ‘जैसा देश, वैसा भेष’, ‘जहाँ चाह, वहाँ राह’, ‘साँच को आँच क्या’ और कर्म करो, फल की चिंता मत करो’ जैसे कुछ प्रसिद्ध हिंदी मुहावरे सुनाते नजर आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस वीडियो को भी रीपोस्ट किया। साथ ही उन्होंने लिखा है, “आपके ये दोहे और मुहावरे मंत्रमुग्ध करने वाले हैं। ऑस्ट्रेलिया के राजनयिकों का हिंदी के प्रति ये लगाव बेहद ही दिलचस्प है।”
“हम भारतीयों के प्रति बहुत आभारी हैं, जिन्होंने हमें अंकन की कला प्रदान की। इस आधार के बिना, हमारे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रहस्योद्घाटन अबूझ पहेली बने रहते।”
यह प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था। भारतीय उपमहाद्वीप की समृद्ध ज्ञान-परंपरा प्राचीन काल में वैश्विक समुदाय के लिए अनुकरणीय आदर्श रही है। यह भारत की गंभीर अनुसंधान-वृत्ति, उन्नत वैचारिकी और वैज्ञानिक प्रगति की परंपरा परिणाम रहा है।
‘आधुनिक सभ्यता के उद्गम स्थल’ के रूप में प्रतिष्ठित प्राचीन भारतीय बुद्धिमत्ता विज्ञान, चिकित्सा, आध्यात्मिकता, भाषा-विज्ञान, तत्व मीमांसा, खगोल विज्ञान आदि विविध अनुशासनों को समाहित करते हुए विविध क्षेत्रों का समन्वय और सामरस्य करती रही है।
मानविकी के क्षेत्र में महान भारतीय विचारकों ने सरल और जीवनोपयोगी विचारों का प्रतिपादन और प्रचार-प्रसार किया। इससे आधुनिक समाज को भारत की साहित्यिक, कलात्मक और दार्शनिक अवधारणाओं से ज्ञान-समृद्ध होने का अवसर प्राप्त हुआ। प्राचीन भारतीय अभिलेखों एवं वास्तुकला में शरीर विज्ञान, आयुर्वेद, मनोविज्ञान एवं अन्य विषयों से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है। निश्चय ही, ये भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं इतिहास की समृद्धि के सूचक हैं।
प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं अनुसंधान के केंद्र नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, शारदा जैसे विश्वविद्यालय रहे हैं। ये भारतीय बुद्धिमत्ता और विद्वता की उद्गमस्थली हैं। नालंदा विश्वविद्यालय विश्व की सबसे प्राचीन विद्यापीठों में से एक है। इस युग को ‘भारत का स्वर्ण युग’ कहा जाता है। इस समय इस विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में वेद, व्याकरण, चिकित्सा, तर्कशास्त्र और गणित सहित विविध प्रकार के विषय शामिल थे। इसका परिसर आज भी सदियों पुरानी ज्ञान की विरासत का गवाह है।
हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए, जिन्होंने इस विश्वविद्यालय के माध्यम से ज्ञान की सशक्त नींव रखी। गणित और विज्ञान में आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, ब्रह्मगुप्त, रामानुज,कणाद, नागार्जुन के साथ-साथ चिकित्सा में सुश्रुत और चरक आदि कई अन्य विद्वान हमारे ऐसे ही पूर्वज हैं, जिन्होंने प्राचीन भारत को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान का भंडार बना दिया था।
नालंदा, तक्षशिला जैसे भारत के प्राचीन ज्ञान-मंदिर महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ औपनिवेशिक प्रभुत्व, प्रतिकूलताओं एवं विध्वंस के युगों का भी प्रमाण देते हैं। विदेशी आक्रमणकारियों और औपनिवेशिक शक्तियों ने अपने एजेंडे के अनुरूप भारत के इन संस्थानों, भारतीय ज्ञान-परम्परा और अर्थ-व्यवस्था का विध्वंस करने का कार्य किया। उनके वर्चस्व के परिणामस्वरूप प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा नष्ट-भ्रष्ट हो गई।
औपनिवेशिक शासन में समृद्ध भारतीय ज्ञान-परंपरा का अवमूल्यन कर विदेशी पाठ्यक्रमों, अंग्रेजी भाषा और मूल्यों को लागू करने के जबरिया प्रयास किए गए। मैकॉले द्वारा प्रतिपादित काले अंग्रेज और क्लर्क पैदा करने वाली शिक्षा नीति 1835 में लागू हुई। हालाँकि, समय-समय पर इसका प्रतिकार भी हुआ।
राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, रविंद्र नाथ टैगोर जैसे दूरदर्शी विद्वानों और विचारकों ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा सूचना संग्रहण और प्रसारण करने का उपकरण नहीं होनी चाहिए, जैसा कि औपनिवेशिक शासन द्वारा किया जा रहा था। अपितु शिक्षा नागरिकों में आलोचनात्मक सोच, नवाचार और सांस्कृतिक अस्मिता के जागरण का भी साधन होनी चाहिए।
‘विश्वगुरू भारत’ और ‘सोने की चिड़िया भारत’ जैसे विशेषणों में अन्यान्योश्रित संबंध है। एंगस मेडिसन नामक ब्रिटिश आर्थिक इतिहासकार ने लिखा है कि 1700 ई. में विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 27 फीसदी थी, जो अंग्रेजी शासन की औपचारिक शुरुआत (1757) में घटकर 23 फीसद हो गई। आज़ादी के समय यह मात्र 3 फीसदी रह गई थी।
मिन्हाज मर्चेंट और शशि थरूर (एन ईरा ऑफ डार्कनेस नामक अत्यंत पठनीय पुस्तक में) ने औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों द्वारा लूटी गई संपदा की गणना करते हुए उसे 3 ट्रिलियन डॉलर बताया है। यह 2015 में ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद से भी कहीं ज्यादा है। इस प्रकार विदेशी शासन ने भारत को बौद्धिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर खोखला करते हुए दिवालिया कर दिया।
औपनिवेशिक काल में हुए नुकसान की भरपाई करने का सबसे विश्वसनीय तरीका अद्यतन अनुसंधान है। अनुसंधान की गहनता एवं ज्ञान-विज्ञान की उत्कृष्टता और आध्यात्मिक उन्नति एवं आर्थिक समृद्धि की पारस्परिकता को स्वीकारते हुए ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की है। यह प्राचीनतम और समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनराविष्कार करने और भारत के वर्तमान शोचनीय शोध परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन करने की महत्वपूर्ण पहल है।
50 हजार करोड़ रुपए की प्रारंभिक राशि के आवंटन के साथ गठित यह फाउंडेशन भारत के अनुसंधान क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। निश्चित रूप से यह पहल भारत में अनुसंधान-वृत्ति को बढ़ावा देने, नवाचार पैदा करने और शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने में योगदान देगी। यह कदम अनुसंधान के महत्व की स्वीकृति और वैज्ञानिक प्रगति की आवश्यकता के प्रति भारत की सजगता का प्रमाण है। यह फाउंडेशन वैश्विक मंच पर भारत के कद को बढ़ाने का कारण बनेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा व अनुसंधान के क्षेत्र में बुनियादी सुधार एवं शिक्षा के समावेशी स्वरूप पर बल देती है। यह नीति शैक्षणिक संस्थानों के भीतर अनुसंधान, नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने जैसे उद्देश्यों पर केंद्रित है। इसमें अंतर्निहित मूल भाव देश के युवाओं को अपने देश की प्रगति में ठोस योगदान देने की क्षमता से लैस करना है।
एनईपी के इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगी। यह फाउंडेशन प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, मानविकी, कला और सामाजिक विज्ञान सहित विविध क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। ज्ञान-विज्ञान, अनुसंधान, समाज, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने में भी इस फाउंडेशन की भूमिका प्रभावी होगी।
आज भारत ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नवाचार किए हैं। भारत में कुशाग्र बुद्धिमत्ता एवं विपुल मानव संसाधन हैं। लेकिन अभी भी हम कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। भारत की 140 करोड़ आबादी का काफी बड़ा हिस्सा अभी भी मूलभूत भौतिक सुविधाओं से वंचित है। ऐसी तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों को अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करना और अधिक-से-अधिक सुविधाएँ प्रदान करना अभीष्ट है।
आज भी अनुसंधान पर हमारे देश द्वारा व्यय की जाने वाली राशि दुनिया में आनुपातिक रूप से चिंताजनक रूप से कम है। सरकार के सामने अन्य चुनौतियों के साथ-साथ इन संस्थानों को पर्याप्त बजट आवंटित करने की भी बड़ी चुनौती है। इसके लिए सरकारी शोध बजट को बढ़ाने के अलावा निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की भी आवश्यकता है।
भारतीय इतिहास, कला, मानविकी और भारतीय भाषाओं में शोध को प्रोत्साहित करने और आर्थिक सहयोग देने की आवश्यकता है। देश के युवा पीढ़ी को तकनीकी सुविधाओं और वैज्ञानिक दृष्टि से लैस करने की आवश्यकता है। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दूरदर्शी पहल करते हुए भारत सरकार ने एनआरएफ की स्थापना की है। इस फाउंडेशन की परिकल्पना न केवल वर्तमान अनुसंधान-वृत्ति को बढ़ावा देने के लिए की गई है, अपितु अनुसंधान की परिवेशगत चुनौतियों से निपटने के लिए भी की गई है।
सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम निश्चित रूप से भारत को वैश्विक अनुसंधान पटल पर स्थापित करते हुए सर्वसमावेशी और धारणीय/टिकाऊ विकास के माध्यम से भारतवासियों के जीवन में सुख-सुविधाओं की प्राप्ति का कारण बनेगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) के तत्वावधान में कार्य करने वाले इस फाउंडेशन का प्रबंधन एक सशक्त गवर्निंग बोर्ड के हाथ में रहेगा। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और प्रतिष्ठित शोधकर्ता और पेशेवर लोग शामिल होंगे। इसकी महत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि स्वयं प्रधानमंत्री इस फाउंडेशन के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। उनके साथ केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री उपाध्यक्ष होंगे।
एनआरएफ के संचालन को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार देखेंगे। इनके पास कार्यकारी परिषद की अध्यक्षता का दायित्व भी रहेगा। यह फाउंडेशन शिक्षा जगत, उद्योग जगत, सरकारी विभागों और देश के शोध संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देगा। इसमें वैज्ञानिकों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ उद्योग जगत तथा राज्य सरकारों को भी शामिल किया जाएगा। इस प्रकार यह पहल उन नीतियों और नियामक ढाँचों को तैयार करने पर जोर देगी, जो आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं और अनुसंधान एवं विकास की दिशा में उद्योग जगत की भूमिका को बढ़ाते हैं।
कुल मिलाकर राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन का गठन वैश्विक अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भारत की नेतृत्व क्षमता को प्रकट करने की महत्वाकांक्षी परियोजना है। उच्च कोटि के अनुसंधान के माध्यम से ही आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों का उदाहरण हमारे सामने हैं। निकट भविष्य में प्रौद्योगिक प्रगति ही आत्मनिर्भरता की आधारभूमि होगी।
ध्यान रखने की बात है कि लालफीताशाही की समाप्ति करके, आधारभूत ढाँचे और आर्थिक संसाधनों की नियमित और समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करके, प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन देकर ही यह फाउंडेशन अपने घोषित लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेगी। इसके प्रबंध-तंत्र को भी राजनीतिक आग्रहों और हस्तक्षेप से मुक्त रखते हुए आवश्यक स्वायत्तता दिया जाना अपेक्षित होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की कोख से जन्मी यह फाउंडेशन भविष्य के भारत का स्वरूप निर्धारण करेगी। किसी भी प्रकार के विचलन से बचकर ही यह भारत को ज्ञान-अर्थव्यवस्था और विश्व महाशक्ति बनाने में सहयोगी होगी।
अयोध्या में एक सैनिक पर ईसाई बनने के लिए दबाव डालने का मामला सामने आया है। पीड़ित सैनिक ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई है। रक्षा मंत्रालय को भी शिकायत भेजी है। पीड़ित जवान भारतीय सेना की सिग्नल कोर में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं।
उन्होंने अपनी शिकायत में पादरी आशीष कुमार पीटर पर पीटने और गाली देने का आरोप लगाया है। कथित तौर पर पादरी सेना में लगने वाले हर हर महादेव, राजा रामचंद्र की जय, जय भवानी जैसे युद्धघोषों को बंद कराने के लिए उकसाता है। इस संबंध में अयोध्या के कोतवाली थाना में 26 अगस्त 2023 को केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
पीड़ित जवान के पिता भी भारतीय सेना के MES विभाग से साल 2015 में रिटायर हुए थे। शिकायत में सैनिक ने बताया कि उनके पिता ने रिटायरमेंट के बाद शहर में घर बनवाने का फैसला किया। सैनिक के पिता को एक पुराने मित्र ने प्रॉपर्टी डीलर बता कर आशीष कुमार पीटर उर्फ जॉनी नाम के पादरी से मिलवाया।
पादरी आशीष पीटर अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से सटे मोदहा इलाके में बने एफजी मिशन चर्च में रहता है। पीड़ित नायब सूबेदार के पूर्व सैनिक पिता से जॉनी पीटर के साथ श्याम शंकर पीटर और सचिन चौधरी नाम के दो अन्य लोग भी खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताकर मिले थे। इन सभी ने मिल कर चर्च से सटी एक जमीन की बिक्री के लिए उनसे करीब 20 लाख रुपए लिए थे।
शिकायत के अनुसार पैसे लेने के बाद पादरी पीटर ने पीड़ित जवान और उनके पिता का फोन उठाना बंद कर दिया। अपने पिता को परेशान देख कर नायब सूबेदार छुट्टी लेकर घर आए। 25 जुलाई 2023 को पादरी से पैसे माँगने वे चर्च गए। कथित तौर पर यहाँ पादरी आशीष पीटर और श्याम शंकर पीटर ने मिलकर उन्हें बेरहमी से मारा। आरोप है कि माँ-बहन की गालियाँ देते हुए सैनिक से कहा कि यदि पैसे वापस चाहिए तो ईसाई बनना पड़ेगा। इस घटना के बाद से पीड़ित जवान और उनका परिवार बेहद डरा और मानसिक तनाव में है।
पीड़ित सैनिक के मुताबिक उनकी पत्नी का इलाज भी मिलिट्री हॉस्पिटल में चल रहा है। उनका दावा है कि पादरी के साथ किए गए सारे लेनदेन के सबूत उनके पास हैं। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 420, 406, 323, 504 और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। FIR में आशीष पीटर, सचिन चौधरी और पीड़ित के पिता को पादरी से मिलवाने वाले रामचंद्र प्रजापति को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हालाँकि 15 दिन से अधिक बीत जाने पर भी अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
दुनिया में होगा सिर्फ ईसाइयों का राज
4 सितंबर 2023 को पुलिस में दर्ज करवाए गए अपने बयान में पीड़ित नायब सूबेदार ने बताया है कि 25 जुलाई 2023 को जब वे पादरी आशीष पीटर के पास गए तो उन्हें लालच दिया गया। पादरी ने कहा, “तुम्हारे हिन्दू धर्म में क्या रखा है। आने वाले समय में ईसाइयों का ही दुनिया पर राज होगा।” साथ ही पादरी ने ईसाई बनने पर बिना पैसे जमीन देने का लालच दिया।
सेना के युद्धघोष से चिढ़
पीड़ित नायब सूबेदार ने अपने बयान में आगे बताया कि पादरी आशीष पीटर ने उनसे भारतीय सेना द्वारा युद्ध काल में लगाए जाने वाले नारों के बारे में भी उलटी-सीधी बातें की। आरोप है कि पादरी ने जय काली माता, बजरंग बली की जय, जय ज्वाला माता और कुछ अन्य नारों को बंद करवाने की कसमें खाने लगा। नायब सूबेदार को मुँहमाँगा पैसा देने का लालच देते हुए ऐसे सैनिको को अंदर ही अंदर तैयार करने में मदद माँगी जो इन नारों को बंद करवाने की आवाज उठाएँ।
सवर्ण बिरादरी के सैनिकों के खिलाफ भड़काया
पुलिस को दिए गए बयान और शासन को भेजी गई शिकायत में पीड़ित सैनिक ने बताया कि पादरी उन्हें बार-बार OBC समुदाय का बता रहा था। उसने सेना में मौजूद सवर्ण समुदाय के सैनिको के खिलाफ भी पीड़ित को उकसाया।
पुलिस में दर्ज बयान
चर्च में घेरकर पीटने का आरोप
पीड़ित सैनिक ने अपने बयान में बताया है कि वो देश को सर्वोपरि मानते हैं और पादरी की बातें सुन कर उन्होंने उसे जेल भिजवाने की चेतावनी दी। इस बात से नाराज होकर पादरी ने चर्च के बाकी सहयोगियों के साथ घेर कर उन्हें मारा और कहा कि वह पुलिस को कुछ भी नहीं समझता है। पुलिस में शिकायत वाली चेतावनी पर जॉनी पीटर ने कहा, “पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ईसाइयों की ताकत देखनी है तो जाकर फतेहपुर के पुलिस अधिकारियों से हाल पता कर लेना।”
पीड़ित सैनिक ने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि उनकी शिकायत पर दर्ज एफआईआर में पुलिस ने पादर के खिलाफ धर्मान्तरण की धारा नहीं लगाई है।
पुलिस में दर्ज बयान
सैनिक के पिता को पादरी बनाने का ऑफर
पीड़ित जवान के पिता व पूर्व सैन्यकर्मी ने भी 4 सितंबर 2023 को पुलिस में अपने बयान दर्ज करवाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ पादरी ने पहले जमीन दिलाने के नाम पर प्रॉपर्टी डीलर बनकर 20 लाख रुपए की ठगी की। जब रिटायर्ड सैन्यकर्मी ने अपने पैसे वापस माँगे तो उन्हें चर्च में पादरी बनाने का लालच दिया गया। बयान में पीड़ित नायब सूबेदार के पिता ने बताया है, “आशीष पीटर उर्फ़ जॉनी ने कहा कि तुम्हें चर्च का पादरी बनाऊँगा। यहाँ पर ही अपना घर बना कर रहो और चर्च का पूरा देखभाल करो।”
चर्च की वैधता पर सवाल
पीड़ित सैनिक ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपित पादरी जॉनी पीटर का चर्च फ्री गोस्पल मिशन एन्ड चर्च नाम की सोसायटी के रजिस्ट्रेशन पर चलता है। यह संस्था 23 जनवरी 1984 में रजिस्टर्ड हुई थी, जिसकी वैधता 1 सितंबर 2016 तक थी। संस्था के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर रजिस्ट्रार के दस्तखत हैं। नायब सूबेदार ने आशंका जताई है कि वर्तमान में यह चर्च बिना अपने सर्टिफिकेट को रिन्यूवल कराए संचालित हो रहा है। पीड़ित सैनिक ने चर्च की वैधता पर सवाल खड़े किए और उसे सरकारी जमीन पर जबरन कब्ज़ा बताया है।
चर्च सोसाइटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
जिस जगह यह चर्च बना हुआ है, वहाँ से रामजन्मभूमि की सड़क मार्ग से दूरी महज 6-7 किलोमीटर है। ट्रेन से अयोध्या आने वाले अधिकतर यात्री और अन्य लोग चर्च के बगल मौजूद स्टेशन पर उतरते हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित सैनिक ने बताया कि उन्होंने पुलिस में दर्ज करवाए गए बयान की कॉपी शिकायत रक्षा मंत्रालय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, DGP सहित कई अन्य सक्षम लोगों को भी भेजी है।
आरोपित रामचंद्र प्रजापति
ऑपइंडिया ने चर्च के सर्टिफिकेट रिन्यूवल और सैनिक द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पादरी आशीष पीटर उर्फ़ जॉनी का पक्ष जानने के लिए उन्हें कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऑपइंडिया ने इस मामले में अयोध्या सिटी डिप्टी एसपी शैलेन्द्र सिंह को सम्पर्क किया। DSP शैलेन्द्र सिंह ने हमें बताया कि जिन धाराओं में पादरी पर केस दर्ज हैं, उनमें नियमनुसार गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि केस में जाँच जारी है।
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की शोभायात्रा पर इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। इस मामले में पुलिस ने 14 सितंबर 2023 की रात मामन खान को गिरफ्तार किया है। वह मेवात की फिरोजपुर झिरका सीट से कॉन्ग्रेस का विधायक है। उस पर हिंसा के लिए लोगों को भड़काने का आरोप है। गिरफ्तारी से बचने के लिए मामन खान ने हाई कोर्ट में भी अर्जी लगाई थी। लेकिन कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नूहं हिंसा मामले की जाँच के लिए गठित SIT ने मामन खान को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए मामन ने 12 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उसने कहा था कि हिंसा वाले दिन और उससे पहले वह प्रभावित इलाके में नहीं था। साथ ही उसने उच्च अधिकारियों की देखरेख में SIT जाँच कराने और जाँच पूरी होने तक अपने खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग की थी।
मामन की इस याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई हुई थी। इस दौरान SIT ने उसके खिलाफ सबूत कोर्ट में पेश किए थे। इसके चलते कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई थी। अब SIT ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस ने दो बार नोटिस भेजकर मामन को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ था।
बता दें कि हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज नूहं हिंसा के पीछे मामन खान के हाथ होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था कि नूहं हिंसा के गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में कहा है कि वे कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान के संपर्क में थे। उन्होंने कहा था कि हिंसा से पहले मामन खान ने 29, 30 और 31 जुलाई को नूहं का दौरा किया था। वह दंगा प्रभावित इलाकों में लोगों के साथ लाइव कॉन्टैक्ट में था।
क्या है मामला
हरियाणा के मेवात के नूहं जिले में 31 जुलाई, 2023 को हिंदू संगठन श्रावण सोमवार पर बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा निकाल रहे थे। इसी दौरान घात लगाए बैठे इस्लामिक दंगाइयों ने उन पर हमला बोल दिया था। पत्थरबाजी, गोलीबारी और आगजनी की थी। इस्लामी दंगाइयों ने नल्हड़ मंदिर को तीन ओर से घेरकर फायरिंग की थी। इसके चलते 1500 से अधिक हिंदू मंदिर में फँस गए थे। आरोप है कि इस्लामवादियों ने हिंदुओं को घेरकर उन्हें जान से मारने की प्लानिंग की थी।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। अंतरिक्ष से लेकर समंदर की गहराइयों तक अपना लोहा मनवा रहा है। भारत वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन चुका है। ये वो भारत है, जिसे कुछ साल पहले तक दुनिया के दूसरे देशों की तरफ देखना पड़ता था।
भारत अब वैश्विक ताकतों की आँखों में आँखें डालकर अपनी शर्तों पर बात करता है। वो भारत, जो कभी पाकिस्तान से शांति के लिए, कश्मीर में आतंकवाद रोकने के लिए गिड़गिड़ाने की हद तक चला जाता था, वो भारत सालों से पाकिस्तान को भाव नहीं देता है। इसी भारत में रहने वाले कुछ पाकिस्तान प्रेमियों को ये पसंद नहीं आता। उन्हीं में से एक नाम शेखर गुप्ता का भी है।
‘कभी’ शेखर गुप्ता जैसों की सलाह मानी जाती थी वजनदार
शेखर गुप्ता यूपीए सरकार के समय देश के सबसे ताकतवर पत्रकारों में से एक थे। उनकी सलाह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक जाती थी। शेखर गुप्ता जैसे लोग ही पाकिस्तान को लेकर हमेशा सॉफ्ट स्टैंड रखते रहे हैं, लेकिन कुछ सालों में इनकी अहमियत गिरी है।
ऐसा इसलिए भी, क्योंकि पहले की सरकारों की तरह मोदी सरकार न तो ऐसे लोगों को सिर-आँखों पर बिठाती है और न ही इनके प्रेम वाले देश पाकिस्तान को कोई भाव देती है। फिर भी, शेखर गुप्ता जैसे लोग अब बिन माँगे सलाह देने लगे हैं। वो अलग बात है कि ये सलाह 7-आरसीआर (पूर्व नाम) के लिए न होकर उनके प्रिय देश पाकिस्तान के लिए होती है।
पाकिस्तान-चीन की सांसे रोकने वाले कॉरिडोर से परेशान हुए शेखर गुप्ता
जी-20 की अध्यक्षता के दौरान दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के प्रमुख नई दिल्ली में जुटे। जी-20 का शिखर सम्मेलन भारत से शान से आयोजित किया। जब शिखर सम्मेलन से पहले की रात तक पूरी दुनिया इस बार को लेकर दुविधा में थी कि जी-20 के देश किसी एजेंडा पर सहमति बना भी पाएँगे या नहीं।
भारत ने दुनिया के सभी देशों को नई दिल्ली घोषणापत्र (New Delhi Declaration-G20) के लिए तैयार किया, बल्कि उन विषयों को भी शामिल किया, जिनकी चर्चा तक की किसी को उम्मीद नहीं थी। यही नहीं, जी-20 के शिखर सम्मेलन के पहले दिन ही भारत ने ऐसी घोषणा कर दी, जो पाकिस्तान और उसके आका चीन की सांसें रोकने वाला रहा।
भारत ने मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप तक इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट को चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट की काट के तौर पर पूरी दुनिया देख रही है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में सऊदी अरब से लेकर यूएई, इजरायल, इटली और फ्रांस समेत कई देश शामिल हैं। ये ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसके लिए सहमति बनाने में अमेरिका ने भी पूरा जोर लगा दिया।
खास बात ये है कि अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट में जी-7 देशों की ओर से बनाया गया फंड फाइनेंसियल पार्टनर है। इसे भारत की ताकत कहें या कुछ और, भारत ने ऐसे देशों को उन प्रोजेक्ट से पूरी तरह दूर रखा है, जो चीन और चीनी पैसों के कर्जजाल में फँसे हैं। खासकर पाकिस्तान जैसा पड़ोसी मुल्क। ये प्रोजेक्ट पूरा होते ही अगर सबसे ज्यादा नुकसान में कोई देश रहेगा, तो वो देश चीन के बाद पाकिस्तान ही होगा।
ऐसे में अब पाकिस्तान परस्त शेखर गुप्ता जैसे लोग पाकिस्तान को मुफ्त की सलाह देने लगे हैं। उनका कहना है कि अब पाकिस्तान को चीन का साथ छोड़ देना चाहिए, वर्ना वो पीछे रह जाएगा। इसके लिए उसे भारत की दुश्मनी भी छोड़ देनी चाहिए। उनका कहना है कि अब पाकिस्तान का भला यूएई और सऊदी अरब भी नहीं कर पाएँगे, क्योंकि उनका बड़ा हित हिंदुस्तान के साथ जुड़ चुका है।
Besides challenging China’s BRI, the Ind-ME-Europe corridor lays down stark choices for Pakistan. If it wants to join the global mainstream, it must bury enmity of India & become a normal state. Or be a permanent Chinese vassal. Days of presuming Saudi-UAE patronage are gone
यूँ तो दिखने में ये सलाह मामूली सी लगती है, जिसे कोई भी दे सकता है। लेकिन, इस सलाह के पीछे शेखर गुप्ता का वो छिपा हुआ दर्द भी बाहर आ गया, जिस पर वो खुलकर बात नहीं कर पा रहे थे। उनको इस बात की चिंता है कि पाकिस्तान पीछे छूटता जा रहा है।
उन्हें इस बात की चिंता है कि भारत पाकिस्तान को भाव नहीं दे रहा है तो पाकिस्तान को अब अपने भले के लिए भारत से हाथ मिला लेना चाहिए, वर्ना वो बर्बाद हो जाएगा। चूँकि अब तक पाकिस्तान को बचाते रहे यूएई और सऊदी अरब भी भारत के साथ खड़े हो गए हैं तो उन्हें पाकिस्तान की बर्बादी की चिंता सता रही है।
अंदर के दुश्मनों की पहचान जरूरी
कहते हैं न, हम अपने दुश्मन से तो लड़ सकते हैं। उसके खिलाफ रणनीति भी बना सकते हैं। लेकिन, उन दुश्मनों से कैसे लड़ सकते हैं, जो उनके अपने ही खेमे में बैठकर जड़ में मट्ठा डाल रहे हैं। शेखर गुप्ता जैसे कथित पाकिस्तान प्रेमी पत्रकारों की भी यही हकीकत है।
एक तरफ तो अनंतनाग में पाकिस्तानी आतंकियों से मुठभेड़ चल रही है। कश्मीर में पाकिस्तान प्रॉक्सी वार लड़े जा रहा है। हमारे सैनिक शहीद हो रहे हैं तो दूसरी तरफ हमारे ही लोग, जो दिल से दूसरी तरफ हैं, वो ये सोच रहे हैं कि पाकिस्तान को कैसे मजबूत किया जाए।
लखनऊ की NIA कोर्ट ने तिलक और कलावा देखकर हत्या करने वाले ISIS के दो आतंकियों को गुरुवार (14 सितंबर 2023) को फाँसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल खान ने कानपुर के जाजमऊ में रिटायर्ड शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अदालत ने आतिफ और मोहम्मद फैसल को IPC की धारा 302, 120B और UAPA की धारा 16 एवं 18 के तहत फाँसी की सजा सुनाई है। इससे पहले कोर्ट ने 4 सितंबर 2023 को दोनों आतंकियों को दोषी ठहराया था।
आतंकियों को फाँसी की सजा मिलने पर मृतक के परिजनों ने खुशी जाहिर की है। रमेश बाबू शुक्ला की पत्नी ने आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल खान को मौत की सजा मिलने पर कहा कि अब जाकर उनके कलेजे को ठंडक मिली है। दोनों दोषी और मृतक कानपुर के रहने वाले हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, NIA के विशेष वकील कौशल किशोर शर्मा ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से दोनों आतंकियों के लिए मृत्यु दंड की माँग की थी। इसके लिए कोर्ट में दलील दी थी कि दोनों ने एक निर्दोष शिक्षक के हाथ में बंधे कलावा और माथे पर तिलक देखकर हत्या की थी।
उन्होंने आगे कहा कि जो अच्छा इंसान बनने की शिक्षा देता है, उसकी हत्या कर जिहाद पर चर्चा का माहौल बनाया गया था। इन दोनों के अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आते हैं। इसके आधार पर कोर्ट ने इन्हें फाँसी की सजा सुनाई है। वहीं, इनका एक साथी मोहम्मद सैफुल्लाह उत्तर प्रदेश ATS के साथ मुठभेड़ में पहले ही मारा जा चुका है।
बता दें कि केस लगभग 78 महीने तक चला। अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 29 गवाह पेश हुए थे। इन गवाहों में उत्तर प्रदेश सरकार में वर्तमान राज्यमंत्री असीम अरुण भी शामिल हैं। ट्रायल के दौरान असीम अरुण ATS के IG पद पर तैनात थे। हालाँकि जाँच एजेंसी ने कुल 64 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे। सबूत के तौर पर 61 दस्तावेज भी जमा हुए थे।
क्या था घटनाक्रम
कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के विष्णुपुरी कालोनी में रहने वाले रमेश बाबू 24 अक्टूबर 2016 को कॉलेज से पढ़ा कर घर लौट रहे थे। रास्ते में खड़े 2 युवकों ने उन्हें गोली मार दी। इस हमले में रमेश बाबू की मौके पर ही मौत हो गई। तब पुलिस ने अज्ञात हमलावरों पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू की। हालाँकि घटना के 7 माह बीत जाने पर भी हमलावरों का कुछ अता-पता नहीं चल पाया।
इस बीच 7 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश ATS की लखनऊ में उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट के साजिशकर्ता सैफुल्लाह से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में सैफुल्लाह मारा गया पर उसके पास से बरामद हथियार चकेरी में रमेश बाबू की हत्या में प्रयोग हुए पाए गए।सैफुल्लाह केस की जाँच में UP ATS के साथ NIA भी शामिल हो गई।
NIA ने हथियारों के कनेक्शन जोड़ते हुए पहले फैज़ल और बाद में आतिफ को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने खुद को ISIS के खुरसान मॉड्यूल का सदस्य बताया। सैफुल्लाह भी इसी नेटवर्क से जुड़ा था। फैज़ल और आतिफ को ISIS के नेटवर्क से हथियार मिले थे। इन सभी ने भारत में जिहाद फैलाने की कसम भी खाई थी।
इन हथियारों को चलाने की प्रैक्टिस वो नदी के किनारे किया करते थे। रमेश बाबू की हत्या करके दोनों ने हथियारों की टेस्टिंग की थी। एक बार दोनों ने लखनऊ के ऐशबाग में IED ब्लास्ट का भी प्रयास किया था। हालाँकि वो विस्फोटक फट नहीं पाया।
खासतौर पर कत्ल के लिए रमेश को ही चुनने की वजह दोनों ने उनके हाथ में कलावा और माथे पर तिलक होना बताया था। जाँच के दौरान यह भी सामने आया था कि आतिफ और फैज़ल ने रमेश बाबू की हत्या से पहले वीडियो रिकार्डिंग भी की थी। यह वीडियो सीरिया में आतंकियों को भेजी थी। पुलिस ने इस हत्याकांड के बाद आस-पास के कुछ अन्य लोगों को पूछताछ के लिए उठाया था। हालाँकि सबूत न मिलने के कारण बाकियों को छोड़ दिया गया था।
केरल के ईसाई पादरी रेव मनोज केजी इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने भगवान अयप्पा के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर में पूजा करने का फैसला लिया है। इसके लिए वो 41 दिनों का ‘व्रत’ भी कर रहे हैं। उनके इस फैसले से चर्च खासा नाराज है। इसके बाद उन्होंने पादरी वाला अपना लाइसेंस लौटा दिया है।
हालाँकि, चर्च का कहना है कि उसने पादरी मनोज केजी का लाइसेंस सात माह पहले ही रद्द कर दिया है। अब वो कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है। चर्च ने उनके काम को धर्म विरोधी करार दिया है। इसके लिए चर्च ने उन्हें फटकार भी लगाई है।
कुछ दिन पहले प्राप्त की तुलसी की माला
मीडिया रिपोर्ट्स में के मुताबिक, फादर मनोज ने कहा कि ‘तत्वमसि’ दर्शन उन्हें अयप्पा के करीब लाया। इसके लिए वो छह दिन पहले तिरुवनंतपुरम में एक शिव मंदिर गए और वहाँ के पुजारी से मोतियों की माला भी प्राप्त की थी। ये माला भी सबरीमाला में दर्शन की प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।
भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए कही ये बात
इस विवाद को लेकर फादर मनोज ने कहा कि ‘तत्वमसि’ दर्शन उन्हें अयप्पा के करीब लाया। उन्होंने कहा कि धर्म ही ईश्वर को अलग-अलग तरीकों से देखते हैं। सभी धर्म एक बात कहते हैं। ऐसे में ईश्वर को धर्म की सीमा तक सीमित नहीं किया जा सकता।
पादरी मनोज ने कहा कि दुनिया में हरेक समस्या का समाधान हो सकता है, अगर सभी धर्म एक ईश्वर की बात को समझ लें। ऐसे में दूसरे धर्म को जानने के लिए अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी धर्मों का लक्ष्य मानव कल्याण है।
मनोज ने कहा, “जब चर्च को मेरे लक्ष्य के बारे में पता चला तो उसने कहा कि इस तरह का आचरण अस्वीकार्य है। मुझसे स्पष्टीकरण माँगा कि मैंने उसके सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन क्यों किया। इसलिए, स्पष्टीकरण देने के बजाय मैंने चर्च की ओर से मुझे दिया गया आईडी कार्ड और लाइसेंस लौटा दिया।”
पादरी मनोज को ये चीजें तब दी गई थीं, उन्होंने पादरी का पद संभाला था। बता दें कि 41 दिनों के उपवास के बाद एंग्लिकन पादरी फादर डॉक्टर मनोज सबरीमाला की तीर्थयात्रा पर निकलेंगे। वहाँ वे सभी अनुष्ठानों का लगन से पालन करेंगे और भगवान अयप्पा का आशीर्वाद ग्रहरण करेंगे। ।
सबरीमाला मंदिर की मान्यताएँ
सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है, जिन्हें विकास के देवता के रूप में जाना जाता है। भगवान अयप्पा को शिव और विष्णु के पुत्र के रूप में भी माना जाता है। मंदिर में भगवान अयप्पा को योगमुद्रा में बैठे हुए दिखाया गया है।
सबरीमाला मंदिर के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों को कई नियमों का पालन करना पड़ता है। तीर्थयात्रियों को 41 दिनों के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है, जिसमें वे मांस, मछली, शराब और अन्य वर्जित पदार्थों का सेवन नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों को लोहे की वस्तुओं को छूने से बचना चाहिए।
“मैं नहीं चाहती कि किसी भी औरत को कभी भी ये झेलना पड़े। जब तक मैं होश में थी, उन्होंने मेरा रेप किया।” मणिपुर हिंसा के दौरान गैंगरेप की शिकार 37 साल की मैतेई पीड़िता एक इंटरव्यू में जब आपबीती बता रही थी तो वो जिस्म ही नहीं बल्कि पूरे वजूद में दर्द को समेटे उस खौफनाक मंजर को याद कर फफक-फफक कर रो पड़ी थीं।
मणिपुर हिंसा में कुकी पुरुषों के गैंग रेप का शिकार हुई ये औरत शायद ही इस हादसे से कभी उबर पाए। मई की शुरुआत में ही मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान यौन उत्पीड़न का ये भयानक मामला सामने आया था। पीड़िता के साथ 3 मई को गैंग रेप किया गया। इसके बाद से वह विस्थापितों के लिए निर्मित एक राहत शिविर में रह रही हैं।
गैंगरेप पीड़िता ने दो महीने से अधिक वक्त तक अपने साथ हुई इस ज्याददती का खुलासा नहीं किया था। लोगों ने ही इस चौंकाने वाले मामले की जानकारी अधिकारियों को दी थी। बिष्णुपुर थाने में पीड़िता ने 9 अगस्त 2023 को इस अपराध की जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी। ये थाना पीड़िता के चुराचाँदपुर गाँव के अब तबाह हो चुके घर से 35 किमी दूर पड़ता है।
दरअसल ‘जीरो एफआईआर’ किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है और इसके लिए ये जरूरी नहीं कि अपराध उसी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ हो। बिष्णुपुर थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376डी, 354, 120बी और 34 के तहत केस दर्ज किया है।
एफआईआर होने के बाद बीते महीने अगस्त में मीडिया ने इस मामले को रिपोर्ट किया था। द हिंदू के मुताबिक, पीड़िता की शिकायत के बाद बिष्णुपुर पुलिस थाने में दर्ज ये जीरो एफआईआर उसी दिन चुराचाँदपुर पुलिस थाने को स्थानांतरित कर दी गई थी।
एफआईआर के मुताबिक, जब 3 मई की शाम 6.30 बजे उपद्रवियों ने उनके और उनके पड़ोसियों के घरों को जलाना शुरू किया तो वो अपने दो बेटों, भतीजी और भाभी के साथ अपने जलते हुए घर से जितनी तेजी से भाग सकती थे उतनी तेजी से भागी थीं, लेकिन गिरने की वजह से वो उपद्रवियों के हाथ लग गई और उन्हें जिंदगी भर टीस देने वाले उस वाकए का सामना करना पड़ा। मणिपुर में अधिक से अधिक महिलाएँ अब पुलिस के पास आ रही हैं और अपने साथ हुए खौफनाक बर्ताव और बर्बरता के बारे में बता रही हैं। ये इसलिए कि अधिकारी उन्हें बोलने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं।
‘मुझे गाली दी और जबरन नीचे गिरा दिया’
चुराचाँदपुर की रहने वाली गैंगरेप की शिकार तीन बच्चों की माँ की आँखों से न्यूज द ट्रुथ के 13 सितंबर 2023 के यूट्यूब पर डाले गए इंटरव्यू में, पीड़िता के लगातार आँसू बह रहे थे। ये देख इंटरव्यू के लिए गए रिपोर्टर भी कहने लगे कि मैं भाई की तरह आपसे अनुरोध कर रहा हूँ तो इस दौरान उनके साथ आई एक दूसरी महिला ने उन्हें ढाढस बँधाया और उनका दर्द बयाँ किया।
इस दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र करते हुए इस दूसरी महिला ने बताया कि यह 3 मई को शाम 6:30 से 7 बजे के आसपास का वक्त था। जब कुकी उग्रवादी पीड़िता के इलाके में घर जला रहे थे।
जब उन्होंने देखा कि पड़ोसियों के घर जल रहें हैं, तो वो अपने दो बेटों जिनमें छोटा 7 और बड़ा 11 साल का है, के साथ ही अपनी साढ़े चार साल की भतीजी को पीठ पर बैठाकर भाभी इंदो के साथ भागने लगीं। उनकी भाभी भी अपनी पीठ पर ढाई साल के एक बच्चे को लेकर उनके आगे दौड़ रही थीं।
उन्होंने आगे बताया कि ये लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे। करीब आधा किलोमीटर ही दौड़ी होंगी तभी वो लड़खड़ाकर सड़क पर गिर पड़ी। इससे उसके घुटनों और माथे पर चोटें आ गई। वो खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।
इस दौरान उनसे आगे दौड़ रही उनकी भाभी उनके पास वापस पीछे लौटी, भाभी ने पीठ से उनकी भतीजी को उठा लिया। उनके जोर देने पर भाभी पीड़िता के दो बेटों संग उस जगह से भागने के लिए तैयार हुई। भाभी ने उनसे भी उठकर भागने के लिए कहा, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकी।
पीड़िता के साथ आई औरत ने उनके दिल दहला देने वाले सदमे के बारे में बताते हुए कहा जब पीड़िता अपनी चोटों से जूझ रही थी तो इस दौरान आरोपित वहाँ पहुँच गए। वो उठने की कोशिश कर रही थी तो वे आए और उन्होंने उसके साथ जोर-जबरदस्ती की। उन्होंने उसे जमीन पर गिरा दिया, गालियाँ दी और सभी तरह की ऐसी गैर जरूरी हरकतें की जो शायद लफ्जों में बताई न जा सकें। मसलन उन्होंने पीड़िता को दबोचा उसे बेदर्दी से छुआ।
पाँच लोगों ने बर्बरता से दबोचा
ये बताते हुए गैंगरेप पीड़िता के साथ आई दूसरी महिला भी इस कदर हिल गई कि उसे कहना पड़ा कि मैं यहाँ उन सभी अवांछित हरकतों का जिक्र नहीं करना चाहती, लेकिन उसे पूरी तरह से उन लोगों ने जमीन पर दबा के रखा था। वो मदद के लिए चिल्लाई भी, लेकिन इन हालात में वो पूरी तरह से असहाय थी।
वो आगे कहती है आप समझ सकते हैं, “पाँच लोग एक ही वक्त में एक महिला को पकड़ रहे हैं तो वो असहाय हो ही जाएगी। अब वो लोग उसके साथ हर तरह की न किए जाने वाली भद्दी हरकते करते हैं और कुछ समय बाद चार या पाँच लोग और आते हैं, आतंकवादी या उग्रवादी ऐसे ही कुछ वो कौन थे मैं ये नहीं जानती।”
वो आगे बताती हैं कि वो लोग आए और उन्होंने भी उसे परेशान करना शुरू कर दिया। उस पल वो बेहोश हो गई और जब उसे होश आया, तो उसने खुद को एक मैतई के घर में पाया। वो कई लोगों से घिरी हुई थी और लोग उसके चेहरे पर पानी छिड़क रहे थे।”
जैसे ही गैंगरेप पीड़िता होश में आई, उसने अपने बच्चों के बारे में पूछा। हालाँकि, वे सब लोग पहले ही जा चुके थे, क्योंकि उसने ही उनसे खुद को छोड़ देने और भागने के लिए कहा था। अगर वो उसका इंतजार करते, तो उनकी जान ख़तरे में पड़ जाती।
उनकी भाभी ने अपने साथ छोटी बच्ची को भी ले गई थीं। लगभग आधे घंटे तक खोजने के बाद पीड़िता को अपने बच्चे मिले जो वहाँ आसपास के घरों के कोनों में छिपे हुए थे। जब पीड़िता ने उनका नाम पुकारा तो वे दौड़कर उसके पास आए और सबने पूरी रात उस मैतई के घर में बिताई।
रेप के बाद दिखने लगे थे यौन रोगों के लक्षण
इस खौफनाक घटना के बाद में सेना के जवानों ने गैंगरेप पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह पहुँचाया। शुरुआत में पीड़िता ने इस खौफनाक घटना के बारे में किसी को नहीं बताया। वो इसे अपने दिल में लेकर घुटती रहीं, लेकिन उनकी सेहत बिगड़ने लगी।
हारकर वो प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र (पीएचसी) गई और वहाँ से उन्हें क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) अस्पताल में रेफर कर दिया गया। उन्हें डर था कि अगर वह डॉक्टर के पास गई तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनके साथ क्या हुआ था। वो बगैर डॉक्टर के पास गए घर वापस आ गई।
इसके बाद पीड़िता की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनके के पेट में गंभीर दर्द था। इसके साथ ही उन्हें खुजली जैसे यौन संचारित रोग (एसटीडी) के लक्षणों का अनुभव हुआ। तब वो 7 जुलाई को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जेएनआईएमएस) अस्पताल गई थीं।
इस दौरान उन्होंने इस घटना के बारे में अपने पति या किसी और को नहीं बताया। वो उन सभी दिनों में दर्द और परेशानी अकेले सहती रही। गैंग रेप पीड़िता के साथ आई महिला ने बताया कि जब वो और उनकी बहन (सगी नहीं) के इलाज के लिए जेएनआईएमएस अस्पताल गए तो तब उन्होंने गैंगरेप पीड़िता को एक महिला के साथ बेंच पर बैठे देखा था। वो बहुत रो रही थी और उन्होंने उसे अपनी आपबीती उनके साथ साझा करने के लिए हिम्मत दी।
इस महिला ने आगे कहा, “वे सभी लोग जिनके घर मणिपुर हिंसा में जला दिए गए थे उन्होंने अपने जीवन की सारी बचत, सब कुछ खो दिया था। जो लोग कभी अमीर थे, वे अब भिखारी बन गए थे। उनके पास एक पैसा भी नहीं है और सबसे बुरा उनके साथ गैंग रेप किया गया था।”
पीड़िता के साथ आई महिला ने पुलिस के सहयोग की भी तारीफ की। उन्होंने बताया, “पुलिस ने बहुत मदद की और उनका रवैया बहुत सहयोगात्मक था। पुलिस ने पीड़िता से बयान देते वक्त बगैर किसी डर के सब सच बताने का भी अनुरोध किया। उन्होंने आगे बताया कि कल हमें जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से मिलना था, लेकिन यहाँ (मणिपुर) लागू होने वाले कुछ नियमों के वजह से शायद हम उनसे कल या परसों मिलेंगे।
लोकलाज की वजह से घुटती रही थीं
इस दौरान पीड़िता ने बताया कि उनका एक बच्चा उनके पास था और दो बच्चे बाल गृह में थे। गैंगरेप पीड़िता के साथ आई महिला ने बताया कि पीड़िता के पति को भी पूरे घटना की जानकारी है और वो पूरी तरह से अपने जीवनसाथी के समर्थन में हैं।
इस महिला ने बताया, “लेकिन जब पहली बार पीड़िता के पति ने उसके साथ हुई दरिंदगी के बारे सुना तो वह बहुत निराश हुए। वो बहुत गुस्सा भी हुए क्योंकि पीड़िता ने इस बारे में हमसे खुल कर बात की थी। ऐसा रेप को सामाजिक कलंक मानने की वजह से था।”
पीड़िता ने बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज ‘जीरो एफआईआर’ के साथ संलग्न अपने बयान में कहा, “मैंने अपनी और अपने परिवार की इज्जत बचाने और सामाजिक बहिष्कार से बचने के लिए घटना का खुलासा नहीं किया। इस शिकायत को दर्ज करने में देरी सामाजिक कलंक और लोक-लाज की वजह से हुई है। मैं खुद को ख़त्म करना भी चाहती थी।” इस जीरो एफआईआर में पीड़िता ने अपने साथ घटी सभी दर्दनाक घटनाओं को सिलसिलेवार बताया है।
इंटरव्यू के दौरान पीड़िता ने खौफनाक मंजर को याद करते हुए कहा, “मुझे उस सदमे और दर्द का एहसास होने लगा, जो बगैर मेरी किसी गलती के मेरे खिलाफ किए गए उन जघन्य अपराधों की वजह से मुझे झेलना पड़ा। मेरे साथ दुर्व्यवहार, यौन और शारीरिक उत्पीड़न करने वाले आरोपितों के गिरोह को उचित सजा दी जानी चाहिए।
दो औरतों को नंगे घुमाने का वीडियो था वायरल
इस साल जुलाई में ही मणिपुर में पुरुषों के एक समूह के दो महिलाओं को सड़क पर नंगा घुमाने का एक खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर साझा किया गया था। इसकी पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर निंदा की गई और कार्रवाई की माँग की गई। फ़िलहाल, इस वीडियो में दिख रहे आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
was registered at Nongpok Sekmai PS (Thoubal District) against unknown armed miscreants and the investigation has been started. The State Police is making all-out effort to arrest the culprits at the earliest.
मणिपुर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को 8 अगस्त 2023 को बताया कि 3 मई से 30 जुलाई तक लगभग तीन महीने की अवधि के बीच 6,500 से अधिक केस दर्ज किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में पेश पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज केसों में सबसे अधिक हिस्सा “आगजनी, लूटपाट और घरेलू संपत्ति को नष्ट करने की श्रेणी के तहत दर्ज किया गया है।
ऐसे केस हजारों में है और इनमें से एक ही मामले में कई जीरो एफआईआर दर्ज हैं। इसमें से आगजनी के 4,454, लूटपाट के 4,148. घरेलू संपत्ति नष्ट करने के 4,694 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के 584 केस हैं।
बता दें कि देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में अप्रैल में मणिपुर हाई कोर्ट के एक फैसले की वजह से तनाव बढ़ गया था। इसमें में राज्य को अनुसूचित जनजाति की स्थिति के मुद्दे पर फैसला लेने का आदेश दिया गया था।
गौरतलब है कि मैतई और कुकी समुदाय के बीच पहली झड़प 3 मई 2023 को हुई थी। तब मैतई समुदाय के अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की माँग का विरोध करने के लिए पहाड़ी इलाकों में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर (एटीएसयूएम) ने “आदिवासी एकजुटता मार्च” आयोजित किया था।
गुजरात के वडोदरा में भगवान श्रीराम का अपमान करने के आरोप में इकबाल मियाँ मलिक को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, इकबाल मियाँ का निकाह मुस्लिम लड़की से तय हुआ था, लेकिन बाद में लड़की का निकाह कहीं और हो गया। इससे नाराज होकर इकबाल ने उस लड़की और उसकी ननद के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट किए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला वडोदरा के शिनोर थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाले एक युवक ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा था कि उसकी बहन और बीवी के नाम से स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट हैं। इन अकाउंट से आपत्तिजनक पोस्ट किए जा रहे हैं। शिकायत में कहा था कि उसकी बहन ने इन फेक अकाउंट्स के स्क्रीनशॉट भेजे थे।
शिकायत के अनुसार, इन स्क्रीनशॉट में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आपत्तिजनक फोटो थी। इस फोटो में आरोपित ने भगवान राम के हाथ में सुअर वाली इमोजी लगाई थी। साथ ही तस्वीर के नीचे आपत्तिजनक टेक्स्ट लिखा था। इसके अलावा, उसने उस लड़की का मोबाइल नंबर लिखकर लोगों को उस पर कॉल करने के लिए भी कह रहा था।
इस पूरे मामले में ऑपइंडिया ने शिनोर पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर एआर महिदा से बातचीत की। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता शिनोर तालुका के पुनियाड गाँव का रहने वाला है। आरोपित ने शिकायतकर्ता की बीवी के नाम से स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर तीन फर्जी अकाउंट बनाए थे। इन अकाउंट से वह शिकायतकर्ता की बीवी और बहन की फोटो शेयर करता था।”
सब इंस्पेक्टर महिदा ने आगे कहा, “आरोपित इकबाल मियाँ ने स्नैपचैट पर भगवान श्रीराम की फोटो का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक पोस्ट किया था। साथ ही शिकायतकर्ता की बहन का नंबर ‘वायरल’ करते हुए लिखा था, ‘जिस में हिम्मत है वह इस नंबर पर फोन करे’। युवक की शिकायत के बाद टेक्निकल रूप से इसकी जाँच शुरू की।”
उन्होंने कहा, “जाँच में स्नैपचैट के साथ ही इंस्टाग्राम अकाउंट भी मिले हैं। इन अकाउंट को चेक करते हुए एक मेल आईडी मिली है। मेल आईडी की जाँच में एक मोबाइल नंबर सामने आया। उक्त मोबाइल नंबर की जाँच की तो पता चला कि यह बकरोल गाँव के रहने वाले इकबाल मियाँ का है। आरोपित की पहचान होने के बाद एक टीम भेजकर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।”
सब इंस्पेक्टर ने कहा, “उसके पास से बरामद फोन में सभी फर्जी अकाउंट और उससे पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री भी मिली। शिकायत करने वाले युवक की बीवी का निकाह आरोपित इकबाल मियाँ के साथ तय हुआ था, लेकिन इसके बाद लड़की की निकाह उससे नहीं हुआ। इससे गुस्साए इकबाल मियाँ ने लड़की से बदला लेने के लिए फेक अकाउंट बनाकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।”
1 अक्टूबर, 2023 से बर्थ सार्टिफिकेट यानी कि जन्म प्रमाण पत्र का रोल बढ़ने जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा जारी नए नियम के अनुसार यदि आपके पास सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट है तब भी स्कूल में एडमिशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी, वोटर आईडी, पासपोर्ट, आधार कार्ड, विवाह पंजीयन करा सकते हैं। वेरिफिकेशन के लिए इसका उपयोग सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केन्द्र सरकार ने 13 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बर्थ सर्टिफिकेट को सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर पर लागू किया जा रहा है ताकि केंद्र और राज्य स्तर पर जन्म व मृत्यु डेटाबेस तैयार किया जा सके। इस नियम के लागू होने के बाद राज्य और केंद्र सरकार जन्म व मृत्यु के डेटा को आपस में आसानी से शेयर कर पाएँगी। साथ ही, सरकारी सेवाऍं और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सही तरीके से हो सकेगा।
Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2023 that allows the use of a birth certificate as a single document for admission to an educational institution, issuance of a driving licence, preparation of voter list, Aadhaar number, registration of marriage or appointment… pic.twitter.com/fk7KIJ2myv
इसके लिए राज्य सरकार चीफ रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेगी। इसमें चीफ रजिस्ट्रार राज्य स्तर पर जन्म और मृत्यु का डेटा तैयार करेगा। वहीं रजिस्ट्रार ब्लॉक स्तर पर जानकारी एकत्रित करेगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदन में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2023 पेश किया था। बिल पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति से मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में अब सरकार ने इसके तहत बनाए गए नियमों को 1 अक्टूबर, 2023 से लागू करने का भी ऐलान किया है।
उल्लेखनीय है कि नया कानून लागू होने के बाद बर्थ और डेथ सार्टिफिकेट डिजिटल रूप में भी मिल सकेगा। अब तक इसे हार्ड कॉपी यानि कि कागज के रूप में ही दिया जाता था। लेकिन अब यह डिजिटल फॉर्मेट में भी मिल सकेगा। नए कानून को सीधे शब्दों में समझें तो अब तक जिस तरह आधार कार्ड काम करता था। यानि कि स्कूल में एडमिशन से लेकर अन्य सभी कामों में जहाँ आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। वहाँ अब बर्थ सार्टिफिकेट का उपयोग किया जा सकता है। चूँकि, अब तक दफ्तरों में आधार कार्ड समेत अन्य डॉक्यूमेंट की भी माँग की जाती थी। लेकिन अब बर्थ सार्टिफिकेट ही सिंगल डॉक्यूमेंट होगा।