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G20 में आखिर किस इरादे से आया था चीन? सूटकेस की नहीं करने दी जाँच, प्राइवेट इंटरनेट कनेक्शन की डिमांड; 12 घंटों तक बना रहा था तनाव

जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद पूरी दुनिया में भारत की सराहना हो रही है। लेकिन मीडिया में एक रिपोर्ट ऐसी आई है जिससे सम्मेलन में शामिल हुए चीन के इरादों को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। इसके अनुसार चीन प्रतिनिधिमंडल अपने साथ एक ‘असामान्य साइज’ का सूटकेस लेकर होटल ताज में आया था। अलग और प्राइवेट इंटरनेट कनेक्शन की डिमांड रखी थी। इसको लेकर करीब 12 घंटे तक होटल में तनाव की स्थिति बनी रही थी।

चीनी प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के होटल ताज पैलेस में ठहरा हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ‘डिप्लोमेटिक बैगेज’ की साइज को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। लेकिन चीनी प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक व्यक्ति के पास असामान्य साइज का बैग था। बावजूद इसके डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने उसे बैग लेकर अंदर जाने की इजाजत दी। यह घटना 7 सितंबर 2023 की है।

होटल के स्टाफ को रूम विजिट के दौरान इस बैग में संदिग्ध उपकरण होने का संदेह हुआ। उसने इसकी जानकारी ऊपर के लोगों को दी। इसके बाद चीनी स्टाफ से इस बैग को स्कैनर से ​गुजारने को कहा गया है। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। चीनी प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जो बैग अंदर आ चुका है, उसकी स्कैनिंग का क्या तुक बनता है। इसके कारण करीब 12 घंटे तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। इस विवाद का निपटारा संदिग्ध बैग को चीनी दूतावास भेजने की रजामंदी के साथ हुआ।

इतना ही नहीं चीनी दल ने होटल के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करने से भी इनकार कर दिया था। प्राइवेट कनेक्शन की डिमांड रखी थी। लेकिन इसे होटल ने अस्वीकार कर दिया था। वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि संदिग्ध बैग में चीनी दल किस तरह का उपकरण लेकर आया था और अलग इंटरनेट कनेक्शन की उनकी डिमांड के पीछे क्या मंशा थी। रिपोर्ट में ताज पैलेस होटल में सुरक्षा से जुड़े सूत्र के हवाले से कहा गया है, “तीन सदस्यीय सुरक्षा दल को कमरे के बाहर करीब 12 घंटे तक पहरा देना पड़ा। इसके बाद एक चीनी सुरक्षा अधिकारी इस बैग को अपने दूतावास भेजने को तैयार हुए।”

उल्लेखनीय है कि इसी होटल में ब्राजील को राष्ट्रपति भी ठहरे हुए थे। ब्राजील अगले जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल नहीं हुए थे। उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।

वर्कशॉप के नाम पर छात्रों से मस्जिद में पढ़वाई नमाज, छात्राओं पर हिजाब पहनने का डाला गया दबाव: गोवा के स्कूल का प्रिंसिपल सस्पेंड

गोवा में वर्कशॉप के बहाने छात्रों को मस्जिद ले जाने वाले ​एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रिंसिपल पर छात्रों से मस्जिद में नमाज पढ़वाने और अन्य इस्लामी क्रियाकलाप करवाने का आरोप है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि मस्जिद में हुए कार्यक्रम के पीछे प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) से जुड़ा एक संगठन था। शनिवार (9 सितंबर 2023) की इस घटना पर राज्य शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से जवाब भी माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गोवा के वास्को शहर का है। सोमवार (11 सितंबर 2023) को यहाँ के केशव स्मृति हायर सेकेंडरी नाम के प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल शंकर गांवकर के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया गया है कि शनिवार को शंकर गांवकर स्कूल के छात्रों को अपने साथ डबोलिन स्थित नूर मस्जिद में ले गया था। वहाँ एक इस्लामी संस्थान द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि इस कार्यक्रम में छात्रों से न सिर्फ नमाज पढ़वाई गई, बल्कि छात्राओं पर हिजाब पहनने का भी दबाव दिया गया। हालाँकि छात्राओं ने इससे इनकार कर दिया।

शिकायत के अनुसार मस्जिद में हुए कार्यक्रम में कई मौलानाओं ने भाषण दिए थे। कार्यक्रम में लाए गए कुछ छात्रों की तादाद 22 बताई गई है। मस्जिद में हुए इस आयोजन में केशव स्मृति स्कूल के अलावा एक सरकारी स्कूल के भी छात्रों की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। कार्यक्रम का नाम ‘मस्जिद ओपन फॉर ऑल’ (मस्जिद सबके लिए खुली है) दिया गया था। हिन्दू संगठनों ने इस कार्यक्रम का आयोजक PFI से जुड़ा एक संगठन को बताते हुए प्रिंसिपल शंकर गांवकर पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।

मामला सामने आने के बाद शिक्षा निदेशालय के निदेशक शैलेश झिंगाडे के मुताबिक घटना को लेकर स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण माँगा है। स्कूल के प्रबंधक अध्यक्ष पांडुरंग कोरगानोकर के मुताबिक प्रिंसिपल शंकर गांवकर को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने हिन्दू संगठनों से माफ़ी भी माँगी है और कहा है कि स्कूल की मानसिकता गलत नहीं थी। खुद पर लगे आरोपों पर निलंबित प्रिंसिपल शंकर गांवकर ने सफाई दी है। उन्होंने इसे सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है।

इस कार्यक्रम का आयोजन स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) से जुडी जमात-ए-इस्लामी हिंद ने किया। इस संगठन के गोवा अध्यक्ष आसिफ हुसैन ने बतया कि नूर मस्जिद में हुए उनके आयोजन में छात्र अपनी खुद की मर्जी से आते हैं। आसिफ के मुताबिक छात्रों को मस्जिद का वह हिस्सा दिखाया गया जहाँ नमाज़ होती है। बच्चों को मिठाइयाँ देने की बात मानते हुए आसिफ ने कहा कि किसी को जबरन इस्लामी कायदे पालन करवाने के आरोप निराधार हैं।

मोनू मानेसर के साथ VHP, कहा- मुस्लिम वोट बैंक के लिए राजस्थान ले गई पुलिस: नूहं हिंसा में गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट पहुँचा MLA मामन खान

मोनू मानेसर को ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान पुलिस ले गई है। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने इसे राजस्थान चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की कोशिश करार दिया है। दूसरी तरफ नहूं हिंसा में गिरफ्तारी से बचने के लिए कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान ने हाई कोर्ट में अर्जी लगाई है।

मोनू मानेसर को फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट लिखने के मामले में नूहं साइबर क्राइम पुलिस ने 12 सितंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने पहले उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्देश दिए। फिर उसे ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।

VHP ने मोनू मानेसर को हर प्रकार की सहायता देने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की बात कही है। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है, “निर्दोष गौभक्त मोनू मानेसर को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ समय पहले ही राजस्थान पुलिस ने निर्दोष माना था। चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक लिए गौभक्त मोनू की गिरफ्तारी हुई है, जो उन्हें बहुत भारी पड़ेगा। विश्व हिंदू परिषद गौभक्त मोनू मानेसर को हर प्रकार से सहायता करेगी और आवश्कता पड़ी तो आंदोलन भी करेंगे।”

गौरतलब है कि राजस्थान के भरतपुर के पहाड़ी थाना क्षेत्र के घाटमीका गाँव के रहने वाले नासिर और जुनैद के अपहरण का मामला 15 फरवरी 2023 को दर्ज हुआ था। अगले दिन दोनों के शव हरियाणा के भिवानी में जली हुई गाड़ी में मिले थे। इसी मामले में मोनू मानेसर का नाम आया था। लेकिन अगस्त में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) उमेश मिश्रा ने बताया था कि अब तक की जाँच में इस घटना में उसकी सीधी संलिप्तता के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।

मामन खान ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

वहीं नूहं हिंसा में हिंसक भीड़ को भड़काने के आरोपों का सामना कर रहे फ़िरोज़पुर झिरका से कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपने वकील अर्शदीप सिंह चीमा के माध्यम से उन्होंने नूहं हिंसा की उच्च अधिकारियों की देखरेख में SIT जाँच कराए जाने की माँग की है। अपनी याचिका में मामन ने उच्च न्यायालय से यह भी अपील की है कि जाँच पूरी होने तक उनके खिलाफ पुलिस को दंडात्मक एक्शन न ले।

गौरतलब है कि 31 जुलाई को नूहं में बृजमंडल यात्रा पर हुए हमला हुआ था। हरियाणा पुलिस 25 अगस्त से अब तक मामन खान को 2 अलग-अलग बार पेश होने के लिए नोटिस दे चुकी है। लेकिन दोनों ही मौकों पर मामन खान पुलिस के आगे पेश नहीं हुआ।

13 सितंबर: जिसने कॉन्ग्रेस के अस्तित्व को हिलाकर रख दिया, जिसने भारत की राजनीति की दिशा और दशा बदल दी

भारत की अध्यक्षता में जी-20 का सफल आयोजन पिछले दिनों ही संपन्न हुआ है। पूरी दुनिया में भारत की सराहना हो रही है। आज जो वैश्विक मंचों पर भारत का प्रभाव दिख रहा है, देश की राजनीतिक दशा और दिशा में जो बदलाव दिख रहा, आम आदमी के चेहरों पर जो उम्मीदों का भाव दिखता है, इन सबकी पटकथा 2013 में आज यानी 13 सितंबर को ही लिखी गई थी।

दरअसल, 2014 लोकसभा चुनाव से पहले 13 सितंबर, 2013 को ही तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उनके साथ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे।

इसी प्रेस वार्ता में यह घोषणा की गई कि नरेंद्र मोदी आगामी चुनावों में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री का चेहरा होंगे। उससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि फिर से लालकृष्ण आडवाणी पीएम का चेहरा हो सकते हैं। बहुतों ने यह भी सोचा था कि सुषमा स्वराज या अरुण जेटली भी पीएम का चेहरा हो सकते है, क्योंकि मोदी को मीडिया ने 2002 के गुजरात दंगों की अगुवाई करने वाले व्यक्ति के तौर पर पेश किया था, जबकि इस तथ्य पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के 12 वर्षों में गुजरात काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा था।

उस वक्त के कई ट्वीट्स हैं जिसमें राणा अय्यूब और राजदीप सरदेसाई ने भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी को पीएम चेहरे के लिए चुनने पर जमकर हमला किया था। उस दौरान वे नरेंद्र मोदी को काफी हल्के में ले रहे थे।

उन लोगों ने उनके US वीजा स्टेटस का मजाक भी उड़ाया।

आप देखें, किसी ने वास्तव में नहीं सोचा था कि साबरमती के किनारे से यह आदमी भाजपा का यह सपना पूरा करेगा। मीडिया की धारणा उनके खिलाफ थी। विपक्षी नेताओं द्वारा उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कहा जाता था। उनके अपने सहयोगी इस बात से बहुत खुश नहीं थे और उन्होंने इसे बहुतायत स्पष्ट भी कर दिया था। जून 2013 में जब मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होने की चर्चाएँ तेज हो रही थीं, तब जदयू के नीतीश कुमार ने 17 साल पुराने एनडीए गठबंधन को तोड़ दिया था।

उन्होंने पीएम मोदी के लिए अपनी ‘नापसंदगी’ को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया था। नीतीश कुमार ने 2010 में मोदी सहित कई भाजपा नेताओं के लिए एक पूर्व निर्धारित रात के भोजन के कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया था। वहीं दो साल पहले 2008 में, उन्होंने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में गुजरात सरकार द्वारा दिए गए 5 करोड़ रुपए को भी लौटा दिया था जो बिहार को बाढ़ राहत के लिए मिला था। उन्होंने इसे ब्याज के साथ वापस किया था।

गौरतलब है कि भाजपा पूरे पाँच साल के लिए सिर्फ एक बार ही सत्ता में आई थी। वहीं मोदी को पीएम उम्मीदवार के रूप में प्रचारित कर भाजपा एक बहुत ही बड़ा जोखिम मोल ले रही थी, जब उनकी खुद की पार्टी के सहयोगी इस बात से नाराज चल रहे थे। इसके अलावा वे कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए को भी चुनौती दे रहे थे जिसके पास तीसरी बार सत्ता में आने के लिए पूरा इकोसिस्टम साथ खड़ा था।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात नामक द्विवार्षिक शिखर सम्मेलन शुरू किया था। एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक बार मुझसे कहा था कि 2002 के दंगों के ठीक बाद मोदी ने गुजरात में परिवर्तन लाने का फैसला किया था। उन्होंने मन बना लिया था कि जब लोग गुजरात के बारे में सोचेंगे तो वे प्रगति के बारे में सोचेंगे। पहला वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन नवरात्रि के दौरान 2003 में आयोजित किया गया था, जो नौ-रात्रि लंबा नृत्य महोत्सव था।

उससे पहले मोदी ने विभिन्न मीडिया हाउस के संपादकों और पत्रकारों को बुलाया और उन्हें अपने विजन पर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। एक पत्रकार ने मुझे बताया 2002 के दंगों के दौरान भड़काऊ खबरों को प्रसारित करने वाले गुजरात समाचार संपादक श्रेयांश शाह भी उसमें मौजूद थे। उन्होंने मुझे बताया कि शाह प्रस्तुति के बीच में ही बाहर चले गए थे। जाहिर तौर पर उन्हें वो सब पसंद नहीं आया होगा। इसके बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें खुद रोका और वापस आने के लिए कहा। लेकिन शाह फिर भी नहीं माने।

यह तब था जब मोदी ने यह परवाह करना छोड़ दिया था कि मीडिया उनके बारे में क्या कहती है। उन्होंने इस बात का फैसला किया था कि उनके द्वारा किए गए काम को बोलने दो।

अगला शिखर सम्मेलन जनवरी 2015 के लिए निर्धारित किया गया था। नरेंद्र मोदी ने इस अवसर का भरपूर फायदा उठाया। उन्होंने हरित ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक, शिक्षा, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न विषयों पर ‘वाइब्रेंट गुजरात प्री-इवेंट समिट्स’ की एक श्रृंखला की।

जिन लोगों ने 2003 में शिखर सम्मेलन को खारिज कर दिया था। वहीं लोग उसके शुरुआत से पहले ही उसको फ्रंट पेज पर प्रकाशित कर रहे थे। उन्होंने न केवल देश को यह बताया कि एक सीएम होते हुए उन्होंने सबसे उद्यमी राज्य में क्या-क्या किया। बल्कि यह भी कि जो वादा उन्होंने किया उसे पूरा भी किया। वह जानते थे कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था नीतिगत पक्षाघात के कारण फँस गई है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर कोई इसके बारे में जाने।

लेकिन इस बात की उम्मीद कम थी कि बीजेपी के पास वास्तव में एक मौका हो सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चरम पर था। लोग कॉन्ग्रेस से नाराज थे। लेकिन क्या उनकी नाराजगी भाजपा को बहुमत देने देने के लिए पर्याप्त थे? क्या लोग 2002 के दंगों के बाद मोदी को वोट देने के लिए घटनाओं और मनगढ़ंत कहानियों को नजरअंदाज करने के इच्छुक थे? क्या भाजपा के लिए तर्कसंगत नेता को पीएम चेहरे के रूप में चुनना बुद्धिमानी होगी? क्या ‘त्रिशंकु संसद’ होगी और भाजपा को 5 साल की स्थिर सरकार के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा? सच कहूँ, तो मुझे यकीन नहीं था।

यह तस्वीर मतगणना से 2 दिन पहले की है। भारत ने तय किया था। मोदी की बॉडी लैंग्वेज से यह लगता था कि उन्हें यकीन था कि वह दिल्ली आ रहे हैं।

भाजपा ने रिस्क लिया। मोदी जीते और कैसे। सिर्फ एक बार नहीं। उन्होंने न केवल इतिहास दोहराया, बल्कि 2019 में मजबूत जनादेश के साथ वापसी करते हुए सत्ता में अपनी पकड़ को स्थापित किया।

राजनाथ सिंह की उस घोषणा ने पार्टी के इतिहास को बदल दिया। पार्टी को मजबूती के साथ हर वर्ष एक नई उम्मीद और पहचान बनाने का मौका दिया। मौजूदा परिस्थितियों में 2024 की राह भी उसके लिए आसान दिख रही है।

(यह लेख मूल रूप से 2020 के 13 सितंबर को ऑपइंडिया अंग्रेजी की तत्कालीन संपादक निरवा मेहता ने लिखा था। कुछ आवश्यक बदलावों के साथ हम इसे दोबारा प्रकाशित कर रहे हैं)

पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत पर दलित युवक मना रहा था जश्न: पटाखे फोड़ने पर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने घेरकर पीटा, घर में की तोड़फोड़

एशिया कप में 11 सितंबर 2023 को हुए मैच में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह से हरा दिया। टीम इंडिया की जीत के जगह-जगह लोग जश्न में डूब गए। गुजरात के सूरत में रहने वाले एक दलित युवक ने भी पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। इस पर मुस्लिम युवक भड़क गए और बैट व स्टंप से हमला कर उसे घायल कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना सूरत के सैयदपुरा मार्केट इलाके की है। भारत-पाकिस्तान मैच खत्म होने के बाद करीब 11 बजे रात को दलित युवक खुशी मनाते हुए पटाखे फोड़ रहा था। इसी दौरान कुछ मुस्लिम युवक वहाँ आ धमके और जाति सूचक टिप्पणी व गालियाँ देते पटाखे फोड़ने की वजह पूछने लगे। देखते-ही-देखते वहाँ मुस्लिम युवकों की भीड़ जमा हो गई।

इसके बाद भीड़ बैट और स्टंप से उसकी बेरहमी से पिटाई करने लगी। बुरी तरह से घायल होने के बाद युवक किसी तरह से भागता हुआ अपने घर पहुँचा, लेकिन इस्लामवादियों की भीड़ उसे मारने के लिए पीछा करती हुए उसके घर तक पहुँच गई। वहाँ पहुँचकर भीड़ ने उसके घर में जमकर तोड़फोड़ की। जानकारी मिलने पर लालगेट पुलिस मौके पर पहुँची गई।

पीड़ित युवक की शिकायत पर पुलिस ने मारपीट और जातिसूचक गालियाँ देने वाले आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसकी जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है। हालाँकि, दलित युवक पर हमला करने वाले सभी मुस्लिम युवक मौके से फरार हो गए। पुलिस ने जल्द ही सभी की पहचान कर गिरफ्तार करने की बात कही है।

वहीं, मुस्लिमों ने भी हिंदू युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सैयदपुरा निवासी शाहरुख आफताब मिर्जा ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि बच्चे सड़क पर क्रिकेट खेल रहे थे। इसलिए उन्होंने हिंदू युवकों से पटाखे नहीं फोड़ने के लिए कहा था। इसी दौरान हिंदू युवक और उसके दो दोस्तों ने उसकी पिटाई कर दी।

पीड़ित हिंदू युवक का दावा है कि वह वाहन चलाकर परिवार की आर्थिक मदद करने की कोशिश करता है। बीते 15 साल में उस पर यह तीसरा हमला है। उसने कहा कि साल 2021 में भी उस पर हमला हुआ था, लेकिन इस मामले में पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की थी। कोर्ट के दबाव में पुलिस को FIR दर्ज करना पड़ा था।

अब संस्कृत पढ़ेंगे मदरसे के छात्र, कुरान का भी कराया गया अनुवाद: उत्तराखंड की सरकार ने लिया फैसला, कॉन्ग्रेस ने किया विरोध

देवभूमि उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जाएगी। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने फैसला लिया है कि मदरसों में एनसीईआरटी के अंतर्गत आने वाले विषयों की पढ़ाई होगी। इसमें अन्य विषयों की तरह संस्कृत भाषा की भी पढ़ाई की जाएगी। यही नहीं, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने कुरान का संस्कृत भाषा में अनुवाद भी कराया है।

वहीं, कॉन्ग्रेस ने हमेशा की तरह इस फैसले पर भी सवाल उठाया है। कॉन्ग्रेस ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि वक्फ बोर्ड को कुरान का अनुवाद अन्य भाषाओं में भी कराना चाहिए, ताकि बच्चों को अन्य भाषाओं की भी जानकारी मिल सके। बताते चलें कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड राज्य में 103 मदरसों का संचालन करता है।

वक्फ बोर्ड ने उठाया बड़ा कदम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस नए निर्णय का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “राज्य के मदरसों में एनसीईआरटी के अंतर्गत आने वाले सभी विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए राज्य में नए और मॉडर्न मदसरे भी बनाए जा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अब बच्चे गणित, विज्ञान, हिंदी के साथ ही संस्कृत और अंग्रेजी की भी पढ़ाई करेंगे। संस्कृत विषय को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत में कुरान लिखी गई है। इस कुरान को मदरसा शिक्षा कमेटी में भी शामिल किया गया है।” उन्होंने कहा इसके लिए यहाँ नए और मॉर्डन मदरसे भी बनाए जा रहे हैं।

शम्स ने कहा, “यह किसी क्रांति से कम नहीं है। हमें राज्य में मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण के प्रयास के खिलाफ मुस्लिम परिवारों से कड़े विरोध की आशंका थी, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल उलट रही। बच्चों के अभिभावकों ने इसका स्वागत किया। वे मदरसों का आधुनिकीकरण चाहते हैं।” 

कॉन्ग्रेस ने कसा वक्फ बोर्ड पर तंज

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के इस फैसले पर कॉन्ग्रेस ने तंज कसा है। उत्तराखंड प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि वो इस फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कहा कि आजकल बोर्ड के अध्यक्ष सिस्टम के करीब जाने के लिए चाटुकारिता करने में लगे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुरान का अन्य भाषाओं में भी अनुवाद कराना चाहिए।

6 साल पहले भी उठी थी माँग

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाने की माँग छह साल पहले मदरसा वेलफेयर सोसाइटी ने उठाई थी। मदरसा वेलफेयर सोसायटी ने उस समय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भी लिखा था।

कमिटी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत से माँग की थी की मदरसों में संस्कृत विषय के शिक्षकों की भी तैनाती की जाए, ताकि बच्चों को संस्कृत भाषा भी पढ़ाई जा सके। हालाँकि, तब रावत सरकार ने इस माँग को ये कहकर खारिज कर दिया था कि ये सुझाव अव्यवहारिक है।

‘हमारे मुस्लिम भाई भी दिल्ली के साथ व्यापार के लिए बेचैन’: जानिए भारत-सऊदी की नजदीकी पर क्यों रो रहा पाकिस्तान, इकोनॉमिक कॉरिडोर पर ‘डॉन’ ने कहा भला-बुरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और MBS के नाम से प्रसिद्ध सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच दो पक्षीय वार्ता हुई। इस वार्ता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर की है। इसके बाद पाकिस्तान को जैसे मिर्ची लग गई। पाकिस्तान के अखबारों ने इस मुलाकात को लेकर अपनी भड़ास निकाली है।

दरअसल, तरफ जी-20 से हटकर भारत और सऊदी अरब के प्रमुखों ने सोमवार (11 सितंबर) को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान 8 समझौते पर दस्तखत किए गए। प्रिंस सलमान ने भारत को शानदार बाजार निवेश के लिए पसंदीदा जगह बताया।

इतना ही नहीं, दोनों देशों ने अपने संयुक्त बयान में वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ कमर कसने का भी ऐलान किया है। दोनों देशों के रिश्तों की इस गर्माहट और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई पर पड़ोसी देश पाकिस्तान बौखला गया है। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान ही भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए जिम्मेवार है।

पाकिस्तान ने सऊदी को दी नैतिकता की दुहाई

पाकिस्तान के अखबार डॉन ने जी-20 पर लिखे अपनी संपादकीय में भड़ास निकाली है। इसमें लिखा गया है कि यूरोपीय संघ के साथ दुनिया की 19 शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के समूह ने अफ्रीकी संघ को स्वीकार कर लिया, जबकि शी जिनपिंग की गैर-मौजूदगी साफ थी। इससे मेजबान देश के साथ-साथ ब्लॉक के पश्चिमी सदस्यों को एक अस्पष्ट संदेश भेजा गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इससे दूर रहे।

डॉन (Dawn) वही अखबार है, जिसे पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के मुखपत्र के तौर पर स्थापित करने के लक्ष्य के साथ निकाला था। आज से 81 साल पहले दिल्ली में 26 अक्टूबर 1941 को यह अखबार लॉन्च किया गया था। अब ये पाकिस्तान के इरादों के मुखपत्र की तरह काम कर रहा है। जी-20 पर लिखे इसके संपादकीय में इसकी स्पष्ट छाप दिखती है।

सऊदी को तंज कसते हुए इसमें लिखा गया है, “पाकिस्तान को यह भी महसूस करना चाहिए कि कश्मीर में भारत के क्रूर मानवाधिकार रिकॉर्ड के बावजूद, पश्चिमी देशों के साथ-साथ हमारे मुस्लिम भाई भी कम फिक्रमंद हैं और दिल्ली के साथ व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं। दुखद वास्तविकता यह है कि अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में आर्थिक प्रभुत्व नैतिकता पर हावी हो जाता है।” पाकिस्तान इतना चिढ़ा हुआ है कि बार-बार कश्मीर के मुद्दे पर अनैतिकता का रवैया अपनाने के बावजूद वो सऊदी के प्रिंस को नैतिकता की दुहाई देने से बाज नहीं आ रहा है।

डॉन आगे लिखता है, “आधिकारिक घोषणा में बल के प्रयोग और किसी भी राज्य की क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की गई, लेकिन इस शिखर सम्मेलन में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की साफ तरह से आलोचना नहीं की गई। जबकि कथित तौर पर समूह के सदस्यों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मतभेदों को पाटने के लिए एक समझौता समाधान निकाला गया था।”

हालाँकि अपने संपादकीय में उसने ये भी लिखा है, “जहाँ तक पाकिस्तान का सवाल है, हमारे आंतरिक मुद्दों की वजह से हम इन अंतरराष्ट्रीय भू-आर्थिक नेटवर्क में सक्रिय खिलाड़ियों के बजाय बड़े पैमाने पर दर्शक हैं। इसलिए, अगर हम इस वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्सा बनना चाहते हैं और अगर हम चाहते हैं कि कश्मीर जैसे मुद्दों पर हमारी आवाज़ सुनी जाए तो हमें पहले अपनी आंतरिक कमियों को दूर करना होगा।”

आईएमईईसी पर भी निकाली कोफ्त

पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार (9 सितंबर 2023) को दिल्ली में ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEEC) लॉन्च किया। इस परियोजना में अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ-साथ सऊदी अरब की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

ये इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर एक प्रस्तावित व्यापार और निवेश गलियारा है, जो भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप को रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। इसके बाद उन्हें भारत से एक शिपिंग रूट के माध्यम से लिंक किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में अंतरमहाद्वीपीय परिवहन, ऊर्जा और डेटा लिंकेज शामिल हैं।

इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की काट माना जा रहा है। माना जा रहा है कि IMEEC नए व्यापार और निवेश के अवसर पैदा करेगा। इसके साथ ही कनेक्टिविटी में सुधार होने से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

ये आर्थिक गलियारा भारत की चीन पर निर्भरता को कम करेगा। इससे चीन की सिल्क रोड की अहमियत कम हो जाएगी और भारत से सऊदी अरब-तुर्की होते हुए यूरोप तक सीधे माल की आवाजाही हो पाएगी।

इसे लेकर डॉन लिखता है कि एक और बड़ी घोषणा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की शुरुआत थी। ये एक विशाल योजना है, जिसे आधुनिक ‘स्पाइस रूट’ के तौर पर बताया जा है। इससे अरब प्रायद्वीप के जरिए भारत को यूरोप से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे ‘वास्तविक बड़ा सौदा’ करार दिया है।

ऐसा लगता है कि G20 के साथ ही G7 खुद को पश्चिमी नेतृत्व वाले ओल्ड ब्वॉयज क्लब से अधिक खुद को ‘समावेशी’ संगठनों में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जो साउथ ग्लोबल के देशों को आमंत्रित करने के लिए तैयार हैं। ओल्ड ब्वॉयज क्लब से मतलब समान सामाजिक या शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले अमीर लोगों के कारोबार या निजी मामलों में एक-दूसरे की मदद करने वाले सिस्टम से हैं।

साउथ ग्लोबल दुनिया के वे देश हैं, जिनके आर्थिक और औद्योगिक विकास का स्तर अपेक्षाकृत कम आँका जाता है। आमतौर पर ये अधिक औद्योगिक देशों के दक्षिण में स्थित हैं। पाकिस्तान भी ऐसे देशों में से एक है। जाहिर है कि वो खुद के लिए भी फिक्रमंद है।

डॉन आगे लिखता है कि ब्रिक्स और एससीओ के विस्तार ने इन बदली हुई प्राथमिकताओं में भूमिका निभाई होगी। यही वजह है कि अफ्रीकन यूनियन को एक भागीदार के तौर पर पेश किया गया है। भू-अर्थशास्त्र और भू-राजनीति भी इस खेल में शामिल है, जिसमें स्पाइस रूट बीआरआई और रूस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे को टारगेट कर रहा है। ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ की मदद से भारत ‘ग्लोबल साउथ’ का नेता बनकर उभर सकता है और चीन के लिए चुनौती पेश कर सकता है।

डॉन ने आगे लिखा है कि G20 सदस्य होने के बावजूद बीजिंग को भारत और यूरोप को जोड़ने वाली नई परियोजना में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। यह योजना इजरायल को अरब राज्यों से जोड़ने में भी काम आएगी। दरअसल मौजूदा वक्त में भारत या उसके आसपास के देशों से सामान जहाजों के जरिए स्वेज नहर से होते हुए भूमध्य सागर पहुँचता है। इसके बाद ये जहाज यूरोपीय देशों में प्रवेश करते हैं।

वहीं अमेरिका, कनाडा और लैटिन अमेरिकी देशों तक सामान पहुँचाने के लिए जहाजों को भूमध्य सागर से होते हुए अटलांटिक महासागर जाना होता है। आईएमईईसी के पूरा होने के बाद सामान दुबई से इजरायल के हाइफा बंदरगाह तक ट्रेन से जा सकता है और उसके बाद आसानी से यूरोप में प्रवेश पा सकता है।

पीएम मोदी और सऊदी की दोस्ती से पाक को एतराज

सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का भारत के पीएम मोदी के साथ बहुत अच्छा दोस्ताना संबंध है, जो एक-दूसरे की नीतियों में भी साफ तौर से दिखाई देता है। दरअसल पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने खाड़ी देशों के साथ रिश्तों को मज़बूत करने पर खासा जोर दिया। इसमें सऊदी अरब ने भी अहम भूमिका निभाई है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2016 और 2019 में दो बार सऊदी अरब का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान भारत-सऊदी अरब के बीच कई अहम मुद्दों पर रजामंदी हुई और कई समझौते हुए। वहीं, 2019 में भारत यात्रा के बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का यह दूसरा दौरा था।

सऊदी अरब मध्य-पूर्व में एक बड़ी शक्ति है। खासकर इस्लामिक देशों पर इसका बड़ा असर है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने सऊदी अरब से नजदीकी पाकिस्तान को रास नहीं आ रही है। भारत सऊदी अरब को मध्य पूर्व में अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक के तौर में देखता है।

दोनों देशों की रिश्तोें में गर्माहट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों देशों के बीच वर्ष 2022-2023 में व्यापार 52.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। इसी तरह, सऊदी अरब ने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद’ से पीएम मोदी को नवाजा। इससे साबित होता है कि सऊदी अरब की नजर में भारत का क्या कद है।

आतंकवाद पर मिलकर कसेंगे लगाम

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को नई दिल्ली में वार्ता में कई अहम फैसले भी लिए गए। दोनों देशों ने 45 पैरा का संयुक्त बयान जारी किया। इसके 30वें पैरा में आतंकवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई।

इसमें कहा गया, “दोनों पक्षों ने सभी देशों से दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को नकारने की अपील की है।” इसके अलावा आतंकवादी कामों को अंजाम देने के लिए मिसाइलों और ड्रोन सहित हथियारों तक पहुँच को रोकने की जरूरत पर जोर दिया गया।

इसके अलावा दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि आतंकवाद जहाँ भी मौजूद हैं, वहाँ इसके इंफ्रास्ट्रकचर को खत्म किया जाए। इसके साथ ही आतंकवाद फैलाने वालों को कानून के दायरे में तेजी से लाकर उन्हें सजा देने की बात कही गई है।

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद से लड़ने और इसके वित्त पोषण पर लगाम लगाने के लिए के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया। दोनों पक्षों ने माना कि आतंकवाद अपने सभी रूपों में इंसानियत के लिए सबसे गंभीर खतरा है।

दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए कि आतंक के किसी भी कृत्य को किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। दोनों ही देशों ने आतंकवाद को किसी खास नस्ल, धर्म और संस्कृति से जोड़ने की बात को खारिज किया। दोनों पक्षों ने सभी देशों से किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को खारिज करने को कहा।

भारत सरकार ने जस्टिन ट्रुडो को ऑफर किया था अपना विमान, कनाडा के PM ने नकार दिया: मीडिया रिपोर्ट्स में दावा – 6 घंटे तक नहीं दिया कोई जवाब

भारत में भव्य G20 शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो भारत में ही अटक गए। असल में उनका विमान खराब हो गया था, जिस कारण उन्हें नई दिल्ली में ही होटल में रुकना पड़ा। इसके बाद कनाडा से एक दूसरा विमान उन्हें लेने के लिए चला, लेकिन उसे बीच में से ही वापस जाना पड़ा। अब सामने आया है कि भारत सरकार ने भी कनाडा के प्रधानमंत्री को अपना विमान ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल करने से नकार दिया।

हालाँकि, अब भारत में 36 घंटे फँसे रहने के बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो और उनके साथ आया प्रतिनिधिमंडल वापस अपने देश के लिए निकल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत सरकार ने सोमवार (11 सितंबर, 2023) को ही ‘एयर इंडिया वन’ से उन्हें वापस कनाडा छोड़ने की पेशकश की थी। ‘एयर इंडिया वन’ बोईंग 777s का 2 विमानों का एक समूह है, जिसका इस्तेमाल भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्राओं के दौरान करते हैं।

हालाँकि, कनाडा ने इस पेशकश को नकार दिया। ऊपर से ये बात भी सामने आई है कि भारत सरकार द्वारा ये ऑफर दिए जाने के 6 घंटे बाद कनाडा की तरफ से प्रतिक्रिया आई। भारत के केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री राजीव चंद्रशेखर एयरपोर्ट पर जस्टिन ट्रुडो को छोड़ने के लिए मौजूद थे। उन्होंने G20 समिट में भाग लेने के लिए कनाडा के पीएम को धन्यवाद भी दिया। मंगलवार (12 सितंबर, 2023) को दोपहर लगभग 1:10 बजे जस्टिन ट्रुडो के विमान ने कनाडा के लिए उड़ान भरी।

राजीव चंद्रशेखर ने भारत सरकार की तरफ से उनकी सुरक्षित यात्रा के लिए कामना की। भारत सरकार की तरफ से जस्टिन ट्रुडो को उनके उड़ान भरने से 24 घंटे पहले ही ऑफर दिया गया था। हालाँकि, उन्हें लेने के लिए कनाडा से चला वहाँ के एयरफोर्स का CC-150 पोलरिस विमान वापस क्यों गया, इसका कोई कारण नहीं दिया गया है। उधर कनाडा के गुरुद्वारा में भारतीय राजनयिकों की हत्या के लिए उकसाने वाले पोस्टर्स लगाए जाने को लेकर भी वहाँ की सरकार की आलोचना हो रही है।

मंदिरों को लूट कर जिहाद की फंडिंग की साजिश का पर्दाफाश: केरल में पनप रहा था ISIS मॉड्यूल, NIA ने नबील अहमद को दबोचा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में नए ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान नबील अहमद के रूप में हुई है। वो टेलीग्राम के माध्यम से केरल में आईएस के लिए भर्तियाँ कर रहा था, इसके लिए उसने ‘पेट लवर्स’ नाम का ग्रुप बनाया था। एनआईए ने जिस नबील अहमद को गिरफ्तार किया है, वो त्रिशूर जिले का रहने वाला है।

एनआईए की जाँच में पता चला है कि नबील ने केरल में आईएस का नया समूह बनाया था और वो युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। उसके निशाने पर ईसाई मजहब का एक पादरी भी था। यही नहीं, उसने त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों में मंदिरों को लूटने की योजना बनाई थी, ताकि वो अपने मकसद के लिए फंडिंग कर सके।

कतर में बैठे आईएस आतंकियों के संपर्क में था नबील

एनआईए ने बताया है कि नबील कतर में आईएस आतंकियों से कॉन्टैक्ट में था। उन्हीं आतंकियों की मदद से उसने केरल में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में पूरी ताकत झोंक रखी थी। एनआईए ने कहा है कि वो इस मामले में और भी गिरफ्तारियाँ करने वाली है।

त्रिशूर का अशरफ भी हो चुका है गिरफ्तार

बता दें कि इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए पैसे के लिए डकैती करने के मामले में एनआईए ने पहले त्रिशूर के मूल निवासी अशरफ को गिरफ्तार किया था। उनके समूह को हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा केरल में डकैती और सोने की तस्करी में लिप्त पाया गया था। पलक्कड़ से 30 लाख रुपए लूटने के बाद अशरफ और उसका गैंग सत्यमंगलम जंगल में एक घर में छिप गया था। संदिग्ध को कोच्चि एनआईए टीम ने जंगल के अंदर से पकड़ लिया।

मोनू मानेसर को ले गई राजस्थान पुलिस, गिरफ़्तारी के बाद हरियाणा पुलिस ने सौंप दिया

हरियाणा ने पुलिस ने गोरक्षक मोनू मानेसर को राजस्थान पुलिस को सौंप दिया है। राजस्थान पुलिस ने कोर्ट से मोनू मानेसर की रिमांड माँगी थी। इसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी। इससे पहले मंगलवार (12 सितंबर, 2023) को हरियाणा की नूहं पुलिस ने मोनू को गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नूहं पुलिस ने मोनू मानेसर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इसके बाद रिमांड की माँग की थी। लेकिन कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। पुलिस उसे भौंडसी जेल लेकर जा रही थी। लेकिन इसी दौरान राजस्थान पुलिस भी कोर्ट पहुँच गई। जहाँ कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को मोनू मानेसर की ट्रांजिट रिमांड दे दी। इसके बाद हरियाणा पुलिस ने उसे राजस्थान पुलिस को सौंप दिया।

किस मामले में हुई थी गिरफ्तारी

नूहं साइबर क्राइम पुलिस ने मोनू मानेसर को फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट लिखने के मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि मोनू मानेसर नामक फेसबुक पेज से 26 अगस्त को एक पोस्ट शेयर की गई थी। इस पोस्ट में लिखा था, “परिणाम की चिंता हम नहीं करते, वार एक ही होगा, पर आखिर होगा। मोनू मानेसर।”

इस मामले में सोशल मीडिया सेल के सिपाही मनोज कुमार ने नूहं साइबर क्राइम थाने में शिकायत की थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि मोनू मानेसर के नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही यह पोस्ट की गई थी। पुलिस ने गिरफ्तारी के समय मोनू के पास से 45 बोर की पिस्टल और 3 कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस ने मोनू के खिलाफ धारा 153, 153A, 295A, 504, 109 IPC व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
राजस्थान पुलिस को क्यों मिली रिमांड

दरअसल, मोनू मानेसर पर राजस्थान के भिवानी में हुए  नासिर-जुनैद हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है। फरवरी 2023 में नासिर और जुनैद नाम के 2 युवकों के एक वाहन में जले हुए शव मिले थे। इस केस में मोनू मानेसर सहित कुछ और लोगों को नामजद किया गया था। मोनू मानेसर के अलावा हरियाणा में गोरक्षा से जुड़े कुछ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

लगभग 8 माह से भूमिगत चल रहे मोनू मानेसर के मुद्दे पर राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों में आरोप-प्रत्यारोप भी. देखने को मिला था। वहीं राजस्थान के DGP उमेश मिश्रा ने नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू मानेसर की सीधी भूमिका से इंकार कर दिया था। हालाँकि उन्होंने इस केस में मोनू की परोक्ष भूमिका की जाँच जारी होने की बात कही थी।

Cow Vigilante Monu Manesar Arrested in Gurugram Handed Over to Rajasthan Police