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LLB छात्रा से रेप की कोशिश-दुपट्टे से गला घोंटने का प्रयास, विरोध करने पर भाई को चाकू मारा: भीड़ ने सुल्तान को बाँधकर पीटा

उत्तर प्रदेश के बागपत में एलएलबी की एक छात्रा से रेप की कोशिश की गई। लड़की को बचाने आए उसके चचेरे भाई को चाकू मार दिया गया। इसके बाद नाराज लोगों ने आरोपित सुल्तान की बाँध कर पिटाई की। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है। जिस होटल में रविवार (10 सितंबर 2023) को यह घटना हुई, वहाँ के स्टाफ पर भी बिना पहचान पत्र आरोपित को कमरा देने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बागपत कोतवाली थाना क्षेत्र का है। यहाँ सिसाना गाँव की रहने वाली LLB की एक छात्रा रविवार को कुछ सामान खरीदने बागपत बाजार गई थी। घर लौटने के दौरान पीड़िता बाजार के एक चौराहे पर सवारी वाहन का इंतजार कर रही थी। तभी लड़की के पड़ोसी गाँव का निवासी एक मुस्लिम युवक सुल्तान वहाँ पहुँचा। आरोप है कि उसने पीड़िता को लिफ्ट देने के बहाने अपनी कार में बिठाया और फिर घर के बजाय स्टारलाइट नाम के गेस्ट हाउस में ले गया। यहाँ आरोपित ने छात्रा से रेप का प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि छात्रा के विरोध के चलते सुल्तान अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया। इस बात से नाराज हो कर उसने छात्रा की पिटाई की। यह बात किसी ने पीड़िता के चचेरे भाई को बता दी। वह होटल पहुँचा और अपनी बहन को वहाँ से साथ ले जाने का प्रयास करने लगा। इस दौरान सुल्तान ने पीड़िता के चचेरे भाई पर चाकू से वार किया। चाकू लड़की के भाई के सिर में लगा और वो घायल हो गया। आरोपित ने लड़की का भी गला उसके दुपट्टे से घोंटने का प्रयास किया।

घटना की जानकारी मिलते ही लड़की के परिजन मौके पर पहुँचे। भीड़ आरोपित सुल्तान को बंधक बना कर ले गई। आरोप है कि आरोपित को गोशाला ले जाया गया और बाँधकर पीटा गया। फ़िलहाल उसका इलाज दिल्ली में चल रहा है। मामला 2 समुदायों का होने की वजह से आसपास में तनाव फ़ैल गया। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। बिना पहचान पत्र के कमरा देने वाले होटल पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

बागपत पुलिस के मुताबिक सुल्तान की पिटाई करने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपितों के नाम तरुण सिंह, अरुण सिंह, जॉनी सिंह और सचिन सिंह हैं। इन सभी पर IPC की धारा 307, 364, 342, 504 के तहत कार्रवाई की गई है। सुल्तान को साथ ले जाने में प्रयोग वैगन आर कार को भी जब्त कर लिया गया है। साथ ही वो हॉकी स्टिक भी बरामद कर ली गई है, जिससे कथित तौर पर सुल्तान की पिटाई की गई थी।

‘भारत की 1 इंच जमीन पर भी चीन का कब्ज़ा नहीं’: लद्दाख के LG ने राहुल गाँधी के दावों पर दिया करारा जवाब, बोले ब्रिगेडियर मिश्रा – हमारे जवान पूरी तरह तैयार

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दावा किया था कि चीन ने भारत की जमीन कब्जा ली है, जिसके बाद लद्दाख के राज्यपाल ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) BD मिश्रा ने उन्हें कराया जवाब दिया है। राहुल गाँधी के बयान पर प्रतिक्रिया माँगे जाने पर उप-राज्यपाल ने कहा कि वो किसी के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन लेकिन वो तथ्य बताएँगे जो कि उन्होंने खुद अपनी आँखों से देखा है। उन्होंने साफ़-साफ़ कहा कि चीन ने भारत की 1 वर्ग इंच की जमीन पर भी कब्ज़ा नहीं किया है।

ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बीडी मिश्रा ने कहा कि सन् 1964 में क्या हुआ वो उस समय की बात थी, लेकिन आज के समय में भारत अंतिम इंच तक अपनी जमीन को नियंत्रण में रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वो नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे, जो तथ्य है बस वही बता रहे हैं। LG ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कोई कुछ भी गड़बड़ी करता है तो उस पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।

बता दें कि 25 अगस्त, 2023 को राहुल गाँधी कारगिल पहुँचे थे। वहाँ एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ये एक स्ट्रैटेजिक लोकेशन है, ऐसे में एक चीज स्पष्ट है कि चीन ने भारत की जमीन कब्जाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी झूठ बोलने का आरोप लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि ये जमीन का मसला है और चीन हमारी और जमीन ले लेना चाहता है। लद्दाख में राहुल गाँधी ने बाइक भी चलाई थी। अब LG ने उनके इन आरोपों को नकार दिया है।

इतना ही नहीं, मुंबई में हुई विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. की बैठक के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी राहुल गाँधी ने अपने इस आरोप को दोहराया था कि चीन ने भारत की जमीन कब्जाई है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार पर चीन के साथ इसके लिए समझौता करने तक के आरोप लगा दिए थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर लद्दाख की जनता से धोखा का आरोप मढ़ा था। भाजपा ने भी उन पर हमला बोलते हुए पूछा था कि वो चीन के प्रवक्ता की तरह व्यवहार क्यों कर रहे हैं?

G20 समिट के बाद भारत-सऊदी अरब के संबंधों को नई उड़ान: कई क्षेत्रों में समझौते, बोले PM मोदी – ऐतिहासिक है इकोनॉमिक कॉरिडोर

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद ने G20 समिट के समापन के बाद अपना भारत का एक दिवसीय राजकीय दौरा शुरू किया। नई दिल्ली स्थित ‘हैदराबाद हाउस’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हुई। ‘सऊदी-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल’ की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ वो एक इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने की भी योजना तैयार हो रही है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ये काम दुष्कर है और इसमें अभी बहुत समय और मेहनत लगनी है।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और भारत के संबंधों से दोनों देशों का फायदा है और दोनों देश साथ मिल कर भविष्य के मौकों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में रहने वाला भारतीय समाज हमारा ही हिस्सा है और हम उनका अपने नागरिकों के लिए ख्याल रखेंगे। इससे पहले भारत और सऊदी अरब में कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। भारत ने सऊदी अरब के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की बात कही।

काउंसिल की ये पहली लीडर्स बैठक थी, जिसकी घोषणा 2019 में पीएम मोदी के पहले सऊदी अरब दौरे के दौरान हुआ था। उन्होंने कहा कि इससे हमारे रणनीतिक संबंधों में मजबूती आई है। पीएम मोदी ने इन संबंधों में नए और आधुनिक आयाम जोड़ने की बात करते हुए सऊदी अरब को सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक पार्टनर्स में से एक बताया और दोनों को विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था करार दिया। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के साथ ये साझेदारी अहम है।

पीएम मोदी ने कहा, “इस बैठक से हमारे संबंधों को एक नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी। हमें मानवता की भलाई के लिए काम करते रहने की प्रेरणा मिलेगी। हम भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच ऐतिहासिक कॉरिडोर स्थापित करने की बात की है। इससे हमारे बीच आर्थिक सहयोग, ऊर्जा का विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी को बल मिलेगा। क्राउन प्रिंस के ‘विज़न 2030’ के माध्यम से सऊदी अरब जिस तेजी से आर्थिक-सामाजिक प्रगति कर रहा है, उसके लिए मैं उनका अभिनन्दन करता हूँ।”

उन्होंने सऊदी अरब में रहने वाले भारतीयों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता हेतु और G20 की सफलता योगदान में लिए भी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद को धन्यवाद दिया। 2019 के बाद सऊदी अरब के क्राउन्स प्रिंस की ये भारत की दूसरी राजकीय यात्रा है। बैठक से पहले राष्ट्रपति भवन में उनका परंपरागत स्वागत किया गया। IT, कृषि, फार्मा, पेट्रोकेमिकल और मानव संसाधन के क्षेत्रों में 2 दर्जन से भी अधिक MoU पर हस्ताक्षर किए गए।

क्राउन प्रिंस ने इस दौरान भारत की तारीफ़ करते हुए कहा कि इन समझौतों से दोनों देशों का भविष्य बेहतर होगा। क्राउन प्रिंस ने इस बैठक में ये भी ध्यान दिलाया कि सऊदी अरब की जनसंख्या का 7% हिस्सा भारतीय समाज का है, जिन्होंने मुल्क के आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने आशा जताई कि ये काउंसिल दोनों देशों के नागरिकों की आकाँक्षाओं को पूरा करेगा। एनर्जी सेक्टर में भी एक बड़ी डील पर हस्ताक्षर हुए। इससे पहले मोहम्मद बिन सलमान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की थी

प्रियंका गाँधी की रैली के बाद कॉन्ग्रेस को डबल झटका, BJP में ज्योति मिर्धा और सवाई सिंह चौधरी: कहा- गहलोत राज में राजस्थान की स्थिति दयनीय

राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जाट नेता और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा बीजेपी में शामिल हो गईं हैं। कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता रिटायर्ड IPS सवाई सिंह चौधरी ने भी बीजेपी की सदस्यता ली है।

दोनों नेताओं ने 11 सितंबर 2023 को राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष सीपी जोशी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। कॉन्ग्रेस को राज्य में यह डबल झटका प्रियंका गाँधी की रैली के ठीक एक दिन बाद लगा है। उन्होंने 10 सितंबर को ही राजस्थान के टोंक में एक सभा को संबोधित किया था।

ज्योति मिर्धा राजस्थान के दिग्गज जाट नेता नाथूराम मिर्धा की पोती हैं। नाथूराम भी नागौर से सांसद रहे हैं। कुल मिलाकर वह 6 बार सांसद और 4 बार विधायक रहे। मिर्धा परिवार का दशकों से जाटों में बड़ा प्रभाव रहा है। ज्योति राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र से आती हैं। इस क्षेत्र में नागोर के अलावा बाड़मेर, जोधपुर, पाली और जालोर जिले की सीटों पर भी मिर्धा परिवार का प्रभाव रहा है।

ज्योति मिर्धा साल 2009 में कॉन्ग्रेस के टिकट से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनी थीं। हालाँकि 2014 और 2019 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में उन्हें रालोपा अध्यक्ष और एनडीए प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल से हार मिली थी। लेकिन अब रालोपा और भाजपा का गठबंधन टूट चुका है। ऐसे में भाजपा किसी मजबूत प्रत्याशी की तलाश में थी।

ज्योति मिर्धा के भाजपा में आने से पार्टी की तलाश पूरी हो गई है। एक ओर जहाँ भाजपा ज्योति को विधानसभा में जाट नेता के रूप में उपयोग कर जाट वोट बैंक साध सकती है। वहीं कॉन्ग्रेस के खिलाफ विधानसभा में उतारकर भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है। ज्योति का भाजपा में आना हनुमान बेनीवाल के लिए भी चिंता का कारण हो सकता है। यदि बेनीवाल बिना गठबंधन अकेले चुनाव लड़ते हैं तो उनके लिए राह आसान नहीं होगी।

मिर्धा परिवार के अन्य नेता भी हो सकते हैं भाजपा में शामिल

ज्योति मिर्धा के भाजपा का दामन थामने के बाद अब मिर्धा परिवार के अन्य नेताओं के भी बीजेपी में आने के कयास लगाए जा रहे हैं। इसमें बड़ा नाम ज्योति के चचेरे भाई डेगाना विधायक विजयपाल मिर्धा का है। भाजपा ज्वाइन करने के बाद ज्योति मिर्धा ने कहा कि कॉन्ग्रेस में कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। गहलोत सरकार में राजस्थान की हालत दयनीय हो गई। इसलिए पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व के चलते उन्होंने भाजपा में आने का फैसला किया।

रिटायर्ड IPS ने भी छोड़ा ‘हाथ’ का साथ

राजस्थान के पूर्व डीआइजी और रिटायर्ड IPS सवाई सिंह चौधरी ने भी ज्योति मिर्धा के साथ बीजेपी की सदस्यता ली है। उन्होंने साल 2018 में राजस्थान की खींवसर विधानसभा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालाँकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

PM मोदी के जन्मदिन पर ‘आयुष्मान भव:’, ₹13 हजार करोड़ की विश्वकर्मा योजना भी: जानिए केंद्र सरकार की इन स्कीम्स से किनको होगा लाभ

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘आयुष्मान भव:’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इसका मकसद हर व्यक्ति तक सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँचाना है। इसके अलावा इसी दिन ‘विश्वकर्मा योजना’ की भी शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री के जन्मदिन को बीजेपी ‘सेवा सप्ताह’ के तौर पर मनाती रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मनसुख मंडाविया ने 17 सितंबर से ‘आयुष्मान भव:’ अभियान शुरू करने की जानकारी सोमवार (11 सितंबर 2023) को दी। इस दौरान देशभर के 1 लाख 17 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिकों का फ्री में हेल्थ चेकअप किया जाएगा। यह अभियान 15 दिनों तक चलेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, “आयुष्मान भव: योजना के अंतर्गत देश में 1 लाख 17 हजार हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर है। हमने तय किया है कि सभी हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर पर आयुष्मान मेला लगेगा। आयुष्मान मेला में सभी गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को उपचार होगा। उसकी जाँच होगी। सभी ब्लॉक स्तर के अस्पताल में मेडिकल कॉलेज हेल्थ कैंप लगाया जाएगा। इस पखवाड़े के दौरान पूरे देश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्वच्छता को स्वास्थ्य के साथ जोड़कर कार्य करेंगे।”

ग्राम पंचायतों को किया जाएगा सम्मानित

मनसुख मांडविया ने 2 अक्टूबर को देश के सभी गाँव में ग्राम सभा की बैठक होने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि जिन गाँवों में आयुष्मान भारत कार्ड बने हैं, लोगों ने इसका लाभ लिया है, ​शत प्रतिशत वैक्सीनेशन हुआ है और टीबी तथा कुष्ठ रोग के मरीज नहीं हैं, उन्हें आयुष्मान गाँव घोषित किया जाएगा।

आयुष्मान भारत यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत प्रति साल 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मांडविया ने बताया कि अभियान के दौरान उन लोगों के कार्ड भी बनाए जाएँगे जो अभी तक इस योजना के दायरे में नहीं आ पाए हैं।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी पीएम मोदी के जन्म सप्ताह को सेवा सप्ताह के तौर पर मनाती है। पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर टीबी के मरीजों को गोद लेने के लिए भाजपा कार्यकर्ता सामने आए थे। अब तक 1 लाख टीबी मरीजों को गोद लेकर उनकी देखरेख और सहायता की जा रही है।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर विश्वकर्मा योजना की होगी शुरुआत

पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले से विश्वकर्मा योजना की घोषणा की थी। इसके अगले दिन 16 अगस्त को इस योजना को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई थी। 17 सितंबर को 13,000 करोड़ रुपए की पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत होगी। इससे 30 लाख शिल्पकार परिवारों को लाभ होगा। इसमें शिल्पकारों को 1 लाख रुपए तक का लोन 5 प्रतिशत के ब्याज पर दिया जाएगा।

इस योजना से सबसे ज्यादा लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएँ और कमजोर वर्ग को लाभ पहुँचेगा। इसका सीधा फायदा बढ़ई, सोनार, मूर्तिकार और कुम्हार आदि को मिलेगा। इसके जरिए सरकार शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाकर उन्हें घरेलू एवं वैश्विक बाजार के साथ जोड़ना चाहती है।

गोरों ने जिसे समझा गुलाम, स्वामी विवेकानन्द ने उनसे हाथ मिला कर कहा था – ‘धन्यवाद भाई’

अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद्, अध्याय 6, मंत्र 71)

यह नीति वाक्य सदियों से हमारी प्राचीन सनातन संस्कृति और भारतवर्ष के श्रेष्ठ चरित्र का परिचायक है। विश्व के इतिहास में एक स्वर्णिम कालखण्ड ऐसा भी रहा है, जब भारत समस्त मानव जाति का नेतृत्व करता था। हर क्षेत्र में भारत सर्वोच्च शिखर पर हुआ करता था। सर्वशक्तिमान होने के पश्चात भी हमने कभी भी अपना-पराया नहीं किया वरन् सबको अपना माना।

सबकी सहायता, सबके विकास के लिए सदैव तत्पर इस महान शांतिप्रिय राष्ट्र ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। परन्तु दुर्भाग्यवश हम पर सदैव ही चहुं दिस आक्रमण हुए और परिणाम स्वरूप एक दिन यह देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा गया।

परतंत्रता रूपी इस अंधकार ने भारत के स्वाभिमान को ऐसा ग्रहण लगाया कि भारतवासी अपना आत्म-विश्वास ही खो बैठे। क्रूर अंग्रेजी शासकवर्ग भौतिकवाद से ग्रस्त थे और अपने तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति हेतु सब पर अमानवीय अत्याचार करते थे। ऐसा प्रतीत होता था मानों प्रेम, करुणा, उदारता, संवेदनशीलता, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता जैसे मूल्य अपना अस्तित्व खोते जा रहे थे।

ऐसे में, सन् 1863, 12 जनवरी को भारत की तत्कालीन राजधानी कलकत्ता में ऐसे सूर्य का उदय हुआ, जिसके ज्ञान के प्रकाश से युगों-युगों तक दुनिया आलोकित होती रहेगी। 19वीं शताब्दी के इस महानायक को हम सभी स्वामी विवेकानन्द के रूप में याद करते हैं।

स्वामी विवेकानन्द प्राचीनता और आधुनिकता का मिश्रण थे। उन्हें प्राचीन भारतीय संस्कृति, इतिहास, दर्शन और अपने पूर्वजों के प्रति जहाँ अपार श्रद्धा थी, वहीं उनके आधुनिक विचार तत्कालीन रूढ़िगत परंपराओं का खण्डन भी करते थे। बचपन में उनके घर पर विभिन्न जातियों एवं संप्रदायों के लोगों की आवाजाही होती थी, अतएव सभी को भिन्न-भिन्न हुक्के दिए जाते थे। उन्होंने प्रत्येक हुक्के से एक-एक कश केवल इसी जिज्ञासावश लगाया कि यदि जातिगत नियमों को तोड़ दिया जाए तो क्या परिणाम होंगे?

11 सितम्बर 1893 (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 1949, युगाब्द 4995), पश्चिमी क्षितिज पर भारत के ज्ञानोदय का अविस्मरणीय और ऐतिहासिक दिवस बन गया। अमेरिका के शिकागो शहर में ‘विश्व धर्म संसद’ का आयोजन हुआ था, जिसमें दुनिया भर के दस प्रमुख संप्रदायों के अनेक प्रतिनिधि पूर्ण तैयारी से आए हुए थे। इसमें यहूदी, हिन्दू, इस्लाम, बौद्ध, ताओ, कन्फ्यूशियस, शिन्तो, पारसी, कैथोलिक तथा प्रोटेस्टेंट इत्यादि शामिल थे।

‘आर्ट इंस्टीट्यूट’ का विशाल सभागार लगभग 7000 श्रोताओं से खचाखच भरा हुआ था। भारत के हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए जब मात्र 30 वर्षीय नवयुवक, स्वामी विवेकानन्द स्वागत का उत्तर देने हेतु मंच पर जाते हैं, तब माता सरस्वती को स्मरण कर वह बोल उठते हैं, “अमेरिका वासी बहनों और भाइयों!”

उनके केवल इतना कहते ही सभी लोग खड़े हो गए और पूरा सभागार अगले 2 मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। यह घोर करतल नाद उस संन्यासी के सम्मान में हुआ था, जिसे कुछ क्षण पूर्व हीन भावना से देखा गया था। जिसने अमेरिका की भीषण ठंड में स्वयं की रक्षा हेतु रात भर रेलवे के माल यार्ड में पड़े बक्से में बिताया, जिनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, रंगभेद का शिकार बनाया गया, नीग्रो, काला कुत्ता आदि अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया गया। इन सभी कठिनाइयों का सामना कर, अपार सहनशीलता के साथ इस महायोगी ने समस्त संसार को विश्वबन्धुत्व का ही अमृत संदेश प्रदान किया।

कुल 17 दिनों (11 से 27 सितंबर, 1893) तक चलने वाले विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने 6 व्याख्यान दिए। क्रमशः स्वागत का उत्तर (11 सितम्बर), हम असहमत क्यों हैं (15 सितम्बर), हिन्दुत्व पर शोध-प्रपत्र (19 सितम्बर), धर्म भारत की मुख्य आवश्यकता नहीं (20 सितम्बर), बौद्ध धर्म – हिन्दू धर्म की पूर्णता (26 सितंबर), अंतिम सत्र में संबोधन (27 सितम्बर)।

एक ओर जहाँ वैश्विक मंच पर अन्य धर्मावलंबियों ने केवल अपने ही धर्म को सच्चा बताया और बाकी धर्मों की निंदा की वहीं, स्वामी विवेकानंद ने अपने वक्तव्य में गौरवशाली हिन्दू धर्म के विषय में कहा:

“मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं।”

भारत सदैव सर्वे भवन्तु सुखिन: की सोच रखता है और विपदा में मित्र की भाँति सबका साथ देने वाला देश रहा है, जिसका वर्तमान युग में भी प्रचुर उदाहरण मिल जायेगा!

वैश्विक महामारी कोरोना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व के 120 देशों में बिना किसी शर्त और मूल्य के भारतीय वैक्सीन भेज कर उन्हें संकट से उबारा। तुर्की जो कई मुद्दों पर भारत का घोर विरोधी रहा है, में भूकंप के समय यथोचित सहायता पहुँचाना इत्यादि।

भारत की इसी बंधुत्व भावना को उजागर करते हुए स्वामी विवेकानंद आगे कहते हैं, “मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूँ, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है। मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इजरायलियों की पवित्र स्मृतियाँ सँजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़ कर खंडहर बना दिया था। और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी। मुझे इस बात का गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ, जिसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और अभी भी उन्हें पाल-पोस रहा है।”

‘हिन्दुत्व पर शोध-प्रपत्र’ विषय पर स्वामी विवेकानन्द ने 19 सितम्बर को जो भाषण दिया, वह अत्यन्त महत्वपूर्ण और चर्चित भाषण था। मानो इसी कार्य के लिए उन्हें अपने गुरु ठाकुर श्रीरामकृष्ण परमहंस देव का आदेश और भारत माता का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। उनके आह्वान के ओजस्वी शब्दों की शक्ति थी वेद, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता की पावन वाणी!

स्वामी विवेकानंद के प्रत्येक भाषण का अमेरिकी जनमानस पर अद्वितीय प्रभाव पड़ा। प्रशंसा करते हुए कुछ ने यह भी कहा, “ऐसे विद्वान राष्ट्र में मिशनरी भेजना तो निरा मूर्खता है। वहाँ से तो हमारे देश में धर्मप्रचारक भेजे जाने चाहिए।”

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. जॉन हैनरी राइट ने कहा था, “स्वामीजी, आपसे आपकी योग्यता का प्रमाण-पत्र माँगना सूर्य से उसके चमकने का अधिकार पूछने जैसा है।”

महर्षि अरविन्द ने कहा था, “स्वामी विवेकानन्द का पश्चिम में जाना, विश्व के सामने पहला जीता जागता संकेत था कि भारत जाग उठा है, न केवल जीवित रहने के लिए बल्कि विजयी होने के लिए।”

स्वामी विवेकानंद पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने पश्चिम में भारतीय सनातन संस्कृति, वेदान्त दर्शन और योग को केवल प्रस्तुत ही नहीं अपितु प्रतिष्ठित भी किया। अमेरिका के विभिन्न प्रान्तों में उनके बड़े-बड़े पोस्टर लगे, दुनिया भर के समाचार पत्र उनकी प्रशंसा और वंदन से भरे हुए थे। धर्म संसद के पहले ही भाषण से वो विश्व विख्यात हो गए थे!

उनके सम्मान में उस रात राजोचित सत्कार का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद का कक्ष भौतिक सुख-सुविधाओं से लैस था परन्तु एक संन्यासी को उस विलासितापूर्ण बिछौने पर नींद कहाँ आती! उनका कोमल हृदय तो अपनी मातृभूमि की दशा पर द्रवित हो उठा, जिसे विगत 5 वर्षों तक भ्रमण के दौरान उन्होंने स्वयं अनुभव किया था! सारी रात वह शिशु के समान फूट-फूट कर रोते रहे और ईश्वर के सम्मुख अपने भारत के पुनरुत्थान की प्रार्थना करते रहे।

स्वामी विवेकानंद का विशाल हृदय केवल भारत ही नहीं अपितु अन्य देश के पतितों और दीनों के लिए भी क्रंदन करता था। एक बार एक रेलवे स्टेशन पर जब वे गाड़ी से उतर रहे थे, उनका भव्य स्वागत किया जा रहा था, तभी वहाँ एक नीग्रो (काले लोग, जिसे अमेरिका-यूरोप के गोरे गुलाम समझते थे) कुली ने आगे बढ़ कर उनसे हाथ मिलाते हुए कहा, “बधाई! मुझे बेहद खुशी है कि मेरी जाति के एक व्यक्ति ने इतना बड़ा सम्मान प्राप्त किया है। इस देश के पूरे नीग्रो समुदाय को आप पर गर्व है।”

स्वामी विवेकानंद ने उससे स्नेहपूर्वक हाथ मिलाया और विनम्रता से कहा, “धन्यवाद भाई धन्यवाद!”

वास्तव में इतनी प्रसिद्धि होने के पश्चात भी स्वामी विवेकानंद को कई बार अपमान और तिरस्कार झेलना पड़ा था। अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में नीग्रो समझ कर कई होटलों में उन्हें प्रवेश करने से रोका गया परन्तु उन्होंने कभी यह उजागर नहीं किया की वे नीग्रो नहीं हैं या वे भारतीय हैं। एक पश्चिमी शिष्य ने उनसे पूछा कि ऐसी स्थितियों में वे सत्य जाहिर क्यों नहीं करते? इस पर उन्होंने तनिक क्रोधित स्वर में उत्तर दिया, “क्या! दूसरों को नीचा दिखा कर मैं ऊपर उठूँ! मैं इस पृथ्वी पर इसलिए नहीं आया हूँ।”

स्वामी विवेकानंद ने वैश्विक स्तर पर पराधीन भारत का मान बढ़ाकर, उसके सोए हुए आत्म विश्वास को पुनः जागृत कर नवशक्ति का संचार किया। इस चराचर जगत के कण-कण में ईश्वर दर्शन करने वाले इस दिव्य पुरुष ने अपने भारतवासियों का आह्वान करते हुए कहा:

“मेरे भारत! जागो! और जनसमूह का उद्धार करो।”

वर्तमान समाज सांप्रदायिकता की अग्नि में झुलस रहा है। कोई देश अपनी सीमाओं के विस्तार हेतु अतिक्रमण कर रहा है तो कहीं मजहब के नाम पर जिहाद हो रहा है। सब अपने को श्रेष्ठ और महान बताने की होड़ में लगे हुए हैं। ऐसे में स्वामी विवेकानंद के विश्वबन्धुत्व का सन्देश ही मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की क्षमता रखता है क्योंकि यह संसार को सहिष्णुता और सार्वभौम स्वीकृति की सीख देता है।

डरावना, खतरनाक, परेशान करने वाला… कश्मीर फाइल्स और केरल स्टोरी के बाद ‘ग़दर 2’ की सफलता से चिढ़े नसीरुद्दीन शाह, बताया – मेरी नानी ने पैदा किए 15 बच्चे

बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह अपनी एक्टिंग से अलग विवादित बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। अब उन्होंने कहा है कि कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार का सच दिखाती फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ के हिट से वह परेशान हो गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के स्कर्ट पहनने पर ‘मुल्ले’ कुछ कहते थे उन्हें गुस्सा आता था।

FPJ ने नसीरुद्दीन शाह से बातचीत की है। इसमें उन्होंने कहा, “मैंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘गदर 2’ जैसी फिल्में नहीं देखीं हैं। लेकिन मुझे पता है ये किन मुद्दों पर बनाई गई हैं। परेशान करने वाली बात यह है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्में इतनी लोकप्रिय हैं। वहीं, सुधीर मिश्रा, अनुभव सिन्हा और हंसल मेहता द्वारा बनाई गई फिल्में हैं। ये लोग अपने समय की सच्चाई को दिखाने करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वे नजर नहीं आते।”

नसीरुद्दीन शाह ने अनुभव सिन्हा की सुपर फ्लॉप रही फिल्म ‘भीड़’ की तुलना ‘गदर 2’ से करते हुए कहा, “अब महत्वपूर्ण यह है कि ये फिल्म निर्माता हिम्मत न हारें और फिल्म बनाना जारी रखें। सौ साल बाद लोग ‘भीड़’ और ‘गदर 2’ भी देखेंगे। तब उन्हें पता चलेगा कि कौन सी फिल्म हमारे समय की सच्चाई दिखाती है। यह बेहद डरावना है कि फिल्म निर्माता ऐसी फिल्में बना रहे हैं जो सभी गलत चीजों को सही दिखाते हैं और बिना किसी कारण के अन्य समुदायों को नीचा दिखाते हैं। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है।”

अपने घर-परिवार की बातें बताते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “जब मैं 10 साल का था, तब मैंने अपनी अम्मी से पूछा कि आपने किस स्कूल में पढ़ाई की है। इस पर अम्मी ने कहा कि उन्हें किसी ने स्कूल नहीं भेजा। मेरी माँ मेरी नानी के 15 बच्चों में दूसरे नंबर की थी। मेरा मानना ​​है कि 35 साल की उम्र तक उन्होंने बच्चे पैदा करने के अलावा कुछ भी नहीं किया। जब वह 14 साल की थीं तब उनकी शादी हो गई और 15 साल की उम्र में ही पहला बच्चा हुआ।”

सानिया मिर्जा के स्कर्ट पहनने पर इस्लामिक कट्टरपंथियों के कमेंट और बुर्का को लेकर नसीरुद्दीन ने कहा, “पर्दा करने का मतलब यह नहीं है कि औरत को ढक कर एक बेडौल गाँठ में बदल दिया जाए, ताकि कोई उस पर नजर न डाले। आँख के पर्दे का मतलब है कि वहाँ मत देखो जहाँ तुम्हें नहीं देखना चाहिए। इसीलिए जब मुल्ले टेनिस खेलते समय सानिया मिर्जा के स्कर्ट पहनने की आलोचना करते थे तो मुझे बहुत गुस्सा आता था। तुम उसकी स्कर्ट क्यों देख रहे हो? इसका मतलब है कि तुम दोषी हो और गंदे दिमाग वाले हो।”

गाल पर नाखून के निशान, कार में खून… सेक्स के लिए महक शर्मा पर दबाव बना रहा था शादीशुदा अजीज अहमद, अब मिली लड़की की लाश

असम के डिब्रूगढ़ में एक 20 वर्षीय हिन्दू लड़की का शव संदिग्ध स्थिति में पाया गया है। क्षत-विक्षत हालत में मिले इस शव की पहचान महक शर्मा के रूप में हुई है। शव के बगल में अजीज अहमद उर्फ़ मुन्ना नामक एक व्यक्ति भी पड़ा मिला, जिसके शरीर पर चोट के निशान नहीं पाए गए। अजीज को महक का प्रेमी बताया गया है। उसे ही हत्या का आरोपित माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अजीज के शादीशुदा और 1 बच्चे के अब्बा होने की जानकारी मिलने पर महक उस से दूरी बनाने लगी थी। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना सोमवार (10 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना डिब्रूगढ़ टाउन के बाईपास की है। यहाँ रविवार सुबह 4:15 बजे पुलिस को सड़क के किनारे एक अज्ञात लड़की के शव मिलने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँची तो वहाँ एक युवक भी सड़क पर पड़ा मिला। युवक का नाम अजीज अहमद है जिसके शरीर पर चोट के निशान नहीं थे। घटनास्थल पर एक इनोवा कार भी मिली। अजीज के अब्बा का नाम मुस्तफा है। वह डिब्रूगढ़ के मैजान गाँव का निवासी है। मृतका की पहचान डिब्रूगढ़ के ही खालीहमारी इलाके की महक शर्मा के तौर पर हुई।

अजीज अहमद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। मिल रही जानकारी के मुताबिक, पहले से शादीशुदा और बाल-बच्चेदार अजीज अहमद पिछले 6 माह से महक शर्मा से परिचित था। वह लगातार महक पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव दे रहा था। शनिवार (9 सितंबर, 2023) को शाम लगभग 3:30 पर अजीज अहमद महक शर्मा को घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। पुलिस का कहना है कि अजीज के गले पर महक के नाखूनों द्वारा खरोंच के निशान पाए गए हैं। कार के अंदर भी खून के छींटे भी मिले हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, अजीज ने महक की मौत की वजह कार का एक्सीडेंट होना बताया। हालाँकि, कार में खरोंच आदि के निशान नहीं मिले इसलिए पुलिस को अजीज अहमद की बातें संदेहास्पद लग रहीं हैं। मामले की गहराई से जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है।

इस घटना पर मृतका महक की माँ मौसमी शर्मा का बयान सामने आया है। पेशे से टीचर मौसमी ने बताया कि वो और उनकी बेटी एक साथ रहते थे। आरोप है कि अजीज पिछले 6 माह से मृतका को तंग कर रहा था। जब महक की माँ ने इसकी शिकायत करनी चाही तब उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी मिली थी। घटना के दिन का जिक्र करते हुए मौसमी शर्मा ने कहा कि अजीज उनकी बेटी को जबरन शम 3:30 पर अपने साथ ले गया था। रात 8:30 पर मौसमी ने अंतिम कॉल अपनी माँ को कर के एक ढाबे पर खाना खाने की जानकारी दी थी। उसके बाद माँ-बेटी का सम्पर्क नहीं हो पाया।

असम के DGP जी पी सिंह ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिला पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

‘5 कुत्तों ने मिल कर मुझ पर हमला किया’: हाथ में पट्टी बाँध कर सुप्रीम कोर्ट पहुँचा वकील तो CJI ने पूछा क्या हुआ, रेबीज से बच्चे की मौत का मामला भी उठा

हाल के दिनों में देश भर में कुत्तों के हमले के कई मामले सामने आए थे। अब सुप्रीम कोर्ट में कुत्तों के हमले वाला मामला उठा है। असल में एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कुणाल चटर्जी घायल अवस्था में सुप्रीम कोर्ट पहुँचे। उनके हाथ में जख्म था। जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें इस तरह से देखा तो पूछा कि क्या हुआ। अधिवक्ता ने बताया कि 5 कुत्तों ने एक साथ मिल कर उन पर झपट्टा मारा और हमला बोल दिया। इसी कारण वो घायल हो गए।

इस पर CJI चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा कि अगर आपको कोई मेडिकल मदद चाहिए तो वो रजिस्ट्रार को इसके लिए कह सकते हैं। इसी दौरान वहाँ बैठे जस्टिस PS नरसिम्हा ने कुत्तों के हमले को लेकर कहा कि ये एक गंभीर खतरा बन कर उभर रहा है। तब ‘सॉलिसिटर जनरल (SG)’ तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इसी महीने हुई एक घटना का जिक्र किया, जहाँ पिता की गोद में एक 14 वर्ष के बच्चे की मौत हो गई थी। विजयनगर थाना क्षेत्र के चरण सिंह कॉलोनी में डेढ़ महीने पहले एक कुत्ते ने बच्चे को काट लिया था।

बच्चे ने डाँट के डर से ये बात अपने परिवार से छिपाई और इसका खुलासा तब हुआ जब उसके शरीर में रेबीज फैलने लगा। इस मामले में पड़ोस की एक महिला और उसके परिजनों पर मुकदमा दर्ज किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अकेले गाजियाबाद-नोएडा में 1.25 लाख कुत्ते हैं। इस घटना जब सुप्रीम कोर्ट में जिक्र सामने आया तो CJI ने बताया कि उनका लॉ क्लर्क जब गाड़ी पार्क कर रहा था, उस दौरान भी उस पर कुत्तों का हमला हुआ। फिर SG ने ध्यान दिलाया कि एक और छोटे बच्चे पर हमला हुआ था।

वकील ने इस दौरान इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की भी अपील सुप्रीम कोर्ट से की, हालाँकि इस पर कुछ कहा नहीं गया है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से भी CCTV वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक बच्चे को कुत्तों ने दौड़ा कर उस पर हमला कर दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही एक मामला विचाराधीन है, जो लोगों पर कुत्तों के हमले से जुड़ा है। अब वकील के हाथ में पट्टी बाँध पर पहुँचने से ये मामला वहाँ फिर उठा है। इस दौरान पीठ में जस्टिस मनोज मिश्रा भी मौजूद थे।

राजस्थान में सड़क पर नंगी मिली महिला, बार-बार बयान बदलती रही पुलिस: क्या प्रियंका गाँधी की रैली के कारण गैंगरेप छिपा रही थी पुलिस?

राजस्थान के भीलवाड़ा में शनिवार (9 सितम्बर, 2023) की रात में गैंगरेप की एक घटना सामने आई है। मामले में महिला नंगी सड़क पर पाई गई थी। जिसको लेकर रविवार (10 सितम्बर, 2023) को पुलिस बार-बार अपने बयान बदलती रही, पहले कहा कोई रेप नहीं हुआ, फिर कहा परिचितों के साथ गई महिला ने झूठ बोला और बाद में उसी राजस्थान पुलिस ने आरोप को सही बताते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया।

वहीं सोशल मीडिया पर इसे प्रियंका गाँधी की रैली से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, रविवार (10 सितम्बर, 2023) को राजस्थान में भाजपा के परिवर्तन रैली के जवाब में प्रियंका गाँधी की रैली थी। और पुलिस के बयान बदलने की घटना को उसी से जोड़कर लोगों द्वारा देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रेप की यह घटना भीलवाड़ा के गंगापुर में शनिवार (9 सितम्बर, 2023) रात करीब 8 बजे की है।

इस मामले में अंकित जैन नामक एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर दावा किया, “प्रियंका गाँधी की रैली से सिर्फ़ तीन किलोमीटर दूर एक महिला निर्वस्त्र पाई जाती है, पुलिस की गाड़ी की सीट के कपड़े से उसे ढका जाता है। महिला कहती है उसके साथ गैंगरेप हुआ है। रैली से पहले राजस्थान पुलिस ट्वीट कर कहती है रेप और अपहरण की घटना झूठी निकली, रैली के बाद पुलिस नया ट्वीट कर कहती है रेप की घटना सच है।”

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, प्रियंका गाँधी के राजस्थान में रैली को देखते हुए 10 सितंबर को राजस्थान पुलिस द्वारा भीलवाड़ा गैंग रेप के मामले में लापरवाही बरतने और बार-बार अपने बयान बदलने का मामला सामने आया है।

इस मामले में सबसे पहले सुबह 11:05 बजे, राजस्थान पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बयान जारी कर दावा किया कि गंगापुर के आमली रोड पर नग्न अवस्था में मिली महिला का न तो अपहरण किया गया था और न ही उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि महिला ने ‘झूठ’ बोला था क्योंकि वह अपने पति से डरती थी।

इसके बाद, एक और पोस्ट कर पुलिस ने कहा कि उसका मेडिकल अस्पताल में किया गया था, और उन्हें उसके फोन पर आरोपित के साथ कॉल रिकॉर्डिंग मिली।

दोपहर करीब 2:59 बजे जब प्रियंका गाँधी की रैली समाप्त हो चुकी थी तब भीलवाड़ा पुलिस ने फिर से बयान जारी कर कहा कि आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस ने साफ कहा कि सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई है, लेकिन अपहरण की शिकायत फर्जी निकली। आरोपित महिला के परिचित थे। उसके साथ बलात्कार करने के बाद वह भाग निकली।

करीब 3:45 बजे, राजस्थान पुलिस के ऑफिसियल एक्स हैंडल ने इस मामले पर एक और बयान जारी किया, जिसमें यह हिस्सा हटा दिया गया कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार नहीं हुआ था और कहा गया कि 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अपने बाद के ट्वीट में, पुलिस ने पुष्टि की कि जाँच के बाद महिला के खिलाफ दुष्कर्म की पुष्टि की गई, जो कि पुलिस के पहले के बयान के विरोध में था। 

सोशल मीडिया पर हुई राजस्थान पुलिस की किरकिरी 

इस पूरे मामले को लेकर फैक्ट नाम के सोशल मीडिया हैंडल ने लिखा, “ये है राजस्थान पुलिस! पहले उन्होंने रेप से इनकार किया क्योंकि सुबह प्रियंका गाँधी वहाँ रैली कर रही थीं, बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उनके साथ रेप हुआ था। और अब उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है जब उन्होंने कहा था कि पीड़िता के साथ बलात्कार नहीं हुआ है।”

इस पोस्ट में फैक्ट हैंडल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत और प्रियंका गाँधी को टैग करते हुए इसे शर्म की बात बताया है। साथ ही तंज करते हुए कहा है कि यही लोग महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की बात करते हैं। 

आरोपित गिरफ्तार 

गौरतलब है कि इस मामले में FIR के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसएचओ गंगापुर, सीओ व अन्य पुलिस टीमों ने सर्च अभियान चलाया। पुलिस का दावा है कि सीडीआर की जाँच से भी उन्हें मामले की पुष्टि करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया।

आरोपितों के नाम गंगापुर आमली निवासी छोटू (42) पुत्र गणेश सरगरा व चीडखेड़ा निवासी गिरधारी (30) पुत्र नगजीराम गाडरी बताया जा रहा है। फ़िलहाल दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं पुलिस को मौके से एक मोबाइल फोन भी बरामद और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली है