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सनातन है तो भारत है, उसकी छाया में ही सब सुरक्षित हैं… जहाँ कम हुआ सनातन का प्रभाव वहाँ बँध गया सेकुलरिज्म का बोरिया-बिस्तर

सनातन धर्म के विरुद्ध विपक्षी नेताओं के बयानों की गाली-गलौज भरी बौछारें देखकर पुरानी हिन्दी फिल्म का चर्चित गीत ‘अच्छों को बुरा साबित करना दुनिया की पुरानी आदत है’ याद आता है। दुनिया की यह आदत रही होगी किन्तु भारतवर्ष की सनातन संस्कृति में उसकी मूलभूत विशेषता सहिष्णुता के कारण यह आदत कभी नहीं रही।

गुलामी के काले दिनों में अंग्रेजों ने भारतवर्ष के धर्म, संस्कृति, शिक्षा आदि समस्त अस्मिता सूचक महान संदर्भों के विरुद्ध षड्यन्त्रपूर्वक विष उगलना प्रारम्भ किया। उनके इसी विष को यहाँ के कम्युनिस्टों ने शिक्षा, साहित्य और कला के धरातल पर स्वतंत्र भारत में निरन्तर फैलाया और आज यही जहर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए विपक्ष के कुछ नेता उगल रहे हैं।

सनातन धर्म, समानता के खिलाफ है, वह कुष्ठ रोग की तरह है, उसे डेंगू-मलेरिया और कोरोना की तरह मिटाना होगा- आदि अपमान सूचक वाक्य देश की फिजा में गूँजकर देश-विदेश में बसे एक अरब से अधिक सनातनी हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करके उनकी सहिष्णुता का खुला मजाक उड़ा रहे हैं। उन्हें समर्थन देने वाले इसे अभिव्यक्ति की आजादी कह रहे हैं और इसका समर्थन कर रहे हैं।

यदि स्वयं को चर्चा में लाने और मीडिया में छाने के लिए ऐसी अनर्गल बयानबाजी अभिव्यक्ति की आजादी है तो इस पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाने पर विचार करना आज की बड़ी आवश्यकता बन गई है, क्योंकि ऐसे बयानों से विपक्ष को सत्ता मिले या न मिले किन्तु सामाजिक समन्वय, सद्भाव और सहयोग अवश्य क्षत-विक्षत होगा। समाज में संघर्ष बढ़ेगा। इसलिए ऐसे नफरत भरे बयानों पर नियंत्रण अनिवार्य है।

सनातन भारतवर्ष का अपना धर्म है। उसके सिद्धान्त शाश्वत हैं और न केवल भारतवर्ष के लिए अपितु समस्त विश्व के कल्याण के लिए संकल्पित हैं। हजारों वर्ष पूर्व सनातन धर्म ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का उदार भाव व्यक्त किया और आज भी वह अपने धार्मिक अनुष्ठानों की समापन वेला में ‘विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो‘ – जैसे उद्घोष गुंजित कर अपनी मूल्य चेतना को स्वर देता है। प्रकृति के साथ उसकी गहरी रागात्मकता है जो नदी, सागर, पर्वत, वन, बादल, भूमि, वायु आदि में देवत्व का दर्शन कराती है और प्राकृतिक पर्यावरण की शुद्धता के लिए आवश्यक वातावरण का निर्माण करती है।

सनातन धर्म के अद्वैत दर्शन ने मनुष्य के साथ-साथ जीवमात्र में परम सत्ता का दर्शन देकर पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों तक की रक्षा का प्रावधान किया है। सनातन धर्म का प्रतिनिधि ग्रंथ श्रीमद्भगवदगीता ब्राह्मण, गाय हाथी, कुत्ता, चाण्डाल सब में एक ही ईश्वर की उपस्थिति निर्देशित कर जीवमात्र की समानता का शंखनाद करता है। वैदिक युग से लेकर आज तक उसका प्रवाह निर्बाध रहा है।

शास्त्र और शस्त्र सनातन धर्म की दो सशक्त भुजाएँ हैं। राम, कृष्ण और शिव उसके प्रतीक आदर्श हैं। भारत में हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक फैले छोटे-बड़े करोड़ों मंदिर, चैरे, चबूतरे उसके ऊर्जा केन्द्र हैं और असंख्य साधु-संन्यासी उसके संरक्षक हैं। उसे मिटाने की बात करना दिन में सपने देखने जैसा है।

सनातनी धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगाने में अग्रणी हैं। शकों और हूणों जैसे बर्बर आक्रान्ताओं पर विजय प्राप्त करने वाला सनातन धर्म गजनवी, गोरी, तैमूर, औरंगजेब, नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली जैसे आक्रान्ताओं से टकराकर भी नहीं टूटा। ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ आए पादरियों के कुचक्र और प्रलोभन उसे लुभा न सके। हजारों वर्ष के संघर्ष के बाद भी उसकी विजय-पताका सबसे ऊँची है। शिकागो के सर्वधर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द के व्याख्यान की सर्वस्वीकृति उसकी साक्षी है।

सनातन दूर्वा है। उसमें दूर्वा की तरह झुककर पैरों तले रौंदे जाने पर भी अपने अस्तित्व को बचा ले जाने की अद्भुत क्षमता है। विधर्मी आक्रमणों और कुटिल षड्यंत्रों की कड़ी धूप में सूख जाने पर भी वह अवसर पाकर हरी हो उठती है।

सनातन अमरवेल है। उसे अपने विस्तार के लिए कभी राजसिंहासन का सहारा नहीं लेना पड़ा। वह राजपुत्रों और राजवंशों से पोषण पाकर नहीं फैली। उसे अपने प्रसार के लिए आक्रमणकारी सैनिकों और सेवा का आडम्बर रचते प्रलोभनकारी व्यापारियों का सहारा नहीं लेना पड़ा। सनातन धर्म की अमरवेल अपने उदार चिन्तन और मानवीय मूल्यों के कारण बिना आश्रय के ही फल-फूल रही है। विश्व में प्रतिष्ठित हो रहे नए मंदिर इसके प्रमाण हैं। सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देश में मंदिर निर्माण सनातन की नई प्रतिष्ठा है। इस्कॉन द्वारा स्थापित कृष्ण मंदिरों की बढ़ती संख्या सनातन धर्म की अमर बेल का नूतन विकास है।

सनातन धर्म अक्षयवट है, जिसकी छाया में मनुष्यता सुरक्षित है। उसकी जड़ें जितनी गहरी हैं, उसका विस्तार आकाश में भी उतना ही अपार है। उसके आदर्श काल्पनिक नहीं, यथार्थपरक हैं। वह जड़ अथवा स्थिर नहीं है, गतिमान और परिवर्तनशील है। उसमें अपने अंदर समय के साथ आने वाली विकृतियों को स्वयं दूर करने की अद्भुत क्षमता है। गति, परिवर्तन, परिष्करण, संशोधन उसके मूलतत्व हैं। इसलिए वह चिर पुरातन और नित नवीन है। उसकी पृष्ठभूमि में विराट इतिहास है और उसके समक्ष अनन्त भविष्य। सनातन मनुष्य की रचनात्मक प्रज्ञा का अक्षय प्रवाह है। नकारात्मक नारों का भ्रामक प्रचार उसे रोक नहीं सकता।

विगत शताब्दियों में परतंत्रता जनित प्रभावों के कारण सनातन में आई छुआछूत, पर्दा, बालविवाह, आदि विकृतियों पर विजय पाने की ओर सनातन का विजय-रथ निरन्तर अग्रसर है। सनातन को कोसकर समाज में जहर घोलने वाले इन तथाकथित बुद्धिजीवियों, समाज सुधारकों और नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि अब से लगभग पंद्रह सौ वर्ष पूर्व सम्राट हर्षवर्धन के समय में भारत भ्रमण पर आने वाले विदेशी चीनी यात्री हवेनसांग ने भारतीय समाज की जिस सुख, शान्ति, समृद्धि का उल्लेख किया है, वह सनातन चिन्तन परम्परा की ही देन है।

भारत सोने की चिड़िया सनातन व्यवस्था की छाया में ही रहा। अयोध्या नरेश सत्यवादी हरिश्चन्द्र को काशी के डोम ने खरीदा था, इस संदर्भ से भी प्राचीन भारत में सनातन व्यवस्था में दलित समझे जाने वाले वर्ग की आर्थिक स्थिति का अनुमान करना चाहिए। लगभग सौ वर्ष पूर्व सवर्ण वर्ग में जन्मे महर्षि दयानन्द ने आर्य समाज की स्थापना कर सनातन धर्म में संशोधन करते हुए अस्पृश्यता के अभिशाप को दूर करने की दिशा में देशव्यापी सार्थक प्रयत्न किए।

कथित ऊँची जातियों में जन्म लेने वाले वीर सावरकर, महात्मा गाँधी, डॉ. हेडगेवार, प. श्रीराम शर्मा आचार्य आदि ने सनातन में आए सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए गंभीर प्रयत्न किए, जिनका शुभ परिणाम स्वतंत्र भारत में धार्मिक, सामाजिक और संवैधानिक धरातल पर आज सबके सामने हैं। मंदिरों के द्वार सबके लिए खुले हैं। आज चाय की गुमठियों, होटलों और चाट के ठेलों पर खाने-पीने का सामान बनाने वालों की जाति नहीं पूछी जाती। सामाजिक समरसता के इन प्रयत्नजनित सकारात्मक परिवर्तनों ने सनातन को नई शक्ति दी है। जिन गाँवों-कस्बों में अभी भी हठपूर्वक छुआछूत जैसे अपराध यदि कुछ लोग कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाहियाँ हो रही हैं। जितना घना अँधेरा कल तक था, उतना आज नहीं है। जो आज बचा है वह कल नहीं रहेगा।

इस आशा और विश्वास के साथ सनातन समाज आगे बढ़ रहा है। उसने तुलसीदास के उस रामराज्य की स्थापना को चुना है, जिसमें चारों वर्णों के लोग राजघाट पर साथ-साथ स्नान करते हैं;

राजघाट सब विधि सुंदर वर।
मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर।।

किंतु सामाजिक समरसता के इस राजघाट का निर्माण दलित और सवर्ण की राजनीति करने वाले कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है। वह उनकी आँख की किरकिरी बन रहा है, क्योंकि इसके कारण उन्हें सत्ता स्वयं से छिटकती दिख रही है। उनकी बौखलाहट बढ़ रही है और वे वाणी का विवेक और संयम खोकर स्वयं को ही कोस रहे हैं। सनातन को कोसने वालों का मूल भी सनातन में ही है, क्योंकि सनातन ही भारत की पहचान है। संसार के अन्य देश भारत की सनातन सांस्कृतिक विरासत यहाँ के मठों, मंदिरों, धर्म ग्रंथों, पर्व-उत्सवों, राम-कृष्ण आदि महापुरुषों से ही जानते हैं।

सनातन है तो भारत है। सनातन नहीं तो भारत नहीं, भारत की पहचान नहीं। सनातन की छाया में ही भारत में अन्य धर्म सुरक्षित रह सकते हैं। विगत सात दशकों का इतिहास साक्षी है कि पाकिस्तान और बंगलादेश में सनातन के अल्पमत में आते ही वहाँ अन्य धर्मों के अनुयायी सुरक्षित नहीं रहे। अफगानिस्तान में सनातन पूरी तरह निर्मूल हुआ है तो वहाँ बौद्ध, जैन और सिख आदि भी नहीं बचे हैं। जिस धर्म-निरपेक्षता और सर्वधर्म समभाव की दुहाई हमारे विपक्षी नेता देते हैं उसकी सुरक्षा सनातन की पुष्टि में ही है, उसके निर्मूलन में नहीं।

(लेखक डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र, शासकीय नर्मदा महाविद्यालय, नर्मदापुरम्, मध्य प्रदेश में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हैं)

डीजल की गाड़ियों पर नहीं लगेगा 10% एक्स्ट्रा टैक्स: मीडिया में छपी रिपोर्ट, गडकरी ने क्या-क्या कहा, जानिए पूरी बात

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने साफ़ किया है कि डीजल गाड़ियों पर टैक्स लगाने का भारत सरकार का कोई इरादा नहीं है। उनका एक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया में कुछ कन्फ्यूजन पैदा हो गया था, जिसे लेकर उन्होंने अब सफाई दी है। नितिन गडकरी ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि जिन मीडिया रिपोर्ट्स में डीजल गाड़ियों की बिक्री पर 10% टैक्स लगाए जाने की बात चल रही है, उन पर तुरंत सफाई देना आवश्यक है।

नितिन गडकरी ने कहा कि इस पर सफाई देनी ज़रूरी है कि फलहाल भारत सरकार के पास इस विषय पर कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि 2070 तक भारत कार्बन उत्सर्जन को शून्य पर ले जाना चाहता है। उन्होंने कहा कि डीजल जैसे फ्यूल और गाड़ियों की बिक्री में बड़ी तेजी के कारण वायु प्रदूषण में होने वाली बढ़ोतरी से निपटने के लिए ज़रूरी है कि ऊर्जा के अधिक क्लीन एवं ग्रीन विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि ये फ्यूल स्वदेशी, प्रदूषण मुक्त और सस्ते होने चाहिए, साथ ही इन्हें बाहर से आयात करने की ज़रूरत न पड़े।

मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चाओं का बाजार एक कार्यक्रम में उनके भाषण के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था, “प्रदूषण एक बहुत गंभीर समस्या है और इसके कारण हमारे स्वास्थ्य पर भी दुष्परिणाम आ रहे हैं। वित्त मंत्री मेरे घर पर एक बैठक के लिए आने वाली हैं और मैं उन्हें निवेदन करने वाला हूँ कि डीजल से जो भी गाड़ियाँ चलती हैं उन पर अतिरिक्त 10% GST लगाया जाए। फिर जल्दी इसका (ऊर्जा का) ट्रांसफॉर्मेशन होगा। नहीं तो लोग जल्दी सुनने के मूड में नहीं हैं।”

इस बयान के बाद मीडिया में चलने लगा कि मोदी सकरार डीजल गाड़ियों पर 10% अतिरिक्त टैक्स लगाने वाली है। मीडिया से भी बात करते हुए भी उन्होंने कहा था कि 2014 के बाद जो 22% डीजल की गाड़ियाँ थीं, वो अब 18% पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बढ़ रही है, वैसे डीजल की गाड़ियाँ नहीं बढ़नी चाहिए। फिर उन्होंने अतिरिक्त टैक्स लगाने की बात की थी। हालाँकि, अब उनके ट्वीट के बाद साफ़ हो गया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है और मोदी सरकार डीजल गाड़ियों पर अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाने जा रही है।

हरियाणा पुलिस की हिरासत में गोरक्षक मोनू मानेसर, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तारी: नासिर-जुनैद केस में राजस्थान पुलिस को सौंपने की तैयारी

हरियाणा पुलिस ने गुरुवार (12 सितंबर 2023) को गोरक्षक मोनू मानेसर को उसके गाँव से हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है कि अब मोनू को राजस्थान पुलिस को सौंपने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान पुलिस भिवानी में इस साल फरवरी माह में मारे गए नासिर और जुनैद हत्याकांड में मोनू से पूछताछ करेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस की CIA ब्रान्च ने पकड़ा है। सभी पुलिसकर्मी बोलेरो और क्रेटा सहित 3 गाड़ियों से सादी वर्दी में आए थे। मोनू को उसके गुरुग्राम स्थित घर से हिरासत में लिया गया है। बताते चलें कि मुस्लिम पक्ष नूहं मामले में भी मोनू मानेसर पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते रहे हैं।

इस बीच, पुलिस कार्रवाई की दावे वाली एक CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फुटेज में काले रंग के कपड़ों में मोनू को 2 लोग ले जाते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पुलिसकर्मी हैं।

इंडिया टुडे से बात करते हुए हरियाणा की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) ममता सिंह ने कहा कि मोनू मानेसर को आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मा्मले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने उन राज्यों को भी सूचित कर दिया है, जहाँ मोनू मानेसर वांछित है।”

राजस्थान के भरतपुर के एसपी ने कहा, “जानकारी मिली है कि नासिर-जुनैद मामले में वांछित आरोपित है, उसे हरियाणा पुलिस ने डिटेंड किया है। हरियाणा पुलिस अपनी प्रक्रिया को पूरी कर रही है और हमारे अधिकारी उनके संपर्क में हैं। जब हरियाणा पुलिस की विधिक कार्रवाई पूरी हो जाएगी तो राजस्थान पुलिस अपनी विधिक कार्रवाई शुरू करेगी।”

बताते चलें कि फरवरी 2023 में नासिर और जुनैद नाम के 2 युवकों के एक वाहन में जले हुए शव मिले थे। इस केस में मोनू मानेसर सहित कुछ और लोगों को नामजद किया गया था। मोनू मानेसर को छोड़कर हरियाणा में गोरक्षा से जुड़े कुछ अन्य लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

लगभग 8 माह से भूमिगत चल रहे मोनू मानेसर के मुद्दे पर राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों में आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला था। इस बीच में राजस्थान के DGP उमेश मिश्रा ने नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू मानेसर की सीधी भूमिका से इंकार कर दिया था। हालाँकि, उन्होंने इस केस में मोनू की परोक्ष भूमिका की जाँच जारी होने की बात कही थी।

इस बीच 31 जुलाई 2023 को नूहं में बृजमंडल यात्रा के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान और आम आदमी पार्टी नेता जावेद अहमद को हिंसा का मुख्य आरोपित बताया।

वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस हिंसा के लिए मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी के भड़काऊ वीडियो को मुख्य वजह बता था। माना जा रहा है कि हिरासत की अवधि के दौरान मोनू मानेसर से नूहं हिंसा मामले में भी पूछताछ की जाएगी।

एक प्लेन खराब हुआ, दूसरा बीच रास्ते से लौटा… G20 सम्मेलन के बाद भी दिल्ली में 2 दिन अटके रहे कनाडा के PM, खालिस्तान पर भारत ने दिया था कड़ा सन्देश

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो G20 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली में थे। शिखर सम्मेलन खत्म होने के दो दिन बाद भी वो नई दिल्ली में ही हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वो जिस हवाई जहाज से भारत की राजधानी दिल्ली में पहुँचे थे, वो हवाई जहाज ही खराब हो गया था। इस समस्या से निपटने के लिए कनाडा सरकार ने दूसरा हवाई जहाज भेजा था, लेकिन वो अब तक दिल्ली पहुँचा ही नहीं है। हालाँकि, अब भारत में खराब हुए उनके जहाज की मरम्मत हो गई है, तो अब मंगलवार (12 सितंबर, 2023) को किसी भी समय वो अपने देश वापस जा सकते हैं।

दो दिन तक होटल में ही रहे जस्टिन ट्रूडो

जस्टिन ट्रूडो 8 सितंबर को अपने 15 साल के बेटे के साथ भारत पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने जी-20 के शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इसके बाद पीएम मोदी के साथ एक द्विपक्षीय बैठक हुई। रविवार को आधिकारिक कार्यक्रमों से फ्री होने के बाद से वो नई दिल्ली के ललित होटल में ही हैं। उनके साथ उनका बेटा, उनका स्टाफ और कनाडा से आए पत्रकार भी हैं। चूँकि भारत सरकार ने उनके ज्यादा भाव नहीं दिया है, इसलिए उनके साथ किसी भी तरह की आधिकारिक मीटिंग भी नहीं थी। ऐसे में रविवार, सोमवार और अब तक मंगलवार को भी वो अपने होटल में ही हैं।

बैकअप में रखा जहाज भी नहीं पहुँचा

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रेस सचिव मोहम्मद हुसैन ने बताया था कि जस्टिन ट्रूडो को लाने के लिए कनाडा से दूसरे विमान ने उड़ान भरी थी, लेकिन रोम के बाद दिल्ली की ओर बढ़ने की जगह उसे वापस लंदन जाना पड़ा। हालाँकि, अब उन्होंने कहा है कि भारत में जिस विमान में खराबी आई थी, वो ठीक कर लिया गया है। ऐसे में ट्रूडो मंगलवार को कनाडा के लिए रवाना हो जाएँगे। उन्होंने बताया कि जहाज को उड़ान भरने के लिए जरूरी क्लियरेंस मिल चुकी है।

भारत का दौरा हो रहा बुरा साबित

जस्टिन ट्रूडो के लिए भारत का ये दौरा मुश्किलों भरा रहा है। पहले तो उन्हें जी-20 में भी कोई खास तवज्जो नहीं मिली। फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी उन्हें खालिस्तानियों के प्रति सॉफ्ट स्टैंड रखने की वजह से काफी कुछ सुनना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई तो दी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही। इसके बाद उनका प्लेन खराब हो गया। उन्हें रिसीव करने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी उनसे दोबारा मुलाकात नहीं की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उन्हें सिर्फ रिसीव करना था, इसके अलावा उनके साथ कोई औपचारिक बैठक नहीं थी। हालाँकि, भारत सरकार सारे प्रोटोकॉल्स का पालन कर रही है, जो विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए किया जाता है।

पहले भी परेशान कर चुका है ये प्लेन

कनाडा के प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए सीसी-150 पोलारिस नाम का 36 साल पुराना विमान इस्तेमाल किया जाता है। ये जहाज उन्हें पहले भी परेशान कर चुका है। सीबीसी न्यूज के मुताबिक, अक्टूबर 2016 में ये विमान उन्हें बेल्जियम की यात्रा के दौरान भी परेशान कर चुका है। इसके बाद साल 2019 में जब वो नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे थे, तो लंदन में भी इस जहाज ने धोखा दे दिया था। तब 16 महीने तक इस विमान की मरम्मत का काम चला था और इसकी पूरी ओवरहॉलिंग की गई थी। लेकिन, इस बार भारत में उन्हें फिर से इस जहाज ने धोखा दे दिया है।

हालाँकि, ताज़ा अपडेट ये है कि जस्टिन ट्रुडो कनाडा के लिए निकल गए हैं।

UP का श्यामलाल मुंबई जाकर बना मोहम्मद हुसैन, सालों बाद घर लौटा तो बहन के परिवार पर डाला मुस्लिम बनने का दबाव: 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के जिला अम्बेडकरनगर में एक दलित परिवार पर इस्लाम कबूलने का दबाव डालने के आरोप में चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनकी पहचान 61 साल के श्यामलाल उर्फ मोहम्मद हुसैन, उसकी 50 साल की बीवी मुमताज शेख, उसका 36 साल का दामाद विक्की उर्फ अब्दुल रहमान और विक्की की 30 वर्षीया बीवी हीना अब्दुल के तौर पर सामने आई है।

इनके खिलाफ इंद्रावती नाम की महिला ने शिकायत की है। वह श्यामलाल उर्फ मोहम्मद हुसैन की सगी बहन है। मालीपुर थाना क्षेत्र के गाँव ताराकला निवासी इंद्रावती के अनुसार घटना 30 अगस्त 2023 की है, जिसकी शिकायत उसने अगले दिन दर्ज कराई। उसने बताया है कि सालों पहले उसका भाई श्यामलाल मुंबई कमाने गया था। वहाँ कुछ मौलानाओं ने उसे इस्लाम कबूल करवा दिया। उसका नाम बदलकर मोहम्मद हुसैन कर दिया और मुमताज शेख से उसका निकाह करवा दिया। उसके बाद श्यामलाल ने परिवार से संपर्क खत्म कर लिए।

इंद्रावती का दावा है कि वाराणसी के निवासी विक्की त्रिपाठी उर्फ़ विकास को इस्लाम भी उसके भाई ने ही कबूल करवाया था। विक्की को अब्दुल रहमान का नाम देकर उसने उसका निकाह अपनी बेटी हीना अब्दुल से करवा दिया गया। इंद्रावती के अनुसार अपनी माँ प्रतापी देवी की मौत की खबर मिलने के बाद श्यामलाल उर्फ मोहम्मद हुसैन परिवार के साथ मुंबई से गाँव आया था। इसी दौरान उसने इंद्रावती और उसके परिजनों पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाला।

इंद्रावती के अनुसार 30 अगस्त को मोहम्मद हुसैन अपने परिवार के साथ उसके घर में घुस गया। जमीन और 2 लाख रुपए का लालच देते हुए उससे मुस्लिम बन जाने के लिए कहा। जब इंद्रावती ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया तो उसे काफिर बताते हुए जातिसूचक गालियाँ और जान से मारने की धमकी दी गई।

इंद्रावती की तहरीर पर 31 अगस्त 2023 को अम्बेडकरनगर पुलिस ने मोहम्मद हुसैन उर्फ़ श्यामलाल, अब्दुल रहमान उर्फ़ विकास त्रिपाठी उर्फ़ विक्की, हिना अब्दुल रहमान शेख और मुमताज के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इन चारों आरोपितों पर IPC की धारा 452, 504 और 506 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन की धारा 5(1) और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। शनिवार (2 सितम्बर 2023) को पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया।

डरी हुई है पीड़िता

ऑपइंडिया ने पीड़िता इंद्रावती से बात की। इंद्रावती ने हमें बताया कि कुछ लोग उन्हें आरोपितों के जेल से छूट कर लौटने पर देख लेने की धमकी दे रहे हैं। इन लोगों का नाम बताने से उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

घर से रिश्ता तोड़ चुका श्यामलाल अचानक पहुँचा कब्ज़ा लेने

इंद्रावती के मुताबिक घर का इकलौता भाई श्यामलाल लगभग 25 साल की उम्र में मुंबई गया था। लगभग 30 साल की उम्र में किसी हाजी की बेटी से उसका निकाह करवा दिया गया और वो मोहम्मद हुसैन बन गया। दावा है कि श्यामलाल अपने माता-पिता की सेवा करने भी नहीं आया। ऐसा करने के पीछे वो खुद का मुस्लिम होना बताता था। माता-पिता की सेवा इंद्रावती ने की। माँ-बाप की मौत के बाद अचानक ही श्यामलाल अपने परिवार के साथ घर पर कब्ज़ा करने पहुँच गया।

मैं शिवभक्त हिन्दू, कभी नहीं बनूँगी मुसलमान

इंद्रावती ने ऑपइंडिया को बताया कि उसे गंदी-गंदी गालियाँ दी गई। आरोप है कि इससे पहले जब भी श्यामलाल घर आता था वो मुस्लिमों के बीच ही रुकता था। अपनी ही जाति वालों को नीचा बताता था। खुद को बजरंग बली और महादेव शिव की भक्त बताते हुए इंद्रावती ने हमें बताया कि कुछ भी हो जाए पर वो इस्लाम कबूल नहीं करेंगी और जीवन भर हिन्दू बन कर ही रहेंगी।

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर को 12 साल की कैद, सांसद का सिर कलम करने पर ₹19 लाख देने का किया था ऐलान: गीर्ट वाइल्डर्स ने नुपूर शर्मा का किया था समर्थन

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खालिद लतीफ को नीदरलैंड में 12 साल की सजा सुनाई गई है। लतीफ ने वहाँ के सांसद गीर्ट वाइल्डर्स की हत्या करने के लिए पैसों का ऑफर दिया था। वाइल्डर्स ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने का ऐलान किया था। इसके बाद खालिद ने वाइल्डर्स की हत्या करने के लिए लोगों को उकसाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीदरलैंड की एक अदालत ने 11 सितंबर 2023 को सजा का ऐलान किया। कोर्ट ने कहा कि खालिद लतीफ ने केवल वाइल्डर्स को धमकी ही नहीं दी, बल्कि उसने एक तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हमला किया था। यह साफ है कि हत्या के लिए उकसाने के बाद लतीफ के बयान पर पूरी दुनिया का ध्यान गया होगा।

हालाँकि इस बात की संभावना बेहद कम है कि पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर खालिद लतीफ को यह सजा काटनी पड़े, क्योंकि नीदरलैंड और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की प्रत्यर्पण संधि नहीं है। ऐसे में वहाँ की सरकार के लिए खालिद लतीफ को पाकिस्तान से नीदरलैंड ला पाना बेहद मुश्किल होगा।

इससे पहले हुई सुनवाई में सामने आया था कि नीदरलैंड ने पाकिस्तान सरकार से सहयोग करने की अपील की थी, लेकिन वहाँ से किसी प्रकार का जवाब नहीं मिला था। सुनवाई के दौरान गीर्ट वाइल्डर्स के वकीलों ने कोर्ट में खालिद का नाम लिए बिना कहा था कि साल 2018 में एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर को वाइल्डर्स की हत्या के लिए पैसे देने का वादा करते हुए देखा गया था।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में खालिद लतीफ ने कहा था कि कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने वाले व्यक्ति की हत्या करने वाले को वह 30 लाख पाकिस्तानी रुपए (€21,000 या लगभग 19 लाख भारतीय रुपया) देगा। सरकारी वकीलों ने अपने लिखित बयान में कहा था कि लतीफ का वीडियो बेहद खतरनाक था, क्योंकि इसे उस समय जारी किया था जब गीर्ट वाइल्डर्स के खिलाफ लोगों में गुस्सा और नफरत थी।

वाइल्डर्स ने कहा था कि इस्लामवादियों द्वारा दी जा रही धमकियों के चलते आम लोगों की तरह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं। जो चीजें हर इंसान हर दिन करता है, उसके बारे में वह सोच भी नहीं सकते। न तो वह खुली हवा में आजादी से घूम सकते हैं और न ही अकेले कहीं जा सकते हैं।

बता दें कि इस्लाम की आलोचना करने के बाद इस्लामवादियों द्वारा मिल रहीं धमकियों के चलते डच सरकार द्वारा वाइल्डर्स को कड़ी सुरक्षा दी गई है। वह बीते कई वर्षों से 24 घण्टे सुरक्षा घेरे में ही रहते हैं। उन्हें दी जा रही सुरक्षा के लिए गीट वाइल्डर्स ने कहा था कि वह सुरक्षा देने के लिए आभारी हैं।

वाइल्डर्स ने कहा था कि यदि आरोपित के खिलाफ दोष सिद्ध हो जाता है तो इससे धमकी देने वाले अन्य सभी लोगों को एक शक्तिशाली मैसेज जाएगा। खालिद लतीफ पर टिप्पणी करते हुए वाइल्डर्स ने कहा था, “जब तक मैं जीवित हूँ और साँस ले रहा हूँ, तब तक तुम मुझे नहीं रोक पाओगे। मुझे मारने के लिए पैसे का ऑफर देने से मैं चुप नहीं हो सकता।”

वाइल्डर्स ने साल 2018 में कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने के ऐलान को लेकर कोर्ट में कहा था, “मैंने उस कार्टून प्रतियोगिता के आयोजन का ऐलान इसलिए किया था क्योंकि मैंने साल 2015 में मैं अमेरिका में टेक्सास के गारलैंड शहर गया था। वहाँ मुझे एक कार्टून प्रतियोगिता के विजेता को पुरस्कार देना था, लेकिन उस कार्यक्रम के दौरान आतंकी हमला हो गया। अमेरिकी पुलिस ने दोनों आतंकियों को मौके पर ही मार गिराया था। यह सब मेरे साथ पहली बार हुआ था।”

उन्होंने आगे कहा था, “यही कारण है कि मैं बताना चाहता था कि चित्र बनाने की अनुमति किसी को भी है और हमें कभी भी ऐसे लोगों के सामने झुकना नहीं चाहिए जो हिंसा, धमकी, हत्या और आतंक का रास्ता अपना लेते हैं।” वाइल्डर्स का कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। वह लंबे समय से तालिबान, अल-कायदा और आईएसआईएस की ‘हेड लिस्ट’ में हैं।

वकीलों का कहना था कि वे साल 2018 से पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर खालिद लतीफ से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। खालिद के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान सरकार से भी मदद माँगी है, लेकिन वहाँ से कभी कोई जवाब नहीं मिला।

उल्लेखनीय है कि डच कोर्ट द्वारा खालिद लतीफ को गिरफ्तार करने के लिए उसके खिलाफ इंटरनेशनल वारंट जारी किया जा चुका है। हालाँकि अपने ऊपर लगे आरोपों पर खालिद लतीफ ने कहा था कि उसे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि जून 2018 में वाइल्डर्स ने अपनी पार्टी के संसदीय कार्यालयों में आयोजित होने वाली ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ की भी घोषणा की थी। बाद में अगस्त में आतंकवादी हिंसा की धमकियों के बाद उन्हें इस कार्यक्रम को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनकी हत्या के लिए कई इस्लामी नेताओं ने फतवा जारी किया था।

कौन है खालिद लतीफ

खालिद लतीफ पाकिस्तान का क्रिकेटर रह चुका है। उसे साल 2017 में दुबई में हुए पाकिस्तान सुपर लीग मैच में स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया था। इसके बाद उस पर 5 साल का बैन लगाया गया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी खालिद लतीफ को दोषी पाया था।

खालिद लतीफ के दोषी पाए जाने पर उस पर दस लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया था। साल 2022 में खालिद लतीफ ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली थी। साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से लिखित माफी माँगी थी।

गीर्ट वाइल्डर्स और इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ उनका रुख

गीर्ट वाइल्डर्स लंबे समय से अपने देश में इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर रहे हैं। एक सांसद के रूप में वह मास माइग्रेशन के भी विरोधी रहे हैं। उन्होंने संसद में कहा था कि बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवास (माइग्रेशन) को स्वीकार कर सरकार ‘इस्लाम नामक एक मॉन्स्टर को देश में निमंत्रण दे रही है’।

वहीं, एक साक्षात्कार में वाइल्डर्स ने कहा था, “मैं मुस्लिमों से नफरत नहीं करता, मैं इस्लाम से नफरत करता हूँ।” उन्होंने उसी साक्षात्कार में कहा था, “इस्लाम कोई धर्म नहीं है। यह एक विचारधारा है। मंद संस्कृति की विचारधारा है।” उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का भी समर्थन किया था।

साल 2019 में जुनैद नाम के एक पाकिस्तानी मूल के डच मुस्लिम को वाइल्डर्स के खिलाफ हत्या की साजिश के लिए 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। जुनैद ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि वह वाइल्डर्स को जहन्नुम में भेजना चाहता है।

बता दें कि 58 वर्षीय डच सांसद वाइल्डर्स नीदरलैंड की संसद में पार्टी फॉर फ्रीडम के अध्यक्ष हैं। वह एक दक्षिणपंथी नेता हैं, जो विशेष रूप से मुस्लिम देशों से डच सरकार की आव्रजन नीतियों का मुखर रूप से विरोध करते रहे हैं।

वाइल्डर्स ने यहाँ तक ​​​​कहा है कि वे चाहते हैं कि उनका देश यूरोपीय संघ को छोड़ दे। उन्होंने यूरोपीय संघ की संसद में एक संसदीय समूह बनाने के लिए फ्रांस के मरीन ले पेन जैसे अन्य रूढ़िवादी यूरोपीय नेताओं के साथ काम किया है। इसमें अब यूरोपीय संघ के देशों की 9 पार्टियाँ हैं।

गीर्ट वाइल्डर्स ने फितना (Fitna) नाम की एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई है। 17 मिनट की इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कुरान अपने सभी अनुयायियों को घृणा करना सिखाता है। आतंकवाद, मूर्ति पूजा-विरोधी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, काफिरों के खिलाफ हिंसा, समलैंगिकों से नफरत आदि को इस फिल्म में मीडिया क्लिपिंग्स के जरिए दिखाया गया है।

जनमत संग्रह के बाद कनाडा के गुरुद्वारे में भारतीय राजनयिकों की हत्या के लिए पोस्टर, बोला आतंकी पन्नू – हमारे PM ट्रुडो के साथ जो हुआ उसका बदला लेंगे

जहाँ एक तरफ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो G20 समिट के बाद फ्लाइट में खराबी के कारण 2 दिन तक भारत में ही अटके रहे, वहीं उनके देश में खालिस्तानी गतिविधियाँ अब भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। द्विपक्षीय वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियाँ रोकने के अलावा मंदिरों और दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संदेश दिया, लेकिन इसके बावजूद कनाडा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। वहाँ भारत विरोधी गतिविधियाँ चालू ही हैं।

कनाडा में स्थित एक गुरुद्वारा ने भारतीय राजनयिकों की तस्वीरें लगा कर उनकी हत्या के लिए उकसाया है। साथ ही इसमें 2 खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें भी लगी हैं। इनमें से एक तस्वीर 1985 में ‘एयर इंडिया’ की फ्लाइट में बम डाल कर 329 लोगों की जान लेने वाले आतंकी तलविंदर सिंह परमार की तस्वीर लगी है, जो ‘बब्बर खालसा’ का संस्थापक था। एक तस्वीर 2023 में संदिग्ध रूप से मार डाले गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की है।

खालिस्तानियों ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों पर मढ़ा है। गुरुद्वारा के बाहर लगे इस पोस्टर में ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ की बात की गई है। साथ ही एक महिला अधिकारी समेत 3 भारतीय राजनयिकों की तस्वीरें डाल कर लिखा है ‘Assassination Wanted’, अर्थात हत्या के लिए उकसाया गया है। वहीं दूसरी तरफ कनाडा के सरे में वहाँ की सरकार ने एक अन्य भारत विरोधी कार्यक्रम की अनुमति दे दी है।

सरे में खालिस्तानियों को ‘रेफरेंडम’ के लिए कार्यक्रम की इजाजत दे दी गई है। वहाँ स्थित ‘गुरु नानक सिंह गुरुद्वारा’ में ये कार्यक्रम हुआ। ये घटना रविवार (10 सितंबर, 2023) की है। इसमें 5000 से अधिक लोग मौजूद थे। इससे पहले कनाडा के एक सरकारी स्कूल में ऐसे ही रेफरेंडम के आयोजन का ऐलान किया गया था, जहाँ 50,000 से अधिक सिखों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। वहीं अपने सिक्योरिटी गार्ड्स के साथ आतंकी संगठन SFJ (सिख फॉर जस्टिस) का मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू भी आया था।

उसने भारत को खंडित करने के लिए लोगों को भड़काया। इस पर सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या कनाडा अब एक आतंकी को सुरक्षा प्रदान कर रहा है? पन्नू ने एक ऑडियो भी जारी किया है। उसने भारत सरकार को धमकाया है कि ओटावा में भारतीय दूतावास को बंद किया जाए और साथ ही वहाँ भारत के हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा को वापस बुलाने के लिए कहा है। उसने कहा है कि भारत में जस्टिन ट्रुडो के साथ जो ‘व्यवहार हुआ’, उसके बदले में वो दूतावास पर हमला करेगा।

किसी का स्तन दबोचा, कोई गश खाकर गिर पड़ी… AR रहमान के कंसर्ट में महिलाओं के यौन शोषण की कहानियों से पटा सोशल मीडिया, रोते दिखे बच्चे

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में संगीत निर्देशक AR रहमान के कंसर्ट में भगदड़ मच गई और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कई महिलाओं ने इस कंसर्ट के आने बुरे अनुभव साझा किए हैं। 31 साल की एक फिल्म निर्देशक ने बताया कि कंसर्ट के दौरान उन्हें पैनिक अटैक आया, जिसके बाद उन्होंने एक व्यक्ति को ‘अन्ना’ (बड़ा भाई) कह कर संबोधित किया और पूछा कि बाहर जाने का रास्ता किधर से है। महिला ने बताया, “उसने मेरी आँखों में देखा और अगली चीज मुझे याद है कि उसके हाथ मेरे स्तन के ऊपर थे और उसने मुझे दबोच लिया।

पीड़िता ने बताया कि वो वहीं खड़ी की कड़ी रह गई और एक इंच भी इधर-उधर नहीं खिसक सकी। उसने इसे एक ऐसा डरावना और आघात पहुँचाने वाला अनुभव करार दिया, जिससे वो शायद ही बाहर निकल सके। सिर्फ यही महला नहीं, बल्कि AR रहमान के इस कंसर्ट में छेड़खानी को लेकर कई अन्य महिलाओं ने शिकायत की है। ये कंसर्ट ‘मराकुम्मा नेंजम’ (अर्थ – क्या दिल कभी भूलेगा?) नाम से चेन्नई के ECR (ईस्ट कोस्ट रोड) में आयोजित किया गया था।

एक व्यक्ति ने बताया कि उसने कभी नहीं सोचा था कि AR रहमान के किसी कंसर्ट में लोग शो को रोकने के लिए चिल्लाएँगे। कई लोग टिकट मिलने के बावजूद भीतर नहीं जा सके। जो अंदर गए, उनमें से कइयों को पैनिक अटैक आया। कइयों को घुटन महसूस हुई। कई बच्चे भी खो गए। पीड़ितों ने बताया कि ट्रैफिक का भी ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया था। शाम 7:30 बजे ही लोग घर जाने लगे। बताया जा रहा है कि आयोजनों ने भी क्षमता से ज़्यादा टिकट्स भेजे हैं।

चेन्नई के एक NGO में काम करने वाली 23 वर्षीय महिला ने बताया कि कंसर्ट शुरू होने से पहले ही भगदड़ मच गई थी। टिकट होने के बावजूद कंसर्ट में घुसने के लिए टैग लेने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ी। कई जब भीतर घुसे तो देखा कि सीट फुल है। खड़े होने तक की जगह नहीं थी। ताम्बरम के पुलिस कमिश्नर ने मामले के जाँच के आदेश दिए हैं। आयोजक ‘ACTC इवेंट्स’ ने इन सबके बावजूद कंसर्ट को ‘बड़ी सफलता’ बताते हुए अपनी पीठ थपथपाई, और ‘जो अटेंड न कर पाए’, उनसे माफ़ी माँगी।

आयोजकों ने महिलाओं के साथ छेड़खानी पर कुछ नहीं कहा। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में बच्चों को अभिभावकों से बिछड़ कर रोते हुए देखा जा सकता है। लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। एक 22 वर्षीय महिला वकील ने बताया कि उनकी और उनके माँ को आधे घंटे के भीतर कई बार गलत तरीके से छुआ गया, जब वो बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने खुद को मानसिक, शारीरिक और भावुक रूप से एक थकी हुई पीड़िता करार दिया।

एक बुजुर्ग महिला बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। मेडिकल मदद की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। कुछ महिलाएँ रोने लगीं। प्रबंधन के लिए काफी कम वॉलंटियर्स मौजूद थे। एक अर्थराइटिस की मरीज ने बताया कि उन्हें 3 किलोमीटर चलने के बाद कई घंटे पैदल खड़ा रहना पड़ा, क्योंकि कोई मदद करने वाला नहीं था। हालाँकि, AR रहमान ने बाद में इन घटनाओं के लिए माफ़ी माँगते हुए कहा है कि वो किसी पर उँगली नहीं उठाना चाहते, लेकिन शहर बड़ा हो रहा है और संगीत के प्रति दीवानगी भी बढ़ रही है।

एक महिला ने कहा कि वो कभी अब जीवन में किसी कंसर्ट में नहीं जाएगी। वहीं एक 45 वर्षीय महिला ने बताया कि उनकी बेटी अब तक सदमे में है। पवित्रा नाम की एक पीड़िता ने लिखा कि उसके भीतर AR रहमान का जो फैन था, वो अब मर गया है। चारुलता रंगराजन नाम की महिला ने अपनी उँगलियों के निशान दिखाते हुए बताया कि कैसे उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ। वीडियो में पीड़ितों ने इस कंसर्ट को पैसों की वसूली करार दिया। बताया जा रहा है कि कंसर्ट में लगभग 50,000 लोग पहुँच गए थे।

कुछ पीड़ितों ने पूछा कि AR रहमान जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे हैं, सिर्फ ‘सॉरी’ कह देने से क्या हो जाएगा। हालाँकि, एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने दावा किया कि वो इस घटना को लेकर बेहद दुःखी हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने कहा कि एक संगीत निर्देशक के रूप में उनका काम लोगों का मनोरंजन था, उन्हें लगा कि बाकी चीजों का ख्याल रख लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एक प्राथमिक विषय है और वहाँ महिलाएँ-बच्चे थे। AR रहमान ने कहा है कि जो लोग टिकट होने के बावजूद कंसर्ट में नहीं आ पाए, वो उन्हें ईमेल पर टिकट की कॉपी और अपनी शिकायतें भेजें, उसका निदान किया जाएगा।

आतंकवाद पर करारा प्रहार करेंगे भारत और सऊदी अरब: PM मोदी और क्राउन प्रिंस सलमान के बीच बैठक में निवेश व इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई सेक्टर में समझौते

भारत और सऊदी अरब जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद आर्थिक और सुरक्षा संबंधों का विस्तार करने पर रजामंद हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद की सोमवार (11 सितंबर) को नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान कई अहम फैसले लिए गए।

दोनों देशों ने 45 पैरा का एक संयुक्त बयान जारी कर आतंकवाद से निपटने पर भी अपनी प्रतिबद्धता जताई। इस बयान में कहा गया है कि भारत और सऊदी अरब मिलकर आतंकवाद का सामना करेंगे और सुरक्षा की दिशा में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। संयुक्त बयान में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को भी याद किया गया।

इसमें आगे कहा गया है कि द्विपक्षीय संबंध आपसी समझ, विश्वास, सद्भावना, सहयोग और एक-दूसरे के हितों के प्रति सम्मान से चिह्नित होते हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर संतोष जताया कि राजनीति, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके संबंध गहरे हुए हैं।

पीएम मोदी के मुरीद हैं सऊदी के क्राउन प्रिंस

गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक आकर्षक बाजार के रूप में पहचानते हुए यहाँ निवेश में अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा, उनका भारतीय प्रधानमंत्री के साथ सौहार्द्रपूर्ण रिश्ता है, जो एक-दूसरे के लिए दोनों देशों की नीतियों में साफ तौर से दिखाई देता है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी और एमबीएस की मुलाकात के दौरान भारत ने सऊदी अरब में रहने वाले 24 लाख से अधिक भारतीयों की बेहतरीन देखभाल के लिए राजशाही को धन्यवाद दिया।

इसके साथ ही भारत ने ऑपरेशन कावेरी के तहत जेद्दा के जरिए सूडान में फँसे भारतीय नागरिकों की निकासी के दौरान सऊदी अरब के समर्थन के लिए भी सराहना की। भारत ने इस वर्ष सफल हज के लिए सऊदी अरब को भी बधाई दी। हज यात्रियों की सुविधा में दोनों देशों के बीच शानदार समन्वय के लिए भी सराहना की।

इस मौके पर दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। सऊदी अरब ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति का एक विश्वसनीय भागीदार और निर्यातक होने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने कहा कि वे बिजली, ग्रिड इंटरकनेक्शन और हाइड्रोजन एवं इसके डेरिवेटिव के क्षेत्र में संयुक्त सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तत्पर हैं।

वो दोनों देशों में तेल को पेट्रोकेमिकल्स में बदलने के लिए संयुक्त परियोजनाएँ विकसित करने और वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी परियोजना में तेजी लाने के लिए जरूरी समर्थन, आवश्यकताएँ और काबिल लोग देने के लिए भी रजामंद हुए। दोनों देश उर्वरक और विशेष पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाशने पर भी राजी हुए।

आतंकवाद पर मिलकर लगाएँगे लगाम

भारत और सऊदी अरब के संयुक्त बयान के 30वें पैरा में कहा गया है, “दोनों पक्षों ने सभी देशों से दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को अस्वीकार करने की अपील की है। इसके अलावा आतंकवादी कामों को अंजाम देने के लिए मिसाइलों और ड्रोन सहित हथियारों तक पहुँच को रोकने की जरूरत पर बल दिया गया।”

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों को इंसानियत के लिए गंभीर खतरा बताया है। आतंकवाद को रोकने के लिए दोनों देशों ने आतंकवाद से लड़ने और इसके वित्त पोषण पर लगाम लगाने के लिए के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। आतंकवाद को किसी नस्ल, धर्म और संस्कृति से जोड़ने की बात को खारिज किया।

इसके साथ ही आतंकवाद जहाँ भी मौजूद है, वहाँ इसके इंफ्रास्ट्रकचर को खत्म करने और आतंकवाद फैलाने वालों को कानून के दायरे में लाकर उन्हें सजा देने को कहा गया है। दोनों पक्षों ने दूसरे देशों में आतंकवाद फैलाने के लिए हथियारों की पहुँच को रोकने के साथ ही मिसाइल, ड्रोन आदि के इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत पर भी बल दिया।

मध्य पूर्व में अहम रणनीतिक साझेदार है सऊदी अरब

भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद 2019 में बनाई गई थी। ये दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए एक मंच के तौर पर काम करती है। G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत, सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने एक महत्वाकांक्षी रेल और शिपिंग गलियारे का ऐलान किया था।

ये आर्थिक विकास और राजनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ेगा। विशेषज्ञ इसे चीन के राष्ट्रव्यापी बुनियादी ढाँचा कार्यक्रम के विकल्प के तौर पर देखते हैं। एक बयान में पीएम मोदी ने सऊदी अरब को भारत के “सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों” में से एक बताया।

उन्होंने कहा, “गलियारा न केवल दोनों देशों को जोड़ेगा, बल्कि एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग, ऊर्जा विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।” वार्ता से पहले प्रिंस मोहम्मद का नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन प्रेसिडेंशियल पैलेस में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्म ने उनके सम्मान में बैंक्वेट डिनर भी रखा था।

एमबीएस भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर थे। इसमें जी20 शिखर सम्मेलन भी शामिल था। भारत सऊदी अरब को मध्य पूर्व में अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक के तौर में देखता है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 में देशों के बीच व्यापार 52.8 बिलियन डॉलर से अधिक रहा।

द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी परिषद की पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं और आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। द्विपक्षीय बैठक के बाद सचिव (सीपीवी और ओआईए) औसाफ़ सईद ने इस संबंध में मीडिया को संबोधित किया।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने घोषणा की कि सऊदी क्राउन प्रिंस की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें ऊर्जा के क्षेत्र में डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, भारत के सीवीसी (मुख्य सतर्कता आयोग) और सऊदी की भ्रष्टाचार निगरानी समिति, दोनों पक्षों के राष्ट्रीय अभिलेखागार, इन्वेस्ट इंडिया और सऊदी के निवेश मंत्री के बीच हुआ एक्सिम बैंक, सिडबी और सऊदी का एसएमई बैंक के समझौते शामिल हैं।

औसाफ़ सईद ने कहा कि दोनों पक्ष फिनटेक क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का पता लगाने पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि भारत और सऊदी अरब संयुक्त रूप से एक टास्क फोर्स स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, जो 100 बिलियन डॉलर के निवेश की पहचान करने और उसे आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

कई विशेषज्ञ इसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की एक बड़े रणनीतिक नजरिए के तौर पर देखते हैं, जो सऊदी साम्राज्य में सुधार के लिए कोशिश कर रहे हैं। एमबीएस के नाम से मशहूर 38 साल के क्राउन प्रिंस सऊदी के वास्तविक शासक हैं। वो 5 वर्षों से देश की सत्ता सँभाल रहे हैं। उनके शासन में सऊदी अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता कम हो रही है।

सऊदी अरब को मध्य पूर्व में एक विश्वसनीय भारतीय भागीदार के तौर पर देखा जाता है। भारत और सऊदी अरब के संबंधों में रणनीतिक गहराई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहाँ के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद’ से नवाजे जाने से जाहिर होती है।

पत्थरबाजी, आगजनी, मौत… सतारा में इंटरनेट बंद, रिपोर्टों में दावा- छात्रपति शिवाजी पर आपत्तिजनक पोस्ट से भड़की हिंसा

महाराष्ट्र के सतारा जिले में हिंसा के बाद धारा 144 लागू करना पड़ा है। इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छत्रपति शिवाजी को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट किया गया था। कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के पोस्ट भी शेयर किए गए। इसके बाद खटाव तहसील में 10 सितंबर 2023 की रात हिंसा भड़क उठी।

हिंसा में 1 की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में 2 मौतों की बात कही है। आठ अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हिंसक भीड़ ने न सिर्फ पत्थरबाजी की, बल्कि कई दुकानों, मकानों और वाहनों में आग भी लगा दी। इलाके में भारी पुलिस बल लगाया गया है। अब तक 100 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज हुई है। 23 की गिरफ्तारी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंसा की शुरुआत सतारा के तहसील खटाव स्थित गाँव पुसेसावली से हुई। मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर छत्रपति शिवाजी महराज के खिलाफ 9 सितंबर को अपमानजनक पोस्ट की। कुछ ही देर में यह पोस्ट वायरल हो गई और आसपास के इलाकों में तनाव फैल गया। पुलिस ने पोस्ट डालने वाले 2 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि लगभग 1 हजार लोगों की भीड़ ने 10 सितंबर को पुसेसावली गाँव में हमला कर दिया। इस हमले के दौरान दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई। हिंसक भीड़ ने न सिर्फ दुकानों और मकानों, बल्कि सड़क के किनारे खड़े वाहनों में भी आगजनी की। हिंसा के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब तक कुल 23 लोगों को हिरासत में लिया गया है। IPC 295 और 34 के तहत 100 हमलावरों पर FIR दर्ज हुई है। हिंसाग्रस्त इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। आरोप है कि इस पोस्ट में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ भी लिखा हुआ था। बताया जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद से ही सतारा में सोशल मीडिया पर पाकिस्तान समर्थक पोस्ट शेयर किए जा रहे थे। इन्ही रिपोर्ट्स में हिंसा के दौरान एक हिन्दू मंदिर पर हमले का भी जिक्र है। हालाँकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

पाकिस्तान समर्थक नारेबाजी का आरोप

प्रभावित इलाके में धारा 144 लगा दी गई है। पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट न डालने की अपील की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए सतारा DSP ऑफिस में तैनात ड्यूटी ऑफिसर ने हिंसा में 1 मौत की पुष्टि की है। ड्यूटी ऑफिसर ने मामले में और अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। फ़िलहाल हालात तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।