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CAA का विरोध, 370 का समर्थन, आतंकियों से नरमी… भारत के खिलाफ ज़हर उगलने वाले प्रोफेसर से मिले राहुल गाँधी, हिन्दू संगठनों को बताता है ‘हिंसक’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी यूरोप दौरे पर हैं। इस बीच उन्होंने 8 सितंबर को पेरिस की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान लेखक और कॉलमिस्ट क्रिस्टोफ जैफरलॉट उनके साथ मंच पर नजर आया। क्रिस्टोफ जैफरलॉट भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत उगलने के लिए कुख्यात रहा है। राहुल के इस कार्यक्रम की फोटो कॉन्ग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर की गई थीं।

भारत विरोधी बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले राहुल गाँधी के साथ मंच पर नजर आया क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भारत के खिलाफ लिखने का लंबा इतिहास रहा है। वह आमतौर पर केंद्र की भाजपा सरकार और उसके नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करता रहा है।

हिंदू संगठनों का विरोध

क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ करार दिया था। उसने CAA की तुलना इजरायल और वहाँ के यहूदियों से तुलना करते हुए कहा था, “इस तरह का दृष्टिकोण जातीय और धार्मिक आधार पर किसी भी देश की दृष्टि को दर्शाता है। जहाँ बहुसंख्यक आबादी के अलावा बाकी सभी दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। यह इजरायल की तरह है, जहाँ यहूदी बहुतायत में हैं।”

दिलचस्प बात यह है कि अल्पसंख्यकों को (मुस्लिमों को छोड़ कर) नागरिकता देने के भारतीय कानून में जैफरलॉट को समस्या तो नजर आती है। लेकिन, भारत के 3 पड़ोसी इस्लामी मुल्कों में अल्पसंख्यकों खासतौर से हिंदुओं की दयनीय स्थिति दिखाई नहीं देती।

क्रिस्टोफ जैफरलॉट हिंदुओं में आत्मसम्मान की कमी होने और भाजपा नेताओं पर मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट का ‘झूठ’ फैलाने का भी आरोप लगाता रहा है। उसे यह नहीं दिखता कि भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ की दहलीज पर खड़ी है। वहीं पड़ोसी मुल्कों में हिंदू शून्य की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, वह भारत विभाजन के लिए अंग्रेजों को तो जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन, इस्लामिक चरमपंथियों और मुस्लिम लीग जैसे कट्टरपंथी संगठनों के नापाक इरादों का जिक्र करना भूल जाता है।

राहुल गाँधी ने व्यक्ति के साथ मंच साझा किया वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश करते और निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले आतंकियों को दोषी नहीं ठहराता। बल्कि वह यह कहता है कि भारत में 1993 से लेकर 2008 तक जो आतंकी हमले हुए उसका फायदा भाजपा को मिला। वह कहता है कि भाजपा ने भय की राजनीति कर चुनाव जीता है। क्रिस्टोफ जैफरलॉट को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खुद को ‘संघ परिवार’ कहने से भी समस्या है।

जैफरलॉट ने राष्ट्रवादी संगठन ‘बजरंग दल’ पर हिंसा करने, चर्च और मुस्लिमों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। वह हिंदुओं द्वारा किए गए किसी पलटवार का हर बार जिक्र करता है। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आए दिन हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा और मिशनरी चर्च के माध्यम से हिंदुओं के खिलाफ रची जा रही साजिशों पर चुप्पी साध लेता है।

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2014 और 2019 में केंद्र में भाजपा सरकार सत्ता में है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता में आने से पहले और बाद में विरोधियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। इनमें से एक नाम क्रिस्टोफ जैफरलॉट का भी है। भाजपा की लगातार जीत पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए उसने ‘मोदीज इंडिया: हिंदू नेशनलिज्म एंड द राइज ऑफ एथनिक डेमोक्रेसी’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा है, “पिछले दो दशकों में नरेंद्र मोदी की वजह से हिंदू राष्ट्रवाद को एक तरह के राष्ट्रीय लोकप्रियता के साथ जोड़ा गया है। इससे चुनावों में पहले गुजरात में और फिर भारत में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।”

उसने अपनी इस किताब में भारतीय जनता पार्टी पर विकास का वादा करने के साथ ही जातीय-धार्मिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर देश की जनता को बहकाने का आरोप लगाया। हालाँकि, जैफरलॉट ने अपनी किताब में पीएम मोदी की लोक-कल्याणकारी, विकासवादी और महत्वाकांक्षी योजनाओं डिजिटल इंडिया, जन धन योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र नहीं किया। क्योंकि सच्चाई यह है कि देश की जनता अब किसी बहकावे की जगह विकास के नाम पर वोट देती है।

क्रिस्टोफ जैफरलॉट ने दावा किया है कि उसने पीएम मोदी को लेकर भारतीयों का इंटरव्यू किया है। इस इंटरव्यू के आधार पर उसने लिखा है, “मोदी सरकार ने भारत को लोकतंत्र के एक नए रूप में बदल दिया है। यह एक तरह का जातीय लोकतंत्र है, जिसमें बहुसंख्यक समुदाय के साथ देश में समानता का व्यवहार होता है। लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों को दोयम दर्ज के नागरिकों की तरह ट्रीट किया जाता है।” जैफरलॉट ने दावे तो बड़े-बड़े किए हैं। लेकिन, भारत के अन्य विरोधियों की तरह उसके पास भी इस दावे की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं है। इसके अलावा, अनुच्छेद-370 को लेकर सुनवाई में देरी के लिए उसने भारत की न्यायपालिका पर लांछन लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पर भी हमला बोला।

डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट

साल 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व इंवेट’ में क्रिस्टोफ जैफरलॉट को बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदुत्व के खिलाफ लड़ना और हिंदू धर्म को टारगेट करना था। जैफरलॉट ने इस कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्व हमला किया था।

(यह लेख मूल तौर पर अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया है। मूल कॉपी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

PM मोदी ने की G20 के समापन की घोषणा, ब्राजील को सौंपी अध्यक्षता: डिजिटल पेमेंट्स से लेकर ‘चंद्रयान 3’ तक की बात, UNSC में बदलाव पर भी बोले

दिल्ली में दो दिन तक चले G-20 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 समिट की अध्यक्षता ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को सौंप दी। इसके साथ ही PM ने समिट के समापन का ऐलान किया। ब्राजील अगले साल होने वाली G20 समिट का आयोजन करेगा। इस दौरान PM मोदी ने इस समिट के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा के लिए नवंबर में जी-20 वर्चुअल समिट का भी सुझाव दिया।  

समिट के समापन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कल हमने वन अर्थ और वन फैमली सेशन में व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा, “मुझे संतोष है कि आज G-20, वन अर्थ, वन फैमली और वन फ्यूचर को लेकर आशावादी प्रयासों का प्लेटफ़ॉर्म बना है। यहाँ हम ऐसे फ्यूचर की बात कर रहे हैं, जिसमें हम ग्लोबल विलेज से आगे बढ़कर ग्लोबल फैमिली को हकीकत बनता देखेंगे। एक ऐसा फ्यूचर, जिसमें देशों के केवल हित ही नहीं जुड़े हों, बल्कि हृदय भी जुड़े हों।  समापन का ऐलान करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संपूर्ण विश्व में आशा और शांति का संचार हो। 140 करोड़ भारतीयों की इसी मंगलकामना के साथ आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।”

प्रधानमंत्री मोदी ने समापन के इस अवसर पर कहा, “जैसा आप सब जानते हैं भारत के पास नवंबर तक G 20 की अध्यक्षता है।अभी ढाई महीने बाकी है।  इन दो दिनों में आपने कई बातें और प्रस्ताव रखे हैं। हमारी ज़िम्मेदारी है कि जो सुझाव आए और देखा जाए कि उनकी प्रगति में गति कैसे लाई जा सकती है। मेरा प्रस्ताव है कि हम नवंबर के अंत में G-20 का एक और वर्चुअल सेशन रखें। इसमें हम इस समिट के दौरान लिए गए निर्णयों की समीक्षा कर सकते हैं। इस सबका ब्योरा हमारी टीम आपके साथ साझा करेगी। मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सब इससे जुड़ेंगे।”

पीएम मोदी के समापन स्पीच की खास बातें

  1. मैंने GDP सेंट्रिक अप्रोच के बजाय ह्यूमन सेंट्रिक विजन पर निरंतर आपका ध्यान आकर्षित किया है।आज भारत जैसे अनेक देशों के पास ऐसा कितना कुछ है, जो हम पूरे विश्व के साथ साझा कर रहे हैं। भारत ने चंद्रयान मिशन के डेटा को मानव हित में सबके साथ शेयर करने की बात की है। ये भी ह्यूमन सेंट्रिक ग्रोथ को लेकर हमारे कमिटमेंट का प्रमाण है।
  2. भारत ने टेक्नॉलॉजी को इंक्लूसिव डेवलपमेंट के लिए, लास्ट माइल डिलिवरी के लिए, उपयोग किया है। हमारे छोटे से छोटे गाँव में, छोटे से छोटा व्यापारी भी, डिजिटल पेमेंट्स कर रहा है। मुझे खुशी है कि भारत की अध्यक्षता में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मजबूत फ्रेमवर्क पर सहमति बनी है। इसी तरह, “G20 Principles on Harnessing Data for Development” को भी स्वीकार किया गया है।
  3. ग्लोबल साउथ के विकास के लिए “Data for Development Capacity Building Initiative” को लॉन्च करने का निर्णय भी लिया है। भारत की प्रेसीडेंसी में स्टार्टअप 20 एंगेजमेंट ग्रुप का गठन भी एक बड़ा कदम है।
  4. आज हम न्यू जेनेरेशन टेक्नॉलॉजी में अकल्पनीय स्केल और स्पीड के गवाह बन रहे हैं। आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स का उदाहरण हमारे सामने है। 2019 में G20 ने “Principles on AI” अपनाये थे। आज हमें उससे एक कदम और आगे बढ़ने की जरूरत है। मेरा सुझाव है कि अब हम Responsible Human-centric AI governance के लिये एक फ्रेमवर्क तैयार करें। इस संबंध में भारत भी अपने सुझाव देगा। हमारा प्रयास होगा कि Socio-Economic Development, ग्लोबल वर्कफोर्स और R&D जैसे क्षेत्रों में सभी देशों को AI का लाभ मिले।
  5. आज कुछ अन्य ज्वलंत समस्याएँ भी हमारे विश्व के सामने हैं, जो हम सभी देशों के वर्तमान और भविष्य, दोनों को प्रभावित कर रही हैं। साइबर सिक्योरिटी और क्रिप्टो-करेंसी की चुनौतियों से हम परिचित हैं। क्रिप्टो-करेंसी का क्षेत्र, सोशल आर्डर, मोनेटरी और फाइनेंसियल स्टेबिलिटी, सबके लिए एक नया विषय बनकर उभरा है। इसलिए हमें क्रिप्टो-करेंसी को रेगुलेट करने के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स विकसित करने होंगे। हमारे सामने ‘Basel standards on bank regulation’ एक मॉडल के रूप में है।
  6. इस दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इसी प्रकार साइबर सिक्योरिटी के लिए भी वैश्विक सहयोग और फ्रेमवर्क की ज़रूरत है। साइबर जगत से आतंकवाद को नए माध्यम, फंडिंग के नए तौर-तरीके मिल रहे हैं। ये हर देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है। जब हम हर देश की सुरक्षा, हर देश की संवेदना का ध्यान रखेंगे, तभी वन फ्यूचर का भाव सशक्त होगा।
  7. विश्व को एक बेहतर भविष्य की तरफ ले जाने के लिए ये जरूरी है कि वैश्विक व्यवस्थाएँ वर्तमान की वास्तविकताओं के मुताबिक हों। आज “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद” भी इसका एक उदाहरण है। जब UN की स्थापना की गई थी, उस समय का विश्व आज से बिलकुल अलग था। उस समय UN में 51 फाउंडिंग मेंबर्स थे। आज UN में शामिल देशों की संख्या करीब 200 हो चुकी है।
  8. बावजूद इसके, UNSC में स्थाई सदस्य आज भी उतने ही हैं। तब से आज तक दुनिया हर लिहाज़ से बहुत बदल चुकी है। ट्रांसपोर्ट हो, कम्यूनिकेशन हो, हेल्थ, एजुकेशन, हर सेक्टर का कायाकल्प हो चुका है। ये नई  वास्तविकता हमारे नए ग्लोबल स्ट्रक्चर में भी दिखाई देनी चाहिए।
  9. ये प्रकृति का नियम है कि जो व्यक्ति और संस्था समय के साथ स्वयं में बदलाव नहीं लाती है, वो अपनी प्रासंगिकता खो देती है। हमें खुले मन से विचार करना होगा कि आखिर क्या कारण है कि बीते वर्षों में अनेक रीजनल फोरम्स अस्तित्व में आए हैं, और वो प्रभावी भी सिद्ध हो रहे हैं।
  10. आज हर वैश्विक संस्था को अपनी प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए सुधार करना आवश्यक है। इसी सोच के साथ हमने कल ही अफ्रीकन यूनियन को G-20 का स्थाई सदस्य बनाने की ऐतिहासिक पहल की है। इसी तरह, हमें Multilateral Development Banks के मैंडेट का विस्तार भी करना होगा। इस दिशा में हमारे फैसले तुरंत होने चाहिए, और प्रभावी भी होने चाहिए।

गौरतलब है कि G20 समिट के दूसरे और आखिरी दिन G20 और मेहमान देश के नेताओं ने राजघाट पहुँचकर महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि दी। राजघाट पर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी नेताओं का खादी के शॉल के साथ स्वागत किया। सभी नेताओं को राजघाट के बारे में जानकारी भी दी।

ताजिया जुलूस को लेकर भिड़ा मुस्लिमों का ही 2 पक्ष, जम कर हुई हिंसा और पत्थरबाजी: बीच-बचाव कर रहे बुजुर्ग को भी जड़ दी लाठी, चिड़ीमार टोले का वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में ताजिया जुलूस के दौरान 2 पक्षों में विवाद हो गया। विवाद के दौरान लाठी-डंडे चलाने के साथ-साथ पत्थरबाजी भी की गई है। घटना में लगभग आधे दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज करवाया जा रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना 8-9 सितम्बर रात की है। झगड़े में शामिल दोनों पक्ष एक ही समुदाय के बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना हरदोई के थानाक्षेत्र मल्लावाँ की है। यहाँ शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) को बाजार के टोला चिड़ीमार में एक पक्ष ने चेहल्लुम के मद्देनजर ताजिए का जुलूस निकला था। ताजिया ले जा रहे लोगों में ग्यास, मोहम्मद अमान और बबलू आदि शामिल थे। शिकायत के मुताबिक चंदन, शकील, जग्गीर, सलमान और रवावुल ने चिड़ीमार टोले में ताजियादारों से झगड़ा शुरू कर दिया। आरोप है कि हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे थे। झगड़े की वजह ताजिया आगे-पीछे करने से शुरू हुई बहस बताई गई।

आरोप है कि कुछ ही देर में बहस ने हिंसा का रूप ले लिया। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर लाठी-डंडे बरसने लगे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में हमलावरों व पीड़ितों में नाबालिग भी शामिल दिखाई दे रहे हैं। मौके पर चीख-पुकार मची हुई है। ताजिया 2 अलग-अलग वाहनों में दिख रही है जिसमें से एक के ड्राइवर को भी भीड़ खींच कर पीटा गया। एक बुजुर्ग मामले को शांत करने का प्रयास करता दिख रहा है जबकि दूसरा हमलावरों को उकसा रहा। अंत में बीच-बचाव कर रहे बुजुर्ग को भी एक लाठी मारी जाती है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

मामले में दूसरे पक्ष ने भी पुलिस में तहरीर दे कर कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर में साल 2013 में भी ताजिए को ले कर विवाद होने का आरोप लगा है। इस तहरीर पर अभी FIR दर्ज नहीं हुई है। हरदोई जिले के एडिशनल एसपी दुर्गेश कुमार सिंह ने मीडिया से बात करते हुए इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि एक ही समुदाय के बीच हुई मारपीट की इस घटना की वजह पुरानी रंजिश है। इस मामले में 5 लोगों पर FIR दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

मोरक्को में 2000 से अधिक मौतें, 12वीं शताब्दी का मस्जिद भी ध्वस्त: रात में सड़क पर सोने को मजबूर हैं हजारों लोग, 100 साल में सबसे ज़्यादा तीव्र भूकंप

मोरक्को में आए भीषण भूकंप ने 2000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें लील ली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा के दुष्प्रभावों से पूरी तरह बाहर निकलने में मोरक्को को वर्षों लग जाएँगे। अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर से लगा उत्तरी अफ्रीका के इस देश में चीख-पुकार मची है। अब तक 2059 लोगों की मौत और 1200 से ज़्यादा लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। ‘रेड क्रॉस’ ने कहा है कि नुकसान की भरपाई में कई वर्ष लग जाएँगे।

मोरक्को में स्थित हाई एटलस पर्वत श्रृंखला शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) को आए इस भूकंप का केंद्र था। इसका एपिसेंटर ईघिल नामक जगह है, जो मोरक्को के चौथे सबसे बड़े शहर मारकेश से 70 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। तुर्की और सीरिया में ऐ भूकंपों का भी असर यहाँ पड़ा था, लेकिन तब कुछ ही हफ़्तों में हालात सामान्य हो गए थे। कई घर ध्वस्त हो गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इलाकों के सभी घर ध्वस्त हो गए हैं। टाफेघाघटे नामक एक महत्वपूर्ण शहर के सभी घर भी मिट्टी में मिल गए हैं।

लगातार दूसरी रात भूकंप पीड़ितों को सड़क पर सोना पड़ा। मारकेश शहर के लोगों ने भी घर से बाहर रात गुजारी, क्योंकि भूकंप के फिर से आने का डर था। मोरक्को में 1960 में भयंकर भूकंप आ चुका है, जिसमें 15,000 लोगों को जान गँवानी पड़ी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मोरक्को को मदद का आश्वासन दिया है, जिसके बाद मोरक्कन मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फ़तेही ने उन्हें धन्यवाद दिया। अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा है कि सन् 1900 के बाद अब तक मोरक्को में 6 से ज़्यादा मैग्नीट्यूड का भूकंप नहीं आया।

भूकंप की गहराई धरती के भीतर 18.5 किलोमीटर थी, जो इसे ‘Shallow भूकंप’ की कैटेगरी में डालता है और ये सामान्य भूकंप से ज़्यादा विनाशकारी होता है। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ हेलीकॉप्टर से ही अब पहुँचा जा सकता है। अल-हौज़ प्रान्त में जहाँ भूकंप का एपिसेंटर था, वो ग्रामीण इलाका है। मोरक्कों के दुश्मन देश अल्जीरिया ने भी मदद के लिए अपना एयरस्पेस खोलने का आश्वासन दिया है। कई लाशें धूल-मिट्टी में सनी हुई मिलीं। सड़क पर सोते हुए लोगों की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

मोरक्को का जेमा-अल-फ़ना मस्जिद भी ध्वस्त हो चुका है। कुतुबिय्या मस्जिद में मरम्मत का कार्य चल रहा था, लेकिन अब ये पूरी तरह गिर चुका है। ये 12वीं शताब्दी का मस्जिद है। इसके 69 मीटर (226 फ़ीट) के मीनार को मारकेश की छत कहा जाता था। रेस्क्यू के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सन् 1492 में यहूदियों द्वारा बनवाया गया एक सिनेगॉग (धर्मस्थल) भी तबाह हो गया। मोरक्को ने अब तक किसी देश से सहायता नहीं माँगी है। कई लोगों ने पलायन किया है।

आतंकी जैसा, नफरत फैलाने वाला, भीख पर पलने वाला… फुदक रहा था मोहम्मद जुबैर, आईना दिखा असली औकात दिखाई वेंकटेश प्रसाद ने

क्रिकेट की पिच पर फुदकते पाकिस्तानियों को पेवेलियन भेज औकात दिखाते थे वेंकटेश प्रसाद। वही फास्ट बोलर वेंकटेश अब सोशल मीडिया पर भी उसी फॉर्म में हैं – बेखौफ, बेधड़क! बस मैदान अलग है, टारगेट बदल गया है। मोहम्मद जुबैर नाम के फर्जी फैक्ट-चेकर ने जब वेंकटेश प्रसाद को टारगेट करना चाहा तो उसी की भाषा में चमाटेदार जवाब मिला।

वेंकटेश प्रसाद को डिलीट किए गए ट्वीट पर घेरना चाह रहा था जुबैर

इसकी शुरुआत होती है मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट से, जो उसने वेंकटेश प्रसाद को टारगेट कर लिखा। इसमें वेंकटेश प्रसाद के एक डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाया गया था। वेंकटेश ने यह ट्वीट 9 सितंबर को किया था, जो किसी कारण से डिलीट किया गया होगा। इसी पर ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ बनते हुए मोहम्मद जुबैर टूट पड़ा। बिना यह सोचे कि वेंकटेश उसे क्लिन बोल्ड करने वाले हैं। और हुआ भी ऐसा ही।

वेंकटेश प्रसाद ने मोहम्मद जुबैर की भाषा में ही जवाब दिया, उसके डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाते हुए। उन्होंने लिखा:

“हाहाहा… हमेशा नफरत फैलाने वाला वो बोल रहा है, जिसने अपने एजेंडे के लिए कई लोगों की जान खतरे में डाल दी। तुम फैक्ट-चेकर के भेष में ठीक वैसे हो, जैसे कोई आतंकी शांति की बात कर रहा हो। अब पोस्ट करो कि तेरे को पैसे की जरूरत है, अपनी वेबसाइट के लिए भीख माँगो… क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाकर पेट पालने में तुम्हे कोई शर्म नहीं।”

राम-भक्त वेंकटेश को घेर रहे थे जुबैर के चमचे, खाए बाउंसर

जुबैर को उसके ट्वीट पर जब करारा जवाब मिल गया तो उसके चमचे वेंकटेश प्रसाद की ट्रोलिंग करने लगे। रोशन राय नाम के एक यूजर ने तो ‘राम-भक्त’ लिखते हुए वेंकटेश को चैलेंज तक कर डाला। लेकिन अफसोस! वेंकटेश ने यहाँ भी फास्ट बोलर वाली तेजी के साथ ही उसे धो डाला।

रोशन राय ने वेंकटेश प्रसाद के डिलीट किए गए ट्वीट के बारे में पूछा था, जिस पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने लिखा कि उनका ट्वीट एक सामान्य ट्वीट था। जिसमें उन्होंने एक भ्रष्ट व्यक्ति के कारण उसके संगठन पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव की बात कही थी। वेंकटेश ने यह भी कहा कि वर्ल्ड कप में टिकटों को लेकर वो बीसीसीआई की अक्षमता पर भी खुल कर लिख चुके हैं, इसी कारण से भ्रम पैदा हुआ। और ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लिखा:

“वरना नाम लेकर, खुल कर बोलने में रामभक्त किसी को छोड़ते नहीं, जय श्री राम।”

वेंकटेश प्रसाद को 9 सितंबर 2023 वाले ट्वीट को अगर गलत मंशा से डिलीट करना होता तो वो फिर से 10 सितंबर को वही ट्वीट एक लाइन जोड़ कर नहीं करते।

जुबैर ने बिना संदर्भ जाने उनको ट्रोल करना चाहा, जिसने कभी भारत का झंडा बुलंद किया है। और जुबैर ने क्या किया है? फर्जी और एडिट किए गए वीडियो के दम पर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगवाए, कट्टर इस्लामी लोगों को हिंदुओं की हत्या के लिए उकसाया।

मोहम्मद जुबैर: फैक्ट-चेकर की भेष में इस्लामी कट्टरपंथी

वो मोहम्मद जुबैर ही था जो ‘Times Now’ चैनल पर आए नाविका कुमार की उस डिबेट का एडिट किया हुआ वीडियो इस्लामी संगठनों तक लेकर गया था, जिसमें नूपुर शर्मा ने इस्लामी साहित्य में लिखी किसी बात का उल्लेख किया था। उससे पहले इस्लामी कट्टरपंथी तस्लीम रहमानी क्या कह रहा था, किस तरह शिवलिंग और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बना रहा था – इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसे एक साजिश के तहत एडिट कर दिया था मोहम्मद जुबैर ने।

एडिट वीडियो वायरल होने के बाद क्या हुआ? मोहम्मद ज़ुबैर वामपंथी मीडिया का हीरो बना… लेकिन नूपुर शर्मा और उनके परिवार को छिप कर रहना उनकी मजबूरी है। कन्हैया लाल तेली, उमेश कोल्हे और प्रवीण नेट्टारू को तो मार ही डाला गया।

फर्जी फैक्ट-चेकर जुबैर कैसे खबरों से खेल कर फेक न्यूज फैलाता है, BefittingFacts नाम के ट्विटर (अब X) यूजर ने इस पर लंबा थ्रेड लिखा है। वेंकटेश प्रसाद ने इस थ्रेड पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह अपने मालिक लोगों से सवाल नहीं करेगा और फिर से पत्रकारिता के नाम पर भीख माँग कर पेट पालेगा।

200 बैठकें, 300 घंटे और 15 ड्राफ्ट… यूँ ही नहीं भारत के घोषणा-पत्र पर पूरी G20 में बन गई सहमति: शशि थरूर भी हुए कायल, जानें उन अधिकारियों को जिन्होंने कर दिखाया ये कमाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के नेतृत्व में भारत ने वो कर दिखाया, जो कुछ महीने पहले तक असंभव सा लग रहा था। न सिर्फ G20 समिट का भव्य आयोजन नई दिल्ली में सफल हुआ, बल्कि समूह ने जो संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया, उसमें भी सर्व-सम्मति बन गई। वो भी तब, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बँटी हुई है। भारत ने रूस की निंदा करवाए बिना इस घोषणा-पत्र को पारित करवा दिया, साथ ही ये सन्देश भी दे दिया कि ये युद्ध का काल नहीं है। इसके लिए भारत के अधिकारियों ने भी खूब मेहनत की।

G20 में भारत के ‘शेरपा’ अमिताभ कांत ने बताया कि 200 घंटे तक चले नॉन-स्टॉप बातचीत के बाद G20 के डिक्लेरेशन पर सर्व-सहमति बनी। संगठन के 18वें समिट के दौरान भारत के अधिकारियों का एक पूरा समूह इसमें लगा हुआ था। इसमें जॉइंट सेक्रेटरी इनम गंभीर और नागराज नायडू काकनर शामिल थे। इनलोगों ने 300 से अधिक द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया और 15 ड्राफ्ट्स तैयार किए। यही कारण रहा कि G20 समिट के पहले ही दिन सर्वसम्मति से डिक्लेरेशन पास हो गया।

इसमें सबसे कठिन था जियोपॉलिटिकल पैरा, यानी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सबको एकमत में लाना। इसके लिए 200 घंटों की बातचीत, 300 बैठकें और 15 ड्राफ्ट्स लगे। अमिताभ कांत ने दोनों अधिकारियों को धन्यवाद करते हुए कहा कि इस कार्य में उन दोनों के सहयोग के लिए वो आभारी हैं। आइए, आपको बताते हैं कि ईनम गंभीर कौन हैं। वो भारतीय विदेश मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी हैं, जिन्हें G20 में भी इस पद पर रखा गया। वो 2005 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं।

उन्होंने भारत की G20 अध्यक्षता की नीतियों को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाई है। इससे पहले वो न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संस्था के अध्यक्ष की वरिष्ठ सलाहकार (शांति एवं सुरक्षा मामले) के रूप में काम कर चुकी हैं। उन्होंने UNGA (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली) के 74वें अधिवेशन के दौरान इस पद पर काम किया था। मेक्सिको और अर्जेंटाइना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में भारतीय दूतावास में कार्यरत रहीं ईनम गंभीर स्पेनिश भाषा में दक्ष हैं।

उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान को लेकर भारत की विदेश नीति तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2011-16 के बीच उन्होंने अलग-अलग पदों पर रहते हुए ये जिम्मेदारियाँ निभाईं। वो न्यूयॉर्क में UN में भारत के परमानेंट मिशन के रूप में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित विषय में मास्टर्स ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। साथ ही उन्होंने यूनिवर्सिटी और जेनेवा से एडवांस इंटरनेशनल सिक्योरिटी में भी मास्टर्स किया था। UN में उन्हें 2 बार भारत की तरफ से पाकिस्तान को जवाब देने का मौका मिला और उन्होंने पाकिस्तान की बखिया उधेड़ दी थी।

अब बात करते हैं नागराज नायडू काकनुर की, जो फ़िलहाल जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर हैं और चीनी भाषा में दक्ष हैं। यूक्रेन संबंधी विषय पर ड्राफ्ट तैयार करने और मोलभाव में उन्होंने ही नेतृत्व किया। उन्होंने 76वें UNGA अधिवेशन के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद के चीफ कैबिनेट के रूप में काम किया था। अब्दुल्ला शाहिद ने कहा था कि नागराज नायडू एक बहुत अच्छे कूटनीतिज्ञ हैं, जो संकट के समय में काम आते हैं और मेहनत और प्रतिबद्ध हैं। साथ ही वो संयुक्त राष्ट्र में भारत के डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेन्टेटिव रहे हैं।

उन्होंने 4 बार अलग-अलग जिम्मेदारियाँ देकर चीन भेजा गया था। उन्होंने 2000-2003 में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में सेकंड एवं थर्ड सेक्रेटरी (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) के रूप में काम किया था। 2003-06 में उन्हें हॉन्गकॉन्ग स्थित भारतीय काउंसलेट में काउंसल (राजनीतिक एवं वाणिज्यिक) के रूप में काम करने की जिम्मेदारी मिली थी। 2009-12 में वो बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी एन्ड काउंसलर (इकोनॉमिक एन्ड कमर्शियल अफेयर्स) के रूप में कार्यरत रहे।

चीन के गुआंगझोउ में 2013-15 में वो भारतीय काउंसलेट में काउंसल रहे। नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्रालय में लौटने के बाद वो 2015-17 में इसके इकोनॉमिक डिप्लोमेसी डिवीज़न में जॉइंट सेक्रेटरी/डायरेक्टर जनरल के पद पर रहे। उन्होंने अमेरिका के मेडफोर्ड सहित फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एन्ड डिप्लोमेसी से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की थी। ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया ने भारत द्वारा तैयार किए गए डिक्लेरेशन को सर्वसम्मति प्रदान करवाने में बड़ी भूमिका निभाई।

इसमें रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले की चर्चा किए बिना सामान्य तौर पर सभी देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करने का सन्देश दिया गया। अन्य अधिकारियों, जिन्होंने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनमें अभय ठाकुर का भी नाम है। अभय ठाकुर भारतीय विदेश मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी हैं। उन्हें G20 में ‘डिप्टी’ (Sous शेरपा) का पद मिला है। वो मॉरीशस और नाइजीरिया में भारत के राजदूत रह चुके हैं। विदेश मंत्रालय में नेपाल और भूटान से डील करने का अनुभव उनके पास है। वो रूसी भाषा के जानकार भी हैं।

इसी तरह एक नाम 2005 बैच के IFS अधिकारी आशीष सिन्हा का है। मैड्रिड, काठमांडू, नैरोबी और न्यूयॉर्क में काम कर चुके आशीष सिन्हा स्पेनिश भी बोलते हैं। पिछले 7 वर्षों से वो कई समझौतों में भारत के लिए मोलभाव करते रहे हैं। G20 में शामिल बड़े वैश्विक नेताओं ने इस डिक्लेरेशन की तारीफ़ की है। यहाँ तक कि भारत में विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस के नेता शशि थरूर भी इन IFS अधिकारियों के कायल हो गए। उन्होंने अमिताभ कांत को बधाई देते हुए कहा कि भारत ने एक दक्ष IFS अधिकारी खो दिया, क्योंकि उन्होंने IAS में जाना पसंद किया।

शशि थरूर खुद भारत के विदेश राज्यमंत्री रहे हैं और IFS अधिकारी के रूप में UN में काम कर चुके हैं। उन्होंने अमिताभ कांत के एक बयान को शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे G20 समिट के एक रात पहले ही डिक्लेरेशन को लेकर सर्वसम्मति बनी थी। केरल कैडर के 1980 बैच के IAS अधिकारी रहे अमिताभ कांत ‘नीति आयोग’ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहले ड्राफ्ट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ आई थीं और किसी को नहीं लग रहा था कि सब सहमत होंगे, लेकिन प्रयास जारी रखा गया। पहला, दूसरा, तीसरा… और 15वें ड्राफ्ट में सहमति बनी।

‘बुढ़ापे में शादी तो कर लेते हैं लेकिन पत्नी के साथ…’ : 6 बार के कॉन्ग्रेस विधायक ने की महिलाओं पर घटिया बात, वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर सीट से 6 बार के कॉन्ग्रेस विधायक केपी सिंह ‘कक्काजू’ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह महिलाओं को लेकर विवादित बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। विधायक केपी सिंह ने इस वायरल वीडियो में बुजुर्ग पतियों की कम उम्र की पत्नियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिन औरतों के पति बूढ़े होते हैं, उन औरतों के साथ रात को दूसरे मर्द सोने आते हैं। उनके पतियों से कुछ होता नहीं है। उनके बस में कुछ होता नहीं है। यह वीडियो, पिछोर विधानसभा क्षेत्र में एक आमसभा का बताया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस विधयक केपी सिंह ने विवादित वीडियो में कहा, “मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है कि जो बुढ़ापे में शादी करते हैं, पहले तो मजा आता है कि घर में बहू आ गई, लेकिन बाद में उस बहू के लक्षण होते हैं कि अपना आदमी तो ऐसे ही पड़ा है और घर में दूसरे मर्द आ रहे हैं, क्योंकि बुढ़ापा है और खुद की बस की कुछ है नहीं, तो ना तो बहू को रोक पा रहे हैं और ना कुछ कह पा रहे हैं।”

भाजपा प्रवक्ता ने साधा निशाना

केपी सिंह कक्काजु का महिलाओं के अपमान करने वाला वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा के प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने सोशल मीडिया पर X पर लिखा, “पिछोर कॉन्ग्रेस विधायक के पी सिंह महिलाओं को अपशब्द बोल रहे हैं। सार्वजनिक रूप से इस तरह की भाषा का प्रयोग करना कॉन्ग्रेस की निकृष्ट मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है। कॉन्ग्रेस नेताओं की यही सोच भँवरी देवी, सरला मिश्रा, बॉबी मर्डर केस और तंदूर कांड जैसे प्रकरणों में परिभूत होती है।”

गौरतलब है कि केपी सिंह का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालाँकि वीडियो दो-तीन दिन पुराना बताया जा रहा है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि अक्सर ही उनके इस तरह के बायान इंटरनेट मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

बदनामी के बाद आई कॉन्ग्रेस विधायक की सफाई 

वीडियो वायरल होने के बाद निशाने पर आए कॉन्ग्रेस विधायक ने वीडियो जारी कर इस मामले पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मेरे वक्तव्य को तोड़ मड़ोर कर पेश किया जा रहा है, और मेरे विपक्षी लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी सबसे प्रार्थना है कि मेरे द्वारा ना तो ऐसा कोई वक्तव्य दिया गया है और ना ही मेरा कोई ऐसा इरादा है। मैं सारी महिलाओं का सम्मान करता हूँ और किसी को मेरे इस बयान से कथन से ठेस पहुँची हो तो मैं क्षमा चाहता हूँ। 

पहले 48 घंटों में 30, साल में 500+ बच्चों की मौत… अब आँकड़ा है – शून्य: जापानी इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया, मलेरिया पर योगी सरकार विजयी

उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। सरकार ने दावा किया कि लगभग 40 वर्षों से आम जनता पर कहर की तरह बरसने वाली जापानी इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों पर काबू पा लिया गया है। सरकार ने इन बीमारियों को जड़ से खत्म करना अपना अगला टारगेट बताया है। इसी के साथ शासन ने इस साल अभी तक जापानी इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया व मलेरिया से एक भी मौत न होने की जानकारी दी है।

शनिवार (9 सितंबर 2023) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस बावत आँकड़े पेश किए गए। CM कार्यालय के मुताबिक, “पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में इंसेफेलाइटिस से हजारों बच्चों की मौत होती थी। साल 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरविभागीय समिति बनाकर जापानी इंसेफेलाइटिस के नियंत्रण के लिए कार्य किए। नतीजा, इस वर्ष 01 जनवरी से 07 सितंबर तक प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया व मलेरिया से एक भी मृत्यु नहीं हुई।”

उत्तर प्रदेश शासन ने अपना अगला लक्ष्य इन बीमारियों को जड़ से खत्म करना बताया है। शासन स्तर पर इसकी तैयारियाँ भी शुरू कर दी गई हैं। मरीजों के बेहतर इलाज की मॉनिटरिंग के लिए सभी जिलों के ज़िलाधिकारियों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले अक्टूबर माह में इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया और मलेरिया के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। इस अभियान के लिए संबंधित अधिकारियों को अभी से तैयारियाँ शुरू करने के लिए कहा गया है। हर अस्पताल की रोज जाँच के भी आदेश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक संचारी रोगों के लिए 15 नवंबर तक का समय संवेदनशील है। अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर चली इस मीटिंग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किसी भी तरह की ढिलाई न स्वीकार होने के साथ अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती करने के भी आदेश दिए। मरीजों की देखरेख के लिए जिलेवार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी फुल शर्ट और पैंट में आने की सलाह दी गई है।

बैठक में बीमारियों के हिसाब से नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, संतकबीरनगर, सहारनपुर, बस्ती, संभल, शाहजहाँपुर, बरेली और बुलंदशहर को संवेदनशील बताते हुए विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। बीमारियों की आशंका दूर करने के लिए अधिकारियों द्वारा आम लोगों को साफ-सफाई के लिए जागरूक करने का अभियान भी चलाए जाने के लिए भी बोला गया है।

एक साल में 500 मौतें, 48 घंटों में 30 बच्चे… और सरकारी घोषणाएँ

योगी आदित्यनाथ की सरकार से पहले जापानी इंसेफेलाइटिस बच्चों के लिए मौत का दूसरा नाम बन चुका था। उत्तर प्रदेश में 2012 में 500 से ज्यादा मौतें हुई थीं। इनमें अधिकतर बच्चे थे। कभी-कभी तो सिर्फ 48 घंटों के भीतर ही 30 बच्चों की मौत भी इसी उत्तर प्रदेश ने झेला है। अखिलेश यादव की सरकार तब मरने वाले बच्चों के माँ-बाप को 50000-50000 रुपए देकर सरकारी काम करने का दायित्व उठाती थी।

जापानी इंसेफेलाइटिस की बात हो तो बिहार कोई अलग नहीं है उत्तर प्रदेश से। 2019 में सिर्फ एक जिले मुजफ्फरपुर में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई। नीतीश कुमार की सरकार अखिलेश यादव की ही तरह सरकारी काम करने का दायित्व उठाते रही। इन दोनों मुख्यमंत्रियों के उलट योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बीमारी के जड़ को खोजा, उसको दूर करने का प्लान बनाया और रिजल्ट सबके सामने है।

अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आकर G20 से पहले पादरी के साथ करते हैं प्रार्थना-भोज… चुप हैं वामपंथी-सेक्युलर क्योंकि निशाना सिर्फ हिंदू धर्म को है बनाना 

देश के राजधानी दिल्ली में G-20 शिखर सम्मलेन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक मजहबी अनुष्ठान किया लेकिन उस पर किसी ने कोई बवाल नहीं किया। वहीं भारत में प्रधानमंत्री मोदी या मुख्यमंत्री योगी जैसे राजनेता जब भी कोई राजनीतिक कार्य से पहले पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तो वामपंथियों से लेकर खुद को सेक्युलर कहने वाले सभी धड़े पीछे पड़ जाते हैं क्योंकि मूल में हिन्दू धर्म होता है। और हिन्दू धर्म का विरोध ही लेफ्ट-लिबरल गैंग का मुख्य एजेंडा है। 

अब चाहे वह संसद में सेंगोल की स्थापना हो, राम मंदिर का शिलान्यास, काशी विश्वनाथ या महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन या प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किसी मंदिर में पूजा-पाठ, तब-तब यही सेक्युलर गैंग यह सिखाने जरूर आता है कि राष्ट्र का कोई धर्म नहीं होता, राष्ट्र सेक्युलर होता है। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति के ईसाई पादरी को बुलाकर विशेष प्रार्थना और भोज के आयोजन से उन्हें कोई समस्या नहीं क्योंकि विरोध तो केवल सनातन हिन्दू धर्म का करना है, उसको नीचा दिखाना है, उसके अलावा बाकी सब सेक्युलर है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शिखर सम्मलेन से पहले किया विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन 

नई दिल्ली में G-20 शिखर सम्मलेन के दो दिवसीय (9-10 सितम्बर, 2023) बैठक से पहले भारत में अमेरिकी दूतावास के अधिकारी यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि बैठक से पहले जो बाइडेन की इच्छानुसार हॉली कम्यूनियन सर्विस (एक पवित्र भोज सेवा) का आयोजन कराया जा सके। इसके लिए दिल्ली के ईसाई मजहबी आयोजन के प्रमुख फादर निकोलस डायस से एक सप्ताह पहले ही संपर्क कर सब कुछ तय कर दिया गया था।

बता दें कि फादर निकोलस डायस, जो बेनौलीम, गोवा के रहने वाले हैं और तीन दशकों से अधिक समय से विभिन्न ईसाई मजहबी आयोजनों और उपदेशों के लिए काम कर रहे हैं, उन्होंने शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही प्रार्थना सेवा के लिए राष्ट्रपति बाइडेन के अनुरोध को पूरा करने में लग गए। इसी के लिए शनिवार (9 सितम्बर, 2023) सुबह लगभग 9 बजे, फादर डायस होटल आईटीसी मौर्य में थे, जहाँ, राष्ट्रपति बाइडेन के साथ, एक छोटे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने 30 मिनट की पवित्र भोज सेवा में भाग लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जो जानकारी निकलकर सामने आई है उसके मुताबिक यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति बाइडेन इस मामले में बिलकुल स्पष्ट थे कि वह अपने दो दिवसीय जी-20 कार्यक्रम की शुरुआत भारत मंडपम में पवित्र यूचरिस्ट और प्रार्थना के साथ शुरू करना चाहते हैं। वहीं फादर निकोलस डायस ने भी द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमने मिलकर प्रतिभागियों के साथ-साथ शिखर सम्मेलन की सफलता और उन वैश्विक मुद्दों के लिए प्रार्थना की, जिन पर G-20 शिखर सम्मलेन में चर्चा होनी थी।”

फादर ने आगे बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक संक्षिप्त बातचीत में उनको बताया कि कैसे उनकी दादी का उनके जीवन और कैथोलिक पालन-पोषण का बहुत बड़ा योगदान है। फादर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उपहार में बेबिनका (गोवा का एक पुर्तगाली व्यंजन) भी भेंट किया जो भारत में ईसाई मजहब की जड़ों, प्रभाव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने भारत के तटीय राज्यों तक पहली बार सेंट फ्रांसिस जेवियर द्वारा कैसे ईसाई धर्म पहुँचा इसकी भी चर्चा की। 

भारत और हिन्दू धर्म की हर पहचान से है सेक्युलरों को नफरत 

इतना सब कुछ हुआ वह भी विश्व के एक सबसे शक्तिशाली राष्ट्र के मुखिया द्वारा, जिसने एक वैश्विक शिखर सम्मलेन से पहले भी अपनी ईसाई पहचान और मज़हब के अनुकूल आचरण को विदेशी धरती पर भी नहीं छोड़ा। लेकिन, इस पर न कहीं कोई बवाल हुआ और न सोशल मीडिया पर ही कोई चर्चा देखने को मिली। क्योंकि, लेफ्ट-लिबरलों की दृष्टि में यहाँ डेमोक्रेसी और राष्ट्र का धर्म जैसी बातें नहीं आती। वहीं आपको याद होगा यह गैंग कब-कब बवाल नहीं किया है। चाहे वह संसद भवन में पहली बार प्रवेश से पहले मंगलाचरण हो, राम मंदिर का शिलान्यास, काशी विश्वनाथ या महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन हो, अयोध्या में दिवाली सहित कई मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद उद्घाटन भी शामिल है। 

असली बवाल तो लेफ्ट-लिबरल गैंग ने तब काटा था हाल ही में नए संसद भवन के उद्घाटन के पहले सेंगोल की स्थापना की बात आई। बता दें कि चोल राजवंश के प्रतीक ‘सेंगोल’ को राजदंड के रूप में देखा जाता है, जो शासक को न्याय और धर्म की याद दिलाता रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के बगल में इसे स्थापित किया और इस दौरान तमिल पुरोहितों का समूह, जिन्हें ‘अधीनम’ कहा जाता है, वो मौजूद रहे। उनकी ही निगरानी में ये पूरा का पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ। तब भी इस लेफ्ट लिबरल गिरोह ने न सिर्फ उसका विरोध किया बल्कि हिन्दू धर्म को जड़ से उखाड़ने जैसी बातें की थी। 

और हाल ही में इन्हें विदेशी गुलामी का प्रतीक ‘इंडिया’ इतना भा गया है कि ये अब ‘भारत’ के विरोध में भी हाथ धो कर पड़ गए हैं। क्योंकि भारत में इन्हें हिन्दुओं का वर्चस्व दिखाई दे रहा है जबकि इंडिया इनके लिए सेक्युलर शब्द है।  

बेटा कहे जाने का विरोध करने पर आलोक की चाकुओं से गोद कर हत्या, यामीन, गुगा और राजा की तलाश: फरीदाबाद की घटना

हरियाणा के फरीदाबाद में 2 युवकों पर चाकुओं से हमला किया गया। इस हमले में आलोक नाम के युवक की मौत हो गई है। एक अन्य पीड़ित शिवम गंभीर रूप से घायल है। शिवम का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हमले के बाद सभी आरोपित फरार हो गए हैं। पुलिस ने यामीन, राजा और गुगा पर FIR दर्ज कर ली है। घटना शनिवार (9 सितम्बर 2023) की है।

FIR कॉपी के मुताबिक यह घटना फरीदाबाद के पल्ला थानाक्षेत्र की है। मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के निवासी नवीन कुमार चौधरी ने इस मामले में शिकायत दी है। नवीन फिलहाल दिल्ली के जैतपुर में किराए पर रहते हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्हें 9 सितंबर को रात एक बजे अपने सबसे छोटे 21 वर्षीय बेटे आलोक को चाकू मारे जाने की जानकारी मिली थी। साथ ही शिवम नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी बेरहमी से पीटे जाने के बारे में बताया गया। आलोक के दोस्त राहुल नेगी ने हमले के लिए यामीन, गुगा और राजा को जिम्मेदार बताया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

इस सूचना के बाद आलोक के परिजनों ने खोजबीन शुरू की। लगभग 3 घंटे बाद घायल आलोक अपने परिजनों को पंचशील कॉलनी के एक पार्क में घायल अवस्था में मिले। परिजनों ने उन्हें दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में भर्ती करवाया। इलाज के दौरान ही आलोक ने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने इस केस को IPC की धारा 302 और 34 के तहत दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपितों का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का भी एलान किया है। फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच की 4 टीमें लगाई गई हैं।

हमले में गंभीर रूप से घायल शिवम का इलाज अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालात चिंताजनक बताई जा रही है। हरियाणा के बजरंग दल पदाधिकारी ललित भाटी ने इस मामले में ऑपइंडिया से बातचीत की। ललित के मुताबिक आलोक और शिवम लव जिहाद के खिलाफ काम करते थे। कुछ समय पहले ही उन्होंने एक हिन्दू लड़की को लव जिहाद से बचाया था। लेकिन फरीदाबाद पुलिस ने इन दावों का खंडन किया है।

पुलिस ने X/ट्विटर पर एक लंबे पोस्ट में बताया है कि मृतक और आरोपितों की पहले से जान पहचान थी। इनका रोज का मिलना जुलना था। आलोक ने बेटा कहने का विरोध किया जिसके कारण उस पर हमला किया गया। बजरंग दल से जुड़ाव और किसी लड़की को बचाने के कारण हमला किए जाने के दावों को पुलिस ने झूठ बताया है।

पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपितो राजा, यामीन और बुगा उर्फ गुगा उर्फ गोगा उर्फ अजहर की तलाश क्राइम ब्रांच की चार टीमें कर रही है। आमलोगों से भी पुलिस ने इनकी जानकारी देने की अपील की है।

अपडेट: इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा वस्तुस्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद हमने खबर में जरूरी बदलाव किए हैं