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ब्रसेल्स पहुँचे राहुल गाँधी भारत विरोधी EU सांसदों से मिले, भारत के खिलाफ यूरोपीय यूनियन के संसद में लाए गए प्रस्ताव में थी इनकी भूमिका

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 7 सितंबर 2023 एक बार फिर 6 दिवसीय विदेशी दौरे पर हैं। सफर के पहले पड़ाव में राहुल गाँधी बेल्जियम की राजधानी और यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स पहुँचे हैं। कॉन्ग्रेस के आधिकारिक हैंडल इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस ने उनके इस सफर का पूरा कार्यक्रम शेयर किया है।

कॉन्ग्रेस सांसद का दोपहर में यूरोपीय संघ के सांसदों से मिलने का कार्यक्रम था, तो शाम को ‘सिविल सोसाइटी’ से मिलने का। उसके बाद उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना था और फिर एक ‘डायस्पोरा मीट’ में जाना था। राहुल गाँधी 8-9 सितंबर को फ्रांस की राजधानी पेरिस, 10-11 सितंबर को नीदरलैंड के हेग और 11-12 सितंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में रहेंगे।

राहुल के विदेशी सफर पर गौर किया जाए तो वे अक्सर भारत विरोधी लोगों से मिलते दिखते हैं। इस साल मई में जब वो अमेरिका गए थे तो उन्होंने वहाँ ‘बे एरिया मुस्लिम कम्युनिटी’ के एक सवाल के जवाब में कहा था कि जिस तरह भारत में मुस्लिमों पर हमला हो रहा है। मैं गांरटी दे सकता हूँ कि सिख, ईसाई, दलित, आदिवासी भी ऐसा ही महसूस कर रहे होंगे’।

उन्होंने वहाँ ये तक कह डाला था, “मैंने अडानी और हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर देश की संसद में बोला तो मेरी सांसदी चली गई।” इस दौरान उन्होंने वहाँ पीएम मोदी को लेकर कहा था कि अगर उन्हें भगवान के बगल में बैठा दिया जाए तो वो भगवान को समझाने लगेंगे कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। उनके सेन फ्रांसिस्को के कार्यक्रम में खालिस्तान के समर्थन में नारे लगे।

इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। वो ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के सांसदों- अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौतुरौ सहित कई लोगों से मिले। कॉन्ग्रेस ने इन बैठकों की तस्वीरें अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा की हैं।

इन तस्वीरों में दिख रहा है कि राहुल गाँधी और सैम पित्रोदा यूरोपीय यूनियन के सांसदों के साथ बैठे हुए हैं। बताते चलें कि सांसद पियरे वही शख्स हैं, जिन्होंने जुलाई में मणिपुर मुद्दे पर यूरोपीय संघ की संसद में पारित भारत विरोधी प्रस्ताव की पैरवी की थी।

दूसरी तरफ, शुक्रवार (8 सितंबर) को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के प्रेस क्लब में राहुल गाँधी ने फिर वही किया है, जो अक्सर विदेशी दौरें में भारत की छवि को लेकर करते हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं के ऊपर बड़े पैमाने पर हमले हो रहे हैं। सत्ताधारी बीजेपी देश के संविधान को बदलने की कोशिश कर रही है।

कौन हैं अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौतुरौ?

सांसद अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौतुरौ बेहद खुशी के साथ राहुल गाँधी के साथ तस्वीरें शेयर कीं। इतना ही नहीं, ‘भारतीय लोकतंत्र के महान शख्स’ बताकर उनकी तारीफ भी की।

पियरे लारौतुरौ ने लिखा, “आज यूरोपीय संसद में राहुल गाँधी का स्वागत करते हुए बहुत सम्मानित महसूस हो रहा है। वो भारतीय लोकतंत्र की महान हस्तियों में से एक हैं और मोदी सरकार के अति-राष्ट्रवाद के खिलाफ वर्षों से लड़ रहे हैं। 7 अलग-अलग समूहों के एमईपी के साथ हमने मानवाधिकारों, सामाजिक न्याय और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई पर एक बहुत ही दिलचस्प चर्चा की।”

गौरतलब है कि मणिपुर मुद्दे पर जुलाई में यूरोपीय संघ की संसद में पारित भारत विरोधी प्रस्ताव के पीछे एमईपी लारौतुरौ अहम व्यक्ति थे। जुलाई में यूरोपीय संघ ने “इंडिया, द सिच्युएशन इन मणिपुर” शीर्षक से ये प्रस्ताव पास किया था।

एक लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में शेखी बघारते हुए पियरे ने यह भी साफ कर दिया था कि यूरोपीय संघ का ये प्रस्ताव खास तौर से पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा को निशाने पर लेने के लिए पास किया गया था।

साभार एक्स पर @ClaFrancavilla

यूरोपीय संघ की संसद ने 12 जुलाई 2023 को स्ट्रासबर्ग में अपने पूर्ण सत्र में मणिपुर की स्थिति पर तत्काल बहस की। यह चर्चा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के पीएम नरेंद्र मोदी को बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि के न्योते पर उनकी राजकीय यात्रा से ठीक पहले हुई थी।

ये चर्चा ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर बहस, लोकतंत्र और कानून का शासन’ के तहत की गई थी। तब यूरोपीय संसद में समाजवादियों और डेमोक्रेट्स के प्रगतिशील गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले पियरे ने ‘भारत, मणिपुर की स्थिति’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को पेश किया था।

भारत ने इस प्रस्ताव को दृढ़तापूर्वक खारिज कर दिया था और एक कड़ा बयान जारी किया था। तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की संसद को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक तौर पर दखलअंदाजी करने की कोशिश का आरोप लगाया था यूरोपीय संघ की संसद से ‘अपने काम से काम रखने’ की चेतावनी दी थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय के 13 जुलाई के इस बयान में यूरोपीय संसद को अपने आंतरिक मुद्दों पर अपना समय देने और ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी। राहुल गाँधी ने ब्रसेल्स में जिन अलविना अलमेत्सा से मुलाकात की थी वो भी उन एमईपी में से एक थीं, जो भारत के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव के पीछे थीं। वो यूरोप में भारत विरोधी मुखर कैंपेनर हैं।

गणतंत्र दिवस से पहले भारत में अलविन्ना अल्मेत्सा का कार्यक्रम

इस साल जनवरी में अलविना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े संगठन ‘द लंदन स्टोरी’ की एक चर्चा में प्रशांत भूषण और शाहरुख आलम के साथ शिरकत की थी। जुलाई में ईयू पूर्ण सत्र में अलविना ने मणिपुर के हालातों की ‘निगरानी’ करने और इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बाहरी पर्यवेक्षकों की तैनाती को मंजूरी देने की वकालत की थी।

उन्होंने कहा था कि भारत में मानवाधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता के हालात बदतर हो रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की अपील की थी। इस साल जनवरी में डिसइन्फोलैब ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अलविना की वार्ता की मेजबानी करने वाले संगठन FTLS की आईएसआई और जमात के साथ गहरी साँठ-गाँठ है।

इस रिपोर्ट में एक लंबा ब्योरा देते हुए बताया था कि कैसे अलविना यूरोपीय संघ में भारत के खिलाफ लॉबी करने की आईएसआई की कोशिशों का हिस्सा रही हैं। अलविना अलमेत्सा भारत के खिलाफ अपने कैंपेन, कॉलम लिखने, लॉबी करने और यूरोपीय संघ में भारतीय हितों के खिलाफ अभियान चलाने में लगातार लगी हुई हैं।

जनवरी 2021 में उन्होंने ईयू ऑब्जर्वर में एक लेख लिखकर भारत में ‘मानवाधिकार’ के हालातों पर दखल देने के लिए ईयू से अपील तक की थी। अपनी भारत-केंद्रित बातचीत और कहानियों में अलविना इन प्लेट्फार्म्स का इस्तेमाल तीस्ता सीतलवाड, संजीव भट्ट से लेकर स्टेन स्वामी जैसे भारत विरोधियों को बढ़ावा देने या समर्थन करने के लिए करती रही हैं।

राहुल गाँधी और उनकी भारत विरोधी ताकतों से मुलाकातें

यह लगभग एक पैटर्न बन गया है कि जब भी राहुल गाँधी विदेश यात्रा पर जाते हैं तो वो भारत विरोधी पैरवीकारों और राजनेताओं से मिलने की कोशिश में रहते हैं। इन मुलाकातों और बैठकों में लगभग हमेशा एक ही बात होती है कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है, मानवाधिकारों की स्थिति खराब हो रही है और कॉन्ग्रेस के नेता के तौर में केवल वे ही इन सबका ‘समाधान’ कर सकते हैं।

राहुल और उनके सहयोगियों का दावा है कि भारत में परेशानी केवल मोदी सरकार की वजह से पैदा हो रही है। इस साल की शुरुआत में जब राहुल गाँधी वाशिंगटन डीसी में थे, तब उन्होंने सीएए पर झूठ बोला और गलत सूचना फैलाई थी। उन्होंने कहा था कि वो अच्छी तरह जानते हैं कि डोनल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा से ठीक पहले 2020 में दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे क्यों हुए।

अपने 10 दिन के अमेरिकी दौरे के दौरान राहुल गाँधी को हडसन इंस्टीट्यूट में सुनीता विश्वनाथ के साथ गहन बातचीत करते देखा गया। सुनीता विश्वनाथ ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचआरएचआर)’ की सह-संस्थापक हैं। उन्होंने रशीद अहमद के नेतृत्व वाले आईएएमसी के साथ मिलकर राष्ट्रपति बाइडेन को लिखे एक पत्र पर दस्तख़त किए थे। इसमें बाइडेन से पीएम मोदी के लिए आयोजित राजकीय रात्रिभोज को रद्द करने के लिए कहा गया था।

डिसइन्फो लैब की जाँच से पता चला कि एचआरएचआर ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ की भ्रामक कहानी को बढ़ावा दे रहा था। इसी संगठन को ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ यानी दुनिया में हिंदुत्व को ख़त्म करने वाले कार्यक्रम का समर्थन करते हुए भी देखा गया था।

वर्तमान में, भारत में राहुल गाँधी के गठबंधन सहयोगी हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाने में व्यस्त हैं। राहुल गाँधी के साथ गठबंधन में राज्य स्तर पर सत्ता में बैठे राजनेता ऐलान कर रहे हैं कि हिंदू धर्म एक ‘संक्रामक बीमारी’ है और वे इसे खत्म होते देखना चाहते हैं।

विदेशी ताकतों से देश के आंतरिक मामलों में दखल की माँग

भारत में अपने राजनीतिक फायदे के लिए राहुल गाँधी द्वारा ‘विदेशी मदद’ माँगने के कई उदाहरण हैं। देश में एक के बाद एक चुनावों में हारने के बाद और लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता का विश्वास जीतने में नाकाम रहने के बाद उन्होंने वैश्विक वामपंथियों के सामने कहना शुरू कर दिया है कि भारत अराजकता में डूबा हुआ है और यहाँ लोकतंत्र का पतन हो रहा है। सिर्फ वे ही इसे ठीक कर सकते हैं।

अप्रैल 2021 में हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में राहुल ने जोर देकर कहा था कि अमेरिकी सरकारी प्रतिष्ठानों को ‘भारत में क्या हो रहा है’ के बारे में ‘और अधिक बोलना’ चाहिए। यूनाइटेड किंगडम में 2022 में ‘आइडियाज फॉर इंडिया’ सम्मेलन में उन्होंने भारत में विदेशी दखल की माँग को दोहराया था।

अपने विवादास्पद भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने दो बार विदेशी दखल की अपनी इच्छा जाहिर की थी। पहली बार इसका जिक्र उन्होंने रूस-यूक्रेन मुद्दे की बात करते हुए किया और दूसरा तब कहा था कि जब उन्होंने भारतीय राजनयिकों के यूरोपीय लोगों से आदेश लेने में अनिच्छुक होने की आलोचना की थी। इसी सम्मेलन में उन्होंने लद्दाख की तुलना यूक्रेन से करते हुए कहा था कि इसमें अमेरिकी दखल की जरूरत है।

जिस काम में भारत को लगते 47 साल, वह 6 साल में हुआ: वर्ल्ड बैंक ने माना मोदी सरकार का लोहा, गेमचेंजर बने UPI- DPI, जन-धन

विश्व बैंक ने जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले मोदी सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट की दिशा में उठाए गए कदमों की जमकर तारीफ की है। वर्ल्ड बैंक ने भारत की प्रशंसा करते हुए अपने जी-20 दस्तावेज में कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत ने वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को 6 साल में हासिल कर लिया है, जिसे करने में 47 साल लग जाते। यानी मोदी सरकार ने 47 साल के काम को मात्र 6 साल में ही कर दिखाया है। इससे तक़रीबन 41 साल की बचत हुई है।

वर्ल्ड बैंक की इस खबर को प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया एक्स के अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें विश्व बैंक द्वारा भारत सरकार की तारीफ की गई है। PM मोदी के अकाउंट पर किे गए पोस्ट में लिखा है, “डिजिटल पब्लिक इंन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा संचालित वित्तीय समावेशन यानी फिनांशियल इनक्लूशन में भारत की छलांग! विश्व बैंक द्वारा तैयार किए गए एक G-20 दस्तावेज में भारत के विकास पर एक बहुत ही दिलचस्प बिंदु साझा किया गया है। भारत ने केवल 6 वर्षों में वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है, अन्यथा इसमें कम से कम 47 वर्ष लग जाते। हमारे मजबूत डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे और हमारे लोगों की भावना को बधाई। यह समान रूप से तीव्र प्रगति और नवप्रवर्तन का प्रमाण है।”

दरअसल, जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन की खुशी से सराबोर भारत की प्रशंसा में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भारत ने जन धन बैंक खाते, आधार और मोबाइल फोन (JAM ट्रिनिटी) के उपयोग से वित्तीय समावेशन की दर 80% तक प्राप्त करने में केवल 6 साल का समय लिया है, जिसके लिए इस तरह के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बिना 47 साल लग सकते थे। वर्ल्ड बैंक ने जी-20 के लिए पॉलिसी डॉक्युमेंट तैयार किया है जिसमें उसने भारत में जारी आर्थिक गतिविधियों की खूब तारीफ की है, खासकर डिजिटल इंडिया की।

UPI पर फिदा वर्ल्ड बैंक

यूपीआई प्लेटफॉर्म ने भारत में बड़ी लोकप्रियता हासिल की है। मई 2023 में ही लगभग 14.89 खरब रुपए मूल्य के 9.41 अरब से अधिक लेनदेन किए गए। वर्ल्ड बैंक के दस्तावेज के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की नॉमिनल जीडीपी का लगभग 50% के बराबर मूल्य का यूपीआई ट्रांजैक्शन हुआ है। डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्राक्चर ने नए ग्राहक पर बैंकों का खर्च लगभग खत्म कर दिया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के उपयोग से भारत में बैंकों के ग्राहकों को शामिल करने की लागत 23 डॉलर (करीब 1,900 रुपए) से घटकर 0.1 डॉलर (करीब 8 रुपए) हो गई है। वहीं ई-केवाईसी का उपयोग करने वाले बैंकों ने अपनी अनुपालन लागत 0.12 डॉलर से घटाकर 0.06 डॉलर कर दी है। 

वर्ल्ड बैंक में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने डीपीआई का लाभ उठाते हुए दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल गवर्नमेंट-टू-पीपल आर्किटेक्चर में से एक का निर्माण किया। इससे 312 प्रमुख योजनाओं के जरिए 53 केंद्रीय मंत्रालयों के लाभार्थियों को सीधे लगभग 361 अरब डॉलर की रकम भेजी गई है। मार्च 2022 तक भारत ने डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) के कारण कुल 33 अरब डॉलर की बचत की, जो जीडीपी के लगभग 1.14 फीसदी के बराबर है।

यूपीआई से देश से बाहर भी पेमेंट करने की सुविधा भी शुरू हो गई है। भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow इंटरलिंकिंग शुरू हो चुकी है। यह G-20 की वित्तीय समावेशन प्राथमिकताओं के साथ जुडी है और तेज़, सस्ता और अधिक पारदर्शी सीमा पार भुगतान की सुविधा प्रदान करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपीआई ने बिजनेस चलाने की जटिलता, लागत और समय में कटौती के जरिए प्राइवेट कंपनियों के लिए बड़े अवसर खोल दिया है।

जन-धन योजना से पड़ा बड़ा फर्क

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों की संख्या में बड़ा उछाल आया। जहाँ मार्च 2015 में 14.72 करोड़ थी वहीं जून 2022 तक तीन गुना होकर 46.2 करोड़ हो गई है। इनमें से 56 फीसदी यानी 26 करोड़ से अधिक खातों की मालिक महिलाएँ हैं।

आसान हुई केवाईसी प्रक्रिया

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने केवाईसी (Know Your Customer) प्रक्रिया को आसान बना दिया है। इससे बैंकों की लागत कम हो गई है। बैंकों ने अपनी अनुपालन लागत 0.12 डॉलर से घटाकर 0.06 डॉलर कर ली है। लागत में कमी ने कम आय वाले ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवा को अधिक आकर्षक बना दिया।

गौरतलब है कि वित्तीय समावेशन के लिए जी-20 ग्लोबल पार्टनरशिप (GPFI) दस्तावेज विश्व बैंक ने वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधित्व वाले G-20 इंडिया प्रेसीडेंसी के मार्गदर्शन और इनपुट के साथ तैयार किया है। 

‘पाकिस्तान जिंदाबाद, इंडियन आर्मी बचा लो अपना सैनिक’: रेलवे पटरी पर मिला जवान का शव, पत्नी को मैसेज- आपके पति को खुदा के पास भेज दिया

हरियाणा के अंबाला कैंट में तैनात सेना के जवान पवन शंकर का शव बरामद हुआ है। वे 6 सितंबर 2023 से लापता थे। मूल रूप से यूपी के कानपुर के रहने वाले पवन घर से ड्यूटी ज्वाइन करने निकले थे। लेकिन ड्यूटी पर नहीं पहुँचे। इसी दौरान उनकी पत्नी को व्हाट्सएप पर एक मैसेज मिला। इसमें लिखा था, “आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है, पाकिस्तान जिंदाबाद।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पवन शंकर अंबाला कैंट में बतौर हवलदार तैनात थे। वह छुट्टी मनाने कानपुर स्थित अपने घर गए हुए थे। छुट्टी पूरी होने पर वह ड्यूटी ज्वाइन करने वापस अंबाला जा रहे थे। लेकिन न तो वह ड्यूटी में पहुँचे और न ही घरवालों को उनके बारे में कुछ पता चल पा रहा था। लगातार उनकी तलाश की जा रही थी।

इस मामले में अंबाला कैंट में पवन शंकर की यूनिट के सूबेदार की शिकायत पर स्थानीय पड़ाव थाने में गुमशुदगी का केस भी दर्ज हुआ था। इसी बीच 6 सितंबर की रात 11:39 पर पवन के नंबर से उनकी पत्नी को एक व्हाट्सएप मैसेज मिला था। इस मैसेज में लिखा था, “मैंने आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है। पाकिस्तान जिंदाबाद। इंडियन आर्मी को जो करना है वो कर ले। बचा लो अपने सैनिक को।” इसके बाद उनके व्हाट्सएप पर रात 11:42 बजकर पर लास्ट सीन दिखाई दिया।

मैसेज मिलने के बाद से पुलिस और इंटेलिजेंस जाँच कर रही थी। इसके बाद 7 सितंबर की शाम पवन शंकर का शव कैंट रेलवे स्टेशन से मोहड़ा के बीच पटरी से बरामद हुआ है। पहले रेलवे पुलिस इस शव को अज्ञात मानकर चल रही थी। लेकिन सेना के जवानों ने रेलवे पुलिस से संपर्क कर शव की पहचान की।

इस मामले में अंबाला के SHO जीआरपी धर्मवीर भारती ने कहा है कि शव मिलने की सूचना पवन के परिजनों को दी गई है। अब तक उनका मोबाइल नहीं मिल सका है। रेलवे पुलिस के अलावा सेना भी इस मामले में जाँच कर रही है। कहा जा रहा है कि जवान के सिर और गर्दन के पास गहरा घाव मिला है। मामले में कार्रवाई की जा रही है।

G20 शिखर सम्मलेन से पहले पूर्व PM मनमोहन सिंह भी हुए मोदी सरकार के मुरीद, कहा- भारत के लिए आशा अधिक, चिंता कम: आर्थिक महाशक्ति बनने का भी भरोसा

UPA सरकार में प्रधानमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में आज घरेलू राजनीति के लिए विदेश नीति और अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गई है। इसके अलावा, उन्होंने कई मुद्दों पर वर्तमान भाजपा सरकार की तारीफ की।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर नई विश्व व्यवस्था बदल-सी गई है। इस व्यवस्था को संचालित करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों से शांति की अपील करते हुए भारत ने अपने संप्रभु और आर्थिक हितों को पहले स्थान पर रखकर सही काम किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत के भविष्य के बारे में चिंतित होने की तुलना में आशावादी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से निर्मित संवैधानिक मूल्यों के साथ एक शांतिपूर्ण बड़े लोकतंत्र और एक बड़ी बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को अब विश्व स्तर पर बहुत अधिक सम्मान मिल रहा है।

ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका पर बोलते हुए देश के पहले अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान में डी-ग्लोबलाइजेशन और नए प्रकार के व्यापार प्रतिबंधों की बात हो रही है। ये मौजूदा ऑर्डर को बाधित कर सकते हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत के लिए नए अवसर भी खोल सकते हैं।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत बदलती विश्व व्यवस्था में एक अद्वितीय आर्थिक अवसर के मुहाने पर खड़ा है। एक बड़े बाजार और प्रचुर मानव और प्राकृतिक संसाधनों के साथ एक शांतिपूर्ण लोकतंत्र के रूप में भारत आने वाले दशकों में सेवाओं, विनिर्माण और उत्पादन पर जोर देकर दुनिया की एक आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।

बताते चलें कि भारत को विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सरकार पहले से ही प्रयासरत है। इसके कारण चीन की नींद उड़ी हुई है। विश्व की कई दिग्गज क्षेत्र की कंपनियाँ भारत में उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। वहीं, विश्व स्तर पर भारत जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन आदि में कटौती को लेकर भारत का स्टैंड साफ कर चुका है।

इस तरह एक दशक तक (2004-2014) तक देश के प्रधानमंत्री रहे एक विख्यात अर्थशास्त्री का यह बयान उस वक्त में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जब विश्व के 20 शक्तिशाली देशों के नेता जी-20 में शामिल होने के लिए दिल्ली में पहुँचना शुरू हो चुके हैं। इसे वर्तमान सरकार की नीतियों की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

अपने ही पैंट में लटक कर जेल में आत्महत्या: चाकू दिखा एयर होस्टेस का कर रहा था रेप, काट दिया था गला

एयर होस्टेस रुपल ओग्रे की हत्या के आरोप में जेल में बंद विक्रम अटवाल ने गुरुवार (7 सितंबर 2023) को मुंबई की जेल में आत्महत्या कर ली। मुंबई पुलिस ने जानकारी दी कि अटवाल जेल की जिस कोठरी में बंद था, उसमें उसने अपनी पैंट को फंदा बनाकर आत्महत्या की है।

सफाई कर्मचारी विक्रम अटवाल को मुंबई के मरोल इलाके में रहने वाली 23 साल की एयर होस्टेस की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसने रुपल के फ्लैट में जाकर उसका गला काट दिया था। इसके बाद उसे मुंबई की अंधेरी स्थित जेल में बंद रखा गया था।

रुपल ओग्रे छत्तीसगढ़ की रहने वाली थी। एयर इंडिया में प्रशिक्षण के लिए वह अप्रैल 2023 में मुंबई आई थी। मुंबई के मरोल में कृष्णलाल मारवाह मार्ग पर एनजी कॉम्प्लेक्स में उसने किराए पर फ्लैट ले रखा था। उसमें वह अपनी बहन और उसके प्रेमी के साथ रह रही थी। घटना से 8 दिन पहले दोनों छत्तीसगढ़ चले गए थे।

रविवार (3 सितंबर 2023) को रात रुपल का शव मिला था। उसका गला कटा हुआ था और शव बाथरूम में पड़ा हुआ था। इसके साथ ही चारों तरफ खून फैला हुआ था। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ऐक्टिव हो गई और घटना के 12 घंटे के भीतर 40 साल के विक्रम अटवाल को गिरफ्तार कर लिया।

रूपल ओग्रेे जिस सोसायटी में रहती थी, उसी में विक्रम अटवाल कचरा बटोरने और हाउस कीपिंग का काम करता था। वह पिछले एक साल से यह काम कर रहा था। पुलिस ने उसे सोमवार (4 सितंबर 2023) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना अपराध भी कबूल कर लिया।

पूछताछ में अटवाल ने पुलिस को बताया कि वह रूम की सफाई करने का बहाना बनाकर रूपल के कमरे में घुसा था। कहा जा रहा है कि कमरे में घुसने के बाद उसने रुपल को अकेली देखा और चाकू दिखाकर उससे बलात्कार करने की कोशिश की। रुपल ने इसका विरोध किया और खुद को उसके चुंगल से बचाने की कोशिश की।

इसके बाद विक्रम अटवाल ने रुपल का गला काट दिया और शव को बाथरूम में डाल दिया। इस दौरान उसके हाथ में चोट भी आई। अटवाल 11:30 से 1:30 बजे के बीच करीब दो घंटे तक रुपल के फ्लैट में था। इसके बाद उसने अपने कपड़े बदले और फर्श पर खून को साफ करके वहाँ से भाग निकला। उसकी करतूत CCTV कैमरे में कैद हो गई।

जब उसकी पत्नी ने चोट के बारे में पूछा तो उसने अपनी पत्नी से झूठ बोला। इसके बाद वह अपने घाव को दिखाने के लिए डॉक्टर के पास भी गया। शाम तक यह घटना सामने आई और अगले दिन उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ 8 सितंबर तक कोर्ट ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया। रिमांड खत्म होने के एक दिन पहले ही अटवाल ने आत्महत्या कर ली।

पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अटवाल ने 2 घंटे तक कमरे में क्या किया और हत्या से पहले वास्तव में क्या हुआ था। जिस चाकू से अटवाल ने रुपल की हत्या की थी, उस नौ इंच के चाकू और अपराध के समय आरोपित द्वारा पहने गए कपड़े को सोसाइटी के पास झाड़ियों से बरामद कर लिया गया है।

दरअसल, घटना का खुलासा परिवार के एक कॉल से हुआ। रुपल के परिजन उसे लगातार कॉल कर रहे थे, लेकिन वह फोन पिक नहीं कर रही थी। इसके बाद रुपल की चचेरी बहन ने अपने एक दोस्त को रुपल के फ्लैट पर देखने के लिए भेजा। जब वह दोस्त वहाँ पहुँचा तो देखा कि फ्लैट अंदर से लॉक है और डोरबेल का कोई जवाब नहीं दे रहा है।

इसके बाद घटना के बारे में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने डुप्लिकेट चाबी से फ्लैट को खोला गया तो रुपल का गला कटा हुआ और चारों तरफ खून फैला हुआ मिला। इसके बाद पुलिस ने इस घटना के बारे में रुपल के परिजनों को जानकारी दी और घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम बुलाकर जाँच शुरू की।

अटवाल पवई तुंगा गाँव में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहता था। वह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था और 12 साल पहले मुंबई आया था। वह सोसायटी में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। उनकी पत्नी भी सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती थी।

पुलिस अटवाल की मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए अंधेरी की हवालात में उनके साथ मौजूद अन्य आरोपियों का बयान दर्ज करेगी। इसके साथ ही अटवाल की पत्नी का भी बयान दर्ज करेगी कि यह कदम उठाने से पहले उसे कुछ बताया तो नहीं था।

कंगना रनौत के ‘साहस’ से पाकिस्तानी हिरोइन हैरान, कहा- मिलकर उसे दो थप्पड़ माारना चाहती हूँ: खुद साथी हीरो का ‘ब्याह बर्बाद’ करने को लेकर बदनाम रही है नौशीन शाह

पाकिस्तानी अभिनेत्री नौशीन शाह हाल ही में एक इंटरव्यू में भारतीय अभिनेत्री कंगना रनौत को न सिर्फ ‘चरमपंथी’ कहा बल्कि थप्पड़ मारने जैसी बात भी कह दी। दरअसल, वह कंगना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ दिए बयानों से आहत नजर आ रहीं हैं। हालाँकि इसे लोग नौशीन द्वारा कंगना पर कीचड़ उछालकर या उनके खिलाफ विवादित बयान देकर मशहूर होने की कोशिश मान रहे हैं।

नौशीन इंटरव्यू में 29 मिनट के बाद करीना की खूबसूरती और भारत के कलाकारों पर बात करते बोल रहीं थीं कि दोनों देशों के अभिनेताओं को एक-दूसरे का सम्मान कैसे करना चाहिए और फिर उन्होंने बीच में यह भी स्वीकार किया कि वह अभी तक किसी भी भारतीय अभिनेता या अभिनेत्री से नहीं मिली हैं, लेकिन वह कंगना से मिलना चाहती हैं और उन्हें दो थप्पड़ मारना चाहती हैं। ‘हद कर दी विद मोमिन साकिब’ वीडियो के यूट्यूब संस्करण में ‘थप्पड़’ शब्द को म्यूट कर दिया गया है, लेकिन नौशीन शाह के हाथ के इशारे से यह साफ़ जाहिर है।

क्या कहा नौशीन शाह ने

पाकिस्तानी अभिनेत्री नौशीन ने कहा, “जिस तरह से वह मेरे देश के बारे में बकवास कहती है, जिस तरह से वह पाकिस्तानी सेना के बारे में बहुत बकवास कहती है, मैं उसके साहस को सलाम करती हूँ। उन्हें ज्ञान नहीं है लेकिन वो देश की बात करती हैं, वो भी किसी और के देश की। अपने देश पर ध्यान केंद्रित करें, अपने अभिनय, अपने निर्देशन पर ध्यान केंद्रित करें, अपने विवादों और पूर्व-प्रेमियों और न जाने क्या-क्या पर ध्यान दें।”

नौशीन ने कहा कि वह जानना चाहेंगी कि कंगना को पाकिस्तानी सेना और उनकी खुफिया एजेंसियों के बारे में इतनी जानकारी कैसे है, जबकि पाकिस्तान में भी लोगों को उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

वहीं अपने इंटरव्यू में उन्होंने सवाल किया, “आप कैसे जानते हैं कि पाकिस्तान में लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है? आप पाकिस्तानी सेना के बारे में कैसे जानते हैं? आप हमारी एजेंसियों के बारे में कैसे जानते हैं? हम खुद नहीं जानते, एजेंसियाँ ​​हमारे देश में हैं, सेना हमारे देश की है, वो ये बातें हमसे साझा नहीं करते। वे रहस्य हैं, क्या वे नहीं हैं? 

हालाँकि, इसी इंटरव्यू में नौशीन ने कंगना की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा कि कंगना एक बेहतरीन और खूबसूरत अभिनेत्री हैं लेकिन जब दूसरों और दूसरे देश (पकिस्तान) का सम्मान करने की बात आती है तो मुझे खेद है, वह बहुत बुरी है।”

कंगना के प्रशंसकों ने बताया मशहूर होने की कोशिश

वहीं इस मौके पर कंगना के प्रशंसकों ने यूट्यूब वीडियो के कॉमेंट में लिखा, “वह कौन है? वह कंगना की वजह से मशहूर हो रही हैं। एक और टिप्पणी में तो लिखा था, “कंगना के नाम ने इस महिला को सुर्खियों में ला दिया। यह इसके करियर का मुख्य आकर्षण है।”

पब्लिसिटी के लिए सेलिब्रिटी के पीछे पड़ने की पुरानी लत

बता दें कि नौशीन शाह पहले भी विवादों में रहीं हैं। मामला नौशीन और उनके साथी यासिर हुसैन के बीच 2019 का है। जब यासिर ने नौशीन पर उनकी शादी में ‘बिन बुलाए मेहमान’ होने का आरोप लगाया था। बाद में नौशीन इस विवाद को भी भुनाने के लिए कहा, “मैं निमंत्रण के बिना भी सेलिब्रिटी शादियों में जाती हूँ, मैं शादियाँ ख़राब करती हूँ और मुझे यह पसंद है।”

हालाँकि, इस बयान के बाद यासिर नौशीन की टिप्पणी से नाराज हो गए और अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर नौशीन  चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह लोकप्रियता हासिल करने के लिए फिर से ऐसी घटिया रणनीति अपनाने की कोशिश करेंगी तो वह उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने नौशीन पर शादी की पार्टी ख़राब करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि जहाँ नौशीन को पाकिस्तान के बाहर कोई नहीं जानता वहीं कंगना अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए वैश्विक राजनीति और मामलों पर भी बोलने में काफी मुखर रही हैं। फिल्मों की बात करें तो वह जल्द ही चंद्रमुखी-2 में नजर आएँगी, जो अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। वह अपने निर्देशन में बनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की रिलीज का भी इंतजार कर रही हैं, जिसमें वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की भूमिका में नजर आएँगी। उनके पास आने वाली फिल्मों में तेजस भी है जिसमें वह वायुसेना पायलट की भूमिका में हैं।

कनाडा में अब दुर्गा मंदिर पर हमला, दीवारों पर लिखा- पंजाब इज नॉट इंडिया: पहले भी हिंदुओं के पूजा स्थलों को निशाना बना चुके हैं खालिस्तानी

खालिस्तानियों ने कनाडा में फिर से एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया है। अब ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिख दिए गए थे। इन नारों में प्रधानमंत्री मोदी को ‘आतंकी’ बताते हुए पंजाब को भारत से अलग बताया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खालिस्तानी आतंकियों ने गुरुवार (7 सितंबर, 2023) तड़के मंदिर को निशाना बनाया। स्थानीय निवासी जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने के फोटो, वीडियो सामने आए हैं। दीवारों पर ‘मोदी इज टेररिस्ट’ यानी ‘मोदी आतंकी है’ और ‘पंजाब इज नॉट इंडिया’ यानी ‘पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है’ लिखा देखा जा सकता है।

हिंदुस्तान टाइम्स ने मंदिर समिति के सदस्य रोहित के हवाले से कहा है कि अब इन नारों को हटा दिया गया है। खालिस्तानी आतंकियों की इस गतिविधि पर मंदिर समिति का कहना है कि मंदिर पूजा करने के स्थान होते हैं न कि राजनीतिक गुटों और विचारधाराओं की लड़ाई का मैदान। किसी भी प्रकार की नफरत स्वीकार करने योग्य नहीं है। कनाडा के सरे में रहने वाले फ्रेंड्स ऑफ कनाडा एन्ड इंडिया फाउंडेशन के सदस्य मनिंदर सिंह गिल ने इस घटना को कायराना हरकत करार दिया है।

गौरतलब है कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी लगातार पैर पसारते जा रहे हैं। 8 सितंबर को खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने वैंकूवर शहर में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी दी है। इस धमकी के बाद भारतीय उच्चायोग ने कनाडाई विदेश मंत्रालय को खालिस्तानी आतंकियों के चलते उत्पन्न खतरे के बारे में सूचित किया था।

कनाडा में मंदिर पर पहले भी हो चुके हैं हमले

बता दें कि कनाडा में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने और तोड़फोड़ की इस साल हुई यह चौथी घटना है। इससे पहले सरे शहर में ही 12 अगस्त, 2023 को खालिस्तानियों ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़ की थी। मंदिर के गेट पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के पोस्टर चिपका दिए थे। इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था।

इससे पहले इसी साल 31 जनवरी को ही कनाडा के ब्रैम्पटन में एक प्रमुख हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। इसके ऊपर भारत-विरोधी भड़काऊ बातें लिखी गई थीं। इसके बाद अप्रैल में भी कनाडा के ओंटारियो में एक और हिंदू मंदिर को खालिस्तानियों ने निशाना बनाया था। भारत-विरोधी नारे लिखे गए थे। इस मामले में कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया था, जिसमें दो लोगों को मंदिर की दीवार पर स्प्रे पेंट के जरिए भारत विरोधी नारा लिखते हुए देखा गया था।

हज हाउस बनाना सेकुलर काम: बॉम्बे हाईकोर्ट, हिंदूवादी नेता ने पुणे में सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण को की थी गिराने की माँग

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (7 सितंबर) को समस्त हिंदू अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे की पुणे में निर्माणाधीन हज हाउस को गिराने की माँग वाली याचिका खारिज कर दी। इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि हज हाउस का निर्माण एक ‘धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है, धार्मिक नहीं’।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर वाली कोर्ट की बेंच ने एकबोटे से कहा, “आपको धार्मिक गतिविधि और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि में राज्य की संलिप्तता के बीच अंतर करना चाहिए। हज हाउस का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। यह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है। आप खुद को भ्रमित न करें।”

बेंच ने देखा कि इस मामले में मिलिंद एकबोटे की कोई व्यक्तिगत हित नहीं है तो उसने रिट याचिका को जनहित याचिका (पीआईएल) में बदल दिया। दरअसल, कोर्ट में हिंदू नेता एकबोटे के वकील ने दलील थी कि केवल एक समुदाय को ही फायदा कैसे मिलता है? पंढरपुर में लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया जाता है।

हज हाउस का निर्माण धार्मिक गतिविधि नहीं

समस्त हिंदू अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे के वकील कपिल राठौड़ ने अपने मुवक्किल के पक्ष में दलील दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में ‘जमीन के इस्तेमाल में बदलाव’ हुआ है, क्योंकि यह जगह पुणे के कोंढवा क्षेत्र के और उसके आसपास के लोगों को बुनियादी सुविधाएँ देने के लिए आरक्षित था। उन्होंने तर्क दिया कि हज हाउस के निर्माण के लिए जमीन का इस्तेमाल बदल दिया गया।

एडवोकेट कपिल राठौड़ ने कहा कि हज हाउस का निर्माण ‘धार्मिक गतिविधि’ के तहत आता है और यह वर्तमान परिदृश्य में स्वीकार्य नहीं है। एडवोकेट राठौड़ ने कोर्ट से कहा, “केवल एक समुदाय को फायदा क्यों मिले, जबकि पंढरपुर में लाखों श्रद्धालु आते है। इन श्रद्धालुओं के लिए कुछ नहीं किया गया।”

वहीं, पुणे नगर निगम की ओर से पेश वकील अभिजीत कुलकर्णी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा कि जमीन का इस्तेमाल नहीं बदला गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदाय के लोगों को उनकी सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए यहाँ जगह मिलती है।

इस दौरान वकील कुलकर्णी ने कोर्ट का ध्यान हिंदू नेता के वकील राठौड़ की इस दलील पर दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा कि हज हाउस की इमारत की दो मंजिलों का निर्माण पहले ही किया जा चुका था। इसके बाद कोर्ट ने उनसे याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने को कहा।

बेंच ने वकील कपिल राठौड़ से कहा कि वह सिर्फ हज हाउस मामले पर ध्यान केंद्रित करें। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने उनसे सवाल किया, “जमीन के इस्तेमाल में बदलाव कहाँ हुआ है? यदि आप मंदिर बनाएँगे तो क्या इसका इस्तेमाल हर कोई करेगा? कृपया पहले एक मामला बनाएँ और फिर बताएँ कि हज हाउस का निर्माण नहीं किया जा सकता है।”

बेंच ने कहा, “आपने कहा कि जमीन के इस्तेमाल में बदलाव हुआ है। अपनी दलीलों में से कोई एक पैराग्राफ ऐसा बताएँ। इसमें कहा गया है कि यह ‘कानून की स्थापित स्थिति’ थी कि धार्मिक गतिविधियों में राज्य की संलिप्तता की अनुमति नहीं है।”

G20 के लिए वायुसेना ने रोका ‘त्रिशूल’, राफेल-सुखोई करेंगे दिल्ली के आसमान की पहरेदारी: भारत ने अमेरिका से माँगे ‘हंटर किलर’ ड्रोन

दिल्ली में 9 और 10 सितंबर 2023 को G-20 शिखर सम्मेलन होना है। इसकी सुरक्षा में राफेल, सुखोई समेत अन्य फाइटर विमान तैनात किए गए हैं। वहीं भारत ने अमेरिका से 31 हंटर किलर ड्रोन के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया है।

TOI की रिपोर्ट अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने कुछ दिन पहले रिमोटली पॉयलेटेड एयरक्रॉफ्ट सिस्टम वाले 31 ‘हंटर किलर’ की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार को एलओआर (Letter of Request) यानी अनुरोध पत्र भेजा है। इस पत्र में MQ9B रीपर या प्रीडेटर-B के हथियार पैकेज, मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य उपकरणों का जिक्र किया गया है।

इस पत्र को लेकर अब बायडेन सरकार विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कॉन्ग्रेस को एक-दो महीने के भीतर जवाब देगा। इसके बाद भारत और अमेरिका आपस में बातचीत कर ‘हंटर किलर’ ड्रोन के दाम करेंगे। भारत सरकार ने जिन ड्रोन की खरीदी का प्रस्ताव दिया है, उसमें 15 सी गार्डियन नौसेना को और 16 स्काई गार्डियन थल सेना और वायुसेना को दिए जाएँगे। रक्षा मंत्रालय ने 15 जून को कहा था कि इस सौदे में करीब 3.1 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा।

G-20 की सुरक्षा में तैनात फाइटर जेट

भारत सरकार G-20 शिखर सम्मेलन की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतना चाहती। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान-चीन सीमा पर चल रहे ‘त्रिशूल’ अभ्यास को फिलहाल रोक दिया है। साथ ही इस अभ्यास में शामिल राफेल, मिराज, चिनूक, अपाचे, गरुण समेत अन्य फाइटर जेट्स को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

मोदी-बायडेन करेंगे बैठक

G-20 में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) शाम करीब 6:55 पर भारत पहुँचेगे। इसके बाद वह शाम 7:30 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसके बाद बायडेन और मोदी साथ में डिनर करेंगे।

भारत आएगा छत्रपति शिवाजी का ‘वाघ नख’, इसी से अफजल खान को मौत के घाट उतारा था: गिफ्ट में लेकर चले गए थे अंग्रेज

छत्रपति शिवाजी महाराज के खंजर वाघ नख (Wagh Nakh) की घर वापसी होने वाली है। उन्होंने इसका ही उपयोग कर 1659 में बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को मौत के घाट उतारा था। बाद में अंग्रेज गिफ्ट के तौर पर इसे ब्रिटेन लेकर चले गए। लेकिन अब खबर आ रही है कि ब्रिटेन इसे भारत को लौटाने के लिए तैयार हो गया है।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार सितंबर 2023 के आखिर में इसे वापस भारत लाने की आधिकारिक प्रक्रिया के लिए लंदन जाएँगे। वहाँ वे विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। इसी संग्रहालय में ये नख रखा हुआ है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो ‘वाघ नख’ इसी साल देश में आ जाएगा।

जगदंबा तलवार के भी वापस आने के आसार

रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने बताया, “हमें ब्रिटेन के अधिकारियों से एक पत्र मिला है। इसमें कहा गया है कि वे हमें छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख वापस देने पर राजी हो गए हैं। हिंदू कैलेंडर के आधार पर हम इसे उस दिन वापस पा सकते हैं, जिस तिथि को शिवाजी ने अफ़ज़ल खान को मार डाला था। कुछ अन्य तारीखों पर भी विचार किया जा रहा है और वाघ नख को वापस लाने के तौर-तरीकों पर भी काम किया जा रहा है।”

मंत्री मुनगंटीवार ने आगे कहा, “एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा, हम अन्य वस्तुओं जैसे कि शिवाजी की जगदंबा तलवार को भी देखेंगे, जो यूके में प्रदर्शित है और इन्हें वापस लाने के लिए भी कदम उठाएँगे। तथ्य यह है कि वाघ पंजा वापस आ रहा है। यह महाराष्ट्र और उसके लोगों के लिए एक बड़ा कदम है। अफजल खान की हत्या की तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के आधार पर 10 नवंबर है, लेकिन हम हिंदू तिथि कैलेंडर के आधार पर तारीखें तय कर रहे हैं।” उन्होंने ये भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख इतिहास का अमूल्य खजाना है और इनसे राज्य के लोगों की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं।

वाघ नख लेने कौन जाएगा लंदन

सांस्कृतिक मंत्रालय ने बताया है कि मंत्री मुनगंटीवार के साथ संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख सचिव डॉ. विकास खड़गे और राज्य के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के निदेशक डॉ. तेजस गर्गे लंदन का दौरा करेंगे। यह तीन सदस्यीय टीम की 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक छह दिनों की यात्रा के लिए ब्रिटेन जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि स्टील से बने वाघ नख में चार पंजे होते हैं जो एक पट्टी पर लगे होते हैं और पहली तथा चौथी ऊँगलियों के लिए दो छल्ले होते हैं।

साभार टाइम्स ऑफ इंडिया

कैसे भारत से ब्रिटेन पहुँचा वाघ नख

महाराष्ट्र के अधिकरियों के मुताबिक, वाघ नख मुट्ठी में पहने जाने वाला अपनी तरह का पहला पंजा खंजर है। ये बड़ी बिल्लियों यानी शेर, बाघ, चीते के पंजों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। ये अंगुली के जोड़ों पर पहना जाता है। ये हथेली के नीचे छुपा कर पहना जा सकता है। इसमें चार ब्लेड होते हैं जो दस्तानों या क्रॉस बार में फिक्स होते हैं।

ये दुश्मन की स्किन और माँसपेशियों को चीर देने के लिए डिजाइन किया गया होता है। ये वाघ नख सतारा कोर्ट में शिवाजी के वंशजों के पास था। 1818 में अंग्रेज अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ को यह उपहार के तौर पर मिला था। डफ को उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी ने सतारा स्टेट का रेजिडेंट राजनीतिक एजेंट बनाकर भेजा था। उसने सतारा की कोर्ट में 1818 से लेकर 1824 तक अपनी सेवाएँ दी थी। इसके बाद वो वाघ नख अपने साथ ब्रिटेन ले गया। वहाँ उसके वंशजों ने इस हथियार को विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय को दान कर दिया।