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अंकित के प्यार में मौलवी की बेटी ने छोड़ा घर, पहले मंदिर में की शादी; लौटी तो चाँद बन अंकित को करना पड़ा निकाह: पीड़ित पिता ने की धर्मांतरण की शिकायत

उत्तर प्रदेश के कानपुर से धर्मांतरण का एक मामला सामने आया है। कथित तौर पर एक स्थानीय मौलवी की बेटी पहले अंकित नाम के हिंदू लड़के के साथ घर से भागी। मंदिर में शादी की। कोर्ट में शादी का रजिस्ट्रेशन करवाया। दावा है कि जब दोनों घर लौटे तो लड़के का जबरन इस्लामी धर्मांतरण करवाकर दोबारा लड़की से निकाह करवाया गया।

अंकित के पिता ने बेटे के जबरन धर्मान्तरण को लेकर पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि करीना से निकाह के बाद उनके बेटे अंकित का नाम चाँद भाई नाम रख दिया गया है। अंकित का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह​ इस्लामी तौर-तरीके से करीना से निकाह करता दिख रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र का है। यहाँ नाथूपुर गाँव के रहने वाले अंकित की बचपन से ही अपने पड़ोस में रहने वाली करीना से दोस्ती थी। दोस्ती बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। करीना के अब्बा का नाम शमीम है। वह मौलवी है। कथित तौर पर दोनों ने शादी के लिए अपने-अपने परिजनों को मनाने की बहुत कोशिश की। लेकिन अलग धर्म की वजह से घर वाले इस रिश्ते का विरोध करते रहे। आखिरकार कातिब 6 महीने पहले अंकित और करीना घर छोड़ कर एक साथ कहीं चले गए।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान दोनों ने हिन्दू विधि-विधान से पहले मंदिर शादी और बाद में कोर्ट मैरिज की। लेकिन जब अंकित अपने घर लौट कर करीना के साथ आया तो परिजनों ने उसे रखने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि इस बीच कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अंकित से सम्पर्क किया। उन्होंने अंकित को धर्मान्तरित करवा दिया और फिर दोबारा करीना से उसका निकाह करवाया। इस निकाह का बाकायदा वीडियो भी बनवाया गया जिसमें अंकित सिर पर टोपी रख कर बैठा दिख रहा है।

2 सितंबर से यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में काजी निकाह करवा रहा है। निकाह में गवाही मोहम्मद इरफ़ान और मोहम्मद शाकिर आलम ने दी है। निकाह के मेहर के तौर 51786 रुपए दिए गए हैं। बाद में काजी ने अंकित से भी करीना को कबूल करने के बावत 3 बार सवाल किया, जिस पर जवाब हाँ में आया। हालाँकि इस सवाल के दौरान अंकित हँस रहा था।

वीडियो वायरल होने के बाद अंकित के पिता ने पुलिस में अपने बेटे के धर्मान्तरण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने लिखा है कि उनके बेटे अंकित का नया नाम चाँद भाई रख दिया गया है। बेटे को वापस दिलाने की गुहार लगाते हुए अंकित के पिता ने बताया कि वो करीना को अपनी बहू के तौर पर स्वीकार करने को तैयार हैं। इस मामले में SHO चौबेपुर इंस्पेक्टर संजय ने मीडिया को बताया कि दोनों में पहले से प्रेम संबंध हैं। साथ ही उन्होंने धर्मान्तरण के आरोपों और वायरल वीडियो की जाँच जारी होने की जानकारी दी।

कॉन्ग्रेस को ‘भारत माता की जय’ से भी चिढ़, राजस्थान में भड़क गईं MLA: कहा- यह अनुशासनहीनता, जयपुर बैठक में चले लात-घूँसे

कॉन्ग्रेस ने विपक्षी दलों का जो गुट बनाया है उसका नाम INDIA रखा है। लेकिन, उसके खुद के नेता हों या सहयोगी दल के, उनकी ​भारत और हिंदू घृणा बाहर आ ही जाती है। एक ओर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि सनातन धर्म को खत्म करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कॉन्ग्रेस नेता आराधना मिश्रा ‘भारत माता की जय’ से भड़क गईं।

भारत माता के जयकारे राजस्थान के जयपुर में आदर्श नगर ब्लॉक कॉन्ग्रेस की 4 सितंबर 2023 को हुई बैठक में लगे। लेकिन आराधना मिश्रा इससे नाराज हो गईं। उन्होंने इसे अनुशासनहीनता बताया। कहा कि नारे लगाने तो कॉन्ग्रेस जिंदाबाद कहो। इस बैठक में कॉन्ग्रेसियों के बीच आपस में ही लात-घूँसे भी चले।

राजस्थान में इसी साल चुनाव होने हैं। आराधना मिश्रा बतौर पर्यवेक्षक बैठक में मौजूद थीं। उन्हें मोना तिवारी के नाम से भी जाना जाता है। वे उत्तर प्रदेश की रामपुर खास से कॉन्ग्रेस की विधायक हैं। उनके पिता वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी हैं। तिवारी राज्यसभा के लिए राजस्थान से ही चुने गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को जयपुर के आदर्श नगर ब्लॉक के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई गई थी। मीटिंग में कॉन्ग्रेस पर्यवेक्षक आराधना मिश्रा और जिलाध्यक्ष आर आर तिवारी भी मौजूद थे। कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान गुलाम मुस्तफा को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने का कॉन्ग्रेस नेता अफजल ने विरोध किया। उन्होंने गुलाम मुस्तफा को पूर्व भाजपाई बताया। इसके बाद दोनों पक्षों में तनातनी हो गई।

दोनों पक्षों में लात-घूँसे चलने की भी खबर है। मारपीट में घायल कार्यकर्ताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता गुलाम मुस्तफा सहित 4 लोगों पर FIR दर्ज की है। चोटिल लोगों की तरफ से ब्लॉक अध्यक्ष गुलाम मुस्तफा व उनके 3 साथियों के खिलाफ केस दर्ज करववया गया है। इस पूरे विवाद के पीछे आदर्श नगर के कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान के समर्थकों और विरोधियों का मनमुटाव बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

बताया जा रहा है कि इसी बवाल के बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। इससे आराधना मिश्रा भड़क गईं। कार्यकर्ताओं से केवल कॉन्ग्रेस जिंदाबाद के नारे लगाने को कहा।

राजस्थान के राजसमंद से भाजपा सांसद दिया कुमारी ने इस हंगामे का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, “देश का अपमान करना कॉन्ग्रेस की आदत बन चुकी है। जयपुर में भारत माता के जयकारे लगाने को कॉन्ग्रेस पर्यवेक्षक आराधना मिश्रा अनुशासनहीनता बता रही हैं। मैं, मेरा और अहंकार समाहित घमंडिया कॉन्ग्रेस का असली चेहरा सामने आ चुका है।”

कल्पनाओं में रूस का द्वीप भी खा गया ड्रैगन, नए नक्शे को मॉस्को ने किया खारिज: भारत पहले ही बता चुका है बेतुका दावा

रूस और चीन को सदाबहार मित्र माना जाता है। पर ऐसा लगता है कि अब दोनों के संबंधों में पुरानी गर्मजोशी नहीं रही। पहले चीन ने अपने नए नक्शे में रूस के द्वीप को शामिल किया। अब मॉस्को ने इस नक्शे को खारिज कर दिया है।

अपने काल्पनिक नक्शे में चीन ने भारत को कुछ हिस्सों पर दावा दिखाया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे चीन की पुरानी आदत बताते हुए कहा था कि बेतुके दावों से किसी दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता। इसी तरह इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, नेपाल और ताइवान भी चीन के नए नक्शे का विरोध कर चुके हैं।

दरअसल चीनी सरकार के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ‘काल्पनिक’ नक्शा शेयर किया था। साथ ही लिखा था कि प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 28 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चीन का नया ‘स्टैंडर्ड नक्शा’ लॉन्च किया है। इसमें भूमि और समुद्र के उन क्षेत्रों को चीनी के हिस्से के तौर में दिखाया गया है, जिन्हें ये देश अपना मानते हैं।

रूस को इस बात से एतराज है कि वर्षों पहले बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप पर चीन और उसके बीच विवाद सुलझा लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा पेश कर रहा है। चीन के जारी किए गए मानक नक्शे में बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को पूरी तरह से चीनी क्षेत्र के तौर दिखाया गया है।

बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप पर चीन-रूस आमने- सामने

चीन (China) ने हाल ही में जारी अपने नए नक़्शे में रूस के उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को भी शामिल किया है। गौरतलब है कि इस द्वीप को लेकर दोनों देशों के बीच पहले ही समझौता हो चुका है। इसके मुताबकि इस द्वीप पर रूस का भी हिस्सा है, लेकिन चीन ने नए नक़्शे में पूरे द्वीप को अपना बता डाला है।

चीन और रूस ने 2005 में इस विवाद को सुलझाया था। 2008 तक विवादित द्वीप का विभाजन पूरा हो गया। फिर भी नक्शे में चीन ने इस क्षेत्र पर अपना दावा किया है। रूस ने नए नक्शे को खारिज करते हुए यह बात दोहराई है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जख़ारोवा ने कहा है कि 15 साल पहले द्विपक्षीय समझौतों से द्वीप पर स्वामित्व के सवाल को सुलझा लिया गया था। उन्होंने कहा कि साल 2005 में हुए समझौते के मुताबिक बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को दोनों देशों के बीच बाँटा गया था, लेकिन चीन ने नए नक्शे में 135 वर्ग मील द्वीप पर अपना दावा किया है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों ने कई सालों की मेहनत के बाद सीमा विवाद को सुलझाया था। इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों को

ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया को भी एतराज

चीन के नए नक़्शे में किए दावे पर ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने भी एतराज जताया था। उन्होंने कहा, ”ताइवान को डराने, धमकाने के लिए चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है।” वहीं वियतनाम ने कहा था कि यह नक्शा स्प्रैटली और पारासेल द्वीपों पर उसकी संप्रभुता और उसके जल क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।

फिलीपींस ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान जारी कर विरोध जताया था। फिलीपींस ने बयान में कहा था, “फिलीपींस के समुद्री क्षेत्रों पर चीन की कथित संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र को वैध बनाने के इस नवीनतम प्रयास का अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के तहत कोई आधार नहीं है।”

दक्षिण चीन सागर के अपने इलाकों पर चीनी अधिकार दिखाने के बाद मलेशिया ने प्रोटेस्ट नोट भेजने की बात कही थी। इस सागर पर चीन के दावे को ताइवान, फिलीपीन्स, वियतनाम, मलेशिया के साथ ही ब्रूनेई भी ख़ारिज करता है। यही वजह है कि अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना के पोत लगा रखे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते में आवाजाही की आजादी बनी रहे।

संतों की सभा के बाद गुजरात के सालंगपुर मंदिर से हटाए गए विवादित चित्र, स्वामी सहजानंद के सेवक के तौर पर प्रदर्शित किए गए थे हनुमानजी

गुजरात के सालंगपुर मंदिर की दीवालों पर बने हनुमानजी के विवादित चित्रों को हटा दिया गया है। सोमवार (4 सितंबर 2023) को इसे हटाने का निर्णय संतों और हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया था। बैठक के बाद वड़ताल स्वामीनारायण संस्था विवादित चित्रों को 5 सितंबर (मंगलवार) की सुबह तक हटाने पर सहमत हो गई थी। अब उस स्थान पर नए चित्रों को लगाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंदिर प्रशासन ने सूर्योदय से पूर्व विवादित चित्रों को हटाने के वादे पर अमल किया। इस दौरान पुलिस ने भी सुरक्षा के इंतजाम किए थे। देर रात इन चित्रों को हटाने से पहले लाइटें बंद कर दी गई थी। साथ ही दीवालों के आगे पर्दे लगा दिए थे। इन चित्रों के चलते पूरे गुजरात में विवाद खड़ा हो गया था। गौरतलब है कि सालंगपुर मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के नीचे बने भित्तिचित्रों में महावीर बजरंगबली को सहजानंद स्वामी के सेवक के रूप में चित्रित किया गया था।

एक दिन पहले ही बन गई थी सहमति

बताते चलें कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) की कोशिशों के बाद सोमवार (4 सितंबर) को अहमदाबाद में संतों की एक सभा हुई थी। यह सभा शिवानंद आश्रम में हुई जो लगभग करीब 2 घंटे तक चली थी। इस बैठक में विवाद को खत्म करने पर आपसी सहमति बन गई। सहमति के तौर पर अगले दिन सूर्योदय से पहले सभी विवादित चित्रों को हटाना तय हुआ था। संत परमानंद स्वामी ने प्रेस वार्ता में स्वामीनारायण संप्रदाय को वैदिक सनातन धर्म का अंग बताया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि इसके सभी भक्त व संत वैदिक परंपराओं, पूजा विधियों और प्रथाओं का सम्मानपूर्वक पालन करते हैं।

परमानन्द स्वामी ने कहा था कि हिंदू समाज का हिस्सा होने के चलते स्वामीनारायण संप्रदाय समाज की भावनाओं को चोट नहीं पहुँचाना चाहता। बकौल परमानन्द स्वामी विश्व हिंदू परिषद हिंदू समाज में सद्भाव बनाए रखने और हिन्दुओं की एकता के लिए प्रतिबद्ध है।

परमानन्द स्वामी ने बैठक को सार्थक बताते हुए सभी से समाज के सौहार्द को बनाए रखने की अपील के साथ मनमुटाव पैदा करने वाले बयानों से परहेज करने के लिए कहा था। इसी विवाद पर 4 सितम्बर को ही गुजरात के ही गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और गृहमंत्री हर्ष संघवी की मौजूदगी में साधु-संतों और हिंदू नेताओं की बैठक हुई थी। इस बैठक में भी विवाद को जल्द से जल्द निपटाने पर सहमति बनी थी। अंततः अब इस पर विवाद पर पूर्ण विराम लग गया है।

‘सनातन को मिटा देना चाहिए, बार-बार बोलता रहूँगा’: विरोध के बाद भी उदयनिधि स्टालिन के वही तेवर, ममता बनर्जी ने किया किनारा, कहा – सनातन का करती हूँ सम्मान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बीच उदयनिधि ने एक बार फिर कहा है कि वह सनातन धर्म के खिलाफ बोलते रहेंगे। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उदयनिधि अभी छोटे हैं। इसलिए हो सकता है उन्होंने ऐसा बयान दिया हो। साथ ही कहा है कि वह सनातन धर्म का सम्मान करती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा है, “मैंने जो इससे पहले कहा था वही बोलता रहूँगा। मैंने अपने भाषण में कहा था कि मेरा बयान कई लोगों को असहज कर देगा और यह सच हो गया। सनातन ने महिलाओं को गुलाम बनाया। वहीं द्रविड़वाद था ने बेड़ियों को तोड़ने का काम किया।”

अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने आगे कहा है, “मैंने केवल इतना कहा था कि हमें सनातन धर्म के सिद्धांतों का विरोध करना चाहिए। मैं फिर से कह रहा हूँ कि हमें ऐसे सिद्धांतों को मिटा देना चाहिए। लेकिन यह हास्यास्पद है कि कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर यह कह दिया कि मैंने नरसंहार करने की बात कही थी।” उदयनिधि स्टालिन ने सवाल करते हुए कहा है, “तमिलनाडु में ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि द्रविड़वाद को खत्म कर देना चाहिए। क्या इसका मतलब यह है कि वे सभी डीएमके कार्यकर्ताओं को मारना चाहते हैं?”  

यही नहीं, उदयनिधि ने अपने बयान की तुलना पीएम मोदी से करते हुए कहा है, “प्रधानमंत्री मोदी अक्सर कॉन्ग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं। क्या उसका मतलब यह है कि वो सभी कॉन्ग्रेसियों को मार डालना चाहते हैं? मैंने सिर्फ एक विचारधारा का ही विरोध किया था। सनातनम ​​पुराने सिद्धांतों पर जोर देता है जबकि द्रविड़वाद परिवर्तन की वकालत करता है। एक समय ऐसा भी था, जब महिलाओं को शिक्षा से वंचित कर दिया जाता था और उन्हें ब्लाउज पहनने की अनुमति नहीं थी। लेकिन फिर हम बदलाव लेकर आए।”

ममता बनर्जी ने उदयनिधि स्टालिन को बताया छोटा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा है, “मैं तमिलनाडु और दक्षिण भारत के लोगों का बहुत सम्मान करती हूँ। स्टालिन का भी सम्मान करती हूँ। लेकिन मेरा सभी विनम्र अनुरोध है कि सभी का सम्मान करें। हर धर्म की अलग-अलग भावनाएँ होती हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है। मैं सनातन धर्म का सम्मान करती हूँ।”

ममता ने आगे कहा है, “हम जानते हैं कि ऋग्वेद, अथर्ववेद व अन्य सभी वेद उपासना, आराधना और वंदना से मिले हैं। मेरी सरकार बहुत सारे पुरोहितों को पेंशन देती है। वे धार्मिक कार्यों का आयोजन करते हैं। सिद्धिविनायक मंदिर महाराष्ट्र और पूरे देश में बहुत लोकप्रिय है। इसी तरह दुर्गा पूजा लोकप्रिय है। हमें ऐसे किसी भी मामले में नहीं बोलना चाहिए जिससे लोगों के किसी भी वर्ग को ठेस पहुँचे। उदयनिधि अभी जूनियर हैं इसलिए हो सकता है कि उन्हें यह पता न हो। लेकिन अपनी तरफ से, मैं यह कह रही हूँ कि उन्हें हर धर्म का सम्मान करना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने उदयनिधि स्टालिन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की थी। साथ ही इस बयान को I.N.D.I.A. गठबंधन से अलग बताया था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 2 सितंबर को कहा था कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए। वह सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

अंकित का जबरन धर्मांतरण करा बनाया चाँद मोहम्मद: फरीना से की थी हिंदू रीति-रिवाज से शादी, अब्बा शमीम ने करा दिया निकाह

उत्तर प्रदेश के कानपुर में धर्मांतरण का चौंकाने मामला सामने आया। यहाँ अंकित नामक युवक का आरोप है कि उसने मुस्लिम लड़की से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। लेकिन फिर लड़की के अब्बा ने उसका जबरन धर्मांतरण करा निकाह करा दिया। अंकित के पिता का आरोप है कि लड़की के अब्बा ने उनके बेटे का नाम चाँद मोहम्मद रख दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के नाथूपुर गाँव का है। पीड़ित युवक अंकित और उसकी पत्नी फरीना दोनों एक ही गाँव के हैं। दोनों बचपन से एक-दूसरे से प्यार करते थे। लेकिन दोनों को लगता था कि उनके घरवाले शादी के तैयार नहीं होंगे। ऐसे में उन्होंने करीब 6 महीने पहले घर से भाग गए थे। फिर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया था और वापस लौट आए थे। अंकित के परिजनों ने भी फरीना को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था।

अब अंकित और फरीना का एक वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अंकित और फरीना निकाह पढ़ते नजर आ रहे हैं। इसमें निकाह पढ़ते हुए दोनों एक दूसरे के साथ निकाह कबूलने की बात कहते सुने जा सकते हैं। हालाँकि, अब अंकित का आरोप है कि लड़की के घरवालों ने उसका जबरन धर्मांतरण कराकर निकाह कराया है।

अंकित के पिता का कहना है कि बेटे के जबरन धर्मांतरण और निकाह को लेकर उन्होंने पुलिस से लिखित शिकायत की है। उनका आरोप है कि लड़की का अब्बा शमीम मौलवी है। उसने ही अंकित का धर्मांतरण कराकर उसका नाम चाँद मोहम्मद रखा। फिर अपनी लड़की से निकाह करा दिया। अंकित के पिता ने यह भी कहा है कि उनके बेटे और फरीना ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। इसलिए वह फरीना को स्वीकार करने के लिए तैयार थे। लेकिन इसके बाद शमीम ने जबरन धर्मांतरण करा दिया।

इस पूरे मामले में हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। वहीं चौबेपुर थाना प्रभारी संजय पांडे का कहना है कि वीडियो हाल ही में वायरल हुआ है। मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच के लिए एक टीम गाँव भेजी गई थी। अंकित और फरीना की शादी और फिर निकाह की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने बताया कि मुस्लिम लड़की की जिद के बाद अंकित ने धर्मांतरण किया है।

हालाँकि, गाँव में अंकित और फरीना दोनों नहीं मिले। वहीं उनके परिजनों का कहना है कि दोनों से उनका कोई वास्ता नहीं है। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

हमेशा ऑन ड्यूटी… 9 सालों में PM मोदी ने एक भी दिन नहीं ली काम से छुट्टी, RTI से खुलासा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सोशल मीडिया पर कई चीजें वायरल होती रहतीं हैं। इसमें उनके छुट्टी न लेने को लेकर भी दावा किया जाता रहा है। अब आरटीआई (RTI) में खुलासा हुआ है कि देश की सत्ता सँभालने के बाद से पीएम मोदी ने एक भी छुट्टी नहीं ली है। यानी कि वह बतौर पीएम बीते 9 साल से अधिक समय से लगातार काम कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता प्रफुल्ल पी शारदा ने 31 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में अर्जी दाखिल कर पीएम मोदी की छुट्टियों से जुड़ी जानकारी माँगी थी। इसमें उन्होंने दो सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में कितने दिन उपस्थित रहे? दूसरा सवाल था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक वह विभिन्न कार्यक्रमों में कितने दिन उपस्थित रहे?

इस आरटीआई के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जवाब देकर कहा गया है कि पीएम मोदी हर समय ऑन ड्यूटी पर रहते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक उन्होंने एक भी छुट्टी नहीं ली है। वहीं प्रधानमंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े सवाल के जवाब में कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट में पीएम मोदी के कार्यक्रम से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध है।

गौरतलब है कि इससे पहले साल 2016 में भी आरटीआई दाखिल कर प्रधानमंत्री कार्यालय से पीएम की छुट्टी से जुड़ी जानकारी माँगी गई थी। तब भी PMO ने अपने जवाब में कहा था कि पीएम मोदी ने एक भी छुट्टी नहीं ली। वह हमेशा ड्यूटी में रहते हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दी गई यह जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर की है। साथ ही हैशटैग के साथ लिखा है, “माई पीएम-माई प्राइड” यानि कि मेरा प्रधानमंत्री-मेरा अभिमान।

वहीं केंद्रीय आयुष और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने लिखा है, “जब कर्म की पूजा होती है तब देश समृद्ध होता है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सभी के लिए इसका उदाहरण हैं।”

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तेलंगाना के गडवाल से विधायक डीके अरुण ने एक्स पर लिखा है, “कार्यालय में अनुपस्थित दिनों की संख्या जीरो है। यही कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने पहले संबोधन में खुद को प्रधानमंत्री की जगह ‘प्रधान सेवक’ कहा था।”

बर्लिन में बन कर तैयार हुआ जर्मनी का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर: दीपावली में विराजेंगे भगवान, 50 साल पहले नौकरी के लिए पहुँचे इस शख्स ने कर दिया कमाल

यूरोपीय देश जर्मनी में 20 साल की मेहनत के बाद हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। राजधानी बर्लिन में बना भगवान श्रीगणेश का यह मंदिर 70 वर्षीय विल्वनाथन कृष्णामूर्ति के अथक परिश्रम और प्रयासों का परिणाम है। इस मंदिर में अब तक भगवान की मूर्ति विराजमान नहीं हुई है। कृष्णामूर्ति दीवाली के समय भव्य कार्यक्रम कर यहाँ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा करने की योजना बना रहे हैं।

डीडब्ल्यू से हुई बातचीत में विल्वनाथन कृष्णामूर्ति ने कहा है कि वह 50 साल पहले जर्मनी आए थे। यहाँ वह बर्लिन में रहते हुए एक इलेक्ट्रिकल कंपनी में काम करते थे। जर्मनी आने के बाद से उनका सपना मंदिर बनाने का था। इस सपने को लेकर उनका कहना है कि वह त्यौहार घर भी मना सकते हैं। लेकिन दोस्तों के साथ त्यौहार का जश्न मनाने के लिए उन्हें एक स्थान की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने श्री-गणेश हिंदू मंदिर बनाने के लिए साल 2004 में एक एसोसिएशन की स्थापना की।

एसोसिएशन बनने के कुछ दिनों बाद ही बर्लिन जिला प्रशासन ने मंदिर बनाने के लिए हसेनहाइड पार्क के किनारे एक प्लॉट दे दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर बनाने के लिए पैसा जुटाना शुरू किया। प्लान था कि साल 2007 में ही मंदिर बनना शुरू हो जाएगा। लेकिन साल 2010 तक भी शुरू नहीं हो पाया। कृष्णामूर्ति बताते हैं कि मंदिर बनाने में उन्हें 4 तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। पहली समस्या सरकार से अप्रूवल थी। दूसरी मंदिर बनाने को लेकर नियम, तीसरी समस्या पैसों की थी और चौथी डेडलाइंस थी।

कृष्णामूर्ति का कहना है कि वह उधार लेकर मंदिर नहीं बनाना चाहते थे। क्योंकि आने वाली पीढ़ी को उधार वापस करना पड़ता। इसलिए वह दान के पैसों को अधिक से अधिक जुटाने में लगे हुए थे। उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण दान के पैसों के दम पर ही हुआ है। बर्लिन प्रशासन की ओर से इसमें किसी भी तरह का सहयोग नहीं मिला। जब वह मंदिर के लिए दान जुटा थे तब बर्लिन में भारतीयों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी। इसके साथ ही दान में भी बढ़ोतरी हो रही थी।

उन्होंने आगे कहा है कि बर्लिन में अमेजॉन की सबसे बड़ी बिल्डिंग तैयार की जा रही है। इस बिल्डिंग से ज्यादातर भारतीय काम कर रहे हैं। बीते 5 सालों में मंदिर निर्माण के लिए मिल रहे दान में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। युवा खुले दिल से दान कर रहे हैं। युवा पुरुष और महिलाएँ दोनों नौकरी करते हैं। इसलिए उनके पास किसी त्यौहार को मनाने के लिए घर में समय नहीं मिलता। ऐसे में सभी मंदिर में भगवान के विराजमान होने का इंतजार कर रहे हैं।

विल्वनाथन कृष्णामूर्ति ने कहा है कि दीवाली के समय वह 6 दिवसीय कुंभाभिषेकम अभिषेक समारोह आयोजित करना चाहते हैं। इसी कार्यक्रम के दौरान भगवान श्री गणेश भी मंदिर में विराजित होंगे और उनकी प्राण प्रतिष्ठा होगी।

नाबालिग हिन्दू छात्रा ने ज़हर खाकर दे दी जान, शावेज रिज़वी ने वायरल कर दिया था वीडियो: हिन्दू कार्यकर्ता बोले – ‘शकील के स्कूल में हिन्दू लड़कियों को बना रहे शिकार’

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शावेज रिज़वी द्वारा अपना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने से आहत एक नाबालिग हिन्दू छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। शनिवार (2 सितंबर 2023) को पीड़िता ने जहर खा लिया। मृतका और शावेज एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इस मामले में पुलिस शुक्रवार को ही आरोपित को IT एक्ट व पॉक्सो की धाराओं में जेल भेज चुकी है। अब शावेज पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा बढ़ा दी गई है। ऑपइंडिया से बातचीत में स्थानीय हिन्दू संगठनों ने स्कूल पर ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र देवरनियाँ की है। यहाँ पीड़िता का एक रेस्टॉरेंट से वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में पीड़िता कुछ खा रही थी। वहीं बगल में बैठा शावेज रिज़वी लगातार उसके साथ छेड़खानी कर रहा था। वीडियो 15 अगस्त का बताया जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की। लड़की के पिता ने 29 अगस्त को थाने में तहरीर दी। पुलिस ने आरोपित पर IT एक्ट और पॉक्सो की धाराओं में केस दर्ज कर लिया। 1 सितम्बर को शावेज रिज़वी को पुलिस ने गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया।

बताया जा रहा है कि अपना वीडियो वायरल होने के बाद से पीड़िता काफी परेशान और आहत थी। शावेज की गिरफ्तारी के अगले दिन 2 सितंबर को उसने घर वालों की नजर से बचते हुए उसने जहर खा लिया। परिजनों ने लड़की को अस्पताल में भर्ती करवाया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद लड़की को बचाया नहीं जा सका और रविवार (3 सितम्बर, 2023) को उसने दम तोड़ दिया। थाना प्रभारी देवरनियाँ ने मीडिया से बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा की जा रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने आरोपित पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा बढ़ाने की जानकारी दी।

स्कूल का संचालन शकील के हाथों में

मृतका क्लास 11 की छात्रा थी, जबकि आरोपित उसी स्कूल में कक्षा 12 में पढ़ रहा था। ऑपइंडिया ने मृतका छात्रा के पिता से बात की। उन्होंने बताया कि जिस स्कूल में उनकी बेटी पढ़ती थी वो एक मुस्लिम का है। इस स्कूल का मुख्य संचालन शेरी डॉक्टर और उनके परिवार के शकील के हाथों में है। स्कूल में हिन्दू और मुस्लिम छात्रों की संख्या लगभग बराबर-बराबर है। आरोपित शावेज रिज़वी भी यही पढ़ता है जिसके अब्बा दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं।

छात्रा के पिता हमें आगे बताया कि 16 वर्षीया मृतका के 2 छोटे भाइयों की पहले ही बीमारियों से असामयिक मृत्यु हो चुकी थी। हमें बताया गया कि घर में काफी दिनों से आधे पैकेट चूहे मारने की दवा रखी थी, उसे ही लड़की ने खोज कर खा लिया। जहर खाने की वजह पीड़ित पिता ने अत्यधिक टेंशन में उठाया कदम बताया।

शकील के स्कूल में ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में स्थानीय ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ कार्यकर्ता हिमांशु पटेल से बात की। हिमांशु ने शेरिया स्कूल को छात्रों की तादाद के लिहाज मुस्लिम बहुल बताते हुए वहाँ ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को बढ़ावा मिलने का आरोप लगाया। हिमांशु ने हमें बताया कि शेरिया स्कूल के तमाम मुस्लिम छात्र सोची-समझी साजिश के तहत हिन्दू लड़कियों को अपने साथ होटलों और रेस्टॉरेंट पर ले जाते हैं। हिमांशु ने सप्ताह पर पहले मृतका से बात करने का दावा किया।

उन्होंने कहा कि तब लड़की ने उस स्कूल में अपनी तरह कई और हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम छात्रों के चंगुल में बताया था। हिमांशु ने स्कूल पर कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि हिन्दू अभिभावकों को अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेजने से पहले अच्छे से जाँच-पड़ताल करनी चाहिए।

शावेज पर धारा 306 की बढ़ोत्तरी

ऑपइंडिया ने SHO देवरनियाँ इंस्पेक्टर देवेंद्र धामा से बात की। इंस्पेक्टर धामा ने हमें बताया कि मामला संज्ञान में आते ही तत्काल केस दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने आगे बताया कि आरोपित पर धारा 306 बढ़ा दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह SHO ने जहर खाना बताया। साथ ही मृतका का बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। बताते चलें कि धारा 306 आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने पर लागू होती है।

पीड़ित परिवार पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट

कुछ रिपोर्ट्स में मामले में पुलिस की लापरवाही जैसी खबरों का मृतका के पिता ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस सही काम कर रही है और स्थानीय थाना प्रभारी लगातार उनके सम्पर्क में बने हुए हैं। वहीं स्थानीय VHP पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए पुलिस कार्रवाई की तारीफ की। उन्होंने कहा कि शावेज द्वारा वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद पुलिस ने न सिर्फ केस दर्ज कर लिया था बल्कि आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भी भेज दिया था।

‘हलफनामा दायर कर माफ़ी माँगो’: सदन में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ का नारा लगाने वाले सांसद को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा – लिख कर दो कश्मीर भारत का अभिन्न अंग

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 सितम्बर, 2023) को नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन को माफी माँगने के लिए कहा है। दरअसल, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के 15वें दिन, केंद्र ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन से अपने बयानों के लिए माफी माँगते हुए एक हलफनामा माँगा, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे। लोन उन याचिकाकर्ताओं में से एक हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी थी

सुप्रीम कोर्ट का आदेश केंद्र द्वारा 2018 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पटल पर लोन द्वारा कथित तौर पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा लगाने पर कड़ी आपत्ति जताने के बाद आया है। 

कोर्ट में केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा, “लोन को एक हलफनामा दायर करना होगा जिसमें कहा गया हो कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। और अलगाववादी ताकतों और आतंकवाद का विरोध करते हैं।”

मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा, “लोन को सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर करना चाहिए जिसमें कहा गया हो कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और अलगाववादी ताकतों और आतंकवाद का विरोध करते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, मेहता का बयान तब आया जब कश्मीरी पंडितों के एक संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बिमल जाद ने पीठ से कहा, “इन याचिकाकर्ताओं को इस मामले का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने कहा कि सदन के पटल पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ की लोन की टिप्पणी की अपनी गंभीरता है। यह मामला गैर सरकारी संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’ ने अदालत के समक्ष उठाया था।

मेहता ने कहा कि अदालत को इस नजरिए से देखना चाहिए कि अनुच्छेद 370 को जारी रखने की माँग कौन कर रहा है। मेहता ने कहा कि लोन कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं बल्कि वह संसद सदस्य हैं और यह पर्याप्त नहीं है कि वह पश्चाताप व्यक्त करें। उन्हें कहना होगा कि मैं जम्मू-कश्मीर या अन्य जगहों पर पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद और किसी भी अलगाववादी गतिविधि का विरोध और आपत्ति करता हूँ। इसे रिकॉर्ड पर आना चाहिए।

रूट्स इन कश्मीर की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को बताया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एसके कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत भी शामिल थे, उन्होंने विवरण देते हुए एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था और कहा था कि लोन ने जो कहा था उसके लिए उन्हें कोई पछतावा नहीं जताया है। .

गौरतलब है कि एक दूसरे वकील ने बताया कि सांसद लोन ने सदन के बाहर कहा था कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जो कुछ भी कहा, उस पर कायम हैं। वहीं अनुच्छेद 370 में किए गए बदलावों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध करने वाले अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने भी कहा कि लोन को माफी माँगनी चाहिए।