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बबलू बन हिंदू लड़की के साथ लिव इन में रहा, माँ बनते ही छोड़ भागा: चुपके से बहन से किया निकाह, महिलाओं ने खुर्शीद को पकड़ पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। आरोपित खुर्शीद ने बबलू बनकर एक अनाथ हिंदू लड़की को फँसाया। दो साल उसके साथ लिव इन में रहा। लड़की को प्रेग्नेंट करने के बाद वह भाग खड़ा हुआ और चुपके से अपनी ममेरी बहन से निकाह कर ली।

किसान संगठन की महिलाओं को पीड़िता रेलवे स्टेशन पर बदहवास हाल में मिली। उन्होंने उसकी मदद की और मंगलवार (5 सितम्बर 2023) को खुर्शीद को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुर्शीद मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। दिल्ली की एक स्टील फैक्ट्री में 7 वर्षों से वह नौकरी कर रहा था। इसी फैक्ट्री में दिल्ली के वजीरपुर की एक हिन्दू लड़की भी बर्तन पॉलिश करने का काम करती थी। पीड़िता के माता-पिता नहीं हैं।

खुर्शीद पर आरोप है कि उसने बबलू नाम से लड़की को प्यार के जाल में फँसाया और 2 साल पहले उसके साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहना शुरू कर दिया। इस दौरान लड़की एक बेटी की माँ भी बनी। लड़की ने कई बार खुर्शीद से शादी को कहा पर वह टालता रहा।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि बेटी होने के बाद खुर्शीद उसे अस्पताल में ही छोड़ कर अपने घर वालों को मनाने और जल्दी लौटने का भरोसा दे कर मुरादाबाद आ गया। 2 माह बाद भी जब वो नहीं लौटा तो लड़की उसे खोजते हुए बेटी को लेकर मुरादाबाद पहुँची। यहाँ उसे खुर्शीद मिला। लेकिन उसने अपनी मामा की बेटी से निकाह करने की जानकारी दी। खुर्शीद ने पीड़िता को साथ रखने से मना कर दिया। उसे डाँट कर भगा दिया। इससे सदमे में आई लड़की मुरादाबाद जंक्शन पर पहुँच कर रोने लगी। तभी वहाँ से गुजर रही किसान यूनियन की महिला शाखा की सदस्यों की नजर उस पर गई। उन्होंने कारण पूछा तो पीड़िता ने सारी बात बता दी।

सारी बात सुन कर किसान संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने पीड़िता की मदद का फैसला किया। उन्होंने खुर्शीद को बहाने से मिलने के लिए बुलवाया। जब खुर्शीद पीड़िता से मिलना पहुँचा तब वहाँ मौजूद महिलाओं ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। मुरादाबाद के पत्रकार सुमित टंडन ने ऑपइंडिया को गिरफ्तारी के दौरान के कुछ वीडियो भेजे हैं। इन वीडियो में खुर्शीद पुलिस कस्टडी में दिख रहा और आसपास के लोग उसे डाँट रहे हैं। मुरादाबाद पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

केरल में तेजी से हो रहा है युवा ईसाइयों का पलायन: शिक्षा और रोजगार की तलाश में जा रहे विदेश, नौकरी के लिए जागरूक करने की कोशिश में लगे चर्च

केरल में बढ़ती बेरोजगारी के चलते बढ़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में यूरोप और कनाडा जा रहे हैं। इससे वहाँ के चर्च चिंतित हो गए हैं। ऐसे में वहाँ के चर्च युवाओं को सरकारी नौकरी की जानकारी देकर उन्हें राज्य में ही रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार से जुड़े लोग बहुत से लोग विदेशों में जाकर बस चुके हैं। इनमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जाने वालों की संख्या अधिक है। युवाओं के बढ़ते पलायन को रोकने के लिए बीते दो महीने से चर्च राज्य और केंद्र सरकार की सरकारी नौकरियों से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। साथ ही इन नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं की तैयारी के लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं।

केरल के चर्चों ने बयान में कहा है, “शांति और आरामदायक जिंदगी की तलाश में युवा विदेश जा रहे हैं। युवाओं का विदेश जाना ईसाई समुदाय के अस्तित्व का सवाल बन गया है। युवाओं के साथ ही उनके माता-पिता भी विदेश जा रहे हैं। ऐसे में राज्य में कई घरों में ताले पड़ते जा रहे हैं।” युवाओं के विदेश जाने से परेशान चर्च ने अपने बयान में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निकाली जा रही भर्तियों का भी जिक्र किया है।

केरल कैथोलिक बिशप कॉउंसिल के पादरी जैकब पलक्कपिल्ली का कहना है, “हमारे चर्चों से युवा गायब हो रहे हैं। युवा उच्च शिक्षा और नौकरियों के लिए विदेश जा रहे हैं। कई छात्र वीजा पर जाते हैं और फिर विदेश में ही बस जाते हैं। ऐसे में वे अपने परिवार से भी अलग हो जाते हैं। कई ईसाई परिवारों में अब सिर्फ बुजुर्ग ही रह गए हैं। यहाँ से जो लोग विदेश जा रहे हैं वे अपने परिवारों को पैसे भी नहीं भेज रहे हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।”

पादरी जैकब पलक्कपिल्ली का कहना है कि युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए जागरूक करके पलायन रोका जा सकता है। युवाओं के पलायन को रोकने के प्रयास किए चर्च प्रयास कर रहा है। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। केरल माइग्रेशन द्वारा साल 2018 में किए गए सर्वे के अनुसार, दुनिया भर में केरल से करीब 21 लाख लोग विदेश जा चुके हैं।

केरल के युवाओं के बढ़ते पलायन को लेकर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑद फ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. इरुदया राजन का कहना है, “शिक्षा और रोजगार के लिए युवा विदेश जा रहे हैं। पहले 25 साल की उम्र में पलायन होता था। अब 18 साल के लड़के भी विदेश जा रहे हैं।”

राजन ने आगे कहा, “चर्च इस पलायन को रोक पाएगा या नहीं यह तो नहीं कह सकता। लेकिन पलायन का बड़ा नौकरी नहीं है। बल्कि नए तरह से जीवन जीने की जद्दोजहद है। कोई व्यक्ति अगर विदेश चला गया है तो उसके केरल वापस लौटने के कारण होने चाहिए। यहाँ वो दिखाई नहीं देते।”

गणेश चतुर्थी पर होगा नए संसद भवन का ‘श्रीगणेश’: पुरानी बिल्डिंग में होगी विशेष सत्र की शुरुआत, 19 सितंबर से नई बिल्डिंग में कामकाज

संसद का विशेष सत्र 18-22 सितंबर तक होना है। सत्र के एजेंडे को लेकर चल रहे कयासों के बीच संसद भवन को लेकर एक जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक विशेष सत्र की शुरुआत पुराने संसद भवन में होगी। लेकिन इसके बाद 19 सितंबर से सत्र संसद की नई इमारत में होगा। इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है।

मीडिया एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि संसद के विशेष सत्र की शुरुआत 18 सितंबर को पुराने भवन में ही होगी। गणेश चतुर्थी के मौके पर 19 सितंबर को संसद की कार्यवाही नए संसद भवन में होगी। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई, 2023 को नए संसद भवन का शुभारंभ किया था। नए संसद भवन में कामकाज शुरू होने के बाद पुरानी बिल्डिंग को ‘म्यूजियम ऑफ डेमोक्रेसी’ में बदल दिया जाएगा।

गौरतलब है कि लगभग 1,200 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नया संसद भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें संयुक्त केंद्रीय सचिवालय, राजपथ का नवीनीकरण, नया प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री का नया कार्यालय और एक नया उप-राष्ट्रपति एन्क्लेव शामिल है।

भारत का वर्तमान संसद भवन ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर द्वारा डिज़ाइन किया गया था। औपनिवेशिक युग के इस भवन को बनाने में छह साल (1921 से 1927) लगे थे। ब्रिटिश काल में काउंसिल हाउस कहलाने वाले इस भवन में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल स्थित थी।

भारत जब स्वतंत्र हुआ, तब अधिक जगह की जरूरत को देखते हुए सन 1956 में संसद भवन में दो और मंजिल बनाए गए। साल 2006 में भारत की 2,500 वर्षों की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए संसद भवन में संग्रहालय बनाया गया था। अब इसमें 2500 वर्षों की लोकतांत्रिक विरासत के साथ-साथ 5000 वर्षों की सभ्यता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

मार्च 2020 में सरकार ने संसद को बताया था कि पुरानी बिल्डिंग खराब हो रही है। लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन होना है। इसके बाद सीटें भी बढ़ेंगी। ऐसे में सांसदों के बैठने के लिए पुराने संसद भवन में पर्याप्त जगह नहीं होती। इसलिए नए संसद भवन का निर्माण किया गया है।

भारत, भारतवर्ष, भारतभूमि… संविधान सभा में आए कई नाम, अंत में ‘India, that is Bharat’ पर लगी मुहर: नजीरुद्दीन अहमद चाहते थे ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया’

देश में India और भारत को लेकर बहस जारी है। देश जब आजाद हुआ तब हुआ, तब इसके नाम को लेकर उस समय के तमाम नेताओं ने चर्चा की थी। उस समय सबने अपनी-अपनी राय रखी थी। हालाँकि, इसे INDIA और भारत, दोनों नाम दिया गया। संविधान का अनुच्छेद 1 कहता है कि इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ है। हालाँकि, जब संविधान का ड्राफ्ट बनाया गया था तो उसमें ‘भारत’ नाम का कहीं जिक्र नहीं था।

दरअसल, संविधान का मसौदा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा तैयार किया गया था और 4 नवंबर, 1948 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। लगभग एक साल बाद 17 सितंबर 1949 को डॉक्टर अंबेडकर ने एक संविधान संशोधन प्रस्ताव रखा कि इसके पहले उप-खंड में ‘भारत’ जोड़ा जाए। उन्होंने अपने प्रस्ताव में ‘India, that is, Bharat’ करने का प्रस्ताव किया।

डॉक्टर अंबेडकर के प्रस्ताव के बाद ऑल इंडिया फॉरवॉर्ड ब्लॉक के नेता एचवी कामथ ने पहला संशोधन पेश किया, जिसमें पहले उप-खंड के प्रासंगिक हिस्से को ‘भारत या अंग्रेजी भाषा में इंडिया’ से बदलने का प्रस्ताव रखा। कामथ ने तर्क दिया कि ‘द फायरिश फ्री स्टेट’ उन कुछ देशों में शामिल था, जिसने स्वतंत्रता हासिल करने के बाद अपना नाम बदल लिया।

कुछ लोगों ने इस दौरान इंडिया शब्द के अंग्रेजी होने पर आपत्ति उठाई। कामथ ने कहा कि इंडिया को अंग्रेजी में लिखो या जर्मन में, यह इंडिया ही रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत को हिंदुस्तान के रूप में भी संदर्भित किया जाता है और यहाँ रहने वाले नागरिकों को हिंदू कहा जाता है। बहस के अंत में कामथ ने देश का नाम भारत रखने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्हें बहुत अधिक समर्थन नहीं मिला।

लाइव लॉ में अवस्तिका दास लिखती हैं कि कामथ के बाद कॉन्ग्रेस नेता सेठ गोविंद दास ने सुझाव दिया कि ‘इंडिया’ नाम को स्पष्ट रूप से केवल विदेशी देशों में प्रचलित एक के रूप में नामित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह तर्क दिया कि ‘भारत’ के विपरीत, ‘इंडिया’ का उल्लेख ग्रंथों में नहीं मिलता है।

उन्होंने तर्क दिया था कि ‘इंडिया जो कि भारत है’ देश के नाम के लिए बहुत सुंदर शब्द नहीं है। इसके बदले हमें लिखना चाहिए ‘भारत, जो विदेशों में इंडिया के नाम से जाना जाता है’। उन्होंने कहा कि ग्रीक ने सिंधु नदी को इंडस नाम दिया और उससे भारत को इंडिया कहा, जबकि भारत का वर्णन महाभारत में भी है।

इसी तरह कॉन्ग्रेस के ही कमलापति त्रिपाठी ने कहा कि ‘India, that is, Bharat’ के बदले ‘Bharat, that is, India’ अधिक उपयुक्त होगा। उन्होंने कहा कि एक हजार साल की गुलामी के बाद भारत ने अपनी संस्कृति से लेकर आत्म-सम्मान तक खो दिया है। ऐसे में जब देश आजाद हो रहा हो तो ऐतिहासिक नाम भारत रखा जाना चाहिए। यह वेदों और पुराणों में भी वर्णित है।

कॉन्ग्रेस के नेता गोविंद बल्लभ पंत ने देश का नाम भारतवर्ष करने की बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि भारतवर्ष के अलावा, कोई और नाम नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदियों से देश का नाम भारत या भारतवर्ष रहा है। अगर इसे स्वीकार नहीं किया जाता है तो यह देशवासियों के लिए बेहद शर्म की बात होगी।

वहीं, बंगाल का प्रतिनिधित्व करने वाले नजीरुद्दीन अहमद ने भी इसको लेकर सुझाव दिया। उन्होंने देश का नाम ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया’ रखने का प्रस्ताव दिया। हालाँकि, इस प्रस्ताव को भी जरूरी समर्थन नहीं मिला। भारत नाम रखने के प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई, जो सदन में गिर गया।

हालाँकि, असेंबली ने संविधान के ड्राफ्ट में अनुच्छेद 1 में प्रस्तावित सभी संशोधनों को खारिज कर दिया, सिवाय डॉक्टर अंबेडकर द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधन को। आखिरकार, 18 सितंबर 1949 को डॉक्टर अंबेडकर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। इस तरह भारत के संविधान के अनुच्छेद 1 में ‘India, that is Bharat’ कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका

साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा गया था कि देश का नाम सिर्फ भारत किया जाए और इसमें से इंडिया शब्द को हटा दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस यूयू ललित ने इस याचिका को खारिज कर दिया था।

बेंच ने कहा था, “भारत या इंडिया? अगर आप भारत कहना चाहते हैं, कहिए। अगर कोई इंडिया कहना चाहता है तो उसे इंडिया कहने दीजिए।” इस जनहित याचिका को महाराष्ट्र के निरंजन भटवाल नाम के शख्स ने दाखिल की थी।

शास्त्रों में भारत का नाम का जिक्र

दरअसल, पुरुवंशी महाराज दुष्यंत और विश्वामित्र की पुत्री शकुंतला के बेटे चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर यह देश भारत या भारतवर्ष कहलाते आया है। भारत को सर्वदमन कहा जाता है और माना जाता है कि चारों दिशाओं में उनका साम्राज्य फैला हुआ था। इसका जिक्र सनातन धर्म की कई पुस्तकों में आया है। इनमें से एक ऐतरेय ब्राह्मण प्रमुख है।

वहीं, जैन धर्म के अनुसार, महाराजा नाभिराज और महारानी मरुदेवी के पुत्र भगवान ऋषभदेव, जो आदिनाथ के नाम से भी जाने जाते हैं, के ज्येष्ठ पुत्र महायोगी भरत के नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा।

जामिया के शिक्षक हारिस उल हक पर भूकंप पीड़ितों के नाम पर जमा चंदा खा जाने का आरोप, निलंबित: आरोपित शिक्षक ने कार्रवाई को बताया साजिश

जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) ने मिडिल स्कूल के फिजिकल एजुकेशन टीचर हारिस उल हक को सस्पेंड कर दिया है। हरिस पर तुर्की (अब तुर्किये) में आए विनाशकारी भूकंप के प्रभावितों की मदद के नाम पर चंदा जमा कर के ठगी के आरोप लगे हैं। हालाँकि ऑपइंडिया से बातचीत में हारिस उल हक ने इन आरोपों को झूठा बताया है। साथ ही कहा है कि उनके खिलाफ केवल शिकायत की गई है। एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठगी की गई राशि लगभग 1 लाख 40 हजार रुपए बताई जा रही है। मंगलवार (5 सितम्बर, 2023) को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की है।

31 जुलाई को जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी की तरफ से आरोपित हारिस उल हक के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी। इस शिकायत के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया की तरफ से दिल्ली के जामिया नगर थाने में धोखाधड़ी, विश्वासघात और हेराफेरी की FIR दर्ज हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि तुर्की में आए भूकंप के बाद वहाँ के पीड़ितों की मदद के नाम पर आरोपित हारिस उल हक ने छात्रों से पैसे वसूले थे। वसूलीआरोप है कि यह पैसे हारिस उल हक ने अपने निजी कामों में खर्च कर दिए थे।

पुलिस में FIR दर्ज करवाने के बाद 4 अगस्त, 2023 को जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने इस मामले में एक बार फिर मीटिंग की। इस मीटिंग में आरोपित हारिस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई। यूनिवर्सिटी की जाँच में आरोपित हारिस पूर्व में भी अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया। वह साल 2010 में कदाचार के आरोप में सस्पेंड भी हो चुका है। जामिया मिलिया इस्लामिया ने अंतिम फैसले में पाया कि तुर्की भूकंप पीड़ितों के लिए धन जुटाने के अभियान की अनुमति भी हारिस ने किसी सीनियर से नहीं ली थी।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल हारिस उल हक को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस और जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन द्वारा मामले की जाँच की जा रही है। बताते चलें कि 6 फरवरी 2023 को तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप से वहाँ सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी और हजारों बेघर हो गए थे।

शिक्षक हारिस उल हक ने बताया साजिश

हारिस उल हक ने ऑपइंडिया से बातचीत में सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, “तुर्की में भूकंप आने के बाद स्कूल के कुछ छात्र उनके पास आए थे। छात्रों ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह वह भी तुर्की के भूकंप पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने चंदा इकट्ठा किया था। चंदा इकट्ठा होने के बाद इसकी जानकारी देने के लिए मैंने वाइस चांसलर नजमा अख्तर को मेल किया था। उन्होंने इस मेल का जवाब देने की जगह मेरे खिलाफ साजिश रचते हुए कार्रवाई करा दी।”

हारिस उल हक ने बताया, “चंदा इकट्ठा होने के बाद स्कूल के छात्रों ने अपने परिजनों के साथ जाकर तुर्की एंबेसी जाकर 1 लाख 45 हजार 540 रुपए जमा किए थे। इसकी रसीद और छात्रों के वहाँ जाने की फोटो भी मेरे पास है। जामिया स्कूल में हो रही गड़बड़ी के खिलाफ मैं आवाज उठाता था। इसलिए मेरे खिलाफ साजिश रचकर यह सब किया जा रहा रहा है। रही बात FIR की तो अब तक सिर्फ शिकायत हुई है। एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।”

‘India, That Is Bharat – ये संविधान में भी लिखा है’: ‘भारत’ का विरोध कर रहे विपक्षी दलों को विदेश मंत्री S जयशंकर का जवाब, कहा – पढ़ने के लिए करूँगा आमंत्रित

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के बाद अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी जी-20 निमंत्रण पत्र पर देश का नाम ‘भारत’ लिखे जाने पर विपक्षी दलों की टिप्पणी का करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान में ‘इंडिया दैट इज भारत’ का जिक्र है। उन्होंने ये बातें ANI के साथ एक इंटरव्यू में कही।

उन्होंने कहा कि ‘भारत’ शब्द के अर्थ की झलक संविधान में भी दिखती है। दरअसल राष्ट्रपति भवन ने ‘भारत के राष्ट्रपति’ की तरफ से 9 सितंबर को G20 रात्रिभोज के लिए निमंत्रण भेजा था। इसमें ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’ की जगह ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ लिखा था। इस पर ही विपक्षी पार्टियाँ लामबंद होने लगी और इंडिया की जगह भारत शब्द पर एतराज जताने लगी।

S जयशंकर ने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा, “इंडिया, दैट इज़ भारत, यह संविधान में है। मैं सभी को इसे पढ़ने के लिए आमंत्रित करूँगा।” विदेश मंत्री से जब विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया कि क्या सरकार G20 शिखर सम्मेलन के साथ इंडिया को भारत के रूप में प्रतिस्थापित करने जा रही है, इस पर उन्होंने कहा, “देखिए, जब आप ‘भारत’ शब्द के संदर्भ में बात करते हैं तो उसे समझने के लिए एक ही अर्थ होता है जो उसके साथ ही आता है और वह हमारे संविधान में भी प्रतिबिंबित होता है।”

जहाँ एक तरफ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार इस शब्द को लेकर इसीलिए ‘ड्रामा’ कर रही है, क्योंकि उन्होंने एकजुट होकर अपने गुट को ‘भारत’ कहा है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं ने सरकार के इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों से ही उलटा सवाल कर लिया कि देश का राष्ट्रपति भारत का ही राष्ट्रपति होता है तो भारत लिखने में आपत्ति क्यों है? उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार में मंत्री हूँ। इसमें नया कुछ भी नहीं है। G20-2023 (ब्रांडिंग, लोगो) पर भारत और इंडिया दोनों लिखा होगा। तो फिर भारत नाम पर आपत्ति क्यों? भारत से किसी को आपत्ति क्यों है? इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है कि वे दिल से इंडिया या भारत के खिलाफ हैं।”

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स (ट्विटर)’ पर राष्ट्रपति की ओर से रात्रिभोज के निमंत्रण की एक तस्वीर पोस्ट की और राष्ट्रगान की कुछ पंक्तियाँ लिखीं। उन्होंने लिखा, “यह पहले ही हो जाना चाहिए था। इससे मन को बहुत संतुष्टि मिलती है। ‘भारत’ हमारा परिचय है। हमें इस पर गर्व है। राष्ट्रपति ने ‘भारत’ को प्राथमिकता दी है। यह औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आने वाला सबसे बड़ा बयान है।”

आठवें अवतार, 64 कलाओं के ज्ञाता… पूर्ण पुरुष कहलाते हैं श्रीकृष्ण, जानिए माखनचोरी और रासलीला के पीछे क्या हैं रहस्य

भारतवर्ष ने जहाँ एक ओर विदेशी आक्रांताओं का दंश झेला, अत्याचार सहे वहीं दूसरी ओर इस पुण्यभूमि पर अनेकों महापुरुषों, ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया। इस देवभूमि को तो साक्षात ईश्वर की माता कहलाने का भी गौरव प्राप्त है और हम भरतवंशियों को ईश्वर का वंशज कहलाने का परम सौभाग्य मिला है। भारतीय संस्कृति में अनेक अवतार हुए परन्तु श्रीकृष्ण उनमें सबसे लोकप्रिय हैं। भक्तवत्सल भगवान श्रीहरि विष्णु जी के आठवें अवतार श्रीकृष्ण 64 कलाओं के ज्ञाता थे। इसी कारण उन्हें पूर्ण पुरुष भी कहा जाता है।

श्रीकृष्ण प्रेम की मूरत हैं। उनके नटखट बालस्वरूप की तो दुनिया दीवानी है। उनके जन्म के हजारों वर्षों पश्चात भी प्रभु की सुमधुर बाल लीलाएँ इतनी प्रसिद्ध हैं कि भारत की हर माता वात्सल्य में अपने लाल को कान्हा ही पुकारती है। आज भी ‘मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो’ जनमानस का प्रिय भजन है।

आज भी राधाजी और श्रीकृष्ण की प्रेम कहानी प्रेमियों के लिए आदर्श है। मित्रता की जब भी चर्चा होती है तो यहाँ सर्वप्रथम द्वारिकाधीश और सुदामा का ही उदाहरण दिया जाता है। उनकी मित्रता की करुण कथा से सबकी आँखें नम हो जाती हैं। स्त्री अस्मिता पर जब आँच आती है तो सुदर्शन चक्रधारी का न्याय याद आता है। श्रीकृष्ण के नारीवाद के समक्ष संसार के समस्त तथाकथित नारीवाद फीके पड़ जाते हैं। प्रभु ने हर रिश्ते को जी भर जिया है और समाज के समक्ष श्रेष्ठ आदर्श प्रस्तुत किया है।

जब श्रीकृष्ण धरती पर मनुज रूप में अवतरित हुए तब साधारण मनुष्य की भाँति ही उनका भी जीवन कष्टों, संघर्षों और पग-पग पर चुनौतियों से भरा हुआ था। उनके जन्म से पूर्व ही उन्हें मारने का षड्यंत्र रच दिया जाता है। राजकुमार होते हुए भी कारागृह में जन्म और तत्क्षण अपने माता-पिता से वियोग सहना पड़ता है। प्रतिक्षण मृत्यु का सामना करने वाले बाल गोपाल सदैव आनंदित ही रहते थे। वह जो भी कार्य करते उसमें जनकल्याण का भाव छिपा रहता। यही कारण है कि ‘माखनचोरी से लेकर महाभारत युद्ध’ को भी प्रभु की लीला ही कहा जाता है।

माखनचोरी का उद्देश्य

भक्तगण तो माखनचोरी को मात्र अपने कन्हैया की लीला समझकर वात्सल्य रस में डूब जाते हैं, परन्तु गुणिजनों ने इस संदर्भ की विविध प्रकार से व्याख्या की है। तत्कालीन परिस्थिति यह थी कि मथुरा में अत्याचारी कंस का शासन था। नंदगाँव, बरसाना, गोकुल, वृंदावन और आसपास के इलाकों में अहीर अथवा यादव दुग्ध का व्यापार करते थे, पशुपालन, गौ पालन करते थे। अपने क्रूर राजा के आदेशानुसार वे लोग घी, दही, छाछ, मक्खन, मलाई बनाते थे, परन्तु उसका एक छटांक भी वे अपने परिवार के लिए नहीं रख पाते। भयवश मक्खन आदि के पात्र को मटके में भरकर बच्चों की पहुँच से दूर, रस्सी में बाँध कर लटका दिया जाता। समय आने पर सभी वस्तुओं को मथुरा भेज दिया जाता, जहाँ बड़े-बड़े घरों में लोग दूध पान करते, कंस की दोनों रानियाँ अपने सौन्दर्य के लिए मक्खन का लेप करती, दुग्ध स्नान करती।

अपने अधिकार को जताने हेतु ही श्रीकृष्ण ने बाल-सखाओं के साथ मिलकर माखनचोरी की लीला की थी। इस लीला में चार मण्डल बने। सबसे पहले हृष्ट-पुष्ट बालकों का समूह खड़ा होता, जो आज के संदर्भ में मजदूर वर्ग हैं। अर्थात शारीरिक श्रम करने वाले लोग जिनमें अथाह बल होता है। उसके ऊपर सबकी सुरक्षा करने वाला क्षत्रिय वर्ग, उसके ऊपर वैश्य वर्ग जिनके व्यापार के कारण ही हमें तमाम आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त होती हैं और अंत में ब्राह्मण वर्ग जो अमूमन शारीरिक रूप से बहुत बलिष्ठ नहीं होता। इन सबके ऊपर सबकी रक्षा और सम्मान करने वाले भगवान श्रीकृष्ण चढ़ते और मटकी फोड़कर जो भी नवनीत प्राप्त होता वह सबमें बाँट देते। इसीलिए तो उन्हें योगेश्वर भी कहा जाता है।

इस लीला से यह सन्देश मिलता है कि यदि किसी व्यक्ति को समाज का मक्खन अर्थात् शिक्षा, सम्मान, यश, वैभव, धन-दौलत, प्राप्त हुआ है तो उसका कर्त्तव्य बनता है कि समाज के हर वर्ण के साथ वह उसे बाँटे। क्योंकि उसने जो भी पाया है समाज के हर वर्ग से पाया है। सरलतम शब्दों में इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यदि अन्नदाता किसान खेती करना छोड़ दे तो अपार धन-संपदा का स्वामी होने के पश्चात भी क्या अन्न का एक दाना भी नसीब हो सकता है? यदि सफाई कर्मचारी हमारे द्वारा फैलाई गंदगी को साफ करने से मना कर दे तो क्या उस परिवेश में जीवित रहा जा सकता है? यदि सेना राष्ट्र रक्षा करना छोड़ दे तो क्या कोई चैन की नींद सो पाएगा? यदि शिक्षक ज्ञान धारा को रोक दे तो क्या कोई ज्ञानी बन सकता है?

स्वामी विवेकानंद कहते थे, “जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी हैं; तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को गद्दार मानता हूँ जो उनके बल पर शिक्षित हुआ और अब वह उनकी ओर ध्यान नहीं देता।” स्पष्ट है कि हम सब अपने समाज के ऋणी होते हैं। अपने देश का ऋण सबसे बड़ा ऋण होता है, यदि इसका एकांश भी चुका पाए तो बाकी सब ऋण स्वतः ही उतर जाता है। अतः हमें अपने भीतर सेवा, करुणा और संवेदनशीलता और दायित्वबोध को बढ़ाना होगा। ‘जीवने यावदादानं स्यात्प्रदानं ततोऽधिकम्’ जैसे महामंत्र को मन में धारण कर परमार्थ में जुटना होगा। यही हमारा कर्म भी है और धर्म भी।

रासलीला का सन्देश

सदैव स्थितप्रज्ञ रहने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण परमानंद की मूर्ति थे। वह कहते थे कि जीवन को उत्सव के समान जीना चाहिए। रासलीला का परिदृश्‍य ऐसा है कि चारों ओर संकटों के बादल मँडराए हुए थे। दुराचारी कंस, जरासंध और उसके आसुरी मित्रों का आतंक अपने चरम पर था। नित नवीन षड्यंत्र रचकर श्रीकृष्ण की हत्या का प्रयास किया जाता। ऐसी विकट परिस्थिति में भी मुरलीधर ने अपनी बँसी पर तान छेड़ कर गोपियों के साथ आनंदित हो नृत्य किया। कान्हा जी हमें छोटे-छोटे क्षणों का आनन्द उठाना सिखलाते हैं। भविष्य की चिंता न कर वर्तमान में जीना सिखलाते हैं। हर प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण, विधाता पर विश्वास, सकारात्मकता, शांति और आनंद बनाए रखना ही रास कहलाता है। हम सब गोपियाँ ही तो हैं जो कुंठित हैं और यदि ईश्वर में चित्त लगा लें तो सदा के लिए आनंद की अमृतधारा में डूब जाएँगे और यह समझ जाएँगे की संकट अस्थायी है और बिना विचलित हुए भी उसका सामना किया जा सकता है।

श्रीभगवान गीता में स्वयं ही अपने जन्म का कारण बताते हुए कहते हैं,

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

महाभारत काल में जब युद्ध से पहले ही भटके हुए योद्धा अर्जुन ने हथियार डाल दिए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें मार्ग पर लाने के लिए जो ज्ञान की गंगा बहाई उसे हम गीता कहते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है, वरन् प्राणिमात्र के कल्याण का दुर्लभ ग्रंथ है। संसार भर के विभिन्न क्षेत्र के दिग्गजों, विद्वानों और महापुरुषों ने इस ग्रंथ को अपना जीवन आदर्श और प्रेरणा माना है।

जीवन रूपी महासमर में हम सब भी उसी भटके हुए अर्जुन के समान हैं। परन्तु हम वीर, पराक्रमी योद्धा अर्जुन की तरह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से उन्नत नहीं हैं। अतः प्रत्यक्ष रूप से तो ईश्वर हमारे लिए प्रकट नहीं हुए तथापि गीता के रूप में अवश्य हमारे सारथी बनकर आए हैं। यह ग्रंथ समस्त वेद, पुराणों का सार है। इसे विश्व का पहला मनोवैज्ञानिक ग्रंथ कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। अतः इसमें जीवन के हर रहस्य, हर प्रश्न का उत्तर व्याप्त है। जिस प्रकार कलियुग के प्रत्येक पात्र को महाभारत में ढूँढा जा सकता है, उसी प्रकार इस युग की हर समस्या का निदान गीता जी में व्याप्त है।

गोपियों की भाँति एक दिन के लिए नृत्य करके, सज-सँवर के सोशल मीडिया पर सेल्फी डालकर, लड्डू गोपाल जी को झूला झुलाकर, स्वयं के स्वाद हेतु केक, चॉकलेट, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक आदि अशोभनीय पदार्थों का तथाकथित भोग लगाने जैसा अशास्त्रीय आचरण करके भगवद् प्राप्ति हो या न हो किन्तु श्रीमद्भगवद्गीता पढ़कर निश्चित रूप से परमब्रह्म की अनुभूति की जा सकती है। जीवन जीने की कला गीता पढ़कर ही आएगी, सफल और सार्थक जीवन का मंत्र हमें उसी से प्राप्त होगा। अतः इस जन्माष्टमी संकल्प लें कि दैनिक जीवन में नित्य गीता का पाठ करेंगे और एक सार्थक जीवन की ओर अग्रसर होंगे।

(लेखिका शुभांगी उपाध्याय, कलकत्ता विश्वविद्यालय में पी.एच.डी शोधार्थी हैं। )

नौकरी के नाम पर महिलाओं को स्कूल में बुलाकर करता था रेप, वीडियो बनाकर दूसरी लड़कियों को लाने के लिए कहता: प्रिंसिपल इरफान मोमीन गिरफ्तार, कराची का मामला

पाकिस्तान के कराची (Karachi, Pakistan) में एक स्कूल के प्रिंसिपल को महिलाओं से ब्लैकमेलिंग और रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित इरफ़ान मोमिन गुलशन-ए-हदीद स्कूल का मालिक और प्रिंसिपल भी है। पीड़ित महिलाओं की संख्या लगभग 45 बताई जा रही है।

थानाधिकारी नंद लाल ने पाकिस्तानी मीडिया को सोमवार (4 सितंबर 2023) को बताया कि सबूत के तौर पर स्कूल के CCTV फुटेज आदि अपने कब्ज़े में लिए हैं। स्कूल को भी सील कर दिया गया है। वहीं, अपने बचाव में आरोपित इरफान ने भी पीड़िताओं पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत दर्ज करवाई है।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, कराची के प्राइवेट स्कूल गुलशन-ए-हदीद स्कूल में CCTV कैमरे ठीक करने आए अली लोधी नाम के एक मैकेनिक के हाथ में सबसे पहले प्रिंसिपल के करतूतों की फुटेज लगी थी। वीडियो में प्रिंसिपल महिलाओं से स्कूल कैम्पस में छेड़खानी करता दिख रहा है।

आरोपित ने पुलिस को बताया कि महिलाएँ स्कूल की स्टाफ नहीं है। ये सभी बाहरी हैं। मैकेनिक अली लोधी ने इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस बीच शकील नाम के अन्य व्यक्ति ने आरोपित प्रिंसिपल से उसके वीडियो के आधार पर 10 लाख रुपए उगाही का प्रयास किया। आरोपित प्रिंसिपल ने इस मामले की शिकायत भी दर्ज करवाई।

अपना वीडियो सामने आने से नाराज इरफ़ान मोमिन ने CCTV मैकेनिक अली लोधी को स्कूल में बुलाकर बुरी तरह से मारा-पीटा। इस बीच आरोपित का वीडियो सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर पुलिस ने इरफ़ान मोमिन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर के पुलिस ने अदालत से 7 दिनों का कस्टडी रिमांड लिया है।

दावा किया जा रहा है कि पूछताछ में आरोपित ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। आरोपित ने बताया कि वह महिलाओं को नौकरी देने के नाम पर स्कूल में बुलाया करता था। यहाँ वो उनके साथ यौन शोषण करके उनका वीडियो बना लिया करता था। बाद में इन्हीं वीडियो को दिखाकर वह पीड़िताओं से अन्य लड़कियों को लाने की डिमांड करता था।

पुलिस की एक टीम पीड़ित महिलाओं से सम्पर्क के लिए गठित की गई है। सभी पीड़िताओं के बयान के आधार पर आरोपित प्रिंसिपल पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह भी कहना है कि अगर पीड़िताएँ मामले में शिकायत देने से इंकार भी करती हैं तो भी वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपित प्रिंसिपल पर कार्रवाई की जाएगी।

यह जानकारी भी सामने आई है कि आरोपित इरफान मोमिन अपना स्कूल गुलशन-ए-हदीद सरकार की अनुमति के बिना अवैध तौर पर चला रहा था। इस आधार पर प्रशासन ने स्कूल को सील भी कर दिया है।

जिस कॉन्ग्रेस नेता के नाम में ‘परमेश्वर’, वे पूछ रहे- हिंदू धर्म का जन्म कब हुआ: अब कर्नाटक के गृहमंत्री के बिगड़े बोल, कहा- भारत में सिर्फ जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास

अभी तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को खत्म किए जाने और इसे डेंगू-मलेरिया बताने जाने के बाद उपजा विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि कर्नाटक के गृह मंत्री गंगाधरैया परमेश्वर ने हिन्दू धर्म पर निशाना साधा है। कॉन्ग्रेस नेता G परमेश्वर ने हिन्दू धर्म की उत्पत्ति पर सवाल खड़े कर दिए। हुबली में एक सभा के दौरान उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में कई धर्म उत्पन्न हुए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जैन एवं बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ।

वहीं हिन्दू धर्म की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका कब जन्म हुआ और और किसने इसे शुरू किया, ये अभी भी सवालों के घेरे में है। G परमेश्वर ने कहा कि भारत में जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इस्लाम और ईसाई मजहब बाहर से आया। साथ ही उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई ही सभी धर्मों और मजहबों का सार है। इस पर लोगों ने उन्हें जवाब दिया कि हिन्दू धर्म को सनातन इसीलिए कहा गया है क्योंकि इसका कोई उद्भव नहीं है, ये आदिकाल से है।

जी परमेश्वर ने कहा कि हिन्दू धर्म की उत्पत्ति कैसे ही और किसने इसे शुरू क़िया, अभी भी इस सवाल का जवाब तलाशा जाना है। कर्नाटक में भाजपा के संयुक्त प्रदेश प्रवक्ता S पारख ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा बहुसंख्यक समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करती रहती हैं। वहीं VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ये हैरान करने वाला है कि जिस व्यक्ति के नाम में ‘परमेश्वर’ है, हिन्दू धर्म के मूल पर सवाल उठा रहा है। कॉन्ग्रेस ने आधिकारिक रूप से अब तक उदयनिधि स्टालिन के बयान की भी निंदा नहीं की है।

कर्नाटक के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री CN अश्वनाथ नारायण ने कहा कि वो स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये लोग वामपंथियों के प्रभाव में हैं और हमारे देश भारत में हमारी संस्कृति एवं परंपराओं का विध्वंस करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जी परमेश्वर को याद रखना चाहिए कि इस किस्म का अहंकार इन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि वो विद्वान हैं, अगर हिम्मत है तो अन्य धर्मों के बारे में बोल कर दिखाएँ। उन्होंने कहा कि अगर G परमेश्वर खुश नहीं हैं तो इस धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म में चले जाएँ, किसी ने उन्हें रोका नहीं है।

उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे के खिलाफ रामपुर में FIR; वकीलों ने की थी धार्मिक भावनाएँ आहत करने की शिकायत, UP पुलिस ने शुरू की जाँच

सनातन धर्म के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन (Tamil Nadu CM MK Stalin’s son Udhayanidhi Stalin) के खिलाफ उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में FIR दर्ज हुई है। इसी FIR में स्टालिन का समर्थन करने वाले प्रियांक खड़गे को भी नामजद किया गया है।

प्रियांक खड़गे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं। यह केस राम सिंह लोधी और हर्ष गुप्ता नाम के 2 वकीलों ने रामपुर जिले के थाना सिविल लाइन्स में दर्ज करवाई है। मंगलवार (5 सितंबर 2023) को दर्ज इस FIR में आरोपितों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और 2 समुदायों के बीच नफरत फ़ैलाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ताओं ने अपनी तहरीर में बताया कि उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया व कारोना से करते हुए सनातन धर्म के नाश की बातें कहीं हैं। शिकायतकर्ताओं ने उदयनिधि का यह बयान 4 सितंबर 2023 को एक समाचार पत्र में पढ़ने की जानकारी दी है।

दोनों वकीलों ने खुद को सनातन धर्म का अनुयायी बताया और स्टालिन के बयान से खुद को आघात पहुँचने का आरोप लगाया। शिकायत में आगे दोनों वकीलों ने उदयनिधि स्टालिन के बयान को विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाने वाला और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला बताया है। इस हरकत को जानबूझकर की गई बताते हुए इसकी मंशा लोगों की आस्था को चोट पहुँचाना बताई गई है।

शिकायत में आगे 5 सितंबर 2023 को एक अन्य समाचार पत्र में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के बयान का भी जिक्र किया गया है। प्रियांक खड़गे पर एक भाषण के दौरान उदयनिधि स्टालिन के बयान का समर्थन करने और सनातन धर्म को बीमारी बताने का आरोप लगाया गया है।

FIR Copy

प्रियांक खड़गे कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्यमंत्री हैं, जबकि उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री हैं। एडवोकेट हर्ष और राम सिंह ने दोनों आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस शिकायत पर उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे पर IPC की धारा 153A व 295A के तहत FIR दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर नरेश कुमार इस मामले की जाँच कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

बताते चलें कि उदयनिधि स्टालिन की आपत्तिजनक बयानबाजी के बाद पूरे देश में उनके खिलाफ लोगों में गुस्सा है। हजारीबाग़ में स्टालिन के पुतले के पीछे बाँस घुसेड़ कर प्रदर्शन हुआ है। उत्तराखंड में भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है।