Tuesday, July 23, 2024
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कल्पनाओं में रूस का द्वीप भी खा गया ड्रैगन, नए नक्शे को मॉस्को ने किया खारिज: भारत पहले ही बता चुका है बेतुका दावा

अपने काल्पनिक नक्शे में चीन ने भारत को कुछ हिस्सों पर दावा दिखाया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे चीन की पुरानी आदत बताते हुए कहा था कि बेतुके दावों से किसी दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता। इसी तरह इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, नेपाल और ताइवान भी चीन के नए नक्शे का विरोध कर चुके हैं।

रूस और चीन को सदाबहार मित्र माना जाता है। पर ऐसा लगता है कि अब दोनों के संबंधों में पुरानी गर्मजोशी नहीं रही। पहले चीन ने अपने नए नक्शे में रूस के द्वीप को शामिल किया। अब मॉस्को ने इस नक्शे को खारिज कर दिया है।

अपने काल्पनिक नक्शे में चीन ने भारत को कुछ हिस्सों पर दावा दिखाया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे चीन की पुरानी आदत बताते हुए कहा था कि बेतुके दावों से किसी दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता। इसी तरह इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, नेपाल और ताइवान भी चीन के नए नक्शे का विरोध कर चुके हैं।

दरअसल चीनी सरकार के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ‘काल्पनिक’ नक्शा शेयर किया था। साथ ही लिखा था कि प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 28 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चीन का नया ‘स्टैंडर्ड नक्शा’ लॉन्च किया है। इसमें भूमि और समुद्र के उन क्षेत्रों को चीनी के हिस्से के तौर में दिखाया गया है, जिन्हें ये देश अपना मानते हैं।

रूस को इस बात से एतराज है कि वर्षों पहले बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप पर चीन और उसके बीच विवाद सुलझा लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा पेश कर रहा है। चीन के जारी किए गए मानक नक्शे में बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को पूरी तरह से चीनी क्षेत्र के तौर दिखाया गया है।

बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप पर चीन-रूस आमने- सामने

चीन (China) ने हाल ही में जारी अपने नए नक़्शे में रूस के उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को भी शामिल किया है। गौरतलब है कि इस द्वीप को लेकर दोनों देशों के बीच पहले ही समझौता हो चुका है। इसके मुताबकि इस द्वीप पर रूस का भी हिस्सा है, लेकिन चीन ने नए नक़्शे में पूरे द्वीप को अपना बता डाला है।

चीन और रूस ने 2005 में इस विवाद को सुलझाया था। 2008 तक विवादित द्वीप का विभाजन पूरा हो गया। फिर भी नक्शे में चीन ने इस क्षेत्र पर अपना दावा किया है। रूस ने नए नक्शे को खारिज करते हुए यह बात दोहराई है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जख़ारोवा ने कहा है कि 15 साल पहले द्विपक्षीय समझौतों से द्वीप पर स्वामित्व के सवाल को सुलझा लिया गया था। उन्होंने कहा कि साल 2005 में हुए समझौते के मुताबिक बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को दोनों देशों के बीच बाँटा गया था, लेकिन चीन ने नए नक्शे में 135 वर्ग मील द्वीप पर अपना दावा किया है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों ने कई सालों की मेहनत के बाद सीमा विवाद को सुलझाया था। इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों को

ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया को भी एतराज

चीन के नए नक़्शे में किए दावे पर ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने भी एतराज जताया था। उन्होंने कहा, ”ताइवान को डराने, धमकाने के लिए चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है।” वहीं वियतनाम ने कहा था कि यह नक्शा स्प्रैटली और पारासेल द्वीपों पर उसकी संप्रभुता और उसके जल क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।

फिलीपींस ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान जारी कर विरोध जताया था। फिलीपींस ने बयान में कहा था, “फिलीपींस के समुद्री क्षेत्रों पर चीन की कथित संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र को वैध बनाने के इस नवीनतम प्रयास का अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के तहत कोई आधार नहीं है।”

दक्षिण चीन सागर के अपने इलाकों पर चीनी अधिकार दिखाने के बाद मलेशिया ने प्रोटेस्ट नोट भेजने की बात कही थी। इस सागर पर चीन के दावे को ताइवान, फिलीपीन्स, वियतनाम, मलेशिया के साथ ही ब्रूनेई भी ख़ारिज करता है। यही वजह है कि अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना के पोत लगा रखे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते में आवाजाही की आजादी बनी रहे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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