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‘ये संविधान की मूल भावना पर हमला, कानून का बनाया मजाक’: उदयनिधि स्टालिन पर कार्रवाई के लिए 262 प्रबुद्ध नागरिकों का CJI को पत्र, पूर्व जज से लेकर सेना के रिटायर्ड अफसर तक शामिल

तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी। इसको लेकर देश की 262 प्रतिष्ठित हस्तियों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। पत्र लिखने वालों में पूर्व न्यायाधीश, ब्यूरोक्रेट्स और सेना के रिटायर्ड अफसर शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि उदयनिधि स्टालिन द्वारा दिया गया बयान भारत की एक बड़ी आबादी के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण की तरह है। उन्होंने न केवल नफरती भाषण दिया बल्कि माफी माँगने से भी इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि वह सनातन धर्म के खिलाफ लगातार बोलते रहेंगे। उनके इस तरह के बयान से सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती है। देश के ‘धर्मनिरपेक्ष चरित्र’ को बचाए रखने के लिए स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है।

इस पत्र में मुख्य न्यायाधीश से ‘शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए के आदेश का जिक्र कर उदयनिधि स्टालिन के नफरत भरे बयान पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले बयानों की बढ़ती संख्या देखकर औपचारिक शिकायत दर्ज होने का इंतजार किए बिना राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को स्वत: कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लेकिन, इस गंभीर मामले में प्रशासन द्वारा की गई देरी एक तरह से अदालत की अवमानना है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को लिखे इस पत्र में कहा गया है कि वह सनातन धर्म के महत्व को तो जानते ही हैं, उसे कम करके नहीं आँका जा सकता। हिंदुओं को ही सनातनी कहा जाता है और यह हमेशा ही कहा जाता रहेगा। हिंदू धर्म सभी को अपने हिसाब से अपने भगवान चुनने और उनकी पूजा करने की स्वतंत्रता देता है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि स्टालिन का बयान भारतीय संविधान की मूल भावना पर हमला है। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में किसी भी तरह कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। स्टालिन पर कार्रवाई न होना एक तरह से यह दर्शाता है कि कानून कमजोर हो गया है या फिर इसका मजाक बना दिया गया है।

CJI चंद्रचूड़ के नाम इस पत्र के आखिर में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट से आग्रह है कि वह अवमानना का स्वत: संज्ञान ले और तमिलनाडु सरकार की निष्क्रियता के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करे। साथ ही नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने, सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए निर्णायक कदम उठाए। यह भी कहा कि उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस पत्र पर विचार करेगा और जल्द ही कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने वालों में इन 262 लोगों में मध्य प्रदेश, गुजरात, इलाहाबाद, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, सिक्किम, तेलंगाना हाई कोर्ट के 14 पूर्व न्यायाधीश, 20 राजदूत, पूर्व रक्षा सचिव, पूर्व रॉ प्रमुख, पूर्व विदेश सचिवों सहित 130 सेवानिवृत्त नौकरशाह और सशस्त्र बल के 118 रिटायर्ड अधिकारी शामिल हैं।

क्या बोला था उदयनिधि स्टालिन ने

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 2 सितंबर को कहा था कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

गिलगिट-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान ने मोबाइल इंटरनेट पर लगाई पाबंदी, प्रदर्शन को कुचलने के लिए आर्मी उतारी: शिया लगा रहे भारत में शामिल होने का नारा

पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय भूभाग गिलगिट-बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर शिया विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ईशनिंदा के आरोप में शिया मौलवियों की गिरफ्तारी के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की आवाज कुचलने के लिए इलाके में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है। पाकिस्तानी आर्मी की तैनाती की गई है।

प्रदर्शन का केंद्र स्कर्दू शहर है। प्रदर्शनकारी भारत में विलय की चेतावनी दे रहे हैं। वे ‘खोलो हमारा तारीख-ए-रास्ता हमें नहीं जाना तुम्हारे मुल्क, हम कारगिल की तरफ जाएँगे, रास्ते में रुकावट पैदा करोगे तो हम तुम्हें वहाँ जाकर दिखाएँगे’ जैसे नारे लगा रहे हैं।

प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने गिलगिट-बाल्टिस्तान में शांति और सब कुछ नियंत्रण का दावा किया था। लेकिन डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस दावे के विपरीत प्रदर्शन जारी हैं।

स्कर्दू में यह विरोध-प्रदर्शन के लोगों ने शिया मौलवी आगा बकीर अल-हुसैनी की गिरफ्तारी के विरोध में शुरू हुआ था। आगा बकीर ने पाकिस्तान में कड़े किए जा रहे ईशनिंदा कानून का विरोध किया था। उन्होंने काउंसिल की बैठक में कहा था कि इस कानून की आड़ में पाकिस्तान में शियाओं को निशाना बनाया जाता है। उनके इस बयान पर सुन्नियों ने 22 अगस्त 2023 को प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

आरोप है कि शिया मौलवी ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया था। प्रदर्शनकारी शियाओं ने कराकोरम हाईवे जाम कर दिया था। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

मौलवी की रिहाई की माँग कर रहे प्रदर्शनकारी गृहयुद्ध और भारत में विलय की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह इस क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें ‘चलो, चलो कारगिल चलो’ के नारे गूँज रहे हैं।

गिलगिट-बाल्टिस्तान का दर्द

दरअसल ब्रिटेन से देश को आज़ादी मिलने से पहले गिलगिट-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का अंग हुआ करता था, लेकिन 1947 के बाद से इस पर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा जमा रखा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिया समुदाय पर अन्याय होता आया है। इससे इस समुदाय के लोग खासे परेशान रहते हैं।

पाकिस्तान में इस्लाम के सुन्नी फिरके का वर्चस्व है। वहाँ हिंदू और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि इस्लाम के शिया और अहमदी फिरके भी जुल्म के शिकार हो रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से गिलगिट-बाल्टिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी निवास करती है।

पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के शासन से शुरू होकर लगभग सभी सरकारें इस इलाके की जनसांख्यिकीय बदलाव (Demography Change) करने की कोशिश करती रही हैं। बाहर से लाकर यहाँ सुन्नियों को बसाया जा रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र तीन प्रशासनिक भाग में विभाजित है- बाल्टिस्तान, दामेर और गिलगिट। इसका मुख्य प्रशासनिक केंद्र गिलगिट और स्कर्दू शहर हैं।

पटना यूनिवर्सिटी में गिर गए, जनता दरबार में खुद को ही भूल गए… ‘गजनी’ बन गए हैं बिहार के CM नीतीश कुमार या फिर I.N.D.I.A. की लगी नजर?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना विश्वविद्यालय में एक उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान गिर गए। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सँभाला। वो सीनेट हॉल के उद्घाटन के लिए पहुँचे हुए थे। बताया जा रहा है कि इस घटना में नीतीश कुमार को कोई चोट नहीं आई है। उनके संबोधन के दौरान समर्थकों ने ‘देश का PM कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो’ के नारे भी लगाए। पटना विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार के गिरने के बाद ये अटकलें चालू हो गई हैं कि वो स्वस्थ हैं या नहीं।

ये सब इसीलिए, क्योंकि गिरने के 1 दिन पहले ही उनका एक वीडियो वायरल होने के कारण लोग उन पर सवाल खड़े कर रहे थे। असल में उन्होंने ‘जनता दरबार’ लगाया था और इस दौरान एक व्यक्ति अपनी समस्या लेकर आया तो नीतीश कुमार ने वहाँ मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि गृह मंत्री को फोन लगाया जाए। जबकि बात ये है कि बिहार में गृह मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के पास है। यानी, नीतीश कुमार ही गृह मंत्री हैं। उनके इस तरह के निर्देश से खुद अधिकारी भी हैरान हो गए।

उन्होंने पूछा कि क्या गृह सचिव को फोन लगाना है, इस पर नीतीश कुमार बोलने लगे कि अरे मंत्री बैठे हुए हैं न। फिर अधिकारियों ने मंत्री विजय चौधरी को फोन लगा दिया, जिस पर नीतीश कुमार ने फिर डाँटा कि उनको फोन लगाने के लिए थोड़े कहा गया था। अधिकारी इस पूरे वाकये के दौरान हैरान-परेशान दिखे और शिकायतकर्ता सामने बैठा रहा। गृह विभाग सीएम के बाद सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है, ऐसे में वो कैसे इस चीज को भूल गए इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस वीडियो को ट्वीट करते हुए बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने टिप्पणी की, “नीतीश जी जिस गृह विभाग के मंत्री हैं उसी विभाग को भूल गए। उन्होंने अपने ‘मेमोरी लॉस’ होने को प्रमाणित किया है। आज बिहार गुंडाराज से त्राहिमाम कर रहा है और नीतीश बाबू गजनी बने हुए हैं। अब आपकी उम्र आराम करने की हो गई है। अब आप से बिहार नहीं संभल रहा है तो नीतीश बाबू, बिहार को अब बख्श दीजिए।” उन्होंने नीतीश कुमार को ‘मेमोरी लॉस सीएम’ करार दिया और ये हैशटैग भी लगाया।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार के लिए सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है? हाल ही में बिहार में रक्षाबंधन और दशहरा समेत कई छुट्टियों में कटौती की गई थी। इसके बाद भाजपा ने तगड़ा विरोध किया था और कहा था कि जानबूझकर हिन्दुओं को दबाया जा रहा है। अब खबर आई है कि इन छुट्टियों को रद्द करने का फैसला वापस ले लिया गया है। यानी, बिहार सरकार कई मामलों में कन्फ्यूज्ड नजर आ रही है, सिर्फ CM ही नहीं कन्फ्यूजन में नज़र आ रहे हैं।

क्या नीतीश कुमार के मन में अब भी विपक्ष के नए गठबंधन I.N.D.I.A. का संयोजक न बनाए जाने का मलाल है? जहाँ राजद से तेजस्वी यादव (डिप्टी CM) और DMK से स्टालिन (CM) कोऑर्डिनेशन कमिटी में हैं, फिर जदयू से नीतीश कुमार की जगह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को डाला गया, क्योंकि नीतीश कुमार को संयोजक का पद चाहिए था? नीतीश कुमार ने मुंबई में विपक्ष की तीसरी बैठक से पहले कई बार बयान दिया कि उनके मन में किसी पद की लालसा नहीं है, लेकिन ये सन्देश देने का एक तरीका होता है नेताओं का।

अगर पद की लालसा नहीं होती तो वो तेजस्वी यादव को नेतृत्व देकर सीएम पद छोड़ चुके होते, लेकिन वो तेजस्वी यादव को भविष्य बताने के बावजूद इस पद पर बने हुए हैं। उधर लालू यादव ने पटना में हुई पहली विपक्षी बैठक में ही राहुल गाँधी के ‘दूल्हा’ बनने और उनके विवाह पर चर्चा छेड़ दी थी। लेकिन, विपक्ष का ‘दूल्हा’ बनने का ख्वाब तो शायद नीतीश कुमार ने सजो रखा है। उनके मन में ये मलाल भी हो सकता है कि लालू यादव ने ये क्यों नहीं कभी खुल कर कहा कि विपक्ष के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नीतीश कुमार हों।

ये भी गौर कीजिए कि हाल ही में जदयू के विधायक गोपाल मंडल ने गठबंधन के साथी लालू यादव को खूब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद लालू यादव का दिमाग सठिया गया है, नीतीश कुमार ही प्रधानमंत्री पद के लिए अच्छे उम्मीदवार हो सकते हैं क्योंकि उन्होंने ही विपक्षी एकजुटता की शुरुआत की थी। मुंबई में अपने भाषण के दौरान भी नीतीश ने ये ‘एहसान’ जताना नहीं भूला कि उन्होंने ही सबको बार-बार कहा कि एक हो जाइए, अब उन्हें कुछ नहीं चाहिए।

ऊपर से राहुल गाँधी दिल्ली में लालू यादव के आवास पर पहुँचे और उनसे मटन बनाना सीखा। वो अपनी बहन प्रियंका गाँधी के लिए भी मटन पैक कर के ले गए। राहुल गाँधी और लालू यादव इतने करीब आ गए हैं, क्या इससे नीतीश कुमार के मन में कुछ ऐसा चल रहा है कि वो भूल जा रहे हैं कि वो किस विभाग के मंत्री हैं? आखिर वो क्या है, जो नीतीश कुमार को खाए जा रहा है? नीतीश कुमार गिर गए – ये उनके स्वास्थ्य का मसला हो सकता है और इस पर उनके स्वस्थ होने की कामना की जा सकती है, उनसे सहानुभूति जताई जा सकती है। लेकिन, वो भूल जाएँ कि उनके पास कौन सा विभाग है – ये चिंतनीय है।

ये भी याद कीजिए कि विपक्ष की बेंगलुरु में दूसरी बैठक में नीतीश कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिए बिना निकल गए थे और तब भी उनकी नाराज़गी की बात सामने आई थी। अगर नीतीश कुमार को सच में कोई समस्या महसूस हो रही है तो उन्हें आराम करना चाहिए। उन्हें युवाओं को मौका देना चाहिए और खुद स्वास्थ्य लाभ लेना चाहिए। अगर उन्हें कोई मलाल है तो इस पर सीधे-सीधे अपनी बात रखनी चाहिए। वैसे भी कभी भाजपा तो कभी राजद के साथ मिल कर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार को विपक्षी नेता ‘पल्टूराम’ कहते हैं।

‘नीरज चोपड़ा का भाला ले गए चोर’, चौराहे पर लगी है प्रतिमा: Video वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस को करना पड़ा ट्वीट, जानिए सच

जेवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक हैं और इस खेल में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी हैं। ट्रैक एन्ड फिल्ड के इस खेल में उन्होंने दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। 2020 में उन्होंने जापान में आयोजित ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। अब उन्होंने बुडापेस्ट में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल को जीत कर गोल्ड मेडल जीता है। मई 2023 में वो वर्ल्ड की नंबर-1 रैंकिंग पर भी पहुँचे। भारत में खेल के क्षेत्र में नाम कमाने का लक्ष्य रखने वाले कई बच्चे उनसे प्रेरणा लेते हैं।

इसी बीच, उत्तर प्रदेश के मेरठ से उन्हें लेकर कुछ ऐसी खबर आई जिसने सबको हैरान कर दिया। मामला मेरठ के स्पोर्ट्स सिटी चौराहे का है, जहाँ नीरज चोपड़ा के सम्मान में उनका स्टेचू बनवाया गया था। गोल्डन कलर का ये स्टेचू भाला फेंकने वाले पोज में बनवाया गया है। सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया के दौरान ये स्टेचू बनवाई गई थी। इसी बीच खबर फ़ैल गई कि स्टेचू में जो भाला लगाया गया था, वो चोरी हो गया है। सोशल मीडिया के माध्यम से खबर फैली और लोग वहाँ जमा होकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

‘मेरठ में नीरज चोपड़ा के स्टेचू का भाला चोरी’: सोशल मीडिया वीडियो में दावा

एक वीडियो भी पोस्ट किया गया और दावा किया गया कि इसमें नीरज चोपड़ा के स्टेचू के साथ में लगा भाला गायब दिख रहा है। ‘रिपोर्ट 1 भारत’ के संस्थापक मयंक ने भी इस वीडियो को शेयर किया और लिखा कि पुलिस की पेट्रोलिंग के बावजूद ये हो गया।

यहाँ तक कि ABP के ‘अनकट’ वाले चैनल ने भी इस झूठ को आगे बढ़ाया और लिखा कि मेरठ में नीरज चोपड़ा की स्टेचू मर लगा भाला किसी ने चुरा लिया।

यहाँ तक कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भी खबर चलाई कि मेरठ में नीरज चोपड़ा के भाले का एक हिस्सा गायब है और पुलिस की जाँच में सामने आ रहा है कि ये डकैती का मामला हो सकता है। मीडिया संस्थान ने स्थानीय एक्टिविस्ट लोकेश खुराना के हवाले से चलाया कि भाला या तो टूटा है या फिर चोरी हुआ है, जल्द इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भी चलाया – नीरज चोपड़ा के स्टेचू से भाला चोरी

कुछ अन्य सोशल मीडिया हैंडलों ने ये झूठ फैलाया, देखिए:

मेरठ: नीरज चोपड़ा के भाला चोरी होने वाले अफवाह का सच

हालाँकि, मेरठ पुलिस की जाँच के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। पुलिस ने अपने बयान में बताया है, “मेरठ डेवलपमेंट अथॉरिटी (MDA) से वार्ता करने पर पता चला है कि 2 महीने पहले उनके द्वारा स्वयं जो नकली भाला लगाया गया था, व्यापार बंधुओं के सुझाव के बाद उसे बदल कर असली भाला लगाया गया है। ये वर्तमान में भी लगा हुआ है। आपको सचेत किया जाता है कि बिना पुष्टि के भ्रामक खबरें न चलाएँ, अन्यथा विधिक कार्यवाही करने हेतु प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

यानी, भाला चोरी नहीं हुआ है बल्कि प्रशासन द्वारा ही बदला गया है।

कंगाल पाकिस्तान ने लड़ाकू विमान के नाम पर म्यांमार को थमाए ‘कबाड़’, जेएफ-17 थंडर की गड़बड़ी पर सैन्य शासन ने माँगा जवाब

कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान ने म्यांमार को जिन लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की थी वे कबाड़ बन गए हैं। बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान जेएफ-17 थंडर में गड़बड़ी के बाद म्यांमार के सैन्य शासन ने नाराजगी जताई है। सख्त संदेश भेजकर पाकिस्तान से जवाब माँगा है।

इस आपूर्ति के लिए दोनों देशों के बीच 2016 में समझौता हुआ था। इन विमानों को पाकिस्तान एयरोनॉटिक्स कॉम्प्लेक्स ने चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर तैयार किया था। लेकिन अब ये लड़ाकू विमान उड़ने की स्थिति में नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, JF-17 लड़ाकू विमानों के कबाड़ होने पर म्यांमार की सत्ता में काबिज सैन्य शासक जुंटा नेता जनरल अंग मिग ह्लाइंग ने कड़ा ऐतराज जताया है। साथ ही पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर को कड़ा संदेश भेजा है।

पाकिस्तान ने म्यांमार को साल 2019 से 2021 के बीच 11 जेएफ-17 लड़ाकू विमान बेचे थे। लेकिन अब इन सभी को अयोग्य घोषित किया गया चुका है। साथ ही टेक्निकल खराबी के चलते भी ये उड़ भी नहीं पा रहे हैं। इसलिए म्यांमार अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। इन विमानों की खरीदी के लिए म्यांमार ने साल 2016 में पाकिस्तान से करार किया था। इसके तहत ही पाकिस्तान ने उसे ये विमान दिए थे। लेकिन विमानों की डिलीवरी के बाद ही म्यांमार को तकनीकी और बनावट में खराबी का पता चल गया था।

इसके बाद म्यांमार को इन विमानों की उड़ान बंद करनी पड़ी थी। इसके बाद इन लड़ाकू विमानों की मरम्मत के लिए पाकिस्तान ने अपनी टीम भी भेजी थी। लेकिन इसके बाद भी इनमें कोई सुधार नहीं हो सका। अब ये विमान उड़ने की स्थिति में नहीं है। म्यांमार को मजबूरन इन्हें खड़ा रखना पड़ रहा है। म्यांमार को दिए गए जेएफ-17 के फेल होने के बाद अब पाकिस्तान से कोई भी देश विमान खरीदने को तैयार नहीं है।

मीडिया में नरिंजरा न्यूज के हवाले से कहा जा रहा है कि इस मामले में म्यांमार में चीन के राजदूत ने सैन्य शासक जनरल अंग मिन ह्लाइंग को चीन सरकार के अधिकारियों द्वारा भेजा गया एक मैसेज भी दिया है। लेकिन यह मैसेज क्या था और किसको लेकर था, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। बता दें कि म्यांमार इस मामले में लंबे समय से चीन से हस्तक्षेप की माँग करता रहा है।

‘वर्ल्ड कप में भी खिलाड़ियों जर्सी की पर लिखा हो भारत’: वीरेंद्र सहवाग ने ‘India’ को बताया गुलामी की निशानी, अमिताभ बच्चन बोले – भारत माता की जय

मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 18 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक मोदी सरकार द्वारा बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र में हमारे देश का नाम सिर्फ ‘भारत’ रखने वाला संविधान संशोधन लाया जाएगा, यानी ‘India’ को हटा दिया जाएगा। G20 के लिए राष्ट्रपति भवन के आमंत्रण पत्रों में ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ लिखा है, जिससे इन अटकलों को बल मिला है। अब इस मामले को लेकर फिल्म से लेकर क्रिकेट जगत की हस्तियों की प्रतिक्रियाएँ आनी भी चालू हो गई हैं।

इस दौरान एक व्यक्ति ने वीरेंद्र सहवाग के उस ट्वीट की तरफ ध्यान दिलाया, जो उन्होंने एशिया कप के भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान किया था। इस ट्वीट में उन्होंने ‘BHAvsPAK’ का हैशटैग लगाया था। लोगों ने कहा कि वीरेंद्र सहवाग को शायद पहले से इसका अंदेशा था। इस पर टिप्पणी करते हुए सहवाग ने कहा कि उनका हमेशा से मानना है कि देश का नाम ऐसा रहना चाहिए जिससे हमारे भीतर गर्व की भावना आए। उन्होंने कहा कि हम भारतीय हैं, ‘India’ नाम अंग्रेजों का दिया हुआ है।

वीरेंद्र सहवाग ने ये भी कहा कि ये काफी पहले किया जाना चाहिए था, हमें हमारे देश का नाम फिर से आधिकारिक रूप से केवल ‘भारत’ रखा जाना चाहिए था। उन्होंने BCCI और इसके सेक्रेटरी जय शाह से अपील की कि ODI क्रिकेट विश्व कप के दौरान भारतीय क्रिकेटरों की जर्सी पर ‘India’ की जगह ‘भारत’ लिखा हो। मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की भी घोषणा हुई है। टीम की जीत की कामना करते हुए सहवाग ने लिखा कि इसे ‘टीम भारत’ कहा जाना चाहिए।

इस दौरान वीरेंद्र सहवाग ने नीदरलैंड्स और म्यांमार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कैसे 1996 में हॉलैंड भारत में वर्ल्ड कप खेलने आया था, लेकिन 2003 में जब भारत से उसका मैच हुआ तो वो हॉलैंड नहीं बल्कि नीदरलैंड्स बन गया था। इसी तरह, सहवाग ने बताया कि कैसे बर्मा ने अंग्रेजों के दिए नाम को त्याग कर वापस अपना नाम म्यांमार रख लिया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कई देश हैं, जो अपने मूल नाम की तरफ लौटे हैं और अपना नाम बदला है।

वीरेंद्र सहवाग ने इस दौरान साफ़ किया कि राजनीति में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, पिछले 2 चुनावों में देश की दोनों बड़ी पार्टियों ने उन्हें चुनाव लड़ने का न्योता दिया था। इसी तरह अमिताभ बच्चन ने भी अपनी ‘T 4759’ नामक ट्वीट में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा वाला इमोजी लगाया और लिखा, “भारत माता की जय।” इससे ये अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन भी देश का नाम सिर्फ ‘भारत’ रखे जाने और ‘India’ हटाए जाने से खुश हैं।

कुछ भाजपा नेताओं के भी बयान देखें तो इशारों-इशारों में इसी तरह की बातें की गई हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का ताज़ा ट्वीट देखिए। उन्होंने लिखा है, ‘भारत का का गणतंत्र: मैं खुश और गर्वित हूँ कि हमरी सभ्यता अमृत काल की तरफ बढ़ रही है।’ इससे पहले भी जब विपक्ष ने अपने गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. रखा था तब सीएम सरमा ने खुद को भारत का निवासी बताया था और अपने ट्विटर बायो में से ‘India’ हटा दिया था। सोशल मीडिया पर भी लोग उत्साहित होकर देश का नाम केवल ‘भारत’ रखे जाने का स्वागत कर रहे हैं।

जैकलीन फर्नांडीस को सुकेश ने लिखा लेटर: हिरोइन की ‘खुशी’ के लिए खोलेगा जानवरों का अस्पताल, कुत्ते-बिल्ली-घोड़ों का फ्री होगा इलाज

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की मंडोजी जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने हिरोइन जैकलीन फर्नांडीस को एक और लेटर लिखा है। इस लेटर में उसने कहा है कि जैकलीन को जानवर बहुत पसंद हैं। इसलिए वह बेंगलुरु में जानवरों का हॉस्पिटल बनवाने जा रहा है। जहाँ फ्री में इलाज की व्यवस्था होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में IANS के हवाले से कहा जा रहा है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन के नाम लिखे खत में लिखा है कि हॉस्पिटल बनाने के लिए उसकी टीम ने पूरी प्लानिंग कर ली है। यह हॉस्पिटल जैकलीन के जन्मदिन 11 सितंबर 2023 से बनना शुरू होगा। 11 सितंबर 2024 से हॉस्पिटल शुरू भी हो जाएगा। यह हॉस्पिटल 25 हजार वर्ग फ़ीट में बनेगा और इस बनाने में 25 करोड़ का खर्चा आएगा। इसमें कुत्ते, बिल्ली, घोड़ों समेत सभी जानवरों का इलाज होगा।

सुकेश ने जैकलीन को ‘क्वीन बी’ कहते हुए लिखा है, “जैसा तुम चाहती थी इस हॉस्पिटल में बेहतरीन पशु चिकित्सक होंगे। सभी तरह का इलाज और सर्जरी मुफ्त में होगी। मुझे उम्मीद है कि यह सब जानने के बाद तुम्हारे चेहरे पर सुंदर सी मुस्कान आएगी। तुम्हारी मुस्कान और प्यार से ही इस समय मुझे ताकत मिल रही है। अमेरिका में हुई इंडियन परेड में तुम बहुत खूबसूरत लग रही थी। तुम्हें देखने के बाद मैं फिर से प्यार करने के लिए मजबूर हो गया।”

‘जवान’ के गाने पर नाचा सुकेश

सुकेश ने इस लेटर में यह भी लिखा है कि उसने शाहरुख की फिल्म ‘जवान’ के गाने ‘चलेया’ पर डांस किया। उसने इस खूबसूरत गाने के लिए शाहरुख खान और अनिरुद्ध को धन्यवाद दिया है। साथ ही इस गाने को जैकलीन फर्नांडीज को डेडिकेट किया है।

होली पर जैकलीन को दी थी शुभकामनाएँ

बता दें कि इससे पहले होली पर भी सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडीस को पत्र लिखा था। इस पत्र में उसने कहा था “मैं बहुत कमाल की इंसान, शानदार और मेरी सदाबहार जैकलीन को होली की शुभकामनाएँ देता हूँ। रंगों के त्योहार के दिन मैं तुमसे वादा करता हूँ, जो रंग फीके या गायब हो गए हैं उन्हें 100 बार वापस लाऊँगा। मेरे अंदाज में कहूँ तो यह साल बहुत चमकदार और रौशन होगा। मैं इसे सुनिश्चित करूँगा और यह मेरी ज़िम्मेदारी भी होगी।”

सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को ‘आई लव यू’ कहते हुए आगे लिखा था, “माई बेबी, हमेशा मुस्कुराती रहो, तुम जानती हो कि तुम मेरे लिए क्या हो, और कितनी अहम हो… लव यू माई प्रिंसेज, मिस यू, माई बी, माई बोम्मा, माई लव।”

जैकलीन को दिए थे करोड़ों के गिफ्ट

बता दें कि ₹215 करोड़ की ठगी के इस मामले में ईडी जैकलीन की 7.27 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जैकलीन ने यह रकम फिक्स डिपॉजिट के रूप में अपने पास रखी हुई थी।

रिपोर्ट्स की मानें तो सुकेश ने जैकलीन की माँ को लग्जरी कार मासेराती और पॉर्श कार, उनकी बहन को 1.50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.20 करोड़ रुपए) लोन के रूप में दिए थे। वहीं, जैकलीन के भाई को भी 15 लाख रुपए दिए थे। जैकलीन की बहन अमेरिका में] जबकि भाई ऑस्ट्रेलिया में रहता है।

इसके अलावा, महाठग सुकेश ने जैकलीन को डिजाइनर गुच्ची, चैनल एवं वाईएसएल बिर्किन के महँगे बैग व महँगे झुमके गिफ्ट किए थे। वाईएसएल, लुई वुइटन और गुच्ची के जूते, कार्टियर चूड़ियाँ तथा हेमीज़ एवं टिफ़नी के कंगन दिए। इसके अलावा रोलेक्स, रोजर डुबुइस और फ्रेेंक मूलर की लग्जरी घड़ियाँ गिफ्ट की थी।

यही नहीं, सुकेश जैकलीन पर इतना मेहरबान था कि उसने BMW (5) और मिनी कूपर कार भी जैकलीन को गिफ्ट की थी। इसके अलावा, गुच्ची के दो जिमवियर, 52 लाख रुपए का अरबी घोड़ा एस्पुएला, 9-9 लाख रुपए की तीन फारसी बिल्लियाँ भी दी थी। हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस ने बार-बार यह दावा किया है उसने कई सारी चीजें सुकेश चन्द्रशेखर को लौटा दी थी।

‘लाइव टेलीकास्ट हो रहा…’: जब सुप्रीम कोर्ट में पढ़ा जाने लगा अकबर लोन का ‘माफीनामा’ तो बेचैन हो गए कपिल सिब्बल, 370 पर बहस का आखिरी दिन

‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के सांसद अकबर लोन ने विधायक रहते जम्मू कश्मीर की विधानसभा में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ का नारा लगाया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हलफनामा दायर कर माफ़ी माँगने को कहा।अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान ये मामला उठा था। इस दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कैसे अकबर लोन ने एक सार्वजनिक रैली के दौरान भी आतंकियों के प्रति हमदर्दी जताई थी। इसमें भारत को विदेशी देश बताया गया था।

SG ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अकबर लोन ने जो एफिडेविट दायर की है, उसमें उन्हें ये ज़रूर कहना चाहिए कि वो अपनी कही गई उन बातों का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने ये भी लिख कर दिए जाने की माँग की कि वो न तो किसी आतंकवादी का समर्थन करते हैं न देश के किसी अलगाववादी का। हालाँकि, इस दौरान कपिल सिब्बल फँस गए। जब सॉलिसिटर जनरल ने सांसद के बयान का जिक्र किया तो वो कहने लगे कि सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट हो रहा है, इसे न पढ़ा जाए।

हालाँकि, मुख्य न्यायाधीश ने भी एसजी से कहा कि वो इसे न पढ़ें, इसीलिए एसजी ने पूरा न पढ़ते हुए सिर्फ बताया कि कैसे उस रैली में आतंकियों के प्रति अकबर लोन ने हमदर्दी जताई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में पेश गोपाल शंकरनारायणन ने इस पर आपत्ति जताई कि अनुच्छेद-370 के पक्ष में याचिका दायर करने पर उनलोगों को अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया जा रहा है।

हालाँकि, इस दौरान CJI डीवाई चन्द्रचूड़ ने उन्हें आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट में किसी शिकायत के संबंध में याचिका लेकर आना संवैधानिक अधिकार है, इसमें अलगाववादी एजेंडे वाली कोई बात नहीं है। SG ने भी कहा कि याचिका दायर करना अलगाववादी नहीं है। इस दौरान कपिल सिब्बल ने बतौर अधिवक्ता पेश होते हुए दावा किया कि उनलोगों ने केवल कानून और संविधान के हिसाब से ही बातें रखी हैं। इस दौरान उन्होंने उन रियासतों की सूची दी, जो भारतीय गणतंत्र में शामिल हुए और दलील दी कि जम्मू कश्मीर का मामला अलग था।

हालाँकि, CJI ने ध्यान दिलाया कि इस करार में ये भी कहा गया था कि आगे के सभी निर्णय भारत के संविधान के हिसाब से लिए जाएँगे और पिछले जो भी करार हुए थे वो सब निलंबित रहेंगे। उसमें लिखा था कि आने वाले संविधान के हिसाब से चीजें चलेंगी, क्योंकि तब संविधान बना नहीं था। कपिल सिब्बल ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने को संविधान की मूल संरचना से छेड़छाड़ करार दिया। उन्होंने पूछा कि कानून के किस प्रावधान के तहत किसी राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदल दिया गया?

उन्होंने राज्य में विधानसभा चुनाव न कराए जाने को लेकर भी भारत सरकार पर निशाना साधा। बता दें कि CJI कह चुके हैं कि मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को ही इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। कपिल सिब्बल ने इस दौरान अनुच्छेद-356 के तहत संसद को शक्ति दिए जाने पर भी सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान ही अकबर लोन द्वारा 2015 में दिए गए बयान का मुद्दा भी उठा था। सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला रिजर्व रखेगी और अगली तारीख़ पर फैसला सुनाएगी।

अकरम, शाहिद और अली को मौत की सजा… गैंगरेप के बाद ‘बहन’ को पेचकस से गोद दिया था, उसके दो बच्चों की गला दबाकर की थी हत्या

दिल्ली की तीस ​हजारी कोर्ट ने मोहम्मद अकरम, शाहिद और रफत अली उर्फ मंजूर अली को मौत की सजा सुनाई है। तीनों को आठ साल पुराने गैंगरेप और तिहरे हत्याकांड का दोषी पाए जाने की सजा सुनाई गई है। यह मामला 2015 में पश्चिमी दिल्ली के ख्याला में एक महिला से गैंगरेप और दो बच्चों सहित उसकी हत्या से जुड़ा है।

गैंगरेप के बाद जिस महिला की पेचकस से गोदकर हत्या की गई थी, उसे मोहम्मद अकरम ‘बहन’ कहता था। महिला की हत्या के बाद उसके 6 और 7 साल के बच्चों को गला दबाकर मार डाला गया था। तीस हजारी कोर्ट की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज आंचल ने धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत शाहिद, अकरम और रफत अली को मौत की सजा सुनाई है।

इन्हें सामूहिक बलात्कार और डकैती के अपराध में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 35000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में अदालत ने 22 अगस्त को आरोपितों को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने कहा कि दोषियों को पता था कि महिला का पति जयपुर गया है और उसके विश्वास को तोड़ते हुए इस घिनौनी साजिश को अंजाम दिया गया।

मृतका के पति ने की शिकायत पर 2015 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें एक नाबालिग (किशोर) सहित चार लोग शामिल थे।

क्या है मामला ?

पश्चिमी दिल्ली के ख्याला में सितंबर 2015 को इस वारदात के दिन 27 साल की महिला अपने पाँच बच्चों के साथ घर में अकेली थी। मृतका के पति के बयान पर दर्ज एफआईआर के मुताबिक घर लौटने पर उसे पत्नी और दो बच्चे मृत मिले थे।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला शिकायतकर्ता जींस पैंट बेचने का काम करता था। वह हर शनिवार को जयपुर जाता था। दिल्ली में वह ख्याला के रघुबीर नगर में किराए के घर में पत्नी, दो बेटों और तीन बेटियों के साथ रहता था। घटना के समय उसके बेटों की उम्र एक और सात साल तथा बेटियों की उम्र दो, तीन और 6 साल थी।

महिला का पति हमेशा की तरह 19 सितंबर 2015 को भी जयपुर गया था। जब वह जयपुर लौटा तो घर का दरवाजा बाहर से बंद था। दरवाजा खोलते ही उसने अपनी पत्नी और एक बेटे और एक बेटी को मरा हुआ पाया। तीन अन्य बच्चे फर्श पर सो रहे थे। उसकी पत्नी की गर्दन और नाक पर खून लगा हुआ था और उसकी गर्दन दुपट्टे से बँधी हुई थी। वहीं बेटी की गर्दन रूमाल से बँधी हुई थी।

पुलिस पूछताछ में उसने मकान मालिक फहीम पर शक जताया था। वारदात के बाद घर से कुछ आभूषण और पैसे भी गायब मिले थे। वहीं पहली मंजिल पर रहने वाले किरायेदार के बेटे शब्बू ने 20 सितबंर की रात करीब 09.45 बजे अकरम और कुछ लोगों को ऊपर की मंजिल पर जाते देखने की बात कही थी। इसके बाद मृतका के पति ने अकरम और उसके साथ दिखे नाबालिग को जानने की जानकारी पुलिस को दी थी।

पोस्टमार्टम से बलात्कार का पता चला

महिला से रेप का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) जोड़ी गई थी। शाहिद और मोहम्मद अकरम को 4 अक्टूबर 2015 को रघुवीर नगर के पास एक पार्क से गिरफ्तार किया गया।

मृतका से पहले से जान-पहचान होने के कारण वे आसानी से घर में घुस गए थे। पूछताछ में दोनों ने रफत अली के साथ मिलकर हत्या, डकैती और सामूहिक बलात्कार का खुलासा किया था। इसके बाद केस में आईपीसी की धारा 376 (डी) जोड़ी गई थी। बाद में घटना में शामिल नाबालिग को दिल्ली के खजूरी चौक से और रफत अली को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया था।

G20 देशों को राष्ट्रपति के न्योते में ‘भारत’, असम के CM के ट्वीट में ‘भारत’, मीडिया के दावों में ‘भारत’: क्या संसद के विशेष सत्र में INDIA हटाने जा रही है मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 18 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में कोई क्वेश्चन ऑवर नहीं होगा, साथ ही प्राइवेट मेंबर बिल भी नहीं लाया जा सकेगा। साफ़ है, संसद के इस विशेष सत्र का विशेष उद्देश्य भी है, क्योंकि हाल ही में मॉनसून सत्र का समापन हुआ है। चूँकि मोदी सरकार ने बताया नहीं है कि इसका उद्देश्य क्या है, इसीलिए मीडिया में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, विपक्षी दल भी इसमें कूद पड़े हैं और बहस का एक नया दौर शुरू हो गया है।

पहले चर्चा चली कि मोदी सरकार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल लेकर आ रही है, जिसके तहत देश भर में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव होंगे। हालाँकि, इसके लिए हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय कमिटी बनाई गई है, ऐसे में कमिटी को रिपोर्ट तैयार करने में लंबा समय लग सकता है। अब चर्चा है कि देश का नाम ‘India’ हटा कर सिर्फ ‘भारत’ रखे जाने की योजना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इन अटकलों को और बल दिया है और कहा है कि ये सच हो सकता है।

कॉन्ग्रेस के जयराम रमेश ने कहा – G20 के आमंत्रण में ‘India’ की जगह ‘भारत’

उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा, “तो ये खबर वस्तुतः सच है। 9 सितंबर को G20 के डिनर के लिए राष्ट्रपति भवन की तरफ से जो आमंत्रण भेजे गए हैं, उसमें हमेशा की तरह ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’ नहीं, बल्कि इसकी जगह ‘प्रेजिडेंट ऑफ भारत’ लिखा हुआ है। अब संविधान के अनुच्छेद 1 को बदल कर ऐसे किया जा सकता है – ‘भारत, जो इंडिया था, राज्यों का एक संघ है।’ लेकिन, अब तो राज्यों के इस संघ पर भी प्रहार हो रहा है। नरेंद्र मोदी इंडिया, जो भारत है, राज्यों का संघ है, उसके इतिहास को तोड़-मरोड़ सकते हैं और इसे विभाजित कर सकते हैं। लेकिन, हम पीछे नहीं हटेंगे।”

राष्ट्रपति भवन द्वारा भेजे गए आमंत्रण पत्र में ‘India’ नहीं, ‘भारत’

जयराम रमेश ने ये भी बताया कि I.N.D.I.A. गठबंधन का औचित्य क्या है? उन्होंने कहा कि ये भारत है – समरसता, मेलजोल, समन्वय और विश्वास लेकर आना। उन्होंने BHARAT का फुल फॉर्म बताया – Bring Harmony, Amity, Reconciliation And Trust. साथ ही उन्होंने ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ नामक टैगलाइन भी लगाया। यानी, विपक्षी दल भी इस अटकल को हवा दे रहे हैं कि ताज़ा संसद सत्र में देश का नाम सिर्फ ‘भारत’ रखा जाएगा और ‘India’ हटा दिया जाएगा जो अंग्रेजों ने रखा था।

क्या नए संसद सत्र के बाद देश का नाम नहीं रहेगा ‘India’?

कुछ भाजपा नेताओं के भी बयान देखें तो इशारों-इशारों में इसी तरह की बातें की गई हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का ताज़ा ट्वीट देखिए। उन्होंने लिखा है, ‘भारत का का गणतंत्र: मैं खुश और गर्वित हूँ कि हमरी सभ्यता अमृत काल की तरफ बढ़ रही है।’ इससे पहले भी जब विपक्ष ने अपने गठबंधन का नाम I.N.D.I.A. रखा था तब सीएम सरमा ने खुद को भारत का निवासी बताया था और अपने ट्विटर बायो में से ‘India’ हटा दिया था। सोशल मीडिया पर भी लोग उत्साहित होकर देश का नाम केवल ‘भारत’ रखे जाने का स्वागत कर रहे हैं।

अब कुछ दिन पहले की बात करते हैं। 28 जुलाई, 2023 को ये मामला संसद में वैसे भी गूँज चुका है। भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने माँग की थी। उन्होंने कहा था कि अभी जब आज़ादी का अमृत काल चल रहा है, संविधान के अनुच्छेद-1 को संशोधित कर के इस पुण्य पावन धरा का नाम केवल ‘भारत’ रखा जाना चाहिए। कि देश का नाम सिर्फ ‘भारत’ रखा जाए और ‘इंडिया’ को हटा दिया जाए। उन्होंने याद दिलाया था कि विगत स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि देश को दासता के चिह्नों से मुक्ति दिलाए जाने की आवश्यकता है।

ऐसे में इन अटकलों को बल मिलना लाजिमी है कि क्या देश का नाम अब सिर्फ ‘भारत’ रहेगा, ‘India’ नहीं। प्राचीन काल से हमारे देश का नाम भारत ही रहा है। हाल ही में RSS प्रमुख भागवत ने भी कहा था कि हमें अपने देश का नाम ‘India’ की जगह ‘भारत’ ही कहना चाहिए, इससे बदलाव आएगा। ट्विटर पर लगातार लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं कि ऐसा होता है तो ये सही है या गलत। हालाँकि, इसके लिए हमें संसद के विशेष सत्र तक इंतजार करना होगा।