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यह ऋषियों की देवभूमि है, मजार-भूमि नहीं’: उत्तराखंड में हथौड़ा मार-मार कर ध्वस्त किए गए 2 मजार, जमीन कब्ज़ा कर बनाई गई थी

उत्तराखंड के ऋषिकेश में मजारों को ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें मजारों को ध्वस्त करते हुए जय श्री राम के नारे भी लगाए जा रहे हैं।  देवभूमि रक्षा अभियान के सदस्यों की ओर से इस कार्रवाई को किए जाने की बात सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि ऋषिकेश में देवभूमि रक्षा अभियान के सदस्यों द्वारा ऋषिकेश में दो मजारों को ध्वस्त किया गया और उनका वीडियो भी फेसबुक पर लाइव किया गया। ऋषिकेश में मजारों पर की गई कार्रवाई का यह वीडियो 29 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक व्यक्ति को एक मजार की दीवारों पर हथौड़ा चलते हुए देखा जा सकता है।

मजारों को ध्वस्त करते हुए देवभूमि रक्षा अभियान का सदस्य कह रहा है कि ऋषिकेश में इन मजारों को बख्शा नहीं जाएगा। ऋषिकेश ‘ऋषियों’ की भूमि है, यह देवभूमि है, कोई ‘मजार भूमि’ नहीं है।  साथ ही  यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि राज्य में कहीं भी ऐसी मजार होगी, सभी अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। 

वहीं मीडिया रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी स्थानीय लोगों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि पुलिस टीम की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों और हथौड़ों से दो मजारों को ध्वस्त कर दिया गया। कहा जा रहा है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस समय अतिक्रमण विरोधी अभियान चल रहा है और इसके तहत कई अवैध मजारों को ध्वस्त किया गया है।

हालाँकि, वायरल वीडियो में जिस देवभूमि रक्षा अभियान संस्था द्वारा मजारों को तोड़ने की बात सामने आई है। उसके प्रमुख दर्शन भारती ने शुक्रवार को मीडिया में दिए बयान में कहा, “हमें उस जमीन के मालिकों से उन्हें ध्वस्त करने की लिखित अनुमति मिली थी, जहाँ मजार बनाया गया था। किसी ने उन्हें यह सोचकर गुमराह किया था कि मजारों को अनुमति देने से उनके घरों में समृद्धि आएगी।”

बता दें कि ऋषिकेश की इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड पुलिस एक्शन में आई है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 505 (किसी भी पूजा स्थल या धार्मिक पूजा या समारोहों के प्रदर्शन में शामिल किसी भी सभा में अपराध करना) के तहत मामला दर्ज किया है। 

गौरतलब है कि इस मामले में एसपी (ग्रामीण) कमलेश उपाध्याय ने भी मजारों के तोड़े जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि मजारें ऋषिकेश में अमित ग्राम, गुमानीवाला में निजी भूमि पर बनाई गई थीं। जमीन मालिकों ने इसे हटाने की हामी भरी थी। लेकिन तोड़फोड़ करने वालों ने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही पुलिस वहाँ मौजूद थी। हमने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हम इस मामले में  वीडियो से आरोपितों की पहचान कर कार्रवाई कर रहे हैं। 

बीवी से अप्राकृतिक सेक्स करना चाहता था शौहर, नहीं मानी तो इस्त्री गर्म कर जला डाले दोनों कूल्हे: ट्रॉमा सेंटर में चल रहा इलाज

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक व्यक्ति द्वारा अपनी बीवी के साथ हैवानियत की बात सामने आई है। उसने अप्राकृतिक संबंध बनाने से विरोध करने पर पत्नी के कूल्हों को गर्म प्रेस से जला डाला। जानकारी के मुताबिक, शौहर ने रात के समय अपनी बीवी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका बीवी ने विरोध किया। इस बात से शौहर इतना गुस्सा हुआ कि वो हैवान बन बैठा। उसके पहले तो बीवी को जमकर पीटा, फिर गर्म प्रेस से उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।

अप्राकृतिक संबंध बनाने की सनक में बना हैवान

ये पूरा मामला रसूलपुर थाना इलाके का है, जहाँ फिजोराबाद के दक्षिण थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला का निकाह 5 साल पहले रसूलपुर क्षेत्र में रहने वाले युवक के साथ हुआ था। दोनों में विवाद चल रहा था, लेकिन समझौते के बाद महिला अपने शौहर के घर आ गई थी। इस बीच, 31 अगस्त की रात शौहर ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका उसने विरोध किया। इस बात से खफा उसके शौहर ने उसे खूब मारा-पीटा, फिर प्रेस गर्म कर उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।

इस दौरान वो चीखती रही, लेकिन उसके हैवान शौहर पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

पीड़ित महिला के भाइयों ने अस्पताल में कराया भर्ती

महिला ने अपने भाइयों को किसी तरह से सूचना दी। इसके बाद गंभीर हालत में पीड़िता को थाना रसूलपुर ले जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद महिला का मेडिकल कराने के लिए जब अस्पताल ले जाया गया, तब सब चौंक गए, क्योंकि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। महिला को तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

समझौते के बाद ससुराल आई थी महिला

इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है कि उसके शौहर के साथ झूठ बोलकर उसका निकाह कराया गया था, वो पहले ही एक बार निकाह कर चुका था। शिकायत में महिला ने कहा, “वो मुझे रोज परेशान करता था, जिसकी वजह से मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।” पारिवारिक न्यायालय में समझौते के बाद वो अपनी ससुराल आ गई थी।

महिला को निर्वस्त्र करने के मामले में महिला आयोग ने लिया संज्ञान: गहलोत सरकार से 5 दिन के भीतर माँगी जाँच रिपोर्ट, गठित किया इंक्वायरी कमीशन भी

राजस्थान के प्रतापगढ़ में पति व ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा एक गर्भवती महिला को निर्वस्त्र घुमाने के मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने निष्क्रियता दिखाने के लिए राजस्थान पुलिस की निंदा और अशोक गहलोत सरकार से आरोपितों को गिरफ्तार कर 5 दिन के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इसके अलावा, मामले की जाँच के लिए एक कमिटी का भी गठन किया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “महिला आयोग राजस्थान के प्रतापगढ़ में हुई दर्दनाक घटना की कड़ी निंदा करता है। एक महिला के साथ छेड़छाड़ की गई, उसे निर्वस्त्र किया गया और वीडियो बनाया किया गया। दो दिन पहले हुई घटना के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता स्वीकार नहीं की जा सकती।”

इस पोस्ट में आगे कहा गया है, “राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने राज्य के डीजीपी को दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आईपीसी की आवश्यक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। हम 5 दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट की माँग करते हैं।”

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए महिला आयोग ने वुमेन एक्ट 1990 के सेक्शन 10 के तहत एक जाँच कमिटी का गठन किया है। इस जाँच कमिटी की प्रमुख डेलिना कोंगडुप को बनाया गया है। वहीं स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी राजस्थान की ओर से एक वकील को इस समिति का सदस्य बनाया गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा, “हमने कल रात संज्ञान लिया है और जाँच के लिए एक टीम भेज रहे हैं। राजस्थान में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग घटनाओं पर संज्ञान ले रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इन घटनाओं को कंट्रोल करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।”

इस मामले में पुलिस ने 21 साल की पीड़ता के पति समेत 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ धारा 294, 354, 365, 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

क्या है मामला:

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के धरियावद थाना क्षेत्र के पहाड़ा गाँव में एक महिला को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाने का मामला सामने आया है। घटना 31 अगस्त की है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। इस मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पीड़ित महिला का एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। 31 अगस्त को महिला प्रेमी के साथ चली गई थी।

महिला के ससुराल वालों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद महिला को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया। इस मामले को लेकर भास्कर ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि महिला 31 अगस्त को पड़ोस में रहने वाले एक युवक से मिलने गई थी। जानकारी मिलने पर ससुराल वाले भी वहाँ पहुँच गए। पहले तो उन लोगों ने महिला को पकड़कर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया।

घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। वायरल वीडियो में महिला चीख रही है। चिल्ला रही है। खुद को छोड़ने के लिए गुहार लगा रही है। लेकिन पति उसके कपड़े उतरता जा रहा है। आसपास खड़े लोग भी उसके इसके लिए उकसाते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग पास में खड़े होकर वीडियो बनाते भी दिखाई दे रहे हैं। महिला के पकड़े उतारने के आरोपितों ने उसे गाँव में घुमाया।

इस मामले में प्रतापगढ़ एसपी अमित कुमार ने कहा है कि मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस की 6 टीमों का गठन किया गया है। साथ ही धरियावद थाने में पूर्व में सेवाएँ दे चुके सभी कॉन्स्टेबल से लेकर बड़े अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया है। पीड़ित पक्ष द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

युसूफ के खौफ से सत्यम को किसी ने नहीं बचाया… जिस तुर्कपुरवा में सत्यम को मारा गया, वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 28 अगस्त 2023 को सत्यम नाम के नाबालिग छात्र की हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपित युसूफ सहित कुछ नाबालिगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हिन्दू संगठनों के साथ मृतक के परिजन युसूफ पर NSA के साथ बुलडोजर की कार्रवाई माँग रहे हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए खीरी के स्थानीय निवासियों ने युसूफ को दबंग और आए दिन लोगों से मारपीट करने वाला बताया है। जिस मुस्लिम बहुल क्षेत्र तुर्कपुरवा में सत्यम की हत्या हुई, यहाँ जमीनों पर अवैध कब्ज़े का भी आरोप है। साथ ही आसपास के लोगों को भैंस और भेड़ चोरी जैसे अपराधों का सामना करना पड़ता है।

तुर्कपुरवा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़े

ऑपइंडिया से बात करते हुए खीरी के स्थानीय निवासी व हिन्दू संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि जिस तुर्कपुरवा में सत्यम को मारा गया, वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर है। उन्होंने आरोप लगाया कि तुर्कपुरवा में कई मुस्लिमों ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़े कर रखे हैं।

तुर्कपुरवा में मदरसा और 3 मस्जिदें

हिन्दू संगठन के पदाधिकारी ने ऑपइंडिया को बताया कि वर्तमान में जो भी मुस्लिम आबादी खीरी में दिखाई देती है, वो 5-6 साल पहले नहीं थी। उन्होंने एकतरफा आबादी बढ़ने का आरोप लगाते हुए इसकी प्रशासनिक जाँच की माँग की। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी ने हमें बताया कि मुस्लिम बाहुल्य तुर्कपुरवा मुख्य सड़क पर लगभग 300 मीटर तक फैला हुआ है।

सड़क से हटकर भी यह एक गाँव के रूप में है जहाँ मजार, 3 मस्जिदें और मदरसा भी हैं। इस गाँव के एक किनारे कुछ अनुसूचित जाति के लोगों को छोड़ कर अंदर लगभग सभी मुस्लिम समुदाय के ही लोग हैं।

आस-पास के लोग पशु चोरी से परेशान

खीरी तुर्कपुरवा के आस-पास के निवासी चोरी जैसी घटनाओं से काफी परेशान हैं। इस चोरी में पशुओं की चोरी भी शामिल है। 18 जनवरी 2021 को तुर्कपुरवा के पड़ोसी गाँव कंचनपुर में राजेश कुमार ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया था कि उनकी लगभग 20 भेड़ों को रात में कोई चुरा ले गया था।

इन भेड़ों की कीमत लगभग 2 लाख रुपए आँकी गई थी। तब राजेश ने खुद को गरीब और कर्जदार बताया था और कहा कि इसके जरिए उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। उन्होंने कहा था कि भेंड़े चोरी होने के बाद से वे बेरोजगार हो गए हैं।

राजेश कुमार की शिकायती पत्र

इस घटना से भी पहले 16 अप्रैल 2018 को समाजसेवी राजेंद्र मिश्रा ने खीरी और कोरांव सहित आसपास के क्षेत्रों में भैंसों चोरों के गैंग के सक्रिय होने का आरोप लगाया था। राजेंद्र मिश्रा की शिकायत पर प्रयागराज पुलिस ने अधीनस्थों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

हिन्दुओं के वोटों में बँटवारे से जीता युसूफ

खीरी के लोगों ने हमें बताया कि गाँव में लगभग 6500 वोट हैं। इनमें से 1500 वोट मुस्लिमों के हैं जो ज्यादातर तुर्कपुरवा में रहते हैं। मुस्लिमों के ही लगभग बराबर वोट SC समुदाय के लोगों के हैं। बाकी में सभी अन्य लोग हैं।

हमें बताया गया कि लगभग आधे दर्जन प्रत्याशी गाँव की प्रधानी के चुनाव में खड़े हुए थे, जिनमें एकमात्र मुस्लिम कैंडिडेट युसूफ था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, युसूफ को लगभग सभी मुस्लिमों का एकमुश्त वोट मिलने के साथ हिन्दुओं का भी वोट मिला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव में किसी भी हिंदू प्रत्याशी को मुस्लिमों के वोट नहीं मिले। आखिरकार युसूफ ने अपने प्रतिद्वंद्वी अवनीश केसरवानी को लगभग 250 वोटों से हरा दिया था। युसूफ इससे पहले भी 2 बार ग्राम प्रधानी के लिए उम्मीदवार रह चुका था, लेकिन उसे हार मिली थी।

चुनाव जीत कर पहला काम मजार का विस्तार

खीरी के ग्रामीणों ने ऑपइंडिया को बताया कि मुख्य सड़क से लगभग सटकर ही एक मजार बनी हुई है। यह मजार पहले छोटे हिस्से में थी और आवाजाही यहाँ सामान्य थी। हमें बताया गया कि युसूफ ने चुनाव जीतकर सबसे पहले इस मजार का सौंदर्यीकरण करवाया।

युसून ने न सिर्फ मजार का रंग रोशन करवाया, बल्कि उसमें गेट ग्रिल आदि भी लगवा दी। युसूफ की प्रधानी में इस बार मुहर्रम में उसी मजार पर बड़ा मेला भी लगा था। यह मजार वैध जमीन पर बनी है या अवैध जमीन पर, इसके बारे में ग्रामीण जानकारी नहीं दे पाए।

युसूफ के खौफ से सत्यम को किसी ने नहीं बचाया

हमने स्थानीय लोगों से सवाल किया कि पिट रहे सत्यम को बचाने कोई सामने क्यों नहीं आया? इसके जवाब में स्थानीय निवासियों ने बताया कि यूसुफ का खीरी में इतना खौफ है कि गाँव में कोई भी उसके किसी भी काम में अड़ंगा डालने की हिम्मत नहीं करता। लोगों ने उसे दबंग बताते हुए कहा कि युसूफ पर पहले भी भी मारपीट के केस दर्ज है।

अब तक युसूफ पर कुल 5 केसों के सामने आने का दावा किया गया है। माना यह भी जा रहा है कि युसूफ पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। युसूफ के परिवार में ट्रकें आदि चलती हैं, लेकिन लोगों ने युसूफ का मुख्य काम सरकारी कार्यालयों में दलाली आदि का बताया। पत्रिका की रिपोर्ट में भी युसूफ के थाने में धाक और पुलिसकर्मियों पर पैसे लुटाने की बात कही है।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसके द्वारा दी गई कारों से थानेदार चलता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले बकरीद पर युसूफ ने थाने पर पुलिसकर्मियों को दावत दी थी। उस पर सरकारी फंड का दुरूपयोग करने और शिकायत करने वालों को फर्जी केस में फँसाने के भी आरोप हैं। इसमें जिले के कुछ अन्य अधिकारी उसके मददगार बताए गए हैं।

प्रशासनिक ढिलाई से लोग नाखुश

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें युसूफ की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलने की प्रतीक्षा है। लोगों ने कहा कि जिलाधिकरी प्रयागराज ने कड़ी कार्रवाई के लिए जो 48 घंटे का समय दिया था, वो अब पूरा हो चुका है। एक बार फिर से प्रशासन द्वारा 48 घंटे का समय लेने की जानकारी सामने आई है।

हालाँकि, कुछ लोगों ने यह भी बताया कि प्रशासनिक अधिकारी युसूफ के अपराधों और उसके द्वारा अर्जित सम्पत्तियों आदि का लेखा-जोखा निकाल रहे हैं। इसके आधार पर ही उस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि प्रयागराज के खीरी में 16 साल के सत्यम शर्मा की 28 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वजह सत्यम द्वारा आरोपितों की अपनी चचेरी बहन से छेड़खानी का विरोध बताया जा रहा है। सत्यम की चचेरी बहन ने अपने भाई को बचाने के लिए मोहम्मद यूसुफ का पैर पकड़कर रहम की भीख माँगी थी।

जमीन घोटाले में CM हेमंत सोरेन को ED का तीसरा समन: जाँच एजेंसी ने कुर्क की ₹161 करोड़ की संपत्ति, अब तक 14 गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार (2 सितम्बर, 2023) को भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फिर से समन जारी किया है, जिसमें उन्हें 9 सितंबर को पूछताछ के लिए अपने जोनल कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। यह उन्हें जारी किया गया तीसरा समन है। वहीं ED  ने ‘जमीन हड़पने और धोखाधड़ी’ के इस मामले से जुड़े धनशोधन जाँच के तहत एक दिन पहले ही बड़ी कार्रवाई की है। जाँच एजेंसी ने इस मामले में राँची में 161 करोड़ रुपए से अधिक के तीन भूखंड भी कुर्क किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 अगस्त को पहला समन नहीं लिया और ईडी को एक पत्र भेजकर कहा कि वह समन वापस ले लें या वह एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने समन को राजनीति से प्रेरित बताया था। जवाब में, ईडी ने फिर से एक समन जारी कर उन्हें 24 अगस्त को उसके सामने पेश होने के लिए कहा। सोरेन ने फिर से एक पत्र भेजकर इसे उपस्थित होने से मना कर दिया और कहा कि उन्होंने उन्हें जारी किए गए समन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है।

इस बीच ईडी ने भी 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है जिस पर अभी सुनवाई होनी है। बता दें कि कैविएट किसी व्यक्ति को उसके खिलाफ कोई भी निर्णय लेने से पहले उसकी बात सुनने का अधिकार देता है क्योंकि कोई भी अदालत किसी व्यक्ति का पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ कोई निर्णय नहीं दे सकती है या उसके खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं कर सकती है।

हालाँकि, जमीन घोटाले के मामले में ईडी ने तीसरा समन जारी किया क्योंकि उसे पता चला कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी याचिका पर शीर्ष अदालत में सुनवाई कराने में कोई तत्परता नहीं दिखा रहे थे।

161.64 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क 

गौरतलब है कि ईडी झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग के दो बड़े मामलों की जाँच कर रही है। पहला मामला साहिबगंज में अवैध खनन से जुड़ा है, जिसमें पिछले साल 17 नवंबर को सीएम से पूछताछ हुई थी। दूसरा मामला राज्य की राजधानी में एक कथित भूमि घोटाले से संबंधित है जिसके लिए ED द्वारा सोरेन को दो बार समन जारी किया गया है। 

ईडी ने एक बयान में कहा, “राँची में चेशायर होम रोड, पुगरू और सिरम में 161.64 करोड़ रुपए के वाणिज्यिक मूल्य के तीन भूखंडों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। इन भूखंडों में भूमि राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से भू-माफिया के पक्ष में धोखाधड़ी से बदलाव किया गया।”

आईएएस अधिकारी सहित 14 आरोपितों की हो चुकी है गिरफ्तारी 

बता दें कि यह इस मामले में जारी किया गया दूसरा कुर्की आदेश है। इसके साथ ही मामले में 236 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है। वहीं एजेंसी ने इस मामले में आईएएस अधिकारी छवि रंजन और दो व्यवसायी, कोलकाता के अमित अग्रवाल और राँची में शॉपिंग मॉल के मालिक बिष्णु अग्रवाल सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी छवि रंजन भी शामिल हैं। रंजन पूर्व में राज्य समाज कल्याण विभाग के निदेशक और राँची के उपायुक्त रह चुके हैं।

46 साल की अम्मी का 21 साल के हुसैन से अवैध संबंध, बनाया पोर्न वीडियो… लीक होने के डर से टिकटॉक स्टार बेटी के साथ किया डबल मर्डर

टिकटॉक की बहुत फेमस स्टार है महक बुखारी। ब्रिटेन में रहती है। पाकिस्तानी मूल की है। इनकी अम्मी है अंसरीन। अब ये दोनों माँ-बेटी आजीवन जेल में रहेंगी। क्यों? क्योंकि इन दोनों ने साजिश रच कर साकिब और मोहम्मद हाशिम इजाजुद्दीन को मार डाला। इस दिलचस्प केस से जुड़ा है पोर्न वीडियो मामला।

लेस्टरशायर कोर्ट ने दोनों को पिछले महीने अगस्त में अंसरीन के प्रेमी साकिब हुसैन और मोहम्मद हाशिम इजाजुद्दीन के दोहरे हत्याकांड का दोषी ठहराया। लेस्टर क्राउन कोर्ट में तीन महीने की सुनवाई में 28 घंटे के विचार-विमर्श के बाद जूरी ने ये फैसला लिया था। शुक्रवार (1 सितंबर, 2023) को इस मामले में सज़ा सुनाने का ऐलान किया गया।

टिकटॉकर और ब्रिटिश पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महक बुखारी को अम्मी अंसरीन के पोर्न वीडियो लीक होने की आशंका थी। उसे डर था कि इनके लीक होने से सोशल मीडिया पर उसकी फैन फॉलोविंग पर असर पड़ सकता है। यही सोचकर दोनों माँ-बेटी ने पोर्न वीडियो लीक करने की धमकी देने वाले साकिब हुसैन की हत्या की साजिश रची थी।

इस दोहरे हत्याकांड के लिए महक बुखारी को कम से कम 31 साल 8 महीने और अम्मी अंसरीन को न्यूनतम 26 साल 9 महीने की आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों ने हत्या की इस साजिश को कार हादसा दिखाने की पुरजोर कोशिश की थी। मौत से पहले साकिब के इमरजेंसी नंबर पर की गई कॉल रिकॉर्डिंग और घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज शो कोर्ट में पेश किए गए। इस आधार पर ही आरोपितों को सजा सुनाई गई।

क्या है मामला?

फरवरी 2022 में लेस्टर के पास हुए कार हादसे में 21 साल के साकिब हुसैन और उनके हमउम्र दोस्त हाशिम इजाजुद्दीन की मौत हो गई। उनकी कार तेज रफ्तार से एक पेड़ से जा टकराई थी। इससे उसके दो टुकड़े हो गए थे। मौत से कुछ पल पहले ही साकिब ने इमरजेंसी नंबर 999 को भी कॉल की थी।

इमरजेंसी कॉल में साकिब ने कहा था कि उनका पीछा कर रही दो कारों में सवार बालाक्लावा (नकाब) पहने हमलावरों ने उनकी कार को सड़क पर टक्कर मार दी। कॉल के दौरान बैचेन हुसैन कह रहा था, “कुछ लोग मेरा पीछा कर रहे हैं, वे मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं, मैं मरने जा रहा हूँ सर, मुझे बस मदद की ज़रूरत है। वे कार को पीछे से बहुत तेजी से मार रहे हैं, कृपया मैं आपसे विनती कर रहा हूँ। मैं मरने जा रहा हूँ।”

इसके बाद कॉल अचानक खत्म होने से पहले एक चीख सुनाई दी। दरअसल दोनों इस हादसे का शिकार एक साजिश के तहत हुए थे, जो 24 साल की ब्रिटिश पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महक बुखारी ने रची थी। मृतक साकिब हुसैन ने उसकी 46 साल की अम्मी अंसरीन बुखारी का साथ चल रहे संबंध का खुलासा करने की धमकी दी थी।

मुकदमे के दौरान, लेस्टर क्राउन कोर्ट की जूरी के सामने ये बात आई थी कि हुसैन ने लंबे वक्त से अंसरीन से चल रहे अपने अफेयर का खुलासा करने लिए सेक्स टेप को इस्तेमाल करने की धमकी दी थी। इस वजह से ही महक ने साकिब हुसैन को मारने की साजिश रची थी।

लेस्टर क्राउन कोर्ट में तीन महीने की सुनवाई के दौरान पता चला कि माँ-बेटी का ये जोड़ा उस समूह का हिस्सा था, जिसने पिछले साल फरवरी में मृतकों को टेस्को कार पार्क में ले जाने का लालच दिया था और फिर 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उनका पीछा किया था। इस दोहरे हत्याकांड में आठ आरोपित थे।

इनमें से जूरी सदस्यों ने साथी आरोपितों रेखन कारवान और रईस जमाल को भी इस हत्याकांड में दोषी पाया था। इनके अलावा बर्मिंघम की 23 साल की नताशा अख्तर, 28 साल का अमीर जमाल और लेस्टर के 23 साल के सनाफ गुलाम मुस्तफा को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन उन्हें मानव संहार का दोषी ठहराया गया। इस मामले में लेस्टर के रहने वाले 21 साल के सह-अभियुक्त मोहम्मद पटेल को हत्या या मानव संहार का दोषी नहीं पाया गया।

जज ने सुनाई माँ- बेटी को खरी-खरी

शुक्रवार (1 सितंबर 2023) दोपहर को सजा सुनाते हुए जज टिमोथी स्पेंसर केसी ने कहा कि एक मशहूर शख्स के तौर पर अपने करियर के दौरान महक बुखारी की दिखावटी शोहरत ने उन्हें पूरी तरह से आत्म-मुग्ध बना दिया था।

उन्होंने कहा, ”टिकटॉक और इंस्टाग्राम इस मामले के केंद्र में हैं। यही वजह है कि महक आपने यूनिवर्सिटी छोड़ दी। यदि आपने ऐसा नहीं किया होता, तो अब आप एक युवा ग्रेजुएट होते और आपकी पूरी जिंदगी बाँहें फैलाए आपका स्वागत करती। अब, आप अपने आप को अपने सभी बेहतरीन सालों के लिए जेल में बंद पाएँगे।”

मुकदमे के दौरान ये भी पता चला कि जब महक बुखारी की अम्मी अंसरीन ने अपने रिश्ते को खत्म करने की कोशिश की तो हुसैन ने इसका विरोध किया था। उसने धमकी दी थी कि अगर उसने 3,000 पौंड (लगभग 3.12 लाख रुपए) का भुगतान नहीं किया तो वह उसके पति को उनकी अश्लील तस्वीरें भेज देगा। उसने दावा किया था कि ये पैसा उसने अंसरीन पर खर्च किया था।

ऐसे बिछाया था हत्या का जाल

महक बुखारी के टिकटॉक पर लगभग 129,000 फॉलोअर्स हैं। वहाँ वह फैशन और सुंदरता के बारे में पोस्ट करती थी। तीन महीने की कोर्ट की सुनवाई में खुलासा हुआ कि महक ने ही साकिब हुसैन की हत्या का जाल बिछाया था।

अभियोजकों ने कहा कि ऑक्सफ़ोर्डशायर के बैनबरी के हुसैन को महक बुखारी ने परिवार से मिलने के लिए उन्हें 3,000 पौंड वापस करने की बात कहकर बुलाया था। इस दौरान उन पर घात लगाकर हमला किया गया और फिर दो कारों से उनका पीछा किया गया। इसी दौरान एक पेड़ से टकराने के बाद इजाजुद्दीन की कार दो हिस्सों में बंट गई और उसमें आग लग गई।

जिस ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने पर कॉन्ग्रेस सरकार ने बहाया था खून, वहाँ अब होगा गणेश उत्सव: BJP शासित महानगरपालिका ने दी अनुमति, कॉन्ग्रेस-AIMIM ने किया विरोध

कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका (HDMP) ने उसी ईदगाह में गणेशोत्सव समारोह को मनाने की मंजूरी दी है, जिसे लेकर कभी दो-दो मुख्यमंत्रियों को अपनी कुर्सी गँवानी पड़ी थी। इसी ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने पहुँचे राष्ट्रभक्तों को साल 1994 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने गोलियों से भुनवा दिया था। उस गोलीकांड में 5 राष्ट्रभक्तों की मौत हो गई थी। लेकिन हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका (एचडीएमपी), जहाँ भाजपा सत्ता में है, उसने इस साल भी ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव के आयोजन की मंजूरी दी है।

कॉन्ग्रेस-एआईएमआईएम ने किया तीखा विरोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका की दूसरी छमाही में सूचीबद्ध अतिरिक्त विषयों की सूची में ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव का मुद्दा आखिरी था। इस बार जैसे ही चर्चा की शुरुआत हुई, कॉन्ग्रेस और AIMIM के पार्षदों ने इसका तीखा विरोध किया। दोनों दलों के पार्षदों का कहना था कि पूर्व सूचना के बगैर ही इस मुद्दे को उठाया गया, जिसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालाँकि, हंगामे के बीच महापौर वीणा बराडवाड ने गणेशोत्सव को मंजूरी दे दी।

भाजपा ने कॉन्ग्रेस-एआईएमआईएम के विरोध को किया खारिज

ये निर्णय गुरुवार (31 अगस्त, 2023) को लिया गया। इस मामले पर हंगामे के बीच भाजपा के पार्षदों ने कहा कि अतिरिक्त विषयों को चर्चा में शामिल करना महापौर का विशेषाधिकार है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। बता दें कि पिछले साल भी ईदगाह मैदान पर ही गणेशोत्सव मनाया गया था। ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए गणेशोत्सव को मंजूरी दे दी। इस मैदान को लेकर तनातनी काफी पुरानी है।

तिरंगा फहराने से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने बहाया था खून

हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने को लेकर अतीत में बड़ा विवाद हो चुका है। साल 1994 में इस विवाद को तत्कालीन कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री वीरप्पा मोईली ने अयोध्या के राम मंदिर विवाद से जोड़ते हुए कहा था कि यहाँ गोलियाँ चलेंगी। उन्होंने तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले राष्ट्रभक्तों पर गोलियाँ भी चलवाईं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसी मामले में घटना के सालों बाद उमा भारती को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद गँवाना पड़ा था। वो पूरा घटनाक्रम आप यहाँ पर पढ़ सकते हैं।

‘ब्रिटेन ईसाई देश नहीं’: चर्च ऑफ इंग्लैंड के आधे से अधिक पादरियों ने माँगी समलैंगिकों की शादी की अनुमति, 64% बोले- LGBT के बीच सेक्स पाप नहीं

ब्रिटेन स्थित ‘चर्च ऑफ इंग्लैंड’ के आधे से अधिक पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिकों की शादी कराने की अनुमति के लिए चर्च के कानून में परिवर्तन की भी माँग की है। वहीं, 75 प्रतिशत से अधिक पादरियों का कहना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

द टाइम्स ने चर्च ऑफ इंग्लैंड के पादरियों का एक सर्वे किया है। इस सर्वे में 53.4% पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिक शादी कराने का समर्थन किया। वहीं, 36.5% पादरियों ने इसका विरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2014 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने के बाद इंग्लैंड के ‘एंग्लिकन पादरियों’ से इस बारे में सवाल किया गया था। तब, 51% पादरियों ने समलैंगिक विवाह को गलत बताया था। वहीं, 39% पादरियों ने इसका समर्थन किया था।

गौरतलब है कि साल 2022 में लैंबेथ सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में दुनिया भर के एंग्लिकन पादरी शामिल हुए थे। इस दौरान कैंटरबरी के आर्कबिशप ने साल 1998 में दिए एक बयान की पुष्टि करने को लेकर कहा था कि समलैंगिक संबंध पाप करने की तरह है। इसको लेकर उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

हालाँकि, अब किए गए सर्वे में सामने आया है कि इंग्लैंड के 64.5% पादरियों का कहना है कि समलैंगिक संबंधों को पाप या उनके मजहबी ग्रन्थों के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। यही नहीं, 27.3% पादरियों ने समलैंगिकों के लिए शुचिता की धारणा को नकार दिया। साथ ही 37.3% पादरियों ने कहा है कि वह समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों से उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है।

द टाइम्स के इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि 75% पादरियों का मानना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं, 64 फीसदी पादरियों ने कहा है कि ब्रिटेन को ऐतिहासिक रूप से ईसाई देश तो कहा जा सकता है, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इसे ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

‘सहजानंद स्वामी की सेवा में महादेव, हाथ जोड़े हनुमान जी’: स्वामीनारायण संप्रदाय के विरोध में संत समाज, भगवान के अपमान से आहत व्यक्ति ने पोता काला पेंट

सालंगपुर में हनुमान जी की मूर्ति के नीचे स्थापित कुछ भित्तिचित्रों पर महावीर बजरंगबली को सहजानंद स्वामी के सेवक के रूप में चित्रित किए जाने से हंगामा मचा हुआ है। वहीं महादेव के अपमान की बात भी सामने आई है। स्वामी नारायण संप्रदाय के इस तरह के व्यवहार से न सिर्फ संत समाज बल्कि कई धार्मिक-सामाजिक संगठन भी आहत हैं। इस मामले में सीहोर थाने में एक आवेदन देकर स्वामीनारायण संप्रदाय के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। वहीं एक आहत हिन्दू व्यक्ति ने भित्तिचित्रों पर काला पेंट पोतकर एवं छड़ी से हमला कर विरोध जताया है।

देश गुजरात पोर्टल ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें सालंगपुर में स्वामीनारायण संप्रदाय की वडताल स्थित मंदिर में एक आक्रोशित हिंदू व्यक्ति ने विवादास्पद भित्ति चित्रों पर काला रंग पेंट कर दिया है और साथ ही वह वीडियो में उन पर छड़ी से हमला करते हुए भी दिख रहा है। हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। 

हनुमान जी और महादेव के अपमान के लिए सोशल मीडिया पर विरोध के साथ मोरारी बापू, हर्षद भारती,  महंत मणिधर बापू, जूनागढ़ गोरखनाथ आश्रम के शेरनाथ बापू, महंत दिलीपदास जी महाराज, महंत इंद्रभारती बापू, महेंद्रानंद गिरि महाराज समेत कई संतों ने भी आक्रोश व्यक्त किया है। इसके अलावा ब्रह्म समाज ने भी सालंगपुर में आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं इस मामले में वीएचपी के महामंत्री का भी बड़ा बयान सामने आया है। 

तस्वीरें वायरल होने के बाद सामने आया मामला 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  सालंगपुर में बनी हनुमानजी की विशाल प्रतिमा के नीचे स्थापित भित्तिचित्र में भगवान हनुमानजी महाराज को सहजानंद स्वामी उर्फ ​​नीलकंठवर्णी (सहजानंद स्वामी का बाल रूप) के सेवक के रूप में दर्शाया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है।

इस मामले को लेकर जब सनातन धर्म सेवा समिति के सदस्य नीलकंठ भगत और मंदिर के अन्य संतों से मिलने पहुँचे तो उन्होंने हनुमानजी और भगवान शिव को लेकर विवादित टिप्पणी की। रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि स्वामी नारायण संप्रदाय के संतों से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “महादेव और महाबली हनुमान जी भगवान सहजानंद स्वामी की सेवा में 24 घंटे मौजूद रहते थे।” यहीं से सालंगपुर मंदिर विवाद और भी बढ़ गया। इसके बाद संगठन के लोगों के द्वारा हनुमानजी को सहजानंद स्वामी के सेवक के रूप में दिखाने के लिए और महादेव को सेवक सेवक बताने के मामले में संगठन और सनातन धर्म को मानने वालों की भावनाएँ आहत हुई हैं। जिसको लेकर स्वामी नारायण संप्रदाय के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई। 

बता दें कि संगठन ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि जिस तरह से हनुमानजी महाराज का अपमान किया गया है और सहजानंद के दास के रूप में दिखाया गया है वह सही नहीं है। शास्त्रों, पुराणों या उपनिषदों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। हनुमानजी के इस तरह के चित्रण से सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। इसके साथ ही संगठन ने जिम्मेदार लोगों, संतों और हाल ही में बयान देने वाले स्वामी नारायण संप्रदाय के संतों  और उनके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की माँग की है। 

क्या है विवाद की बड़ी वजह 

कुछ समय पहले सालंगपुर मंदिर में स्थित हनुमानजी की विशाल प्रतिमा के नीचे लगे कुछ भित्तिचित्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। वायरल हुई तस्वीर में भगवान हनुमान को सहजानंद स्वामी के सामने हाथ जोड़े नमस्कार मुद्रा में खड़े हैं। इसके अलावा एक अन्य भित्तिचित्र में नीलकंठवर्णी (सहजानंद स्वामी के बचपन का नाम) को एक आसन पर बैठे हुए दिखाया गया है, जबकि हनुमानजी को हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में बैठे दिखाया गया है।

ज्ञात हो कि सनातन आस्था में हनुमानजी का महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी को 7 चिरंजीवियों में भी शामिल किया गया है। हनुमानजी को भगवान शंकर का अवतार भी माना जाता है। साथ ही वह भगवान राम के अनन्य भक्त भी हैं। दूसरी ओर, सहजानंद स्वामी का जन्म 1781 में और मृत्यु 1830 में हुई थी। स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना सहजानंद स्वामी ने ही की थी, जिन्हें स्वामीनारायण भगवान के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि, कुछ वर्षों के बाद संप्रदाय में दरार आ गई और BAPS, वडताल, सोनखड़ा जैसे संगठन अस्तित्व में आए। फिलहाल जो विवाद में है वह वडताल स्थित संस्था है।

सालंगपुर मंदिर विवाद पर विरोध में संत समाज

हनुमानजी को सहजानंद स्वामी के सेवक के रूप में दिखाने को लेकर प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू ने कहा, ”दुनिया में खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए कई तरह के फर्जीवाड़े चल रहे हैं। हमारे सौराष्ट्र में हनुमानजी की एक विशाल सुंदर मूर्ति बनाई गई है, जिसके नीचे हनुमानजी को झुककर एक महापुरुष की सेवा करते हुए दिखाया गया है। ये सब घटिया हरकत है, धोखेबाज हैं। समाज को जागने की जरूरत है।”

दूसरी ओर, हर्षद भारती बापू ने भी हनुमानजी के अपमान पर एक वीडियो के जरिए अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा, ”इन लोगों ने हद कर दी है। पहले किताबें ही काफी होती थीं, किताबों में भगवान के चित्र होते थे। भगवान हाथ जोड़े खड़े हैं… और अब सालंगपुर में हजारों लोग हनुमान जी को एक गुलाम, एक चौकीदार के रूप में खड़े देख सकते हैं।  हद हो गई, तुम्हारे पास कौन सा शास्त्र है? संत, कथावाचक, कलाकार, हनुमानजी को मानने वाले संगठन सभी को इस मामले में बोलना होगा।”

इसके अलावा महंत मणिधर बापू ने भी स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों को चेतावनी दी है। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा, ”हनुमानजी का अपमान करने की ताकत किसी में नहीं है। जो लोग हनुमान जी का अपमान करते हैं वे उनके चरणों में बैठने के भी लायक नहीं हैं। ऐसा अपमान वही कर सकता है जिसका आचरण राक्षस जैसा हो।”

हनुमानजी के आपत्तिजनक भित्तिचित्र नहीं हटाए गए तो होगा उग्र आंदोलन

बता दें कि हनुमान जी के अपमान पर राजकोट ब्रह्म समाज में काफी गुस्सा है। उन्होंने इन विवादित भित्तिचित्रों को हटाने की माँग की है, अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में ब्रह्म समाज ने सालंगपुर के संतों को अगली 5 सितम्बर तक का अल्टीमेटम दिया है। 

जूनागढ़ गोरक्षनाथ आश्रम के शेरनाथ बापू ने की माफी माँगने की माँग 

जूनागढ़ गोरखनाथ आश्रम के शेरनाथ बापू ने भी इस मामले में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “जिस तरह से भित्तिचित्रों में हनुमानजी को भगवान स्वामीनारायण के सेवक के रूप में दिखाया गया है। उन्हें सहजानंद स्वामी महाराज के सामने हाथ जोड़े खड़े दिखाया गया है। यह बहुत दुख की बात है।”

उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्राचीन काल से ही हनुमान, राम और शिव सभी के पसंदीदा देवता रहे हैं। उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। कहा जा रहा है कि इससे कई श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्होंने भित्ति चित्र वाली घटना के लिए माफी माँगने को भी कहा। 

‘हमें अपनी परंपरा को कायम रखना चाहिए’

उधर, अहमदाबाद जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीपदासजी महाराज ने धर्म को नुकसान न पहुँचाने की अपील की है। उन्होंने कहा, ”हनुमानजी अनादि काल से हैं इसलिए हमें अपनी परंपरा का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से हमारा और हमारे देवी-देवताओं का सम्मान सुरक्षित रहेगा।”

महामंडलेश्वर महेंद्रानंदगिरि महाराज

मुचकुंद गुफा के महामंडलेश्वर महेंद्रानंदगिरि महाराज ने नाराजगी जताते हुए कहा, ”स्वामीनारायण संप्रदाय के महापुरुष महादेव और हनुमाजी के प्रति बहुत सम्मान रखते थे। इसी प्रकार आज तक सनातन धर्म के किसी भी संत ने आपके सम्प्रदाय के बारे में कभी कोई टिप्पणी नहीं की। बेहतर होगा कि हम सब अपनी सीमा में रहें।”

जूनागढ़ रुद्रेश्वर आश्रम के महंत इंद्रभारती बापू

जूनागढ़ रुद्रेश्वर आश्रम के महंत इंद्रभारती बापू भी सालंगपुर विवाद मामले में शर्मसार हैं। उन्होंने सालंगपुर मंदिर के इस कृत्य को निंदनीय बताते हुए कहा, ”ऐसे ढोंगी साधु जो धर्म के मंच पर बैठे हैं। इससे आंतरिक विवाद पैदा होते हैं जिससे विधर्मी भी खुश रहते हैं। इसलिए इस कृत्य के अपराधी को कभी माफ नहीं किया जाएगा।”

सालंगपुर विवाद पर विहिप के महामंत्री का बड़ा बयान

इस मामले में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने भी विरोध दर्ज कराया है। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव अशोक रावल ने कहा कि उन्होंने कई संतों से मुलाकात की और इस विवाद का हल निकालने की कोशिश की।  इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम और हनुमानजी का जन्म त्रेता युग में हुआ था। जबकि सहजानंद स्वामी का कालखंड 250-300 वर्ष पहले का है। दोनों समय में बहुत बड़ा अंतर है। 

‘आदित्य L1’ ने शुरू किया सौर ऊर्जा से बिजली बनाना, एक्टिवेट होकर काम करने लगे सोलर प्लेट्स: उधर चाँद पर ‘प्रज्ञान’ ने लगाया ‘शतक’

ISRO ने ‘आदित्य L1’ के सफल लॉन्च के बाद एक और अच्छी खबर दी है। इसके सोलर पैनल को एक्टिवेट कर दिया गया है। सीधे शब्दों में कहें तो ‘आदित्य L1’ ने सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर के बिजली बनानी शुरू कर दी है। सौर ऊर्जा पैदा करने के लिए जो सोलर प्लेट्स लगाए गए हैं, वो ठीक तरह से काम कर रहे हैं। अब रविवार (3 सितंबर, 2023) को दोपहर के 11:45 बजे पहली अर्थबाउंड फायरिंग की जाएगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये जानकारी दी है।

बता दें कि PSLV-C57/Aditya-L1 का सफल लॉन्च शनिवार (2 सितंबर, 2023) को पूरा हुआ। बता दें कि इस मिशन को PSLV-C57 रॉकेट का इस्तेमाल कर के लॉन्च किया गया है। जिस ऑर्बिट में इसे स्थापित किया जाना था, रॉकेट ने ठीक उसी तय बिंदु पर इसे स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक L1 पॉइंट (पृथ्वी और सूर्य के बीच स्थित वो बिंदु, जहाँ सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल संतुलन में रहता है) के लिए निकल गया है।

उधर ‘चंद्रयान 3’ को लेकर भी बड़ी खबर आई है। ISRO ने जानकारी दी है कि चाँद पर ‘प्रज्ञान’ रोवर ने 100 मीटर की यात्रा कर ली है और ये अभी भी जारी है। जहाँ पर ‘विक्रम’ लैंडर स्थित है, उस जगह को ‘शिवशक्ति पॉइंट’ नाम दिया गया है। वहाँ से कुछ दूर आगे चलने के बाद ‘प्रज्ञान’ मुड़ गया और फिर दिशा बदल कर दूसरी तरफ बढ़ने लगा। ‘प्रज्ञान’ सबसे पहले पश्चिम की तरफ चला, फिर अब वो उत्तर दिशा में मुड़ कर आगे बढ़ रहा है। ISRO लगातार इस संबंध में ताज़ा सूचना दे रहा है।

ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने ‘आदित्य L1’ मिशन को ‘बहुत अनोखा’ करार दिया है। उन्होंने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब PSLV का ऊपरी हिस्सा प्राइमरी सैटेलाइट को इंजेक्ट करने के लिए 2 बार ‘बर्न सीक्वेंस’ से गुजर रहा है। ये कुल 127 दिन की यात्रा होने वाली है, जिसके बाद ‘आदित्य L1’ सूर्य का अध्ययन करना शुरू करेगा और धरती पर डेटा भेजेगा। ISRO प्रमुख ने ये भी बताया कि एक-दो दिनों में चाँद पर ‘विक्रम’ और ‘प्रज्ञान’ को सुला दिया जाएगा, क्योंकि इन्होंने ‘लूनर नाइट (चाँद की रात, 14 दिन)’ में अपना काम कर लिया है।