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I.N.D.I.A. का नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ – 13 लोगों की समन्वय समिति में ‘हरामखोर’ और मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता भी 

मुंबई में I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक दूसरे दिन भी जारी है। इस बैठक में विपक्षी दल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति से लेकर मंथन कर रहे हैं। वहीं आज इंडिया के नेताओं ने 13 सदस्यों की समन्वय समिति बनाने का फैसला लिया है। साथ ही गठबंधन ने अपना नारा ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ भी जारी किया है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ने शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को मुंबई की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर किस राज्य में किस पार्टी को कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने हैं इसे लेकर भी इस बैठक में चर्चा हो रही है। मुंबई में हो रही इस बैठक में इस गठबंधन के संयोजक के नाम को लेकर भी चर्चा हुई है। इस बैठक के दौरान एक समन्वय समिति का भी गठन किया गया है। 

इस समन्वय समिति में कॉन्ग्रेस से केसी वेणुगोपाल, एनसीपी से शरद पवार, डीएमके से एमके स्टालिन, शिवसेना से संजय राउत, आरजेडी से तेजस्वी यादव, टीएमसी से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जेडीयू से ललन सिंह, जेएमएम से हेमंत सोरेन, सीपीआई से डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल हैं। 

आपको बता दें कि इस समन्वय समिति में हरामखोर को नॉटी समझाने वाले नेता भी शामिल हैं। राउत के अनुसार हरामखोर का मतलब उनके यहाँ नॉटी या बेईमान होता है। वहीं 1993 के बम ब्लास्ट के दौरान मुस्लिम एरिया में झूठा बम फोड़ने वाले नेता शरद पवार भी हैं। अब ऐसे में इस समिति का क्या होगा ये आने वाला समय ही बताएगा।

एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का साझा संकल्प

इंडिया गठबंधन ने लोकसभा चुनाव-2024 एक साथ मिलकर लड़ने का भी संकल्प लिया। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। उन्होंने लिखा, “इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का संकल्प लिया। जहाँ तक संभव होगा वहाँ तक हम एकसाथ लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।” 

वहीं ANI की रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन ने इस पर एक प्रस्ताव भी पास किया।

जयराम रमेश ने कॉन्ग्रेस की तरफ से जानकारी देते हुए आगे कहा, “सीट बँटवारे पर अलग-अलग राज्यों में चर्चा तत्काल शुरू की जाएगी और जल्द से जल्द से इसे पूरा किया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्से में जनसभा आयोजित की जाएगी। अलग-अलग भाषाओं में “जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया” की थीम के साथ विपक्षी गठबंधन चुनाव में उतरेगा। मीडिया की साझा रणनीति भी बनाई जाएगी।

विपक्ष जारी कर सकता है लोगो 

 बता दें कि INDIA गठबंधन द्वारा आज लोगो जारी करने की बात सामने आई है वहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि लोगो अभी तैयार नहीं है तो गठबंधन विचार-विमर्श के बाद इसे जारी करेगा। 

इसरो के वैज्ञानिकों ने भगवान वेंकटेश्वर को किया नमन, सूरज को छूने के लिए तैयार है आदित्य एल-1: जानिए भारत के सूर्य मिशन के बारे में सब कुछ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 2 सितंबर 2023 को आदित्य एल-1 लॉन्च करने जा रहा है। यह भारत का पहला अंतरिक्ष आधारित सौर मिशन है। चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद सूर्य मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।

यह मिशन सूर्य के भूत, वर्तमान और भविष्य को जानने में मदद करेगा। उम्मीद है कि इससे धरती के अस्तित्व के लिए आने वाली ऊर्जा और प्रकाश के स्त्रोत के बदलावों को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही इस मिशन से मिलने वाला लेखा-जेखा पृथ्वी पर कई शताब्दियों में हुए जलवायु परिवर्तनों को समझने के काम भी आएगा।

चंद्रयान-3 के बाद इस मिशन को लेकर पूरी दुनिया में उत्सुकता है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो भारत ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। भारत से पहले सूर्य को लेकर अमेरिका, रूस और यूरोपीय स्पेस एजेंसी अपने स्पेस मिशन भेजकर शोध कर चुकी हैं।

शुरू हुआ आदित्य एल-1 का काउंटडाउन

इसरो 2 सितंबी की सुबह 11:50 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सौर मिशन आदित्य एल-1 लॉन्च करेगा। इसरो के चीफ सोमनाथ के मुताबिक, आदित्य-L1 के लॉन्‍च के लिए रॉकेट और सैटेलाइट सब तैयार हैं और रिहर्सल पूरी हो गई है। इसकी लॉन्चिंग की 23 घंटे 40 मिनट की उलटी गिनती (Countdown) शुक्रवार (1 सितंबर) को 12:10 बजे शुरू हुई।

इससे पहले सोमनाथ ने तिरुमाला के तिरुपति मंदिर पहुँचकर भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना की और मानव कल्याण के लिए उनका आशीर्वाद माँगा। इसरो चीफ सोमनाथ के साथ आदित्य एल-1 मिशन से जुड़े सारे वैज्ञानिक भी उनके साथ थे।

इसरो ने दुनिया को इसकी लॉन्चिंग दिखाने के लिए खास इंतजाम किए हैं। इसके लिए श्रीहरिकोटा केंद्र से सीधा प्रसार दर्शकों को दिखाने के लिए व्यू गैलरी की सीटें बुक करने का विकल्प दिया था। यहाँ सीमित सीटें रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद ही फुल हो गई।

इसरो की वेबसाइट isro.gov.in पर इस मिशन की लॉन्चिंग का सीधा प्रसारण भी देखा जा सकता है। इसके साथ ही लोग इसरो के यूट्यूब चैनल से लॉन्च का लाइव स्ट्रीम कर सकते हैं। ये जानने के बाद आपको भी उत्सुकता हो रही होगी कि भारत के आदित्य एल-1 का उपग्रह कैसे सूर्य की कक्षा में पहुँचेगा तो आइए आगे बढ़ते हैं।

PSLV लेकर जाएगा सूरज के पास

केंद्र सरकार ने 2019 में आदित्य-एल1 मिशन के लिए लगभग 46 मिलियन डॉलर (करीब 380.64 करोड़ रुपए) के बराबर राशि मँजूर की थी। हालाँकि इसरो ने इस मिशन की लागत पर कोई आधिकारिक अपडेट नहीं दिया है। ISRO के चीफ एस सोमनाथ ने बताया था कि इस मिशन का यान लगभग 120 दिन यानी 4 महीने में 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लैग्रेंज बिंदु-1 (एल1) यानी सूर्य की कक्षा में पहुँचेगा और वहाँ उपग्रह को स्थापित करेगा। ये उपग्रह लैंग्रेंज बिंदु-1 बिंदु पर सवा पाँच साल तक रहकर सौर वातावरण का अध्ययन करेगा और आँकड़े इकट्ठे कर पृथ्वी पर भेजेगा।

आदित्य एल-1 को सूर्य की कक्षा लैग्रेंज बिंदु-1 पर पीएसएलवी-सी57 रॉकेट स्थापित करेगा। ये अंतरिक्ष यान सात ‘पेलोड्स’ अपने साथ लेकर जाएगा। पेलोड यानी वो उपकरण, जो मिशन के आँकड़े एकत्र करने और फिर उसे को पृथ्वी पर भेजने का काम करते हैं। ये वहाँ फ़ोटोस्फ़ेयर, क्रोमोस्फ़ेयर और कोरोना की स्टडी करेंगे। इनमें से चार पेलोड लगातार सूर्य पर नज़र रखेंगे तो अन्य तीन पेलोड लैग्रेंज बिंदु-1 पर कणों और अन्य क्षेत्रों के डेटा इकट्ठा करेंगे।

फ़ोटोस्फ़ेयर का अर्थ है, किसी तारे का चमकदार कवर जिससे उसकी रोशनी और गर्मी निकलती है। वहीं, क्रोमोस्फ़ेयर का अर्थ किसी तारे के वायुमंडल की दूसरी परत है, जो फ़ोटोस्फ़ेयर के ऊपर और कोरोना यानी सूर्य के वायुमंडल के सबसे बाहरी हिस्से के नीचे होती है।

कोरोना सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी भाग या परत को कहते है। ये आमतौर पर सूर्य की सतह की चमकदार रोशनी से छिपा रहता है। इससे खास उपकरणों के इस्तेमाल के बगैर देखना कठिन हो जाता है। हालाँकि, इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जा सकता है। अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर ये पीएसएलवी और लैग्रेंज बिंदु होता क्या है तो इसे आसान भाषा में हम आपको बताते हैं। पहले पीएसएलवी से शुरुआत करते हैं।

पीएसएलवी इसरो का सैटेलाइट भेजने का सिस्टम

भारतीय रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) इसरो की बनाई एक सहायक प्रक्षेपण प्रणाली है। इसे इसरो ने अपने सुदूर संवेदी उपग्रह (Remote Sensing Satellite) को सूर्य की समकालिक कक्षा (Sun Synchronous Orbit) यानी एसएसओ में प्रक्षेपण के लिए बनाया है।

एसएसओ किसी ग्रह के चारों ओर की ध्रुवीय कक्षा है। यहीं पर रहते हुए उपग्रह हर वर्ष एक पूरा चक्कर लगाते हुए हमेशा सूर्य के साथ समान संबंध बनाए रख सकता है। भारत से पहले ये प्रणाली केवल रूस के पास थी।

यही वजह है कि सौर मिशन के उपग्रह आदित्य एल-1 को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु-1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा यानी फ़ोटोस्फ़ेयर में रखा जा रहा। इसरो के मुताबिक, इसे यहाँ रखने का ये फायदा होता है कि बगैर किसी ग्रहण के सूर्य पर लगातार नजर बनाए रखी जा सकती है। इससे वास्तविक वक्त में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके असर को देखने का फायदा मिलेगा।

“लैग्रेंज-1 बिंदु ही क्यों?

गणितज्ञ जोसेफ लुईस लैग्रेंज के इस बिंदु की खोज करने की वजह से इसका नाम लैग्रेंजियन पड़ा। पृथ्वी और सूर्य के बीच कुल मिलाकर ऐसे 5 बिंदु हैं और यहाँ पर गुरुत्वाकर्षण सेंट्रिपेटल फोर्स (एक ऐसा बल है जो किसी पिंड को एक घुमावदार रास्ते पर चलने के लिए मजबूर करता है) के बराबर हो जाता है। इससे यहाँ किसी भी उपग्रह का परिक्रमा करना आसान हो जाता है। इससे ऊर्जा की भी बचत होती है।

ये बिंदु धरती और सूर्य के बीच की ऐसी जगह है, जहाँ से सूर्य को बग़ैर किसी रुकावट के देखा जा सकता है। सरल शब्दों में कहें तो यहाँ गुरुत्वाकर्षण बल कम से कम होता है। इस वजह से कोई भी अंतरिक्ष यान इस बिंदु पर कम ईंधन के साथ ही स्टडी कर सकता है।

पृथ्वी से इस बिंदु की दूरी लगभग 15 लाख किलोमीटर है। हालाँकि, आदित्य एल-1 मिशन को पाँचों बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, लेकिन इस बिंदु का चुनाव इसलिए किया गया है कि यहाँ मिशन के कामयाब होने और पेचीदगियाँ कम होने के आसार हैं। ये बिंदु इसलिए भी खास है कि क्योंकि सूर्य से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) और सौर तूफान इसी राह से होकर पृथ्वी तक पहुँचते हैं।

सीएमई सूर्य के कोरोना से हेलिओस्फीयर यानी सूर्य की सबसे बाहरी वायुमंडलीय परत के चुंबकीय क्षेत्र और उसके साथ आने वाले प्लाज्मा द्रव्यमान यानी ऊर्जा का उत्सर्जन है। इसरो के सौर मिशन का आदित्य एल-1 यहाँ सूर्य के हमें दिखाई पड़ने वाले हिस्से यानी फ़ोटोस्फ़ेयर, इसके ऊपर की सतह क्रोमोस्फ़ेयर और सूर्य से कुछ हजार किलोमीटर ऊपर की बाहरी परत कोरोना के चुंबकीय क्षेत्र और सौर वायु का अध्ययन करेगा।

इसरो के मुताबिक, इस मिशन का मकसद क्रोमोस्फ़ीयर और कोरोना की गतिशीलता, सूर्य के तापमान, कोरोना के तापमान, कोरोनल मास इजेक्शन, सूरज से निकलने वाली आग या गर्मी के निकलने के पहले और बाद की गतिविधियों, अंतरिक्ष मौसम समेत कई अन्य वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन करना है।

क्यों है जरूरी सौर मिशन?

सूर्य हाइड्रोजन और हिलियम से मिलकर बना हुआ पृथ्वी का सबसे नजदीकी तारा है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग 14,96,00,000 किलोमीटर यानी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। इससे पृथ्वी पर प्रकाश को आने में 8.3 मिनट का वक्त लगता है। इसी ऊर्जा से प्रकाश-संश्लेषण की अहम जैव-रासायनिक अभिक्रिया होती है, जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है। इस वजह से सौर मिशन खासे अहम हो जाते हैं।

सूर्य अपने असीम ताप की वजह से हमारे लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला है। इसको लेकर उन क्रियाओं का अध्ययन किया जा सकता है, जिसे पृथ्वी पर पैदा करना मुश्किल है। ये आग का एक ऐसा गोला है, जो लाखों डिग्री सेल्सियस गर्म है और पृथ्वी के आकार से लाखों गुना बड़ा है। इसकी सतह पर हमेशा विस्फोट होते रहते हैं।

इसके पीछे वहाँ चार्ज प्लाज़्मा, प्रचंड तापमान और चुंबकीय क्षेत्र है। इनकी वजह से वहाँ भयंकर तूफ़ान आते रहते हैं। सूर्य में हर 11 साल बाद बदलाव आता है और ये उसकी चुंबकीय गतिविधियों में भी होता है। इन्हें सौर चक्र कहा जाता है। कई बार ये बेहद खतरनाक होते हैं।

इससे सौरमंडल के वातावरण में ऊर्जा का शक्तिशाली विस्फोट होता है। ये सौर तूफान कहलाते हैं। इससे अंतरिक्ष में बहुत सारा चार्ज प्लाज़्मा फैलता है। कई दफा इन सौर तूफ़ानों के रास्ते में पृथ्वी आ जाती है, लेकिन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और बाहरी परत अक्सर इन तूफानों से हमारी पृथ्वी को बचा ले जाते हैं।

हालाँकि, इससे धरती की वायुमंडल की बाहरी परत खतरे में आ सकती है। यही वो परत है, जहाँ दुनिया भर के हज़ारों सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। सूर्य से निकली भयंकर गर्मी से सैटेलाइट के जलने या शॉर्ट सर्किट जैसी परेशानियाँ आ सकती हैं। उदाहरण के लिए इसके असर से धरती पर ना कम्युनिकेशन हो पाएगा और न ही मौसम की भविष्यवाणी हो पाएँगी। इस वजह से सूर्य की हलचलों पर नजर रखना जरूरी है।

RJD के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद: वोट नहीं दिया तो 2 वोटरों की पोलिंग बूथ के पास ही कर दी गई हत्या, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसा पहले नहीं देखा

सुप्रीम कोर्ट ने साल 1995 में छपरा के मशरख में हुए डबल मर्डर केस में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को 10 लाख और घायलों के घर वालों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने ऐसा केस पहली बार देखा है।

दरअसल, प्रभुनाथ सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 28 साल पहले अपने कहे के अनुसार वोट नहीं डालने पर पोलिंग बूथ के पास ही 2 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मृतक के भाई ने सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की लड़ाई लड़ी।

लाइव लॉ के मुताबिक इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच में हुई। सुनवाई के बाद जस्टिस कौल ने बचाव पक्ष के वकील से सवाल किया कि वो प्रभुनाथ सिंह के लिए उम्रकैद या मृत्युदंड में से कौन सा विकल्प चुनना चाहेंगे। साथ ही अदालत ने प्रभुनाथ सिंह की उम्र पूछी।

इसके जवाब में प्रभुनाथ सिंह की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि उनके मुवक्किल की उम्र 70 साल है। तब जस्टिस कौल ने कहा, “तब तो भगवान ही मालिक है।” जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि ऐसा मामला उन्होंने पहली बार देखी है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा दी।

बताते चलें कि इस केस में पटना की एक अदालत ने साल 2008 में प्रभुनाथ सिंह को दोषमुक्त करार दिया था। इसके बाद साल 2012 में पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाई थी। हालाँकि, मृतक के परिजन ने अपनी लड़ाई जारी रखी और फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई 18 अगस्त को पूरी हो चुकी थी।

आखिरकार 1 सितंबर 2023 (शुक्रवार) को अदालत ने प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद की सजा सुना दी गई। अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले में पुनर्विचार याचिका दायर होने का भी तर्क दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे बाद में चैंबर में देखने का आदेश दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितम्बर को बिहार के गृह सचिव और DGP को प्रभुनाथ सिंह को अदालत में पेश करने का आदेश जारी किया था।

किस मामले में हुई सजा

यह मामला 1995 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों से जुड़ा हुआ है। अप्रैल माह में छपरा के मशरख में 18 वर्षीय राजेंद्र राय और और 47 साल के दरोगा राय की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या एक पोलिंग बूथ के पास की गई थी। हत्या का आरोप तब बिहार पीपुल्स पार्टी से चुनाव लड़ रहे प्रभुनाथ सिंह पर लगा था। इस चुनाव में उनकी हार हुई थी।

इस चुनाव में प्रभुनाथ सिंह को अशोक सिंह ने हरा दिया था। जनता दल से जीते हुए विधायक अशोक सिंह को भी प्रभुनाथ सिंह की तरफ से 90 दिनों के अंदर मार देने की धमकी दी गई थी। आखिरकार 90 दिन बाद 3 जुलाई 1995 को अशोक सिंह की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

प्रभुनाथ सिंह को विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के बाद वो साल 2017 से सेंट्रल जेल हजारीबाग़ में बंद हैं। हालाँकि, पटना की निचली अदालत और पटना हाईकोर्ट ने उन्हें राजेंद्र व दरोगा राय हत्याकांड में बरी कर दिया था। इस फैसले को मृतक राजेंद्र राय के भाई हरेंद्र राय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

चीन के काल्पनिक नक़्शे पर भड़के कई देश: भारत के बाद ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया ने भी किया खारिज, दक्षिण चीन सागर पर दावे को भी नकारा

चीन के काल्पनिक नक़्शे पर भारत के विरोध के तीन दिन बाद चार अन्य देशों ने भी उनके क्षेत्रों को अपना बताने वाले चीन के मानचित्र जारी करने पर आलोचना की है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार शाम (29 अगस्त, 2023 ) को ही चीन द्वारा काल्पनिक क्षेत्रीय मानचित्र का 2023 का संस्करण जारी करने पर पलटवार किया। चीन के विचित्र दावों पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चीन के तथाकथित 2023 “मानक मानचित्र” को खारिज कर दिया।

चीन का विकृत मानचित्र (स्रोत X)

वहीं अब, फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया और वियतनाम ने भी चीन द्वारा जारी “मानक मानचित्र” को अस्वीकार कर भारत की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। बता दें कि चीन के काल्पनिक मानचित्र में इन चार देशों के क्षेत्रों को भी चीन ने अपना बताया है। वियतनाम ने बयान दिया है कि यह नक्शा स्प्रैटली और पारासेल द्वीपों पर उसकी संप्रभुता और उसके जल क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।

वियतनाम के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, फाम थू हैंग (Pham Thu Hang) ने सरकार की वेबसाइट पर एक बयान में कहा, “वियतनाम डॉटेड लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर में चीन के सभी दावों का दृढ़ता से विरोध करता है।” फिलीपींस ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान जारी किया है। 

फिलीपींस सरकार ने भी एक बयान जारी कर विरोध जताया है,  फिलीपींस ने बयान में कहा, “फिलीपींस के समुद्री क्षेत्रों पर चीन की कथित संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र को वैध बनाने के इस नवीनतम प्रयास का अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के तहत कोई आधार नहीं है।”

बता दें कि चीन ने अपने काल्पनिक क्षेत्रीय मानचित्र का नवीनतम संस्करण जारी किया है जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख (अक्साई चिन क्षेत्र) जैसे भारतीय क्षेत्रों को अपना बताया। भारतीय क्षेत्रों के अलावा, चीन के नक़्शे में ताइवान और दक्षिण चीन सागर में विवादास्पद 9-डैश लाइन भी शामिल थी, लेकिन इस बार उसने दक्षिण चीन सागर में अपना दावा बढ़ाते हुए इसे 10-डैश लाइन तक बढ़ा दिया; जबकि इस क्षेत्र का अधिकांश भाग पश्चिमी फिलीपींस सागर में शामिल है।

आधिकारिक फिलीपींस समाचार एजेंसी ने विदेश मामलों के प्रवक्ता मा टेरेसिटा डाज़ा ( Ma. Teresita Daza) ने कहा, “(2016 Arbitral Award) ने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘नाइन-डैश लाइन’ के प्रासंगिक हिस्से से घिरे दक्षिण चीन सागर के समुद्री क्षेत्र कन्वेंशन के विपरीत हैं और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”

चीन द्वारा हाल ही में जारी किए गए विकृत मानचित्र में, उसने दक्षिण चीन सागर के 10-डैश लाइन तक दावा थोक दिया है।  (स्रोत: एएनसी डिजिटल/यूट्यूब)

मलेशिया और ताइवान भी चीन के आक्रामक विस्तारवादी रवैये की आलोचना करते हुए विरोध में आगे आए। मलेशिया ने कथित तौर पर कहा कि वह चीन को प्रोटेस्ट नोट भेजेगा। बर्नामा समाचार एजेंसी ने विदेश मंत्री डॉ. जाम्ब्री अब्दुल (Dr Zambry Abdul Kadir) के हवाले से कहा, “यह हमारी प्रथा रही है (इस तरह के मुद्दों से निपटने के दौरान)…और विस्मा पुत्रा (विदेश मंत्रालय) द्वारा कल जारी किए गए बयान के आधार पर, अगले कदम में एक विरोध नोट भेजना शामिल है।” 

ताइवान ने कहा कि उस पर कभी भी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा शासन नहीं किया गया है। “ताइवान, चीन गणराज्य, एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है जो पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के अधीन नहीं है। पीआरसी ने कभी भी ताइवान पर शासन नहीं किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेफ लियू ने ताइवान न्यूज को बताया, ये सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त तथ्य और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मौजूद है।

यह विवाद तब सामने आया जब चीनी सरकार के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स ने एक पोस्ट किया। पोस्ट में कहा गया कि प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 28 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चीन का नवीनतम ‘मानक मानचित्र’ लॉन्च किया। इस चीन के ‘मानक मानचित्र’ के नवीनतम संस्करण के रूप में बताया गया।

गौरतलब है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अभी हाल ही में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात की थी और इस बात पर जोर दिया था कि दोनों देशों को सीमा पर तनाव कम करने के लिए व्यापक बातचीत करनी चाहिए। उस चर्चा की पृष्ठभूमि में, और जी-20 शिखर सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले ही भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा करने में चीन का आक्रामक व्यवहार एलएसी पर तनाव को हल करने के लिए उसकी ओर से ईमानदारी की कमी को दर्शाता है।

मुंबई में ‘बिन बुलाए मेहमान’ बने कपिल सिब्बल, I.N.D.I.A. के मंच पर हो गया क्लेश: फोटो सेशन में किए गए ‘किनारे’

मुंबई में विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. के मंच पर उस समय स्थिति असहज हो गई, जब मंच पर कपिल सिब्बल पहुँच गए। एक तो सिब्बल पूर्व कॉन्ग्रेसी हैं, जो अब समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं। दूसरी तरफ, वो ‘बिन बुलाए मेहमान’ के तौर पर पहुँचे और वो भी सीधे मंच पर। उनकी मौजूदगी से कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई, जिसे संभालने के लिए कई नेताओं को बातचीत करनी पड़ी।

केसी वेणुगोपाल ने सिब्बल की मौजूदगी पर जताई नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपिल सिब्बल के मंच पर पहुँचने से केसी वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे से शिकायत की। चूँकि उद्धव ठाकरे ही मुंबई में मुख्य मेजबान की हैसियत में हैं, ऐसे में उन्होंने चीजों को गंभीरता से नहीं लेने की सलाह दी। इस बीच, अखिलेश यादव और फारुख अब्दुल्ला ने भी मामले को संभालने की कोशिश की, लेकिन मामला संभला नहीं।

इसके बाद ये मामला राहुल गाँधी के पास ले जाया गया, तो राहुल गाँधी ने हरी झंडी दे दी। राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें कपिल सिब्बल की मौजूदगी से कोई आपत्ति नहीं है। मंच पर फोटो खिंचाने के कार्यक्रम में सिब्बल सबसे किनारे खड़े नजर आए। वहीं, उद्धव ठाकरे के दोनों ओर सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े दिखे।

कई अहम मामलों में राहुल-सोनिया-कॉन्ग्रेस के वकील

बता दें कि राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ चल रहे कई मामलों की पैरवी कपिल सिब्बल ही कर रहे हैं। वो कई मामलों में कॉग्रेस पार्टी के वकील हैं। चूँकि, वो कॉन्ग्रेस में लंबे समय तक रहे हैं और यूपीए की सरकारों में कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं।

वैसे, पिछले साल कपिल सिब्बल को कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा की सीट नहीं मिली तो वो समाजवादी पार्टी में चले गए। समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। उन्होंने अपने नॉमिनेशन के समय कहा था कि वो कॉन्ग्रेस के नेता ‘थे’ अब वो समाजवादी पार्टी के नेता ‘हैं’।

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री का बेटा, लखनऊ वाले घर में लाइसेंसी पिस्टल… कौशल किशोर के बेटे के दोस्त को किसने मारी गोली?

केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर (Kaushal Kishore) के लखनऊ स्थित घर में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान विनय श्रीवास्तव के तौर पर हुई है। वह कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर का दोस्त था। पुलिस ने मौके से पिस्टल बरामद की है।

जिस पिस्टल से विनय को गोली मारी गई थी, वह विकास का ही बताया जा रहा है। मंत्री कौशल किशोर ने भी इसकी पुष्टि की है। साथ ही यह भी बताया है कि घटना के समय उनका बेटा दिल्ली में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का घर लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के बेगरिया गाँव में है। इस घर पर उनका बेटा विकास किशोर रहता है। घर में उसके दोस्तों का भी आना-जाना लगा रहता है। लखनऊ के डीएसपी राहुल राज ने बताया कि इसी घर में 31 अगस्त 2023 की रात गोली लगने से विनय श्रीवास्तव की मौत हुई। उसके सिर पर भी चोट के निशान मिले हैं। घटना वाली रात घर पर 6 लोग आए थे। इन लोगों ने खाना-पीना साथ खाया था।

डीएसपी ने बताया कि मौके से एक पिस्टल बरामद हुई है। मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और फोरेंसिक टीम मामले की जाँच में जुटी हुई है। घर में लगे सीसीटीवी के फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं।

मृतक विनय श्रीवास्तव के भाई विकास का कहना है कि उनका भाई विकास किशोर का बेहद करीबी था। अधिकतर उनके ही घर पर रहता था। अपने घर देर तक लौटता था। वहाँ अजय रावत, अंकित वर्मा, शमीम बाबा भी रहते हैं। भाई के आत्महत्या करने के दावों को नकारते हुए उसने कहा है कि यदि ऐसा है तो उसे रोकने की कोशिश वहाँ मौजूद लोगों ने क्यों नहीं की। उनके अनुसार विनय की शर्ट फटी हुई थी। इससे लगता है कि हत्या से पहले उसके साथ झगड़ा भी किया गया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के भाई ने यह भी कहा है कि विनय की हत्या साजिश के तहत की गई। उसका दावा है कि मंत्री का बेटा कहीं भी जाता था तो ​विनय को साथ ही लेकर जाता था। लाइसेंसी पिस्टल भी साथ रखता था। उसने पूछा है कि इस बार वे विनय को साथ लेकर दिल्ली क्यों नहीं गए? लाइसेंसी पिस्टल घर पर छोड़कर क्यों गए?

वहीं केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने कहा है कि उनका बेटा दिल्ली में है। घटना के वक़्त मौके पर मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा, “घटना कैसे हुई, यह नहीं पता है। पुलिस इसकी जाँच कर रही है। जानकारी मिलने के बाद मैंने इसकी जानकारी पुलिस कमिश्नर को दी। घर में मौजूद लोगों ने भी शायद पुलिस को फोन किया था। पुलिस इसकी जाँच कर रही है। हम मृतक के परिजनों के साथ हैं। अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी।”

कौशल किशोर ने बताया कि उनका बेटा 31 अगस्त की शाम 4:50 की फ्लाइट से लखनऊ से दिल्ली गए थे। मौके से बरामद हुई पिस्टल को लेकर उनका कहना है कि उसका लाइसेंस सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही मान्य है। इसलिए उनका बेटा इसे घर में ही रखकर दिल्ली गया था। 

‘मेरे बाल पकड़ कर किया अप्राकृतिक सेक्स’: भोजपुरी अभिनेत्री प्रियांशु सिंह का अभिनेता पुनीत सिंह राजपूत पर आरोप, FIR दर्ज करवा कर माँगा न्याय

भोजपुरी फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रियांशु सिंह ने अपने सह अभिनेता पुनीत सिंह राजपूत पर रेप और अप्राकृतिक सेक्स का आरोप लगाया है। उन्होंने पुनीत के खिलाफ 1 अगस्त 2023 को FIR दर्ज करवाई है। शिकायत में पुनीत पर शादी का झाँसा देकर मुकर जाने का भी आरोप है। प्रियांशु का कहना है कि अब वो पुनीत से शादी नहीं करेंगी। बताते चलें कि दोनों कई फिल्मों और वीडियो में साथ काम कर चुके हैं।

प्रियांशु ने 31 अगस्त 2023 को ET टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में ये खुलासा किया। प्रियांशु के मुताबिक, सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी और पुनीत की मुलाकात हुई थी। शुरुआत में प्रियांशु को पुनीत का व्यवहार काफी सौम्य लगा। पुनीत भी फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहता था। आरोप है कि इसके लिए पुनीत ने प्रियांशु के सम्पर्कों का इस्तेमाल किया।

प्रियांशु ने आगे बताया कि पुनीत ने हमेशा उनसे शादी का वादा किया। थोड़े समय बाद पुनीत का प्रियांशु के घर आना-जाना शुरू हो गया। पुनीत ने खुद को प्रियांशु के घर के आस-पास ही शिफ्ट कर लिया। आरोप है कि एक दिन जब प्रियांशु घर में अकेली थी, तब पुनीत वहाँ शराब के नशे में आया। पुनीत ने प्रियांशु से जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

अगले दिन प्रियांशु ने रोते हुए उसकी करतूत बताई। जब प्रियांशु ने इसकी शिकायत पुलिस में करने की बात कही, तब पुनीत गिड़गिड़ा कर माफ़ी माँगने लगा। पुनीत ने उस रात की घटना के लिए माफ़ी माँगी और भविष्य में शादी करने का भरोसा दिया। माफ़ी माँगने के बावजूद एक दिन फिर पुनीत ने प्रियांशु के बाल पकड़े और उनसे अप्राकृतिक सेक्स किया।

प्रियांशु ने आगे बताया कि कोई भी लड़की अपने रिश्तों के ऐसे बुरे अनुभव साझा नहीं करना चाहती पर उन्होंने ऐसा न्याय की उम्मीद के साथ किया है। प्रियांशु ने पुनीत के खिलाफ 1 अगस्त 2023 को FIR भी करवाई है। उन्होंने भविष्य में पुनीत से शादी न करने का एलान करते हुए उसे जल्द से जल्द सजा सजा होने की उम्मीद जताई।

दिल्ली मेट्रो में फिर से हस्तमैथुन: रक्षाबंधन पर भीड़ के बीच युवक ने नाबालिग पर गिराया स्पर्म; लोगों ने जमकर धुना

दिल्ली मेट्रो से एक बार फिर से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति ने भीड़ होने के बावजूद हस्तमैथुन किया और अपना स्पर्म नाबालिग लड़की पर गिरा दिया। लड़की ने इस घटना की जानकारी अपनी माँ को दी, जिसके बाद लोगों ने आरोपित को मेट्रो में ही पकड़कर खूब धुना और सुरक्षाकर्मियों के हवाले कर दिया था। आरोपित पश्चिम बंगाल का रहने वाला है।

राखी के दिन भीड़ में युवक ने की शर्मनाक हरकत

न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना बुधवार (30 अगस्त 2023) की रात करीब साढ़े आठ बजे ‘रेड लाइन’ की है। रक्षाबंधन होने के कारण मेट्रो कोच में काफी भीड़ थी। नाबालिग की माँ को पता चला कि युवक ने उनकी बेटी पर अपना स्पर्म गिरा दिया है, तो वह बेटी के साथ सीलमपुर स्टेशन पर उतर गई। इस बीच दो लोगों ने आरोपित को मेट्रो में ही पकड़ लिया और उसे शाहदरा स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो अधिकारियों के हवाले कर दिया। इस दौरान लोगों ने उसकी पिटाई भी की।

वहीं इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का बयान भी आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा, “कुछ लोगों के चलते दिल्ली मेट्रो पूरे देश में बदनाम होती जा रही है। अब एक आदमी छोटी बच्ची को देखके मेट्रो में मास्टरबेशन करते हुए पकड़ा गया है। क्या घटियापन चल रहा है? हमने दिल्ली पुलिस को नोटिस इशू किया है। दिल्ली महिला आयोग मामले में सख़्त कार्यवाही करवाएगा।”

पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले

दिल्ली मेट्रो में ऐसी घटनाएँ पहले भी आ चुकी हैं। बीती 10 अगस्त को मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन पर एक महिला को अश्लील इशारा करने के आरोपित 23 साल के युवक की गिरफ्तारी की गई थी। वहीं, 7 अगस्त को भी पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, वो मंडी हाउस स्टेशन के दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी महिला को देखकर हस्तमैथुन करने लगा था।

अप्रैल माह में हस्तमैथुन करते युवक का वीडियो हुआ था वायरल

बता दें कि अप्रैल माह में एक युवक का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो दिल्ली मेट्रो में ही सफर के दौरान पॉर्न देखते हुए हस्तमैथुन कर रहा था। उसके पास में ही एक जोड़ा इसकी वजह से काफी असहज हो रहा था। 27 सेकंड के उस वीडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हुई थी।

पहले अबू अंसारी ने फँसाकर बनाया मुस्लिम, अब उसका अब्बा बीवी बनने का डाल रहा दबाव: लखनऊ की पीड़िता बोली- ‘द केरल स्टोरी’ का मैं जीवित सबूत

सोशल मीडिया में एक लव जिहाद पीड़िता का वीडियो वायरल है। पीड़ित उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली है। उसने जिस अबू आमिर अंसारी पर फँसाकर निकाह और इस्लामी धर्मांतरण का आरोप लगाया है, वह मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। फिलहाल अपने परिवार के साथ बरेली में रहता है। पीड़िता के अनुसार अब अबू अंसारी का अब्बा उस पर निकाह कर अपनी बीवी बनने का दबाव डाल रहा है।

पीड़िता के अनुसार 26 अगस्त 2023 को सुसराल वालों ने उसके साथ मारपीट की थी। अगले दिन उसने बरेली के बारादरी थाना में इसकी शिकायत दी। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। शिकायत में पीड़िता ने कहा है कि घटना वाले दिन वह बरेली के मी जॉन क्लीनिक के बाहर से गुजर रही थी। यह क्लीनिक उसके देवर अबू सईद और अबू सूफियान अंसारी चलाते हैं।

पीड़िता के अनुसार इसी दौरान क्लीनिक में काम करने वाला मोहम्मद इमरान उसके पीछे लग गया। उसने उसे जान से मारने की धमकी दी। बताया कि उसे अबू सईद और सूफियान ने भेजा है। शिकायत में इमरान की धमकियों और गालियों का जिक्र है। उसने कथित तौर पर पीड़िता से कहा, “तुम एक हिन्दू हो कर मुस्लिम को कैसे परेशान कर रही हो।” कुछ राहगीरों के आने के बाद इमरान मौके से भाग गया। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

खुद को बताया द केरल स्टोरी का जीवित सबूत

ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़िता ने फिल्म द केरल स्टोरी की कहानी रियल बताते हुए खुद को इसका जीवित सबूत बताया है। पीड़िता के अनुसार अबू आमिर साल 2006 में पढ़ाई के लिए लखनऊ आया था। यहीं वह उससे अमित बनकर मिला था। थोड़े समय के मेलजोल के बाद अबू ने उसे अपने भाई अबू सईद और बहन रानी उम्मे हबीबा से मिलवाया। कथित तौर पर ये दोनों भी हिंदू बनकर उससे मिले थे। साल 2010 में अबू आमिर दिल्ली चला गया, लेकिन उसकी पीड़िता से बातचीत जारी रही।

मुस्लिम से निकाह पर घर वालों ने छोड़ा साथ

पीड़िता ने बातचीत में दावा किया कि थोड़े समय बाद उसे अबू आमिर के मुस्लिम होने का पता चल गया था। लेकिन तब तक वह उसका उसका ब्रेनवॉश कर चुका था। शादी की बात आमिर अपनी बहन की निकाह का बहाना बना काफी समय तक टालता रहा। 14 जून 2020 को आमिर और पीड़िता का निकाह अलीगढ़ क्वार्सी थाना क्षेत्र की गौसिया मस्जिद में हुआ। पीड़िता का कहना है कि निकाह के दौरान ही उससे इस्लाम कबूल करवाकर मुस्लिम नाम दे दिया गया था।

पीड़िता के अनुसार ब्रेनवॉश की वजह से उस समय उसे अपने परिजनों की नसीहत ठीक नहीं लगी। निकाह के बाद घर वालों ने उससे रिश्ते तोड़ लिए। कथित तौर निकाह के दौरान पीड़िता से हिंदू धर्म का पालन करने की छूट का वादा किया गया था। पीड़िता ने निकाह के बाद हिन्दू तौर-तरीके अपनाए रखे। लेकिन कुछ दिनों बाद अबू आमिर के परिवार वाले पीड़िता को प्रताड़ित करने लगे। पीड़िता ने इस प्रताड़ना के खिलाफ अलीगढ़ पुलिस को अक्टूबर 2020 में शिकायत दी थी। शिकायत में पीड़िता ने अपने ससुर अबू हुरैरा, सास सईदा खातून, देवर अबू सईद और अबू सूफियान, देवरानी फरहत हुमा, ननद उम्मे हबीबा रानी और उम्मे रबीबा के खिलाफ IPC 498 A के तहत घेरलू हिंसा की FIR दर्ज करवाई थी।

बरेली गई तलाश में तो हुई मारपीट

शिकायत में पीड़िता ने ससुराल वालों पर खुद को घर से बेदखल करने की साजिश का आरोप लगाया है। पीड़िता ने अलीगढ़ वाले मकान पर अपना दावा जताते हुए कोर्ट में केस भी किया था। उसका दावा है कि साल 2022 में वह केस जीत भी गई। लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस उसे शौहर के मकान पर कब्जा दिलाने में नाकाम रही।

पीड़िता का कहना है कि कोर्ट में केस हारने के ससुराल के लोग अलीगढ़ के घर में ताला लगाकर बरेली शिफ्ट हो गए। उन्होंने निचली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर रखी है। पीड़िता के अनुसार वह ससुराल वालों की तलाश में बरेली गई थी, जहाँ 27 अगस्त 2023 को उसके साथ मारपीट की घटना हुई।

ससुर से निकाह का दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता के ससुर अबू हुरैरा ने उसे अपनी बीवी बना कर रखने का दबाव बनाया। लड़की के शौहर अबू आमिर ने भी इस इच्छा में अपनी रजामंदी जताई। बीच में अबू हुरैरा ने पीड़िता से जबरदस्ती करने की भी कोशिश की। लड़की का आरोप है कि आरोपित चाह रहे थे कि वह तनाव में आत्महत्या कर ले। पीड़िता का कहना है कि उसने अपनी ससुराल में साफ कर दिया था कि वह 4 बीवियों वाले नियम नहीं मानती। इसके बाद आरोपितों द्वारा पीड़िता की कथित तौर पर पिटाई की गई।

ऑपइंडिया से हुई बातचीत में भी पीड़िता ने अपने ससुर को आपराधिक छवि वाला बताया। पीड़िता के आरोपों पर बरेली पुलिस जाँच कर रही है।

क्या संसद के विशेष सत्र में ‘एक देश, एक चुनाव’ पर आएगा बिल? मोदी सरकार ने बनाई कमेटी, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद होंगे मुखिया

केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर 2023 के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें से एक यह भी है कि मोदी सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) का बिल ला सकती है। अब खबर आ रही है कि इसको लेकर सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई है। हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक कमिटी का गठन किया है। कहा जा रहा है कि इस कमिटी को लेकर सरकार शुक्रवार (1 सितंबर, 2023) को नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। इस नोटिफिकेशन में कमिटी के सदस्यों के नाम, कार्यकाल समेत अन्य जानकारियाँ होंगी।

यह कमिटी ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करने से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर गौर करेगी। साथ ही इसको लेकर देश की जनता से भी राय लेने की बात सामने आ रही है। इस कमिटी के बनने के बाद इस बात को लेकर चर्चा तेज गई है कि मोदी सरकार संसद के विशेष सत्र में ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बिल ला सकती है।

हालाँकि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष कहना है कि सरकार ने इसको लेकर उनसे बात नहीं की। इसके अलावा इसकी संवैधानिकता पर भी सवाल उठाया जा रहा है। वहीं मीडिया में कमिटी गठन की खबर आने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की है।

‘एक देश, एक चुनाव’ यानी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाने के मसले पर लंबे समय से बहस चल रही है। इसमें संभावना यह भी है कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव भी एक साथ कराए जाएँ। दरअसल, अलग-अलग चुनाव होने से देश में हर 3-4 महीने में चुनाव होते रहते हैं। इससे उन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इससे विकास कार्य ठप्प पड़ जाते हैं। इसके अलावा, चुनावों में करोड़ों रुपए भी खर्च होते हैं। इससे सरकार पर बोझ बढ़ता है। इन सब चीजों से बचने के लिए ‘एक देश, एक चुनाव’ की माँग होती रहती है।

ज्ञात हो कि आजादी के बाद 1951-52 में देश में पहली बार चुनाव हुए थे। तब लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। इसके बाद साल 1957, 1962 और 1967 में भी लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए। इसके बाद साल 1968-69 में कई सरकारें भंग कर दी गईं। वहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने साल 1971 में समय पहले ही लोकसभा चुनाव कराए थे। इस तरह से देश में एक साथ होने वाले चुनावों की परंपरा टूट गई। इसके बाद की सरकारों ने देश में एक साथ चुनाव कराने की कोशिश नहीं की।