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ऐप से पता लगाते थे वाहन मालिक का नाम, हिंदू होने पर करते हमला: इस्लामी कट्टरपंथियों के व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर नया खुलासा, 4 गिरफ्तार

गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने मुस्लिम लड़कियों से संपर्क रखने पर हिंदू लड़कों को निशाना बनाने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों के एक गुट का खुलासा किया था। इन लोगों ने व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। इस मामले में नया खुलासा हुआ है कि आरोपित वाहन नंबर के जरिए उसके मालिक का नाम पता करते थे। यदि वह हिंदू होता तो उस पर हमला करते। लड़की और उसके परिजनों को भी ब्लैकमेल करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडोदरा पुलिस ने 30 अगस्त को इस्लामी कट्टरपंथियों के गुट से जुड़े 4 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं 9 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान याकिब अली शेख, नौमान शेख, मोहसिन पठान और अबरार खान सिंधी के रूप में हुई। ये सभी ‘आर्मी ऑफ मेहँदी’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए थे।

ग्रुप से जुड़े लोग बेहद शातिर तरीके से काम करते थे। जैसे याकिब अली अगर हिंदू लड़के के साथ किसी मुस्लिम लड़की को देखता तो वह उसका पीछा करना शुरू कर देता। इसको लेकर वह ग्रुप में ऑडियो मैसेज भेजकर बताता था कि हिंदू लड़का और मुस्लिम लड़की किस ओर जा रहे हैं। इसके बाद वह मौके पर पहुँचकर वीडियो बनाता। वहीं, मोहसिन पठान और अबरार खान वॉयस मैसेज के जरिए ग्रुप से जुड़े लोगों को ‘उन्हें रोको..’, ‘आईकार्ड चेक करो..’ जैसे निर्देश देते थे।

बीते 5 महीनों में कट्टपंथियों ने कम से कम 15 लोगों को निशाना बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया। पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि अगर मुस्लिम लड़की किसी के साथ बाइक पर जा रही होती तो कट्टरपंथी उसका पीछा करते। फिर ऐप के माध्यम से वाहन नंबर से मालिक का नाम पता करते। अगर मालिक हिंदू निकला, तो उसे रोककर वीडियो बनाते और मारपीट करते थे।

मुस्लिम लड़कियों के साथ दिखने वाले हिंदू लड़कों को निशाना बनाने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों ने फरवरी 2023 में ‘हुसैनी लश्कर’ नामक 500 लोगों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप से जुड़े हुए लोग पूरे वडोदरा शहर में नजर रखते थे। पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आरोपित कोई भी ग्रुप 3-4 महीने तक ही चलाते थे। इसके बाद उस ग्रुप को डिलीट कर नया ग्रुप बनाते। ‘हुसैनी लश्कर’ के बाद ‘मेहँदी आर्मी’ और फिर ‘लश्कर-ए-आदम’ नामक ग्रुप इसी के तहत बनाया गया था।

फिलहाल पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि इस ग्रुप से कितने लोग और कहाँ-कहाँ के लोग जुड़े हुए थे। आरोपितों को कहीं से फंडिंग मिलने को लेकर भी पुलिस जाँच कर रही है। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी न केवल बड़ोदरा बल्कि अन्य शहरों में भी इसी तरह व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर निशाना बनाते थे। इस मामले में पुलिस अब तक 73 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इससे पहले पुलिस ने व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन मुस्तकिम शेख, बुरहान सैयद और साहिल शेख को गिरफ्तार किया था।

कैसे हुआ खुलासा

2 महीने पहले वडोदरा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें शहर के अकोटा ब्रिज के पास एक आइसक्रीम पार्लर में एक हिंदू युवक और एक मुस्लिम लड़की बैठे थे, तभी कुछ युवक वहाँ पहुँच गए और हंगामा करते हुए युवक को पकड़ लिया। उन्होंने हिंदू लड़के के साथ बदतमीजी की और इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने पाया कि कुछ लोग ऐसी मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाते थे, जो हिंदू लड़कों के साथ दिख जाती थी। ये लोग व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर ऐसी मुस्लिम लड़कियों की तलाश करते थे। वे मुस्लिम लड़की और हिंदू लड़के का वीडियो बना लेते थे और फिर उन लड़कियों के परिवारों को वीडियो भेजकर ब्लैकमेल करते थे।

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए डीसीपी अभय सोनी ने मीडिया को बताया था कि त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है तो किसी भी सांप्रदायिक घटना को रोकने के लिए वह सोशल मीडिया पर नजर रख रहे हैं। इसी बीच ट्विटर पर एक वायरल वीडियो देखने को मिला, जिसमें अलग-अलग धर्म के दो पुरुष और महिलाएँ घूम रहे थे, कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बदसलूकी की। वीडियो की जाँच करने पर पता चला कि ऐसे लोगों को टारगेट करके व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें महिलाएँ एक धर्म की हैं और पुरुष दूसरे धर्म के हैं। उसका नेटवर्क पूरे वडोदरा शहर में फैला है, जिसमें कई युवा जुड़े हुए हैं।

30 साल से थी तलाश, पकड़े गए ‘आम आदमी’ बनकर छिपे 8 आतंकी: सरकारी नौकरियों में घुस गए थे कुछ, एक तो कोर्ट में कर रहा था काम

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 8 ऐसे आतंकियों को गिरफ्तार किया जिनकी करीब 30 साल से तलाश थी। ये लोगों के बीच आम आदमी बन कर छिपे हुए थे। इनमें से दो ने सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी। एक शिक्षा विभाग में तो दूसरा अदालत में मुलाजिम है।

पकड़े गए इन आतंकियों पर अपहरण, हत्या, कश्मीरी हिन्दुओं और सुरक्षा बलों पर हमले के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में कानून की विभिन्न धाराओं के साथ टाडा और पोटा के तहत केस दर्ज है। इनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि गुरुवार (31 अगस्त 2023) को की गई। सुरक्षा एजेंसियों को शक है इसी तरह कई और फरार आतंकी भी छिपे हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार आतंकियों में जम्मू के शहीदी चौक का आदिल फारुख फरीदी शिक्षा बोर्ड में काम करता है। वहीं डोडा का इश्तियाक अहमद अपने ही जिले की कोर्ट में टाइप राइटर के पद पर है। इनके अलावा इकबाल, मुजाहिद हुसैन, तारिक, एजाज और जमील और इश्तियाक पकड़े गए हैं। फरार होने के बाद शुरुआत में ये भूमिगत रहे और बाद में अपने घर के आसपास आम नागरिकों की तरह रहने लगे। SIA ने इन सभी को जम्मू की टाडा अदालत में पेश किया है।

गिरफ्तार 8 आतंकियों पर साल 1992 में डोडा में बंदूक के बल पर एक व्यक्ति का अपहरण कर जान से मारने की धमकी देने, 23-24 अप्रैल 1993 की रात 2 व्यक्तियों का अपहरण कर एक की हत्या व दूसरे को घायल करने, साल 1991 में लोगों को हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा के लिए भड़काने, साजिशन हड़ताल कराने जैसे आरोप हैं। साल 1993-94 में सुरक्षा बलों ने इनके द्वारा छिपाए गए हथियार और गोला-बारूद को जब्त कर लिया था। लेकिन कार्रवाई के दौरान ये सभी 8 आतंकी फरार होने में सफल रहे थे। बताया जा रहा है कि अपनी आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए इन सभी ने मस्जिदों का भी सहारा लिया था।

बताते चलें कि यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर की जाँच एजेंसी SIA और CID ने सामूहिक तौर पर की है। दोनों टीमों ने सामूहिक तौर पर भगोड़ों की तलाश का अभियान छेड़ रखा है। भगोड़ों की कुल तादाद 734 बताई जा रही है। इनमे से 417 भगोड़े कश्मीर और 317 जम्मू क्षेत्र से हैं। इनमें से 369 भगोड़ों का वेरिफिकेशन हो चुका है। लिस्ट में शामिल 80 भगोड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 जेलों में बंद हैं। वहीं 45 ने देश छोड़ कर पाकिस्तान जैसे मुल्कों की शरण ली है, जबकि 127 का अभी तक अता-पता नहीं चल पाया है।

‘चलो करगिल…’: ईशनिंदा कानून को लेकर गिलगिट-बाल्टिस्तान में बगावत पर उतरे शिया, पाकिस्तान में गृहयुद्ध और भारत में विलय की दी चेतावनी

पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय भूभाग गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में एक शिया धर्मगुरु की गिरफ्तारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। यह प्रदर्शन क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया जा रहा है। इसमें ‘चलो, चलो… करगिल चलो’ के नारे लगाए गए। गिलगिट के स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तान प्रशासन को गृहयुद्ध की चेतावनी दी और कहा कि वे वे भारत में विलय चाहते हैं।

यह विरोध प्रदर्शन स्कर्दू के लोगों ने शिया धर्मगुरु आगा बकीर अल-हुसैनी की गिरफ्तारी के विरोध में किया। आगा बकीर ने पाकिस्तान में कड़े किए जा रहे ईशनिंदा कानून के खिलाफ काउंसिल की बैठक में कहा था कि इस कानून की आड़ में पाकिस्तान में शियाओं को निशाना बनाया जाता है। उनके इस बयान पर सुन्नियों ने 22 अगस्त को प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

शियाओं ने कराकोरम हाइवे किया जाम, सेना के खिलाफ की नारेबाजी

आरोप है कि शिया धर्मगुरू ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। हालाँकि, शिया धर्मगुरू ने आरोपों से इनकार किया है। शियाओं ने कराकोरम हाईवे जाम कर दिया। इस बात से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के खिलाफ नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।

भारत के साथ करेंगे विलय

वीडियो में स्थानीय नेताओं को यह भी कहते हुए दिखाया गया है कि अगर सड़क बंद रही तो लोग पंजाब (पाकिस्तान) या सिंध नहीं जाएँगे, बल्कि करगिल जाएँगे। उनके कहने का सांकेतिक मतलब है भारत में गिलगिट-बल्टिस्तान का विलय। करगिल लद्दाख एरिया में स्थित है और यहाँ शियाओं की एक बडी आबादी निवास करती है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी भी दी कि अगर अल-हुसैनी को जल्द रिहा नहीं किया तो पूरे इलाके में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा।

गिलगिट-बाल्टिस्तान में किया जा रहा डेमोग्राफी चेंज

पाकिस्तान में इस्लाम के सुन्नी फिरके का वर्चस्व है। वहाँ हिंदू और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि इस्लाम के शिया और अहमदी फिरके भी जुल्म के शिकार हो रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से गिलगिट-बाल्टिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी निवास करती है।

पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के शासन से शुरू होकर लगभग सभी सरकारें इस इलाके की जनसांख्यिकीय बदलाव (Demography Change) करने की कोशिश करती रही हैं। बाहर से लाकर यहाँ सुन्नियों को बसाया जा रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र तीन प्रशासनिक भाग में विभाजित है- बाल्टिस्तान, दामेर और गिलगिट। इसका मुख्य प्रशासनिक केंद्र गिलगिट और स्कर्दू शहर हैं।

दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना भारत, चीन को पीछे धकेला: पहली तिमाही में GDP ग्रोथ रेट बढ़कर हुआ 7.8 प्रतिशत

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ( Ministry of Statistics and Programme Implementation ) ने 31 अगस्त 2023 को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गया। यह पिछली तिमाही से 1.7 प्रतिशत अधिक है। अगर भारत के प्रतिद्वंद्वी चीन की बात करें तो अप्रैल-जून तिमाही में उसकी जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत है।

सरकार द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत सेवा गतिविधि और माँग के कारण जून तिमाही में पिछले एक साल में सबसे तेज वृद्धि हुई। अप्रैल-जून तिमाही में वार्षिक आधार पर सकल घरेलू उत्पाद में 7.8% की वृद्धि हुई, जो मार्च तिमाही में 6.1% थी। अगर हम पिछले साल की समान अवधि की बात करें तो विकास दर 13.1% थी।

निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च पर बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण

ईटी से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय निजी क्षेत्र ने निवेश शुरू किया है और आगामी तिमाहियों में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को लेकर आशावाद है। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊँची ब्याज दरों से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रभाव को संभालने में भारत की क्षमता पर आश्वासन व्यक्त किया। निर्मला सीतारमण ने जोर दिया कि कुछ उत्पादों को मुद्रास्फीति के दबाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन Comprehensive Basket Inflation की समग्र प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है।

दरअसल, Comprehensive Basket Inflation में वृद्धि का अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में सामान्य रूप से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं। यह बढ़ती लागत और कम खरीदारी शक्ति का कारण बन सकता है। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापा जाता है, जो एक इंडेक्स है। ये एक निश्चित समय अवधि में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को ट्रैक करता है।

दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है भारत के हालात

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि भारत की तिमाही जीडीपी वृद्धि कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार और आरबीआई वित्त वर्ष 2024 में 6.5% की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को बरकरार रखने में सहज है।

उन्होंने आगे कहा, “यह जानना अच्छा है कि राज्य भी पूंजीगत व्यय सृजन की उस मुहिम में शामिल हो रहे हैं, जिसका केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से समर्थन कर रही है। निजी पूंजी निर्माण अब आगे बढ़ने का इंतजार नहीं कर रहा है। यह चल निकला है। कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति के नियंत्रण से बाहर होने को लेकर चिंता का कोई वास्तविक कारण नहीं है।”

जुलाई में प्रमुख बुनियादी ढाँचा क्षेत्र की वृद्धि बढ़कर 8% हो गई

गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कोयला, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में विस्तार के कारण जुलाई 2023 में आठ प्रमुख बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों की वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई। यह पिछले साल की समान अवधि में 4.8 प्रतिशत थी।

आँकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में स्टील, सीमेंट और बिजली का उत्पादन भी बढ़ा है। हालाँकि, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आँकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में कोर सेक्टर की वृद्धि पिछले महीने की तुलना में कम थी। पिछले महीने यह वृद्धि 8.3 प्रतिशत थी। इसका असर अगले तिमाही की ग्रोथ में दिखेगा।

आरबीआई के अनुमानों के मुताबिक ही रहे परिणाम

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। वहीं, कुछ अर्थशास्त्रियों ने रॉयटर्स सर्वेक्षण में सकल घरेलू उत्पाद दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने विकास दर 8.3 प्रतिशत आँकी थी।

भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर गति से बढ़ रही है और आगामी त्योहारी सीजन के दौरान इसमें और सुधार होने की संभावना है। हालाँकि, अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक विकास पर मुद्रास्फीति और अनियमित मौसम के समग्र प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है, देश के विनिर्माण, सेवाओं और निर्यात क्षेत्रों में मजबूत कर संग्रह के अलावा मजबूत वृद्धि देखी गई है।

भारत को UNSC में स्थाई सदस्यता नहीं दी गई तो खत्म हो जाएगी संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- बदलाव का वक्त आ गया है

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के लिए दबाव बनाए रखना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान यूएनएससी की आधारशिला 1940 के दशक में रखी गई थी, जब सिर्फ 50 देश इसके सदस्य थे।

आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता लगभग 200 हो गई है। इसलिए इसमें बदलाव समय की माँग है। अगर इसे और अनदेखा किया गया तो संयुक्त राष्ट्र की भी विश्वसनीयता धीरे-धीरे कम होती चली जाएगी। उन्होंने कहा कि UN सदस्यों को कबूल करना होगा कि बदलाव का वक्त आ गया है।

दबाव बनाना जारी रखेगा भारत

जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश और पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में अगर भारत को ही यूएनएससी की स्थाई सदस्यता नहीं दी जाएगी तो संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाएँगे। इसलिए भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि इतिहास भारत के पक्ष में है और यकीनन यूएनएससी में सुधार होगा।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी उठी यूएनएससी में विस्तार की माँग

भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि यूएनएससी में परमानेंट सीट पाने वाले अपनी सीट छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में नई सीटों को लगाने की भी जरूरत है। आप देखिए कि अफ्रीका महाद्वीप से एक भी देश यूएन में नहीं है। लैटिन अमेरिका से कोई देश नहीं है। दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा देश भारत यूएनएससी में नहीं है।

उन्होंने सवाल किया, “आप हमें कितने समय के लिए बाहर रख सकते हैं? अगर आप बाहर रखेंगे तो यूएन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगेगा, क्योंकि यूएन के 5 देश ही निर्णय लेंगे तो लोग मानना बंद कर देंगे। लोकतांत्रिक तरीके से भी ये सही नहीं है। ब्रिक्स में भी पहली बार ये कहा गया है कि यूएनएससी में विस्तार की जरूरत है।”

यूएनएससी में सार्थक भूमिका निभाना चाहता है भारत

जयशंकर ने कहा कि भारत यूएनएससी में सुधार के लिए एक ‘वस्तुनिष्ठ और उदार’ दृष्टिकोण रखता है। उन्होंने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यूएनएससी में सुधार सभी सदस्य देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

चूँकि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए प्रासंगिक और सार्थक भूमिका निभाना चाहता है। ऐसे में भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यूएनएसी एक प्रभावी और समकालीन संस्थान बने, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दे सके।

यूएन के शांति मिशनों में भारत की सक्रिय भागीदारी

जयशंकर ने कहा कि भारत यूएन के शांति मिशनों में भी सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूएन के शांति मिशनों में 2,50,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। यही नहीं, भारत यूएन के आर्थिक और सामाजिक एजेंडे को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है और यूएन के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत के दावे के पक्ष में महत्वपूर्ण देश

भारत के विदेश मंत्री के इस बयान का स्वागत किया गया है। दुनिया के कई देश कह चुके हैं कि भारत यूएनएससी में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। साथ ही भारत के दबाव के कारण सुधार की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, रूस समेत दुनिया के अधिकतर देश भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं।

भारत के साथ जर्मनी, जापान और ब्राजील भी यूएनएसी में स्थाई सदस्यता के लिए लंबे समय से अभियान चला रहे हैं। ये तीन देश यूएनएसी में सुधार के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत को उम्मीद है कि इस समूह के साथ मिलकर यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

हालाँकि, भारत को यूएन सुधारों के लिए समर्थन हासिल करने के प्रयासों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक प्रमुख चुनौती यह है कि चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच मतभेद है। इन दोनों देशों के बीच मतभेद संयुक्त राष्ट्र सुधारों को आगे बढ़ाने में बाधा बन रहे हैं।

जैसे चीन ने दिखाया काल्पनिक नक्शा, वैसे ही राहुल गाँधी ने अडानी पर किया ‘गुमराह’: हिंडनबर्ग पर सुप्रीम कोर्ट पैनल की रिपोर्ट की अनदेखी, ताइवानी को बताया चीनी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (31 अगस्त) को ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कुछ विदेशी न्यूज पेपर की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। हालाँकि, यह मामला भी ठीक वैसे ही है जैसे चीन ने काल्पनिक नक्शा दिखाया था, वैसे ही अडानी से करार करने वाले ताइवानी व्यक्ति पर भी राहुल गाँधी ने आज देश को गुमराह किया। आज के अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंडनबर्ग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल की रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए उन्होंने मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए। 

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने गौतम अडानी के मुद्दे पर मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, “जी-20 सम्मेलन देश के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन देश में पारदर्शिता होना जरूरी है। पीएम मोदी का एक करीबी  (गौतम अडानी) ने बिलियन डॉलर का इस्तेमाल शेयर के लिए किया। सवाल उठता है कि ये किसका पैसा है? अडानी का या और किसी का? इसकी जाँच होनी चाहिए है।”

राहुल गाँधी ने यह भी कहा, “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना नाम साफ करें और स्पष्ट रूप से बताएँ कि क्या चल रहा है। कम से कम JPC की अनुमति दी जानी चाहिए और गहन जाँच  होनी चाहिए। मुझे समझ नहीं आ रहा कि प्रधानमंत्री जाँच क्यों नहीं करवा रहे हैं? वे चुप क्यों हैं और जो लोग ज़िम्मेदार हैं क्या उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया गया है? G20 नेताओं के यहाँ आने से ठीक पहले यह प्रधानमंत्री पर बहुत गंभीर सवाल उठा रहा है।”

हालाँकि, राहुल गाँधी यहाँ जिस विदेशी रिपोर्ट की बात कर रहे हैं उस हिंडनबर्ग रिपोर्ट है और दूसरा ऑर्गेनाइजड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ का रिपोर्ट, पहली हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आने के बाद अडानी समूह के खिलाफ जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय (SC) द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल ने पहले ही कहा है कि कीमतों में हेरफेर को लेकर पहली नजर में किसी तरह की रेगुलेटरी कमी नहीं दिखी है। अदालत द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) को अडानी समूह की संस्थाओं की अपनी जाँच में कुछ नहीं मिला है। 

इस तरह से राहुल गाँधी का यह आरोप कि मोदी सरकार अडानी को छूट दे रही है जबकि अडानी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच चल रही है। शीर्ष अदालत ने 17 मई 2023) को ही अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जाँच पूरी करने के लिए SEBI को तीन महीने का विस्तार दिया था। 

वहीं ऑर्गेनाइजड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ (ओसीसीआरपी) ने अडानी समूह पर आरोप लगाया कि उसके प्रवर्तक परिवार के साझेदारों से जुड़ी विदेशी इकाइयों के द्वारा समूह के शेयरों में करोड़ों डॉलर का निवेश किया गया। हालाँकि, अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। 

इस मामले में अडानी समूह ने एक बयान में ओसीसीआरपी की रिपोर्ट को बेवकूफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट को ही पुनर्जीवित करने का विदेशी मीडिया का प्रयास बताया। उन्होंने साफ़ कहा कि यह सब चार्ल्स सोरोस का किया धरा है  .

बता दें कि ग्लोबल नेटवर्क ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने गुरुवार (31 अगस्त 2023) को अडानी समूह (Adani Group) को लेकर एक रिपोर्ट जारी की। इसमें आरोप लगाया गया है कि समूह ने मॉरीशस के Opaque Funds के जरिए अपनी ही कंपनियों के सूचीबद्ध शेयरों को खरीदने में लाखों डॉलर का निवेश किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी परिवार और उनके साझेदारों के जरिए गुपचुप रुप से ये निवेश किए गए। इसके लिए OCCRP ने कई टैक्स हेवन और अडानी समूह के आंतरिक ईमेल की फाइलों की समीक्षा का हवाला दिया गया है। उसने कहा कि जाँच में कम-से-कम दो मामले पाए गए, जहाँ ‘रहस्यमय’ निवेशकों ने ऐसी ऑफशोर संस्थाओं के जरिए अडानी के स्टॉक को खरीदा और बेचा।

वहीं, OCCRP के आरोपों को अडानी समूह ने सिरे से खारिज कर दिया है। अडानी समूह का कहना है, “हम इन दोहराए गए आरोपों को साफ तौर पर खारिज करते हैं। ये खबरों पर आधारित रिपोर्ट्स गुणवत्ताहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को दोबारा से जिंदा करने की विदेशी मीडिया के एक वर्ग की मिलीजुली कोशिश है।”

वहीं राहुल गाँधी का यह भी कहना कि अडानी के इंफ़्रा प्रोजेक्ट (पीएमसी प्रोजेक्ट्स) का स्वामित्व एक चीनी नागरिक के पास है, जो कि पूरी तरह से गलत है, क्योंकि, चांग चिएन-टिंग (Chang Chien-Ting) वास्तव में एक ताइवानी नागरिक है। यहाँ तक कि यह बात खुद कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए ट्वीट में साफ़ है कि चांग चीनी नहीं बल्कि ताइवानी नागरिक है।

चीनी मिलीभगत का उनका यह आरोप भी निराधार है। जबकि वह और सोनिया गाँधी खुद कुछ साल पहले चीनी सरकार के निमंत्रण पर बहाना बनाकर बीजिंग का गुपचुप दौरा कर चुके हैं। कॉन्ग्रेस पर चीनी सरकार से गुपचुप करार के भी आरोप लगे थे। जबकि ताइवान के भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, और इसलिए, अगर वैध वीजा पर कोई ताइवानी नागरिक किसी भारतीय कंपनी के लिए काम करता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

गौरतलब है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन होना है। ऐसे में इस हंगामें के पीछे चार्ल्स सोरोस का हाथ माना जा रहा है। जिसका मोदी विरोध और हिन्दू घृणा से सना एजेंडा पहले भी कई बार उजागर हो चुका है। 

जम्मू-कश्मीर में रौशन हुआ वंशवाद का एक और चिराग: महबूबा मुफ्ती ने छोटी बेटी को बनाया मीडिया सलाहकार, जानिए कौन हैं इल्तिजा जिनके पासपोर्ट को लेकर भी उठे थे सवाल

जम्मू-कश्मीर आधारित राजनीतिक दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) में अगली पीढ़ी को शामिल करने की पहल 30 अगस्त 2023 दिन बुधवार को शुरू हो गई। पार्टी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती ने अपनी 36 साल की बेटी इल्तिजा मुफ्ती को अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त किया है।

इल्तिजा की बहाली की ये खबर अचानक ही सही, लेकिन अनपेक्षित नहीं थी। बीते 4 साल में इस बात के पर्याप्त संकेत मिले हैं कि वह पीडीपी के संस्थापक और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम रहे अपने नाना मुफ्ती मोहम्मद सईद और अम्मी महबूबा मुफ्ती की राहों पर चलने के लिए कदम बढ़ा चुकी हैं।

इल्तिजा साल 2019 से महबूबा मुफ्ती के सोशल मीडिया हैंडल की प्रभारी हैं। इसी साल केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द किया था। उस वक्त उनकी अम्मी महबूबा सहित जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेता गिरफ्तार हुए थे। तब सरकार के फैसले के खिलाफ उन्होंने मोर्चा सँभाला था। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति में आने के अपने इरादे जाहिर कर दिए थे।

राजनीति की तरफ बढ़ाया उनका ये कदम भले ही औपचारिक तौर पर छोटा हो, लेकिन इससे साफ है कि वह आने वाले समय में अपनी अम्मी महबूबा मुफ्ती की राजनीतिक विरासत सँभालने जा रही हैं। आखिर वंशवाद की राजनीति की उड़ान में वो कहाँ तक पंख फैलाएँगी, उसके लिए उनके व्यक्तित्व और नजरिए पर नजर डालना जरूरी हो जाता है।

बनना चाहती थी अंतरिक्ष यात्री

कश्मीर में लेखक, राजनीतिक विश्लेषक एवं कारोबारी जावेद इकबाल शाह और महबूबा मुफ्ती के घर साल 1987 में छोटी बेटी इल्तिजा पैदा हुई थीं। उनकी बड़ी बहन का नाम इरतिका मुफ्ती है। इल्तिजा की पैदायश होने के एक साल बाद ही उनके पैरेंट्स में अलगाव हो गया। इकबाल शाह कुछ वक्त तक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी रहे थे।

इल्तिजा का निक नाम सना है। वो दो साल तक कश्मीर में पढ़ीं। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गईं। हालाँकि, बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनने की चाह रखने वाली इल्तिजा ने युवा होने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकेटश्वेर कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री ली।

इसके बाद वो यूके चली गईं, वहाँ इंग्लैंड के वारविक विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री की। अपने निजी जिंदगी के बारे में खुलकर बात न करने वाली इल्तिजा ने लंदन में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के तौर पर काम किया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया-भारत के एक इंस्टीट्यूट में भी काम किया।

कुछ समय के बाद इल्तिजा वापस कश्मीर आ गईं। वो अपने लफ्जों के इस्तेमाल के हुनर का क्रेडिट अपने दादा मुफ्ती मोहम्मद सईद को देती हैं। सईद देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री थे। इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर के सीएम भी रहे हैं। राजनीति और कश्मीर के अलावा वो लेखक और मनोवैज्ञानिक बनने की चाह रखती हैं।

‘उम्मीद है कि मैं बदलाव ला सकती हूँ’

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के मीडिया सलाहकार के पद पर तैनाती के बाद ही इल्तिजा ने खुद को बदलाव की बयार बताया। उन्होंने नियुक्ति के बाद पीटीआई से कहा, “ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर के लोग खुद को पूरी तरह से अराजकता, निराशा और अंधेरे में फँसा हुआ पाते हैं, उनकी हरसंभव मदद करना मेरे लिए फक्र की बात है। मुझे उम्मीद है कि मैं बदलाव ला सकती हूँ।”

हालाँकि, उन्होंने कहा कि वो अपनी नई पोजिशन को राजनीति में औपचारिक प्रवेश की तरह नहीं देखती हैं। पीडीपी चीफ की नवनियुक्त मीडिया प्रभारी ने कहा, ”मैं इस बात पर सहमत नहीं हूँ कि मैं औपचारिक तौर पर राजनीति में शामिल हो रही हूँ। मेरी भूमिका पूर्व मुख्यमंत्री मीडिया के साथ कैसे डील करें, इस पर उन्हें सलाह देने तक सीमित है।”

उन्होंने कहा, “मीडिया संवाद का प्राथमिक और अहम जरिया बन गया है। मेरा मानना है कि यह एक ऐसी जगह है, जहाँ बहुत कुछ किया जा सकता है। अगर मैं उनकी (मुफ्ती की) आवाज को लोगों तक पहुँचाने में मदद कर सकती हूँ और अपना दो फीसदी भी योगदान दे सकती हूँ, तो क्यों ना दूँ? मेरी भूमिका मीडिया से उनकी (मुफ्ती की) हर तरह से मदद करने की है।”

इल्तिजा इस बात से राजी थीं कि उनकी भूमिका और राजनीतिक हालातों के बीच एक पतली रेखा है। उन्होंने कहा, “मैं संगठन में नहीं जा रही हूँ। वह मेरी भूमिका नहीं है। मैं जानती हूँ कि कश्मीर जैसी जगह में सब कुछ राजनीतिक है।” उन्होंने कहा, “मैं शुतुरमुर्ग की तरह हर चीज की राजनीतिक प्रकृति को नकारने वाली नहीं हूँ। जब मैं औपचारिक राजनीति में कदम रखूँगी तो यह सबके सामने होगा।”

राजनीति का पहला सबक

इल्तिजा का राजनीतिक सफर 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद उनकी माँ महबूबा मुफ्ती के हिरासत में लेने के साथ ही शुरू हो गया था। उस वक्त वह टेलीविजन बहसों में भाग लेकर घाटी में एक मुख्यधारा की आवाज बनकर उभरीं। इल्तिजा ने अपनी माँ की सोशल मीडिया अकाउंट, खासकर एक्स (पहले ट्विटर) की जिम्मेदारी संभाली और इसका नतीजा ये हुआ कि उनका सार्वजनिक प्रोफ़ाइल बढ़ता गया।

महबूबा की रिहाई के 14 महीने बाद मीडिया से बातचीत करते हुए और बैठकों के दौरान इल्तिजा को साथ देखा गया था। तभी ये एक बड़ा संकेत था कि महबूबा की छोटी बेटी पार्टी में अधिक औपचारिक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। ये जून 2022 में साबित हो गया। उन्होंने ट्विटर (अब एक्स) पर 15 दिन की वीडियो बातचीत ‘आपकी बात इल्तिजा के साथ’ सीरीज शुरू की। इसमें वो जम्मू-कश्मीर के लोगों पर असर डालने मुद्दों और फैसलों पर बात करती थीं।

‘कहा था राजनीति में शामिल नहीं होना चाहती’

इल्तिजा ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर में मौजूदा “भयभीत माहौल” के तहत राजनीति में शामिल नहीं होना चाहती हैं। हालाँकि, उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया था और कहा था कि भविष्य कोई नहीं जानता।

इल्तिजा मुफ़्ती ने जम्मू में एक सम्मेलन में कहा था, “मौजूदा माहौल में जहाँ राजनेता, पत्रकार और बाद में स्टेनोग्राफर बन गए हैं, मैं ऐसे में राजनीति नहीं करना चाहती। राजनीति जनता के साथ अपना रिश्ता बनाने के बारे में है। आपके जीवन में कुछ परिस्थितियाँ आती हैं, जो आपका मार्गदर्शन करती हैं।”

उन्होंने ये भी कहा था कि दिवंगत पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की पोती होने के नाते उन्होंने अपने जन्म के बाद से राजनीति को करीब से देखा है। उन्होंने कहा था, “अन्य लोगों के लिए यह आकर्षक हो सकता है। मुझे इसके लिए कोई आकर्षण नहीं है।”

मुद्दा बनाने में भी हैं माहिर

इस साल की शुरुआत में इल्तिजा ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण को लेकर अधिकारियों को निशाने पर लिया था। उनका पासपोर्ट 2 जनवरी 2023 को खत्म हो रहा था। इसके लिए उन्होंने 8 जून 2022 को नए पासपोर्ट के लिए पहले ही दरख्वास्त दी थी।

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) श्रीनगर द्वारा पासपोर्ट जारी नहीं करने पर वो फरवरी में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट पहुँच गई थीं। आरपीओ ने सीआईडी की बताई गई गुप्त प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट के बावजूद अप्रैल में उन्हें पासपोर्ट जारी किया था।

स्कूल में भी सत्यम की बहन से हुई थी छेड़खानी, विरोध करने पर रास्ते में मारने की दी थी धमकी: प्रयागराज में छात्र की हत्या मामले में FIR से नया खुलासा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सोमवार (28 अगस्त 2023) को सत्यम शर्मा नाम के एक नाबालिग छात्र की हत्या कर दी गई थी। बहन से छेड़छाड़ के विरोध में हुई सत्यम की हत्या में मोहम्मद युसूफ और कुछ अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज हुई थी। FIR में एक नई जानकारी सामने आई है। सत्यम को रास्ते में हत्या करने की धमकी दी गई थी।

मृतक की बहन से आरोपित ने स्कूल में छेड़खानी की थी। छेड़खानी का विरोध करने पर आरोपितों द्वारा स्कूल में ही सत्यम की हत्या की धमकी दी गई थी। घटना के बाद SHO और चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है। अब तक 5 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना को सोची-समझी साजिश और हिन्दुओं को उकसाने वाली बताया है।

दरअसल, खीरी थाना क्षेत्र की इस घटना में शिकायत सत्यम के भाई पुरुषोत्तम ने दी है। पुरुषोत्तम ने अपनी शिकायत में बताया कि 28 अगस्त को उनके भाई और बहन हर दिन की तरह परमानन्द स्मारक इंटर कालेज में पढ़ने गए थे। इस दौरान स्कूल में ही एक आरोपित ने छात्रा से छेड़खानी की थी। इसका सत्यम ने विरोध किया था।

विरोध से नाराज होकर आरोपित और उसके साथियों ने सत्यम को रास्ते में मारने की धमकी दी थी। छुट्टी के बाद जब सत्यम घर लौट रहा था, तब युसूफ ने अपने घर के आगे कुछ आरोपितों के साथ मिलकर उस पर डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में सत्यम की मौके पर ही मौत हो गई थी।

पुलिस ने मोहम्मद युसूफ और कुछ अन्य अज्ञात लोगों पर IPC की धारा 34, 302, 324, 354 और 506 के तहत FIR दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इस मामले पर बोलते हुए प्रयागराज पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा ने कुल 5 संदिग्धों के हिरासत में होने की जानकारी दी, जिसमें कुछ नाबालिग भी हैं।

स्थानीय थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, मृतक के परिजनों को जो भी अधिकतम सहायता दी जा सकती है उस बारे में जिलाधिकारी से बातचीत की जा रही है। वहीं, VHP ने मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने के साथ आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग की है।

सत्यम हत्याकांड को विश्व हिन्दू परिषद ने सोची-समझी और हिन्दू को उकसाने की साजिश बताया है। VHP काशी प्रान्त के उपाध्यक्ष अजय गुप्ता ने मृतक के परिजनों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की है। मृतक के घर गए हिन्दू संगठन के लोगों ने इस मुद्दे पर I.N.D.I.A. गठबंधन की इस मुद्दे पर चुप्पी पर सवाल खड़े किए।

बताते चलें कि प्रयागराज के खीरी में 16 साल के सत्यम शर्मा की 28 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वजह सत्यम द्वारा आरोपितों की अपनी चचेरी बहन से छेड़खानी का विरोध बताया जा रहा है। सत्यम की चचेरी बहन ने मीडिया से बताया कि उन्होंने अपने भाई को बचाने के लिए मोहम्मद यूसुफ का पैर पकड़ा और रहम की भीख माँगी।

हालाँकि, युसूफ पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने पीड़िता को भी खींचकर लात मार दी थी। जिस जगह तुर्कपुरवा में यह घटना हुई, वहाँ हिन्दू समाज के लोगों ने लड़कियों से छेड़खानी को आम बात बताया।

मोदी सरकार ने बुलाया 5 दिनों का संसद का विशेष सत्र, एजेंडा और टाइमिंग को लेकर लग रहे कयास: क्या कुछ बड़ा होने जा रहा

केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। यह सत्र 18 से 22 सितंबर के बीच होगा। इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि इस सत्र में 5 बैठकें होंगी। पहली बैठक 18 सितंबर को होगी, जबकि आखिरी बैठक 22 सितंबर को होगी।

इस सत्र में क्या एजेंडा होगा, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालाँकि, माना जा रहा है कि इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है। इनमें आर्थिक सर्वेक्षण, 2023-24, बजट संशोधन विधेयक, 2023, और कुछ अन्य विधेयक शामिल हो सकते हैं।

वहीं विपक्ष ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह सरकार की मनमानी है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को चलाने में असफल है इसलिए यह विशेष सत्र बुला रही है।

वहीं इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत का बयान भी सामने आया है, “संसद के इतिहास में, किसी उत्सव के दौरान कोई सत्र नहीं हुआ है। जिन दिनों गणपति उत्सव मनाया जाता है, उन दिनों उन्होंने सत्र रखा है। यह उनका हिंदुत्व है।” 

बता दें कि संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से 12 अगस्त तक चला था। इस सत्र में विपक्षी दलों ने सरकार के कई बिलों का विरोध किया था। मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन इंडिया केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लेकर आया था।

इस पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर हमला बोला था। सरकार की ओर से इस मामले को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तार से जवाब दिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्ष पर चुन-चुन कर हमला बोला था।

विशेष परिस्थितियों में बुलाए जाते हैं विशेष सत्र

आमतौर पर संसद के तीन सत्र होते हैं। इसमें बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र शामिल हैं। विशेष परिस्थितियों में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने का प्रावधान किया गया है।

‘तुम हिंदू हो, हमारी मुस्लिम लड़की से बातचीत क्यों करते हो’: अहमदाबाद में पड़ोसी लड़की को किशन ने दिया लिफ्ट, अकबर ने फैजान और हुसैन संग मिल की पिटाई, हुए गिरफ्तार

पिछले कुछ दिनों में अहमदाबाद और वडोदरा में मुस्लिमों लड़कियों के साथ बातचीत करने या घूमने की वजह से मुस्लिम कट्टरपंथियों ने दूसरे संप्रदाय के लड़कों की पिटाई कर दी थी। ऐसी कई घटनाओं के बीच अहमदाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में लड़के को कट्टरपंथी भीड़ पीट रही थी।

इस मामले में भीड़ ने मुस्लिम लड़की के साथ जा रहे हिंदू लड़के को रोका और उसके साथ गाली-गलौच करते हुए मारपीट की थी। इस दौरान लड़की का बुर्का भी खींचा गया था। पीड़ित की पहचान किशन के रूप में हुई है। किशन ने इस मामले में दानिलिम्दा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद तीन आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (26 अगस्त 2023) को पीड़ित किशन अपनी बाइक पर पड़ोस की मुस्लिम लड़की के साथ घर जा रहा था। दानिलिम्दा में चिराग हाईस्कूल के पास पहले से ही उसका पीछा कर रहे तीन मुस्लिम युवकों- अकबर, फैजान और हुसैन ने उसका स्कूटर रोक लिया और ये कहकर उसे पीटना शुरू कर दिया कि ‘तुम हिंदू हो, हमारी मुस्लिम लड़की से बातचीत क्यों करते हो’।

भीड़ ने छीन लिया था मोबाइल

किशन की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में बताया गया है कि उसका नाम किशन उर्फ सुनील सुब्रमण्यम रामोदर है। वो अपने परिवार के साथ बेहरामपुरा क्षेत्र में जमनादास की चॉल में रहता है और इडली-वड़ा स्टॉल पर काम करके अपने घर का भरण-पोषण करता है।

ऑपइंडिया टीम ने बेहरामपुरा के जमनादास की चॉल में रहने वाले पीड़ित युवक किशन उर्फ ​​​​सुनील सुब्रमण्यम रामोदर से संपर्क करने की कोशिश की। चूँकि, हमले के दौरान भीड़ ने उनका मोबाइल छीन लिया था, इसलिए उनसे फोन पर संपर्क नहीं हो सका। हालाँकि, हमने उनके भाई से बात करने के बाद किशन से संपर्क स्थापित करने में सफल रहे।

पीड़ित ने ऑपइंडिया को सुनाई आपबीती

किशन ने ऑपइंडिया को बताया कि शनिवार (26 अगस्त 2023) को वह अपनी परिचित एक मुस्लिम लड़की के साथ अपने दोपहिया वाहन से घर जा रहा था। मुस्लिम लड़की उसके पड़ोस में रहती है, इसलिए उसने घर जाते समय उसे लिफ्ट दे दिया था। खोडियारनगर से दानिलिम्दा जाने वाले रास्ते पर मोती बेकरी के ठीक सामने चिराग स्कूल से गुजरते समय अकबर खान पठान, फैजान शेख और हुसैन सैय्यद ने उसे रोक लिया।

किशन ने बताया कि ये तीन मुस्लिम लड़के काफी दूर से उनका पीछा कर रहे थे। तीनों ने आगे आकर बाइक रोक ली। इसके बाद गाली-गलौच करते हुए उनके और लड़की, दोनों के साथ मारपीट की। किशन ने बताया कि हमलावरों ने यह भी कहा, “तुम हिंदू हो। हमारी मुस्लिम लड़की के साथ क्यों हो?”

किशन ने बताया कि ये मुस्लिम बहुल इलाका है। इसलिए कुछ ही मिनटों में मुस्लिमों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। इसके बाद तीनों ने लोगों को भड़काया और कहा, “यह हिंदू हमारी मुस्लिम लड़की को लेकर घूम रहा है।” इस दौरान मुस्लिम लड़की के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी की गई।

किशन ने आगे कहा, “मेरे साथ हाथापाई के दौरान भीड़ में से किसी ने मेरा मोबाइल फोन छीन लिया। उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी भी दी। अभी मेरा परिवार बहुत डरा हुआ है। परिवार में मेरी माँ, दो बहनें और एक छोटा भाई है। परिवार की सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। मैं इडली-वड़ा के ठेले पर काम करके परिवार चलाता हूँ। मुझे अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा महसूस हो रहा है।”

तीनों आरोपितों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

ताजा जानकारी के मुताबिक, किशन की शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर दानिलिम्दा पुलिस ने युवक और युवती पर हमला करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों व्यक्तियों की पहचान क्रमशः अकबर खान पठान (पठानों की चाल, दानिलिम्दा के निवासी), फैज़ान शेख (चिराग पार्क, बॉम्बे होटल, दानिलिम्दा के निवासी) और हुसैन सैय्यद (अल्लाहनगर, दानिलिम्दा के निवासी) के रूप में की गई है।

अहमदाबाद डिवीजन के एसीपी मिलाप पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “वीडियो वायरल होने के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि इस मामले में वीडियो में नजर आ रहे अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।”

मिलते जुलते कई मामले आ चुके हैं सामने

हाल ही में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ उन मुस्लिम लड़कियों का पीछा करते हुए दिखाई देती हैं, जो गैर-मुस्लिम पुरुषों से दोस्ती करती हैं। ऐसा ही एक वीडियो इस साल अप्रैल में अहमदाबाद के मुस्लिम बहुल जुहापुरा इलाके से सामने आया था, जिसमें मुस्लिम युवक हिजाब पहनी एक मुस्लिम महिला को हिंदू युवक से बात करने पर परेशान करते दिखे थे।

इसी तरह की एक घटना हाल ही में हैदराबाद में भी हुई थी, जहाँ अपने गैर-मुस्लिम पुरुष मित्र के साथ यात्रा कर रही बुर्का पहनी एक लड़की के साथ छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया गया था। यह घटना 26 अगस्त को जुबली हिल्स इलाके में हुई और पुलिस ने उस कपल को परेशान करने के आरोप में 3 नाबालिगों पर मामला दर्ज किया था।