Homeराजनीतिमुंबई में 'बिन बुलाए मेहमान' बने कपिल सिब्बल, I.N.D.I.A. के मंच पर हो गया...

मुंबई में ‘बिन बुलाए मेहमान’ बने कपिल सिब्बल, I.N.D.I.A. के मंच पर हो गया क्लेश: फोटो सेशन में किए गए ‘किनारे’

वैसे, पिछले साल कपिल सिब्बल को कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा की सीट नहीं मिली तो वो समाजवादी पार्टी में चले गए। समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। उन्होंने अपने नॉमिनेशन के समय कहा था कि वो कॉन्ग्रेस के नेता 'थे' अब वो समाजवादी पार्टी के नेता 'हैं'।

मुंबई में विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. के मंच पर उस समय स्थिति असहज हो गई, जब मंच पर कपिल सिब्बल पहुँच गए। एक तो सिब्बल पूर्व कॉन्ग्रेसी हैं, जो अब समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं। दूसरी तरफ, वो ‘बिन बुलाए मेहमान’ के तौर पर पहुँचे और वो भी सीधे मंच पर। उनकी मौजूदगी से कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई, जिसे संभालने के लिए कई नेताओं को बातचीत करनी पड़ी।

केसी वेणुगोपाल ने सिब्बल की मौजूदगी पर जताई नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कपिल सिब्बल के मंच पर पहुँचने से केसी वेणुगोपाल ने उद्धव ठाकरे से शिकायत की। चूँकि उद्धव ठाकरे ही मुंबई में मुख्य मेजबान की हैसियत में हैं, ऐसे में उन्होंने चीजों को गंभीरता से नहीं लेने की सलाह दी। इस बीच, अखिलेश यादव और फारुख अब्दुल्ला ने भी मामले को संभालने की कोशिश की, लेकिन मामला संभला नहीं।

इसके बाद ये मामला राहुल गाँधी के पास ले जाया गया, तो राहुल गाँधी ने हरी झंडी दे दी। राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें कपिल सिब्बल की मौजूदगी से कोई आपत्ति नहीं है। मंच पर फोटो खिंचाने के कार्यक्रम में सिब्बल सबसे किनारे खड़े नजर आए। वहीं, उद्धव ठाकरे के दोनों ओर सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े दिखे।

कई अहम मामलों में राहुल-सोनिया-कॉन्ग्रेस के वकील

बता दें कि राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ चल रहे कई मामलों की पैरवी कपिल सिब्बल ही कर रहे हैं। वो कई मामलों में कॉग्रेस पार्टी के वकील हैं। चूँकि, वो कॉन्ग्रेस में लंबे समय तक रहे हैं और यूपीए की सरकारों में कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं।

वैसे, पिछले साल कपिल सिब्बल को कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा की सीट नहीं मिली तो वो समाजवादी पार्टी में चले गए। समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। उन्होंने अपने नॉमिनेशन के समय कहा था कि वो कॉन्ग्रेस के नेता ‘थे’ अब वो समाजवादी पार्टी के नेता ‘हैं’।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मुफ्त इलाज का ढकोसला और महँगे मेडिकल बिल: कहाँ खर्च हो रहा है आम आदमी का पैसा?

सरकार ने उन दवाओं को इस प्राइस कंट्रोल से बाहर रखा है जिन्हें कंपनियाँ 'पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम' (PAPs) के तहत भारी छूट पर देती हैं।

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।
- विज्ञापन -