Home Blog Page 1568

‘सनातन धर्म और कुछ नहीं, जातियों में विभाजित समाज है’: हजरतबल दरगाह में सजदा करने वाले कार्ति चिदंबरम ने दिया ‘ज्ञान’, मनी लॉन्ड्रिंग में जा चुके हैं तिहाड़

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने के बयान पर बवाल हो गया है। इस बीच कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि सनातन धर्म और कुछ नहीं, बल्कि जातियों के बंटवारे पर आधारित समाज है। उन्होंने इसे अभिशाप बताया।

उदयनिधि के बयान पर जारी बहस के बीच कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सनातन धर्म जातियों में विभाजन के लिए नियम के अलावा और कुछ नहीं है। इसकी वकालत करने करने वाले सभी अच्छे पुराने दिनों के लिए उत्सुक हैं! जाति भारत का अभिशाप है।”

उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु की आम बोलचाल में ‘सनातन धर्म’ का अर्थ जाति पदानुक्रमित समाज है। ऐसा क्यों है कि हर कोई जो सनातन धर्म की वकालत कर रहा है, वह विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग से आता है और इस ‘पदानुक्रम’ का लाभार्थी है। किसी के खिलाफ ‘नरसंहार’ का कोई आह्वान नहीं किया गया था, यह एक शरारती फिरकी है।”

बताते चलें कि सनातन धर्म पर ज्ञान देने वाले कार्ति चिदंबरम ने सितंबर 2021 में कश्मीर के हजरतबल दरगाह जाकर वहाँ सजदा किया था। इसकी तस्वीर भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ ट्विटर पर डाली थी और कहा था कि कश्मीर के ‘हजरतबल में शुक्रवार की नमाज पढ़ा’।

कहा जाता है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का यहाँ बाल रखा हुआ है। 1963-64 में मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का बाल) चोरी हो गया था। हालांकि, बाद में यह रहस्यमयी ढंग से मिल भी गया था। उसके बाद से यह दरगाह चर्चित हो गया।

ये वही कार्ति चिदंबरम पर हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के कई केस हैं। प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने उन्हें 16 अक्टूबर 16 2019 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। कार्ति पर आरोप है कि अपने पिता पी. चिदंबरम के केंद्र में मंत्री रहते समय कार्ति ने कई कंपनियों से पैसे लेकर उन्हें फायदा पहुँचाया है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

मुस्लिमों के चेहल्लुम पर मुंगेर में 18 मंदिर और 8 महापुरुषों को खतरा: बिहार पुलिस ने बाँस-बल्ली से घेरा, BJP ने की हटाने की माँग

मुंगेर में मुस्लिमों द्वारा मनाए जाने वाले इमाम हुसैन के शहादत पर्व चेहल्लुम (चालीसवाँ) और श्री कृष्ण जन्माष्टमी को देखते हुए बिहार पुलिस के हाथ-पाँव फुले हुए हैं। चेहल्लुम पर मुस्लिमों द्वारा निकाले जाने वाले जुलुस को देखते हुए पहले से ही शहर के आठ महापुरुषों की मूर्तियों सहित 18 मंदिरों को सुरक्षा के लिहाज से बाँस-बल्ली से घेर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को हुए शांति समिति की बैठक में मुस्लिमों द्वारा माँग की गई थी कि जिस रास्ते से चेहल्लुम का जुलूस निकलेगा उसमें पड़ने वाले सभी मंदिरों और मूर्तियों को सुरक्षित कर दिया जाए। ऐसी माँग की रूप रेखा एक दिन पहले ही गुरुवार (31 अगस्त, 2023) को हुए केंद्रीय पहलाम कमेटी के सचिव जफ़र अहमद की अध्यक्षता में सभी अखाडा समिति के सदस्यों की बैठक में लिया गया था। जिस पर अमल करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने ये आदेश दिया था।

बता दें कि जिन महापुरुषों की प्रतिमा को बाँस-बल्ली से घेरा गया है, उसमें राजीव गाँधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, महात्मा गाँधी, शिवा जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद और भगत सिंह हैं। इसके अलावा शहर के 18 अलग-अलग हिन्दू मंदिर भी शामिल हैं जिसकी घेराबंदी की गई है। मुस्लिमों की भीड़ से डरकर इस तरह की घेराबंदी को देखते हुए मुंगेर के आम लोगों में भी आक्रोश की बात सामने आई है। वहीं बीजेपी ने भी इसका विरोध किया है। 

वहीं, हिन्दू मूर्तियों और मंदिरों पर घेराव की तस्वीरें सामने आने के बाद शनिवार (2 सितम्बर, 2023) हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया। बीजेपी ने मुंगेर प्रशासन के इस आदेश का विरोध करते हुए अगले 24 घंटे के अंदर इसे हटाने की बात कही है। साथ ही सोमवार तक घेराव नहीं हटने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।

बीजेपी ने दी आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार, मुंगेर से भाजपा विधायक प्रणव कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चेहल्लुम को लेकर शहर में पहली बार महापुरुषों की प्रतिमा और मंदिरों को बाँस-बल्ली से घेरा जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा मुस्लिमों की माँग महापुरुषों को इस तरह से बंद कर देना सरासर गलत है। 

विधायक ने कहा कि हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार नवरात्रि होता है। उस दौरान न जाने कितने अखाड़ा दल सदस्यों द्वारा इस रास्ते से अखाड़ा निकाला जाता है, लेकिन कहीं किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती हैं। भाजपा विधायक ने कहा कि यदि रविवार तक सभी महापुरुषों पर लगाए गए बैरिकेडिंग को नहीं हटाया तो अगले दिन भाजपा जिला प्रशासन और राज्य की नीतीश सरकार के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन करेगी, जिसका जिम्मेदार पूर्ण रूप से जिला प्रशासन होगा।

वहीं, बीजेपी और स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि प्रशासन द्वारा यह आदेश दिया गया है कि सभी महापुरुषों की प्रतिमा पर लगाया गया बाँस-बल्ली का  घेराव हटा दिया जाए।

क्या है चेहल्लुम 

बता दें कि कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन व उनके 71 अनुयायियों की शहादत के चालीस दिन बाद चेहल्लुम मनाया जाता है। इमाम हुसैन मोहर्रम की दसवीं पर शहीद हुए थे, चालीसवें पर मुस्लिम समुदाय के लोग उनके और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मातम मनाते हैं। 

गौरतलब है कि इस बार मुंगेर में चेहल्लुम पर 28 लाइसेंस प्राप्त अखाड़ा दलों द्वारा इमाम हुसैन की शहादत की याद में चेहल्लुम का जुलुस निकालने की तैयारी है। 6 और 7 सितम्बर को जन्माष्टमी है और उसी रात 11 बजे से ही चेहल्लुम का जुलुस निकलना शुरू हो जाता है। इस साल 7 सितंबर को चेहल्लुम मनाया जाएगा और 8 सितंबर की सुबह विसर्जन किया जाएगा।

‘कानूनी कार्रवाई की धमकी से डरने वाले नहीं’: सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने वाली बात पर कायम हैं तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन, कहा था- ईसाई होने पर गर्व

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है। ईसाई होने पर गर्व करने वाले उदयनिधि ने कहा कि सनातन का सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, उदयनिधि ने कहा कि इसको लेकर अगर कोई कानूनी कार्रवाई की बात करता है तो वो इससे डरने वाले नहीं हैं।

दरअसल, उदयनिधि ने सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

सोशल मीडिया साइट पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की लगातार माँग उठ रही है। इसी बीच ‘लीगल राइट्स ऑजरवेटरी- LRO’ नाम के एक एक्स हैंडल ने उदयनिधि पर कानूनी कार्रवाई की बात कही। LRO हैंडल ने लिखा, “हम चर्च के आदेश पर सनातन धर्म को बदनाम करने वाले गंदे मच्छरों को खत्म करने के लिए विभिन्न कानूनी उपाय तलाशेंगे! आप सज़ा से बचेंगे नहीं उदय स्टालिन।”

LRO के इस पोस्ट पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जवाब दिया और कहा कि वे अपनी बात पर कायम हैं। उदयनिधि ने कहा कि वो धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने खुद को परियार-कलैग्नार का अनुयायी बताते हुए कहा कि जो है, उसे उन्होंने सामने रखा है। इससे उनकी सनातन धर्म को रोकने की भावना बिल्कुल कम नहीं होगी।

उदयनिधि ने LRO के जवाब में कहा, “मैं किसी भी कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूँ। हम ऐसी भगवा धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हम पेरियार, अन्ना और कलैग्नार के अनुयायी हैं। हम माननीय मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के कुशल मार्गदर्शन में सामाजिक न्याय को बनाए रखने और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। मैं आज, कल और सदैव यही कहूँगा- द्रविड़ भूमि से सनातन धर्म को रोकने का हमारा संकल्प रत्ती भर भी कम नहीं होगा।”

डीएमके नेता के इस आपत्तिजनक बयान को लेकर तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने उदयनिधि पर निशाना साधा है। अन्नामलाई ने उदयनिधि के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। उन्होंने इसे ईसाई मिशनरियों का विचार बताया और कहा कि उदयनिधि जैसे मंत्री इस तरह के कार्यक्रम में आकर दुर्भावना को बढ़ा रहे हैं।

के. अन्नामलाई ने कहा, “गोपालपुरम परिवार का एकमात्र संकल्प राज्य सकल घरेलू उत्पाद से अधिक संपत्ति जमा करना है। थिरु उदयनिधि स्टालिन आप, आपके पिता या उनके विचारक के पास ईसाई मिशनरियों से खरीदा हुआ विचार है और उन मिशनरियों का विचार आप जैसे मूर्खों को अपनी दुर्भावनापूर्ण विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए तैयार करना था। तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। सबसे अच्छा काम जो आप कर सकते हैं, वह है इस तरह के कार्यक्रम में माइक पकड़ना और अपनी निराशा व्यक्त करना!”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट में लिखा, “तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को मलेरिया और डेंगू से जोड़ा है। उनका मानना है कि इसका सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। संक्षेप में वह सनातन धर्म का पालन करने वाली भारत की 80 प्रतिशत आबादी के नरसंहार के लिए आह्वान कर रहे हैं। द्रमुक विपक्षी गुट का एक प्रमुख सदस्य और कॉन्ग्रेस का लंबे समय से सहयोगी है। क्या मुंबई बैठक में इसी पर सहमति बनी थी?”

बताते चलें कि उदयनिधि स्टालिन ने पिछले साल क्रिसमस के कार्यक्रम में शामिल होने पर कहा था, “मुझे अपने आप को ईसाई कहने पर गर्व है। आज सभी संघी जल रहे होंगे, क्योंकि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री शेखरबाबू ‘हेलेलुजाह’ कह रहे हैं, उदयनिधि कह रहे हैं ‘मैं एक ईसाई हूँ’।”

रामनाथ कोविंद, अमित शाह, गुलाम नबी आज़ाद… ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर मोदी सरकार ने बनाई कमिटी, इन 8 नामों को मिली जगह

देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। वहीं मोदी सरकार की घोषणा के बाद वन नेशन, वन इलेक्शन पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सदस्यों के नामों का ऐलान कर दिया है। 8 सदस्यीय समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और गुलाम नबी आजाद भी शामिल हैं। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर कानून मंत्रालय ने शनिवार (2 सितम्बर, 2023) को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। 

8 सदस्यीय समिति में कौन-कौन है शामिल 

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election) की जाँच के लिए एक कमेटी बनाई थी। वहीं अब कानून मंत्रालय ने समिति के सभी 8 सदस्यों की जानकारी दी है।

इस समिति में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोक सभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्त आयोग के चैयरमैन एनके सिंह, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरीश साल्वे, पूर्व चीफ सीवीसी संजय कोठारी सदस्य बनाए गए हैं। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। 

संसद के विशेष सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

गौरतलब है कि जब से केंद्र सरकार ने जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया है। तभी से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार एक देश, एक इलेक्शन बिल पेश कर सकती है। संसद का यह सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा।

बता दें कि विपक्षी दल मोदी सरकार के एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election) विधेयक के विरोध में हैं। ऐसे में मोदी सरकार के लिए संसद के दोनों सदनों से इस बिल को पारित कराना बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इसके लिए देश के आधे राज्यों की सहमति जरूरी है। अब तो यह समय ही बताएगा कि संसद के विशेष सत्र में ये विधेयक पेश होगा या नहीं। 

‘चंद्रयान 3’ और आदित्य L-1 के बाद अब गगनयान की बारी, अक्टूबर में होगी पहली टेस्ट उड़ान: केंद्रीय मंत्री ने बताया – अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

भारत के पहले सूर्य मिशन, आदित्य-L1 के सफल प्रक्षेपण के बाद, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगला कदम गगनयान के पहले परीक्षण उड़ान को शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि यह उड़ान अक्टूबर के महीने में हो सकती है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि आदित्य-L1 के सफल प्रक्षेपण से पता चलता है कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बन रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश के प्रयासों का परिणाम है। आज भारत हरेक मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है।

गगनयान को लेकर जितेंद्र सिंह ने कही ये अहम बात

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गगनयान के पहले परीक्षण उड़ान में कोई भी अंतरिक्ष यात्री शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस उड़ान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यान सुरक्षित रूप से उड़ सके और सभी प्रणालियाँ ठीक से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गगनयान के पहले मानवयुक्त मिशन के लिए तैयारी जोरों पर है। उन्होंने कहा कि इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में उतरेंगे और कुछ वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान के सफल होने से भारत को अंतरिक्ष में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगा।

क्या है गगनयान?

गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया जा रहा है। इस मिशन के तहत, तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। वे तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में रहेंगे और कुछ वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण जारी

गगनयान मिशन के लिए तैयारी जोरों पर है। ISRO ने इस मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कर लिया है। इन अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण चल रहा है। गगनयान मिशन के पहले मानव रहित परीक्षण उड़ान का लक्ष्य 2023 के अंत में रखा गया है। पहले मानवयुक्त मिशन का लक्ष्य 2024 के अंत में रखा गया है।

‘डेंगू-मलेरिया की तरह है सनातन धर्म, इसे खत्म करना होगा’: MK स्टालिन के मंत्री बेटे ने उगला ज़हर, ‘सनातन को खत्म करने’ के लिए तमिलनाडु में कार्यक्रम

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए। वह सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

करुणानिधि के पोते और फिल्मी सितारे हैं उदयनिधि

बता दें कि उदयनिधि स्टालिन डीएमके के मुखिया एमके स्टालिन के बेटे हैं। वो तमिल सिनेमा के एक्टर भी हैं, प्रोड्यूसर भी हैं और वितरक भी। आने वाले समय में वो कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ को भी प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस समय वो युवा और खेल विकास मामलों के मंत्री हैं। उनकी पार्टी डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. में भी शामिल है, तो राज्य में वो कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ती, सरकार बनाती रही है। उनके दादा का नाम एम करुणानिधि था, जो तमिलनाडु के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

‘₹10000 का निवेश आज ₹300 करोड़ का, लाखों प्रत्यक्ष नौकरियाँ दी’: उदय कोटक ने ‘कोटक महिंद्रा’ बैंक के CEO पद से दिया इस्तीफा, 38 साल इस पद पर रहे

दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने 38 साल की पारी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ का पद छोड़ दिया है। उन्होंने एक भावुक चिट्ठी लिखकर अपने इस फैसले की घोषणा की। चिट्ठी में उन्होंने कहा कि 1985 में, उन्होंने और उनके दो साथियों ने एक छोटे से कार्यालय में कोटक महिंद्रा फाइनेंस की स्थापना की थी। आज, यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा निजी बैंक है।

ग्राहकों-कर्मचारियों को कहा थैंक यू

उदय कोटक ने कहा कि उन्होंने हमेशा इस बैंक को एक विश्व स्तरीय बैंक बनाने का लक्ष्य रखा है और हमेशा ग्राहकों को सर्वोत्तम सेवा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उदय कोटक ने कहा कि उन्होंने बैंक के कर्मचारियों को भी सम्मान और विश्वास दिया है। बैंक के कर्मचारी ही बैंक की सफलता के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वह बैंक के बोर्ड और शेयरधारकों के आभारी हैं, जिन्होंने हमें हमेशा अपना समर्थन दिया है।

कोट महिंद्र बैंक का भविष्य उज्जवल

उदय कोटक ने कहा कि वह बैंक के उज्जवल भविष्य के लिए आशावादी हैं। इस बैंक के पास एक मजबूत टीम है जो इसे आगे ले जाएगी। उन्होंने कहा कि वह बैंक के लिए अपनी सेवाओं को जारी रखेंगे। वह गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में बैंक के साथ जुड़े रहेंगे। उदय कोटक ने कहा कि बैंक प्रस्तावित उत्तराधिकारी के लिए आरबीआई की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरिम में उनके सहयोगी दीपक गुप्ता – वर्तमान में संयुक्त एमडी, अनुमोदन के अधीन एमडी और सीईओ के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमारे पास एक उत्कृष्ट प्रबंधन टीम है।

38 साल पहले हुई थी शुरुआत

उदय कोटक ने कहा कि संस्थापक चले जाते हैं, लेकिन संस्था निरंतर फलती-फूलती रहती है। उन्होंने कहा, “काफी समय पहले, मैंने जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसे नामों को वित्तीय दुनिया पर हावी होते देखा और भारत में ऐसी संस्था बनाने का सपना देखा। इसी सपने के साथ मैंने 38 साल पहले फोर्ट, मुंबई में 300 वर्गफुट के कार्यालय में 3 कर्मचारियों के साथ कोटक महिंद्रा की शुरुआत की थी। मैंने अपने सपने को जीते हुए, इस यादगार यात्रा के हर हिस्से को गहराई से सँजोया है।”

दिग्गज बैंकर ने कहा, “अब हम एक प्रतिष्ठित बैंक और वित्तीय संस्थान हैं, जो विश्वास और पारदर्शिता के बुनियादी सिद्धांतों पर बनाया गया है। हमने अपने हितधारकों के लिए मूल्य बनाया है और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियाँ प्रदान की हैं। 1985 में हमारे साथ ₹10,000 का निवेश आज लगभग ₹300 करोड़ का होगा।”

उदय कोटक ने लिखा इमोशनल पत्र

उदय कोटक के इस फैसले को भारतीय बैंकिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि कोटक महिंद्रा बैंक में प्रमोटर की हिस्सेदारी 26% के करीब है। नवंबर 2021 के दौरान, आरबीआई के नियमों के कारण प्रमोटर की हिस्सेदारी को लेकर उदय कोटक से टकराव की स्थिति बन गई थी। बाद में, आरबीआई ने प्राइवेट बैंकों में प्रमोटर की हिस्सेदारी 15% से बढ़ाकर 26% कर दी थी।

‘बच्चों को खाना कैसे खिलाएँगे?’: कंगाल पाकिस्तान में बिजली बिल देने को तैयार नहीं लोग, पूरे मुल्क में सड़क पर चल रहा प्रदर्शन 

पाकिस्तान के कई शहरों में पिछले कई दिनों से बहुत ज्यादा बिजली बिलों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पेशावर, कराची, लाहौर, मुल्तान, रावलपिंडी, सभी में लोगों ने बिजली की बढ़ी हुई दरों के खिलाफ सड़क जाम करते, टायर जलाते और नारे लगाते देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि वहाँ आम लोगों के घरों में भी लाखों के बिल आ रहे हैं। बता दें कि आज शुक्रवार, 2 सितम्बर, 2023  को जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के आह्वान पर बिजली दरों के मुद्दे पर देशव्यापी हड़ताल है। वहीं खैबर पख्तूनख्वा में भी बढ़ी हुई बिजली बिल के खिलाफ सड़क जाम कर भारी प्रदर्शन हो रहा है।

दरअसल, सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मंजूरी के बिना बिजली की कीमतों में कटौती करने से इनकार करने के बाद पाकिस्तान में बिजली के बिल बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं। वहीं लोग कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक़ के समझाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बिजली का बिल जलाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों ने बिजली कंपनियों के कार्यालयों पर हमला भी किया।

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्सी ड्राइवर नूरुल अमीन कहना है,  “हम महँगाई की बाढ़ में डूब गए हैं। बिजली के ये बिल बहुत ज़्यादा है, अगर मैंने इस महीने बिजली का बिल भर दिया तो मैं अपने तीन बच्चों को खाना नहीं खिला पाउँगा।”

पेशे से नाई मोहम्मद करामात ने बताया कि अगस्त के लिए 60,000 पाकिस्तानी रुपए (लगभग 200 डॉलर) का बिल आया है, जो उनके बस के बाहर का है। 

वहीं इस मामले में पिछले दिनों पाकिस्तान के अंतरिम सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय ने लोगों को राहत देने के लिए प्रस्तावित उपायों की एक सूची को अंतिम रूप दे दिया है और इसे मंजूरी के लिए संघीय कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा।

इससे पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री, अनवर उल हक काकर ने एक आपातकालीन बैठक की थी और बिजली दरों में कटौती के लिए अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया था।  हालाँकि, अभी तक पाकिस्तान सर्कार कोई हल नहीं निकाल पाई है और पाकिस्तानी एक सप्ताह से ज़्यादा समय से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं उनके मंत्रिमंडल ने कहा है कि बिलों में कटौती से आईएमएफ का भारी ऋण खतरे में पड़ जाएगा इसलिए फिलहाल राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 

काकर ने 27 अगस्त को कहा था कि वह आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं, पीएम हाउस और पाकिस्तान सचिवालय में बिजली की खपत को कम करने के लिए उपाय किए जाएँगे। उन्होंने आगे कहा था , “अगर इसके लिए मेरे कमरे का एयर कंडीशनर भी बंद करना पड़े तो बंद कर दीजिए।'”

गौरतलब है कि IMF ने कंगाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जुलाई में पाकिस्तान को ऊर्जा सब्सिडी समाप्त करने और 3 बिलियन डॉलर के ऋण के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए कठिन शर्तें रखी थीं, जिसकी वजह से पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार असहाय नजर आ रही है।

‘मुस्लिम बन जा नहीं तो मार डालेंगे’: दलित महिला से घर में घुस कर गाली-गलौच, जातिसूचक टिप्पणी कर दी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में दलित महिला के धर्मांतरण के आरोप में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता ने धर्मांतरित हो चुके अपने भाई, उसकी बीवी, बेटी और दामाद पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और घर में घुसकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अंबेडकर नगर के मालीपुर थाना क्षेत्र के तारा कला गाँव का है। यहाँ रहने वाली दलित महिला इंद्रावती ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि उसका भाई श्यामलाल करीब 40 साल पहले अपनी पत्नी को छोड़कर मुंबई चला गया था, जहाँ एक मौलाना ने उसका धर्मांतरण करा दिया और उसका नाम मोहम्मद हुसैन रख दिया।

इसके बाद श्याम लाल से मोहम्मद हुसैन नामक शख्स ने मुंबई की एक मुस्लिम महिला मुमताज शेख से निकाह कर लिया। दोनों को बेटी हुई तो उसका नाम हिना रब्बानी शेख रखा गया। हिना रब्बानी जब निकाह के लायक हुई तो मोहम्मद हुसैन ने वाराणसी में रहने वाले विक्की उर्फ विकास त्रिपाठी का धर्मांतरण कराकर पहले अब्दुल रहमान शेख बनाया फिर अपनी बेटी हिना शेख से निकाह करा दिया।

इंद्रावती का आरोप है कि उनकी माँ प्रतापी देवी की मौत के बाद श्यामलाल से मोहम्मद शेख बना शख्स अपने परिवार के साथ गाँव लौट आया। मोहम्मद शेख के साथ उसकी बीवी मुमताज शेख, बेटी हिना रब्बानी शेख और विकास त्रिपाठी से अब्दुल रहमान बना उसका दामाद भी आया था। ये सभी मिलकर इंद्रावती को नकदी और उसके नाम पूरी जमीन करने की बात करते हुए इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगे।

पुलिस को दी शिकायत में इंद्रावती ने कहा है कि भाई और उसके परिवार वालों के दबाव के आगे वह नहीं झुकी और उसने धर्मांतरण करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मोहम्मद हुसैन ने बीवी, बेटी और दामाद के साथ मिलकर घर में घुसकर गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी दी। साथ ही जाति सूचक टिप्पणी करते हुए अपमानित किया।

इस मामले में महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद हुसैन उर्फ श्यामलाल, उसकी बीवी मुमताज, बेटी हिना रब्बानी शेख, और दामाद अब्दुल रहमान उर्फ विकास त्रिपाठी के विरुद्ध धर्मांतरण, एससी-एसटी, घर में घुसकर मारपीट करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चारों को गिरफ्तार किया।

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ED की गिरफ्त में: कहा जाता था UPA सरकार के एविएशन मंत्री का दुलारा, ₹538 करोड़ के बैंक फ्रॉड की पूरी कहानी

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में शुक्रवार (1 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार किया। इस मामले में उन पर केनरा बैंक के साथ 538 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप हैं।

उन्हें पूछताछ के लिए ईडी दिल्ली से मुंबई लेकर आई थी और इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई। यहाँ उनसे कई घंटों पूछताछ की गई, लेकिन, जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इस दौरान जाँच अधिकारियों को सहयोग नहीं किया। शनिवार (2 सितंबर, 2023) को ईडी गोयल को मुंबई में प्रीवेन्शन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की विशेष अदालत में पेश करने जा रही है। वहाँ ईडी उनकी हिरासत की माँग करेगी।

CBI की एफआईआर पर हुआ केस दर्ज

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 3 मई को जेट एयरवेज के नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता और कंपनी के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई थी। सीबीआई ने ये एफआईआर गोयल पर केनरा बैंक के कथित 538 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप के बाद दर्ज कराई थी।

एफआईआर में सीबीआई ने गोयल के खिलाफ आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोप लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि बैंक को इसकी वजह से ही 538.62 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

बैंक ने इस मामले में सीबीआई से संपर्क किया था। बैंक ने एजेंसी को कहा था कि उसने जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (जेआईएल) को 848.86 करोड़ रुपए की क्रेडिट सीमा का कर्ज दिया था। इसमें नरेश गोयल ने 538.62 करोड़ रुपए चुकाए ही नहीं है।

केनरा बैंक ने 1 अप्रैल, 2011 से लेकर 19 जून, 2019 के बीच गोयल की कंपनियों से जुड़े खातों का फोरेंसिक ऑडिट किया। इसमें पैसों के डायवर्ट करने और धांधली की बात सामने आई। बैंक का आरोप है कि कंपनी के फॉरेंसिक ऑडिट में पता चला की गोयल ने अपनी अन्य कंपनियों को 1410.41 करोड़ रुपए कमीशन के तौर पर भुगतान किए थे।

इस तरह से उसने जेट एयरवेज का पैसा बाहर भेजा। इतना ही नहीं सहयोगी कंपनियों को कर्ज व अन्य निवेस के जरिए भी पेमेंट किया, लेकिन बैंक का पैसा नहीं चुकाया। ये रिपोर्ट बैंक ने 2021 में जारी की थी।

दो साल पहले ही जेआईएल का खाता फ्रॉड घोषित

सीबीआई के मुताबिक, जेआईएल के खाते को 29 जुलाई, 2021 में फ्रॉड घोषित कर दिया गया था। उसने जेट एयरवेज और उसके संस्थापकों पर धन की हेराफेरी का आरोप लगाया है। एजेंसी के मुताबिक, 1 अप्रैल, 2011 से 30 जून, 2019 के बीच, एयरलाइन ने पेशेवर और परामर्श खर्च पर 1152.62 करोड़ रुपए खर्च किए।

इतना ही नहीं, इस एयरलाइन से जुड़ी संस्थाओं के बीच 197.57 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन की पहचान की गई। ये भी सामने आया कि एयरवेज के महत्वपूर्ण प्रबंधकीय कर्मी भी कथित तौर पर इन संस्थाओं से जुड़े हुए थे।

जाँच में पाया गया कि जेट एयरवेज ने व्यावसायिक और परामर्श व्यय में कुल 1152.62 करोड़ में से 420.43 करोड़ रुपए का भुगतान उन संस्थाओं को किया। जिनकी कारोबारी प्रकृति उनके चालान (Invoices) में मौजूद सेवा देने के विवरण से मेल नहीं खाती थी। एफआईआर में कहा गया है कि यहाँ तक कि गोयल परिवार के निजी खर्च, जैसे कर्मचारियों का वेतन, फोन बिल और वाहन खर्च आदि का पेमेंट भी जेआईएल से किया जाता था।

जब पड़े ईडी और सीबीआई के छापे

जेट एयरवेज और नरेश गोयल पर केनरा बैंक से धोखाधड़ी के आरोपों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने इस सिलसिले में नरेश गोयल के ठिकानों पर छापेमारी की। चार महीने पहले ही 5 मई, 2023 को सीबीआई ने जेट एयरवेज के संस्थापक के परिसरों और एयरलाइन के पुराने कार्यालयों पर छापे मारे थे। इसके बाद इस मामले में ईडी ने जुलाई 2023 में गोयल और उनके सहयोगियों से जुड़े आठ स्थानों की भी तलाशी ली थी।

जेट एयरवेज के मशहूर होने का दौर

ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले एनआरआई कारोबारी नरेश गोयल ने अपने कारोबार में जमीन से आसमान का सफर तय किया। उन्होंने साल 1992 में जेट एयरवेज स्थापित किया। उन्होंने महज दो बोइंग 737 के साथ देश की इस पहली निजी एयरलाइन ने शुरू हुई।

घरेलू स्तर पर इसकी उड़ाने 1995 में शुरू हुई थी। इसी ने पहली बार ऑफर्स के जरिए सस्ते हवाई टिकट देने की पहल की थी। इससे देखते ही देखते एयरलाइन की दुनिया में ये एक मशहूर ब्रांड बनकर उभरी और 2004 में इसने अंतराष्ट्रीय उड़ाने भी शुरू कर दी।

इस निजी एयरलाइन कंपनी का इस सेक्टर में 2016 तक जलवा था। फरवरी 2016 तक इसका देश के 21.2 प्रतिशत एयर पैसेंजर बाजार में एकछत्र राज था। एक दिन में ही दुनिया के 55 से भी अधिक जगहों तक के लिए जेट एयरवेज की लगभग 300 उड़ाने जाती थीं, लेकिन इसके ये अच्छे दिन ज्यादा दिन नहीं चले।

शुरू हुई दिवालिया होने की कहानी

इसकी शुरुआत साल 2006 से उस वक्त हुई जब जेट एयरवेज ने सहारा एयर लाइन 2250 करोड़ रुपए की सबसे बड़ी एविएशन डील को अंजाम दिया। इसे भी इस एयरलाइन के बुरे दिनों की शुरुआत के तौर पर देखा गया।

इसके साथ साल 2008 की मंदी के साथ ही कम किराए के लिए एविशन सेक्टर में एयरलाइन्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा ने जेट एयरवेज की कमर तोड़ने में कसर नहीं छोड़ी। घरेलू एविएशन सेक्टर को दरकिनार कर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान देने की वजह से जेट एयरवेज के हालात खराब होते चले गए।

रही-सही कसर एयरलाइंस सेक्टर के खराब हालातों ने पूरी कर दी। फिर ऐसा वक्त आया कि कंपनी को कर्ज लेने की नौबत आ गई और कर्ज की वजह से ये एयरवेज दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गई। ऐसे में खाड़ी देशों की एतिहाद एयरलाइन ने मदद के लिए आगे आई और इसके 24 फीसदी शेयर खरीदे, लेकिन कंपनी हालात फिर भी बिगड़ती चली गई।

जेट एयरवेज एसबीआई सहित कई बैंकों के कर्ज तले दबती चली गई। ऐसा भी वक्त आया कि उड़ानें बंद करनी पड़ी। मार्च 2019 में नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल ने कंपनी बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके साथ ही अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज़ एयरलाइंस की उड़ानें बंद हो गईं।

साल 2019 में जब कंपनी ने अपनी उड़ाने बंद की। तब इस पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सहित कई सरकारी कंपनियों का लगभग 8000 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसके साथ जून 2019 में क़र्ज़दारों के समूह ने इसके दिवालिएपन की प्रकिया शुरू कर दी।

लंबी चली दिवालिया प्रक्रिया के बाद जून 2021 में यूएई के कारोबारी मुरारी लाल जालान और लंदन स्थित कालरॉक कैपिटल के बीच साझेदारी ने जेटएयरवेज का अधिग्रहण कर लिया। नरेश गोयल की कंपनी जेट एयरवेज़ (इंडिया) लिमिटेड साल 2005 से कैनरा बैंक से कर्ज़ लेती रही है। ये कर्ज जेट एयरवेज को स्टेट बैंक के नेतृत्व के कंसोर्टियम के तहत बैंकों ने दिए।

बैंक से ये कर्ज जेट एयरवेज़ ने लैंडिंग, नैविगेशन, एयरपोर्ट पर दी जाने वाली सुविधाओं, आयात किए जा रहे विमानों को किराए पर लेने के लिए सिक्योरिटी डिपोज़िट जैसे खर्चों के लिए लिया था। इसके साथ ही ये कर्ज रूट पर विमान उड़ाने और प्रमोशन के लिए था।

सीबीआई का आरोप है कि एयरलाइन ने पैसा इन मदों पर खर्च नहीं किया। जबकि जेट एयरवेज का कहना है कि अगस्त 2018 से कंपनी विमानों को उड़ानों के लिए आर्थिक दिक्कतों सामना कर रही है। कंपनी पर पड़े बोझ की वजह से वो वक्त पर कर्ज़ की अपनी किश्त नहीं चुका सकी।

केनरा बैंक की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज़ का पैसा तीन तरीकों से निकाला गया था। पहला कमीशन पर होने वाले खर्च के तौर पर, दूसरा, गोयल की ही एक और कंपनी जेट लाइट (इंडिया) लिमिटेड में निवेश के लिए और तीसरा कंसल्टेन्सी फ़ीस देने के लिए।

इसी वजह से केंद्रीय बैंक आरबीआई ने 29 जुलाई 2021 को कंपनी के अकाउंट को फर्ज़ी करार दिया। आरबीआई ने कहा कि इसके ज़रिए 728.6 करोड़ रुपए की धांधली की गई है। जिसमें से 538.62 करोड़ रुपए कैनरा बैंक के हैं, जबकि 190 करोड़ रुपए सिंडीकेट बैंक के है। गौरतलब है कि साल 2020 अप्रैल में सिंडीकेट बैंक का कैनरा बैंक में विलय हो गया था।

प्रफुल्ल पटेल जब आए थे नरेश गोयल के बचाव में

साल 2006 में, तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल नरेश गोयल के नेतृत्व वाली एयरलाइन जेट एयरवेज के बचाव में खुलकर सामने आए थे। इसके लिए उन्हें ‘नरेश गोयल का उड्डयन मंत्री’ कहा गया। उस वक्त एक केंद्रीय मंत्री के लिए एक निजी कंपनी के लिए वकालत करना और इस तरह खुले तौर पर बोलना हैरानी भरा था।

साल 2006 के नवंबर में तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और NCP नेता प्रफुल्ल पटेल सब दरकिनार कर नरेश गोयल की एयरलाइन्स जेट एयरवेज के बचाव में उतर आए थे। उन्होंने इस एयरलाइन के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। तब उन्होंने दावा किया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए प्रस्तावित उड़ान में ‘अनावश्यक देरी’ की जा रही है।

उनका कहना था कि ये देरी निराधार सुरक्षा चिंताओं के वजह से हुई। उन्होंने कहा था, “अगर जेट को भारत में सुरक्षा मंजूरी मिल गई है, तो हम गैर-जरूरी तौर पर इसमें देरी क्यों कर रहे हैं। गृह मंत्रालय से उचित मंजूरी के बाद भारत में परिचालन की मंजूरी मिलने के बाद, अमेरिका के लिए उसकी उड़ान में देरी क्यों हो रही है?”

वह इतने पर ही नहीं रुके थे। उन्होंने कहा था, “हमारे लिए, भारत की सुरक्षा चिंता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी एयरलाइन को घरेलू परिचालन के लिए सुरक्षा मंजूरी दे दी गई है, तो मुझे किसी अन्य देश के लिए इस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं दिखता है।” दिलचस्प बात यह है कि उस समय, गोयल के स्वामित्व वाली एयरलाइन न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और कुछ अन्य गंतव्यों के लिए बढ़ती उड़ानों के लिए सरकार से स्लॉट मांग रही थी।

पटेल के खिलाफ ये आरोप कुख्यात राडिया टेप में भी दर्ज किए गए थे। जहाँ जदयू के पूर्व राज्यसभा सांसद ने पटेल को ‘नरेश गोयल का मंत्री’ कहा था। आउटलुक पत्रिका में तब प्रकाशित खबर के अनुसार, लॉबिस्ट नीरा राडिया और जदयू संसद के बीच कथित बातचीत पटेल को लेकर बेहद तीखी थी।

इसमें राडिया को यह पूछते हुए सुना जाता है, “लेकिन उन्होंने (पटेल ने) सेक्टर को बर्बाद कर दिया है। मुझे खेद है…इस पर मेरी राय है। उन्होंने सेक्टर के साथ न्याय नहीं किया है।” फिर तत्कालीन संसद को जवाब देते हुए सुना जाता है, “मुझे लगता है कि उन्होंने नरेश गोयल (जेट एयरवेज) के लिए मंत्री के तौर में काम किया है।”