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फर्जी नाम से सरकार के ₹144 करोड़ डकार गए अल्पसंख्यक संस्थान, CBI ने 830 कॉलेजों के अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों पर दर्ज की FIR

अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में 144 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। इस मामले में अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मामले को CBI के हवाले कर दिया। CBI ने मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। जाँच में 830 संस्थान ‘फर्जी’ पाए गए थे। सीबीआई ने 18 राज्यों के इन 830 कॉलेज/मदरसों के अधिकारियों और PSU बैंक कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। 

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR के अनुसार, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के मामले में 144.33 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा किया है। अब मदरसों और बैंकों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ यह एफआईआर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दर्ज की गई है।

संदिग्ध आरोपितों में अज्ञात सरकारी अधिकारी, कई पीएसयू बैंक के अधिकारी और 18 राज्यों में स्थित 830 संस्थानों के नोडल अधिकारी शामिल हैं। अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि 2017 से लेकर 2022 के बीच करीब 65 लाख अल्पसंख्यक छात्रों को केंद्र सरकार से 3 अलग-अलग योजनाओं के तहत हर साल छात्रवृत्ति दी गई है।

यह छात्रवृत्ति प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति और छह अल्पसंख्यक समुदायों यानी मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी के छात्रों को जाती है। छात्रवृत्ति डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) यानी कि छात्रों के खाते में ही भेजी गई है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई एक आंतरिक जाँच में ऐसे 830 संस्थानों में गहरे भ्रष्टाचार का पता चला। इन फर्जी संस्थानों के जरिए पिछले 5 वर्षों में 144.83 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। अल्पसंख्यक मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई 2023 को इस मामले में अपनी पहली शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले गंभीरता को देखते हुए आगे की जाँच के लिए इसे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भेजा गया।

अल्पसंख्यक मंत्रालय की जाँच के तहत 34 राज्यों के 100 जिलों में पूछताछ की गई। जाँच में 1572 संस्थानों में से 830 को धोखाधड़ी में शामिल पाया गया। ये संस्थान 34 में से 21 राज्यों के हैं, जबकि बाकी राज्यों में संस्थानों की जाँच अभी भी चल रही है।

फिलहाल, अधिकारियों ने इन 830 संस्थानों से जुड़े खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह घोटाला 2007-08 से ही चल रहा है। अब तक करीब 22,000 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। बीते चार साल से सालाना 2,239 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियाँ दी गई हैं।

सीबीआई इन फर्जी संस्थानों के उन जिला नोडल अधिकारियों की भी जाँच करेगी, जिन्होंने फर्जी संस्थानों का सत्यापन किया और अपनी अनुमोदन रिपोर्ट दी। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया है कि बैंकों ने फर्जी आधार कार्ड और केवाईसी दस्तावेजों के साथ लाभार्थियों के लिए फर्जी खाते खोलने की अनुमति कैसे दी।

इतना ही नहीं, जिन संस्थानों का अस्तित्व ही नहीं था या जिनका परिचालन नहीं हो रहा था, ऐसे फर्जी संस्थान जाँच के बाद राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) दोनों पर पंजीकृत होने में कामयाब रहे। इसमें भी संलिप्त अधिकारी जाँच के दायरे में रहेंगे।

राज्य के अनुसार विवरण

  • छत्तीसगढ़: जाँच में सभी 62 संस्थान फर्जी या निष्क्रिय पाए गए।
  • राजस्थान: जाँच के दौरान 128 संस्थानों में से 99 फर्जी या गैर-परिचालन वाले थे। यानी 77 प्रतिशत संस्थान फर्जी हैं।
  • असम: यहाँ के 68 प्रतिशत यानी 225 संस्थान फर्जी पाए गए।
  • कर्नाटक: 64 फीसदी यानी 162 संस्थान फर्जी पाए गए।
  • उत्तर प्रदेश: 44 फीसदी यानी 154 संस्थान फर्जी पाए गए।
  • पश्चिम बंगाल: 39 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।

जाँच के दौरान कई खामियाँ मिलीं

  • केरल के मलप्पुरम में एक बैंक की शाखा ने 66,000 छात्रवृत्तियाँ वितरित कीं। यह छात्रवृत्ति के लिए पंजीकृत संख्या से अधिक है।
  • जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 5,000 पंजीकृत छात्रों वाले एक कॉलेज ने 7,000 छात्रवृत्ति दी गई।
  • एक अभिभावक का मोबाइल नंबर 22 विद्यार्थी से जुड़ा था। ये सभी छात्र नौवीं कक्षा में थे।
  • एक अन्य संस्थान में छात्रावास नहीं था, लेकिन प्रत्येक छात्र ने छात्रावास छात्रवृत्ति लिया।
  • पंजाब में अल्पसंख्यक छात्रों को स्कूल में नामांकित नहीं होने के बावजूद छात्रवृत्ति मिलती थी।
  • असम में एक बैंक शाखा में कथित तौर पर 66,000 लाभार्थी सूचीबद्ध थे। जब इन लाभार्थियों का सत्यापन करने के लिए पहुँची तो एक मदरसे में टीम को धमकी दी गई।

बात दें कि मंत्रालय का छात्रवृत्ति कार्यक्रम से लगभग 1,80,000 संस्थान जुड़े हुए हैं। इनमें 1.75 लाख मदरसे हैं, जिनमें सिर्फ 27,000 मदरसे ही पंजीकृत हैं और छात्रवृत्ति के पात्र हैं। इसमें कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्र शामिल हैं। यह शैक्षणिक वर्ष 2007-2008 में शुरू की गई थी।

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भले ही केंद्र सरकार देती है, लेकिन उसका सत्यापन और अन्य प्रक्रिया राज्य सरकार करती है। संस्थानाें का पंजीकरण जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग में होता है। छात्रवृत्ति के खाते स्थानीय बैंकों में खोले जाते हैं। विद्यार्थियों और संस्थानाें का सत्यापन भी राज्य सरकार का अल्पसंख्यक विभाग करता है।

गर्लफ्रेंड को चुम्मा लेने में मदहोश था युवक, अचानक हो गया बहरा! चीनी वैलेंटाइन डे पर वाकया, डॉक्टरों ने बताया – किस करने से फट सकते हैं कान के पर्दे

चीन में एक युवक को अपनी गर्लफ्रेंड को काफी देर तक ‘किस’ करना भारी पड़ गया। चीनी वैलेंटाइन डे के दिन इस युवक ने अपनी ग्रलफ्रेंड को 10 मिनट तक किस किया, जिसके बाद उसकी सुनने की शक्ति ही खत्म हो गई। इस वजह से चीन में सोशल मीडिया पर इसे ‘किस ऑफ लव’ नहीं बल्कि ‘किस ऑफ डेफ’ यानी ‘बहरे होने का चुंबन’ कहा जा रहा है।

‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (22 अगस्त, 2023) को चीनी वेलेंटाइन डे पर चीन के पूर्वी झेजियांग प्रांत में वेस्ट झील के किनारे एक युवक अपनी प्रेमिका को बाँहों में भरे हुए था। इस दौरान दोनों एक-दूसरे को मदहोशी से किस कर रहे थे। किस के दौरान अचानक ही युवक को बुदबुदाहट की आवाज के साथ ही बाएँ कान में दर्द महसूस हुआ।

इस वजह से वह ठीक से सुन भी नहीं पा रहा था। इस पर तुरंत ये प्रेमी जोड़ा अस्पताल पहुँचा। यहाँ पहुँच कर डॉक्टरों से उन्हें पता चला कि युवक के कान के पर्दे में छेद हो गया है। डॉक्टर्स ने उसे ये भी बताया कि उसे ठीक होने में कम से कम 2 महीने लगेंगे।

किस से कान में हवा के दबाव में आता है बदलाव

SCMP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में डॉक्टर्स का कहना है कि उत्तेजनापूर्ण चुंबन (Passionate Kiss) से कान के अंदर हवा के दबाव में तेज़ी से बदलाव हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साथी की भारी साँस के साथ मिलकर असंतुलन का कारण बनता है। इससे कान का पर्दा फट जाता है। हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

पिछले महीने भी दक्षिणी चीन के गुआंग्डोंग प्रांत में एक जोड़े के घर पर टीवी देखने के दौरान भी ऐसा ही वाकया पेश आया था। किस के अलावा अन्य कई चीजें भी कान के पर्दे में छेद का कारण बन सकते हैं। इन कारणों में लड़ाई, सड़क दुर्घटनाएँ, गोताखोरी और विमान यात्रा शामिल हैं।

उत्तर-पूर्वी हेइलोंगजियांग प्रांत के मुडानजियांग वानिकी अस्पताल में कान और गले की बीमारी विभाग के डॉक्टर, झांग जून ने बाइड्यू डॉट कॉम (baidu.com) पर इस बारे में जानकारी दी है। उनके मुताबिक, अधिकांश रोगियों में इस तरह से कान के पर्दे फटने की वजह टाइम्पेनाइटिस, यानी कान के पर्दे में सूजन होती है।

कम गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक्स का कोर्स और कान को सूखा रखने से परेशानी ठीक हो जाती है, लेकिन कान में छेद होने अधिक गंभीर केसों में सर्जरी की जरूरत होती है।

चीनी सोशल मीडिया पर सुर्खियों में घटना

झेजियांग प्रांत का ये वाकया चीनी सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। चीनी एप डॉयिन पर इससे जुड़े पोस्ट को 1 मिलियन लाइक और 400,000 कॉमेंट मिले हैं। एक शख्स ने कहा, “दुनिया इतनी बड़ी है कि यहाँ अनगिनत अजीबोगरीब घटनाएँ होती रहती हैं।”

एक अन्य ऑनलाइन यूजर ने कहा, “यह पता चला है कि प्यार वास्तव में अपनी दहाड़ से कानों को बहरा कर सकता है।” दूसरे यूजर ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, “यही वजह है कि मैं कोई साथी नहीं ढूँढना चाहता। यह बहुत खतरनाक है।”

बुर्के में लड़की-इस्लामी टोपी में लड़का, बोल रहे थे ‘जय श्रीराम’: कट्टरपंथी ने दी बीच से चीर देने की धमकी, Video वायरल

‘जय श्री राम’ बोलने के कारण बीच से काटने की धमकी देने वाले एक कट्टरपंथी का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। वह उस युवक और युवती को धमकी दे रहा जिन्होंने इस्लामी टोपी और बुर्का पहनकर यह नारा लगाया था।

‘द राइट विंग गाइज’ नाम के एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर ने यह वीडियो शेयर करते हुए कर्नाटक पुलिस से कार्रवाई का आग्रह किया है। जवाब में बेंगलुरु सिटी पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है। वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब का और कहाँ का है।

वैसे ट्विटर यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए धमकी देने वाले युवक को बेंगलुरु का बताया है। उन्होंने लिखा है, “कर्नाटक के बेंगलुरु का रहने वाला यह शख्स बुर्का और इस्लामी टोपी पहनकर ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाले लड़का-लड़की को काटने की धमकी दे रहा है। क्या हिजाब समर्थक इस लड़की के बुर्का पहनने और अपनी पसंद के नारे लगाने के अधिकार के लिए उसके साथ खड़े होंगे?”

साझा किए गए पोस्ट में देखा जा सकता है कि एक वीडियो में एक लड़की बुर्का पहने और एक लड़का इस्लामी टोपी में नजर आ रहे हैं। लड़का कहता है- दिल दिमाग में एक ही नाम, इस पर लड़की कहती है- जय श्री राम, जय श्री राम। फिर लड़का भी ‘जय श्री राम’ कहता है।

इन्हें धमकी देने वाला युवक कहता है, “अरे सु@# के बच्चे तू जो भी बोल रहा है टोपी निकालकर बोल और उस सु@# की बच्ची को बोल की बुर्का निकालकर बोले। तुम लोग इस्लाम को बीच में क्यों ला रहे हो? एक सच्चे मुसलमान के सामने अगर ये बात कर दो तो तुम्हें बीच से चीर देगा।” धमकी वाला वीडियो nayaz_and_boy72 नामक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया था।

यह पहला मौका नहीं है जब इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कट्टरपंथियों ने धमकी देने के लिए किया है। ऑपइंडिया ने ऐसे कई मामलों को उठाया है जिनमें इंस्टाग्राम का इस्तेमाल इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को धमकी देने के लिए किया है। ऐसे कई वीडियो में मुस्लिम बच्चे भी धमकी देते नजर आ चुके हैं।

चंद्रमा पर H2O को लेकर उम्मीदें बढ़ी, रोवर प्रज्ञान को मिला ऑक्सीजन; हाइड्रोजन की खोज जारी: इसरो ने 7 अन्य तत्वों को लेकर भी दी गुड न्यूज

चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर पहुँचकर इतिहास रचने वाले चंद्रयान-3 ने एक और बड़ी खबर भेजी है। रोवर प्रज्ञान को चंद्रमा की सतह पर ऑक्सीजन समेत कई तत्व मौजूद होने के प्रमाण मिले हैं। इसरो ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। फिलहाल हाइड्रोजन की खोज जारी है।

इसरो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट कर बताया है कि प्रज्ञान रोवर पर लगे लिब्स पेलोड ने चंद्रमा की सतह पर आठ तत्व खोजे हैं। इनमें ऑक्सीजन (O) के अलावा एल्यूमिनियम (Al), कैल्शियम (Ca), लोहा (Fe), क्रोमियम (Cr), टाइटेनियम (Ti), मैंगनीज (Mn) और सिलिकॉन (Si) शामिल हैं। इसके अलावा सल्फर (S) के भी दक्षिणी ध्रुव पर होने की पुष्टि की है।

चंद्रमा पर ऑक्सीजन की पुष्टि होना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। चंद्रमा पर अब तक हाइड्रोजन नहीं मिल पाया है। यदि हाइड्रोजन की भी पुष्टि हो जाती है तो फिर चंद्रमा पर पानी भी मिल सकता है। इसके अलावा ऑक्सीजन (O) और हाइड्रोजन (H) के संयोजन से पानी (H2O) भी बनाया जा सकता है।

इसके अलावा सल्फर, एल्युमिनियम, कैल्शियम, लोहा और सिलिकॉन समेत अन्य खनिजों के मिलना भी ISRO के लिए बड़ी सफलता है। ये सभी चंद्रमा में किस मात्रा में उपलब्ध हैं, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। ज्ञात हो कि 28 अगस्त 2023 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की थी। चंद्रमा के इस हिस्से में पहुंचने वाला भारत पहला देश है। उसके बाद से यह दूसरा ऑब्जर्वेशन है।

लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी (LIBS) चंद्रयान 3 का एक पेलोड है। इसने ही चंद्रमा की सतह पर पहला इन-सीटू एक्सपेरिमेंट किया। किसी चीज की खोज को लेकर ऑन साइट किए गए प्रयोग को इन-सीटू एक्सपेरिमेंट कहते हैं। इससे पहले विक्रम लैंडर में लगे चास्टे (ChaSTE) पेलोड ने ISRO को बताया था कि चाँद की सतह के ऊपर और सतह से 10 सेंटीमीटर नीचे के तापमान में बहुत अधिक अंतर है। इसरो के अनुसार चंद्रमा की सतह पर तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच है। वहीं सतह से 8 सेंटीमीटर नीचे पारा माइनम 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।

सत्यम की बहन से छेड़खानी करने वाले ग्राम प्रधान यूसुफ के ही बेटे और भांजे, विरोध करने पर 10वीं के छात्र की कर दी गई थी हत्या

चचेरी बहन से छेड़खानी का विरोध करने वाले 16 साल के सत्यम शर्मा को पहला थप्पड़ ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ ने ही मारा था। छेड़खानी करने वाले नाबालिगों में से एक यूसुफ का बेटा और दो भांजे हैं। मीडिया रिपोर्टों से यह बात सामने आई है। 10वीं के छात्र सत्यम की प्रयागराज के खीरी में 28 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद यूसुफ सहित 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें दूसरा नामजद मोहसिन और तीनों नाबालिग भी शामिल हैं। घटना के बाद से ही खीरी में तनाव बना हुआ है। आक्रोशित ग्रामीणों ने घंटों प्रदर्शन किया था। वे आरोपितों के घर पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे थे।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार तुर्कपुरवा ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ का बेटा परमानंद इंटर कॉलेज में पढ़ता है। इसी स्कूल का छात्र सत्यम भी था। उसकी बहन भी यहीं पढ़ती है। हत्या की घटना के बाद पीड़ित परिजनों ने बताया भी था उनकी लड़की के साथ स्कूल में भी छेड़छाड़ की घटना हुई थी। इसकी शिकायत भी उन्होंने स्कूल प्रबंधन से की थी।

दैनिक जागरण ने मौके पर मौजूद लोगों के हवाले से बताया है कि सत्यम को पहला थप्पड़ मोहम्मद यूसुफ ने ही मारा था। इसके बाद अन्य आरोपितों ने उस पर हमला किया था। कथित तौर पर जब सत्यम की निर्ममता से पिटाई हो रही थी तब यूसुफ गाली भी दे रहा था। उसे हत्याकांड में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आरोपित किया गया है। उसकी ग्राम प्रधान की कुर्सी भी जा सकती है।

डीएम संजय कुमार खत्री का कहना है कि प्रधान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्रधान के हत्या के मुकदमा में नामजद हो जाने के चलते गांव में प्रशासनिक कमेटी गठित होगी। इसके बाद उप चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। मोहम्मद यूसुफ पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ग्रामीणों ने उसके कार्यकाल में कराए गए कार्यों में फर्जीवाड़े की भी शिकायत दी है। सीडीओ गौरव कुमार ने इस भी कार्यों का जाँच कराने की बात कही है।

क्या है मामला

पुरादलू गाँव के रहने वाले सत्यम शर्मा पर हमला मोहम्मद यूसुफ के घर के सामने ही हुआ था। स्कूल में छुट्टी के बाद वह अपनी बहन के साथ घर लौट रहा ​था। तुर्कपुरवा मोहल्ले में उसकी बहन के साथ छेड़खानी हुई। विरोध करने पर उसके सिर पर पटरे से वार किया गया। वह लूहलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद आरोपित धमकी देते हुए चले गए।

सत्यम की बहन ने बताया था कि इस दौरान वह मदद के लिए चिल्लाती रही। लेकिन कोई आगे नहीं आया। बाद में उसके भाई को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सत्यम की बहन ने बताया था, “सोमवार को स्कूल बंद होने के बाद हम दोनों घर जा रहे थे। तुर्कपुरवा मोहल्ले में इसी गाँव के और हमारे स्कूल में पढ़ने वाले गैर-समुदाय के छात्रों ने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे खींचने की कोशिश करने लगे। मैं चिल्लाई तो भाई उनसे भिड़ गया। इसके बाद उन्होंने मेरे भाई पर हमला कर दिया। पटरे से उसे तब तक मारा जब तक वह जमीन पर गिर नहीं गया। फिर हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले।”

शुरुआत में पुलिस इसे स्कूली विवाद में पिटाई बता रही थी, जबकि पीड़ित परिजनों का स्पष्ट तौर पर कहना था कि छेड़खानी का विरोध करने पर सत्यम की हत्या की गई। लोगों के आक्रोश को देखते हुए बाद में खीरी थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया था।

चंद्रयान-3 की डिजाइन बनाने का दावा करने वाला गिरफ्तार, ट्यूशन पढ़ने आएँ ज्यादा बच्चे इसलिए खुद को ‘इसरो वैज्ञानिक’ बता रहा था मितुल त्रिवेदी

सूरत का स्वयंभू वैज्ञानिक मितुल त्रिवेदी गिरफ्तार हो गया है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद उसने इसका डिजाइन तैयार करने का दावा कर खूब सुर्खियाँ बटोरी थी। लेकिन जाँच में यह बात सामने आई है कि उसका भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से कोई वास्ता नहीं है। ट्यूशन में अधिक बच्चे पाने के लिए उसने खुद को वैज्ञानिक घोषित कर दिया था।

मितुल त्रिवेदी को सूरत क्राइम ब्रांच ने 29 अगस्त को गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 478, 471, 419 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ के बाद उसे हिरासत में लिया गया था।

23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी। इसके बाद मितुल त्रिवेदी का एक ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें वह अपने शिक्षक से बात करते हुए सुनाई दे रहा था। बातचीत में वह चंद्रयान-3 के डिजाइन में अहम भूमिका निभाने का दावा कर रहा था। इसके बाद उसने कई मीडिया चैनलों को इंटरव्यू दिया। इस दौरान भी चंद्रयान-3 के डिजाइन को लेकर अपने दावों को दोहराया।

मीडिया में यह मामला आने और सोशल मीडिया में मितुल त्रिवेदी के दावों पर सवाल उठने के बाद सूरत पुलिस का ध्यान इस ओर गया। उन्होंने उसे पूछताछ के लिए बुलाया। इस दौरान त्रिवेदी इसरो से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं दे पाया। इसके बाद मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। त्रिवेदी के दावों में गड़बड़ी दिखने के बाद आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

सूरत के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंघल ने मीडिया को बताया है कि मितुल त्रिवेदी ने खुद के इसरो वैज्ञानिक होने का दावा किया था। पुलिस ने इसको लेकर जब इसरो से संपर्क किया तो उसके दावों की पुष्टि नहीं हुई। त्रिवेदी से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसने एमकॉम की पढ़ाई की। वह ट्यूशन क्लास चलाता है। उसने यह सोचकर खुद के वैज्ञानिक होने की अफवाह फैलाई कि इसके बाद ट्यूशन पर और अधिक बच्चे आएँगे।

प्रकाश राज और RJ सायमा सहित पूरा गिरोह उतरा मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में: मासूम बच्चों का वीडियो वायरल कर किया था कानून का उल्लंघन

फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले कथित फैक्ट चेकर जुबैर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से उसकी गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई है। आम लोग जहां एक पीड़ित बच्चे का वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर करने वाले और वीडियो को एडिट कर समाज में जहर घोलने वाले जुबैर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, तो पूरा वामपंथी गिरोह उसके बचाव में खुलकर उतर आया है। इस लिस्ट में प्रकाश राज, आरजे सायमा, सीमा चिश्ती जैसे नाम हैं।

सबसे पहले पढ़िए सायमा का ट्वीट, जिसने कौशिक राज के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को गलत ठहरा दिया। सायमा ने लिखा, “क्या समय आ गया है, तृप्ति त्यागी नाबालिग के साथ अपराध करने के बाद भी खूब सपोर्ट पा रही है, तो इस खबर को सामने लाने वाले पर ही पुलिस ‘अटैक’ कर रही है।” सायमा ने ‘आई स्टैंड विद जुबैर’ का हैशटैग भी आगे बढ़ाया है।

वहीं, वामपंथी मीडिया संस्थान द वायर की संपादक सीमा चिश्ती को जुबैर इसलिए बेचारे लगने लगे, क्योंकि जुबैर ने आग लगाकर पानी डाल दिया था। उसका एडिट किया हुआ वीडियो सारी दुनिया में घूमने के बाद। अब सीमा चिश्ती यूपी पुलिस पर ही सवाल उठा रही हैं, पढ़िए ट्वीट…

हालाँकि प्रकाश राज के ट्वीट करते ही लोगों ने जम कर लताड़ लगाई। प्रकाश राज ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि वो जुबैर का समर्थन करने के लिए इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी आई स्टैंड विद जुबैर हैशटैग के साथ ट्वीट करने की अपील की।

प्रकाश राज कई मामलों में बुरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं, जो एक्स (पूर्व में ट्विटर) की आम जनता भी उन्हें उसी तरह आड़े हाथों लेती है। प्रकाश राज के ट्वीट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने प्रकाश राज को उसकी असल औकात याद दिला ली। देखिए कुछ ट्वीट्स…

दिनेश भट्ट नाम के एक यूजर ने प्रकाश राज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रकाश राज को रिप्लाई देते हुए लिखा, “एक ऐसा मूर्ख जो अपनी मक्कारी भरी हरकतों से आज तक एक निम्न स्तरीय जंतु की तरह रेंग रहा है, जिसका मन मस्तिष्क घटियापन से भरा हुआ है, वो एक ऐसे बेयर रूपी मक्कार को सहारा देकर खड़े होने की बात कर रहा है, पहले तुम मेरे खड़े हुए कड़क जंतु का सहारा लेकर अपने पृष्ठ भाग को रख कर बैठ जाओ, तुम्हारे पृष्ठ भाग की खुजली के साथ साथ तुम्हारी मानसिक खुजली भी दूर हो जाएगी।।”

अनूप रावत लिखते हैं, “फॉर्म भरते वक्त फादर वाली जगह पर अब्दुल तो नहीं लिखते हो?”

जॉन कबीर एक तस्वीर के माध्यम से बोल रहे हैं कि तुम कुछ भी करो, हमें क्या मतलब है।

योगी आदित्यनाथ नाम से बने एक पेरोडी अकाउंट से अलग ही वीडियो शेयर किया गया है। कैप्शन में उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हालत की तुलना प्रकाश राज और जुबैर से की गई है।

मोहम्मद ज़ुबैर ने वीडियो के जरिए फैलाया था प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर FIR दर्ज की है। ये मामला खुब्बापुर गाँव स्थित ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ के वायरल वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में शिक्षिका तृप्ता त्यागी बैठी हुई दिख रही है। साथ ही एक मुस्लिम बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया जाता है। वीडियो उस मुस्लिम बच्चे के चचेरे बड़े भाई ने ही बनाया था। वीडियो में वो हँसता हुआ सुनाई दे रहा है। वही शिक्षा के पास अपने भाई की शिकायत लेकर आया था।

वहीं मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में वीडियो वायरल किया था, लेकिन बच्चों के चेहरों को ब्लर नहीं किया था। इस FIR में बताया गया है कि AltNews के पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का उल्लंघन करते हुए बच्चे की पहचान उजागर की गई है। इसके लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ये FIR सोमवार (28 अगस्त, 2023) को दर्ज की गई है। मोहम्मद ज़ुबैर ने बाद में इस वीडियो को डिलीट कर लिया था, लेकिन माफ़ी तक नहीं माँगी थी।

वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की धुरी बन रहा भारत, पीएम मोदी की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल रही मजबूती: G20 अध्यक्षता को लेकर जानें सब कुछ यहाँ

भारत इस साल जी-20 का अध्यक्ष देश है और इसकी सभी बैठकों की मेजबानी कर रहा है। जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जो विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 80% प्रतिनिधित्व करता है। भारत के लिए जी-20 की अध्यक्षता अवसर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत को वैश्विक मंच पर प्रमुख खिलाड़ी बनने का मौका मिल रहा है।

नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को जी-20 का शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है। यह शिखर सम्मेलन भारत की जी-20 अध्यक्षता का समापन होगा। जी-20 का शिखर सम्मेलन दुनिया के प्रमुख आर्थिक देशों के नेताओं का वार्षिक सम्मेलन है, जिसका पहली बार आयोजन साल 2008 में शिकागो (अमेरिका) किया गया था। ये शिखर सम्मेलन 20 प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्त, व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। जी-20 के शिखर सम्मेलन से वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्थिरता और समृद्धि में मदद मिली है।

इस समय जी-20 में कौन से देश शामिल हैं?

जी-20 के सदस्य देश हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।

जी-20 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेताओं के नाम

भारत के प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति: जो बाइडेन, चीन के राष्ट्रपति: शी जिनपिंग, जापान के प्रधानमंत्री: फुमियो किशिदा, जर्मनी के चांसलर: ओलाफ शॉल्ज़, रूस के विदेश मंत्री: सर्गेई लावरोव, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री: ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति: इमैनुएल मैक्रॉन, इटली के प्रधानमंत्री: मारियो ड्रैगी, कनाडा के प्रधानमंत्री: जस्टिन ट्रूडो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री: एंथनी अल्बानीज, ब्राजील के राष्ट्रपति: जाइर बोल्सोनारो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति: अल्बर्टो फेर्नांडीज, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति: जोको विदोदो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति: सिरिल रामफोसा, सऊदी अरब: मोहम्मद बिन सलमान-क्राउन प्रिंस, तुर्की के राष्ट्रपति: रेसेप तैयप एर्दोआन, मेक्सिको के राष्ट्रपति: आंद्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्राडोर, इनके अलावा, जी-20 के शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

भारत में जी-20 का शिखर सम्मेलन क्यों हो रहा है?

जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, और भारत कुछ ही समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। भारत जी-20 के सदस्य के रूप में, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में भाग लेने का अधिकार रखता है। भारत में जी-20 का शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर भी है। शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत दुनिया के प्रमुख व्यवसायों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। भारत अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसरों को बनाने के लिए इस अवसर का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है।

कुल मिलाकर, भारत में जी-20 का शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह भारत को वैश्विक मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने, अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसरों को बनाने का अवसर प्रदान करता है।

भारत जी-20 का सदस्य 2008 में बना। जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी 20 अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जो विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 80% प्रतिनिधित्व करता है। भारत जी-20 का सदस्य बनने वाला 8वाँ देश था।

जी-20 में भारत की स्थिति कैसी है?

भारत जी-20 के माध्यम से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी आवाज को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग करने के अवसर का लाभ उठाता है। भारत जी-20 के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर काम करता है। भारत जी-20 के भीतर एक जिम्मेदार और विश्वसनीय सदस्य है। भारत जी-20 के सिद्धांतों और मूल्यों का सम्मान करता है, और यह जी-20 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हाल ही में, भारत ने जी-20 की अध्यक्षता की है। अगला शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद जी-20 की अध्यक्षता ब्राजील के पास चली जाएगी। भारत की अध्यक्षता के दौरान, भारत ने वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए जी-20 देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया। भारत ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए जी-20 देशों के साथ काम किया। भारत की जी-20 अध्यक्षता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सकारात्मक रूप से देखा गया है। भारत ने जी-20 के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और प्रभाव को मजबूत किया है।

जी-20 के बाद वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति कैसी रहने वाली है?

जी-20 के बाद वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत रहने की संभावना है। भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए जी-20 देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए जी-20 देशों के साथ काम किया है। भारत की जी-20 अध्यक्षता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सकारात्मक रूप से देखा गया है। भारत की जी-20 अध्यक्षता के बाद, भारत वैश्विक मंचों पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए काम करना जारी रखेगा। भारत वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

भारत के पास वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कारक हैं। भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, और यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भारत एक सांस्कृतिक महाशक्ति है, और इसका विश्व भर में महत्वपूर्ण प्रभाव है। भारत इन कारकों का लाभ उठाकर वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। भारत वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी आवाज को मजबूत करके, और वैश्विक शांति और सुरक्षा को मजबूत करने में सहयोग देगा।

भारत ने इन मुद्दों पर लगातार बनाए रखा ध्यान

भारत की जी-20 की अध्यक्षता का विषय है ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’। इस विषय के तहत, भारत जी-20 देशों को वैश्विक चुनौतियों, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास पर सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसमें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं-

जलवायु परिवर्तन : जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, और इसलिए यह विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जी-20 देशों को अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

आर्थिक विकास: जी-20 देशों में दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, इसलिए यह वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। जी-20 देशों को व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, आर्थिक समावेश को बढ़ावा देने और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

स्वास्थ्य: जी-20 देशों में दुनिया की अधिकांश आबादी शामिल है, इसलिए यह वैश्विक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। जी-20 देशों को स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में सुधार करने, संक्रामक रोगों को रोकने और स्वास्थ्य देखभाल में नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

गरीबी उन्मूलन: जी-20 देशों द्वारा वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। जी-20 देशों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के अवसरों तक पहुँच में सुधार करके गरीबी को कम करने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

अंतरराष्ट्रीय संबंध: वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जी-20 एक महत्वपूर्ण मंच है। जी-20 देशों को संघर्षों को हल करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

जी-20 को ध्यान में रखते हुए भारत की वैश्विक नीति के खास बिंदु

जी-20 अध्यक्षता के दौरान, भारत ने जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए जी-20 देशों के साथ सहयोग किया है। भारत ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार के लिए भी काम किया है, और उसने शांति और सुरक्षा के लिए सहयोग को बढ़ावा दिया है। भारत की जी-20 अध्यक्षता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सकारात्मक रूप से देखा गया है। भारत ने जी-20 के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और प्रभाव को मजबूत किया है।

भारत इस समय जी-20 के अलावा भी कई महत्वपूर्ण वैश्विक समूहों का सदस्य है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

संयुक्त राष्ट्र (UN): भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है, और यह संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थाई सदस्यता रखता है। भारत संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से वैश्विक शांति और सुरक्षा, आर्थिक विकास, और मानवाधिकारों के लिए काम करता है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO): भारत विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है, और यह वैश्विक व्यापार प्रणाली में एक प्रमुख खिलाड़ी है। भारत विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से मुक्त व्यापार और वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

जी-20: भारत जी-20 का सदस्य है, जो दुनिया की सबसे बड़ी 20 अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। भारत जी-20 के माध्यम से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी आवाज को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

जी 77 + चीन: भारत जी-77 और चीन का सदस्य है, जो विकासशील देशों का एक समूह है। भारत जी-77 और चीन के माध्यम से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार के लिए काम करता है, और यह विकासशील देशों के लिए न्यायसंगत और समान अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए काम करता है।

BRICS: भारत BRICS का सदस्य है, जो ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का एक समूह है। BRICS एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक समूह है, और भारत BRICS के माध्यम से वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यवस्था में सुधार करने के लिए काम करता है। इसमें अगले वर्ष से कुल 11 सदस्य हो जाएँगे।

आसियान: भारत आसियान का एक सहयोगी सदस्य है, जो दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों का एक संगठन है। भारत आसियान के माध्यम से दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

SAARC: भारत SAARC का सदस्य है, जो दक्षिण एशिया के 8 देशों का एक संगठन है। भारत SAARC के माध्यम से दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

IBSA: भारत IBSA का सदस्य है, जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका का एक समूह है। IBSA एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक समूह है, और भारत IBSA के माध्यम से वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यवस्था में सुधार करने के लिए काम करता है।

भारत इन सभी समूहों के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और प्रभाव को मजबूत करने के लिए काम करता है। भारत वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘अब साहसी बन कर सिर उठा रहे हिन्दू, उन्हें ज़िंदा जला दो’: ISIS ने भारतीय मुस्लिमों को ‘हिन्दुओं के रक्तपात’ के लिए उकसाया, कहा – मूर्तियाँ तोड़ने वाला युग वापस लाओ

आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (ISIS) ने अपनी पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ का 28वाँ एडिशन जारी किया है। इस एडिशन का कवर पेज हरियाणा की नूहं हिंसा और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे को लेकर बनाया है।

केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर लिखे भड़काऊ लेखों में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इन जहर बुझे लेखों में भारत के मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ने को कहा गया है। आतंकी समूह ने इसमें हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को भी खुली धमकी दी है। ये मैगजीन आईएसआईएस प्रकाशन फ्रंट ‘अल-अज़ैम फाउंडेशन’ पब्लिश करता है।

मैग्जीन के कवर पेज पर टाइटल में लिखा है रक्तपात का जिहाद इस धरती पर हिंदुओं का आखिरी इलाज है। इससे साफ है कि आतंकी संगठन हिंदुओं के खिलाफ लड़ाई में उनके उनका ज़्यादा से ज़्यादा खून बहाने की मंशा रखता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएस ने अपनी प्रोपेगैंडा मैगजीन के नए एडिशन में ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) के बारे में भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ अच्छा खासा-जहर उगला गया है।

NIA के रडार पर है ‘वॉयस ऑफ खुरासान’

गौरतलब है कि टेलीग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में प्रसारित होने वाली आईएस मैगजीन की सामग्री लगातार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) के रडार पर है। इस्लामिक स्टेट मैगजीन के कवर पेज पर उस बुलडोजर की तस्वीर है जिसका इस्तेमाल 31 जुलाई को हरियाणा के नूहं जिले में हुई हिंसा के बाद आरोपितों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए किया गया था।

रिपोर्टों में कहा गया है कि आईएस की प्रोपेगैंडा मैगजीन के लेख में मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि इन दोनों गौरक्षकों ने एक भड़काऊ वीडियो बनाया था। इसके बाद मुस्लिमों पर कथित तौर पर हमला किया गया।

आईएस मैग्जीन ने आगे आरोप लगाया कि हिंसा के बाद मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त कर दिया गया और जला दिया गया और इस कदम को हरियाणा के गृह मंत्री का समर्थन मिला। इसी वजह से मैगजीन ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज से बदला लेने का भी इशारा किया और उन्हें धमकी भी दी।

आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा

ऑपइंडिया ने आतंकी संगठन आईएस की मैग्जीन के नए अंक की पड़ताल में पाया कि ‘मूर्तियों को तोड़ने के स्वर्ण युग को वापस लाओ’ चैप्टर में आईएसआईएस ने हिंदुओं को कायर कहा है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि हिंदू मुस्लिम आक्रमणकारियों से छुटकारा पाने के काबिल नहीं थे। भारत में अंग्रेजों के आने के बाद ही मुस्लिम शासन की चमक फीकी हुई।

इसमें आगे कहा गया है, “अपमान बहुदेववादियों का आखिरी किस्मत है।” इसमें दावा किया गया है कि जो लोग कई देवताओं की पूजा करते हैं वे अपमानित होने के पात्र हैं। आक्रमणकारियों के हाथों सोमनाथ मंदिर और अन्य हिंदू मंदिरों के साथ जो हुआ उस पर फक्र जताया है। इसके साथ ही मैगजीन के लेख में दावा किया गया कि अंग्रेज केवल ‘कुछ धोखेबाजों मुस्लिमों के विश्वासघात की वजह’ से इस्लामी शासन को दबाने में कामयाब रहे।

हिंदुओं पर मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार का आरोप

इस मैगजीन के लेख में भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर ही उगला गया है। भारत और हिंदुओं पर ‘मासूम मुस्लिमों पर अत्याचार’ करने का आरोप लगाया गया। मैगजीन के प्रचारक लेखक ने ज्ञानवापी में विवादित ढाँचे को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले हिंदुओं पर निशाना साधा है।

इसमें यह बताया गया कि अयोध्या में विवादित ढाँचे पर कब्ज़ा करने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई। लेख में कहा गया है, “हिंदू बहुदेववादी साँप अब साहसी बन रहे हैं और भारत और पूरी दुनिया में इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ अपना सिर उठा रहे हैं।”

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचे के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को ‘हिंदू तवागीत (Tawagheet) का सुप्रीम कोर्ट’ कहा। इस्लाम के मुताबिक, तवागीत एक ऐसी चीज़ है जिसकी पूजा खुद के लिए की जाती है। लेख में हिंदुओं के खिलाफ ‘जिहाद’ का भी ऐलान किया गया। इसमें लिखा था, “भारत में मुस्लिमों के लिए इस दुर्दशा और अपमान से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है जब तक कि वे इन कायर गाय-पूजक हिंदू गंदगी के खिलाफ जिहाद के ऐलान का जवाब नहीं देते।”

आईएसआईएस ने पुलिस को ‘कुत्ते’ कहा

अगले चैप्टर ‘रक्तपात की इबादत: इस सांसारिक जीवन में हिंदुओं का आखिरी इलाज’ में आईएसआईएस ने हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को निशाना बनाया और उन पर नूहं में ‘तलवारों, चाकुओं और बंदूकों से लैस’ हिंदू जुलूस को “मुस्लिम बहुल क्षेत्रों” से गुजरने की मंजूरी देने का आरोप लगाया।

उसने मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी पर जुलूस से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए हिंसा भड़काने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि पुलिस ने साफ कहा है कि हिंसा भड़काने में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं है। आईएसआईएस ने हिंदुओं पर एक इमाम की हत्या करने और मुस्लिमों के 500 घरों को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए उनके के घरों में घुसने और उन्हें गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों को ‘कुत्ते’ कहा।

ISIS ने पुलिस अधिकारियों पर मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उसने भारत के सुप्रीम कोर्ट पर हिंदू यात्राओं को तथाकथित मुस्लिम क्षेत्रों से गुजरने से रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया।

वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहा

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सूअर’ कहते हुए आईएसआईएस ने हिंदुओं को मारने की धमकी दी। लेख में कहा गया है, “हम इंशाअल्लाह आपके हर अन्याय और उत्पीड़न का बदला लेंगे, और बहुत जल्द हम आपको आपकी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक के रूप में आपकी दवा का स्वाद चखने के लिए देंगे।”

हिंदुओं के खिलाफ बदला लेने का उकसाते हुए, आईएसआईएस ने भारतीय इस्लामवादियों से ‘हिंदुओं को जिंदा जलाने, उनके घरों, बाजारों और फसलों को जलाकर राख करने’ के लिए कहा। उसने आगे कहा कि ‘उन्हें उनकी गलियों में मार डालो, वाहनों से उन्हें कुचल दो, उनकी पानी की टंकियों में जहर मिला दो और उनके जुलूसों में साँप फेंक दो।’

मीर फैसल की महिमा गाई

फेक न्यूज पैडलर मीर फैसल आईएसआईएस ने खासी इज्जत दी है। उसकी तीन पोस्ट का जिक्र आंतकी संगठन ने 30 जुलाई को अपनी मैगजीन में किया है। इससे ऐसा लगता है कि इस तारीख को आईएसआईएस ने मैगेजीन बनाने के लिए सोशल मीडिया को ‘स्क्रॉल’ किया था। इसमें आतंकी संगठन ने ये भी जिक्र किया है कि मीर फैसल की पोस्ट कहाँ-कहाँ से ली जा सकती हैं।

मीर फैसल एक प्रचारक और सिलसिलेवार फर्जी खबरें बेचने वाला शख्स है। ऑपइंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में उनके झूठ को बड़े पैमाने पर खुलासा किया है। मार्च 2023 में, उसने एक लंबा थ्रेड प्रकाशित किया जिसमें दावा किया गया कि हिंदू हिंसा में शामिल थे।

थ्रेड में कुल 30 वीडियो के साथ कुल 24 ट्वीट थे, जिनमें से 21वाँ ट्वीट अब हटा दिया गया है। ऑपइंडिया ने थ्रेड के शेष ट्वीट्स में सभी झूठों का भंडाफोड़ किया, जिसे यहाँ जाँचा जा सकता है। जून 2022 में, ऑपइंडिया ने मीर फैसल की एक प्रोफ़ाइल बनाई थी, जब उसने ट्वीट किया था कि सभी गैर-मुस्लिम एक जैसे हैं, वह काफिर है।

नूहं हिंसा में क्या हुआ?

इस साल 31 जुलाई को, हरियाणा के मुस्लिम बहुल नूहं जिले में दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। भीड़ ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के जुलूस पर पथराव किया था। पुलिस के अनुसार, 31 जुलाई को दोपहर 2 बजे के आसपास लगभग 200 लोगों का जुलूस एडवर्ड चौक से नूहं शहर की ओर बढ़ने के 10 मिनट बाद हिंसा शुरू हुई।

जैसे ही समूह मुख्य सड़क से नीचे चला गया, एक बड़ी भीड़ ने उस पर पत्थरों से हमला किया गया। हिंदू पक्ष शुरू में पीछे हट गया, लेकिन फिर से संगठित हो गया और इस्लामी भीड़ का सामना किया। खबरों के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष ने जुलूस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी जिसके बाद हिंदू पक्ष के लोग भड़क गए।

नीरज और गुरसेवक नाम के दो होम गार्डों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए और दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई थी। नूंह और गुरुग्राम जिलों में भीड़ ने वीएचपी-बजरंग दल के जुलूस को रोकने की कोशिश की। लगभग दो सप्ताह बाद, 13 अगस्त को सर्व जातीय हिंदू महापंचायत ने पवित्र महीने सावन के आखिरी सोमवार, 28 अगस्त को नूहं में बृज मंडल शोभा यात्रा को फिर से शुरू करने का आह्वान किया।

हिंदू संगठन की इस शोभा यात्रा से पहले नूहं और इसके आसपास के जिले सोमवार (28 अगस्त) को किले में तब्दील हो गए। जिस स्थान पर 31 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी, वहाँ भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। हालाँकि, अधिकारियों ने सोमवार (28 अगस्त) को जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

G20 सम्मेलन से पहले चीन ने जारी किया किया मनमाना नक्शा, लद्दाख और अरुणाचल को अपना हिस्सा दिखाया: S जयशंकर बोले – बेतुके दावों से कुछ नहीं बदलता

चीन ने रविवार (28 अगस्त, 2023) को अपना नया नक्शा जारी किया। इस ‘काल्पनिक’ नक्शे में चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख (अक्साई चिन) के कुछ हिस्सों समेत ताइवान और दक्षिण चीन सागर में स्थित विवादास्पद 9-डैश लाइन (दक्षिण चीन सागर पर चीन द्वारा खींची गई 9 आभासी रेखाएँ) पर भी अपना दावा जताया है।

यह नक्शा ऐसे समय में जारी किया गया जब भारत 9 और 10 सितंबर को आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी में जुटा हुआ है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी जी-20 सम्मेलन में शामिल होने दिल्ली आ रहे हैं।

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह ‘काल्पनिक’ नक्शा शेयर किया। साथ ही लिखा है कि प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 28 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर चीन का नया ‘स्टैंडर्ड नक्शा’ लॉन्च किया। इस नक्शे को बनाने के लिए चीन और दुनिया भर के अन्य देशों की राष्ट्रीय सीमाओं का उपयोग किया गया। इसे देश के स्टैंडर्स मानचित्र के नए संस्करण के रूप में दिखाया गया है।

वहीं केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के दावे को बेतुका बताया है। उन्होंने कहा है कि किसी के कोई नक्शा जारी कर देने से कुछ भी नहीं बदलता। उन्होंने इसे चीन की पुरानी आदत बताते हुए कहा कि हमारी सरकार इसे लेकर एकदम स्पष्ट है कि हमारा हमारे क्षेत्र कौन से हैं। उन्होंने कहा कि बेतुके दावों से किसी दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता।

(फोटो साभार: X)

‘ग्लोबल टाइम्स’ द्वारा शेयर किए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन जैसे भारतीय क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन पर चीन ने अपना दावा किया था। उल्लेखनीय है कि भारत चीन से कई बार कह चुका है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।

इसके अलावा, इस नक्शे में चीन ने ताइवान को भी अपना हिस्सा बताया है। इसके अलावा 9-डैश लाइन के जरिए दक्षिण चीन सागर के एक बड़े हिस्से पर भी अपना दावा किया। इसे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान जैसे अन्य देशों ने दक्षिण चीन सागर में पहले ही अपना दावा ठोंक रखा है और चीन के इस दावे का विरोध किया है।

चीन अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन सहित भारत के कुछ हिस्सों पर लंबे समय से दावा करता रहा है। दिसंबर 2021 में विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 15 स्थानों को अपना नाम देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था, “हमने इस तरह की खबरें देखी हैं। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश राज्य में स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया है। चीन ने अप्रैल 2017 में भी ऐसे नाम देने की कोशिश की थी। अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में स्थानों को नए नाम देने से यह सच्चाई नहीं बदल जाती।”

अप्रैल 2021 में, ऑपइंडिया ने एक चीनी नागरिक के बारे में बताया था, जिसने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के ओपन-सोर्स नक्शे को चीन का पक्ष लेते हुए मनमाने तरीके से एडिट किया था। मार्च 2019 में यह सामने आया था कि चीन ने 30,000 से अधिक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नक्शों को नष्ट कर दिया था, जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया था।

उल्लेखनीय है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में कहा गया था कि दोनों देशों को सीमा तनाव को कम करने के लिए व्यापक वार्ता करनी चाहिए। लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन ने भारत के अभिन्न अंगों को लेकर दावा किया है, उससे यह कहना गलत नहीं होगा कि ड्रैगन कभी सुधर नहीं सकता।