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PM मोदी से खुश हैं हर 10 में से 8 भारतीय: अमेरिकी थिंक टैंक ‘Pew Research Center’ ने भी माना लोहा, सर्वे में खुलासा – 68% लोग मानते हैं बढ़ रहा भारत का कद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर अब वाशिंगटन स्थित अमेरिकी थिंक टैंक ने भी मुहर लगा दी है। ठीक टैंक ने 23 देशों में सर्वे कर के पाया कि अधिकतर में भारत के प्रति भी सकारात्मक रवैया है। कुल मिला आकर 46% लोगों ने कहा है कि भारत को लेकर उनकी सोच सकारात्मक है। वहीं मात्र 34% ने इसके उलट बात कही। इससे साफ़ है कि भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदल रहा है। वहीं 16% लोग ऐसे हैं जिन्होंने भारत के संबंध में कोई विचार नहीं दिया।

भारत को लेकर सबसे ज़्यादा सकारात्मक रवैया इजरायल में है, जहाँ 71% लोगों ने कहा कि वो भारत को लेकर फेवरेबल सोच रखते हैं। यहाँ तक कि केन्या (64%), नाइजीरिया (60%) और यूके (66%) में भी अधिकतर लोगों की सोच भारत को लेकर सकारात्मक है। दक्षिण कोरिया (58%), जापान (55%), ऑस्ट्रेलिया (52%) और इटली (52%) भी अधिकतर लोगों का नजरिया भारत को लेकर सकारात्मक है। केवल दक्षिण अफ्रीका ही ऐसा देश है, जहाँ भारत को लेकर ाणफेवरेबल नजरिया 50% के पार (51%) है।

वहीं भारत में लोकप्रियता के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तूती बोलती है। विदेशों की बात करें तो जापान में 45%, ऑस्ट्रेलिया में 41% और दक्षिण कोरिया में 40% लोगों ने नरेंद्र मोदी में विश्वास जताते हुए कहा है कि वो अच्छा कार्य कर रहे हैं। अब आते हैं भारत पर। यहाँ 79% लोगों ने पीएम मोदी में भरोसा जताया है, जिनमें 24% का नजरिया सकारात्मक है, वहीं 55% का अति-सकारात्मक है। वहीं राहुल गाँधी को लेकर मात्र 26% लोगों का ही रवैया अति-सकारात्मक की श्रेणी में आ पाया।

कुल मिला कर 62% लोगों का राहुल गाँधी के प्रति फेवरेबल नजरिया है। वहीं कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बात करें तो 46% लोगों का उन्हें लेकर फेवरेबल रवैया है। 34% लोगों ने राहुल गाँधी के प्रति अपने नज़रिये को नकारात्मक करार दिया है। वहीं 68% लोगों ने कहा है कि विश्व में भारत का कद बढ़ रहा है। वहीं इस रिसर्च में ये भी दावा किया गया है कि अधिकतर भारतीय वैश्विक मंच पर अमेरिका का कद बढ़ते हुए और चीन का कद घटते हुए देख रहे हैं।

छात्राओं से पूछता- तुमने अंदर क्या पहना है, ऑफिस में बुलाकर कहता- कपड़े बदलो: CM योगी से शिकायत के बाद प्रिंसिपल गिरफ्तार

गाजियाबाद के किसान आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. राजीव पांडेय के खिलाफ छात्राओं ने यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्कूल की 5 छात्राओं ने खून से लिखा खत भेजा था। इसके बाद प्रिंसिपल को 29 अगस्त 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया। हालाँकि कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है।

प्रिंसिपल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। यह स्कूल गाजियाबाद के शाहपुर के बम्हेटा गाँव में स्थित है। छात्राओं ने सीएम को लिखे पत्र में प्रिंसिपल पर छेड़छाड़ और धमकाने का आरोप लगाया था।

रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं ने 21 अगस्त को प्रिंसिपल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। छात्राओं के अनुसार बहाने से प्रिंसिपल उन्हें अपने ऑफिस में बुलाता था और छेड़छाड़ करता था।

छात्राओं के अनुसार प्रिंसिपल कक्षाओं में आकर लड़कियों के बीच बैठ जाता था। उनसे उनके कपड़ों को लेकर बात करता था। पूछता था कि उन्होंने अंदर क्या पहन रखा है। इधर-उधर गलत तरीके से छूता था। एक छात्रा की माँ के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया है कि 15 अगस्त को प्रिंसिपल ने अपने ऑफिस में छात्रा को कपड़े बदलने को कहा था।

इसको लेकर जब छात्राओं ने परिजनों ने स्कूल में हंगामा किया तो प्रिंसिपल से उनकी झड़प हो गई। इस मामले में दोनों तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई है। स्थानीय पार्षद परमोश यादव के अनुसार प्रिंसिपल के खिलाफ 50 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। हालाँकि स्कूल मैनेजमेंट ने कहा कि प्रिंसिपल ने दबाव में आकर एडमिशन देने से मन कर दिया था, इसलिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।

पुलिस उपायुक्त (ग्रामीण) विवेक चंद यादव ने बताया कि छात्राओं के माता-पिता की शिकायत के आधार पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का उपयोग), 507 (धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘पगड़ी-वर्दी में पंजाब के पुलिसकर्मी ने करवाया धर्मांतरण’: BJP नेता ने शेयर किया Video, सफाई- लड़खड़ा रहा था बुजुर्ग, इसलिए प्रार्थना की

पंजाब के एक पुलिसकर्मी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भाजपा नेता आरपी सिंह ने यह वीडियो शेयर कर पुलिसकर्मी पर गुरुद्वारे में ईसाई मजहब का प्रचार करने का आरोप लगाया है। साथ ही धर्मांतरण की गतिविधियों पर चुप्पी साधने को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी और प्रकाश सिंह बादल पर भी निशाना साधा है।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ऐसा लगता है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) के अध्यक्ष किसी स्वप्न में खोए रहते हैं। पंजाब पुलिस का एक अधिकारी वर्दी और पगड़ी पहनकर श्री दरबार साहिब अमृतसर के परिसर में ईसाई धर्म का प्रचार कर रहा है। यह व्यक्ति अमृतसर के माहल गाँव में एक चर्च का पादरी बताया जा रहा है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मेरा सवाल यह है कि SGOC ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ बोलने से क्यों डरता है। क्या यह सुखबीर सिंह बादल के दबाव के चलते हो रहा है। चूँकि, ईसाई पंजाब की आबादी के 20% हैं और वे चुनावी गणित में मायने रखते हैं। इसलिए क्या हम यह मानें कि सब कुछ पहले से तय हो रखा है और ईसाइयों द्वारा हमारे गुरुद्वारों पर कब्जा करने तक का इंतजार करें?”

वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी को एक बुजुर्ग के पेट को पकड़े और फिर कुछ बोलकर उसे खींचता हुआ दिखाई दे रहा है। फिर वह बुजुर्ग के सिर पर भी हाथ मार कुछ कहता है। इसके बाद बुजुर्ग पुलिसकर्मी के पैर छूकर आगे बढ़ जाता है। वहीं, वीडियो में आगे बढ़ने पर पुलिसकर्मी दो लड़कों को अपने बगल में खड़ा कर सिर हिलाता हुआ कुछ कहता नजर आ रहा है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद पुलिसकर्मी ने माफी माँगते हुए एक वीडियो जारी किया है। उसने कहा है कि उक्त वीडियो धर्म सिंह मार्केट का है। बुजुर्ग की तबियत ठीक नहीं थी। इसलिए उसने उसके लिए प्रार्थना की थी। उसने किसी भी तरह से धर्मांतरण की कोशिश नहीं की। सिखों को अपना भाई बताते हुए उसने कहा है कि यदि उसकी प्रार्थना से किसी की भावना को ठेस पहुँची है तो वह माफी माँगता है।

12 साल के लिए जेल जा सकता है पाकिस्तान का पूर्व क्रिकेटर खालिद लतीफ, नूपुर शर्मा समर्थक डच सांसद की हत्या पर ₹19 लाख देने का किया था ऐलान

डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) की हत्या करने के लिए उकसाने वाले पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खालिद लतीफ (Khalid Latif) को 12 साल की सजा देने की माँग हो रही है। वाइल्डर्स ने पैगंबर मुहम्मद पर कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने का ऐलान किया था। इसके बाद लतीफ ने वाइल्डर्स की हत्या करने वालों को पैसों का ऑफर दिया था। इस मामले में दो सप्ताह बाद सजा सुनाई जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गीर्ट वाइल्डर्स के वकीलों ने कोर्ट में खालिद का नाम लिए बिना कहा है कि साल 2018 में एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर को वाइल्डर्स की हत्या के लिए पैसे देने का वादा करते हुए देखा गया था। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में खालिद लतीफ ने कहा था कि कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने वाले व्यक्ति की हत्या करने वाले को वह 30 लाख पाकिस्तानी रुपए (€21,000 या लगभग 19 लाख भारतीय रुपया) देगा।

सरकारी वकीलों ने अपने लिखित बयान में कहा है कि वह वीडियो बेहद घातक था, क्योंकि इसे उस समय जारी किया था जब नीदरलैंड के सांसद गीर्ट वाइल्डर्स के खिलाफ लोगों में गुस्सा और नफरत थी। वहीं, वाइल्डर्स ने कहा है कि इस्लामवादियों द्वारा दी जा रही धमकियों के चलते आम लोगों की तरह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि जो चीजें हर इंसान हर दिन करता है, उसके बारे में वह सोच भी नहीं सकते। न तो वह खुली हवा में आजादी से घूम सकते हैं और न ही अकेले कहीं जा सकते। हालाँकि उन्हें जो सुरक्षा प्रदान की जा रही है, उसके लिए वह आभारी हैं। बता दें कि इस्लाम की आलोचना करने के बाद इस्लामवादियों द्वारा मिल रहीं धमकियों के चलते डच सरकार द्वारा वाइल्डर्स को कड़ी सुरक्षा दी गई है। वह बीते कई वर्षों से 24 घण्टे सुरक्षा घेरे में ही रहते हैं।

कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच वाइल्डर्स ने यह भी कहा है कि यदि आरोपित के खिलाफ दोष सिद्ध हो जाता है तो इससे धमकी देने वाले अन्य सभी लोगों को एक शक्तिशाली मैसेज जाएगा। यही नहीं वाइल्डर्स ने खालिद लतीफ पर टिप्पणी करते हुए कहा, “जब तक मैं जीवित हूँ और साँस ले रहा हूँ तुम मुझे नहीं रोक पाओगे। मुझे मारने के लिए पैसे ऑफर करने से मैं चुप नहीं हो सकता।”

गीर्ट वाइल्डर्स ने साल 2018 में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर कार्टून प्रतियोगिता आयोजित करने का ऐलान किया था। इसको लेकर उन्होंने कोर्ट में कहा, “मैंने उस कार्टून प्रतियोगिता के आयोजन का ऐलान इसलिए किया था, क्योंकि साल 2015 में मैं अमेरिका में टेक्सास के गारलैंड शहर गया था। वहाँ मुझे एक कार्टून प्रतियोगिता के विजेता को पुरस्कार देना था, लेकिन उस कार्यक्रम के दौरान आतंकी हमला हो गया। अमेरिकी पुलिस ने दोनों आतंकियों को मौके पर ही मार गिराया था। लेकिन, यह सब मेरे साथ पहली बार हुआ था।”


उन्होंने आगे कहा है, “यही कारण है कि मैं बताना चाहता था कि चित्र बनाने की अनुमति किसी को भी है और हमें कभी भी ऐसे लोगों के सामने झुकना नहीं चाहिए जो हिंसा, धमकी, हत्या और आतंक का रास्ता अपना लेते हैं।” वाइल्डर्स का कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। वह लंबे समय से तालिबान, अल-कायदा और आईएसआईएस की ‘लिस्ट’ में हैं।

वकीलों का कहना है कि वे साल 2018 से पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर खालिद लतीफ से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। खालिद के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान सरकार से भी मदद माँगी है, लेकिन वहाँ से कभी कोई जवाब नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि डच कोर्ट द्वारा खालिद लतीफ को गिरफ्तार करने के लिए उसके खिलाफ इंटरनेशनल वारंट जारी किया जा चुका है। हालाँकि, अपने ऊपर लगे आरोपों पर खालिद लतीफ का कहना है कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि जून 2018 में वाइल्डर्स ने अपनी पार्टी के संसदीय कार्यालयों में आयोजित होने वाली ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ की भी घोषणा की थी। बाद में, अगस्त में आतंकवादी हिंसा की धमकियों के बहुत फ़ैल जाने के बाद उन्हें इस कार्यक्रम को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनकी हत्या के लिए कई इस्लामी नेताओं ने फतवा जारी किया था।

कौन है खालिद लतीफ

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर खालिद लतीफ को साल 2017 में दुबई में हुए पाकिस्तान सुपर लीग मैच में स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया था। इसके बाद उस पर 5 साल का बैन लगाया गया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी खालिद लतीफ को दोषी पाते हुए उस पर दस लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया था। साल 2022 में खालिद लतीफ ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली थी। साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से लिखित माफी माँगी थी।

गीर्ट वाइल्डर्स और इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ उनका रुख

गीर्ट वाइल्डर्स लंबे समय से अपने देश में इस्लामी कट्टरवाद और कट्टरपंथियों के खिलाफ मुखर रहे हैं। एक सांसद के रूप में वह मास माइग्रेशन के भी विरोधी रहे हैं। संसद के अंदर कहा था कि बड़े पैमाने पर प्रवास (माइग्रेशन) के माध्यम से सरकार “इस्लाम नामक एक मॉन्स्टर को देश में निमंत्रण दे रही है”। उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का भी समर्थन किया था।

वहीं, एक साक्षात्कार में वाइल्डर्स ने कहा था, “मैं मुस्लिमों से नफरत नहीं करता, मैं इस्लाम से नफरत करता हूँ।” उन्होंने उसी साक्षात्कार में कहा था, “इस्लाम कोई धर्म नहीं है। यह एक विचारधारा है, एक मंद संस्कृति की विचारधारा है।”

वहीं 2019 में, जुनैद नाम के एक पाकिस्तानी मुस्लिम व्यक्ति को वाइल्डर्स के खिलाफ हत्या की साजिश के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। जुनैद ने एक फेसबुक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि वह वाइल्डर्स को जहन्नुम में भेजना चाहता है।

बता दें कि 58 वर्षीय डच सांसद वाइल्डर्स नीदरलैंड की संसद में पार्टी फॉर फ्रीडम के अध्यक्ष हैं। वह एक दक्षिणपंथी नेता हैं, जो विशेष रूप से मुस्लिम देशों से डच सरकार की आव्रजन नीतियों का मुखर रूप से विरोध करते रहे हैं, और उन्होंने यहाँ तक ​​​​कहा है कि वह चाहते हैं कि उनका देश यूरोपीय संघ को छोड़ दे। उन्होंने यूरोपीय संघ की संसद में एक संसदीय समूह बनाने के लिए फ्रांस के मरीन ले पेन जैसे अन्य रूढ़िवादी यूरोपीय नेताओं के साथ काम किया है, जिसमें अब 9 यूरोपीय संघ के देशों की पार्टियाँ हैं।

गीर्ट वाइल्डर्स ने फितना (Fitna) नाम की एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई है। 17 मिनट की इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कुरान अपने सभी अनुयायियों को घृणा करना सिखाता है। आतंकवाद, मूर्ति पूजा-विरोधी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, काफिरों के खिलाफ हिंसा, समलैंगिकों से नफरत आदि को इस फिल्म में मीडिया क्लिपिंग्स के जरिए दिखाया गया है।

‘नूहं में जहाँ-जहाँ गए मम्मन खान, वहाँ-वहाँ हुई हिंसा’: हरियाणा के गृह मंत्री का खुलासा – दंगा प्रभावित इलाकों में लोगों से लाइव कॉन्टैक्ट में थे कॉन्ग्रेस MLA

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने खुलासा किया है कि नूहं हिंसा के गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में बताया है कि वो फिरोजपुर झिरका से कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान से संपर्क में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में तोड़फोड़ की है, वो जहाँ-जहाँ गए वहाँ-वहाँ हिंसा हुई है। अनिल विज ने बताया कि पाकिस्तान से वीडियो वायरल कर के हिंसा भड़काई गई, इस एंगल की भी जाँच चल रही है। मम्मन खान को बुधवार (30 अगस्त, 2023) को पूछताछ के लिए पुलिस ने बुलाया था।

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि हिंसा से पहले मम्मन खान ने 29, 30 और 31 जुलाई को नूहं का दौरा किया था। उन्होंने ये भी बताया कि मम्मन खान दंगा प्रभावित इलाकों में लोगों के साथ लाइव कॉन्टैक्ट में थे। बता दें कि पेशे से सिविल इंजीनियर मम्मन खान नूहं के 3 कॉन्ग्रेस विधायकों में से एक हैं। अनिल विज ने बताया कि घटना का मास्टरमाइंड कौन है, इसका खुलासा जाँच के बाद होगा। साइबर थाने के रिकॉर्ड को भी नुकसान पहुँचाया गया है। बता दें कि नूहं में 31 जुलाई को हिंसा हुई थी।

यात्रा में हजारों की संख्या में हिन्दू श्रद्धालु पहुँचे थे, नूहं में मंदिर से आगे बढ़ते ही उन पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। नल्हड़ मंदिर को घेर कर गोलीबारी की गई। बड़ी संख्या में लोग मंदिर में किसी तरह जान बचा कर छिपे रहे, जिन्हें बाद में पुलिस-प्रशासन ने बाहर निकाला। हिंसा में 6 हिन्दुओं की मौत भी हो गई। इस पूरे प्रकरण में 130 से भी अधिक FIR दर्ज किए गए हैं। 500 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। अनिल विज ने कहा है कि गोरक्षक मोनू मानेसर से भी पूछताछ होगी, उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

अनिल विज का कहना है कि हिंसा से पहले मम्मन खान के नूहं दौरे के सबूत भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि अब तक का निष्कर्ष यही निकला है कि ये सब कॉन्ग्रेस पार्टी का किया-धरा है। अनिल विज ने कहा कि कई एंगल से जाँच जारी है और ये जनता के सामने लाया जाएगा कि इसे मास्टरमाइंड कौन लोग हैं। पाकिस्तान से तस्वीरें-वीडियो डाल कर हिंसा भड़काए जाने के संबंध में जाँच एजेंसियों से समन्वय बनाया जाएगा। बता दें कि हरियाणा में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

‘नज़रुल इस्लाम ने लिखी महाभारत’: ‘चाँद पर इंदिरा गाँधी’ और ‘अंतरिक्ष में राकेश रोशन’ के बाद CM ममता बनर्जी का नया शिगूफा, BJP बोली – जानबूझकर विकृत कर रहीं हिन्दू धर्म के तथ्य

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने अनोखे और अजीबोगरीब बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं। अभी चंद्रयान-3 को लेकर उनके दिए अटपटे बयान को चंद दिन ही गुजरे हैं कि अब फिर से उन्होंने एक अजीबोगरीब बयान दे डाला है।

इस बार तृणमूल कॉन्ग्रेस की स्टूडेंड विंग (TMCP) के स्थापना दिवस पर सोमवार (28 अगस्त, 2023) उन्होंने विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम को महाभारत का रचियता बता डाला है। उनके इस बयान को लेकर भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास को विकृत करना सीएम बनर्जी की पुरानी आदत रही है।

‘हमारे महापुरुषों को पढ़िए’

बांग्ला साहित्य के कवि काजी नजरुल इस्लाम को बंगाल के विद्रोही कवि के तौर पर जाना जाता है। उनके औपनिवेशिक शासन के खिलाफ और सांप्रदायिक सौहार्द पर लिखे गीत और कविताएँ खासे मशहूर हैं। TMCP के स्थापना दिवस पर सीएम ममता बनर्जी ने इन्हीं नज़रुल इस्लाम को महाभारत का रचियता बता दिया।

इस दौरान सीएम बनर्जी ने कहा कि केवल पढ़ाई जिंदगी के सही मायने नहीं सिखा सकती है, इसके लिए बड़ा दिल होना चाहिए। उन्होंने का कि हमें इसके लिए अपने महापुरुषों को लिखे को पढ़ना और समझना चाहिए। उन्होंने लोगों को रविंद्रनाथ टैगोर, नजरुल और विवेकानंद को पढ़ने की सलाह दे डाली। इसी दौरान उन्होंने कह दिया कि काजी नजरुल इस्लाम ने महाभारत लिखी थी।

ये पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने बयान में ऐतिहासिक चीजों के बारे में गलत जानकारी दी है। इससे पहले चंद्रयान-3 मिशन के कामयाब होने पर भी वो ऐसा ही अटपटा बयान दे चुकी हैं। इसके लिए उन्हें खासा ट्रोल भी किया गया।

कहा था – इंदिरा गाँधी चाँद पर गईं

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 23 अगस्त को चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की कामयाबी के बाद भी सीएम बनर्जी ने ऐसा ही बयान दिया था। दरअसल, ममता बनर्जी ने राकेश शर्मा की जगह बॉलीवुड के डॉयरेक्टर राकेश रोशन को भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री बता डाला था।

उन्होंने ये भी कहा था कि इंदिरा गाँधी चाँद पर गई थीं और उन्होंने राकेश रोशन से पूछा था कि भारत वहाँ से कैसा दिखता है। यहीं नहीं उन्होंने सोयुज टी-11 को चंद्रयान कहा था, जबकि ये एक अंतरिक्ष कार्यक्रम था। तब उन्हें नेटिजन्स ने ये कहकर ट्रोल किया था कि कहीं उन्होंने चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण देखने की जगह राकेश रोशन की फिल्म ‘कोई मिल गया’ तो नहीं देख ली।

क्या है सीएम ममता बनर्जी का इरादा?

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इस तरह के अटपटे और गलत बयानों पर पता नहीं क्या साबित करना चाहती है। विपक्षी दलों के महागठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA)’ की मुंबई में गुरुवार 31 अगस्त से तीसरी बैठक शुरू हो रही। ये 1 सितंबर तक चलेगी। इसमें 2024 लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों में पीएम पद की उम्मीदवारी पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में सीएम बनर्जी की कहीं ये सभी का ध्यान खींचने की कोशिश तो नहीं की?

सीएम बनर्जी पर बीजेपी का वार

माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर बीजेपी एमएलए और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इतिहास को विकृत करना ममता बनर्जी की पुरानी आदत रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के ऐतिहासिक घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करना सार्वजनिक जानकारी का विषय है।

उन्होंने कहा कि यह आम तौर पर लोगों को हँसने का मौका देता है, कोई भी नाराज नहीं दिखता क्योंकि हर कोई जानता है कि सीएम का सामान्य ज्ञान वास्तव में खराब है, लेकिन हाल ही में उनमें हिंदू धर्म से संबंधित तथ्यों को विकृत करने की प्रवृत्ति विकसित हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि 4 जुलाई, 2023 को उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू पर टिप्पणी की कि उन्होंने या उनकी सरकार ने तारकेश्वर, कालीघाट, दक्षिणेश्वर और अन्य हिंदू तीर्थ स्थलों जैसे पवित्र मंदिरों का निर्माण किया है। 28 अगस्त, 2023 को अपने स्थापना दिवस के अवसर पर टीएमसीपी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे महान महाकाव्य महाभारत काजी नजरुल इस्लाम ने लिखा था।

उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि वह बहुत अच्छी तरह से जानती है कि महान ऋषि महर्षि वेदव्यास महाभारत के रचयिता हैं, लेकिन उन्होंने जानबूझकर कहा कि महाभारत के रचयिता काजी नजरुल इस्लाम हैं। ऐसा लगता है कि वह हमारे महान धर्म के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करके संतुष्टि की विकृत भावना महसूस करती है।”

बिहार में रक्षाबंधन और छठ-दीपावली सहित कई छुट्टियाँ रद्द: BJP बोली – अब शरिया लागू करेगी चाचा-भतीजे की सरकार

बिहार सरकार ने राज्य के स्कूलों में रक्षाबंधन समेत 12 छुट्टियों को रद्द करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले का शिक्षकों और भाजपा ने विरोध जताया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आदेश के मुताबिक, छात्र-शिक्षकों को रक्षाबंधन, तीज, जिउतिया, गुरु नानक जयंती में भी छुट्टी नहीं मिलेगी। वहीं, दुर्गा पूजा, छठ, दीपावली जैसे त्योहारों में दिनों की कटौती की गई है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने छुट्टियों को रद्द करने का कारण बताया है कि समय समय पर परीक्षा, त्योहार, चुनाव की वजह से पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों को रद्द करने का आदेश जारी किया गया है।

हिंदुओं को आहत करने से नहीं चूकती चाचा-भतीजे की सरकार

बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “बिहार की यह घमंडिया सरकार लगातार तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। चाचा-भतीजे की सरकार हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने से बाज नहीं आती है। बिहार में अब क्या हिन्दू अपने धार्मिक त्यौहार भी नहीं मना सकते हैं? दीपावली, दुर्गा पूजा के अलावा महापर्व छठ की छुट्टियों में भी कटौती कर दी गई है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है। तुष्टिकरण की राजनीति के प्रणेताओं को बिहार की जनता 2024 और 2025 में करारा जवाब देगी।”

हो सकता है- “बिहार में शरिया लागू कर दिया जाए”

इधर शिक्षा विभाग के आदेश के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी बिहार सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा की छुट्टियाँ रद्द की गई हैं। कल संभव है कि बिहार में शरिया लागू कर दी जाए और हिंदू त्योहार मनाने पर रोक लग जाए।”

शिक्षा विभाग के फरमान के बाद एक बार फिर से बिहार के शिक्षकों का आक्रोश भड़क उठा है। उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। अभी 10 दिन पहले ही उन्हें मिड-डे मील के बोरों को बेचने का काम भी दिया गया था। मिड-डे मील योजना विभाग के निदेशक मिथिलेश मिश्रा ने कहा था कि टीचर इन बोरों को कम से कम 20 में बेचें। दरअसल, मिड-डे मील की सामग्री इन्हीं बोरों में आती है।

शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

शिक्षक नेता आनंद कौशल सिंह और राजू सिंह ने सरकार को शिक्षक और हिंदू विरोधी बताते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि केके पाठक का फरमान भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है, शिक्षक इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा इसको लेकर जल्द ही शिक्षक संघ की आपात बैठक बुलाकर राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य भर के स्कूलों में तालाबंदी कर शिक्षा व्यवस्था को ठप किया जाएगा।

सरकार ने इन छुट्टियों को किया है रद्द

1- रक्षाबंधन- 30 अगस्त
2- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- 07 सितंबर
3- हरितालिका तीज- 18, 19 सितंबर
4- जीवित पुत्रिका व्रत (जीउतिया)- 06 अक्टूबर
5- दुर्गा पूजा में 3 दिन की छुट्टी कम
6- दीपावली से छठ पूजा 5 दिन की छुट्टी कम
7- गुरुनानक जयंती/कार्तिक पूर्णिमा- 27 नवंबर

वहीं, सरकार ने 8 सरकारी छुट्टियाँ रखी हैं, जिनमें

1- चेहल्लुम- 06 सितंबर
2- अनंत चतुर्दशी/हजरत मोहम्मद का जन्म दिवस- 28 सितंबर
3- महात्मा गाँधी जयंती- 02 अक्टूबर 4- दुर्गा पूजा- 22-24 अक्टूबर
5- दीपावली- 12 नवंबर
6- चित्रगुप्त पूजा/भैया दूज- 15 नवंबर
7- छठ पूजा- 19-20 नवंबर
8- क्रिसमस डे- 25 दिसंबर

बता दें कि बिहार में छठ पूजा को महापर्व के तौर पर मनाया जाता है। इसकी छुट्टियों में कटौती की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए जा रहे हैं। पहले की तरह ही छुट्टी देने की माँग की जा रही है। दरअसल, बिहार में टीचरों को कुल 23 छुट्टियाँ साल में दी जाती थीं। अब उन्हें सिर्फ 11 छुटियाँ मिलेंगी।

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के फैसले पर आपकी क्या राय है, जरूर हमें बताएँ।

रवीश कुमार की दिक्कत बोर्ड पर ‘जय श्रीराम’ लिखना नहीं, लिखने वाले का हिंदू होना है: ‘भौं-भौं कुमार’ के लिए मुजफ्फरनगर में शिक्षिका तो कठुआ में बच्चा दोषी

रवीश कुमार को भले ही NDTV से निकले 8 महीने हो गए हों, लेकिन उन्होंने अब YouTube को प्रोपेगंडा का नया अड्डा बना लिया है, जहाँ वो लाखों तक तक भ्रामक सूचनाएँ न सिर्फ पहुँचा रहे हैं, बल्कि उन्हें लेकर एक एजेंडे के तहत टिप्पणियाँ कर के लोगों को भड़का भी रहे हैं। अब उन्होंने मुज़फरनगर में वायरल हुए एक स्कूल के वीडियो को लेकर इसी तरह का कुछ किया है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में ‘जय श्री राम’ कहने पर मुस्लिम शिक्षक द्वारा हिन्दू बच्चे को पीटे जाने पर भी चर्चा की, लेकिन सारा दोष बच्चे पर ही मढ़ दिया।

रवीश कुमार कहते हैं कि ‘लोगों ने इस घटना की निंदा की है’, लेकिन उनसे सवाल होना चाहिए कि किसने की है? क्या मोहम्मद ज़ुबैर ने इस घटना की निंदा की है, जिसने मुज़फ्फरनगर वाले वीडियो को लेकर दिन-रात एक कर दिया था? उस वीडियो पर तुरंत बयान जारी करने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान दिया है? क्या उस शिक्षक के विरुद्ध ट्विटर ट्रेंड चलाया गया, जैसा तृप्ता त्यागी के खिलाफ किया गया था। क्या अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी और पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसों ने एक के बाद एक ट्वीट किए, जैसा उन्होंने मुज़फ्फरनगर की घटना को लेकर किया था?

इसीलिए, ‘लोगों’ ने निंदा की, लेकिन उन ‘लोगों’ में रवीश कुमार के गिरोह के साथी नहीं आते। रवीश कुमार जम्मू कश्मीर के कठुआ स्थित स्कूल की घटना को लेकर कहते हैं कि ‘अगर’ धर्म के आधार पर पीटा गया है तो सज़ा उस प्रावधान के अंतर्गत भी मिलनी चाहिए। ध्यान दीजिए, तृप्ता त्यागी पर सुप्रीम कोर्ट बन कर फैसले पर फैसले सुनाने वाले ये गिरोह ‘जय श्री राम’ को लेकर एक मुस्लिम शिक्षक द्वारा छात्र को पीटे जाने पर अगर-मगर लगा कर ऐसे बात करता है जैसे कुछ पता ही नहीं हो।

कठुआ की घटना पर ‘ज़्यादा जानकारी नहीं’: रवीश कुमार

इस घटना में सिर्फ शिक्षक फारूक अहमद ही शामिल नहीं है, बल्कि स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद हाफिज ने भी उसका साथ दिया है। दोनों को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना में न सिर्फ छात्र को घसीटा गया, बल्कि उसकी जम कर पिटाई की गई। मुज़फ्फरनगर वाली घटना में तो बच्चों ने बच्चे को मारा था, यहाँ 2 वयस्क शिक्षकों ने मिल कर इस घटना को अंजाम दिया है। क्या ‘जय श्री राम’ लिखने पर मुस्लिम शिक्षकों द्वारा पिटाई किए जाने के बाद भी कोई शक बचता है, क्या इसे मजहबी घृणा के आधार पर अंजाम नहीं दिया गया, फिर रवीश कुमार अगर-मगर क्यों लगा रहे?

रवीश कुमार कह रहे हैं कि इस घटना के संबंध में और ज़्यादा जानकारी नहीं है, न ही वो जुटा सकते हैं। और ज़्यादा कितनी जानकारी चाहिए? क्या सिर्फ उसे ही सूचना या जानकारी का तमगा मिलेगा, जो मोहम्मद ज़ुबैर निकाल कर लाया हो? मोहम्मद ज़ुबैर के एक ट्वीट के बाद, भले ही वो फेक ही क्यों न हो, रवीश जैसों के लिए ‘और जानकारी’ की कोई ज़रूरत ही नहीं बचती, जबकि ‘जय श्री राम’ कहने पर हिन्दू बच्चे को मुस्लिम शिक्षकों द्वारा पीटे जाने पर रवीश ‘और जानकारी’ की तलाश में हैं, तब तक रहेंगे जब तक दोनों शिक्षकों को निर्दोष न साबित कर सकें।

और तो छोड़िए, रवीश कुमार को इस बात से भी दिक्कत है कि हिन्दुओं ने अपने समाज के बच्चे को मजहबी घृणा के तहत पीट-पीट कर अस्पताल पहुँचा देने की घटना के खिलाफ प्रदर्शन क्यों किया। उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है कि जिस स्कूल का प्रधानाध्यापक हिन्दू धर्म के प्रति ऐसी घृणा रखता हो, एक और शिक्षक यही भावना रखता हो, इन्होंने कितने बच्चों को अपना शिकार बनाया होगा। कश्मीर में ऐसे कितने शिक्षक होंगे। हिन्दू बच्चों को इनसे कितना खतरा होगा। लेकिन नहीं, रवीश कुमार को खतरा उनसे है जो बच्चों के साथ क्रूरता का विरोध कर रहे।

जबकि देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों में कई छात्र भी शामिल हैं। इसके बाद रवीश कुमार अपने प्रमुख एजेंडे की तरफ आ जाते हैं – ‘जय श्रीराम’ को अपराध साबित करने की तरफ। उनका सवाल है कि बच्चे ने स्कूल के बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ क्यों लिखा। इसका सीधा जवाब होना चाहिए – हिन्दू है, बच्चा है, लिख दिया। लेकिन, रवीश कुमार जैसों के भेजे में ये नहीं घुसेगा। आज भी आप कई हिन्दू बच्चों की कापियाँ खँगालेंगे तो पाएँगे कि वो पहले पन्ने पर ‘जय माँ सरस्वती’ लिखते हैं।

इसीलिए रवीश कुमार जी, बच्चे द्वारा ‘जय श्री राम’ लिखना अपराध नहीं है बल्कि इस पर परिवार को गर्व होना चाहिए क्योंकि वो भारत की संस्कृति को समझता है। उसे अपने हिन्दू होने का एहसास है, वो जानता है कि भगवान श्रीराम इस देश के आराध्य हैं। उस बच्चे को पता है कि वो हिन्दू है और वो इसे छिपाना नहीं चाहता – इससे बड़ी गर्व की बात क्या होगी उसके परिवार के लिए? लेकिन अफ़सोस, 2 मुस्लिम शिक्षकों को उसका हिन्दू होना रास नहीं आया और उसे अस्पताल पहुँचा दिया। इसी तरह, रवीश कुमार को भी उस बच्चे के हिन्दू होने से दिक्कत है।

‘जय श्री राम’ से दिक्कत, एक समूह के लिए तो राष्ट्रगीत भी हराम

भारत के विद्यालयों में दशकों से सरस्वती पूजा मनाई जा रही है। ‘भारत माता की जय’ भी देश के सम्मान में बोला जाता है। जो ‘वन्दे मातरम्’ हमारा राष्ट्रगीत है, मुस्लिम नेता और मौलवी कहते हैं कि ऐसा बोलना इस्लाम में हराम है क्योंकि हम अल्लाह के सिवा किसी के सामने सर नहीं झुकाते। क्या अब भारत देश में ‘जय श्री राम’, ‘जय माँ सरस्वती’, ‘भारत माता की जय’ या ‘वन्दे मातरम्’ लिखा अपराध है? बच्चे को बोर्ड पर तरह-तरह की तस्वीरें बनाते हैं, शिक्षक के न रहने पर मस्ती करते हैं, शिक्षकों का भी मजाक बनाते हैं – यही तो बच्चों का बचपना है।

उस बेचारे बच्चे को नहीं पता है कि ‘जय श्री राम’ कुछ लोगों की नज़र में अपराध है। रवीश कुमार कह रहे हैं कि ये राजनीति से आया है। धर्मग्रंथ पढ़ना तो छोड़ दीजिए, शायद उन्होंने रामानंद सागर की ‘रामायण’ भी नहीं देखी है, जिसमें हनुमान जी ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हैं। यहाँ ‘श्री’ का अर्थ माता सीता से है, वहीं ‘राम’ अयोध्या के राजा, ‘जय’ का अर्थ विजय से है। यानी, हम इस वाक्य के द्वारा भगवान श्रीराम और माँ सीता का वंदन करते हैं। इसमें क्या कोई गाली है, क्या ये नारा लगा कर किसी की हत्या की गई है?

कौन सा नारा लगा कर हत्याएँ की गई हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। फ्रांस में 2016 में 84 वर्ष के एक वृद्ध पादरी का गला रेत डाला गया ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला कर। इसके अगले साल फ्रांस में ही एक व्यक्ति ने चाकू से गोद कर 2 महिलाओं को मार डाला और ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाने लगा। फ़्रांस के पेरिस में 2018 में एक व्यक्ति ने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला कर एक को मार डाला। इस साल जर्मनी में यही लगा लगा कर 2 लोगों को गोद दिया गया। इसी साल इजरायल में एक महिला बंदूक लेकर ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाती हुई दौड़ पड़ी

बड़ी बात ये है कि रवीश कुमार या उनके गिरोह के लोगों ने कभी इस नारे को आपत्तिजनक नहीं बताया, जबकि ‘जय श्री राम’ उन्हें आपत्तिजनक लगता है, राजनीतिक लगता है। वो तृप्ता त्यागी की तुलना मजहबी घृणा से सने उन शिक्षकों से की जिन्होंने बच्चे को पीट-पीट कर बच्चे को अस्पताल पहुँचा दिया। जाँच हो जाने तक रवीश लोगों को इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं। क्या उनके गिरोह ने तृप्ता त्यागी वाले मामले में कम से कम यूपी पुलिस के बयान तक इंतजार करने की सलाह दी? नहीं, उस समय तो सब उछल कर लग पड़े इस मामले पर।

मुज़फ्फरनगर पर रवीश कुमार ने फैलाया झूठ

अब आपको बताते हैं कि मुज़फ्फरनगर में हुआ क्या था, फिर रवीश कुमार के प्रोपेगंडा को भी जानेंगे। खुब्बापुर गाँव में ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ चलाने वाली तृप्ता त्यागी ने बच्चों से एक बच्चे को पीटने के लिए कहा, क्योंकि उसने होमवर्क नहीं पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएँ बच्चों को लेकर मौके चली जाती हैं, जिनसे बच्चे बिगड़ जाते हैं। बच्चे को पीटने के लिए किसने कहा? बच्चे के ही बड़े चचेरे भाई ने, जिसने ये वीडियो भी बनाया था। असल में वही अपने भाई की शिकायत लेकर परिवार की तरफ से आया था।

तृप्ता त्यागी बुजुर्ग और दिव्यांग महिला हैं, ऐसे में उन्होंने बच्चे को खुद सज़ा न देकर अन्य बच्चों को ऐसा करने के लिए कहा। बच्चे के परिवार ने इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया है। पुलिस ने जाँच में कुछ भी सांप्रदायिक नहीं पाया। गाँव के मुस्लिमों ने भी कहा कि तृप्ता त्यागी में उन्होंने कभी भेदभाव वाली भावना नहीं देखी, कई उनसे पढ़े हुए हैं बचपन में और आज अपने बच्चों को उनसे पढ़ा रहे। सब कह रहे कम्युनल नहीं है, लेकिन रवीश कुमार चीख-चीख कर साबित करना चाह रहे हैं कि सब झूठे हैं, उन्होंने कैमरे के सामने होकर कह दिया कि हिन्दू-मुस्लिम है तो है।

रवीश कुमार को मोहम्मद ज़ुबैर से कोई दिक्कत नहीं है, जिसने कानून का उल्लंघन कर के मासूम बच्चों की पहचान सार्वजनिक की। उनका कहना है कि ‘बच्चे की पिता को समझाने की कोशिश की गई’। समझाने की नहीं तो क्या भड़काने की कोशिश की जाएगी? रवीश कुमार ने इसके बाद एक एनिमेशन के जरिए अपना प्रोपेगंडा फैलाया। उनका कहना है कि वीडियो ‘भयावह’ था और ‘देखने वालों का दिमाग सुन्न हो गया’। आजकल ये चलन हो गया है जहाँ साधारण घटनाओं को ISIS द्वारा सिर कलम करने के स्तर का बताया जाए।

रवीश कुमार को इससे भी दिक्कत है कि बच्चे का परिवार आखिर तृप्ता त्यागी के खिलाफ एक्शन न लिए जाने की माँग क्यों कर रहा है। आखिर क्यों मामला शांति से निपट गया। गिरोह को तो चैन तब आता है, जब दंगे होते हैं और उन दंगों की आग में वो अपनी रोटियाँ सेंकते हैं। इस बार वो मौका नहीं मिला, क्योंकि पूरा मामला ही झूठा निकला। अगर दंगे होते, तो उसके बाद मुस्लिम भीड़ को सही साबित करने का उपक्रम चलता। वैसे ही, जैसा नूँह की घटना को लेकर किया जा रहा है जहाँ हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर हमले हुए।

तृप्ता त्यागी का मामले में स्पष्ट हो गया है कि कोई हिन्दू-मुस्लिम वाली बात नहीं है, इसके बावजूद रवीश कुमार इसका उलटा साबित करने में लगे हुए हैं। रवीश कुमार जबरन आरोप लगाते हैं कि मुस्लिम बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है, और उन्हें ‘आतंकवादी’ कहा जा रहा है। रवीश कुमार को ऑपइंडिया की ये रिपोर्ट पढ़नी चाहिए, जिसमें जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने की कई ऐसी घटनाओं का जिक्र है जिन्हें फर्जी पाया गया। अब रवीश गिरोह ने बच्चों का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करना शुरू कर दिया है।

रवीश कुमार ने इस वीडियो में मोहम्मद ज़ुबैर का झूठा बयान भी चलाया है, जिसमें उसने कहा है कि उसके अलावा किसी के खिलाफ FIR नहीं हुई है। जबकि मुज़फ्फरनगर वाले मामले के सामने आते ही पुलिस ने मंसूरपुर थाने में FIR दर्ज की थी। वैसे रवीश ने भले कश्मीर की घटना का जिक्र कर दिया, इस दौरान वो मध्य प्रदेश की एक घटना का जिक्र करना भूल गए, जहाँ छतरपुर में केवल कड़ा पहनने पर हिन्दू बच्चे को मुस्लिम शिक्षक ने पीटा। ऐसी घटनाएँ एक ट्रेंड बन चुकी हैं, जिसकी तुलना मुज़फ्फरनगर के मामले से नहीं हो सकती।

इसीलिए नहीं हो सकती, क्योंकि जहाँ मुज़फ्फरनगर वाला मामला सांप्रदायिक नहीं है और वहाँ शिक्षिका को लेकर मुस्लिम समाज के लोग ही अच्छी बातें कह रहे हैं, वहीं कठुआ और छतरपुर जैसी कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं जहाँ तिलक या हिन्दू प्रतीकों के लिए बच्चों को पीटा गया। रवीश कुमार कठुआ की तरह इन मामलों में भी महीन बचे को ही दोषी न ठहरा दें। आज ‘जय श्री राम’ से दिक्कत है, कल को वो ये कहने लगें तो कोई आश्चर्य नहीं कि बच्चे को तिलक लगाना सिखाने वाले माता-पिता ही अपराधी हैं।

बंद मॉल से समान लेकर निकली बिहार पुलिस, लोगों ने चोर बताकर पकड़ा तो जोड़ने लगे हाथ: वीडियो वायरल, एसपी ने आरोपों को नकारा

अब आपने चोर-बदमाशों को चोरी करते और पुलिस को उन्हें खोजते हुए सुना होगा, लेकिन बिहार में लगता है कि सब कुछ उलटा हो रहा है। राजधानी पटना में पुलिस को ही एक बंद मॉल से सामान चुराते हुए पकड़ा गया है, वो भी वर्दी में। इस दौरान लोगों ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया और तलाशी ली तो उनकी गाड़ी से कई सामान बरामद हुए।

मामला पटना के मामला राजीव नगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ रामनगरी में रैपिड बाजार मॉल है। मॉल के मालिक सन्नी कुमार ने बताया कि यह मॉल बंद था। इसके बाद रात 10:30 बजे डायल 112 की पुलिस बंद मॉल से सामान लेकर निकली। पता चलने पर उनकी गाड़ी का पीछा किया। इस पर वे तेजी से भागने लगे, लेकिन किसी तरह लोगों ने रोक लिया।

कुछ देर तक सड़क पर पुलिस और लोगों के बीच बहसा-बहसी चलती रही। इस दौरान लोगों ने उनकी गाड़ी की तलाशी ली तो मॉल से निकाले गए सामान उसमें से बरामद हो गए। इस दौरान लोगों ने इसका वीडियो बना लिया और ‘पुलिस चोर है’ के नारे लगाए। घटना की सूचना मिलने पर राजीव नगर पुलिस सभी लोगों को थाने ले गई। 

जिस मकान में मॉल बना है, उसके मालिक वीरेंद्र कुमार का कहना है कि यह मॉल सन्नी कुमार का है। मॉल का किराया बाकी था। कई बार माँगने पर भी नहीं मिला और किराया बढ़कर 2.50 लाख रुपए पहुँच गया। इसके बाद सन्नी ने 2.50 लाख रुपए का चेक दिया। हालाँकि, बाद में यह चेक भी बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने मॉल में ताला लगवा दिया और कहा कि किराया देने पर ताला खुलेगा।

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मकान मालिक वीरेंद्र ने कहा कि देर रात पुलिस वाले आए और कहा कि उन्हें सामान खरीदना है। इसके बाद पुलिस वालों को जो सामान चाहिए था, उन लोगों ने ले लिया और पैसा कल देने की बात कहकर चले गए। इसी दौरान मॉल मालिक सन्नी कुमार के लोग पहुँच गए और पुलिस पर सामान चोरी का आरोप लगाने लगे। इसके बाद पुलिस भागने लगे।

उधर, मॉल मालिक सन्नी कुमार का कहना है कि किराए के विवाद में मकान मालिक ने मॉल में ताला लगवा दिया। इसके बाद रात के अंधेरे में मकान मालिक सामान निकलवा कर कहीं दूसरी जगह भेजा रहा था। इसमें इसका साथ पुलिस भी दे रही थी। इसी दौरान रात 10 बजे के बाद 2 पिकअप सामान कहीं भेजवा दिया। इस बात की जानकारी जब मेरे स्टाफ को लगी तो वे मेरे साथ मॉल पहुँचे।

वहाँ देखा कि पुलिस वाले सामान भर के निकल रहे थे। जब उनसे इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे सामान खरीद कर ले जा रहे हैं। जब उनसे बिल माँगा गया तो उन्होंने कहा कि देंगे। सन्नी कुमार ने कहा कि जब मॉल बंद है तो सामान कैसे खरीद लिए? इस दौरान जब लोगों ने चोरी का आरोप लगाया तो वे भागने लगे। इसके बाद लोगों ने उनका पीछा करके उन्हें रोका।

सन्नी कुमार का कहना है कि लोगों द्वारा पीछा करने के बाद पुलिस वालों ने इस सामान को मकान मालिक के कहने पर कही पहुँचाने की बात कही। वहीं, राजीव नगर पुलिस का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर चोरी का आरोप लगा है। अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रेंट के विवाद में दोनों तरफ से शिकायत ले ली गई है।

इस मामले में पटना सेंट्रल के एसपी ने प्रेसवार्ता की और कहा, “मॉल के मैनेजर विकास कुमार बैंकेट हॉल भी चलाते हैं। पुलिसकर्मी ने उसे वॉशरूम आदि के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। इसलिए उनसे जान-पहचान थी। ये लोग वहाँ थे तो विकास कुमार ने बताया कि हम लोग मॉल को बंद कर रहे हैं। अगर सामान आदि लेना हो तो ले सकते हैं। इसकी बिलिंग आदि बाद में करवा लेंगे। वहाँ बताया कि बाद में बिलिंग करके अच्छा डिस्काउंट दे देंगे तो ये सामान ले लिए। चोरी और लूट की बात सरासर गलत है।”

प्रयागराज सत्यम मर्डर केस: चलेगा बुलडोजर, पीड़ित बहन ने बताया- भाई को बचाने के लिए प्रधान यूसुफ के पकड़े थे पैर, पर उसने खींचकर मारी थी लात

प्रयागराज के खीरी में 16 साल के सत्यम शर्मा की हत्या के आरोपितों की संपत्ति कुर्क होगी। उनके घरों पर बुलडोजर भी चलेगा। चचेरी बहन के साथ छेड़खानी का विरोध करने पर 10वीं के छात्र सत्यम की 28 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में 5 लोगों की अब तक गिरफ्तारी हुई है। इनमें तुर्कपुरवा का ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ और मोहसिन के अलावा तीन नाबालिग हैं। नाबालिगों में से एक यूसुफ का बेटा और दो भांजे हैं। इस घटना के बाद से ही आक्रोशित लोग बुलडोजर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित परिवार को सरकार आर्थिक सहायता देगी। इस संबंध में डीएम संजय कुमार खत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय से सहमति ले ली है। आरोपितों की संपत्ति की डिटेल जुटाई जा रही है। साथ ही उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

सत्यम की चचेरी बहन के हवाले से अमर उजाला ने बताया है कि अपने भाई को बचाने के लिए मोहम्मद यूसुफ का पैर पकड़कर वह गिड़गिड़ाई भी थी। लेकिन यूसुफ ने उसे खींचकर लात मारी थी। उसने बताया, “हम ग्राम प्रधान युसूफ के घर के सामने पहुँचे ही थे कि मेरे साथ पढ़ने वाले उसके बेटे ने मेरा हाथ पकड़कर खींचा। सत्यम ने टोका तो उसका कॉलर पकड़ लिया। मैं कुछ कर पाती, इससे पहले ही आठ लोगों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। इसमें चार बाहरी थे, जिन्हें मैं नहीं जानती।”

उसने आगे बताया, “सत्यम को घेरकर लकड़ी के पटरे और सरिया से मारा गया। वह खून से लथपथ होकर वहीं गिर गया और फिर नहीं उठा। मेरी आँखों के सामने मेरे भाई को मार डाला।” उसका यह भी कहना है कि ग्राम प्रधान यूसुफ वहीं खड़े होकर हमलावरों को उकसा रहा था।

जहाँ हुई छात्र की हत्या, वहाँ छेड़खानी आम

सत्यम शर्मा पर जिस जगह हमला हुआ, वहाँ लड़कियों से छेड़खानी आम है। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया है कि इसके कारण कई लोग अपनी बेटियों की पढ़ाई छुड़वा चुके हैं। इनलोगों ने बताया, “हर दिन स्कूल जाते वक्त तुर्कपुरवा से गुजरते हुए हमारी बहन-बेटियाँ अपना सिर नीचे कर लेती हैं। मनचले उन पर भद्दे कॉमेंट और फब्तियाँ कसते हैं।”

परमानंद इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल राजेश पांडेय के अनुसार तुर्कपुरवा में गुमटी पर मनचले बैठे रहते हैं। वे स्कूल आती-जाती छात्राओं पर फब्तियाँ कसते हैं। छेड़खानी करते हैं। छात्राओं ने कई बार स्कूल में यह बात बताई है। उनके अनुसार इसकी शिकायत खीरी थाने को भी कई बार दी गई है। उल्लेखनीय है कि आरोपितों में शामिल मोहम्मद यूसुफ का बेटा इसी स्कूल का छात्र है। सत्यम भी यहीं पढ़ता था।

खीरी गाँव के मैनेजर पांडेय के अनुसार छेड़खानी का विरोध करने पर तुर्कपुरवा के दबंग लोगों की पिटाई भी करते हैं। उन्होंने कहा, “योगी सरकार में अगर बहन-बेटियों का घर से निकलना मुश्किल है, तो आप सोच सकते हैं कि अन्य सरकारों के वक्त यहाँ कैसा माहौल रहा हाेगा। कई अभिभावकों ने तो बच्चियों की पढ़ाई इसलिए छुड़वा दी, क्योंकि उन्हें तुर्कपुरवा से होकर गुजरना पड़ता है।”