लखनऊ में एक जज के बेटे ने 19 अगस्त 2023 दिन शनिवार को जमकर हंगामा किया और पुलिसकर्मियों को धमकी दी। पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए जज के बेटे ने कहा, “युवक ने चीखते हुए कहा कि गाड़ी कैसे उठा ली तुम लोगों ने… अभी ऐसी तैसी कर दूँगा। थाने में चार थप्पड़ खाएगा तब छोड़ेगा गाड़ी?” उसके साथ उसकी माँ यानी जज की पत्नी भी थी।
दरअसल, मेरठ में तैनात एक जज के बेटे ने लखनऊ के हजरतगंज में ‘नो पार्किंग जोन’ में अपनी कार खड़ी कर रखी थी। इसके बाद ट्रैफिक विभाग ने लाउडस्पीकर से 2 मिनट तक अनाउंस किया कि UP 14 BY 2615 नंबर की स्विफ्ट कार जिसकी भी है, वो आकर ले जाए अन्यथा क्रेन से उठा लिया जाएगा। हालाँकि, उस दौर कोई नहीं आया।
इसके बाद पुलिसकर्मियों ने कार को क्रेन से उठा लिया और उसे पार्किंग यार्ड में ले गए। पता चलने पर जज का बेटा पार्किंग यार्ड पहुँच गया। उसने पार्किंग यार्ड में लगी अपनी कार को देखा तो उसका पहिया लॉक मिला। इसके बाद युवक ने पहले नगर निगम के कर्मचारियों और फिर ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों को लॉक खोलने के लिए कहा।
जज ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने कहा कि जुर्माना भरने के कारण ही गाड़ी छोड़ी जा सकती है। वह खुद को अधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों से अभद्रता करने लगा। उस युवक ने कहा कि कार पर ‘मजिस्ट्रेट’ लिखा हुआ था, इसके बावजूद उसकी गाड़ी कैसे उठा ली गई।
इस पर कर्मचारियों ने युवक से ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) से बात करने के लिए कहा। इस पर जज का बेटा आग बबूला हो गया और पुलिसकर्मियों को धमकाने लगा। उसने कर्मचारियों को जेल भेजवाने की धमकी दी। इसका वीडियो भी सामने आया है।
In Lucknow, the son of a judge threatened traffic police for towing away his car from a no-parking zone. Thankfully, police didn't succumb to pressure. Hope CJI is watching this "entitlement of the unelected" anonymously on Twitter and takes cognizance.pic.twitter.com/Y5BxhpovGh
युवक ने चिल्लाते हुए कहा, “मैं जरूरी काम से निकला था। मेरी गाड़ी कैसे उठा ली? दिमाग खराब हो गया है? जिससे कहना है उससे कहो। मुझे अर्जेंट जाना है। मैं ज्वॉइंट सीपी से बात करूँ? अभी ऐसी तैसी कर दूँगा। थाने में चार थप्पड़ खाएगा, तब छोड़ेगा गाड़ी?”
हंगामा बढ़ता देख कर्मचारियों ने इस मामले की जानकारी ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर को गई। ज्वॉइंट सीपी ने जज की पत्नी से फोन पर बात किया। उन्होंने कानून उल्लंघन पर चालान भरकर जाने का सुझाव दिया। इसके बाद जज की पत्नी ने 1100 रुपए जुर्माना भरा। इसके बाद उनकी कार छोड़ी गई।
बता दें कि हाल ही में ट्रैफिक पुलिस ने ‘नो पार्किंग जोन’ में खड़ी पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की गाड़ी को भी उठा लिया था। मंत्री जयवीर सिंह की गाड़ी विधानसभा मार्ग के ‘नो पार्किंग जोन’ में खड़ी थी। उस दौरान गाड़ी में ड्राइवर भी नहीं था। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने 1100 रुपए का चालान काटा था।
मध्य प्रदेश में अगले 3 महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजधानी भोपाल पहुँचे। यहाँ उन्होंने शिवराज सरकार के 20 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड का जारी किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि शिवराज सरकार ने एक बीमारू राज्य को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल किया है। साथ ही कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि उसे 53 साल का हिसाब देना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बीते 41 दिनों में मध्य प्रदेश का यह चौथा दौरा है। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने मध्य प्रदेश से बीमारू राज्य का टैग हटाया है। प्रदेश को अगले 25 साल में संपूर्ण विकसित राज्य बनाने की नींव रख दी गई है। 20 साल में राज्य आत्मनिर्भर बन गया है। मध्य प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाना ही सरकार की लक्ष्य है।
भाजपा की सरकार ने विकास को गरीबों व वंचितों के घरों तक पहुँचाया है। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के 20 सालों के रिपोर्ट कार्ड के लॉंच कार्यक्रम को संबोधित कर रहा हूँ। https://t.co/vYZczTt6It
यही नहीं, इस दौरान गृह मंत्री ने प्रदेश सरकार की कई महत्वांकाक्षी और जनहित योजनाओं का जिक्र किया। अमित शाह ने न मध्य प्रदेश के इस दौरे से न केवल विधानसभा बल्कि लोकसभा की भी तैयारियों की राह स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा है कि डबल इंजन सरकार में मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश का दिल खोलकर सहयोग किया। 2024 के लोकभा चुनाव में यहाँ से BJP सभी 29 सीटें जीतेगी। 2024 का चुनाव संपूर्ण गरीबी से मुक्त बनाने का चुनाव होगा।
कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 53 साल तक कॉन्ग्रेस ने राज किया। लेकिन उनकी सरकार में एमपी को बीमारू राज्य का टैग दिया गया था। ‘बीमारू’ शब्द जिन राज्यों के पहले अक्षर को मिलाकर बना था उनमें बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश थे। उस समय इन राज्यों को भारत की विकास दर कम करने वाला राज्य माना गया था। 2003 में बँटाधार की सरकार हटाई और उसके बाद से मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य की इमेज से 20 सालों में ही बाहर निकाल दिया।
अमित शाह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कॉन्ग्रेस को चुनौती देते हुए कहा है कि हिम्मत है तो अपने 50 साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर आइए। कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश के साथ कितना न्याय किया इसका हिसाब देना चाहिए। 2004 से 2014 तक जब सोनिया-मनमोहन सरकार थी, तब मध्य प्रदेश को 10 साल में सिर्फ 1 लाख 58 हजार करोड़ रुपए मिले थे। लेकिन मोदी सरकार ने 9 साल में ही 8 लाख 30 हजार करोड़ रुपए मध्यप्रदेश को देने का काम किया है।
कॉन्ग्रेस सरकार में हुए घोटालों को लेकर भी अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को घेरा। साथ ही सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बंटाधार करार दिया और कहा कि बंटाधार और कमलनाथ इधर-उधर की बातें करते हैं। इन दोनों को कॉन्ग्रेस राज में हुई लूट का जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि श्रीमान बंटाधार और कमलनाथ इन चीजों का स्पेसिफिक जवाब दें कि 2002 में प्रदेश का बजट 23 हजार 100 करोड़ रुपए था। अब डबल इंजन सरकार इसे 3 लाख 14 हजार करोड़ रुपए पर ले आई है। यह पूरे देश में दूसरे नंबर पर है। दिग्विजय और कलमनाथ को इसका जवाब देना चाहिए।
ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई के साथ राजनीति की चर्चा में एक नया नाम जुड़ गया है। Unacademy के करण सांगवान के बाद फिलहाल अब इस विवाद में बबिता मैडम (Babita Madam Video) का नाम सामने आया है। बबिता मैडम ICS कोचिंग में कार्यरत हैं। बबिता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वो छात्रों से पढ़े-लिखे लोगों को ही वोट देने की अपील कर रहीं हैं। साथ ही वो सभी पार्टियों को एक जैसा बताते हुए बच्चों से तमाम लोगों पर जाति और धर्म के नाम पर वोट देने का आरोप लगा रहीं हैं।
बबिता मैडम ICS कोचिंग में पढ़ाती हैं। यह कोचिंग हरियाणा के सोनीपत में है। अपने इस वीडियो को बबिता ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर गुरुवार (17 अगस्त, 2023) को शेयर किया है। उन्होंने कहा, “पढ़े-लिखे लोगों को राजनीति में आने की बहुत ज्यादा जरूरत हैं इण्डिया में।” क्लास में राजनैतिक पार्टियों के खिलाफ बयानबाजी करते हुए बबिता ने आगे कहा, “2004 से 2014 तक कॉन्ग्रेस को दे रखा था देश लेकिन लोग दुखी हुए। फिर 2014 से अब तक तक किसके हाथ में है देश। बीजेपी के। लेकिन अब इलेक्शन आएँगे न तो वही पुरानी बातें होंगी। बोफोर्स की बातें होंगी। राम मंदिर की बात होगी। जिसमें धर्म की बात होगी।”
बबिता ने गारंटी लेते हुए आरोप लगाया कि आने वाले चुनावों में कोई भी स्कूल, कॉलेज, रोजगार या अस्पताल के नाम पर वोट नहीं माँगेगा। उन्होंने आबादी को नंबर 1 बताते हुए रोजगार के अनुपात को काफी कम बताया। हालात को बदतर बताते हुए बबिता ने कहा कि स्कूटी वालों को आटा चुराना पड़ रहा है। चोरी करने वालों को बबिता ने ‘बेचारा’ बताया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई बुरा बनना चाहता है। बबिता मैडम के अनुसार, नहा-धो कर पार्टी लेना और देना ही अच्छी लाइफ है।
बबिता के इस लेक्चर के दौरान कुछ छात्र उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे रहे थे और पीछे आपस में चर्चा कर रहे थे। बबिता को उन छात्रों को टोकना पड़ा और खुद को सुनने के लिए कहा। उन छात्रों पर बबिता ने बाकी छात्रों को डिस्टर्ब करने वाला बताया। उन्होंने बार-बार खुद को सुनने पर जोर डालते हुए कहा, “अगर तुम्हारा सिलेबस हो गया है तो नीचे वाली क्लास ले लिया करो फिर ऊपर नहीं आया करो।” अपने अभिभावकों के समयकाल के लोगों को टीचर ने नासमझ बताया।
उन्होंने आगे कहा, “मुझे क्या फर्क पड़ता है, तुम्हें क्या फर्क पड़ा है कि मस्जिद मंदिर बने। अच्छी बात है बनाओ। धर्म भी जरूरी है। धर्म इंसान को सीधे रास्ते पर चलना सिखाता है। लेकिन धर्म प्राथमिकता नहीं है। प्राथमिकता है पढ़ाई-लिखाई। दिमाग के स्तर को इतना बढ़ा दो कि लोग अन्धविश्वास और पाखंड से दूर हट जाएँ। पढ़ें-लिखें और पैसा कमाएँ।” बकौल बबिता, सरकार के हाथ में सब कुछ है लेकिन वो कमअक्लों और नशेड़ियों को थोड़े से पैसे दे कर वोट ले लेती है।
बताते चलें कि इस से पहले एक क्लास के दौरान बच्चों को पोलिटिकल एजेंडा पढ़ाते हुए ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म अनएकेडमी (Unacademy) ने करन सांगवान को नौकरी से निकाल दिया था। नौकरी से निकाले जाने से पहले सांगवान का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह अंग्रेजों के कानून में बदलाव के लिए लाए गए बिल को लेकर अपनी भड़ास निकालते दिखे थे। इसके जरिए वे छात्रों के बीच एक खास पॉलिटिकल एजेंडा का प्रसार कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह उत्तर प्रदेश में लोगों को बिजली न मिलने की बात कहते नजर आ रहे हैं। इस पर एक बुजुर्ग व्यक्ति समेत कई अन्य लोगों ने कहा कि प्रदेश में पहले से कहीं अधिक बिजली मिलती है। इस पर अखिलेश भड़क गए।
दरअसल, अखिलेश यादव ‘आज तक’ से बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, “जितने भी बिजली के कारखाने लगे। जितने भी बिजली के पॉवर प्लांट लगे। सब समाजवादी सरकार की देन है। दिल्ली की सरकार 10 साल और यूपी की 7 साल की सरकार ने एक भी पॉवर प्लांट लगाया हो तो मुझे बता दीजिए। यूपी में बिजली नहीं है। कब आती है, कब जाती है किसी को नहीं पता।”
इसी दौरान कुछ लोगों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली पहले से ज्यादा रहती है, बहुत आ रही है। इनमें से एक बुजुर्ग व्यक्ति भी थे। इस पर अखिलेश यादव भड़क गए। उन्होंने कहा कि जितने भी लोग बोल रहे हैं उनमें सबसे अधिक पढ़ा-लिखा आदमी ये लग रहा है मुझे। बुजुर्ग व्यक्ति जब खड़े हुए तो अखिलेश ने कहा एक पॉवर प्लांट बताइए जो BJP ने लगाया हो। अखिलेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने बुजुर्ग व्यक्ति को कहा, “अरे बुजुर्ग, अरे बुजुर्ग भाई एक पॉवर प्लांट लगा हो तो बता दो मुझे। बोलो-बोलो-बोलो। ए बोलिए।”
अखिलेश यादव ने बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र का लिहाज किए बिना आगे कहा, “अब क्या दाएँ-बाएँ देख रहे हो इधर-उधर। मिलाओ व्हाट्सएप, फोन मिलाओ।” इस पर लोगों ने जवाब दिया कि प्रदेश में कई सोलर प्लांट लग रहे हैं। लोगों का जवाब सुन अखिलेश ने कहा, “अरे भगवान, सोलर प्लांट की बात कर रहे हैं।” यही नहीं, उत्तर प्रदेश में कम बिजली मिलने की बात नकारने वाले बुजुर्ग व्यक्ति को अखिलेश यादव ने BJP का समर्थक करार दिया।
सुपरस्टार अभिनेता रजनीकांत शनिवार (19 अगस्त, 2023) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके आवास पर पहुँचे। दिग्गज अभिनेता ने यूपी के सीएम से मुलाकात की और उनके पाँव छूकर उनका अभिवादन किया, जिसका एक वीडियो और कई तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
दरअसल, अभिनेता रजनीकांत अपनी फिल्म ‘जेलर’ की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए लखनऊ में थे, फिल्म देखने जाने से पहले रजनीकांत ने सीएम योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान रजनीकांत सीएम योगी के पाँव छूते नजर आए। वहीं CM योगी ने पुष्पगुच्छ और किताब देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान रजनीकांत के साथ उनकी पत्नी लता रजनीकांत भी मौजूद रहीं। मुलाकात के बाद रजनीकांत के विशेष आग्रह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उनकी फिल्म देखने पहुँचे।
जहाँ ‘जेलर’ फिल्म महज 10 दिनों में ही ₹500 करोड़ के क्लब में शामिल हो गई है वहीं कल मात्र एक सुपरस्टार अभिनेता द्वारा CM योगी के पाँव छूने की घटना ने लेफ्ट-लिबरल, कॉन्ग्रेसी, इस्लामी सभी तरह के कुढ़े हुए लोगों के लिए मिर्ची का काम किया। सोशल मीडिया पर एक से एक नेगेटिव पोस्ट की बाढ़ आ गई। वहीं तमाम समर्थक ऐसे जले हुए दिलजलों को बरनॉल मोमेंट के लिए मुबारकबाद देते आए।
बता दें कि आमतौर पर CM योगी फ़िल्में नहीं देखते। हालाँकि, इससे पहले सीएम योगी ने पूरी कैबिनेट के साथ इस्लामिक कट्टरपंथियों के चेहरे को उजागर करती फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ देखने गए थे। तब भी कट्टरपंथियों और लेफ्ट-लिबरल गैंग को मिर्ची लगी थी।
जैसे ही रजनीकांत का योगी आदित्यनाथ के सामने झुकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही कई वामपंथी सुपरस्टार रजनीकांत द्वारा मुख्यमंत्री को प्रणाम करने को लेकर भड़क गए।
हालाँकि, अभिनेता रजनीकांत भाजपा के साथ नजदीकी को लेकर पहले से ही चर्चित हैं। जम्मू कश्मीर से 370 हटाने के बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और PM मोदी की तारीफ करते हुए उनकी जोड़ी को अर्जुन और कृष्ण की जोड़ी बता दिया था। तब भी लेफ्ट-लिबरल गैंग को ऐसे ही आग लगी थी। अभिनेता कई बार विभिन्न अवसरों पर PM मोदी के कामों की तारीफ कर चुके हैं जिससे वामपंथी ब्रिगेड के वह पहले से ही निशाने पपर रहते हैं वहीं कल CM योगी के पाँव छूकर प्रणाम करने के वीडियो ने तो अलग ही कहर ढाया है। जिसकी आँच सोशल मीडिया पर कल से ही भड़क रही है।
रजनीकांत के योगी आदित्यनाथ के पाँव छूने से लेफ्ट-लिबरल गैंग में मची खलबली
एक एक्स यूजर ने तो इतना आहत हो गया कि उसने अपने ट्वीट किया, “नफरत फैलाने वाले के पैरों पर गिरने के लिए रीढ़विहीन, पाखंडी कायर रजनी से चकित हूँ। यह एक नया निचला स्तर है!”
#Rajinikanth bows down to Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath.
Appalled by the spineless, hypocritical coward Rajini for falling at the feet of a hate monger. A new low! ???♂️
ऐसे एक नहीं, बल्कि कई सोशल मीडिया यूजर्स हैं जिन्हें इतनी तगड़ी मिर्ची लगी कि योगी आदित्यनाथ के बहाने सुपरस्टार रजनीकांत पर तरह-तरह से हमला करना शुरू कर दिया।
72 Years old Superstar Rajinikanth touching feet of 52 Years old Yogi Adityanath.
I stopped watching @rajinikanth movies. I don’t care how big a super star he is, what great roles he is playing, what mass hero he is. He will remain a sanghi to me. Now a sangji who fell on the feet of a criminal. If this is what spirituality does to someone, to hell with it
In #Kaala movie, #Rajinikanth plays a politically-conscious Dalit who fights against a right-wing leader. He is seen praying among the Muslims. He is seen asking Hari Dhadha'a grand daughter not to touch his feet and just say Namaste.
रजनीकांत ने फिल्म की सफलता को बताया ‘दैवीय आशीर्वाद’
इस बीच, रजनीकांत ने अपनी फिल्म को दर्शकों से मिले जबरदस्त उत्साह का स्वागत किया और साथ ही इसकी उल्लेखनीय सफलता को लेकर अपना आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, “…यह एक दैवीय आशीर्वाद जैसा लगता है कि फिल्म इतनी सफलता हासिल कर रही है।”
बता दें कि इससे पहले, रजनीकांत झारखंड के राँची में थे, जहाँ उन्होंने शुक्रवार को राज्य के प्रसिद्ध छिन्नमस्ता मंदिर की यात्रा और पूजा-अर्चना की। उन्होंने राँची में ‘योगदा आश्रम’ में ध्यान के लिए भी समय निकाला। इसके बाद उन्होंने राजभवन में झारखंड के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन से भी मुलाकात की।
वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अभिनेता की असाधारण अभिनय क्षमता की सराहना करते हुए कहा, “मुझे ‘जेलर’ फिल्म देखने का भी अवसर मिला। मैंने रजनीकांत की कई फिल्में देखी हैं, और वह इतने कुशल अभिनेता हैं कि भले ही फिल्म में पर्याप्त सामग्री की कमी हो, लेकिन उनका प्रदर्शन फिल्म के महत्व को बढ़ा देता है।”
गौरतलब है कि ‘जेलर’ ने 10 अगस्त, 2023 को रिलीज के बाद से बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला दिया है। फिल्म कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है। बता दें कि फिल्म ‘जेलर’ करीब 900 स्क्रीन पर एक साथ रिलीज हुई है। रजनीकांत ने फिल्म में ‘जेलर टाइगर’ की भूमिका निभाई है। फिल्म में रजनीकांत के अलावा मोहनलाल, शिवराजकुमार और जैकी श्रॉफ की महत्वपूर्ण भूमिकाएँ हैं। फिल्म ने 10 दिनों में 514 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के कानून-व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार है। इसका उदाहरण व्यापारिक एवं निवेश संबंधी गतिविधियों में उत्तर प्रदेश पर वित्तीय संस्थाओं एवं निवेशकों का दिख रहा विश्वास है। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहाँ निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI के एक अध्ययन में सामने आया है कि साल 2022-23 में बैंक-सहायता प्राप्त नए निवेश में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश को मिले हैं। वहीं, इन कुल निवेश प्रस्तावों का आधा सिर्फ पाँच राज्यों को मिले हैं, जिनमें यूपी और गुजरात शीर्ष पर हैं।
यूपी को 45 परियोजनाओं के लिए 43,180 करोड़ रुपए मिले हैं। यह कुल निवेश मदद का 16.2 प्रतिशत है। गुजरात को 37,317 करोड़ रुपए मिले, जो कुल निवेश का 14 प्रतिशत है। वहीं, ओडिशा का कुल निवेश में 11.8 प्रतिशत हिस्सेेदारी है।
अगर, उत्तर प्रदेश के पूर्व के निवेशों की तुलना करें तो यह लगातार बढ़ रहा है। RBI के आँकड़ों के अनुसार, साल 2013-14 से 2020-21 तक बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं द्वारा स्वीकृत किए गए कुल परियोजना लागत में उत्तर प्रदेश की परियोजनाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 4.4 प्रतिशत थी। इसमें 14.3 प्रतिशत के साथ गुजरात पहले और 13 प्रतिशत के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर था।
साल 2021-22 में उत्तर प्रदेश यह हिस्सेदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 4.4 प्रतिशत से 12.8 प्रतिशत हो गई। इस दौरान यूपी के निवेश में बढ़ोत्तरी तो हुई, लेकिन गुजरात और महाराष्ट्र का शेयर घटकर क्रमश: 11.7 प्रतिशत और 9.7 प्रतिशत रह गया।
साल 2022-23 में 2022-23 में कुल 547 परियोजनाओं को बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से मदद मिली। इस दौरान कुल 2,66,547 करोड़ रुपए जारी किए गए। यूपी को 45 परियोजनाओं के लिए 43,180 करोड़ रुपए मिले हैं। यह कुल निवेश मदद का 16.2 प्रतिशत है।
योगी आदित्यनाथ सरकार में एक तरफ अपराध में कमी आ रही है तो दूसरी तरफ सजा देने की दर में वृद्धि हो रही है। कठोर कानून व्यवस्था के कारण यूपी में संज्ञेय अपराधों में कमी आती गई है। साल 2020 में जहाँ यूपी में 6.57 लाख अपराध रजिस्टर्ड किए गए थे, वहीं साल 2021 में यह संख्या घटकर 6.08 लाख रह गई।
इनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, दहेज संबंधित हत्या में भी कमी देखने को मिली। यह अन्य राज्यों की अपेक्षा बहुत कम था। राज्य में साल 2016 की तुलना में साल 2022 में अपराध में भारी गिरावट देखी गई। बताते दें कि यूपी में पहली बार योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी थी। राज्य सरकार ने अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस फोर्स धनराशि का आवंटन करके पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की।
दूसरी तरफ, बच्चों और महिलाओं के खिलाफ राज्य में होने वाले अपराध में सजा देने की दर में वृद्धि हुई। इस कारण अपराधियों में भी डर देखने को मिला। साल 2022 में रेप के 671 मामलों, दहेज के 537 और POCSO के तहत 2313 मामलों में सजा दी गई। इनमें 5 को मौत की सजा, 736 को आजीवन कारावास और 1860 को 10 साल से अधिक की सजा मिली।
पिछले कुछ दिनों से एक मुद्दा खबरों और सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैला। इसमें दावा किया गया कि गुजरात के मेहसाणा जिले के खेरालु के लुनवा गाँव के एक सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा को सिर्फ इसलिए सम्मानित नहीं किया गया क्योंकि वह मुस्लिम समुदाय से आती है। दावा यह भी किया गया कि पहली रैंक से पास होने वाली मुस्लिम छात्रा का हक दूसरी रैंक से पास होने वाली छात्रा को दे दिया गया।
इस मामले में छात्रा और उसके पिता ने मीडिया में सीधा स्कूल पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया। तब मीडिया और लेफ्टलिबरल गैंग सोशल मीडिया पर ऐसे टूट पड़े, जैसे उन्हें उनकी पसंद का हॉट केक मिल गया हो। बिना पर्याप्त जानकारी के ऐसे लोगों ने पूरे सोशल मीडिया पर इस खबर को धड़ाधड़ फैलाना शुरू कर दिया।
मीडिया चैनल ज़ी न्यूज ने “स्कूल में नफरत: प्रथम स्थान के बजाय नंबर 2 छात्र को सम्मानित किया” शीर्षक के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि स्कूल में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, 2022 में कक्षा 10 उत्तीर्ण करने वालों को सम्मानित किया गया। लेकिन नंबर एक को बाईपास कर उपविजेता यानि दूसरे नंबर की छात्रा के नाम की घोषणा पहले की गई। जबकि वहाँ पर नंबर वन स्थान पर आने वाली अर्नाज़ बानो (Arnaz Bano) स्कूल में मौजूद थीं। सभी के सामने उसका सम्मान न होने पर वह रो पड़ीं और घर जाकर अपने अब्बू को सारी सच्चाई बता दी।
छात्रा अर्नाज़ बानो (Arnaz Bano) के अब्बू ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया:
”मेरी बेटी का नाम इसलिए लिस्ट से काट दिया गया क्योंकि वह मुस्लिम है और दूसरे स्थान पर रहने वाली छात्रा को सम्मानित किया गया है। अल्पसंख्यक होने के नाते हमारे साथ अन्याय हुआ है।”
TheWire, क्विंट, मकतूब मीडिया, सियासत डेली, मिल्लत टाइम्स जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ने इस फर्जी खबर को पब्लिश कर खूह फैलाया।
यूट्यूब चैनलों पर भी ऐसे ही दावे
मुख्यधारा मीडिया में रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद कई यूट्यूब चैनलों ने भी ऐसे ही दावे किए। एक गुजराती यूट्यूब चैनल ‘JAMAWAT’ ने भी इस मुद्दे को कवर किया। उसने वीडियो के टाइटल में लिखा, “10वीं क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की पहला नंबर पर आई, लेकिन लड़की मुस्लिम थी इसलिए इनाम नहीं दिया गया! यह कैसी व्यवस्था है?”
चैनल चलाने वाली पत्रकार देवांशी जोशी ने भी वीडियो में इसी दावे को आगे बढ़ाया कि छात्रा के साथ भेदभाव किया गया है। साथ ही वीडियो में उन्होंने पूछा, ”हम देश में एक लड़की के खिलाफ नफरत और भेदभाव का माहौल बनाने के लिए क्या कर रहे हैं क्योंकि वह मुस्लिम है?” साथ ही वह सामाजिक व्यवस्था पर भी खास टिप्पणी करती नजर आती हैं।
सोशल मीडिया पर भी फैला झूठ
सोशल मीडिया में ऐसी खबरों और यूट्यूब चैनलों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम छात्रा को उसके मजहब के आधार पर पुरस्कार नहीं दिया गया। ऐसे कई पोस्ट फेसबुक और ट्विटर (वर्तमान में एक्स) जैसे प्लेटफॉर्म पर देखे गए। ट्विटर पर कुछ वामपंथी और मुस्लिम यूजर्स ने ये दावे किए और कहा कि छात्रा को सिर्फ इसलिए सम्मानित नहीं किया गया क्योंकि वह मुस्लिम थी। इसकी आड़ में ही उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ के नारे के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा।
गुजरात के मेहसाणा के खेरालु गाँव में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कक्षा 10 के टॉपर्स बच्चों को सम्मानित किया जाना था। जिसमें पहले नम्बर के छात्र की जगह पर सीधा दूसरे नम्बर के छात्र को बुला कर सम्मानित किया गया। पहले नम्बर वाले को बुलाया ही नहीं गया। जानते हैं क्यूँ ? वजह सिर्फ इतनी… pic.twitter.com/3GWCQDnHCs
दूसरी ओर, फेसबुक पर कुछ यूजर्स ने उसी गुजराती यूट्यूब चैनल का वीडियो भी शेयर किया और इस दावे को हवा दी कि छात्रा के साथ भेदभाव किया गया और उसे सम्मान नहीं दिया गया क्योंकि वह मुस्लिम थी।
फेसबुक पर शेयर की जा रही पोस्ट का स्क्रीनशॉट
वास्तविकता क्या है?
ऑपइंडिया की गुजराती टीम ने यह जानने की कोशिश की कि इस पूरे घटनाक्रम में सिक्के का दूसरा पहलू क्या है? स्कूल से बात करने पर सच सामने आ ही गया। स्कूल से जुड़े सूत्रों ने कहा, ”इस पूरे मामले को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। इसमें धार्मिक भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं है। दरअसल, यह कोई बड़ा आधिकारिक आयोजन नहीं था, इस कार्यक्रम को स्कूल के शिक्षकों ने अपने-अपने तरीके से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के आयोजन में शिक्षकों का उद्देश्य स्कूल के छात्रों को प्रेरित करना और आगामी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उन्हें मोटिवेशन देना था।”
स्कूल के शिक्षकों ने अपने स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया, तो मुस्लिम छात्रा को सम्मानित क्यों नहीं किया गया? – जब स्कूल के सूत्रों से इस सवाल का जवाब माँगा गया तो पता चला कि दरअसल, छात्रा ने पिछले साल दसवीं पास किया था। आगे की पढ़ाई के लिए उसे दूसरे स्कूल में जाना था। जिस स्कूल की बात हो रही है, वहाँ इस वर्ष उसका एडमिशन ही नहीं है। जबकि कार्यक्रम में केवल स्कूल जाने वाले छात्रों को प्रोत्साहित किया गया।
आगे बातचीत करने पर यह भी पता चला कि स्कूल हर साल गणतंत्र दिवस पर सम्मान समारोह आयोजित करता है। इस साल गणतंत्र दिवस पर सम्मान समारोह में इस मुस्लिम छात्रा अर्नाज़ बानो (Arnaz Bano) को भी सम्मानित किया जाएगा।
स्कूल से जुड़े सूत्रों ने यह भी बताया कि लुनवा गाँव की अधिकांश आबादी मुस्लिम है और गाँव के कुछ स्थानीय मुस्लिमों का भी मानना है कि इस घटना में कोई धार्मिक भेदभाव नहीं है। छात्रा और उसके अभिभावक की ओर से ऐसे दावे क्यों किए जा रहे हैं, यह अभी भी लोगों की समझ से परे है। यह भी पता चला है कि घटना के संबंध में हकीकत सामने लाने के लिए गाँव के प्रमुख लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्कूल का दौरा करेगा।
गलतफहमी के कारण ऐसा हुआ
स्कूल के प्रिंसिपल ने भी ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जिस छात्रा की बात हो रही है, वह अभी वर्तमान सत्र में स्कूल में नहीं पढ़ रही थी और कार्यक्रम केवल जूनियर स्तर के स्कूली छात्रों के लिए था। इस छात्रा को 26 जनवरी को आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा। गलतफहमी के कारण छात्रा के माता-पिता को समस्या हुई है।
दरअसल, यह कार्यक्रम बहुत ही छोटे पैमाने पर स्कूल में आयोजित किया गया था। इसमें केवल स्कूली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को पुरस्कार वितरित करने के लिए हर साल 26 जनवरी को एक आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें इस छात्रा को भी सम्मानित किया जाएगा।
इस फेक खबर का फैक्ट चेक गुजराती ऑपइंडिया के साथी क्रुणालसिंह राजपूत ने किया है।
भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सनी देओल की फिल्म ‘ग़दर 2’ का तूफान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। रिलीज के 9वें दिन शनिवार (19 अगस्त, 2023) को भी इसने 31 करोड़ रुपए से अधिक की नेट कमाई कर के इतिहास रच दिया। ये किसी भी हिंदी फिल्म के लिए दूसरे शनिवार का सबसे बड़ा कलेक्शन है। शुक्रवार को फिल्म ने 20.50 करोड़ रुपए कमाए थे। पहले सप्ताह में फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 285 करोड़ रुपए के पास पास रहा था। इस तरह ‘Gadar 2’ ने अब तक भारत में 336 करोड़ रुपए नेट कमा लिए हैं।
इस तरह ‘ग़दर 2’ ने अब तक 2019 में आई ऋतिक रोशन और टाइगर श्रॉफ की ‘वॉर’ (318 करोड़ रुपए) और 2015 में आई सलमान खान की ‘बजरंगी भाईजान’ (315 करोड़ रुपए) का रिकॉर्ड तो डाला है। अगर रविवार के कलेक्शन को भी मिला दें तो फिल्म ने 2017 में आई सलमान खान की ‘टाइगर ज़िंदा है’ (339 करोड़ रुपए), 2014 में आई आमिर खान की ‘पीके’ (337 करोड़ रुपए) और 2018 में आई रणबीर कपूर की ‘संजू’ (334 करोड़ रुपए) का रिकॉर्ड भी तोड़ डाला है।
सोमवार को ‘ग़दर 2’ के सामने आमिर खान की 2016 में आई फिल्म ‘दंगल’ (374 करोड़ रुपए) भी कमाई भी फीकी पड़ जाएगी। हालाँकि, अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि यश की फिल्म ‘KGF 2’ के हिंदी वर्जन का रिकॉर्ड सनी देओल की मूवी कब तोड़ती है। ‘KGF 2’ के हिंदी वर्जन ने 427 करोड़ रुपए कमाए थे और ये सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में तीसरे नंबर पर आती है। अगर ये रिकॉर्ड टूट जाता है तो शाहरुख़ खान की ‘पठान’ का विवादित रिकॉर्ड भी पीछे नहीं रहेगा।
उधर ‘ग़दर 2’ के साथ ही रिलीज हुई अक्षय कुमार, पंकज त्रिपाठी, यामी गौतम और पवन मल्होत्रा की फिल्म ‘OMG 2’ ने भी 100 करोड़ रुपए का आँकड़ा डोमेस्टिक बॉक्स ऑफिस पर पार कर लिया है। फिल्म ने रिलीज के 9वें दिन किसी तरह खींच-खाँच कर इस आँकड़े को छुआ। इसने शनिवार को 10.53 करोड़ रुपए की कमाई की, जिसके बाद इसका कुल नेट कलेक्शन 101.61 करोड़ रुपए पहुँच गया। उधर सुपरस्टार रजनीकांत की ‘जेलर’ ने 10 दिनों में दुनिया भर में 514 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा छू लिया है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 8 अगस्त 2023 को साल 1980 में हुए मुरादाबाद दंगों की जाँच रिपोर्ट पेश की। इस दंगे में कम से कम 83 लोगों की हत्या हुई थी और 112 अन्य घायल हो गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एमपी सक्सेना के एक सदस्यीय पैनल ने इन दंगों पर 496 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। जस्टिस सक्सेना की इस रिपोर्ट में दंगों के असल कारणों और उससे हुए नुकसान का जिक्र किया गया था।
तब केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों में ही कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस रिपोर्ट में हिंसा के दौरान वहाँ मौजूद न सिर्फ मुस्लिम और हिन्दुओं बल्कि तब तैनात पुलिस अधिकारियों का भी हवाला दिया गया है। दंगे के दौरान दर्ज हुए 6 हिंदुओं की गवाही का भी इस रिपोर्ट में उल्लेख है।
मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट के हर बयान में यह साफ़ है कि नरसंहार की योजना पहले से ही बनाई गई थी। 1980 में हुए इन दंगों के चश्मदीदों में से एक संतोष सरन ने अपनी लिखित गवाही में कहा है कि हिंसा की वजह वोट बैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति थी।
दंगे 13 अगस्त 1980 में भड़के थे। अपनी गवाही में संतोष सरन ने खुलासा किया है कि दंगे भड़कने से पहले 30,000 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को सोची समझी साजिश के तहत लाकर बसाया गया था। इन्हें मुरादाबाद के मुस्लिम बहुल गाँवों में रखा गया था।
दंगों की प्रमुख वजह संतोष सरन ने जिले की डेमोग्राफी बदलने की साजिश बताया। सरन के अनुसार 1947 में मिली आजादी के समय मुरादाबाद मुस्लिम बहुल था। तब शहर की आबादी में 52 प्रतिशत मुस्लिम और 48% हिन्दू थे। लेकिन स्वतंत्रता मिलने के बाद कई मुस्लिम पाकिस्तान चले गए थे, जिस वजह से आज़ादी के बाद मुरादाबाद हिन्दू बहुल हो गया था। तब यहाँ 52 हिन्दू और 48 प्रतिशत मुस्लिम हो गए थे।
चश्मदीद सरन ने बताया कि कॉन्ग्रेस शासन में धीरे-धीरे मुरादाबाद में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों की लगातार घुसपैठ करवाई गई। इस वजह से एक बार फिर शहर की जनसांख्यिकी बदल गई। इन्हीं अवैध घुसपैठियों को स्थानीय मुस्लिमों ने हिंदुओं के खिलाफ भड़काया।
आरोप यह भी है कि तत्कालीन राज्य और केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन अवैध घुसपैठियों पर कोई एक्शन नहीं लिया। चश्मदीद के मुताबिक कालांतर में इन्हीं अवैध मुस्लिम घुसपैठियों का दबदबा बढ़ता गया और मुरादाबाद में सांप्रदायिक हिंसा होना बहुत आम बात हो गई।
पिछली रिपोर्ट में एक अन्य चश्मदीद दयानंद गुप्ता की गवाही का जिक्र किया गया था। दयानंद के मुताबिक हिंसा की शुरुआत 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद के ईदगाह से हुई थी। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस अधिकारियों और दलित समुदाय के वाल्मीकि लोगों पर बेवजह हमला किया था। इसके अलावा न्यायमूर्ति सक्सेना के नेतृत्व में हुई जाँच की रिपोर्ट में भाजपा, RSS व अन्य हिन्दू संगठनों को क्लीन चिट दी गई है।
इसी रिपोर्ट में हिंसा के लिए मुस्लिम लीग के कुछ राजनैतिक लोगों की सांप्रदायिक राजनीति को जिम्मेदार ठहराया गया था और बताया गया कि दंगो की वजह बना सांप्रदायिक उन्माद मुस्लिम लीग और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा रची गई साजिश का परिणाम था। ‘मुरादाबाद में ईद की नमाज के दौरान ईदगाह में सुअर घुसने’ के आरोपों को भी इस रिपोर्ट में पूरी तरह से खारिज किया गया है।
बताते चलें कि साल 1980 के मुरादाबाद दंगों पर जस्टिस सक्सेना की 496 पन्नों की रिपोर्ट मई 1983 में ही तैयार कर दी गई थी। हालाँकि इतने साल बीत जाने के बाद भी इस रिपोर्ट को एक विभाग से दूसरे सरकारी विभाग तक घुमाया जाता रहा। इसी के साथ पिछले लगभग 4 दशकों में इस जाँच रिपोर्ट को कोई न कोई बहाना बना कर कम से कम 14 बार दबाया गया था।
योगी सरकार से पहले पहले किसी भी सरकार ने इसे सार्वजानिक नहीं किया। आखिरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में UP में चल रही भाजपा सरकार ने 43 साल पुराने इस मामले को खोलने का फैसला लिया है। इसी साल मई में राज्य कैबिनेट ने न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने का फैसला किया और मंगलवार 8 अगस्त को यह रिपोर्ट यूपी विधानसभा में पेश हुई।
भारतीय रिजर्व बैंक के अध्ययन में ये रिपोर्ट सामने आई है कि साल 2022-23 में बैंक-सहायता प्राप्त कुछ निवेश प्रस्तावों में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश को मिले। वहीं, इन कुल निवेश प्रस्तावों का आधा सिर्फ पाँच राज्यों को मिले हैं, जिनमें यूपी और गुजरात भी शामिल हैं। वहीं, इस अवधि में निवेश हासिल करने वाले राज्यों में सबसे नीचे केरल और असम हैं।
जिन पाँच राज्यों को सबसे अधिक निवेश सहायता मिली हैं, उनमें क्रमश: उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक हैं। वहीं, सबसे नीचे से क्रमश: पाँच राज्य- असम, गोवा, केरल, हरियाणा और पश्चिम बंगाल हैं। वहीं, बिहार नीचे से सातवें स्थान पर है।
यूपी को 45 परियोजनाओं के लिए 43,180 करोड़ रुपए मिले हैं। यह कुल निवेश मदद का 16.2 प्रतिशत है। गुजरात को 37,317 करोड़ रुपए मिले, जो कुल निवेश का 14 प्रतिशत है। वहीं, ओडिशा को कुल निवेश का 11.8 प्रतिशत, महाराष्ट्र को 7.9 प्रतिशत और कर्नाटक को 7.3 प्रतिशत मिले हैं। इन पाँच राज्यों का कुल निवेश लागत में 57.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके लिए इन पाँच राज्यों को 2,01,700 करोड़ रुपए मिले।
अगर सबसे निचले पायदान पर खड़े राज्यों की बात करें तो कुल परियोजना लागत का सिर्फ 0.7 प्रतिशत असम, 0.8 प्रतिशत गोवा, 0.9 प्रतिशत केरल और सिर्फ 1 प्रतिशत हरियाणा के जिम्मे आया। बिहार के हिस्से में कुल परियोजना लागत का 1.6 प्रतिशत आया।
अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि करने के बावजूद 3,52,624 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के साथ इन प्रस्तावों में 79.50 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई। यह वृद्धि वित्त वर्ष 2014-15 के बाद सबसे अधिक है।
2022-23 में कुल 547 परियोजनाओं को बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से मदद मिली। इस दौरान कुल 2,66,547 करोड़ रुपए जारी किए गए। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2022-23 में 146 प्रोजेक्ट अधिक हैं। इन परियोजनाओं पर 1.42 लाख करोड़ रुपए की लागत आई।
वित्त वर्ष 2022-23 में जिन 547 परियोजनाओं को बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा मदद मिली, उनमें सबसे अधिक 135 प्रोजेक्ट रोड, ब्रिज जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हैं। वहीं, अन्य कैटेगरी के 112 प्रोजेक्ट इसमें शामिल हैं, जबकि मेटल से जुड़े 60 प्रोजेक्ट हैं।