केरल में एक महिला पुलिस अधिकारी के यौन उत्पीड़न के दोषी को 3 साल की सजा सुनाई गई है। दोषी व्यक्ति की पहचान जोस रॉकी फर्नांडीस के तौर पर हुई है। उसने 48 घंटे के भीतर तीन सौ से अधिक बार थाने के नंबर पर कॉल किया था। महिला पुलिस अधिकारी से अश्लील बातें की। गालियाँ दीं। यौन संबंध बनाने की डिमांड रखी। इससे पहले इसी तरह के दो मामलों में फर्नांडीस सबूतों के अभाव में बरी हो गया था।
क्या है मामला
जुलाई 2019 में एर्नाकुलम के महिला पुलिस स्टेशन के नंबर पर एक कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने महिला पुलिसकर्मी से यौन संबंध बनाने की माँग की। पुलिसकर्मी से उसका पर्सनल नंबर भी माँगा। पुलिसकर्मी ने रॉन्ग नंबर सोचते हुए फोन काट दिया। लेकिन इसके बाद भी उसी नंबर से लगातार फोन आते रहे। अगले दिन थाने में कुल 309 बार फर्नांडीस ने फोन किया। फोन उठाने पर वह अश्लील बातें करता था।
इस मामले की जाँच कर जोस रॉकी फर्नांडिस के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने वाले सब इंस्पेक्टर वीबी अनस का कहना है, “सबसे पहले हमने साइबर सेल से संपर्क किया और कॉलिंग डेटा हासिल किया। हमने फोन करने वाले जोस और उसके मोबाइल टावर लोकेशन की पहचान की। इसके बाद उसे कलूर के एक लॉज से गिरफ्तार किया।” जाँच में सामने आया कि आरोपित जोस इस तरह की हरकतें पहले भी कर चुका था। उसके खिलाफ इसी तरह के मामले कडवंतरा और पल्लुरूथी पुलिस स्टेशनों में भी दर्ज थे। अनस ने कहा है, “महिला अधिकारी उसके निशाने पर थीं। वह पुलिस स्टेशनों में कॉल करता था। अगर कोई महिला अधिकारी फ़ोन उठाती, तो वह उसे गालियाँ देता था।”
सब इंस्पेक्टर अनस के अनुसार पूछताछ के दौरान जोस ने यह भी स्वीकार किया था कि उसके निशाने पर कई सीनियर अधिकारी थे। उसने कई अधिकारियों को फोन भी किया था। वह शराब और नशीले पदार्थों के नशे में धुत होकर फोन करता था। जमानत पर बाहर आने के बाद भी उसने पुलिस स्टेशन में फोन करना बंद नहीं किया। हाल ही में उसे तिरुवनंतपुरम में फिर से गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने बताया कि कॉल रिकॉर्ड और सिम कार्ड की जानकारी के अलावा इस मामले में सबसे बड़ा सबूत फर्नांडीस का मोबाइल फोन था। दरअसल, उसके फोन में कॉल रिकॉर्डिंग ऐप था, जिसमें रिकॉर्डिंग दर्ज थी। फोरेसिंक जाँच से यह साबित हुआ था कि फर्नांडीस ने ही पुलिस स्टेशन में फोन किया था। उसे सजा मिलने पर खुशी जताते हुए सब इंस्पेक्टर ने कहा, “पहले भी उसके खिलाफ इसी तरह के दो मामले दर्ज हुए थे। लेकिन सबूतों के अभाव में वह बरी हो गया था।”
जोस रॉकी फर्नांडीस के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई एर्नाकुलम की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सजिनी बीएस ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फर्नांडीस को भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 354A (1) (ii) के तहत दोषी करार दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने उसे 3 साल की सजा और 15000 रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया।
आपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर देखा होगा कि कैसे कुछ इन्फ्लुएंसर्स स्क्रीनशॉट डाल कर बता रहे हैं कि इस प्लेटफॉर्म द्वारा उन्हें कितने रुपए भेजे गए हैं। इसके बाद आप सोच रहे होंगे कि आखिर ट्विटर इन्हें रुपए क्यों भेज रहा है? यहाँ हम आपकी शंकाओं का समाधान करते हुए बताएँगे कि कैसे आप भी ट्विटर का इस्तेमाल कर के पैसे बना सकते हैं। एलन मस्क द्वारा कंपनी का टेकओवर करने के बाद जो बदलाव हुए हैं, उसका फायदा आप भी उठा सकते हैं।
एलन मस्क का ‘X’: वीडियो से पैसे कमाने के तरीके
इसके लिए ‘X’ के मोनेटाइजेशन नीति लेकर आया है, जिसका उद्देश्य है कि यूजर्स ट्विटर टूल्स का इस्तेमाल कर के अपने विचारों को नकदी में बदल सकें। इसके तहत आप अपने कंटेंट को मोनेटाइज कर सकते हैं। YouTube पर भी कुछ ऐसा ही होता है, जहाँ चैनलों को वीडियो में एड चलाने के बदले व्यूज के हिसाब से पैसे मिलते हैं। हालाँकि, ट्विटर वाला फॉर्मूला थोड़ा अलग है। यहाँ ट्वीट, वीडियो और ‘स्पेस’ के अलावा कई अन्य रास्ते हैं जिसके माध्यम से आप पैसे कमा सकते हैं।
इसमें सबसे पहले आता है ‘वीडियो मोनेटाइजेशन प्रोग्राम’, जिसके तहत दो विकल्प पब्लिशरों को दिए जाते हैं – Amplify Pre-roll और Amplify Sponsorships, जिनके माध्यम से वीडियो कंटेंट प्रोड्यूस करने वाले पैसे बना सकते हैं। पहले विकल्प के तहत ऐसे वीडियो को चुना जाता है जो ब्रांड के नियम-कानून के हिसाब से सही हों और उन्हें विज्ञापनदाताओं से जोड़ा जाता है। यूजर चुन सकते हैं कि वो किस वीडियो को मोनेटाइज करना चाहते हैं और किसको नहीं।
प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर जितने भी विज्ञापनदाता उपलब्ध हैं, उनके साथ वीडियो को जोड़ा जाता है और और पब्लिशर्स को अतिरिक्त रेवेन्यू मिलता है। इसके तहत सीधा आपको मोनेटाइजेशन प्रोग्राम में ऑप्ट-इन करना पड़ता है। वीडियो में दिए गए टैग के आधार पर ‘X’ ये निर्धारित करता है कि किन ब्रांड्स के एड उसमें चलाए जाएँगे। ‘X’ के ‘मीडिया स्टूडियो’ के माध्यम से आप अपने वीडियो कंटेंट और उससे होने वाली कमाई को देख सकते हैं।
वहीं वीडियो कंटेंट को मोनेटाइज करने का दूसरा तरीका ‘X’ ये भी देता है कि कैसे लाइव वीडियो, वीडियो क्लिप्स और अन्य स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट के वीडियो को सीधे लीडिंग ब्रांड से जोड़ा जाए और फिर वो उससे होने वाली कमाई को आपस में शेयर करें। इसके तहत प्रीमियम वीडियो पैकेज बनाने वालों को सीधा इंडस्ट्री के बड़े ब्रांड्स से संपर्क हो जाता है। इसे आप ‘वन टू वन स्पॉन्सरशिप पेयर’ भी कह सकते हैं।
‘X’ पर केवल ट्वीट कर के भी कमाए जा सकते हैं पैसे
अब आते है इसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर। वीडियो सभी कोई नहीं बनाते, लेकिन ट्वीट तो लगभग सभी यूजर करते हैं। अब आप ‘X’ पर सिर्फ ट्वीट कर के भी पैसे कमा सकते हैं, नए नियमों के तहत। इसके एक तरीका इन्फ्लुएंसर्स के लिए है, जो अपना-अपना सब्सक्रिप्शन लॉन्च करते हैं और सब्सक्रिप्शन लेने वालों को उनके ‘सुपर फॉलोवर्स’ में गिना जाता है। $2.99से लेकर $9.99 तक सब्सक्रिप्शन का चार्ज हो सकता है।
दूसरा तरीका है – सीधा ट्वीट कर के पैसे कमाएँ। कैसे, आइए हम बताते हैं। इसके लिए पात्रता की शर्त है – ‘X’ पर आपके 500 फॉलोवर्स होने चाहिए और 3 महीने में इंगेजमेंट 15 मिलियन होना चाहिए। इसका अर्थ है कि 90 दिनों के भीतर अगर आपके ट्वीट्स को 1.5 करोड़ बार देख लिया गया है और आपके 500 फॉलोवर्स हैं, फिर आप अपने ट्वीट्स के माध्यम से पैसे कमाने के पात्र हैं। इसके लिए तीसरी शर्त है – आपको ‘ट्विटर ब्लू’ का वेरिफिकेशन लेना होगा।
हालाँकि, अब ट्विटर ने नियम बदल कर इस आँकड़े को 5 मिलियन, यानी 50 लाख कर दिया है। आपके ट्वीट्स को कितनी बार देखा गया है, आपकी रीच किया है, आपको कितने नए फॉलोवर्स कितनी अवधि में मिले हैं और ट्वीट इंगेजमेंट से लेकर इम्प्रेशन (रीट्वीट, लाइक, प्रोफाइल क्लिक्स इत्यादि) के आँकड़े क्या हैं, इसे आप ‘ट्विटर एनालिटिक्स‘ पर जाकर चेक कर सकते हैं।
ब्लू टिक लेने के लिए आपको वेब के माध्यम से आपको प्रति महीने 680 रुपए या फिर प्रतिवर्ष 6800 रुपए का भुगतान करना होता है। वहीं स्मार्टफोन में एप के माध्यम से ब्लू टिक का सब्सक्रिप्शन लेने के लिए आपको प्रति महीने 900 रुपए का फिर साल में 9000 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके लिए चौथी शर्त है – आपको ‘Stripe’ नामक प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना होगा और उसे अपने ट्विटर हैंडल से जोड़ना होगा।
ट्वीट रिप्लाइज से पैसे कमाने के लिए शर्तें, Stripe पर भी बनाना होगा अकाउंट
‘Stripe’ एक आयरिश-अमेरिकन वित्तीय सेवाएँ देने वाला प्लेटफॉर्म है, जो सिर्फ पेमेंट गेटवे न होकर इससे भी अधिक काम करता है। मार्केटप्लेस के वित्तीय प्रबंधन से लेकर सब्स्क्रिप्शन्स को मैनेज करने तक, इसके माध्यम से सभी पैसों के लेनदेन वाले काम किए जा सकते हैं। इस पर अकाउंट बनाने के लिए आपको नाम, ईमेल, पैन और फोन नंबर वेरिफाई कराना पड़ेगा। आपको भारत के टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, इसके लिए एक फॉर्म आपसे भरवाया जाएगा।
जैसे ही ‘X’ द्वारा आपको किया गया पेमेंट 50 डॉलर के पार जाएगा, आप उसे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकते हैं। ‘Stripe’ पर आपको बता दिया जाएगा कि आपको कितने रुपए भेजे गए हैं और किस समयावधि के लिए। ट्वीट की रिप्लाइज में दिखने वाले एड के लिए ये रुपए आपको मिलेंगे। यानी, जितनी अधिक संख्या में रिप्लाई उस हिसाब से पैसे बढ़ते जाएँगे। प्लेटफॉर्म पर नोटिफिकेशन के माध्यम से भी आपको बता दिया जाएगा कि कितने रुपए भेजे गए हैं।
ट्वीट रिप्लाइज से पैसे कैसे कमाएँ? – जानें प्रक्रिया
इसके लिए आपको सबसे पहले ट्विटर के ‘Monetization’ वाले सेक्शन में जाना होगा। इस लिंक पर क्लिक कर के आप सीधे वहाँ तक पहुँच सकते हैं। वहाँ आपको ‘जॉइन एन्ड सेटअप पेआउट्स’ विकल्प दिखेगा, जिस पर क्लिक करने के बाद आपको स्ट्राइप पर अकाउंट बनाने के लिए कहा जाएगा। कुल मिला कर इसे ऐसे समझिए कि आपके कंटेंट या ट्वीट की रिप्लाई में एड दिखाने की एवज में आपको ये पैसे दिए जाएँगे।
पहले ‘Monetization’ में जाएँ, फिर ‘Ads Revenue Sharing’ में
जितने ज्यादा लोग इस एड को देखेंगे उस हिसाब से आपके पैसे बढ़ेंगे। अगर किसी को ट्विटर के एड रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम से बाहर निकलना है तो वो पेड सपोर्ट से संपर्क कर के ऐसा कर सकता है। ये कार्यक्रम अब दुनिया के लगभग सभी देशों में उपलब्ध करा दिया गया है। ये क्रिएटर सब्सक्रिप्शन से बिलकुल अलग है। ज़रूरी नहीं है कि आपके पास केवल रीच बढ़ाने से ही पैसे आएँगे, इसके तहत अगर आप क्रिएटर नहीं हैं फिर भी आपकी कमाई हो सकती है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है। इस पूरे मॉनसून सत्र में वे सदन से निलंबित रहेंगे। राज्यसभा सभापति और देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर चीखने के बाद उन पर मंगलवार (8 अगस्त 2023) को यह कार्रवाई की गई। सदन के नेता पीयूष गोयल ने उनके निलंबन का प्रस्ताव रखा था।
विवाद एक प्वाइंट ऑफ ऑर्डर को लेकर हुआ। मणिपुर पर चर्चा की मांग को लेकर ब्रायन सदन में हंगामा कर रहे थे। जब सभापति ने पूछा कि आपका पॉइंट ऑफ ऑर्डर क्या है तो उनकी वाज तेज होती चली गई। वे मणिपुर पर तुरंत चर्चा चाहते थे। उनके इस रवैए पर सभापति ने नाराजगी जताई। बावजूद वे चीखते रहे।
इसके बाद पीयूष गोयल ने उनके खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव पेश किया। पीयूष गोयल ने कहा, “सदन की कार्यवाही में लगातार खलल डालने, सभापति की बात न मानने और सदन में लगातार अशांति पैदा करने के लिए मैं डेरेक ओ ब्रायन के खिलाफ बाकी सत्र के लिए निलंबन का प्रस्ताव पेश करता हूँ। इसे आसन ने मंजूर कर लिया।” इसके बाद सभापति धनखड़ ने कहा कि डेरेक ओ ब्रायन को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया जाता है और इस सत्र के लिए निलंबित किया जाता है।
TMC MP in Rajya Sabha Derek O'Brien suspended for the remainder of the current Parliament session "for unruly behaviour unbecoming of a Member of Rajya Sabha."
बता दें कि सदन के अंदर डेरेक ओ ब्रायन पहले भी कई बार चीखते हुए नजर आ चुके हैं। कुछ दिनों पहले भी वे प्रधानमंत्री के बयान की माँग करते हुए सदन में चीखने लगे थे। उस समय भी सभापति ने उन्हें डाँट लगाई थी। इससे पहले मौजूदा मॉनसून सत्र से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को निलंबित किया गया था।
फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात वामपंथी कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने एक बार फिर से झूठी खबर फैलाई है। प्रशांत भूषण ने रविवार (6 अगस्त, 2023) को सिंगर पिता और बेटी का वीडियो शेयर किया। वीडियो में दोनों बॉलीवुड के पुराने गाते दिखाई दे रहे हैं। प्रशांत भूषण ने वीडियो शेयर कर दावा किया कि दोनों मणिपुर के अलग-अलग समुदाय से हैं। इनमें से एक कुकी और दूसरा मैतेई है।
प्रशांत भूषण ने वीडियो शेयर लिखा, “कितना प्यारे और सुरीले हैं। हम पहले इंसान हैं। बाकी काल्पनिक है। इनमें से एक कुकी है और दूसरा सिजलिंग मणिपुर का मैतेई है। विविधता के साथ प्यार की सुंदरता।”
इसके बाद कई वामपंथियों और कॉन्ग्रेस समर्थकों ने भी वीडियो शेयर कर इसी तरह का दावा किया। प्रेम एम कुरियन नामक यूजर ने लिखा, “क्या सुंदर जोड़ी है, वाह। दिल को छू लेने वाला गीत। लेकिन कुछ और बात है जो इस गीत को खास बनाता है। दोनों गायक मणिपुरी हैं। एक मैतेई दूसरा कुकी। जब संभव था तब महत्वपूर्ण लोगों ने प्रयास किए होते तो क्या इस तरह के कई और प्यारे गीत नहीं होते? क्या इस अंतिम चरण में सबकुछ सही किया जा सकता है? सोशल मीडिया में सामान्य धारणा लगभग असंभव है। जिन लोगों ने यह सब शुरू किया। आग में विमान में डालने वाला ईंधन डालकर देखते रहे कि नफरती की आग जल रही है। उनकी कई पीढ़ियों को पापों का बोझ उठाना पड़ेगा।”
इस ट्वीट को अब तक 29 हजार से अधिक बार देखा जा सकता है।
कर्नल अमित कुमार नामक व्यक्ति ने भी वीडियो शेयर कर दोनों को कुकी और मैतेई बताया। साथ ही, किसी भी राजनीतिक या धार्मिक नेताओं के उकसावे में न आने और शांति बनाए रखने की अपील की।
Someone shared this beautiful message with wrong facts.. No problems I'm ready to take the troll.. let it go for #peace
— Col Amit Kumar ??INDIAN COMRADES ?? (@ColAmitkumar) August 5, 2023
वामपंथी कार्यकर्ता प्रशांत भूषण व अन्य कॉन्ग्रेस समर्थकों के झूठे दावे की पोल वीडियो में दिख रही लड़की ने ही खोल दी। फेसबुक पर एक पोस्ट कर शकीना मुखिया नामक लड़की ने बताया कि वह अपने पिता के साथ गाना गा रही है और वह मणिपुर से नहीं है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, “हम पुष्टि कर सकते हैं कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति शकीना मुखिया और उसके पिता विकास मुखिया हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हम मणिपुर से नहीं हैं और कुकी या मैतेई समुदायों के साथ हमारा कोई संबंध नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो के संबंध में किए गए दावे पूरी तरह ‘झूठे’ हैं और वायरल ट्वीट के जरिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
वीडियो में दिख रही लड़की के फेसबुक पोस्ट सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस समर्थक प्रेम एम कुरियन ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। वहीं, कर्नल अमित कुमार ने स्वीकार किया कि वीडियो को गलत जानकारी के साथ वायरल किया जा रहा है। हालाँकि, समय-समय पर झूठी खबरें फैलाने वाले प्रशांत भूषण ने अब तक न तो अपनी गलती मानी है और न ही ट्वीट डिलीट किया।
शकीना उत्तराखंड के देहरादून से हैं; मणिपुर से नहीं
शकीना मुखिया उत्तराखंड के देहरादून की मशहूर सिंगर हैं। 5 साल पहले ‘द वॉयस इंडिया किड्स’ नामक टीवी रियलिटी शो में आने के बाद से उनके कई वीडियो वायरल होते रहे हैं।शकीना मुखिया का एक यूट्यूब चैनल भी है। इसमें 126K से अधिक सब्सक्राइबर हैं।
यूट्यूब में शेयर किए गए वीडियो के अनुसार यह वीडियो इसी साल 25 मई को शेयर किया गया था। वीडियो के कैप्शन से भी स्पष्ट है कि वह अपने पिता, विकास मुखिया के साथ गा रही थीं।
शेकिना के यूट्यूब चैनल का स्क्रीनशॉट
मणिपुर ने हिंसक घटनाएँ लगातार हो रही हैं। निश्चित रूप से राज्य और केंद्र सरकार समेत सुरक्षा एजेंसियाँ शांति व्यवस्था कायम करने की कोशिश कर रहीं हैं लेकिन राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए सोशल मीडिया के जरिए फर्जी खबरें और अफवाह फैलाने से राज्य के हालात और भी खराब हो सकते हैं।
कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई के नेतृत्व में पार्टी ने संसद के मॉनसून सत्र में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत की, जिसका जवाब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि राहुल गाँधी पहले बोलेंगे, लेकिन उन्होंने नहीं बोला। इस दौरान विपक्ष ने भारी नारेबाजी की, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने पूछा कि आखिर निशिकांत दुबे के भाषण से विपक्ष इतना डर क्यों रहा है?
अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करने उठे दुबे ने कहा कि सत्ता पक्ष ने विपक्षी नेताओं को ध्यान सुना, अब वो भी हमें ध्यान से सुनें। गौरव गोगोई ने इस दौरान मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाने हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि जब गुजरात, त्रिपुरा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बदले गए, फिर मणिपुर के CM को क्यों नहीं हटाया गया? उन्होंने दावा किया कि मणिपुर के दोनों समुदायों (मैतेई और कुकी) में उन्होंने कभी कोई भेदभाव नहीं देखा, ये भाजपा की राजनीति से शुरू हुआ है।
वहीं प्रह्लाद जोशी ने पूछा कि हम राहुल गाँधी को सुनना चाहते थे, लेकिन आखिरी 5 मिनट में ऐसा क्या हुआ कि गौरव गोगोई को बोलने के लिए लाया गया? नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर राहुल गाँधी ने बहस की शुरुआत नहीं की, इस पर भाजपा ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर वो भाग क्यों रहे हैं? जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी ने राहुल गाँधी की तस्वीर ट्वीट कर लिखा था, “आज सदन में बोलेंगे जननायक।” भाजपा की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी बोलेंगी।
निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल गाँधी बड़े आदमी हैं, मोदी जैसी छोटी OBC जाति से माफी नहीं माँगेंगे। उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई ने पूरी संसद और पूरे देश को चुनौती दी कि वो मणिपुर नहीं गए। इस पर दुबे ने जवाब दिया कि उनके मामा मणिपुर में सीआरपीएफ के डीआईजी हुआ करते थे और उन्होंने अपना एक पाँव हिंसक हमले में गँवा दिया। उन्होंने बताया कि इसी कॉन्ग्रेस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि यही कॉन्ग्रेस पार्टी आज मणिपुर और राष्ट्रवाद की बात करती है।
निशिकांत दुबे ने इस दौरान असम में भी कॉन्ग्रेस पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मिजोरम में केवल 7% वोट के आधार पर कॉन्ग्रेस ने सरकार बना ली थी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी बजट सेशन में भी थे और मॉनसून सेशन में भी हैं, ऐसे में वो गए कहाँ हैं? उन्होंने याद दिलाया कि जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वो आए हैं, उसमें सिर्फ फैसले पर स्टे लगा है बल्कि जजमेंट नहीं आया है।
उन्होंने राहुल गाँधी के बयान “मैं सावरकर नहीं हूँ” पर निशाना साधते हुए कहा कि वो सावरकर हो भी नहीं सकते क्योंकि वीर सावरकर ने अपने जीवन के 28 वर्ष जेल में गुजारे। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के नेताओं से रैंडमली पूछ लेंगे कि I.N.D.I.A का फुल फॉर्म क्या है तो बता नहीं पाएँगे। दुबे ने कहा कि वो मणिपुर का शुक्रगुजार हैं कि इसी बहाने इतना इंडिया-इंडिया हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि ये अविश्वास प्रस्ताव नहीं है, ये विपक्ष का विश्वास प्रस्ताव है कि कौन उनके साथ है और कौन नहीं।
‘न्यूज क्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को चीनी फंडिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को घेरा है। उनसे देश से माफी माँगने को कहा है। पूछा है कि चीन से फंड लेने वाले ‘न्यूज क्लिक’ के साथ कॉन्ग्रेस क्यों खड़ी है। साथ ही राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से मिले पैसे को लेकर भी सवाल पूछा है।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ‘न्यूज क्लिक’ जैसे मीडिया संस्थानों के जरिए भारत विरोधी अभियान चलाया जाता है। वामपंथी और अन्य दल भी इनका सहयोग करते रहे हैं। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस का हाथ न्यूज क्लिक के साथ और न्यूज क्लिक के ऊपर चीन का हाथ। इसके लिए राहुल गाँधी को देश से माफी माँगनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन से पैसा कैसे लिया गया और इसका कहाँ-कहाँ इस्तेमाल हुआ।” ठाकुर ने कहा कि कॉन्ग्रेस को बताना चाहिए कि ‘न्यूज क्लिक’ को समर्थन की उसकी मजबूरी क्या है? उसने चीन से पैसा लेने वाले संस्थान को समर्थन क्यों दिया? उससे क्या-क्या लाभ हासिल किया?
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जब राहुल गाँधी सदन में आ रहे हैं तो उनको बताना चाहिए क्या ये खेल तभी शुरू हो गया था, जब सोनिया गाँधी और वे ओलंपिक गेम्स देखने चीन गए थे। जिस न्यूज क्लिक का शेयर कभी 10 रुपए का था, जो घाटे में थी, उसके शेयर 11 हजार रुपए में कैसे बिके?”
कांग्रेस का हाथ #Newsclick के साथ, न्यूज़क्लिक के ऊपर चाइना का हाथ!
राहुल गांधी जी सदन में बतायें की राजीव गांधी फ़ाउंडेशन में कैसे चीन से पैसा लिया, उसे कहाँ-कहाँ खर्च किया।
राहुल जी…चीन द्वारा फ़ंडेड न्यूज़क्लिक को आपने क्यों समर्थन दिया, उस से आपको क्या-क्या लाभ मिला? pic.twitter.com/Ot0pUUibF7
गौरतलब है कि अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित कर अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम के साथ चीनी सरकार के रिश्तों और ‘न्यूज क्लिक’ को मिल रही फंडिंग का खुलासा किया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है।” ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के मुद्दों को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है।
न्यूज क्लिक को लेकर हुए इस खुलासे के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में कहा था कि अभिसार शर्मा, रोहिणी सिंह और स्वाति चतुर्वेदी जैसे लोगों को केवल भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए चीन पैसा दे रहा है।
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को इस्लामी भीड़ ने जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। हमले को पूरे प्लान के साथ अंजाम दिया गया। इसके लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए थे। ऐसे ही ग्रुप में भेजे गए कुछ ऑडियो इंडिया टुडे ग्रुप को हाथ लगे हैं। इनसे पता चलता है कि हिंदुओं पर हमलों के लिए मुस्लिमों को भड़काया गया था।
ऑडियो भेजने वाले व्यक्ति ने 31 अगस्त को अपने समुदाय के लोगों को मेवात के शृंगार मंदिर के पास इकट्ठा होने को उकसाया। उनसे कहा कि वहाँ सौ-दौ सौ लोग होंगे, जिनमें 10-20 की हत्या तो की ही जा सकती है। शृंगार मंदिर, नल्हड़ के उस शिव मंदिर से करीब 45 मिनट दूर है जहाँ हिंदू श्रद्धालु हमले के दौरान घंटों बंधक की तरह फँसे रहे थे। जलाभिषेक यात्रा शृंगार मंदिर जाकर ही समाप्त होनी थी।
मेवात क्षेत्र के मुस्लिमों के वॉट्सऐप ग्रुप में भेजे गए इस ऑडियो में एक व्यक्ति को कहते हुए सुना जा सकता है,
“मुझे बताओ की मेवात की जमीन कायरों से भर गई है? 100-200 लोग होंगे, क्या हम उनमें से 10-20 को भी नहीं मार सकते? जिस हिसाब से उनकी गाड़ियाँ जलाई गई हैं, उसमें ही 10-20 को मार देना था। क्या मेवात वालों ने कंगन पहन लिए हैं? आज तुम्हारा मौका है। अगर तुम लोग हाथ उठाते हो, तो उतने लोग और आ जाएँगे। अगर तुम 10-20 को भी मारते हो, उतने और मारेंगे। आज ही वो दिन है। सबको एक दिन मरना है, आज नहीं तो कल।”
इसके बाद दूसरे व्यक्ति का ऑडियो ग्रुप में आता है, वो कहता है,
“भाई जितने भी इस ग्रुप में जो हैं बंदे, जितने भी हैं, 10 हैं, 20 हैं 50 हैं 100-150 है, जितने भी हैं, सब मुस्लिमों के ग्रुप में इसे बाँट दो। सऊदी अरब तक के ग्रुप में डाल दो। यहाँ तो सब छूट जाना है। या मौत आने से छूट जाए, या अपने आप। बीबी-बच्चे भी छूट जाएँगे। फिर अपने कौम पर बात बने तो बिल्कुल निडर होकर सामने खड़े हो। मैदान में से भागना बुजदिलों के काम है। या से बढ़ियाँ तुम चूड़ी पहन लो। जब यार खुदा के बंदों का गढ़ मेवात माना जाता है, यहाँ से सब बच के चले जाएँगे? कम से कम 20 को दफन कर दो। वीडियो बनाकर क्या करना? अपने समाज को बचाओ। सब वीडियो बनाने में जुटे रहोगे, तो काम कौन करेगा?”
बता दें कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद मंदिर पर मुस्लिमों की भीड़ ने हमला बोल दिया। लोगों पर पत्थर फेंके गए, गोलियां चलाई गईं। कई लोग घायल हुए। मंदिर के अंदर दो बार मुस्लिमों की भीड़ ने घुसने की कोशिश की। ये ऑडियो क्लिप बताते हैं कि हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरी तैयारी के साथ की गई। हिंदुओं पर हमला शुरू होने के बाद 45 किमी दूर सिंगार में भी हमला शुरू हो गया था। हरियाणा पुलिस अब इस ऑडियो की जाँच कर रही है।
गौरतलब है कि नूहं में 31 जुलाई को हिन्दुओं द्वारा आयोजित जलाभिषेक शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला करने के मामले में कई खुलासे हो रहे हैं। नूहं दंगा मामले में अब तक कुल 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 104 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। हिंसा के दौरान नूहं के साइबर पुलिस थाने पर भी हमला किया गया था। ये हमला सुनियोजित था। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने भी इसके सुनियोजित होने की बात कही है।
पुलिस अधिकारी ने सुनाई मंदिर से लोगों को बचाने की पूरी कहानी
हरियाणा के मेवात के नूहं जिले में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस दौरान नल्हड़ महादेव मंदिर में हिंदुओं के बंधक बनने की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) ममता सिंह खुद मौके पर पहुँची थीं। उनकी अगुवाई में पुलिस ने हिंदू श्रद्धालुओं को बचाया था। उन्होंने उस समय के हालात और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा था कि 35-36 साल के पुलिस करियर में ऐसे मौके कम ही आते हैं, जब आपका सामना इस तरह के हालात से होता है। हालात पर काबू पाना, लोगों को भरोसा दिलाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर ले जाने जैसी चुनौतियों से एक साथ जूझना पड़ता है।
7 अगस्त 2023 की रात राज्यसभा ने दिल्ली सेवा बिल पारित कर दिया। लेकिन इस दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। चड्ढा ने बिल पर चर्चा के दौरान सदन में इस विधेयक को चयन समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव तो पास नहीं हुआ, लेकिन जिन पाँच सांसदों के नाम से यह प्रस्ताव रखा गया उनका कहना है कि इसके बारे में उनसे सहमति नहीं ली गई थी।
इन सांसदों ने चड्ढा पर उनके ‘फर्जी दस्तखत’ का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। ये सांसद हैं- बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी, नरहरि अमीन, पी कोन्याक, बीजेडी के सस्मित पात्रा और एआईडीएमके सांसद थम्बी दुरई। पार्टी सांसद के आरोपों में घिरने के बाद आप ने सफाई देते हुए कहा है कि नियमानुसार चयन समिति को प्रस्ताव भेजने के लिए हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है। इसलिए जाली हस्ताक्षर के आरोप गलत है। सांसदों का नाम सद्भावना में दिया गया था, क्योंकि वे सदन के भीतर और बाहर चर्चा में भाग लेते रहे हैं।
वहीं प्रस्ताव पर जिन पाँच सांसदों के नाम थे, उनका कहना है कि उन्होंने इस पर दस्तखत नहीं किए थे। न ही उन्हें इस बात की किसी भी तरह जानकारी थी कि उनके नाम इस प्रस्ताव के समर्थन में शामिल किए जा रहे हैं। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने इसकी जाँच के आदेश दिए हैं। इन आरोपों के लेकर चड्ढा ने कहा, “विशेषाधिकार समिति को मुझे नोटिस भेजने दीजिए। मैं अपना जवाब समिति को दूँगा।”
राघव चड्ढा पर किसने क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में फर्जीवाड़ा करते-करते अब संसद भवन जैसे पवित्र स्थान पर भी फर्जीवाड़ा करके सदस्यों के फर्जी साइन कर रही है। उन्होंने इसे सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन बताया है। साथ ही कहा कि यह मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जाना चाहिए।
आम आदमी पार्टी दिल्ली में फर्जीवाड़ा करते-करते अब संसद भवन जैसे पवित्र स्थान पर भी फर्जीवाड़ा करके सदस्यों के फर्जी साइन कर रही है… pic.twitter.com/JbfAOoG8rn
वाईएसआरसीपी सांसद विजय साई रेड्डी ने कहा है, “जब भी कोई प्रस्ताव लाना होता है तो उन सदस्यों से परामर्श करना होता है जिनके नाम उसमें शामिल होते हैं। लेकिन राघव चड्ढा ने सदस्यों से परामर्श किए बिना उनके नाम शामिल कर दिए हैं। इसलिए कई सदस्यों ने राघव चड्ढा के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।”
बीजद के सस्मित पात्रा ने कहा है, “जब सदन में प्रस्ताव पेश किया जा रहा था मुझे पता चला कि राघव चड्ढा के पेश किए गए प्रस्ताव में मेरे नाम का उल्लेख किया गया था। उन्होंने मेरी मर्जी के बगैर प्रस्ताव में मेरा नाम डाल दिया। मुझे उम्मीद है कि सदन के सभापति कार्रवाई करेंगे। मैंने शिकायत दर्ज कराई है। जाहिर है, यह विशेषाधिकार का मामला है। हम सभी ने निजी तौर पर अपनी शिकायतें दर्ज की हैं।”
बीजेपी के नरहरि अमीन ने कहा,” राघव चड्ढा ने सेलेक्ट कमेटी में मेरा नाम शामिल किया. उन्होंने मुझसे पहले कोई सलाह-मशविरा नहीं किया और न ही मैंने इस पर अपनी सहमति दी। उन्होंने जो किया वह गलत था। मैंने किसी दस्तावेज पर अपना दस्तखत भी नहीं किया।”
थंबीदुरई ने कहा कि वह पहले ही राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की माँग कर चुके हैं। अन्नाद्रमुक ने कहा, “मैंने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति द्वारा उठाया जाए। प्रस्ताव में मेरा नाम कैसे शामिल किया गया, क्योंकि मैंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।”
जस्टिस नीलकंठ गंजू हत्याकांड की जम्मू-कश्मीर पुलिस दोबारा जाँच करेगी। 33 साल पहले उनकी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। राज्य जाँच एजेंसी (SIA) को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। एजेंसी ने आम लोगों से मदद की अपील की है।
1989 में जज नीलकंठ गंजू की हत्या की गई थी। उन्होंने ही पुलिस अधिकारी अमर चंद की 1966 में हुई हत्या के मामले में आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। फैसला सुनाए जाने के समय वे स्पेशल जज थे और बाद में हाई कोर्ट जज के तौर पर रिटायर हुए। जेकेएलएफ के सरगना यासीन मलिक के आदेश पर इस्लामी आतंकवादियों ने उन्हें कोर्ट के बाहर गोलियों से भून दिया था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी ने ‘रिटायर जज नीलकंठ गंजू हत्याकांड के पीछे की बड़ी साजिश’ की परतों को खोलने के लिए आम लोगों से मदद माँगी है, और नंबर के साथ ईमेल आईडी जारी करते हुए कहा है कि जानकारी साझा करने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। साथ ही प्रासंगिक जानकारी देने वाले को उचित रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। जनता से इस मर्डर केस से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए 8899004976 या ईमेल [email protected] पर संपर्क करने को कहा गया है।
नीलकंठ गंजू की हत्या
साल 1990 में कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन भारत के इतिहास का एक काला पन्ना है। कश्मीरी पंडितों की हत्या की शुरुआत साल 1989 से हो गई थी। इसमें सबसे नृशंस हत्या रिटार्यड जज नीलकंठ गंजू की थी। बीजेपी नेता टीका लाल टपलू की हत्या के सात हफ्ते बाद ही नीलकंठ गंजू की 4 नवंबर 1989 को श्रीनर हाई स्ट्रीट मार्केट के पास स्थित हाईकोर्ट के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद दो घंटे तक उनका शव सड़क पर ही पड़ा रहा था। उनकी हत्या के बाद, रेडियो कश्मीर पर एक घोषणा की गई, “अज्ञात हमलावरों ने श्रीनगर के महाराज बाजार में एक पूर्व सत्र न्यायाधीश की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में यासीन मलिक ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। इसे आतंकी मकबूल भट की मौत का बदला बताया था।
In a fitting and praiseworthy rebuke to the Supreme court, the Government of India has decided to reopen cases of Kashmiri Hindu genocide.
The first to be investigated is the brutal murder of Judge Neelkanth Ganjoo by Yasin Malik's terror group, shown here in the Kashmir Files. pic.twitter.com/ufb5IVeN7L
मकबूल भट जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (JKLF) का संस्थापक था। उसने 1966 में सीआईडी सब इंस्पेक्टर अमर चंद की हत्या कर दी। अगस्त 1968 में मकबूल भट को तत्कालीन सेशन जज नीलकंठ गंजू ने फाँसी की सजा सुनाई। मगर वह तिहाड़ जेल से भाग गया और पाकिस्तान चला गया। साल 1976 में उसने कश्मीर के कुपवाड़ा स्थित एक बैंक में डाका डाला और मैनेजर की हत्या की। इस दौरान वह पकड़ा गया और दोबारा उसे फाँसी की सजा सुनाई गई। मकबूल के आतंकी संगठन ने उसे जेल से छुड़ाने के प्रयास में इंग्लैंड स्थित भारतीय उच्चायोग रविंद्र म्हात्रे का अपहरण कर हत्या कर दी। इसके बाद साल 1984 में उसे फाँसी पर लटका दिया।
दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा से भी पास हो गया है। सोमवार (7 अगस्त 2023) की रात संसद के उच्च सदन में 131 मत केंद्र सरकार के इस बिल के पक्ष में पड़े। वहीं विरोध में 102 वोट पड़े। लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका है। अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही कानून बन जाएगा।
इससे पहले सदन में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक व्यवस्था ठीक करने लिए लाया गया है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम पर नागपुर से इशारा लेने का आरोप लगता है। मैं आपकी बात मान लेता हूं। लेकिन नागपुर तो भारत का हिस्सा है। रूस या चीन नहीं है। आप रूस और चीन से इशारा लेते हैं।
बता दें कि राज्यसभा में सोमवार को केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सर्विस बिल पेश किया। दिनभर के बहस के बाद गृह मंत्री जवाब देने आए तो उन्होंने विपक्ष को चैलेंज दिया कि इस बिल को गिराकर दिखाओ। उन्होंने कहा- 8 से 10 अगस्त तक लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, इसलिए विपक्ष मणिपुर पर 11 अगस्त को चर्चा करे।
उन्होंने कहा कि यह बिल पूर्व की तरह प्रधानमंत्रियों की सदस्यता बचाने नहीं लाए। इमरजेंसी लगाने के लिए नहीं लाया गया है। गृहमंत्री शाह के यह कहते ही कॉन्ग्रेस के सांसद भड़क गए। इस पर अमित शाह ने कहा, “कॉन्ग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं है। आपने देश को इमरजेंसी दी थी। AAP का जन्म कॉन्ग्रेस को गाली देकर हुआ। खड़गे साहब आप जिस गठबंधन को बचाने के लिए इस बिल का विरोध कर रहे हैं, सदन के बाद केजरीवाल साहब आप से मुँह मोड़ लेंगे।”
कांग्रेस के विरोध के बाद आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ। उन्होंने (AAP) कांग्रेस के खिलाफ लगभग तीन टन आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और अस्तित्व में आए और आज वे इस बिल के विरोध में कांग्रेस से समर्थन मांग रहे हैं। जिस वक्त यह बिल पास होगा, अरविंद केजरीवाल जी पलट जाएंगे, ठेंगा… pic.twitter.com/pDfniIRU7U
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ”आज जो बिल लेकर मैं इस महान सदन के सामने उपस्थित हुआ हूँ, उस बिल की चर्चा में डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी से लेकर अठावले जी तक 34 सम्माननीय सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। इसकी चर्चा के समय सभी ने अपनी-अपनी समझ के हिसाब से पक्ष और विपक्ष दोनों ने विचार रखे। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से पूरे सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि बिल का उद्देश्य केवल और केवल दिल्ली में सुचारू रूप से भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन हो, वो है।”
#WATCH उन्होंने (AAP सरकार) सतर्कता विभाग में अधिकारियों का तबादला कर दिया क्योंकि 'आबकारी घोटाले' से संबंधित फाइलें वहां पड़ी थीं: राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2023 पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह pic.twitter.com/6Vkur2Fjx3
उन्होंने कहा, ”अब किसी को भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन में विरोध है तो इसका तो मेरे पास कोई जवाब नहीं है, मगर मैं इतना जरूर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि बिल के एक भी प्रावधान से पहले जो व्यवस्था थी, जब इस देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस व्यवस्था में किंचित मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है।”
इस बिल का उद्देश्य दिल्ली में सुचारू रूप से भ्रष्टाचार मुक्त शासन हो। बिल के एक भी प्रावधान से, पहले जो व्यवस्था थी, उस व्यवस्था में एक इंच मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है: राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन (विधेयक) 2023 की राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित… pic.twitter.com/MmL1zVXkNi
गृह मंत्री ने कहा, ”मैं जो बिल लेकर आज उपस्थित हुआ हूँ वो महामहिम राष्ट्रपति जी के 19 मई 2023 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सेवाओं के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े अध्यादेश, जो उन्होंने प्रख्यापित किया था, उस अध्यादेश से बनी हुई व्यवस्था के स्थान पर विधि द्वारा बनी हुई व्यवस्था को प्रस्थापित करने के लिए बिल लाया हूँ. ये इसका मूल उद्देश्य है।”
गृह मंत्री शाह ने आगे कहा, ”मैं दिल्ली की स्थिति को थोड़े शब्दों में जरूर सदन के सामने रखना चाहूँगा। दिल्ली कई मायनों में सभी राज्यों से अलग प्रदेश है क्योंकि यहाँ संसद भवन भी है, कई सारे इंस्टीट्यूशन का स्टेटस एंजॉय करने वाली संवैधानिक हस्तियाँ यहाँ विराजमान होती हैं, सुप्रीम कोर्ट, एंबेसीज यहाँ हैं और बार-बार दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष यहाँ पर चर्चा करने के लिए आते हैं. इसीलिए दिल्ली को यूनियन टेरिटरी बनाया गया है। स्टेट लिस्ट के मुद्दों पर यहाँ की सरकार को सीमित मात्रा में अधिकार दिए गए हैं। दिल्ली एक असेंबली के साथ मगर सीमित अधिकारों के साथ यूनियन टेरिटरी है। तो आगे जिसको भी दिल्ली में चुनाव लड़ना है, दिल्ली के एक कैरेक्टर को समझना चाहिए।”
‘देश का प्रधानमंत्री बनना है तो संसद का चुनाव लड़ना पड़ता है’
उन्होंने कहा, ”मैं जब पंचायत का चुनाव लड़ता हूँ और पार्लियामेंट के अधिकारों की माँग करता हूँ तो ये संवैधानिक रूप से पूरे नहीं हो सकते हैं। हम जब चुनाव लड़ते हैं दिल्ली के एमएलए का या चीफ मिनिस्टर की दावेदारी करते हैं तब हमको मालूम होना चाहिए कि यूनियन टेरिटरीज, और सपना तो मुझे कोई भी आ सकता है, मगर चुनाव मैं जो लड़ता हूँ। इसके हिसाब से भी हो सकता है, स्वप्न पूरे हो सकते हैं। अगर देश का प्रधानमंत्री बनना है तो संसद का चुनाव लड़ना पड़ता है दिल्ली के एमएलए का चुनाव नहीं लड़ना पड़ता है।”
अमित शाह ने बताया दिल्ली का इतिहास
केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, ”दिल्ली के शासन का इतिहास भी मैं जरा बताना चाहता हूँ। स्वतंत्रता पूर्व भी दिल्ली कई सालों से किसी न किसी प्रकार से देश की सत्ता का केंद्र रहा, राजधानी रहा। 1911 में दिल्ली तहसील और महरौली थाना इन दोनों को अलग करके राजधानी बनाया गया। बाद में वर्ष 1919 और 1935 के अधिनियमों में उस वक्त की ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली को चीफ कमिश्नर प्रोविंस माना. .स्वतंत्रता के समय जब संविधान बनने की प्रक्रिया हुई, उस वक्त दिल्ली के स्टेटस के बारे में पट्टाभि सीतारमैया और बाबा साहेब अंबेडकर की एक कमेटी बनी और ड्राफ्टिंग कमेटी ने दिल्ली की स्थिति को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया।”