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मेवात में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने किया हमला, लेकिन जामिया के कट्टरपंथियों के लिए नूहं के मुस्लिम ही ‘पीड़ित’

हरियाणा के मेवात के नूहं में हिंदुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ के हमले के एक सप्ताह बाद ही, घटना की वास्तविकता को बदलने की कोशिश की जा रही है। लोगों को भ्रमित करने के लिए झूठ का जाल बुना जा रहा है। इसकी शुरुआत की गई है अक्सर विवादों में रहने वाले विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के एक समूह द्वारा। 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शनकारी मुस्लिम छात्रों के अनुसार, नूहं में हिंदू भक्तों पर हमला करने वाले सशस्त्र हमलावर ‘पीड़ित’ थे, जबकि मुस्लिम कट्टरपंथी दंगाइयों के हाथों पीड़ित होने वाले हिन्दू ‘हमलावर’। हालाँकि, इसमें कुछ नया नहीं है, यह वही वामपंथी तरीका है जिसमें अक्सर मुस्लिम दंगाइयों को मासूम दिखाने की कोशिश की जाती रही है। ठीक उसी तरह नूहं में पीड़ित हिंदुओं को ही हमलावर के तौर पर प्रचारित करने की कोशिश जामिया मिल्लिया के छात्रों के इस समूह ने की है।

स्वराज्य पत्रिका की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शन का एक वीडियो साझा किया है। इसमें छात्रों के एक समूह को नूहं में हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ नरसंहार बताते देखा जा सकता है। इन छात्रों का कहना ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हथियारों के साथ वहाँ जाने का आरोप लगाया गया है, जबकि स्थानीय लोगों का यह स्पष्ट कहना है कि वे पूरी तरह से ‘निहत्थे’ थे।

यह लीपापोती तब की जा रही है जब जलाभिषेक यात्रा में भाग लेने वाले और क्षेत्र के नल्हड़ शिव मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं पर हमले की खबरों की भरमार है। पीड़ितों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।

जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला, राम मंदिर में बनाया बंधक 

कई वामपंथी मीडिया संस्थानों और मुस्लिम समूहों द्वारा नूहं दंगों के आरोपितों के अपराध को छिपाने और लीपापोती की कोशिश तब हो रही है जब हिन्दुओं पर हमले के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। जिसमें अल्लाह-हू-अकबर” के नारे लगाने, मुस्लिम भीड़ द्वारा की जा रही पत्थरबाजी, गोलीबारी और हमलों को देखा जा सकता है। यहाँ तक कि इस दंगे में दो होम गार्डों की जान चली गई और लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मी भीं घायल हो गए। मुस्लिम दंगाई भीड़ ने हिन्दुओं की जलाभिषेक यात्रा पर अचानक पथराव किया था और वाहनों में आग लगा दी थी। जिससे अभी तक कुल 6 लोगों के मौत की खबर है। 

ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज कई एफआईआर से जो जानकारी हासिल की है। उसके अनुसार, सब डिविजन टौरू के पीएचईएस के सब डिविजनल इंजीनियर आदीब हुसैन की शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक से पता चला हैं कि 400-500 की मुस्लिम दंगाई भीड़ ने नूहं के वार्ड नंबर 9 में राम मंदिर में 35-40 भक्तों को बंधक बना लिया था।

अपनी शिकायत में हुसैन ने कहा कि वह प्रबंध अधिकारी ओमबीर सिंह के साथ तैनात थे तभी मुस्लिम समुदाय के 700-800 दंगाइयों ने पथराव शुरू कर दिया और भक्तों और पुलिस कर्मियों पर अवैध हथियारों से गोलीबारी की। यहाँ तक कि दंगाइयों ने सरकारी और निजी वाहनों को भी जला दिया। 

बता दें कि हमले के समय हुसैन और सिंह नूहं बस स्टैंड पर थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि सैकड़ों दंगाइयों ने 35-40 श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया है और उन्हें वार्ड नंबर 9 में राम मंदिर में बंधक बना लिया। हुसैन ने उल्लेख किया कि मुस्लिम दंगाई भीड़ हिन्दुओं को राम मंदिर परिसर से बाहर नहीं जाने दे रही थी। जब वे घटनास्थल पर पहुँचे, तो 400-500 दंगाइयों ने लाठी, डंडे, पत्थर और अवैध हथियारों के साथ उन पर हमला बोल दिया। 

पहले से थी हिंसा की प्लानिंग, 6 पीड़ितों में से 5 गैर-मुस्लिम

नूहं हिंसा में दो होम गार्ड के अलावा 4 अन्य लोग मारे गए हैं, जिनमें से 3 हिंदू थे। जलाभिषेक यात्रा में भाग लेने वाले अभिषेक राजपूत भी इसी खूनी दंगाई भीड़ के शिकार थे, दंगाइयों न केवल उन पर गोली चलाई, बल्कि उनका गला भी काट दिया और पत्थरों से उनका सिर कुचल दिया, जो कि तालिबान और आईएसआईएस आतंकवादियों के तरीकों से काफी मिलता-जुलता है। 

दंगाई इस तरह से योजनाबद्ध थे कि उन्होंने जलाभिषेक यात्रा के दौरान न केवल जुलूस में भाग लेने वाले हिन्दुओं को शिकार बनाया, बल्कि स्थानीय हिंदू भी, इन मुस्लिम दंगाइयों के निशाने पर थे। भले ही उन्होंने जलाभिषेक यात्रा में भाग लिया हो या नहीं। इसी दंगाई भीड़ ने मिठाई विक्रेता शक्ति सैनी की भी हत्या कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सैनी को दुकान से उठाकर कहीं और ले जाया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई और फिर शव को उसी बड़कली चौराहे पर फेंक दिया गया, जिसके आसपास उनकी दुकान थी।

इसी तरह, एक हिंदू भक्त और बजरंग दल कार्यकर्ता, प्रदीप कुमार भी उस हिंसा का शिकार थे, जिसकी मुस्लिम दंगाइयों ने योजना बनाई थी। गिरफ्तार किए गए आरोपितों से पूछताछ में पता चला है कि कई व्हाट्सएप ग्रुप 21 जुलाई से 23 जुलाई के बीच बनाए गए थे। जिसमें 31 जुलाई को होने वाले हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हमला करने के लिए पत्थर इकट्ठा करने और काँच की बोतलें इकट्ठा करने के लिए ग्रुप एडमिन को जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं थी।

वहीं नूहं हिंसा पर मीडिया रिपोर्ट, मामले में दर्ज की गई एफआईआर, और साजिश की प्रकृति भी इसे पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम देने की तरफ इशारा करते हैं। फिर भी उनके वैचारिक भाई, लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्ट, और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मुस्लिम छात्र जैसे कई लोग वास्तविकता को विकृत करने और पीड़ितों को हमलावर के रूप में प्रोजेक्ट करने के लिए दिन-रात लगे हुए हैं। 

राजस्थान में पिता ने की बेटी की चिता में कूदने की कोशिश, गैंगरेप कर 14 साल की लड़की को कोयला भट्टी में जला दिया था

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में गैंगरेप के बाद कोयला भट्टी में जलाई गई 14 वर्षीय नाबालिग लड़की का सोमवार (7 अगस्त, 2023) को अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान लड़की के पिता ने बेटी की जलती चिता पर कूदकर जान देने की कोशिश की। इससे वह घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह बचाकर उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहीं पीड़ित परिवार ने पुलिस पर त्वरित कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेप पीड़िता का भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र के नरसिंहपुरा गाँव में अंतिम संस्कार किया जा रहा था। बेटी के अधजले शव के अवशेषों को जलता देख पिता के सब्र का बाँध टूट गया। बेटी के साथ हुई हैवानियत से निराश पिता ने जलती चिता में कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उनके ऐसा करते ही श्मशान घाट में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लेकिन वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें बचा लिया। इस दौरान मृतक लड़की का एक रिश्तेदार भी बेहोश हो गया। इसके बाद दोनों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

राजकीय महात्मा गाँधी हॉस्पिटल के डायरेक्टर अरुण गौड़ का कहना है कि मृतक लड़की के पिता की हालत अब खतरे से बाहर है। वह होश में हैं। ब्लड प्रेशर, ईसीजी, शुगर समेत सभी जाँच सामान्य हैं। डॉक्टरों की निगरानी में आवश्यक इलाज दिया जा रहा है।

पुलिस ने नहीं की त्वरित कार्रवाई

स्थानीय ग्राम पंचायत के सदस्य और मृतक लड़की के चाचा से इंडियन एक्सप्रेस ने बात की। इस बातचीत में उन्होंने कहा है, “2 अगस्त को जब लड़की शाम तक नहीं लौटी थी तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए मैं पुलिस स्टेशन गया था। मैं उसका आधार कार्ड और राशन कार्ड लेकर गया था। लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाए उसकी उम्र, उसके स्कूल प्रमाण-पत्र, मार्कशीट आदि का सबूत माँगना शुरू कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा है कि यदि शिकायत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई की होती तो लड़की की जीवित होती। पुलिस पर निष्क्रियता के आरोप लगने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने थाने के एसआई को निलंबित कर दिया है। साथ ही एसएचओ के निलंबन का भी आदेश दिया गया है।

क्या है मामला

राजस्थान के भीलवाड़ा में बुधवार (2 अगस्त, 2023) को 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर कोयला भट्टी में जलाने का मामला सामने आया था। मृतक लड़की अपनी माँ के साथ बकरियाँ चराने गई थी। दोपहर में माँ बकरी लेकर घर वापस आ गई। लेकिन लड़की घर नहीं पहुँची। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब लड़की घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गाँव के खेतों से लेकर आसपास के रिश्तेदारों तक के घर तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।

लगातार जारी तलाश के बीच रात करीब 10 बजे गाँव के बाहर कालबेलियों के डेरे के पास कोयला बनाने वाली एक भट्टी जलती दिखाई दी। चूँकि बारिश के दिनों में भट्टी नहीं जलाई जाती है। ऐसे में लोगों को शक हुआ। इस पर भट्टी के पास जाकर देखने पर वहाँ लड़की के जूते पड़े दिखाई दिए। साथ ही भट्टी में लड़की के हाथ में पहना हुआ चाँदी का कड़ा और हड्डी के टुकड़े मिले। इसके बाद ग्रामीणों कालबेलियों को पकड़कर उनसे पूछताछ की। इस पर तीन लोगों ने गैंगरेप कर भट्टी में जलाने की बात कही।

पुलिस की जाँच में यह सामने आया है कि आरोपित नाबालिग लड़की को पकड़कर दोपहर करीब 2 बजे तक उसके साथ गैंगरेप करते रहे। इसके बाद जब उसके लापता होने की सूचना फैली तो आरोपितों ने लड़की को मारने का प्लान बनाया। इसके लिए सबसे पहले उन लोगों ने अपनी पत्नियों को इसकी सूचना दी। फिर पत्नियों की सहायता से लड़की को भट्टी में डालकर जला दिया। बाद में अधजला सिर और छाती का हिस्सा भट्टी से निकाल कर तालाब में फेंक दिया। आरोपितों ने 4 महीने पहले मृतक लड़की के पिता से खेत किराए पर लिया था। इसके बाद वे वहीं झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। इस मामले में पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

CBI जाँच की निगरानी के लिए अधिकारी, 42 SIT, 3 पूर्व महिला जजों की न्यायिक समिति: जानिए मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

मणिपुर हिंसा मामले में सोमवार (7 अगस्त, 2023) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने हिंसा की जाँच तथा राहत व पुनर्वास के काम की देखरेख के लिए हाई कोर्ट की 3 रिटायर्ड महिला जजों की न्यायिक समिति बनाई है। साथ ही सीबीआई (CBI) जाँच की निगरानी के लिए अधिकारी की नियुक्ति की है। वहीं, राज्य सरकार 42 SIT का गठन उन मामलों की जाँच के लिए करेगी जो सीबीआई के पास नहीं हैं।

मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता में न्यायिक कमिटी बनाई। इस कमिटी में दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन और बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिनी पनसाकर जोशी सदस्य के रूप में होंगी। यह कमिटी मुआवजे और पुनर्वास अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह न्यायिक कमिटी मणिपुर में हुई हिंसक घटनाओं की सीबीआई और मणिपुर पुलिस द्वारा की जा रही जाँच की निगरानी भी करेगी। यही नहीं, यह कमिटी राज्य में चल रहे राहत और बचाव कार्य, मुआवजा, पुनर्वास, समेत सभी मानवीय मुद्दों की देखरेख करेगी।

इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और एनआईए अधिकारी दत्तात्रेय पडसलगीकर भी जाँच एजेंसियों द्वारा विभिन्न स्तर पर की जा रही जाँच की निगरानी करेंगे। वह जाँच कर मामले की रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार ने यौन हिंसा से जुड़ी 11 एफआईआर सीबीआई को ट्रांसफर करने की बात कही थी। इसे कोर्ट द्वारा मंजूरी दे दी गई है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सीबीआई टीम में कम से कम 5 अधिकारी डीएसपी रैंक के हों। ये अधिकारी ऐसे राज्यों से शामिल किए जाएँ जहाँ हिंदी बोली जाती है।

मणिपुर में हुई हिंसक घटनाओं की जाँच के लिए राज्य सरकार ने 42 एसआईटी बनाने की बात कही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर SIT में कम से कम एक इंस्पेक्टर दूसरे राज्य से होना चाहिए। साथ ही, दूसरे राज्यों से डीआजी रैंक के 6 अधिकारी होंगे।

नूहं में बुलडोजर अभियान पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, अब तक 750+ अवैध निर्माण जमींदोज

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार (7 अगस्त, 2023) को अवैध निर्माण के खिलाफ हरियाणा सरकार के बुलडोजर अभियान पर रोक लगा दी है। जिसके बाद नूहं, गुरुग्राम में दंगों के आरोपितों और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ चल रहा बुलडोजर अभियान थम गया है। नूहं प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बाद तत्काल प्रभाव से अभियान रोक दिया है। वहीं हाई कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार से जवाब-तलब भी किया है।

बता दें कि नूहं, मेवात और गुरुग्राम में अवैध निर्माण और वन भूमि पर अतिक्रमण हटाओ बुलडोजर अभियान 31 जुलाई को ब्रजमंडल जलाभिषेक शोभायात्रा पर पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाओं के बाद शुरू किया गया था। हालाँकि, प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण के खिलाफ सामान्य अभियान बताया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, अभियान के दायरे में आए लोगों का पक्ष वकील मोहम्मद अरशद ने हाई कोर्ट ने में रखा। जस्टिस गुरुमीत सिंह संधावालिया की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण अभियान पर रोक लगाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने प्रभावित पक्षों को कोई नोटिस दिए बिना अवैध निर्माण को गिराने के लिए सरकार के बुलडोजर अभियान पर भी सवाल उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नूहं में अवैध निर्माण के खिलाफ हरियाणा के खट्टर सरकार के बुलडोजर अभियान पर रोक लगाने का उच्च न्यायालय का आदेश तब आया, जब अभियान पाँचवें दिन में प्रवेश कर गया था। ऐसे में यदि बात करें अब तक के अभियान में कितने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई तो नूहं प्रशासन ने रविवार को 94 घरों और 212 अन्य अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया था, जिससे पिछले लगभग एक सप्ताह में ध्वस्त की गई इमारतों की कुल संख्या 750 से अधिक हो गई है।

गौरतलब है कि नूहं में 31 जुलाई को हिन्दुओं द्वारा आयोजित जलाभिषेक शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला करने के बाद हरियाणा सरकार द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान शुरू किया गया था। वहीं नूहं दंगा मामले में अब तक कुल 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 80 को एहतियातन हिरासत में लिया गया है तथा 104 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। 

राहुल गाँधी से शादी को तैयार हैं शर्लिन चोपड़ा, पर कॉन्ग्रेस नेता को माननी होगी हिरोइन की एक शर्त: Video वायरल

अपने बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाली हिरोइन शर्लिन चोपड़ा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें उनसे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से शादी करने को लेकर सवाल पूछा जाता है। जवाब में वह अपनी रजामंदी जताती हैं। लेकिन एक शर्त भी रखती हैं। इसके मुताबिक वह शादी के बाद भी अपना सरनेम नहीं बदलेंगी।

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि शर्लिन चोपड़ा फैंस से घिरी हुई हैं। इसी दौरान एक पैपराजी उनसे पूछता है- आप राहुल गाँधी से शादी करना चाहेंगी। जवाब में शर्लिन कहती हैं, “हाँ क्यों नहीं। लेकिन मैं चाहूँगी कि शादी के बाद मेरा सरनेम चोपड़ा ही रहे।” यह वीडियो ऐसे वक्त में वायरल हुआ है जब कॉन्ग्रेस नेता की लोकसभा सदस्यता फिर से बहाल कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है’ वाले बयान को लेकर गुजरात कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इस मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने भी उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सजा पर रोक लगा दी थी। उसके बाद कॉन्ग्रेस नेता की संसद सदस्यता फिर से बहाल कर दी गई है। वे केरल की वायनाड सीट से सांसद हैं।

कॉन्ग्रेस नेता को कुछ समय पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने शादी करने की सलाह दी थी। पटना में विपक्षी दलों की बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू यादव ने कॉन्ग्रेस नेता से यह बात कही थी। बाद में जब सोनिया गाँधी ने हरियाणा के महिलाओं के एक समूह से मुलाकात की थी तब भी उनकी शादी पर चर्चा हुई थी। उस समय सोनिया ने महिलाओं से कहा था कि वे लोग लड़की खोज दें तो वह उनकी (राहुल गाँधी) शादी करवा देंगी।

पिछले साल बॉलीवुड के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर वह चर्चा में रहीं थी। ‘बिग बॉस 16’ में साजिद खान को प्रतिभागी के तौर पर शामिल करने पर कनिष्का सोनी, शर्लिन चोपड़ा और मंदाना करीमी जैसे अभिनेत्रियों ने नाराजगी जताई थी। इन अभिनेत्रियों ने मीटू कैंपेन के दौरान साजिद खान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे।

साजिद खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद शर्लिन चोपड़ा ने कहा था, “मैंने हाल ही में MeToo के आरोपित साजिद खान के खिलाफ यौन शोषण और धमकी देने की शिकायत दर्ज करवाई है। इस दौरान पुलिस ने मुझसे पूछा कि यह घटना कब हुई थी। इस पर मैंने जवाब दिया कि यह 2005 में हुई थी। उन्होंने मुझसे आगे पूछा कि मुझे उन तक पहुँचने में इतना समय क्यों लगा? मैंने कहा कि तब मुझमें साजिद खान जैसे बड़े नाम के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं थी।”

कश्मीरी पंडित माँ-बेटी दोनों से रेप… दोनों के योनि में मारी गोली: कश्मीर फाइल्स फिल्म में जो दिखाया, उससे भी भयावह और क्रूर है इस्लामी आतंक

कश्मीरी हिंदुओं का दर्द और इस्लामी आतंकवाद के काले चेहरे को उजागर करती फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में जो दिखाया गया है, जम्मू-कश्मीर की हालत उससे कहीं अधिक भयानक थी। यह कहना है रिटायर्ड IPS अधिकारी और दो बार कश्मीर के आईजीपी रहे एसएम सहाय का। सहाय ने कश्मीरी हिंदू माँ-बेटी के साथ हुए बलात्कार और फिर हत्या की भयावह दास्तान सुनाई है।

‘बीयर बायसेप्स’ नामक यूट्यूब चैनल पर जम्मू-कश्मीर के हालातों पर बात करते हुए एसएन सहाय ने कहा है, “फिल्म में तो बहुत कुछ नाटकीय ढंग से दिखाया गया है। लेकिन, वहाँ जो कुछ भी हो रहा था वह और भी भयानक था। मुझे याद है, एक सुबह मैं जल्दी उठा और मुझे क्रालखुद जाना पड़ा। जहाँ एक कश्मीरी हिंदू महिला और उसकी बेटी एक छोटे से घर में रहती थीं। दोनों के साथ बलात्कार किया गया इसके बाद उन्हें योनि में गोली मार दी गई थी। लड़की की मौके पर ही मौत हो गई थी। जब मैं वहाँ पहुँचा था लड़की की माँ जिंदा थी। मैं उसे लेकर हॉस्पिटल जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई। इससे भयानक भी कुछ हो सकता है?”

राष्ट्रपति पुरस्कार और वीरता पुरस्कार विजेता सहाय ने आगे कहा, “फ़िल्म में जो कुछ भी दिखाने की कोशिश की गई है वहाँ की सच्चाई कहीं अधिक दिल दहलाने वाली है। वह महिला जब जीवित थी तो उसने पूछा कि मेरी लड़की कैसी है? शायद उसे यह पता था कि अब वह नहीं बचेगी। लेकिन उसको खुद से ज्यादा अपनी बेटी की चिंता थी। वह अपनी बेटी के बारे में ही जानना चाहती थी।”

रहने को ठिकाना और खाना माँगा, फिर किया माँ बेटी का रेप

रिटायर्ड आईपीएस एसएम सहाय द्वारा बताई गई यह घटना 30 मार्च, 1992 की है। रात करीब 8:30 बजे इस्लामी आतंकी एक रिटायर्ड ट्रक ड्राइवर सोहन लाल के घर में घुस आते हैं। इसके बाद हथियारबंद आतंकियों ने सोहन लाल से खाना और रुकने के लिए स्थान की माँग की। सोहन लाल के परिवार ने आतंकियों के लिए ठहरने और खाने का इंतजाम किया। करीब 2 घण्टे बाद सोहन लाल और उसकी पत्नी ने देखा कि उनकी बेटी मदद के लिए चिल्ला रही है। जब आतंकियों से बचाने के लिए दोनों वहाँ पहुँचे तो उन्होंने सोहन लाल को गोली मार दी। इसके बाद उन लोगों ने विमला और उनकी बेटी अर्चना के साथ बलात्कार किया। फिर दोनों को गोली मार दी।

साभार: THE HUMAN RIGHTS CRISIS IN KASHMIR

मीडिया में नहीं है जिक्र

बलात्कार और हत्या की इस घटना का स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ। लेकिन, इस्लामी आतंकियों की क्रूरता को दर्शाती क्रॉलखुद रेप (Kralkhud Rape Case) की घटना का जिक्र न मीडिया में कहीं नहीं है। हो सकता है कि स्थानीय अखबारों में इसका जिक्र हो लेकिन नेशनल मीडिया में ऐसी भयावह घटनाओं के न होने से यह साफ पता चलता है कि इस्लामी आतंकवाद को छिपाने के लिए किस हद तक प्रयास किए गए।

साभार: Kashmir A Kaleidoscopic View (D. N. Dhar)

ऐसी भीषण घटनाओं के बारे में अब या तो मौके पर तैनात किसी पुलिस अधिकारी से पता चलता है या फिर किसी किताब या रिसर्च पेपर के एक पैराग्राफ में कहानी शुरू होती है और वहीं खत्म हो जाती है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि ऐसी घटनाओं पर एक पैराग्राफ नहीं बल्कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी कई फ़िल्में बन सकतीं हैं।

अब बिहार के जेल में ही रखे जाएँगे मनीष कश्यप, बेटे को देख माँ की आँखों से बहने लगे आँसू: स्वागत के लिए बड़ी संख्या में उमड़े लोग

तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों के खिलाफ हिंसा की फेक न्यूज फैलाने के आरोपित चर्चित यूट्यूबर 130 दिनों के बाद बिहार पहुँचे, जहाँ उन्हें बेतिया के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर की शिकायत पर दर्ज मामले में यहाँ पेश किया गया है। इसके साथ ही उन्हें अभी तमिलनाडु वापस भी नहीं भेजा जाएगा, क्योंकि कोर्ट ने उन्हें पटना भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि पटना-बेतिया की पेशी के बाद मनीष को कहीं ले जाने की कार्रवाई न की जाए। अभी उसे यहीं पर पुलिस की अभिरक्षा में रखा जाए।

पटना के बाद फिर से बेतिया लाया जाएगा मनीष

मनीष कश्यप के खिलाफ अकेले बेतिया में ही 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें से पाँच में उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इनमें से कुछ मामलों की पेशी आज थी। इन मामलों में बैंक के मैनेजर के अलावा बीजेपी विधायक से भी रंगदारी माँगने का मामला चल रहा है। इसीलिए कोर्ट ने कहा है कि मनीष को अभी बेतिया में ही रखा जाए। इसके बाद पटना में कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस वापस उसे बेतिया ही ले जाएगी। तमिलनाडु में चल रहे मामलों में उसकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी कराई जाएगी।

मनीष के समर्थकों ने की रिहाई की मांग

इससे पहले, सुबह बेतिया में मनीष कश्यप का जोरदार स्वागत किया। रेलवे स्टेशन से लेकर कोर्ट तक पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी। इस दौरान समर्थकों ने मनीष कश्यप के ऊपर फूल बरसा कर उनका स्वागत किया। तमिलनाडु की पुलिस सप्तक्रांति एक्सप्रेस से मनीष कश्यप को लेकर बिहार पहुँची। स्टेशन पर उनका स्वागत करने के लिए समर्थकों की बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। मनीष कश्यप को मदुरै स्थित जेल में बंद कर के रखा गया है।

एसपी ऑफिस में नहीं, कोर्ट परिसर में हुई माँ-भाई से मुलाकात

बेतिया में जैसे ही मनीष कश्यप को लेकर तमिलनाडु पुलिस पहुँची, ‘मनीष कश्यप ज़िंदाबाद’ और ‘मनीष कश्यप को रिहा करो’ के नारों से इलाका गूँज उठा। उन्हें एसपी ऑफिस में ले जाकर रखा गया, फिर कोर्ट में पेश किया गया। एसपी ऑफिस के बाहर भी यूट्यूबर की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ बेताब दिखी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसपी ऑफिस में मनीष की माँ और भाई पहुंचे थे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। इसके बाद तीनों की मुलाकात कोर्ट परिसर में हुई, जहाँ मनीष को देखकर उनकी माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।

ये भी पढ़ें : फूल बरसे, ज़िंदाबाद और ‘रिहा करो’ के नारे, जमा हुई बड़ी भीड़… बिहार में कुछ यूँ हुआ मनीष कश्यप का स्वागत

तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों पर फर्जी वीडियो बनाने का आरोप

बता दें कि मनीष कश्यप पर आरोप है कि उसने तमिलनाडु में बिहार के प्रवासी मजदूरों पर हमले से संबंधित एक गलत वीडियो प्रसारित किया था, जिसकी वजह से तमिलनाडु से लेकर बिहार तक भगदड़ की स्थिति बन गई थी। इस मामले में उन पर एनएसए भी दर्ज किया गया है। उन्होंने हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों को एक जगह चलाने और खुद को बिहार भेजने की माँग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं थी। अब स्थानीय कोर्ट के आदेश के दम पर वो बेतिया की जेल में ही रहेगा।

‘कॉन्ग्रेस, चीन और न्यूज़क्लिक एक गर्भनाल का हिस्सा’: अभिसार शर्मा वाले पोर्टल को चायनीज फंडिंग पर BJP का हल्ला बोल, कहा – चल रहा एंटी-इंडिया प्रोपेगंडा

भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वाले वामपंथी मीडिया पोर्टल न्यूज क्लिक का चीनी कनेक्शन सामने आया है। यूट्यूबर अभिसार शर्मा इसी मीडिया संस्थान से जुड़े हुए हैं। दरअसल, विदेशी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स ने खुलासा किया है कि न्यूज क्लिक को भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने के लिए चीन की ओर से फंडिंग दी जाती है, जिसमें भारत के कई पत्रकार सहित कई दूसरे लोग भी शामिल हैं।

वहीं जहाँ एक ओर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार (6 अगस्त, 2023) को लोकसभा में मीडिया में चाइनीज फंडिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में चीन के पैसे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाया गया। वहीं इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कड़े शब्दों में न्यूज़ क्लिक के समर्थक कॉन्ग्रेस और सहयोगी विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। 

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “कॉन्ग्रेस, चीन और न्यूज़क्लिक एक गर्भनाल का हिस्सा हैं। राहुल गाँधी की ‘नकली मोहब्बत की दुकान’ में चीनी सामान साफ देखा जा सकता है, चीन के प्रति उनका प्रेम देखा जा सकता है। वे भारत विरोधी एजेंडा चला रहे थे।”

उन्होंने आगे न्यूज़ क्लिक के समर्थक कॉन्ग्रेस और विपक्षी पार्टियों को घेरते हुए कहा,  “2021 में हमने न्यूज़क्लिक को बेनक़ाब किया कि कैसे विदेशी दुष्प्रचार भारत के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा है। इस भारत विरोधी अभियान में कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल उनके समर्थन में आए… चीनी कंपनियाँ नेविल रॉय सिंघम के माध्यम से न्यूज़क्लिक को फंडिंग कर रही थीं लेकिन उनके सेल्समैन भारत के कुछ लोग थे, जो उनके खिलाफ कार्रवाई होने पर उनके समर्थन में आ गए।”

न्यूज क्लिक की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीन के ग्लोबल मीडिया संस्थान से इसकी फंडिंग हुई है। उन्होंने बताया कि जब इस वेबसाइट के ऊपर रेड हुई तो सामने आया था कि एक विदेशी नेविल राय सिंघम ने इसकी फंडिंग की है। ठाकुर ने दावा किया कि नेविल राय को चीन फंडिंग करता है। उसका संबंध कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की प्रोपेगेंडा शाखा के साथ है। ये लोग एंटी इंडिया और ब्रेक इंडिया कैंपेन चलाते हैं। 

इससे पहले रविवार को भी अनुराग ठाकुर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “NYT से बहुत पहले, भारत लंबे समय से दुनिया को बताता रहा है कि न्यूज़क्लिक चीनी प्रचार का एक खतरनाक वैश्विक जाल है।”

नेविल रॉय और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के संबंधों को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट की ओर इशारा करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा, “इस बात की पुष्टि उन अखबारों ने की है, जिनके बारे में कॉन्ग्रेस बड़ी-बड़ी बातें करती हैं। हमने 2021 में ही न्यूजक्लिक के बारे में खुलासा कर दिया था कि कैसे ये विदेशी फंडिंग से एंटी इंडिया प्रोपेगेंडा चलाता है।”

अनुराग ठाकुर ने कहा, चाइनीज कम्पनियाँ नेविल राय सिंघम के माध्य्म से न्यूज क्लिक को फंडिंग कर रही थीं, लेकिन कुछ लोग भारत में उनके सेल्समैन बन गए थे। चीन के नैरेटिव को चलाने के लिए फ्री न्यूज के नाम पर फेक न्यूज परोसी जा रही थी और कॉन्ग्रेस व अन्य दल फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर इन देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े थे। 

गौरतलब है कि अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित कर अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया था।

बता दें कि ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में बताया है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के मुद्दों को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है।

नफरत की दुकान, चीनी सामान… संसद में उठा अभिसार शर्मा वाली Newsclick को चीन की फंडिंग का मुद्दा: बोले सांसद निशिकांत दुबे – स्वाति-रोहिणी को भी मिल रहे पैसे

वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ को मिली चीनी फंडिंग को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स ने खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद सोमवार (7 अगस्त, 2023) को लोकसभा में भी यह मुद्दा उठा। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ‘न्यूजक्लिक’ को देशद्रोही और टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्सा बताया। साथ ही कॉन्ग्रेस को चीन से मिली फंडिंग की जाँच तथा कॉन्ग्रेस के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की माँग की।

निशिकांत दुबे ने कहा है, “राहुल गाँधी की नफरत की दुकान पर चीनी समान बेचा जा रहा है। आज मैं एक सीरियस मुद्दा उठाना चाहता हूँ। न्यूयॉर्क टाइम्स में एक रिपोर्ट छपी है कि ‘न्यूजक्लिक’ जैसी संस्था को 38 करोड़ रुपए मिले हैं। इस रिपोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जो खुलासा किया था वही बताया गया है। ‘न्यूजक्लिक’ देशद्रोही गैंग, टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्सा है। यह भारत को खण्डित करना चाहता है। पुरकायस्थ इसका मालिक है। उसको पैसे कहाँ-कहाँ से मिले, नक्सलियों को कैसे दिए गए, कैसे माओवादियों को दिए गए।”

उन्होंने यह भी कहा है, “शर्मा (अभिसार), रोहिणी सिंह और स्वाति चतुर्वेदी जैसे लोगों को केवल भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए चीन पैसा दे रहा है। 2005 से लेकर 2014 तक चीनी सरकार ने कॉन्ग्रेस को पैसा दिया, जिसका FCRA लाइसेंस भारत सरकार ने कैंसिल किया। जब 2008 में ओलंपिक हुआ तो सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को बुलाया गया। 2017 में जब डोकलाम में विवाद मचा हुआ था, तब ये लोग चीन से बातचीत कर रहे थे। तिब्बत के बाद ‘हिंदी चीनी भाई-भाई’ वाली नेहरू की जो नीति थी उस नीति को कॉन्ग्रेस निभाना चाहती है। ये भारत का विभाजन करना चाहते हैं।”

निशिकांत दुबे ने आगे कहा है, “कॉन्ग्रेस चीन के साथ मिलकर भारत को तहस नहस करना चाहती है। सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकारों के माध्यम से और चीन के माध्यम से देश में अलग तरह का माहौल बनाना चाहती है। मेरा भारत सरकार से आग्रह है कि कॉन्ग्रेस को चीन से जितनी भी फंडिंग मिली है उसकी जाँच होनी चाहिए और इसमें जितने भी लोग शामिल हैं उन्हें सलाखों के पीछे डाला जाए। साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी पर चुनाव लड़ने से रोक लगाई जाए।”

चीन के पैसे से चलता है वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में अमेरिकी व्यवसायी के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया गया।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के मुद्दों को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है।

(फोटो: न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का स्क्रीनग्रैब)

नेविल रॉय सिंघम के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के साथ मजबूत संबंध हैं। वह चीन की ‘स्मोक लेस’ वार नीति को सफल बनाने में सबसे आगे रहा है। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपने लेख में यह भी कहा है, “चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने शासन काल में सरकारी मीडिया तंत्र का तेजी विस्तार किया है। इसके लिए चीन ने विदेशी मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपने प्रचार तंत्र में शामिल किया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से चीनी प्रोपेगेंडा को स्वतंत्र मीडिया सामग्री के रूप में दिखाना है।”

NYT ने यह भी कहा है, “इसका यह नतीजा सामने आ रहा है कि धुर वामपंथी संगठन उभर रहे हैं। ये संगठन चीनी सरकार की बातों को दोहराते हैं या इनके विचार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मेल खाते हैं। यही नहीं चीन का सरकारी मीडिया भी इन संगठनों की बात करता दिखाई देता है।” अपनी जाँच में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाया है कि नेविल रॉय सिंघम ने भारत में स्थित ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को भी फंडिंग की है। अमेरिकी अखबार ने पाया है कि न्यूजक्लिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुद्दों पर बात करता दिखाई दिया है।

नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट फाइलिंग से भी पता चलता है कि नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क ने प्रोपेगेंडा पोर्टल न्यूज़क्लिक को फंडिंग की थी। इसके तहत न्यूजक्लिक ने अपनी कवरेज को चीनी सरकार के मुद्दों से जोड़ते हुए एक वीडियो में कहा था, “चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।”

ईरान में लाशों की सफाई करने को मजबूर महिलाएँ: हिजाब न पहनने पर कुछ ऐसे दी जा रही सज़ा, पागलखाने में भी भेज रहे

ईरान कभी एक खुला समाज हुआ करता था, लेकिन इस्लामी कानूनों के लागू होने के बाद हालात अब वहाँ पहले जैसे नहीं रहे। हिजाब न पहनने पर मोरलिटी वाली पुलिस महिसा अमीनी वाला हाल कर देती है, तो अदालतों पर कट्टरपन का ऐसा पागलपन चढ़ा है कि वो हिजाब पहनने का विरोध करने वालों को ही पागल करार दे रही है। यही नहीं, सजा के तौर पर वो महिलाओं को सप्ताह में एक दिन मेंटल डॉक्टर के पास जाने को मजबूर कर रही है, ताकि ‘ऐसी महिलाएँ पारिवारिक मूल्यों’ को याद कर सकें और हिजाब पहनकर सामाजिक जीवन जी सकें।

हिजाबी सनक के चलते दी जा रही अजब-गजब सजा

‘फ्रांस 24’ के हवाले से मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि तेहरान की कोर्ट ने एक महिला को पूरे एक माह तक मॉर्चुरी (शव गृह) में मुर्दों की साफ-सफाई की सजा दी है, क्योंकि वो बिना हिजाब के गाड़ी चलाती हुई पकड़ी गई थी। इसी मामले के बाद मशहूर ईरानी एक्ट्रेस Afsaneh Bayegan को सुनाई गई दो साल की सजा पर बहस शुरू हो गई। उन्होंने महिला अमीनी की हत्या के बाद विरोध में सोशल मीडिया पर अपनी कई तस्वीरें पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने हिजाब नहीं पहना था।

इस मामले में उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें पागल करार दे दिया गया और सजा के तौर पर 2 साल की जेल की जगह सप्ताह में एक दिन मेंटल डॉक्टर से मिलने को कहा गया है।

एक अन्य अभिनेत्री को भी मेंटल डॉक्टर से मिलने की सजा

कुछ समय पहले ही ईरान में कोर्ट ने एक्ट्रेस अजादेह समादी की ‘एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसॉर्डर’ का इलाज किया था। उन्होंने हिजाब का विरोध करते हुए हैट लगाकर किसी व्यक्ति को आखिरी विदाई देने कब्रिस्तान गईं थी। उन्हें ‘साइकोलॉजिकल सेंटर’ जाकर थेरेपी कराने का आदेश दिया गया था, ताकि वो सामाजिक रूप से खुद को ‘दुरुस्त’ कर सकें।

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महिसा अमीनी की हत्या के बाद उठा तूफान

ईरान में कट्टरपंथी शासल हिजाब को लेकर बेहद कड़ा रवैया अपनाता है। महिला अमीनी नाम की 22 साल की युवती की कथित तौर पर हिसारत में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद ईरान की महिलाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया था। कई खिलाड़ियों ने बगैर हिजाब के खेल प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लिया और आम महिलाओं ने जुलूस निकाले। हालाँकि, ईरानी शासन ने कड़ाई से सभी विरोध-प्रदर्शनों का दमन कर दिया।

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ईरान में फिर से उठी हिजाबी सनक

अब फिर से हिजाब को लेकर सनक दिखने लगी है। लोगों से बोला गया है कि वो अगर किसी महिला को बिना हिजाब के गाड़ी चलाते देखें, तो उसे रिपोर्ट करे। जो महिला बिना हिजाब के नौकरी करती दिखे, उसे तुरंत प्रभाव से नौकरी से निकालने का भी हुक्म दिया गया है। हिजाब न पहनने वाली महिलाओं का अस्पताल में इलाज नहीं किए जाने का भी फरमान जारी किया जा चुका है।