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हरियाणा के मेवात में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को सही ठहराने में लगे हैं इस्लामवादी, गौ-रक्षक मोनू मानेसर का पुराना वीडियो कर रहे हैं साझा

हरियाणा के नूहं में हिंदुओं द्वारा निकाली गई ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर सोमवार (31 जुलाई 2023) को कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला कर दिया था। इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 60 से ज्यादा लोग घायल हैं। कई दर्जन गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। तनाव को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद करके धारा 144 लगा दी गई है।

हिंसा के दौरान लगभग 3000 हिंदू महिला एवं पुरुष बंधक जैसी स्थिति में फँसे हुए थे। हालाँकि, ADG ममता सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहाँ से आए लोगों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि एके-47 से उन पर हमला किया गया और 14 साल के बच्चे तक हथियार चला रहे थे।

इस्लामवादी नूहं में हुई इस हिंसा के लिए बजरंग दल से जुड़े गौ रक्षक मोहित यादव उर्फ मोनू मानेसर को जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। मोनू मानेसर के एक पुराने वीडियो का इस्तेमाल कर वे दावा कर रहे हैं कि सावन महीने के सोमवार को हुई जलाभिषेक यात्रा में मोनू मानेसर मौजूद था और हिंसा उसकी वजह से हुई।

फेसबुक यूजर साहिद डेमरोट ने 31 जुलाई 2023 को एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में साहिद ने उन हैशटैग का इस्तेमाल किया, जो मोनू मानेसर और उसकी टीम अक्सर इस्तेमाल करती है।

साभार: फेसबुक

हारुन खान नाम के एक यूजर ने ट्वीट कर लिखा, “जुनैद और नासिर की हत्या का आरोपित मोनू मानेसर आज 31 जुलाई 2023 को मेवात यात्रा में मौजूद है।” उन्होंने कार्रवाई के लिए राजस्थान और हरियाणा पुलिस को टैग किया। हारून ने मेवात के नासिर ज़खोपुरिया की एक फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया था। फेसबुक पोस्ट भी डिलीट कर दिया गया है।

ट्विटर यूजर x_aliways ने ट्वीट कर दावा किया कि मोनू रैली में मौजूद था और उसने धार्मिक जुलूस को ‘मुस्लिम विरोधी’ रैली कहा। उन्होंने पुराने वीडियो का स्क्रीनशॉट शेयर किया।

ट्विटर यूजर BinT_E_Hawa___ ने पुराने वीडियो का स्क्रीनशॉट शेयर किया और मानेसर को आतंकवादी बताया।

ट्विटर यूजर द मुस्लिम ने यह भी दावा किया कि मानेसर रैली में मौजूद था। इस ट्विटर हैंडल ने मोनू मानेसर पर दंगे कराने का आरोप लगाया।

फेसबुक उपयोगकर्ता द जस्टाज लाइव, जो एक समाचार पृष्ठ प्रतीत होता है, ने दावा किया कि मोनू मानेसर हिंसा भड़काने के लिए मेवात गया था।

चूँकि विश्व हिंदू परिषद ने पहले ही स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था कि मोनू मानेसर जुलूस में मौजूद था, इसलिए ऑपइंडिया ने इस वीडियो की जाँच की। हमें मोनू मानेसर के एक सहकर्मी और बजरंग दल कार्यकर्ता श्रीकांत द्वारा मई 2023 में साझा किया गया एक वीडियो मिला।

इसके अलावा, हमें बताया गया कि यह वीडियो पिछले साल का है। 2 अक्टूबर 2022 को पोस्ट की गई श्रीकांत की एक अन्य पोस्ट में, हमने देखा कि वीडियो में मौजूद लोगों ने वही कपड़े पहने हुए थे। ये तस्वीरें मानेसर को गौरक्षा प्रमुख बनाए जाने का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम की थीं, जिसे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आयोजित किया था।

यह स्पष्ट था कि वीडियो पिछले साल अक्टूबर का था। आगे की खोज करने पर हमें इंस्टाग्राम पर 2 अक्टूबर 2022 को अपलोड किया गया वीडियो मिला।

फैसला: इस्लामवादियों ने मेवात में हिंदू विरोधी दंगों को सही ठहराने के लिए मोनू मानेसर के एक पुराने वीडियो का इस्तेमाल किया। ऑपइंडिया को दिए वीएचपी के बयान के अनुसार, मानेसर रैली में शामिल नहीं हुआ।

नूहं में हिंदू विरोधी दंगे

इस्लामवादियों ने 31 जुलाई 2023 को हरियाणा के नूहं जिले में हिंसा फैलाई। हरियाणा के कई हिस्सों में उस समय तनाव फैल गया, जब मुस्लिम बहुल क्षेत्र मेवात में जलाभिषेक शोभायात्रा पर पथराव किया गया। श्रावण सोमवार के शुभ अवसर पर जुलूस निकाला गया था।

झड़प वाले कई वीडियो में यात्रियों पर शत्रुतापूर्ण तरीके से हमला करने वाली भीड़ को ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए और दंगाई गतिविधियों में शामिल होते हुए सुना जा सकता है। पुलिस ने कहा कि हरियाणा के नूहं जिले में भीड़ ने जुलूस को रोकने की कोशिश की, पथराव किया और कारों में आग लगा दी। हिंसा में दो होम गार्ड की मौत हो गई और लगभग एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

राज्य सरकार ने गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही नूहं, रेवाड़ी, गुरुग्राम और फरीदाबाद में धारा 144 लगा दी है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 20 कंपनियों (लगभग 2000 कर्मियों) को तैनात किया। अतिरिक्त बल 6 अगस्त 2023 तक नूंह में रहेगा।

इस दल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की चार कंपनियाँ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की दो कंपनियाँ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की दो कंपनियाँ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 12 कंपनियाँ शामिल हैं।

मदरसों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का सरकारी आदेश रद्द: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने ADC के आदेश के खिलाफ कहा- ये सभी मदरसों पर लागू नहीं

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में स्थित कुछ मदरसों का प्रशासन केंद्रशासित प्रशासन द्वारा अपने हाथ में लेने के निर्णय को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि पिछले महीने आए आधिकारिक आदेश को सभी संस्थानों पर सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता है।

मौलाना अली मियां एजुकेशनल ट्रस्ट, भटिंडी द्वारा संचालित मदरसों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए जम्मू के मंडलायुक्त ने 14 जून 2023 को आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत कई मदरसों पर कार्रवाई की गई।

इस आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने कहा कि यह आदेश याचिकाकर्ताओं द्वारा संचालित मदरसों पर लागू नहीं किया जा सकता है। उनका मौलाना अली मियां एजुकेशनल ट्रस्ट, भटिंडी से कोई लेना-देना नहीं है।

किश्तवाड़ के अतिरिक्त उपायुक्त ने 3 जुलाई 2023 के मदरसों के संचालकों को संबंधित तहसीलदारों के माध्यम से मदरसे का कब्जा प्रशासन को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता राज अली एवं अन्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिका में कहा गया कि जम्मू के बठिंडी में मौलाना अली मियां एजुकेशनल ट्रस्ट विदेशी संस्थाओं से मिले पैसों का दुरुपयोग करता था, जिसके चलते जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर ने पिछले एक आदेश जारी कर ट्रस्ट का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उसका कोई लेना-देना नहीं है।

सरकारी वकील ने भी कहा कि याचिकाकर्ता का ट्रस्ट मौलाना अली मियां एजुकेशनल ट्रस्ट से अलग है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने कहा कि किश्तवाड़ के अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा जम्मू के संभागीय आयुक्त को दिए गए आदेश को सभी मदरसों पर लागू करना सही नहीं था।

आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “यह आदेश केवल मौलाना अली मियां एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित मदरसों पर लागू होता है। इसे यूटी में वैध रूप से चलाए जा रहे सभी मदरसों पर सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता है।”

‘6 महीने की साजिश, 14 साल के बच्चे भी चला रहे थे हथियार’: नूंह के जिस मंदिर को घेरा इस्लामी आतंकियों ने, वहाँ फँसे श्रद्धालुओं ने बताया AK-47 से बरसा रहे थे गोलियाँ

हरियाणा के मेवात (Mewat, Haryana) में सोमवार (31 जुलाई 2023) को भारी हिंसा हुई। हिंसा में 2 होमगार्ड जवानों और एक नागरिक की हत्या कर दी गई। घायलों की संख्या 60 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें दर्जनों पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस सहित बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल लोगों के 30 से अधिक वाहनों को या तो तोड़ डाला गया है या जला दिया गया।

तनाव को देखते हुए नूहं, गुरुग्राम, रेवाड़ी और फरीदाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ इंटरनेट को भी बंद कर दिया गया है। दंगाइयों के बीच फँसे लोगों को बचाकर नूहं पुलिस लाइन लाया गया है। बचाये गए लोगों का दावा है कि हिंसा की साजिश कम-से-कम 6 महीना पहले से रची जा रही थी।

ABP न्यूज़ ने हिन्दू संगठन से जुड़े उन लोगों का इंटरव्यू लिया है, जिन्हें नल्हड शिव मंदिर से बचाकर लाया गया है। बचाए गए लोगों में एक साधु के वेश वाले व्यक्ति ने बताया, “हिन्दुओं की पहली बस, जो मंदिर में जल चढ़ाकर गई, उसे 1 किलोमीटर बाद जला दिया गया। इसके बाद 14-15 और गाड़ियों को जलाया गया।”

पीड़ित ने आगे बताया कि मामले की जानकारी होने पर कुछ हिन्दू घटना के बारे में जानने गए तो उनके वाहनों को भी जला दिया गया। पीड़ित ने कहा कि उन पर हमले के लिए आतंकवादियों द्वारा AK 47 का इस्तेमाल किया गया था। एक अन्य पीड़ित ने कहा, “प्राचीन शिव मंदिर 3 तरफ से पहाड़ों से घिरा है। तीनों तरफ से गोलियाँ चलीं।”

आरोप है कि पुलिस ने पहुँचने के बाद जवाबी फायरिंग की, लेकिन पुलिस पर भी लगभग एक घण्टे तक गोलियाँ बरसाईं गईं। लोगों ने बताया कि हमले के दौरान मंदिर में फँसे श्रद्धालुओं की संख्या 6 से 7 हजार के बीच थी। पूरी बृजमंडल यात्रा में अनुमानित लोगों की तादाद 25 हजार बताई गई है। लोगों ने बताया कि वो मंदिर के अंदर लगभग 7 घंटे तक फँसे रहे।

बचाकर लाए गए एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “14 साल के लड़के भी असलहा चला रहे थे। ये प्लानिंग 6 महीने से की गई थी।” लोगों का आरोप है कि पहाड़ों से चलाई जा रही गोलियाँ किसी के पेट, किसी के जाँघ और किसी के माथे से छूकर निकली है।

मेवात में फँसी हजारों हिंदू महिलाओं को पुलिस ने निकाला: जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले के बाद इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू

हरियाणा के मेवात में सावन महीने के सोमवार को हिंदू भक्तों की यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला किया। सोमवार (31 जुलाई 2023) को निकली इस यात्रा में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के लोग भी भक्ति-भाव से शामिल थे। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं। कट्टरपंथी मुस्लिम आतंकियों द्वारा महिलाओं को लगभग 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। आखिरकार पुलिस ने उन्हें सकुशल निकाल लिया है।

मेवात के नूहं से शुरू हुई हिंसा गुरुग्राम के सोहना तक फैलने के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने मेवात, गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी जिलों में धारा 144 लागू कर दिया है। इसके साथ ही यहाँ इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। नूहं में अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

वहीं, ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर इसमें हजारों की संख्या में शामिल हिंदू महिलाओं एवं उनके साथ छोटे बच्चों को घेर लिया था। ये महिलाएँ एक पहाड़ी इलाके में घिरी हुई थीं और उस इलाकों ने मुस्लिमों ने चारों तरफ से घेर रखा था। आखिर ADG ममता सिंह के नेतृत्व में कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें निकाल लिया गया।

हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि नूहं के एक शिव मंदिर में शरण लेने वाले लगभग 2,500 महिलाओं और बच्चों को पुलिस ने रेस्क्यू कर लिया है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं, मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि लोगों को ‘हरियाणा एक हरियाणवी एक’ के सिद्धांत को याद रखना चाहिए।

इस हिंसा में कई दर्जन गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया है। वहीं, फायरिंग में होमगार्ड के दो जवान और एक नागरिक की मौत हो गई है। मुस्लिमों की हिंसा में 20 से अधिक पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है। होडल के डीएसपी सज्जन सिंह के सिर में गोली मारी गई। वहीं, एक इंस्पेक्टर के पेट में गोली लगी है। गो-तस्करी और लूटपाट के लिए कुख्यात मुस्लिम बहुल मेवात एरिया पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

कट्टरपंथी मुस्लिम आतंकियों के हमले को मीडिया में दबाने के लिए इसे मोनू मानेसर से जोड़ा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार बजरंग दल कार्यकर्ता मोनू मानेसर ने 30 जुलाई 2023 को एक वीडियो बनाकर लोगों से अपील की थी कि इस शोभायात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। मोनू ने इस शोभायात्रा में खुद शामिल होने की बात कही थी, लेकिन वह शामिल नहीं हुआ था। मोनू मानेसर पर गो-तस्कर जुनैद और नासिर की हत्या का आरोप है।

आपको बता दें कि हरियाणा के मेवात के नूहं में सावन महीने के सोमवार को हिंदू भक्तों की इस यात्रा में भाजपा की जिला प्रमुख गार्गी कक्कड़ भी थीं। नूहं के खेडला मोड़ के पास मुस्लिमों ने इस यात्रा को रोक लिया। इसी बीच शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पथराव और फायरिंग कर दिया गया और गाड़ियों में आग लगा दी गई।

यात्रा में शामिल करीब 2500 लोगों ने इलाके के नल्हड़ महादेव मंदिर में शरण ली। इसके बाद मुस्लिमों ने इसे चारों तरफ से घेर लिया। पत्रकार आदित्य राज कौल ने वीडियो शेयर कर दावा किया है कि नल्हड़ महादेव मंदिर में 2500 से अधिक लोग फँसे हुए हैं। वहीं, वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि मुस्लिमों ने 100 गाड़ियों को जला दिया और 3 लोगों को जिंदा जला दिया है। इसके बाद वह लोगों को बचाने की अपील करता सुना जा सकता है।

मेवात की हिंसा गुरुग्राम तक फैली, फँसे हुए हैं सैकड़ों श्रद्धालु: VHP ने कहा- कई दिनों से हमले की तैयारी कर रहे थे मुस्लिम

हरियाणा के मेवात के नूंह में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ब्रजमंडल यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। पत्थरबाजी, आगजनी और फायरिंग की घटना हुई। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि हजारों श्रद्धालु अभी भी हिंसा वाले इलाकों में फँसे हुए हैं। इस बीच हिंसा की आग बढ़कर गुरुग्राम के सोहना तक पहुँच गई है। यहाँ भी गाड़ियों को आग के हवाले करने की खबर है।

हिंसा के दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया। भीड़ की तरफ से चली गोली में होमगार्ड के दो जवान की मौत हो गई है। कई अन्य पुलिसकर्मी घायल हैं।हिंसा के बाद इंटरनेट बंद कर दिया गया है। नूंह और गुरुग्राम में धारा 144 लागू कर दी गई है। यात्रा की शुरुआत जिस नल्हड़ शिव मंदिर से हुई थी, वहाँ सैकड़ों लोगों के फँसे होने की खबर है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। थानों पर भी हमला हुआ है।

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है, “हिंसा प्रभावित इलाके में अतिरिक्त फोर्स भेजा गया है। आसपास के सभी जिलों की फोर्स को वहाँ लगाया गया है। हमने केंद्र से भी बात की है। वहाँ से भी लोगों को रेस्क्यू करने के लिए 3 कंपनियाँ भेजी जा रहीं हैं। मेवात का इंटरनेट बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं ताकि लोग अफवाहें न फैलाएँ। हम जल्द से जल्द शांति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। जहाँ-जहाँ लोग फँसे हुए हैं वहाँ से लोगों को निकाला जा रहा है।”

नूंह में हुई हिंसा के कई वीडियो सामने आए हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में, दर्जनों जलती हुई गाड़ियाँ देखी जा सकती है। स्थानीय साइबर थाने के पास खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने साल 1992 के बाद ऐसी हिंसा नहीं देखी थी। नूंह के रहने वाले गौरव ने कहा है कि पहले भीड़ ने पुलिस थाने पर पथराव किया। इस पर पुलिस ने फायरिंग और आँसू गैस के गोले छोड़े। इससे दंगाई भाग गए। लेकिन फिर हजारों लोग आए और पुलिस थाने में पथराव कर आग लगा दी। घरों में लगे कैमरे तोड़ दिए और गाड़ी चुरा कर ले गए। उन्होंने कहा, “यदि वह घर में छिपे न होते तो भीड़ उन्हें भी मार देती।”

पत्रकार आदित्य राज कौल ने वीडियो शेयर कर दावा किया है कि नल्हड़ महादेव मंदिर में 2500 से अधिक लोग फँसे हुए हैं। वहीं, वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि मुस्लिमों ने 100 गाड़ियों को जला दिया और 3 लोगों को जिंदा जला दिया है। इसके बाद वह लोगों को बचाने की अपील करता सुना जा सकता है।

विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि यह हमला सुनियोजित साजिश थी। मुस्लिमों ने इसकी पूरी तैयारी कर रखी थी। वे कई दिनों से पत्थर इकट्ठा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “नल्हड़ महादेव मंदिर से ब्रजमंडल यात्रा निकलनी थी। जलाभिषेक होना था। यह कार्यक्रम हर साल होता है। 20 हजार लोग आते हैं, सबको पता है। इसकी तैयारी पुलिस ने नहीं की थी। मुस्लिमों ने की थी। कई दिनों से पत्थर इकट्ठे किए जा रहे थे। योजना बनाई जा रही थी। आज इस यात्रा को बढ़े एक किलोमीटर ही हुआ होगा कि हमला हो गया। इस हमले के लिए पहले से तैयारी की गई थी। दौड़ा-दौड़ा कर मारने की कोशिश हो रही थी।”

विहिप नेता ने इसे इंटेलिजेंस की असफलता बताते हुए कहा है कि अभी भी वहाँ सैकड़ों लोग उन इलाकों में फँसे हुए हैं, जहाँ मुस्लिमों की बड़ी आबादी है। सरकार को इनलोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा है, “हम केवल सरकार का आसरा नहीं ले रहे। आत्मरक्षा का भी अधिकार है। इसलिए हिंदू अपने आत्मरक्षा के अधिकार का भरपूर प्रयोग करके इस प्रकार के हमलों का सामना करेगा। इसके बाद जो होगा उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। हम सामना भी करेंगे। भयभीत भी नहीं होंगे। मेवात को हिंदुओं के लिए सुरक्षित स्थान बनाएँगे।”

ज्ञानवापी अकेला नहीं, हर विवादित ढाँचे के नीचे मंदिर… 1800 स्थल जहाँ हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार: राज्यवार सूची

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने साफ कर दिया है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को मस्जिद कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य निशान हैं। साथ ही कहा है कि इस ‘ऐतिहासिक भूल’ के समाधान के लिए ​मुस्लिम समाज की ओर से प्रस्ताव आना चाहिए।

हालाँकि, देश भर में ऐसे कई निर्माण हैं। वर्ष 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने अन्य लेखकों अरुण शौरी, हर्ष नारायण, जय दुबाशी और राम स्वरूप के साथ मिलकर ‘हिंदू टेम्पल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (Hindu Temples: What Happened To Them) नामक दो खंडों की किताब प्रकाशित की थी। उसमें गोयल ने 1800 से अधिक मुस्लिमों द्वारा बनाई गई इमारतों, मस्जिदों और विवादित ढाँचों का पता लगाया था, जो मौजूदा मंदिरों/या नष्ट किए गए मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। कुतुब मीनार से लेकर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, पिंजौर गार्डन और अन्य कई का उल्लेख इस किताब में मिलता है।

लेखकों द्वारा उपयोग की जाने वाली पद्धति

पुस्तक के कुछ अध्याय में लेखकों के समाचार पत्रों में पहले प्रकाशित लेखों का भी एक संग्रह है। अध्याय छह में, ‘Historians Versus History’ अर्थात ‘इतिहासकार बनाम इतिहास’ राम स्वरूप ने उल्लेख किया है कि हिंदू मंदिरों को कैसे ध्वस्त किया गया और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे ब्रिटिश और मुस्लिम दोनों इतिहासकारों ने अपने-अपने तरीके से कैसे लिखा है। बात करें ब्रिटिश इतिहासकारों की तो उन्होंने भारत को गुलाम बनाने और यहाँ राज करने को सही ठहराते हुए मुगलों द्वारा की गई क्रूरता और बर्बरता को गलत करार दिया है। इसके विपरीत, मुस्लिम इतिहासकारों ने इस्लाम और उनके तत्कालीन संरक्षकों का महिमामंडन करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया।

देश भर में मौजूद मस्जिदों और कई ऐतिहासिक इमारतों में उपलब्ध शिलालेखों में अल्लाह, पैगंबर और कुरान को कोट करके लिखा हुआ है। इन अभिलेखों से पता चलता है कि इन इमारतों का निर्माण किसके द्वारा, कैसे और कब किया गया था। पुस्तक में कहा गया है, “शिलालेखों को विद्वान मुस्लिम एपिग्राफिस्टों द्वारा उनके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा गया है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने एपिग्राफिया इंडिका अरबी और फारसी में प्रकाशित किए गए हैं। पहली बार 1907-08 में एपिग्राफिया इंडो-मोस्लेमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था।”

5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था। शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था। उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।

उदाहरण के लिए बाबरी मस्जिद, जिसके बारे में हमने पढ़ा है, “अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है। वहाँ पर प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस जगह को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है। कहा जाता है कि यहाँ श्रीराम चंद्र भगवान की पत्नी सीता का एक मंदिर था, जिसमें वह रहती थीं और अपने पति के लिए खाना बनाती थीं।” उसी स्थान पर बाबर ने एच. 963 में इस मस्जिद का निर्माण किया था।” यहाँ एच 963 का अर्थ हिजरी कैलेंडर वर्ष 963 से है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 1555-1556 के बीच होता है।

इस्लामिक जगहों की राज्यवार सूची

इसके अलावा किताब में विभिन्न राज्यों के 1800 से अधिक स्थानों का उल्लेख है। हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित संगठन, ‘रिक्लेम टेंपल’ ने सीता राम गोयल द्वारा पुस्तक में दी गई सूचियों पर बखूबी काम किया है। राज्यवार सूची के पीडीएफ यहाँ देखे जा सकते हैं।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद उसकी सामग्री का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, प्रवेश द्वार और किलों के निर्माण में किया गया था। अकेले आंध्र प्रदेश को लेकर लेखकों ने 142 जगहों की पुष्टि की है, जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।

वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था। इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था। यह भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई है।

असम

किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार। ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट कर उसकी सामग्री उपयोग करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके दो शताब्दियों के अंदर बनाई गई थीं।

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

नालंदा जिले में और बिहारशरीफ में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

दिल्ली

किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

गुजरात

किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था। अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।

ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी। 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।

दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

हरियाणा

इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 स्थलों का उल्लेख किया गया है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में, मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।

बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी। हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था। अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश

किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर को बदलकर एक मुस्लिम राजधानी का निर्माण किया गया था। सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।शहर के मंदिरों को या तो ध्वस्त कर दिया गया या फिर उन्हें मस्जिदों में बदल दिया गया। जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था। जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

मध्य प्रदेश

किताब में मध्य प्रदेश के 151 स्थलों का उल्लेख है। भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था। धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।

मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था। जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।

मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था। वहीं, रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) में बदल दिया गया था।

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है। बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

पंजाब

किताब में पंजाब के 14 जगहों का जिक्र है। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है। लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

राजस्थान

पुस्तक में राजस्थान के 170 स्थलों का उल्लेख है। पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था। भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था। लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

तमिलनाडु

किताब में तमिलनाडु के 175 स्थलों का उल्लेख किया गया है। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था। कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

उत्तर प्रदेश

अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर। किताब में यूपी के 299 स्थलों का उल्लेख है, जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे। आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है। इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।

अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।

शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे। गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।

टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है। एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।

‘यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं, जिनके मंदिर की जगह पर और मंदिर की सामग्री के इस्तेमाल से बनाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “हमने उल्लेख किए गए स्मारकों के स्थानों, नामों और तारीखों के संबंध में सटीक होने की पूरी कोशिश की है। फिर भी कुछ गलतियाँ और भ्रम रह गए होंगे। हालाँकि, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि विभिन्न स्रोत एक ही स्मारक के लिए अलग-अलग तिथियाँ और नाम का प्रयोग करते हों। कुछ मुस्लिम फकीरों को कई नामों से जाना जाता है, जो उनकी मजारों या दरगाह की पहचान करने में भ्रम पैदा करते हैं। या फिर कुछ जिलों का नाम बदलकर अगर नया नाम रख दिया गया तो ऐसा हो सकता है। खैर, यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है।”

अनुराग की यह रिपोर्ट मई 2022 में ​पहली बार प्रकाशित हुई थी। आंशिक बदलावों के साथ इसे दोबारा प्रकाशित किया गया है।

इस्लाम कबूलने के बाद अंजू पर तोहफों की बौछार, पाकिस्तानी बिजेनसमैन ने दिए जमीन और पैसे: वीडियो वायरल

राजस्थान के भिवाड़ी की रहने वाली अंजू थॉमस पाकिस्तान जाने के बाद से सुर्खियों में बनी हुई है। अंजू लगातार दावा कर रही है कि वह अपने पाकिस्तानी ‘दोस्त’ नसरुल्लाह से मिलने और घूमने गई है। लेकिन पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि अंजू ने इस्लाम कबूल कर अपना नाम फातिमा रख लिया है। साथ ही उसने नसरुल्लाह से निकाह भी कर लिया है। इसके बाद एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन ने उसे गिफ्ट में जमीन और पैसे दिए हैं। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की एक रियल एस्टेट कंपनी के सीईओ मोहसिन खान अब्बासी ने अंजू को शौहर नसरुल्लाह की मौजूदगी में एक चेक और प्लॉट दिया है। मोहसिन खान अब्बासी ने शनिवार (29 जुलाई, 2023) को अंजू से मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान में अपनी नई जिंदगी शुरू करने में मदद के तौर पर अंजू को 10 मरला (करीब 305 गज) का प्लॉट और दोनों को उमराह पैकेज गिफ्ट किया है। इसके कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। वीडियो में अंजू मास्क लगाए दिखाई दे रही है।

अंजू और नसरुल्लाह से मुलाकात के बाद मोहसिन खान ने कहा, “अंजू भारत से पाकिस्तान तक अकेले आई और निकाह करने के लिए इस्लाम अपना लिया। हम यहाँ अपने मजहब में उसका स्वागत करने और उसे निकाह की बधाई देने आए थे।” उन्होंने यह भी कहा है कि अंजू को पाकिस्तान में रहने के दौरान किसी भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। बता दें कि इससे पहले एक अन्य बिजनेसमैन ने भी अंजू को 40 लाख रुपए का फ्लैट गिफ्ट किया था।

बता दें कि कुछ दिन पहले अंजू और नसरुल्लाह की कुछ तस्वीरें सामने आईं थीं। इन तस्वीरों में अंजू बुर्का पहनकर नसरुल्ला के दोस्तों के साथ डिनर करते देखी गई थी। गौरतलब है कि मीडिया में भले ही अंजू-नसरुल्लाह की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अंजू निकाह की बातों से इनकार करती रही है। अंजू और नसरुल्लाह का निकाहनामा भी सामने आ चुका है। इससे ही खुलासा हुआ था कि उसने इस्लाम कबूल कर अपना नाम फातिमा रखा है।

उल्लेखनीय है कि अंजू भारत में रहने वाले अपने पति अरविंद से कहकर गई थी कि वह जयपुर घूमने जा रही है। अरविंद ने भी इसकी पुष्टि की थी। हालाँकि अब अरविंद ने कहा है कि अंजू के वीजा समेत अन्य दस्तावेजों की जाँच होनी चाहिए। उसने भारत सरकार से अंजू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी अपील की है।

अंजू राजस्थान के भिवाड़ी में अपने पति और 2 बच्चों के साथ रहती थी। साल 2020 में फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दीर बाला जिले में रहने वाले नसरुल्लाह से हुई थी। दोनों के बीच बीते 3 साल से बातचीत हो रही थी। दोस्ती इतनी बढ़ी कि वह नसरुल्लाह से मिलने पाकिस्तान पहुँच गई और अब निकाह की खबरें आम हैं। अंजू की अब तक की बातें सुनने के बाद यह कह पाना बेहद मुश्किल है कि वह भारत वापस आएगी या नहीं। हालाँकि उसने अपने आखिरी वीडियो में कहा था कि वह घूमने के लिए पाकिस्तान गई है और 20 अगस्त तक भारत लौट आएगी। 

गोरी, कुतुबुद्दीन, रजिया, लोदी, तुगलक… सबने काशी में तोड़े मंदिर, इस्लामी आक्रांताओं की ‘ऐतिहासिक भूल’ ज्ञानवापी तक ही सीमित नहीं

ज्ञानवापी विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है, “ज्ञानवापी को अगर मस्जिद कहेंगे, तो विवाद होगा। भगवान ने जिसको दृष्टि दी है, वह देखे न। त्रिशूल मस्जिद के अंदर क्या कर रहा है? हमने तो नहीं रखे। वहाँ ज्योतिर्लिंग हैं, देव प्रतिमाएँ हैं। दीवारें चिल्ला-चिल्ला कर क्या कह रही हैं? मुझे लगता है कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से प्रस्ताव आना चाहिए कि साहब ऐतिहासिक गलती हुई है, उस गलती के लिए हम चाहते हैं समाधान हो।”

योगी आदित्यनाथ ने जिस ऐति​हासिक गलती का जिक्र किया है, वह केवल ज्ञानवापी तक ही सीमित नहीं है। इस्लामी आक्रांताओं ने काशी के कई हिस्सों में मंदिरों को तोड़कर उस पर मस्जिद बनवाई थी। मुहम्मद गोरी, कुतुबुद्दीन ऐबक, रजिया सुल्तान, मुहम्मद शाह तुगलक, फिरोजशाह तुगलक, सिकंदर लोदी सहित कई इस्लामी अक्रांता इसमें शामिल रहे।

मुहम्मद गोरी ने 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में एक के बाद एक लूट और विध्वंस की घटनाओं को अंजाम दिया। सन् 1193 में कन्नौज के राजा जयचंद और कुतुबुद्दीन ऐबक के बीच यमुना नदी के किनारे चंदावर (अभी फिरोजाबाद) में एक भीषण युद्ध हुआ, जिसमें जयचंद की मृत्यु हो गई। पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच हुए युद्ध में इस्लामी सेना की जबरदस्त हार हुई थी, लेकिन अगले एक वर्ष में ही वो दोबारा लौटा और पृथ्वीराज चौहान की हार के साथ ही दिल्ली में इस्लामी सत्ता की स्थापना हो गई।

जयचंद के खिलाफ युद्ध में खुद मुहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी-अपनी फ़ौज के साथ था। जयचंद का कटा हुआ सिर इन दोनों इस्लामी शासकों के सामने लाया गया। इसके बाद, मुहम्मद गोरी वाराणसी की तरफ बढ़ा। पृथ्वीराज चौहान और जयचंद जैसे हिन्दू राजाओं की मृत्यु के बाद वाराणसी को बचाने वाला शायद ही कोई था। वाराणसी में लूटपाट का भयंकर मंजर देखने को मिला। मंदिर के मंदिर तोड़ डाले गए। वाराणसी न सिर्फ एक धार्मिक नगरी थी, बल्कि व्यापार और वित्त का भी बड़ा केंद्र था। ऐसे में मुहम्मद गोरी ने मनमाने ढंग से लूटपाट मचाई। कहते हैं, यहाँ से लूटे हुए माल को ले जाने के लिए उसे 1400 ऊँटों की ज़रूरत पड़ी थी।

काशी विश्वनाथ मंदिर को भी इसी दौरान ध्वस्त किया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी उठाई। कन्नौज के राजा जयचंद्र के पुत्र हरीशचंद्र और आम लोगों ने जब मंदिर का निर्माण पुनः शुरू कर दिया, तब कुतुबुद्दीन ऐबक ने 4 वर्षों बाद फिर से अपनी फ़ौज के साथ हमला किया और भारी तबाही मचाई। कुतुबुद्दीन ऐबक ने विश्वेश्वर, अविमुक्तेश्वर, कृतिवासेश्वर, काल भैरव, आदि महादेव, सिद्धेश्वर, बाणेश्वर, कपालेश्वर और बालीश्वर समेत सैकड़ों शिवालयों को तबाह कर दिया। इस तबाही के कारण अगले पाँच-छः दशकों तक ये मंदिर इसी अवस्था में रहे।

तुर्कों का शासन था और दिल्ली में उनकी स्थिति और मजबूत ही होती जा रही थी। ऐसे में कुछेक साधु-संतों के अलावा धर्म की मशाल को ज़िंदा रखने वाले लोग कम ही बचे थे। काशी वही है, जिसके बारे में 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेन सांग ने वर्णन किया है कि उसने यहाँ सैकड़ों शिव मंदिर देखे और हजारों साधु-श्रद्धालु भी अपने शरीर पर भस्म मल कर घूमते हुए उसे दिखे। उसने एक 30 मीटर ऊँची शिव प्रतिमा का भी जिक्र किया है।

हालाँकि, 13वीं शताब्दी के मध्य में ही मुहम्मद गोरी की मौत हो गई और कुतुबुद्दीन ऐबक भी इस दशक के अंत तक मर गया। लेकिन, दिल्ली सल्तनत का काशी पर कब्ज़ा जारी रहा। इसके बाद इल्तुतमिश और फिर उसकी बेटी रजिया सुल्तान का शासन हुआ। जिस रजिया सुल्तान को ‘बहादुर महिला’ बता कर वर्षों तक पढ़ाया जाता रहा उसने भी काशी में मंदिरों को ध्वस्त कर विश्वनाथ मंदिर परिसर में ही एक मस्जिद बनवाई थी। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘रजिया मस्जिद’ की जगह भी कभी मंदिर ही हुआ करता था।

इसके बाद सन् 1448 में मुहम्मद शाह तुगलक ने आसपास के छोटे-बड़े मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और रजिया मस्जिद को और बड़ा बना दिया। काशी के प्राचीन इतिहास को पढ़ें तो पता चलता है कि यहाँ कई पुष्कर थे, जिन्हें व्यवस्थित ढंग से तबाह कर इस्लामी शासकों ने मस्जिद बनवाए। हालाँकि, उससे पहले 13वीं सदी में हिन्दुओं ने फिर से मंदिर को बना कर खड़ा कर दिया था। इसे हिन्दुओं की जिजीविषा कहें या फिर श्रद्धा, इतने अत्याचार और खून-खराबे के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस्लामवादी लगातार मंदिरों को तोड़ते रहे और हिंदू पुनर्निर्माण में लगे रहे।

इन्हीं मंदिरों में से एक था पद्मेश्वर मंदिर, जिसे काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने ही बनवाया गया था। हालाँकि, 1296 ईस्वी में बने पद्मेश्वर मंदिर को भी 15वीं शताब्दी के मध्य में तोड़ डाला गया। पद्म नाम के एक साधु ने इसका निर्माण करवाया था। आप जानते हैं कि ये मंदिर अब कहाँ है? इसके ऊपर ही लाल दरवाजा मस्जिद बनवा दिया गया, जिसे आज भी शर्की सुल्तानों का भव्य आर्किटेक्चर बता कर प्रचारित किया जाता है। फिरोजशाह तुगलक से लेकर सिकंदर लोदी तक, कई इस्लामी सुल्तानों ने काशी में मंदिरों को बारम्बार ध्वस्त किया। सन् 1494 में सिकंदर लोदी ने काशी में कई ऐसे मंदिर तोड़े, जिनका पुनर्निर्माण हिंदुओं ने अपने खून-पसीने से किया था।

सन् 1514-1594 के कालखंड में ही जगद्गुरु नारायण भट्ट हुए, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘त्रिस्थली’ में काशी के विश्वनाथ मंदिर के बारे में लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि अगर म्लेच्छों ने शिवलिंग को हटा दिया है तो वो खाली जगह ही हमारे लिए पवित्र है और उसकी पूजा की जानी चाहिए, अथवा कोई और शिवलिंग स्थापित किया जाना चाहिए। उनके शुरुआती जीवनकाल में मंदिर नहीं बना था, इससे ये पता चलता है। तुगलक और लोदी के विध्वंस से वाराणसी नहीं उबरी थी।

वो नारायण भट्ट ही थे, जिनकी प्रेरणा से राजा टोडरमल ने काशी में पुनः भव्य विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। आज जिस ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को आप देख रहे हैं, उसे औरंगजेब ने इसी मंदिर को तोड़ कर इसके ऊपर बनवाया था। काशी की मुक्ति के प्रयास लगातार चलते रहे और यहाँ पूजा-पाठ भी नहीं रोका गया। बार-बार आक्रमण के बावजूद काशी में पुनर्निर्माण चलता रहा। अब यदि अयोध्या के बाबरी ढाँचे की ही तरह पूरे ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हो जाए तो हिंदुओं को एक और बार मंदिर के पुनर्निर्माण का सौभाग्य प्राप्त होगा।

लालू परिवार की 6 करोड़ की संपत्ति जब्त, तेजस्वी यादव की दिल्ली की ‘D ब्लॉक’ वाली प्रॉपर्टी भी: जमीन के बदले नौकरी केस में ED की कार्रवाई

लैंड फॉर जॉब घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू यादव और उनके परिजनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लालू परिवार की करीब 6 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली है। ये संपत्ति पटना, दिल्ली और गाजियाबाद में हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED ने लालू यादव और उनके परिवार से जुड़ी जिन संपत्तियों को कुर्क किया है वह पटना जिले के बिहटा, महुआबाग और दानापुर में हैं। इसके अलावा तेजस्वी यादव की दिल्ली की ‘डी ब्लॉक’ वाली संपत्ति और लालू की बेटी हेमा यादव की प्रॉपर्टी जब्त करने की करने की बात भी कही जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 6 करोड़ 2 लाख रुपए आँका है। हालाँकि इन संपत्तियों का बाजार मूल्य कहीं अधिक होने का अनुमान है।

बता दें कि रेलवे में नौकरी के बदले जमीन अपने नाम करने के आरोप में सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 3 जुलाई 2023 को एक नई चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई ने कोर्ट में कहा था कि आरोपितों ने घोटाला एक अलग तरीके से किया गया था, इसलिए पुरानी चार्जशीट होने के बाद भी एक नई चार्जशीट दाखिल की जा रही है। सीबीआई ने नई चार्जशीट में लालू यादव के साथ ही उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व उनकी कंपनियों तथा अन्य लोगों को आरोपित बनाया था।

लैंड पर जॉब घोटाला (Land for job scam) कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-1 के शासनकाल सन 2004-2009 के बीच की है। बिहार में 15 साल तक लगातार सत्ता के सिरमौर रहे लालू प्रसाद यादव उस समय केंद्रीय रेल मंत्री थे। सन 2008 में रेलवे में नौकरी देने के बदले अभ्यर्थियों से रिश्वत के रूप में जमीन ली गई। ये जमीन पटना सहित अन्य जगहों पर ली गई।

अभ्यर्थियों को रेलवे के ग्रुप-डी में नौकरी देने के लिए रेलवे की तरह से कोई नोटिफिकेशन नहीं निकाला गया। जिन लोगों ने जमीनें दीं, उन्हें तीन दिन के अंदर रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नौकरी दे दी गई। जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनमें से कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाण-पत्र का भी उपयोग किया।

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि लालू यादव को पटना को 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन दी गई। इन जमीनों का सौदा नकद में और बेहद कम कीमत पर किया गया। लालू यादव और उनके परिजनों को 7 उम्मीदवारों ने नौकरी के बदले में जमीने दी थी। इनमें से 5 जमीनों की बिक्री हुई थी, जबकि दो गिफ्ट के तौर पर दिए गए थे।

क्या हुई थी डील?

केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में पाया कि इसमें सिर्फ लालू यादव ही नहीं, उनके पर्सनल असिस्टेंट रहे भोला यादव, उनकी पत्नी राबड़ी, बेटा तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती, हेमा यादव सहित कुछ उम्मीदवारों भी शामिल हैं। इस मामले में सीबीआई ने मई 2022 में भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज किया था।

मामला-1: जाँच में सीबीआई ने पाया कि फरवरी 2007 में पटना के रहने वाले हजारी राय ने 9527 वर्ग फीट अपनी जमीन एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी। यह जमीन 10.83 लाख रुपए में बेची गई थी। बाद में हजारी राय के दो भतीजों दिलचंद कुमार और प्रेमचंद कुमार को रेलवे में नौकरी मिली।

सीबीआई की जाँच में यह बात भी सामने आई कि साल 2014 में एके इन्फोसिस्टम के सारे अधिकार और उसकी सारी संपत्तियाँ राबड़ी देवी और मीसा भारती के नाम पर चली गईं। साल 2014 में राबड़ी देवी ने इस कंपनी के ज्यादातर शेयर खरीद लिए और इस कंपनी की डायरेक्टर बन गईं।

मामला-2: नवंबर 2007 में पटना की रहने वाली किरण देवी नाम की महिला ने अपनी 80,905 वर्ग फीट की जमीन लालू यादव की बेटी मीसा भारती के नाम पर कर दी। यह सौदा सिर्फ 3.70 लाख रुपए में हुआ था। बाद में किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को मुंबई में भर्ती किया गया।

मामला-3: इसी तरह 6 फरवरी 2008 को पटना के रहने वाले किशुन देव राय ने अपनी 3375 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बेच दी। यह जमीन 3.75 लाख रुपए में बेची गई थी। इसके बदले में किशुन राय के परिवार के तीन लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई।

मामला-4: इसी तरह फरवरी 2008 में पटना के महुआबाग में रहने वाले संजय राय ने 3,375 वर्ग फीट की अपनी प्लॉट को राबड़ी देवी को बेच दिया। यह प्लॉट 3.75 लाख रुपए में बेची गई। इसके बदले में संजय राय और उनके परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी दी गई थी।

मामला-5: इसी तरह मार्च 2008 में ब्रिज नंदन राय ने 3375 वर्ग फीट की अपनी जमीन गोपालगंज के रहने वाले ह्रदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपए में बेच दी। बाद में ह्रदयानंद चौधरी ने यह जमीन लालू यादव की बेटी हेमा को तोहफे में दे दी। ह्रदयानंद चौधरी को साल 2005 में हाजीपुर में रेलवे में भर्ती किया गया था।

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि ह्रदयानंद चौधरी लालू यादव का रिश्तेदार नहीं था, इसके बावजूद उसने जमीन लालू यादव की बेटी को गिफ्ट किया था। जिस वक्त यह जमीन गिफ्ट की गई थी, उस वक्त उसकी कीमत लगभग 62 लाख रुपए थी।

मामला-6: मार्च 2008 में विशुन देव राय ने अपनी 3375 वर्ग फीट की जमीन सिवान के रहने वाले ललन चौधरी को बेची। उसी साल ललन के पोते पिंटू कुमार को पश्चिमी रेलवे में भर्ती कराया गया। इसके बाद फरवरी 2014 में ललन चौधरी ने यह जमीन लालू यादव की एक और बेटी हेमा यादव को गिफ्ट कर दी।

मामला-7: इसी तरह मई 2015 में पटना के रहने वाले लाल बाबू राय ने अपनी 1360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को 13 लाख रुपए में बेच दी। सीबीआई की जाँच में पता चला कि साल 2006 में लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को रेलवे में नौकरी दी गई थी।

करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव लिए

CBI जाँच में पाया कि लालू यादव और उनके परिवार ने बिहार में 1.05 लाख वर्ग फीट की जमीन सिर्फ 26 लाख रुपए में हासिल की थी। वहीं, उस समय के सर्किल रेट के अनुसार उन जमीनों की कुल कीमत 4.40 करोड़ रुपए के करीब थी। सीबीआई ने यह पाया कि जमीन की खरीद के मामले में अधिकतर जमीनों के लिए नकद में पैसे दिए गए थे।

सीबीआई ने यह पाया कि 7 लोगों से करोड़ों रुपए की जमीन लेकर 12 लोगों को नौकरी दी गई थी। इन जमीनों को या तो सीधे लालू परिवार को बेच दिया गया, गिफ्ट कर दिया गया या फिर अन्य लोगों के जरिए रूट करके अंतत: लालू परिवार को दे दी गई।

मेवात में हिंदुओं की शोभायात्रा पर हमला, मंदिरों में तोड़फोड़ और वाहनों को फूँका: इंटरनेट बंद, 144 लागू

राजस्थान से लगे हरियाणा के नूहं जिले में हिन्दू भक्तों की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम समुदाय द्वारा हमला करने की खबर सामने आ रही है। है। सोमवार (31 जुलाई 2023) को हुई इस घटना में लाठी-डंडे और तलवारों से हमले के साथ ही पत्थरबाजी भी की गई। कुछ वाहनों को आग लगा दी गई। हालत को सँभालने के लिए बाहर से फ़ोर्स बुलानी पड़ी है।

हालात को देखते हुए मेवात इलाके में धारा 144 लगा दी गई है और की इंटरनेट सेवा को 2 अगस्त तक के लिए बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि दर्जनों गाड़ियों में आग लगा दी गई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में गोली चलने से दो लोगों की मौत की भी बात कही जा रही है। इसके अलावा, मंदिरों में भी तोड़फोड़ की चर्चा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला नूहं के नल्हड शिव मंदिर इलाके का है। यहाँ सावन महीने के सोमवार पर हिंदू भक्त एक शोभायात्रा निकालते हैं। स्थानीय लोग इसे बृजमंडल यात्रा कहते हैं, जिसमें विश्व हिन्दू परिषद और दुर्गा वाहिनी के लोग भी सामूहिक रूप से शामिल होते हैं। यात्रा के दौरान पुलिस फ़ोर्स भी मौजूद थी। मंदिर से निकलकर यह धार्मिक यात्रा जैसे ही फ़िरोज़पुर-झिरका की तरफ बढ़ी, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग श्रद्धालुओं से उलझ गए।

बहस करने के थोड़ी ही देर बाद हमलावरों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात सँभालने का प्रयास किया, लेकिन हालात थोड़ी ही देर में बेकाबू हो गए। हरियाणा शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता रितुराज अग्रवाल का कहना है कि हमलावरों ने लगभग 4500 हिन्दुओं को घेर लिया, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

हिंसा के चलते नूहं बाजार बंद हो गया। कुछ देर के अंदर आसपास के इलाकों में भी तनाव फ़ैल गया। होडल आदि क्षेत्र में ही उपद्रव हुआ, जिसके चलते कुछ गाड़ियों में आग लगा दी गई है। पत्थरबाजी के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस घटना में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं।

घटना में घायल हुए लोगों के भी वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में वाहनों को जलते और घायलों को इलाज करवाते देखा जा सकता है। एक घायल के सिर में चोटें आईं हैं। पीड़ित का कहना है कि हिंसा के दौरान पुलिस वाले साइड में खड़े हो गए। शहर के कई हिस्सों में काला धुँआ भी उठते देखा जा सकता है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए रितुराज ने बताया कि एक पुलिस स्टेशन को जला दिया गया है। उन्होंने कहा कि लगभग 1 दर्जन वाहनों को आग लगा दी गई है और सैकड़ों लड़कियाँ हिंसाग्रस्त इलाकों में फँसी हुई हैं। रितुराज ने आगे बताया कि कम-से-कम 20 पुलिस वाले घायल हुए हैं।