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‘मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करो, बुर्का पहनो’: लव जिहाद का ट्यूशन देती थी हिना शेख, फोटो से छेड़छाड़ कर छात्राओं की ब्लैकमेलिंग

महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले से लव जिहाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक नाबालिग लड़की ने 8 लोगों पर प्यार के जाल में फँसाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। आरोपितों की पहचान आवेज निसार शेख, कैफ शेख, सोहेल शेख, हिना शेख, अलीशा शेख, सलीम पठान, अल्ताफ शेख और शाकिर सैय्यद के रूप में हुई। इस मामले में पुलिस ने दो महिलाओं सहित 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR कॉपी के अनुसार, मामला अहमदनगर जिले के राहुरी इलाके के उम्ब्रे गाँव का है। पुलिस को दी शिकायत में 10वीं की पीड़िता ने कहा है कि वह अपने दोस्तों के साथ हिना शेख के पास ट्यूशन पढ़ने जाती थी। इस दौरान वह ट्यूशन में मुस्लिम लड़कों को बुलाती थी। छात्राओं से मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने और हिंदी में बात करने को कहती थी।

ऑपइंडिया को मिली एफआईआर कॉपी

पीड़ित लड़की ने अपनी शिकायत में बताया है कि आरोपित लड़कों का ट्यूशन से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन हिना शेख उन्हें हिंदू लड़कियों के साथ ट्यूशन में बैठाती थी। यही नहीं हीना छात्राओं को मुस्लिम लड़कियों की तरह रहने और बुर्का पहनने को भी कहती थी। वह यह भी चाहती थी कि छात्राएँ चूड़ियाँ पहनना बंद कर दें और अपने माथे पर कुमकुम न लगाएँ।

पीड़िता ने बताया है, “एक दिन जब मैं घर जा रहा थी तब आवेज ने मुझे रास्ते में रोका और कहा कि वह मुझे पसंद करता है। वह महिलाओं के प्रति बहुत सम्मान दिखाता था। इसलिए मैंने उससे दोस्ती कर ली। इसके बाद अचानक ही उसने मेरे भाई से भी मिलना शुरू कर दिया और मेरे घर आने-जाने लगा। इसके बाद उसने कहा कि वह मुझसे प्यार करता है और मेरा बिना नहीं रह सकता। मैं उस पर विश्वास करने लगी थी। इसी दौरान एक दिन आवेज ने मुझसे कहा कि मैं इस्लाम अपना लूँ और उसके साथ भाग जाऊँ।”

पीड़ित लड़की का कहना है कि आवेज उससे कहता था कि उसके रिश्ते के बारे में गाँव के कई मुस्लिम लोगों को पता है और वह उसकी हर तरह से मदद करने को तैयार हैं। पीड़िता का कहना है, “वह चाहता था कि मैं किसी तरह हाँ कर दूँ। लेकिन मैं उसकी बात मानने को तैयार नहीं हुई। इसके बाद मुझे बताया गया कि उसने अपना हाथ काट लिया है और मुझ पर उससे बात करने और धर्मांतरण का दबाव डाला गया।”


एफआईआर में यह भी कहा गया है कि आरोपित आवेज ने अपनी बहन अलीशा से पीड़ित लड़की को समझाने के लिए कहा था। वह सब कुछ जानती थी। इसलिए उसने पीड़िता से मिलकर उसे समझाया और कहा कि आवेज प्यार में पागल है। यदि वो नहीं मानी तो वह मर जाएगा। इसके बाद आवेज पीड़ित लड़की को उसकी फोटो के जरिए ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता ने आगे कहा है, “इसी दौरान एक दिन मैंने ट्यूशन में देखा कि आवेज को मेरा अपहरण करने के लिए कैफ और सोहेल उकसा रहे थे। उन लोगों ने कहा कि वे पैसे और घर उपलब्ध करा देंगे। जब मैंने ये बातें सुनीं तो डर गई और आवेज से बात करना बंद कर दिया। लेकिन आवेज मुझे इंस्टाग्राम पर मैसेज करता रहा।”

यह छात्रा 2021 से हिना शेख के पास ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। उसने हिना का असली चेहरा सामने आने के बाद अब ट्यूशन जाना बंद कर दिया है। पीड़ित लड़की के साथ पढ़ने वाली एक अन्य लड़की ने भी आवेज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद पीड़िता ने अपने घर वालों को मामले की पूरी जानकारी दी और उसने 26 जुलाई 2023 को FIR दर्ज कराई। सूत्रों के अनुसार ट्यूशन में पढ़ने वाली 3-4 लड़कियों ने आवेज पर प्रेम जाल में फँसाने और फिर धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। ऑपइंडिया को एफआईआर की 3 अलग-अलग कॉपियाँ मिली हैं। इनमें 3 पीड़ित लड़कियों ने कहा है कि आवेज ने पहले उन्हें प्रेमजाल में फँसाया और फिर अपने दोस्तों के साथ मिलकर उनके अपहरण की योजना बनाई।

यह भी सामने आया है कि ट्यूशन टीचर हिना शेख हिंदू लड़कियों की फोटो हासिल करने में भी मुस्लिम लड़कों की मदद करती थी। बाद में फोटोज से छेड़छाड़ कर उनके जरिए हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों के साथ संबंध बनाने के लिए ब्लैकमेल किया जाता था। एक पीड़ित लड़की ने कहा है कि अब तक 7-8 लड़कियाँ आरोपितों की शिकार बन चुकी है। हालाँकि अब तक केवल 3 लोगों ने ही शिकायत दर्ज कराई है।


महाराष्ट्र विधान परिषद में भाजपा के प्रसाद लाड ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा है कि इस मामले में आवाज उठाने वाले हिंदुओं और स्थानीय लोगों को बेरहमी से पीटा गया है। इसका सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है। वहीं इस मामले में एक आरोपित सलीम पठान ने कथित तौर पर 25 हिंदुओं पर मस्जिद में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। हिंदुओं का दावा है कि उन्हें झूठे केस में फँसाया जा रहा है। वह तो सिर्फ यह सवाल करने गए थे कि हिंदू लड़कियों को क्यों फँसाया गया और मस्जिद ले कर क्यों गए।

ऑपइंडिया को मिली एफआईआर कॉपी

मूल रूप से यह रिपोर्ट सिद्धि सोमानी ने अंग्रेजी में लिखी है। विस्तार से इसे आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

ज्ञानवापी पर जो बात आज CM योगी ने कही, सर्वे में मिल चुके हैं वैसे ही हिंदू प्रतीक: कानूनी तौर पर भी हिंदुओं का अधिकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को लेकर साफ कर दिया है कि यह मस्जिद नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य निशान हैं। इसलिए इस परिसर को मस्जिद नहीं कहा जा सकता।

सीएम योगी ने कहा, “ज्ञानवापी के अंदर देव प्रतिमाएँ हैं। यह प्रतिमा हिंदुओं ने नहीं रखी है। अगर ज्ञानवापी को मस्जिद कहेंगे तो विवाद तो होगा ही।” उन्होंने कहा कि सरकार ज्ञानवापी विवाद का समाधान चाहती है। मुस्लिम समाज को आगे आकर इस ऐतिहासिक गलती सुधारना चाहिए।

ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश ने सीएम योगी से बातचीत में पूछा कि ‘काशी विश्वनाथ मंदिर – ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का कोई समाधान’ है। इस पर सीएम योगी ने कहा, “अगर हम उसे मस्जिद कहेंगे तो फिर विवाद होगा। मुझे लगता है कि जिसे भगवान ने दृष्टि दी है, वह देखे इसे।”

सीएम योगी ने यह बता ऐसे ही नहीं कही है और ना ही इसके पीछे चुनावी मौसम में फायदा लेने की नियत मात्र है। ज्ञानवापी परिसर की प्राचीन तस्वीरें देखें और परिसर में आने आए इस बात की गवाही दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जो कहा, वह शब्दत: सत्य है।

सर्वे में सीएम योगी की बातों की हो चुकी है पुष्टि

पिछले साल मई में पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा ने अदालत में रिपोर्ट में देकर खुलासा किया था कि ज्ञानवापी ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर शेषनाग और हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृति है। दीवार के उत्तर से पश्चिम की ओर शिलापट्ट पर सिंदूरी लेप की उभरी हुई कलाकृति है। इसमें देवों के रूप में चार मूर्तियाँ दिख रही हैं।

पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा ने न्यायालय को आगे बताया था कि जाँच में चौथी आकृति मूर्ति प्रतीत हो रही है और उस पर सिंदूर का मोटा लेप है। उसके आगे दीपक जलाने के लिए उपयोग में लाए गए त्रिकोणीय ताखा में फूल रखे हुए थे। पूर्व दिशा में बैरिकेडिंग के अंदर व ढाँचे की पश्चिम दीवार के बीच मलबे का ढेर पड़ा हुआ है। यह शिलापट्ट भी उन्हीं का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। इन पर उभरी हुई कलाकृतियाँ ढाँचे की पश्चिम दीवार पर उभरी कलाकृतियों से मेल खाती दिख रही हैं।

अदालत को सौंपी गई कमीशन की रिपोर्ट

ये हाल ही में हुए ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की रिपोर्ट है। सर्वे में एक शिवलिंग भी मिला है, जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है। हालाँकि, वो ये नहीं बता पा रही है कि एक फव्वारे के आगे नंदी की प्रतिमा क्यों, जो प्राय: शिव मंदिरों में शिवलिंग या प्रतिमा के आगे बना रहता है।

154 साल पुरानी तस्वीर में ज्ञानवापी में भगवान हनुमान भी

इतना ही नहीं। सर्वे में जो बात सामने आई है और जिसके आधार पर सीएम योगी ने ज्ञानवापी को मस्जिद कहने से इनकार किया है, उसके सबूत अमेरिकी म्यूजियम में भी रखे हैं। विवादित ढाँचे के अंदर से हनुमान जी की भी मूर्ति होने के सबूत मिले हैं। करीब 154 साल पुरानी तस्वीर से ये खुलासा हुआ है। यह तस्वीर अमेरिका के एक म्यूजियम में रखी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1868 में ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न ली ने ये फोटो खींची थी। जिस ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को मुस्लिम पक्ष मस्जिद बताकर उस पर अपना दावा करते हैं, ये रिपोर्ट उन दावों की पोल खोल देती है।

दरअसल, 154 साल पहले ली गई इस तस्वीर को ध्यान से देखने पर इसमें भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार हनुमान जी की मूर्ति के साथ ही घंटा टंगा दिखता है। इसके अलावा वहीं पर नंदी भी विराजमान दिखाए दे रहे हैं। तस्वीर में तीन खंबे भी दिख रहे हैं, जिनमें प्राचीन भारतीय शिल्पकला उकेरी दिख रही है।

1868 में ली गई ज्ञानवापी मंदिर की तस्वीर, फोटो साभार: getty.edu

ऊपर दिख रही तस्वीर को और भी बड़ा/भव्य/क्लियर देखना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं। मौजूदा वक्त में यह तस्वीर अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित ‘द म्यूजियम ऑफ फाइन आर्ट्स में संभाल कर रखी गई है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद से विवादित ढाँचे पर हिन्दू पक्ष का दावा और अधिक मजबूत हो गया है।

काशी-मथुरा हिंदू देवताओं की जमीन

सीएम योगी ने मुस्लिम समाज को साफ संदेश दिया कि वे आगे आकर मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित करने के ऐतिहासिक भूल को सुधारें। यह अयोध्या के रामजन्मभूमि विवाद के उलट, मामले का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने से संबंधित है। हालाँकि, मुस्लिम समाज इसके पक्ष में नहीं दिख रहा। ऐसी स्थिति में यह मामला पूरी तरह कोर्ट के फैसले पर निर्भर हो गया है।

मुस्लिम पक्ष ने तो पूजास्थल अधिनियम-1991 के आधार पर इस मामले में सुनवाई ना करने की सुप्रीम कोर्ट से अपील तक कर दी थी। हालाँकि, मई 2022 में ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि किसी स्थान के धार्मिक चरित्र के निर्धारण को पूजास्थल अधिनियम-1991 (Places of Worship Act 1991) प्रतिबंधित नहीं कर सकता।

इसी तरह, मथुरा के शाही ईदगाह ढाँचे और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर (Shahi Idgah Mosque – Shri Krishna Janmbhoomi Temple) मामले में हिंदू पक्ष की याचिका को स्वीकार करते हुए मथुरा की कोर्ट ने भी कह दिया था कि इसकी सुनवाई में पूजास्थल अधिनियम-1991 बाधा नहीं है।

हालाँकि, दोनों ही मामलों में कोर्ट स्वीकार किया है कि यह कानून सुनवाई में बाधा नहीं बन सकता, लेकिन तकनीकी तौर यह अधिनियम भारतीय कानून का हिस्सा है और विभिन्न परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट अपने विवेक के आधार पर इसका प्रयोग कर सकता है। ऐसे में यह कानून रहने के बावजूद उपरोक्त दोनों मामलों में हिंदुओं का पक्ष कितना मजबूत है, इस पर चर्चा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने पूजास्थल अधिनियम-1991 को असंवैधानिक बताया और कहा कि ऐसा कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है ही नहीं। उन्होंने कहा कि अवैध काम को वैध ठहराने के लिए सरकार कानून नहीं बना सकती। इस कानून द्वारा हिंदुओं, बौद्धों, जैनों और सिखों को उनके धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने इस कानून पर न्यायपालिका पर चोट बताया है।

भाजपा तो इस कानून का शुरू से विरोध करती रही है। कॉन्ग्रेस की सरकार द्वारा इस बिल को पेश करने के दौरान ही बहस में तत्कालीन भाजपा सांसद उमा भारती (Uma Bharti) ने इसे महाभारत के ‘द्रौपदी का चीरहरण’ कहा था। भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Adawani) ने कहा था कि इस कानून से जिन स्थानों पर तनाव नहीं है, वहाँ भी दोनों समुदायों में तनाव बढ़ेगा।

साबित करना होगा कि ज्ञानवापी और ईदगाह मस्जिद है

ऑपइंडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय मथुरा, काशी, भद्रकाली, भोजशाला जैसे विवादों में कानूनन हिंदुओं के पक्ष को मजबूत बताया और कहा कि इसके प्रमाण इन जगहों पर उपलब्ध हैं। ये प्रमाण हिंदुओं के पक्ष को मजबूत करते हैं।

एडवोकेट उपाध्याय ने बताया, “ये सब स्थान मस्जिद नहीं हैं। इन्हें मस्जिद साबित करने के लिए सबसे पहले इस्लामिक लॉ से इन्हें प्रूव करना पड़ेगा। ये मंदिर हैं या नहीं है, इसे हिंदू लॉ से प्रूव करना है। कोई भी स्थान ऐसा नहीं हो सकता कि वह मंदिर भी हो और मस्जिद भी। वह या तो मंदिर होगा या मस्जिद। अगर यह मस्जिद है तो आपको (मुस्लिम पक्ष को) कुछ बातें साबित करनी पड़ेंगी।”

इस्लामिक कानून के तहत मस्जिद बनाने के लिए आवश्यक शर्त की बात करते हुए उन्होंने कहा, “मस्जिद बनाने के लिए सबसे पहले यह साबित करना होगा कि ये यह जमीन मेरी है या हमने इसे किसी से खरीदा या फिर किसी ने अपनी इच्छा (बिना डर-भय, लालच के) से इसे दान किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात साबित करना होगा कि वहाँ पहले कोई स्ट्रक्चर नहीं था। इस्लामिक लॉ में मस्जिद के लिए यह पहली कंडीशन होती है। धार्मिक स्ट्रक्चर तो होना ही नहीं चाहिए।”

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे बताया, “अगर मकान, दलान, दुकान आदि कोई घरेलू ढाँचा है और वहाँ मस्जिद बनाना चाहते हैं…. मान लीजिए हमारे पास एक दुकान है और हम उसे अब नहीं चलाना चाहते और वहाँ एक मस्जिद बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले उस दुकान की एक-एक ईंट उखाड़नी पड़ेगी। इस्लामिक लॉ कहता है कि नींव में पहले के ढाँचे का एक ईंट भी नहीं होनी चाहिए। पहली ईंट जो लगनी चाहिए, वो मस्जिद के नाम की लगनी चाहिए।”

हिंदू कानून और इस्लामिक कानून के बीच फर्क का जिक्र करते हुए एडवोकेट उपाध्याय ने कहा कि मंदिरों में पहले मंदिर बन जाता है फिर नामकरण होता है, जबकि मस्जिदों में पहले नामकरण होता है फिर मस्जिद बनती है। इस्लामिक लॉ के तहत मस्जिद का जो नाम रख दिया जाता है, उसी के नाम की पहली ईंट मस्जिद निर्माण की नींव में रखी जाती है।

औरंगजेब और इतिहास को झूठा साबित करना होगा

अश्विनी उपाध्याय ने ज्ञानवापी मामले को लेकर ऑपइंडिया से कहा था, “आप (मुस्लिम) कहते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद है तो आपको सबसे पहले औरंगजेब को झूठा साबित करना पड़ेगा। जो उसके इतिहासकार हैं, उनको झूठा साबित करना पड़ेगा। उसके ये भी साबित करना पड़ेगा कि फलाने आदमी ने जमीन दान किया या उससे खरीदा। यह भी साबित करना पड़ेगा कि फलाने बादशाह ने इस मस्जिद की पहली ईंट रखी थी यहाँ पर।”

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष ने 20 मई को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि इतिहासकार इस बात की पुष्टि करते हैं कि इस्लामी शासक औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें उसके प्रशासन को वाराणसी में स्थित भगवान आदि विश्वेश्वर के मंदिर को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। आदि विश्वेश्वर के मंदिर पर 1193 ईस्वी से 1669 ईस्वी तक हमला किया गया, लूटा गया और ध्वस्त किया गया।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि औरंगजेब ने अपने फरमान में और मुगल इतिहासकारों के रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि औरंगजेब या उसके बाद के शासकों ने विवादित भूमि पर वक्फ बनाने या किसी मुस्लिम या मुस्लिम निकाय को जमीन सौंपने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष की ओर कोर्ट में शामिल अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका में अदालत को बताया कि फरमान की कॉपी कोलकाता के एशियाटिक लाइब्रेरी रखे होनी की जानकारी मिली है।

हिंदू देवता की एक बार जमीन, हमेशा के लिए उनकी जमीन

अश्विनी उपाध्याय ने कहा, “हिंदू लॉ कहता है कि एक बार वहाँ भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा कर दिया, उसके बाद उसकी दीवार तोड़ दीजिए, गुंबद उड़ा दीजिए, नमाज पढ़िए चाहे उसकी नींव की एक-एक ईंट उखाड़ दीजिए वह मंदिर ही रहेगा। एक बार मंदिर हो गया तो वह किसी भी रूप में हमेशा मंदिर ही रहेगा। जब तक वहाँ से मूर्ति का विसर्जन नहीं होगा, तब तक वह मंदिर ही कहलाएगा।”

हिंदू पक्ष ने कहा कि मस्जिद सिर्फ वक्फ या मुस्लिम की जमीन पर बनाई जा सकती है। इस मामले में मंदिर की भूमि और संपत्ति अनादि काल से देवता की है। इसके साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि किसी मुस्लिम शासक या किसी मुस्लिम के आदेश के तहत मंदिर की भूमि पर किए गए निर्माण को मस्जिद नहीं माना जा सकता है।

ज्ञानवापी विवादित परिसर में अभी भी भगवान की पूजा होती है और श्रद्धालुओं द्वारा पंचकोशी परिक्रमा की जाती है। हिंदू कानून भी कहता है कि देवता की भूमि हमेशा देवता के नाम पर रहती है। विदेशी शासन आने के बाद भी देवता का अधिकार खत्म नहीं होता।

अगर विवादित स्थानों पर वर्तमान कानून, इस्लामिक कानून, हिंदू कानून और संविधान के अनुच्छेदों में प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन पर गौर करें तो स्पष्ट है कि इन मामलों में हिंदुओं का पक्ष मजबूत है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिन-जिन स्थानों को विवादित माना जा रहा है, वहाँ हिंदू देवताओं एवं प्रतीकों के निशान आज भी मौजूद हैं।

छात्रा की पानी की बोतल में किया पेशाब, बैग में डाल दिया I love You वाला लेटर: राजस्थान के भीलवाड़ा में ‘एक समुदाय के छात्र’ की हरकत से बवाल

राजस्थान के भीलवाड़ा में एक छात्र की हरकत के कारण बवाल हो गया है। इस छात्र पर एक साथी छात्रा की पानी की बोतल में पेशाब करने और उसके बैग में आई लव यू लिखा लेटर रखने का आरोप है। आरोपित छात्र पर कार्रवाई की माँग कर रहे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज की खबर है। स्कूल और पुलिस प्रशासन पर ग्रामीणों ने ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार छात्रा कक्षा 8 में पढ़ती है। आरोपित छात्र ‘एक समुदाय’ का बताया गया है। हालाँकि वह किस समुदाय से है यह स्पष्ट रूप से रिपोर्टों में नहीं बताया गया है। घटना भीलवाड़ा के लुहारिया स्थित राजकीय सीनियर हायर सेकेंड्री स्कूल का है। 28 जुलाई 2023 को पीड़ित छात्र के साथ यह घटना हुई थी।

लड़की ने इसकी शिकायत स्कूल के प्रिंसिपल से की। लेकिन आरोपित छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। घर आकर लड़की ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। इस बीच किसी ने घटना को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद सोमवार (31 जुलाई 2023) को पीड़िता के परिजनों के साथ कई लोग पुलिस में शिकायत करने पहुँचे। जब उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो नाराज ग्रामीण आरोपित छात्र के घर की तरफ बढ़ गए।

इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी हुई। हालात तनावपूर्ण हो गए। ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला लगा दिया। वे आरोपित छात्र को स्कूल से निकालने की माँग कर रहे थे। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस का कहना है कि आरोपित छात्र के घर पहुँच कर अराजकता फैलाने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक घनश्याम शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर की छुट्टी के दौरान लड़की बैग स्कूल में छोड़कर ही घर चली गई थी। जब वह लौटकर आई तो उसके पानी के बोतल से बदबू आ रही थी। उसके बैग में एक लव लेटर भी था। उसने प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की थी। लेकिन आरोपित छात्र पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार हंगामा किया। आरोपित छात्र के मोहल्ले में पथराव किया। इसके बाद भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

जुलाई का वो सीरियल ब्लास्ट, जब 70 मिनट में फटे 21 बम: जानिए किस हाल में हैं 2008 अहमदाबाद बम धमाकों के पीड़ित

गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के इतिहास में 26 जुलाई 2008 कभी न भूल पाने वाली दुर्भाग्यपूर्ण तारीख है। इस दिन महज 70 मिनट के अंदर हुए 21 सीरियल ब्लास्ट ने शहर की शांति को छिन्न-भिन्न कर डाला था। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

इससे एक दिन पहले बेंगलुरु में भी सीरियल विस्फोट हुए थे, जिनमें 7 अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया गया था। तब वहाँ से 1500 किलोमीटर दूर गुजरात के लोगों को इस बात की भनक भी नहीं थी कि आतंकियों का अगला निशाना वो खुद हैं। इस विनाशकारी घटना को 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन यह घाव लोगों के जेहन में आज भी ताजा है।

26 जुलाई 2008  (शनिवार) के दिन अहमदाबाद के लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यस्त थे। शाम को लगभग 6:45 पर पहला धमाका हुआ। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही महज 70 मिनट के अंदर अलग-अलग जगहों पर एक के बाद एक 21 विस्फोट हुए। इन घटनाओं से अहमदाबाद के लोग सन्न रह गए।

इन विस्फोटों को पूरी साजिश के साथ भीड़-भाड़ वाले इलाकों में अंजाम दिया गया था। खड़िया, बापूनगर, रामोल, अमराईवाड़ी, वटवा, दानिलिम्दा, इसानपुर, ओधव, कालूपुर, नरोदा, ठक्करनगर, सरखेज, निकोल, अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल सहित अहमदाबाद के कुछ अन्य क्षेत्र इन धमाकों से प्रभावित हुए।

अस्पताल को भी बनाया गया निशाना

इन धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकियों ने अस्पतालों को भी नहीं छोड़ा था। अहमदाबाद के सिविल ट्रॉमा सेंटर और एलजी अस्पताल में भी बम विस्फोट किए गए। ऐसा करने के पीछे अन्य विस्फोटों में घायल उन लोगों को भी मार डालने की साजिश थी, जो इलाज के लिए अस्पताल आए थे।

विस्फोटों के जरिए यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी कि दूसरी जगह हुए धमाकों में घायल हुए लोगों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा ना मिल पाए। अस्पताल में हुए विस्फोटों की वजह से न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टर, बल्कि घायलों के कई रिश्तेदार भी चपेट में आ गए थे।

अस्पताल में हुआ ब्लास्ट

पुलिस ने सुलझाया था 19 दिनों में केस

सीरियल ब्लास्ट का दिन पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती वाला था। इस दिन अधिकारियों के फोन सहित थानों की लैंडलाइन लगातार बज रहीं थी। हर कोई अपने परिजनों की कुशलता जानने के लिए पुलिस से सम्पर्क कर रहा था। शहर में एक तरह से अफरा-तफरी के साथ-साथ भय का माहौल था।

इन धमाकों की जाँच का जिम्मा IPS आशीष भाटिया और क्राइम ब्रान्च के DCP अभय चुड़ासामा को दिया गया। यह टीम आतंकियों को पकड़ने के प्रयास में जुट गई। पुलिस ने धमाकों को देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने का प्रयास माना और उसको देखते हुए पूरी गंभीरता से कार्रवाई शुरू की।

तत्कालीन CM गुजरात नरेंद्र मोदी और PM मनमोहन सिंह घटनास्थल पर

तब देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। देश के वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह तब गुजरात के गृहमंत्री हुआ करते थे। आखिरकार बेहद सधे हुए अंदाज में काम करते हुए अहमदाबाद पुलिस ने महज 19 दिनों में पूरे केस का खुलासा कर दिया।

पुलिस ने इन धमाकों में शामिल रहे 30 संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। आतंकियों की धर-पकड़ में गुजरात पुलिस की मदद मध्य प्रदेश, दिल्ली, मुंबई, कर्नाटक, केरल और राजस्थान की पुलिस टीमों ने भी की। अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए संदिग्धों को गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया गया था।

ब्लास्ट की जाँच करती पुलिस टीम

इंडियन मुजाहिदीन ने ली जिम्मेदारी, यासीन भटकल मास्टरमाइंड

अहमदाबाद के सीरियल विस्फोट की ज़िम्मेदारी इस्लामी आतंकवादी संगठन- इंडियन मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी ने सामूहिक तौर पर ली थी। आतंकियों ने इसे गोधरा दंगों का बदला बताया था। जाँच कर रहे पुलिस दल ने इस मामले में कुल 99 आतंकियों की पहचान की गई थी।

इनमें से 82 को अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। जाँच का दायरा इतना बड़ा था कि गुजरात पुलिस ने सूरत में 15 शिकायतें और अहमदाबाद में लगभग 20 केस दर्ज किए। अदालत में सुनवाई के दौरान कुल 78 आरोपितों को पेश किया गया।

जाँच कर रही पुलिस टीम बम धमाकों में शामिल एक आतंकी अयाज़ सैय्यद को सरकारी गवाह बनाने में सफल रही थी। सैय्यद ने अपनी सजा कम करने की अपील की थी। इसी केस में गिरफ्तार कुछ अन्य आरोपित अहमदाबाद की साबरमती जेल से सुरंग खोदकर भागने का असफल प्रयास भी किए थे।

हालाँकि, जेल प्रशासन ने सतर्कता से उनकी साजिश नाकाम कर दी थी। फिलहाल अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों का मुख्य मास्टरमाइंड यासीन भटकल अभी दिल्ली की एक जेल में बंद है, जबकि दूसरा आरोपित अब्दुल सुभान उर्फ ​​तौकीर को कोचीन की एक जेल में रखा गया है।

38 आतंकियों को सजा ए मौत

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस की कोर्ट में सुनवाई लगभग 14 वर्षों तक चली थी। इस लम्बी न्यायिक प्रक्रिया का समापन साल 2022 में विशेष न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत के एक ऐतिहासिक फैसले से हुआ। अपने फैसले में उन्होंने कुल 38 आतंकवादियों को मृत्युदंड दिया था। इसके अलावा, इसी केस के 11 दोषियों को उनके जीवन के आखिरी दिन तक जेल में रहने की सजा मिली। इन सभी के खिलाफ हत्या, राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं में कार्रवाई हुई थी।

अपनी आतंकी करतूत से 56 बेगुनाहों की जान लेने के आरोप में मौत की सजा पाने वाले दोषियों के नाम जाहिद शेख, इमरान इब्राहिम, इकबाल कासम, शमसुद्दीन शेख, गयासुद्दीन अंसारी, मोहम्मद कागजी, मोहम्मद उस्मान, कमरूद्दीन नागोरी, आमिल परवाज, करीम सिबली, सफदर नागोरी, आमिल परवाज, करीम सिबली, कयामुद्दीन कपाड़िया, मोहम्मद सैफ शेख, जीशान अहमद, जियाउर रहमान, मोहम्मद शकील रहमान, मोहम्मद अकबर, फजले रहमान, अहमद बावा बरेलवी, सरफुद्दीन सलीम, सादुली करीम, मोहम्मद तनवीर, अमीन शेख और मोहम्मद मोबिन हैं।

पापा ने कहा था कि वो घर आ रहे

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के 15 साल होने पर ऑपइंडिया ने इस घटना के पीड़ितों में से एक पांचाल परिवार से संपर्क किया। सीरियल विस्फोट में इस परिवार के परेश करसनदास (गोपी भाई) को जान से हाथ धोना पड़ा था। उनके बेटे स्वप्निल ने बताया कि घटना के समय वो क्लास 12 में पढ़ते थे।

घटना के दिन स्वप्निल के पापा ने उनकी मम्मी को फोन पर दोस्तों के साथ होने और थोड़े समय बाद घर आने की बात कही थी। कुछ ही देर में TV पर सीरियल ब्लास्ट की खबरें चलीं। भावुक होकर स्वप्निल ने आगे बताया कि उनके पिता अस्पताल पहुँचकर घायलों की मदद करने लगे। इस बीच एक ब्लास्ट अस्पताल में भी हुआ और उसकी चपेट में स्वप्निल के पिता भी आ गए।

मृतक परेश पांचाल

स्वप्निल ने बताया कि उनके पिता का शरीर तेज धार वाली चीजों से छलनी हो गया था। विस्फोट से निकले छर्रों ने स्वप्निल के पिता की आँतों और लीवर को भारी नुकसान पहुँचाया था। स्वप्निल ने बताया कि उन्होंने परिवार के साथ पूरी रात अपने पिता को खोजा और अगले दिन वो सिविल हॉस्पिटल में मृत अवस्था में मिले।

स्वप्निल ने बताया कि विस्फोट ने उनकी दुनिया ही बदल दी और कभी न भरने वाला घाव दे दिया। बचपन में अपने पिता के साथ बिताए पल अभी भी स्वप्निल को ज्यों का त्यों याद है। अब 26 साल के हो चुके स्वप्निल के दादा 85 साल के हो चुके हैं। पिता की मौत के बाद स्वप्निल के दादा ने ही अपनी बहू के साथ मिलकर उनका पालन-पोषण किया।

मृतक परेश पांचाल के माता-पिता

दरअसल इस ब्लास्ट के बाद सरकार, पुलिस और न्यायपालिका ने सामूहिक तौर पर जिम्मेदारी उठाते हुए दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया। हालाँकि, इन कोशिशों के बावजूद जो लोग अपनों से जुदा हो गए उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। यह एक ऐसा नुकसान है जो किसी भी मुआवजे से परे है।

प्रार्थना इस बात की भी है कि दोबारा देश को कभी ऐसी हृदयविदारक घटना का सामना न करना पड़े। देश में ऐसे सुरक्षित माहौल को बनाने का प्रयास जारी रहे, जहाँ सभी नागरिक बिना डर और दुःख के अपना जीवन सम्मानपूर्वक ढंग से व्यतीत कर सकें।

अक्षय कुमार की ‘OMG 2’ में 20 कट, सेंसर बोर्ड ने भगवान शिव का किरदार बदलने को भी कहा: ट्रेलर को U/A सर्टिफिकेट, रिलीज पर संशय

अक्षय कुमार और पंकज त्रिपाठी स्टारर फिल्म ओएमजी 2 (OMG 2) की मुश्किलें खत्म नहीं हो रही है। फ़िल्म का ट्रेलर U/A सार्टिफिकेट के साथ रिलीज करने की अनुमति दे दी गई है। लेकिन फिल्म को रिलीज करने के लिए सेंसर बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिली है। फिल्म में 20 कट्स लगाए जाने के बाद अब भगवान शिव का किरदार बदलने के लिए कहे जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में फिल्म के तय डेट पर रिलीज होने को लेकर संशय बरकरार है।

इस फिल्म की रिलीज डेट 11 अगस्त 2023 रखी गई थी। लेकिन यह सेंसर बोर्ड में अटकी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओएमजी 2 की कहानी स्कूलों में सेक्स एजुकेशन पर आधारित है। फिल्म के सीन में मास्टरबेशन यानी हस्थमैथुन का भी सीन है। सेंसर बोर्ड ने डायरेक्टर अमित राय से कहा है कि वह फिल्म में भगवान शिव के किरदार को बदलकर शिव दूत का किरदार रख दें। 

कोइमोई ने सूत्रों के हवाले से कहा है, “सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए बदलाव करने का मतलब यह है कि OMG 2 के मेकर्स को कई सीन को बदलना या हटाना होगा। इसमें वे सीन भी शामिल हैं जिनमें अक्षय कुमार को नीले रंग में भगवान शिव के रूप में दिखाया गया है। इस सीन को हटाने या डिजिटल रूप से कलर बदलने में अधिक समय और पैसा दोनों लगेगा।”

ईटाइम्स ने सूत्र के हवाले से कहा है, “सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए बदलावों को देखते हुए फिल्म मेकर्स OMG 2 की रिलीज डेट 11 अगस्त से आगे बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही मेकर्स सेंसर बोर्ड की रिव्यू कमेटी द्वारा लगाए गए कट्स के खिलाफ कोर्ट में अपील कर सकते हैं। इसके अलावा फिल्‍म के प्रमोशन का काम भी बाकी है।”

दरअसल, OMG 2 के मेकर्स सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए कट्स से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि इन कट्स से फिल्म की कहानी कमजोर हो जाएगी। यही नहीं, मेकर्स फिल्म को A सार्टिफिकेट दिए जाने का बोर्ड के सामने विरोध कर रहे हैं। वे फिल्म को U/A सार्टिफिकेट दिए जाने की माँग कर रहे हैं। मेकर्स चाहते हैं कि हर उम्र का व्यक्ति उनकी फ़िल्म देखे। गौरतलब है कि ‘OMG 2’ साल 2012 में आई सुपरहिट फिल्‍म ‘OMG’ का सीक्‍वल है। ‘OMG’ में अक्षय कुमार भगवान कृष्‍ण के अवतार में थे और उनके साथ परेश रावल थे।

बजरंगबली की प्रतिमा का अपमान करने वाले अमजद खान के घर पर चला बुलडोजर, महाकाल की सवारी पर धमकी देने वाला शोएब शेख गिड़गिड़ाया

मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के शहपुरा में भगवान हनुमान की प्रतिमा का अपमान करने वाले अमजद खान का घर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं, उज्जैन में महाकाल की सवारी निकालने को लेकर धमकी देने वाले शोएब शेख ने वीडियो जारी कर माफी माँगी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डिंडोरी जिले के शहपुरा में माँ शारदा टेकरी के पास भगवान बजरंग बली का मंदिर है। अमजद खान और फिरोज खान ने मंदिर में रखी भगवान हनुमान जी की प्रतिमा का अपमान किया था। मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करने के साथ ही घर गिराने की माँग की थी।

हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर थाने का घेराव किया था। चक्का जाम कर विरोध-प्रदर्शन भी किया था। इस बीच प्रशासन ने अमजद खान के घर के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया है। जब यह कार्रवाई की जा रही थी तब अमजद खान के घर पर ताला लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि अमजद खान के परिजन भी शहपुरा छोड़कर चले गए हैं।

हालाँकि हिंदू संगठनों का विरोध अभी समाप्त नहीं हुआ है। वे दूसरे आरोपित निलंबित वन रक्षक फिरोज खान के घर पर भी बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि फिरोज का घर शहडोल जिले में है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपितों के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई करने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा गया है।

ज्ञात हो कि बजरंगबली की प्रतिमा के अपमान का मामला इसी महीने 17 जुलाई को सामने आया था। इस मामले में लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अमजद और फिरोज के खिलाफ मुकदमा दर्ज उन्हें 19 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

पहले दी धमकी, अब माँगी माफी

उज्जैन में एक युवती के साथ हुई छेड़छाड़ के आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर प्रदर्शन हो रहा था। इसी दौरान प्रदर्शन में शामिल शोएब शेख नामक युवक ने महाकाल की सवारी निकालने को लेकर धमकी दी थी। इसको लेकर हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे थे। इस बीच शोएब शेख ने वीडियो जारी कर माफी माँगी है। उसने कहा है कि उसके मुँह से गलती से यह निकल गया था।

वीडियो में शोएब शेख ने कहा है, “मैं सभी से माफी माँगना चाहता हूँ। आरएसएस और हिंदू संगठन व जितने भी लोगों को ऐसा लगता है कि ये सब चीजें नहीं बोलनी चाहिए थी। मैंने ऐसा नहीं बोला था। ये सब गलती से मेरे मुँह से निकल गया है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ। मैं खुद इससे शर्मसार हूँ। उज्जैन में जितने भी लोग महाकाल दर्शन के लिए आते हैं उन सभी का हम ख्याल रखते हैं और आगे आकर सेवा करते हैं। मेरी बातों से जिनका दिल दुखा है मैं उनसे क्षमा चाहता हूँ।”

बता दें कि आरोपित शोएब शेख का धमकी वाला वीडियो वायरल होने के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने शोएब शेख के खिलाफ धारा 502 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 

ज्ञानवापी को मस्जिद कहना गलत, इसमें त्रिशूल-देव प्रतिमाएँ: CM योगी, कहा- ऐतिहासिक गलती के समाधान का प्रस्ताव मुस्लिम समाज से आए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को लेकर साफ कर दिया है कि यह मस्जिद नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य पहचान हैं। इसलिए इस परिसर को मस्जिद नहीं कहा जा सकता।

सीएम योगी ने कहा, “ज्ञानवापी के अंदर देव प्रतिमाएँ हैं। यह प्रतिमा हिंदुओं ने नहीं रखी है। अगर ज्ञानवापी को मस्जिद कहेंगे तो विवाद तो होगा ही।” उन्होंने कहा कि सरकार ज्ञानवापी विवाद का समाधान चाहती है। मुस्लिम समाज को आगे आकर इस ऐतिहासिक गलती सुधारना चाहिए।

ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश ने सीएम योगी से बातचीत में पूछा कि काशी विश्वनाथ मंदिर – ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का कोई समाधान है। इस सीएम योगी ने कहा, “अगर हम उसे मस्जिद कहेंगे तो फिर विवाद होगा। मुझे लगता है कि जिसे भगवान ने दृष्टि दी है, वह देखे इसे।”

सीएम योगी ने कहा, “त्रिशूल मंदिर के अंदर क्या कर रहा है? हमने तो नहीं रखे हैं ना? ज्योतिर्लिंग है, देव प्रतिमाएँ हैं, पूरी दिवालें चिल्ला-चिल्ला के क्या कह रही हैं? मुझे लगता है कि ये प्रस्ताव मुस्लिम समाज की ओर से आना चाहिए कि साहब… ऐतिहासिक गलती हुई है और उस गलती के लिए हम चाहते हैं समाधान हो।”

स्मिता प्रकाश ने सीएम से कहा कि ‘भारत में चल रहा है कि देश में रहना होगा तो वंदेमातरम कहना होगा’ और एक विधायक ने कहा था कि इस्लाम खुदा के अलावा किसी के सामने सिर झुकाने की इजाजत नहीं देता। इस पर सीएम योगी ने कहा, “देश संविधान से चलेगा, मत और मजहब से नहीं।”

सीएम योगी ने आगे कहा, “मैं ईश्वर का भक्त हूँ, लेकिन किसी पाखंड में विश्वास नहीं करता। आपका मत-मजहब आपके अपने तरीके तक होगा, आपके अपने घर में होगा और अपनी मस्जिद… ईबादतगाह तक होगा। यह सड़क पर प्रदर्शन करने के लिए नहीं होगा। इसे आप किसी तरीके से दूसरे पर थोप नहीं सकते।”

योगी आदित्नयाथ ने कहा, “नेशन फर्स्ट। अगर किसी को देश में रहना है तो उसे राष्ट्र को सर्वोपरी मानना होगा, अपने मत और मजहब को नहीं।” सीएम योगी ने बताया कि उनके शासन में उत्तर प्रदेश में दंगे क्यों नहीं हो रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा की भी आलोचना की।

बरेली में काँवड़ मार्ग में धरने पर बैठ गई मुस्लिम महिलाएँ, काँवड़ियों पर लाठीचार्ज के बाद हटाए गए SSP; इंस्पेक्टर सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जोगी नवादा में काँवड़ रूट को लेकर विवाद जारी है। रविवार (30 जुलाई 2023) को जिस रूट से काँवड़ यात्रा निकलनी थी, उस पर मुस्लिम महिलाओं ने धरना दिया। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद वो नहीं हटीं। काँवड़ यात्रा पर लाठी चार्ज होने के बाद महिलाओं का धरना खत्म हुआ। मौके पर भारी फ़ोर्स लगाया गया है। उधर काँवड़ियों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक IPS प्रभाकर चौधरी को हटा दिया गया है। साथ ही SHO और चौकी प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बारादरी थाना क्षेत्र के जोगी नवादा इलाके का है। यहाँ गुंसाई गौटिया नाम के इलाके से पिछले सप्ताह निकली काँवड़ यात्रा पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा पत्थरबाजी की गई थी। मची अफरातफरी के बीच पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। सोमवार (31 जुलाई) से इसी रास्ते से फिर काँवड़ यात्री जल चढ़ाने के लिए जाने वाले थे। इस बीच मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने रविवार को काँवड़ मार्ग पर धरना दे दिया। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो मौके पर पहुँची। धरना दे रहीं महिलाओं को समझाने की काफी कोशिश की गई पर वो नहीं हटीं।

इस धरना-प्रदर्शन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में हिजाब पहने महिलाओं के एक समूह को सड़क पर बैठ कर नारेबाजी करते देखा जा सकता है। महिलाओं के पीछे कुछ नाबालिग बच्चे और पुरुष खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं मौके पर रैपिड एक्शन फ़ोर्स की भी तैनाती देखी जा सकती है। धरना दे रहीं महिलाओं का एलान था कि वो उस मार्ग से काँवड़ यात्रा नहीं निकलने देंगीं।

बताया जा रहा है कि काँवड़ यात्री भी इस बात को ले कर अड़े थे कि वो यात्रा के मार्ग में बदलाव नहीं करेंगे। थोड़ी समय बाद पुलिस ने काँवड़ियों पर लाठीचार्ज किया। इस से भीड़ तितर-बितर हो गई। आखिरकार काँवड़ यात्रा भी इस बार उस मार्ग से नहीं निकल पाई, जहाँ धरना दिया गया था। काँवड़ियों पर लाठीचार्ज के बाद मुस्लिम महिलाओं ने अपना धरना खत्म कर लिया। इस पूरे विवाद की जड़ में शाननूरी मस्जिद बताई जा रही है। पिछली बार 23 जुलाई 2023 को काँवड़ यात्रा पर हुई पत्थरबाजी में भी इसी मस्जिद का नाम सामने आया था। तब पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता उस्मान अल्वी को गिरफ्तार किया था।

लाठीचार्ज के बाद हटाए गए SSP, इंस्पेक्टर सस्पेंड

बताते चलें कि पुलिस द्वारा काँवड़ यात्रियों पर हुए लाठीचार्ज का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में भाग रहे काँवड़ यात्रियों को पुलिस दौड़ा कर पीटती दिखाई दे रही थी। मामला संज्ञान में आने के बाद बरेली पुलिस के SSP प्रभाकर चौधरी को हटा कर लखनऊ PAC भेज दिया गया है। वहीं लाठीचार्ज में शामिल SHO इंस्पेक्टर अभिषेक सिंह और सब इंस्पेक्टर अमित कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। फिलहाल जिले में नए SSP IPS धुले सतीश चंद्रभान की तैनाती की गई है।

ऑपइंडिया से बात करते बरेली के हिन्दू संगठन से जुड़े पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने बताया कि 23 जुलाई को हुई पत्थरबाजी में पुलिस ने सिर्फ 2 लोगों को पकड़ कर खानापूर्ति की थी, इसलिए उपदव्रियों के हौसले इतने बुलंद हुए। उन्होंने काँवड़ियों को आतंकी बोलने वाली बरेली पुलिस DSP दीपशिखा पर भी कार्रवाई न होने पर आश्चर्य जताया। हिमांशु ने हमें बताया कि जिस दिन काँवड़ यात्रियों पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं थीं, उस दिन 3 हजार मुस्लिम भी धारा 144 का उल्लंघन कर के सड़कों पर जमा थे। लेकिन पुलिस की कार्रवाई एकतरफा हिन्दुओं पर ही हुई थी। हिमांशु पटेल ने सड़क कब्ज़ाने वाली मुस्लिम महिलाओं पर कार्रवाई की माँग की है।

47 अजगर साँप और 2 दुर्लभ छिपकलियाँ; त्रिची एयरपोर्ट पर मोहम्मद मोइद्दीन गिरफ्तार… मलेशिया से आए जीवों को वापस भेजने की तैयारी

कस्टम विभाग ने रविवार (30 जुलाई 2023) को तमिलनाडु के त्रिची इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 47 साँपों और 2 छिपकलियों की तस्करी करके ला रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम मोहम्मद मोइद्दीन है। वह इन जीवों को अपने ट्राली बैग में भरकर मलेशिया के क़्वालालामपुर से आया था। इन जीवों को जब्त करके वापस मलेशिया भेजने की तैयारी की जा रही है। आरोपित को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पकड़ा गया आरोपित मोहम्मद मोइद्दीन मूल रूप से चेन्नई का रहने वाला है। वह बाटिक एयरलाइन्स से रविवार को त्रिची एयरपोर्ट पर उतरा था और हवाई अड्डे से बाहर जा रहा था। उसके हाथों में ट्रॉली बैग था। इस दौरान एयरपोर्ट पर मौजूद कस्टम विभाग के अधिकारियों को उस पर शक हुआ।

अधिकारियों ने मोइद्दीन को बुलाकर उसकी और उसके बैग की तलाशी ली। तलाशी के दौरान बैग के अंदर प्लास्टिक के डिब्बों में रखे गए 47 साँप बरामद हुए। ये साँप अजगर प्रजाति के हैं। कस्टम विभाग के अधिकारियों द्वारा बरामद किए गए इन सरीसृपों के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

तलाशी के दौरान बैग से 2 छिपकलियाँ भी बरामद हुईं। इन्हें भी प्लास्टिक के डिब्बे में भर कर रखा गया था। दोनों छिपकलियाँ अलग-अलग प्रजाति की बताई जा रहीं हैं। आरोपित से इन जीवों को लाने के बारे में सवाल किया गया तो वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। आखिरकार मोइद्दीन को हिरासत में ले लिया गया।

हिरासत में आरोपित से इन जीव-जंतुओं को लाने के मकसद के बारे में सवाल किए जा रहे हैं। फिलहाल बरामद 47 साँप और 2 छिपकलियाँ जीवित बताई जा रही हैं। इनकी निगरानी संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। प्रथम दृष्टया इसे जंतुओं की तस्करी माना जा रहा है। इन्हे वापस मलेशिया भेजने की तैयारी की जा रही है।

निकाह के 5 साल में हुआ तलाक: भगवान कृष्ण के शरण में पहुँची मुस्लिम महिला शबनम, मीरा बन पहुँची वृंदावन

सनातन धर्म को जिसने भी समझने की कोशिश की, वही इसका हो कर रह गया। शबनम नाम की एक मुस्लिम महिला का जब सनातन और राधा-कृष्ण से परिचय हुआ तो वह शबनम से मीरा बन गई। शबनम भगवान में प्रेम में डूबकर घर-बार छोड़ दिया और भगवान की भक्ति के लिए वृंदावन पहुँचकर आश्रम में रहने लगीं।

शबनम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित जिगर कॉलोनी की निवासी हैं। उनके अब्बू क नाम इकराम हुसैन है। हुसैन पीतल के बर्तन और मूर्तियाँ बनाने का काम करते हैं। घर में वह भगवान की मूर्तियों को बनते हुए देखकर बड़ी हुईं। इस तरह से इन मूर्तियों और इनसे जुड़े भगवान के प्रति शबनम का एक लगाव हो गया।

शबनम जैसे ही थोड़ी बड़ी हुई तो साल 2000 में उसका निकाह दिल्ली के शाहदरा में हो गया। हालाँकि, 5 साल बाद 2005 में ही शबनम का तलाक हो गया। तलाक के बाद शबनम एक बार फिर अपने पिता के पास वापस लौट आईं और साथ रहने लगीं।

हालाँकि, वह अपने मायके ज्यादा दिन नहीं रह पाई। इस बीच शबनम को एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी मिली। उन्होंने वह लेडी बाउंसर के तौर पर कुछ महीनों तक काम किया, लेकिन उन्हें यह काम रास नहीं आई। वह भगवान में भक्ति में लीन रहना चाहती थीं।

शबनम हाथ में लड्डू गोपाल (भगवान कृष्ण का बाल रूप) वृंदावन पहुँच गईं। शबनम का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार से नाता तोड़ दिया है। उन्होंने अपने भाई-बहनों और अम्मी-अब्बू सहित अन्य रिश्तेदारों से बातचीत बंद कर दी है। वह अब भगवत भक्ति करती हैं।

शबनम ने अपना नाम मीरा रख लिया है। वह दस्तावेजों में भी अपना नाम मीरा कराना चाहती हैं। हालाँकि, अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। उनका मानना है कि एक ना एक दिन दिन यह हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्ति में बिताना चाहती हैं।