Home Blog Page 1645

16 साल से एनेस्थीसिया का डॉक्टर, कई किताबों में लेख… ISIS आतंकी निकला अदनान अली, NIA ने महाराष्ट्र से दबोचा

महाराष्ट्र में ISIS के नेटवर्क को खंगाल रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है। NIA ने प्रदेश में पाँचवी गिरफ्तारी के तौर पर डॉ अदनान अली सरकार को पुणे से दबोचा है। जाँच एजेंसी के मुताबिक आरोपित देश की एकता, अखंडता और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करने के साथ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहा था। डॉ अदनान को गुरुवार (27 जुलाई 2023) को गिरफ्तार किया गया है।

27 जुलाई को एक प्रेसनोट जारी करते हुए NIA ने इस गिरफ्तारी की जानकारी साझा की है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इसे बड़ी सफलता बताया है। गिरफ्तार हुआ 43 वर्षीय डॉ अदनान पुणे के कोंढवा इलाके में रहता था। यहीं NIA ने छापेमारी की जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। डॉ अदनान अली के घर की तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, आतंकी संगठन ISIS से संबंधित कई से जुड़े कई दस्तावेज और तमाम अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है। इन्हे सील कर के जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार डॉक्टर अदनान अली सरकार को एनेस्थीसिया के इलाज में 16 वर्षों का अनुभव है। डॉ अदनान अली ने साल 2001 में पुणे के बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से MBBS किया था। इसके बाद साल 2006 में उसने उसी कॉलेज से MD एनेस्थीसिया किया। ISIS समर्थक डॉ अदनान इंग्लिश, हिंदी, मराठी, और जर्मन भाषाओं का अच्छा ज्ञान है। कोर्स की कई ऐसी किताबें भी हैं जिसमें डॉ अदनान अली सरकार ने सहायक प्रकाशक के तौर पर काम किया है। ,

अब तक की प्रारम्भिक जाँच में सामने आया है कि डॉ अदनान भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की मंशा से ISIS संगठन में युवाओं की भर्ती की कोशिशों के साथ आतंकी संगठन की हिंसक गतिविधियों को भारत में फैलाने की साजिश रच रहा था। NIA ने प्रथम दृष्टया अदनान की हरकतों को देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ माना है। डॉ अदनान व उसकी गैंग से जुड़े अन्य संदिग्धों के खिलाफ NIA ने 28 जून, 2023 को FIR दर्ज किया था। डॉ अदनान अली से पहले 3 जुलाई, 2023 को NIA ने मुंबई से 4 अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।

डॉ अदनान से पहले गिरफ्तार हुए चारों संदिग्धों की पहचान मुंबई के ताबिश नासिर सिद्दीकी, पुणे के जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ ​​अबू नुसैबा, ठाणे के शरजील शेख और जुल्फिकार अली बड़ौदावाला के रूप में हुई थी। NIA का यह भी कहना है कि वह अब इन सभी से पूछताछ के आधार पर इनके पूरे नेटवर्क को खँगालेगी।

‘ड्रोन का इस्तेमाल कर पंजाब में ड्रग्स भेज रहा पाकिस्तान’: प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ के करीबी का खुलासा, हाईटेक तकनीक से नारकोटिक्स तस्करी

पंजाब को ‘उड़ता पंजाब’ बनाने में पाकिस्तान का बड़ा हाथ है। पाकिस्तान के तस्कर अब पंजाब में ड्रग्स भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तान के ही एक सीनियर अधिकारी ने इसका खुलासा कर दिया, वो भी मीडिया के सामने। हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर के भारत में नारकोटिक्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। कसूर सिटी में पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के साथ एक इंटरव्यू में वहाँ के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के करीबी ने ये खुलासा किया है।

मलिक मोहम्मद अहमद खान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के ‘स्पेशल असिस्टेंट ऑन डिफेंस’ हैं, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की प्रांतीय असेंबली के सदस्य (MPA) भी हैं। उन्होंने जहाँ से चुनाव जीता है, वो इलाका भारत की सीमा से भी लगता है। सोमवार (17 जुलाई, 2023) को ट्वीट किए गए एक वीडियो में उन्हें इस पर बात करते हुए देखा जा सकता है। जब मीर ने कसूर में क्रॉस-बॉर्डर नारकोटिक्स के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने सहमति में सिर हिलाया।

उन्होंने कहा कि हाँ, ये बहुत भयावह है। उन्होंने बड़ा खुलासा किया कि हाल ही में ऐसी 2 घटनाएँ हुई हैं। 10 किलोग्राम हेरोइन को ड्रोन से बाँध दिया गया और फिर सीमा के उस पार भारत में भेज दिया गया। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए सेप्सिअल पैकेज की माँग करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हो पाया तो वो लोग भी ड्रग्स की तस्करी में लिप्त हो जाएँगे। पंजाब के खेमकरण और फिरोजपुर के बीच में कसूर बसा हुआ है।

भारत की पंजाब पुलिस के आँकड़ों की मानें तो जुलाई 2022 से लेकर अब तक 1 साल में पंजाब में NDPS एक्ट के तहत 795 FIR दर्ज कराए गए हैं। अधिकतर ड्रग्स पंजाब के उन जिलों से जब्त किए गए, जिनकी सीमाएँ पाकिस्तान से लगती हैं। BSF ने भी इसकी पुष्टि की है कि ड्रग्स की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। 260 किलोग्राम हेरोइन, 19 बंदूकें, 30 कारतूस और 470 राउंड गोलियों के अलावा 30 पाकिस्तानी ड्रोन भी जब्त किए गए हैं।

हामिद मीर ने भी कहा है कि मलिक अहमद खान द्वारा की गई स्वीकारोक्ति महत्वपूर्ण है। वो पाकिस्तान के सत्ता और सैन्य प्रतिष्ठान के करीबी हैं। पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल बाजवा के भी वो करीबी हैं। वर्तमान मिलिट्री अधिकारियों से भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कसूर में मोबाइल सिग्नल जाम कर रखे हैं, इसके बावजूद ड्रग्स और शराब की तस्करी हो रही है। फोन कनेक्टिविटी न दे पाने के कारण कसूर में उनका खासा विरोध हो रहा है।

‘हिजाब नहीं बुर्का पहनो’: कर्नाटक में बस ड्राइवर ने मुस्लिम छात्राओं को उतार दिया, कहा – बिना बुर्के के बस में नहीं दूँगा एंट्री

कर्नाटक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बस ड्राइवर को छात्राओं को बुर्का पहनने के लिए कहते हुए देखा जा सकता है। उक्त ड्राइवर ने स्कूल जाती लड़कियों से कहा कि वो उन्हें तभी बस में बैठने देगा, जब वो बुर्का पहन कर आएँगी। अंततः उसने छात्राओं को बाद में नहीं चढ़ने दिया। कमलापुर तालुक के ओकली गाँव की ये छात्राओं को बस में चढ़ना था, ताकि वो बसव्कल्याण स्थित अपने स्कूल में पढ़ने के लिए जा सकें।

वहाँ मौजूद लोगों ने बताया कि बस ड्राइवर ने छात्राओं को उनके मजहब की याद दिलाते हुए कहा कि वो बस में चढ़ने से पहले बुर्का पहन लें। बता दें कि ये छात्राएँ भी मुस्लिम समुदाय की ही थीं। यहाँ तक कि जिन लड़कियों ने हिजाब और स्कार्फ पहन रखा था, उसे भी इस बस ड्राइवर ने बस में नहीं घुसने दिया। उसने साफ़ कर दिया कि बिना बुर्के के किसी भी मुस्लिम लड़की को वो बस में नहीं बैठने देगा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

बस ड्राइवर ने यहाँ तक कहा कि अगर तुमलोग मुस्लिम हो तो हिजाब नहीं बल्कि बुर्का पहनो। छात्राओं से पहले उसने उनके धर्म के बारे में पूछा था। जब पता चला कि वो मुस्लिम हैं, तब वो भड़क गया। छात्राओं ने भी बुर्का पहनने से इनकार कर दिया। इसके बाद बस ड्राइवर उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगा। जब लोगों ने हस्तक्षेप किया तो वो बात घुमाते हुए कहने लगा कि बस ख़राब हो गई है, इसीलिए छात्राएँ हंगामा कर रही हैं।

वो कहने लगा कि उसने बस खराब होने की बात बताई, इसके बावजूद लड़कियाँ बस में बैठ गईं। राज्य के परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर ने जो किया वो गलत है, क्या पहनना है ये उन लड़कियों का अधिकार है। याद दिला दें कि हिजाब के समर्थन में कर्नाटक प्रदर्शन और हिंसा का गवाह बना था। शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब-बुर्का की अनुमति के लिए जिद करते हुए बवाल किया गया था।

दरभंगा में सोशल साइट्स बंद कर क्या छिपा रही बिहार पुलिस, सांसद बोले- जहाँ मुस्लिम ज्यादा, वहाँ सत्यनारायण पूजा भी नहीं कर सकते हिंदू

मधुबनी हो या दरभंगा, किशनगंज हो या अररिया, मिथिला क्षेत्र के जिस भी इलाके में मुस्लिमों की आबादी अधिक है, हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं, वहाँ पूजा तक नहीं करने दिया जाता है। सत्यनारायण भगवान की कथा नहीं होने दी जाती है। शादी-ब्याह में ढोल-बाजा नहीं बजने दिया जाता है। कहते हैं कि मस्जिद के आगे से बारात लेकर नहीं जाने देंगे।

बिहार के मधुबनी के सांसद अशोक यादव ने महादलित बुजुर्ग श्रीकांत पासवान के अंतिम संस्कार में समुदाय विशेष के लोगों के उत्पात का जिक्र करते हुए यह बात ऑपइंडिया से कही है। वैसे यह घटना दरभंगा जिले के कमतौल थाना क्षेत्र धर्मपुर-मालपट्टी गाँव की है। लेकिन यह इलाका अशोक यादव के संसदीय क्षेत्र में ही आता है। दरभंगा जिले में पिछले कुछ दिनों में कई सांप्रदायिक घटनाएँ हुई हैं।

मसलन 21 जुलाई को बिरौल थाना क्षेत्र में मोहर्रम का झंडा लगाने को लेकर विवाद हुआ। फिर 23 जुलाई को मब्बी थाना क्षेत्र के शिवधारा चौक पर भी देर रात इसी कारण तनाव पैदा हुआ। 23 जुलाई को श्रीकांत पासवान के दाह संस्कार के दौरान पथरबाजी और आगजनी की घटना हुई। 24 जुलाई को कमतौल थाना क्षेत्र के ही बरिऔल गाँव में मोहर्रम के जुलूस में डीजे बजाने पर फसाद हुआ। 25 जुलाई को मनीगाछी थाना क्षेत्र के इजरहटा गाँव में मारपीट हुई। 26 जुलाई को सिमरी थाना क्षेत्र के बनोली गाँव में मोहर्रम झंडा को लेकर विवाद हुआ। 27 जुलाई को सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के भवानीपुर भापुरा प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से मुहर्रम झंडा लगाने पर विवाद होते-होते बचा।

यह दूसरी बात है कि दरभंगा पुलिस इन विवादों को इस तरह पेश कर रही है, जैसे ये सामान्य घटनाएँ हो। इसी कोशिश में अब दरभंगा जिले में सोशल साइट्स बंद कर दिए गए हैं। जन संपर्क उप निदेशक ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि विधि-व्यवस्था के कारण 27 जुलाई की शाम से 30 जुलाई 2023 की शाम तक सोशल नेटवर्किंग सेवाएँ बंद रहेंगी।

इसमें बताया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए दरभंगा में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य के गृह विभाग के निर्देश पर ये सेवाएँ स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने सहित सोशल नेटवर्किंग की तमाम सेवाओं पर यह बंदिश लागू है।

भले दरभंगा प्रशासन ने असमाजिक तत्व, सांप्रदायिक सौहार्द जैसी सरकारी शब्दकोष के साथ यह प्रतिबंध लगाया है, लेकिन दरभंगा ​जिले में पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं से आप समझ सकते हैं कि यह नौबत क्यों आई है। किनके कारण आई है। यह दूसरी बात है कि राष्ट्रीय मीडिया में इन घटनाओं को सुर्खियाँ नसीब नहीं हुई हैं। इससे भी खतरनाक स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने, पीड़ितों पर दबाव बनाने और बीच-बचाव करने वालों को भी प्रताड़ित करने जैसे आरोप लगना है।

दरभंगा में सोशल साइट्स पर बैन को लेकर प्रशासन की तरफ से मीडिया में जारी बयान

शव के साथ अमानवीय व्यवहार, हिंदुओं के घर फूँके: सांसद अशोक यादव

श्रीकांत पासवान के दाह-संस्कार के दौरान हुई घटना का हवाला देते हुए सांसद अशोक यादव ने ऑपइंडिया को बताया कि श्मशान की जिस जमीन को अपना बताकर मुस्लिम समुदायों के लोग ने विरोध किया, वहाँ कई पुश्तों से हिंदू दाह-संस्कार करते आ रहे हैं। श्मशान की जमीन नीचे हो जाने के कारण पानी लगने लगा था। मनरेगा से मिट्टी भराई उस जगह पर की गई है। उन्होंने कहा, “शव के साथ अभद्र-अमानवीय व्यवहार किया गया। इससे पहले इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। लाश को फेंक ​दिया गया। उस पर लाठी चलाई गई और अन्य अमानवीय व्यवहार किया गया। हिंदुओं का घर जलाया गया। स्थानीय मुखिया की मोटरसाइकिल फूँक दी गई। ट्रांसफर्मर से बिजली काटकर हिंसा की गई।”

सांसद के अनुसार जो कुछ हुआ वह प्रशासन के सामने हुआ। पुलिस के लोग भी घायल हुए हैं। पुलिस को दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन प्रशासन ने बीच-बचाव कराने मौके पर गए मुखिया अजय झा को ही इस मामले में घसीट दिया। उन्हें जेल भेज दिया। थाना लाकर उनको अपमानित किया गया। उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “श्मशान की जितनी भूमि खतियान में है, उसकी अविलंब घेराबंदी कर बिहार सरकार हिंदुओं को सौंप दे। दोषियों पर कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो। यदि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती है तो फिर से इस तरह की घटना होने की आशंका है।”

श्रीकांत पासवान के शव के साथ क्या हुआ था

धर्मपुर गांव के 62 साल के श्रीकांत पासवान कैंसर से पीड़ित थे। मौत हो गई तो परिजन अंतिम संस्कार के लिए 23 जुलाई 2023 को शव श्मशान में ले गए। यह श्मशान मालपट्टी गांव की सीमा से लगा है। मालपट्टी गांव के मुस्लिमों ने श्मशन की जमीन को अपनी बताकर अंतिम संस्कार का विरोध किया। पत्थरबाजी से लेकर घरों पर हमले तक हुए। मीडिया रिपोर्टों में जलती चिता को फेंकने और शव पर पेशाब करने जैसे दावे तक गिए थे। लेकिन बिहार पुलिस इन दावों को नकार रही है। वह इसे अंतिम संस्कार को लेकर दो समुदाय के बीच उत्पन्न विवाद बता रही है।

ऑपइंडिया को कमतौल के थाना प्रभारी ने बताया था कि शव के साथ अमानवीयता के जो दावे किए जा रहे हैं, वे झूठे हैं। विवाद की सूचना मिलने के बाद जब पुलिस मौके पर पहुँची तो शव गड्ढा खोदकर चिता पर रखा हुआ था। प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार करवाया गया। उन्होंने बताया था कि पीड़ित परिवार ने भी अपनी शिकायत में शव के साथ किसी तरह की अभद्रता का जिक्र नहीं किया है। उन्होंने उपद्रव के दौरान तीन पुलिसकर्मियों के चोटिल होने की बात कही थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार विवाद की सूचना मिलने के बाद मुखिया अजय झा मौके पर पुलिस प्रशासन के साथ पहुँचे थे। लेकिन बाद में मुस्लिमों के दबाव में उनको भी इस मामले में फँसाकर गिरफ्तार कर लिया गया। ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ नाम के एक संगठन ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस संबंध में पत्र लिखा था। मुखिया अजय कुमार झा पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा था कि मालपट्टी के दो दर्जन से अधिक मुस्लिमों के घरों में मुखिया के आदमी और पुलिस ने घुसकर मारपीट की।

‘बिहार को भी चाहिए यूपी का बुलडोजर मॉडल’

इसी तरह हाल में हुई अन्य घटनाओं में भी पुलिस पर मुस्लिमों के दबाव में काम करने और हिंदुओं को भी फँसाने के आरोप लग रहे हैं। सांसद अशोक यादव इसे बिहार सरकार की तुष्टिकरण का नतीजा बताते हैं। उन्होंने ऑपइंडिया से कहा, “लालू प्रसाद यादव के लिए शुरू से ही विकास का कोई मतलब नहीं रहा है। वह तुष्टिकरण और माई समीकरण की राजनीति करते रहे हैं। नीतीश कुमार की भी यह नीति रही है। बीजेपी जब साथ रही तो वे खुलकर तुष्टिकरण नहीं कर पाते थे। लेकिन अब लालू यादव से हाथ मिलाने के बाद वे भी खुलकर तुष्टिकरण करने और वोट बैंक बनाने में लगे हैं। यही कारण है कि बिहार में इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकवादी भी खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। इसका उपचार कैसे किया जा सकता है यह बीजेपी की सरकार ने उत्तर प्रदेश में दिखाया है। यूपी में यदि इस तरह की घटना हुई होती तो अब तक बुलडोजर चल गया रहता। अब बिहार में भी ऐसी ही सरकार की आवश्यकता है।”

एक दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर जिस तुष्टिकरण की बात अशोक यादव कह रहे हैं, वह दरभंगा पुलिस के ट्विटर हैंडल पर भी दिखती है। महादलित श्रीकांत पासवान के अंतिम संस्कार पर बवाल करने वालों के नाम पुलिस ने नहीं बताए हैं। विरोध करने वाले लोगों की पहचान ‘अन्य समुदाय’ के तौर पर सोशल मीडिया में बताई है। लेकिन इसी पुलिस ने बहेड़ा थाना क्षेत्र में एक दलित किशोरी के साथ बलात्कार के आरोपित मनीष कुमार सिंह का नाम-पता और तस्वीर तक सोशल मीडिया में जारी की है।

एक मामले में आरोपित का नाम पता सब, दूसरे में केवल अन्य समुदाय

क्या इसी तुष्टिकरण पर पर्दा डालने की नीयत से अब सोशल नेटवर्किंग साइट पर बैन लगाने का फैसला आया है? इसका बेहतर जवाब दरभंगा का पुलिस-प्रशासन ही दे सकता है। जो वह फिलहाल पूछे जाने पर भी नहीं दे रही है।

राजस्थान में BJP को पूर्ण बहुमत, कॉन्ग्रेस सरकार को बेदखल करेगी जनता: ओपिनियन पोल में खुलासा, बतौर PM 70% की पसंद मोदी

क्षेत्रफल के हिसाब से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने है। अब इस विधानसभा चुनाव को लेकर ABP न्यूज़-C वोटर ने एक सर्वे कराया है। इस ओपिनियन पोल की मानें तो राजस्थान में सत्ता में बैठी कॉन्ग्रेस पार्टी की हार तय लग रही है, वहीं भाजपा सत्ता में वापसी करती हुई दिख रही है। बता दें कि राजस्थान में 108 सीटों वाली कॉन्ग्रेस पार्टी बहुमत में है और अशोक गहलोत राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात्र 70 सीटों से संतोष करना पड़ा था, लेकिन अबकी ओपिनियन पोल की मानें तो भाजपा 109-119 सीटें लेकर सरकार बना सकती है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी की बात करें तो उसे 78-88 सीटों से संतोष करना पड़ेगा और वो बहुमत से काफी दूर रहेगी। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में राजस्थान की सभी सीटों पर दम ठोका था। इस बार भी पार्टी सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

‘एबीपी न्यूज़’ और ‘सी-वोटर’ ने साथ मिल कर जो ओपिनियन पोल किया है, उसके हिसाब से भाजपा 46% वोट शेयर के साथ बाजी मारती हुई दिख रही है। जबकि कॉन्ग्रेस का वोट शेयर उससे 5 प्रतिशत कम, यानी 41% रहने का अंदाज़ा है। 13% वोट अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में जाता दिख रहा है। इस सर्वे में 14.85 हजार लोगों से बात की गई है। 25 जुलाई तक ये सर्वे संपन्न किया गया। 1885 लोगों से कुछ त्वरित सवाल भी पूछे गए।

दोनों संस्थानों ने मिल कर एक और सर्वे भी किया है, जिसमें देश के लोगों से पूछा गया कि प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में उनकी पहली पसंद कौन है। 63% लोगों ने जहाँ नरेंद्र मोदी को पहली पसंद बताया, वहीं 20% ने राहुल गाँधी और 6% ने योगी आदित्यनाथ को पहली पसंद बताया। 2% अरविंद केजरीवाल के पक्ष में भी दिखे। 70% ने कहा कि डायरेक्ट पीएम चुनने की स्थिति में वो राहुल गाँधी पर नरेंद्र मोदी को तरजीह देंगे।

विपक्षी ने नया गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ बनाया है, जिसके पक्ष में खूब माहौल बनाया जा रहा है, ऐसे में इस सर्वे के नतीजों से विपक्षी दलों को झटका लगना तय है। मात्र 25% ने कहा कि डायरेक्ट प्रधानमंत्री चुनने की नौबत आएगी तो वो राहुल गाँधी को चुनेंगे। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक विपक्ष लगातार मणिपुर का मुद्दा उछालने में लगा हुआ है, लेकिन इससे उसे कोई खास फायदा होता हुआ दिख नहीं रहा है।

मणिपुर वीडियो कांड की जाँच CBI के हवाले, केंद्रीय गृह मंत्रालय का फैसला: जिसने वीडियो शूट किया वो भी धराया, फोन जब्त

मणिपुर वीडियो काण्ड की जाँच अब CBI को सौंप दी गई है। राज्य में 3 महिलाओं को नग्न कर भीड़ द्वारा उनका जुलूस निकाले जाने और उनके साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिए जाने की वारदात की जाँच अब सीबीआई करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ( 27 जुलाई, 2023) को बताया है कि इस मामले की जाँच ‘केंद्रीय जाँच एजेंसी’ को रेफर कर दी गई है। 26 सेकेण्ड का उक्त वीडियो घटना के ढाई महीने बाद वायरल हुआ था, जिसके बाद आरोपितों की धर-पकड़ शुरू हुई थी।

ये भी जानकारी सामने आई है कि सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दायर कर केंद्र सरकार ये माँग करेगी कि इस मामले की जाँच को मणिपुर से बाहर ट्रांसफर किया जाए। इसके लिए असम को चुना जा सकता है। जिस मोबाइल फोन से इस वीडियो को शूट किया गया था, उसे जब्त कर लिया गया है। साथ ही जिस व्यक्ति ने महिलाओं का नग्न परेड कराए जाने वाला वीडियो शूट किया था, उसकी पहचान के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि केंद्र सरकार इस मामले में कुकी और मैतेई, दोनों समुदायों के संपर्क में है और शांति बहाली के लिए हर प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष संसद भी नहीं चलने दे रहा है, जिसके बाद अमित शाह ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी, दोनों को पत्र लिख कर मणिपुर की घटनाओं पर चर्चा के लिए सहयोग माँगा था। 

अमित शाह ने मणिपुर को भारत का बहुत महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य बताते हुए लिखा था कि इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत संपूर्ण भारत की संस्कृति का गहना है। अमित शाह ने पत्र के माध्यम से बताया कि पिछले 6 वर्षों से मणिपुर भाजपा के शासनकाल में शांति और विकास का अनुभव कर रहा था, लेकिन कुछ अदालती निर्णयों और कुछ घटनाओं के कारण मई महीने में हिंसा की घटनाएँ घटीं। अमित शाह ने कहा कि जनता को ये अपेक्षा है कि देश दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर मणिपुर के लोगों के साथ खड़ी हो।

जब गौरी से शादी के लिए शाहरुख़ खान बन गए ‘जितेंद्र कुमार तुली’, इस नाम के पीछे बॉलीवुड की 2 बड़ी हस्तियाँ: गौरी को निकाह के लिए बनना पड़ा था ‘आयशा’

शाहरुख़ खान और गौरी की प्रेम कहानी के बारे में लगभग सभी जानते हैं। गौरी के चक्कर में ही शाहरुख़ मुंबई आए थे। गौरी के पिता को वो पसंद नहीं थे, ऐसे में उन्हें शादी के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े। फिल्मों में आने से पहले शाहरुख़ खान 1989 में आने वाले ‘फौजी’ और ‘सर्कस’ जैसे सीरियलों के लिए जाने जाते थे। क्या आपको पता है कि गौरी से शादी के लिए शाहरुख़ खान ने अपना नाम बदल कर ‘जितेंद्र कुमार तुली’ रख लिया था?

मुस्ताक शेख ने अपनी पुस्तक ‘Shah Rukh Can’ में लिखा है कि बीते जमाने के 2 अभिनेताओं को सम्मान देने के लिए शाहरुख़ खान ने ये नाम चुना था। उनकी दादी को ऐसा लगता था कि शाहरुख़ खान, ‘जम्पिंग जैक’ कहे जाने वाले अभिनेता जितेंद्र जैसे दिखते हैं। वहीं ‘तुली’ राजेंद्र कुमार का ऑरिजिनल सरनेम हुआ करता था। उन्हें ‘जुबली कुमार’ भी कहा जाता था, क्योंकि आए दिन उनकी फ़िल्में सिल्वर जुबली करती थीं।

लेखक मुस्ताक शेख के बारे में बता दें कि वो शाहरुख़ खान की ‘ओम शांति ओम (2007)’, ‘बिल्लू (2009)’ और ‘Ra.One (2011)’ जैसी बड़ी फिल्मों का स्क्रीनप्ले भी लिख चुके हैं। असल में गौरी निकाह के लिए ‘आयशा’ बनी थीं। विवाह के 2 कार्यक्रम हुए थे और कोर्ट मैरिज भी हुई थी। नाम बदलने के बारे में ज़्यादा लोगों को नहीं बताया गया था। 1991 में दोनों की शादी हुई थी। आर्यन खान और अबराम जहाँ उनके 2 बेटे हैं, वहीं सुहाना नामक एक बेटी हैं।

गौरी खान की माँ ने इसके रिश्ते के खिलाफ नींद की गोलियाँ खा ली थीं, लेकिन वो किसी तरह बच गईं। गौरी ने अपने लोगों के बीच शाहरुख़ खान का नाम ‘अभिनव’ बताया था, ताकि ऐसा लगे कि वो हिन्दू हैं। शाहरुख़ खान दावा करते हैं कि उनके बच्चे सबसे पहले भारतीय हैं और उनका धर्म मानवता है। शाहरुख़ खान ने बताया कि उन्हें इस दौरान विरोध का सामना भी करना पड़ा था। उन्होंने अपने दोस्त संजय का पता अपने नाम पर लिख रखा था, इस कारण उन पर पत्थर चले – ऐसा उन्होंने दावा किया।

AMU के सुलेमान हॉस्टल में हिंदू युवक की बेल्ट से पिटाई, जूते पर रगड़वाई नाक: Video वायरल होने के बाद प्रॉक्टर ने दिए जाँच के आदेश

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक हॉस्टल में हिंदू युवक की पिटाई का वीडियो सामने आया है। वीडियो में तीन लोग दिख रहे हैं। एक हिंदू युवक को पीट रहा है। दूसरा उसे पिटते दिख रहा है। घटना करीब एक महीने पुरानी है। लेकिन इसका वीडियो अब वायरल हुआ है। यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ने घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।

पुलिस के अनुसार पीड़ित युवक का नाम आकाश है। उसे जो बेल्ट और लात-घूसों ​से​​​​​​ मार रहा है, उसकी पहचान राहुल उर्फ फरमान के तौर पर बताई गई है। मीडिया रिपोर्टों में पीटने वाले का नाम जैद मोहम्मद बताया गया है। वीडियो में नजर आ रहा तीसरा युवक AMU का छात्र नेता फरहान जुबेरी बताया जा रहा है। हिंदू युवक की पिटाई 23 जून 2023 को सुलेमान हॉस्टल में की गई थी। पुलिस के अनुसार पीड़ित और आरोपित AMU के छात्र नहीं हैं।

छात्र नेता फरहान जुबेरी ने ऑपइंडिया को बताया कि जब यह घटना हुई उस समय गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी। घटना की जानकारी मिलने पर वह मौके पर गया था और पीड़ित छात्र को बाहर निकालकर लाया था। उसने बताया कि इसके कारण ही थोड़ी देर के लिए वह भी वीडियो में नजर आ रहा है। जुबेरी का यह भी कहना है कि छुट्टी के समय छात्रों के घर जाने के कारण हॉस्टल खाली हो जाते हैं। इसका फायदा उठाते हुए बाहरी तत्व ताला तोड़कर हॉस्टल के कमरों में घुस जाते हैं।

वीडियो में जिस युवक की पिटाई हो रही है, वह हाथ जोड़ते हुए छोड़ देने की गुहार लगाता दिख रहा है। कथित तौर पर आरोपित ने जूते पर उससे नाक भी रगड़वाई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित आकाश अलीगढ़ का रहने वाला है और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। उसके एक दोस्त का होटल महेशपुर में है। आरोपित यहाँ शराब पीने के लिए आया करते थे। एक दिन आकाश ने आरोपितों को होटल पर शराब पीने से रोक दिया। यह बात फरहान को नागवार गुजरी। उसने बहाने से 23 जून को आकाश को AMU के सुलेमान हॉस्टल बुलाया। यहाँ उसकी पिटाई की गई।

वायरल वीडियो में पीड़ित छात्र को आरोपितों के आगे हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते देखा जा सकता है। वहीं आरोपित बेल्ट के साथ लात-घूसों से उसे मार रहा है और गालियाँ दे रहा है। पुलिस के अनुसार घटना के बाद दोनों पक्षों को थाने पर लाया गया था। तब पीड़ित ने आरोपितों के खिलाफ कोई शिकायती पत्र नहीं दिया था। इसके बावजूद आरोपित का चालान शांतिभंग की धाराओं में किया गया था। दावा यह भी किया जा रहा है कि पिटाई के बाद से पीड़ित का मोबाइल बंद है और वह शहर से गायब है।

पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर एम वसीम ने जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि पुलिस के सहयोग से वीडियो की जाँच करवाई जा रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए अलीगढ़ पुलिस के DSP- 3 ने बताया कि यदि पीड़ित व्यक्ति द्वारा कोई तहरीर मिलती है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि पीड़ित और आरोपित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र नहीं हैं। करणी सेना ने इस वीडियो में दिख रहे आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

‘मुस्लिम लड़कों को 1 साल से शेयर किए जा रहे थे हिंदू महिलाओं के वीडियो’: उडुपी की कॉलेज छात्राओं का खुलासा, एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल खादर ने बताया था ‘प्रैंक’

कर्नाटक के उडुपी में कॉलेज के बाथरूम में कैमरा लगा कर हिन्दू लड़कियों का वीडियो बना जाने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया में बताया गया कि मुस्लिम लड़कियों ने ये वीडियो बना कर अपने समुदाय के लड़कों को भेजा। अब कॉलेज की छात्राओं ने इस बारे में कई अन्य खुलासे किए हैं। ‘TV9 कन्नड़’ के साथ एक इंटरव्यू में उसी कॉलेज की छात्राओं ने बताया है कि मुस्लिम लड़कियाँ पिछले 1 साल से हिन्दू छात्राओं के वीडियो बना रही थीं और मुस्लिम लड़कों के साथ साझा कर रही थीं।

‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ की छात्राओं ने बताया, “पिछले एक साल से ये सब हो रहा था। कॉलेज के बाहर मुस्लिम लड़के कार में इंतजार करते रहते थे। हिन्दू लड़कियों का वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद मुस्लिम लड़कियाँ उन्हें जाकर अपना फोन दे देती थीं। दोपहर में लंच के समय मोबाइल फोन्स की अदला-बदली होती थी। कॉलेज मैनेजमेंट के सामने इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। 18 जुलाई, 2023 को पीड़िता ने कॉलेज प्रबंधन से फिर शिकायत की।”

लड़कियों ने बताया कि मैनेजमेंट ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। 2 दिन बाद 20 जुलाई को कॉलेज की अन्य छात्राओं को इस बारे में पता चला और वो धरना प्रदर्शन पर बैठ गईं। छात्राओं ने बताया कि तीनों आरोपित मुस्लिम लड़कियों ने मोबाइल फोन में वीडियो डाल कर ऊच्चीला से आए मुस्लिम लड़कों को दिया था। ये लड़के पल्सर बाइक और कार से आते थे। छात्राओं ने ये भी बताया कि तीनों मुस्लिम लड़कियों के नाम हैं – शाफिया, अल्फिया और शबनाज़।

छात्रों ने बताया कि अब्दुल खादर कॉलेज मैनेजमेंट में एडमिनिस्ट्रेटर है। लड़कियों ने बताया कि उन्होंने आकर उनसे कहा कि उन तीनों लड़कियों को ‘सुंदर सज़ा’ दे दी गई है। उन्हें 5 बार ये लिखने के लिए कहा गया है कि वो आगे से ऐसा नहीं करेंगी। मीडिया से बात करते हुए कॉलेज की छात्राओं ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि ये सब प्रैंक के लिए किया गया था और उन्हें इस मामले को नहीं उठाना चाहिए। मोहम्मद ज़ुबैर जैसों ने भी इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया।

छात्राओं ने कहा, “हम पूछना चाहती हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी के घर के बाथरूम में वीडियो लगा कर घर की महिलाओं का वीडियो रिकॉर्ड करने लगे, तो क्या उस घर का व्यक्ति कहेगा कि ऐसी हरकत करने वालों को होमवर्क देकर छोड़ दिया जाए? ये 6 महीने पहले भी हुआ था, लेकिन कॉलेज मैनेजमेंट ने बिना किसी जाँच-पड़ताल के मामले को बंद कर दिया।” छात्राओं ने बताया कि कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल खादर ने पीड़िताओं को कहा था कि इस मामले को गंभीरता से न हो, ये प्रैंक है।

‘विकास कार्यों के लिए फंड नहीं, चुनावी वादे पूरे करने हैं’: बोले कर्नाटक के डिप्टी CM, नाराज विधायकों को मनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक

कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने साफ़ कर दिया है कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए कोई फंड जारी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी कि पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए 5 गारंटियों को लागू किया जाए। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण में भी सभी विधायकों को धैर्य रखने की सलाह दी थी।

कर्नाटक के डिप्टी CM का बयान तब आया है, जब एक दिन पहले ही सत्ताधारी पार्टी के 11 विधायकों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिख कर इस पर नाराज़गी जताई थी कि विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए उन्हें फंड्स अलॉट किए जाएँ। डीके शिवकुमार ने अब दावा किया है कि पिछली भाजपा सरकार ने राज्य को कंगाली की तरफ धकेल दिया और अब ये हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी गलतियों को सुधारा जाए और चुनाव की गारंटियों को पूरा किया जाए।

उन्होंने माना कि चुनाव में पार्टी ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों को खर्च करने की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि विधायकों को ये उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि उन्हें अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के लिए फंड्स मिलेंगे, कम से कम इस वित्तीय वर्ष में तो नहीं। उन्होंने कहा कि उनके विभाग, मतलब जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय को भी कोई फंड नहीं मिला है। सीएम ने इस बाबत विधायकों की एक बैठक भी बुलाई है।

CLP (कॉन्ग्रेस लेजिस्लेटिव पार्टी) की बैठक बेंगलुरु के एक बड़े होटल में बुलाई गई है, जिसमें कॉन्ग्रेस के नाराज विधायकों को मनाया जाएगा। फंड्स न मिलने से कई विधायक असंतुष्ट हैं। जब डीके शिवकुमार से विधायकों द्वारा अपने पत्र में कुछ मंत्रियों पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मनगढंत चीजों पर प्रतिक्रिया नहीं दी जाएगी। 19 जुलाई को ही पार्टी के विधायकों की बैठक होने वाली थी और उसमें राहुल गाँधी भी आने वाले थे, लेकिन ये टल गया।