कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने साफ़ कर दिया है कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए कोई फंड जारी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी कि पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए 5 गारंटियों को लागू किया जाए। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण में भी सभी विधायकों को धैर्य रखने की सलाह दी थी।
कर्नाटक के डिप्टी CM का बयान तब आया है, जब एक दिन पहले ही सत्ताधारी पार्टी के 11 विधायकों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिख कर इस पर नाराज़गी जताई थी कि विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए उन्हें फंड्स अलॉट किए जाएँ। डीके शिवकुमार ने अब दावा किया है कि पिछली भाजपा सरकार ने राज्य को कंगाली की तरफ धकेल दिया और अब ये हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी गलतियों को सुधारा जाए और चुनाव की गारंटियों को पूरा किया जाए।
उन्होंने माना कि चुनाव में पार्टी ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों को खर्च करने की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि विधायकों को ये उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि उन्हें अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के लिए फंड्स मिलेंगे, कम से कम इस वित्तीय वर्ष में तो नहीं। उन्होंने कहा कि उनके विभाग, मतलब जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय को भी कोई फंड नहीं मिला है। सीएम ने इस बाबत विधायकों की एक बैठक भी बुलाई है।
CLP (कॉन्ग्रेस लेजिस्लेटिव पार्टी) की बैठक बेंगलुरु के एक बड़े होटल में बुलाई गई है, जिसमें कॉन्ग्रेस के नाराज विधायकों को मनाया जाएगा। फंड्स न मिलने से कई विधायक असंतुष्ट हैं। जब डीके शिवकुमार से विधायकों द्वारा अपने पत्र में कुछ मंत्रियों पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मनगढंत चीजों पर प्रतिक्रिया नहीं दी जाएगी। 19 जुलाई को ही पार्टी के विधायकों की बैठक होने वाली थी और उसमें राहुल गाँधी भी आने वाले थे, लेकिन ये टल गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान में कई विकास परियोजनाओं की का शुभारंभ किया और साथ ही राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर भी बरसे। इस दौरान उन्होंने देश भर के करोड़ों किसानों को नमन करते हुए कहा कि खाटू श्याम जी की ये धरती देश भर के श्रद्धालुओं को भरोसा और उम्मीद देती है। उन्होंने वीरों की भूमि शेखावाटी से देश के लिए अनेक विकास परियोजनाओं की शुरुआत करने का अवसर मिलने को अपना सौभाग्य करार दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि यहाँ से देश के करोड़ों किसानों को ‘PM किसान सम्मान निधि’ के लगभग 18,000 करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में सवा लाख ‘पीएम किसान समृद्धि केंद्रों’ की शुरुआत की गई है। गाँव और प्रखंड स्तर पर इन केंद्रों से करोड़ों किसानों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि 1500 से ज़्यादा FPO के लिए, किसानों के लिए ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)’ का लोकार्पण भी हुआ है।
शेखावाटी की धरती पर PM मोदी, किसानों को किया नमन
उन्होंने कहा कि इससे देश के किसी भी कोने में बैठे किसान के लिए अपनी उपज बाजार में पहुँचाना और आसान हो जाएगा। पीएम मोदी ने बताया कि आज भी देश के किसानों के लिए एक नया यूरिया गोल्ड शुरू किया गया है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों को नए मेडिकल कॉलेज और मॉडल स्कूल का उपहार भी मिला है। पीएम मोदी ने इसके लिए राजस्थान की जनता, देश की जनता और खासकर किसान भाई-बहनों को खास शुभकामनाएँ दी।
#WATCH | Rajasthan: Prime Minister Narendra Modi says, "Today the country's farmers have received Rs 18,000 crores under the PM Kisan Samriddhi. Today, 1,25,000 PM Kisan Samriddhi Kendras (PMKSKs) centres have started in the country. The PMKSYs centres at the block & village… pic.twitter.com/o0gZhhxdDV
पीएम मोदी ने कहा, “आजादी के इतने दशक बाद आज देश में ऐसी सरकार आई है, जो किसान का दुख-दर्द समझती है, किसान की चिंता समझती है इसलिए पिछले 9 वर्षों में लगातार किसानों के हित में फैसले लिए गए हैं। किसान का सामर्थ्य, किसान का परिश्रम मिट्टी से भी सोना निकाल देता है। इसलिए हमारी सरकार देश के किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। पीएम-किसान की आज की 14वीं किश्त को जोड़ दें तो अब तक 2 लाख 60 हजार करोड़ से अधिक रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजे गए हैं। इन पैसों ने छोटे-छोटे अनेक खर्च निपटाने में किसानों की बहुत मदद की है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेखावाटी में आगे कहा कि उनकी सरकार कैसे अपने किसान भाइयों के पैसे बचा रही है, इसका एक उदाहरण यूरिया की कीमतें भी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आज भारत में यूरिया की जो बोरी हम किसानों को 266 रुपए में देते हैं उतनी ही यूरिया हमारे पड़ोस में पाकिस्तान के किसानों को 800 रुपए में मिलता है, बांग्लादेश के किसानों को 720 रुपए में मिलता है, चीन में 2100 रुपए में और अमेरिका में 3000 रुपए से अधिक में मिलता है।
पीएम मोदी ने ये भी कहा कि भारत का विकास तभी हो सकता है, जब भारत के गाँवों का विकास हो। भारत विकसित भी तभी बन सकता है, जब भारत के गाँव विकसित हों। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई को मातृभाषा में कराने का भी रास्ता बना दिया है। साथ ही कहा कि अब ये नहीं होगा कि अंग्रेजी न जानने के कारण किसी गरीब की बेटी और बेटा डॉक्टर न बन पाए और ये भी मोदी की गारंटी है।
बकौल पीएम मोदी, सफलता तब बड़ी होती है जब सपने बड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान तो भारत का वह राज्य है, जिसके वैभव ने सदियों तक दुनिया को हैरान किया है। उस विरासत को संरक्षित करने पर जोर देते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि राजस्थान को आधुनिक विकास की ऊँचाई तक भी पहुँचाना है। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की।
सीकर में पीएम मोदी ने विशाल जनसभा को किया संबोधित
सीकर में रैली के दौरान उपस्थित भीड़ को देख कर पीएम मोदी ने कहा कि ये जन सैलाब बता रहा है कि आने वाले चुनाव में ऊँट किस करवट बैठेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राजस्थान की करवट भी बदलेगी और राजस्थान की किस्मत भी बदलेगी। उन्होने कहा कि आज राजस्थान में एक ही गूँज है, एक ही नारा है… जीतेगा कमल, खिलेगा कमल। पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान में अच्छी सड़कों के लिए, अच्छे हाईवे के लिए, राज्य के विकास के लिए भाजपा सरकार लगातार पैसे भेज रही है।
उन्होंने बताया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब 10 वर्षों में राजस्थान में टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में एक लाख करोड़ रुपए ही दिए गए थे, जबकि बीते 9 वर्षों में भाजपा सरकार ने टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुँचाए हैं। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में शत-प्रतिशत नल से जल देने का काम पूरा हो गया है, लेकिन राजस्थान के लोगों को कांग्रेस की सरकार पानी के लिए भी तरसा कर रखना चाहती है। राजस्थान ‘हर घर जल’ योजना में बहुत पीछे चल रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है और झूठ का बाजार चलाया है। झूठ की दुकान का सबसे ताजा प्रोजेक्ट है, राजस्थान की ‘लाल डायरी’। कहते हैं इस ‘लाल डायरी’ में कॉन्ग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे। कॉन्ग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस ‘लाल डायरी’ का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुँह पर ताला लगा लें, लेकिन ये ‘लाल डायरी’ इस चुनाव में कॉन्ग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है।”
महिलाओं के खिलाफ अपराध पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी दलित बेटी के साथ दुष्कर्म होता है और उस पर एसिड डाल दिया जाता है, किसी दलित बहन के साथ उसके पति के सामने गैंगरेप होता है, आरोपी उसका वीडियो बनाते हैं, पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। उन्होंने कहा कि बेखौफ आरोपी वीडियो वायरल कर देते हैं, छोटी-छोटी बच्चियाँ और स्कूल की टीचर तक राजस्थान में सुरक्षित नहीं हैं। बता दें कि कॉन्ग्रेस के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने लाल डायरी में कई रहस्य होने का खुलासा किया था।
जातीयता से लेकर मजहब, इतिहास और भौगोलिकता कुकी समाज दशकों से अपनी पहचान को अलग-अलग रूप देता रहा है। बताया जाता है कि ये लोग म्यांमार के चीन क्षेत्र से भारत में आए थे। ये इलाका सीमा पर ही स्थित है। बताया जाता है कि चीन-कुकी-मिजो (CHIKUMI) समुदाय अधिकतर ईसाई मजहब का अनुसरण करते हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि उनके पूर्वजों को लेकर एक थ्योरी ये भी है कि ये लोग इजरायल से आकर भारत में बसे थे।
मणिपुर में जब कुकी-मैतेई हिंसा के दौरान कुकी समाज के घरों में आग लगाई गई थी, तब इजरायली मीडिया ने भी इसे खूब कवर किया था। कुकी समाज ने यहूदी राष्ट्र से भी मदद की माँग की है, जिसके बाद एक बार फिर से कुकी-इजरायल संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि मणिपुर में जो आज कुकी समाज रह रहा है, वो क्या है। आइए, इस पर चर्चा करते हैं कि कुकी समाज और इजरायल का क्या संबंध है।
आज का कुकी समाज कौन है
जहाँ तक चीन-कुकी-मिजो जनजातीय समाज की बात है, वो उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर, मिजोरम, असम, मेघालय और त्रिपुरा में बसे हुए हैं। ये सामान्यतः म्यांमार और बांग्लादेश से लगी सीमावर्ती इलाकों में ये रहते हैं। उन्हें तिब्बत-बर्मा भाषाई समूह का हिस्सा माना जाता है। इनका ताल्लुक मिजोरम के मिजो और म्यांमार के चीन से भी है। कुकी समाज के भीतर भी 20 समुदाय आते हैं, अधिकतर ईसाई ही हैं। वो माइग्रेशन ही कारण है कि इन्हें ‘नए कुकी’ और ‘पुराने कुकी’ के रूप में जाना जाता है।
‘ओल्ड कुकीज़’ उन्हें कहा जाता है, जो सन् 1600 या उससे पहले नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में माइग्रेट हुए थे। वहीं ‘न्यू कुकीज’ उन्हें कहा जाता है, जो 18वीं या 19वीं सदी में आए। CHIKUMI से जुड़े जितने भी साहित्य हैं, वो बताते हैं कि कई चरणों में इनका पलायन संपन्न हुआ। निश्चित रूप से ये नहीं कहा जा सकता कि वो उत्तर-पूर्वी राज्यों के मूलनिवासी हैं या नहीं। हालाँकि, म्यांमार के चीन स्टेट से आए हुए कुकी समाज के बारे में बहुत कुछ नहीं पता है।
फिर कुकी समाज का इजरायल से क्या संबंध है?
यहूदी मानते हैं कि 3000 साल पहले इजरायल के उत्तरी साम्राज्य के 10 समुदायों को अश्शूर से आए असीरियन लोगों के हमले के कारण पलायन करना पड़ा था। उसके बाद से उनके बारे में बहुत कुछ पता नहीं चल पाया। इजरायली लोगों का मानना है कि उस समय पलायन करने वाले ये लोग वापस आएँगे और तब एक नए युग का प्रारंभ होगा। उस समय इन्हीं में से एक राजा डेविड का वंशज मसीहा भी होगा।
माना जाता है कि जो समुदाय खो गए हैं, वो जहाँ जाकर बसे वहीं की संस्कृति में घुल-मिल गए हैं। कुकी समाज को भी ऐसे ही एक ट्राइब के रूप में जाना जाता है, जिसे वो ‘Bnei Menashe’ कहा जाता है। इन्हें पैगंबर जोसेफ के बेटे बिबिलिकल मनस्सेह के वंशजों के रूप में जाना जाता है। बताया जाता है कि 1950 के दशक में मिजोरम-मणिपुर के 10,000 कुकी लोगों ने ईसाई मजहब छोड़ कर यहूदी मजहब अपना लिया था, जब उन्हें अपनी तथाकथित वास्तविक मातृभूमि का पता चला था।
कैसे ये समुदाय अपने कथित मूलस्थान से परिचित हुआ, इसकी भी एक अलग कहानी है। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। मिजोरम के बुआल्लॉन में मेई चलाह नाम के एक मजहबी मंत्री ने बताया था कि उसने सपने में आया है कि कुकी लोग ज़िओन समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। साथ ही उन्होंने बताया था कि सपने में ये भी आया कि कुकी लोगों को अब अपने मूलस्थान की तरफ लौट चलना चाहिए।
इतिहास की बात करें तो कुकी समाज जीववाद (Animism), अर्थात पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अलाव प्रकृति की पूजा करता रहा है। साथ ही वो ‘मनमासी’ (मानसिया) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इसके बाद वहाँ मिशनरियों का प्रभाव बढ़ने लगा और कई जनजातीय समुदायों, खासकर कुकी लोगों ने ईसाई मजहब अपना लिया। ये मिशनरी ब्रिटेन और अमेरिका से आए थे। बनेई मेनाशे कम्युनिटी का दावा है कि धर्मांतरण के दौरान उन्होंने ईसाई मजहब और अपने परंपराओं के बीच समानता पाई।
मिशनरियों ने उन्हें खूब बाइबिल की कहानियाँ सुनाईं और खुद की परंपराओं से समानता पाते हुए उन्होंने थोक में धर्मांतरण किया। ब्रिटिश मिशनरियों को भी खुद के और इनकी परंपराओं में समानता मिली। दावा किया जाता है कि कुकी लोगों के कुछ प्राचीन गानों में बाइबिल के शब्द मिलते हैं। ‘सिकपुई हला’ उनमें से ही एक गाना है, एक कुकी सब-ट्राइब हमार द्वारा सदियों से गाया जाता रहा है।
मिजोरम का ‘Bnei Menashe’ समाज (फोटो साभार: Timeline YouTube)
ये लोग फसल की कटाई के मौसम ‘सिकपुइरोइ’ के दौरान इसे गाते हैं। ये गाना इजिप्ट से इजरायली लोगों के पलायन की बात करता है। फिर इसमें बताया जाता है कि कैसे लाल सागर ने उन्हें बचाया। ‘लिटेन्टेन ज़िओन’ नाम का एक गीत भी है, जिसका अर्थ है – ‘चलो, जिओन की ओर चलें।’ इजरायल की लोककथाएँ भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में गीत के रूप में कैसे आ गईं, ये एक रहस्य है। ‘सेलाह’, ‘अबोरीज़ा’ और ‘एलो’ जैसे शब्द बाइबिल में कई बार मिलते हैं।
वहीं Pslam की किताब में जहाँ ‘Selah’ शब्द मिलता है, ‘अबोरीज़ा’ एक हिब्रू शब्द है जिसका इस्तेमाल ईश्वर की प्रशंसा के लिए किया जाता है। ‘बुलपिजेम’ नाम की कुकी स्क्रिप्ट में 32 अक्षर हैं और इनका कनेक्शन भी Jews से सामने आता है। बताया जाता है कि ये चीन में राजा शीह हुंगताई के समय खो गया था। ये 214 ईसापूर्व की बात है। बिबिलिकल इजरायलियों से भी कुछ समानताएँ कुकी समाज से हैं।
कुकी ये शॉल ओढ़ते हैं, जो इजरायली शॉल से मिलता-जुलता है
समुदाय ‘Bnei Menashe’ द्वारा ओढ़ी जाने वाली एक प्रकार की शॉल यहूदियों द्वारा प्रार्थना के समय पहनी जाने वाली ‘तल्लीत’ से काफी मिलती-जुलती है। बाइबिल में लिखा है कि ऐसे शॉल के किनारों पर एक नाले रंग की डिजाइन वाला घेरा होना चाहिए, जो ‘Puan’ के लिए भी सटीक बैठता है। ‘Zelengam’ के तथाकथित झंडे में भी एक प्रकार का स्टार है, जिसे ‘स्टार ऑफ डेविड’ भी कहा गया है।
बताया जाता है कि ‘Zelengam’ के झंडे में ‘स्टार ऑफ डेविड’ है
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों के आधार पर रिसर्च करने पर पता चलता है कि माना जाता है कि 30 लाख कुकी ‘Bnei Menashe’ हैं, जिन्हें उत्तरी इजरायल से निकाला गया था और वो सदियों तक चले पलायन में मध्य एशिया तक आए। फिर वो चीन और बर्मा से होते हुए उत्तर-पूर्वी भारत में पहुँचे। बताया जाता है कि उन्हें यहाँ पर ‘Shinlung’ कहा गया, क्योंकि वो चीन में यालुंग नदी के किनारे स्थित छीनलूंगसान से आए थे।
सबूत कहाँ है?
कही-सुनी गई बातों के अलावा इजरायल के ‘Manasseh’ और कुकी समाज के बीच संबंध को लेकर कोई और सबूत नहीं है। 2003 में कुकी समाज के सब ट्राइब्स हमार, कोम, लेंथंग, चांगसां, लुन्किम और हूआलंगो समाज के लोगों का DNA टेस्ट कराया गया, जो नेगेटिव निकला। 2005 में एक अन्य डीएनए टेस्ट में कुछ कनेक्शन निकला। कलकत्ता के सेन्ट्रल फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट ने इस टेस्ट सैम्पल्स की जाँच की थी।
इसमें पाया गया कि जहाँ उनके पुरुष वाले हिस्से का कोई विदेशी लिंक सामने नहीं आया, उनके महिला वाले हिस्से का कनेक्शन मध्य-पूर्व से सामने आया। इस रिसर्च में शामिल एक स्कॉलर ने कहा था कि दुनिया के दो अलग-अलग इलाकों में रह रहे समुदायों के डीएनए में समानता मुश्किल है, जब तक वो एक ही जगह से न आएँ रहे हों। एक अन्य रिसर्च में पता चला कि रोग ‘Tay-Sachs’ और हड्डी रोग ‘Saitika-Zenghit’ रोग CHIKIMZO ट्राइब्स के अलावा सेमिटिक यहूदियों में भी पाया जाता है।
हालाँकि, 2005 में कराए गए ये टेस्ट इतने विश्वसनीय नहीं हैं। इजरायल के प्रोफेसर स्कोरकी जेनेटिसिस्ट्स ने पार्शियल सिक्वेंसिंग का सहारा लिया और पूरी तरह से सेक्वेंशिंग नहीं की। उन्होंने कहा था कि हजारों वर्षों बाद कॉमन जेनेटिक ओरिजिन का पता लगा पाना मुश्किल है।
अपनी ‘मूल भूमि’ की तरफ लौटने वाली थ्योरी
1970 के दशक में ‘Bnei Menashe’ का एक समूह इजरायल की यात्रा पर निकला, जहाँ उसने रब्बी एलियाहु अविचाईल से मुलाकात की, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ही इस समुदाय का नामकरण किया। साथ ही ‘Amishav’ नाम का एक NGO (जिसका अर्थ है – मेरे लोग वापस आएँगे) भी है, जो इजरायल से पलायन करने वाले ट्राइब्स को ढूँढने में लगा हुआ है। साथ ही ये संगठन उन्हें वापस यहूदी मजहब में धर्मांतरित करने करने के प्रयास में भी ये लगा रहता है।
उसी साल अविचाईल ने भारत का दौरा कर ‘बनई मेनाशे’ समुदाय के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने ही इस समुदाय को इजरायल के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई और आइजोल के साथ-साथ इम्फाल में भी धर्मांतरण की शुरुआत की। उन्होंने इस दावे पर भी रिसर्च किया कि उनके इजरायल से पलायन करने की बातों में कितनी सच्चाई है। इम्फाल में येरुसलम के रब्बी ने ‘अमिषाव हाउस’ भी खोला। उसमें एक सिनेगॉग भी है।
उसमें 2 गेस्ट रूम, एक मिक्वाह (परंपरागत नहाने का स्थान), एक क्लासरूम और कर्मचारियों के रहने के लिए क्वार्टर भी हैं। हालाँकि, इजरायल सरकार ने इस समुदाय के इजरायल माइग्रेशन ‘अलियाह’ का समर्थन नहीं किया। 90 के दशक में इस समाज के कुछ लोग इजरायल पर्यटक बन कर पहुँचे और वहाँ बस गए। उन्हें वहाँ की नागरिकता भी मिली और वो यहूदी कहलाए। 1997 में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के डिप्टी कम्युनिकेशंस डायरेक्टर माइकल फ्रूंड को इस समाज का एक पत्र मिला और उन्होंने इनसे मिलने का मन बनाया।
उन्होंने इसके बाद कहा कि उक्त समाज और बिबिलिकल इजरायलियों में काफी समानताएँ हैं। उनकी परंपराओं और विश्वासों में भी उन्हें समानता मिली। उन्होंने इस समाज के माइग्रेशन को सपोर्ट करने के लिए फंड भी इकट्ठा किया। उनका मानना है कि इजरायल का खोया हुआ समुदाय यही है। उनके प्रयासों के कारण हर साल 100 ‘बनई मेनाशे’ को इजरायल में जाकर बसने और यहूदी बनने की अनुमति मिली।
उन्होंने एक ‘Shavei’ नामक एक NGO की भी स्थापना की, जिसने इजरायल की खोई हुई ट्राइब्स को वापस लेकर बसाने को अपना लक्ष्य बताया। 2003 तक इस समाज के 1000 लोगों को इजरायल में बसाया जा चुका था। उसी साल इजरायल के तत्कालीन इंटीरियर मिनिस्टर अवराहम पोराज ने कुछ राजनीतिक और मजहबी कारणों से फिर इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी। लेकिन, फ्रूंड इसके लिए प्रयास करते रहे और 2005 में एक फैसला कराया कि इस समाज को यहूदियों का ही हिस्सा माना जाए।
इस फैसले के बाद उनके NGO का खासा उत्साहवर्धन हुआ और उन्होंने मिजोरम और मणिपुर में धर्मांतरण के लिए सेंटरों की स्थापना की। अगर ‘Bnei Menashe’ को यहूदी का दजा मिल गया तो वो बिना रोकटोक इजरायल में जाकर बस सकेंगे। 2006 में इस प्रक्रिया के तहत 218 ऐसे लोगों को ‘Bnei Menashe’धर्मांतरित कर इजरायल ले जाया जाना था, लेकिन भारत सरकार ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। बताया जाता है कि 10,000 लोग इजरायल जा चुके हैं।
क्या कुकी और ‘Bnei Menashe’ को उनकी असली भूमि मिल गई?
यहूदियों ने भी कुकी समाज के ‘Bnei Menashe’ होने के दावों पर आपत्ति जताई है। भारत और इजरायल की सरकारों ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है। इजरायल के कई नेता भी इन्हें यहूदी नहीं मानते। इजरायली आलोचकों का कहना है कि उन्हें वेस्ट बैंक और गाजा से लगे इलाकों में जानबूझकर एक साजिश के तहत बसाया गया। बेंजामिन नेतन्याहू इन्हें वहाँ बसाने के पक्ष में थे, ऐसे में वो अपने देश में विवादों के केंद्र में भी आ गए।
इस समाज को पूरी तरह यहूदी कहलाने के लिए भी काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा। स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग से लेकर आर्थिक स्थिति तक, शुरुआत में बिल्कुल भी इस समाज को समर्थन नहीं मिला। कइयों ने नागरिकता ली और इजरायल की सेना में भी शामिल हुए। भारत में इस धर्मांतरण के खिलाफ भी आवाज उठी। इसमें कोई शक नहीं है कि कुकी समाज में अधिकतर प्रवासी ही रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ ‘कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (KNO)’ का नेता पीएस हाओकीप अभियान चला रहा है कि पूरे कुकी समाज को एक ‘Zelengam’ के अंतर्गत लाया जाए। इसे ‘लैंड ऑफ फ्रीडम’ भी कहा जाता है और यहूदी थ्योरी ही मानी जाती है। कुकी समाज की कई पहचान है, जिससे वो कहाँ से ताल्लुक रखते हैं इस पर संशय बना रहता है। अब इस पर और रिसर्च हो या कोई सबूतों वाला इतिहास निकले तो इस बारे में और पता चलेगा। इतिहास के गर्त में छिपा पलायन के इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा हटना अभी बाक़ी है।
(OpIndia पर प्रकाशित मूल अंग्रेजी लेख यहाँ क्लिक कर के पढ़ें।)
यह आपको सुनने में अजीब लग सकता है, पर सच्चाई यही है। 33 साल बाद श्रीनगर की गलियों से मुहर्रम का ताजिया निकला है। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद 1989 से शिया मुहर्रम का जुलूस नहीं निकाल पा रहे थे। यह बताता है कि जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर, आर्टिकल 370 को खत्म कर और आतंकवाद की कमर तोड़ कर मोदी सरकार ने किस तरह इस केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति सामान्य की है। अब हर तबका भय मुक्त होकर जी रहा है।
1989 में एक आदेश जारी कर श्रीनगर के डलगेट मार्ग से ताजिया निकालने पर पाबंदी लगाई गई थी। इसी रास्ते में लाल चौक भी पड़ता है। लेकिन 27 जुलाई 2023 को इस रास्ते से शिया मुस्लिमों ने मुहर्रम का जुलूस निकाला। सैकड़ों लोग इसमें शामिल थे।
कश्मीर के अतिरित्क पुलिस महानिदेशक IPS विजय कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि शिया समुदाय पिछले काफी समय से मुहर्रम के जुलूस की अनुमति माँग रहा था। प्रशासन ने इस बार अनुमति देते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए थे। वहीं कश्मीर के कमिश्नर वी के भिदुरी के मुताबिक वर्किंग डे में अन्य लोगों की सुविधा को देखते हुए जुलूस के लिए सुबह 6 से 8 बजे के बीच 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। भिदुरी ने इस जुलूस की अनुमति को प्रशासन का ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया।
#WATCH | J&K: Additional Director General of Police (ADGP) Kashmir Zone Vijay Kumar speaks on J&K Govt permits Muharram procession through its traditional route in Srinagar after almost 3 decades, says, "We held a detailed meeting as soon as the govt decided this. Force is… pic.twitter.com/vbe5pJ92sg
इस जुलूस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंद शहीद गंज से डलगेट वाली सड़क पर जुलूस की शक्ल में जा रहे हैं। उनके हाथों में मजहबी झंडे हैं। मौके पर सुरक्षा बल के जवान और प्रेस रिपोर्टरों को भी देखा जा सकता है। जुलूस में कुछ बुर्काधारी महिलाएँ भी शामिल थीं। प्रशासन द्वारा तय किए गए समय पर यह जुलूस शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।
#WATCH | Srinagar, J&K | Muharram procession taken out through its historic route in the city. The procession was allowed from 6 am to 8 am today, by the Administration. pic.twitter.com/fqbq6uOGwP
इस जुलूस की अनुमति देते हुए रखी गई शर्तों में उत्तेजक नारेबाजी, आतंकियों या उनके संगठनों की तस्वीरें, किसी भी स्तर पर बैन किया गया LOGO, कोई प्रतिबंधित झंडा आदि न ले जाना शामिल था। गौरतलब है कि साल 1989 में मोहर्रम के जुलूस में कुछ आतंकी घुस गए थे। उन्होंने देश विरोधी नारे लगाए थे। नारे लगाने वालों में यासीन मलिक, जावेद मीर और हमीद शेख का नाम सामने आया था। तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने तब एक आदेश जारी करते हुए शहीदगंज से डलगेट वाले मार्ग पर जुलूस निकालने पर पाबन्दी लगा दी थी। तब से यह प्रतिबंध कायम था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 27 जुलाई 2023 के राजस्थान दौरे को कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजनीतिक विवाद में घसीटने का प्रयास किया है। गहलोत ने दावा किया कि पीएम के कार्यक्रम से उनका भाषण हटा दिया गया है। इस प्रोपेगेंडा की पोल खोलते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया है कि प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री गहलोत को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। उनका संबोधन भी था। लेकिन उनके कार्यालय ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएँगे।
जिस कार्यक्रम को लेकर गहलोत ने दावा किया था वह सीकर में होना है। यहाँ से प्रधानमंत्री नौ करोड़ किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि (Kisan Samman Nidhi Yojana) की 14वीं किस्त ट्रांसफर करेंगे। प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, और यूरिया गोल्ड की शुरुआत करेंगे। सीकर सहित राज्य में 5 मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन और 7 का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित भी करेंगे।
लेकिन प्रधानमंत्री के सीकर पहुँचने से कुछ घंटे पहले गहलोत ने एक लंबा ट्ववीट कर आरोप लगाया कि उनका पूर्व निर्धारित तीन मिनट का संबोधन पीएमओ ने हटा दिया है। उन्होंने लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी। आज आप राजस्थान पधार रहे हैं। आपके कार्यालय PMO ने मेरा पूर्व निर्धारित 3 मिनट का संबोधन कार्यक्रम से हटा दिया है। इसलिए मैं आपका भाषण के माध्यम से स्वागत नहीं कर सकूँगा। अतः मैं इस ट्वीट के माध्यम से आपका राजस्थान में तहेदिल से स्वागत करता हूँ।”
इस ट्वीट में गहलोत ने 5 माँगें भी रखी है। इसके जवाब में पीएमओ ने बताया है कि गहलोत के कार्यालय ने बताया था कि वे इस कार्यक्रम में नहीं रहेंगे। पीएमओ ने अपने ट्वीट में कहा है, “अशोक गहलोत जी, प्रोटोकॉल के अनुसार, आपको आमंत्रित किया गया है। आपका भाषण भी निर्धारित किया गया है। लेकिन आपके कार्यालय ने बताया कि आप शामिल नहीं हो पाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्राओं के दौरान भी आपको हमेशा आमंत्रित किया गया है। आपने अपनी उपस्थिति से उन कार्यक्रमों की शोभा भी बढ़ाई है। आज के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आपका हार्दिक स्वागत है। विकास कार्यों की पट्टिका पर भी आपका नाम है। अगर आपको हाल ही में लगी चोट के कारण कोई शारीरिक परेशानी न हो, तो आपकी उपस्थिति बहुत महत्व रखेगी।”
CM अशोक गहलोत ने ट्वीट कर जो माँगें रखी हैं उनमें अग्निवीर स्कीम वापस लेकर सेना में पहले जैसी भर्ती चालू करवाना, केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना पर निर्णय लेना, राज्य के किसानों की कर्जमाफी के लिए वन टाइम सेटेलमेंट के प्रस्ताव को मँजूरी देना, जनजातीय इलाकों ने खुले 3 मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय महत्व परियोजना का दर्जा दिया जाना शामिल है।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों ब्रिटेन में हैं। लंदन के लीसेस्टर में उनकी रामकथा चल रही है। कथा सुनने के लिए स्थानीय हिंदुओं के अलावा ब्रिटिश अधिकारी भी आ रहे हैं। 27 जुलाई 2023 को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स के प्रतिनिधि साइमन भी व्यासपीठ से आशीर्वाद लेने पहुँचे थे। इस बीच रामकथा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे बागेश्वर धाम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से 25 जुलाई को शेयर किया गया था।
इस वीडियो में एक अंग्रेज अधिकारी रामनामी दुपट्टा डाल रामकथा में शामिल दिख रहे हैं। उनके सामने एक सवाल के जवाब में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कोहिनूर वापसी की चर्चा करते हैं। साथ ही कहते हैं कि कभी अंग्रेज भारत में आकर बोलते थे और हमारे पुरखे सुनते थे। आज लंदन में अंग्रेज रामकथा बैठकर सुन रहे हैं।
लगभग 4:13 मिनट के इस वीडियो में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री एक बड़े हॉल में विशाल जनसमूह को कथा सुनाते दिखाई दे रहे हैं। वे कहते हैं, “कोहिनूर लेकर वापस लौटेंगे।” आगे उन्होंने कहा, “वैसे ये नहीं कह सकता कि कोहिनूर वापस दो। अभी हमको बहुत बार आना भी है। लोग कहेंगे कि अराजकता फैलाता है। वैसे भी हम बदनाम हैं। जो दिल में होता है हम साफ-साफ बोल देते हैं।”
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) July 25, 2023
इसी रामकथा में मौजूद मैथ्यू नाम के एक अंग्रेज को धीरेन्द्र शास्त्री क्राइम कमिश्नर बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय में ऐसा बदलाव आया है कि कभी अंग्रेज भारत आकर अपना लेक्चर देते थे, लेकिन आज लंदन में बैठ कर उनकी रामकथा सुन रहे हैं। इस दौरान बागेश्वर बाबा पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने कथा के मंच से पूरे इंग्लैंड के उद्धार की कामना की। ब्रिटेन के राजा को व्यास पीठ से आशीर्वाद देते हुए अर्थव्यवस्था में मजबूती आने की प्रार्थना की।
दिल्ली की दो बड़ी मस्जिदों से अतिक्रमण नहीं हटेगा। बाबर रोड के बच्चू शाह मस्जिद जिसे बंगाली मार्केट मस्जिद भी कहते हैं और आईटीओ के तिलक मार्ग रेलवे ब्रिज के पास स्थित तकिया बब्बर शाह मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। उत्तर रेलवे प्रशासन ने नोटिस जारी कर इन मस्जिदों से अपनी जमीन से अवैध कब्जा हटाने को कहा था। इसके लिए 15 दिन का समय दिया था। ऐसा नहीं होने पर एक्शन लेने की चेतावनी दी थी।
इसे चुनौती देते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने 26 जुलाई 2023 को इस पर सुनवाई करते हुए नोटिस पर स्टे लगा दिया। जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि रेलवे अपनी भूमि से अनधिकृत ढाँचों और अतिक्रमण को हटाने के लिए मस्जिदों पर चिपकाए गए नोटिस पर आगे कोई कार्रवाई ना करे।
वक्फ बोर्ड के वकील वजीह शफीक ने कहा कि जाँच करने पर पता चला है कि मस्जिदों पर चिपकाए गए नोटिस मंडल रेलवे प्रबंधक के कार्यालय से जारी किए गए थे। इस नोटिस में कोई फाइल नंबर, तारीख, हस्ताक्षर, जारी करने वाले व्यक्ति का नाम या पद नहीं है। उन्होंने रेलवे द्वारा कार्रवाई की आशंका जताते हुए अदालत से इस पर रोक की गुहार लगाई।
वक्फ बोर्ड ने अपनी याचिका में कहा है कि बंगाली मार्केट मस्जिद करीब 250 साल और तिलक मार्ग मस्जिद 400 साल पुरानी है। ऐसे में इन नोटिसों को रद्द कर दिया जाना चाहिए। इन मस्जिदों को 1945 में कानूनी तौर पर एग्रीमेंट के जरिए जमीन ट्रांसफर किए जाने का हवाला भी याचिका में दिया गया है। कहा गया है कि ये मस्जिद अनधिकृत नहीं हैं और जमीन रेलवे की नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने भी नोटिस की प्रकृति पर सवाल उठाए। कहा कि नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। उस प्राधिकरण का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसके तहत उन्हें जारी किया गया। अदालत ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि नोटिस कथित तौर पर रेलवे प्रशासन, उत्तर रेलवे, दिल्ली द्वारा जारी किया गया एक सामान्य नोटिस है, जो 15 दिनों के भीतर रेलवे भूमि से मंदिरों/मस्जिदों/मजारों को स्वेच्छा से हटाने का आह्वान करता है, अन्यथा उन्हें रेलवे प्रशासन द्वारा हटा दिया जाएगा। यह नोटिस अहस्ताक्षरित, अदिनांकित हैं और उस प्राधिकार का उल्लेख नहीं करते जिसके तहत उन्हें जारी किया गया है। फिलहाल इन नोटिसों के अनुसार कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।” इस दौरान केंद्र सरकार के वकील ने इस मुद्दे पर ‘स्पष्ट निर्देश’ लेने के लिए अदालत से समय देने की अपील की थी।
उत्तर रेलवे प्रशासन की तरफ जारी नोटिस में कहा गया था, “सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि रेलवे भूमि को अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित किया गया है। आप लोग अनाधिकृत रूप से रेलवे की जमीन पर बने अनाधिकृत भवन/मंदिर/ मस्जिद/मजार को इस सूचना के 15 दिन के अंदर स्वेच्छा से हटा दें। अन्यथा रेलवे प्रशासन एक्शन लेगा। रेलवे अधिनियम के प्रावधान के तहत अनाधिकृत कब्जे को हटा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में होने वाले नुकसान के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे। रेलवे प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।” आज तक की रिपोर्ट के अनुसार तकिया बब्बर शाह मस्जिद के बगल में स्थित एमसीडी के मलेरिया दफ्तर को भी खाली करने का नोटिस दिया गया था।
इससे पहले इसी साल अप्रैल में भूमि और विकास कार्यालय (L&DO), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने एक संयुक्त अभियान में बंगाली मार्केट की मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई के दौरान एक दीवार हटाई गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि कुछ महीने पहले अतिक्रमण कर कंक्रीट की यह दीवार खड़ी की गई थी। वहीं मस्जिद के अधिकारियों का कहना था कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी।
वहीं 2 जुलाई 2023 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा में एक सड़क को चौड़ा करने के लिए फुटपाथ पर बने दो धार्मिक स्थलों को हटाया गया था। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस दौरान एक हनुमान मंदिर और एक दरगाह को हटाया था। अभियान के दौरान भारी संख्या में बलों की तैनाती की गई थी। साथ ही ड्रोन से पूरे इलाके की निगरानी हो रही थी।
कर्नाटक के उडुपी स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज की हिंदू छात्राओं का बाथरूम में अश्लील वीडियो बनाने के मामले में पुलिस ने तीन मुस्लिम छात्राओं पर FIR दर्ज की है। वहीं, अब इस मामले की जाँच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सदस्य खुशबू सुंदर गुरुवार (27 जुलाई 2023) को उडुपी पहुँचेंगी।
इस मामले का पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेकर दो एफआईआर दर्ज की है। एक मामला टॉयलेट में छात्रा के बनाए गए वीडियो को डिलीट करने को लेकर तीन छात्राओं और कॉलेज प्रशासन से जुड़ा है। दूसरा मामला यूट्यूब चैनलों पर हिडन कैमरे वाला वीडियो अपलोड करने से जुड़ा है। मामले में अलीमतुल शैफ़ा, शबानाज़ और आलिया को आरोपित बनाने के साथ-साथ कॉलेज प्रशासन को भी नामजद किया गया है।
उडुपी पहुँचने के बाद NCW की सदस्य खुशबू सुंदर ने कहा, “मैं राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य के रूप में यहाँ के लिए आई हूँ। मैं सबसे पहले पुलिस के साथ बैठक करूँगी। मैं देखूँगी कि FIR में क्या कहा गया है।”
#WATCH | Udupi Video Incident: NCW member Khushbu Sundar says, "I am here for an inquiry as an NCW member. I am going to have a meeting with the police. And then of course meet the girls involved in this. And meet the other students and college authorities to find out as to what… pic.twitter.com/0dV9cVEnY8
उन्होंने आगे कहा, “क्या हुआ था… इस बात की जानकारी के लिए मैं इस घटना में शामिल लड़कियों से मिलूँगी। इसके साथ ही कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों से भी मिलूँगी। कॉलेज प्रशासन से मिलकर उनसे बात करूँगी और उनका पक्ष जानने की कोशिश करूँगी कि उनका क्या कहना है।”
उधर, कॉन्ग्रेस शासित कर्नाटक सरकार में गृहमंत्री डॉक्टर जी परमेश्वर ने कहा कि उडुपी की घटना बहुत छोटी है और इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में ऐसी चीजें होती रहती हैं। भाजपा को ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के गोलाघाट में सामने आई तिहरे हत्याकांड की घटना को ‘लव जिहाद’ का दुष्परिणाम करार दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में असम पुलिस 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर करेगी। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह ‘लव जिहाद’ का मामला है। जहाँ मृतक हत्यारा समुदाय से था, वहीं तीनों मृतक हिन्दू परिवार के थे। CM सरमा ने बताया कि फेसबुक पर नजीबुर रहमान ने खुद को हिन्दू बता कर संघमित्रा घोष से जान-पहचान की थी।
‘ये ओपन एन्ड शट केस, ड्रग्स का मामला’: CM सरमा
उन्होंने ये जानकारी दी कि जब नजीबुर रहमान और संघमित्रा घोष कोलकाता भागे थे, तब उसने महिला को भी ड्रग्स का इस्तेमाल करना सिखा दिया। उन्होंने बताया कि नजीबुर रहमान बोरा ड्रग्स का आदी था और प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी भी करता था। उन्होंने बताया कि महिला को ड्रग्स इंजेक्ट किया गया था, जिसके प्रभाव में आकर बेसुध हालत में महिला को गर्भवती कर दिया गया। मुख्यमंत्री ये जानकारी भी दी कि महिला जब उसके पास रहने गई थी, तब उसे प्रताड़ित भी किया गया था।
#WATCH | Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma meets family members of triple murder case victim Golaghat. pic.twitter.com/rnsYiWOlYM
असम के सीएम ने मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने इस पर भी चिंता जताई कि नाम बदल कर प्यार में फँस जाने के बाद महिला जब वापस लौटती है तो समाज में उसे स्वीकार्यता नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि मज़बूरी में ऐसी स्थिति में लड़कियाँ धर्मांतरण कर लेती हैं, सब कुछ का त्याग कर देती हैं और एक दूसरे ही जीवन में घुस जाती है। सीएम सरमा ने कड़ी से कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने का आश्वासन देते हुए इसे एक ‘ओपन एन्ड शट केस’ करार दिया।
नजीबुर ने हिन्दू बीवी और उसके माता-पिता को कुल्हाड़ी से काट डाला
जानकारी देते चलें कि असम में नजीबुर रहमान नामक एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी संघमित्रा और पत्नी के माता-पिता को मार डाला। इसके बाद वो 9 महीने के बच्चे को लेकर पुलिस थाने पहुँच गया। राज्य में इस ट्रिपल मर्डर की घटना सामने आने के बाद सनसनी मच गई है। नजीबुर रहमान ने इस वारदात को अंजाम देने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया है। संघमित्रा की उम्र 24 साल थी। हत्यारा नजीबुर रहमान पेशे से मेकेनिकल इंजीनियर है। मामला ‘लव जिहाद’ का भी लग रहा है।
इसकी शुरुआत जून 2020 में हुई, जब नजीबुर रहमान ने फेसबुक के माध्यम से संघमित्रा से दोस्ती की। ये वो समय था, जब कोरोना संक्रमण अपने शिखर पर था और देश भर में लॉकडाउन लगा हुआ था। अक्टूबर 2020 आते-आते दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे और कोलकाता भाग कर उन्होंने शादी तक कर ली। हालाँकि, संघमित्रा के परिजनों को ये रिश्ता बिल्कुल भी पसंद नहीं था। इसके बावजूद उसने नजीबुर रहमान से कोर्ट में शादी कर ली थी।
माता-पिता ने बेटी के खिलाफ चोरी का मामला भी दर्ज कराया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और एक महीने उसे न्यायिक हिरासत में गुजारने पड़े। इसके बाद संघमित्रा घर लौट आई थी और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी थी। लेकिन, जनवरी 2022 में दोनों एक बार फिर से भाग गए थे। जब अगस्त में दोनों लौटे तब संघमित्रा गर्भवती थी। दोनों 5 महीने चेन्नई में रहे थे। नवंबर में नजीबुर रहमान के घर में ही संघमित्रा ने एक बेटे को जन्म दिया।
मार्च 2020 में दोनों में फिर से झगड़ा हुआ और संघमित्रा अपने बेटे के साथ माँ-बाप के पास रहने चली गई। नजीबुर रहमान पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उसके विरुद्ध FIR भी दर्ज की गई थी। 28 दिन बाद आखिरकार उसे जमानत मिली और वो बाहर निकला था। जेल से निकलने के बाद वो बार-बार बच्चे से मिलने की जिद कर रहा था, लेकिन संघमित्रा के माता-पिता ने मना कर दिया। 29 अप्रैल को नजीबुर रहमान के भाई ने संघमित्रा के परिजनों पर मारपीट का आरोप लगाया।
सोमवार (24 जुलाई, 2023) को दोनों पक्ष एक बार फिर से भिड़े। नजीबुर ने न सिर्फ संघमित्रा, बल्कि अपने ससुर संजीव घोष और सास जुनू घोष का भी क़त्ल कर डाला। फिर वो अपने 9 महीने के बच्चे को लेकर भाग गया। अंततः उसे थाने में सरेंडर करना पड़ा। कुल्हाड़ी से काट कर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। तीनों के शव खून से लथपथ अवस्था में मिले। नजीबुर रहमान ने काफी निर्ममता से तीनों को कुल्हाड़ी से काट डाला था। तीनों के शरीर पर कई जख्म मिले हैं।
फर्जी हिंदू महिला बनकर कई लोगों के साथ ठगने वाली जमीला खातून और उसके दो साथियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जमीला ने पूजा शर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ रिलेशनशिप में जाती और फिर बलात्कार एवं जबरन धर्मांतरण का मुकदमा करने की धमकी देकर उनसे पैसे वसूलती थी।
जमीला खातून मूल रूप से असम की रहने वाली है। वह यूपी के बिजनौर के कोतवाली देहात इलाके में पूजा शर्मा बनकर रह रही थी। पुलिस ने जमीला खान के साथ-साथ उसके दो साथियों- मोहम्मद जहीर और आसिफ को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, उसके अन्य साथी- सलमान, अमजद और खालिद पुलिस के चंगुल से बाहर हैं। ये सभी बिजनौर के रहने वाले हैं।
इस मामले का खुलासा पूजा शर्मा बनी जमीला खातून के एक तहरीर से हुआ। जमीला ने 6 जुलाई 2023 को कोतवाली देहात में एक तहरीर दी। इस तहरीर में उसने अपना नाम पूजा शर्मा, पिता का नाम स्वर्गीय राजू शर्मा और निवासी महावीर कॉलोनी तिलक नगर दिल्ली बताया था।
तहरीर में जमीला खातून ने कहा था कि 29 मई 2023 को उसका निकाह जिले के अकबराबाद गाँव के रहने वाले एहतेशाम पुत्र मोहम्मद फरीद के साथ हुआ था। पूजा शर्मा ने आरोप लगाया था कि उसका शौहर उसे छोड़कर चला गया है और उसके सास-ससुर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं।
महिला की शिकायत के बाद यूपी पुलिस ने मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। जाँच के दौरान पता चला कि जो महिला खुद को पूजा शर्मा बता रही है, उसका असली नाम जमीला खातून है। वह दिल्ली की नहीं, बल्कि असम के जिला दर्रांग के थाना डलगाँव के अंतर्गत आने वाले कस्बा लालबरी सीलबोरी की रहने वाली है।
जमीला के अब्बू का नाम रजब अली और अम्मी का खालीदा बेगम है। रजब अली और खालीदा बेगम ने जमीला खातून की पहचान अपनी बेटी के रूप में की है। यूपी पुलिस को जमीला के पास से उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और बैंक खाता मिला है।
पुलिस ने पाया कि जमीला ने आधार कार्ड पूजा शर्मा के नाम से बनवा रखा है। वहीं, पैन कार्ड, वोटर आईडी और बैंक खाता पासबुक जमीला खातून के नाम से ही हैं। पुलिस ने इन सारे कागजातों की जाँच कराई तो ये सही पाए गए, जबकि पूजा नाम का आधार कार्ड फर्जी मिला।
उपरोक्त केस में गिरफ्तारी के संबंध में क्षेत्राधिकारी नगीना जनपद बिजनौर द्वारा दी गई बाईट। https://t.co/FqGG9ObTS9
पुलिस जाँच में यह बात भी पता चला कि जमीला ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पटेल नगर थाने में जहीर अहमद नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ साल 2019 में मुकदमा दर्ज करा रखा है। उसने साल 2023 में ही देहरादून के रहने वाले के नौशाद कुरैशी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करा रखा है। दोनों अभी जेल में हैं।
पुलिस ने पाया कि जमीला ने इस साल जनवरी में नौशाद कुरैशी नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ जबरन धर्मांतरण का मामला दर्ज कराया था। उसने अपने बयान में कहा था कि वह डेढ़ साल से नौशाद के साथ रह रही थी और उसने निकाह का झूठा आश्वासन देकर उसके साथ रेप किया। जमीला ने आगे कहा था कि नौशाद ने उसका जबरन गर्भपात करा दिया।
पूजा शर्मा बनीं जमीला ने कहा कि जब भी वह इसका विरोध करती थी तो नौशाद अपने भाई और अब्बू के साथ मिलकर उसकी पिटाई करता था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने नौशाद, उसके भाई शाहनवाज और उनके अब्बू जहीर पर बलात्कार, मारपीट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया था।
बिजनौर के पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने कहा कि पूछताछ के दौरान जमीला ने खुलासा किया कि जहीर अहमद से पहले उसने दो बार निकाह किया था। उसने मोइदुल हसन इस्लाम और इनाम-उल-हक के साथ निकाह किया था। जमीला ने दोनों को छोड़ दिया था। उसने यह भी खुलासा किया कि एहतेशाम के साथ निकाह के लिए उसने अपना नाम पूजा शर्मा से बदलकर जैनब परवीन रख दिया गया।