चंडीगढ़ में 60 साल की एक महिला के साथ बलात्कार का मामला सामने आया। पीड़ित महिला मंदिर जा रही थी। इसी दौरान ऑटो चालक और उसके साथी ने उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद जंगल ले जाकर मारपीट कर बलात्कार किया। घायल होने के चलते महिला बेहोश हो गई। आरोपित उसे मरा हुआ समझ छोड़कर भाग गए। घटना सोमवार (3 जुलाई, 2023) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला चंडीगढ़ के कैंबवाला इलाके से पैदल ही साकेत्री मंदिर जा रही थी। तभी वहाँ एक ऑटो आकर रुका, जिसमें दो लोग सवार थे। उन लोगों ने महिला से बातचीत कर कहा कि वे उसे मंदिर तक छोड़ देंगे। ऑटो वालों के बार-बार कहने के बाद महिला ऑटो में बैठ गई।
इसके बाद ऑटो चालक उसे साकेत्री मंदिर की जगह किसी अन्य धार्मिक स्थल ले गया और कहा कि यह वही मंदिर है, जहाँ वह आना चाहती थी। लेकिन महिला समझ गई कि वे उसे कहीं और लेकर आ गए हैं। उसने विरोध किया। इसके बाद दोनों आरोपित उसे पास के जंगल में ले गए। वहाँ बलात्कार करने की कोशिश करने लगे। जब महिला ने इसका विरोध किया तो दोनों आरोपित उसके साथ मारपीट करने लगे। इसके बाद दोनों ने उसके साथ बलात्कार किया।
आरोपितों की मारपीट के चलते महिला बेहोश हो गई थी। ऐसे में बलात्कार करने के बाद आरोपितों को लगा कि उसकी मौत हो चुकी है। इसलिए उसे मौके पर छोड़कर भाग गए। करीब 7-8 घंटे बाद महिला को होश आया तो वह किसी तरह अपने घर पहुँची और घटना के बारे में बताया। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने पीड़िता को हॉस्पिटल में भर्ती कराया। महिला के बयान और मेडिकल जाँच के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर की मोहम्मदेन एजुकेशन सोसायटी और उसकी 3500 करोड़ रुपए की संपदा पर राज्य वक्फ बोर्ड ने अपना कब्जा कर लिया है। ये सोसायटी राजश्री साहू महाराज ने साल 1906 में स्थापित की थी जिसे किंग एडवर्ड मोहम्मदेन एजुकेशन सोसायटी उर्फ मुस्लिम बोर्डिंग भी कहा जाता है।
23 जून को इसी सोसायटी के ट्रस्टी को वक्फ बोर्ड ने कहा कि उन्होंने ध्यानपूर्वक सारे दस्तावेजों को छाना और ये पता चला कि ये संस्थान वक्फ का है। वहीं सोसायटी ये बात कहती रही कि इस संस्थान को वक्फ बोर्ड नहीं चलाता है।
बता दें कि वक्फ संपत्तियाँ वो होती हैं जिन्हें किसी शख्स ने अल्लाह के नाम पर दान में दे दिया हो और वक्फ उसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए करता हो। इस मामले में टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट बताती है, मुस्लिम बोर्डिंग को वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन नंबर भी मिल गया है। संगठन को पहले राज्य चैरिटी आयुक्त द्वारा अधिकृत किया गया था।
A waqf board member can decide whether it's a property belongs to them or not and can take over it entirely as per Draconian waqf board Act https://t.co/3Kz0NqK4VR
— Eshwar Vishnubhotla (@Eswarkarthikeya) July 5, 2023
वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमबी तहसीलदार ने इस संबंध में बताया कि वो उन्हें वो सबूत संतोषजनक लगे जो ये साबित करने के लिए दिखाए गए थे कि मोहम्मदेन एजुकेशन सोसायटी हकीकत में वक्फ की संपत्ति है और उसे वक्फ एक्ट 1995 के तहत संचालित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन सबूतों में साहू महाराज द्वारा जारी सनद भी थे। इसमें वक्फ संपत्तियों की बिक्री और खरीद पर सख्त प्रतिबंध कानून द्वारा लगाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि एक अध्यक्ष की देखरेख में एक समिति मुस्लिम बोर्डिंग के लिए दैनिक व्यवसाय का संचालन करती है। मजहब और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियाँ संस्था की देखरेख में होती हैं। ऐसे में अधिकारियों की इच्छा नहीं है कि ये संस्थाएँ वक्फ बोर्ड के कड़े नियमों के तहत चलें। अधिकारी इसे स्वतंत्र रखना चाहते हैं क्योंकि शाह महाराज ने शैक्षिक लक्ष्यों को देखते हुए इसकी स्थापना की थी।
संगठन के उपाध्यक्ष आदिल फरास का भी कहना है, “सामान्य कानून के अनुसार, वक्फ बोर्ड को इस बदलाव के संबंध में नोटिस जारी करना चाहिए था। हमें तो ऐसा कोई नोटिस ही नहीं मिला। हम अपना स्टैंड लेंगे तब सोसायटी के अध्यक्ष और प्रशासक हज यात्रा से लौट आएँगे।” टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट, बताती है कि मुस्लिम बोर्डिंग को वक्फ संपति बताते हुए वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम बोर्डिंग से उनके सदस्यों की एक लिस्ट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जानकारी भी माँगी है। इसमें पंजीकरण में बदलाव के बारे में राज्य चैरिटी आयुक्त कार्यालय को भी सूचित किया गया है। साथ ही कहा गया है कि अब से संपत्ति का मालिकाना हक उसके पास होगा।
ओडिशा (Odisha) के जगतसिंहपुर क्षेत्र के काटेसिंहपुर गाँव में कनाडाई नागरिक द्वारा धर्मांतरण की कोशिश की जा रही थी। इस मामले में ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने संज्ञान लिया है। NCPCR ने आरोपित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जगतसिंहपुर प्रशासन को पत्र लिखा है।
NCPCR ने जगतसिंगपुर के कलेक्टर पारुल पटवारी को लिखे पत्र में कहा है कि 11 नाबालिग हिंदू बच्चों को एक कार्यक्रम में अवैध रूप से धर्मांतरित किया जा रहा था। इस कार्यक्रम को कनाडाई नागरिक एपेन मोहन किडंगलील (Eapen Mohan Kidangalil) ने तिर्तोल की दो अन्य मिशनरियों के साथ मिलकर आयोजित किया था।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पत्र में आगे कहा, “आयोग इस मामले की गहन जाँच और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध करता है। यह पत्र मिलने के 3 दिन के भीतर बच्चों की जानकारी और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज आयोग के सामने प्रस्तुत किए जाएँ।”
एपेन मोहन किडंगलील पर ओडिशा पुलिस ने 24 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। किडंगलील पर प्रार्थना सभा आयोजित करने के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) समाज के गरीब लोगों को लालच देकर ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है। इन लोगों में बच्चे भी शामिल हैं। इसके बाद उसे पकड़कर VHP के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सौंप दिया।
22 जून 2023 को VHP कार्यकर्ताओं को जगतसिंहपुर क्षेत्र के काटेसिंहपुर गाँव में धर्मांतरण कार्यक्रम की जानकारी मिली थी। जब वे मौके पर पहुँचे तो पाया कि कनाडा की नागरिकता रखने वाला एपेन मोहन करीब 33 स्थानीय निवासियों को ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। इनमें महिलाओं सहित 11 नाबालिग भी थे।
VHP कार्यकर्ता सूर्यकांत नंदा का कहना है कि आरोपित के पास से कैश, कागजात, बाइबिल, टूरिस्ट वीजा और कुछ दवाएँ बरामद हुई हैं। कडंगलील की मदद क्षेत्र में सक्रिय ईसाई मिशनरी के 2 अन्य सदस्य कर रहे थे। प्रार्थना सभा में ये सभी लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से आए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, VHP कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन पर हमले किए गए।
Police seized 2 Bikes & a Number less Bolero SUV used for conversion actvities Jagatsinghpur Police has showed leniency to the Christian Missionary from CANADA & has set him free without Observing Proper Process to deport him which is a direct dereliction of duty. cc @MEAIndiapic.twitter.com/qAI0hVzY8e
— Kalinga Rights Forum (@KalingaForum) June 25, 2023
मामले का संज्ञान स्थानीय कानूनी कार्यकर्ता समूह कलिंगा राइट्स फोरम ने लिया है। कनाडाई नागरिक पर पर्यटक वीजा के कानूनों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलिंगा राइट्स फोरम ने विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों पर मिशनरी सदस्यों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है।
कलिंगा राइट्स फोरम के मुताबिक, किडंगलील पर्यटक वीजा पर भारत आया हुआ है, लेकिन उसने नियमों के विपरीत 22 जून को प्रार्थना सभा का आयोजन किया। ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के मुताबिक, आरोपित पर ओडिशा धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1967 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की गई है।
मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठनों पर जवाबी FIR
इस घटना के बाद ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठन के कुछ लोगों पर जवाबी FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मिशनरियों ने VHP कार्यकर्ताओं पर अपने ‘व्यक्तिगत कार्यक्रम’ में बाधा डालने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के तौर पर लक्ष्मीप्रिया मलिक का नाम सामने आया है।
लक्ष्मीप्रिया की शिकायत पर VHP सहित हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 448, 294, 323, 506 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला ने बताया है कि नाबालिग बच्चे उसके बेटे के जन्मदिन में आए थे। उसने आरोप लगाया है कि सुबह लगभग 11 बजे उनका परिवार पूजा कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर दुर्व्यवहार किया।
हिन्दू संगठनों पर दर्ज FIR
महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ भगवान की पूजा बंद की
ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP सदस्य सूर्यकांत नंदा ने बताया कि बजरंग दल के सदस्यों को बेरहमी से पीटा गया था, क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के नाम हो रहे धर्मान्तरण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि घटना के दिन बिना नंबर की सफेद बोलेरो गाड़ी देखकर जब पड़ताल की गई तो उसमें कनाडा के नागरिक के आने की जानकारी मिली।
नंदा ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद एक घर की तरफ जनजातीय समाज के करीब 40-50 गरीब हिन्दुओं को जाते देखा गया। जमावड़े की बजरंग दल सदस्यों ने जाकर पड़ताल की तो उन्हें वहाँ प्रार्थना के नाम पर धर्म परिवर्तन का प्रयास होता दिखा।
VHP नेता नंदा ने कहा कि हिन्दू संगठन के सदस्यों को देख कर लक्ष्मीप्रिया नाम की महिला ने इस कार्यक्रम में हुए जमावड़े को घर में जन्मदिन का आयोजन बताया। बजरंग दल के सदस्यों ने प्रार्थना में बैठी कुछ महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ की पूजा करना बंद कर दी है, क्योंकि उनका धर्म परिवर्तित हो गया है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान VHP नेता सूर्यकांत नंदा ने स्थानीय पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले तो पुलिस ने सब कुछ जानते हुए भी कनाडा के नागरिक को छोड़ दिया और अब हिन्दू संगठनों से भी पूछताछ करने जा रही है।
As per Complaint filed by @bajrangdal_jsp ,Christian missionaries tried to attack Bajrangdal Karyakartas with weapons as they tried to stop Conversion event Jagatsingpur Police Lodged FIR Under Odisha's Anti Conversion Law i.e Section 4 of Odisha Freedom of Religion Act 1967 pic.twitter.com/VCl8oh7eMI
— Kalinga Rights Forum (@KalingaForum) June 24, 2023
कनाडा के नागरिक को छोड़ने पर SHO की सफाई
ऑपइंडिया ने इस घटना पर SHO शुभ्रांशु परिदा से बात की। SHO ने बताया कि कनाडाई व्यक्ति एपेन मोहन किडंगलील के पास OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड पाया गया है। उन्होंने किडंगलील को मूल रूप से केरल का निवासी और जन्मजात ईसाई बताया।
बकौल SHO एपेन मोहन किडंगलील को भारत में अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, क्योंकि वो पर्यटक वीजा पर नहीं है। पुलिस के मुताबिक, किडंगलील ने नियमों को नहीं तोड़ा है, इसलिए उसे धारा 41 का नोटिस जारी करके रिहा किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर ही की जाती है।
पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं
ऑपइंडिया ने SHO से यह जानना चाहा कि OCI कार्ड धारक को क्या मिशनरी गतिविधि में शामिल होने का अधिकार है? इस सवाल के जवाब पर SHO ने कहा कि पुलिस को मौके से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला, जिससे यह कहा जा सके कि घटनास्थल पर धर्मान्तरण जैसा कुछ चल रहा था।
OCI के कानून
थाना प्रभारी शुभ्रांशु के मुताबिक, मामले में आगे की जाँच चल रही है। हालाँकि कलिंगा राइट फोरम पुलिस की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। फोरम ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए ऑपइंडिया को बताया कि वह पूरी साजिश का पर्दाफाश करेगी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता, सहृदयता और प्रशासन चलाने का तरीका ऐसा है कि जनता के लिए वे ‘मामा’ हैं। सीधी पेशाब कांड का जो वीडियो वायरल हुआ है, उस मामले में भी एक तरफ उनके भीतर का सख्त प्रशासक दिखता है, दूसरा ऐसा मुख्यमंत्री जिसके लिए ‘जनता ही भगवान’ है। आरोपित की गिरफ्तारी हुई, एनएसए लगा, घर पर बुलडोजर चला। सजा की ऐसी लीक खींची जा रही है कि अपराधियों के लिए नजीर बन जाए। दूसरी तरफ पीड़ित को मुख्यमंत्री आवास लाए। चरण पखारे। माफी माँगी। शाल ओढ़ाया। साथ मिलकर पेड़ लगाए। सम्मान की ऐसी मिसाल पेश की है कि कोई पीड़ित खुद को कभी अकेला न महसूस करे।
गुरुवार 6 जुलाई 2023 को सीधी पेशाब कांड के पीड़ित दशमत रावत मुख्यमंत्री आवास आए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद हाथ पकड़कर अनुसूचित जनजाति से आने वाले पीड़ित को घर के भीतर ले गए। कुर्सी पर बैठाया। चरण पखारे। आरती उतारी। तिलक लगाया। शाल ओढ़ाया। अपने राज्य में उसके साथ हुई घटना के लिए माफी माँगी। इसका वीडियो साझा करते हुए सीएम ने ट्वीट में लिखा है, “यह वीडियो मैं आपके साथ इसलिए साझा कर रहा हूँ कि सब समझ लें कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान है, तो जनता भगवान है। किसी के साथ भी अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के हर नागरिक का सम्मान मेरा सम्मान है।”
यह वीडियो मैं आपके साथ इसलिए साझा कर रहा हूँ कि सब समझ लें कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान है, तो जनता भगवान है।
किसी के साथ भी अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। राज्य के हर नागरिक का सम्मान मेरा सम्मान है। pic.twitter.com/vCuniVJyP0
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) July 6, 2023
इसके बाद दशमत के साथ मुख्यमंत्री राजधानी भोपाल में स्थित स्मार्ट सिटी पार्क पहुँचे। यहाँ दोनों ने मिलकर वृक्षारोपण किया। साथ मिलकर फावड़े से मिट्टी डाली। कहा कि उनके लिए गरीब पूज्य हैं। गरीबों का अपमान सबका अपमान है।
एक ही चेतना सब में है वृक्ष बिना किसी भेदभाव के सबको प्राणवायु देते हैं हम भी वृक्ष जैसे बनें दशमत जी के साथ पौधारोपण किया pic.twitter.com/qNVTFrqUjq
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) July 6, 2023
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में CM ने कहा, “मेरे लिए दरिद्र ही नारायण है। जनता ही भगवान है। जनता की सेवा हमारे लिए भगवान है। हम ये मानते हैं कि हर इंसान में भगवान निवास करता है। भाई दशमत के साथ अन्याय हुआ। मेरा मन दर्द-पीड़ा और व्यथा से भर गया। इसलिए मैंने इन्हें यहाँ बुलाया। मन गहरी वेदना से भरा हुआ था। मन में बहुत तकलीफ थी। हमारे भाई के साथ एक अमानवीय घटना घटी। मैं अन्तर्रात्मा से मानता हूँ कि गरीब मेरे लिए पूज्य है। उसका अपमान हम सबका अपमान है।”
#WATCH | "For me, the poor is God and people are like God to me. Serving the people is equal to worshipping God. We believe that God resides in every human being. I was pained by the inhuman incident that happened with Dashmat Rawat…Respect and security is important for the… pic.twitter.com/p6TCzAjq3J
इस बीच दैनिक भास्कर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि पेशाब कांड का वीडियो पुलिस के अनुसार एक साल पुराना है। प्रवेश शुक्ला के चाचा विद्याकांत शुक्ला का दावा है कि वीडियो तीन साल पुराना है। इसके जरिए उनके भतीजे को ब्लैकमेल किया जा रहा था। इससे वह मानसिक तौर पर परेशान था। कुबरी गाँव के आदर्श शुक्ला और दीनदयाल साहू पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसा माँगने का आरोप लगाया है। भास्कर ने सीधी की एएसपी अंजूलता पटेल के हवाले से बताया कि वीडियो पुराना है। सोशल मीडिया में इसे वायरल करने वाले लोगों से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पेशाब वाला वीडियो 24 जून 2023 को भी सीधी जिले के कुछ सोशल मीडिया ग्रुप में डाला गया था। बाद में डिलीट कर दिया गया। इस बीच अचानक 29 जून को प्रवेश शुक्ला घर से गायब हो गया। जब परिजनों ने उसका लापता होने की शिकायत पुलिस से की तो 3 जुलाई को फिर से इस वीडियो को वायरल किया गया।
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में 10 गायों को काटकर उनके सिर को सड़क के किनारे और खेतों में फेंक दिए गए हैं। वहीं, एक सिर गाँव के कुएँ में भी मिला है। हिंदू संगठनों का कहना है कि दंगे कराने की साजिश के तहत यह सब किया गया है। वहीं, इस घटना का संबंध बकरीद से होने की बात भी कही जा रही है।
मामला सिवनी जिले के बरघाट तहसील अंतर्गत अरी गाँव के अमराई टोला का है। मंगलवार (4 जुलाई 2023) की सुबह स्थानीय ग्रामीण खेतों की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें सड़क किनारे गायों के सिर कटे हुए दिखाई दिए। इसके बाद यह बात पूरे गाँव में फैल गई। इसी दौरान गाँव के ही गोवर्धन साहू नामक व्यक्ति के कुएँ में भी गाय का कटा हुआ सिर मिला।
मामले की जानकारी मिलने पर हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँच गए। कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की माँग की। इसके साथ ही हिंदू संगठनों ने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि सावन माह के पहले दिन हुई इस तरह की घटना से हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं।
इस मामले में ऑपइंडिया ने VHP नेता दिग्विजय सिंह राजपूत से बात की। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की सीमा से सटे इस इलाके में बड़े पैमाने पर गौ-तस्करी हो रही है। गौ-तस्करों को पुलिस प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। यहाँ कई ऐसे ढाबे हैं, जहाँ गौमांस की बिक्री होती है। गौवंश की हत्या करके उनके सिर लोगों के खेतों और सड़कों पर फेंक कर हिंदुओं को खुली चुनौती दी जा रही है। इस तरह की हरकतें सांप्रदायिक दंगे भड़काने की मंशा से की जा रही हैं।”
दिग्विजय सिंह राजपूत ने यह भी कहा, “बरघाट थाना क्षेत्र के बोरिकला गाँव के सलाई कोसनी में हर रोज गौ-हत्या करके गौ-मांस बेचा जा रहा है। यह गौ-मांस उन रेस्टोरेंट में बेचा जा रहा है, जहाँ विदेशी पर्यटक ठहरते हैं। मध्य प्रदेश में गौ-हत्या पर कड़ी सजा का प्रावधान न होने के चलते ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं। जिस दिन गौ-हत्या पर मृत्यु दंड का प्रावधान हो जाएगा, उस दिन से गौ-तस्करी और ऐसी सभी घटनाएँ बंद हो जाएँगी।”
वहीं, बजरंग के दल प्रखंड सह-संयोजक रवि रहांगडाले ने ऑपइंडिया से कहा, “इसका संबंध बकरीद से भी हो सकता है। ऐसी आशंका है कि बकरीद पर गौ-हत्या कर सिर छिपाकर रखे गए थे, लेकिन अब सड़ने और बदबू आने के चलते इन्हें हिंदुओं के खेतों के सामने फेंक दिया गया। पुलिस को आरोपितों की तलाश कर उन्हें कड़ी सजा देनी चाहिए। घटना के विरोध और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए गुरुवार (6 जुलाई 2023) को बरघाट बंद बुलाया गया है।”
पश्चिम बंगाल के एक विधायक के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया है। ये विधायक हैं- नौशाद सिद्दीकी। सिद्दीकी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF MLA Naushad Siddiqui) के राज्य में इकलौते विधायक हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने दक्षिण 24 परगना के भांगड़ सीट से जीत हासिल की थी। वे हुगली जिले के श्रीरामपुर स्थित फुरफुरा शरीफ मजार के पीरजादा भी हैं।
सिद्दीकी पर एक महिला ने निकाह का झाँसा देकर ‘यौन संबंध’ बनाने के आरोप लगाए हैं। कहा है कि डेढ़ साल में विधायक कई बार उसके साथ संबंध बनाए। लेकिन जब उसने शादी की बात की तो वे मुकर गए। इसके बाद विधायक ने अपने लोगों के साथ मिलकर उसे धमकी भी दी। सिद्दीकी पर मामला ऐसे समय में दर्ज कराया गया है, जब पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होने हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला भांगर विधानसभा के बाउबाजार थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि नौशाद सिद्दकी ने उसे अपने बीबी गांगुली स्ट्रीट इलाके में बने ऑफिस में करीब डेढ़ साल गलत तरीके से रोका। फिर निकाह का वादा करके उसके साथ ‘यौन संबंध’ बनाए। इसके बाद लंबे समय तक उसके साथ शरीरिक संबंध बनाए रखा। लेकिन जब वह शादी करने की बात करने लगी तो नौशाद सिद्दीकी अपनी बात से मुकर गए और उसे दूर करने की कोशिश करने लगे। पीड़िता अपनी जिद्द पर अड़ी रही तो कथित तौर पर सिद्दीकी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसे डराया-धमकाया।
इसके बाद महिला और उसके भाई ने TMC नेता सब्यसाची दत्ता को पूरे मामले की जानकारी दी। दत्ता ने पीड़िता को लेकर न्यू टाउन पुलिस स्टेशन पहुँचे। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बयान दर्ज करते हुए आरोपित विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। मामला बाउबाजार थाना क्षेत्र का है। ऐसे में न्यू टाउन पुलिस ने बाउबाजार थाने को महिला द्वारा दर्ज शिकायत की कॉपी भेजी गई। इसके अलावा, डीसी न्यू टाउन से भी बाउ बाजार पुलिस को एक पत्र भेजा गया है।
वहीं, आरोपित विधायक नौशाद सिद्दीकी ने खुद को निर्दोष बताते हुए इस पूरी घटना को अपने खिलाफ साजिश करार दिया है। इस मामले में ऑपइंडिया से बात करते हुए बंगाल BJP के मीडिया पैनलिस्ट आशुतोष झा ने कहा, “नौशाद सिद्दीकी ने गलत किया है तो उसे कड़ी सजा होनी ही चाहिए। लेकिन पीड़िता के साथ TMC नेता के होने से राजनीति की भी बू रही है। ममता बनर्जी ने बंगाल के पुलिस थानों को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यालय की तरह बना दिया है। यहाँ TMC नेताओं के साथ गए बिना कोई कार्रवाई नहीं होती।”
मध्य प्रदेश के सीधी में अनुसूचित जनजाति (ST) व्यक्ति के ऊपर पेशाब करने के आरोपित प्रवेश शुक्ला (Pravesh Shukla) से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें पुलिस उसे धकियाते और पीटते हुए दिख रही है। एक दावा भी। इस दावे के अनुसार पेशाब का जो वीडियो वायरल (Pravesh Shukla Video) है, वह काफी पुराना है। पुलिस के अनुसार एक साल तो आरोपित के परिजन के अनुसार तीन साल। यह भी कि यह वीडियो प्रवेश शुक्ला से पैसे की उगाही करने के मकसद से अब वायरल किया गया है।
कुछ तस्वीरें भी सामने आई है जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पेशाब कांड के पीड़ित जनजातीय व्यक्ति का चरण पखारते दिख रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “मन दु:खी है। दशमत जी आपकी पीड़ा बाँटने का यह प्रयास है, आपसे माफी भी माँगता हूँ, मेरे लिए जनता ही भगवान है।”
मन दु:खी है; दशमत जी आपकी पीड़ा बाँटने का यह प्रयास है, आपसे माफी भी माँगता हूँ, मेरे लिए जनता ही भगवान है! pic.twitter.com/7Y5cleeceF
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) July 6, 2023
दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पुलिस के अनुसार यह वीडियो एक साल पुराना है। प्रवेश शुक्ला के चाचा विद्याकांत शुक्ला का दावा है कि वीडियो तीन साल पुराना है। इसके जरिए उनके भतीजे को ब्लैकमेल किया जा रहा था। इससे वह मानसिक तौर पर परेशान था। कुबरी गाँव के आदर्श शुक्ला और दीनदयाल साहू पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसा माँगने का आरोप लगाया है। भास्कर ने सीधी की एएसपी अंजूलता पटेल के हवाले से बताया कि वीडियो पुराना है। सोशल मीडिया में इसे वायरल करने वाले लोगों से पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पेशाब वाला वीडियो 24 जून 2023 को भी सीधी जिले के कुछ सोशल मीडिया ग्रुप में डाला गया था। बाद में डिलीट कर दिया गया। इस बीच अचानक 29 जून को प्रवेश शुक्ला घर से गायब हो गया। जब परिजनों ने उसका लापता होने की शिकायत पुलिस से की तो 3 जुलाई को फिर से इस वीडियो को वायरल किया गया।
वैसे वीडियो नया हो या पुराना, यह घिनौना कृत्य है। दोषी को उसकी सजा होनी ही चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर आरोपित को गिरफ्तार कर एनएसए लगाया गया है। उसके घर पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त भी किए गए हैं। लेकिन भास्कर की रिपोर्ट से कुछ सवाल खड़े होते हैं। वीडियो कब का है? यदि वीडियो पुराना है तो उसे वायरल करने के पीछे कौन हैं? वायरल करने वाले लोगों की मंशा क्या है? आरोपित के पक्ष में पीड़ित ने एफिडेविट क्यों दी है? इन सवालों के जवाब इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप ले चुका है। प्रवेश शुक्ला को कॉन्ग्रेस बीजेपी से जुड़ा बता रही है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब उसके पूरे घर को गिराने की माँग कर रही है। वहीं बीजेपी प्रवेश शुक्ला से किसी जुड़ाव से इनकार कर रही है।
इस बीच प्रवेश शुक्ला का एक वीडियो सामने आया है। इसमें पुलिसकर्मी उसका कॉलर पकड़े दिख रहे हैं। उसे धकियाते हुए ले जाया जा रहा है। बीच-बीच में उसकी पिटाई भी हो रही है। एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार यह वीडियो 5 जुलाई 2023 का है, जब प्रवेश शुक्ला को पुलिस थाने से पेशी पर कोर्ट ले जा रही थी।
राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) में टूट की खबर 2 जुलाई 2023 को तब सामने आई, जब अजित पवार (Ajit Pawar) ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री (Maharashtra Deputy CM) पद की शपथ ली। लेकिन अब यह बात सामने आई है कि इससे दो दिन पहले ही यानी 30 जून को ही उन्होंने चुनाव आयोग के सामने पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा ठोक दिया था। आयोग को बता दिया था कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वे हैं न कि उनके चाचा शरद पवार (Sharad Pawar)।
चुनाव आयोग को बताया गया था कि पार्टी विधायक दल और संगठन के सदस्यों ने भारी बहुमत के साथ अजित पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। अजित पवार गुट ने 5 जुलाई को आयोग को जो 43 विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों के समर्थन वाला हलफनामा दिया है, उसमें भी 30 जून की तारीख अंकित होने की बात कही जा रही है। इससे जाहिर होता है कि दुनिया को खबर लगने से पहले ही अजित पवार ने एनसीपी पर कब्जे की तैयारी शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं शरद पवार या उनके गुट के किसी नेता को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।
आज तक ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 30 जून को एनसीपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। यह बैठक पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बुलाई थी। गुपचुप तरीके से हुई इस बैठक में आम राय से शरद पवार को हटाकर अजित पवार को पार्टी का नया अध्यक्ष चुनने का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में प्रस्ताव पास होते ही अजित पवार के गुट ने उसी दिन चुनाव आयोग को पत्र लिख पार्टी पर चुनाव चिह्न पर अपनी दावेदारी जता दी।
प्रफुल्ल पटेल को जून में ही शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। लेकिन अब वे पहले ही दिन से अजित पवार के साथ दिख रहे हैं। गौरतलब है कि 5 जुलाई को चाचा और भतीजा दोनों ने अपने शक्ति का प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान भी शरद पवार कमजोर नजर आए थे। उनकी बैठक में 13 विधायक और 4 सांसद ही मौजूद थे। महाराष्ट्र में एनसीपी विधायकों की संख्या 53 है।
#WATCH | Delhi | NCP President Sharad Pawar's posters and hoardings were removed by New Delhi Municipal Council (NDMC).
Meanwhile, Sharad Pawar left his residence for Delhi where the party's National Executive meeting is scheduled for today. Amid NCP vs NCP crisis in… pic.twitter.com/RLeluKHiHY
इधर पार्टी पर कब्जा बचाए रखने की जुगत में लगे शरद पवार गुट की 6 जुलाई को दिल्ली में बैठक होनी है। उससे पहले न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें दिल्ली में लगे शरद पवार गुट के होर्डिंग को एनडीएमसी के कर्मचारी उतारते दिख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रहा है, जिसमें दलित समाज के कुछ लोगों द्वारा पेशाब पिलाने के कारण विकास शर्मा नाम के लड़के ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। लोगों का कहना है कि एक साल बीत जाने के बाद भी अभी भी मृतक के परिजनों को न्याय नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर इसको लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। इसके वायरल वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टैग किया है।
शुभम शुक्ला नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “विकास शर्मा को दलित समाज के लोगों ने पेशाब पिलाया, मारपीट की, मानसिक प्रताड़ना दी। इससे तंग आकर विकास ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। ये वीडियो भी वायरल हुआ था। 2020 शिवपुरी की इस घटना पर मृतक को अभी न्याय नहीं मिला। स्वच्छ समाज के लिए मनोज कोली और प्रवेश शुक्ला जैसे लोग कलंक हैं।”
विकास शर्मा को दलित समाज के लोगों ने पेशाब पिलाया, मारपीट की, मानसिक प्रताड़ना दी. इससे तंग आकर विकास ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. ये वीडियो भी वायरल हुआ था. 2020 शिवपुरी की इस घटना पर मृतक को अभी न्याय नहीं मिला. स्वच्छ समाज के मनोज कोली और प्रीतेश शुक्ला जैसे लोग कलंक हैं. pic.twitter.com/VgHmEFZ7ko
सौरभ तिवारी नाम के यूजर ने लिखा, “इस पर मामा का एक्शन क्यू नहीं? क्या ये अपराध के श्रेणी में नही आता या फिर इसमें पीड़ित ब्राह्मण है और अपराधी दलित है इसलिए? न ही nsa लगाया न ही घर गिराया और न ही कोई करवाई हुई। मामा का यह चरित्र बहुत ही घटिया है और बेहूदा है।”
इस पर मामा का एक्शन क्यू नही क्या ये अपराध के श्रेणी में नही आता या फिर इसमें पीड़ित ब्राह्मण है और अपराधी दलित है इसलिए न ही nsa लगाया न ही घर गिराया और न ही कोई करवाई हुई मामा का यह चरित्र बहित ही घटिया है और बेहूदा है@ChouhanShivraj
बबलू शुक्ला नाम के एक यूजर ने लिखा, “इस विषय मे सबके मुँह सिल जाएँगे, क्योंकि सब मानते है गलत सिर्फ ब्राह्मण है, बाकी सब गंगा जी के कर कमलों से पैदा हुए है।”
इस विषय मे सबके मुँह सिल जायेंगे क्योंकि सब मानते है गलत सिर्फ ब्राम्हण है बाकि सब गंगा जी के कर कमलों से पैदा हुए है.
दरअसल, मई 2020 में मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले साजोर गाँव में 20 साल के विकास शर्मा से मनोज कोली और उसके घर की दो महिलाएँ- तारावती कोली और प्रियंका कोली ने मारपीट की थी और बाद में में उसे पेशाब पिला दी थी। इससे क्षुब्ध होकर विकास शर्मा ने आत्महत्या कर लिया था। विकास शर्मा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अपवित्र हो गया, इसलिए वह आत्महत्या कर रहा है।
सुसाइड नोट में विकास ने लिखा था, “सुबह वह अपने घर के पास स्थित माता के मंदिर पर जल चढ़ाने गया था। इस दौरान गाँव के हैंडपंप पर पानी भर रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने अपने बर्तनों पर पानी के छींटे पड़ने से नाराज होकर मारपीट की। मेरे पूजा के लोटे में मनोज कोली ने पेशाब कर मुझे जबरन पिलाया और आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया।”
पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), धारा 323 (मारपीट), धारा 505 (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य की भावनाएँ पैदा करना) और धारा 34 लगाई थीं। साथ ही तीनों को गिरफ्तार भी कर लिया था।
बताते चलें कि मध्य प्रदेश में ऐसी ही घटना सामने आई है, जिसमें प्रवेश शुक्ला नाम के एक व्यक्ति ने अनुसूचित जनजाति समुदाय के एक व्यक्ति पर शराब के नशे में पेशाब कर दिया। पीड़ित व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर है। वहीं, प्रवेश शुक्ला भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि बताया जा रहा है।
इस घटना को लेकर हंगामा होने के बाद मध्य प्रदेश की पुलिस ने प्रवेश शुक्ला के घर के बाउंड्री वॉल सहित अतिक्रमण वाले हिस्से को बुलडोजर चलाकर गिरा दिया है। इसके साथ पर उस पर NSA के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है।
कर्नाटक में राजधानी बेंगलुरु से धारवाड़ के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई है। इससे पहले भी देश के कई इलाकों में ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ताज़ा मामले की जानकारी खुद भारतीय रेलवे ने आधिकारिक रूप से दी है। इस जानकारी में बताया गया है कि ट्रेन संख्या 20661 पर सुबह के 8:40 बजे पत्थरबाजी की गई है। ये घटना कदुर स्टेशन से गुजरने के बाद हुई है।
उस समय ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन कर्नाटक में कदुर-बिरूर खंड के बीच में थी। किन लोगों ने ट्रेन पर पत्थरबाजी की है, इस संबंध में अब तक कुछ खास पता चल नहीं सका है। हालाँकि, भारतीय रेलवे ने इस संबंध में जाँच शुरू किए जाने की जानकारी दी है। इस पत्थरबाजी में ट्रेन का डब्बा C-4 क्षतिग्रस्त हो गया है। राहत की बात ये रही कि पत्थरबाजी की इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ है।
पथराव की ये घटना कृष्णराजपुर और बेंगलुरु कैंटोनमेंट के बीच घटित हुई है। ज्ञात हो कि कुछ ही दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से देश भर में 5 नई ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखा कर उनका शुभारंभ किया था। कर्नाटक को मिलने वाली ये दूसरी ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन है। पत्थरबाजी की ताज़ा घटना बुधवार (5 जुलाई, 2023) को घटित हुई है।
Stones were pelted on Train No 20661(Bengaluru-Dharwad) Vande Bharat express train at 08.40 hrs after passing Kadur station and between Kadur-Birur section in Karnataka by some unknown persons today: Indian Railways
बता दें कि कर्नाटक में हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार बनी है और सिद्धारमैया फिर से मुख्यमंत्री बनाए गए हैं, वहीं डीके शिवकुमार बतौर डिप्टी CM काम कर रहे हैं। इससे पहले भी शनिवार को बेंगलुरु-धारवाड़ के बीच चलने वाली इसी ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई थी, जिससे इसकी एक खिड़की क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे पहले ये घटना देवांगरे स्टेशन के पास हुआ था। इन ट्रेनों की सुरक्षा के लिए उन पर RPF जवानों को भी तैनात किया गया है।