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दिल्ली सरकार के 400 ‘विशेषज्ञों’ को LG ने निकाला, नियुक्ति में कई तरह की अनियमितता आई सामने: बोली BJP- केजरीवाल के खास लोगों को दी नौकरी

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की AAP सरकार में काम कर रहे 400 ‘विशेषज्ञों’ की सेवा उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने समाप्त कर दी है। नियुक्ति में कई तरह की अनियमितता सामने आने के बाद इन्हें बर्खास्त किया गया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर और बिना विभागीय अनुमति के ये नियुक्तियाँ की गई थी। सेवा विभाग ने इन ‘विशेषज्ञ कर्मचारियों’ को हटाने का प्रस्ताव दिया था। उपराज्यपाल ने सोमवार (3 जुलाई 2023) को इसे मँजूरी दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से कहा गया है कि इन नियुक्तियों में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया है। उपराज्यपाल ने सभी विभागों को सेवा विभाग के आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। आदेशों का पालन नहीं होने पर संबंधित प्रशासनिक सचिव के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

जिन्हें बर्खास्त किया गया है उन्हें दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों में फेलो/सहायक फेलो, सलाहकार/उप सलाहकार, विशेषज्ञ/सीनियर रिसर्च अधिकारी और कंसल्टेंट पदों नियुक्त किया गया था। सेवा विभाग ने अपनी जाँच में पाया कि इन पदों पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों के पास पर्याप्त योग्यता नहीं थी। नियुक्त किए गए लोग नौकरी के लिए जारी विज्ञापन में दिए गए आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं कर रहे थे। इसके अलावा संबंधित विभागों ने इनके अनुभव प्रमाण-पत्र को वेरिफाई भी नहीं किया था। जाँच में कई के अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए।

सेवा विभाग की जाँच में यह भी सामने आया कि पुरातत्व, पर्यावरण, दिल्ली अभिलेखागार तथा महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों ने इन कर्मचारियों को नियुक्त तो कर लिया, लेकिन इसके लिए संबंधित अधिकारियों से मँजूरी नहीं ली। कुल 69 कर्मचारी बिना किसी अनुमति के पुरातत्व, पर्यावरण, दिल्ली अभिलेखागार, महिला और बाल विकास और उद्योग विभाग में काम कर रहे थे। इसके अलावा, दिल्ली सरकार के 13 बोर्डों में भी 155 लोगों की नियुक्ति के लिए किसी भी प्रकार की आवश्यक मँजूरी नहीं ली गई थी। यही हाल दिल्ली एसेंबली रिसर्च सेंटर, डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमिशन ऑफ दिल्ली और डिपार्टमेंट ऑफ प्लानिंग का है। इन विभागों में 187 लोगों को नौकरी पर रखा गया था। लेकिन इसकी जानकारी सेवा विभाग को नहीं दी गई थी।

इस मामले में BJP का कहना है कि इन नियुक्तियों के में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। दिल्ली बीजेपी प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है, “400 पदों पर नियुक्त किए गए लोग कोई विशेषज्ञ नहीं थे। ये लोग सीएम अरविंद केजरीवाल के खास व्यक्ति थे।” उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियाँ अपने आप में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हैं। इसके पीछे सीएम केजरीवाल और अन्य मंत्रियों का हाथ है। कर्मचारियों को बर्खास्त करना पर्याप्त नहीं है। दिल्ली सरकार द्वारा उन लोगों को दिए गए वेतन की भी वसूली होनी चाहिए। वहीं, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक बयान में कहा है कि उपराज्यपाल के पास इन लोगों को नौकरी से निकालने का कोई अधिकार नहीं है। वह असंवैधानिक रूप से काम कर रहे हैं। उपराज्यपाल के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

‘कुछ देशों ने आतंकवाद को बनाया हथियार, उनकी आलोचना में न हो दोहरा मापदंड’: SCO समिट में PM मोदी की खरी-खरी, सुन रहे थे पुतिन-जिनपिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO)’ के समिट को संबोधित किया, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद रहे। 23वीं SCO समिट में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 2 दशक में ये संगठन यूरेशियाई क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास के क्षेत्र में एक बड़े मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के साथ भारत के हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और लोगों का आपसी संपर्क हमारी साझा विरासत का जीवन प्रमाण है।

पीएम मोदी ने कहा कि वो इस क्षेत्र को ‘एक्सटेंडेड नेबरहुड’ नहीं, बल्कि एक बड़े परिवार के रूप में देखते हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के बारे में बात करते हुए कहा कि विश्व को परिवार मानने का सिद्धांत प्राचीन काल से हमारे आचरण का हिस्सा रहा है और आज भी प्रेरणा का स्रोत है। दूसरा मूलभूत सिद्धांत उन्होंने बताया – SECURE (सिक्योरिटी, इकोनॉमिक डेवलपमेंट, यूनिटी, रेस्पेक्ट फॉर सॉवर्निटी, टेरीटोरियल इंटीग्रिटी और एनवीरोंमेंट प्रोटेक्शन)।

उन्होंने कहा कि भारत ने SCO में सहयोग के 5 नए स्तम्भ बनाए हैं। वो हैं – स्टार्टअप्स एवं इनोवेशन, परंपरागत दवाएँ (आयुर्वेद इत्यादि), युवाओं का सशक्तिकरण, डिजिटल इन्क्लूजन और साझा बौद्ध विरासत। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्थिति के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। विवादों, तनावों और महामारी से घिरे विश्व में फ़ूड, फ्यूल और फर्टिलाइजर की किल्लत है। बकौल पीएम मोदी, हमें मिल कर विचार करना चाहिए कि एक संगठन के रूप में लोगों की अपेक्षाओं-आकाँक्षाओं को पूरा कर पाने में समर्थ हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या हम आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं? उन्होंने इस सवाल पर जोर दिया कि क्या SCO ऐसा संगठन बन रहा है जो भविष्य के लिए तैयार हो? उन्होंने आतंकवाद और वैश्विक और क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई ज़रूरी है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप या अभिव्यक्ति में हो, हमें इसके खिलाफ मिल कर लड़ाई लड़नी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कुछ देश क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को अपनी नीतियों के इंस्ट्रूमेंट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। आतंकवादियों को पनाह देते हैं। SCO को ऐसे देशों की आलोचना करने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। ऐसे गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं होने चाहिए। अफगानिस्तान को लेकर भारत की अपेक्षाएँ और चिंताएँ SCO के अन्य देशों के समान ही हैं। अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के लिए हमें मिल कर प्रयास करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान टेरर फाइनेंसिंग और युवाओं को भड़का कर कट्टर बनाए जाने की घटनाओं के खिलाफ भी मिल कर काम करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति का SCO में शामिल सभी देशों की सुरक्षा का असर पड़ा है। उन्होंने अफगान नागरिकों को मानवीय सहायता, वहाँ समावेशी सरकार का गठन, ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई और महिलाओं-अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

काॅन्ग्रेसी दबंग ने BJP का झंडा लगाने पर कर दी हत्या, फिर खुद को पागल बताकर कानून को देता रहा झाँसा: कोर्ट की सख्ती से खुली पोल, 19 साल बाद उम्रकैद की सजा

2004 में मध्य प्रदेश के जबलपुर एक 30 साल के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस व्यक्ति का ‘कसूर’ बीजेपी समर्थक होना था। अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाना था। उसे गोली मारने वाला दबंग काॅन्ग्रेस से जुड़ा था। 19 साल बाद इस हत्यारे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस बीच हत्यारा खुद को पागल बताकर कानून को झाँसा देता रहा। पागल होने के उसके नाटक की पोल भी कोर्ट की सख्ती के बाद हुई जाँच से ही खुली थी।

उम्रकैद की सजा पाने वाले हत्यारे का नाम नन्हू उर्फ घनश्याम पटेल है। उस पर आरोप था कि उसने साल 2004 में भाजपा का झंडा लगाने से नाराज होकर 30 वर्षीय रवींद्र पचौरी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। नन्हू कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थक था। उसने लोगों को BJP का झंडा नहीं लगाने की चेतावनी दी थी।

दैनिक भास्कर के मुताबिक मामला जबलपुर के पाटन विधानसभा क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव चंदवा में घनश्याम पटेल 2004 के लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए वोट माँग रहा था। कॉन्ग्रेस समर्थकों ने किसी को भी भाजपा का न तो झंडा लगाने और न ही वोट देने की चेतावनी जारी की थी। इसी गाँव का 30 वर्षीय रवींद्र पचौरी भाजपा समर्थक था। उसने घर पर बीजेपी का झंडा लगा रखा था। इसी बात से नाराज हो कर 28 अप्रैल 2004 को नन्हू रायफल ले कर रविंद्र के घर पहुँचा और उसे गोली मार दी।

रवींद्र के घर पहुँचकर नन्हू उर्फ़ घनश्याम पटेल ने सबसे पहले उसकी माँ को गालियाँ दी। फिर रवींद्र को गोली मारी। इसके बाद रायफल को मिट्टी में दबा दिया। मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने 30 अप्रैल 2004 को घनश्याम पटेल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने रायफल और कारतूस भी बरामद कर लिया। हत्या की धारा 302 के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

लेकिन 224 दिनों तक जेल में रहने के बाद घनश्याम पटेल को जमानत मिल गई थी। जमानत के लिए उसके परिजनों ने कुछ कागजात पेश किए। इन कागजातों में उसे मानसिक बीमार बताते हुए इलाज चलने का दावा किया गया था। कोर्ट को यह भी बताया गया कि हत्या के बाद भी उसे मानसिक बीमारी की दवाएँ दी जा रही है। जेल में भी उसका इलाज हो रहा है। बेहतर इलाज के लिए जमानत भी मिल गई।

इसके बाद घनश्याम पटेल की पत्नी जबलपुर हाईकोर्ट चली गई। पति को मानसिक तौर पर बीमार बताकर उसके खिलाफ ट्रायल रोकने की माँग की। हाई कोर्ट ने आरोपित की मानसिक हालत की जाँच करवाने का आदेश दिया। जाँच करने वाली जबलपुर मेडिकल कॉलेज की 5 डॉक्टरों की टीम को डॉ. आफताब अहमद खान लीड कर रहा था। हाई कोर्ट को दी रिपोर्ट में पटेल को सीजोफ्रेनिया नाम की बीमारी से पीड़ित बताया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी।

इसके बाद मृतक के परिजनों ने ट्रायल शुरू करने की गुहार लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत को बताया कि पटेल अपने नाम से लोन ले रहा है। गाड़ी फाइनेंस करवा रहा है। हथियार का लाइसेंस बनवा रहा। काॅन्ग्रेस का प्रचार कर रहा है। शादी समारोह में शिरकत कर रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने फिर से उसकी मानसिक स्थिति की जाँच के आदेश दिए। इस बार उसे जबलपुर में डाक्टरों की टीम ने 10 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखा और कोर्ट को बताया कि वह पागल नहीं है।

इस रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर 2020 में पाटन एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू हुआ। तीन साल चले ट्रायल के दौरान मामले के तीन विवेचकों और 15 गवाहों के बयान दर्ज हुए हुए। आखिरकार 27 जून 2023 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने आरोपित नन्हू उर्फ घनश्याम पटेल को रवींद्र की हत्या का दोषी पाया। 30 जून को अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 6 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

अब महाराष्ट्र में हाइवे पर कंटेनर ने कई गाड़ियों को ठोका, होटल में घुस गया; 12 की मौतः 3 दिन पहले बुलढाणा में बस हादसे में जलकर मर गए थे 26 यात्री

महाराष्ट्र के धुले जिले में मंगलवार (4 जुलाई 2023) को हुए भीषण सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 15 घायल बताए जा रहे हैं। तेज रफ्तार कंटेनर कई वाहनों को टक्कर मारता हुआ होटल में जा घुसा। इससे यह बड़ा हादसा हो गया है। हादसे के बाद कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। ऐसे में मरने वालों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना धुले जिले के पलासनेर गाँव की है। मुंबई-आगरा हाइवे से दोपहर करीब 12 बजे एक तेज रफ्तार कंटेनर गुजर रहा था। इसी दौरान वह अनियंत्रित होकर कई वाहनों को रौंदता हुआ होटल में घुस गया। बताया जा रहा है कि इस घटना में कुछ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। शुरुआत में मरने वालों की संख्या 7 बताई जा रही थी। हालाँकि इसके बाद अब यह संख्या 1 दर्जन के करीब पहुँच चुकी है। घायलों की गंभीर हालत के चलते मौत का आँकड़ा बढ़ सकता है।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को हॉस्पिटल पहुँचाया गया। वहाँ घायलों का इलाज चल रहा है। पुलिस प्रशासन भी राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। घटना किस वजह से हुई इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि रिपोर्ट्स में हादसे की वजह कंटेनर का ब्रेक फेल होना बताया जा रहा है। 

बता दें कि इससे पहले शनिवार (1 जुलाई, 2023) को महाराष्ट्र के बुलढाणा में भी भीषण सड़क हादसा हुआ था। इस हादसे में बस में सवार 3 बच्चों समेत 26 लोग जिंदा जलकर मौत के मुँह में समा गए थे। इस हादसे में पुलिस ने बस ड्राइवर दानिश शेख इस्माल को गिरफ्तार किया है। दानिश पर पुलिस को बरगलाने और ‘टायर फटने का झूठ’ बोलने का आरोप है। पुलिस ने उसके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 134, 184 और 279 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 

अब ऑस्ट्रेलिया में लगा ‘किल इंडिया’ वाला खालिस्तानी पोस्टर, अधिकारियों की तस्वीरें जारी कर बताया आतंकी निज्जर का हत्यारा: भारत ने कनाडा के राजदूत को समन किया

खालिस्तानियों की नापाक हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कनाडा के बाद अब ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में सिख कट्टरपंथियों ने भारत विरोधी पोस्टर्स लगाए हैं। ताज़ा मामला ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का है। ऑस्ट्रेलिया में भारत के हाई कमिश्नर और काउंसल-जनरल की तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गई हैं और उन्हें ‘शहीद निज्जर’ का हत्यारा बताया गया है। साथ ही शनिवार (8 जुलाई, 2023) को मेलबर्न में एक मार्च का आयोजन भी किया गया है, जिसमें खालिस्तानियों से हिस्सा लेने की अपील की गई है।

बताया गया है कि ये मार्च उस दिन दोपहर के 12:30 बजे कोबर्ग स्थित ब्रिजेज रिजर्व से शुरू होगा और मेलबर्न स्थित भारतीय एम्बेसी पर खत्म होगा। इस पोस्टर में लिखा है – ‘शहीद जत्थेदार हरदीप सिंह निज्जर’। साथ ही इसमें 2 फोन नंबर भी दिए गए हैं और ‘किल इंडिया’ लिखा हुआ है। फिर दोनों भारतीय विदेश अधिकारियों की तस्वीरें और डिटेल्स दिए गए हैं। बता दें कि विदेश में बैठ कर पंजाब में आतंकी गतिविधियाँ चलाने वाले हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई थी।

खालिस्तानी दावा कर रहे हैं कि भारतीय एजेंसियों ने उसे मरवाया है। उधर कनाडा में भी ‘खालिस्तान फ्रीडम रैली’ की साजिश रची गई है, लेकिन उससे पहले भारत ने नई दिल्ली में कनाडा के हाई कमिश्नर को समन किया है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय दूतावास में भी तोड़फोड़ की गई है और वहाँ भी भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। भारत इस मामले में अमेरिका से संपर्क में है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

भारत में कनाडा के राजदूत कैमरून मैके को समन किया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया में सामने आए पोस्टरों के बाद ये एक्शन लिया है। टोरंटो और वैंकोवर में खालिस्तानियों की रैली प्रस्तावित है। ‘खालिस्तानी टाइगर फ़ोर्स (KTF)’ का सरगना रहे निज्जर की हत्या के लिए ये लोग भारत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 23 मार्च को कनाडा स्थित भारतीय दूतावास में धुएँ वाले कंटेनर फेंके गए थे, इसे लेकर भी भारत आपत्ति दर्ज कराएगा।

उधर कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जॉय ने भारतीय अधिकारियों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने रैली को लेकर वायरल किए जा रहे पोस्टर्स को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि वियना समझौते के तहत कनाडा विदेशी अधिकारियों की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की राय पूरे कनाडा के विचार नहीं हैं। केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर पहले ही अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आग्रह कर चुके हैं कि वो खालिस्तानियों को जगह न दें।

‘मेरे जैसे कश्मीरियों के लिए 370 अब बीती बात’: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले बोले IAS शाह फैसल, कहा- बुहत पहले वापस ले चुका हूँ याचिका

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इसी महीने सुनवाई करने वाली है। उससे पहले राज्य के चर्चित आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने कहा है कि अनुच्छेद 370 अब उन जैसे कश्मीरियों के लिए पुरानी बात हो चुकी है। इसको लेकर अब वे पीछे नहीं देख सकते। उन्होंने यह भी बताया है कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने के लिए अपनी याचिका भी वे सुप्रीम कोर्ट से काफी पहले वापस ले चुके हैं।

शाह फैसल ने ट्वीट कर कहा है, “मेरे जैसे कश्मीरियों के लिए 370 अब अतीत की बात हो चुकी है। झेलम और गंगा हमेशा के लिए महान हिंद महासागर में मिल चुकी हैं। अब पीछे नहीं जाया जा सकता है। सिर्फ आगे ही बढ़ना है।”

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका वे बहुत पहले ही वापस ले चुके हैं। बता दें कि इससे पहले फरवरी 2021 में शाह फैसल ने स्वीकार किया था कि अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ उन्होंने जो कुछ भी प्रयास किए हैं, उसके लिए उन्हें काफी पछतावा है।

ज्ञात हो कि शाह फैसल ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सितंबर 2022 में अपनी याचिका वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया था।

11 जुलाई को होनी है सुनवाई

अनुच्छेद-370 को रद्द किए जाने के मोदी सरकार के फैसले के 4 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ इस संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता करेंगे। अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ 20 याचिकाएँ दर्ज की गई हैं। 11 जुलाई को सुनवाई के लिए इस मामले को लिस्ट किया गया है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ये निर्णय लेगी कि शाह फैसल द्वारा डाली गई याचिका को वापस ली जा सकती है या नहीं।


नौकरी छोड़ बने थे राजनेता, लेकिन फिर वापस लौटे

साल 2009 के यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने कथित असहिष्णुता के नाम पर जनवरी 2019 में सरकारी नौकरी छोड़ते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनाई थी। उनका उद्देश्य विधानसभा चुनाव लड़ना था, लेकिन राज्य में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया और चुनाव नहीं हुआ।

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद शाह फैसल को हिरासत में भी लिया गया था। राज्य के बदले राजनीतिक हालात के बाद उन्होंने अगस्त 2020 में राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। इसके बाद उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर नौकरी में वापसी के लिए आवेदन किया था। इसी साल अप्रैल में उनकी नौकरी बहाल की गई थी और फिर अगस्त में संस्कृति मंत्रालय में उप-सचिव के रूप में नियुक्ति की गई। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के लोलाब इलाके में जन्मे फैसल श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में मेडिकल की पढ़ाई की है और गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। जब फैसल 19 साल के थे तब साल 2002 में उनके शिक्षक पिता गुलाम रसूल शाह की आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

बेल्जियम और स्विट्जरलैंड तक फैली फ्रांस की आग: चौथे सबसे बड़े स्विस शहर में पेट्रोल बम से घरों-दुकानों पर हमला, ब्रसेल्स में 64 दंगाई गिरफ्तार

यूरोप में फ्रांस के बाद अब स्विट्जरलैंड में भी दंगे शुरू हो गए हैं। स्विट्जरलैंड के लॉज़ेन शहर में कई दुकानों की खिड़कियों को तोड़ डाला गया, उनके दरवाजों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहाँ की पुलिस का कहना है कि फ्रांस में हुए दंगों के कारण ये शुरू हुआ है। कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसमें से अधिकतर किशोर हैं। लॉज़ेन के अलावा फ़िलहाल फ्रांस के अन्य शहरों में दंगों की खबर नहीं है। वहीं बेल्जियम के ब्रुसेल्स में भी दंगे हुए हैं।

स्विट्जरलैंड और बेल्जियम में फ्रांस के आबाद दंगे फैले हैं। फ्रांस में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे एक नाबालिग को पुलिस द्वारा गोली मार दी गई, जिसकी मौत के बाद हिंसा शुरू हुई है। लॉज़ेन में इस हत्याकांड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। मोरक्को-अल्जीरियन मूल के नहेल की मौत पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी कहा है कि ये माफ़ी के लायक नहीं है। ‘मोलोटोव कॉकटेल’ (बोतल वाला बम) का इस्तेमाल स्विट्जरलैंड के दंगों में किया गया है।

इसे जब फेंका जाता है तो हल्का विस्फोट होता है। कई दुकानों और घरों में ईंट-पत्थर भी फेंके गए। पुलिस ने बताया है कि 100 से भी ज्यादा युवकों ने इकट्ठे होकर इस घटना को अंजाम दिया। वहीं बेल्जियम के ब्रसेल्स में पुलिस ने 64 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। दंगाइयों ने ‘जस्टिस फॉर नहेल’ का नारा भी लगाया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का जर्मनी दौरा प्रस्तावित था, जिसे उन्होंने हिंसा के कारण रद्द कर दिया है। पेरिस से लेकर आसपास के अन्य इलाकों में भी 45,000 अतिरिक्त पुलिस बलों को लगाया गया है।

जिस अधिकारी ने नहेल को गोली मारी थी, उसे अब तक पुलिस रिमांड में रखा गया है। फ्रांस में शुक्रवार (30 जून, 2023) को 1300 लोग गिरफ्तार किए गए थे, जबकि उसके अगले दिन ये आँकड़ा 719 रहा। इसके अगले दिन 49 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के सांसदों और मेयरों से मुलाकात करेंगे। वहीं स्विट्जरलैंड में भीड़ ने पेट्रोल बम से हमला किया। लॉज़ेन में गिरफ्तार दंगाइयों में लड़कियाँ भी हैं।

नाबालिग हिंदू छात्रा और मुस्लिम महिला टीचर की कहानी में नया मोड़, वीडियो जारी कर कहा- हम लेस्बियन, किसी लड़के से शादी नहीं कर सकते

राजस्थान के बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ से 30 जून 2023 को एक नाबालिग हिंदू छात्रा अचानक गायब हो गई। स्कूल की एक मुस्लिम महिला टीचर पर उसके अपहरण का आरोप लगा। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव फैल गया है। अब छात्रा और टीचर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दोनों ने खुद को एक-दूसरे के प्यार में बताया है। लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा है कि वे एक-दूसरे के बिना जिंदा नहीं रह सकतीं।

जारी किए गए वीडियो में छात्रा और टीचर निदा वहलीम के चेहरे पर मास्क है। वीडियो की शुरुआत में छात्रा ने कहा कि उसे अपने लापता होने के बाद दंगों की जानकारी मिली है। अगर लोगों को लग रहा है कि टीचर ने उसका अपहरण किया है तो ये गलत है। हम अपनी मर्जी से एक साथ आए हैं। इसके बाद निदा वहलीम अल्लाह की कसम खाते हुए कह रही है कि वह लड़की को बहला-फुसला कर नहीं लाई है।

दोनों ने वीडियो कहाँ से बनाया इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है। पीछे से किसी बच्चे के रोने की आवाज भी सुनाई दे रही है। वीडियो में दोनों ने आगे अपने-अपने परिजनों से उन्हें परेशान करने के लिए माफ़ी माँगी है। खुद को लेस्बियन बताते हुए कहा है कि वे किसी लड़के से शादी नहीं कर सकतीं। एक-दूसरे से बहुत प्यार करती हैं। लोगों से दोनों ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ देने की अपील की है।

वीडियो में टीचर निदा वहलीम ने कहा है कि वे मर जाएँगी पर छात्रा से अलग नहीं रह पाएँगी। खुद को पूरी तरह से सुरक्षित और एक-दूसरे के साथ खुश बताया है। वीडियो के अंत में छात्रा ने अपने परिजनों से अपील की है कि वो टीचर निदा वहलीम पर कोई केस न करें क्योंकि ऐसा उसने अपनी मर्जी से किया है। हालाँकि बीकानेर की SP तेजस्विनी गौतम ने दैनिक भास्कर को छात्रा के नाबालिग होने और FIR पर जाँच जारी होने की जानकारी दी है। इस घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। विरोध में बाजार बंद रहा और मामले को लव जिहाद बता कर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

गौरतलब है कि 30 जून को निदा वहलीम नाम की एक 25 वर्षीया मुस्लिम टीचर पर 17 वर्षीया हिन्दू छात्रा को अपने साथ ले कर भागने का आरोप लगा था। छात्रा के परिजनों ने इसी केस में निदा के 2 भाइयों जुनैद और नावेद को भी नामजद किया था। निदा वहलीम की पिछले 2 माह से नाबालिग छात्रा से काफी करीबी होने की बात सामने आई थी।

महाराष्ट्र में ISIS के स्लीपर सेल का पर्दाफाश, भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की ट्रेनिंगः NIA की छापेमारी, 4 आतंकी गिरफ्तार

महाराष्ट्र में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्लीपर सेल का पर्दाफाश राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने किया है। राज्य के अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की ट्रेनिंग देने की बात भी सामने आई है।

NIA ने सोमवार (3 जुलाई 2023) को महाराष्ट्र के 5 जगहों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम ज़ुबैर नूर, ज़ुल्फ़िकार अली, शरजील शेख और मोहम्मद शेख उर्फ़ अबू नुसैबा हैं। इनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 जून को NIA ने ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल को लेकर केस दर्ज किया था। इसी सिलसिले में सोमवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने ख़ुफ़िया सूचना के आधार पर मुंबई, ठाणे और पुणे के कुल 5 अलग-अलग जगहों पर दबिश दी। इस छापेमारी में दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा से ताबिश नासिर सिद्दीकी, पुणे के कोंढवा इलाके से जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा के अलावा ठाणे के पडघा से जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और शरजील शेख को गिरफ्तार किया गया।

जाँच दल द्वारा इन सभी के घरों की तलाशी भी ली गई। तलाशी के दौरान ISIS से संबंधित भड़काऊ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स मिले हैं। NIA की टीम इन दस्तावेजों को जब्त कर जाँच कर रही है। मीडिया को दिए गए अपने बयान में NIA ने बताया है कि शुरुआती पड़ताल में जब्त दस्तावेज भारत विरोधी और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से संबंधित पाए गए हैं।

जाँच एजेंसी ने इन सभी की हरकतों को भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए खतरा बताया है। इन सभी पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप है। आरोपित स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। युवाओं को कट्टरता का पाठ पढ़ाने के अलावा विस्फोटक उपकरणों और हथियारों को बनाने की ट्रेनिंग देने का भी आरोप है। बरामद हुए दस्तावेजों में इन चारों द्वारा आईईडी बनाने के साथ छोटे हथियारों और पिस्तौल बनाने के लिए ‘डू इट योरसेल्फ (डीआईवाई)’ किट साझा करने का खुलासा हुआ है।

गिरफ्तार हुए चारों आरोपित विदेश में बैठे किसी आका से निर्देश ले रहे थे। वहीं से मिले आदेश पर इन सभी ने भड़काऊ मीडिया सामग्री तैयार कर ‘वॉयस ऑफ हिंद’ नाम की पत्रिका में प्रकाशित करवाया था।

इधर पूरा परिवार देख रहा था ताजमहल, उधर गर्मी से कार में तड़प-तड़पकर मर गया कुत्ता: हैंडब्रेक में जंजीर फँसने से दम घुटा, FIR दर्ज

हरियाणा नंबर की कार से एक परिवार ताजमहल देखने उत्तर प्रदेश के आगरा आया। साथ में विदेशी नस्ल का पालतू कुत्ता भी था। पार्किंग में कार खड़ी कर परिवार ताजमहल का दीदार करने चला गया। कुत्ते को कार में ही छोड़ दिया। इधर परिवार ताजमहल देखता रहा और उधर गर्मी से बेचैन कुत्ते ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

रिपोर्टों के अनुसार हैंडब्रेक में जंजीर फँसने से कुत्ते की दम घुटकर मौत हो गई। कुत्ते को तड़पते देख कुछ लोगों ने बचाने की कोशिश भी की। लेकिन गेट लॉक होने की वजह से वे कामयाब नहीं हो पाए। जब तक परिवार ताजमहल देखकर लौटा कुत्ते की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने कार मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कुत्ते के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना रविवार (2 जुलाई 2023) की है।

मामला आगरा जिले के थाना ताजगंज इलाके का है। ताजमहल के पश्चिमी गेट के मैनेजर गज्जू प्रधान ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया कि 2 जुलाई की सुबह लगभग 10:30 पर कुछ लोग कार से ताजमहल घूमने आए थे। उन्होंने कार को पार्किंग में खड़ी कर अपने पालतू कुत्ते को उसी में बंद कर दिया। कुछ समय बाद पार्किंग में तैनात कर्मचारियों ने कुत्ते को कार में मरा पाया। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

इस शिकायत पर पुलिस ने कार मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह केस पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 (1)(1) के तहत दर्ज हुआ है। रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर यह गाड़ी हरियाणा में हिसार के किसी अजय कुमार के नाम पर दर्ज है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में कई लोग कार को घेरे खड़े हुए हैं। अंदर कुत्ता भी पिछली सीट के आगे मृत पड़ा है। कुत्ते की नस्ल लैब्राडोर बताई जा रही है।

मृत कुत्ते के पास जमा लोगों ने बताया कि न सिर्फ उन्होंने, बल्कि गाइड ने भी कुत्ते को कार में न छोड़ने की सलाह परिवार को दी थी। लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। आगरा पुलिस के DCP सिटी सूरज राय के मुताबिक केस दर्ज कर जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।