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सैन फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्य दूतावास में खालिस्तानियों ने लगाई आग, आतंकी हरदीप निज्जर की मौत का बदला बताया: 5 महीने के भीतर दूसरा हमला

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्य दूतावास पर खालिस्तान समर्थकों ने हमला किया। 2 जुलाई 2023 को किए गए इस हमले के दौरान वाणिज्य दूतावास में आग लगा दी गई। इस घटना में दूतावास को ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचा है। अमेरिका ने इसकी कड़ी निंदा की है। इससे पहले मार्च में भी सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास (Indian consulate in San Francisco) पर खालिस्तान समर्थकों ने हमला किया था।

एक स्थानीय चैनल की रिपोर्ट के अनुसार रविवार को दूतावास पर हमला और आगजनी की गई। सैन फ्रांसिस्को के दमकल विभाग ने तुरंत इस पर काबू पा लिया। हमले में कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ है। नुकसान ‘सीमित’ है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने मंगलवार (4 जुलाई) को ट्वीट कर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “अमेरिका सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले और आगजनी के प्रयास की कड़ी निंदा करता है। अमेरिका में राजनयिक संस्थानों या विदेशी राजनयिकों के खिलाफ हिंसा या हमला एक अपराध है।”

मिल रही जानकारी के मुताबिक इस घटना की जाँच FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) कर रही है। हमलावरों ने इसे कनाडा में मारे गए आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का बदला बताया है। यह हमला ऐसे वक्त में सामने आया है जब सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सरगना आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 8 जुलाई को भारतीय दूतावासों को घेरने का एलान किया है।

भारतीय वाणिज्य दूतावास में आगजनी की घटना का वीडियो भी वायरल है। वीडियो में बंद पड़े गेट के अंदर अचानक ही एक हिस्से में आग लग जाती है जो कुछ ही समय में अन्य हिस्सों में फ़ैल जाती है। माना जा रहा है कि इसकी रिकार्डिंग खालिस्तान समर्थकों ने ही की है। उन्होंने वीडियो के ऊपर हैशटैग के तौर पर #LongLiveKhalistan लिखा है। बाद में घटना की जिम्मेदारी खालिस्तानियों ने इसे कनाडा में जून 2023 में मारे गए आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का बदला बताया।

बताते चलें कि सैन फ्रांसिस्को के इसी दूतावास को पाँच महीने पहले खालिस्तानियों ने अमृतपाल की रिहाई को लेकर निशाना बनाया था। तब 19 मार्च को दूतावास के बाहर कई खालिस्तान समर्थक जमा हुए थे। दूतावास में तोड़फोड़ की थी। तिरंगा उतार कर खालिस्तानी झंडा लगा दिया था।

दरअसल हरदीप सिंह निज्जर की मौत के बाद से गुरपतवंत सिंह पन्नू अंडरग्राउंड चल रहा है। भारतीय जाँच एजेंसियाँ उसकी तलाश कर रहीं हैं। 30 जून को पन्नू ने किसी अज्ञात जगह से वीडियो बना कर 8 जुलाई को भारतीय दूतावासों पर हमले का एलान किया था। इस हरकत को उसने ‘किल भारत’ का नाम दिया था। इस दौरान उसने 21-21 की तादाद में खालिस्तान समर्थकों के जत्थे द्वारा दूतावासों पर हमले का एलान किया था।

‘अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति को नीचा दिखाने के लिए भारत पर की टिप्पणी’: अमेरिकी गायिका ने बराक ओबामा को कहा अहंकारी, बोलीं – PM मोदी के लिए मन में सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान उनके पैर छूने वाले सिंगर और एक्ट्रेस मैरी मिलबेन ने कहा है कि वह पीएम मोदी का बहुत सम्मान करती हैं। भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की टिप्पणी पर उन्होंने कहा है कि ओबामा ने बायडेन को नीचा दिखाने के लिए वह बयान दिया था। वहीं, मिलबेन ने राहुल गाँधी को अपने देश के बारे में निगेटिव बातें करने वाला व्यक्ति करार दिया है।

मैरी मिलबेन ने ‘द न्यू इंडियन’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, “प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान और प्रशंसा है। इसलिए उनकी राजकीय यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए सम्मान की बात है। मैं अब भारत को एक परिवार की तरह महसूस करती हूँ। यह मेरे लिए एक बड़े परिवार की तरह है। अमेरिका-भारत संबंधों और भारत में पीएम मोदी के काम का जश्न मनाने का अवसर मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी।”

भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अमेरिका की पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान को लेकर मिलबेन ने कहा है, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति जो बायडेन और प्रधानमंत्री मोदी दोनों के लिए ही वह समय बेहद महत्वपूर्ण था। ऐसे समय में ओबामा ने अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन को नीचा दिखाने के लिए अहंकार से भरी टिप्पणी की थी। ईमानदारी से कहूँ तो मुझे उनके बयान में काफी अहंकारी लगा। धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर दुनियाभर में जिस तरह की बातचीत हो रही है उसे मैं समझती हूँ। जिस प्रकार अमेरिका और भारत आस्था, मजबूत परिवार व स्वतंत्रता को लेकर एक तरह के।= विचार रखते हैं। ठीक उसी प्रकार धार्मिक स्वतंत्रता भी उसका एक अभिन्न अंग है।”

राहुल गाँधी की अमेरिकी यात्रा और उस दौरान उनके बयानों को लेकर मैरी मिलबेन ने कहा है, “मैंने उनके भाषणों और विचारों को समझा है। लेकिन अगर ईमानदारी से हूँ तो, मैं व्यक्तिगत रूप से राहुल गाँधी को नहीं जानती। इसलिए मैं उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। हालाँकि, कोई भी देश लंबे समय तक ऐसे नेता का समर्थन नहीं कर सकता जो लगातार अपने ही देश के बारे में नेगेटिव बातें करता हो। एक सच्चा नेता अपने देश की तारीफ करता है और अपने देश को महत्व देता है। यही कारण है कि भारत में प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की जाती है और दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है।”

बता दें कि मैरी मिलबेन अफ्रीकी-अमेरिकी मूल की सिंगर और एक्ट्रेस हैं। पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उन्होंने राष्ट्रगान गाकर करोड़ों देशवासियों का दिल जीत लिया था। इससे पहले भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर भी उन्हें सांस्कृतिक राजदूत के रूप में आमंत्रित किया गया था। यही नहीं, मिलबेन ‘ओम जय जगदीश हरे’ गाकर भी भारतवासियों के दिल में जगह बना चुकी हैं।

शेख सिराजुद्दीन ने कराई FIR, तमिलनाडु पुलिस ने मीडिया संस्थान ‘द कम्यून’ और BJP नेता को भेजा समन: भक्तों के साथ दुर्व्यवहार पर उठाई थी आवाज

तमिलनाडु की चिदंबरम टाउन पुलिस ने बीजेपी के सचिव एसजी सूर्या को समन जारी कर पेश होने के लिए कहा है। दरअसल, आरोप है कि प्राचीन नटराज मंदिर में आनी थिरुमंजनम उत्सव के दौरान हुई घटनाओं को लेकर एसजी सूर्या ने सोशल मीडिया पोस्ट पर अपमानजनक पोस्ट की थी। इसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। इस मामले में पुलिस ने न्यूज पोर्टल ‘द कम्यून’ से जुड़े कौशिक सुब्रमण्यन को भी 4 जुलाई को पेश होने के लिए कहा है।

पुलिस ने एक राजस्व अधिकारी की शिकायत के आधार पर सूर्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। राजस्व अधिकारी का आरोप है कि आनी थिरुमंजनम उत्सव के दौरान सूर्या ने स्थानीय अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट की थी। 

वहीं, न्यूज पोर्टल ‘द कम्यून ने 28 जून को एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। इस रिपोर्ट में एचआर एंड सीई अधिकारी व पुलिस पर दीक्षितों को परेशान करने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अधिकारियों द्वारा दीक्षितों को धक्का दिया गया और उनके धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया।

दरअसल 24-28 जून तक चले चार दिवसीय आनी थिरुमंजनम उत्सव के दौरान कुड्डालोर जिले के चिदंबरम मंदिर में कनगासाबाई मंडपम में भक्तों को प्रवेश करने से मना कर दिया था। मंदिर प्रशासन का कहना था कि इस उत्सव के दौरान बहुत सारे लोग मंदिर में आते हैं। ऐसे में भीड़ से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन ने एक नोटिस भी लगाया था। लेकिन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग ने यह नोटिस हटा दिया था।

इसके बाद दीक्षितरों और अधिकारियों के बीच बहस हुई। बहस के बाद एचआर एंड सीई अधिकारी ने दीक्षितरों पर मारपीट करने और काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने कहा था, “पोधु दीक्षितर समिति के सचिव शिवराम दीक्षितर व कुछ पुजारियों समेत 10 लोगों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

शेख सिराजुद्दीन ने दर्ज कराई है FIR

ऑपइंडिया को पता चला है कि ‘द कम्यून’ के खिलाफ शेख सिराजुद्दीन नामक एक स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारी ने 29 जून को FIR दर्ज कराई थी। सिराजुद्दीन ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने 2 अलग-अलग बस स्टैंड पर लोगों को एचआर एंड सीई अधिकारियों द्वारा दीक्षितरों के साथ दुर्व्यवहार की खबर पर चर्चा करते हुए सुना था। इसलिए उन्हें लगता है कि ‘द कम्यून’ की रिपोर्ट्स से चिदंबरम क्षेत्र में लॉ एंड आर्डर की समस्या पैदा हो सकती है।

सिराजुद्दीन ने यह भी कहा है कि ‘द कम्यून’ की रिपोर्ट का उद्देश्य कानून-व्यवस्था के मुद्दों को भड़काना और सरकार के खिलाफ अफवाहें पैदा करना था। बता दें कि ‘द कम्यून’ की रिपोर्ट दीक्षितरों के समर्थन व राज्य सरकार के विरोध में थी।

चिदंबरम मंदिर का है ताजा मामला

27 जून 2023 को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के अधिकारी वेल्विज़ी दो महिला पुलिस कर्मियों के साथ दीक्षितर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों के विरोध के बीच कनागासाबाई में प्रवेश कर गए थे। इससे पहले हुए विवाद में दावा किया गया था कि चिदंबरम नटराजार मंदिर के पोथु दीक्षितरों ने आनी थिरुमंजनम उत्सव के दौरान भक्तों को कनागासाबाई से प्रार्थना करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

पोथु दीक्षितर श्री सबनयागर मंदिर के वंशानुगत पुजारी और संरक्षक हैं, उन्हें भगवान नटराज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। दीक्षितर की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि उन्हें धक्का देकर गिराया और उनके कपड़े फाड़ दिए गए।

गौरतलब है कि दीक्षितर सदियों से मंदिर का प्रबंधन करते आ रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने अव्यवस्था से बचने के लिए त्योहारों के दौरान ऐतिहासिक रूप से दर्शन का समय और कार्यक्रमों में बदलाव किया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है कि सरकार मंदिर प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने मंदिर के आसपास एचआर एंड सीई के अधिकारियों का उपयोग कर विवाद पैदा करने की कोशिश की।

अनुच्छेद-370 पर सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ: मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ 20 याचिकाएँ, CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में बेंच गठित

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले के 4 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ इस संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता करेंगे। अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ 20 याचिकाएँ दर्ज की गई हैं। जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत भी इस पीठ का हिस्सा होंगे।

11 जुलाई को सुनवाई के लिए इस मामले को लिस्ट किया गया है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ये निर्णय लेगी कि जम्मू कश्मीर के IAS अधिकारी शाह फैसल द्वारा डाली गई याचिका को वापस लिया जा सकता है या नहीं। अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया था और उसके एक हिस्से लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। इस साल फरवरी में ही इस मामले को लिस्ट किए जाने को लेकर CJI चंद्रचूड़ ने हामी भरी थी।

ये मामला पिछले 2 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेंडिंग पड़ा हुआ है। 5 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अनुच्छेद-370 को निरस्त किया गया था। इस याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार का फैसला असंवैधानिक था और इससे संघीय ढाँचे में भी छेड़छाड़ की गई। दिसंबर 2018 में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि राज्य की जनता से सलाह-मशविरा किए बिना ही ये फैसला लिया गया।

केंद्र सरकार कह चुकी है कि ये फैसला संविधान के हिसाब से ही लिया गया। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने दिसंबर 2019 में ही शुरू कर दी थी। अप्रैल 2022 में जब NV रमना सीजेआई हुआ करते थे, तब उनके सामने इस मामले को लिस्ट किए जाने की माँग की गई थी। लेकिन, उन्होंने कुछ सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। रमना और सुभाष रेड्डी रिटायर हो चुके हैं, जो इस मामले पर सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल थे।

ओवैसी की पार्टी के नेता मोहम्मद आजम ने बिजली कर्मचारी को पीटा, साथियों से भी पिटवाया: हैदराबाद का वीडियो, बिजली चोरी का गढ़ है इलाका

सोशल मीडिया पर सोमवार (3 जुलाई, 2023) से हैदराबाद का बता कर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोगों को एक व्यक्ति को पीटते देखा जा सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक, प्रमुख हमलावर का नाम मोहम्मद आज़म है जो ‘ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)’ का नेता है। बाकी हमलावर मोहम्मद आज़म के साथी हैं जो बिजली चोरी की जाँच करने गए कर्मचारी को पीटते दिखाई दे रहे हैं।

50 सेकेण्ड के इस वीडियो को ‘@prashantchiguru’ हैंडल वाले यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में सफेद और काले रंग की चेक शर्ट पहने AIMIM नेता दिन-दहाड़े बीच सड़क पर बिजली विभाग के एक कर्मचारी की पिटाई की शुरुआत करता है। थोड़े ही समय बाद उसके साथी भी पीड़ित को पीटना शुरू कर देते हैं। आस-पास से गुजर रहे लोगों में से किसी ने भी बिजली विभाग के कर्मचारी को बचाने की हिम्मत नहीं की। हालाँकि, मारपीट देख कर लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी।

वीडियो शेयर करने वाले ट्विटर यूजर ‘@prashantchiguru’ ने यह भी बताया कि कैसे पुराने हैदराबाद में 50% बिजली खपत का कोई हिसाब ही नहीं है। इस चोरी के चलते बिजली विभाग को हर दिन 70 लाख रुपए का नुकसान होने की भी जानकारी दी गई है। यूजर ने इसे ओवैसी के संरक्षण में हो रही गुंडागर्दी बताया है। घटनास्थल के तौर पर कारवाँ विधानसभा क्षेत्र की मेहबूब कॉलोनी बताया गया है जहाँ पीड़ित बिजली की चोरी रोकने के लिए गया था। हमलावरों में AIMIM नेता के अन्य पारिवारिक सदस्यों के भी शामिल होने का दावा किया गया है।

वीडियो शेयर करने वाले व्यक्ति ने हैदराबाद पुलिस और तेलंगाना के DGP से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग भी की है। यूजर ने यह भी दावा किया है कि जिस प्रकार से भारतीय लोग पाकिस्तान की यात्रा करने से डरते हैं वैसे ही सरकारी अधिकारी और कर्मचारी पुराने हैदराबाद में जाने से कतराते हैं।

फोटो सोर्स- तेलंगाना टुडे

बताते चलें कि पुराने हैदराबाद में बिजली चोरी जैसी शिकायतें बड़े स्तर पर आती हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में तेलंगाना स्टेट सदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (TSSPDCL) के अंतर्गत आने क्षेत्रों में 64,245 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या साल 2021 में दर्ज केसों से 3000 ज्यादा थी। ऊर्जा विभाग के अधिकारी भी इसे एक बड़े समस्या बताते हुए कहते हैं कि बिजली कंपनियों को इस चोरी के चलते हर साल राजस्व का लगभग 10 प्रतिशत नुकसान हो रहा है।

कौड़ियों के भाव लिखा ली करोड़ों की जमीन, लालू-राबड़ी ही नहीं बेटे-बेटियों को भी पहुँचा फायदा: ‘लैंड फॉर जॉब’ रेलवे घोटाले में CBI की चार्जशीट, देखें कारनामे

लैंड फॉर जॉब (Land For Job) घोटाला मामले में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है। दरअसल, सीबीआई (CBI) ने लालू, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और उनकी कंपनियों समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की नौकरी के बदले जमीन अपने नाम करवाने के मामले में सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक नई चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई ने कोर्ट में कहा है कि आरोपितों ने घोटाला एक अलग तरीके से किया गया था। इसलिए पुरानी चार्जशीट होने के बाद भी एक नई चार्जशीट दाखिल की गई है। 

सीबीआई ने अपनी इस चार्जशीट में लालू यादव के साथ ही उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व उनकी कंपनियों तथा अन्य लोगों को आरोपित बनाया है। 

लैंड पर जॉब घोटाला (Land for job scam) क्या है और इसे कैसे अंजाम दिया गया, इसके बारे में हम विस्तार से बताएँगे। इस घोटाले में किन-किन लोगों को क्या-क्या फायदा पहुँचाया गया और जाँच एजेंसियों ने लालू और उनके परिवार पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं, इसकी हम चर्चा करेंगे।

बात कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-1 के शासनकाल सन 2004-2009 के बीच की है। बिहार में 15 साल तक लगातार सत्ता के सिरमौर रहे लालू प्रसाद यादव उस समय केंद्रीय रेल मंत्री थे। सन 2008 में रेलवे में नौकरी देने के बदले अभ्यर्थियों से रिश्वत के रूप में जमीन ली गई। ये जमीन पटना सहित अन्य जगहों पर ली गई।

अभ्यर्थियों को रेलवे के ग्रुप-डी में नौकरी देने के लिए रेलवे की तरह से कोई नोटिफिकेशन नहीं निकाला गया। जिन लोगों ने जमीनें दीं, उन्हें तीन दिन के अंदर रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नौकरी दे दी गई। जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनमें से कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाण-पत्र का भी उपयोग किया।

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि लालू यादव को पटना को 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन दी गई। इन जमीनों का सौदा नकद में और बेहद कम कीमत पर किया गया। लालू यादव और उनके परिजनों को 7 उम्मीदवारों ने नौकरी के बदले में जमीनें दी थीं। इनमें से 5 जमीनों की बिक्री हुई थी, जबकि दो गिफ्ट के तौर पर दिए गए थे।

क्या हुई थी डील?

केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में पाया कि इसमें सिर्फ लालू यादव ही नहीं, उनके पर्सनल असिस्टेंट रहे भोला यादव, उनकी पत्नी राबड़ी, बेटा तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती, हेमा यादव सहित कुछ उम्मीदवारों भी शामिल हैं। इस मामले में सीबीआई ने मई 2022 में भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज किया था।

मामला-1: जाँच में सीबीआई ने पाया कि फरवरी 2007 में पटना के रहने वाले हजारी राय ने 9527 वर्ग फीट अपनी जमीन एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी। यह जमीन 10.83 लाख रुपए में बेची गई थी। बाद में हजारी राय के दो भतीजों दिलचंद कुमार और प्रेमचंद कुमार को रेलवे में नौकरी मिली।

सीबीआई की जाँच में यह बात भी सामने आई कि साल 2014 में एके इन्फोसिस्टम के सारे अधिकार और उसकी सारी संपत्तियाँ राबड़ी देवी और मीसा भारती के नाम पर चली गईं। साल 2014 में राबड़ी देवी ने इस कंपनी के ज्यादातर शेयर खरीद लिए और इस कंपनी की डायरेक्टर बन गईं।

मामला-2: नवंबर 2007 में पटना की रहने वाली किरण देवी नाम की महिला ने अपनी 80,905 वर्ग फीट की जमीन लालू यादव की बेटी मीसा भारती के नाम पर कर दी। यह सौदा सिर्फ 3.70 लाख रुपए में हुआ था। बाद में किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को मुंबई में भर्ती किया गया।

मामला-3: इसी तरह 6 फरवरी 2008 को पटना के रहने वाले किशुन देव राय ने अपनी 3375 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बेच दी। यह जमीन 3.75 लाख रुपए में बेची गई थी। इसके बदले में किशुन राय के परिवार के तीन लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई।

मामला-4: इसी तरह फरवरी 2008 में पटना के महुआबाग में रहने वाले संजय राय ने 3,375 वर्ग फीट की अपनी प्लॉट को राबड़ी देवी को बेच दिया। यह प्लॉट 3.75 लाख रुपए में बेची गई। इसके बदले में संजय राय और उनके परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी दी गई थी।

मामला-5: इसी तरह मार्च 2008 में ब्रिज नंदन राय ने 3375 वर्ग फीट की अपनी जमीन गोपालगंज के रहने वाले ह्रदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपए में बेच दी। बाद में ह्रदयानंद चौधरी ने यह जमीन लालू यादव की बेटी हेमा को तोहफे में दे दी। ह्रदयानंद चौधरी को साल 2005 में हाजीपुर में रेलवे में भर्ती किया गया था।

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि ह्रदयानंद चौधरी लालू यादव का रिश्तेदार नहीं था, इसके बावजूद उसने जमीन लालू यादव की बेटी को गिफ्ट किया था। जिस वक्त यह जमीन गिफ्ट की गई थी, उस वक्त उसकी कीमत लगभग 62 लाख रुपए थी।

मामला-6: मार्च 2008 में विशुन देव राय ने अपनी 3375 वर्ग फीट की जमीन सिवान के रहने वाले ललन चौधरी को बेची। उसी साल ललन के पोते पिंटू कुमार को पश्चिमी रेलवे में भर्ती कराया गया। इसके बाद फरवरी 2014 में ललन चौधरी ने यह जमीन लालू यादव की एक और बेटी हेमा यादव को गिफ्ट कर दी।

मामला-7: इसी तरह मई 2015 में पटना के रहने वाले लाल बाबू राय ने अपनी 1360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को 13 लाख रुपए में बेच दी। सीबीआई की जाँच में पता चला कि साल 2006 में लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को रेलवे में नौकरी दी गई थी।

करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव लिए

CBI जाँच में पाया कि लालू यादव और उनके परिवार ने बिहार में 1.05 लाख वर्ग फीट की जमीन सिर्फ 26 लाख रुपए में हासिल की थी। वहीं, उस समय के सर्किल रेट के अनुसार उन जमीनों की कुल कीमत 4.40 करोड़ रुपए के करीब थी। सीबीआई ने यह पाया कि जमीन की खरीद के मामले में अधिकतर जमीनों के लिए नकद में पैसे दिए गए थे।

सीबीआई ने यह पाया कि 7 लोगों से करोड़ों रुपए की जमीन लेकर 12 लोगों को नौकरी दी गई थी। इन जमीनों को या तो सीधे लालू परिवार को बेच दिया गया, गिफ्ट कर दिया गया या फिर अन्य लोगों के जरिए रूट करके अंतत: लालू परिवार को दे दी गई।

ED की कार्रवाई

ED ने शुक्रवार (10 मार्च 2023) को लालू यादव के करीबियों के दिल्ली, मुंबई, नोएडा, राँची, गाजियाबाद और पटना में 24 जगहों पर रेड डाली थी। जिन जगहों पर रेड डाली गई, उनमें दिल्ली स्थित तेजस्वी यादव के घर के साथ-साथ लालू यादव की तीन बेटियों- हेमा, रागिनी और चंदा के घर भी शामिल हैं। ED ने लालू यादव के समधी जितेंद्र यादव के गाजियाबाद स्थित आवास पर भी छापा मारा।

लालू के समधी जितेंद्र यादव के आवास पर ED की कार्रवाई 16 घंटे तक चली। एजेंसी 3 बड़े बॉक्से में कागजात भरकर भी अपने साथ ले गई है। जितेंद्र यादव समाजवादी पार्टी (SP) के MLC रह चुके हैं और गाजियाबाद के RDC राजनगर इलाके में रहते हैं।

वहीं, लालू के करीबी और RJD के पूर्व विधायक अबू दोजाना के घर पर छापेमारी के दौरान ED ने सेप्टिक टैंक की खुदाई भी की। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने ED की कार्रवाई का वीडियो शेयर कर ट्वीट कर लिखा है, “सेप्टिक टैंक की खुदाई से गैस मिली। चाय बनाने के लिए मोदी साहब के लिए भर-भर ट्रक लेके गए हैं जमाई।”

तेजस्वी का 150 करोड़ का मकान और 600 करोड़ रुपए की संपत्ति की जानकारी

प्रवर्तन निदेशालय ने 10 मार्च 2023 को रेड मारा, जिसमें दिल्ली के पॉश इलाके न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में तेजस्वी यादव के 150 करोड़ की कीमत के बंगले जानकारी सामने आई है। कागजों में चार मंजिल वाले इस बंगले की बिक्री की कीमत सिर्फ 4 लाख रुपए दर्ज की गई है।

इतना ही नहीं, रेड के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने लालू यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बहन रागिनी यादव के घर पर रेड के दौरान करोड़ों रुपए कीमत के आभूषण और नकदी बरामद किए। रागिनी यादव के यहाँ से 54 लाख रुपए की नकदी और करोड़ों रुपए का 1.5 किलोग्राम आभूषण बरामद किए गए।

ED ने कहा, “छापे में लगभग 600 करोड़ रुपए की आपराधिक आय वाली संपत्ति का पता चला है। इसमें 350 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति और 250 करोड़ रुपए के लेनदेन के रूप में है।” एजेंसी का कहना है कि इस पैसे का कुछ हिस्सा न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी का बंगला खरीदने में चला गया, जो मुंबई की कुछ आभूषण कारोबारी संस्थाओं के माध्यम से रूट किया गया।

ED का यह भी कहना है कि लालू यादव के परिवार ने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के गरीब आवेदकों से सिर्फ 7.5 लाख रुपए में चार पार्सल जमीन लिया गया था। इसे राबड़ी देवी द्वारा 3.5 करोड़ रुपए के भारी लाभ के साथ आरजेडी के पूर्व विधायक सैयद अबू दोजाना को बेचा गया था।

पिछले साल लालू सहित कई नेताओं के यहाँ छापेमारी

CBI ने मई 2022 में जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव, भोला यादव समेत लालू के करीबियों और परिजनों के दर्जन भर से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद CBI ने 24 अगस्त 2022 को RJD नेताओं के यहाँ दोबारा छापेमारी की।

CBI ने इस मामले में इस साल मई में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व CM राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा यादव और हेमा यादव के अलावा नौकरी पाने के बदले में कम कीमत में जमीन देने वाले कुछ अयोग्य उम्मीदवारों समेत 16 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज की थी।

‘प्रचार के लिए पैसा है, रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए नहीं?’: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से माँगा विज्ञापनों पर खर्च का ब्यौरा, लगाई फटकार

विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहाने के लिए ‘कुख्यात’ दिल्ली की केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई। दरअसल, दिल्ली सरकार ने कहा था कि रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के लिए उसके पास फंड नहीं है। इस जवाब से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को बीते 3 सालों में विज्ञापन पर हुए खर्च का ब्यौरा 2 सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच सोमवार (3 जुलाई 2023) को सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया कि इस प्रोजेक्ट के लिए फंड देने में वह असमर्थ है। 

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “क्या आप चाहते हैं कि हम यह देखें कि किस फंड का इस्तेमाल कहाँ किया गया है। क्या आप इस तरह का आदेश चाहते हैं कि विज्ञापन के लिए रखा गया पूरा फंड इस प्रोजेक्ट में लगाया जाना चाहिए। आप अदालत को ऐसा करने के लिए ही कह रहे हैं।” इसके बाद कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए फंड देने में असमर्थता जताई है। फंड की कमी होना एक बड़ी समस्या है। इसलिए यह अदालत दिल्ली सरकार को 2 हफ्ते के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देती है। हलफनामे में बीते 3 वर्षों में विज्ञापन पर किए गए खर्चों का पूरा ब्यौरा होना चाहिए।

हालाँकि, दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा, “कोरोना महामारी के कारण हालत खराब हो चुकी है। साल 2020 में ही हमने कहा था कि हमारे पास फंड नहीं है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है, “क्या प्रोजेक्ट के लिए एक बार में ही पूरा फंड देने की आवश्यकता है? यह एक विकासकारी परियोजना है। हालाँकि फंड का मुद्दा राज्य सरकार का है। लेकिन जब यह कहा जा रहा है कि इस तरह की परियोजनाओं के लिए फंड है ही नहीं, तब हम यह जानना चाहते हैं कि आपने विज्ञापन जैसी किसी चीज पर कितना खर्च किया है।”

क्या है RRTS प्रोजेक्ट:

RRTS प्रोजेक्ट के जरिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को हरियाणा और राजस्थान से जोड़ने की प्लानिंग है। इस प्रोजेक्ट के तहत कम्प्यूटर द्वारा संचालित हाई स्पीड ट्रेनों की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा मुख्य रूप से इन ट्रेनों के जरिए माल ढुलाई करने की योजना है। 180 किलोमीटर प्रति घण्टे की स्पीड से चलने वाली ट्रेनों से लेकर सफर और माल ढुलाई जल्दी होगी। बल्कि ट्रैफिक की परेशानी से भी निजात मिल जाएगी। RRTS के अंतर्गत बन रहे दिल्ली-मेरठ-गाजियाबाद रूट का काम अंतिम चरण में है।

केंद्र में मंत्री बनेंगी सुप्रिया सुले? NCP की लड़ाई फिक्स होने का राज ठाकरे का दावा, शिंदे की शिवसेना के MP बोले- सब कुछ शरद पवार की मर्जी से ही हुआ

हाल ही में रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि 2019 में शरद पवार ने ‘डबल गेम’ खेला था। क्या इस बार पवार फिर से डबल गेम खेल रहे हैं? यह सवाल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसद सदा सरवणकर के दावों से खड़ा हुआ है।

इन दोनों की मानें तो एनसीपी में जो उठापठक हुई है, वह शरद पवार की ही मर्जी है। राज ठाकरे के अनुसार दिलीप वल्से पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुगबल जैसे नेता शरद पवार को छोड़कर नहीं जा सकते। ठाकरे ने कहा, “कल को सुप्रिया सुले केंद्र में मंत्री बन जाएँ तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा।” मनसे मुखिया के अनुसार भले शरद पवार आज कह रहे हैं कि जो कुछ हुआ इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी, लेकिन उनकी अनुमति के बिना पाटिल, भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता बीजेपी के साथ नहीं जा सकते हैं।

सांसद सदा सरवणकर ने भी इसी तरह का दावा किया है। टाइम्स नाउ के अनुसार मुंबई के शिवाजी पार्क स्थित बाला साहेब स्मारक के दौरे के बाद सरवणकर ने कहा, “यह पूरा खेल शरद पवार का है। अजित पवार को भूल जाइए। छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता हमारे साथ कैसे आ गए? शरद पवार साहब ने कहा कि आप शपथ लें और मैं पुणे में जाकर बैठूँगा। यह एनसीपी अध्यक्ष के समर्थन के बिना संभव नहीं है।”

गौरतलब है कि 2 जुलाई 2023 को अचानक से महाराष्ट्र में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला था। शरद पवार के भतीजे और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ एनसीपी के आठ और नेता एकनाथ शिंदे और बीजेपी गठबंधन की सरकार में शामिल हुए हैं। इनमें छगन भुजबल जैसे एनसीपी के बड़े नाम भी हैं। इतना ही नहीं पिछले महीने ही जिस प्रफुल्ल पटेल को शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, वे भी उनके भतीजे के साथ चले गए हैं। अजित पवार को एनसीपी के 40 विधायकों का समर्थन होने की बात कही जा रही है। अब पार्टी पर भी कब्जे की लड़ाई शुरू हो गई है। 3 जुलाई को शरद पवार ने ट्वीट कर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पार्टी से निकालने की जानकारी दी। उसके कुछ ही देर बाद अजित पवार ने तटकरे को महाराष्ट्र एनसीपी का अध्यक्ष बना दिया।

शरद पवार ने जिसे पार्टी से निकाला, अजित पवार ने उसे ही महाराष्ट्र NCP का अध्यक्ष बनाया: प्रफुल्ल पटेल ने किया ऐलान, चाचा-भतीजे में पार्टी पर कब्जे की लड़ाई शुरू

उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद NCP के बागी गुट ने घोषणा की है कि अजित पवार को सर्वसम्मति से पार्टी के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वो शरद पवार से हाथ जोड़ कर विनती करते हैं कि वो आशीर्वाद दें, क्योंकि वो हमारे गुरु हैं। उधर शपथग्रहण समारोह में मौजूद रहे सांसद अमोल कोल्हे अब खुद को शरद पवार के साथ बता रहे हैं। 8 नए मंत्रियों के अलावा 15 अन्य विधायकों ने अजित पवार का समर्थन किया है, जबकि चाचा शरद पवार के साथ 14 विधायक हैं। कई अभी चुप हैं।

NCP के बागी नेता प्रफुल्ल पटेल ने घोषणा की है कि विधायक अनिल भाईदास पाटिल को महाराष्ट्र विधानसभा में पार्टी का चीफ व्हिप बनाया गया है। उधर शरद पवार ने ट्वीट कर के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को NCP की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि NCP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में ये आदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पटेल और तटकरे को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जाता है।

वहीं NCP के बागी नेताओं ने सुनील तटकरे को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया है। शरद पवार के खेमे के हिसाब से जयंत पाटिल अभी भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जबकि प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उन्होंने जयंत पाटिल को आधिकारिक रूप से उन्हें हटाए जाने के बारे में बता दिया है और आगे बाकी नियुक्तियाँ सुनील तटकरे ही करेंगे। उधर बिहार में राजद सुप्रीमो ने इस बगावत पर कहा कि शरद पवार एक हैसियत हैं, ताकत हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने दावा किया कि इस ताकत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिलाने की कोशिश की, लेकिन सब विफल हो गए। उधर शरद पवार ने 9 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। वो विधायक हैं – अजित अनंतराव पवार, छगन चंद्रकांत भुजबल, दिलीप दत्तात्रेय वालसे पाटिल, हसन मियालाल मुश्रीफ, धनंजय पंडितराव मुंडे, धर्मरावबाबा भगवंतराव अत्राम, अदिति सुनील तटकरे, संजय बाबूराव बनसोडे और अनिल भाईदास पाटिल।

NCP के शरद पवार धड़े ने प्रदेश सचिव शिवाजीराव गर्जे, अकोला जिला के जिलाध्यक्ष विजय देशमुख और मुंबई कार्य अध्यक्ष नरेंद्र रणे को भी पार्टी से निकाले जाने की घोषणा की है। अब तक अजित पवार के साथ रहे अमोल कोल्हे वापस शरद पवार के पास लौट आए हैं। इस पर पूर्व मंत्री जितेंद्र अव्हाड ने कहा कि कुछ लोगों को गुमराह किया गया और शपथग्रहण के बारे में नहीं बताया गया। उधर NCP के छात्र संगठन की अध्यक्ष सोनिया दूहन ने दिल्ली स्थित कार्यालय से प्रफुल्ल पटेल की तस्वीर हटा दी।

भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस से भी अजित पवार, सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने मुलाकात की। अजित पवार गुट ने NCP नेता उमेश पाटिल ने कहा कि शरद पवार हमारे लिए भगवान के समान हैं, वहीं प्रफुल्ल पटेल ने भी उन्हें सम्माननीय बताया। उमेश पाटिल ने कहा कि 5 जुलाई को नेता जिसकी बैठक में आएँगे, उससे सब तय हो जाएगा। उस दिन शरद और अजित, दोनों ने बैठक बुलाई है। शरद पवार ने कहा है कि ये महत्वपूर्ण नहीं है कि किसके पास कितना समर्थन है, संगठन ज्यादा ज़रूरी है।

PUBG खेलते-खेलते पाकिस्तानी महिला को हुआ नोए़डा के सचिन से प्यार, 4 बच्चे लेकर भारत में घुसी: बकरीद के बाद खुली पोल, UP पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने भारत में अवैध तौर पर रह रही पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर को गिरफ्तार किया है। महिला 4 बच्चो की माँ है जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वो सचिन नाम के एक लड़के के प्यार की खातिर भारत आ कर अनधिकृत तौर पर बस गई थी। पुलिस सीमा हैदर से पूछताछ कर रही है। महिला के प्रेमी सचिन को भी हिरासत में लिया गया है। नोएडा पुलिस ने यह जानकारी सोमवार (3 जुलाई 2023) को दी है।

ग्रेटर नोएडा के ADCP अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस को एक पाकिस्तानी महिला के 4 बच्चों के साथ घूमने की सूचना मिली थी। पुलिस टीमों ने महिला की तलाश की जो रबूपुरा पुलिस द्वारा खोज निकाली गई। शुरुआती पूछताछ में महिला ने अपना नाम सीमा गुलाम हैदर बताया जो रबूपुरा के सचिन से पबजी खेलने के दौरान मिली थी। सीमा हैदर सचिन के साथ रहने के लिए नेपाल के रास्ते भारत आई थी। बकौल ADCP मामले की सूचना अन्य एजेंसियों को दे दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीमा हैदर लगभग डेढ़ माह पहले नेपाल के रास्ते भारत पहुँची थी। उसके साथ 4 बच्चे भी थे। वह रबूपुरा में किराने की दुकान पर काम करने वाले सचिन से खेल-खेल में प्यार कर बैठी थी। बताया यह भी जा रहा है कि अपने बारे में लोगों को शक होने की भनक लगते ही सीमा हैदर बस से नोएडा से मथुरा के लिए निकल गई थी लेकिन रास्ते में पुलिस ने उसे ट्रेस कर लिया। सीमा हैदर के पासपोर्ट और कॉल डिटेल आदि की भी जाँच करवाई जा रही है।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक सीमा हैदर मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रान्त की हैं। उसका निकाह गुलाम हैदर नाम के व्यक्ति से हुआ था। इस शादी से उसे 4 बच्चे हुए। थोड़े समय बाद गुलाम हैदर कमाने के लिए सऊदी अरब चला गया। काफी दिनों तक जब गुलाम वापस नहीं लौटा तो सीमा हैदर अपने अब्बा के साथ कराची आ गई। कराची में वो समय बिताने के लिए PUBG खेलने लगी। खेल-खेल में उसकी मुलाकात भारत में नोएडा के निवासी सचिन से हुई। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और ये बातचीत प्यार में तब्दील हो गई।

कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि सचिन नेपाल में सीमा से मिलने भी गया था, जिसके बाद वही उसे अपने साथ ले आया। वहीं कुछ खबरों में कहना है कि सीमा सचिन से मिलने आई थी और सचिन ने ही सीमा हैदर को रबूपुरा में एक कमरा किराए पर दिलाया था।

नोएडा में सीमा की पहचान छिपाने के लिए सचिन ने सबके आगे सीमा को अपना रिश्तेदार बताया हुआ था। लेकिन उसके सभी बच्चे अपना नाम मुस्लिम बताते थे और जब वो मोहल्ले आदि में खेलने जाते तब लोगों को उनके पहनावे, भाषा और चाल-ढल देख कर शक होता। इसके बाद जब बकरीद आई तो सीमा ने घर में बकरीद भी मनाई। इससे लोगों के मन में थोड़ा और शक बढ़ गया। पड़ोसियों में होने वाली कानाफूसी जब पुलिस तक पहुँची तो उन्होंने सीमा को पकड़ा। फ़िलहाल पुलिस इस मामले में विस्तृत जानकारी प्रेसनोट के जरिए देने की बात कह रही है।