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टेस्ट में 0 का रिकॉर्ड, जो तेंदुलकर नहीं कर पाए वह भी किया हासिल: भारत के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की शादी में ‘मजहब’ बन गया था रोड़ा

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम (Team India) को मुख्य चयनकर्ता (Chief Selector) मिल गया है। पूर्व तेंज गेंदबाज अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) को यह जिम्मेदारी मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को उनके नाम की घोषणा की। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए खिलाड़ियों के चयन के साथ ही अगरकर का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। इस साल वनडे वर्ल्ड कप (ICC World Cup 2023) भी होना है। ऐसे में अगरकर के सामने वर्ल्ड कप विजेता टीम चुनने की चुनौती होगी।

ज्ञात हो कि स्टिंग ऑपरेशन में फँसने के बाद पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 5 महीने के लंबे अंतराल के बाद टीम इंडिया को नया मुख्य चयनकर्ता मिला है। अगरकर ने अपने 16 साल के लंबे करियर में टीम इंडिया के लिए कई बार मैच जिताऊ प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने करियर में 26 टेस्ट, 191 वनडे और 4 टी20 मैच खेले। अगरकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में कुल 349 विकेट हासिल किए। उन्हें टेस्ट में 58, वनडे में 288 और टी-20 इंटरनेशनल में 3 विकेट मिले। अगरकर साल 1999, 2003 और 2007 वनडे वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा थे। इसके अलावा साल 2007 के टी20 विश्व कप में टीम इंडिया की जीत में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

अजीत अगरकर वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया की ओर से तीसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। यही नहीं, वनडे क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे तेज अर्धशतक जड़ने का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। उन्होंने साल 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 21 गेंदों में ताबड़तोड़ अर्धशतक जड़ा था।

इसके अलावा लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में शतक जड़कर भी उन्होंने अपने करियर में एक ऐसा कीर्तिमान जोड़ा है जो हर क्रिकेटर का सपना होता है। दिलचस्प बात यह है कि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, विराट कोहली जैसे बल्लेबाज अपने करियर में लॉर्ड्स में शतक नहीं जड़ पाए हैं। अगरकर के करियर में एक अनचाहा रिकॉर्ड भी जुड़ा हुआ है। यह रिकॉर्ड लगातार 5 पारियों में शून्य पर आउट होने का है। साल 1999-2000 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में अजित अगरकर लगातार 5 पारियों में बिना खाता खोले पवेलियन लौटे थे।

अजीत अगरकर के क्रिकेट करियर की तरह उनकी लव लाइफ भी काफी दिलचस्प है। अगरकर ने अपने दोस्त मजहर घड़ियाली की बहन फातिमा घड़ियाली (Fatema Ghadially) से शादी की है। मजहर और अगरकर ने 1990 के दशक में घरेलू स्तर पर साथ में क्रिकेट खेला था। इसके चलते दोनों अच्छे दोस्त थे। फातिमा अपने भाई मजहर के साथ अक्सर क्रिकेट मैचों और अन्य कार्यक्रमों में जातीं थीं।

इसी दौरान साल 2000 में दोनों की मुलाकात हुई। शुरुआती बातचीत के बाद दोस्ती और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हो गया। इसी बीच साल 2001 में दोनों के घरवालों को उनके रिश्ते के बारे में पता चल गया। चूँकि फातिमा मुस्लिम थीं और अगरकर महाराष्ट्रियन ब्राह्मण परिवार से थे। ऐसे में परिवार शादी के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन दोनों अड़े रहे और अंत में घरवालों को उनके आगे झुकना पड़ा। फिर 9 फरवरी 2002 को अगरकर और फातिमा ने शादी कर ली। 

स्वीडन में जली कुरान, पाकिस्तान में बदला लेगा आतंकी संगठन: चर्चों पर हमले की धमकी, कहा- ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देंगे

स्वीडन में कुरान जलाए जाने का ‘बदला’ पाकिस्तान में ईसाइयों से लिया जाएगा। यह ऐलान आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने किया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण इस आतंकी संगठन को हासिल है। यह आतंकी संगठन पाकिस्तान में शिया मुस्लिमों के खिलाफ हिंसक और बर्बर अभियान चलाए जाने के लिए भी पहचान रखता है।

लश्कर-ए-झांगवी ने ईसाइयों और चर्चों पर हमला करने की धमकी दी है। इसके बाद से पाकिस्तानी ईसाई वहाँ की सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी नसीर रायसानी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान में कोई भी चर्च और ईसाई सुरक्षित नहीं रहेगा। स्वीडन में कुरान जलाने की घटना का बदला लेने के लिए ईसाइयों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए जाएँगे।

आतंकी संगठन ने कहा है, “स्वीडन में कुरान का अपमान कर ईसाइयों ने मुस्लिमों को चुनौती दी है। अगर कोई ईसाई दूसरे देश में कुरान का अपमान करता है तो जिहाद के रास्ते पर चलने वाला झांगवी पाकिस्तान को ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देगा।” इस धमकी पर अब तक पाकिस्तानी सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, धमकी मिलने के बाद पाकिस्तान में रह रहे ईसाई डर के साए में जीने को मजबूर हो गए हैं। ईसाई संगठनों ने स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटना की निंदा करते हुए पाकिस्तानी सरकार से सुरक्षा की माँग की है।

UCA की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस के अधिकारी नईम यूसुफ गिल ने कहा है, “स्वीडन में हुए कुरान के अपमान की कड़ी निंदा करता हूँ। धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में हम शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं। हमने हमेशा ही बहुसंख्यक वर्ग का समर्थन किया है। हम कानूनों के उल्लंघन के बारे में सोच भी नहीं सकते। इस धमकी के बाद सभी से सतर्क रहने की अपील करता हूँ।”

पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक अन्य ईसाई संगठन के डायरेक्टर फादर खालिद राशिद असी ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की है। बता दें कि फैसलाबाद में करीब 4000 ईसाई रहते हैं। ऐसे में खालिद राशिद असी ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की है। साथ ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में साल 2009 में हुए ईसाई विरोधी दंगों के दोहराए जाने की आशंका जताई है। दरअसल, 2009 में कुरान का अपमान होने के बाद लश्कर-ए-झांगवी ने पंजाब प्रांत में ईसाइयों के घरों पर हमला किया था। इस घटना में 10 ईसाई मारे गए थे।

स्वीडन में बकरीद पर मस्जिद के सामने जली थी कुरान

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को मस्जिद के सामने कुरान को फाड़ा और जलाया गया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मारते, उसे जमीन पर फेंकते और पैरों से कुचलते दिखे थे। फिर इराकी प्रदर्शनकारी ने कुरान को फाड़कर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से नाराज 57 इस्लामी मुल्कों ने पिछले दिनों सऊदी अरब में बैठक भी की थी। इराक में स्वीडन के दूतावास पर हमला भी हुआ था।

अफगानिस्तान में एक और ‘तालिबानी’ फरमान: ब्यूटी पार्लर पर लगाया प्रतिबंध, कहा- आदेश न मानने पर होगी कड़ी कार्रवाई

अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद से तालिबान ने वहाँ की महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। अब तालिबान ने महिलाओं के सभी सैलून और ब्यूटी पार्लर बंद करने का फरमान जारी किया है। तालिबान के वाइस और सदाचार मंत्रालय ने रविवार (2 जुलाई, 2023) को आदेश जारी कर सैलून मालिकों को एक महीने का समय दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान के सदाचार मंत्रालय ने कहा है, “महिलाओं द्वारा संचालित सभी ब्यूटी पार्लर को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। काबुल समेत सभी प्रांतों में हमारे आदेश का पालन किया जाए। आदेश का उल्लंघन करने वालों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।” वहीं मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा है कि इस फैसले के बारे में उसे 2 जुलाई को बताया गया था। इसके बाद सैलून और ब्यूटी पार्लर चलाने वालों को एक महीने का समय दिया गया। 

तालिबानी शासन के चलते अफगानिस्तान के भागकर अब तुर्की में रहने वाली एक अफगान महिला कार्यकर्ता जमीला ने ब्लूमबर्ग से हुई बातचीत में कहा है, “तालिबान का नया फरमान हजारों मेकअप आर्टिस्टों को प्रभावित करेगा। इस आदेश के चलते सैकड़ों ब्यूटी पार्लर बंद हो जाएँगे। तालिबान महिलाओं को इंसान के रूप में नहीं बल्कि दमन करने वाली वस्तु के रूप में देखता है।”

बता दें कि इससे पहले 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्तान में शासन के दौरान भी तालिबान ने वहाँ ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया था। अब अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर एक बार फिर कब्जा करने के 2 साल के भीतर ही तालिबान ने ब्यूटी पार्लर पर बैन लगाने का फरमान जारी कर दिया है।

पुतलों पर नकाब

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नकाब और हिजाब वाले पुतले वहाँ की पहचान बनते जा रहे हैं। दरअसल, तालिबान ने पुतलों को लेकर फरमान जारी किया था। इस फरमान में पुतलों को हटाने या फिर उनका गला काटने की बात कही गई थी।

इसके बाद दुकानदारों ने गुजारिश करते हुए कहा था कि यदि पुतले हट जाएँगे तो उन्हें कपड़े बेचने में समस्या होगी। इसलिए अब तालिबान ने कहा है कि सभी पुतलों पर नकाब होना चाहिए। इस आदेश के बाद दुकानदारों ने पुतलों के चेहरे को प्लास्टिक या एल्युमिनियम फाइल से ढँक दिया है।

प्रतिबंधों के बोझ तले दबी अफगान महिलाएँ

साल 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के अधिकारों की बात करेगा। हालाँकि, सत्ता में काबिज होने के बाद तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों का लगातार हनन किया है। दुनिया भर में निंदा के बावजूद अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार आए दिन महिलाओं के खिलाफ नए-नए पाबंदियों वाले फरमान जारी करती रहती है। 

अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों की लंबी फेहरिस्त है। अफगान महिलाओं को अकेले घर से बाहर निकलने की मनाही है। साथ ही, यदि कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब के देखी जाती है तो उसके अभिभावक को जुर्माना और जेल की सजा होगी।

तालिबान ने हमेशा ही महिलाओं को शिक्षा से दूर रहने की वकालत की है। इसलिए, वहाँ छठी कक्षा के बाद लड़कियों की उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके अलावा, एनजीओ या किसी अन्य संस्थान में महिलाओं की नौकरी पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।

‘इस्लाम का अपमान कर रहे, मुस्लिमों की छवि धूमिल हो रही’: रिलीज से पहले ’72 हूरें’ के निर्माताओं के खिलाफ शिकायत

इस्लामिक आतंकवाद के काले सच को उजागर करने वाली फ़िल्म ’72 हूरें’ टीजर आने के बाद से ही लगातार चर्चा में है। अब फिल्म के मेकर्स और डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता सैय्यद आरिफअली ने फिल्म से जुड़े लोगों पर इस्लाम का अपमान करने, मुस्लिम समुदाय की छवि को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैयद आरिफअली महमूदअली नामक व्यक्ति ने मुंबई के गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में ’72 हूरें’ के मेकर्स और डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सैयद आरिफअली के वकील आसिफ अली खान देशमुख ने शिकायत में कहा कहा है, “फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान व फिल्म मेकर अशोक पंडित, गुलाब सिंह तंवर, अनिरुद्ध तंवर और किरन डागर ने मेरे मुवक्किल सैयद आरिफअली महमूद अली के धर्म का अपमान किया है। यह कृत्य IPC की धारा 153A, 153ए, 1538, 295A, 298, 500, 505(2) के अंतर्गत आता है।”

वकील ने आगे कहा है, “फिल्म ’72 हूरें’ सांप्रदायिक वैमनस्य, भेदभाव और घृणा को बढ़ावा दे रही हैं। यह फिल्म बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से मुस्लिम समुदाय की छवि को खराब कर रही है। इसका उद्देश्य धार्मिक दृष्टिकोण का उपयोग करके प्रोपेगेंडा फैलाकर पैसा कमाना है।”

बता दें कि ’72 हूरें’ की रिलीज से पहले ही फिल्म विवादों से घिरी हुई है। फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान को कट्टरपंथी गालियाँ और उनकी माँ से रेप करने की धमकी दे रहे हैं। ऑपइंडिया ने इस मामले को बड़े पैमाने पर उठाया था। ज्ञात हो कि इससे पहले, फिल्म को लेकर अफवाह फैलाई जा रही थी कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सार्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है। हालाँकि बाद में सेंसर बोर्ड ने बयान जारी कर कहा था कि फिल्म ’72 हूरें’ को ‘A सर्टिफिकेट’ दिया गया है।

गौरतलब है कि फिल्म ’72 हूरें’ शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को देशभर के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज हो रही है। फिल्म IMDB पर 29.5% रेटिंग के साथ मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में टॉप पर बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म ने ‘गदर-2’ को भी पीछे छोड़ दिया है।

जिसने जनजातीय समाज के व्यक्ति पर किया पेशाब, उस पर NSA के तहत कार्रवाई: CM चौहान का ऐलान, प्रदेश भाजपा बोली – आरोपित से कोई संबंध नहीं

मध्य प्रदेश के सीधी से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वक व्यक्ति को एक गरीब के ऊपर पेशाब करते हुए देखा जा सकता है। आरोपित का नाम प्रवेश शुक्ला बताया जा रहा है, जो गरीब और बेसहारा शख्स के ऊपर पेशाब पेशाब करते हुए सिगरेट भी फूँक रहा होता है। वीडियो वायरल होने के बाद इसे भाजपा नेता बताया जाने लगा, लेकिन सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला के बेटे गुरुदत्त शरण शुक्ल ने साफ़ कर दिया है कि ये व्यक्ति भाजपा का पदाधिकारी नहीं है।

उधर जैसे ही ये घटना सामने आई, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया और खुद इसकी निगरानी की। उन्होंने कहा कि सीधी जिले का ये वीडियो उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि न सिर्फ आरोपित को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, बल्कि उस पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा कर उसके ऊपर सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम चौहान ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

सोशल मीडिया में सीढ़ियों पर बैठे जनजातीय समाज के व्यक्ति पर पेशाब करने वाला को स्थानीय विधायक केदार शुक्ला का प्रतिनिधि बताया गया, लेकिन खुद विधायक ने इससे इनकार किया है। पीड़ित की पहचान पाले कोल के रूप में हुई है। भाजपा MLA केदार शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश शुक्ला उनका प्रतिनिधि नहीं है। कॉन्ग्रेस ने इस मामले पर राजनीति शुरू कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि जनजातीय समाज पर अत्याचार में मध्य प्रदेश नंबर वन है।

भाजपा के मीडिया विंग ने भी स्पष्ट किया है कि आरोपित पार्टी का नेता नहीं है। मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि प्रवेश शुक्ला नाम के व्यक्ति का भारतीय जनता पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने साफ़ किया कि हर कुत्सित कृत्य जो आदिवासी समाज के विरोध में किया जाएगा, भारतीय जनता पार्टी उसका सदैव विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि प्रदेश भाजपा इस व्यक्ति के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की माँग करती है।

सिर मुंडवाया, गले में रुद्राक्ष की माला… बच्चों और माता-पिता संग तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे धनुष

साउथ के सुपरस्टार धनुष (Dhanush) अपनी अपकमिंग फिल्म ‘कैप्टन मिलर (Captain Miller) और ‘D 50’ को लेकर व्यस्त हैं। इस बीच वह तिरुपति बालाजी पहुँचे। जहाँ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहीं हैं। फोटोज में धनुष को सिर मुंडाए हुए देखा जा सकता है। मंदिर की परंपरा के तहत उन्होंने अपना सिर मुंडवाकर बाल बालाजी को समर्पित किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धनुष सोमवार (3 जुलाई 2023) अपने दोनों बेटों लिंगा और यात्रा तथा माता-पिता के साथ तिरुपति बालाजी के दर्शन करने पहुँचे थे। इस दौरान धनुष के साथ ही उनके बेटे लिंगा ने भी अपने बाल दान करते हुए सिर मुंडवा लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटोज में धनुष को क्लीन हेड शेव में नजर आ रहे हैं। साथ ही वह गले में रुद्राक्ष की माला पहने दिखाई दिए।

एक ओर जहाँ कहा जा रहा है कि धनुष ने तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा के तहत अपना सिर मुंडवाया है। वहीं, दूसरी ओर उनके फैंस का कहना है कि धनुष ने अपनी अपकमिंग फ़िल्म ‘D 50’ के लिए अपना सिर मुंडवाया है। साथ ही धनुष के इस नए लुक से कई फैंस हैरान भी नजर आए। श्रीदेवी श्रीधर नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “धनुष ने अपना सिर मुंडवा लिया है। कैप्टन मिलर में वह लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाई दे रहे थे। लेकिन उसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। इसलिए अब वह D 50 में नए लुक में नजर आएँगें।”

लक्ष्मी कांत नामक यूजर ने हैरान होने वाली इमोजी और #D50 के साथ लिखा, “तिरुपति से धनुष का नया लुक”

वहीं, धनुष अप्पू ने #CaptainMillerके साथ ट्वीट कर कहा, “धनुष सर आज अपने परिवार के साथ तिरुपति में”। शायद यूजर का मानना है कि धनुष का यह नया लुक कैप्टन मिलर में दिखाई देगा।

थारानी नामक यूजर ने ट्वीट कर कहा, “धनुष सर तिरुपति मंदिर में। उन्होंने सिर मुंडवा लिया। D50 का एक और नया लुक लोड हो रहा है।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो धनुष जल्द ही अपनी फिल्म ‘कैटन मिलर’ में दिखाई देंगे। इस फिल्म के नवंबर 2023 में बड़े पर्दे पर आने की उम्मीद है। ‘कैटन मिलर’ एक पीरियड ड्रामा फिल्म है। इसकी कहानी 1930 और 40 के दशक में मद्रास प्रेसिडेंटी पर आधारित है। इस फिल्म के फर्स्ट लुक में धनुष लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाई दिए थे। हालाँकि हो सकता है कि फिल्म के कुछ हिस्सों में धनुष एक नए लुक में नजर आएँ।

जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने किया पेशाब, उसके समर्थन में हैदराबाद में हिंसा और तनाव: कई हिन्दू घायल

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक व्यक्ति द्वारा छत्रपति शिवाजी महराज की प्रतिमा के पास एक व्यक्ति द्वारा पेशाब करने से तनाव फ़ैल गया है। हिन्दू संगठनों ने आरोपित की पिटाई के बाद सड़क पर उसकी परेड करवाई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष के लोग भी जमा हुए जिस से हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने पेशाब करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (3 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना हैदराबाद के सिद्दीपेट इलाके के गजवेल की है। सोमवार की रात लगभग 8:30 पर एक व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास पेशाब कर रहा था। कई रिपोर्ट्स में आरोपित को मुस्लिम समुदाय का बताया जा रहा है। आस-पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने पेशाब कर रहे व्यक्ति को डाँटा। इस बीच वहाँ हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ युवक पहुँच गए। उन्होंने आरोपित को अर्धनग्न हालत में शहर के अलग-अलग हिस्सों में घुमाया। इस जुलूस में भारत माता की जय, छत्रपति शिवाजी महाराज की जय और जय श्री राम के नारे गूँज रहे थे।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हिन्दू संगठन के लोगों ने पेशाब कर रहे व्यक्ति की पिटाई की और पेशाब वाली जगह को चाटने पर मजबूर किया। घटना के समय आरोपित को नशे में बताया जा रहा है। जब हिन्दू संगठन आरोपित को ले कर सड़क पर जुलूस निकाल रहे थे इस दौरान दूसरी तरफ से मुस्लिम समुदाय के लोग भी एकजुट होने लगे थे। हालत तनावपूर्व देखते हुए बीच में पुलिस ने मोर्चा संभाला। इस विवाद में कुछ हिन्दू घायल बताए जा रहे हैं।

हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार (4 जुलाई) को गजवेल बंद का आह्वान किया। पुलिस ने पेशाब करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर IPC की धारा 294, 294 (बी), 295- ए और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक वीडियो में दिख रहे आरोपितों को भी चिह्नित कर के कार्रवाई की जा रही है। हिंसक झड़प के आरोपितों पर भी केस दर्ज किया गया है जिनकी तलाश की जा रही है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और हालत नियंत्रण में हैं।

PUBG वाला प्यार या लव ट्रैप? पाकिस्तानी पुलिस में भाई-दुबई में शौहर, 4 बच्चों की अम्मी हिंदू बनकर रहती थी पर बकरीद से खुल गई पोल

नोएडा से गिरफ्तार हुई पाकिस्तानी महिला सीमा गुलाम हैदर की असली पहचान क्या है? क्या सच में चार बच्चों की यह अम्मी PUBG खेलते-खेलते सचिन के प्यार में कैद हो गई? अपने बच्चों के साथ भारत आकर सचिन के साथ रहने लगी? या फिर सचिन पाकिस्तानी लव ट्रैप का शिकार है? मीडिया रिपोर्टों की माने तो पुलिस और एजेंसियों को सीमा के पाकिस्तानी जासूस होने का शक है। उससे पूछताछ चल रही है।

भारत आने के बाद सीमा पहचान छिपाने के लिए हिंदू महिलाओं की तरह साड़ी, सिंदूर और मङ्गलसूत्र पहनकर रहती थी। लेकिन गुपचुप बकरीद मनाते देख पड़ोसियों को उस पर शक हुआ। बात पुलिस तक पहुँची और उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस ने उसके कथित प्रेमी सचिन और उसके पिता नेत्रपाल को भी गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि सीमा हैदर का शौहर दुबई में नौकरी करता है। उसका भाई पाकिस्तानी पुलिस में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि 27 साल की सीमा हैदर मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत की है। भारत आने से पहले वह कराची में रहती थी। साल 2014 में उसका निकाह गुलाम हैदर से हुआ। उससे उसके 4 बच्चे हैं। साल 2019 में उसका शौहर नौकरी करने के लिए दुबई चला गया।

लंबे समय तक शौहर के वापस नहीं आने के बाद वह अपने अब्बा के साथ कराची आकर रहने लगी। इसी दौरान पबजी खेलते हुए उसकी बातचीत नोएडा के रबूपुरा के सचिन से होने लगी। बातचीत आगे बढ़ी और दोनों में प्यार हो गया। सीमा ने भारत आकर सचिन से मिलने का फैसला किया। पैसों के लिए अपना घर बेच दिया।

सीमा पहले भी एक बार अपने शौहर के साथ टूरिस्ट वीजा पर नेपाल के काठमांडू आ चुकी थी। इसलिए उसने इस बार भी उसने खुद का और अपने 4 बच्चों का टूरिस्ट वीजा बनवाया। पूर्व में काठमांडू आने के कारण उसे भारत आने के लिए नेपाल का रास्ता ही सबसे बेहतर लगा। इसके लिए उसने कई वीडियो भी देखे। पाकिस्तान से वह अपने बच्चों फरहान, फरवा, फराह, फरीहा के साथ दुबई पहुँची। 11 मई 2023 को दुबई से नेपाल के काठमांडू पहुँची। फिर भारत में दाखिल हुई और 13 मई को रबूपुरा में सचिन के पास पहुँच गई। 

इसके बाद सचिन ने रबूपुरा के अंबडेकर नगर मोहल्ले में किराए पर एक मकान लिया। सचिन ने मकान मालिक समेत अन्य लोगों को बताया था कि सीमा उसकी रिश्तेदार है। अपनी पहचान छिपाने के लिए सीमा हिंदू महिलाओं की तरह रहने लगी। लेकिन उसके बच्चे आसपड़ोस के लोगों को अपना नाम मुस्लिमों की तरह बताते थे। जब वे मोहल्ले में खेलने आते तब भी उनके पहनावे, भाषा और चाल-ढल देख कर लोगों को शक होता था। इसके बाद सीमा को घर में बकरीद मनाते देख लोगों का शक बढ़ गया और बात पुलिस तक पहुँच गई।

पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि सीमा महज 5वीं तक ही पढ़ी है। पड़ोसियों का कहना है कि उसके पास कई स्मार्टफोन थे। पुलिस ने उसके पास से 5 फोन बरामद किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से अधिकांश मोबाइल का डाटा डिलीट किया जा चुका है। जाँच एजेंसियाँ डाटा बैकअप करने में जुटी हुई हैं। साथ ही पुलिस सीमा की कॉल डिटेल और भारत आने के बाद उसने किन-किन लोगों से मुलाकात की है, इसका भी डाटा निकाल रही है।

NBT ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पुलिस और जाँच एजंसियों ने सीमा से करीब 150 सवाल पूछे हैं। उसने बेधड़क तरीके से इन सभी सवालों के जवाब दिए हैं। ऐसे में पुलिस को उसके पाकिस्तानी एजेंट होने का भी संदेह है। इसलिए उससे अलग-अलग एंगल से अब पूछताछ की जा रही है। 

माँ काली के भक्त जिनमें जनजातीय समाज ने देखा ‘राम’, मिशनरियों की नाक में दम कर देने वाले साधु: अंग्रेजों ने पेड़ से बाँध कर दी थी हत्या

भारत के सबसे उम्दा फिल्म निर्देशकों में से एक SS राजामौली की मूवी ‘RRR’ का वो दृश्य तो आपको याद ही होगा जब जंगल में अंग्रेजों से युद्ध के समय धनुष-तीरके साथ रामचरण तेजा की एंट्री होती है। इस दृश्य के दौरान थिएटर तालियों और सीटियों से गूँज उठता था, ‘जय श्री राम’ के नारे लगते थे। फिल्म में राम चरण का किरदार जनजातीय समाज के क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू से प्रेरित था। ‘रामम्, राघवम्, रणधीरम्’ गाने के साथ राम चरण के वो दृश्य लोगों के दिलों में बस गए थे।

फिल्म की बात तो दुनिया भर में हुई और इसके गाने ‘नाटू-नाटू’ को ऑस्कर भी मिला। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिन योद्धा अल्लूरी सीताराम राजू से ये किरदार प्रेरित था वो कौन थे? आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उनका इतना सम्मान क्यों है? आखिर उन्होंने ऐसा क्या किया था कि अंग्रेज भी उनसे खौफ खाते थे और हाथ धो कर उनके पीछे पड़े थे? आइए, आज हम सशस्त्र जनजातीय विद्रोह के इस नायक के बारे में आपको बताते हैं, जिनके जीवन से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर अध्ययन करने वालों की मानें तो सन् 1769 से लेकर हमारे देश को आज़ादी मिलने तक जनजातीय समाज के 72 बड़े विद्रोह हुए। इन्हें इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में उतना सम्मान नहीं मिला और न ही इनके नायकों को लोगों ने याद रखा। अंग्रेजों ने जल, जंगल और जमीन में दखल देकर जनजातीय समाज के जीवन पर बड़ा प्रहार किया था। ओडिशा में कोंध जनजाति के नेतृत्व में पहला बड़ा विद्रोह हुआ। सन् 1772 में झारखंड में पहाड़िया विद्रोह हुआ।

सन् 1785 से पहले तक बिहार के भागलपुर में तिलका माँझी ने क्रांति की ज्वाला थामे रखी थी। अगस्त 1922 में आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों और जंगलों में अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह उठ खड़ा हुआ। जनजातीय समाज के लोगों ने गुरिल्ला युद्धकला का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया। इसे दबाने के लिए अंग्रेजों को ‘मालाबार स्पेशल फोर्स’ को बुलाना पड़ा। आज भी तेलुगु राज्यों में अल्लूरी सीताराम राजू की वीरता की गाथाएँ सुनाई जाती हैं।

अल्लूरी सीताराम राजू जब बच्चे थे, तभी उनके पिता वेंकटराम राजू का देहांत हो गया है, ऐसे में अन्याय के खिलाफ लड़ने की शिक्षा उन्हें उनकी माँ सूर्यनारायणअम्मा से मिली। उनका जन्म विशाखापत्तनम के पंडरंगी गाँव में 4 जुलाई, 1897 को हुआ था। जंगल से लकड़ियाँ तोड़ कर लाना और काश्तकारी या मजदूरी का कार्य करना – यही उनके परिवार का पेशा था। माँ-बेटे जब हिमालय की तीर्थयात्रा के लिए निकले, तो रास्ते में अल्लूरी सीताराम राजू की मुलाकात क्रांतिकारी पृथ्वीसिंह आज़ाद से हुई।

यहीं उन्हें चटगाँव के क्रांतिकारियों के बारे में भी पता चला। ‘ग़दर पार्टी’ के संस्थापकों में से एक पृथ्वीसिंह आज़ाद से अंग्रेज इतना खार खाए रहते थे कि उन्हें कलकत्ता और मद्रास से लेकर सेल्युलर जेल तक में डाला गया था। 1977 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। जहाँ तक चटगाँव क्रांति की बात है, ये बंगाल में अप्रैल 1930 को हुआ था। उस समय अल्लूरी सीताराम राजू जीवित नहीं थे, लेकिन वहाँ सक्रिय क्रांतिकारियों के बारे में उन्हें अपने जीवन काल में जानकारी मिली थी।

अपनी माँ के साथ उन्होंने वाराणसी और ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ और नेपाल तक की तीर्थयात्रा की। अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह का एक बड़ा कारण था – 1882 का ‘मद्रास फॉरेस्ट एक्ट’। इसके तहत आंध्र प्रदेश के एक बड़े इलाके में आने वाले जंगलों को बंद कर दिया गया। जनजातीय समाज को वहाँ से लकड़ियाँ लाने या फिर वहाँ अपने पशु चराने से भी मना कर दिया गया। उन्हें वहाँ खेती भी नहीं करने दी जाती थी।

कुल मिला कर बात ये है कि सदियों से जो जंगल जनजातीय समाज का घर हुआ करते थे, वहाँ अब उनके लिए घूमना-फिरना भी प्रतिबंधित हो गया। अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में हुए विद्रोह को ‘मन्यम क्रांति’ या फिर ‘राम्पा क्रांति’ के रूप में भी जाना जाता है। इसका मुख्य केंद्र आज के आंध्र प्रदेश का गोदावरी जिला था। इसकी शुरुआत चिंतापल्ली, कृष्णदेवीपेट और राजावोम्मांगी के पुलिस थानों को लूटने के साथ हुई थी। अल्लूरी सीताराम राजू ने जनजातीय समाज को असहयोग और स्वराज के बारे में शिक्षित किया।

मालाबार फोर्स बुलाए जाने से पहले क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को 5 बार हराया था। 2 साल तक उन्होंने आक्रांताओं की नाक में दम कर के रखा। भड़के अंग्रेजों ने गाँव वालों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया और मार्शल लॉ लागू कर दिया। 7 मई, 1924 का वो काला दिन था जब अंग्रेजों ने अल्लूरी सीताराम राजू की निर्मम हत्या कर दी थी। बचपन से ही अल्लूरी सीताराम राजू क्रांतिकारी स्वभाव के थे, क्योंकि 13 साल की उम्र में जब उन्हें उनके किसी दोस्त ने किंग जॉर्ज की तस्वीर वाले कुछ बैज दिए थे, तो उन्होंने सबको फेंक दिया था, सिवाए एक के।

एक बैज कोउन्होंने अपने शर्ट पर लगा कर अपने दोस्तों से कहा था कि वो इसे इसीलिए नहीं फेंक रहे हैं ताकि सबको याद रहे कि एक विदेशी आक्रांता हम पर शासन कर रहा है, हमें रौंद रहा है। बचपन में पढ़ाई-लिखाई छूट जाने के कारण उन्हें माँ के साथ तीर्थयात्रा पर जाना पड़ा था। जिस चटगाँव के क्रांतिकारियों से उन्हें प्रेरणा मिली, वो आज बांग्लादेश में है। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न घाट के जनजातीय समाज को एकजुट करने की ठानी। उस समय अंग्रेजों की पुलिस जंगल से जनजातीय लोगों को भगा रही थी।

अपनी यात्रा के दौरान उन्हें जो ज्ञान प्राप्त हुआ था, उसका इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने समाज के लोगों को शिक्षित करना शुरू किया, उन्हें मेडिकल सुविधाएँ दिलाने का भी प्रयास किया। ‘मन्यम (जंगल)’ के क्षेत्र में जनजातीय समाज को प्रताड़ित करने वाली पुलिस और राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध उन्होंने संघर्ष छेड़ दिया। उन्होंने अपने जीवन में मात्र एक रिपोर्टर को इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने बड़े गर्व के साथ ऐलान किया था कि वो 2 वर्षों में अंग्रेजों की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे।

जंगल और पहाड़ियों की भौगोलिक स्थिति को समझने के कारण उन्हें गुरिल्ला युद्ध में आसानी हुई। वो एक जगह साथियों के साथ आते, अपना काम कर के कहीं और निकल लेते। अंग्रेजों की नींद हराम हो गई। तीर-धनुष और बरछे – यही उनलोगों के हथियार थे। उनकी कहानियाँ लोकप्रिय होने लगीं। सीटियों और ड्रम पीटने का इस्तेमाल किया गया, क्रांतिकारियों को आपस में संदेशों का अदन-प्रदान करने के लिए। परंपरागत तौर-तरीकों को उन्होंने अपने हिसाब से ढाला।

जब उन्हें लगने लगा कि तीर-धनुष या भालों से अंग्रेजों से युद्ध नहीं जीता जा सकता, तब जाकर उन्होंने पुलिस थानों को लूटने की योजना बनाई। 22 अगस्त, 1922 को 300 साथियों के साथ चिंतापल्ली पुलिस थाने को लूटना पहला ऐसा हमला था जो सफल रहा। फिर दो ऐसे बड़े हमले और किए गए। 24 सितंबर, 1922 को स्काउट और हीटर नाम के दो अंग्रेज अधिकारियों को उन्होंने मौत की नींद सुला दी, कई अन्य घायल हुए।

एजेंसी कमिश्नर जेआर हिग्गिन्स ने उनके ऊपर 10, 000 रुपए का इनाम रखा। साथ ही उनके करीबी साथियों गणतम डोरा और मल्लू डोरा पर एक-एक हजार रुपए का इनाम रखा गया। अप्रैल 1924 में अंग्रेजों ने अपने अधिकारी टीजी रदरफोर्ड को जनजातीय विद्रोह से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी, जिन्होंने अल्लूरी सीताराम राजू और उनके साथियों का पता लगाने के लिए निर्दोषों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उस ज़माने में उन्हें पकड़ने के लिए अंग्रेजों को 40 लाख रुपए खर्च करने पड़े थे।

अल्लूरी सीताराम राजू आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गाँधी से भी प्रेरित थे, लेकिन उनकी अहिंसा उन्हें समझ में नहीं आती थी। वो कहते थे कि हिंसा ज़रूरी है ऐसी परिस्थिति में। वो कहते थे कि कई बार वो सिर्फ इसीलिए आक्रांता यूरोपियनों को मारने में सफल नहीं हो पाते हैं, क्योंकि अंग्रेजों के इर्दगिर्द कई भारतीय रहते थे जिन्हें वो नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे। सितंबर 2022 में दमरापल्ली में उन्होंने सभी भारतीयों को जाने दिया था, तब अंग्रेजों पर गोली चलाई थी।

उस समय ईसाई मिशनरियों ने भी जनजातीय समाज को निशाना बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन अल्लुरी सीताराम राजू धर्मांतरण के खिलाफ थे। अंग्रेजों ने गनतम डोरा को मार डाला था और मल्लू डोरा को पकड़ कर आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी थी। बाद में मल्लू डोरा लोकसभा सांसद भी बने। अल्लुरी सीताराम राजू की शुरू में एक साधु की छवि थी, जो आयुर्वेद से लोगों को ठीक भी करते थे। 7 मई, 1924 को बिना किसी सुनवाई वगैरह के एक पेड़ से बाँध कर अंग्रेजों ने उनकी हत्या कर दी थी।

जनजातीय समाज के लोग अल्लूरी सीताराम राजू के नाम और उनकी युद्धकला के कारण उन्हें भगवान श्रीराम के रूप में भी देखा करते थे। उनकी हत्या के बाद महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस – सभी ने उनकी प्रशंसा की थी। गोंड और कोया जनजातीय समाज ने उन्हें अपना नायक माना। आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि ओडिशा में भी उनकी गाथा प्रचलित हुई, क्योंकि आंध्र-ओडिशा सीमा पर वो खासे सक्रिय रहे थे। वो काली के पुजारी थे।

उत्तराखंड में हिंदू युवती से छेड़छाड़, विरोध करने पर मुस्लिम भीड़ ने लगाए ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे: हल्द्वानी में गर्भवती महिला तक को पीटा

उत्तराखंड में हिंदू युवती से छेड़छाड़ का विरोध किए जाने पर मुस्लिम भीड़ द्वारा ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाने की घटना सामने आई है। घर जा रही युवती से दो मुस्लिम युवकों ने देहरादून के हरबर्टपुर में सहारनपुर रोड पर शनिवार (1 जुलाई 2023) को छेड़खानी की। बताया जा रहा है कि छेड़छाड़ के बाद दोनों आरोपित मस्जिद में घुस गए। उनकी तलाश में हिन्दू संगठन के लोग मौके पर पहुँचे तो मुस्लिम भीड़ जमा होकर नारेबाजी करने लगी। वहीं एक अन्य घटना में हल्द्वानी में सोमवार (3 जुलाई 2023) को एक हिन्दू परिवार पर इमरान और उसके साथियों ने हमला कर दिया। इस दौरान गर्भवती महिला के पेट में लात मारने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विकास नगर से युवती खरीदारी कर घर लौट रही थी। इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के 2 युवकों ने उससे छेड़छाड़ की। लड़की ने घर लौट कर इसकी जानकारी परिजनों को दी। लड़की के परिजन अन्य स्थानीय निवासियों को साथ ले कर पुलिस के पास पहुँचे। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई।

इस मामले की जानकारी हिन्दू संगठन के लोगों को भी हुई। उन्हें आरोपितों के ढकरानी इलाके की एक मस्जिद में छिपे होने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही हिन्दू मस्जिद के बाहर पहुँच गए और वहाँ जमा हो गए। कुछ ही समय में वहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों की भी भीड़ जमा होने लगी। कहा जा रहा है कि यह भीड़ सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर मैसेज डाल कर देहरादून के अलग-अलग हिस्सों से जमा की गई थी। सैकड़ों की सँख्या में पहुँची मुस्लिमों की भीड़ मस्जिद के आगे जमा हो गई।

इस भीड़ ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। पुलिस आरोपित युवकों की तलाश कर रही है।

हल्द्वानी में हिंदू परिवार को पीटा

उत्तराखंड के ही नैनीताल जिले के हल्द्वानी में राजेंद्र मौर्या ने अपने परिवार पर हमले की शिकायत की है। शिकायत में बताया है कि वनभूलपुरा इलाके में 3 जुलाई को इमरान ने 20-30 हमलावरों के साथ उनके परिवार पर हमला किया। इस हमले में एक गर्भवती महिला के पेट पर लात मारी गई और अन्य महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए गए। पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो हमलावरों ने पत्थरबाजी की।

शिकायत में राजेंद्र मौर्य ने इमरान और उनके साथियों पर घर की महिलाओं के मंगलसूत्र सहित अन्य जेवर छीनने के भी आरोप लगाए हैं। खुद को डरा बताते हुए आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इस घटना का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताते चलें कि यह वही वनभूलपुरा क्षेत्र है जहाँ रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला कुछ समय पहले सुर्ख़ियों में था।