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‘नेताजी बोस होते तो नहीं होता भारत का बँटवारा’: बोले NSA अजित डोभाल – PM मोदी पुनर्जीवित कर रहे उनसे जुड़ा इतिहास

‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA)’ अजित डोभाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद किया है। अजित डोभाल ने शनिवार (17 जून, 2023) को ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल’ में भाषण देते हुए कहा कि अगर नेताजी बोस ज़िंदा होते तो भारत का बँटवारा नहीं होता। उन्होंने याद किया कि कैसे नेताजी बोस ने कई बार साहस दिखाया और उनके भीतर महात्मा गाँधी को भी चुनौती देने की क्षमता थी। महात्मा गाँधी तब अपने राजनीतिक जीवन के शीर्ष पर थे।

NSA अजित डोभाल ने याद किया कि कैसे इसके बाद नेताजी बोस को कॉन्ग्रेस छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि वो अच्छा या बुरा नहीं कह रहे हैं, लेकिन ये साफ़ है कि भारत या विश्व के इतिहास में ऐसे लोगों में बहुत कम समानताएँ हैं, जिनमें धारा के खिलाफ बहने का साहस था। डोभाल ने कहा कि ऐसा करना आसान नहीं था। हालाँकि, उन्होंने ये भी बताया कि उस दौरान सिर्फ एक जापान ही था जिसने नेताजी बोस का समर्थन किया, वो तब अकेले थे।

NSA अजित डोभाल ने कहा, “नेताजी ने कहा था कि मैं पूर्ण स्वतंत्रता से कम किसी चीज के लिए समझौता नहीं करूँगा। वह न केवल इस देश को राजनीतिक पराधीनता से मुक्त कराना चाहते हैं, बल्कि उन्होंने कहा था कि लोगों की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मानसिकता को बदलने की जरूरत है और उन्हें आकाश में स्वतंत्र पक्षियों की तरह महसूस करना चाहिए। नेताजी के दिमाग में ये विचार आया कि मैं अंग्रेजों से लड़ूँगा, मैं आजादी के लिए भीख नहीं माँगूँगा। ये मेरा अधिकार है और मैं इसे हासिल करके रहूँगा।”

NSA अजित डोभाल ने स्पष्ट कहा कि अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस होते तो भारत का विभाजन नहीं होता। उन्होंने बताया कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भी कहा था कि वो सिर्फ एक नेता को स्वीकार कर सकते हैं और वो हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस। डोभाल ने कहा कि उनके मन में अक्सर सवाल आता है कि प्रयास महत्वपूर्ण है या परिणाम। नेताजी के प्रयासों पर कोई संदेह नहीं कर सकता, महात्मा गाँधी भी उनके प्रशंसक थे। लेकिन, डोभाल ने कहा कि परिणाम पर आँकने से क्या बोस का प्रयास व्यर्थ गया?

उन्होंने ख़ुशी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदानों को फिर से जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। NSA ने कहा कि इतिहास बोस के प्रति निर्दयी रहा है।

केंद्रीय मंत्री के काफिले पर बंगाल में फिर हमला: बीरभूम जिले में मिले 28 क्रूड बम, अर्धसैनिक बलों की तैनाती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची ममता बनर्जी सरकार

चुनाव को लोकतंत्र का त्योहार होता है, लेकिन बंगाल का अपवाद इसका अपवाद बनता जा रहा है। वहाँ चुनाव आते ही लोगों अब सिहरने लगे हैं। कारण है सुनियोजित एवं निरंतर हिंसा। राज्य में पंचायत चुनाव का ऐलान होते ही पश्चिम बंगाल एक बार फिर हिंसा का सामना कर रहा है। बंगाल में शनिवार (17 जून 2023) को केंद्रीय मंत्री पर भी हमला किया गया है।

केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक अपने काफिले का साथ शनिवार को जा रहे थे। इस दौरान बंगाल के कूचबिहार जिले में उनके काफिले पर हमला कर दिया गया। प्रमाणिक के काफिले पर दिनहाटा इलाके में यह दूसरी बार हमला हुआ है। इससे पहले 25 फरवरी 2023 को उन पर हमला किया गया था।

इस हमले में भाजपा के कुछ कार्यकर्ता घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) कार्यकर्ताओं के बीच भी झड़प हो गई। यह झड़प कूचबिहार के साहेबगंज बीडीओ कार्यालय में नामांकन पत्रों की जाँच के दौरान हुई। उधर, टीएमसी विधायक उदयन गुहा ने किसी तरह के हमले से इनकार किया है।

प्रमाणिक ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन वे मूकदर्शक बने रहे। बंगाल भाजपा के प्रमुख सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पुलिस लाचार हो गई हैं। मजूमदार ने कहा कि निशीथ प्रमाणिक की कार पर बम फेंका गया है।

मजूमदार ने TMC के स्थानीय विधायक पर सवाल उठाते हुए कहा, “उदयन गुहा अपने 1000-1500 गुंडों के साथ वहाँ खड़ा थे। वे हमारे कार्यकर्ताओं के हाथों से फॉर्म बी छीन रहे थे। चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन चुपचाप बैठे हैं। अगर किसी मंत्री पर इस तरह हमला किया जा सकता है तो हम कल्पना कर सकते हैं कि पश्चिम बंगाल में क्या स्थिति होगी।”

सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “मैंने राज्यपाल को हिंसा के बारे में सब कुछ बता दिया है। उन्होंने हमें बताया कि पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा को रोकने के लिए सभी आवश्यक और प्रभावी कदम उठाए जाएँगे।”

उधर, राज्य के बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में शनिवार (17 जून 2023) को 28 क्रूड बम मिला है। जिले में लगातार दो दिनों में दूसरी बार बम बरामद किए गए हैं। इससे पहले शुक्रवार (16 जून 2023) को 20 बम बरामद किए गए थे। ये बम टीएमसी के दफ्तर के पीछे बने एक घर से बरामद किए गए हैं।

बता दें कि 16 जून 2023 को राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने 24 परगना जिले के हिंसा प्रभावित भंगोर का दौरा किया था। भंगोर में नामांकन को लेकर हुई झड़प के बाद हिंसा भड़क गई थी। दौरे के बाद राज्यपाल ने कहा था कि राजनीतिक हिंसा खत्म होनी चाहिए। चुनाव में जीत वोट की गिनती के आधार पर होनी चाहिए, न कि शवों की संख्या के आधार पर।

दूसरी तरफ कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा मतदान के दौरान सभी जिलों में अर्धसैनिक बलों को तैनात करने के निर्देश का राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के अधिकारियों ने शुक्रवार (16 जून 2023) को कानूनी सलाहकारों के साथ बैठक करने के बाद यह निर्णय लिया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार (15 जून 2023) को एक मामले की सुनवाई करने के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को निर्देश दिया था कि वह पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई 2023 को होने वाले पंचायत चुनावों के मतदान के लिए केंद्र से 48 घंटे के अंदर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की माँग करे। उच्च न्यायालय ने हर जिले में अर्धसैनिक बलों को तैनात करने का निर्देश दिया था।

‘₹2.5 करोड़ हड़प गई’: ‘ग़दर 2’ की रिलीज से पहले अमीषा पटेल ने राँची की अदालत में किया सरेंडर, धोखाधड़ी के साथ-साथ धमकी देने का भी है आरोप

गदर-2 के प्रमोशन में जुटी एक्ट्रेस अमीषा पटेल को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, चेक बाउंस, धोखाधड़ी और धमकाने का आरोप झेल रहीं अमीषा पटेल (Amisha Patel) को रांची कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालाँकि कोर्ट ने उन्हें बुधवार ( 21 जून, 2023) को फिर से पेश होने के लिए कहा है। इससे पहले कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्होंने मुँह छिपाकर कोर्ट में सरेंडर किया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमीषा पटेल और उनके बिजनेस पार्टनर कुणाल गूमर के खिलाफ चेक बाउंस, धोखाधड़ी और धमकी देने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में सुनवाई के लिए कोर्ट ने अप्रैल 2023 में अमीषा पटेल को नोटिस जारी कर पेश होने के लिए कहा था। 

हालाँकि, अमीषा कोर्ट में हाजिर नहीं हुईं। इसलिए राँची की सिविल कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया था। इसके बाद अमीषा पटेल ने शनिवार (17 जून, 2023) को कोर्ट में सरेंडर किया था। सरेंडर करने रांची कोर्ट पहुँची अमीषा पटेल दुपट्टे से अपना मुँह छिपाए नजर आईं। मामले की सुनवाई करते हुए राँची सिविल कोर्ट के सिविल जज सीनियर डिविजन डीएन शुक्ला ने उन्हें 10 हजार रुपए के दो बेल बॉण्ड पर सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने अमीषा को बुधवार (21 जून, 2023) को फिर से पेश होने के लिए कहा है।

यदि अमीषा 21 जून को कोर्ट में पेश नहीं होतीं तो उनकी जमानत रद्द हो सकती है।

क्या है मामला

दरअसल, झारखंड की राजधानी राँची में रहने वाले फिल्म प्रोड्यूसर अजय कुमार सिंह ने अमीषा पटेल और उनके बिजनेस पार्टनर कुणाल गूमर के खिलाफ 17 नवंबर 2018 को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। अजय कुमार सिंह ने अमीषा पटेल पर चेक बाउंस, धोखाधड़ी और धमकी देने का भी आरोप लगाया है। इसी मामले में कोर्ट ने अमीषा पटेल को कई बार समन जारी किए थे। हालाँकि, इसके बाद भी वह कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहीं थीं। ऐसे में कोर्ट ने अप्रैल 2023 में हुई सुनवाई के बाद अमीषा के खिलाफ वारंट जारी कर दिया था।

फिल्म प्रोड्यूसर अजय कुमार सिंह का आरोप है कि अमीषा पटेल ने ‘देसी मैजिक’ फिल्म बनाने और उसके प्रमोशन के लिए ढाई करोड़ रुपए लिए थे। फिल्म की शूटिंग साल 2013 में शुरू हुई लेकिन लंबे वक्त तक इंतजार करने के बाद भी फिल्म रिलीज नहीं हुई। ऐसे में अजय ने अमीषा से अपने पैसों की माँग की। इस पर अमीषा पटेल ने उन्हें ढाई करोड़ व 50 लाख रुपए के दो चेक दिए थे। लेकिन दोनों ही चेक बाउंस हो गए। इस पर अजय सिंह ने अमीषा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया था।

व्याकरण के विद्वान, वेदों के ज्ञाता, धाराप्रवाह मधुर वाणी बोलने वाले, शुद्ध उच्चारण… जान लीजिए कैसे थे हमारे हनुमान जी, बॉलीवुड नहीं वाल्मीकि रामायण से

फिल्म ‘आदिपुरुष’ की खासी आलोचना हो रही है, जिसका एक बड़ा कारण है इसमें हनुमान जी का चित्रण। फिल्म में लंका दहन से पहले एक डायलॉग है, “बत्ती तेरे बाप की, तेल तेरे बाप का, आग तेरे बाप की, तो जलेगी भी तेरे बाप की।” लोग पूछ रहे हैं कि क्या हनुमान जी इस तरह के संवाद बोल सकते हैं? ये संवाद मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं। फिल्म में हनुमान जी के लुक को लेकर भी तरह-तरह की बातें हो रही हैं। उन्हें मुस्लिम वाली वेशभूषा दे दी गई है, सबको ऐसा लग रहा।

ऐसे में आपके मन में ये सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि हनुमान जी कैसे दिखते थे, उनका व्यवहार कैसा था? क्या हनुमान जी इसी तरह तू-तड़ाक में बात करते थे या फिर उनका व्यक्तित्व अलग था? रामकथा का प्रथम मूल स्रोत है वाल्मीकि रामायण, जिसे महाकवि वाल्मीकि ने लिखा है। वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में सीता हरण के बाद श्रीराम और लक्ष्मण की हनुमान जी से भेंट होती है, वहाँ उनके बारे में काफी कुछ पता चल जाता है।

श्रीराम ने पहली भेंट में हनुमान जी को कैसा पाया? ‘वाल्मीकि रामायण’ से समझिए

रामकथा जानने वालों को ये बताने की आवश्यकता नहीं है कि वानरों के राज्य में बाली और सुग्रीव नामक दो भाइयों के बीच गहरी शत्रुता थी। बाली दुष्ट और बलवान था, अतः सुग्रीव अपने कुछ सहयोगियों के साथ किष्किंधा पर्वत पर निवास करते थे। जब श्रीराम और लक्ष्मण उधर आए तो उसके मन में डर बैठ गया कि कहीं ये बाली के योद्धा तो नहीं। अतः, उसने श्री हनुमानजी को इसका पता लगाने के लिए भेजा। हनुमान जी एक विप्र का रूप धारण कर के दोनों भाइयों के समीप पहुँचे।

यहाँ वाल्मीकि जी लिखते हैं कि हनुमान जी ने मन को प्रिय लगने वाली मधुर वाणी में वार्तालाप आरंभ किया। स्पष्ट है कि हनुमान जी परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लेते थे। उन्हें कहाँ क्या बोलना है और किस तरह, इसकी समझ थी। उन्होंने दोनों भाइयों के रूप और गुण की प्रशंसा करते हुए उनसे वहाँ आने का अभिप्राय पूछा। हनुमान जी ने दोनों भाइयों को बताया कि वो जैसा चाहें वैसा रूप धारण कर सकते हैं। उन्होंने खुद का परिचय सुग्रीव के मंत्री के रूप में दिया।

सोचिए, हनुमान जी ने ऐसी-ऐसी बातें की कि रघुकुल शिरोमणि प्रसन्न हो उठे और उन्होंने फिर लक्ष्मण से चर्चा की। श्रीराम ने हनुमान जी के बारे में जो चर्चा किया, उन्होंने जो पाया, वो आपको बताते हैं। श्रीराम ने हनुमान जी को ‘वाक्यज्ञ’ कहा है, अर्थात वो बातों के मर्म को समझने वाले हैं। सामने वाला क्या बोल रहा है और जवाब में क्या बोलना चाहिए, इसकी उन्हें समझ थी। श्रीराम कहते हैं कि जिसे ऋग्वेद की शिक्षा नहीं मिली, जिसने यजुर्वेद का अभ्यास नहीं किया और जो सामवेद का विद्वान नहीं, वो इस तरह बातें नहीं कर सकता।

अर्थात, श्रीराम ने हनुमान जी की बातों से ही अंदाज़ा लगा लिया कि वो तीनों प्रमुख वेदों के ज्ञाता हैं। हनुमान जी इस प्रसंग में काफी देर तक बोलते हैं। श्रीराम ने पाया कि इसके बावजूद उनके मुँह से एक भी अशुद्धि नहीं निकली। अर्थात, उन्होंने सटीक शब्दों का प्रयोग किया, ऐसा कुछ नहीं कहा जो सामने वाले को बुरा लगे और उनका उच्चारण सटीक था। इतना ही नहीं, बोलने समय हनुमान जी के शरीर के अंगों पर भी श्रीराम की नजर थी।

कोई कुछ बोल रहा है तो उसकी भाव-भंगिमा कैसी होती है, इस पर काफी कुछ निर्भर करता है। हनुमान जी की भौहें, ललाट, मुख और नेत्र के अलावा सभी अंग उनकी बातों के हिसाब से उनका साथ देते थे। यानी, सभी अंगों में और उनकी बातों में तालमेल दिखता था। कोई साधारण मनुष्य भले ही इसका अवलोकन न कर पाए, लेकिन श्रीराम ने इसे समझ लिया। भाषण की एक और कला होती है – कम से कम शब्दों में अपनी बात रखना।

श्रीराम ने लक्ष्मण से इसकी चर्चा भी की है कि कैसे संक्षिप्त शब्दों में हनुमान जी ने अपनी बात कह डाली। अर्थात, अपनी बातों का मर्म सामने वाले के हृदय में पहुँचा दिया। उन्होंने एक भी कड़वा वचन नहीं बोला, बोलने के दौरान वो कहीं इस तरह से नहीं रुके जैसे कुछ भूल गए हैं अथवा उन्होंने कुछ गलत बोल दिया हो। न उनकी आवाज ऊँची थी, न ज्यादा धीमी, मधुर थी। उन्होंने कुछ भी तोड़-मरोड़ कर नहीं कहा, सीधे सपाट शब्दों में अपनी बात रखी।

सोचिए, भगवान श्रीराम कितने बड़े ज्ञानी थे कि उन्होंने सामने वाले की बातों को सुन कर उसके बारे में इतना कुछ जान लिया। उससे भी ज़्यादा हनुमान जी कितने बड़े चतुर विद्वान थे कि स्वयं श्रीराम उनसे प्रभावित हो गए। नियम के हिसाब से बोली गई शुद्ध वाणी को व्याकरण में ‘संस्कार’ कहा गया है, शब्द उच्चारण की शास्त्रीय परिपाटी ‘क्रम’ कहलाती है और धाराप्रवाह बोलने वालों को ‘अविलम्बित’ कहा जाता है। श्रीराम को हनुमान में ये तीनों ही गुण विद्यमान दिखे।

श्रीराम तो यहाँ तक कहते हैं कि हृदय, कंठ और मूर्धा (मुँह के अंदर का तालु और ऊपर के दाँतों के पीछे सिर की तरफ़ का भाग जिसे जीभ का अगला भाग ट्, ठ्, ड्, ढ्, और ण वर्ण का उच्चारण करते समय उलटकर छूता है) के सटीक प्रयोग से बोली गई इस वाणी से तलवार उठाए हुए शत्रु का भी हृदय परिवर्तित हो जाए। श्रीराम यहाँ सुग्रीव को भाग्यशाली मानते हैं, कि उनके पास हनुमान जैसे दूत हैं। हनुमान जी ने बातचीत के द्वारा वहीं संधि प्रस्ताव रख दिया और वो स्वीकृत भी हो गया।

रावण के दरबार में कटु वचन सुन कर भी हित की बात बोलते रहे हनुमान जी

लंका दहन से पहले हनुमान जी और लंका के योद्धाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ था और ब्रह्मास्त्र का सम्मान करते हुए उन्हें मेघनाद का बंदी बनना पड़ा था, हो सकता है उस समय वो आक्रोशित भी रहे हों। लेकिन, हनुमान जी ने कटु वचन का प्रयोग किया हो, ऐसा नहीं हो सकता। तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भी उनके रावण के साथ बहस की चर्चा है, लेकिन वहाँ भी वो रावण को ज्ञान ही दे रहे हैं, उसे समझा रहे हैं।

उलटा होइहि कह हनुमाना। मतिभ्रम तोर प्रगट मैं जाना॥” – रावण द्वारा हनुमान जी के लिए बार-बार अपशब्दों का प्रयोग किए जाने के बावजूद भी उन्होंने यही समझाया कि तुम्हारे मन में भ्रम है। रावण के दरबार में उन्होंने श्रीराम की महिमा का बखान किया। उन्होंने उलटी-सीधी बातें नहीं की। “जदपि कही कपि अति हित बानी। भगति बिबेक बिरति नय सानी॥” – उन्होंने शत्रु के सामने बंदी बन कर भी दुश्मन के ही हित की बात की।

हनुमान जी ने भक्ति और बुद्धि भरी बाते की, तुलसीदास स्पष्ट कहते हैं। रावण ने इस दौरान न सिर्फ वानर जाति, बल्कि श्रीराम के लिए भी कड़वे शब्दों का प्रयोग किया लेकिन हनुमान जी उसे समझाते रहे। आश्चर्य नहीं कि श्रीराम ने हनुमान जी को ‘वाक्यज्ञ’ कहा था। अतः, हनुमान जी मधुर वाणी बोलने वाला वेदज्ञ थे। उनका व्याकरण सही था। वो अपनी वाणी से सामने वाले को प्रभावित कर देते थे। धाराप्रवाह बोलते थे, लेकिन कटु नहीं।

दलित की हत्या करने वाला शरीफ निकला आतंकी, ₹2 करोड़ बैलेंस और 100 बीघा पर कब्ज़ा: मृतक के परिवार को BJP देगी ₹5 लाख, पालतू खच्चरों ने खोला था राज़

हिमाचल प्रदेश के चंबा में एक मुस्लिम लड़की से प्यार करने के कारण एक दलित लड़के की हत्या करके उसके शव को 8 टुकड़ों में काटे जाने का बाद तनाव हो गया है। मृतक को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच भाजपा ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी है। मामले को ST-SC आयोग के समक्ष उठाने का भी फैसला लिया गया है।

वहीं, यह बात भी सामने आई है कि 21 वर्षीय मृतक मनोहर के शव का पहुँचने में उसके खच्चरों ने मदद की थी। मनोहर खच्चरों पर सामान ढोकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। जिस दिन से मनोहर लापता हुआ, उस दिन से ये खच्चर लगातार एक स्थान पर जाकर खड़े हो जाती थे। कहा जा रहा है कि इसी जगह पर मनोहर की हत्या की गई थी।

उधर, भाजपा ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपित शब्बीर (कहीं-कहीं शरीफ मोहम्मद नाम दिया गया है) का आतंकियों से तार जुड़े पाए गए थे। उसने नोटबंदी के दौरान 95 लाख रुपए बदलवाए थे। इतना ही नहीं, उसके खाते मे दो करोड़ रुपए हैं। वह 10,000 फीट की ऊँचाई पर अकेला घर बनाकर भी रहता है।

भाजपा ST-SC में उठाएगी मामला, 1 करोड़ रुपए और सरकारी नौकरी की भी माँग

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जयराम ठाकुर (Jairam Thakur) ने मृतक मनोहर लाल के परिजनों को 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस राशि से मनोहर के घर-परिवार को गुजर-बसर करने में मदद मिल सकेगी।

लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा है कि भाजपा इस मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के समक्ष उठाएगी। वहीं, भाजपा के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने प्रदेश सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए और सरकारी नौकरी देने की माँग की है।

खच्चरों ने खोला मनोहर की हत्या का राज

स्थानीय लोगों का कहना है कि खच्चरों पर समान ढोकर परिवार चलाने वाला मनोहर जिस दिन से मनोहर लापता हुआ था, उस दिन से उसके खच्चर एक स्थान पर जाकर खड़े हो जाते थे। ये वही स्थान था, जहाँ मनोहर की हत्या की गई।

स्थानीय लोगों को खच्चरों का ये व्यवहार अजीब लगता था। तीसरे दिन जब वहाँ से गुजरते एक राहगीर को दुर्गंध का अहसास हुआ तो स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। इस तरह मनोहर का शव 8 टुकड़ों में बरामद हुआ।

दो लड़कियों से संबंध और 15 दिन बाद शादी

एडीजीपी अभिषेक त्रिवेदी ने बताया कि मनोहर के आरोपियों के परिवार की लड़कियों के साथ प्रेम संबंध थे। अलग-अलग धर्म के होने के चलते लड़की के परिवार को ये नागवार गुजरा था। दूसरे धर्म से होने की वजह से आरोपित परिवार को मनोहर से परेशानी थे।

पुलिस का कहना है कि मनोहर को रास्ते से हटाने के लिए आरोपित के परिवार ने मनोहर को घर पर बुलाया और उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसके शव को टुकड़ों में काट दिए और नाले में फेंक दिया।

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर का कहना है कि आरोपित शरीफ मोहम्मद, मुसाफिर मोहम्मद और फरीदा ने मनोहर को अपने घर बुलाया। वहाँ उनका मनोहर से बहस हुई और फिर लाठी-डंडे से इतना मारा गया था कि वह बेहोश हो गया। उसके बाद आँगन में बेहोश पड़े मनोहर को आरी मशीन से 8 टुकड़ों में काट दिया गया।

मृतक मनोहर के परिजनों ने बताया कि उसकी शादी हत्या के 15 दिन बाद शादी होने वाली थी। मनोहर की शादी पास ही के ही एक गाँव में तय की गई थी। घर में उसकी शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। इस बीच उसकी हत्या कर दी गई। मनोहर अपने घर में कमाने वाला अकेला शख्स था।

मुख्य आरोपित शरीफ के आतंकियों से संबंध

भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्य आरोपित शरीफ से साल 1998 में चंबा के सतरुडी में हुए एक आतंकी हमले में पूछताछ की गई थी। इस हमले में 35 लोगों की मौत हो गई थी। शरीफ की बहन से मनोहर के संबंध थे। इससे वह नाराज रहता था।

विधानसभा में विपक्ष के नेता ठाकुर ने कहा कि मुख्य आरोपित ने नोटबंदी के दौरान 95 लाख रुपए के नोट बदलवाए थे और उसके खाते में दो करोड़ रुपए हैं। उन्होंने कहा कि जब आरोपित के पास इतने बड़े आय के साधन नहीं हैं तो उसके पास इतनी बड़ी कहाँ से आई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपित के पास सिर्फ 3 बीघा जमीन है, लेकिन वह 100 बीघा जमीन पर कब्जा किए हुए है। वह 10,000 फीट की ऊँचाई के बेहद दुर्गम इलाके में अपना घर बनाकर रहता है और उसके पास 100 भेड़-बकरियाँ हैं। इस मामले में जयराम ठाकुर ने NIA जाँच की भी माँग की। हालाँकि, कॉन्ग्रेस की सरकार इसे ऑनर किलिंग का मामला मान रही है।

फिल्म ‘आदिपुरुष’ ने पहले दिन बटोरे ₹140 करोड़! T-Series ने पोस्टर के जरिए किया ऐलान, कहा – हिंदी में बनी किसी भी फिल्म के लिए सबसे बड़ी ओपनिंग

शुक्रवार (16 जून 2023) को रिलीज हुई फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) को लेकर ज्यादातर निगेटिव रिव्यू ही सामने आए हैं। फिल्म के डायलॉग से लेकर एक्टर्स की वेशभूषा को लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं। हालाँकि इसके बाद भी फिल्म ने ताबड़तोड़ कमाई करते हुए पहले ही दिन 140 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया।

आदिपुरुष की एडवांस बुकिंग के आँकड़े सामने आने के बाद से ही ओपनिंग डे पर बंपर कमाई करने के कयास लगाए जा रहे थे। अब यह कयास सच भी साबित हुआ। फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब 93 करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं, दुनिया भर के आँकड़ों को देखें तो आदिपुरुष (Adipurush Opening Day Collection) ने 140 करोड़ रुपए की कमाई की है। आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोडक्शन बैनर टी-सीरीज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि ‘आदिपुरुष’ ने हिंदी में बनी किसी भी भारतीय फ़िल्म के मुकाबले ओपनिंग डे पर सबसे अधिक कमाई की है।

फिल्म के हिंदी संस्करण ने पहले दिन लगभग 36 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। कोरोना महामारी के बाद शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘पठान’ और साउथ की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘केजीएफ 2’ के बाद प्रभास की ‘आदिपुरुष’ ही तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म है। ज्ञात हो कि ‘पठान’ ने पहले दिन 57 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं साउथ के सुपरस्टार यश की ‘केजीएफ 2’ के हिंदी संस्करण ने ओपनिंग डे पर 54 करोड़ रुपए का कारोबार किया था।

वहीं, आदिपुरुष ने रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ को पीछे छोड़ दिया है। ‘ब्रह्मास्त्र’ ने ओपनिंग डे पर 36 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

रामायण और प्रभास के नाम पर चली फ़िल्म?

रामायण पर आधारित ‘आदिपुरुष’ को लेकर जिस तरह से दर्शकों और फिल्म क्रिटिक की प्रतिक्रिया देखने को मिली है। उससे ऐसा लग रहा था कि फिल्म कमाई के मामले में अनुमानित आँकड़ों से कहीं पीछे रह जाएगी। हालाँकि ‘रामायण’ के चलते फिल्म को पर्याप्त दर्शक मिले। साथ ही प्रभास के स्टारडम की भी इसमें बड़ी भूमिका रही है।

वास्तव में, ‘आदिपुरुष’ की कास्ट देखें तो प्रभास के अलावा कृति सेनन, सैफ अली खान या फिर सनी सिंह ऐसे स्टार नहीं हैं जिन्हें बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी ओपनिंग के लिए जाना जाता हो। लेकिन बाहुबली से हिंदी भाषी दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले प्रभास को साउथ के लोगों से भी भरपूर प्यार मिला है। यही कारण है कि फ़िल्म बड़ी ओपनिंग हासिल कर पाई।

मणिपुर में एक और BJP नेता का घर जलाया, कहीं 400 की भीड़ ने हमला कर लूटे हथियार: भाजपा दफ्तर को भी किया तहस-नहस

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हिंसा (Manipur Violence) जारी है। उपद्रवियों ने थाना सहित कई जगहों पर हमला और आगजनी करने की कोशिश की। इतना ही नही, शस्त्रागार पर भी हमला कर दिया और पुलिस पर फायरिंग की। वहीं, भाजपा (BJP) के एक और नेता के घर को आग के हवाले कर दिया। इसके पहले केंद्रीय मंत्री राजकुमार रंजन सिंह के घर को उपद्रवियों ने आग लगा दी थी।

बता दें कि अनुसूचित जनजातीय का दर्जा को लेकर पिछले लगभग डेढ़ महीने से मणिपुर जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। इसमें अभी तक 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। स्थिति पर नियंत्रण के लिए पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल के साथ-साथ सेना को भी उतारा गया है।

हालाँकि, इंटरनेट सेवा बंद करने और इलाके में धारा 144 लगाने और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद भी मणिपुर में स्थिति में अभी सुधार नहीं दिख रहा है। हर जगह हिंसा, उपद्रव और आगजनी दिख रही है।

ताजा मामले में 400 उपद्रवियों ने एक शस्त्रागार पर हमला कर दिया और हथियार लूटने की कोशिश की। इस दौरान थाने में लूटपाट और सुरक्षा बलों पर ऑटोमेटिक हथियारों से फायरिंग भी की गई। हिंसाग्रस्त इलाकों में भाजपा के कार्यालयों और उसके नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया गया है।

कल आधी (16-17 जून 2023) की रात को थोंगजू विधानसभा क्षेत्र के खोंगमन ओकराम चुथेक स्थित भाजपा मंडल मुख्यालय में भीड़ ने तोड़फोड़ की। भीड़ ने भाजपा मंडल कार्यालय को जलाने की कोशिश की। हालाँकि स्थानीय लोगों के साथ गर्मागर्म बहस के बाद भीड़ अपने प्रयास से पीछे हट गई और कार्यालय में तोड़फोड़ की गई।

उधर, विष्णुपुर जिले के क्वाकटा में चूराचांदपुर जिले के कांगवई में स्वचालित हथियारों से उपद्रवी फायरिंग कर रहे हैं। यह फायरिंग शनिवार (17 जून 2023) की सुबह तक रूक-रूक कर जारी थी। वहीं, एक अस्पताल के परिसर में आगजनी की कोशिश की गई। इस दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियाँ चलाईं।

वहीं, थोंगजू के पास भाजपा के स्थानीय विधायक के घर में लोग घुस गए और वहाँ तोड़फोड़ करने की कोशिश की। इससे पहले आधी रात को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अधिकारमयुम शारदा देवी के घर पर उपद्रवियों ने तोड़फोड़ करने की कोशिश की।

इसी बीच इंटेलिजेंस ने दावा किया है कि कुछ लोग पुलिस और कमांडो की वर्दी में राज्य में दाखिल हो सकते हैं। इन लोगों ने एक दर्जी को 500 वर्दी सिलने का ऑर्डर दिया है। इसको लेकर राज्य की पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्ना हो गई हैं।

इस बीच पूर्व आर्मी चीफ वीपी मलिक ने मणिपुर मामले में PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से दखल देने की अपील की है। वीपी मलिक ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एल निशिकांत सिंह के ट्वीट के जवाब में दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने गुरुवार (15 जून 2023) को ट्वीट करके राज्य के हालात सीरिया-लेबनान जैसे बताए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल ने लिखा था, ‘मैं मणिपुर का एक साधारण भारतीय हूँ, जो सेवानिवृत्त जीवन जी रहा है। राज्य अब स्टेटलेस है। जिंदगी और संपत्ति को कोई भी और कभी भी खत्म कर सकता है। जैसे लीबिया, लेबनान, नाइजीरिया, सीरिया में होता है। ऐसा लगता है कि मणिपुर को अपनी ही आग में उबलने के लिए छोड़ दिया गया है। क्या कोई सुन रहा है?”

ऐसी ही बात केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने भी कहा था। उनका घर जलाने के बाद रंजन सिंह ने कहा था कि मणिपुर में कानून व्यवस्था फेल हो गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मदद के बावजूद राज्य सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रही है।

राजधानी इंफाल में हिंसक भीड़ गुरुवार (15 जून 2023) की रात शहर के कोंगबा इलाके में स्थित केंद्रीय मंत्री राजकुमार रंजन सिंह के घर में घुस गई और उसे जला दिया था। मंत्री ने कहा था, “मैं इस समय आधिकारिक काम के लिए केरल में हूँ। शुक्र है कि कल रात मेरे इंफाल स्थित घर में कोई घायल नहीं हुआ। बदमाश पेट्रोल बम लेकर आए थे और मेरे घर के भूतल और पहली मंजिल को नुकसान पहुँचाया गया है।”

इससे पहले बुधवार (14 जून 2023) को इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में मणिपुर के मंत्री नेमचा किपजेन के आधिकारिक क्वार्टर में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी थी। यह घटना जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर के खमेनलोक इलाके के एक गाँव में बदमाशों के हमले में 9 लोगों की मौत और 10 अन्य के घायल होने के एक दिन बाद हुई।

बताते चलें कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच एक महीने से जारी जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि 310 अन्य घायल हो गए हैं। राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है।

मैतेई जाति ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जा देने की माँग की थी। इसके विरोध में कुकी समुदाय के लोगों ने 3 मई 2023 को पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन किया था। इस दौरान हिंसा भड़क गई, जो आजतक जारी है। मैतेई मणिपुर की आबादी में लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं।

वहीं, मणिपुर के आदिवासी समुदाय- नागा और कुकी समाज की आबादी 40 प्रतिशत है और वे भी पहाड़ी जिलों में रहते हैं। नागा और कुकी समाज को ST का दर्जा मिला हुआ है और वे कुकी को ST का दर्जा दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।

‘कम कपड़े पहनने से होती है परेशानी’: तेलंगाना में बुर्कानशीं छात्रा को रोका तो मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन, बोले – यूरोपियन कपड़ों से हालात होंगे खराब

तेलंगाना में एक बार फिर बुर्का विवाद सामने आया है। राजधानी हैदराबाद में मुस्लिम लड़कियों ने कॉलेज के कर्मचारियों पर परीक्षा कक्ष में बुर्का पहनकर बैठने की अनुमति न देने का आरोप लगाया। लड़कियों का आरोप है कि उन्हें बुर्का उतारने पर मजबूर किया वहीं, इस मामले में तेलंगाना के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली ने कहा है कि कम कपड़े पहनने से लड़कियों को परेशानी होती है। इसलिए उन्हें अधिक कपड़े पहनने चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला हैदराबाद के संतोष नगर इलाके में स्थित केवी रंगा रेड्डी महिला कॉलेज का है। यहाँ मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब और बुर्का पहनकर परीक्षा देने पहुँची थीं। जहाँ लड़कियों का आरोप है कि बुर्का पहनने के कारण कॉलेज के कर्मचारियों ने उन्हें परीक्षा कक्ष में नहीं जाने दिया। इसके चलते परीक्षा देने से पहले उन्हें करीब आधे घण्टे तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद वह हिजाब उतारकर ही परीक्षा दे पाईं।

कॉलेज की एक छात्रा का बयान भी सामने आया है। छात्रा का कहना है कि अन्य कॉलेजों में हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति है। लेकिन इस कॉलेज में हिजाब पर रोक है। छात्रा का कहना है कि इससे पहले हुई परीक्षा में भी बुर्का नहीं पहनने दिया गया था। छात्रा के इस बयान से ऐसा लगता है कि पहली परीक्षा में हिजाब को लेकर सूचनाएँ  दी गईं थी। लेकिन इसके बाद भी दूसरी परीक्षा में लड़कियाँ हिजाब पहनकर आईं।

वहीं, इस मामले में तेलंगाना के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली के बयान ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा है, “कोई हेडमास्टर या प्रिंसिपल ऐसा कर रहे होंगे। लेकिन हमारी नीति पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है। इंसान की अपनी मर्जी है जो चाहे वो पहन ड्रेस सकता है। लेकिन यूरोप की तरह पहनेंगे तो अच्छा नहीं लगेगा। हालात खराब होंगे। इसलिए इस्लामिक ड्रेस या दूसरे लोग हिंदू बहनें अपनी ड्रेस पहनें।”

उन्होंने आगे कहा है, “हिंदू महिलाएँ सिर में पल्लू रखती हैं वह अच्छा ड्रेस है उसकी हमें इज्जत करनी चाहिए। खासतौर से औरतों के कम कपड़े पहनने से परेशानी होती है। ज्यादा कपड़े पहनने से लोगों को सुकून मिलता है। ऐसा कहीं लिखा है कि बुर्का नहीं पहना जा सकता। हम एक्शन लेंगे।”

बता दें कि पिछले साल अक्टूबर 2022 में तेलंगाना के ही आदिलाबाद में आयोजित एक परीक्षा के दौरान हिंदू महिलाओं को मंगलसूत्र से लेकर पायल, चूड़ियाँ, कंगन और कान के झुमके-बाले तक उतारने के लिए कहा गया था। वहीं, इसी परीक्षा केंद्र पर मुस्लिम महिलाओं को बे रोक-टोक बुर्के सहित परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा था। इसका वीडियो सामने आने के बाद जमकर बवाल मचा था।

हमने भी चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं… मौलाना तौकीर रज़ा ने अवैध मजारों के ध्वस्तीकरण पर सरकार को धमकाया, मुस्लिम लॉ बोर्ड ने UCC पर दी दंगों की धमकी

देश में ‘समान नागरिक संहिता (UCC)’ के लागू होने की सुगबुगाहट के साथ ही ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ की भौंहें तन गई हैं। विधि आयोग ने UCC को लेकर जनता के सुझाव माँगे हैं। इस पर AIMPLB ने कहा है कि भारत में इसकी ज़रूरत नहीं है और ये देश के संसाधनों की बर्बादी है। बोर्ड ने अनावश्यक, अव्यवहारिक और खतरनाक करार दिया। प्रवक्ता SQR इलियास ने कहा कि देश की विविधता ही इसकी पहचान है, ऐसे में इससे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।

इस दौरान बोर्ड ने जनजातीय समाज के अधिकारों को ढाल बनाते हुए कहा कि इससे उन्हें मिले विशेष अधिकार भी खत्म हो जाएँगे। उन्होंने तर्क दिया कि बोर्ड के कानून कुरान से लिए गए हैं, जिसे काटने की इजाजत किसी मुस्लिम को भी नहीं है तो फिर सरकार कैसे किसी कानून के जरिए इसमें हस्तक्षेप कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि देश में अन्य संप्रदायों की भी यही चिंताएँ हैं। साथ ही देश में दंगे भड़कने की धमकी देते हुए इलियास ने कहा कि सरकार को इससे बचना चाहिए।

उधर UCC और अवैध मजारों के ध्वस्तीकरण पर ‘इत्तेहाद-ए- मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा भी भड़क गए हैं। बरेली के मुस्लिम नेता ने कहा कि पहले भाजपा अपने मंदिरों को तोड़े, फिर मजारों की बात करे। उन्होंने एक्शन के रिएक्शन की बात करते हुए कहा कि हमारे सब्र का इम्तिहान न लिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जो हो रहा है उसे पूरे देश में दोहराने की साजिश चल रही है। मौलाना ने कहा कि अगर मजारों पर बुलडोजर चलता रहा तो उत्तराखंड पहुँच कर मुस्लिम हुकूमत का घेराव करेंगे।

मौलाना तौकीर रज़ा ने ‘लव जिहाद’ को भी ‘भगवा ट्रैप’ करार देते हुए कहा कि हमने पाबंदी लगाई है कि अगर कोई लड़का हिन्दू लड़की लेकर आता है तो उसका और उसके परिवार का बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने अपने नौजवानों को नियंत्रण में समझा-बुझा कर रखा है। मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा, “हमने भी चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं।” उन्होंने पूजा स्थल कानून की बात करते हुए दावा किया कि 1921 से पहले बने सभी ऐसे स्थल वैध हैं।

‘सूडो-सेक्युलर मीडिया और नेताओं ने घाव पर नमक छिड़का’: गोधरा दंगों में कोर्ट ने 35 को बरी किया, कहा- नहीं थी कोई साजिश

गुजरात की एक निचली अदालत ने साल 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों से जुड़े चार मामलों से 35 लोगों को बरी कर दिया है। जिन आरोपितों को बरी किया गया है, उनमें कई डॉक्टर, प्रोफेसर, शिक्षक और व्यवसायी हैं। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि छद्म धर्मनिरपेक्ष मीडिया और संगठनों के हंगामे के कारण अनावश्यक रूप से मुकदमा लंबा चला।

पंचमहल जिले के हलोल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्ष बालकृष्ण त्रिवेदी ने यह भी कहा है कि गोधरा के बाद हुए दंगे स्वत: स्फूर्त थे और ना कि छद्म-धर्मनिरपेक्ष व्यक्तियों और नेताओं द्वारा वर्णित योजनाबद्ध। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अभियोजन सफल नहीं हो सकता, क्योंकि कथित कहानी को पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया है।

15 जून 2023 को उपलब्ध हुए फैसले में न्यायाधीश ने शिक्षाविद केएम मुंशी को प्रमुख गुजराती लेखक और महान कॉन्ग्रेसी नेता के रूप में उद्धृत करते हुए कहा, “यदि हर बार सांप्रदायिक संघर्ष होता है तो किसी बात की परवाह किए बिना बहुमत को दोषी ठहराया जाता है। पारंपरिक सहिष्णुता का समय बीत जाएगा।

न्यायाधीश त्रिवेदी ने 12 जून 2023 को चार मामलों में कुल 35 अभियुक्तों के खिलाफ फैसला सुनाया था। लगभग बीस साल पहले जब मुकदमा शुरू हुआ तो कुल 52 अभियुक्त थे। हालाँकि, समय बीतने के साथ 17 लोगों की मौत हो गई। इस तरह मामले में सिर्फ 35 अभियुक्त ही बचे थे।

दरअसल, गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में के S-6 डब्बे में आग लगाने की घटना के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी 2002 को कलोल बस स्टैंड, डेलोल गाँव और डेरोल स्टेशन क्षेत्र के पास हिंसा भड़क गई थी। इनमें रूहुल अमीन पड़वा, हारून अब्दुल सत्तार तसिया और यूसुफ इब्राहिम शेख नाम के तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी।

आरोपितों पर इन तीन लोगों की हत्या के अलावा दंगा करने, आगजनी, गैरकानूनी जुटाव, अवैध हथियार रखने का आरोप लगाया गया था। हारून, रूहुल और यूसुफ अलग-अलग जगहों पर मारे गए। हारून को जिंदा जला दिया गया था। हारून का शव भी कभी बरामद नहीं हो सका था।

फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि किसी पर आरोपित के खिलाफ दंगा का अपराध साबित नहीं होता। पुलिस आरोपितों के खिलाफ एक भी सबूत नहीं पेश कर पाई। अभियोजक ने अनावश्यक रूप से 130 गवाहों को बुलाकर मामले को लंबा खींच दिया। इस मामले में लगभग सभी गवाहों की गवाही पूरी तरह अविश्वसनीय साबित हुई।

36 पन्नों के अपने फैसले में न्यायाधीश त्रिवेदी ने इस टिप्पणी के साथ शुरू किया कि भारत में सांप्रदायिक हिंसा कोई नई घटना नहीं है। ये कभी-कभी छोटे-छोटे मुद्दों पर विवादों या अफवाहों से भी शुरू हो जाती हैं। गवाहों की गवाही की अविश्वसनीयता पर कोर्ट ने कहा, “हमारे देश में लोगों के बीच सच्चाई का स्तर बहुत कम है।”

न्यायाधीश ने विस्तार से वर्णन किया कि कैसे गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के कोच एस-6 को जला दिया गया था, जिसमें 59 यात्रियों की मौत हो गई थी। इससे आम लोग हैरान और परेशान हो गए।

न्यायाधीश ने आगे कहा, “शांतिप्रिय गुजराती लोग इस घटना से हैरान और परेशान थे। हमने देखा कि तत्कालीन छद्म धर्मनिरपेक्ष मीडिया और राजनेताओं ने आक्रोशित लोगों के घावों पर नमक छिड़का। रिपोर्ट कहती है कि गोधरा के बाद गुजरात के 24 जिलों में से 16 सांप्रदायिक दंगे हुए। गुजरात में दंगे स्वतःस्फूर्त थे, ना कि वे सुनियोजित नहीं थे, जैसा कि छद्म-धर्मनिरपेक्षवादियों ने बताया।