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मोदी सरकार ने बदला नेहरू मेमोरियल म्यूजियम का नाम, कॉन्ग्रेस भड़की: BJP ने कहा- इससे सभी प्रधानमंत्रियों को सम्मान मिलेगा

दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (NMML) का नाम बदल दिया गया है। अब इसे प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (Prime Minister Museum and Library- PMML) के नाम से जाना जाएगा। नेहरू के नाम को हटाने के बाद कॉन्ग्रेस (Congress) सत्ताधारी भाजपा (BJP) पर हमलावर हो गई है।

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि ‘संकीर्णता और प्रतिशोध का दूसरा नाम मोदी’ है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री के योगदान को कमतर करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, भाजपा ने निर्णय का बचाव किया और कॉन्ग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

दरअसल, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम बदलकर प्राइम मिनिस्टर म्यूजियम एंड लाइब्रेरी करने का निर्णय एक विशेष बैठक में लिया गया। इस विशेष बैठक की अध्यक्षता सोसायटी के उपाध्यक्ष एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता मे हुई। अब इस संग्रहालय में सारे प्रधानमंत्रियों के योगदान को चित्रित किया जाएगा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2016 में तीन मूर्ति परिसर में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक संग्रहालय स्थापित करने का विचार रखा था। इसके बाद NMML की कार्यकारी परिषद ने 25 नवंबर 2016 को अपनी बैठक में इसे मंजूरी दे दी थी। अब प्रधानमंत्री संग्रहालय को 21 अप्रैल 2022 से जनता के लिए खोल दिया गया है।

इस के इस निर्णय पर जयराम ट्वीट किया, “संकीर्णता और प्रतिशोध का दूसरा नाम मोदी है। 59 वर्षों से अधिक समय से नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय एक वैश्विक बौद्धिक ऐतिहासिक स्थल और पुस्तकों एवं अभिलेखों का खजाना घर रहा है। अब से इसे प्रधानमंत्री म्यूजियम कहा जाएगा।”

पीएम मोदी पर निशना साधते हुए उन्होंने आगे कहा, “पीएम मोदी भारतीय राष्ट्र के शिल्पकार के नाम और विरासत को विकृत करने, नीचा दिखाने और नष्ट करने के लिए क्या नहीं करेंगे। अपनी असुरक्षा के बोझ तले दबा एक तुच्छ व्यक्ति स्वघोषित विश्वगुरु बना फिर रहा है।” 

बता दें कि जयराम रमेश वही शख्स हैं, जिन्होंने साल 2015 में देश में बहस का मुद्दा बने गोमांस को लेकर भाजपा को असहिष्णु बताया था। गोमांस के समर्थन में उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि खुद उनके परिवार के कई गोमांस खाते हैं। उन्होंने खान-पान को निजी मुद्दा बताया था।

वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा, “जिनका कोई इतिहास ही नहीं है, वो दूसरों के इतिहास को मिटाने चले हैं! Nehru Memorial Museum & Library का नाम बदलने के कुत्सित प्रयास से आधुनिक भारत के शिल्पकार व लोकतंत्र के निर्भीक प्रहरी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की शख़्सियत को कम नहीं किया जा सकता।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, “इससे केवल BJP-RSS की ओछी मानसिकता और तानाशाही रवैये का परिचय मिलता है। मोदी सरकार की बौनी सोच, ‘हिन्द के जवाहर’ का भारत के प्रति विशालकाय योगदान कम नहीं कर सकती!”

कॉन्ग्रेस जहाँ इस फैसले का विरोध कर ही है, वहीं भाजपा इसका बचाव कर रही है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “… एक साधारण तथ्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं कि एक वंश से परे ऐसे नेता भी हैं, जिन्होंने अपने देश की सेवा की और इसका निर्माण किया है। पीएम संग्रहालय राजनीति से परे एक प्रयास है और कॉन्ग्रेस के पास इसे महसूस करने के लिए दृष्टि नहीं है।”

वहीं, भाजपा सांसद नीरज शेखर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्‌वीट किया, “मेरे पिता पूर्व पीएम चंद्रशेखर जी ने हमेशा राष्ट्रहित के लिए काम किया। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ भी काम किया, लेकिन इन लोगों ने कभी एक वंश से परे नहीं देखा। अब जब पीएम मोदी ने सभी दलों के प्रधानमंत्रियों को सम्मानित किया तो कॉन्ग्रेस उत्तेजित हो रही है। यह भयानक रवैया है।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्रियों का सम्मान करना तो भूल जाइए, कॉन्ग्रेस और उनके शाही खानदान ने उन प्रधानमंत्रियों का अपमान किया है, जो उनके वंश के नहीं हैं। नरसिम्हा राव जी के प्रति व्यवहार हमारे राजनीतिक इतिहास के सबसे शर्मनाक अध्यायों में से एक के रूप में जाना जाएगा।”

भाजपा ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस अपने ही उन नेताओं का भी अपमान करने से नहीं हिचकिचाती है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। भाजपा का कहना है कि नीरज शेखर ने कहा कि सोनिया गाँधी हों या राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस का कोई अन्य नेता, आजतक इन लोगों ने संग्रहालय का दौरा नहीं किया।

AAP विधायक के काफिले की गाड़ी ने मारी बाइक सवारों को टक्कर, 2 युवकों की मौके पर मौत: SAD नेता का आरोप- पुलिस केस दर्ज करने में दिखा रही ढिलाई

पंजाब के फरीदकोट में तेज गाड़ी की टक्कर लगने से 2 युवकों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ये गाड़ी AAP विधायक गुरदीत सिंह सेखों के काफिले का हिस्सा थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 लोग बाइक पर जा रहे थे जब विधायक के काफिले की गाड़ी ने उनको पीछे से टक्कर मारी। ये टक्कर कथिततौर पर इतनी तेज थी कि दोनों बाइक सवारों की मौके पर मौत हो गई।

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि आम आदमी पार्टी विधायक गुरदीत सिंह सेखों उस समय मौके पर मौजूद नहीं थे। लेकिन वो वहाँ बाद में आए। एक्सीडेंट के बाद युवकों को अस्पताल ले जाया गया। मगर दोनों मे से कोई जीवित नहीं था। एक मृतक की पहचान सतपाल के तौर पर हुई है जबकि दूसरे का अभी पता नहीं चला है। दोनों झोटियाला गाँव के निवासी थे।

शिरोमणि अकाली दल के परमबंस सिंह रोमाना ने घटना के वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया है कि गाड़ी ने पहले युवकों की बाइक पर टक्कर मारी और उसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की जगह वो वहाँ से भाग खड़े हुए। परमबंस ने लिखा, “झोटीवाला गाँव के 2 युवक फरीदकोट में मारे गए। उन्हें विधायक गुरदित सिंह सेखों के काफिलें में तेज गति से आ रही पायलट जिप्सी ने टक्कर मारी थी।”

रोमाना ने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों ने कोतवाली पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया क्योंकि पुलिस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में टाल-मटोल कर रही थी। उन्होंने कहा, “मैं सभी से न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए कोतवाली पहुँचने की अपील करता हूँ। हम पुलिस को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेंगे।”

‘हिंदू संस्कृति का मजाक बनाकर रख दिया’: आदिपुरुष रिलीज होते ही दिल्ली HC में PIL दायर, हिंदू सेना ने ‘आपत्तिजनक दृश्यों’ को हटाने की उठाई माँग

रामायण पर आधारित प्रभास और कृति सैनन अभिनीत फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) विवादों में घिर गई है। फिल्म के स्तरहीन संवाद और सिनेमोटोग्राफी को लेकर दर्शक नाराज है। इसको लेकर हिंदू सेना फिल्म के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में भगवान राम, माता सीता, भगवान हनुमान आदि की छवि से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है।

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में याचिका दायर कर ओम राउत की फिल्म आदिपुरुष से रावण, भगवान राम, हनुमान, माता सीता से संबंधित कुछ ‘आपत्तिजनक दृश्यों’ को हटाने की माँग की है। बता दें कि आदिपुरुष शुक्रवार (16 जून 2023) को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।

विष्णु गुप्त द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म में धार्मिक चरित्रों का फिल्मांकन रामायण में किए गए चित्रण के विपरीत हैं। फिल्म के दृश्यों में हिंदू सभ्यता, हिंदू धार्मिक शख्सियतों और मूर्तियों का अपमान करते हुए धार्मिक चरित्रों को खराब स्वाद में दिखाया गया है।

याचिका में कहा गया है, “हिंदुओं का भगवान राम, सीता और हनुमान की छवि के बारे में एक विशेष दृष्टिकोण है और फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं द्वारा उनकी दिव्य छवि में किया गया बदलाव/छेड़छाड़ उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।” याचिकाकर्ता का कहना है कि इस फिल्म की वजह से देश की संस्कृति का मजाक बन रहा है।

आगे कहा गया है, “महाकाव्यों में बनाई गई छवि के अनुसार हेयर स्टाइल, दाढ़ी और ड्रेसिंग को अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है। फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं द्वारा कोई भी बदलाव निश्चित रूप से उपासकों, भक्तों और धार्मिक विश्वासियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाएगा।”

रावण को ब्राह्मण बताते हुए कहा गया है, “फिल्म में सैफ अली खान द्वारा निभाए गए रावण के किरदार का दाढ़ी वाला लुक हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत कर रहा है, क्योंकि ब्राह्मण रावण को गलत तरीके से भयानक चेहरा बनाते हुए दिखाया गया है, जो हिंदू सभ्यता, हिंदू धार्मिक हस्तियों एवं आदर्शों का घोर अपमान है।”

याचिकाकर्ता ने कहा है कि फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों से फिल्म में ‘सुधारात्मक उपाय’ करने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है, “आदिपुरुष फिल्म द्वारा हिंदू धार्मिक शख्सियतों का विकृत सार्वजनिक प्रदर्शन अंतरात्मा और अभ्यास की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है। यह अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता का भी उल्लंघन है।”

पिछले साल फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद आदिपुरुष को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। हिंदू संगठनों, अयोध्या के राम मंदिर के पुजारी ने महाकाव्य के पात्रों के चित्रण पर आपत्ति जताई थी। फिल्म के निर्माताओं ने आश्वासन दिया कि किसी भी धार्मिक भावना को आहत नहीं किया जाएगा।

बाता दें कि फिल्म ‘आदिपुरुष’ में प्रभास ने भगवान राम, सनी सिंह ने लक्ष्मण, कृति सेनन ने माता सीता का रोल निभाया है। वहीं, सैफ अली खान ने रावण और दवदत्त नागे ने हनुमान जी की भूमिका निभाई है।

बंगाल में हिंसा के बाद बरामद हुई बम बनाने की सामग्री, पुलिस ने जब्त किए 7 बैग

पश्चिम बंगाल के 24 परगना के भांगर में राज्य पुलिस को बम बनाने की सामग्रियाँ बरामद हुई है। पुलिस को ये सामग्री, राज्य में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के दौरान हुई हिंसा के बाद मिली। पुलिस ने कुल सात बैग बरामद किए जिसमें भूसी जैसी चीज मिली। अब पुलिस आगे जाँच कर रही है।

बता दें कि बंगाल में पंचायत चुनाव नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष जारी रहा। बीरभूम के अहमदपुर में खंड विकास कार्यालय में कथित तौर पर देसी बम फेंके गए थे। इसके अलावा कुछ जगह गोली चलने की बात भी सामने आई थी।

हालाँकि, अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सामने आई वीडियोज के मुताबिक, इलाके में देसी बम भी फेंके गए हैं। पुलिस ने मारपीट में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।

व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास में दक्षिण 24 परगना जिले में भारी सुरक्षा तैनाती की गई है। पिछले दो दिनों में सत्तारूढ़ टीएमसी और नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के समर्थकों के बीच झड़पों के कारण कई क्षेत्रों, विशेष रूप से भांगर ब्लॉक में तनाव व्याप्त है।

पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हुए देखा गया। वहीं हिंसा करने पर उतारू लोगों ने पुलिस पर भी हमला किया। इस हमले में झड़प के दौरान एसडीपीओ सहित कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।

कैनिंग उप-विभागीय पुलिस अधिकारी दिबाकर दास ने कहा, “दो समूहों के बीच झड़प हुई थी। भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया। उस दौरान मेरे हाथ में भी चोट आई थी। कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं। 2 लोग घायल हो गए। हमने 17-18 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना की जाँच की जा रही है।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव 8 जुलाई को एक ही चरण में होंगे, जिसकी मतगणना 11 जुलाई को होनी है।

‘बर्बाद हो गए ₹600 करोड़, फिल्म बॉयकॉट करो’ : आदिपुरुष देखने के बाद दर्शकों में दिखा गुस्सा, रेटिंग में 1 स्टार भी नहीं मिला

प्रभास और कृति सेनन स्टारर फिल्म ‘आदिपुरुष’ बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन पर आधारित इस फिल्म को लेकर फैंस की काफी उम्मीदें थीं। हालाँकि फिल्म के टीजर और ट्रेलर ने ही काफी हद तक उम्मीदें तोड़ दीं थीं। लेकिन अब फ़िल्म के रिलीज होने के बाद एक बार फिर फैंस को निराशा हाथ लगी है।

600 करोड़ रुपए की बजट वाली इस फिल्म में माता सीता के किरदार से लेकर भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और यहाँ तक कि रावण व मेघनाथ तक के किरदार से भी लोग प्रभावित दिखाई नहीं दे रहे। कई यूजर्स ने तो फिल्म मेकर्स पर ‘रामायण’ से छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया। यही नहीं फिल्म देखने के बाद लोग सोशल मीडिया पर #BoycottAdipurush भी ट्रेंड करा रहे हैं।

मशहूर फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने आदिपुरुष को 1/2 स्टार के साथ ‘निराशाजनक’ करार दिया है। साथ ही उनका कहना है कि फ़िल्म लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। डायरेक्टर ओम राउत के पास बहुत अधिक बजट था। लेकिन इसके बाद फिल्म में बहुत सारी गड़बड़ियाँ हैं।

बता दें कि एक ओर आदिपुरुष को फिल्म क्रिटिक घटिया रेटिंग देकर मेकर्स पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं तो वहीं सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन से पता चल रहा है कि उन्हें फिल्म में दिखाए सीन और डॉयलॉग बिलकुल पसंद नहीं आए। कोई इसे पैसा वेस्ट मूवी बता रहा है तो कोई इसे देखने के बाद कह रहा है कि वो कहाँ जाकर अपना सिर मारे।

सृष्टि नामक यूजर ने आदिपुरुष को लेकर लिखा है, “RRR मूवी का यह महज कुछ मिनट का सीन पूरी आदिपुरुष मूवी से कई गुना बेहतर है।”

अमित सिंह रजावत नामक यूजर ने एक के बाद एक तीन ट्वीट करते हुए आदिपुरुष पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा है, “आदिपुरुष क्यों देखें? क्योंकि देखने के बाद ही आपको पता चलेगा कि वाल्मीकि जी ने रामायण में काफ़ी ग़लतियाँ की थी। आदिपुरुष में उन गलतियों को सुधारा गया है। जैसे – सोने की लंका का रंग काला था। माता सीता पीले की जगह श्वेत वस्त्र पहनती थी। रावण पुष्पक विमान की जगह चमगादड़ की सवारी करता था।”

उन्होंने आगे लिखा है, “शिव भक्त रावण रुद्राक्ष भी तोड़ देता थ। लक्ष्मण जी स्टाइलिश बियर्ड रखते थे और रावण कूल हेयर स्टाइल रखता था। माता सीता ने हनुमान जी को चूड़ामणि नहीं कड़ा दिया था। प्रणाम हाथ जोड़ कर नहीं बल्कि सीने पर हाथ रख कर किया जाता है।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “आदिपुरुष की टीम ने बहुत रिसर्च करके यह पता लगाया है कि रावण अजगरों की शैय्या पर आराम करता था। तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘रावण रॉकस्टार भी था।”

सूरज सिंह राजपूत नामक यूजर ने लिखा है, “क्या Gहादीपन दिखाया गया है आदिपुरुष में। माँ सीता का गरदन कब काटी गई थी रामायण में? आदिपुरुष ने वाकाई में रामायण के साथ छेड़छाड़ की है। इससे आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश पहुँचेगा।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है, “लंका दहन दृश्य में बजरंग बली डायलॉग- कपड़ा तेरे बाप का, तेल तेरे बाप का, आग भी तेरे बाप की तो जलेगी भी तेरे बाप की। छपरी के इन डायलॉग्स पर मेकर्स को है गर्व? वे चाहते हैं कि बच्चे इसे देखें?”

अनुभव मिश्रा ने लिखा है, “हनुमान हैं कि रहमान, क्या मेहनत की है आदिपुरुष की टीम ने कुछ समझ नहीं आ रहा। पहले चाईनीज भालू दिखा दिया, अब मुह में हवा भर के दिखा रहे, 600 करोड़ कहाँ खर्च किया है। हनुमान जी के सर पर मुकुट भी गायब है। ऐसी फिल्म बनाकर, कब तक हिन्दुओ को बेवकूफ बनाकर पैसा कमाएगा बॉलीवुड। मेरे हिसाब से रामायण पर अब कोई भी नई फिल्म बनने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिये। यार मज़ाक मत बनाओ।”

आकांक्षा नामक यूजर ने लिखा है, “जिन्हें शर्म नहीं होगी वो ही इस फिल्म का समर्थन कर रहे हैं।” इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में व्यक्ति फिल्म की कमियाँ बताते हुए बॉयकॉट करने की अपील करता दिख रहा है।

फिल्म देखकर थिएटर के बाहर आए लोगों ने भी फिल्म को खराब करार दिया। आज तक से बातचीत में एक लड़के ने कहा कि VFX वगैरह तो अच्छा है लेकिन स्टोरी पूरी खराब कर दी इन लोगों ने। स्टोरी दमदार नहीं थी। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा है कि यह बेहद खराब फिल्म है। भगवान के नाम पर मजाक बना दिया है। यही नही, एक व्यक्ति को फिल्म को बकवास करार देते हुए बच्चों न दिखाने की अपील की। एक लड़के ने कहा है, “रावण इतना बड़ा ब्राह्मण होकर माँस खिला रहा है? दिमाग है इन लोगों में?” इसी तरह अन्य लोगों ने भी फिल्म कुछ खास पसंद नहीं आई।

आदिपुरुष को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी जमकर वायरल हो रहे हैं। आइए देखते हैं कुछ मीम:

मणिपुर में उपद्रवियों ने केंद्रीय मंत्री के घर में देर रात लगाई आग: विदेश राज्यमंत्री बोले- प्रदेश में कानून-व्यवस्था ठीक नहीं, 100+ लोगों की हो चुकी मौत

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हिंसा (Manipur Violence) थमने का नाम नहीं ले रही है। राजधानी इंफाल में हिंसक भीड़ गुरुवार (15 जून 2023) की रात शहर के कोंगबा इलाके में स्थित केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर में घुस गई और उसे जला दिया। इस पर मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री आरके रंजन सिंह की घर को उपद्रवियों ने गुरुवार की रात लगभग 10 आग के हवाले कर दिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि मणिपुर में कानून व्यवस्था फेल हो गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मदद के बावजूद राज्य सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रही है।

मंत्री ने कहा, “मैं इस समय आधिकारिक काम के लिए केरल में हूँ। शुक्र है कि कल रात मेरे इंफाल स्थित घर में कोई घायल नहीं हुआ। बदमाश पेट्रोल बम लेकर आए थे और मेरे घर के भूतल और पहली मंजिल को नुकसान पहुँचाया गया है।”

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए आरके रंजन सिंह ने कहा, “मेरे गृह राज्य में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर बहुत दुख होता है। मैं अब भी शांति की अपील करता रहूँगा। इस तरह की हिंसा में लिप्त लोग बिल्कुल अमानवीय हैं।”

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा गार्डों और दमकलकर्मियों ने गुरुवार की रात भीड़ द्वारा आगजनी की कोशिशों पर काबू पाया और मंत्री के घर को पूरी तरह जलने से बचा लिया। यह घटना इंफाल शहर के मध्य में घरों को जलाने और मणिपुर की रैपिड एक्शन फोर्स तथा भीड़ के बीच हुई झड़पों के बाद हुई।

इससे पहले बुधवार (14 जून 2023) को इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में मणिपुर के मंत्री नेमचा किपजेन के आधिकारिक क्वार्टर में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी थी। यह घटना जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर के खमेनलोक इलाके के एक गाँव में बदमाशों के हमले में 9 लोगों की मौत और 10 अन्य के घायल होने के एक दिन बाद हुई।

जिस समय कुकी समुदाय के नेता किपगेन के क्वार्टर में आग लगाई गई, उस समय उसमें कोई मौजूद नहीं था। आग आसपास फैलती, इससे पहले ही दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पा लिया। अभी तक किसी गुट ने आगजनी की जिम्मेदारी नहीं ली है।

किपगेन के घर को जलाने से पहले देर रात में करीब एक बजे हथियारबंद बदमाशों ने इंफाल पूर्वी जिले और कांगपोकी जिले की सीमा से सटे खमेनलोक क्षेत्र के कुकी गाँव को घेर कर हमला कर दिया था। इस दौरान हुई गोलीबारी में दोनों पक्षों के कई लोग घायल होना पड़ा।

बताते चलें कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच एक महीने से जारी जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि 310 अन्य घायल हो गए हैं। राज्य में शांति बहाल करने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है।

मैतेई जाति ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जा देने की माँग की थी। इसके विरोध में कुकी समुदाय के लोगों ने 3 मई 2023 को पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन किया था। इस दौरान हिंसा भड़क गई, जो आजतक जारी है। मैतेई मणिपुर की आबादी में लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं।

वहीं, मणिपुर के आदिवासी समुदाय- नागा और कुकी समाज की आबादी 40 प्रतिशत है और वे भी पहाड़ी जिलों में रहते हैं। नागा और कुकी समाज को ST का दर्जा मिला हुआ है और वे कुकी को ST का दर्जा दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।

राहुल गाँधी के बाद AAP नेता आतिशी ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जाकर भारत को किया बदनाम, GDP से लेकर भुखमरी पर झूठ परोसा: जानें क्या है सच

आम आदमी पार्टी (AAP) की नेत्री और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा भारत विरोधी ‘100 पर भारत: टुवर्ड्स बीइंग ए ग्लोबल लीडर’ आयोजन में गुरुवार (15 जून 2023) को शामिल हुईं। इस दौरान भारत की सफलताओं की कहानी को कमतर करके पेश करने की कोशिश की।

आयोजन में आतिशी ने कहा, “हमें अक्सर बताया जाता है कि भारत की जीडीपी अब ट्रिलियन डॉलर के आँकड़े को पार कर गई है। हमें बताया गया है कि भारत सबसे तेज़ G20 अर्थव्यवस्था है और ऐसी कई अन्य जानकारी दी गईं। हालाँकि, वास्तविकता उससे कहीं अधिक चिंताजनक और कमतर है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि एक बेहतर संकेतक, जो वास्तव में आपको देश की स्थिति के बारे में बताता है, वह मानव विकास सूचकांक है… कुछ संकेतक हैं जिनमें 190 देश भाग लेते हैं। भारत 191 में से 132वें स्थान पर है। यह 75वें साल का भारत है।”

आतिशी ने यह भी कहा कि जबकि भारत खुशी चाहता है और यह अपने पड़ोसियों- श्रीलंका, भूटान और पाकिस्तान जैसे देशों को मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) से बेहतर है।

HDI में भारत की गिरावट की सच्चाई

पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 2021-22 के लिए मानव विकास सूचकांक पर अपनी रिपोर्ट [पीडीएफ देखें] जारी की। शुरुआत में यह नोट किया गया कि सूचकांक में सूचीबद्ध 90% देशों ने 2020 या 2021 में एचडीआई में गिरावट देखी गई थी।

भारत भी अपवाद नहीं था। इस सूचकांक में भारत 191 देशों में 132 वें स्थान पर था। सबसे पहले यूएनडीपी ने खुद स्वीकार किया कि भारत की गिरावट रूस-यूक्रेन युद्ध, कोविड-19 महामारी और ‘खतरनाक ग्रह परिवर्तन’ जैसे संकटों के सामने वैश्विक रुझानों के अनुरूप है।

इसमें आगे कहा गया, “एक राष्ट्र के स्वास्थ्य, शिक्षा और औसत आय से संबंधित मानव विकास में लगातार दो वर्षों – 2020 और 2021 में गिरावट आई है। यह पिछले पाँच वर्षों की प्रगति के विपरीत रहा है। यह दर्शाता है कि दुनिया भर में मानव विकास 32 वर्षों में पहली बार ठप हो गया है। यह वैश्विक गिरावट है।”

APP नेता आतिशी ने यह सुझाव देने की कोशिश की कि भारत के मामले में एचडीआई मूल्य में गिरावट एक अलग मामला है, जबकि अन्य देश इस मोर्चे पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे।

दूसरा, यूएनडीपी ने स्वीकार किया कि इस तरह के वैश्विक रुझान के पीछे प्राथमिक कारण जीवन प्रत्याशा में गिरावट थी। रिपोर्ट में कहा गया, “मानव विकास सूचकांक की हालिया गिरावट में एक बड़ा कारण जीवन प्रत्याशा में वैश्विक गिरावट है, जो 2019 में 72.8 वर्ष से घटकर 2021 में 71.4 वर्ष हो गया है।”

अपने भाषण में दिल्ली की मंत्री ने एचडीआई में योगदान देने वाले विभिन्न कारकों के बारे में बताया, जिनमें औसत आय, स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल हैं। इसके जरिए उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि किसी तरह लोगों की आय, शिक्षा और स्वास्थ्य, समग्र रूप से मोदी शासन के तहत टॉस के लिए चला गया।

तीसरा, यूएनडीपी ने बताया, “पिछले दो वर्षों में दुनिया भर में अरबों लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है जब एक के बाद COVID-19 और यूक्रेन में युद्ध जैसे संकट ने प्रभावित किया और व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक बदलावों परिवर्तनों का कारण बना।”

बता दें कि साल 2020 से साल 2022 के बीच दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही थी। इनमें महामारी, पूर्वी यूरोप में युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आदि शामिल हैं लेकिन सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं रही थीं।

यूएनडीपी ने जोर देकर कहा, “इन परस्पर संकटों ने भारत के विकास पथ को उसी तरह प्रभावित किया है जैसा कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में किया है।” भारत, अन्य देशों की तरह, जीवन प्रत्याशा में 69.7 से 67.2 वर्ष की गिरावट देखी गई।

चौथा, यूएनडीपी ने यह भी बताया कि भारत का एचडीआई मूल्य दक्षिण एशिया में औसत मानव विकास से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया, “भारत का एचडीआई मूल्य 1990 के बाद से लगातार विश्व औसत तक पहुँच रहा है, जो मानव विकास में प्रगति की वैश्विक दर की तुलना में तेजी का संकेत देता है। यह समय के साथ किए गए नीतिगत विकल्पों का परिणाम है, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा में किए गए निवेश शामिल हैं।”

इस मामले के बारे में बात करते हुए भारत में यूएनडीपी के रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव शोको नोडा ने कहा, “मानव विकास में भारत की गिरावट संकटों से प्रभावित होने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, लेकिन एक अच्छी ख़बर है। 2019 की तुलना में मानव विकास पर असमानता का प्रभाव कम है। भारत दुनिया की तुलना में पुरुषों और महिलाओं के बीच मानव विकास की खाई को तेजी से पाट रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह विकास पर्यावरण की एक छोटी सी कीमत पर आया है। भारत की विकास गाथा समावेशी विकास, सामाजिक सुरक्षा, लैंगिक-उत्तरदायी नीतियों में देश के निवेश को दर्शाती है। इसके साथ ही यह अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ने को प्रेरित करती है, ताकि कोई भी पीछे ना छूटे।

शोको नोडा ने बताया, “3I (निवेश, बीमा और नवाचार) पर ध्यान केंद्रित करने वाली नीतियाँ लोगों को अनिश्चितता का सामना करने में सक्षम बनाती हैं। भारत पहले से ही इन क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सबसे कमजोर लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा दे रहा है और यूएनडीपी द्वारा समर्थित Co-WIN के माध्यम से दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है।”

पाँचवाँ, यूडीएनपी ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और सस्ती स्वच्छ ऊर्जा, पानी और स्वच्छता तक पहुँचाने के लिए भारत की प्रशंसा की। इसमें कहा गया है कि देश ने कमजोर समुदायों के लिए सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा दिया और जलवायु नेतृत्व का प्रदर्शन किया।

उन्होंने आगे कहा, “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर एसडीजी के कार्यान्वयन और निगरानी को तेजी से ट्रैक कर रहा है।” इस तरह, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में आतिशी द्वारा चित्रित किया गया परिदृश्य पूरी तरह से गंभीर नहीं है।

भारत में भुखमरी के बारे में आतिशी के दावे

आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा, “हमें बताया गया है कि भारत में अरबपतियों की सबसे बड़ी संख्या है… जो 2020 और 2022 के बीच 102 से 166 हो गई है। इन सबके बीच एक और आँकड़ा है, जो 2020 से 2022 तक बढ़ा है, यानी देश में भूखे लोगों की संख्या। इन लोगों के पास पर्याप्त भोजन नहीं है।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए आगे कहा, “यह संख्या उसी अवधि की है, जब अरबपतियों की संख्या बढ़ रही थी। भूखे लोगों की संख्या 19 करोड़ से 35 करोड़ हो गई। भारत दुनिया में खाद्यान्न का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, फिर भी यह ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक संख्या में लोग कुपोषित हैं।”

यहाँ यह उल्लेख किया जाना जरूरी है कि आतिशी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय के भारत विरोधी आयोजन में जिस ग्लोबल हंगर रिपोर्ट 2022 का जिक्र किया, उसे भारत सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में ही खारिज कर दिया था। उसने रिपोर्ट को संकलित करने में इस्तेमाल की गई गलत पद्धति पर सवाल उठाया था।

भारत ने साफ कहा था कि सूचकांक में जिन 4 संकेतकों का इस्तेमाल किया गया था, उनमें से 3 बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हैं। इस तरह वे पूरी आबादी के प्रतिनिधि के रूप मे लागू नहीं होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि चौथा संकेतक ‘अल्पपोषित (पीओयू) आबादी का अनुपात’ एक जनमत सर्वेक्षण पर आधारित है, जो केवल 3,000 लोगों के नमूने के पर दिया गया था।

प्रतिभागियों से कुल 8 प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें से एक में यह शामिल था – पिछले 12 महीनों के दौरान क्या कोई ऐसा समय था जब पैसे या अन्य संसाधनों की कमी के कारण: आप इस बात को लेकर चिंतित थे कि आपके पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं होगा? या आपने जितना सोचा था उससे कम खाया?”

उचित परिश्रम न करने पर एजेंसियों को फटकार लगाते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा था, “रिपोर्ट न केवल जमीनी हकीकत से अलग है, बल्कि जनता के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को जानबूझकर अनदेखा करने का विकल्प भी चुनती है। विशेष रूप से कोविद महामारी के दौरान।

आगे कहा गया, “खाद्य असुरक्षा अनुभव स्केल (FIIES)’ सर्वेक्षण मॉड्यूल के माध्यम से भारत के आकार के एक देश के लिए एकत्रित किए एक छोटे से नमूने का उपयोग भारत के लिए PoU मूल्य की गणना करने के लिए किया गया है। यह न केवल गलत और अनैतिक है, बल्कि यह पूर्वाग्रह की भी गंध देता है।”

आतिशी ने दो संगठनों द्वारा प्रकाशित एक तर्कहीन, गलत रिपोर्ट ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022’ के आधार पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भारत को बदनाम करने की कोशिश की। दिलचस्प बात यह है कि यही रिपोर्ट व्यक्तियों और संगठनों को सावधान करती है कि वे दो वर्षों के स्कोर और रैंकिंग की तुलना न करें। हालाँकि, आतिशी ने भूख पर अपने बयान में इसका इस्तेमाल किया।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राहुल गाँधी का भारत विरोध

इसी साल 28 फरवरी को राहुल गाँधी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में वैश्विक खालिस्तान आंदोलन के बिंदुओं को दोहराया था। उन्होंने दर्शकों में से एक सिख व्यक्ति को बुलाया और दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सिखों को भारत में दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया गया है।

राहुल गाँधी ने कहा था, “मेरा मतलब है कि मेरे यहाँ एक सिख सज्जन बैठे हैं। वह सिख धर्म से हैं। वह भारत से आते हैं, है ना? हमारे भारत में मुस्लिम हैं, भारत में ईसाई हैं। हमारे पास भारत में अलग-अलग भाषाएँ हैं … यही पूरा भारत है। श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वह (असली भारतीय) नहीं है। श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वह (सिख लड़का) भारत में दूसरे दर्जे का नागरिक है। मैं उनसे सहमत नहीं हूँ।”

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राहुल गाँधी ने यह दावा किया कि भारत में मुस्लिम भी नरेंद्र मोदी के अनुसार ‘द्वितीय श्रेणी के नागरिक’ हैं। बता दें कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इस तरह की कहानियाँ लंबे समय से चल रही थी और कई गुना बढ़ गई हैं।

मोबाइल छीनना पति को पड़ा भारी, पत्नी ने खौलता तेल प्राइवेट पार्ट पर डाला: युवक बुरी तरह झुलसा, बीवी फरार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक पत्नी पड़ोस के युवक से बात करती थी। इसको लेकर पति को पत्नी से मोबाइल छीनना भारी पड़ गया। मोबाइल छीनने से नाराज पत्नी ने पति के प्राइवेट पार्ट पर खौलता हुआ तेल डाल दिया। इसके बाद वह फरार हो गई। पीड़ित का शोर-शराबा सुनकर मोहल्ले वालों ने उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र के माधवी नगर का है। प्राइवेट कंपनी में जॉब करने वाला सुनील धाकड़ अपनी पत्नी भावना के साथ रह रहा था। मोहल्ले में रहने वाली एक महिला ने सुनील से शिकायत करते हुए कहा था कि उसकी पत्नी भावना उसके पति से बात करती है। इसको लेकर सुनील ने भावना को कई बार समझाया था। लेकिन वह नहीं मानी।

इसी बीच सुनील जब ऑफिस से घर पहुँचा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी भावना फोन पर बात कर रही है। इसके चलते सुनील ने भावना से फोन छीन लिया। इससे नाराज होकर भावना ने रात करीब 2 बजे तेल गर्म कर सुनील के प्राइवेट पार्ट में डाल दिया और मौके से फरार हो गई। खौलते हुए तेल से जलने के कारण सुनील की चीखें निकल गईं।

घर में मचे हँगामे और शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग जब घर के अंदर पहुँचे तो सुनील बुरी तरह जल था। मोहल्ले के लोगों ने आनन-फानन में उसे नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। पति और पत्नी के बीच हुए इस झगड़े पति सुनील का प्राइवेट पार्ट बुरी तरह झुलसने की बात कही जा रही है।

उधर, मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। पीड़ित पति सुनील की शिकायत और बयान के आधार पर फिलहाल पुलिस ने आरोपित भावना के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। कंपू थाने के टीआई दीपक यादव का कहना है कि आरोपित महिला की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गईं हैं।

बड़ा हमला करने के लिए कश्मीर में हो रही थी घुसपैठ, सेना ने 5 आतंकियों को ढेर किया: कुपवाड़ा में सर्च ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सेना को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार (16 जून 2023) सुबह हुई मुठभेड़ में सेना ने 5 आतंकियों को मार गिराया। आतंकी सीमापार से घुसपैठ कर किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की फिराक में थे। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने संयुक्त ऑपरेशन चला आतंकियों को ढेर कर दिया। 

आतंकियों के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर कश्मीर जोन पुलिस ने शुक्रवार (16 जून 2023) तड़के ट्वीट कर कहा था, “कुपवाड़ा जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल के जुमागुंड इलाके में पुलिस की विशेष सूचना पर आतंकियों के खिलाफ सेना और पुलिस ने एनकाउंटर शुरू किया।”

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में, 5 विदेशी आतंकियों की पुष्टि की गई। इन आतंकियों के मारे जाने के बाद भी सेना और पुलिस अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका के चलते इलाके की तलाश कर रही है। माना जा रहा है कि पाँचों आतंकी पाकिस्तानी हैं। हालाँकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। वहीं, जम्मू-कश्मीर के एडीजीपी विजय कुमार ने कहा है कि कुपवाड़ा सेक्टर में हुई घुसपैठ की यह कोशिश इस साल हुई घुसपैठ का सबसे बड़ा मामला है। 

बता दें कि इससे पहले, गुरुवार (15 जून 2023) को भी सेना ने आतंकियों की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया था। आतंकी पुंछ जिले में स्थित LOC से घुसपैठ की कोशिश में थे। इस दौरान सेना को कृष्णा घाटी सेक्टर में घुसपैठ की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर जब सेना ने तलाश शुरू की थी। इसके बाद आतंकियों की गतिविधियों को भाँपने के लिए सेना ने फायरिंग की थी। तभी, आतंकी अपना सामान छोड़कर, घने कोहरे और अंधेरे का फायदा उठाकर भाग खड़े हुए।  आतंकियों के भागने के बाद सेना ने एके-47 राइफल और उसकी 9 मैगजीन, 438 कारतूस और उसकी 4 मैगजीन, दो पिस्टल, 6 ग्रेनेड व पाकिस्तानी दवाइयाँ बरामद की थीं।  इसके अलावा, मंगलवार (13 जून 2023) को भी सेना ने कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में 2 आतंकियों को मार गिराया था।

बृजभूषण सिंह के घर में घुसा संदिग्ध युवक, पुलिस ने पकड़ा: नाबालिग पहलवान के दादा ने पूछा- हमारी बेटी क्यों बने मोहरा, और लड़कियाँ कहाँ हैं?

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ गुरुवार (15 जून 2023) को दो चार्जशीट दायर की गई। दिल्ली पुलिस ने POCSO मामले में भाजपा सांसद सिंह को क्लीनचिट दे ही है। इस बीच उनके घर में एक संदिग्ध युवक के घुसने का मामला सामने आया है। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।

यूपी के कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के दिल्ली स्थित आवास में शुक्रवार (16 जून 2023) को एक संदिग्ध युवक पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर वह स्टाफ से बृजभूषण शरण सिंह के बारे में पूछताछ करने लगा। उसकी हरकत को देखकर स्टाफ को शंका हुई।

इसके बाद स्टाफ के लोगों ने दिल्ली पुलिस के PCR को कॉल कर मौके पर बुला लिया और युवक को पकड़ कर उसके हवाले कर दिया। पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। संदिग्ध युवक की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है।

उधर, बृजभूषण सिंह को POCSO मामले में पुलिस की क्लीनचिट मिलने के बाद नाबालिग महिला पहलवान के दादा एक बार फिर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद पर से केस हटाना है या रखना है, ये देखना दिल्ली पुलिस का काम है और वह अपना काम अच्छे से कर रही है।

नाबालिग के दादा बोले, “हम पाप के भागी क्यों बनें? बृजभूषण सिंह से हमें कोई लेना-देना नहीं है। जिनके साथ कुछ हुआ है, वे जानें।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी बच्ची मोहरा क्यों बने? शुरू में ये तीन लड़कियों का नाम ले रहे थे। हमारी बेटी के अलावा दो और कौन हैं, उन्हें सामने क्यों नहीं लाया गया?”

उधर पुलिस की क्लीनचिट पर पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि चार्जशीट से स्पष्ट हो गया है कि बृजभूषण सिंह कसूरवार हैं। उन्होंने कहा कि उनके वकील ने चार्जशीट की कॉपी के लिए एप्लीकेशन दी है। उसे देखने के बाद अपना अगला कदम उठाएँगे। खापों ने भी कहा है कि खिलाड़ी जो भी फैसला लेंगे, उनका समर्थन खाप करेगी।