Home Blog Page 1738

तमन्ना ने हिन्दू लड़की से कराई अपने भाई अरमान की दोस्ती, इस्लामी धर्मांतरण और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव: उत्तराखंड की ‘द केरल स्टोरी’

उत्तराखंड में लव जिहाद (Love Jihad) बढ़ती घटनाओं को लेकर तनाव है। इसी बीच राजधानी देहरादून (Dehradun) से धर्मांतरण का दबाव डालने और निकाह करने का एक और मामला सामने आया है। आरोपित पीड़िता की सहेली का भाई है। पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

देहरादून के डोईवाला (Doiwala Conversion) इलाके में एक युवती का जबरन धर्मांतरण करने और जबरन निकाह करने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। आरोपित अरमान अंसारी और उसकी बहन तमन्ना के खिलाफ उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने आरोपी अरमान को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। एसएचओ राजेश साह ने बताया कि आरोपित की बहन और माँ भी पीड़िता पर धर्म बदलने और शादी करने का दबाव बना रही थीं। दोनों इस्लाम को बेहतर बताकर आरोपित के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाल रही थीं।

दरअसल, पीड़िता के साथ तमन्ना नाम की लड़की पढ़ती थी। इसके कारण दोनों में दोस्ती हो गई। पीड़िता तमन्ना के केशवपुरी बस्ती स्थित घर आती-जाती भी थी। इसी दौरान तमन्ना ने अपने भाई अरमान अंसारी से दोस्ती करा दी। इसके बाद आरोपित अरमान पीड़िता से मिलता था। 

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि दोस्ती के कुछ समय बाद ही अरमान उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने लगा। ऐसा ना होने पर वह पीड़िता को धर्म बदलकर निकाह करने का दबाव डालने लगा। पीड़िता ने बताया कि इसमें आरोपित का साथ उसकी माँ और बहन भी देती थी।

वहीं, डोईवाला के बुल्लावाला में एक हिंदू युवक के धर्मांतरण के मामले में पुलिस छानबीन कर रही है। पुलिस ने मोबाइल और लैपटॉप को जाँच के लिए लैब भेज दिया। युवक की दिमागी हालत ठीक नहीं लग रही है। ऐसे में इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस बाद में उससे पूछताछ करेगी।

लंदन में भारतीय युवती की हत्या: फ़्लैट में साथ रहने वाले ब्राजील के युवक पर ही आरोप, साथ में एक अन्य महिला को भी घोंपा चाकू

हैदराबाद की युवती तेजस्विनी रेड्डी की लंदन में हत्या कर दी गई है। 27 वर्षीय युवती की हत्या UK की राजधानी स्थित वेम्ब्ले के नील्ड क्रिसेंट में की गई। पीड़िता और हत्यारा, दोनों एक ही फ़्लैट में रहते थे। मृतका की पहचान कोट्ठाम तेजस्विनी रेड्डी के रूप में हुई है। तेजस्विनी के अलावा एक और महिला को चाकुओं से गोदा गया, जिसकी उम्र 28 साल बताई जा रही है। उक्त महिला को एक अस्पताल में शिफ्ट किया गया।

फ़िलहाल उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है। लंदन मेट्रोपोलिटन पुलिस ने बताया है कि ये घटना मंगलवार (13 जून, 2023) की है। सुबह 10 बजने से ठीक एक मिनट पहले लंदन एम्बुलेंस सर्विस को फोन कॉल गया कि दो महिलाएँ चाकू घोंपे जाने के बाद जमीन पर पड़ी हुई हैं और काफी सारा खून बह रहा है। पुलिस के पहुँचने से पहले ही तेजस्विनी मर चुकी थीं। वहीं दूसरी महिला को नॉर्थ लंदन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

पहले पुलिस ने दो लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया। इसके बाद एक और व्यक्ति की तस्वीर जारी करते हुए कहा गया कि वो इस मामले में वॉन्टेड है। आखिरकार उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें एक महिला भी थीं। दोनों को पूछताछ के लिए पुलिस थाने लाया गया। हत्या का आरोप ब्राजील मूल के व्यक्ति पर लगा है। तेजस्विनी उस फ्लैट में रहती थीं, क्योंकि वो उनके दफ्तर से नजदीक था।

तेजस्विनी उच्च-शिक्षा के लिए लंदन गई थीं। ब्राजील का उक्त व्यक्ति भी उसी फ्लैट में रहता था। फ़्लैट का किचन कॉमन था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आ जाने के बाद पुलिस हत्यारे की आधिकारिक पुष्टि करेगी और उसकी पहचान बताएगी। 23 वर्षीय आरोपित को घटनास्थल से कुछ ही दूर हैरो से गिरफ्तार किया गया। जिस महिला को थाने ले जाया गया था, उससे छोड़ दिया गया है। जासूसों की टीम को भी इस घटना में लगाया गया है।

फिल्म ’72 हूरें’ की रिलीज़ से पहले ट्विटर ने सस्पेंड किया निर्माता अशोक पंडित का हैंडल, इस्लामी-वामपंथी गिरोह ने की है मास रिपोर्टिंग

ट्विटर पर इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों ने ’72 हूरें’ फिल्म के निर्माता अशोक पंडित के खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चलाया, जिसके बाद उनका ट्विटर हैंडल सस्पेंड कर दिया गया है। संजय पूरन सिंह चौहान द्वारा निर्देशित इस फिल्म का वो सह-निर्माता हैं। उनके साथ-साथ गुलाब सिंह तँवर, किरण डागर और अनिरुद्ध तँवर ने इस फिल्म का निर्माण किया है। ये फिल्म शुक्रवार (7 जुलाई, 2023) को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।

अशोक पंडित सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ कई सालों से आवाज उठाते रहे हैं। इसलिए, इस्लामवादी भी उन्हें निशाना बनाए रखते हैं। इस बार, उनके एक ट्वीट को निशाना बना कर ‘टीम साथ’ नामक प्रोपेगंडा हैंडल ने उनके ट्विटर हैंडल को सस्पेंड करा दिया। इसके लिए मास रिपोर्टिंग का सहारा लिया गया। अशोक पंडित ने सभी रक्षकों के विनाश की बात कही थी, उनके इसी ट्वीट पर मास रिपोर्टिंग की गई।

वामपंथी और इस्लामी गिरोह लगातार इस फ़िराक में था कि किसी ट्वीट को बहाना बना कर अशोक पंडित का ट्विटर हैंडल निलंबित करवाया जाए। ‘टीम साथ’ ने उन पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाते हुए यूजर्स से मास रिपोर्टिंग की अपील की। साथ ही ‘ट्विटर सेफ्टी’ और कंपनी के मालिक एलन मस्क को टैग करने की भी सलाह दी। अशोक पंडित इस ट्वीट में कोई धमकी नहीं दे रहे थे, बल्कि बुराई के विनाश और अच्छे की जीत से उनका आशय था।

इसी ट्वीट को आधार बना कर अशोक पंडित के ट्विटर हैंडल को सस्पेंड करवा दिया गया

भाजपा नेताओं तजिंदर पाल सिंह बग्गा, कपिल मिश्रा शलभ मणि त्रिपाठी और रमेश सोलंकी ने ट्विटर द्वारा अशोक पंडित का हैंडल सस्पेंड किए जाने के खिलाफ आवाज़ उठाई है। ट्विटर से अपील की जा रही है कि वो अशोक पंडित के हैंडल को रिस्टोर करे। बता दें कि ’72 हूरें’ आतंकवाद के खिलाफ बनी फिल्म है, जिसके ट्रेलर को जनता से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। ‘टीम साथ’ अक्सर इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथियों की करतूतों की पोल खोलने वालों के पीछे लगा रहता है।

शरीर मानव का, सिर और खुर बकरी का… तुर्किये में खुदाई के दौरान निकली ‘देवता’ की मूर्ति, 1700 साल से भी अधिक पुरानी

तुर्किए के पुरातत्वविदों ने इस्तांबुल के सरचने पुरातत्व पार्क में स्थित एक चर्च के पास खुदाई के दौरान ग्रीक देवता पान की 1700 साल पुरानी एक संगमरमर की मूर्ति मिली है। यह ईसाई कालीन एक चर्च की खुदाई के दौरान मिला है। पान को बकरी के सींग, खुर और नग्न धड़ के साथ चित्रित किया गया है

उत्खनन में मिली यह मूर्ति रोमन कालीन है। वहाँ सेंट पॉलीयुक्टस (St. Polyeuctus) स्थित है। अब इसका सिर्फ खंडहर ही बचा है। यह कभी रोमनों कांस्टेंटिनोपल में सबसे बड़ा चर्च था। इसे यरूशलेम में सोलोमन मंदिर के समान बनाया गया था। अब यहाँ इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगरपालिका स्थित है।

सन 537 में सम्राट जस्टिनियन द्वारा बनवाए गए नए हागिया सोफिया चर्च से पहले कॉन्स्टेंटिनोपल में चर्च ऑफ सेंट पॉलीयूक्टस सबसे बड़ा चर्च था। बताते चलें कि इन्हीं रोमनों को हराकर कर तुर्किए में ऑटोमन साम्राज्य की नींव रखी गई थी और उस समय की राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल आज का इस्तांबुल है।

हागिया सोफिया विश्व प्रसिद्ध एक चर्च है, जिसे बाइजेंटाइन शासकों ने बनवाया था। इस्तांबुल पर ओटोमेन्स ने 1453 पर कब्जा कर लिया था और इसे 1511 में मस्जिद बना दिया था। हागिया सोफिया को 434 वर्ष तक मस्जिद माना गया। फिर 1945 में तुर्की सरकार ने इसे म्यूजियम बना दिया।

तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने 10 जुलाई 2020 को ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन कैथेड्रल हागिया सोफिया को एक बार फिर से मस्जिद में बदलने की घोषणा की थी। उससे पहले तुर्की के एक अदालत ने यह निर्देश दिया था। एर्दोगन के इस निर्णय पर पोप ने दुख व्यक्त किया था।

संगमरमर की इस मूर्ति का जानकारी उस समय सामने आई है, जब सेंट पॉलीएक्टस चर्च के खंडहर के नीचे मिसे एक सुरंग को फिर से खोल दी गई। इस्तांबुल महानगरपालिका (IBB) इसे एक पुरातात्विक पर्यटक आकर्षण केंद्र के रूप में पुनर्विकास किया है।

यह मूर्ति चर्च के मुख्य भवन के उत्तर-पश्चिम की ओर सतह से लगभग 8.5 फीट (2.6 मीटर) नीचे बैकफिल में मिली थी। संगमरमर की मूर्ति एक फुट (20 सेंटीमीटर) से भी कम लंबी है और बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। उसका केवल सिर, धड़ और एक हाथ बचा है। हालाँकि, इसका अभी भी महत्व है। हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि इसकी जाँच के बाद ही इसकी वास्तविक समय की जानकारी मिल पाएगी।

पान जंगलों, खेतों, चरवाहों और किसानों के प्राचीन यूनानी देवता थे। वह मूल रूप से एक उर्वरता (Fertility) के देवता थे और वे अप्सराओं के साथ गुफ्तगू करते थे जो पेड़ों, धाराओं आदि वाली अन्य विशेषताओं से जुड़ी महिला प्रकृति देवी थीं।

नग्न ननों और हिन्दू महिलाओं के साथ पादरियों की तस्वीरें-वीडियो, AOCC ने कहा – कार्रवाई नहीं हुई तो ‘बजरंग दल’ को दे देंगे: कन्वेंट स्कूलों में छात्राएँ भी निशाना

एक बार फिर से भारत में पादरियों के सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ है। कैथोलिक पादरियों की ननों और हिन्दू महिलाओं के साथ आपत्तिजनक अवस्था में तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें भारत में पोप के प्रतिनिधि और बॉम्बे के कार्डिनल-आर्कबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस को भी दिखाई गई हैं। ‘एसोसिएशन ऑफ कन्सर्न्ड कैथोलिक्स (AOCC)’ ने चेताया है कि इन पॉर्नोग्राफिक तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दे दिया जाएगा, अगर पोप ने कार्रवाई नहीं की तो।

इन तस्वीरों में कई नन भी नंगी दिख रही हैं। 14 अप्रैल, 2023 को AOCC ने ग्रेसियस के सामने ये तस्वीरें रखी थीं और 29 अप्रैल को फॉलोअप मेल भेजा था। 9 मई को भेजे गए ईमेल में AOCC ने कहा कि उनके पास हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाए जाने के सबूत भी हैं। हिन्दू लड़कियों की नग्न तस्वीरें भी हैं, जो इन पादिरयों ने ली थीं। उन्होंने कहा कि वो इन तस्वीरों को जाँच के लिए ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ को सौंपेंगे।

साथ ही संगठन ने कहा कि पादरियों के साथ हिन्दू लड़कियों की नग्न तस्वीरें-वीडियोज के अलावा कई अश्लील चैट्स भी उसके पास हैं, जिन्हें ‘बजरंग दल’ को सौंप दिया जाएगा। अधिकतर तस्वीरों में ननों और चर्च में काम करने वाली महिलाओं के साथ पादरियों के अश्लील रिश्ते सामने आए हैं। एक पादरी तो ननों को लेकर कश्मीर में हनीमून मनाने भी गया। नागपुर के ऑर्डर्स स्कूल में ट्रांसफर कर दिए गए पादरी अरुण बेबी जॉन पर भी औरंगाबाद के MSFS स्कूल के प्रधानाध्यापक रहते शिक्षिकाओं और ननों से यौन संबंध बनाने के आरोप हैं।

इसी तरह दिल्ली के फ्रांसिस डिसेल्स स्कूल के एंथोनी अमलडॉस पर छात्रों तक से यौन संबंध बनाने के आरोप हैं। इसी तरह कई मिशनरी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर ऐसे आरोप लगे हैं। इनमें ब्लैकमेल से लेकर कवर-अप तक के आरोप हैं। 1987 से अब तक भारत में 24 ननों की आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं, लेकिन वेटिकन इनकी जाँच नहीं कराता। ननों को बहला-फुसला कर भी उनके साथ सेक्स की खबरें सामने आती रहती हैं।

‘गेम जीतना है तो 5 टाइम नमाज पढ़ो’: कई चरणों में बच्चों का ब्रेनवॉश, मौलाना तारिक जमील का Video दिखा बनाते थे कट्टरपंथी

नाबलिग लड़कों को ऑनलाइन गेम के माध्यम से अपने जाल में फँसा कर धर्मांतरण की तरफ धकेलने वाले गिरोह के बारे में गाजियाबाद पुलिस ने नए खुलासे किए हैं। कुछ साजिशकर्ताओं ने हिंदू नाम से भी ID बना रखी थी। बच्चों को शुरू में इस्लाम के बारे में जानकारी देने के लिए जाकिर नाइक और बाद में कट्टरपंथी बनाने के लिए पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील के वीडियो दिखाए जाते थे। कई चरणों में पूरी होने वाली धर्मान्तरण की इस प्रक्रिया के दौरान बच्चों को अपने परिवार से दूर रहने की सलाह दी जाती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 30 मई 2023 को गाजियाबाद के कवि नगर थाना में दर्ज FIR में 1 जैन और 3 हिन्दू नाबालिगों को पीड़ित बताया गया है। इन सभी को 5 टाइम की नमाज पढ़ने और अन्य इस्लामी प्रथाओं का पालन करने के लिए ब्रेनवाश किया गया था। एकदम नई तरह की इस साजिश में रैकेट के मास्टरमइंड शाहनवाज खान उर्फ बद्दो को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया था। वहीं दूसरा आरोपित मौलवी अब्दुल रहमान गाजियाबाद के बापूधाम थानाक्षेत्र के संजय नगर से गिरफ्तार हुआ था।

जाँच के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली कि साजिशकर्ताओं ने पहले उन किशोरों को टारगेट किया जो ऑनलाइन गेम के शौकीन थे। आरोपितों द्वारा इन बच्चों को ‘फोर्टनाइट’ और ‘डिस्कॉर्ड’ जैसे खेलों को खेलने का लालच दिया गया। डिस्कॉर्ड एक टेक्स्ट, वॉयस और वीडियो चैट ऐप है जिसका कोई चार्ज नहीं लगता। फ्री होने के कारण यह अधिक लोकप्रिय है। मासूमों के धर्मांतरण की इस प्रक्रिया को आरोपितों द्वारा कई चरणों में पूरा किया जा रहा था। पहले चरण में हिंदू नाम से ID बना कर हिंदू व जैन समुदाय के अनजान लड़कों के साथ फोर्टनाईट खेल खेलना था।

इस खेल की सेटिंग कुछ ऐसे की गई थी कि निशाने पर लिए गए किशोर तमाम मेहनत के बावजूद हार जाते थे। ऐसे में उन्हें जीतने के लिए इस्लामी आयतों को पढ़ने की सलाह दी जाती थी। आयतों को पढ़ने के बाद लड़कों को सेटिंग के माध्यम से जीत दिला दी जाती थी। पहले चरण में इस्लामी आयतों की ताकत पर किशोरों को यकीन जमाने के बाद इस साजिश का दूसरा चरण शुरू हो जाता था। इस चरण में लड़कों को ‘डिस्कॉर्ड’ नाम के ऑनलाइन चैट ग्रुप में जोड़ा जाता था।

इस ऑनलाइन चैटिंग में लड़कों को न सिर्फ इस्लामी प्रथाओं की जानकारी दी जाती थी, बल्कि उन्हें नमाज पढ़ना भी सिखाया जाता था। थोड़े समय में इसकी आदत पड़ने के बाद टारगेट किए गए बच्चों को पास की मस्जिद में जाने की नसीहत दी जाती थी। बच्चों को इस बात का भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें गेम जीतने के लिए 5 टाइम की नमाज पढ़नी होगी। जब बच्चे मस्जिद जाना शुरू कर देते तो आरोपित उनसे खुलकर मिलते थे। उन्हें अपना धर्म छोड़ कर इस्लाम कबूलने के लिए ब्रेनवॉश शुरू कर देते थे।

इसी के साथ साजिश के तीसरे चरण की भी शुरुआत हो जाती थी। इस चरण में बच्चों को भगोड़े आतंकी ज़ाकिर नाइक की वीडियो दिखाई जाती थी। वीडियो दिखाने के साथ बच्चों को तरह-तरह के लालच भी दिए जाते थे। एक बार अपने मनमाफिक बच्चों को ढाल लेने के बाद उनको तबलीगी जमात के पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील की भी वीडियो दिखाई जाती थी। ऐसा बच्चों में कट्टरपंथ भरने के लिए किया जाता था। साजिश के अंतिम चरण में मौलवियों की इंट्री होती थी।

इस आखिरी स्टेप में मौलवी खुद टारगेट किए गए बच्चों से मिलते थे और उन्हें नमाज पढ़ने के फायदे बताते थे। इन सभी चरणों के दौरान बच्चों को अपने माता-पिता से कुछ भी न बताने के लिए कहा जाता था। जब आरोपितों को यह लग जाता था कि उन्होंने बच्चे को पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर लिया है तो अंत में उसे अपने परिवार वालों की बातों का जवाब देने के लिए छोड़ दिया जाता था। इस दौरान उसे सच पर कायम रहने जैसी सलाह भी दी जाती थी।

पुलिस के अनुसार ऑनलाइन गेमिंग एप्लिकेशन ‘फोर्टनाइट’ के बहाने जिन बच्चों को निशाने पर लिया जाता था, उन्हें पहले 2-3 गेम जानबूझकर जिताया जाता था। बाद में इन बच्चों को अपने यूट्यूब पर गेमिंग चैनलों में बाकी खेलों को भी खेलने के लिए मनाया जाता था। इन गेम के वीडियो के बहाने इस्लाम का प्रचार और प्रसार किया जाता था। बच्चे जब डिस्कॉर्ड जैसे नए खेलों की तरफ आकर्षित हो कर उन्हें खिलाने की माँग करते थे तब उन्हें इस्लामी तौर-तरीके मानने के लिए मजबूर किया जाता था। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस इस केस की गहनता से जाँच कर रही है।

हिंदुओं को जोड़ने के लिए 204 दिनों से ‘भिक्षा यात्रा’ पर हैं स्वामी दीपांकर: जाति और नशा छोड़ने की दिला रहे शपथ, 5+ लाख लोग अब तक ले चुके हैं संकल्प

भारतीय सनातन पद्धति में संन्यासियों का भिक्षाटन एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक परंपरा है। इससे वह अपने अहम यानी अहंकार का न सिर्फ त्यागता है, बल्कि वह समाज में गहराई से जुड़ता है। इससे समाज की वास्तविकता का पता चलता है। भगवान विष्णु के परमावतारों में से एक भगवान बुद्ध से लेकर गुरु गोरखनाथ, मच्छेंद्रनाथ, दधीचि, भर्तृहरि, आचार्य शंकर आदि तक भिक्षाटन परंपरा को अपनाया और समाज को जागरूक एवं प्रकाशमय बनाया।

वर्तमान में इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं एक युवा संन्यासी। इस संन्यासी का नाम है स्वामी दीपांकर। स्वामी दीपांकर पिछले 6 महीनों से अधिक समय से भिक्षा यात्रा पर निकले हैं। वे संन्यासी परंपरा के तहत से लोगों से भिक्षा तो ले रहे हैं, लेकिन यह भिक्षा कुछ अलग हटकर है। वे लोगों से संकल्प की भिक्षा ले रहे हैं।

स्वामी दीपांकर अपनी यात्रा के 204वें दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और सहारनपुर जिले के देहात की यात्रा पर हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए स्वामी दीपांकर कहते हैं, “इस भिक्षा यात्रा में लोगों से ली जाने वाली दो भिक्षा हैं- पहली भिक्षा जातियों में ना बँटकर एक हिंदू होने की भिक्षा दीजिए और दूसरी भिक्षा है एक युद्ध नशे के विरूद्ध।”

हिंदुओं की संगठित करने के लिए भिक्षा यात्रा की जरूरत पर बल देते हुए युवा संन्यासी स्वामी दीपांकर कहते हैं, “1990 में जब कश्मीर से पंडित निकले थे तो वे हिंदू नहीं थे। वे पंडित बनकर निकले थे। अगर वे हिंदू होते तो समाज साथ खड़ा होता। एक होना बहुत जरूरी है। अगर एक नहीं होंगे और इसी प्रकार जातीय जनगणनाएँ होती रहेंगी।”

जातीय जनगणना का आम हिंदुओं के जनमानस पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर वे कहते हैं, “जाति की जनगणना होगी तो आपको एक बार फिर से बाँटा जाएगा। आप सोचिए…. कभी क्रिश्चियन में पिछड़ा-अति पिछड़ा नहीं हुआ, मुस्लिम में पिछड़ा- अति पिछड़ा नहीं हुआ, मगर हिंदुओं में पिछड़ा, अति पिछड़ा और महा पिछड़ा सब हो गया।”

हिंदुओं को जोड़ने के लिए ‘भिक्षा यात्रा ही क्यों’ के सवाल पर स्वामी दीपांकर कहते हैं कि यह प्राचीन भारतीय परंपरा है। भारत में बुद्ध ने भिक्षा माँगी है, दधीचि ने भिक्षा माँगी है और गुरुकुल परंपरा में ब्रह्मचारियों को भिक्षा माँगने की अनुमति थी। उनका कहना है कि वे उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भिक्षा यात्रा निकाल रहे हैं।

स्वामी दीपांकर का कहना है कि उनकी इस भिक्षा यात्रा को लोगों का अपार समर्थन मिल रहा है। इस यात्रा में अब तक 5 लाख से अधिक लोगों को संकल्प करा चुके हैं। इन लोगों ने जातियों में ना बँट करके एक हिंदू होने का संकल्प लिया है। स्वामी दीपांकर का कहना है कि 23 नवंबर 2023 होने वाली इस यात्रा तक वे 10 से अधिक लोगों को जाति-पाँति से हटकर सिर्फ हिंदू होने का संकल्प दिलाएँगे।

दरअसल, स्वामी दीपांकर जातिवाद और नशा से लोगों को बचाने के लिए 23 नवंबर 2022 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की यात्रा शुरू की थी। स्वामी दीपांकर का कहना है कि 23 नवंबर 2023 तक इस क्षेत्र के कुल लगभग 26 जिलों के कवर कर रहे थे, जिसमें 14-15 जिलों तक वे पहुँचे हैं। इस बीच यूपी का पंचायत चुनाव शुरू हो गया और आचार संहिता लगने के कारण वे उत्तराखंड और दिल्ली में यात्रा करने लगे। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के कई जिलों और दिल्ली के 8 से 10 पर यात्रा की।

स्वामी दीपांकर से यह पूछे जाने पर कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत को धीरेंद्र शास्त्री की तरह हिंदू राष्ट्र बनाने की माँग को लेकर तो नहीं है। इस पर स्वामी दीपांकर कहते हैं, “आप हिंदू हो तो जाइए। हो जाइए फिर कहना नहीं पड़ेगा, राष्ट्र के लिए।” उन्होंने कहा कि उनकी भिक्षा यात्रा को स्थानीय लोगों के साथ-साथ साधु-संतों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है।

हिंदू राष्ट्र की माँग को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के साथ मिलकर काम करने के सवाल पर स्वामी दीपांकर ने कहा, “ये काल के गर्भ में छिपा है। हमें लगता है कि हर व्यक्ति अपनी नियति स्वयं तय करता है। हर संन्यासी का अपना कर्तव्य है और संन्यासी को अपने कर्तव्य का निर्वाह स्वयं करना चाहिए। हम अलग कभी किसी से रहे नहीं है।”

ऑपइंडिया को स्वामी दीपांकर ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जातियों में बँटे हुए सनातन को हिंदू के रूप में संगठित करना है। उन्हें जागरूक करना है कि जातियों में ना बँट करके हिंदू बनकर रहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ हिंदू होने का महासंकल्प ही इस यात्रा का सार है।

यात्रा की सफलता पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “लोगों में अब एक स्पार्क दिखता है। पहले लोगों के कारों के पीछे जाट, गुज्जर, ब्राह्मण, बनिया लिखा देखते थे, लेकिन अब हिंदू लिखा देखने को मिलता है। मोबाइल के कवर से लेकर विवाह के समारोह के कार्ड तक हिंदू दिखना अब आम हो गया है। यह देखना अच्छा लगता है।” उन्होंने कहा कि यात्रा के संपन्न होने तक इसके और भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

1 जनवरी को गिल्ली-डंडा खेलते हुए हुआ विवाद, 12 जून को रिशु और आनंद पर चाकू से हमला: अनस और शाकिब गिरफ्तार, दिल्ली की घटना

दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में चाकूबाजी में दो लड़के घायल हो गए। इनकी पहचान रिशु और आनंद के तौर पर हुई है। इन पर हमला करने वालों की पहचान अनस और शाकिब के रूप में हुई है। इनके साथ एक नाबालिग भी घटना में शामिल था। आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (12 जून 2023) की है। रिपोर्टों के अनुसार जनवरी में गिल्ली-डंडे के खेल के दौरान हुए विवाद को लेकर यह घटना अंजाम दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कालिंदी कुंज थाना क्षेत्र के जैतपुर का है। घायल 16 वर्षीय रिशु तिवारी ने बताया कि सोमवार की शाम वह अपने दोस्त के साथ बाइक से जा रहा था। जैतपुर की गली नंबर 4 में कुछ लोग उसे रोक कर मारपीट करने लगे। इस बीच अनस ने रिशु पर चाकू से वार किया। अनस को इलाके में बल्ली के नाम से भी लोग जानते हैं। जब इसकी जानकारी रिशु के 19 वर्षीय साथी आनंद माथुर को हुई तो वह अपने दोस्त को बचाने के लिए मौके पर पहुँचा।

आनंद को आता देख हमलावर रिशु के साथ उस पर भी टूट पड़े। आनंद को भी चाकू घोंपी गई। थोड़ी देर बाद सभी हमलावर मौके से भाग निकले। मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो वह मौके पर पहुँची। घायल रिशु और आनंद को अस्पताल पहुँचाया गया। रिशु को अस्पातल से छुट्टी दे दी गई है। आनंद अभी भी अस्पताल में है। रिशु का आरोप है कि अनस उर्फ़ बल्ली उस पर पहले भी हमला कर चुका था। इसकी शिकायत पुलिस में हुई थी, लेकिन तब उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना के CCTV फुटेज भी निकाले गए हैं। पुलिस के मुताबिक 19 साल के अनस और रिशु में एक जनवरी 2023 को गिल्ली-डंडा खेलने के दौरान झगड़ा हुआ था। पुलिस का मानना है कि अनस ने उसी रंजिश में रिशु पर हमला किया था। अनस और शाकिब को गिरफ्तार कर मामले की जाँच जारी है।

मणिपुर में फिर से हिंसा, 9 मैतेई हिन्दुओं को मार डाला: राजधानी में लूटपाट की भी घटना, अब तक आतंकियों ने लूटे 4000 हथियार

एक तरफ जहाँ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर में माहौल शांत करने के लिए खुद प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। ताज़ा घटना मणिपुर के ईस्ट इम्फाल जिले के अगिजांग गाँव में हुई है। मंगलवार (13 जून, 2023) की रात हुई इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैला हुआ है। उधर सुरक्षा एजेंसियों ने 1000 से भी ज्यादा हथियार बरामद करने में सफलता पाई है, जिन्हें आतंकियों द्वारा लूटा गया था।

3 मई को हिंसा शुरू होने के बाद से ही लगातार पुलिस से लेकर आम लोगों तक से बड़ी मात्रा में हथियार आतंकियों ने लूटे थे। पूरे मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक विभिन्न थानों और आउटपोस्ट्स से 4000 से भी अधिक हथियार और 5 लाख से भी अधिक गोली-बारूद लूटे जा चुके हैं। अब तक इनमें से 1040 बंदूकों और 13,601 गोली-बारूद जब्त करने में ही पुलिस को सफलता मिली है। इतना ही नहीं, सुरक्षा एजेंसियों ने 320 ज़िंदा बम जब्त कर के उन्हें निष्क्रिय करने में सफलता पाई है।

ताज़ा हिंसा की बात करें तो अब तक 9 लोग मारे गए हैं और 11 घायल हुए हैं। ये इलाका कांगपोकपि जिले के साथ लगती है। इम्फाल ईस्ट के एसपी के शिवकांत सिंह, जो रात के 10-10:30 बजे घटनास्थल पर पहुँचे थे, उन्होंने बताया कि पुलिस और आतंकियों के बीच गोलीबारी के कारण ये घटना हुई है। राज मेडिसिटी में घायलों का इलाज चल रहा है, जिनमें से एक की हालत गंभीर है। ‘जवाहरलाल नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (JNIMS)’ में मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ।

वहीं इम्फाल वेस्ट के मोइरंगखोम इलाके में भी लूटपाट की घटनाएँ हुई हैं। जिन 9 लोगों की हत्या हुई है, वो सभी मैतेई समाज के थे। इसके बाद इम्फाल के दोनों जिलों में कर्फ्यू की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है और दिन-रात कर्फ्यू जारी रहेगा। इससे पहले कर्फ्यू में कुछ राहत दिए जाने की शुरुआत है। बता दें कि ईसाई आतंकियों ने मैतेई समाज के लोगों का बड़े स्तर पर कत्लेआम किया है, क्योंकि वो नहीं चाहते कि मूलनिवासियों को जनजातीय समाज का दर्जा मिले।

साबिर अली के घर हुए धमाकों ने 4 की ली जान, 500 मीटर दूर तक गिरा मलबा: पुलिस ने खाली कराए 300 घर, मृतकों में 6 महीने का ओम भी

उत्तर प्रदेश के संभल में एक घर में हुए विस्फोट में चार लोगों की मौत हो गई। आठ लोग घायल हैं। धमाका पटाखा कारोबारी साबिर अली के घर हुआ। मृतकों में साबिर की बीवी गुड्डो (45), बेटी अनम (17), पड़ोसी पप्पू की बेटी सुमैय्या (15) और जसवंत का छह महीने का बेटा ओम शामिल है।

धमाका मंगलवार (13 जून 2023) को हुआ। यह इतना जोरदार था कि साबिर का मकान पूरी तरह ढह गया। मलबा 500 मीटर दूर तक जाकर गिरा। एहतियातन पुलिस को आसपास के करीब 300 घर खाली कराने पड़े। साबिर अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बताया है कि घर में रखे आतिशबाजी की सामग्री स्टोर करके रखी हुईं थी। इसमें आग लगने के कारण विस्फोट हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थाना क्षेत्र गुन्नौर का है। मंगलवार शाम लगभग 6 बजे साबिर के घर पर जोरदार ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट की तीव्रता इतनी थी कि उसकी गूँज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। डर से लोग इधर-उधर भागने लगे। धमाके की चपेट में सबसे पहले साबिर की पत्नी और बेटी आए। दोनों की मौत पर ही मौत हो गई। साबिर के पड़ोस में एक बच्ची की भी मौत हो गई। घटनास्थल से उठा मलबा 500 मीटर दूर जा कर गिरा। इसकी चपेट में आने से ओम नाम के एक बच्चे की मौत हो गई।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुँची। राहत और बचाव कार्य शुरू हुए। कुल 8 घायलों को निकाल कर अस्पताल पहुँचाया गया। एहतियातन साबिर के आसपास के लगभग 300 घरों को खाली करवाया गया। आसपास रहने वालों से गैस सिलेंडर भी घरों से बाहर निकाल कर खुले में रखने की अपील की गई। धमाके में साबिर का घर पूरी तरह से जमींदोज हो गया है। पड़ोसियों के घरों को भी काफी नुकसान पहुँचा है। चश्मदीदों ने धमाके के बाद धुएँ के गुबार देखने की भी बात कही है।

संभल जिले के पुलिस अधीक्षक ने साबिर अली की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी दी है। साबिर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पटाखों को आवासीय इलाकों में स्टोर कर रखा था।