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NIA ने 45 खालिस्तान समर्थकों की तस्वीरें जारी की, लोगों से माँगी मदद: लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमले से जुड़ा है मामला

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 19 मार्च 2023 को लंदन में भारतीय दूतावास पर हुए हमले के आरोपितों की तस्वीरें जारी की हैं। इन आरोपितों में अधिकतर खालिस्तानी विचारधारा के लोग शामिल हैं। CCTV फुटेज द्वारा निकाले गए इन 45 संदिग्धों के चेहरों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी सूचना के लिए NIA ने एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है जिस पर सीधे सम्पर्क किया जा सकता है।

चित्र साभार- NIA

14 जून (बुधवार) को जारी हुए इन पोस्टरों में आरोपितों के नाम पते के साथ उनकी राष्ट्रीयता और पासपोर्ट डिटेल आदि की भी जानकारी साझा करने की माँग की गई है। NIA का मानना है कि इन सभी 45 संदिग्धों द्वारा लंदन में न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया था बल्कि कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी पहुँचाई गईं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा संदिग्धों की जानकारी देने वाले की पहचान भी गुप्त रखने का भरोसा दिया गया है। संदिग्धों के बारे में किसी भी जानकारी को साझा करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 7290009373 पर डायरेकट मैसेज भेजने की अपील की गई है।

चित्र साभार- NIA

NIA द्वारा जिन संदिग्धों की तस्वीरें जारी हुई हैं उनके बारे में 5 जानकारियाँ माँगी गईं हैं। इसमें संदिग्धों के नाम, उनके गाँव और जिले सहित पते, उनके फोन नंबर, उनकी नागरिकता और पासपोर्ट की डिटेल शामिल है। तस्वीरों में कुछ संदिग्धों के हाथों में खालिस्तानी झंडा और कुछ के पास भारत विरोधी पोस्टर दिख रहे हैं। वहीं एक तस्वीर में 3 महिलाएँ भी नजर आ रहीं हैं। 2-3 को छोड़ कर ज्यादातर संदिग्ध पगड़ी में नजर आ रहे हैं।

चित्र साभार- NIA

बताते चलें कि ये घटना 20 मार्च 2023 की है। तब खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की गिरफ्तारी के विरोध में उसके समर्थकों ने लंदन स्थित भारतीय दूतावास पर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में हिंसा की गई थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने ब्रिटिश सरकार को आड़े हाथों लिया था। भारत सरकार इस हमले की जाँच NIA से करवा रही है। NIA की टीम मई 2023 में लंदन पहुँच कर अपनी कार्रवाई शुरू कर चुकी है।

62 साल की महिला ने 27 साल के मुहम्मद से किया निकाह, कहा- 40 जैसा फील करती हूँ… खुद के 11 बच्चे, 22 नाती-पोते भी

मलेशिया की रोकैया समत (Rokiah Samat) 62 साल की हैं। 11 बच्चे हैं। 22 नाती-पोते भी। अब वे 27 साल के सबहान मुहम्‍मद अमीन जुमदैल (Sabahan Muhamad Amin Jumdail) से निकाह के कारण चर्चा में हैं। यह उनकी तीसरी निकाह है। रोकैया का कहना है कि इस उम्र में भी वे 40 के जैसा महसूस करती हैं। साथ ही उम्मीद जताई है कि यह उनकी आखिरी निकाह होगी।

रिपोर्ट के अनुसार 2021 में टिकटॉक (TikTok) के जरिए रोकैया और मुहम्मद संपर्क में आए। फिर मुलाकात हुई और दोनों एक-दूसरे के करीब आते गए। जून 2022 में दोनों ने सगाई की। इसके तीन महीने बाद सितंबर में निकाह हो गया। अब एक टिकटॉक वीडियो के ही कारण यह निकाह चर्चा का विषय बन गया है। कुछ रिपोर्टों में मुहम्मद की उम्र 28 साल और रोकैया के 10 बच्चे बताए गए हैं।

रोकैया का खुद का सबसे बड़ा बच्चा 45 साल का और सबसे छोटा 18 साल का है। मुहम्मद से निकाह को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने बताया, ‘वह बेहद नेक, जिम्मेदार, धैर्यवान और ख्याल रखने वाला इंसान है।’ रोकैया के अनुसार उन्हें अपने बच्चों के साथ रहना पसंद नहीं। अकेले में वह खुद को ज्यादा सहज पाती है। उन्हें एक जीवनसाथी की जरूरत महसूस हो रही थी, इसलिए उन्होंने एक और निकाह कर लिया है। वे कहती हैं, “यह अल्लाह की मर्जी। मेरे लिए उम्र मायने नहीं रखता। ईमानदार शौहर मिलना महत्वपूर्ण है।”

रोकैया का पहला निकाह 1977 में हुआ था जो 40 साल चला। पहले शौहर से अलग होने के बाद उन्होंने 2018 में म्यांमार के एक आदमी से दूसरी निकाह की। यह करीब दो साल ही चला। रोकैया के अनुसार उनके दूसरे शौहर चीन में काम करते थे। इसके कारण रिश्ते में गर्मजोशी नहीं थी और उन्होंने तलाक ले लिया।

कुछ दिन पहले ही रोकैया और मुहम्मद ने अपनी निकाह की जानकारी वाला वीडियो टिकटॉक पर पोस्ट किया है। इसे 24 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। इसमें दोनों ने उम्र के फासले के बारे में भी बताया है। रोकैया का कहना है, “हालाँकि वह (मुहम्मद) बहुत छोटे हैं, पर मुझे पूरा यकीन है कि मेरे शौहर आखिरी साँस तक मेरा ख्याल रखेंगे। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह मेरी आखिरी निकाह होगी।” वहीं मुहम्मद का कहना है शुरुआत में वे रोकैया का दोस्त बनकर रहना चाहते, लेकिन बाद में वे उनसे जुड़ते गए। इसके बाद आखिरकार 2022 में अपने जन्मदिन पर 10 जनवरी को वे रोकैया से मिलने उनके घर पहुँचे। दोनों ने 9 सितंबर 2022 को निकाह किया था।

‘गजवा ए हिन्द की शुरुआत उत्तराखंड से होगी’: पुरोला महापंचायत पर देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक का सिर कलम करने की धमकी

उत्तराखंड के पुरोला में लव जिहाद के खिलाफ आज (15 जून 2023) होने वाली महापंचायत अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी गई है। पुरोला में प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है। वहीं महापंचायत के आयोजक स्वामी दर्शन भारती को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी दी गई है। वे देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक हैं।

स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को एक प्रेस नोट भेज कर महापंचायत स्थगित होने की जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि पहले महापंचायत पुरोला नगर में करने का प्रस्ताव था। लेकिन प्रशासन द्वारा धारा 144 लागू करने के बाद पंचायत को शहर से बाहर करने की योजना बनाई गई। इसकी भनक लगने के बाद प्रशासन ने पूरे पुरोला तहसील क्षेत्र में धारा 144 लगा दी है।

प्रेसनोट

प्रेसनोट में बताया गया है कि धारा 144 लागू करने के साथ प्रशासन ने महापंचायत से जुड़े लोगों को नजरबंद करना भी शुरू कर दिया। नजरबंद किए लोगों में स्वामी दर्शन भारती भी हैं। पत्र में महापंचायत को कुछ समय के लिए स्थगित किए जाने की जानकारी देते हुए बाद में फिर से इसका आयोजन करने की बात कही गई है।

ये हैं महापंचायत की माँगे

इस महापंचायत का मकसद अलग उत्तराखंड राज्य बनाए जाने के दौरान देखे गए सपनों को साकार करना बताया गया है। इस महापंचायत में रखी जाने वाली माँगों का भी एक अलग से पत्र स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को भेजा है।

महा पंचायत

इन माँगों में हिमाचल प्रदेश की तरह भू-कानून लागू करने, लव जिहाद को रोकने के लिए कड़े नियम, चार धाम यात्रा में समुदाय विशेष के लोगों का पूर्ण प्रतिबंध, प्रदेश में पहचान छुपा कर काम करने पर पाबंदी, वक्फ बोर्ड खत्म करने या उसकी तरह सनातन बोर्ड गठित करने, बाहरी और विशेष समुदाय के लोगों को अपने घर पर रखने वालों द्वारा पूरी गारंटी लेने का शपथ-पत्र और अनैतिक कामों में शामिल लोगों के पनाहगारों पर पुलिस की विशेष चौकसी की माँग शामिल है।

स्वामी दर्शन भारती को मौत की धमकी

देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती को सिर तन से जुदा की धमकी दी गई है। इस धमकी का पोस्टर स्वामी दर्शन भारती ने ऑपइंडिया को भेजा है। पत्र में NO महापंचायत पुरोला उत्तरकाशी लिखा गया है। इसके नीचे चेतावनी देते हुए किसी मुशर्रते इंकलाब ने लिखा है, “RSS/भाजपा के भगवा आतंकवादी। अगर पहाड़ में हमारे किसी आदमी को नुकसान पहुँचाया तो पहाड़ी कुत्ते तो तुझे पहाड़ जाना होगा या तेरा सिर कलम कर दिया जाएगा और गज़वा ए हिन्द की शुरुआत इंशाअल्लाह उत्तराखंड से होगी।”

धमकी

स्वामी दर्शन भारती को यह धमकी बुधवार (14 जून 2023) को पत्र भेज कर दी गई है। पोस्टर के अंत में सिर कलम करने वाले को 5 करोड़ रुपए इनाम भी देने की घोषणा की गई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए स्वामी दर्शन भारती ने बताया कि धमकी के ये पत्र पत्थर में लपेट कर उनके घर में फेंके गए थे। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी पुलिस को दी गई है। बकौल स्वामी दर्शन भारती उनके घर पर अभी भी फ़ोर्स तैनात है।

बाजार में सन्नाटा और पुलिस का फ्लैग मार्च

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड प्रशासन ने पुरोला में धारा 144 लागू करने के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात कर दिया है। फिलहाल बाजार में दुकानें बंद हैं। पुलिस द्वारा पुरोला में फ्लैग मार्च भी किया गया है।

‘पाकिस्तानी एजेंसियों ने टॉर्चर किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने मेरा हाथ थाम लिया’: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली का ‘घर वापसी’ का ऐलान

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली (Shayan Ali) ने हिंदू धर्म स्वीकार करने की घोषणा की है। एक ट्वीट में उन्होंने ‘घर वापसी’ के बारे में बताया है। कहा है कि पाकिस्तानी एजेंसियों के टॉर्चर के कारण जब उन्हें मुल्क छोड़ना पड़ा, वे अवसाद में आ गए थे, तब श्रीकृष्ण ने उनका हाथ थामा था। साथ ही जल्द ही भारत आने की भी बात कही है।

अपने ट्वीट में शायन अली ने बताया है, “करीब दो साल अपने पूर्वजों की संस्कृति और जीवनशैली का पालन करने के बाद आज (15 जून 2023) मैं घर वापसी कर रहा हूँ। विश्वास जताने के लिए मैं इस्कॉन का आभारी हूँ।”

आगे उन्होंने बताया है कि एजेंसियों की प्रताड़ना के कारण उन्हें 2019 में पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था। वे अवसाद में चले गए थे। टूट गए थे। उस समय ‘श्रीकृष्ण’ से उन्हें शक्ति मिली। अब उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार कर अपने पूर्वजों को गौरवान्वित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है, “मैं बहुत जल्द अपनी ‘मातृभूमि’ भारत आऊँगा, जहाँ मेरे दादा-दादी और मेरे सभी पूर्वज पैदा हुए थे। अपनी ‘मैं खुद को अपनी मिट्टी और लोगों को समर्पित कर दूँगा क्योंकि आखिर में घर तो घर होता है।”

शायन अली ने कहा है कि एक ‘सनातनी’ होने के नाते वे किसी भी अन्य मजहब के खिलाफ नहीं हैं। वे सभी मान्यताओं का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि दूसरे भी उनके विश्वासों का सम्मान करें। उन्होंने लिखा है, “मेरी गीता मुझे हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाती है, चाहे उसका धर्म कोई भी हो। इस खास दिन पर, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ जिन्हें मैंने अपने पूरे जीवन में जानबूझकर या अनजाने में चोट पहुँचाई हो। मैं लोगों को चोट पहुँचाकर अपने जीवन की इस खूबसूरत यात्रा की शुरुआत नहीं करना चाहता। आज मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने पर गर्व महसूस हो रहा है। मुझे उम्मीद है कि मेरे पूर्वज भी ऐसा ही महसूस कर रहे होंगे।”

इससे पहले उन्होंने मई में एक लंबे ट्वीट में ‘पाकिस्तान छोड़ने की मेरी कहानी’ शीर्षक से अपनी आपबीती साझा की थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की साजिश का हिस्सा बनने से इनकार करने पर उन पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का जासूस और यहूदी एजेंट होने के आरोप लगाए गए। मुझे जान से मारने की योजना थी। लेकिन मैं भाग्यशाली था कि मैं सुरक्षित पाकिस्तान से निकलने में कामयाब रहा।

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में उन्होंने अपने पुरखों के भारत छोड़कर पाकिस्तान आने के फैसले पर निराशा जताई थी। उन्होंने लिखा था, “दुनिया में ‘पाकिस्तान’ जैसी कोई चीज ही नहीं है। पाकिस्तान की स्‍थापना मजहब के आधार पर की गई थी न कि इसलिए कि दुनिया को इसकी जरूरत थी। मेरे दादा-दादी ने भारत के बजाय पाकिस्तान को सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि वे मुसलमान थे। पाकिस्तान जाना मेरे दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती थी।”

पैसे दिए, गले में डाला क्रॉस, घर से देवी-देवताओं की मूर्ति फिंकवाई… ईसाई बनने को नहीं हुआ तैयार तो झूठे केस में फँसाने की धमकी: पादरी सहित 4 पर FIR

उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक परिवार के जबरन धर्मांतरण करने की कोशिश में 4 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बीमार बच्चे को ठीक करने के बहाने आरोपित पूरे परिवार पर ईसाई बनने का दबाव डाल रहे थे। जब पीड़ित परिवार ने धर्मांतरण से इनकार कर दिया तो उन्हें झूठे केस में फँसाने की धमकी दी। 13 जून 2023 को इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है।

मामला हरदोई जिले के थाना क्षेत्र सुरसा का है। यहाँ के गाँव ओदरा के रहने वाले विजय कुमार श्रीवास्तव ने अपने ही गाँव के 4 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि मैकू, सुमित, अधिराज और शिवनंदन ईसाई हैं। अधिकराज और शिवनंदन को उन्होंने पादरी भी बताया है। चारों पर गाँव में बिना अनुमति और मान्यता के ईसाई स्कूल चलाने का भी आरोप है।

शिकायतकर्ता ने बताया है कि उनके बेटे सौरभ को ब्रेन ट्यूमर था। आरोपितों ने उन्हें बीमारी ठीक करने का भरोसा दिया। इसके बाद विजय कुमार कई बार अपने बेटे को आरोपितों के घर ले गए। लेकिन उनकी झाड़फूँक से भी उनके बेटे की हालत ठीक नहीं हुई। कुछ दिनों बाद चारों आरोपितों ने विजय से कहा कि यदि वे पूरे परिवार के साथ धर्म परिवर्तन कर लेते हैं तो उन्हें एक लाख रुपया मिलेगा। साथ ही उनका बेटा भी ठीक हो जाएगा। इसी दौरान 24 दिसंबर 2022 को उन्हें 5000 रुपए दिए गए और उनके बीमार बेटे के गले में क्रॉस डाल दिया गया।

आरोप है कि मैकू, सुमित, अधिराज और शिवनंदन ने विजय के घर में मौजूद देवी-देवताओं की मूर्ति बाहर फिंकवा दी। जब विजय के परिजनों और पड़ोसियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। विजय ने भी धर्म बदलने से इनकार कर दिया। शिकायत के अनुसार इससे चारों आरोपित नाराज हो गए। वे 14 अप्रैल 2023 को शाम 6 बजे विजय के पास पहुँच गए जो उस समय खेत में काम कर रहा था।

विजय कुमार का आरोप है कि उस दिन भी आरोपितों ने उन पर धर्मांतरण का दबाव डाला। ऐसा न करने पर झूठे केस में फँसाने की धमकी दी। उस दिन के बाद से लगातार उन पर दबाव बनाया जा रहा था। इससे परेशान होकर विजय कुमार ने पुलिस से फरियाद लगाई। उनकी शिकायत पर मौकू, सुमित, शिवनंदन और अधिराज पर IPC की धारा 504 सहित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत केस दर्ज किया गया है।

फिलहाल पुलिस सारे मामले की जाँच कर रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

राज ठाकरे ने काट डाला औरंगजेब का गला… कुछ इस अंदाज़ में MNS सुप्रीमो ने मनाया अपना 55वाँ जन्मदिन, मुग़ल बादशाह के साथ-साथ मस्जिदों वाले लाउडस्पीकर को भी काटा

‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)’ के संस्थापक राज ठाकरे ने बुधवार (14 जून, 2023) को अपने 55वाँ जन्मदिन मनाया। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने जो केक काटा वो चर्चा का विषय बना हुआ है। राज ठाकरे ने अपने जन्मदिन पर जो काके काटा, उसके एक तरफ औरंगजेब और दूसरी तरफ मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर की तस्वीर बनी हुई थी। बता दें कि महाराष्ट्र में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा औरंगजेब का नाम लेकर जगह-जगह हिंसा की है।

वहीं राज ठाकरे की लंबे समय से माँग रही है कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाएँ, क्योंकि दिन में 5 बार नमाज से आसपास के इलाके के लोगों को परेशानी होती है। रायगढ़ से MNS कार्यकर्ता इस केक को लेकर मुंबई पहुँचे थे। इसके बाद राज ठाकरे ने हाथ में चाकू लेकर प्रतीकात्मक रूप से केक में औरंगजेब का गला काटा। इस दौरान समर्थकों ने ताली बना कर उनका स्वागत किया और चिल्ला कर उनका समर्थन भी किया।

राज ठाकरे अपने दमदार भाषणों के कारण जाने जाते हैं, जिनमें वो अक्सर हिन्दू धर्म और मराठा गौरव से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। राज ठाकरे ने अपना जन्मदिन मनाते हुए केक के उस हिस्से को भी काटा, जहाँ मस्जिदों वाला लाउडस्पीकर बना हुआ था। महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर पर अजान के कारण कई बार हिंसा हो चुकी है। 7 जून को कोल्हापुर में छत्रपति शिवाजी महाराज के समर्थन में रैली निकाल कर औरंगजेब का महिमामंडन करने वालों का विरोध किया गया।

हिंसा की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। MNA कार्यकर्ताओं ने ताजा प्रकरण में औरंगजेब का पुतला भी फूँका है। अहमदनगर में भी एक जुलूस के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों ने औरंगजेब के पोस्टर लहराए थे। मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने बड़ी पैमाने पर हिन्दुओं का कत्लेआम कराया था और मंदिरों को ध्वस्त किया था। इसी तरह टीपू सुल्तान का भी महिमामंडन करने की कोशिश की गई।

सऊदी अरब में स्कूली छात्राओं ने हिजाब-बुर्का निकाल कर फेंका, पाँव तले कुचला: शो का वीडियो वायरल होने के बाद जाँच का आदेश

सऊदी अरब के केंद्रीय क्षेत्र अल कासिम के एक स्कूल में “होराइजन्स” नामक स्टेज शो के दौरान स्कूली छात्राओं द्वारा अबाया (बुर्का) उतार कर फेंकने के बाद विवाद बढ़ गया है। विवाद को देखते हुए शिक्षा अधिकारियों ने इसकी जाँच करने का वादा किया है।

दरअसल, एक स्कूल के स्टेज शो के एक ऑनलाइन वीडियो में एक दृश्य दिखाया गया, जिसमें स्कूली छात्राओं का एक समूह अपने काले बुर्के को उतारता है और उन पर चलकर हाथों में रोशनी वाली एक गेंद पकड़े हुए अपने सहयोगी की ओर बढ़ती हैं।

विवाद बढ़ने के बाद सऊदी अरब के अधिकारियों ने इसकी जाँच का आदेश दिया है। इसके साथ ही स्कूल समारोहों के कार्यक्रमों की निगरानी करने और उनकी सामग्री को संशोधित करने के लिए एक समिति के गठन का भी आदेश दिया।

अल कासिम के शिक्षा अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि इस कदम का उद्देश्य ‘इस्लामी मूल्यों और शिक्षाओं’ के अनुरूप शैक्षिक भूमिका को निर्देशित करना है। बता दें कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह शो कब और कहाँ प्रदर्शित किया गया था।

बताते चलें कि हाल के वर्षों में इस्लामी मुल्क सऊदी अरब ने बाहरी दुनिया से कदम मिलाने के लिए मुल्क में थिएटर और संगीत सहित मनोरंजन के साधनों को मंजूरी दी थी। इसे एक बड़े सामाजिक परिवर्तन के तौर पर देखा गया।

फरवरी 2020 में सऊदी अरब के संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध एक सरकारी एजेंसी के रूप में संगीत आयोग की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संगीत क्षेत्र में विकास को देखना और संगीत शिक्षा तक सबकी पहुँच प्रदान करना था। पिछले सितंबर में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि दो साल में संगीत शिक्षा किंडरगार्टन स्तर से पढ़ाया जाने लगेगा।

इतना ही नहीं, अप्रैल 2021 में भारत के दो प्रमुख धर्मग्रंथों- रामायण, महाभारत और आयुर्वेद को भी सऊदी अरब के स्कूलों में पढ़ाए जाने की मंजूरी दी गई थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन ग्रंथों को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्देश दिया था। उम्मीद है कि जल्दी ही इसे पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।

गंगा आरती करने वाले विभु उपाध्याय ने पास की NEET परीक्षा: कहा – करता रहूँगा मैया की सेवा, सनातन संस्कृति से जुड़ने से मन को मिली शांति

उत्तर प्रदेश के विभु उपाध्याय ने NEET की परीक्षा 720 में 622 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने अपने प्रदर्शन का श्रेय माँ गंगा की आराधना को दिया है। विभु अपना कोर्स पूरा करने के बाद MBBS डॉक्टर बनेंगे। विभु की इस सफलता से उनका पूरा परिवार भी प्रभुल्लित है। विभु उपाध्याय ने कहा है कि वो डॉक्टर बनने के बाद भी माँ गंगा की आरती करते रहेंगे, मैया की सेवा करते रहेंगे। ऐसा करने से उनके मन को शांति मिलती है।

विभु उपाध्याय के इस प्रदर्शन से उनके गाँव कछला में भी उत्साह का माहौल है। विभु ने कहा, “गंगा मैया ने मुझे लोगों की सेवा के लिए चुना है। मैं उन्हें कभी निराश नहीं करूँगा। उनकी कृपा से ही मैं आज इस मुकाम तक पहुँच पाया हूँ। मेरी कामयाबी के पीछे मेरे माता-पिता के वाला शिक्षकों का भी हाथ है। मैं अपने जिले के पूर्व DM डीके सिंह को भी धन्यवाद देता हूँ, 2019 में उन्होंने ही गंगा आरती कार्यक्रम की शुरुआत करवाई थी।”

विभु उपाध्याय का मानना है कि ऐसी पहल के कारण ही उनके जैसे युवा सनातन धर्म से जुड़ पाए। घाट पर जाकर आरती करना युवाओं को अच्छा लगने लगा। साथ ही उन्हें उनकी संस्कृति से भी जोड़ता था। विभु उपाध्याय ने गंगा माँ की आरती के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र की भी तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि उनका मन गंगा आरती के कारण केंद्रित रहता था और शांत रहता था। वो रोज एक घंटे आरती में अपना समय देते थे।

इसके बाद वो पढ़ाई में समय व्यतीत करते थे। वो पिछले 4 वर्षों से NEET की तैयारी कर रहे थे, अर्थात वो जब 9वीं कक्षा में थे तभी से। वो प्रतिदिन रात को 1 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक पढ़ाई करते थे। बीच में वो खेलकूद भी करते थे। 12वीं करने के बाद वो राजस्थान के कोटा कोचिंग के लिए चले गए। विभु की माँ सुनीता ने भी कहा कि गंगा मैया की कृपा से उनके बेटे को सफलता मिली है। पिता हरेंद्र ने भी कहा कि हमलोग ऐसे ही गंगा मैया की सेवा करते रहेंगे।

देश में लागू होगा UCC, वो भी आपकी सलाह लेकर: विधि आयोग ने माँगी जनता की राय, ऐसे भेजें अपने सुझाव

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code- UCC) को लेकर विधि आयोग (Law Commission) एक बार फिर से लोगों सेे रायशुमारी शुरू कर दी है। इसको लेकर देश के प्रबुद्ध लोगों तथा सभी धर्मों के मान्यता प्राप्त प्रमुख धार्मिक संगठनों से उनकी राय माँगी है।

विधि आयोग ने बुधवार (14 जून 2023) को कहा कि 22वें विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता के बारे में मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों के विचारों को जानने के लिए फिर से निर्णय लिया। आयोग ने कहा कि जिन लोगों को इसमें रुचि है और अपनी राय देना चाहते हैं, वे राय दे सकते हैं।

विधि आयोग ने कहा कि जो लोग अपनी राय रखना चाहते हैं कि वे नोटिस जारी करने की तारीख के 30 दिनों के भीतर इससे संबंधित लिंक पर करके अपनी राय भेज सकते हैं। इसके अलावा, भारत सरकार के विधि आयोग को [email protected] पर ईमेल द्वारा भी राय भेज सकते हैं।

कानूनी पैनल ने आगे कहा, “शुरुआत में भारत के 21वें विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता पर विषय की जाँच की थी और 7 अक्टूबर 2016 को एक प्रश्नावली दी थी। इसके साथ ही, 19 मार्च 2018 एवं 27 मार्च 2018 और 10 अप्रैल 2018 की सार्वजनिक अपील/नोटिस देकर सभी हितधारकों को अपने विचार रखने का अनुरोध किया था।”

विधि आयोग ने अपने बयान में कहा कि इस अपील पर लोगों से उसे भारी प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद 21वें विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को ‘पारिवारिक कानून में सुधार’ पर परामर्श पत्र जारी किया थी।

पैनल ने कहा कि चूंकि परामर्श पत्र जारी किए हुए तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में विषय की प्रासंगिकता और महत्व को ध्यान में रखते हुए तथा इस विषय पर विभिन्न अदालती आदेशों को ध्यान में रखते हुए भारत के 22वें विधि आयोग ने इस पर पहल करना जरूरी समझा।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समान रूप लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

गोवा में लागू है UCC

देश भर में समान नागरिक संहिता को लागू करने की माँग दशकों से हो रही है, लेकिन देश में गोवा अकेला ऐसा राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता लागू है। गोवा में वर्ष 1962 में यह कानून लागू किया गया था।

साल 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भारतीय संसद ने गोवा में ‘पुर्तगाल सिविल कोड 1867’ को लागू करने का प्रावधान किया था। इसके तहत गोवा में समान नागरिक संहिता लागू हो गई और तब से राज्य में यह कानून लागू है।

पिछले दिनों गोवा में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड की तारीफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस ए बोबड़े ने भी की थी। सीजेआई ने कहा था कि गोवा के पास पहले से ही वह है, जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने पूरे देश के लिए की थी।

फंदे से लटका मिला 17 साल की हिन्दू लड़की का शव, शादाब पर ‘लव जिहाद’ का आरोप: खून से दीवार पर लिखा – तुम्हारी ज़िंदगी से जा रही हूँ, खुश रहना

उत्तराखंड में ‘लव जिहाद’ का मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ये सब इसके बावजूद हो रहा है, जब उत्तरकाशी से लेकर कई इलाकों में हिन्दू समाज सड़क पर है। अब राजधानी देहरादून में एक लड़की की लाश उसके घर में फंदे से लटकी हुई मिली है। घटना लक्षमण चौक इलाके की है। साथ ही कमरे की दीवार पर खून से ये लिखा हुआ मिला – “मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से जा रही हूँ। तुम दोनों खुश रहना।” लड़की एक मुस्लिम युवक से प्यार में थी।

इसके बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। लड़की नाबालिग थी। उसकी उम्र मात्र 17 साल थी। लड़की का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला है, लेकिन ये लोग देहरादून कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित किराए के एक मकान में रहता था। सोमवार (12 जून, 2023) की रात पूरा परिवार गर्मी के कारण मकान की छत पर सो रहा था। लेकिन, लड़की बाद में कमरे में सोने चली गई।

रात करीब 2 बजे जब लड़की के पिता किसी काम से नीचे आए तो उन्होंने देखा कि उनकी बेटी का शव फंदे से लटक रहा था। उसके दोस्त शादाब पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा है। उसकी सहेलियों ने पुलिस को बताया कि शादाब उन्हें भी फँसाने की कोशिश कर चुका था। उक्त मुस्लिम युवक पर पूरे परिवार के साथ मिल कर हिन्दू लड़कियों को फँसाने का काम करने का आरोप लगा है। ये लड़की उसके जाल में फँस गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स में परिजनों के हवाले से ये भी आशंका जताई जा रही है कि हो सकता है कि शादाब लड़की से मिलने घर पर आया हो। परिजन हत्या की आशंका भी जाहिर कर रहे हैं। परिजनों ने कहा कि लड़की से उनका कोई झगड़ा नहीं था, लेकिन उसका ब्रेनवॉश किया गया था। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि शादाब ने लड़की पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया होगा। पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या बताया है लेकिन जाँच के बाद पूरी बात सामने आने की बात कही है।