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सिद्धारमैया के बाद कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भी दिया इस्तीफ़ा

कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों में कॉन्ग्रेस की करारी शिकस्त के बाद इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है। दिनेश गुंडू राव ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दिया था। 15 सीटों पर हुए ये उपचुनाव येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे।

गुंडू राव ने कहा, “मैं हार की ज़िम्मेदारी ले रहा हूँ और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ।”
सिद्धारमैया ने इस्तीफ़ा देते हुए कहा, “विधायक दल के नेता के रूप में, मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में इस्तीफ़ा दे दिया है। मैंने अपना इस्तीफ़ा सोनिया गाँधी जी को सौंप दिया है।”

ग़ौरतलब है कि भाजपा के पास 105 विधायक थे, जिसमें एक निर्दलीय विधायक भी शामिल था। इसीलिए कॉन्गेस की नज़र भी कर्नाटक के उप चुनाव के नतीजों पर लगातार बनी हुई थी, क्योंकि इसके नेता JD (S) के साथ फिर से गठजोड़ कर सरकार बनाने की फ़िराक में थे। जानकारी के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा था कि नतीजों के बाद बहुत सी चीजें बदल जाएँगी। दरअसल, येदियुरप्पा की सरकार बनने से पहले कॉन्ग्रेस-JD (S) की सरकार में कॉन्ग्रेस के 14 और JD (S) के तीन विधायकों द्वारा इस्तीफ़ा दिए जाने से गठबंधन सरकार गिर गई थी।

इसके बाद सभी बागी विधायकों को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्हीं 15 सीटों पर उप चुनाव कराए गए हैं। बता दें कि बीजेपी का इस चुनाव से वोट पर्सेंट बढ़ा है। चुनाव आयोग से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, बीजेपी पार्टी को 49.7% वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 31% वोट मिले। इसके अलावा, कुमारस्वामी की JD (S) को तगड़ा झटका लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। आँकड़ों के अनुसार, JD (S) को सबसे कम यानी 13.3% ही वोट मिले हैं।

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भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

नागरिकता विधेयक पर अपने पिछले लेख की ही तरह इस बार भी मैं शुरुआत इसी सवाल से करूँगा कि मजहब विशेष के लोग भारत में ‘माइनॉरिटी’ आखिर किस पैमाने पर, किस तर्क से हैं? 20 करोड़ की आबादी, जनसंख्या में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी, तकरीबन 1000 साल तक इस देश पर शासन, फिर पहले ब्रिटिश और उसके बाद सेक्युलर सरकारों द्वारा जमाईयों वाला आदर-सत्कार। इसके बाद भी यह मजहब अगर खुद को ‘सताया हुआ’ समझते हैं तो इसमें किस का दोष है?

पहले इस्लामी शासन में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए जजिया से लेकर तलवार और बलात्कार के इस्तेमाल की छूट, हज़ारों मंदिरों को ढहा कर उनके ऊपर मस्जिद बनाने की स्वच्छंदता, और ब्रिटिश शासन के अंत में देश के हिन्दुओं से उनकी एक तिहाई ज़मीन छीन लेना- इतना सब जी भर कर एक हज़ार साल तक करने के बाद भी अगर इस देश के समुदाय विशेष के पूर्वजों ने उन्हें ऐसी स्थिति में छोड़ा कि उनका एक बड़ा तबका ‘ghetto’ वाली झुग्गियों में रहता है, आधुनिक शिक्षा को ‘हराम’ मानता है, अपनी बीवियों से जबरन हलाला करवाता है, दूसरे मज़हबों के जुलूसों पर पत्थरबाज़ी करता है, तो इसमें हिन्दुओं का दोष कहाँ से हुआ?

इतनी बड़ी भूमिका बाँधना गैर-ज़रूरी लग सकता है, लेकिन है अति-आवश्यक। NDTV के सम्पादक श्रीनिवासन जैन नागरिकता विधेयक को लेकर अपने ट्वीट के चंद शब्दों ‘excludes a specific minority community’ में जो हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने, उन्हें नाहक ग्लानि का अनुभव कराने और मजहब विशेष को बिना किसी ठोस आधार के बेचारा दिखाने का जो प्रपंच रच रहे हैं, उसे विस्तार से ही काटा जा सकता है।

जिस ‘specific minority community’ यानी कि कथित अल्पसंख्यकों के लिए उनके दिल में इतनी हूक उभर रही है, भारत के, और दूसरे देशों के, संदर्भ में उसे स-प्रसंग देखे जाने की ज़रूरत है।

भारत के संदर्भ में हमने देखा कि अगर वे मानव विकास के कुछ सूचकांकों पर, एक हज़ार साल की प्रभुसत्ता के बाद भी, पिछड़े हुए हैं, तो यह हिन्दुओं या अन्य किसी समुदाय की गलती से नहीं है, जो वह समुदाय अपने हितों, या देश के राष्ट्रीय हितों को कुर्बान कर इसकी भरपाई करे।

और भी ज़्यादा ज़रूरी नागरिकता बिल के संदर्भ को देखा जाना है। नागरिकता बिल के संदर्भ में जिन लोगों की बात हो रही है, यानी अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वे अल्पसंख्यक नहीं हैं- इस्लामी देशों के बहुसंख्यक समुदाय हैं। और अगर NDTV यह नहीं कह रहा है कि ऐसा केवल और केवल हिन्दू-बहुल देशों और इलाकों में ही होता है कि अल्पसंख्यकों पर ही अत्याचार हो, व अत्याचार करने वाला बहुसंख्यक ही हो, तो उसके द्वारा प्रतिपादित अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक संबंधों के फ़लसफ़े के हिसाब से तो इन देशों में शोषण, प्रताड़ना, हिंसा, बलात्कार करने वाले बहुसंख्यक यानी मजहब विशेष से हुए, और इसके शिकार होने वाले अल्पसंख्यक यानी हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि। यानी NDTV के संपादक महोदय खुद के ट्वीट में ही कंफ्यूजियाए से, अतार्किक दिखते हैं।

भारत सरकार यह बिल मानवीयता के आधार पर, न कि किसी क़ानूनी जिम्मेदारी के तहत, दूसरे देशों के उन नागरिकों के लिए ला रही है, जो वहाँ पर मज़हबी प्रताड़ना का शिकार हैं। पहली बात तो मानवीयता किसके अंदर किस आधार पर होगी, किस हद तक होगी, यह न संविधान या कानून तय करते हैं, न ही मीडिया गिरोह। दूसरी बात, अगर इस्लामी आक्रांताओं ने भारत के पड़ोसियों में कोई ऐसा देश छोड़ा होता, जहाँ समुदाय विशेष वाले अल्पसंख्या में होते और शांति से रह कर दिखा देते, तो उन पर विचार करने की बात आती। अब बाबर, अब्दाली, तुग़लक़ और लोदी ने कोई ऐसा समाज भारत के आसपास मजहबी-प्रभुत्व से अछूता छोड़ा ही नहीं, तो इसमें हम क्या करें!

भारत अपनी मर्ज़ी से, बिना किसी संवैधानिक अनिवार्यता के किसी देश के अल्पसंख्यकों की जान बचाने का ज़िम्मा ले रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि उस देश के अत्याचारी बहुसंख्यक समुदाय का भी ठेका उसके सिर केवल इसलिए आ जाए क्योंकि वह जिहादी बहुसंख्यक समुदाय इस देश के ‘समुदाय विशेष’ की उम्मत का हिस्सा है।

सच्चाई यही है कि इनके राजनीतिक आकाओं को समुदाय विशेष के वोटों की काटनी है फ़सल! लेकिन अभी के राजनीतिक समीकरण में यह होता जा रहा है मुश्किल। क्योंकि अब मजहब विशेष के एक हिस्से ने कट्टरता से किनारा करना शुरू कर दिया है (जिसका सबूत है इस साल लोकसभा चुनावों में आधी मजहबी प्रभुत्व वाली सीटों पर अकेले मोदी/BJP का जीत दर्ज करना, हलाला पर प्रतिबंध को समुदाय विशेष की महिलाओं का समर्थन, आदि)। इसके अलावा हिन्दू भी भाजपा के पक्ष में होने लगे हैं ध्रुवीकृत, जो उनके ख़िलाफ़ चल रही नफ़रती मुहिम के चलते स्वभाविक है। इसलिए भारत के इस मजहब में वही असुरक्षा और कुंठा भरने का काम अब पत्रकारिता का समुदाय विशेष कर रहा है, जो सैकड़ों सालों से इन्हें हिंसा और जिहाद की घुट्टी पिलाने वाले करते चले आए हैं।

और हाँ! एक सच यह भी है कि इस सच को मानने के बजाय श्रीनिवासन जैन साहब और उनका समूचा NDTV दिल्ली के ज़ाफ़राबाद, जाकिरनगर, सीलमपुर, मुबारकपुर, जामियानगर, या निजामुद्दीन शिफ़्ट हो जाना पसंद करेगा बजाय कैलाश कॉलनी के अपने वर्तमान पते के!

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रॉबर्ट वाड्रा बीमार: विदेश में कराएँगे इलाज, कोर्ट ने 2 हफ्ते के लिए दी इजाजत

कॉन्ग्रेस महसचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वाड्रा को विदेश जाने की इजाजत दे दी है। वाड्रा ने मेडिकट ट्रीटमेंट और बिजनेस कारणों से विदेश यात्रा की इजाजत माँगी थी। उनका कहना था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती। इलाज के लिए वे विदेश जाना चाहते हैं।

बता दें कि वह फिलहाल मनी लॉड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। कोर्ट ने उन्हें दो सप्‍ताह के लिए विदेश जाने की छूट दी है। इससे पहले कोर्ट ने ईडी और वाड्रा दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वाड्रा की याचिका पर कोर्ट ने ईडी से जवाब माँगा था। ईडी ने वाड्रा की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें विदेश नहीं जाने दिया जाए।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉड्रिंग मामले में फँसे हुए हैं। उन पर लंदन में बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप है। इसके अलावा राजस्थान के बीकानेर में भी जमीन खरीदने की जाँच चल रही है। लंदन में एक फ्लैट को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया था। ईडी का आरोप है कि यह फ्लैट मनोज अरोड़ा की बजाय रॉबर्ट्र वाड्रा का है। यह संपत्ति हथियार डीलर संजय भंडारी से साल 2010 में खरीदा गया था।

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि लंदन स्थित ब्रायनटन स्क्वेयर में 1.2 करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदने में मनी लॉन्ड्रिंग की गई। संपत्ति की कीमत 19 लाख पाउंड है। कथित तौर पर संपत्ति का स्वामित्व वाड्रा के पास है। इसे लेकर ईडी रॉबर्ट वाड्रा से कई चरणों में पूछताछ कर चुका है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कोर्ट ने वाड्रा को 6 सप्ताहों के लिए अमेरिका तथा नीदरलैंड जाने की इजाजत दी थी। हालाँकि वाड्रा को लंदन जाने की अनुमति नहीं मिली थी, क्योंकि लंदन में ही संपत्ति खरीद की जाँच ईडी कर रही है। वाड्रा को 1 अप्रैल को कोर्ट ने सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि वह कोर्ट से मंजूरी लिए बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं।

प्रियंका की सुरक्षा में ‘सेल्फी वाली’ चूक रॉबर्ट वाड्रा के लिए बलात्कार, यौन अपराध जैसे?

रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील कराने वाले डीलर के ठिकानों से 6 बोरी कागजात के साथ 11 लाख कैश बरामद

रॉबर्ट वाड्रा सहयोग नहीं कर रहे, हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता, मनी लॉन्ड्रिंग में उनका सीधा संबंध: ED

1 मिनट का VIDEO, जिससे सुलझी हैदराबाद रेप ऐंड मर्डर केस की गुत्थी

हैदराबाद में प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड मामले में पुलिस को आरोपितों तक पहुँचाने वाली महत्तवपूर्ण सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। वीडिया हैदराबाद के बाहरी इलाके शमशाबाद टोल प्लाजा की है। 1 मिनट की इस फुटेज में देखा जा सकता है कि एक ट्रक टोल प्लाजा पर पार्क है। थोड़ी देर में उसकी हेडलाइट जलती है और ट्रक धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगती है। इसके बाद ट्रक टोल लेन में एंटर करता है और फिर उस इलाके से निकल जाता है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इसी वीडियो की मदद से पुलिस ने आरोपितों की धड़-पकड़ की। फुटेज के मुताबिक 26 नवंबर को यह ट्रक टोल प्लाजा में पार्क हुआ था। लेकिन, 27 नवंबर को इस ट्रक में हरकत तब देखी गई जब प्रीति रेड्डी के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्या कर दी गई। इस फुटेज में ट्रक के पास कई लोगों की गतिविधियाँ देखने को मिल रही है। ट्रक में कई लोगों को घुसते हुए देखा जा सकता है।

इस सीसीटीवी फुटेज ने ही पुलिस को आरोपितों तक पहुँचाया। इस फुटेज के हाथ लगने के बाद ही पुलिस ने टोल प्लाजा जाकर इस ट्रक से संबंधी सारी जानकारी जुटाई और वीडियो में नजर आ रहे ट्रक का पंजीकृत नंबर निकलवाया। नंबर मिलने के बाद पुलिस ट्रक के मालिक श्रीनिवास रेड्डी के पास पहुँची। रेड्डी ने पुलिस को बताया कि उनका ट्रक चेन्नाकेशवुलु और मोहम्मद आरिफ चलाते हैं।

इसी जानकारी पर पुलिस ने आगे की जाँच शुरू की और जल्द ही पता लगा लिया कि चारों आरोपित घटना को अंजाम देने के बाद नेशनल हाइवे के पेट्रोल पंप पर पेट्रोल लेने पहुँचे थे, ताकि वो प्रीति रेड्डी के शव में आग लगा सकें। जहाँ पहले पेट्रोल पंप पर एक शख्स ने उन्हें पेट्रोल देने से मना कर दिया। इसके बाद वह दूसरे पेट्रोल पंप पर गए और वहाँ से पेट्रोल लिया।

इसी पंप से पेट्रोल देने वाले शख्स ने मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस को कॉल किया और चारों आरोपितों का स्केच बनवाने में पुलिस की मदद की। इसके बाद पुलिस ने चारों हैवानों की शिनाख्त की और एक दिन के भीतर ही दावा किया कि उन्होंने प्रीति रेड्डी के साथ हैवानियत करने वाले दरिंदो को पकड़ लिया।

29 नवंबर को चारों आरोपित-शिवा, मोहम्मद आरिफ, चिंताकुनु चेन्नाकेशवुलु, जोलू नवीन को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बीते शुक्रवार को पुलिस उन्हें क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए मौके पर ले गई। वहाँ उन्होंने पुलिस के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और एनकाउंटर में मारे गए।

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस
प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

सोनिया गाँधी को झटका, सिद्धारमैया ने सौंपा इस्तीफ़ा: कर्नाटक उप चुनाव में पार्टी की हुई छीछालेदर

कर्नाटक में 15 सीटों के लिए हुए उप चुनाव के लिए वोटों की गिनती अभी भी जारी है। अभी तक के आए रुझानों में जनादेश स्पष्ट तौर पर बीजेपी के समर्थन में नज़र आ रहा है। बीजेपी ने 10 सीटें जीत ली हैं और 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, क़ॉन्ग्रेस अभी तक केवल दो सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है।

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस ने अपनी हार स्वीकारते हुए कहा कि 15 सीटों पर मतदाताओं के जनादेश से हमें सहमत होना पड़ेगा। इस बीच ख़बर आई है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा, “विधायक दल के नेता के रूप में, मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में इस्तीफ़ा दे दिया है। मैंने अपना इस्तीफ़ा सोनिया गाँधी जी को सौंप दिया है।”

बता दें कि बीजेपी का इस चुनाव से वोट पर्सेंट बढ़ा है। चुनाव आयोग से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, बीजेपी पार्टी को 49.7% वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 31% वोट मिले। इसके अलावा, कुमारस्वामी की JD (S) को तगड़ा झटका लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। आँकड़ों के अनुसार, JD (S) को सबसे कम यानी 13.3% ही वोट मिले हैं।

उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा, “मैं लोगों के जनादेश से ख़ुश हूँ। अब बिना किसी समस्या के हम एक स्थायी सरकार बना सकते हैं।”

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लिबरलों को मिली ‘रूदन कक्ष’ हेतु 5 वर्गफीट जमीन, रवीश को पेपर रोल, राठी-कामरा के लिए ChiRAnDh योजना

कर्नाटक में छोटे को बड़े भाई से हार कबूल फिर सिद्धारमैया को क्यों अखर रही ये जीत

कर्नाटक में ​15 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में कॉन्ग्रेस को करारी हार मिली है। पार्टी की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन, उनके लिए सबसे बड़ा झटका गोकाक सीट से पूर्व मंत्री रमेश जरकीहोली की जीत बताई जा रही है।

बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे रमेश जरकीहोली ने अपने छोटे भाई और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार लखन जारकीहोली को भारी अंतर से हराया है। कर्नाटक में येदियुरप्पा की अगुआई में बीजेपी की सरकार बनवाने में रमेश जरकीहोली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने ही 16 अन्य विधायकों के साथ बगावत की थी जिसके कारण कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी थी।

अपनी हार स्वीकार करते हुए उनके छोटे भाई लखन जरकीहोली ने कहा है कि जनता ने रमेश को चुना है और वे जनादेश को स्वीकार करते हैं। उन्होंने क्षेत्र का विकास होने की उम्मीद जताई।

रमेश जरकीहोली ने PLD बैंक चुनावों के बाद अक्टूबर 2018 में कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ खुले तौर पर विद्रोह कर दिया था, जहाँ उनकी प्रतिद्वंद्वी, लक्ष्मी हेब्बलकर को PLD बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार पर बेलगावी कॉन्ग्रेस की राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था।

कैबिनेट फ़ेरबदल के दौरान नगर पालिकाओं के मंत्री के रूप में हटाए जाने के लिए रमेश जरकीहोली पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी नाख़ुश थे। इस साल नवंबर में, रमेश जरकीहोली ने खुले तौर पर कहा था कि उन्होंने गुप्त रूप से विद्रोह की योजना बनाई थी। रमेश ने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से सम्पर्क किया था, जिसके बाद उन्होंने हैदराबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुरलीधर राव के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने भाजपा नेताओं से 16 विधायकों को गठबंधन में लाने का वादा किया था।

इस साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहराए गए विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति देने के तुरंत बाद, रमेश जारकीहोली ने कहा था कि जुलाई में सफल होने से पहले ही उन्होंने सात बार गठबंधन सरकार को गिराने की कोशिश की थी। उनकी जीत कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के लिए एक बड़ा झटका सा प्रतीत हो रही है, क्योंकि गोकाक में यह चुनावी दंगल सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के लिए एक व्यक्तिगत लड़ाई के रूप में थी। डीके शिवकुमार को भी बेलगावी में प्रचार करने की अनुमति नहीं दी गई थी और सूत्रों का कहना है कि अनुमति नहीं मिलने का कारण उनके ख़िलाफ़ दायर धन शोधन मामला था।

गोकाक सीट पर रमेश जारकीहोली का 1999 से ही कब्जा रहा है। वे यहॉं से पॉंच बार विधायक रह चुके हैं। वे सिद्धारमैया के वफादार हुआ करते थे। यही कारण है कि जब उन्होंने बगावत की तो शुरुआत में माना गया कि यह सिद्धारमैया के ही इशारे पर हुआ है।

कर्नाटक उपचुनाव पर कुमारस्वामी का बयान- हम दुःखी थे, लेकिन हमसे ज़्यादा दुःखी 3 और लोग थे

कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया, कुमारस्वामी पर राजद्रोह, मानहानि का मुक़दमा दर्ज

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार की कब्र खोदने वाले नागराज ने खरीदी 11 करोड़ की लग्जरी कार

जो-जो बागी हैं और BJP के टिकट पर चुनाव जीते हैं, सबको मंत्री पद दिया जाएगा: येदियुरप्पा

कर्नाटक की 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना जारी है। अभी तक के रुझानों में जनादेश स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में है। बीजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस महज दो सीटें ही जीत पाई है और एक विधानसभा सीट पर निर्दलीय आगे है।

सत्ता में वापसी करने के बाद सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि भाजपा के टिकट पर उपचुनाव जीतने वाले पूर्व कॉन्ग्रेस और जद (एस) के बागियों को मंत्री पद दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम इन सभी विधायकों को मंत्री पद देंगे, जिन्होंने हमें सत्ता में वापस आने में मदद की। येदियुरप्पा ने कहा कि हमने इन नेताओं से वादा किया था कि अगर उन्हें जीत मिलती है तो हम उन्हें मंत्री पद देंगे और हम अपना वादा निभाएँगे।

चुनाव के रुझानों को देखते हुए कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने हार मान ली है। कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा, “हमें 15 सीटों पर वोटरों के जनादेश से सहमत होना पड़ेगा। लोगों ने दलबदलुओं को स्वीकार कर लिया है। हमने हार मान ली है, मुझे नहीं लगता कि हमें हतोत्साहित होने की जरूरत है।”

वहीं कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सौंप दिया है। उपचुनाव में बीजेपी की जीत पर सीएम येदियुरप्पा ने खुशी जताते हुए कहा कि अब बिना किसी समस्या के स्थायी सरकार चल सकती है। बता दें कि उपचुनाव में येदियुरप्पा को सत्ता में बने रहने के लिए हर हाल में 6 सीट जीतना जरूरी था। 

बीजेपी का इस चुनाव में वोट पर्सेंट भी बढ़ा है। चुनाव आयोग से मिले आँकड़ों के मुताबिक पार्टी को 49.7 फीसदी वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस 31 प्रतिशत मत मिले हैं। वहीं कुमारस्वामी की जेडीएस को सबसे बड़ा झटका लगा है। जहाँ एक ओर पार्टी को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई, वहीं उसके खाते में सबसे कम 13.3 प्रतिशत वोट आए हैं।

जमानत पर रिहा होते ही हंसिए से रेता महिला का गला, हुई मौत: नहाते वक्त बना लिया था अश्लील वीडियो

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 35 वर्षीय महिला पर एक शख्स ने 6 दिसंबर को हंसिए से हमला किया। जिसके बाद बीती रात इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। पूरा मामला एक तरफा प्यार से संबंधित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित शख्स का नाम इंद्रपाल तोंडे हैं। जो पिछले कुछ समय से महिला का पीछा किया करता था और उसने उसका अश्लील वीडियो भी बनाया था। महिला की शिकायत पर आरोपित शख्स पहले गिरफ्तार हो चुका था। लेकिन बीते दिनों उसे जमानत मिली थी। ऐसे में 6 दिसंबर को जब महिला कोरबा में बुधवारी बजरंग चौक के पास काम पर जा रही थी, तो वह उसे रास्ते में मिल गया और काम पर जा रही महिला का दिनदहाड़े हँसिए से गला रेत दिया।

न्यूज़स्टेट की रिपोर्ट के अनुसार, कोरबा पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा ने इस संबंध में बताया कि महिला मुंगेली जिले की निवासी थी और पति से अलग होने के बाद कोरबा के बुधवारी क्षेत्र में रहकर काम करती थी। जिसे हमले के बाद शनिवार शाम को कोरबा स्थित अस्पताल से बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन शनिवार और रविवार की रात को उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित इंद्रपाल तोंडे ने कुछ समय पहले महिला से प्रेम का इजहार किया था, लेकिन महिला ने उस समय उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया। महिला के घर बदलने के बाद भी तोंडे उसका पीछा करता रहता था। वे उसे लगातार परेशान कर रहा था।

इतना ही नहीं, इसी साल अक्टूबर में आरोपित ने कथित तौर पर महिला का गुप्त तरीके से नहाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया था। जिसके बाद महिला ने उससे वीडियो हटाने को कहा, मगर जब टोंडे ने नहीं सुनी तो महिला ने एक शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस द्वारा उसको गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिन पहले वह जमानत पर छूटा, तो महिला से बदला लेने के लिए हँसिया लेकर उसे रास्ते में मिला। जहाँ उसने महिला का गला रेतकर उसे मारने की कोशिश की।

जानकारी के मुताबिक इस हमले के दौरान पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने महिला को बचाने की कोशिश की और तोंडे को पुलिस हिरासत में देने से पहले पीटा। पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। महिला की मृत्यु के बाद अब तोंडे पर हत्या के आरोप में मामले को दर्ज किया गया है।

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MCD का करप्शन छिपाने के लिए मोदी सरकार ने कहा झूठ: AAP ने 43 चिताओं पर सेंकी पॉलिटिकल रोटी

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविन्द केजरीवाल की राजनीति फिर वहीं वापिस आ गई है, जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी- ‘खुलासे’। दिल्ली में एक इमारत में कल (रविवार, 8 दिसंबर, 2019) लगी भीषण आग के बारे में सनसनीखेज़ दावा करते हुए आप ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार अनाज मंडी में लगी आग के बारे में झूठ बोल रही है।

बकौल आप, भाजपा ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (एमसीडी) में व्याप्त भ्रष्टाचार को ढँकना चाहती है। लेकिन अपने दावे के पक्ष में, केंद्र सरकार को झूठा साबित करने वाला कोई भी सबूत दिल्ली सरकार या आम आदमी पार्टी ने खबर लिखे जाने तक सामने नहीं रखा है। गौरतलब है कि दिल्ली की महानगरपालिका भाजपा के नियंत्रण में है।

अब तक 43 लोगों की जान लील चुके इस हादसे के बारे में केजरीवाल सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है, “एक स्तब्ध कर देने वाला और झूठा बयान हाउसिंग और अर्बन अफ़ेयर्स (शहरी मामलों) के मंत्रालय ने अनाज मंडी के अग्निकाण्ड के बारे में जारी किया है। एमसीडी के भ्रष्टाचार और अक्षमता को छिपाने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने कुछ असत्य दावे किए हैं।”

दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (दिल्ली फायर सर्विस) ने इस बात की पुष्टि की है कि फैक्ट्री को कोई फायर क्लियरेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिला था। यह फैक्ट्री अवैध तरीके से चल रही थी। केंद्रीय मंत्रालय क्यों एक ऐसी अवैध फैक्ट्री का बचाव कर रहा है जो सभी नियमों के उल्लंघन से चल रही थी, और जिसने इतनी सारी बेगुनाह जानें ले लीं?

आगे एमसीडी को लपेटते हुए आप ने कहा कि बिल्डिंगों के प्लान की जाँच करना और यह देखना कि सारा निर्माण कार्य और इमारतों का परिचालन क़ानूनी तरीके से हो रहा है या नहीं, यह एमसीडी का काम है।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली के रानी झाँसी रोड पर रविवार की सुबह अनाज मंडी में भीषण आग लग गई थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। आग इतनी भयानक थी कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 27 गाड़ियाँ लगानी पड़ीं।

घटना सुबह 5 बजे की है। मंडी में एक तीन-मंजिला बेकरी है जिसकी ऊपरी मंजिल पर आग लगी थी। इसके बाद आग ने पूरी इमारत को ही अपनी चपेट में ले लिया था। इलाके के काफी सँकरे होने के चलते भी आग ज्यादा फैली।

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कर्नाटक में उपचुनाव हुए। 4 महीने पहले बनी येदियुरप्पा सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी थी। भाजपा को 6 सीटें जितनी ही जितनी थी, वरना सरकार चली जाती। फिर सवाल भी उठते। आरोप लगता कि कॉन्ग्रेस और जेडीएस की सरकार को गिरा कर भाजपा ख़ुद भी बहुमत साबित नहीं कर पाई और ‘चाणक्य’ अमित शाह एक बार फिर से विफल रहे। वो तो अच्छा हुआ कि कॉन्ग्रेस की जीत नहीं हुई वरना सिद्दारमैया के रूप में मीडिया के पास एक नया ‘चाणक्य’ मिल जाता। ठीक वैसे ही, जैसे महाराष्ट्र में शरद पवार के रूप में एक पुराना ‘चाणक्य’ खड़ा हो गया और संजय राउत रूप में शिवसेना को भी एक शायरी-प्रेमी ‘चाणक्य’ मिला।

इन सारे चाणक्यों के चक्कर में याद दिलाना ज़रूरी है कि असली चाणक्य विष्णुगुप्त थे। कहीं ऐसा न हो कि कल को इतने चाणक्य हो जाएँ कि विष्णुगुप्त अथवा कौटिल्य के बारे में किसी को पता ही न हो। खैर, आगे बढ़ने से पहले आँकड़ों पर नज़र डालना ज़रूरी है। कर्नाटक में 15 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने 12 सीटों पर अपनी जीत लगभग सुनिश्चित कर ली है। कॉन्ग्रेस को 2 सीटें आईं और 1 सीट स्वतंत्र उम्मीदवार के पाले में गई। जहाँ तक जेडीएस की बात है, देवगौड़ा और कुमारस्वामी कब रोने आएँगे, इसका मीडिया को बेसब्री से इंतज़ार है।

पिता-पुत्र दुःखी ज़रूर होंगे। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के ‘चाणक्य’ डीके शिवकुमार भी दुःखी होंगे। लेकिन उन्हें ‘थ्री इडियट्स’ का वो डायलॉग ज़रूर याद आ रहा होगा। तभी तो दोनों सोच रहे होंगे कि वो तो दुःखी हैं ही लेकिन उनसे ज्यादा दुःखी 3 और लोग हैं। उन तीन लोगों में ठाकरे, जो सीएम बेटे को बनाना चाहते थे लेकिन अंत में ख़ुद बन गए। दूसरे हैं आदित्य ठाकरे, जो भाई-बहन-चाचा-कजन-फूफा-मौसा सबके साथ सरकारी बैठकों में शामिल होते हैं। तीसरे दुःखी व्यक्ति होंगे शरद पवार, क्योंकि बकियों के मुक़ाबले उनकी प्रतिष्ठा ज्यादा दाँव पर है।

हाँ, प्रधानमंत्री ज़रूर ख़ुश हैं। उधर संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक के लिए हंगामा मचा हुआ है, इधर पीएम झारखण्ड में चुनाव प्रचार करने निकले हुए हैं। जब शाह वहाँ मौजूद हैं तो भला टेंशन कैसे लेना? तभी तो मोदी ने झांरखंड के निवासियों को कर्नाटक उपचुनाव के परिणाम याद दिलाया और कहा कि देखो कैसे वहाँ लोगों ने कॉन्ग्रेस को करारा सबक सिखाया है। हज़ारीबाग में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिन्होंने जनादेश के साथ धोखा किया था, उन्हें जनता ने लोकतान्त्रिक तरीके से सज़ा दे दी। इस बयान की गूँज बंगलौर तो नहीं लेकिन मुंबई में ज़रूर एक सन्देश पहुँचा रही होगी।

जनादेश के साथ धोखा- यही वो वक्तव्य था, जिसका प्रयोग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन के लिए किया था। पीएम मोदी के बयान के बाद मुंबई के सियासी हलकों में ये चर्चा ज़रूर चल रही होगी अब वहाँ के 3 दलों को ‘लोकतान्त्रिक सज़ा’ कब मिलेगी? मोदीजी ने कहा कि जो-जो जनता के साथ धोखा करेगा, उसे ऐसे ही पाठ पढ़ाया जाएगा। अब मुंबई के लिए शाह और मोदी का क्या सिलेबस होगा, उसमें कौन सी पुस्तकें होंगी और कौन सा पाठ पढ़ाया जाएगा, ये देखने वाली बात है। और हाँ, सिलेबस में ‘अर्थशास्त्र’ नहीं होगा क्योंकि ये असली चाणक्यों का खेल नहीं है। एक बार फिर दोहराइए- चाणक्य विष्णुगुप्त ही थे। वैसे कुमारस्वामी ने उद्धव को भेजे अपने पत्र में पहले ही लिखा था:

“प्रिय उद्धव, अंत में क्या हुआ? हम भी रेले गए, आप भी रेले जाएँगे। याद रखिए, मुख्यमंत्री तो मैं था लेकिन पावर सेंटर सिद्दारमैया था। ख़ुद के हालात देखिए। भले मुख्यमंत्री मातोश्री का हो लेकिन सत्ता तो ‘सिल्वर ओक’ से ही चलेगी न। मेरे पिता की कुछ महत्वाकांक्षाएँ थीं तो आपके बेटे की है। मेरा कार्यकाल रोते-रोते बीता और मैं 5 साल तो क्या, डेढ़ वर्ष भी पूरे नहीं कर पाया। फिर आपकी तीन पहिए वाली सरकार का संतुलन कब तक बना रहेगा, ये सोचने वाली बात है। हमने डीके शिवकुमार पर भरोसा किया था, आपने संजय राउत पर किया है।”

कॉन्ग्रेस का बयान आया है कि जनता ने दलबदलुओं पर भरोसा जताया। पार्टी की ये पुरानी आदत रही है। सोनिया-राहुल को बचाने के लिए जनता, ईवीएम और चुनाव आयोग को ढाल बना कर खड़ा किया जाता रहा है। पीएम मोदी का राँची में बयान, बंगलौर में विधानसभा के आँकड़े बदलना, मुंबई में नई सरकार की सियासी हलचल और दिल्ली में संसद में नागरिकता बिल- ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कुमारस्वामी ने जनता को डाँटते हुए पहले ही कहा था- “मोदी के पास जाओ, उन्हें अपनी समस्याएँ सुनाओ।” जनता ने उनकी बात सुन ली है। वो मोदी के पास चली गई है।

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