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क्या बिहार की सियासत के रामविलास हैं जीतनराम मांझी?

दिवंगत रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के कारण भारतीय राजनीति में एक शब्द खासा लोकप्रिय हुआ। यह शब्द है- मौसम वैज्ञानिक। पासवान उन नेताओं में थे जो चुनाव से पहले ही हवा को भाँप लेते थे। उस हिसाब से तय करते थे कि अबकी बार किस पाले में खड़ा होना है। यही कारण है कि केंद्र में सरकारें बदलती रहीं, पर कुछेक मौकों को छोड़ ज्यादातर समय वे मंत्री बने रहे। बिहार की राजनीति में जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की यात्रा भी ऐसी ही है।

वैसे राजनीतिक असर के लिहाज से रामविलास पासवान के आगे जीतनराम मांझी कहीं नहीं टिकते। 90 के दशक में ही रामविलास पासवान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी। पर 2014 में नीतीश कुमार ने जब इस्तीफा देकर मांझी को सीएम बनाया उससे पहले वे बिहार की राजनीति के भी उन चेहरों में नहीं थे जिनसे पूरा प्रदेश परिचित हो। इसके उलट रामविलास पासवान अपने जीवन के अंतिम क्षण तक लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ बिहार की राजनीति के तीसरे कोण बने रहे।

लेकिन जीतनराम मांझी सियासत के उस हुनर का नाम है, जिसमें बिना शोर किए सब कुछ हासिल कर लिया जाता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में जदयू की करारी शिकस्त के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। जदयू में उनकी जगह लेने के कई दावेदार थे। लेकिन कुर्सी मिली उस जीतनराम मांझी को जो उस लोकसभा चुनाव में गया से तीसरे नंबर पर रहे थे।

बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने की जीतनराम मांझी की इस यात्रा की शुरुआत 80 के दशक में डाक विभाग की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने से हुई थी। उनकी यात्रा कॉन्ग्रेस से शुरू हुई। वे 1980 में पहली बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर ही गया की फतेहपुर सीट से विधायक चुने गए थे। 1983 में चंद्रशेखर सिंह की कॉन्ग्रेस सरकार में वे पहली बार राज्यमंत्री बने। इसके बाद के करीब चार दशक के राजनीतिक सफर में मांझी ने तीन पार्टियों से होते हुए अपनी पार्टी बनाने का सफर पूरा किया है। इस दौरान बिहार में मुख्यमंत्री बदलते गए, लेकिन कुछ मौकों को छोड़ दे तो ज्यादातर की सरकार में मांझी मंत्री बने रहे।

मांझी की सियासी एंट्री के बाद 1990 तक बिहार में कॉन्ग्रेस की सत्ता रही। दशक भर में कॉन्ग्रेस ने 5 मुख्यमंत्री बदले। इनके नेतृत्व में 6 बार सरकार का गठन हुआ। लेकिन मांझी हर कैबिनेट में टिके रहे। 1990 में बिहार में कॉन्ग्रेस का सितारा डूब गया। मांझी भी चुनाव हार गए। बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर लालू यादव का उदय हुआ। मांझी चुनावी पराजय के कुछ ही दिनों बाद लालू यादव की जनता दल के साथ चले गए। इसके बाद भी वे 1995 का विधानसभा चुनाव हार गए। 1996 में जब लालू यादव ने राजद बनाई तो मांझी उसमें चले गए। उसी साल राजद के टिकट पर उपचुनाव में जीते और राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री हो गए।

2005 में फरवरी में बिहार विधानसभा के चुनाव हुए। राजद सरकार नहीं बना पाई। राष्ट्रपति शासन लगा। उसी साल अक्टूबर में फिर से विधानसभा के चुनाव कराए गए। मांझी अबकी बार नीतीश कुमार के पाले में थे। उस चुनाव में बाराचट्टी से जीते और नीतीश सरकार में मंत्री बने। एक घोटाले की वजह से इस्तीफा भी फटाफट हो गया। उस मामले में बरी होते ही 2008 में नीतीश की कैबिनेट में वापसी भी हो गई। 2010 के चुनाव में जहानाबाद की मखदुमपुर सीट से जीतकर वे फिर से मंत्री बने।

फिर आया मई 2014 जब वे अचानक से मुख्यमंत्री ही बन गए। फरवरी 2015 में सीएम पद पर नीतीश की वापसी के बाद मांझी को इस्तीफा देना पड़ा। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा नाम से उन्होंने अपनी पार्टी बनाई। लेकिन सियासत में उनका भाव कम नहीं हुआ। महागठबंधन हो या एनडीए वे सबके प्रिय रहे। हर कोई उन्हें अपने पाले में खड़े करने के प्रयास करता रहा।

ऐसा नहीं है कि मांझी जिसके साथ गए उसकी ही जीत हुई। 2015 के विधानसभा चुनाव में वे बीजेपी के साथ थे। बीजेपी को हार मिली। मांझी की पार्टी को केवल एक सीट। लेकिन चुनाव बाद महागठबंधन ने उन्हें हाथों हाथ साथ ले लिया। यानी मांझी बिहार की सत्ता में बने रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वे महागठबंधन के साथ थे। उनकी पार्टी को तीन सीट मिली। एक पर भी जीत नहीं मिली। खुद मांझी चुनाव हार गए। 2020 के विधानसभा चुनावों से पहले वे एक बार फिर एनडीए के साथ आ गए। पार्टी को चार सीटों पर जीत मिली। 2022 में जब नीतीश एनडीए को छोड़ गए तो मांझी उनके साथ चले गए। महागठबंधन की सरकार में बेटे संतोष कुमार सुमन मंत्री बने।

अब 2024 का आम चुनाव आने को है। मांझी के बेटे ने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। पर मांझी ने पत्ते पूरे तरह से नहीं खोले हैं। न तो महागठबंधन छोड़ने का ऐलान किया है और न एनडीए के साथ जाने का। कंफ्यूज करने की यही राजनीति असल में जीतनराम मांझी की पहचान है। वे अपने फैसलों से शोर कम मचाते हैं, मोलभाव की ताकत अधिक बना लेते हैं। सियासी यू टर्न लेने का मौका बनाए रखते हैं।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमित राजनीतिक प्रभाव रखने वाले मांझी 2024 के लिए कितना कमा पाते हैं। यही कमाई यह भी तय करेगी कि 2025 के विधानसभा चुनावों मे वे प्रासंगिक बने रहेंगे या नहीं।

जीतनराम मांझी के इस सियासी तीर के क्या मायने? बेटे ने नीतीश कैबिनेट से दिया इस्तीफा, पर महागठबंधन से अभी खत्म नहीं की है रिश्तेदारी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी ने हाल के समय में कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की है। कोशिश कर रहे हैं कि 2024 के आम चुनावों से पहले सारे विपक्षी तराजू के एक ही पल्ले में आ जाएँ। इसी कड़ी में 23 जून 2023 को पटना में एक बैठक भी होनी है। विपक्षी एका में नीतीश कुमार कितने कामयाब हो पाते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन उससे पहले उनके कैबिनेट से संतोष कुमार सुमन ने इस्तीफा दे दिया है।

सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा पार्टी (HAM) के कोटे से बिहार सरकार में मंत्री थे। वे पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे हैं। मांझी कभी जदयू में ही हुआ करते थे। 2014 में मोदी लहर से घुटनों पर आने के बाद नीतीश ने उन्हें सीएम बनाया था। कुछ महीने बाद उन्हें हटाकर नीतीश फिर से मुख्यमंत्री बन गए और मांझी ने ‘हम’ नाम से अपनी पार्टी बना ली। उसके बाद से दोनों के ​राजनीतिक रिश्तों में कभी प्यार तो कभी कड़वाहट का दौर जारी है।

इस्तीफे के बाद संतोष कुमार सुमन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का अस्तित्व खतरे में था। पार्टी को बचाने के लिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। अब उनकी पार्टी के बीजेपी नीत एनडीए के साथ जाने की अटकलें लग रही हैं। लेकिन सुमन ने इसके बारे में स्पष्ट तौर पर कोई जवाब नहीं दिया है। कहा है कि कैबिनेट से इस्तीफा दिया है, लेकिन उनकी पार्टी अभी महागठबंधन में बनी हुई है।

सुमन से जब पूछा गया कि नीतीश कुमार पहले भी उनकी पार्टी के विलय का प्रस्ताव दे चुके हैं, फिर इस बार ऐसा क्या हुआ कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा तो उन्होंने कहा, “जंगल में कई प्रकार के जीव रहते हैं। शेर भी रहता है और छोटे जानवर भी रहते हैं। हम लोग आज तक बच रहे थे। जब ऐसा लगा कि नहीं बच पाएँगे तो अलग हो गए।” वहीं 23 जून को पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक से जुड़े सवाल के जवाब में कहा, “आप सबको पता है हम लोगों को बुलाया ही नहीं गया। हमारी पार्टी के अस्तित्व को कोई स्वीकार ही नहीं कर रहा, तब हमें कहाँ से बैठक में बुलाया जाएगा?”

NDA में शामिल होने के सवाल पर संतोष सुमन ने कहा, “हम कहाँ जाएँगे या नहीं जाएँगे इस बारे में अभी हमारी किसी से कोई बातचीत नहीं हुई है। हम स्वतंत्र पार्टी हैं। अपना अस्तित्व बचाने के लिए सोचेंगे। अभी हम महागठबंधन में आज भी रहना चाहते हैं। हम यह कह रहे हैं कि हमारा आस्तित्व खतरे में था। अगर कोई हमें विलय करने के लिए कहता है तो मेरे पास क्या विकल्प था? मेरी जगह पर आप होते तो क्या करते?”

गौरतलब है कि 23 जून की बैठक में शामिल होने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है। लेकिन संतोष सुमन और उनके पिता जीतन राम मांझी को नहीं बुलाया गया है। इससे पहले नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद मांझी ने बिहार की 5 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।

बिहार विधानसभा में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास महज 4 सीटें ही हैं। लेकिन आम चुनावों के दौरान वोटों की गोलबंदी के लिहाज से छोटे दल महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 13 अप्रैल 2023 को मांझी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। उसके बाद से ही उनकी पार्टी के महागठबंधन को छोड़ एनडीए के साथ जाने के कयास लगाए जा रहे थे।

निषादराज के किले पर बना दिया अवैध मस्जिद, मार्च 2024 तक ढाह देंगे: NISHAD Party के मुखिया का ऐलान, कहा – मुक्त कराएँगे श्रृंग्वेरपुर धाम

उत्तर प्रदेश के मत्स्यपालन मंत्री डॉ संजय निषाद ने कहा है कि श्रृंगवेरपुर धाम में निषादराज के किले के ऊपर बनाई गई मस्जिद को मार्च 2024 तक ढहा दिया जाएगा। उन्होंने इसे एक अवैध निर्माण करार दिया। संजय निषाद ने बताया कि रामायण काल में वनवास के लिए निकले भगवान श्रीराम ने वहाँ विश्राम किया था। उन्होंने जानकारी दी कि इंदिरा गाँधी के प्रधनमंत्री रहते उत्खनन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में भी वहाँ निषादराज का किला पाया गया था।

‘NISHAD Party’ के मुखिया ने कहा, “जब इंदिरा गाँधी ने वहाँ खुदाई कराई थी, उस समय तो वहाँ मस्जिद थी ही नहीं। यानी, बाद में इस किले के ऊपर मस्जिद बना दिया गया। फिर धीरे-धीरे बढ़ कर इस मस्जिद को एक एकड़ में फैला लिया गया। निषादराज तो मुस्लिम थे ही नहीं, फिर वहाँ मस्जिद कैसे बन गई? जब हमारा पुरातत्व विभाग कह चुका है कि ये निषादराज की संपत्ति है, फिर मुस्लिमों ने यहाँ मस्जिद कैसे बना ली?”

बता दें कि देश भर में की जगह मस्जिद-मजार का अवैध तरीके से निर्माण किए जाने के खुलासे हो रहे हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए डॉ संजय निषाद ने कहा कि ये हमारे निकम्मेपन का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जब हम अपना घर नहीं बनाएँगे तो दूसरे लोग तो बना ही लेंगे। उन्होंने समझाया कि जब हम अपनी खेतों में बीज नहीं बोएँगे तो घास-फूस उगेंगे ही। मोदी सरकार के 9 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में संजय निषाद प्रयागराज पहुँचे थे।

श्रृंगवेरपुर, प्रयागराज में लखनऊ की तरफ जाने वाले रास्ते में पड़ता है। उन्होंने कहा कि नियम के हिसाब से भी ये मस्जिद अवैध है क्योंकि पुरातत्व स्थल के 300 मीटर के दायरे में कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। संजय निषाद ने मछली पालकों के लिए सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। बता दें कि वनवास के समय श्रृंगवेरपुर में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माँ सीता को नदी पार कराने में निषाद समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

70000 युवाओं को PM मोदी ने दिया सरकारी नौकरी का लेटर, ‘रोजगार मेला’ में बोले- पहले चलता था भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार, अब पारदर्शिता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रोजगार मेला’ में 70,000 युवाओं को सरकारी नौकरियों का ‘नियुक्त पत्र’ वितरित किया। देश भर में 43 जगहों पर इसका आयोजन हुआ। इसके तहत केंद्र सरकार और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा भर्तियाँ की जा रही है। वित्त, डाक, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, राजस्व, परमाणु ऊर्जा, रेल, लेखा और गृह समेत कई विभागों में भर्तियाँ की गई है। iGot प्लेटफॉर्म के जरिए इन कर्मचारियों को ”कर्मयोगी प्रारंभ’ मॉड्यूल के जरिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये रोजगार मेले NDA और भाजपा सरकार की नई पहचान बन गए हैं। उन्होंने खुशी जताई कि भाजपा के शासन वाली सरकारें भी लगातार इस तरह के रोजगार मेलों का आयोजन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस समय सरकारी नौकरी में आ रहे हैं उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि आपके सामने अगले 25 साल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है।

पीएम मोदी ने जानकारी दी कि मुद्रा योजना से करोड़ों युवाओं को मदद मिली है। स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ा है। सरकार से मदद पाने वाले ये नौजवान अब खुद अनेक युवाओं को नौकरी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया हमारी विकास यात्रा में साथ चलने को तत्पर है। पीएम ने ध्यान दिलाया कि भारत को लेकर विश्वास और हमारी अर्थव्यवस्था पर इतना भरोसा पहले कभी नहीं रहा।

पीएम मोदी ने बताया कि कैसे तमाम कठिनाइयों के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है और विश्व की बड़ी बड़ी कंपनियाँ उत्पादन के लिए भारत आ रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। उन्होंने याद किया कि कैसे राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी और जनता-जनार्दन के धन का दुरूपयोग. – पुरानी सरकारों में यही पहचान बन गई थी लेकिन आज भारत सरकार की पहचान उसके निर्णायक फैसलों से हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे जल जीवन मिशन पर 4 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जब यह मिशन शुरू हुआ तो ग्रामीण इलाकों के 100 घरों में से 15 घरों में ही नल से जल आता था लेकिन आज इस मिशन के जरिए 100 में से 62 घरों में पाइप से पानी आने लगा है। आज देश के 130 जिलों में, सभी गाँवों के प्रत्येक घर में नल से जल आता है। आज भारत सरकार की पहचान उसके आर्थिक और प्रगतिशील सामाजिक सुधारों से हो रही है।”

पीएम मोदी ने कहा कि देश में चल रहा यह रोजगार अभियान पारदर्शिता और सुशासन का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हमने देखा है कि कैसे हमारे देश में परिवारवादी राजनीतिक दलों ने हर व्यवस्था में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया। जब सरकारी नौकरी की बात आती थी तो भी ये भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार ही करते थे। पीएम मोदी ने कहा कि देश के करोड़ों लोगों के साथ इन पार्टियों ने विश्वासघात किया है, जबकि भाजपा सरकार पारदर्शिता भी लाई है और भाई-भतीजावाद को भी खत्म किया है।

पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ परिवारवादी पार्टियाँ हैं, भ्रष्टाचार करने वाली पार्टियाँ हैं, देश के नौजवानों को लूटने वाली पार्टियाँ हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उनका रास्ता है ‘रेट कार्ड’ जबकि हम युवाओं के भविष्य को ‘सेफ गार्ड’ करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेट कार्ड आपके सपनों को चूर-चूर कर देते हैं जबकि हम आपके संकल्पों को साकार करने में लगे हैं, आपकी और आपके परिवार की सभी इच्छाओं और आकांक्षाओं को ‘सेफ गार्ड’ करने में लगे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “आज तेजी से आगे बढ़ते भारत में सरकारी व्यवस्थाएँ और सरकारी कर्मचारियों के काम करने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। आज सरकार अपनी सेवाएँ लेकर देश के नागरिकों के घर तक पहुँच रही है। आज जनता की अपेक्षाओं और क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है।” बता दें कि इससे पहले भी कई बार ‘रोजगार मेला’ का आयोजन किया जा चुका है।

21 साल के मनोहर को 8 टुकड़ों में काट डाला, क्योंकि रुखसाना से चल रहा था इश्क: हिमाचल की घटना, मुस्लिम प्रेमिका का भाई गिरफ्तार

मुस्लिम लड़की से इश्क के कारण हिमाचल प्रदेश में 21 साल के एक हिंदू युवक की हत्या का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान मनोहर के तौर पर हुई है। उसकी लाश आठ टुकड़ों में एक नाले से बरामद की गई है। पुलिस ने इस मामले में शबीर को गिरफ्तार किया है। कुछ अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मनोहर 6 जून 2023 से लापता था। उसका शव पुलिस ने 9 जून 2023 (शुक्रवार) को बरामद किया। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला चम्बा के सलूनी इलाके में बांदल गाँव का है। यहाँ के रहने वाले मनोहर का रुखसाना नाम की लड़की से प्रेम संबंध था। बताया जा रहा है कि लड़की के घर वालों को ये रिश्ता पसंद नहीं था।

इसी बीच 6 जून को मनोहर अचानक लापता हो गया। घर वाले उसकी तलाश कर रहे थे। तीन दिन बाद सलूनी इलाके में ही एक नाले के पास से गुजर रहे कुछ लोगों को बदबू आई। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद एक बोरा नाले से निकाला गया। बोरे को खोला गया तो उसमें एक युवक की लाश थी। शव 7-8 टुकड़ों में कटा हुआ था। शव की पहचान मनोहर के रूप में हुई।

मामले की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन आक्रोशित हो गए। धारा 302 के तहत केस दर्ज कर पुलिस जाँच कर रही है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। जाँच के दौरान शबीर का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने शबीर को गिरफ्तार कर कोर्ट से 5 दिनों की रिमांड ली है। शबीर को रुखसाना का भाई बताया जा रहा है।

मृतक की माँ ने आरोपितों के लिए फाँसी की माँग की है। मनोहर की माँ ने रुखसाना के चाचा मुसाफिर पर भी अपने बेटे की हत्या में शामिल होने का शक जताया है। ऑपइंडिया ने चम्बा पुलिस के मीडिया सेल प्रभारी मनीष से बात की। मनीष ने बताया कि एडिशनल SP ने मौके पर जाकर जाँच की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल के जिला संयोजक रवि भारद्वाज ने बताया कि यदि प्रशासन ने आरोपितों पर कार्रवाई नहीं की तो संगठन आंदोलन करेगा। वहीं स्थानीय बीजेपी नेता अजय टंडन ने आशंका जताई है कि दहशत फैलाने के लिए देवदार की लड़की की तस्करी करने वाले मुस्लिम इस हत्याकांड के पीछे हो सकते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टो में दावा किया गया है कि मुस्लिमों ने इस हत्या के बाद आरोपित के परिवार का बहिष्कार कर दिया है। लेकिन टंडन के अनुसार यह महज दिखावा है। कुछ दिनों के दिखावे के बाद ये सभी लोग फिर से एकजुट हो जाएँगे।

व्हाइट हाउस में ट्रांसजेंडर हो गई टॉपलेस, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले – आपलोग सबसे बहादुर: नंगे होकर तैराकी करते थे जो बायडेन, महिला एजेंट्स को होती थी दिक्कत

अमेरिकी राष्ट्रपति के आवास व्हाइट हाउस में शनिवार (10 जून, 2023) को समलैंगिकों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में एक TikTok सेलेब्रिटी ने अपना टॉप उतार दिया। इसके बाद वो अपने ऊपर के प्राइवेट पार्ट्स खुलेआम कैमरे के सामने आकर दिखने लगी। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन भी मौजूद थे। उनके बारे में एक खुलासा हुआ था कि वो अक्सर नंगे होकर तैराकी करते हैं, जिससे महिलाओं को दिक्कत होती है।

ट्रांसजेंडर टिकटॉकर ने व्हाइट हाउस में उतार दिया अपना टॉप

जिस ट्रांसजेंडर मॉडल ने व्हाइट हाउस में अपना टॉप उतार के अपने बूब्स को प्रदर्शित करने वाला वीडियो बनाया, उसका नाम रोज मोंटोया है। इस समारोह को व्हाइट हाउस में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा ‘प्राइड सेलिब्रेशन’ कहा जा रहा है। बता दें कि जून 2023 में दुनिया भर के ट्रांसजेंडर ‘प्राइड मंथ’ मना रहे हैं। इसी को मनाने के लिए जो बायडेन के प्रशासन ने इन ट्रांसजेंडरों को व्हाइट हाउस के साउथ लेन में आमंत्रित किया था।

इस समारोह में बड़ी संख्या में LGBTQ+ लोग पहुँचे थे। रोज मोंटोया ने अपने TikTok हैंडल पर वीडियो पोस्ट किया। समलैंगिकों ने जो बायडेन के साथ सेल्फी भी ली। जो बायडेन ने इस दौरान ‘हैप्पी प्राइड मंथ, हैप्पी प्राइड ईयर, हैप्पी प्राइड लाइफ’ कह कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ये लोग सबसे बहादुर और सबसे प्रेरणादायक लोग हैं। सीएटल यूनिवर्सिटी से स्नातक रोज मोंटोया 10वीं कक्षा से पुरुषों के प्रति आकर्षित होने लगी थी, फिर वो बाईसेक्सुअल ट्रांसजेंडर बन गई और अब वो ‘She’ और ‘Them’ को अपना प्रोनाउन मानती है

नंगे होकर स्विमिंग करते हैं रष्ट्रपति जो बायडेन

जुलाई-अगस्त 2014 में एक पुस्तक से खुलासा हुआ था कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन बिना बाथसूट के तैराकी करते हैं। इससे ये उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की बात है। उस दौरान वो अमेरिका के उप-राष्ट्रपति हुआ करते थे और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे। रोनाल्ड केसलर द्वारा लिखित किताब ‘द फर्स्ट फैमिली डिटेल’ में बताया गया था कि जो बायडेन वाशिंगटन DC स्थित उप-राष्ट्रपति आवास और डेलावेयर स्थित अपने घर में भी सारे कपड़े उतार कर स्विमिंग करते थे।

इस किताब में कई स्रोतों के हवाले से ये खुलासे किए गए थे, जिनका नाम नहीं बताया गया था। जो बायडेन द्वारा नंगे होकर तैराकी करने से सीक्रेट सर्विस’ की महिला कर्मचारियों को खासी दिक्कत होती थी। कई बार वो अचानक डेलावेयर जाने का प्लान बना लेते थे, इससे भी एजेंट्स नाराज़ थे। इसमें ये भी लिखा था कि बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल एजेंट्स के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आते थे। साथ ही हिलेरी क्लिंटन पर एजेंट्स को काफी कठिन काम सौंपने का आरोप लगाया गया था।

पहले कहा- लड़की चीज ही ऐसी, अब कहा- इंसान हूँ जुबान फिसल जाती है: माफीनामे में बोला अजमेर दरगाह वाला सरवर चिश्ती- चुपके से बनाया Video

अजमेर शरीफ दरगाह के खादिमों की संस्था है- अंजुमन सैयद जादगान। इसका सचिव सरवर चिश्ती है। महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान को लेकर सरवर चिश्ती ने माफी माँगी है। उसका कहना है कि उसकी जुबान फिसल गई थी। उसका जो बयान वायरल किया जा रहा है उसका वीडियो चुपके से बनाया गया था।

सैयद सरवर चिश्ती ने एक वीडियो में कहा है, “मेरे एक बयान पर बवाल मचा हुआ है। वह वीडियो स्टिंग ऑपरेशन से बनाया गया था। उसमें मैंने कहा था कि औरत ऐसी चीज है जिससे लोग भटक जाते हैं। विश्वामित्र जैसे भी मेनका से भटक गए थे। बाबा लोग भी जेल में हैं। फिल्म ‘अजमेर 92’ को लेकर मेरे असली इंटरव्यू को नहीं दिखाया गया और ऑफ द कैमरा को दिखाया गया। इमसें मैंने आरोपितों की भरपूर आलोचना की है। लेकिन वह न दिखाकर यह दिखाया जा रहा है।”

चिश्ती ने आगे कहा है, “इसके बाद भी अगर मेरी माँ, बहन, बेटियों को बुरा लगा है तो मैं इसके लिए माफी माँगता हूँ। इंसान हूँ, जुबान फिसल जाती है। लेकिन मेरे कहने यह मतलब यह था कि अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को बदनाम न करें। कुछ लोगों की गलती से पूरे चिश्ती परिवार को बदनाम न करें।”

सरवर चिश्ती ने क्या कहा था

कई मुस्लिम संगठन ‘अजमेर 92’ का विरोध कर रहे हैं। इसमें अंजुमन सैयद जादगान भी शामिल है। इसकी कड़ी में सरवर चिश्ती ने कहा था, ‘लड़की चीज ही ऐसी होती है… बड़े से बड़ा फिसल जाता है।’ इस मामले को हिंदुओं से जोड़ते हुए कहा था, “आदमी पैसों से करप्ट नहीं हो सकता, मूल्यों से करप्ट नहीं हो सकता। लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। वो थी ना… नाम क्या था… जो पेड़ के नीचे बैठे थे, विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं।” चिश्ती ने आगे कहा था, “अच्छा… जितने भी बाबा लोग जेल में हैं, ये सिर्फ वो हैं जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।”

‘अजमेर 92’ 90 के दशक में 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल कर रेप करने की घटना पर बनी है। देश के इस सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल के मास्टरमाइंड दरगाह के खादिम परिवारों से जुड़े थे। युवक कॉन्ग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर थे। इस फिल्म के विरोध में अजमेर दरगाह कमेटी का कहना है कि फिल्म के जरिए एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। फिल्म से अजमेर दरगाह और मोइनुद्दीन चिश्ती की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। रिलीज से पहले फिल्म दरगाह कमेटी को दिखाने की भी माँग की गई है।

विवादित बयानों के लिए कुख्यात है सरवर चिश्ती

सरवर चिश्ती वही शख्स है, जिसने नूपुर शर्मा मामले में लोगों को भड़काने का काम किया था। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।”

चिश्ती पर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

कर्नाटक में PFI के मंच से भाषण देते हुए सरवर चिश्ती ने नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी। तब नरेंद्र मोदी को PM उम्मीदवार बनाने की अटकलें लग रही थीं। उस समय सरवर चिश्ती ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो कोई ताज्जुब नहीं होगा कि सभी मुसलमान आतंकवादी बन जाएँ।” चिश्ती के इस बयान के बाद कर्नाटक में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि, उस मामले का क्या हुआ, किसी को ज्ञात नहीं है।

सरवर का बेटा आदिल चिश्ती ने हिंदू-देवताओं का मजाक बनाते हुए 23 जून 2022 को कहा था, “333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है, लेकिन 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

‘भारत ने किसान आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर कार्रवाई करने को कहा, धमकी दी’: जैक डॉर्सी के बयान पर कॉन्ग्रेस लट्टू, सरकार ने दिया करारा जवाब

ट्विटर के पूर्व CEO जैक डॉर्सी ने आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन को दबाने के लिए भारत ने कंपनी पर दबाव बनाया। केंद्र सरकार ने इन आरोपों का करारा जवाब दिया है। जैक डॉर्सी ने दावा किया कि भारत सरकार ने उनसे उन हैंडल्स को ब्लॉक करने को कहा था, जो 2020-21 में चले ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन कर रहे थे। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन पत्रकारों पर भी कार्रवाई करने को कहा गया, जो सरकार की आलोचना कर रहे थे।

उन्होंने एक यूट्यूब चैनल से इंटरव्यू के दौरान ये बातें कही। जैक डॉर्सी ने कहा कि भारत से उनके पास ‘किसान आंदोलन’ के दौरान कई निवेदन आए थे, खासकर उन पत्रकारों के लिए जो सरकार की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ इस तरह धमकी दी गई जैसे भारत में ट्विटर को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ट्विटर के लिए एक बहुत बड़ा बाजार था। उन्होंने भारत को लोकतांत्रिक देश बता कर तंज कसा।

जैक डॉर्सी ने कहा कि ट्विटर के अधिकारियों पर छापेमारी की धमकी दी गई और ऐसा हुआ भी। कॉन्ग्रेस पार्टी जम कर जैक डॉर्सी के बयान को मुद्दा बना रही है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत से लेकर यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष BV श्रीनिवास तक, सभी ने मोदी सरकार पर इस बयान को आधार बना कर निशाना साधा। केंद्रीय IT राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इन दावों को झूठा बताते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ट्विटर की करतूतों का इतिहास छिपाने के लिए ये सब कहा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कैसे जैक डॉर्सी के अंतर्गत ट्विटर और उसकी टीम ने बार-बार भारतीय कानून का उल्लंघन किया। उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि ट्विटर के किसी भी व्यक्ति को जेल में नहीं डाला गया। उन्होंने कहा कि ट्विटर ने ऐसा व्यवहार किया जैसे भारतीय कानून की कोई इज्जत हो ही नहीं। उन्होंने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है जहाँ संचालित होने वाली कंपनियों को यहाँ के नियम-कानूनों का पालन करना पड़ता है।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “2021 के ‘किसान आंदोलन’ के दौरान बहुत सारी झूठी ख़बरें शेयर की गईं, जैसे नरसंहार की बात। ये सब झूठ था। भारत सरकार सजग थी, क्योंकि इससे कोई बड़ी घटना हो सकती थी। जब अमेरिका में ऐसी घटनाएँ हुईं, जब जैक डॉर्सी के ट्विटर ने अपने-आप भ्रामक सूचनाएँ हटाई। न किसी पर छापा पड़ा, न कोई जेल गया। जैक डॉर्सी ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर भेदभाव वाली नीति अपनाई। हमारे देश में कंपनियों को हमारे देश के कानून का पालन करना पड़ेगा।”

कॉलेज उद्धव ठाकरे की पार्टी नेता का, आयोजन करियर गाइडेंस सेमिनार; हुई अरबी में इस्लामी मुनाजात-लगे अल्लाह पर विश्वास के पोस्टर

महाराष्ट्र के मालेगाँव के एक कॉलेज में करियर गाइडेंस सेमिनार के नाम पर इस्लामी पाठ पढ़ाने का मामला सामने आया है। यह कॉलेज पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी से जुड़े एक नेता का है। रविवार (11 जून 2023) को हुए इस विवादित कार्यक्रम की पुलिस जाँच कर रही है। कॉलेज के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मालेगाँव के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स कॉलेज का है। यह कॉलेज उद्धव शिवसेना के नेता और पूर्व विधान पार्षद अपूर्व हिरे का है। डॉ. सुभाष निकम इस कॉलेज के प्रिंसिपल थे। रविवार को कॉलेज में सत्य मालिक लोकसेवा ग्रुप नामक संगठन की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया था। सेमिनार की शुरुआत अरबी में इस्लामी मुनाजात (प्रार्थना) से हुई। इस दौरान लगे पोस्टर पर ‘पाकी आधा ईमान है’ और ‘पवित्रता अर्ध ईमान (अल्लाह वर विश्वास) आहे’ छपा हुआ था। सेमिनार के मुख्य अतिथि अनीस कुट्टी थे।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक हॉल में बने मंच पर मुस्लिम समुदाय के कई लोग बैठे दिख रहे हैं। सामने की कुर्सियों पर भी लोग बैठे हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि कथित करियर गाइडेंस सेमिनार की अरबी भाषा में एक इस्लामी मुनाजात से हुई। जब इसकी जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया और कॉलेज के प्रधानाचार्य पर कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों के मुताबिक कॉलेज में ऐसे कायर्क्रम करवा कर छात्रों को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जा रहा था।

मामले के तूल पकड़ने पर प्रिंसिपल डॉ. सुभाष निकम को सस्पेंड कर दिया गया है। हिन्दू संगठनों की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। महाराष्ट्र के खनन और बंदरगाह विकास मंत्री दादा भुसे ने भी ऐसे कार्यक्रमों को गलत बताते हुए आयोजकों पर कार्रवाई की माँग की है। वहीं सस्पेंड हुए प्रिंसिपल सुभाष ने कहा कि छोटी सी इस्लामी प्रार्थना के बाद वक्ताओं ने सभा को सम्बोधित किया था। प्रिंसिपल के अनुसार जिस संगठन ने यह कार्यक्रम करवाया था वो अपने आयोजनों की शुरुआत अक्सर इस्लामी प्रार्थना से ही करता है।

‘मुस्लिम नहीं बने तो हत्या कर दी जाएगी’: नवीन ने मंदिर में फरजाना के साथ की शादी, अब इस्लाम कबूलने की दी जा रही धमकी; सुरक्षा की लगाई गुहार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक हिंदू युवक को मुस्लिम लड़की से शादी के बाद हत्या की धमकी दी जा रही। उसे इस्लाम कबूलने को कहा जा रहा है। सोमवार (12 जून 2023) को पीड़ित युवक ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई। पीड़ित युवक नवीन ने इसी साल मई में फरजाना के साथ मंदिर में शादी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुरैना के सिविल लाइन्स इलाके का है। यहाँ के रहने वाले 21 वर्षीय नवीन शाक्य और मुंबई की रहने वाली 20 वर्षीया फ़रज़ाना 3 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों का परिचय तब हुआ था जब फरजाना अपने एक रिश्तेदार के घर मुरैना आई थी। थोड़े समय बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। शुरू में दोनों के ही परिजन इस शादी के खिलाफ थे। लेकिन बाद में नवीन के घर वाले रिश्ते के लिए तैयार हो गए।

फरजाना का परिवार अंत तक इस रिश्ते के खिलाफ रहा। वे उसे मुंबई बुलाने लगे। परिजनों का दबाव बढ़ता देख कर मई 2023 में नवीन और फ़रज़ाना ने मंदिर में शादी कर ली। इस शादी में नवीन के मित्र बाराती बने। शादी के बाद फरजाना ने हिन्दू रीति-रिवाजों का पालन करना शुरू कर दिया। जब इस शादी की जानकारी फरजाना के घर वालों को हुई तब उसके भाई और अब्बा ने नवीन को कॉल किया। उससे इस्लाम कबूलने के लिए कहा।

फोन करने वालों ने इस्लाम कबूलने के लिए नवीन को मुंबई बुलाया। कहा कि इसके बाद ही वे इस रिश्ते को कबूल करेंगे। मुस्लिम नहीं बनने पर हत्या की धमकी भी दी। बताया जा रहा है कि जब नवीन ने इस्लाम कबूलने से इनकार कर दिया तो आरोपितों ने उसे और उसके नाना को जान से मार डालने की धमकी दी। इन धमकियों से परेशान हो कर नवीन ने पत्नी फ़रज़ाना के साथ सोमवार (12 जून) को ग्वालियर के एसएसपी से मुलाकात की। दोनों ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई।

नवीन का कहना है कि वह किसी के दबाव में अपना धर्म नहीं बदलेगा। एसएसपी ग्वालियर राजेश सिंह चंदेल ने मुरैना पुलिस को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की जाँच चल रही है।