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‘एशियन गेम्स तभी खेलेंगे जब…’ : साक्षी मलिक की धमकी, बजरंग पूनिया बोले- 15 जून के बाद तय करेंगे धरने की जगह

भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए पहलवानों ने ऐलान किया है कि वो एशिया गेम्स में तभी हिस्सा लेंगे जब यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण सिंह को गिरफ्तार किया जाएगा। इधर मी़डिया से बात करते हुए बजरंग पूनिया ने भी कहा कि सरकार अगर उनकी सुनवाई दी गई तारीख तक नहीं होती तो वो दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा।

साक्षी मलिक को मीडिया से कहते सुना जा सकता है, “एशियन गेम्स तभी खेलेंगे जब ये सारा मुद्दा सुलझेगा। वरना मैंने अभी बोला है कि अब रोज-रोज किस मानसिकता से गुजर रहे हैं ये आप नहीं समझ सकते हो।”

साक्षी मलिक ने कहा पहले बृजभूषण की गिरफ्तारी होनी चाहिए। उसके बाहर रहते हुए कभी निष्पक्ष जाँच नहीं हो सकती। हम सच्चाई लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। पूरा देश का हमें समर्थन मिल रहा है। कुछ लोग सरकार के एजेंडे के तहत फेक न्यूज चला रहे हैं।

बता दें कि एक ओर जहाँ एशियन गेम्स खेलने के लिए जहाँ साक्षी मलिक ने शर्त रखी है। वहीं बजरंग पूनिया ने इस मामले पर हुई खाप पंचायत के फैसले के बारे में बताया कि खाप पंचायत में यही निर्णय लिया गया कि 15 जून तक का समय जो सरकार ने दिया है, अगर सरकार इतने टाइम में मजबूती से आगे नहीं बढ़ पाती तो हम 16 और 17 जून को दोबारा कॉल करके जगह तय करेंगे और उसके बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

बता दें कि इससे पहले पहलवानों ने 8 जून 2023 को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से खिलाड़ियों ने मुलाकात की थी। केंद्रीय मंत्री के घर यह बैठक करीब 6 घंटे चली थी। बैठक के बाद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया था कि खिलाड़ियों के आरोपों पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 15 जून तक आरोपपत्र दाखिल होगा और तब तक पहलवान अपना आंदोलन नहीं करेंगे।

हिन्दू राष्ट्र पर मंथन के लिए गोवा में होगा महोत्सव: पंजाब से लेकर मणिपुर तक के हिन्दुओं की उठाई जाएगी आवाज़, काशी-मथुरा के लिए तेज होगी लड़ाई

गोवा में 16 से 22 जून तक ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। हिन्दू जनजागृति समित, दिल्ली के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने कहा है कि यदि भारत के टुकड़े नहीं चाहते, तो ‘हिन्दू राष्ट्र’ के अलावा विकल्प नहीं है। गोवा में गत 11 वर्षों से हो रहे ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ के कारण हिन्दू राष्ट्र की चर्चा अब केवल भारत में ही नहीं, अपितु वैश्विक स्तर पर प्रारंभ हो गई है।

इसमें अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ की माँग करने वाले अनेक व्यासपीठ के निर्माण हुए हैं, तो दूसरी ओर देश में जिहाद और आतंकवाद के समर्थक भारी संख्या में गिरफ्तार हो रहे हैं। पंजाब में खालिस्तानी पुलिस-प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं, हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं, तो मणिपुर-नागालैंड जैसे राज्यों में हिन्दुओं के घर जलाए जा रहे हैं। कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई है, तब भी वहाँ के हिन्दू सुरक्षित नहीं हो पाए। देश भर में साक्षी, अनुराधा, श्रद्धा वालकर जैसी असंख्य हिन्दू लड़कियों की ‘लव जिहादियों’ द्वारा होने वाली क्रूर हत्याओं को देखते हुए, ऐसा दिखाई देता है कि देश की परिस्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है ।

‘द केरल स्टोरी’ फिल्म द्वारा प्रस्तुत वास्तविकता केवल ‘केरल’ राज्य तक ही मर्यादित नहीं रही, अपितु इन जिहादियों के षड्यंत्र की व्याप्ति देश भर में उजागर हो रही है। एक ओर हिन्दुओं के भाषण करते ही तुरंत उन पर ‘हेट स्पीच’ का अपराध प्रविष्ट किया जाता है, परंतु ‘सर तन से जुदा’ करने की खुले आम घोषणा देनेवालों पर कार्रवाई होते हुए दिखाई नहीं देती। दूसरी ओर ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ की छानबीन में ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ एवं ISI भारत को वर्ष 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र रच रहे हैं, ऐसा उजागर हुआ है।

ऐसी स्थिति में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो समाज को जोड़ सकता है, विश्वबंधुत्व की एवं ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की संकल्पना प्रस्तुत कर सकता है। इसलिए भारत के पुन: टुकड़े होने नहीं देने हैं, तो भारत को आदर्श रामराज्य अर्थात हिन्दू राष्ट्र बनाने के अतिरिक्त विकल्प नहीं; इसीलिए हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य को गति देने के लिए प्रतिवर्ष समान 16 से 22 जून 2023 तक ‘श्री रामनाथ देवस्थान’, फोंडा, गोवा में एकादश ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ अर्थात ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’ आयोजित किया गया है।

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने पत्रकार परिषद में ये जानकारी दी है। ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’, दिल्ली में आयोजित पत्रकार वार्ता में अधिवक्त विष्णु शंकर जैन, प्रवक्ता, ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ तथा ‘सनातन संस्था’ की प्रवक्ता कुमारी कृतिका खत्री भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर सनातन संस्था की प्रवक्ता कुमारी कृतिका खत्री ने कहा, “इस बार के अधिवेशन में ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ इस विशेष सत्र का आयोजन किया गया है।

उन्होंने बताया कि विविध विषयों पर विशेषज्ञों के परिसंवाद, विशेष कार्य करनेवाले मान्यवरों की भेंटवार्ता भी इस बार के अधिवेशन का विशेष आकर्षण होगा। ‘लव जिहाद’, ‘हलाल सर्टीफिकेशन’, ‘लैंड जिहाद’, ‘काशी-मथुरा मुक्ति’, ‘धर्मांतरण’, ‘गोहत्या’, मंदिर संस्कृति की रक्षा’, ‘कश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वसन’, ‘पाकिस्तान एवं बांग्लादेश के हिन्दुओं पर अत्याचार’ जैसे विविध विषयों के साथ ही हिन्दू राष्ट्र की नींव रखने के लिए आवश्यक विषयों पर इस महोत्सव में विचारमंथन होगा।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि काशी, मथुरा, भोजशाला, क़ुतुब मीनार मुक्ति, प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट, वक्फ एक्ट, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट, सच्चर कमिटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय, भारतीय संविधान के अंतर्गत आए धर्मनिरपेक्षता शब्द, मंदिर अधिग्रहण इत्यादि के विषम में निरंतर न्यायलय में संघर्ष कर रहे हैं और ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापना हेतु कानूनी संघर्ष करते रहेंगे। मंदिर मुक्ति के माध्यम से हिन्दू राष्ट्र स्थापना में योगदान कर रहे हैं तथा हिन्दुओं को आवाहन किया गया कि जागृत होकर अपने आस्था के केंद्रों के पुनर्जीवन हेतु संघर्ष करें।

इस हिन्दू राष्ट्र महोत्सव से हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य को गति मिलेगी। हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक, सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने कहा, “इस अधिवेशन के लिए अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर, बांग्लादेश, नेपाल सहित भारत के 28 राज्यों के 350 से भी अधिक हिन्दू संगठनों के 1500 से भी अधिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

इस अधिवेशन में प्रमुखता से अमरावती के ‘श्री रुक्मिणी वल्लभ पीठ’ के अनंत विभूषित श्री जगद्गुरु रामानंदचार्य श्री स्वामी रामराजेश्वराचार्यजी सरकारजी, ‘विश्व हिन्दू परिषद’के देवगिरी प्रांत के संपर्क प्रमुख धर्माचार्य जनार्दन महाराज मेटे, ‘इंटरनैशनल वेदांत सोसाइटी’के स्वामी निर्गुणानंदगिरी महाराज, त्रिपुरा के ‘शांति काली आश्रम’ के स्वामी चित्तरंजन महाराज, छत्तीसगढ के ‘शदाणी दरबार’ के डॉ युधिष्ठिरलाल महाराज, छत्तीसगढ के ‘श्री जामडी पाटेश्वरधाम सेवा संस्थान’के संचालक श्रीरामबालकदास महात्यागी महाराज, गोंदिया के ‘महात्यागी सेवा संस्थान’के अध्यक्ष महंत श्रीरामज्ञानीदास महात्यागी महाराज आदि संतों की वंदनीय उपस्थिति भी इस अधिवेशन में होगी।

इसके अतिरिक्त प्रमुख रूप से काशी की ज्ञानवापी मस्जिद के विरोध में न्यायालयीन लडाई करनेवाले अधिवक्ता हरिशंकर जैन, तेलंगाना के हिन्दुत्वनिष्ठ विधायक टी. राजा सिंह, भूतपूर्व विधायक एवं ‘हिन्दू इकोसिस्टिम’ के संस्थापक तथा भाजपा के नेता कपिल मिश्रा के साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता, उद्योगपति, विचारक, लेखक, मंदिर विश्वस्त, पत्रकार, इसके साथ ही अनेक समविचारी सामाजिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहनेवाले हैं।

इसके साथ ही दिल्ली से कर्नल RSN सिंह भी इस महोत्सव के लिए उपस्थित रहनेवाले हैं । इस अधिवेशन का सीधा प्रक्षेपण हिन्दू जनजागृति समिति के जालस्थल ‘HinduJagruti.org’ द्वारा, इसके साथ ही समिति के ‘HinduJagruti’ इस ‘यू-ट्यूब’ चैनल एवं facebook.com/hjshindi1 इस फेसबुक द्वारा भी किया जानेवाला है । विश्वभर के हिन्दुत्वनिष्ठ इस ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’ का लाभ लें, ऐसा आवाहन हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से किया गया ।

MEA के हस्तक्षेप के बाद कनाडाई सरकार ने भारतीय छात्रों को दी राहत: अब नहीं वापस भेजे जाएँगे 700 स्टूडेंट्स, फर्जी ऑफर लेटर से हुए थे ठगी का शिकार

कनाडा सरकार ने प्रदर्शन कर रहे भारतीय छात्रों को बड़ी राहत देते हुए उनके निर्वासन पर रोक लगा दी। इससे पहले कनाडा सरकार ने भारतीय छात्र लवप्रीत सिंह को 13 जून तक देश छोड़ने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद भारतीय छात्रों ने वहाँ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। भारतीय विदेश मंत्रालय और उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद यह फैसला सामने आया है।

फर्स्टपोस्ट ने टोरंटो स्टार के हवाले से कहा है कि भारतीय छात्रों को कनाडा से निकालने के फैसले को लेकर वहाँ की संसद में मतदान किया गया है। इस मतदान में फैसला भारतीय छात्रों के पक्ष में गया। इसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी (CBSA) को मानवता के आधार पर भारतीय छात्रों को माफ करने और उन्हें स्थायी निवास देने के विकल्प पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

भारतीय छात्रों के कनाडा से निर्वासन के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाली कनाडाई सांसद जेनी क्वान ने कहा है, “छात्र धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं इसलिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए। इनमें से बहुत से छात्रों से मैं मिल चुकी हूँ। वे बहुत बड़े संकट में फँस गए हैं। उनका पूरा पैसा डूब चुका है। ऐसे में उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया गया था।”

इससे पहले, गुरुवार (8 जून, 2023) को कनाडा के शरणार्थी और नागरिकता मंत्री सीन फ्रेजर ने ट्वीट कर कहा था, “फर्जी परमिट के साथ यहाँ आकर फँसे छात्रों की समस्या का समाधान करने के लिए हम सक्रिय होकर काम कर रहे हैं। यहाँ पढ़ने की उम्मीद से आए लोगों का जिन लोगों ने फायदा उठाया है उन्हें उनके किए की सजा जरूर मिलेगी।”

बता दें कि भारतीय छात्रों के साथ हुए इस फ्रॉड और उन्हें कनाडा छोड़ने के आदेश मिलने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मामले पर संज्ञान लिया था। एक बयान में उन्होंने कहा था, “अच्छी नीयत से काम करने वाले छात्रों को सजा देना सही नहीं है। जिन लोगों ने गलती की है उन्हें ही सजा देनी चाहिए। कनाडाई भी स्वीकार करते हैं कि अगर किसी छात्र ने कोई गलती नहीं की है तो उन्हें भारत भेजना गलत होगा। यदि किसी छात्र ने कोई गलती नहीं की है तो उन्हें इसका समाधान खोजना होगा। मुझे उम्मीद है कि इस संबंध में कनाडाई सिस्टम निष्पक्ष काम करेगा।”

वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी भारतीय छात्रों की हरसंभव मदद करने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था, “हमें पता चला है कि कुछ अंतर्राष्ट्रीय छात्र फर्जी कॉलेज लेटर की वजह से निर्वासन का सामना कर रहे हैं। इस मामले में हमारा पूरा ध्यान दोषियों की पहचान करना है ना कि छात्रों को सजा देना।”

दरअसल, मूल रूप से पंजाब निवासी छात्र लवप्रीत सिंह पढ़ाई करने के लिए कनाडा गया था। हालाँकि कनाडाई अधिकारियों ने जाँच में पाया था कि लवप्रीत सिंह ने जिस ऑफर लेटर और स्टडी परमिट पर कनाडा में दाखिल हुआ था वह पूरी तरह फर्जी था। फर्जी परमिट पर कनाडा जाने वाला लवप्रीत सिंह अकेला नहीं था। बल्कि ऐसे ही करीब 700 भारतीय छात्र एजेंट की ठगी का शिकार हुए थे। कनाडा प्रशासन ने सभी को देश छोड़ने का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के बाद गत 5 जून से भारतीय छात्र कनाडा में प्रदर्शन कर रहे थे। हालाँकि अब मौजूदा आदेश के बाद छात्रों ने राहत की साँस ली होगी।

‘लड़की चीज ही ऐसी होती है…’: 100+ लड़कियों से रेप को सरवर चिश्ती ने जायज ठहराने की कोशिश की, अजमेर दरगाह का है खादिम

राजस्थान के अजमेर में 90 के दशक में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ। देश के सबसे बड़े उस रेप कांड में मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के खादिम तक शामिल थे। उस घटना पर ‘अजमेर 92’ नाम से फिल्म आ रही। अब इस्लामी संगठन दरगाह का हवाला देकर फिल्म का विरोध कर रहे हैं। वहीं, दरगाह के खादिम ने एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है।

मंदिर में पुजारियों की तरह दरगाहों में खादिम होते हैं। अजमेर शरीफ दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने अपने विवादित बयान के जरिए अजमेर रेप कांड को सही ठहराने और इसके लिए पीड़ित लड़कियों पर दोष मढ़ने की कोशिश की है।

चिश्ती ने कहा कि ‘लड़की चीज ही ऐसी होती है… बड़े से बड़ा फिसल जाता है’। इस मामले को हिंदुओं से जोड़ते हुए चिश्ती ने कहा, “आदमी पैसों से करप्ट नहीं हो सकता, मूल्यों से करप्ट नहीं हो सकता। लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। वो थी ना… नाम क्या था… जो पेड़ के नीचे बैठे थे, विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं।”

चिश्ती ने आगे कहा, “अच्छा… जितने भी बाबा लोग जेल में हैं, ये सिर्फ वो हैं जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।” चिश्ती ने इसमें मुस्लिम मौलवियों का नाम ना लेकर एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की।

बताते चलें कि इस रेप कांड में लगभग सभी लड़कियाँ हिंदू थीं और उन्हें ब्लैकमेलिंग एवं बलात्कार को अंजाम देने अधिकतर समुदाय विशेष के थे। इस घटना के मुख्य आरोपित थे- फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती। तीनों युवक कॉन्ग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर थे और अजमेर दरगाह के खादिम परिवारों से आते थे।

इस फिल्म के विरोध में अजमेर दरगाह कमेटी ने कहा था कि फिल्म के जरिए एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। फिल्म से अजमेर दरगाह और मोइनुद्दीन चिश्ती की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। रिलीज से पहले फिल्म दरगाह कमेटी को दिखाने की भी की गई है।

विवादित बयानों के लिए कुख्यात है सरवर चिश्ती

सरवर चिश्ती वही शख्स है, जिसने नूपुर शर्मा मामले में लोगों को भड़काने का काम किया था। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।” चिश्ती ने जिस अंदाज में यह ऐलान किया था, वह उसके इरादों को साफ तौर पर जाहिर कर रहा था।

चिश्ती पर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरवर चिश्ती खुद को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य बताता है। उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

पीएफआई के नेताओं के साथ बैठे सरवर का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में सरवर चिश्ती कहता है, “हम मुसलमानों के हामी हैं, मददगार हैं, उनके तरफदार हैं और ये तंजीमें- PFI-SDPI मुसलमानों की आवाज उठाती है।” इस दौरान SDPI नेता तस्लीम रहमानी भी सरवर चिश्ती के साथ बैठा था। साथ में PFI का अनीस, SDPI का जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद शफी, राजस्थान PFI अध्यक्ष आसिफ भी था। सरवर चिश्ती इनकी तारीफ कर रहा था।

इतना ही नहीं, 10 साल पहले कर्नाटक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के मंच से भाषण देते हुए सरवर चिश्ती ने नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी। तब नरेंद्र मोदी को PM उम्मीदवार बनाने की अटकलें लग रही थीं।

उस समय सरवर चिश्ती ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो कोई ताज्जुब नहीं होगा कि सभी मुसलमान आतंकवादी बन जाएँ।” चिश्ती के इस बयान के बाद कर्नाटक में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि, उस मामले का क्या हुआ, किसी को ज्ञात नहीं है।

सरवर का बेटा आदिल चिश्ती हिंदू-देवताओं का मजाक बनाते हुए 23 जून 2022 को कहा था, “333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है, लेकिन 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

माउंटबेटन को दिया गया था सेंगोल, ‘अधीनम’ ने खोली ‘The Hindu’ के झूठ की पोल: कहा – बयान को गलत तरीके से पेश किया, PM मोदी ने तमिल संस्कृति को दिया सम्मान

हाल ही में एक शब्द सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा – ‘सेंगोल’। चोल राजवंश के इस प्रतीक को राजदंड के रूप में देखा जाता है, जो शासक को न्याय और धर्म की याद दिलाता रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के बगल में इसे स्थापित किया। इस दौरान तमिल पुरोहितों का समूह, जिन्हें ‘अधीनम’ कहा जाता है, वो मौजूद रहे। उनकी ही निगरानी में ये पूरा का पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ।

कुछ दिनों पहले वामपंथी अख़बार ‘The Hindu’ ने अपनी एक खबर में दावा किया कि ब्रिटिश इंडिया के अंतिम गवर्नर जनरल माउंटबेटन की ‘सेंगोल’ के साथ कोई तस्वीर ही नहीं है, आज़ादी के समय सत्ता हस्तांतरण के दौरान माउंटबेटन को ‘सेंगोल’ नहीं दिया गया था। ‘अधीनम’ मठ ने इस खबर की निंदा की है। थिरुवावादुथुरई के ‘अधीनम’ के गुरु महासन्निधानम् ने ‘The Hindu’ की खबर को शरारतपूर्ण और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर परोसने वाला बता दिया।

असल में ‘The Hindu’ ने अपनी खबर में ‘अधीनम’ के महंत के हवाले से ही दावा किया था कि माउंटबेटन को कभी ‘सेंगोल’ दिया ही नहीं गया था (नेहरू को देने के लिए)। महंत के हवाले से कहा गया था कि इस कार्यक्रम के संबंध में कोई स्पष्ट सूचना नहीं है। अम्बालवान देसिका परमाचार्य स्वमिगल, जो थिरुवावादुथुरई अधीनम के 24वें महंत हैं, उनके हवाले से ये खबर प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि ‘सेंगोल’ सीधे नेहरू को ही दिया गया।

अब ‘अधीनम’ ने ‘द हिन्दू’ पर गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि 9 जून को आई इस खबर में महंत के बयान को गलत सन्दर्भ में पेश किया गया। साथ ही पूजा के बाद ‘अधीनम’ के साथ ‘द हिन्दू’ के पत्रकार के अशिष्टता से पेश आने की बात भी कही गई है। अब ‘अधीनम’ ने 1947 के सत्ता हस्तांतरण में ‘सेंगोल’ के योगदान पर गौरव जताया है। साथ ही कहा है कि ‘अधीनम’ का एक समूह आमंत्रण के बाद दिल्ली गया था, वहाँ माउंटबेटन को ‘सेंगोल’ दिया गया, फिर उसका गंगाजल से अभिषेक हुआ, फिर उसे पवित्र कर के नेहरू को दिया गया।

‘अधीनम’ के अपने आधिकारिक बयान में कहा, “जब ‘द हिन्दू’ ने पूछा कि ‘सेंगोल’ माउंटबेटन को दिया गया था या नहीं, हमने जवाब दिया कि इसे पंडित नेहरू को दिया गया था। ये तो सही बात है। तब के महंत के सेक्रेटरी रहे मसीलमणि पिल्लई ने इस संबंध में स्पष्ट लिखा है। फ़िलहाल वो 96 साल के हैं। उन्होंने लिखा है कि चक्रवर्ती राजगोपालचारी और मद्रास के कलक्टर के कहने पर ऐसा हुआ था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल संस्कृति को सम्मान दिया गया।”

दो मजहबी भेड़ियों के बीच फँसी लड़की की यह तस्वीर भले धुँधली है, लेकिन इसके बारे में आपकी जानकारी साफ होनी चाहिए

ब्लैकमेल काण्ड के दो नायक एक बेबस युवती को जबरन पाश में बांधकर फोटो खिंचवाते हुए

आज जो तस्वीर आपको धुँधली दिख रही है, वह कभी इसी कैप्शन के साथ एक अखबार में छपी थी। यह उन सैकड़ों तस्वीरों में से एक है जो देश के सबसे बड़े सेक्स कांड के दौरान खींची गई। 90 के दशक में इस सेक्स कांड को राजस्थान के अजमेर में अंजाम दिया गया। 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल किया गया। उनका बलात्कार किया गया।

साल था 1992। तारीख थी 16 मई। अखबार था दैनिक नवज्योति। शीर्षक था- ब्लैकमेल कांड की जानकारी गुप्तचर विभाग ने 5 माह पूर्व दे दी थी। इसी रिपोर्ट का हिस्सा आज धुँधली सी दिख रही यह तस्वीर भी थी। चूँकि उस समय गोदी मीडिया नहीं थी तो एक स्थानीय अखबार को इस खबर का उद्भेदन करना पड़ा। टीवी पत्रकारिता नहीं थी तो प्राइम टाइम की बहस इसके हिस्से नहीं आई। सोशल मीडिया नहीं था तो लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि कैसे इस खबर पर लीपापोती के प्रयास हुए ताकि एक दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या कम न हो।

1992 में दैनिक नवज्योति में प्रकाशित खबर (फोटो साभार: आज तक)

इंटरनेट क्रांति की वजह से आज सब कुछ सर्वसुलभ है। प्रिंट, टीवी, डिजिटल पत्रकारिता है। गोदी मीडिया है। सूचना मेनस्ट्रीम मीडिया की बंधुआ नहीं है। सोशल मीडिया है। वो ऐतिहासिक प्रमाण हैं जो बताते हैं कि जिसे ‘सूफी संत’ बताया जाता है, जिसकी दरगाह पर हिंदुओं की भीड़ लगती है, दरअसल कभी उसकी शह पर अजमेर में मंदिर तोड़े गए थे। गोहत्या की गई थी। सेक्स स्कैंडल पर लीपापोती करने वाली ताकतें सत्ता से बाहर हैं। अजमेर 92 (Ajmer 92) नाम से इस सेक्स स्कैंडल पर एक फिल्म आने वाली है। इसलिए दरिदंगी की वे कहानियाँ फिर से चर्चा में हैं जिसने कइयों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। जिन्हें अंजाम देने वालों को कभी वो सजा न मिल सकी जो भविष्य के लिए सबक बन सके।

इस सेक्स स्कैंडल की कहानी को पर्दे पर आने से रोकने के लिए मजहबी कट्टरपंथी आज भी वही (कु) तर्क दे रहे हैं जिन्हें आधार बनाकर 90 के दशक में इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश हुई थी। कहा जा रहा है कि इससे अजमेर की दरगाह और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कथित छवि को नुकसान होगा। ख्वाजा को लाखों दिलों पर राज करने वाला शांतिदूत बताया जा रहा है। जब इनसे बात बनती नहीं दिखी तो दरगाह के खादिम परिवारों से जुड़े सेक्स कांड के मास्टरमाइंडों की जगह उन हिंदुओं के नाम आगे किए जा रहे हैं, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। ऐसा ही प्रयास करते हुए इंडियन मुस्लिम फाउंडेशन के अध्यक्ष शोएब जमई जो हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने के लिए कुख्यात है ने एक ट्वीट में कहा है, “फिल्म ‘अजमेर 92’ शहर में घटित एक आपराधिक घटना जिसमें (भरोसा कलर लैब) के महेश लुडानी और डॉक्टर जयपाल की प्रमुख भूमिका थी, और कुछ स्थानीय अपराधी शामिल थे, तक सीमित है तो हमारा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है…”

अजमेर दरगाह के खादिमों की संस्था है- अंजुमन सैयद जादगान। इसका सचिव सरवर चिश्ती है। उसका एक वीडियो वायरल है जो 4 जून 2023 का बताया जाता है। इसमें ‘Ajmer 92’ का विरोध करते हुए वह कहता है- लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। सरवर चिश्ती यहीं नहीं रुकता है। हिंदू पीड़ित की जगह दोषी दिखें इसलिए वह आगे कहता है, “विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं। अच्छा जितने भी बाबा लोग जेल में हैं। ये सिर्फ वो हैं, जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।”

अब लड़कियों की ब्लैकमेलिंग और बलात्कार को अंजाम देने के इस मामले के मुख्य आरोपितों का नाम भी जान लीजिए। इनके नाम हैं- फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती थे। तीनों युवक कॉन्ग्रेस में भी महत्वपूर्ण पदों पर थे। अजमेर दरगाह के खादिम परिवारों से आते थे। लेकिन मुस्लिम संगठनों के विरोध की आवाज में आपको कभी ये नाम नहीं सुनाई पड़ेंगे।

दरअसल इनका दर्द यह नहीं है कि देश के सबसे बड़े सेक्स कांड पर फिल्म आ रही है। इनका दर्द यह है कि अब ऐसी फिल्में आ रही हैं जो आतंकियों के, गुंडों के, बलात्कारियों के मजहब को नहीं छिपाती। वो ‘कश्मीर फाइल्स’ में दिखाती है कि मुस्लिम आतंकियों ने हिंदुओं का नरसंहार किया। जो जमीन का सत्य था वही पर्दे पर दिखा। ‘द केरल स्टोरी’ दिखाती है कि लव जिहाद के माध्यम से गैर हिंदू लड़कियों को फँसाया गया। उनका इस्लामी धर्मांतरण किया गया। उन्हें आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में भेजा गया। जो जमीन पर हुआ वही पर्दे पर। चरित्रों के नाम से कोई छेड़छाड़ नहीं। ऐसे में जब अजमेर में 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल कर रेप की कहानी पर्दे पर आएगी तो लोगों को पता चलेगा कि पीड़िताओं का धर्म क्या था। उन्हें एहसास होगा कि लव जिहाद की साजिशें कितनी पुरानी हैं। उन्हें गुनहगारों के मजहब का पता चलेगा। उन्हें अजमेर की दरगाह और कॉन्गेस से उनके रिश्तों का पता चलेगा। यानी कुछ घंटे की फिल्म उस कटु सत्य को लोगों के सामने रख देगी जिस पर इस्लामी, लिबरल, वामपंथी गिरोह अब तक लीपापोती करता रहा है।

भारत के जिस फिल्म उद्योग को आश्रमों, मठों को व्याभिचार का अड्डा दिखाने की आदत रही हो। जिसे राम को क्रूर, चालबाज, झूठा, बेईमान, गुंडा दिखाने की आदत रही हो। जिसके लिए रहीम हमेशा शांति दूत रहा हो। उस उद्योग से इस तरह की फिल्मों का आना गिरोह को डराएगा ही। लेकिन यह डर अच्छा है। भारत की व्यवस्था के पर्दों की आड़ में अजमेर का जो सच 90 के दशक में दबा दिया गया था उसकी कहानी का 2023 में भारत की गली-गली में पहुँचना कथित शांतिदूतों से हिंदुओं को सचेत ही नहीं करेगा, बल्कि उनके मजहबी मंसूबों का बधिया भी करेगा।

‘इसने बगैर निकाह के शादी की है, इसका बच्चा भी हराम’: हिंदू से शादी पर गाली दे रहा था शोएब जमई, इसलिए सुबुही खान ने पीटा; देखिए वीडियो

सोशल मीडिया पर वो वीडियो खासा वायरल हो रहा है, जिसमें अधिवक्ता सुबुही खान ने इस्लामी कट्टरपंथी शोएब जमई की पिटाई कर दी। अब इसका कारण भी सामने आ गया है। पता चल गया है कि सुबुही खान को आखिर किस बात का गुस्सा आया था, जिस पर उन्होंने ‘न्यूज़ 18’ के लाइव डिबेट शो में एंकर अमन चोपड़ा की मौजूदगी में शोएब जमई को पीटा। इसका कारण है कि शोएब जमई ने सुबुही खान के बेटे के लिए ‘हराम’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया था।

इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें शोएब जमई कहता है, “इन्होंने निकाह नहीं किया, बल्कि बगैर निकाह के शादी की। उसका बच्चा भी हराम होगा।” बता दें कि सुबुही खान ने एक हिन्दू से शादी की है। उनके पति का नाम नील पटेल है। अशोक पंडित की फिल्म ’72 हूरें’ पर चर्चा के दौरान शोएब जमई ने एक महिला पर व्यक्तिगत टिप्पणी शुरू कर दी, उनके बेटे को गाली दी – यही कारण है कि सुबुही खान को भी गुस्सा आ गया।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा कि इतना सुनने के बाद सुबुही खान ने वही किया, जो भारत की हर बेटी करेगी। हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलने वाला शोएब जमई ‘इंडियन मुस्लिम फाउंडेशन’ का अध्यक्ष है। वहीं सुबुही खान ‘राष्ट्रीय जागरण अभियान’ की संयोजक हैं और साथ ही ‘कबीर फाउंडेशन’ की संस्थापक हैं। सुबुही खान ने शोएब जमई की पिटाई के दौरान कहा, “भाग यहाँ से। तेरी औकात क्या है।”

पत्रकार अमन चोपड़ा और अन्य अतिथियों ने किसी तरह बीच-बचाव किया और शोएब जमाई को लेकर सुबुही खान से दूर लेकर गए। सुबुही खान ने शोएब जमई को फटकारते हुए कहा, “चल निकल यहाँ से, तेरे बाप को भी मारूँगी।” बता दें कि शोएब जमई के खिलाफ दिल्ली पुलिस में भी अधिवक्ता शशांक शेखर झा द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि वो ऐसे किसी डिबेट शो का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसमें शोएब जमई हों।

NCP शरद पवार की बेटी की ही: सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को बनाया कार्यकारी अध्यक्ष, दो ही चाल में तोड़ दिया भतीजे अजित का सपना

शरद पवार (Sharad Pawar) के बाद राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) का मुखिया कौन होगा, यह बात साफ हो गई है। राजनीति के इस वर्चस्व में आखिरकार भतीजे पर बेटी को तरजीह मिल गई है। शरद पवार ने बेटी सुप्रिया सुले और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को NCP का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है।

शरद पवार ने शनिवार (10 जून 2023) को कहा, “प्रफुल्ल पटेल के कंधे पर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी दे रहे हैं। इसके साथ ही पटेल पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, गोवा, राज्यसभा की जिम्मेदारी रहेगा।”

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार ने आगे कहा, “सुप्रिया सुले को भी हम वर्किंग प्रेसीडेंट की जिम्मेदारी देते हैं। इसके साथ ही उन्हें महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, यूपी और लोकसभा की जिम्मेदारी उनको देते हैं।”

शरद पवार ने यह एलान एनसीपी की स्थापना की 25वीं वर्षगाँठ के मौके पर की। इस दौरान मंच पर उनके भतीजे और खुद को उनका उत्तराधिकारी मानने वाले अजित पवार भी मौजूद थे। पार्टी में कोई अहम पद नहीं देना अजित पवार के साथ-साथ कई सियासी संकेत है।

इस संकेत के बीच पार्टी नेता छगन भुजबल ने कहा कि कार्यकारी अध्यक्ष के एलान के साथ ही चुनाव का काम और लोकसभा-राज्यसभा का काम बँट जाएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही ये जिम्मेदारी तय की गई है।

शरद पवार ने पार्टी में दो कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करके पार्टी की सियासत को समझाने की कोशिश की है। एक तो वो ये संदेश देने में कामयाब रहे कि वे अपनी बेटी का पक्ष नहीं ले रहे हैं और काम के आधार पर जिम्मेदारी दे रहे हैं, दूसरे अपनी तबीयत को कारण सक्रियता कम होने के कारण प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गज नेता के सानिध्य में सुले को नेतृत्व कला सीखने का मौका दे रहे हैं।

हालाँकि, सुप्रिया सुले की NCP में अजित पवार से स्वीकृति कहीं अधिक है। वह मीडिया में कब, कहाँ, कैसे और कितना बोलना है अच्छी तरह जानती हैं। अपने पिता की तरह वह पार्टी के सभी नेताओं को बराबर सम्मान भी देती हैं। वहीं, अजित पवार थोड़ा मुँहफट स्वभाव के हैं और मौके की नजाकत को समझने की कोशिश नहीं करते। इससे अलग संकेत जाता है।

दूसरी बात यह है कि अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में अधिक रूचि है। वे इसके बारे में कई बार बोल चुके हैं कि उन्हें दिल्ली रास नहीं आती। वहीं, सुप्रिया सुले एक सांसद के रूप में अपनी अच्छी पहचान बनाई है। हो सकता है कि आने वाले वक्त में महाराष्ट्र में सीएम या अथवा डिप्टी सीएम जैसे पद पार्टी उन्हें ऑफर करे। हालाँकि, राजनीति में कुछ कहना जल्दबाजी होती है।

जब सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है तो यह एक स्पष्ट संकेत भी है कि पार्टी की कमान उन्हीं की पास रहेगी और वे केंद्र की राजनीति करेंगी। बाल ठाकरे ने भी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई में उद्धव ठाकरे का पक्ष लेते हुए उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया था। अजित पवार फिलहाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।

अजित पवार और सुप्रिया सुले में पार्टी में उत्तराधिकार को लेकर लंबे समय खींचतान चल रही थी। कई मौकेे पर अजित पवार ने खुद को शरद पवार का असली उत्तराधिकारी होने का संकेत दिया था। वहीं, सुप्रिया सुले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अपनी स्वीकृति को लगातार बढ़ा रही थीं।

पार्टी में मचे इस अंदरुनी घमासान के बीच 2 मई 2023 को शरद पवार ने स्वास्थ्य का हवाला देकर पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। छगन भुजबल, जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, प्रफुल्ल पटेल जैसे बड़े नेता कार्यकर्ताओं का हवाला देते हुए उनसे इस्तीफा वापस लेने की माँग करते रहे।

इस बीच भतीजे अजित पवार ने उनके इस्तीफे का समर्थन किया। वे इसे अवसर के रूप में देख रहे थे। इस बीच वरिष्ठ नेताओं की माँग के बाद 6 मई 2023 को शरद पवार ने इस्तीफा वापस ले लिया। उस दौरान अजित पवार उनके साथ मौजूद नहीं थे। लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सहायता के लिए पार्टी में कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत है।

कहा जाता है कि NCP में दो गुट है, जिसमें से एक चाहता है कि भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई जाए, जबकि दूसरा गुट इसके लिए राजी नहीं है। इस बीच मीडिया में यह भी चर्चा होने लगी की अजित पवार NCP छोड़कर कुछ नेताओं के साथ भाजपा का दामन थामेंगे, लेकिन बाद में उन्होंने इस अकटल का खंडन कर दिया।

यहाँ ध्यान रखना जरूरी है कि साल 2019 में अजित पवार एक बार अपनी पार्टी से बगावत कर चुके हैं। तब उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर महाराष्ट्र की सरकार बनाई थी। अजित पवार को तब डिप्टी सीएम पद मिला था। हालाँकि, यह सरकार कुछ ही दिन चल पाई।

इस घोषणा के सुप्रिया सुले ने कहा, “कार्यकारी अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी को सौंपने के लिए मैं NCP अध्यक्ष पवार साहब, सभी वरिष्ठ नेता, पार्टी के साथी, कार्यकर्ता और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करती हूँ। मैं NCP को और मजबूत करने के लिए साथ मिलकर लगन से काम करूँगी।”

‘मंदिर को बम से उड़ाकर यहाँ मस्जिद बनवाऊँगा’: श्रीचंडी सिद्धपीठ में घुसकर नमाज पढ़ने वाला अनवर गिरफ्तार, गजवा-ए-हिंद के नारे लगा मचाया था उत्पात

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में मंदिर में नमाज पढ़ने के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोपित की पहचान अनवर के रूप में हुई। आरोप है कि अनवर ने मंदिर में नमाज पढ़ने के साथ ही गजवा-ए-हिंद के नारे लगाते हुए मंदिर को बम से उड़ा वहाँ मस्जिद बनाने की धमकी दी। घटना शुक्रवार (9 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला हापुड़ के श्रीचंडी सिद्धपीठ मंदिर का है। यहाँ सुबह करीब 4:40 बजे एक युवक मंदिर में घुस गया। कुछ देर टहलने के बाद उसने चादर बिछाकर नमाज पढ़नी शुरू कर दी। इस पर मंदिर के पुजारी और वहाँ मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की। इस पर वह भड़क गया और उनके साथ गाली-गलौज करने लगा। अभद्रता के बाद भी वहाँ मौजूद लोग उसे मंदिर से जाने के लिए कह रहे थे। इस पर उसने अगले जुमे को नमाज पढ़ने की धमकी दी।

यही नहीं, अनवर ने मंदिर परिसर में गजवा-ए-हिंद का नारे लगाते हुए मंदिर को बम से उड़ाने और वहाँ मस्जिद बनाने की धमकी दी। इसके बाद उसने मंदिर में लूटपाट करने की धमकी देते हुए दावा किया था कि मंदिर के बाहर उसके अन्य साथी भी मौजूद हैं। हालाँकि इसके बाद मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने उसे मंदिर परिसर से भगा दिया। इस मामले की जानकारी जैसे ही इलाके में फैली, भारी संख्या में लोग मंदिर के पास इकट्ठा होकर हँगामा करने लगे। 

इस घटना से नाराज व्यापारी वर्ग ने भी बंद की चेतावनी दे दी। मामले की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस के साथ ही डीएम, एसपी समेत आला अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचे और लोगों को शांत कराया। पुलिस ने मंदिर परिसर से सीसीटीवी फुटेज लेकर मामले की जाँच शुरू की थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अनवर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धारा 295, 295A, 298, IPC की धारा 153A ज तहत मामला दर्ज किया गया।

शुरुआती जाँच के आधार पर पुलिस इस मामले में किसी भी प्रकार के षड्यंत्र की बात से इनकार करते हुए आरोपित से कड़ी पूछताछ की बात कर रही है। वहीं, दूसरी ओर मंदिर के पुजारियों व अन्य लोगों ने मंदिर परिसर को गंगाजल से धुलकर वहाँ पूजा अर्चना की।

पाकिस्तान में टीचर अहमद ने करवाया 14 साल की हिंदू लड़की का अपहरण, धर्मांतरण के बाद निकाह हुआ: विधानसभा में हिंदू विधायक रोए

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण, धर्मांतरण और फिर निकाह कराने का मामला सामने आया। सोहना शर्मा नामक पीड़िता का अपहरण उसके टीचर अख्तर ने ही किया था। इस मामले में सिंध प्रांत की विधानसभा में भी जोरदार बहस हुई। साथ ही आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई। इस पर प्रांतीय मंत्री ने आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

दरअसल, सिंध प्रांत के काजी अहमद इलाके से 14 वर्षीय हिंदू लड़की सोहना शर्मा का उसके घर में घुसकर अपहरण किया गया था। पीड़िता के पिता दिलीप कुमार का कहना है कि सोहना के टीचर अख्तर गबोल, फैजान जाट, सारंग खसखेलि ने बंदूक की नोक पर घर में घुसकर लूटपाट की। इसके बाद उनकी बेटी को उठाकर ले गए। दिलीप ने कहा है कि उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत की है। लेकिन पुलिस का कहना है कि सोहना ने अपनी मर्जी से धर्मांतरण और निकाह किया है। इसलिए उन्हें अपनी बेटी वापस मिलने की उम्मीद नहीं है।

सिंध विधानसभा में गरमाया मुद्दा…

पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्मांतरण के बाद उनका निकाह कराने की घटनाएँ आम होती जा रहीं हैं। ऐसे में, इस मुद्दे को लेकर सिंध प्रांत की विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के विधायक लाल चंद उकरानी ने इस मुद्दे पर आक्रोश और दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा है कि सोहना शर्मा के अपहरण से पूरा अल्पसंख्यक वर्ग सदमे में है।

लाल चंद उकरानी ने इस घटना को क्रूरता करार देते हुए कहा है कि किसी भी धर्म में जबरन धर्मांतरण और शादी की इजाजत नहीं है। इसलिए किसी को भी जबरन धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा जब लाल चंद उकरानी ने अल्पसंख्यकों के अन्य मुद्दों को लेकर बात करने की कोशिश की तो विधानसभा स्पीकर आगा सिराज ने उनका माइक बंद कर उन्हें बोलने से रोक दिया।

हालाँकि बाद में उन्होंने सदन में कहा कि सोहना शर्मा का अपहरण करने के बाद उसका निकाहनामा (मैरिज सार्टिफिकेट) भी बनवा दिया गया। ताकि यह साबित किया जा सके कि उसने अपनी मर्जी से धर्मांतरण कर निकाह किया है।

इसके अलावा प्रांतीय मंत्री ज्ञान चंद इसरानी ने कहा है, “कानून के अनुसार यह एक दुखद घटना है। 18 साल से कम उम्र की लड़की न तो धर्म बदल सकती और न ही शादी कर सकती।” उन्होंने यह भी कहा है कि सोहना शर्मा के अपहरण के मामले में वह पुलिस के लगातार संपर्क में हैं। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी की विधायक ने विधानसभा में बेहद दुखी होकर रोते हुए कहा है, “वो लड़की मेरी रिश्तेदार है। प्लीज उस पर दया करिए।” उन्होंने यह भी कहा है कि सोहना को धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया। बाद में प्रांतीय मंत्री मुकेश चावला ने सदन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।