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जब नहीं था इस्लाम तब भी होती थी अमरनाथ यात्रा, राजतरंगिणी से लेकर नीलमत पुराण तक में मौजूद हैं प्रमाण: वामपंथियों का गढ़ा है ‘मुस्लिम ने खोजा शिवलिंग’ थ्योरी

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में स्थित है अमरनाथ मंदिर, जो हिन्दुओं की श्रद्धा का एक बड़ा प्रतीक है। अमरनाथ शिवलिंग को ‘बाबा बर्फानी’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि भगवान शिव का रूप बर्फ से ही यहाँ प्रकट होता है। ये एक स्वयंभू शिवलिंग है, अर्थात स्वयं प्रकट होने वाला। लिद्दर घाटी में स्थित इस गुफा के बारे में मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था। भगवान अमरनाथ की पूजा हिन्दू धर्म में सदियों से होती आ रही है।

लेकिन, कुछ लोगों ने हिन्दुओं के ऊपर इस्लाम के अहसान गिनने के लिए ये कहना शुरू कर दिया कि अमरनाथ शिवलिंग की खोज बूटा मलिक नाम के एक चरवाहे ने की, उससे पहले इसके बारे में किसी को पता नहीं था। ये सरासर झूठ है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में अमरनाथ धाम का जिक्र है। कहानी कुछ यूँ कही जाती है कि गड़रिया बूटा मलिक एक बार इधर अपनी भेड़ें चराते हुए फँस गया था, तभी उसकी मुलाकात एक साधु से हुई।

साधु ने उसे कोयले से भरा एक थैला दिया, लेकिन जब घर जाकर उसने थैले को खोला तो उसमें से हीरे निकले। इस चमत्कार को देख कर वो वापस इस गुफा में आया। लेकिन, जिस साधु को धन्यवाद देने को आया था वो नदारद था और वहाँ उसे एक शिवलिंग दिखाई दिया। इस कहानी के सामने आने के बाद अमरनाथ गुफा में चढ़ने वाले चढ़ावे का एक अंश बूटा मलिक के परिवार को दिए जाने की परंपरा चल पड़ी। हालाँकि, इस कहानी का कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है।

लेकिन, कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने बार-बार इसे इस तरह से दिखाना शुरू कर दिया कि ये सेकुलरिज्म का बहुत बड़ा उदाहरण है और मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर एहसान किया। ‘हमारे बूटा मलिक ने तुम्हारे अमरनाथ मंदिर को खोजा’ – उनका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं को ये एहसास दिलाने का रहता है। जुलाई 1898 में स्वामी विवेकानंद ने भी अमरनाथ की यात्रा की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे विभिन्न वेशभूषा वाले देश भर के लोग इस यात्रा में शामिल रहते थे।

आपको सबसे पहले तो ये जानना चाहिए कि कल्हण द्वारा रचित ‘राजतरंगिणी’, जिसमें जम्मू कश्मीर के राजाओं का हजारों वर्षों का इतिहास वर्णित है, उसमें भी अमरनाथ मंदिर के बारे में बताया गया है। ‘राजतरंगिणी’ 12वीं शताब्दी में लिखी गई थी। इसमें कहीं बूटा मलिक की कहानी का जिक्र नहीं मिलता। इस पुस्तक में राजाओं के बारे में क्रमवार विवरण दिया गया है। इस पुस्तक में अमरनाथ की पथयात्रा का भी जिक्र है, जिसका अर्थ है कि गुफा के लिए यात्रा की परंपरा अति प्राचीन है।

इस क्रम में शेषनाग झील के बारे में भी ‘राजतरंगिणी’ में बताया गया है। कहा जाता है कि इस झील का सीधा कनेक्शन पाताल लोक से है। अगर आप कल्हण द्वारा रचित श्लोक को देखेंगे तो पता चलेगा कि अमरनाथ शिवलिंग को ‘अमरेश्वर’ भी कहा जाता था। कल्हण बताते हैं कि सुस्रवास नामक नाग ने दूर पर्वत के नीचे एक झील का निर्माण कराया, जिसका जल दूध के समान सफ़ेद था। उन्होंने जो श्लोक था, वो इस प्रकार है:

दुग्धाब्धि धवकं तेन सरो दूरगिरौ कृतम्।
अमरेश्वरयात्रायां जनैरद्यापि दृश्यते।।

कल्हण बताते हैं कि इस अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले लोग इस झील का भी दर्शन करते हैं। इतना ही नहीं, इस पुस्तक में कश्मीर में शिवत्व की महिमा के बारे में भी बताया गया है। आज भले ही जम्मू कश्मीर को लोग आतंकवादी घटनाओं और इस्लामी कट्टरवाद के कारण जानते हों, लेकिन पहले ये ब्राह्मणों की भूमि हुआ करती थी। कल्हण लिखते हैं – ‘कश्मीर पार्वती तत्र राजा ज्ञेयः शिवांशकः’, अर्थात कश्मीर माँ पार्वती का स्वरूप है और शिव का अंश इस स्थान के शासक हैं।

इससे साफ़ है कि कश्मीर को भगवान शिव की भूमि के रूप में प्राचीन काल से जाना जाता था। ‘राजतरंगिणी’ में ही कश्मीर के एक अन्य शासक सामदीमत का भी जिक्र है, जिसके बारे में बताया गया है कि वो वन में जाकर बर्फ के शिवलिंग की पूजा करता था। वो शिवभक्त था। बर्फ का शिवलिंग भारत में कहीं अन्यत्र नहीं मिलता, अर्थात साफ़ है कि कश्मीर के राजाओं के लिए अमरनाथ भगवान का महत्व पहले से रहा है। वामपंथियों ने बड़ी चालाकी से ये कोशिश की है कि हमें हमारा इतिहास ही न याद रहे और हम खुद को मुस्लिमों का एहसानमंद मानते रहे।

इतना ही नहीं, कई विदेशी घुमंतुओं ने भी अमरनाथ यात्रा का जिक्र किया है, जिनमें दो प्रमुख हैं – बैरन चार्ल्स हुगेल और गॉडफ्रे विग्ने। जम्मू कश्मीर में 14वीं शताब्दी में मुस्लिम शासन आया और इसी शताब्दी के अंत में जबरन धर्मांतरण का दौर भी शुरू हो गया। सिकंदर बुतशिकन ने उस समय कश्मीर में हिन्दू प्रतिमाओं की तोड़फोड़ शुरू कर दी। फ्रेंच डॉक्टर फ्रांसिस बेर्नियर औरंगजेब के साथ कश्मीर गया था और उस दौरान उसने एक सुंदर गुफा और वहाँ जमे बर्फ के बारे में बताया था, जो अमरनाथ का ही विवरण है।

वहीं विग्ने ने अपनी पुस्तक ‘रवेल्स इन कश्मीर, लद्दाख एन्ड इस्कार्डू’ में लिखा है कि सावन महीने की 15वीं तारीख़ को अमरनाथ यात्रा शुरू होती है। उन्होंने लिखा है कि कई जाति-संप्रदायों के लोग इसमें शामिल रहते हैं। वो 1840-41 के समय अमरनाथ गए थे, लेकिन खराब मौसम के कारण वो नहीं जा पाए थे। इससे पता चलता है कि यात्रा वर्षों से अनवरत चली आ रही थी। ये भी जान लीजिए कि प्राचीन ग्रन्थ ‘नीलमत पुराण’ में बह अमरनाथ यात्रा का जिक्र मिलता है।

‘नीलमत पुराण’ में जो इसका विवरण है, उससे स्पष्ट पता चलता है कि छठी-सातवीं शताब्दी के लोगों को इसकी जानकारी थी। तब तक इस्लाम भारत में आया ही नहीं था। छठी शताब्दी के अंत में इस्लाम की स्थापना ही हुई थी, ऐसे में कोई बूटा मलिक इसके बहुत बाद में ही हुआ होगा। गुफा के बगल से सिंधु की एक सहायक नदी अमरगंगा भी गुजरती थी। शिव श्रद्धालु इसकी मिट्टी को अपने शरीर में लगाते थे। इसी तरह, बर्नियर ने भी इस यात्रा का जिक्र किया है।

अमित कुछ सिंह अपनी पुस्तक ‘अमरनाथ यात्रा’ में लिखते हैं कि ‘बर्नियर ट्रेवल्स’ पुस्तक की पृष्ठ संख्या 418 में अमरनाथ यात्रा का जिक्र है। भारत के ऑक्सफ़ोर्ड इतिहास के लेखक विंसेट ए स्मिथ ने ‘बर्नियर ट्रेवल्स’ का संपादन किया है, जिसमें लिखा है कि अमरनाथ गुफा आश्चर्यजनक है जहाँ छत से बूँद-बूँद पानी गिरता है और जम कर बर्फ के खंड का आकर लेता है और हिन्दू इसकी पूजा करते हैं। इतना ही नहीं, डॉक्टर स्टेन ने आकर का जिक्र भी किया है।

उन्होंने बताया है कि शिवलिंग की ऊँचाई 2 फ़ीट और चौड़ाई 7-8 फ़ीट की होती है। इतना ही नहीं, अकबर का इतिहासकार अबुल फजल भी ‘आईने अकबरी’ में अमरनाथ को एक पवित्र स्थल बताता है। उसने लिखा है कि 15 दिन तक बढ़ते रहने वाला ये शिवलिंग 2 गज का हो जाता है। सन् 1866 में प्रकाशित ‘द इंडियन इनसाइक्लोपीडिया’ में भी कश्मीरी राजाओं के अमरनाथ यात्रा का विवरण है। वामपंथी इतिहासकारों ने झूठ बोल कर अमरनाथ यात्रा के बूटा मलिक की खोज के बाद शुरू होने की धारणा फैलाई।

अब अंत में इस ‘मलिक’ सरनेम के पीछे की सच्चाई भी जान लीजिए। हुगेल लिखते हैं कि मलिक परिवार को वहाँ अकबर ने नियुक्त किया था। इससे पता चलता है कि ये उस समय सरनेम की जगह अकबर द्वारा नवाजा गया टाइटल हुआ करता था। इसका मतलब है कि सीमा की रखवाली करने वालों को अमरनाथ की खोज करने वाला और गुफा का रक्षक बता दिया गया। वो अकबर के कहने पर इस्लामी साम्राज्य की सीमा की रक्षा करता था, न कि अमरनाथ गुफा की।

बाथरूम में भी छिपा रखे थे गोपनीय दस्तावेज, परमाणु बम से लेकर अमेरिकी हमलों तक की थी जानकारी: डोनाल्ड ट्रंप पर लगे 37 आरोप सार्वजनिक

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु बम से लेकर विदेशी देशों पर हमला करने वाले अमेरिका के सारे गोपनीय दस्तावेज अपने पास रखे हुए थे। शुक्रवार (9 जून 2023) को इन बातों को खुलासा दायर किए गए 49 पृष्ठों के संघीय अभियोग से हुआ। इनसे ये भी पता चला कि अमेरिका में ट्रंप के ऊपर कौन से 37 मामले चल रहे हैं।

खबरों के अनुसार, इसमें बताया गया कि ट्रंप साल 2021 में व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद अपने साथ कुछ डिब्बे लेकर निकले थे जिनमें यूएस की परमाणु क्षमता और अन्य देशों की क्षमता से जुड़ी जानकारियाँ थीं। छानबीन में ये डिब्बे ट्रंप के घर मार-अ-लागो की विभिन्न जगहों पर मिले। इनमें कुछ को बेडरूम में रखा गया था, कुछ को बॉलरूम और कुछ को शॉवर रूम में।

साल 2021 में ट्रंप ने एक अज्ञात लेखक और अज्ञात प्रकाशक को इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति के रूप में एक निश्चित देश पर हमला करने की अपनी इच्छा और एक सैन्य अधिकारी से बातचीत के बारे में जानकारी दी थी। ट्रंप के साथ उनके साथी वॉल्टाइन नॉटा पर भी आरोप है कि उन्होंने अपने बॉस के कहने पर इन दस्तावेजों को वकीलों से छिपाया।

अब नॉटा पर भी 6 केस चल रहे हैं। इनमें न्याय में बाधा डालने और सबूतों से छेड़छाड़ जैसे आरोप है। वॉल्ट नॉटा को सीसीटीवी फुटेज में मार-ए-लागो एस्टेट में बक्सों को हटाते हुए देखा गया था।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब वकीलों ने ट्रंप से इस संबंध में बात करने के लिए मई 2022 में मुलाकात की तो ट्रंप ने उन वकीलों से कहा था कि न्याय विभाग को बोल दें कि उन लोगों को ट्रंप के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला जो वापस किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह नहीं चाहते कि कोई भी उनके डिब्बों की छानबीन करें।

उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि अगर इस मामले में कोई प्रतिक्रिया ही न दी जाए तो कुछ होगा क्या? या फिर सबसे बेहतर है ये कह दिया जाए कि ट्रंप के घर से ऐसा कुछ मिला ही नहीं जिसे वापस करना चाहिए।

बता दें कि ट्रंप इस समय गोपनीय जानकारी से जुड़े दस्तावेज रखने, न्याय में बाधा डालने और झूठे बयानों से संबंधित 37 मामलों का सामना कर रहे हैं। फ्लोरि़डा की संघीय अदालत में दायर अभियोग में बताया गया कि ट्रंप ने व्हाइट हाउस छोड़ने के साथ ही अपने साथ जिन फाइलों को वहाँ से हटाया, उन्हें अपने घर में ऐसी असुरक्षित जगह पर रखा जहाँ नियमित तौर पर हजारों मेहमान आते थे और सामाजिक कार्यक्रम होते रहते थे। अभियोग में जोर दिया गया कि इन हरकतों से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा आ सकता था। कहा जा रहा है कि न्याय विभाग के विशेष वकील जैक स्मिथ ने ट्रंप पर जो आरोप लगाए हैं उनमें सबमें 20 साल तक की जेल होती है।

गुजरात के पोरबंदर से 3 कश्मीरी गिरफ्तार, ISIS में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान भागने का था प्लान: सूरत से पकड़ी गई सुमैरा बानो लव जिहाद का भी चला रही थी रैकेट

गुजरात पुलिस के आतंकवादी निरोधी दस्ते (Gujarat ATS) ने कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। ATS ने पोरबंदर से इस संगठन से जुड़े 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक महिला भी है। वहीं, एक अन्य आरोपित की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

गिरफ्तार लोगों में तीन कश्मीरी- उबैद नासिर मीर, हनान हयात शाल, मोहम्मद हाजिम शाह और एक महिला सहित 2 सूरत के रहने वाले- जुबैर अहमद मुंशी और महिला सुमैरा बानो शामिल हैं। कहा जा रहा है कि फरार संदिग्ध का नाम जुबैर अहमद मुंशी है और ATS उसे तलाश रही है।

तीनों कश्मीरी पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर अबू हमजा की मदद से ISIS के आतंकी विंग इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरसान प्रांत (ISKP) में शामिल होने के लिए समुद्र के रास्ते फरार होने की फिराक में थे। भारत से निकलकर ये अफगानिस्तान जाने वाले थे। सभी सदस्य पिछले एक साल से एक-दूसरे के संपर्क में थे।

जाँच एजेंसी का कहना है कि ये सभी ISIS के सक्रिय ग्रुप के सदस्य थे और इनके पास से कई प्रतिबंधित चीजें बरामद की गई हैं। इनके पास से चाकू भी मिला है। पूछताछ में पता चला है कि सुमैरा बानो ने तमिलनाडु में शादी की है। वह अपने अब्बू से मिलने के लिए कन्याकुमारी से सूरत आई थी। उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

सुमैरा बानो इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल के लिए काम करती थी। इसके अलावा, वह लव जिहाद के लिए 16 से 18 साल के मुस्लिम लड़कों को तैयार करती थी, ताकि इन्हें भी ISIS में शामिल किया जा सके। सुमैरा लव जिहाद के रैकेट में भी शामिल पाई गई है।

सुमैरा को सूरत के लालगेट इलाके से पकड़ा गया था और फिर पोरबंदर लाया गया था। उससे हुई पूछताछ के बाद पोरबंदर से तीन और लोगों को हिरासत में लिया गया है। सुमैरा बानो भी ईरान के रास्ते अफगानिस्तान जाने की योजना बना रही थी। 

ATS के DIG दीपेन भद्रन की अगुवाई में यह ऑपरेशन शुक्रवार (9 जून 2023) को शुरू किया गया। ATS की इन आरोपियों पर पिछले कुछ महीनों से नजर थी और उनकी हर गतिविधि को ट्रैक किया जा रहा था। छापेमारी के लिए ATS ने चार टीमें बनाई थीं।

दो टीमों को पोरबंदर दरिया में लगाया गया था, जबकि अन्य दो टीमों को द्वारका इलाके और पोरबंदर में छापेमारी कर रही थीं। इसके अलावा एटीएस की टीम ने गुजरात के भरूच सूरत और दिल्ली में भी अलग-अलग जगहों पर पड़ताल की है। इसके दो दिन पहले एटीएस की एक टीम ने द्वारका के समुद्र में सर्च अभियान चलाया था। फिर एटीएस की टीम ने शुक्रवार से पोरबंदर में डेरा डाल दिया।

बताते चलें कि ATS ने पिछले महीने आतंकी संगठन अलकायदा (Al Qaeda) से जुड़े एक मॉड्यूल का खुलासा किया था। 22 मई 2023 को ATS ने अहमदाबाद से 4 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। ये सभी अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे थे और मुस्लिम युवाओं को अलकायदा में भर्ती कर रहे थे।

इसी तरह, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में मध्य प्रदेश में ISIS से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। NIA ने मध्य प्रदेश पुलिस के ATS के साथ मिलकर जबलपुर में 13 स्थानों पर छापेमारी की थी। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान सैयद ममूर अली, मोहम्मद आदिल खान और मोहम्मद शाहिद के रूप में की गई थी।

इन लोगों के कब्जे से धारदार हथियार, गोला-बारूद, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। NIA ने पता चला कि ISIS के इशारे पर भारत में आतंकवादी हमले करने की साजिश रची जा रही थी। यह मॉड्यूल स्थानीय मस्जिदों और घरों में बैठकें करता रहा था।

शोएब जमई मुस्लिमों का प्रतिनिधि और अधिवक्ता सुबुही खान को अपनी बात रखने का भी हक़ नहीं? लिबरल गिरोह नफरती कट्टरपंथी से जमा रहा सहानुभूति

अधिवक्ता सुबुही खान ने लाइव टीवी शो में इस्लामी कट्टरपंथी शोएब जमई को पीट दिया। हिंसा किसी भी चीज का जवाब नहीं हो सकता है, लेकिन एक पढ़ी-लिखी महिला ने जब मजबूर होकर किसी को शो से भागने के लिए कहा, तो इसके पीछे ज़रूर वाजिब कारण रहा होगा। यहाँ एक मुस्लिम महिला के अधिकारों की चिंता किसी को नहीं है लेकिन एक इस्लामी कट्टरपंथी के लिए आँसू बहाए जा रहे हैं। शोएब जमई जैसे गुंडे को अगर दो-चार हाथ या लात पड़ भी गए तो इसमें हंगामा करने का क्या मतलब है?

शोएब जमई तो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को मिला कर हिन्दुओं पर शासन करने की बातें कर रहा था, क्या इसके लिए उस पर हेट स्पीच का मामला नहीं चलना चाहिए? जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कहा है कि पुलिस हेट स्पीच का स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे, तो क्या उसमें इस्लामी कट्टरपंथियों की गिनती नहीं होती? शोएब जमई के लिए आँसू बहाने वालों को बताना चाहिए कि क्या वो उसकी विचारधारा का समर्थन करते हैं?

उदाहरण के लिए ‘ज़ेहरा कैलीग्राफी’ नामक कंपनी के CEO का ट्वीट देखिए। उसने दावा कर दिया कि मुस्लिम पक्ष की बात नहीं सुनी गई और उन्हें जलील किया गया। ज़ेहरा खुद एक महिला हैं, ऐसे में उन्हें इसका जवाब देना चाहिए कि क्या सुबुही खान मुस्लिम नहीं हैं? सुबुही खान का पक्ष ‘मुस्लिम पक्ष’ क्यों नहीं हो सकता और शोएब जमई कैसे मुस्लिमों का प्रतिनिधि बन गया? इसके लिए तो न कोई मतदान हुआ है, न ऐसी कोई घोषणा हुई है।

फिर तो मुस्लिम समाज को मतदान कर के आपस में ये निर्णय ले लेना चाहिए कि उनका आधिकारिक प्रतिनिधि कौन है और कौन नहीं। अब पत्रकार से यूट्यूबर बने अजीत अंजुम को देख लीजिए। वो शोएब जमई को ऐसे सलाह दे रहे हैं जैसे वो उनके घर के आदमी हों। अजीत अंजुम ने कह दिया कि शोएब जमई पब्लिसिटी के लिए हो रहे स्टंट का हिस्सा बन कर अपने कौम का नुकसान कर रहे, कुछ महीने उन्हें घर में बैठना चाहिए।

अजीत अंजुम ने शायद इतनी सहानुभूति और चिंता तो अपने बेटे के लिए भी नहीं जताई होगी। लोग अजीत अंजुम को कह रहे हैं कि वो शोएब जमई को भी अपनी तरह यूट्यूब चैनल बनाने की सलाह दे दें। फिर दोनों मिल कर भी प्रोपेगंडा कर सकते हैं। जहाँ अजीत अंजुम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ झूठ फैलाएँगे, वहीं शोएब जमई ISIS जैसे आतंकी संगठनों की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए हिन्दू विरोधी बातें करेंगे।

अगर सुबुही खान को मुस्लिमों या मुस्लिम महिलाओं का पक्ष रखने की अनुमति नहीं है तो फिर किसे है? राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल तेली का सिर कलम करने वाले दोनों हत्यारों को? दुनिया भर के मुस्लिम युवाओं को कट्टर बनाने के लिए वीडियो बनाने वाले इस्लामी मुबल्लिग ज़ाकिर नाइक को? या फिर पाकिस्तान में बैठे उन आतंकियों को, जो अल्लाह और जिहाद के नाम पर खून बहाते हैं? या फिर सीधे ISIS को, जिसके नाम में ही इस्लाम है।

शोएब जमई का समर्थन करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने कन्हैया लाल तेली और महाराष्ट्र के अमरावती के उमेश कोल्हे की हत्या की निंदा नहीं की थी। ये वही लोग हैं, जो ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म की निंदा करते हैं, क्योंकि हिन्दू लड़कियों के साथ ‘लव जिहाद’ करने वाले कट्टरपंथियों का वो समर्थन करते हैं। शोएब जमई के पक्ष में बयान देने वाले वही लोग हैं, जो महिला विरोधी हैं। ये नहीं चाहते कि एक मुस्लिम महिला को खुल कर अपनी बात रखने का अधिकार मिले।

शोएब जमई लगातार नफरत भरी बातें कर रहा है। वो हिंसा भरे बयान दे रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिला कर मुस्लिम PM बनाने के उसके बयान को क्या देशद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्या? ऐसे देशद्रोही के लिए लिबरल गिरोह के लोग सहानुभूति जता रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये कि न्यूज़ डिबेट्स में ऐसे व्यक्ति को बुलाया ही नहीं जाना चाहिए। किसी को नफरत फैलाने के लिए मंच देने का क्या तुक है भला?

‘मेरे हिसाब से बयान नहीं देगी तो बोटी-बोटी कर दूँगा’: नाबालिग पहलवान को पिता ने दी थी धमकी, दादा-दादी बोले- वह बालिग, बृजभूषण को फँसाया गया

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) पर पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का मामला उलझता जा रहा है। नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों से मुकरने के बाद अब उसके दादा ने कहा कि उनकी पोती बालिग है और उनके पोती के कंधे पर बंदूक रखकर चलाया जा रहा। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के खिलाफ पहलवानों का धरना सुनियोजित है।

उधर, बृजभूषण शरण सिंह से जब पत्रकारों ने इस पर प्रतिक्रिया माँगी तो उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट फाइल करने का इंतजार है। चार्जशीट फाइल होने के बाद वे बोलेंगे। वहीं, WFI की एडहॉक समिति ने मतदाता सूची एकत्र करके चुनाव कराने की दिशा में कर दिया है। WFI के चुनाव के लिए 30 जून 2023 की समय सीमा निर्धारित की गई है।

भाजपा सांसद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली नाबालिग पहलवान के दादा का कहना है कि पहलवानों का प्रदर्शन सुनियोजित रहा होगा। रिपब्लिक के अनुसार, नाबालिग के दादा ने कहा कि उनकी पोती के साथ शोषण नहीं हुआ था। बता दें कि इसके पहले नाबालिग के पिता ने भी कहा था कि उसने गुस्से में बृजभूषण सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था।

पहलवानों ने मौके का फायदा उठाया- नाबालिग के दादा

नाबालिग के दादा ने बताया, “राँची में नेशनल टूर्नामेंट में रेफरी के गलत पॉइंट देने से हमारी जीती हुई लड़की हार गई थी। इसकी शिकायत मेरे बेटे ने फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से करनी चाही थी, लेकिन वो बेटे से नहीं मिल सके। हो सकता है कि किसी काम से चले गए हों। इन सबके बीच ही धरना देने वाले पहलवानों को मौका मिल गया।”

नाबालिग के दादा ने कहा कि पहलवान साक्षी मालिक, बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट उन्हें और उनके बेटे (नाबालिग के पिता) को भी जानते थे। वे धरने पर बैठ गए। नाबालिग के दादा बोले, “उन्होंने (पहलवानों ने) कहा कि अगर पहलवानों को ऐसे ही हराना है तो इसके खिलाफ धरने पर बैठ जाते हैं। अगर ये (बृजभूषण सिंह) अध्यक्ष ही नहीं रहेगा तो कैसे हराएगा?”

बयान नहीं दोगी तो बोटी-बोटी कर देंगे- दादा

दैनिक भास्कर के अनुसार, लड़की के दादा ने कहा, “हमारी पोती बालिग है और उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। उसके पिता ने उस पर दबाव बनाया और झूठी शिकायत दर्ज करवाई है। हमने जैसे ही यह सुना कि मेरी पोती के कंधे पर बंदूक रख कर ये खेल खेला जा रहा है तो हम बेटे के घर गए। हमें अंदर नहीं जाने दिया गया और कहा गया कि अगर बेटी बयान नहीं देगी तो मैं उसके टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।”

दादा कहते हैं, “उसका पिता उसे मारता-पीटता है। जान से मारने की धमकी देता है। हम भी डरते हैं कि कहीं कोई हादसा न हो जाए, परिवार बिखर न जाए। इसलिए उसे बर्दाश्त करते हैं।” उन्होंने कहा कि पहले उनकी पोती रोज उनसे बात करती थी, लेकिन अब उसे बात करने नहीं दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी उनकी पोती कैंप में जाती थी तो वे बात करते थे और वह बेहद खुश नजर आती थी।

नाबालिग की दादी बोली, “हमारी पोती बालिग है। वो 22 फरवरी 2004 को रोहतक के कमलेश फोगाट नर्सिंग होम में पैदा हुई थी।” दादा ने कहा कि अपने बेटे को निकम्मा बताते हुए कहा कि उसने गरीबी कभी नहीं देखी। घर बेचकर पढ़ाने की बात भी उसने झूठ बोली है। वह तो बच्चे के नाम पर किए गए बीमा के पैसे तक खा गया। दादा ने यह भी बताया कि जिस बड़ी बेटी की मरने की बात उसका बेटा कहता है, वह भी झूठी है। उसकी कोई बड़ी बेटी थी ही नहीं।

धरना सुनियोजित- नाबालिग पहलवान के दादा

पहलवानों की शुरुआती माँगों का जिक्र करते हुए लड़की के दादा ने आगे कहा, “धरने के दौरान मीडिया ने पहलवानों से पूछा कि आप लोगों की माँगें क्या हैं? इन लोगों ने कहा कि हम बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा चाहते हैं। इसके अलावा लखनऊ कैंप में भी हम लोग नहीं जाएँगे, क्योंकि बृजभूषण सिंह के क्षेत्र में हमें नंबर नहीं मिलेंगे। इन लोगों ने धरने पर माँग रखी कि बृजभूषण इस्तीफा दें और टूर्नामेंट कहीं और हो।”

उन्होंने कहा कि इसके बाद पहलवानों ने धरना छोड़ दिया, लेकिन ये बातें उन्हें नहीं बताई गई। धरने पर सवाल खड़े होने लगे, आरोप लगाने लगे कि 2012 के बाद से हजारों लड़कियाँ कैंप में रहकर आ गईं, लेकिन किसी ने शिकायत नहीं की। इससे मालूम होता है कि इनका प्रदर्शन प्री-प्लान रहा होगा।

संगीता फोगाट पर बृजभूषण से समझौते का आरोप

बता दें कि शुक्रवार (8 जून 2023) को दिल्ली पुलिस पहलवान बजरंग पुनिया की पत्नी और विनेश फोगाट की बहन संगीता फोगाट को लेकर बृजभूषण शरण सिंह के सरकारी आवास पर गई थी। इसके बाद ये कयास लगाए जाने लगे कि संगीता भाजपा सांसद से मिलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करने गई हैं।

मीडिया में इस खबर को देखकर बजरंग और विनेश ने कहा था कि दरअसल पुलिस ने क्राइम सीन रिक्रिएट करने गई है। उन्होंने सांसद के लिए तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर गिरफ्तारी की माँग की। पहलवानों ने कहा कि बृजभूषण झूठा नैरेटिव मीडिया में चलवा रहे हैं।

नाबालिग के पिता ने आरोप वापस लेकर गलती सुधारने की बात कही

उधर बयान बदलने को लेकर नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा, “बेहतर है कि अब सच्चाई सामने आ जाए। अब बातचीत शुरू हो गई है। सरकार ने पिछले साल हुई मेरी बेटी की हार (एशियाई अंडर-17 चैंपियनशिप ट्रायल में) की निष्पक्ष जाँच का वादा किया है। इसलिए यह मेरा भी कर्तव्य है कि मैं अपनी गलती सुधारूँ।”

नाबालिग के पिता ने कहा कि लखनऊ में 2022 अंडर 17 एशियाई चैम्पियनशिप ट्रायल में उनकी बेटी फाइनल हार गई और भारतीय टीम में चयन से चूक गई तो वे नाराज हो गए। रेफरी के फैसले के लिए उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह को जिम्मेदार ठहराया।

नाबालिग के पिता ने कहा, “मैं गुस्से से भर गया था और फाइनल में रेफरी के फैसले के कारण मेरे बच्चे की एक साल की मेहनत बेकार चली गई थी। इसलिए मैंने बृजभूषण शरण सिंह से बदला लेने का फैसला किया।”

बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय रेफरी जगबीर सिंह ने बृजभूषण सिंह पर आरोप लगाया था कि महिलाओं के साथ बदसलूकी उनकी आँखों के सामने हुआ। उन्होंने कहा कि यह मामला इसलिए नहीं उठाया था, क्योंकि कोई भी महिला पहलवान अपनी शिकायत लेकर आगे नहीं आई थी।

1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में ₹1000 भेजेंगे CM शिवराज सिंह चौहान: मध्य प्रदेश में आतिशबाजी, दीपोत्सव और रैलियों से हो रहा फैसले का स्वागत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी जानकारी दी है कि महिलाओं के सपनों की उड़ान को नया सम्मान मिला है। मध्य प्रदेश सरकार ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना’ के तहत राज्य की महिलाओं के खाते में 1000 रुपए डाले जाएँगे। भाजपा नेताओं ने मध्य प्रदेश के लिए 10 जून, 2023 के दिन को ऐतिहासिक करार दिया है।

सीएम चौहान ने भी वीडियो जारी कर कहा, “मेरी बहनों, आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा खुशी का दिन है। मैं आज लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत एक हजार रुपए आपके खाते में डालूँगा। साथ ही सायं 6 बजे जबलपुर में आपसे प्रत्यक्ष रूप से और पूरे प्रदेश में वर्चुअल रूप से आपसे अपने दिल की बात करूँगा। आपकी खुशी, मेरा जीवन है।” बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार बच्चियों एवं महिलाओं के लिए कई योजनाएँ लेकर आ रही हैं।”

राज्य की महिलाओं ने इस दौरान रैली भी निकाली। शनिवार (10 जून, 2023) को कई जिलों में प्रभात फेरी निकाली गई। इस दौरान अधिकारीगण भी साथ रहे। टीकमगढ़ में एक मंदिर में दीपोत्सव कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। कहीं आतिशबाजी हो रही है तो कहीं सम्मेलन आयोजित कर के महिलाओं द्वारा भाजपा सरकार को धन्यवाद किया जा रहा है। वार्ड स्तर पर समारोह का टीवी के माध्यम से प्रसारण भी दिखाया जाएगा।

राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में सीएम चौहान महिलाओं के खाते में 1000 रुपए भेजेंगे। कार्यक्रम स्थल पर न सिर्फ रंगोली सजाई गई है, बल्कि गुब्बारों से भी सजावट की गई है। महिलाओ के आधार लिंक्ड ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ इनेबल्ड बैंक एकाउंट्स में प्रथम मासिक आर्थिक सहायता राशि का सिंगल क्लीक के माध्यम से भेजी जाएगी। कुल मिला कर 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में ये राशि भेजी जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक बल मिलेगा।

चल निकल यहाँ से, तेरे बाप को भी मारूँगी… महिला ने बताया न्यूज शो में ही शोएब जमई को क्यों पीटा, शहजाद पूनावाला बोले -जिस शो में वो रहेगा, मैं नहीं जाऊँगा

इस्लामी कट्टरपंथी शोएब जमाई की एक मुस्लिम महिला ने ही पिटाई कर दी, वो भी एक न्यूज़ शो में खुलेआम। ‘न्यूज़ 18′ टीवी चैनल के एक डिबेट शो में एंकर अमन चोपड़ा की मौजूदगी में अधिवक्ता सुबुही खान ने शोएब जमई की पिटाई कर दी। अमन चोपड़ा ने इस दौरान बीच-बचाव किया। बता दें कि अशोक पंडित की फिल्म ’72 हूरें’ पर बहस के दौरान शोएब जमई भड़क गए, जिसके बाद सुबुही खान ने खदेड़ कर उनकी पिटाई कर दी।

हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलने वाला शोएब जमई ‘इंडियन मुस्लिम फाउंडेशन’ का अध्यक्ष है। वहीं सुबुही खान ‘राष्ट्रीय जागरण अभियान’ की संयोजक हैं और साथ ही ‘कबीर फाउंडेशन’ की संस्थापक हैं। सुबुही खान ने शोएब जमई की पिटाई के दौरान कहा, “भाग यहाँ से। तेरी औकात क्या है।” पत्रकार अमन चोपड़ा और अन्य अतिथियों ने किसी तरह बीच-बचाव किया और शोएब जमाई को लेकर सुबुही खान से दूर लेकर गए।

सुबुही खान ने शोएब जमई को फटकारते हुए कहा, “चल निकल यहाँ से, तेरे बाप को भी मारूँगी।” बता दें कि शोएब जमई के खिलाफ दिल्ली पुलिस में भी अधिवक्ता शशांक शेखर झा द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि वो ऐसे किसी डिबेट शो का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसमें शोएब जमई हों। शोएब जमई ने हूरों और अप्सराओं की तुलना कर के हिन्दू धर्म का भी अपमान किया था।

शोएब जमई का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उसे कहते हुए सुना जा सकता है, “कसम खुदा की कह रहा हूँ, अल्लाह करे वो दिन आए कि ये देश अखंड भारत बन जाए और पाकिस्तान में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान, बांग्लादेश में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान और हिंदुस्तान में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान ये सब मिलकर जिस दिन 75 करोड़ हो जाएँगे। उस दिन हमारा ही मुसलमान प्राइम मिनिस्टर होगा और 250 से ज्यादा हमारे सांसद होंगे।”

सुबुही खान ने कहा, “सैकड़ों साल से मुस्लिम बच्चों के साथ अत्याचार हो रहा है, हमें दुख होता है। मुझे जन्नत से दिक्कत है क्योंकि वो ब्रेनवॉश के लिए इस्तेमाल हो रहा है। जिस दिन मुस्लिम बच्चा पुनर्जन्म को मान गया, उस दिन वो डरना बंद कर देगा, उस दिन उसको पता चल जाएगा कि लॉ ऑफ कर्मा होता है।” सुबुही खान ने इस डिबेट शो में इस्लामी कट्टरपंथ पर जबरदस्त प्रहार किया और शोएब जमई के प्रोपेगंडा की पोल खोली।

पेट्रोल पंप, बकरी फर्म, धर्म काँटा, गोदाम-दुकान… हिजाबी स्कूल मालिक के कई धंधे, दस्तावेजों की हो रही जाँच: दमोह के शिक्षा अधिकारी हटाए गए

मध्य प्रदेश के दमोह स्थित गंगा जमुना स्कूल में हिन्दू छात्राओं को जबरन हिजाब पहनाने और नमाज-दुआ पढ़वाने के मामले में राज्य सकार की कार्रवाई जारी है। स्कूल की मान्यता रद्द करने के बाद अब इसके संचालक इदरीश खान के धर्म काँटा, हार्डवेयर दुकान और वेयरहाउस को सील कर दिया गया है।

इदरीश खान के अलग-अलग ठिकानों पर मध्य प्रदेश शासन के 5 अलग-अलग विभागों ने शुक्रवार (9 जून 2023) को रेड डाली। इस दौरान दस्तावेज खंगाले गए और जमीनों की माप की गई। वहीं, इस मामले में दमोह के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एसके मिश्रा पर भी कार्रवाई की गई है। उन्हें पद से हटा दिया गया है।

पाँच सरकारी विभागों ने इदरीश खान के दाल मिल ‘गंगा जमना पल्स’ में कृषि मंडी, वन विभाग, नाप-तौल विभाग, खनन विभाग और जीएसटी विभागों ने छानबीन की। इन विभागों के लगभग 24 अधिकारी फुटेरा मोहल्ला स्थित मिल पर पर पहुँचे। GST विभाग ने खरीद-बिक्री के दस्तावेजों को जाँच की।

GST अधिकारियों का कहना है कि पल्स मिल के दस्तावेजों की जाँच की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि टैक्स जमा किया है या नहीं, टर्नओवर दिखा रहे हैं कि नहीं? मंडी में जो जानकारी दी जा रही है, वह विभाग को भी दी जा रही है कि नहीं? बताया जा रहा है कि यहाँ से दालें सऊदी अरब सहित कई मुस्लिम देशों में भेजी जाती हैं।

वहीं, धरमपुरा नाके पर बने इदरीश के गंगा जमुना हार्डवेयर पर भी GST विभाग की टीम ने छापामारी की। जाँच के बाद हार्डवेयर दुकान को सील कर दिया गया। वहीं, जिस वेयरहाउस में तेंदू पत्ता रखा जाता था, उस गोदाम में अनियमितता मिलने पर वन विभाग की टीम ने सील कर दिया है।

घंटाघर के पास गाँधी चौक पर स्थित गंगा जमना शोरूम पर भी जीएसटी विभाग ने छापामारी की। यहाँ पर भी दस्तावेजों की छानबीन की गई। इदरीश के इस शोरूम में सिर्फ ब्रांडेड कपड़ों की बिक्री होती है।

नाप-तौल विभाग की जाँच टीम इदरीश के दमोह-जबलपुर रोड पर मारूताल चौराहे पर स्थित गंगा जमना धर्म काँटा पर पहुँची। पुलिस की मौजूदगी में विभाग के अधिकारियों ने दस्तावेजों को खँगाला और उसके बाद धर्म काँटा को सील कर दिया है। यहाँ पर खनन विभाग ने भी जाँच की।

खनन विभाग इदरीश खान के पेट्रोल पंप पर भी जाँच करने के लिए पहुँची। यह पेट्रोल पंप हाल ही में बना है। हालाँकि, इसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ है। यह पेट्रोल पंप दमोह-हटा मार्ग पर शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर मानपुरा गाँव के पास बना है। पेट्रोल पंप के पीछे बहुत बड़ा बकरी फॉर्म है। इसकी भी जाँच की गई।

माइनिंग विभाग ने भी इदरीश और उसके परिवार की जमीनों की जाँच शुरू की है। दमोह-कटनी बायपास रोड पर पीएम आवास योजना के मकानों के सामने इदरीश के परिवार की काफी जमीन है, जिसकी नापी की गई। जमीनों की जाँच के लिए खनन विभाग के अधिकारी जबलपुर और भोपाल से आए थे।

जिसे पत्रकार बता कर स्मृति ईरानी को घेर रही थी कॉन्ग्रेस, उससे ‘दैनिक भास्कर’ ने झाड़ा पल्ला: कहा – विपिन यादव से हमारा कोई संबंध नहीं

कॉन्ग्रेस पार्टी ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का एक वीडियो ट्विटर पर डाल कर उन पर निशाना साधा है। इस वीडियो में खुद को ‘दैनिक भास्कर’ का पत्रकार बता कर एक व्यक्ति स्मृति ईरानी से बहस करने लगता है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने दावा कर डाला कि स्मृति ईरानी पत्रकार को धमका रही हैं। साथ ही लिखा कि पत्रकार ने पूछ दिया होगा कि चीनी 13 रुपए किलो कब होगी, गैस सिलिंडर के दाम कम कब होंगे, बेटियों के अत्याचार पर चुप क्यों हैं?

हालाँकि, ‘दैनिक भास्कर’ ने साफ़ कर दिया है कि उक्त पत्रकार उसका नहीं है। मीडिया संस्थान ने कॉन्ग्रेस को जवाब देते हुए कहा, “केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और एक पत्रकार के बीच बहस का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें विपिन यादव नाम को जो पत्रकार खुद को ‘दैनिक भास्कर’ (डीबी कॉर्प) का रिपोर्टर बता रहा है, वह गलत है। अमेठी लोकसभा के इस क्षेत्र में दैनिक भास्कर का कोई स्थायी पत्रकार कार्यरत नहीं है।”

मीडिया संस्थान ने आगे कहा कि अमेठी में ‘दैनिक भास्कर’ अपने स्ट्रिंगर नेटवर्क से खबरें देता है, लेकिन विपिन यादव भास्कर के स्ट्रिंगर भी नहीं है। बता दें कि कॉन्ग्रेस ने वीडियो भी झूठा दावा करते हुए वीडियो डाला है। वीडियो में स्मृति ईरानी धमकी देती हुई नहीं दिख रही हैं, बल्कि उस व्यक्ति को कह रही हैं कि वो अमेठी क्षेत्र की जनता का अपमान न करे। वीडियो में वो कहती हैं, “मैं बहुत प्यार से आपसे निवेदन कर रही हूँ।”

स्मृति ईरानी ने भी कॉन्ग्रेस पार्टी के इस वीडियो पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “हे दिव्य प्राणी, धन्य हूँ पुनः दर्शन पाकर। अमेठी की जनता से बदतमीजी ना करें – ये अनुरोध था जो शायद आप ना समझे। आप अमेठी की जनता का अपमान सह सकते हैं, मैं नहीं। जहाँ तक सवालों का विषय है तो बताएँ पूर्व सांसद से कब डिबेट करनी है? चीनी क्या, आटे दाल का भी भाव बता दूँगी” इससे पहले स्मृति ईरानी राहुल गाँधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले दावे पर भी निशाना साध चुकी हैं।

जलील हनीफ के दरवाजे पर आई दो बारात, DJ पर डांस को लेकर चले ईंट-पत्थर: निकाह से पहले UP के बाराबंकी में मारपीट का Video वायरल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक निकाह समारोह के दौरान DJ पर डांस करने को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान एक-दूसरे पर लाठी-डंडे, ईंट पत्थर सहित जो भी मिला, बरसाया गया। अचानक हुई इस घटना से भगदड़ मच गई। मारपीट में 15 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घटना बदोसराय थाना क्षेत्र के हजरतपुर गाँव का है। यहाँ शुक्रवार को हनीफ और जलील की बेटियों की शादी थी। एक बरात टिकैतनगर थाना के खेमापुर गाँव से और दूसरी बरात सफदरगंज थाना के सैदनपुर गाँव से आई थी। दोनों बरातों में बराती डीजे पर डांस करते हुए करते हुए जा रहे थे। इसी दौरान गाँव के एक रास्ते पर बरातियों ने एक दूसरे को क्रॉस किया।

डांस में खलल होने पर दोनों बराती भड़क गए। पहले उनमें धक्का-मुक्की हुई, फिर देखते-देखते लाठी-डंडे चलने लगे। इस बीच दोनों तरफ के लोगों ने जमकर पथराव भी किया। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान जब लाठी-डंडे टूट गए तो बराती आसपास की झाड़ियों को उखाड़कर और पेड़ों की टहनियाँ तोड़कर एक-दूसरे पर बरसाने लगे।

इस घटना का कुछ लोगों ने वीडियो बना लिया, जो अब वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद मामला एसपी के संज्ञान में आया। इसके बाद एसपी ने मामले की जाँच का आदेश दे दिया है। इस मामले में FIR दर्ज करके पुलिस जाँच कर रही है।