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महाभारत के शकुनि मामा का निधन, एक्टर बनने से पहले सेना में रहे: चीन बॉर्डर पर थी तैनाती, रामलीला में बनते थे सीता-स्कूटर से रावण ने कर लिया था ​हरण

बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में शकुनि मामा का किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता गुफी पेंटल (Gufi Paintal) का सोमवार (5 जून 2023) सुबह निधन हो गया। 78 वर्षीय अभिनेता को दिल और किडनी संबंधी बीमारी थी। वह पिछले दो हफ्तों से मुंबई के अंधेरी स्थित अस्पताल में भर्ती थे। गुफी के भतीजे और एक्टर हितेन पेंटल ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर उनके निधन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ओशिवारा श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक हफ्ते पहले गुफी की तबीयत बिगड़ी थी। उस वक्त वह फरीदाबाद में थे। पहले उन्हें फरीदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर ज्यादा तबीयत खराब होने पर उन्हें मुंबई लाया गया था।

हितेन पेंटल की इंस्टाग्राम स्टोरी

एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले गुफी पेंटल सेना में थे। उनका असली नाम सरबजीत सिंह पेंटल था। वह भारत-चीन सीमा पर रामलीला किया करते थे। दिलचस्प बात यह है कि गुफी रामलीला में सीता का किरदार निभाते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि भारत-चीन के बीच हुए 1962 युद्ध के दौरान वह आर्मी में थे। युद्ध के दौरान कॉलेज में सेना के लिए सीधी भर्तियाँ हो रही थीं। वह यहाँ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। गुफी हमेशा से सेना में जाना चाहते थे। उनकी पहली पोस्टिंग चीन बॉर्डर पर आर्मी आर्टिलरी में हुई थी।

अभिनेता ने बताया था कि उस वक्त बॉर्डर पर एंटरटेनमेंट के लिए टीवी और रेडियो नहीं होता था। ऐसे में सेना के जवान अपने एंटरटेनमेंट के लिए रामलीला करते थे। उस दौरान वह सीता का किरदार निभाया करते थे और रावण का रोल करने वाला स्कूटर पर उनका अपहरण करता था। उन्हें एक्टिंग का भी बहुत शौक था। रामलीला करते हुए इससे उन्हें कुछ ट्रेनिंग भी मिल गई थी।

बता दें कि बीआर चोपड़ा की महाभारत में गुफी पेंटल पहले कास्टिंग डायरेक्टर थे। उन्होंने शकुनि के रोल के लिए तीन लोगों को चुना था। इस दौरान महाभारत की स्क्रिप्ट लिख रहे राही मासूम रजा की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने उन्हें शो में शुकनि का किरदार निभाने की सलाह दी। इसके लिए वह राजी हो गए। शकुनि के किरदार से एक्टर ने घर-घर में अपनी पहचान बनाई। गुफी पेंटल ने महाभारत के अलावा कानून, ओम नम: शिवाय, सीआईडी और जय कन्हैया लाल की जैसे कई टीवी शोज में काम किया था।

घर के बाहर कर दी गई थी अवधेश राय की हत्या, 32 साल बाद मुख्तार अंसारी को उम्रकैद: ₹1 लाख जुर्माना भी, सजा कम करने के लिए गिड़गिड़ाता रहा माफिया

32 साल पुराने अवधेश राय मर्डर केस में माफिया मुख्तार अंसारी को आज (5 जून 2023) वाराणसी की एमपी-एमएलए अदालत ने दोषी करार दिया। इस केस में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने माफिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया। एक अन्य धारा के तहत कोर्ट ने उसपर अलग से 20 हजार रुपए का फाइन ठोंका है। अगर मुख्तार ये राशि नहीं जमा कराता तो उसके ऊपर 6 महीने की और सजा मिलेगी।

जानकारी के अनुसार, मुख्तार की सजा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुकर्रर हुई। इस दौरान उसने खुद को बेगुनाह बताया और अपनी उम्र का हवाला देकर कम सजा देने की अपील की।

मालूम हो कि गैंग्सटर मुख्तार के ऊपर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें उसे चार मामलों में सजा मिली है। अवधेश हत्याकांड में मिली सजा उसके लिए अब तक की सबसे बड़ी सजा मिली है।

उल्लेखनीय है कि अवधेश राय की हत्या का मामला 32 साल पुराना है। वाराणसी के चेतगंज थाना इलाके के लहुराबीर इलाके में 3 अगस्त 1991 की सुबह अवधेश को मारा गया था। घटना के वक्त अवधेश अपने छोटे भाई के घर के बाहर खड़े थे। तभी, वहाँ एक मारूती वैन आई और उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं गईं थी।

घटना के बाद पूर्व विधायक अजय राय ने चेतगंज थाने में मुख्तार अंसारी, भीम सिंह, कमलेश सिंह, राकेश के साथ पूर्व एमएलए अब्दुल कलाम पर एफआईआर दर्ज कराई थी। इन पाँच आरोपितों में से अब्दुल और कमलेश की मौत हो चुकी है।

वहीं अवधेश के छोटे भाई अजय आज के समय में कॉन्ग्रेस नेता हैं। इस फैसले के आने से पहले अजय राय ने कहा, “32 साल का इंतजार आज खत्म हो रहा है। उन्हें उम्मीद है कि उनको न्याय मिलेगा।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले साल 2022 में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को गाजीपुर की अदालत ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। कुल मामलों की सुनवाई में कॉन्स्टेबल रघुवंश सिंह और गाजीपुर के ASP सहित कई लोगों की हत्या शामिल थी।

बिहार में सालभर में गिरे हैं 7 पुल, भागलपुर हादसे के बाद से एक लापता: बोले CM नीतीश कुमार- ठीक से नहीं बना रहा है तभी न गिर जा रहा है

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बन रहा पुल 4 जून 2023 को भरभरा कर गिर गया था। 1700 करोड़ की लागत से बन रहा यह पुल एक साल के भीतर दूसरी बार गिरा है। इस घटना के बाद से एक सुरक्षाकर्मी लापता है। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि सही तरीके से निर्माण नहीं होने के कारण यह पुल बार-बार गिर रहा है।

दरअसल, भागलपुर और खगड़िया जिलों को जोड़ने के लिए अगुवानी व सुल्तानगंज के बीच यह पुल बनाया जा रहा है। रविवार (4 जून 2023) को हुए हादसे के दौरान देखते ही देखते चंद सेकेंड के भीतर पुल जमीदोंज हो गया। निर्माणाधीन पुल के 10वे, 11वें और 12वें पाये का पूरा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया। हादसे के बाद से पुल बना रही एसपी सिंगला कंपनी का एक गार्ड लापता है। गार्ड की तलाश में NDRF और SDRF की टीमें जुटी हुईं हैं। 

क्या बोले नीतीश कुमार

पुल गिरने को लेकर नीतीश कुमार ने कहा है,  “हमने इसे 2012 में बनाने का फैसला किया था। लेकिन 2014 में यह बनना शुरू हुआ। जिसको भी ठेका दिया है वह इतना लेट काम क्यों कर रहा है? 1 साल पहले जब यह पुल गिर गया था तब भी हमने कहा था। अब कल यह फिर गिर गया। इसलिए हमने विभाग के लोगों को कहा है कि देखिए और कार्रवाई कीजिए। ये कोई तरीका नहीं है। अब तक यह बन जाना चाहिए था। इतना देर क्यों हो रहा है? मुझे बहुत तकलीफ हुई है। इसे ठीक से नहीं बना रहा है, तभी ने यह बार-बार गिर जा रहा है।”

बता दें कि 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस पुल को सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी यह पुल 27 अप्रैल 2022 को तेज आँधी और बारिश के चलते ढह गया था। हालाँकि बिहार में पुल टूटने की घटना पहली बार नहीं हूई है। आँकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक साल में राज्य में 7 बार पुल गिरने की घटनाएँ हो चुकीं हैं।

इसी साल बीते महीने 16 मई को बिहार के पूर्णिया जिले में एक निर्माणाधीन पुल कंक्रीट पड़ने के महज चार घंटे बाद ही ढह गया था। इससे पहले 19 मार्च 2023 को राज्य के सारण जिले में अंग्रेजों के जमाने का एक सड़क पुल गिरने से दो लोग घायल हो गए थे। वहीं, 19 फरवरी 2023 को पटना जिले के बिहटा सरमेटा में एक निर्माणाधीन पुल गिर गया था। इस साल की शुरुआत यानी कि 16 जनवरी 2023 को दरभंगा जिले के कुशेश्वर में ओवरलोड ट्रक के कारण लोहे का पुल गिर गया था।

इससे पहले 18 नवंबर 2022 को बिहार के नालंदा जिले के वेना में एक निर्माणाधीन फोरलेन सड़क पुल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसी प्रकार की घटना 9 जून 2022 को बिहार के सहरसा जिले के सिमटी बख्तियारपुर में हुई। यहाँ पुल का एक हिस्सा गिरने से तीन मजदूर घायल हो गए थे। वहीं, 20 मई 2022 को पटना में अत्यधिक बारिश के चलते 136 साल पुराना पुल ढह गया था।

‘बौद्ध’ बनकर शादीशुदा इमरान ने महिला कॉन्स्टेबल के साथ किया ‘लव जिहाद’, IPL खेलने वाले भाई मोहसिन खान ने किया अप्राकृतिक सेक्स

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लव जिहाद (Love Jihad) का मामला सामने आया है। यहाँ शिवकुटी थाने में तैनात महिला पुलिसकर्मी (Women Police Constable) ने इमरान खान पर बौद्ध धर्म अपनाकर धोखे से उससे शादी करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि शादी के बाद से इमरान और उसका परिवार उस पर जबरन इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहे हैं।

पीड़िता ने अपने ससुर मुल्तान, देवर मोहसिन खान पर भी अप्राकृतिक यौन शोषण और रेप का मुकदमा दर्ज कराया है। मोहसिन खान क्रिकेटर है और इस बार आईपीएल में ‘लखनऊ सपुर जायंट्स’ के लिए खेला चुका है। आरोपित महिला पुलिसकर्मी के साथ उसी के विभाग में पुलिस कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात है।

पीड़िता वाराणसी की रहने वाली है। उसने रोते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। महिला पुलिसकर्मी ने मीडियाकर्मी से बताया, “इमरान खान शादी के बाद से उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहा है। उसने उसका नाम जायरा बानो रख दिया था और कहता था जब तक तुम निकाह नहीं करोगी, हमारी शादी वैध नहीं मानी जाएगी। उसकी पहली बीवी उसके साथ रहती है और उसने मुझे एफिडेविट भिजवाकर कहा था कि मेरा इससे तलाक हो गया है। मैंने इस मामले से जुड़े सभी साक्ष्य विवेचक को दिए हैं। इसके बाद भी थाने में कोई भी मेरी सुनवाई करने को तैयार नहीं है। मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है। मैं रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने जा रही थी, लेकिन मेरी दोस्त ने मुझे बचा लिया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता की शिकायत पर 23 फरवरी, 2023 में ही आरोपित इमरान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया था। लेकिन, पीड़िता का आरोप है कि विवेचक मामले में आरोपित से मिले हुए हैं, जिसके चलते इमरान खान पर एससी/सिटी की धाराएँ नहीं लगाई गई हैं। यही नहीं आरोपित के भाई और अब्बा का नाम भी उन लोगों (विवेचक) ने हटा दिया है।

पीड़िता के मुताबिक, 2016 में वह ट्रेनिंग के लिए मुरादाबाद गई थी, जहाँ उसकी मुलाकात पुलिस लाइन में तैनात पुलिस कांस्टेबल इमरान खान से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियाँ बढ़ गई। इसके बाद 2018 में इमरान खान ने बौद्ध धर्म अपनाकर उससे वाराणसी में शादी कर ली। शादी के बाद इमरान उस पर धर्म परिर्वतन का दबाव बनाने लगा। उसने कहा कि अगर उसे उसके साथ रहना है तो मुस्लिम बनना पड़ेगा।

महिला पुलिसकर्मी ने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे बताया, “उसने केवल मुझे फँसाने के लिए बौद्ध धर्म अपनाया था। इस साजिश में उसका पूरा परिवार शामिल है। बौद्ध धर्म अपनाने के बाद भी वो हर मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए जाता है। वो मुझे अजमेर और बाराबांकी की मस्जिद में लेकर गया। 2019 में मैं इमरान के घर एक फंक्शन में गई थी, जहाँ उसके भाई मोहसिन ने रात में मेरे साथ रेप किया।” पीड़िता का तीन साल का एक बच्चा भी है। इमरान ने बच्चे का खतना कराने का प्रयास किया था, लेकिन जब उसे यह पता चला तो उसने इसका विरोध किया। महिला ने इमरान खान और उसके घर वालों पर कठोर कार्रवाई करने की माँग की है।

इस मामले में एसीपी शिवकुटी राजेश यादव ने बताया कि यह मामला पति-पत्नी के बीच आपसी झगड़े का है। इमरान खान पहले से शादीशुदा है। उसने अपनी पहली बीवी से इस्लाम के अनुसार निकाह किया था, जिसके चलते इस मामले में कई तकनीकी खामियाँ हैं। जाँच पूरी होने के बाद ही इस मामले में कोई कार्रवाई होगी। वहीं, डीसीपी दीपक भूकर ने मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने महिला को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी ​कहा है कि केस के विवेचक अब पीड़िता के दिए गए साक्ष्यों को अपनी विवेचना में शामिल करेंगे।

ट्रेन दुर्घटना पर कॉन्ग्रेस की राजनीति: जिस ट्रैक का भारतीय रेलवे से लेना-देना नहीं, उसके लिए कह रही- रेल मंत्री जवाब दो

ओडिशा के बालासोर में हुई रेल दुर्घटना के बाद विपक्ष लगातार केंद्र पर निशाना साधने के तरीके खोज रहा है। ऐसे में खबर आई कि बरगढ़ जिले में भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी। मगर राजनीति करने वालों ने इसे शेयर कर करके भारतीय सरकार और भारतीय रेलवे पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए जबकि हकीकत कुछ और थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा बरगढ़ जिले में मेंधापाली के पास एसीसी के रेलवे ट्रैक पर हुआ। यहाँ मालगाड़ी डूँगरी चूना पत्थर खदान से एसीसी सीमेंट फैक्ट्री जा रही थी। इसी दौरान फैक्ट्री परिसर के भीतर मालगाड़ी के 5 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस घटना के पीछे वजह बताई जा रही है कि भारी वजन के चलते ये डिब्बे पलटे। लेकिन कोरोमंडल एक्सप्रेस के साथ हुए हादसे की आड़ में कुछ लोग इसे लेकर भी भारतीय रेलवे का दोष बताने लगे। हालाँकि सच यह है कि जिस ट्रैक पर मालगाड़ी पटरी से उतरी उसका रख-रखाव इंडियन रेलवे करता ही नहीं है बल्कि यह एसीसी के स्वामित्व वाली नैरोगेज रेल लाइन है।

इस घटना पर ईस्ट कोस्ट रेलवे ने एक बयान जारी कर कहा है, “ओडिशा में बरगढ़ जिले के मेंधापाली के पास एक निजी सीमेंट फैक्ट्री द्वारा संचालित मालगाड़ी के कुछ डिब्बे फैक्ट्री परिसर के अंदर पटरी से उतर गए। इस मामले में रेलवे की कोई भूमिका नहीं है। यह पूरी तरह से एक निजी सीमेंट कंपनी की नैरो गेज साइडिंग है। इसमें कंपनी द्वारा ही रोलिंग स्टॉक, इंजन, वैगन, ट्रेन ट्रैक सहित सभी बुनियादी ढाँचे का रखरखाव किया जाता है।”

बता दें कि शुक्रवार (2, जून 2023) शाम करीब 6:55 मिनट पर ओडिशा के बालासोर जिले के महानगा गाँव के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरियों से उतर गई थी। इसके बाद वह ट्रेन लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी से टक्कर होने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे बगल वाली पटरी पर चले गए। इस पटरी पर दूसरी दिशा से यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन आ गई और कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बों में जाकर टकरा गई।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव बना हादसे की वजह…

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार (4, जून 2023) को एएनआई से हुई बातचीत में कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण यह हादसा हुआ। रेलवे कमिश्नर ने इस पूरे मामले की जाँच की है। जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद सारी चीजें स्पष्ट हो जाएँगीं। जाँच रिपोर्ट के बाद हादसे के आरोपित भी सामने आ जाएँगे।

ज्ञात हो कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के माध्यम से ट्रेन का ट्रैक तय किया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो ट्रेन किस पटरी से जाएगी और कहाँ उसकी पटरियों में बदलाव होगा यह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से ही तय होता है। इस सिस्टम का उद्देश्य यह है कि किसी भी ट्रेन को तब तक आगे बढ़ने नहीं दिया जाता, जब तक इस बात की पुष्टि न हो जाए कि आगे की पटरियाँ या रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है।

नेपाल में बढ़ गई मुस्लिमों और ईसाइयों की आबादी, घटे हिंदू और बौद्ध: जनगणना के नए आँकड़े आए, नेपाली-मैथिली सबसे ज्यादा बोलते हैं लोग

नेपाल में जातियों और विभिन्न जनजातियों की संख्या 142 के पार चली गई है। 2021 में हुई जनगणना के विवरण अब सामने आए हैं, जिसमें ये पता चला है। 2011 में हुई जनगणना में जातियों एवं जनजातियों की संख्या 125 थी। नेपाल के ‘National Statistics Office’ ने ये आँकड़े जारी किए हैं। इसे पहले ‘सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स’ के नाम से जाना जाता था। नेपाल की जातियों, भाषा और धर्मों को लेकर सवालों का भी संस्था ने जवाब दिया है। नेपाल में 2.367 करोड़ हिन्दू हैं, जबकि मुस्लिम 23.945 लाख।

नेपाल में छेत्री समाज की जनसंख्या 16.45% है, जबकि पहाड़ी ब्राह्मण 11.29%, मगार 6.9%, तमांग 5.62% और बिश्वकर्मा 5.04% हैं। नेपाल में फ़िलहाल 124 भाषाएँ बोली जा रही हैं और धर्मों/मजहबों की संख्या 10 है। इनके अलावा 12 ऐसी भाषाएँ भी हैं जिन्हें ‘अन्य’ में रखा गया है, ये विदेशी हैं। साथ ही 13 नई भाषाओं को भी जगह दी गई है। पिछली जनगणना में नेपाल में 123 भाषाओं के मौजूद होने की बात पता चली थी।

नेपाल में 44.8% लोग नेपाली बोल रहे हैं, जबकि 11.05% लोगों की भाषा मैथिली है। जबकि 6.24% लोग भोजपुरी बोलते हैं। इसी तरह थारू 5.88%, तमांग 4.88%, बज्जिका 3.89% और अवधि 2.96% लोगों की भाषा है। जहाँ तक धर्मों की बात है, नेपाल में अभी भी 81.19% हिन्दू हैं। 8.21% अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म दूसरे नंबर पर आता है। इस्लाम यहाँ भी पाँव पसार रहा है और मुस्लिमों की जनसंख्या 5.09% हो गई है।

नेपाल में 3.17% किरात, 1.76% ईसाई, 0.35% प्राकृत और 0.23% बॉन के अलावा मात्र 0.01% ही जैन समाज के लोग हैं। 2011 में हिन्दुओं की जनसंख्या 81.3% थी, अर्थात हिन्दुओं की जनसंख्या 0.19% कम हुई है। वहीं बौद्ध समाज जनसंख्या का 9% हिस्सा था, इस हिसाब से बौद्धों की संख्या भी 0.79% कम हुई है। वहीं मुस्लिमों की जनसंख्या 0.69% बढ़ गई है, क्योंकि वो 2011 में 4.4% हुआ करते थे। ईसाई पहले 0.5% ही थे, जो अब 1.26% ज़्यादा हो गए हैं।

अवधेश राय की हत्या में मुख्तार अंसारी दोषी करार, 32 साल पहले कॉन्ग्रेस नेता के भाई को घर के बाहर मारी गई थी गोली: 2 आरोपित की हो चुकी है मौत

वाराणसी की एमपी एमएलए कोर्ट ने माफिया मुख्तार अंसारी को अवधेश राय मर्डर केस में दोषी करार दिया है। ये मामला 32 साल पुराना है। केस में मुख्तार समेत 5 लोग आरोपित थे।

बता दें कि अवधेश राय की हत्या वाराणसी के चेतगंज थाना इलाके के लहुराबीर इलाके में 3 अगस्त 1991 की सुबह हुई थी। घटना के वक्त अवधेश अपने छोटे भाई के घर के बाहर खड़े थे। तभी, वहाँ एक मारूती वैन आई और उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं गईं थी।

घटना के बाद पूर्व विधायक अजय राय ने चेतगंज थाने में मुख्तार अंसारी, भीम सिंह, कमलेश सिंह, राकेश के साथ पूर्व एमएलए अब्दुल कलाम पर एफआईआर दर्ज कराई थी। इन पाँच आरोपितों में से अब्दुल और कमलेश की मौत हो चुकी है।

वहीं अवधेश के छोटे भाई अजय आज के समय में कॉन्ग्रेस नेता हैं। इस फैसले के आने से पहले अजय राय ने कहा, “32 साल का इंतजार आज खत्म हो रहा है। उन्हें उम्मीद है कि उनको न्याय मिलेगा।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले साल 2022 में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को गाजीपुर की अदालत ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। कुल मामलों की सुनवाई में कॉन्स्टेबल रघुवंश सिंह और गाजीपुर के ASP सहित कई लोगों की हत्या शामिल थी।

उससे पहले मुख्तार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 21 सितंबर 2022 को जेलर एसके अवस्थी पर पिस्टल तानने और उन्हें धमकाने के मामले में दोषी करार देते हुए 7 साल कैद की सजा सुनाई थी।

23 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने साल 1999 के एक मामले में मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। अंसारी को 5 साल की सजा सुनाने के साथ-साथ कोर्ट ने 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था। जेल अधीक्षक रमाकांत तिवारी की 4 फरवरी 1999 को हत्या कर दी गई थी।

उत्तराखंड का गाँव, 5 लोगों का परिवार, डेढ़ कमरे का घर… 51+ स्कूलों में लॉन्च हुआ ‘अजय टू योगी आदित्यनाथ’ ग्राफिक नॉवेल, अमेज़न पर बेस्टसेलर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 51वें जन्मदिन के अवसर पर 51 से भी अधिक स्कूलों ने बुक लॉन्च कर ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया है। इस पुस्तक का नाम है ‘अजय टू योगी आदित्यनाथ’, जो यूपी सीएम के जीवन पर लिखा गया ग्राफिक उपन्यास है। इसने अब ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ बना दिया है। प्रसिद्ध लेखक शांतनु गुप्ता, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दो बेस्टसेलर शीर्षक लिखे हैं, ने युवा पाठकों के लिए अपना नया ग्राफिक उपन्यास – ‘अजय टू योगी आदित्यनाथ’ लॉन्च किया।

योगी आदित्यनाथ के 51वें जन्मदिन 5 जून को उत्तर प्रदेश के 51+ स्कूलों में ग्राफिक उपन्यास लॉन्च किया गया। लेखक शांतनु गुप्ता लखनऊ के ‘सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल’ में सैकड़ों बच्चों सहित कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद, विधायक राजेश्वर सिंह, तूलिका रानी व अन्य अतिथियों के साथ उपस्थित थे। योगी सरकार में युवा शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी वीडियो के माध्यम से अपना संदेश भेजा। साथ ही इस रिकॉर्ड लॉन्च में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के 51+ स्कूलों में 5000 से अधिक बच्चों ने किताब लॉन्च की।

यह पहली बार था कि एक किताब को कई स्थानों पर एक साथ इतने प्रतिभागियों के साथ लॉन्च किया गया, और वो भी बच्चे। इस व्यापक लॉन्च ने ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ क़ायम किया। जब ऑपइंडिया ने लेखक शांतनु से संपर्क किया, तो उन्होंने अपने नए ग्राफिक उपन्यास के बारे में बारीक जानकारी साझा की। शांतनु ने बताया कि ‘अजय से योगी आदित्यनाथ तक’ उत्तराखंड के सुदूर गाँव में पैदा हुए एक युवा लड़के अजय सिंह बिष्ट की यात्रा है।

उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट एक जूनियर वन अधिकारी थे और माता सावित्री देवी एक गृहिणी थीं। अजय को बचपन से ही परिवार की गायों की देखभाल करने, स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियाँ सुनने और स्कूल की बहस में भाग लेने का शौक था। वे सभी आज के उत्तराखंड में पंचूर नाम के एक सुदूर गाँव में डेढ़ कमरे के घर में रहते थे। यहीं से आगे चलकर अजय गोरखनाथ मठ के महंत बने, भारत की संसद के सबसे कम उम्र के सदस्य और भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

लेखक ने आगे कहा कि ‘अजय टू योगी आदित्यनाथ’ हर छात्र के अनुसरण करने और प्रेरणा लेने के लिए धैर्य, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की कहानी है। शांतनु गुप्ता ने बताया कि वह इस कहानी को उन प्रेरक क़िस्सों व उपाख्यानों के माध्यम से बता रहे हैं, जिन्हें उन्होंने अलग-अलग लोगों के साथ अपनी बातचीत के दौरान सुना और आलेखित किया। ये वो लोग हैं जो योगी आदित्यनाथ के जीवन का वर्षों तक हिस्सा रहे।

इनमें उनके पिता दिवंगत आनंद सिंह बिष्ट, उनकी माँ सावित्री देवी, पंचूर गाँव के उनके दोस्त, कोटद्वार और ऋषिकेश में उनके कॉलेज के सहपाठी और शिक्षक और उनके साथ के विभिन्न साथी संत और नेता शामिल हैं। लेखक ने कहा कि वो उन सभी को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ की जीवन-कथा को आप सभी के सामने लाने में उन्हें सक्षम बनाया। इस ग्राफिक उपन्यास का प्रत्येक पृष्ठ एक विस्तृत साहित्यिक और कलात्मक यात्रा से गुजरा है।

उन्होंने बताया, “पहले मैंने अपने प्राथमिक शोध के आधार पर सभी पृष्ठों को स्टोरीबोर्ड किया। संवादों के साथ, मैंने संभावित लेआउट का भी सुझाव दिया। वहाँ से कलाकारों ने काम शुरू किया। पहले कलाकार ने पेज लेआउट के अनुमान के लिए रफ थंबनेलिंग की, फिर सावधानीपूर्वक पेंसिल आर्ट वर्क किया – जो एस पुस्तक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, फिर उसकी बाउंड्री की, पैनलिंग की, संवाद जोड़े और फिर उसे रंगों से भरा।”

टीम के सदस्यों के बीच प्रत्येक पैनल, प्रत्येक पृष्ठ, और प्रत्येक संवाद के लिए विस्तृत समीक्षा और फीडबैक लूप चलते रहे। साहित्य प्रेमियों के लिए, शांतनु ने विस्तृत साहित्यिक और कलात्मक यात्रा के बारे में बताया, जिससे ग्राफिक उपन्यास पिछले एक साल में गुजरा है। पहले लेखक ने अपने प्राथमिक शोध के आधार पर सभी पृष्ठों की स्टोरीबोर्डिंग की। संवादों के साथ-साथ उन्होंने कलाकारों को संभावित रूपरेखा का सुझाव दिया।

फिर इसके बाद कलाकारों और डिजाइनरों की टीम – नितेश कुशवाहा, आकाश जायसवाल और पल्लवी सक्सेना ने काम संभाला। पहले कलाकारों ने पृष्ठ लेआउट के अनुमान के लिए थंबनेलिंग की, फिर उन्होंने सावधानीपूर्वक पेंसिल कला का काम किया, फिर उन्होंने इसे बाउंड्री दी, पैनलिंग की, संवाद जोड़े और फिर रंग। टीम के सदस्यों के बीच प्रत्येक पैनल, प्रत्येक पृष्ठ और प्रत्येक संवाद के लिए विस्तृत समीक्षा और फीडबैक लूप चलाए पुस्तक को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए पुस्तक के अंत में योगी आदित्यनाथ पर कई पहेलियाँ और खेल भी हैं।

पुस्तक में क्यूआर कोड पाठकों को एक वेबसाइट पर ले जाएगा, जहाँ युवा पाठक योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के बारे में अधिक जानने के लिए 100+ गेम और पहेलियाँ खेल सकते हैं। इस रिकॉर्ड लॉन्च में उत्तर प्रदेश के सभी चार क्षेत्रों – वेस्ट यूपी, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र के स्कूल शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के अग्रणी स्कूल जैसे लखनऊ और खुशीनगर से जयपुरिया स्कूल, गाजियाबाद से दिल्ली पब्लिक स्कूल और विद्या बाल भवन, वाराणसी से सनबीम स्कूल और सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, प्रयागराज से सेंट जोसेफ स्कूल, जेपी इंटरनेशनल स्कूल, सर्वोत्तम और गौतम से मानव रचना बुध नगर, आरएनएस वर्ल्ड स्कूल झांसी, केएल इंटरनेशनल और मेरठ से आईआईएमटी स्कूल, बुलंदशहर से अल्पाइन पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरनगर से माउंट लिटेरा जी स्कूल, गोरखपुर से अभ्युदय पब्लिक स्कूल, बहराइच से गुरु कृपा स्कूल, अयोध्या से टिनी टीओटीएस कुछ नाम हैं। स्कूलों की लंबी सूची, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन मनाया।

पूर्व में शांतनु गुप्ता ने योगी आदित्यनाथ पर दो बेस्टसेलिंग टाइटल लिखे हैं- ‘द मोंक हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ और ‘द मॉन्क हू ट्रांसफॉर्मेड उत्तर प्रदेश’। अब उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के लिए यूपी के मुख्यमंत्री पर एक प्रेरणादायक ग्राफिक उपन्यास लिखा है- ‘अजय टू योगी आदित्यनाथ’। किताब पहले से ही अमेज़न पर बेस्टसेलर में रैंकिंग कर रही है।

अमेरिका जाकर राहुल ने गाँधी-नेहरू से लेकर बोस तक को बना दिया NRI: कहा- विदेश से लौटे लोगों ने बनाया आधुनिक भारत, दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ स्वतंत्रता आंदोलन

विदेश जाकर भारत के बारे में नकारात्मक बातें करने वाले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अब एक नए बयान के कारण चर्चा में आए हैं। उन्होंने अपने यूएस दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में कहा है कि आधुनिक भारत के रचयिता NRI (विदेशों से लौटे भारतीय हैं जिन्होंने बाहरी दुनिया को देखा।)

राहुल गाँधी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े बड़े नेता महात्मा गाँधी, बीआर अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस सब एनआरआई थे जो विदेशों से होकर भारत आए थे और जानते थे बाहरी दुनिया कैसी है।

कॉन्ग्रेस नेता कहते हैं, “महात्मा गाँधी एक एनआरआई थे। ऐसा कह सकते हैं कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन दक्षिण अफ्रीका से प्रांरभ हुआ। मेरे दादाजी नेहरू, अंबेडकर, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस सब NRI थे।”

राहुल गाँधी ने न्यूयॉर्क में संबोधन के दौरान कहा कि भारत फिलहाल दो विचारधाराओं के कारण संघर्ष कर रहा है। पहला कॉन्ग्रेस समर्थित दूसरी भाजपा और आरएसएस समर्थित। लेकिन कॉन्ग्रेस के सिद्धांत और हमारी विचारधारा महात्मा गाँधी के विचारधारा से मेल खाती है जो एनआरआई थे और बहुत सुलझे हुए व्यक्ति थे।

भाजपा की विचारधारा पर राहुल बोले कि भारतीय जनता पार्टी के विचार महात्मा गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे से मेल खाते है। वह हिंसक और गुस्सैल व्यक्ति है। साथ ही और जीवन की सच्चाई का सामना करने में असमर्थ है।

राहुल ने बालासोर रेल हादसे के बारे न्यूयॉर्क में बात की। वह बोले कि जब कॉन्ग्रेस के राज में रेल हादसे होते थे तो वो लोग अंग्रेजों पर दोष नहीं मढ़ते थे। लेकिन भाजपा-आरएसएस वाले तो कह देंगे कि 50 साल पहले कॉन्ग्रेस ने ऐसा किया था तो इसलिए ऐसा हो गया। कॉन्ग्रेस नेता ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में नफरत फैलाने के लिए कुछ संस्थाएँ जिम्मेदार हैं जिन्होंने लोकतंत्र को चलाने वाली संस्था पर कब्जा कर लिया है।

अफगानिस्तान के 2 प्राइमरी स्कूल में छात्राओं को दिया जहर, अस्पताल में 80 बच्ची एडमिट: तालिबानी राज में लड़कियों के कक्षा 6 से आगे की पढ़ाई पर है प्रतिबंध

अफगानिस्तान के दो स्कूलों में छात्राओं को जहर देने की घटना सामने आई है। इसके बाद प्राथमिक स्कूलों की करीब 80 लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना 3 और 4 जून 2023 की है। शिक्षा विभाग के प्रांतीय प्रमुख ने इसकी जानकारी दी है।

उत्तरी अफगानिस्तान के सर-ए-पुल प्रांत के संगचरक जिले में ये दोनों स्कूल हैं। नसवान-ए-कबोद आब स्कूल में 60 छात्राओं को और नसवान-ए-फैजाबाद स्कूल में 17 छात्राओं को जहर दिया गया है। शिक्षा विभाग के प्रांतीय प्रमुख मोहम्मद रहमानी ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया कि दोनों स्कूल आसपास ही हैं और एक के बाद एक इनको निशाना बनाया गया। घटना के बाद छात्राओं को अस्पताल ले जाया और अब वे ठीक हैं।

रहमानी के मुताबिक घटना की विभागीय जाँच चल रही है। शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि किसी ने द्वेष में इन घटनाओं को अंजाम दिया है। हालाँकि ऐसे करने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। न ही यह स्पष्ट है कि छात्राओं को किस तरह का जहर दिया गया था। पीड़ित छात्राओं की उम्र के बारे में भी नहीं बताया गया है। रहमानी ने केवल इतना बताया है कि पीड़ित छात्राएँ कक्षा एक से छह की हैं।

गौरतलब है कि अगस्त 2021 से अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज है। उसके बाद से लगातार औरतों के अधिकार और उनकी स्वतंत्रता का दमन किया गया है। लड़कियों की छठी से आगे की पढ़ाई पर प्रतिबंध है। लेकिन स्कूली छात्राओं को जहर देने की यह पहली घटना है। वैसे 2015 में अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में स्कूल की 600 बच्चियों को जहर देने की घटना हुई थी। उस समय कई मानवाधिकार संगठनों ने इसके लिए तालिबान को ही जिम्मेदार बताया था।

बीते साल नवंबर में अफगानिस्तान के पड़ोसी देश ईरान में भी इस तरह की घटना हुई थी। कई स्कूलों में लड़कियों को जहर दिया गया था। हजारों छात्राओं ने बताया था कि वे इन घटनाओं में जहरीले धुएं से बीमार हो गई थीं। लेकिन यह बात कभी सामने नहीं आई कि इन हमलों के पीछे कौन थे या फिर इन्हें अंजाम देने के लिए किस तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया था।