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कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने युवक को पीटा, घुटने के बल बिठा कर मँगवाई माफ़ी: वायरल हो रहा है वीडियो, CM सिद्धारमैया को कहा था ‘सिद्धरामुल्ला खान’

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी सामने आई है। दरअसल, एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सिद्धरमुल्ला खान कहते हुए गाली दी थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई कर दी। यही नहीं, उस व्यक्ति को सिद्धारमैया के पोस्टर के सामने घुटनों पर बैठकर माफी माँगने के लिए भी मजबूर किया गया। वीडियो कब का है और कहाँ है, ये पता नहीं चल सका है लेकिन सोशल मीडिया पर ये अब सामने आया है।

इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दो व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक व्यक्ति सिद्धारमैया के पोस्टर के पास बैठे व्यक्ति पर थप्पड़ मारता हुआ नजर आ रहा है। साथ ही उससे पूछा जा रहा है कि उसकी सिद्धारमैया को गाली देने की हिम्मत कैसे हुई? क्या सिद्धरमैया, सिद्धरमुल्ला खान हैं? वहीं, सिद्धारमैया के पोस्टर के पास घुटने पर बैठा व्यक्ति पोस्टर से ही माफी माँगता नजर आ रहा है। वहीं, युवक उन दोनों से यह भी कह रहा है कि उसने सिद्धारमैया को गाली नहीं दी।

फिलहाल, यह वीडियो कब का है और कहाँ का है यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। साथ ही, आरोपित और पीड़ित व्यक्ति की भी पहचान नहीं हो पाई है। इस वायरल वीडियो को लेकर न्यूज 9 ने पुलिस से बात की है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में अब तक किसी भी तरह की शिकायत दर्ज नहीं की गई है।  

वहीं, बीजेपी ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को परेशान करने का आरोप लगाया है। साथ ही कॉन्ग्रेस से अपने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने की बात कही है।

गौरतलब कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले जारी किए गए अपने चुनावी घोषणा पत्र में राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन PFI से करते हुए बैन लगाने की बात कही है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि युवक के साथ मारपीट कर सिद्धारमैया के पोस्टर के सामने माफी मँगवाने वाले अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कॉन्ग्रेस सरकार क्या कार्रवाई करती है।

2 JDU नेता – एक के बालू माफिया ने तोड़ डाले दोनों पैर तो दूसरे के 24 ठिकानों पर ED की छापेमारी: हलवाई से बन गए MLC, बालू का लंबा-चौड़ा कारोबार

बिहार में बालू माफिया का आतंक सिर चढ़ कर बोल रहा है। पुलिस से लेकर नेता तक कोई भी इनसे बच नहीं पा रहा है। ताज़ा घटना समस्तीपुर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र स्थित डुमरिया गाँव की है। रविवार (4 जून, 2023) को बालू माफिया के गुर्गों ने जदयू नेता मनोज सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया। रॉड से मार कर उनका दोनों पैर तोड़ डाला गया। चीख-पुकार सुन कर ग्रामीण वहाँ जमा हुए और किसी तरह उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुँचाया।

मोतीउद्दीननगर के एक प्राइवेट अस-अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उन्हें ICU में भर्ती रखा गया है। दरअसल, जदयू नेता रात के समय गाँव के डाक अधिकारी के यहाँ आयोजित सत्यनारायण भगवान की कथा में हिस्सा लेने गए थे। वहाँ पूजा का प्रसाद खाने के बाद वो देर रात लगभग 11 बजे बाइक से अपने घर वापस लौट रहे थे। जब वो गाँव के प्राथमिक विद्यालय के पास से गुजरे, पहले से घात लगाए अपराधियों ने उन्हें घेर लिया।

हालिया पुलिस छापेमारी से नाराज अपराधियों ने उन्हें पुलिस मुखबिर बता कर उन पर हमला कर दिया। अस्पताल से निकलने के बाद पुलिस उनसे बयान लेगी। ये घटना तब हुई है, जब बालू माफिया से संबंधों के कारण जदयू के ही एक विधान पार्षद राधाचरण सेठ के यहाँ ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने छापेमारी की है। IT रेड में उनकी 200 करोड़ रुपए की संपत्ति का पहले ही खुलासा हो चुका है। पटना से लेकर राँची तक उनके कई ठिकानों पर रेड पड़ी।

राधाचरण साह को उनके समर्थक ‘सेठ जी’ कहते हैं। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में उनके 24 ठिकानों को ED ने खँगाला है। वो स्थानीय प्राधिकरण क्षेत्र से MLC हैं। पहले वो हलवाई हुआ करते थे। उनके आवास से लेकर मिठाई की दुकान और फार्महाउस पर भी ED के अधिकारी पहुँचे। उनके अलावा राजद नेता सुभाष यादव के घर पर भी ED ने छापेमारी की है। बता दें कि बिहार में एक निर्माणाधीन पुल के दोबारा ध्वस्त होने के कारण राज्य की जदयू-राजद-कॉन्ग्रेस सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है।

‘मैं जानती हूँ अब्दुल तुम अलग हो’: ‘लव जिहाद’ पर पोस्ट कर इस्लामवादियों के निशाने पर आए क्रिकेटर यश दयाल, कहा – हैक हुआ इंस्टाग्राम

गुजरात टाइटंस के तेज गेंदबाज यश दयाल IPL 2023 में रिंकू से 5 छक्के खाने के बाद चर्चा में आए थे। वह अब एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, यश दयाल ने इंस्टाग्राम पर ‘लव जिहाद’ को लेकर एक स्टोरी पोस्ट की थी। इसके बाद वह इस्लामवादियों के निशाने पर आ गए थे। हालाँकि अब उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर यह स्टोरी अपलोड की गई थी।

क्या था स्टोरी में…

यश दयाल के इंस्टाग्राम स्टोरी पर लव जिहाद को लेकर एक कार्टून पोस्ट किया गया था। इस कार्टून में, इस्लामवादियों द्वारा लव जिहाद का शिकार बनाने के बाद मार डाला गई हिंदू लड़कियों को दिखाया गया था। कार्टून में दिल्ली के साक्षी हत्याकांड को भी दर्शाया गया था। यही नहीं, कार्टून में सिर पर टोपी लगाए एक युवक को हाथ में चाकू लिए दिखाया गया था। यह युवक लड़की से कहता है, “लव जिहाद जैसा कुछ नहीं है। सब प्रोपेगैंडा है। मैं तुमसे प्यार करता हूँ।” वहीं, लड़की को, “मैं जानती हूँ अब्दुल तुम अलग हो, मैं तुम पर आँख बंद कर भरोसा करती हूँ” कहते हुए दिखाया गया।

(फोटो साभार : HT)

इस स्टोरी के सामने आने के बाद यश दयाल इस्लामवादियों के निशाने पर आ गए। इसके बाद यश दयाल ने इंस्टाग्राम पर एक और स्टोरी पोस्ट की। इसमें उन्होंने लिखा था, “दोस्तों माफी चाहता हूँ, स्टोरी गलती से पोस्ट हो गई थी। प्लीज नफरत न फैलाएँ। धन्यवाद। मेरे मन में सभी समुदाय और समाज के लिए सम्मान है।”

(फोटो साभार : HT)

यश दयाल के स्टोरी अपलोड कर माफी माँगने के बाद भी इस्लामवादियों का उन्हें ऊटपटाँग कहना बंद नहीं हो रहा था। हालाँकि इसके बाद यश दयाल ने सफाई देते हुए एक स्टोरी अपलोड की है। इस स्टोरी में उन्होंने कहा है, “प्रिय दोस्तों, आज मेरे इंस्टाग्राम अकाउंट से दो स्टोरी पोस्ट की गईं। दोनों ही स्टोरी मेरे द्वारा पोस्ट नहीं की गई थीं। मैंने अधिकारियों को मामले की सूचना दी है। मुझे विश्वास है कि मेरे अकाउंट को किसी और के द्वारा चलाकर स्टोरी अपलोड की गई। मैं अपने इंस्टाग्राम अकाउंट का कंट्रोल हासिल करने की कोशिश कर रहा हूँ। मैं सभी समुदायों की इज्जत करता हूँ और आज की फोटो मेरी आस्था नहीं दर्शाती है।”

(फोटो साभार : NBT)

‘ख्वाजा लाखों दिलों पर राज करने वाले शांतिदूत, दरगाह को बदनाम किया जा रहा’: ‘अजमेर 92’ से भड़के जमीयत ने की फिल्म पर बैन की माँग, सैकड़ों लड़कियों का हुआ था रेप

सच्ची घटनाओं पर आधारित ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरला स्टोरी’ फिल्म की सफलता के बाद ‘अजमेर 92 (Ajmer 92)’ फिल्म 14 जुलाई, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-i-Hind) ने ‘अजमेर 92’ फिल्म पर बैन लगाने की माँग की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अनुसार, यह फिल्म दरगाह अजमेर शरीफ को बदनाम करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

जमीयत के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा, “आपराधिक घटनाओं को मजहब से जोड़ने की बजाए इसके खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने की जरूरत है। वर्तमान समय में समाज को विभाजित के बहाने खोजे जा रहे हैं। यह फिल्म समाज में दरार पैदा करेगी।”

मदनी के मुताबिक, अजमेर में जिस ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, उसे हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक और लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाला शांतिदूत कहा जाता है। जिन लोगों ने उनके व्यक्तित्व का अपमान किया या अपमानित करने की कोशिश की, वे खुद अपमानित हुए हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को विभाजित के बहाने खोजे जा रहे हैं। आपराधिक घटनाओं को मजहब से जोड़ने के लिए फिल्मों और सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है, जो निश्चित रूप से निराशाजनक है। यह हमारी साझा विरासत नुकसान पहुँचाएगा।

मौलाना मदनी ने आगे कहा, “अजमेर की घटना का जो रूप बताया जा रहा है, वह पूरे समाज के लिए बहुत ही पीड़ादायक है। इसके विरुद्ध बिना किसी धर्म और संप्रदाय के सामूहिक कार्रवाई करने की आवश्यकता है, लेकिन हमारे समाज को इस दुखद घटना को सांप्रदायिक रंग देकर इसकी गंभीरता को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं केंद्र सरकार से इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की माँग करता हूँ।”

‘अजमेर 92’ फिल्म

बता दें कि ‘अजमेर 92’ फिल्म 30 साल पहले राजस्थान के अजमेर में हुई सच्ची घटना पर आधारित है। उस वक्त सैकड़ों लड़कियों (100 से भी ज्यादा) की ना सिर्फ न्यूड फोटोज निकाली गई थीं, बल्कि उनके साथ दुष्कर्म भी किया गया। इसके बाद कई लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी। इनमें देश के कई नामचीन रसूखदारों की बेटियाँ भी शामिल थीं। पुष्पेन्द्र सिंह के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ‘अजमेर 92’ में जरीना वहाब, सयाजी शिंदे, मनोज जोशी और राजेश शर्मा मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म को उमेश कुमार तिवारी ने प्रोड्यूस किया है।

मुर्दाघर में लाशों के बीच से पिता ने बेटे को ज़िंदा निकाला: मानने को तैयार नहीं था कि हो गई है मौत, उधर 7 लाशों के नीचे दबे बच्चे को भाई ने बचाया

ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में अब तक 275 लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन हादसे के बाद कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मौत के मुँह को छूकर वापस आ गए। ऐसा ही एक नाम है बिस्वजीत मलिक का, जिसे मुर्दाघर में लाशों के बीच रख दिया था। लेकिन पिता की जिद के चलते वह जिंदा बच गया। वहीं, 10 साल के बच्चे देबाशीष पात्रा को उसके बड़े भाई ने 7 लाशों के नीचे जिंदा निकाला है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के हावड़ा निवासी बिस्वजीत मलिक रेल हादसे के बाद बुरी तरह घायल हो गया था। अत्यधिक खून बहने के कारण उसके शरीर में किसी प्रकार की हरकत नहीं थी। ऐसे में उसे मृत घोषित कर मुर्दाघर में रख दिया गया था। लेकिन उसके पिता हेलाराम मलिक यह मानने को तैरने नहीं थे कि उनके बेटे की मौत हो गई है। उन्होंने अपने बेटे बिस्वजीत को फोन किया। लेकिन दूसरी तरफ से सिर्फ कराहने की आवाज ही आ रही थी।

इसके बाद वह अपने एक रिश्तेदार के साथ स्थानीय एंबुलेंस लेकर बालासोर के लिए निकल पड़े। 230 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद आखिरकार वह बालासोर पहुँच तो गए। लेकिन, उन्हें उनका बेटा किसी भी हॉस्पिटल में नहीं मिला। उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और अपने बेटे की तलाश करते रहे। 

इसी बीच एक व्यक्ति ने उन्हें कहा कि यदि उनका बेटा हॉस्पिटल में नहीं मिल रहा है तो उन्हें बहानगा हाई स्कूल में बने अस्थाई मुर्दाघर में देखना चाहिए। इस पर भी उन्होंने यह स्वीकार नहीं किया कि उनके बेटे की मौत हो गई होगी। लेकिन फिर भी वह बेटे की तलाश में मुर्दाघर पहुँच गए। जहाँ उन्हें शवों को देखने की अनुमति नहीं थी। लेकिन तभी वहाँ मौजूद एक व्यक्ति ने देखा कि लाशों के बीच किसी का हाथ हिल रहा है। चूँकि हेलाराम मौके पर मौजूद थे, इसलिए उन्होंने ध्यान से देखा तो पाया कि वह हाथ किसी और का नहीं बल्कि उनके 24 वर्षीय बेटे बिस्वजीत का है। 

इसके बाद वे बिस्वजीत को एंबुलेंस से लेकर बालासोर हॉस्पिटल पहुँचे। जहाँ शुरुआती जाँचे और दवा के बाद डॉक्टर्स ने उसे कटक मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। हालाँकि हेलाराम उसे लेकर वापस कोलकाता आ गए।जहाँ उनके बेटे का इलाज चल रहा है।

7 लाशों के बीच बड़े भाई ने बचाई छोटे की जान.

ट्रेन की टक्कर में बालासोर के स्थानीय निवासी भी हादसे का शिकार बन गए। इनमें से एक 10 वर्षीय देवाशीष पात्रा बुरी तरह से घायल है। उसके चेहरे पर काफी चोट आई है। घटना के बाद वह लाशों के बीच दब गया था। उसके ऊपर एक, दो नहीं बल्कि 7 लाशों का वजन था। घटना की जानकारी मिलने के बाद देबाशीष का बड़ा भाई शुभाशीष जो कि 10वीं का छात्र है वह मौके पर पहुँचकर अपने भाई की तलाश में जुट गया।

घनघोर अंधेरे और लोगों की चीख पुकार व लाशों को देखने के बाद भी उसकी तलाश बंद नहीं हुई। इसके बाद शनिवार (3 जून, 2023) को स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से शुभाशीष ने 7 लाशों के नीचे से अपने भाई को जिंदा निकाल लिया।

लेट गई अधनंगी, नाबालिग बेटे-बेटी से करवाई बॉडी पेंटिंग: हाई कोर्ट ने किया बरी, कहा- शरीर का नग्न प्रदर्शन अश्लीलता नहीं

अर्धनग्न होकर अपने शरीर पर बच्चे से पेंटिंग करवाने वाली ‘एक्टिविस्ट’ रेहाना फातिमा को केरल हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट केस हटाकर राहत दी है। कोर्ट ने रेहाना को पॉक्सो मामले से बरी करते हुए कहा कि समाज में किसी भी शख्स को अपने शरीर पर स्वायत्ता का अधिकार है।

जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने रेहाना फातिमा के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, “नग्नता को सेक्स से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। एक महिला के नग्न शरीर के चित्रण को भी अश्लील नहीं कह सकते।” उन्होंने कहा कि इस तरह तो मंदिरों में और सार्वजिनक जगहों पर कला के नाम पर कई ऐसी मूर्तियाँ है जिन्हें अर्धनग्न दिखाया गया है। लेकिन लोग इन्हें पवित्र मानते हैं।

कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि महिला ने अपने शरीर को सिर्फ कैनवस की तरह प्रयोग करने की ही तो अनुमति दी थी। वहीं केरल के त्रिशूर में जो पुलिकाली उत्सव के दौरान आदमियों के शरीर पर पेंटिंग एक परंपरा ही है। जज ने कहा कि पुरुषों के शरीर को तो सिक्स एब्स और बाइसेप्स दिखाकर प्रदर्शित किया जाता है। उन्हें कभी अश्लील या अशोभनीय नहीं कहते।

इस दौरान अभियोजन पक्ष ने रेहाना की वीडियो को नैतिकता के आधार पर गलत बताया। उन्होंने दलील दी कि इसे देखने से लोगों के दिमाग पर नैतिक रूप से गलत असर पड़ेगा। जिसपर अदालत ने कहा कि नैतिकता और आपराधिकता को एक साथ नहीं जोड़ सकते। जो नैतिक रूप से गलत हो जरूरी नहीं वो कानूनी रूप से भी गलत हो।

इस दौरान अदालत ने पुरुषों के शरीर को लेकर उदाहरण दिया। जस्टिस बोले कि आदमियों के शरीर ऊपरी पार्ट को कभी अश्लील नहीं माना जाता और न ही इसका सेक्सुआलाइज किया जाता है, लेकिन एक महिला के शरीर के साथ ऐसा नहीं सोचा जाता। कोर्ट ने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने शरीर की स्वायत्तता का हकदार है, यह लिंग पर चयनात्मक नहीं है। लेकिन हम देखते हैं कि इस अधिकार के साथ भेदभाव किया जाता है।

पहले खारिज हो चुकी है रेहाना की याचिका

गौरतलब है कि साल 2020 में रेहाना फातिमा ने यूट्यूब पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में अपने शरीर पर सेमी न्यूड होकर नाबालिग बच्चों (14 साल का लड़का और 8 साल की लड़की) से बॉडी पेंटिग करवाती दिखी थीं। इसके बाद उनके ऊपर पथनमथिट्टा जिले के तिरुवल्ला पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत रेहाना फातिमा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (गैर-जमानती अपराध के लिए यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रसारित करना) मुकदमा दर्ज किया गया था।

जब उन्होंने इस मामले में अग्रिम जमानत माँगी तो केरल हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद रेहाना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के वक्त जज ने उन्हें फटकारते हुए पूछा कि वो इतनी अश्लीलता क्यों करती हैं। इस पर रेहाना ने जवाब दिया कि “उनका स्टैंड हमेशा से रहा है अगर कोई पुरुष आधा नग्न खड़ा है, तो उसके बारे में कुछ भी सेक्सुअल नहीं है, लेकिन अगर कोई महिला ऐसा करती है, तो यह अश्लील है। वह कहती हैं कि इसमें सुधार लाने का एकमात्र तरीका लोगों को इस बारे में संवेदनशील बनाना है।”

‘द केरल स्टोरी’ दिखाई, सांसद ने खुद समझाई; फिर भी घर से पैसे और जेवर लेकर ‘आदतन अपराधी’ यूसुफ के साथ भागी छात्रा

मध्य प्रदेश के भोपाल में 19 साल की एक हिंदू छात्रा घर से जेवर और नकदी लेकर यूसुफ के साथ फरार हो गई। पुलिस के अनुसार यूसुफ आदतन अपराधी है। उससे दूर रहने के लिए युवती को न केवल उसके परिजनों ने, बल्कि भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी समझाया था। उसे द केरल स्टोरी भी दिखाई थी। लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही वह घर से भा गई।

19 साल की यह लड़की नर्सिंग की छात्रा है। 30 मई को उसकी शादी होनी थी। उससे पहले ही वह घर से गहने और पैसे समेटकर चली गई। परिजनों ने भोपाल के कमला नगर पुलिस थाने में युसूफ के खिलाफ केस दर्ज कराया। आरोप लगाया है कि वह उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगाकर ले गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला भोपाल के नया बसेरा इलाके का है। यूसुफ पेशेवर अपराधी है और युवती के पड़ोस में ही रहता है। युवती के परिजनों ने आरोप लगाया है कि 18-19 मई की रात यूसुफ लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगाकर ले गया। लड़की अपने साथ घर से गहने और करीब 70 हजार नकद भी लेकर गई।

बताया जा रहा है कि यूसुफ और युवती के परिजनों का करीब 8 महीने पहले भी विवाद हुआ था। यूसुफ ने लड़की के नाम पर बैंक से लोन लिया हुआ है, जिसकी किस्त वह भर रही है। इस बारे में जब लड़की के परिजनों को पता चला तो उन्होंने विरोध किया। इस पर यूसुफ ने छात्रा के परिजनों को धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद यह मामला कमला नगर थाने पहुँचा। लेकिन पुलिस ने जब युवती को बुलवाकर पूछताछ की तो उसने अपनी मर्जी से यूसुफ के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती के परिजनों ने यूसुफ पर यह भी आरोप लगाया है कि वह उनकी बेटी को ब्लै​कमेल कर रहा था। वह पिछले कुछ समय से बहुत उदास रह रही थी, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया है। परिजनों की माने तो यूसुफ ने एक साल पहले ही इलाके में रहने वाली एक अन्य युवती को न सिर्फ अपनी हवस का शिकार बनाया था, बल्कि उससे भी पाँच लाख रुपए वसूले थे।

पुलिस के अनुसार, यूसुफ के खिलाफ पहले से ही करीब आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। वह आदतन अपराधी है। फिलहाल परिजन युवती से वापस आने की गुहार लगा रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी युवती घर से चली गई थी। इस मामले की जानकारी जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को लगी तो उन्होंने लड़की को समझाने के लिए उसे फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ भी दिखाई थी।

यादव हुई खान, जैन बनी तबस्सुम, श्रीवास्तव कहलाती है बेगम… दमोह के जिस स्कूल ने हिंदू छात्राओं को पहनाया हिजाब, वहाँ महिला शिक्षकों का भी बदला धर्म

मध्य प्रदेश के दमोह में एक पोस्टर में हिन्दू छात्राओं को भी हिजाब में दिखाया गया था। ‘गंगा जमुना स्कूल’ से जुड़े इस प्रकरण को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य बाल आयोग की टीम के साथ-साथ जिले के डीएम को भी जाँच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्कूल में मजहबी शिक्षा से लेकर धर्मांतरण तक की घटनाएँ हो चुकी हैं।

इस्लामी धर्मांतरण के सबूत भी जाँच टीम को मिले हैं। राज्य बाल आयोग ने तहकीकात के क्रम में जानकारी दी है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत 3 महिला शिक्षिकाओं ने इस्लाम अपना लिया। प्रिंसिपल का नाम अफसरा बेगम है, जबकि उनके पिता का सरनेम श्रीवास्तव है। इसी तरह तबस्सुम नाम की एक शिक्षिका के बारे में पता चला कि पहले वो जैन थी। इसी तरह यादव सरनेम वाली एक महिला शिक्षिका भी अब नाम में ‘खान’ लगाती है।

अब इन शिक्षिकाओं से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि ये मामला तब खुला था, जब स्कूल की 18 विद्यार्थियों की तस्वीर एक बोर्ड पर लगाई गई थी। इन्होंने 12वीं की परीक्षा टॉप की थी। इनमें हिन्दू हहतराओं को भी हिजाब में दिखाया गया था। पहले स्कूल ने इसे स्कार्फ बता कर टालमटोल की। अब इस बात की जाँच चल रही है कि कहीं स्कूल में नौकरी के लिए मुस्लिम बनने का दबाव तो नहीं डाला जाता था। जाँच में गैर-मुस्लिम बच्चों को कुरान की आयतें पढ़वाए जाने की बात भी सामने आई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने भी कहा है कि इस स्कूल ने ‘लव जिहाद’ का साम्राज्य खड़ा किया। स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। शर्मा ने कहा कि हमारी बेटियों को जबरन हिजाब पहनने के लिए बाध्य किया गया। स्कूल चलाने वाले इदरीस, जलील और मुश्ताक के टेरर फंडिग कनेक्शन की जाँच का भी उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जबलपुर कोर्ट में NIA दौरा दबोचा गया एक वकील और कटनी का एक मुस्लिम व्यक्ति भी इनके संपर्क में था।

वहीं भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी इस मामले को लेकर कहा कि विधर्मी अपना कार्य करते रहते हैं, धर्म पर चलने वाले लोग जब शिथिल पड़ने लगते हैं तो अधर्म बढ़ता चला जाता है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को देवस्थान कहा गया है, ऐसे में जिहादी मानसिकता वाली इस कुकृत्य को धिक्कार है। स्कूल के दस्तावेजों से पता चला है कि धर्मांतरण के बाद इन शिक्षिकाओं को नौकरी में परमानेंट किया गया। प्रिंसिपल का सरनेम ‘खरे’ था, लेकिन फिर वो ‘खान’ लगाने लगी।

रेलवे की नौकरी पर लौटे बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक, पर प्रदर्शन से हटने की खबरों को किया खारिज: कहा- जारी रहेगा आंदोलन

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ आंदोलनरत पहलवानों को लेकर पिछले कुछ दिनों में सूत्रों के हवाले से कई खबरें बाहर आई है। अब रिपोर्टों में बताया गया है कि बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक ने रेलवे की अपनी नौकरी फिर से ज्वाइन कर ली है। तीनों शुरुआत से ही इस आंदोलन का चेहरा रहे हैं।

इनके रेलवे की नौकरी पर वापसी के साथ ही पहलवानों के आंदोलन के भविष्य को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई है। कहा जा रहा था कि साक्षी मलिक प्रदर्शन से अलग हो गईं हैं। लेकिन उन्होंने पीछे हटने की खबरों को खारिज किया है। वहीं बजरंग पूनिया ने भी कहा है कि उन्होंने आंदोलन वापस नहीं लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर रेलवे मुख्यालय के रिकॉर्ड से पता चला है कि साक्षी मलिक ने 31 मई को ही रेलवे के बड़ौदा हाउस में नौकरी ज्वाइन कर ली थी। साक्षी रेलवे में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में कार्यरत हैं। दो अन्य पहलवानों बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने भी अपनी-अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि तीनों कुछ दिन पहले ही नौकरी पर लौटे हैं।

नौकरी में वापस लौटने की खबरों के बीच पहलवानों के आंदोलन से हटने की खबरें भी मीडिया में सामने आ रहीं थीं। लेकिन रियो ओलंपिक की मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक ने ट्वीट कर कहा है, “यह खबर बिलकुल गलत है। इंसाफ की लड़ाई में न हम में से कोई पीछे हटा है, ना हटेगा। सत्याग्रह के साथ-साथ रेलवे में अपनी ज़िम्मेदारी को साथ निभा रही हूँ। इंसाफ मिलने तक हमारी लड़ाई जारी है। कृपया कोई गलत खबर ना चलाई जाए।”

वहीं, बजरंग पूनिया ने ट्विटर पर लिखा है, “आंदोलन वापस लेने की खबरें कोरी अफ़वाह हैं। ये खबरें हमें नुकसान पहुँचाने के लिए फैलाई जा रही हैं। हम न पीछे हटे हैं और न ही हमने आंदोलन वापस लिया है महिला पहलवानों की एफआईआर उठाने की खबर भी झूठी है। इंसाफ मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।”

इससे पहले मीडिया में इन पहलवानों के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 3 जून 2023 की रात करीब 11 बजे मुलाकात होने की भी खबर आई थी। बताया गया था कि यह बैठक करीब दो घंटे चली थी। साथ ही यह दावा भी मीडिया रिपोर्टों में किया गया था कि नाबालिग पहलवान ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ की गई शिकायत कोर्ट में वापस ले ली है।

टाइम्स नाउ नवभारत का दावा है कि नाबालिग पहलवान ने शुक्रवार ( 2 जून 2023) को पटियाला हाउस कोर्ट में जाकर अपनी शिकायत वापस ली। उसने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि बृज भूषण शरण ने सिंह ने कभी भी उसका यौन उत्पीड़न नहीं किया। हालाँकि, हिंदुस्तान लाइव ने नाबालिग पहलवान के पिता के हवाले से शिकायत वापस लेने के दावों को बेबुनियाद बताया। नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा कि पहलवानों को लेकर फेक न्यूज चलाई जा रही। इससे पहले मेरी बेटी की उम्र को लेकर भी गलत खबर चलाई गई थी। उन्होंने कहा, “वह नाबालिग है और मैं अपनी शिकायत क्यों वापस लूँ।”

गौरतलब है कि इस पहलवान की उम्र को लेकर भी पिछले दिनों विवाद हुआ था। खुद को इस पहलवान का चाचा बताने वाले एक शख्स ने दावा किया था कि उनकी भतीजी बालिग है। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया जैसे पहलवान उसका इस्तेमाल कर उनके परिवार को गुमराह कर रहे हैं। लेकिन बाद में इस लड़की के पिता ने मीडिया को बताया था कि जब उनकी बेटी का एक कैंप के दौरान यौन शोषण हुआ वह नाबालिग थी। इसी तरह न्यूज एजेंसी एनआई सूत्रों के हवाले से बता चुकी है कि बृजभूषण सिंह के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, उसको लेकर दिल्ली पुलिस को अब तक साक्ष्य नहीं मिले हैं।

बिहार में जो पुल हुआ ध्वस्त, मनीष कश्यप ने कब की खोल दी थी वहाँ हुई धाँधली की पोल: वीडियो में जता दी थी गिरने की आशंका, भाग गए थे इंजीनियर

बिहार में एक पुल अपने-आप ध्वस्त हो गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया में जम कर वायरल हो रहा रहा है। सुल्तानगंज-अगुवानी का ये पुल बिहार के दो जिलों भगलपुर और खगड़िया को जोड़ने के लिए 1717 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा था। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब ये पुल गिरा हो। यही पुल एक बार और ध्वस्त हो चुका है। दोनों हादसे निर्माण कार्य के दौरान ही हुए। तब YouTuber मनीष कश्यप ने इस मामले को उठाया था।

ये पुल 2014 से ही बन रहा है। पिछली बार जब ये ध्वस्त हुआ था, उसके बाद मनीष कश्यप यहाँ पहुँचे थे और ‘सच तक न्यूज़’ पर वीडियो डाल कर भी बताया गया था कि कैसे मनीष कश्यप को देखते हुए वहाँ के इंजीनियर लोग भागने लगे थे। मनीष कश्यप पर फ़िलहाल NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा दिया गया है और उन्हें तमिलनाडु की जेल में रखा गया है। उन्होंने तमिलनाडु में बिहारी श्रमिकों के साथ हिंसा का आरोप लगाते हुए वीडियोज शेयर किए थे।

उस समय मनीष कश्यप ने बताया था कि कैसे वहाँ एक इंजीनियर की तब अमृत हो गई थी। पुल हवा से उड़ गया। वहाँ मौजूद लोगों ने इस बारे में पूछने पर कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता। 19 मई को आँधी के दौरान ये मौत हुई थी। मनीष कश्यप ने इन पुलों को लेकर जाँच बिठाने की माँग करते हुए कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 5 वर्ष बाद बिहार में हर दिन कहीं न कहीं कोई पुल गिरेगा। उन्होंने गिरे पुल के मलबे भी दिखाए थे, जिन्हें मजदूरों द्वारा काटा जा रहा था।

उन्होंने आरोप लगाया था कि बिना इंजीनियर की देखरेख में काम चल रहा है, इसीलिए ये दुर्घटनाएँ हो रही हैं। उन्होंने पूछा था कि बिना निगरानी में काम में कोई गड़बड़ी हुई तो कौन देखेगा? मजदूरों की सेफ्टी का भी ध्यान नहीं रखा गया था, कइयों ने हेलमेट भी नहीं पहना था। इस दौरान एक मजदूर कहता भी है कि आपके कैमरे की वजह से सारे इंजीनियर हटे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने एसपी सिंगला का भी नाम लिया था, जिन्हें बिहार में अधिकतर पुल के टेंडर मिलते हैं।

इस वीडियो में मनीष कश्यप ने दिखाया था कि कैसे बिना सेफ्टी पैरामीटर (हेलमेट, जैकेट, ग्लव्स, जूते) के मजदूर ऊँचे ऊपर चढ़ कर काम कर रहे थे। एक व्यक्ति ने बताया कि कैमरा और माइक देख कर पानी पटाने का काम शुरू कर दिया गया। इस दौरान वहाँ काम कर रहे एक व्यक्ति ने धाँधली की आशंका भी जताई थी। मनीष कश्यप ने पुल पर चढ़ कर भी खामियाँ दिखाई थीं। कास्टिंग की गुणवत्ता भी गड़बड़ थी।

एक व्यक्ति ने बताया कि खुद मिस्त्री ने बताया है कि सीमेंट की क्वालिटी ठीक नहीं थी। बीच में सीमेंट के बोर छोड़ दिए गए थे, सीमेंट ऊपर-नीचे होने के कारण पानी लगने की समस्या भी आ सकती है, ये भी मनीष कश्यप ने बताया था। अब पूरा देश इस पुल के ध्वस्त होने का नजारा देख रहा है। इस पुल को तैयार करने की समयसीमा 8वीं बार बढ़ चुकी है। इसे 2019 में ही तैयार किया जाना था। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका शिलान्यास किया था।