Home Blog Page 1781

उत्तर कोरिया में 2 साल के बच्चे को आजीवन कारावास, गुनाह – परिवार ने घर में रखा था बाइबिल: रिपोर्ट में खुलासा – 70000 ईसाई जेल में, तरह-तरह की प्रताड़ना

एक अंतरराष्ट्रीय जाँच रिपोर्ट में सामने आया है कि उत्तर कोरिया में ईसाइयों पर अत्याचार हो रहा है। एक बच्चे को सिर्फ इसीलिए आजीवन कारावास की सज़ा दे दी गई, क्योंकि उसके माता-पिता के पास बाइबिल मिली थी। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के ‘इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम रिपोर्ट’ में ये सामने आया है। इसी क्रम में 2 साल के बच्चे को परिवार सहित जेल में ठूँस दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईसाई मजहब का अनुसरण करने वालों को मार डाला जा रहा है।

साथ ही ईसाई मजहब का अनुसरण करने वालों को एक विशेष प्रकार का ‘Pigeon Torture’ की सज़ा दी जा रही है। इसके तहत उनके दोनों हाथ उनकी पीठ की तरफ कर के बाँध दिया जाता है और कई दिनों तक उन्हें खड़ा रखा जाता है। एक पीड़ित ने बताया कि ये इतना दर्दनाक था कि उसने मौत को गले लगाना इससे बेहतर लगा। 2020 में एक महिला को तो जेल में सोने ही नहीं दिया गया, अंततः उसे आत्महत्या को मजबूर होना पड़ा।

उत्तर कोरिया में ईसाइयों की जनसंख्या 4 लाख बताई जा रही है, जिनमें से 70,000 को अब तक जेल में बंद किया जा चुका है। ईसाइयों को अपने बच्चों से भी अपना मजहब छिपाना पड़ रहा है। ‘Open Door USA (ODUSA)’ नामक NGO ने कहा कि देश में ईसाई सुरक्षित नहीं हैं। ‘कोरिया फ्यूचर’ नामक संस्था ने कहा कि बच्चों को स्कूलों में ईसाई मिशनरियों की करतूतों के बारे में पढ़ाया जाता है, जैसे – बलात्कार, खून पीना, मानव अंगों की तस्करी, हत्या और जासूसी।

पुस्तकों के जरिए बच्चों को बताया जा रहा है कि कैसे पादरी चर्च के एक हिस्से में ले जाकर बच्चों का खून निकाल लेते हैं। ईसाइयों को किम जोंग उन की सत्ता के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है। चर्च के पास से गुजरने वालों को भी नहीं छोड़ा जाता है। चर्च का संगीत सुनने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। चर्च में केवल बुजुर्ग ही दिखते हैं। ईसाई संस्थाओं का कहना है कि इस मजहब के लोग उत्तर कोरिया में खतरे में हैं और खत्म हो सकते हैं। बता दें कि नॉर्थ कोरिया मुख्यतः नास्तिक देश है।

ताहिर और तसव्वुर ने लिफ्ट देने के बहाने दलित नाबालिग लड़की को बिठाया, जंगल में ले जाकर किया गैंगरेप: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में दलित समाज की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। पीड़िता से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपितों के नाम ताहिर और तसव्वुर हैं। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने अपनी बुआ के घर जा रही पीड़िता को लिफ्ट देने के बहाने पीड़िता को झाँसे में लिया था। पुलिस ने ताहिर और तसव्वुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (25 मई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला संभल जिले के थाना क्षेत्र हजरत नगर गढ़ी का है। घटना की शिकायत पीड़िता की माँ ने की है। शिकायत के अनुसार, मूल रूप से मुरादाबाद के मझोला थानाक्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीया पीड़िता यहाँ अपनी बुआ के गाँव जा रही थी। इस दौरान वह बस से सिरसी नाम की जगह पर उतरी। आरोप है कि यहाँ पर तसव्वुर और ताहिर नाम के 2 युवक बाइक पर खड़े थे। उन्होंने अकेली लड़की को देख कर बातचीत शुरू की और थोड़ी ही देर में उसे विश्वास में ले लिया।

बताया जा रहा है कि बातों ही बातों में ताहिर और तसव्वुर ने पीड़िता को उसकी बुआ के घर छोड़ने का ऑफर दिया। लड़की ने इसे मान लिया। दोनों लड़की को बाइक पर बिठा कर थोड़ी दूर स्थित बारीपुर भमरौआ के जंगल में ले गए। यहाँ ताहिर और तसव्वुर ने एक खेत में बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया। बाद में दोनों ने लड़की को मुँह खोलने पर अंजाम भुगतने क धमकी दी और घटनास्थल से फरार हो गए। पीड़िता ने फोन पर अपने घर वालों को घटना की सूचना दी। थोड़ी ही देर में लड़की के परिजनों ने थाने पहुँच कर पुलिस में केस दर्ज करवाया।

पुलिस ने ताहिर और तसव्वुर पर पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर के दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जाँच व कानूनी कार्रवाई जारी है।

चीन को करारा जवाब, 80 करोड़ को राशन… खेती-किसानी से लेकर कोरोना प्रबंधन तक… 9 साल में मोदी सरकार के 9 बड़े काम, साथ ही कॉन्ग्रेस से 9 तीखे सवाल

केंद्र में मोदी सरकार के 9 साल पूरा होने को लेकर कॉन्ग्रेस ने तंज करते हुए 9 साल 9 सवाल पूछे थे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से इस तंज का जवाब दिया गया है। बीजेपी ने ट्विटर पर केंद्र सरकार की नौ बड़ी उपलब्धियों को ‘9 साल 9 कमाल’ बताते हुए जारी किया। भारतीय जनता पार्टी ने महँगाई, भ्रष्टाचार, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे 9 मुद्दों पर यूपीए और एनडीए के शासन की तुलना की है।

दरअसल कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार (26 मई 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बुकलेट जारी किया। इसमें केंद्र में मोदी सरकार के 9 साल पूरा होने पर 9 सवाल पूछे गए थे। सवाल महँगाई, बेरोजगारी, किसानों, चीन समेत कई मुद्दों पर किए गए से थे। BJP के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से देर रात कॉन्ग्रेस के सवालों का जवाब दिया गया। जिसमें 9 मुद्दों पर यूपीए और एनडीए शासन की तुलना की गई थी।

महँगाई

भाजपा ने दावा किया कि यूपीए शासन के दौरान औसत मुद्रास्फीति 8.7 प्रतिशत थी जबकि एनडीए के दौरान यह 4.8 प्रतिशत रही। पार्टी ने कहा कि उसने वर्ष 2017-23 के बीच एमएसएमई क्षेत्र में 6.76 करोड़ नौकरियां पैदा कीं और 41 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यधिक गरीबी रेखा से बाहर निकाला। कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए बीजेपी ने कहा कि यूपीए के शासन में कॉन्ग्रेस ने दोस्तों और रिश्तेदारों को कोयला खदानें आवंटित कीं जबकि एनडीए सरकार में पारदर्शी नीलामी की गई।

खेती और किसान

दावे के अनुसार PM-KISAN (पीएम किसान सम्मान निधि योजना) से 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ है। बताया गया कि यूपीए के शासन काल में चावल के लिए एमएसपी भुगतान 3.09 लाख करोड़ रुपए तय किया गया था जबकि एनडीए के तहत यह रकम 10.64 लाख करोड़ रुपये है। बीजेपी के अनुसार किसानों की आय में 70 प्रतिशत (2016-2023) की वृद्धि हुई और नौ वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई।

करप्शन और क्रोनिज्म

बीजेपी की तरफ से कहा गया कि एलआईसी का मुनाफा एक साल में 27 गुना बढ़ा और एसबीआई ने अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा दर्ज किया। धोखाधड़ी के मामले में फरार लोगों को वापस लाने में एनडीए की सरकार का रिकॉर्ड अच्छा है। उदाहरण के तौर पर क्रिश्चियन मिशेल (Christian Michel) जैसे घोटाले बाजों को भारत लाया गया।

बता दें क्रिश्चियन अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले में मुख्य आरोपितों में से एक हैं। बीजेपी का दावा है कि अपने सहयोगी दलों के साथ वे राज्य में भी अच्छी तरह से सरकार चला रहे हैं। यही वजह है कि एनडीए 15 राजयों में लोगों की सेवा कर रही है जबकि कॉन्ग्रेस सिर्फ चार राज्यों में सिमट चुकी है।

चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा

भारत-चीन मुद्दे पर बात करते हुए, बीजेपी ने कहा कि चीन सिर्फ एक ही बार भारतीय भूमि पर कब्जा कर पाने में कामयाब हुआ था। वह समय था 1962 का जब हम चीन से युद्ध हार गए थे। इस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे और यूपीए का ही शासन चल रहा था। एनडीए के शासन काल में चीन ने दुस्साहस का प्रयास तो किया लेकिन भारत ने चीन की आँख में आँख डालकर करारा जवाब दिया।

बीजेपी ने डोकलाम और गलवान जैसे झड़प का उदाहरण दिया, जहाँ भारतीय सेना ने अपनी वीरता दिखाई थी। बीजेपी की तरफ से कहा गया कि चीन और भारत के बीच अब तक 18 बैठकें हो चुकी हैं। क्योंकि भारत ‘2013 में संसद में एके एंटनी द्वारा दिए गए बयान की तरह’ झुकने को तैयार नहीं है।

सामाजिक सौहार्द्र

भाजपा ने कहा कि सिर्फ एक राज्य का चुनाव जीतने के लिए एक भारतीय ब्रांड के खिलाफ भावनाओं को भड़काने से ज्यादा नफरत की राजनीति का उदाहरण भला क्या हो सकता है? उनका इशारा कर्नाटक चुनाव में नंदिनी बनाम अमुल की राजनीति से था। आगे कहा गया है कि कॉन्ग्रेस और नफरत की राजनीति एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। यही वजह है कि देश के अधिकांश हिस्सों से कॉन्ग्रेस का सफाया हो गया है।

समाजिक न्याय

सामाजिक न्याय पर, पार्टी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का विरोध किया। कॉन्ग्रेस ने भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान किया। बीजेपी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने तीन तलाक बिल का विरोध किया था। पार्टी एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता को बदनाम कर रही है जिसने अपने ही बड़े नेता पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

लोकतंत्र और संघवाद

भाजपा की तरफ से कॉन्ग्रेस को आईना दिखाते हुए याद दिलाया गया कि कैसे चीफ जस्टीस ऑफ इंडिया (CJI) के फैसले से नाखुश कॉन्ग्रेसियों ने उनपर महाभियोग चलाने की धमकी दी थी। बीजेपी ने कहा कि मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC) के तौर पर कॉन्ग्रेस की 2 नियुक्तियों को अवैध पाए जाने के कारण रद्द करना पड़ा। कॉन्ग्रेस द्वारा वैध सरकारों को हटाने के मकसद से अनुच्छेद 356 का 90 बार प्रयोग किया गया। एनडीए के शासन काल में इन्हें बंद किया जा रहा है। साथ ही जनादेश की दिनदहाड़े लूट भी नहीं होने दी जा रही है।

कल्याणकारी योजनाएँ

कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बात करते हुए बीजेपी ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कल्याणकारी योजनाओं के लीक-प्रूफ वितरण के लिए जानी जाती है। इसके बाद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम का भी जिक्र किया गया। साथ ही कोरोना काल में उपजे हालात के बाद से 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिए जाने की भी जानकारी दी गई।

कोविड 19 प्रबंधन

कोविड प्रबंधन पर भाजपा ने कहा कि कोरोना काल में कॉन्ग्रेस ने डर औऱ फर्जी खबरें फैलाईं। कॉन्ग्रेस ने न केवल भारतीय टीकों और वैज्ञानिकों की अवहेलना की बल्कि अंतरराष्ट्रीय बड़ी फार्मा के लिए लॉबिस्ट भी बन गई। कोरोना काल में सबसे बेहतर प्रबंधन के लिए आज भी दुनिया भारत की तारीफ करते नहीं थकती। कोरोना के टीकों की 2.2 बिलियन खुराक देने से लेकर अधिक जनसंख्या होने के बावजूद सबसे कम मृत्यु दर कोरोना प्रबंधन की सफलता दर्शाती है।

दूसरी तरफ वैश्विक मंदी के बावजूद देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर उभरने और सहज तकनीक-संचालित टीकाकरण अभियान तक भारत ने वैश्विक मानदंड कायम किए हैं।

भजन शुरू होते ही रोकने आ जाती है पुलिस, अंजान लोग शिकायत कर देते हैं: गुरुग्राम के कैफे में जिन्होंने किया था ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ, वो आर्टिस्ट डरे

कुछ दिनों पहले गुरुग्राम में युवाओं के एक ग्रुप में एक कैफे के आगे हनुमान चालीसा का पाठ कर के देश भर का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। तब लोगों ने इसे नई पीढ़ी के लिए अच्छा संकेत बताया था। तब ऑपइंडिया से बातचीत में इस कार्यक्रम के आयोजक और केक डिजायर नाम के कैफे के मालिक विवेक गुलाटी ने देशवासियों से मिले प्रेम का धन्यवाद करते हुए भविष्य में अयोध्या से रामेश्वर तक की एक यात्रा अपने साथी कलाकारों के साथ करने की तैयारी बताई थी। फिलहाल अब वही कैफे मालिक और उनके साथी तमाम तरह की समस्याओं से घिर चुके हैं। उनके इस कार्यक्रम को बंद करवाने के लिए पुलिस से दबाव भी बनवाया जा रहा है। ऑपइंडिया की टीम से गुरुवार (25 मई 2023) को विवेक गुलाटी ने अपनी व्यथा बताई।

कार्यक्रम शुरू होते ही पुलिस को जाने लगती हैं शिकायतें

विवेक गुलाटी ने काफी भारी मन से हमें बताया कि शुरू के कुछ दिन तो सब सही रहा लेकिन अब हालात उनके लिए अच्छे नहीं हैं। उनका कहना है अपने साथी कलाकारों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करने के कुछ ही देर बाद वहाँ पुलिस पहुँच जाती है। कार्यक्रम के दौरान पुलिस पहुँचने की वजह विवेक ने उनके पास जाने वाली अलग-अलग नंबरों से कॉल को बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पुलिस से शोर आदि की शिकायत करते हैं और पुलिस पहुँच कर उन्हें नसीहत देने लगती है। हालाँकि ऐसा कर कौन रहा है ये विवेक को नहीं पता था।

आस-पास के दुकानदारों को भी बुलवाया जा रहा थाने

कैफे मालिक ने हमें बताया कि पुलिस को अनजान नंबरों से शिकायती कॉल आना उनके हनुमान चालीसा के वीडियो वायरल होने के लगभग सप्ताह भर बाद शुरू हुई। उनका दावा है कि पुलिस माह में लगभग 1 दर्जन बार या तो उनके कैफे पर आई या उन्हें थाने बुलाया गया। इस दौरान विवेक से आस-पास के दुकानदारों से नो ऑब्जेक्शन का पत्र भी माँगा गया जिसे देने के बाद भी अभी तक पुलिस आए दिन उन्हें टोक रही है। हालाँकि पड़ोसी दुकानदारों को भी विवेक के कार्यक्रम से समस्या नहीं फिर भी बकौल विवेक पुलिस का आना जारी है। ऑपइंडिया को मिले एक ऑडियो में विवेक को आस-पास के लोगों को लेकर 1 घंटे में थाने पहुँचने के लिए भी कहा गया है।

डर गए हैं कलाकार

विवेक का कहना है कि उनके साथ संघर्षशील कलाकार जुड़े हुए हैं जो बार-बार पुलिस के आने से डर गए हैं। इस वजह से उन्होंने जैमिंग में आने वाले कलाकारों की तादाद में भी कमी होना बताया। बकौल विवेक उनके साथ तमाम आर्टिस्ट ऐसे गरीब घरों से भी हैं जो अपने लिए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स भी नहीं ले सकते थे। इस पूरे मामले को अपनी प्रताड़ना बताते हुए कैफे मालिक ने कहा कि इस से युवा और ऊर्जावान कलाकारों के भविष्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है क्योंकि जैमिंग से मिली प्रसिद्धि ने न सिर्फ आत्मबल बल्कि कई ऑफर भी मिल रहे थे।

बाँध के रख दिए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स

विवेक हमें अपने साथ उस जगह पर ले गए जहाँ तमाम म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स रखे हुए थे। ये सारे सामान उनके ही कैफे के बेसमेंट में एक कोने में पड़े थे। कुछ वाद्य यंत्रो पर धूल भी जमने लगी है। इसकी वजह पूछने पर विवेक ने कहा कि पुलिस ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि वो शोर-शराबा बिलकुल भी न करें। ऑपइंडिया को मिले एक वीडियो में आर्टिस्ट और विवेक को कुछ पुलिसकर्मी हिदायत देते देखे जा सकते हैं। इस हिदायत में पुलिसकर्मी जैसे के साथ तैसा करने और लाईसेंस ले कर संगीत बजाने आदि की बातें कह रहे हैं। इस दौरान विवेक ने लोगों को अपने कार्यक्रम से मानसिक शांति मिलने की दलील दी तो उस पर पुलिस वाले का जवाब था कि ये तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं है।

धूल खाता गिटार

दर्शकों की कुर्सियाँ भी पैक

केक डिजायर कैफे के एक कोने में हमें कुछ कुर्सियाँ पैक रखी हुई दिखीं। जब हमने विवेक से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने उसे दर्शकों की कुर्सियाँ बताया। उन्होंने बताया कि बार-बार पुलिस के आने से सिर्फ आर्टिस्टों की ही नहीं बल्कि दर्शकों की भी संख्या काफी कम हुई है। कभी दर्शकों को भक्ति भजन से सुकून मिलने की याद दिलाते कहते हुए विवेक का कहना था कि कोई भी पुलिस से पंगा नहीं लेना चाहता।

पैक कर के रखी गईं कुर्सियाँ

विवेक का यह भी दावा है कि इस बीच कोई एक व्यक्ति ग्राहक बन कर बाजार आया था और उसने भी बड़े गलत तरीके से उनसे म्यूजिक आदि बंद करने के लिए काह। हालाँकि विवेक उस व्यक्ति का नाम और पहचान नहीं बता पाए।

पहले जुटते थे शराबी तब नहीं थी दिक्कत

कैफे केक डिजायर के मालिक विवेक का दावा है कि जिस स्थान पर वो और उनके साथी आर्टिस्ट हनुमान चालीसा का शाम को पाठ करते हैं वहाँ कभी शराबियों का जमावड़ा हुआ करता था। विवेक गुलाटी ने हमें बताया कि जब उस जगह कोई सभ्य आदमी खड़ा नहीं हो सकता था तब किसी को दिक्कत नहीं थी लेकिन जब वहाँ साफ-सफाई करवा कर भगवान का नाम लिया जा रहा तब पुलिस में शिकायतें शुरू हो गईं। हालाँकि विवेक गुलाटी ने पुलिस के बार-बार आने को वर्दी वालों की मजबूरी और किसी की शिकायत पर कंट्रोल रूम से मिला आदेश बताया।

अब सादे समारोह जैसे कायर्क्रम

फ़िलहाल खुद विवेक गुलाटी के मुताबिक तमाम दबाव और तनाव के बावजूद वो अभी भी साथी कलाकारों के साथ हनुमान चालीसा वाला कार्यक्रम करवाते हैं। हालाँकि अब होने वाली जैमिंग को विवेक ने बिना म्यूजिक आदि के एकदम सादे कार्यक्रम जैसा बताया। हालाँकि विवेक गुलाटी का कहना है कि इतना सब कुछ करने के बावजूद अभी भी पुलिस जब-तब आ जाती है।

गौरतलब है कि पिछली रिपोर्ट्स में हमें विवेक के धार्मिक स्वभाव के बारे में बताया था। इस बार हमें उनके कैफे में जा कर देखा तो कैश काउंटर के पास बने मंदिर में हिन्दू देवताओं और सिख गुरुओं की तमाम तस्वीरें लगी हुई थीं।

कैफे का कैश काउंटर

जब हमने केक डिजायर कैफे के आस-पास मौजूद कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने पुलिस के डर से कैमरे पर न आने की शर्त पर कार्यक्रम के दौरान हो रही शिकायतों पर दुःख जताया।

‘भारत को तोड़ने वाले न हों सिलेबस में…’: Pak के राष्ट्रकवि अल्लामा इकबाल के लिए बोले डीयू के VC, सावित्रीबाई फुले होंगी पाठ्यक्रम का हिस्सा

पाकिस्तान के रूप में अलग मुल्क की वकालत करने वाले अल्लमा मुहम्मद इकबाल को दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिलेबस से हटाने का काम शुरू हो गया है। इस संबंध में डीयू के एकेडमिक काउंसिल ने शुक्रवार (26 मई 2023) को एक प्रस्ताव पारित किया। काउंसिल का कहना है कि सिलेबस में नेशनल हीरो को पढ़ाया जाएगा।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर दिनेश सिंह ने कहा कि भारत को तोड़ने की नींव रखने वालों को पाठ्यक्रम में नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “इकबाल ने मुस्लिम लीग और पाकिस्तान आंदोलन के समर्थन में गीत लिखे। भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना का विचार सबसे इकबाल ने दिया था। ऐसे व्यक्तियों को पढ़ाने के बजाय हमें अपने राष्ट्रीय नायकों के बारे में पढ़ना चाहिए।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इकबाल से संबंधित BA के छठवें सेमेस्टर के मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट्स नाम का चैप्टर से इकबाल हटाने के लिए यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल को जानकारी दी जाएगी। काउंसिल की 9 जून 2023 को बैठक होने वाली है और वही इसका अंतिम फैसला लेगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय की 1014वीं एकेडमिक काउंसिल की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। सिलेबस में कुल 11 चैप्टर हैं। इनमें राजा राममोहन राय, रमाबाई, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, भीमराव अम्बेडकर जैसे शख्सियतों के विचार से जुड़े चैप्टर हैं। इनमें इकबाल का भी एक चैप्टर है। इसमें सावित्रीबाई फुले का चैप्टर जोड़ने के लिए कहा गया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल की बैठक शुक्रवार (26 मई 2023) से शुरू होकर शनिवार (27 मई 2023) को दोपहर तक लगभग 13 घंटे चली। काउंसिल के 100 सदस्यों में से पाँच ने इकबाल से संबंधित सिलेबस हटाने के प्रस्ताव का विरोध किया और इसे विभाजनकारी बताया।

बताते चलें कि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने भी 12वीं कक्षा के लिए इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिन्दी के सिलेबस में कुछ बदलाव किए हैं। वहीं, इतिहास की पुस्तकों में से मुगल साम्राज्य से जुड़े पाठ को हटाया गया है। 

शायर और कवि अल्लामा मुहम्मद इकबाल पाकिस्तान के राष्ट्रीय कवि हैं। इन्हें पाकिस्तान बनाने के आइडिया का जन्मदाता कहा जाता है। उनका जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में सन 1877 में हुआ था। उन्होंने ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा….’ भी लिखा है। हालाँकि, बाद में वे मुस्लिमों के लिए एक अलग मुल्क की वकालत करने लगे थे।

विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। यह केंद्र अनुसंधान के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे अज्ञात नायकों और घटनाओं पर काम करेगा, जिन्हें अभी तक इतिहास में जगह नहीं मिली है। इसके लिए गहन अध्ययन और शोध किया जाएगा। उस समय के उन लोगों के ‘मौखिक इतिहास’ को भी दर्ज किया जाएगा, जिन्होंने इस त्रासदी को झेला है।

विश्वविद्यालय ने कहा कि इस केंद्र में विदेशी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों और देश के भौगोलिक विभाजन के कारण लोगों पर शारीरिक, भावनात्मक, आर्थिक और सांस्कृतिक नुकसान के प्रभाव को पूरी तरह से समझने के लिए अध्ययन भी किया जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने जनजातीय अध्ययन केंद्र खोलने का भी प्रस्ताव पारित किया है।

15 अगस्त 1947 को नहीं उतारा गया था यूनियन जैक: मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे पचौरी का दावा भ्रामक, अंग्रेजों को दुःखी नहीं करना चाहते थे नेहरू

देश में नए संसद भवन के उद्घाटन और उसमें रखे जाने वाले ‘सेंगोल’ पर विवाद जारी है। इस बीच पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे तथाकथित पत्रकार पंकज पचौरी झूठ फैलाते पकड़े गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सन 1947 में ‘वास्तविक ट्रांसफर ऑफ पॉवर’ का जिक्र करते हुए दावा किया कि ‘कीर्तन मंडली’ (भाजपा और उसके समर्थक) तिरंगे और आजादी का सम्मान नहीं करते।

पंकज पचौरी ने ट्विटर पर 2 तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “वास्तविक “सत्ता का हस्ताँतरण” तब हुआ जब यूनियन जैक को उतारा गया और हमारे तिरंगे झंडे को निवर्तमान औपनिवेशिक प्रमुख (Outgoing colonial head) के सामने शांतिपूर्वक फहराया गया।” उन्होंने आगे भाजपा और उसके समर्थकों को कीर्तन मंडली कहकर मजाक उड़ाने की कोशिश की। पचौरी ने लिखा कि कीर्तन मंडली ने कभी भी तिरंगे या स्वतंत्रता का सम्मान नहीं किया इसलिए यह सब तमाशा कर रहे हैं।

जब भारत में अंग्रेजों का राज था, तब कई सरकारी इमारतों पर यूनियन जैक लगे रहे होंगे। इनमें से कई को तिरंगा लगाए जाने से पहले उतारा गया होगा। लेकिन, कई रिकॉर्ड्स की मानें तो पहली बार तिरंगा फहराए जाने के वक्त दिल्ली में यूनियन जैक को नहीं उतारा गया था। ये दिखाने की कोशिश की जा रही है कि सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक ‘सेंगोल’ नहीं, बल्कि ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक का उतारा जाना था। जबकि, ऐसा नहीं है।

असल में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर पहली बार तिरंगा 16 अगस्त, 1947 को फहराया था, आज़ादी के एक दिन बाद। PIB की एक प्रेस रिलीज में भी इसका उल्लेख है। जबकि, 15 अगस्त को वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के दरबार हॉल में हुए कार्यक्रम में, जिसमें लॉर्ड माउंटबेटन भी उपस्थित थे, उसमें यूनियन जैक को नहीं उतारा गया था। अंग्रेजों को दुःख न पहुँचे, इसीलिए ऐसा किया गया था। सत्ता हस्तांतरण के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ था।

हो सकता है कि भारत में कई जगहों और सरकारी इमारतों पर हुए कार्यक्रमों में यूनियन जैक को उतारा गया हो, लेकिन दिल्ली के लाल किला पर ऐसा नहीं हुआ था। आज़ादी के दिन जो शपथग्रहण कार्यक्रम आयोजित हुआ था, वो वायसराय हाउस के दरबार हॉल (अब राष्ट्रपति भवन) में हुआ था और इंडिया गेट पर परेड का आयोजन किया गया था।

सोशल मीडिया पर भी पंकज पचौरी को मिला जवाब, दोनों ने दिखाया आईना

उनका यह झूठ सोशल मीडिया पर फैल सकता इसके पहले ही नेटिजन्स ने तथ्यों से इसे काटना शुरू कर दिया। ‘द स्कीन डॉक्टर (@theskindoctor13)’ नाम के यूजर ने पचौरी के ट्वीट पर कमेंट करते हुए 2 मीडिया घरानों के आर्टिकल शेयर किए और लिखा, “इसे (यूनियन जैक) को नीचे नहीं किया गया था। इस पर बहस हुई लेकिन अंतिम समय में पीएम नेहरू ने इसकी मंजूरी नहीं दी। आपने जो स्क्रीनशॉट शेयर किया है वह फिल्म डिवीजन द्वारा बनाई गई किसी टेली मूवी की है। मीडिया घरानों से दो लेख साझा कर रहा हूँ जिन पर आप शायद भरोसा करेंगे।”

फैक्ट चेक करने के लिए ऑपइंडिया की टीम ने भी इंटरनेट पर इस संबंध में पड़ताल की। हमारी पड़ताल में पता चला कि ‘द प्रिंट’ का यह CSDS के एसोसिएट प्रोफेसर लेख हिलाल अहमद ने 14 अगस्त, 2019 को लिखा था। लेख में उस वीडियो की सच्चाई बताई गई है जिसमें यूनियन जैक (अंग्रेजों के झण्डा) को उतरते और भारतीय तिरंगे को उपर उठकर फहराते दिखाया जाता है।

आर्टिकल के अनुसार, दोनों घटनाएँ एक साथ घटित नहीं हुईं। इसे सांकेतिक रूप से अंग्रेजी शासन के अंत और भारतीय स्वाधीनता को दर्शाने के लिए बनाया गया था। लेख के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह नहीं मनाया गया था।

दूसरा लेख ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के लिए सत्येन मोहपात्रा ने 14 अगस्त 2009 को ही लिखा था। लेख के पहले ही पैराग्राफ में लिखा गया, “भारत को स्वतंत्रता प्राप्त होती है। यूनियन जैक को नीचे किए जाने और तिरंगे को ऊपर उठाए जाने का वीडियो हर किसी ने देखा है। लेकिन वास्तव में स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त, 1947 के दिन यूनियन जैक को उतारा ही नहीं गया।

हिंदुस्तान टाइम्स के आर्टिकल का स्क्रीन शॉट

14-15 अगस्त 1947 की रात तिरंगा काउंसिल हाउस (आज के संसद भवन) पर फहराया गया था। लाल किले पर 16 अगस्त 1947 को सुबह 8.30 बजे तिरंगा फहराया गया था। अंग्रेजों की भावनाओं को ठेस न पहुँचे, इसीलिए 15 अगस्त 1947 को यूनियन जैक उतारने की योजना को कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया।

संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए दिल्ली पहुँचे तिरुववादुथुराई अधीनम: PM मोदी को भेंट करेंगे ‘सेंगोल’, 21 ‘अधीनम’ निभाएँगे जिम्मेदारी

नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए तमिलनाडु के 21 तिरुववादुथुराई अधीनम (शैव संप्रदाय से संबंधित मठ के महंत) चेन्नई से दिल्ली पहुँच गए हैं। रविवार (28 मई 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने वाले नए संसद भवन के उद्घाटन में ये सभी उपस्थित रहेंगे।

जो अधीनम दिल्ली में आमंत्रित हैं, उनमें धर्मपुरम अधीनम, पलानी अधीनम, विरुधचलम अधीनम, थिरुकोयिलुर अधीनम आदि शामिल हैं। रविवार को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) संसद भवन में ऐतिहासिक और पवित्र ‘सेंगोल’ या राजदंड की स्थापना करेंगे।

नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान मदुरै अधीनम के 293वें प्रधान पुजारी राजदंड को प्रधानमंत्री मोदी को भेंट करेंगे। इसके बाद इसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास इसे स्थापित किया जाएगा। धर्मपुरम अधीनम के संत पीएम मोदी को विशेष उपहार पेश करेंगे।

न्याय के प्रतीक सेंगोल की स्थापना के बारे में बात करते हुए थिरुवदुथुराई अधीनम के अम्बालावन देसिगा परमचार्य स्वामीगल ने शुक्रवार (26 मई 2023) को कहा कि सेंगोल न्याय का प्रतीक है और इसे महत्व दिया जाना तमिलनाडु के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा, “लॉर्ड माउंटबेटन को सेनगोल मिला और यह 1947 में पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू को दिया गया था। यह अच्छा है कि पीएम मोदी सेंगोल को नई संसद में जगह देंगे। कल, हम दिल्ली जा रहे हैं और हम इसे पीएम को देंगे।”

पीएम मोदी ने अमृत काल के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में सेंगोल को अपनाने का फैसला लिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार (24 मई 2023) को कहा था कि पवित्र सेंगोल अंग्रेजों से भारत में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा था कि ऐतिहासिक सेंगोल को स्थापित करने के लिए संसद भवन सबसे उपयुक्त और पवित्र स्थान है।

मुस्लिम महिला को हिन्दू पति के साथ शॉपिंग करते देख भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, पहले की छेड़खानी फिर पीटा: वीडियो भी वायरल कर दिया

आजकल ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ किसी मुस्लिम लड़की को उसके हिन्दू दोस्त के साथ देख कर उसके साथ बदसलूकी की गई, उनकी पिटाई की गई। कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ द्वारा अंजाम दी गई इन घटनाओं के वीडियो भी सामने आए हैं। अब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक नया मामला सामने आया है। मुरादाबाद में बुर्का पहनी हुई एक महिला को अपने हिन्दू पति के साथ शॉपिंग करते देख इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए।

मुस्लिम युवकों ने पहले महिला के साथ बदसलूकी की, जब पति ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी की गई। ये घटना मुरादाबाद के बिलारी कस्बे की है। ये वीडियो सोमवार (22 मई, 2023) का बताया जा रहा है। युवती ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दे दी है। यूपी पुलिस ने इस आधार पर FIR दर्ज कर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। मुरादाबाद में 5 दिनों में ये दूसरी इस तरह की घटना है, जहाँ मुस्लिम लड़की और उसके साथ किसी हिन्दू को देख कर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें पीटा हो।

ताज़ा मामले में पीड़िता एक गाँव में रहती है और पेशे से नर्स है। बिलारी के ही एक प्राइवेट अस्पताल में वो नौकरी करती है। पड़ोस के गाँव में ही रहने वाले आकाश के साथ उसका प्रेम संबंध चल रहा था। दोनों कोर्ट मैरिज भी कर चुके हैं। हालाँकि, दोनों ने धमकियों के डर से सार्वजनिक रूप से इस शादी को जाहिर नहीं किया है। टेलर की दुकान पर महिला को घेर कर मुस्लिम युवकों ने पूछा, “तुम मुस्लिम होकर दूसरे धर्म के युवक के साथ क्या कर रही हो?

फिर उन्होंने इसका वीडियो बनाना भी शुरू कर दिया। विरोध करने पर छेड़खानी शुरू कर दी। साथ ही उन मुस्लिम युवकों ने ब्लैकमेल करते हुए ये भी कहा कि अगर वो 4600 रुपए देगी तो उसका वीडियो वायरल नहीं किया जाएगा, डिलीट कर दिया जाएगा। वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। टिप्पणियाँ की जाने लगीं। महिला ने कहा कि वो बालिग है और अपनी मर्जी से गई थी। SP (ग्रामीण) संदीप कुमार मीणा ने जल्द आरोपितों की गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है।

शादीशुदा हिंदू महिला के पीछे पड़ा साहिल रफीक, धमकी दे देकर ढाई साल तक रेप किया: नशे की हालत में गुजरात पुलिस ने घर से पकड़ा

गुजरात के आनंद जिले में एक 25 साल की हिंदू विवाहिता ने साहिल रफीक वोहरा नाम के शख्स पर ढाई साल तक उसका रेप करने का आरोप लगाया। महिला ने कहा कि साहिल उसे धमकी दे देकर उसे कंट्रोल करता था। विरोध करने पर कहता था कि वो दोनों के बीच हुई पर्सनल चैट्स को पब्लिक कर देगा। मामले की शिकायत मिलने के बाद आनंद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध आगे की कार्रवाई शुरू हो गई है।

शिकायत में महिला ने साहिल रफीक पर आरोप लगाया कि रफीक ने उसके पीछे लग लगकर उसका नंबर निकाला। बाद में उससे चैट पे बातें करने लगा। जब महिला उसके चंगुल में फँस गई तो उसने धमकी दी कि वो उन दोनों के बीच की बातचीत वायरल कर देगा।

25 वर्षीय महिला पेतलाड रहती है और आनंद के एक शोरूम में काम करती है। आरोपित भी उसके दफ्तर के बगल दुकान में काम करता था। यहीं से दोनों की दोस्ती बढ़ी। लेकिन धीरे-धीरे साहिल पेतलाड से आनंद तक उसका पीछा करने लगा।

महिला ने उसे ऐसा करने से रोका तो उसने उसको धमकी दी कि वो दोनों की चैटों को वायरल करके महिला को बदनाम कर देगा। महिला के अनुसार साहिल रफीक उसे कहता था, “चाहे तुम कुछ भी कर लो। मैं तुम्हें पसंद करता हूँ और जो हो जाए तुम्हें पाकर ही रहूँगा।”

महिला ने यह भी बताया कि आरोपित कई बार उसे धमकाकर होटल ले गया, वहाँ उसके साथ संबंध बनाए और कहता रहा कि अगर किसी को इन सब चीजों के बारे में कहा तो अंजाम बहुत बुरे होंगे। पीड़िता के अनुसार, उसका यह शोषण करीबन ढाई साल चला। इसके बाद उसने हिम्मत जुटाकर इस मामले में शिकायत दी।

पीड़िता की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेते हुए आनंद पुलिस ने साहिल रफीक वोहरा को गिरफ्तार कर लिया है। जब पुलिस उसे पकड़ने गई तो वो नशे की हालत में था। पुलिस अपनी जाँच करके आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

भारत का वीजा न मिलने पर पाकिस्तान में आत्महत्या को मजबूर हिन्दू: बहन-बेटियों को उठा कर ले जाते हैं, दावा- 12 साल में 14000 हिन्दू लड़कियों का अपहरण-धर्मांतरण

पाकिस्तान वहाँ के हिंदुओं के लिए नर्क से कम नहीं है। हिंदू समुदाय की लड़कियों का अपहरण और उनका इस्लाम में धर्मांतरण रोजमर्रा की बात हो गई है। इससे तंग आकर हिंदू समुदाय के लोग किसी कीमत पर पाकिस्तान छोड़ना चाहते हैं। हालाँकि, भारत का वीजा नहीं मिलने के कारण हिंदू समुदाय के कई लोगों द्वारा आत्महत्या कर ली गई।

सिंध में गड़िया लुहार सहायता कमेटी के चेयरमैन मांजी लुहार उर्फ काका का कहना है कि पिछले छह माह में उनके चार परिचित हिंदुओं ने आत्महत्या कर ली। ये लोग भारत आना चाह रहे थे, लेकिन उन्हें वीजा नहीं दिया जा रहा हथा। पाकिस्तान में ऐसे सैकड़ों हिंदू परिवार हैं, जिन्हें भारत आने का वीजा नहीं मिल रहा और पाकिस्तान में उनके परिवार की अस्मत खतरे में पड़ गई है।

भास्कर की खबर के मुताबिक, सिंध स्थित मीरपुर खास के मोहन भारत के जैसलमेर आना चाहते थे, लेकिन तीन साल से उन्हें वीजा नहीं मिल रहा है। इससे तंग आकर उन्होंने जहर खा लिया। ऐसे ही कच्छभूरी की एक हिंदू बुजुर्ग महिला ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

पाकिस्तान से विस्थापित होकर राजस्थान के जयपुर में रह रहे गणेश रीको में कपड़ों की कटिंग करने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके मौसा पाकिस्तान के रहीमयार खान में मजदूरी करते हैं। उनकी 6 बेटियाँ हैं। उनमें से तीन बेटियों का कट्टरपंथी मुस्लिमों ने जबरन इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया, जबकि एक की हत्या कर दी। गणेश 10 साल पहले मौका पाकर भारत आ गए।

पाकिस्तान के ही कोटगुलाम में रहने वाले विष्णुराम की बेटी 9वीं में पढ़ती थी। इलाके के कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम उसे उठा ले गए। पिता के बहुत भागदौड़ करने के बाद भी उनकी बेटी नहीं मिली। ऐसे कई लोग हैं, जिनकी बहन-बेटियों को कट्टरपंथियों द्वारा जबरन उठा लिया गया। ये आवाज तो उठाते हैं, लेकिन पुलिस से लेकर न्यायपालिका तक में उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता।

कुछ ऐसी ही कहानी राव परिवार की है। मीरपुर खास के रहने वाला राव परिवार तीन माह पहले ही पाकिस्तान से मारवाड़ पहुँचा है। राव परिवार का कहना है कि उनकी बहन का भी जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया गया। इससे परिवार इतना डर गया कि अपना सब कुछ छोड़कर भारत आ गया।

राव परिवार के लोगों का कहना है कि उनकी बहन अब किस हालत में है, यह उन्हें या उनके परिवार के किसी को पता नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता रोशन भील कहते हैं कि ऐसा हर परिवार अतीत भूलना चाहता है, पर ऐसा होता नहीं है। पाकिस्तान में पिछले 12 सालों में 14,000 हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और गैंगरेप की घटनाएँ सामने आई हैं।

पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के अत्याचारों से परेशान वहाँ के हिंदुओं ने भारत सरकार से शरण देने की अपील की है। उन्होंने भारत आने वाले हिंदू परिवारों को वीसा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही जो परिवार भारत में हैं, उन्हें पाकिस्तान नहीं भेजने की भी अपील की है।

बताते चलें कि पाकिस्तान से भारत आने वाले इन हिंदुओं की समस्याएँ कम नहीं हुई हैं। जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी के आदेश पर 16 मई 2023 को प्रशासन ने पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के घरों को गिरा दिया। इसकी हर तरफ आलोचना तीखी आलोचना हुई। इसके बाद टीना डाबी ने इन विस्थापितों के पुनर्वास के लिए 40 बीघा जमीन आवंटित किया।

इस जमीन का चयन जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर मूलसागर के पास किया गया है। जमीन समतल करने का काम शुरू करने से पहले पूजा-अर्चना भी की गई। नगरीय सुधार न्यास (UIT) को बिजली और पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस जमीन पर करीब 200 परिवारों को बसाने की योजना है।

इस फैसले के बाद 25 मई 2023 को टीना डाबी शरणार्थी परिवारों के बीच पहुँची। इन लोगों ने उनका भावपूर्ण अंदाज में स्वागत किया। रिपोर्ट के मुताबिक शरणार्थियों ने कहा, “कलेक्टर साहिबा, थों न्याल कर दिया… हे तो हेक ही आशीष देसो थे दूधो नहाओ पूतो फलो।” पुत्रवती होने के आशीर्वाद के जवाब में हँसते हुए कलेक्टर टीना डाबी ने कहा- बेटी होगी तो भी चलेगी

बताते दें कि राजस्थान में गृह विभाग ने 30 मई 2023 को सचिवालय में पाकिस्तान से विस्थापित हुए परिवारों की विभिन्न समस्याओं को लेकर एक अहम बैठक बुलाई है। इसमें नागरिकता सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक में जोधपुर, बीकानेर संभागीय आयुक्त अथवा इनके प्रतिनिधि और ग्रामीण विकास विभाग, फाइनेंस, उद्याेग, रेवेन्यू के अफसर शामिल होंगे।