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PM मोदी ने ‘मन की बात’ के 101वें एपिसोड में की युवा संगम से लेकर जल संकट तक की चर्चा, कहा- ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम देश को जोड़ने वाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (28 मई 2023) को अपनी ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) का 101वाँ एपिसोड पूरा किया। इस एपिसोड में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया। इस दौरान पीएम ने केंद्र की भाजपा द्वारा की गई पहल और सफलताओं का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर को भी याद किया। सावरकर की आज जयंती है।

बता दें कि 30 अप्रैल 2023 को पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 100 एपिसोड किया था। इस एपिसोड का सीधा प्रसारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UN Head Quarter) सहित पूरी दुनिया में किया गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ का ये एपिसोड सेकेंड सेंचुरी का प्रारंभ है। पिछले महीने देश ने इसकी स्पेशल सेंचुरी को सेलिब्रेट किया था। उन्होंने कहा कि देशवासियों की भागीदारी ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है। पिछले एपिसोड के एक वाकये को शेयर किया।

पीएम ने कहा, “जब ‘मन की बात’ का प्रसारण हुआ तो उस समय दुनिया के अलग-अलग देशों में, अलग-अलग Time zone में… कहीं शाम हो रही थी तो कहीं देर रात थी। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में लोगों ने 100वें एपिसोड को सुनने के लिए समय निकाला। मैंने हजारों मील दूर न्यूजीलैंड का वो वीडियो भी देखा, जिसमें 100 वर्ष की एक माताजी अपना आशीर्वाद दे रही हैं।”

सारवरकर को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वीर सावरकर का व्यक्तित्व दृढ़ता और विशालता से समाहित था। उनके निर्भीक और स्वाभिमानी स्वाभाव को गुलामी की मानसिकता बिल्कुल भी रास नहीं आती थी। स्वतंत्रता आंदोलन ही नहीं, सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए भी वीर सावरकर ने जितना कुछ किया उसे आज भी याद किया जाता है।”

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत चलने वाले कार्यक्रम ‘युवा संगम’ के आयोजन को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह युवाओं का सबसे बड़ा मंच है। इसको लेकर पीएम ने अरुणाचल प्रदेश के छात्र ग्यामर न्योकुम और बिहार के सासाराम जिले की विशाखा सिंह से फोन पर बात भी की। पीएम मोदी ने दोनों से बात करने के दौरान युवा संगम से जुड़े उनके अनुभव की जानकारी ली और इस पर ब्लॉग लिखने की सलाह दी।

विशाखा सिंह ने युवा संगम की अपनी यादें पीएम मोदी से साझा करते हुए कहा कि इसके चलते तमिलनाडु में उनके कई दोस्त भी बन गए हैं। विशाखा सिंह ने तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात और इसरो (ISRO) के दफ्तर में जाने को यादगार बताया। पीएम से बातचीत के दौरान विशाखा सिंह ने तमिलनाडु के खानपान से लेकर संस्कृति तक के अपने अनुभव साझा किए।

जी-7 देशों की बैठक में जापान के बारे में बोलते हुए पीएम ने कहा, “कुछ दिन पहले ही मैं जापान में हिरोशिमा में था। वहां मुझे Hiroshima Peace Memorial Museum में जाने का अवसर मिला। ये एक भावुक कर देने वाला अनुभव था। जब हम इतिहास की यादों को संजोकर रखते हैं तो वो आने वाली पीढ़ियों की बहुत मदद करता है। कई म्यूजियम में हमें नए सबक मिलते हैं तो कई बार बहुत कुछ सीखने को मिलता है।”

इस दौरान पीएम ने गुरुग्राम के म्यूजियम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “गुरुग्राम में एक अनोखा संग्रहालय है – Museo Camera, इसमें 1860 के बाद के 8 हजार से ज्यादा कैमरों का collection मौजूद है। तमिलनाडु के Museum of Possibilities को हमारे दिव्यांगजनों को ध्यान में रखकर design किया गया है। मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय एक ऐसा museum है, जिसमें 70 हजार से भी अधिक चीजें संरक्षित की गई हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत में International Museum Expo का भी आयोजन किया था। इसमें दुनिया के 1200 से अधिक Museums की विशेषताओं को दर्शाया गया। हमारे यहां भारत में अलग-अलग प्रकार के ऐसे कई Museums हैं, जो हमारे अतीत से जुड़े अनेक पहलुओं को प्रदर्शित करते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “2010 में स्थापित Indian Memory Project एक तरह का Online Museum है। ये जो दुनियाभर से भेजी गयी तस्वीरों और कहानियों के माध्यम से भारत के गौरवशाली इतिहास की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। विभाजन की विभिषिका से जुड़ी स्मृतियों को भी सामने लाने का प्रयास किया गया है।”

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “बीते वर्षों में भी हमने भारत में नए-नए तरह के museum और memorial बनते देखे हैं। स्वाधीनता संग्राम में आदिवासी भाई-बहनों के योगदान को समर्पित 10 नए museum बनाए जा रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और उसके कारण होने वाले जल संकट पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम सबने एक कहावत कई बार सुनी होगी, बार-बार सुनी होगी – बिन पानी सब सून। बिना पानी जीवन पर संकट तो रहता ही है, व्यक्ति और देश का विकास भी ठप्प पड़ जाता है। भविष्य की इसी चुनौती को देखते हुए आज देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “1965 के युद्ध के समय, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। बाद में अटल जी ने इसमें जय विज्ञान भी जोड़ दिया था। कुछ वर्ष पहले, देश के वैज्ञानिकों से बात करते हुए मैंने जय अनुसंधान की बात की थी। ‘मन की बात’ में आज बात एक ऐसे व्यक्ति की, एक ऐसी संस्था की, जो जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान, इन चारों का ही प्रतिबिंब है।”

वीर सावरकर को नए संसद भवन में श्रद्धांजलि, PM नरेंद्र मोदी ने कहा – उनके त्याग, साहस और संकल्प-शक्ति की गाथाएँ आज भी देती हैं प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उनकी तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी भी उपस्थित रहे। इन बड़े नेताओं के अलावा कई अन्य सांसदों ने भी वीर सावरकर को उनकी जन्म-जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर सावरकर का जन्म 28 मई, 1889 को महाराष्ट्र के नासिक स्थित भागपुर में हुआ था।

इस तरह वीर सावरकर के जन्म के 140 वर्ष पूरे हो चुके हैं। ध्यान देने वाली बात है कि रविवार (28 मई, 2023) को ही नए संसद भवन का उद्घाटन भी हुआ है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चोल राजदंड ‘सेंगोल’ को तमिल ‘अधीनम’ पुरोहितों की मौजूदगी में इसमें स्थापित किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य शीर्ष नेताओं के साथ वीर सावरकर की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की, और हाथ जोड़ कर उन्हें नमन किया।

‘मन की बात’ के 101वें एपिसोड में भी पीएम मोदी ने वीर सावरकर को याद किया और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों की चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर के त्याग, साहस और संकल्प-शक्ति की गाथाएँ आज भी हमें प्रेरित करती हैं। उन्होंने उस दिन को याद किया, जब वो अंडमान में उस कोठरी में गए थे जहाँ वीर सावरकर को अंग्रेजों ने कालापानी की सज़ा के दौरान डाला था। पीएम मोदी ने कहा कि वीर सावरकर का व्यक्तित्व वीरता और विशालता में समाहित था, उनके निर्भीक और स्वाभिमानी स्वभाव को गुलामी की मानसिकता रास नहीं आती थी।

बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा सामाजिक न्याय और समानता के लिए भी वीर सावरकर ने काफी कुछ किया। बता दें कि ‘हिंदुत्व’ शब्द को जन-जन तक पहुँचाने वाले वीर सावरकर को अंग्रेजों ने आजीवन कारावास की दो-दो सज़ाएँ सुनाई थीं। उन्होंने अपने भाई के साथ मिल कर ‘अभिनव भारत’ सोसाइटी की स्थापना की थी। उनकी पुस्तक ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था।

PM मोदी का एक आह्वान….और संसद के वीडियो को मिली शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार की आवाज: नंबर वन ट्रेंड हुआ #MyParliamentMyPride

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजारिश के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में देश की तमाम बड़ी हस्तियों ने नए संसद भवन पर अपने वॉइस ओवर के साथ वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार, अनुपम खेर और शाहरुख़ खान शामिल हैं। शाहरुख़ खान ने नए संसद भवन को अपनी आशाओं का घर बताया तो अक्षय कुमार ने इस भारत की विकास गाथा कहा है। शनिवार (27 मई 2023) को देर रात PM मोदी ने इन दोनों वीडियो को रीट्वीट किया है।

अक्षय कुमार ने अपने वीडियो में कहा कि उन्हें भारत की नई संसद देख कर अलग ही ख़ुशी मिल रही है। अपने बचपन की याद करते हुए उन्होंने कहा कि तब दिल्ली में ज्यादातर इमारतें ब्रिटिशकालीन दिखाई देती थीं। अक्षय कुमार ने आगे कहा, “जब आप इस बिल्डिंग को देखें तो ये सोचें कि हमारा देश कहाँ था और कहाँ आगे निकल रहा है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस काम के लिए तहे दिल से धन्यवाद करते हुए अक्षय कुमार ने ‘जय हिन्द जय भारत’ से अपनी बात को खत्म किया।

अक्षय कुमार का वीडियो रीट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके द्वारा व्यक्त किए गए शब्दों की सराहना की। PM मोदी ने संसद को लोकतंत्र का प्रकाश स्तम्भ भी बताया।

वहीं शाहरुख़ खान ने भारत के नए संसद भवन को उम्मीदों का नया घर बताया है। शाहरुख़ खान ने 140 करोड़ भारतीयों को एक परिवार बताया और नए संसद में देश के हर प्रदेश, जाति और धर्म के समावेश होने की आशा जताई। वीडियो में नए संसद भवन द्वारा देश में एकता और समानता की भावना को बल मिलने की उम्मीद के साथ शाहरुख़ ने ‘नया संसद नए भारत का’ सम्बोधन किया है। शाहरुख़ ने भी अपने वीडियो के वॉइस ओवर को जय हिन्द शब्द से खत्म किया है।

शाहरुख़ खान के वीडियो को भी रीट्वीट करते हुए PM मोदी ने उनकी अभिव्यक्ति की तारीफ की। हैशटैग के तौर पर #MyParliamentMyPride लिखते हुए प्रधानमंत्री ने नए संसद को भारत के मजबूत होते लोकतंत्र और विकास का प्रतीक बताया। #MyParliamentMyPride ट्विटर पर फ़िलहाल टॉप ट्रेंड कर रहा है।

दरअसल 26 मई 2023 (शुक्रवार) को PM मोदी ने 1 मिनट 48 सेकेंड का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया था। तब बिना किसी टेक्स्ट, आवाज या बैकग्राउंड म्यूजिक के इस वीडियो पर उन्होंने लोगों से अपनी आवाज में विचार माँगे थे। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ विचारों को वो रीट्वीट करेंगे।

जिन अन्य लोगों के वीडियो प्रधानमंत्री मोदी ने रीट्वीट किए हैं उनमे पत्रकार अजीत भारती और मीनाक्षी जोशी, मनोज मुंतशिर, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर, प्रोफ़ेसर विकास पाठक, सुनील सिंह, सौमिल जैन आदि शामिल हैं।

पहले कर दिया था हिन्दू कार्यकर्ता की विधवा को बर्खास्त, अब दोबारा की नौकरी बहाल: कर्नाटक CM सिद्धारमैया ने दी जानकारी, BJP के विरोध का असर दिखा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने दिवंगत भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू की पत्नी नूतन की नौकरी को फिर से बहाल करने का ऐलान किया है। नूतन भी पिछली भाजपा सरकार में नियुक्त हुईं उन 150 से अधिक संविदाकर्मियों में से एक थीं जिन्हे कॉन्ग्रेस सरकार ने सेवामुक्त कर दिया है। नूतन की बहाली को राज्य सरकार द्वारा मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय बताया गया है। प्रवीण नेट्टारू की हत्या जुलाई 2022 में कर दी गई थी जिसका आरोप PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) से जुड़े लोगों पर है।

शनिवार (27 मई 2023) को एक ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह ऐलान किया। 150 से अधिक संविदाकर्मियों की पहले ही हो चुकी बर्खास्तगी को एक स्वाभाविक प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने इस मामले में सरकार का कोई दखल न होने की बात कही। प्रवीण नेट्टारू की पत्नी की नौकरी को विशेष मामला बताते हुए CM सिद्धारमैया ने ये ऐलान किया। उन्होंने बताया कि नूतन कुमारी को फिर से नियुक्त किया जाएगा। अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री ने कर्नाटक हेडलाइन की न्यूज़ का स्क्रीनशॉट अटैच किया है। नूतन ने अपनी बहाली पर कॉन्ग्रेस सरकर को धन्यवाद दिया है।

22 सितंबर 2022 को नूतन कुमारी को तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के कार्यालय में वरिष्ठ सहायक (ग्रुप सी) के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। यहाँ से नूतन के ही निवेदन पर उन्हें दक्षिण कन्नड़ उपायुक्त कार्यालय में तैनाती दे दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नूतन कुमारी को यह नौकरी बीजेपी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष एवं दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र से सांसद नलिन कुमार कटील के अनुरोध पर दी गई थी। इस नौकरी की संस्तुति मानवीय आधार पर की गई थी।

भाजपा ने किया था बर्खास्तगी का विरोध

नई सरकार के गठन के बाद नूतन कुमारी की बर्खास्तगी का भारतीय जनता पार्टी ने विरोध किया था। शनिवार (27 मई 2023) को किए गए एक ट्वीट में भाजपा ने PFI को कॉन्ग्रेस द्वारा पोषित संगठन बताते हुए इस कार्रवाई को साम्प्रदायिक घृणा बताया था। सिद्धारमैया सरकार को PFI की कठपुतली कह कर भाजपा ने फैसले को आमनवीय बताया था और इसे तत्काल वापस लेने की माँग की थी।

गौरतलब है कि बीजेपी नेता प्रवीण नेट्टारू की जुलाई 2022 में बेल्लारे गाँव के अंदर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कार्यकर्ताओं पर लगा था। फ़िलहाल इस केस की जाँच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) कर रही है।

‘ताबूत’ बताकर RJD ने नए संसद भवन का किया अपमान, JDU ने उद्घाटन को ‘कलंक’ कहा: NCP की सुप्रिया बोलीं- फोन करके नहीं दिया निमंत्रण, व्हॉट्सएप भेजा

एक तरफ पूरा देश नए संसद भवन को लेकर उत्साहित है और उस पर गर्व कर रहा है तो दूसरी तरफ विपक्षी दल तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और अक्षय कुमार से लेकर पूरा देश नए संसद भवन का वीडियो शेयर करके इसे #MyParliamentMyPride बता रहा है।

वहीं, लालू यादव (Lalu Yadav) की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नए संसद भवन की डिजाइन की तुलना ताबूत (शव रखा जाने वाला बॉक्स) से की है। वहीं, NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा कि देश में तो लोकतंत्र है ही नहीं।

राजद के अपने ट्विटर हैंडल से एक तरफ ताबूत और दूसरी तरफ नए संसद भवन की तस्वीरें शेयर की गईं। इन तस्वीरों के साथ लिखा गया, “ये क्या है?” राजद की इस हरकत पर नेटीजंस उनकी भारी आलोचना कर रहे हैं।

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाईटेड) ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन पर आपत्तिजनक बयान दिया है। JDU ने कहा कि कलंक का इतिहास लिखा जा रहा है। हालाँकि, JDU के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है और कहा कि यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “हमने जो चिह्न लगाया है, वो इसलिए लगाया है कि राजनीति और लोकतंत्र का ताबूतीकरण नहीं करें। जिस तरह से देश में संवादहीनता बढ़ी है, अधिनायकवाद थोपने की कोशिश की जा रही है, उससे संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है। अगर प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रपति भी होतीं तो और अच्छे चित्र आते, लेकिन आत्ममुग्धता की दहलीज पर खड़े होकर जिस तरह का इवेंट किया जा रहा है और महिमामंडन हो रहा है, यह किसी का इवेंट नहीं हो सकता है।”

ताबूत से नए संसद भवन की तुलना करने पर भाजपा सांसद दुष्यंत गौतम ने RJD पर हमला बोला है। गौतम ने कहा कि विपक्षी दलों का काम सिर्फ पीएम मोदी का विरोध करना है। उन्होंने कहा, पहले संसद की आकृति तो जीरो की तरह है तो क्या भारत पहले जीरो के अंदर बैठा था? भारत तब जीरो की तरह धरातल में जा रहा था?” 

उधर NCP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “बिना विपक्ष की उपस्थिति के नए संसद भवन का उद्घाटन संपन्न नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि देश में लोकतंत्र नहीं है। ये एक अधूरा कार्यक्रम है। 3 दिन पहले हमें व्हाट्सएप पर निमंत्रण भेजा गया। वे फोन पर विपक्ष के नेताओं से संपर्क कर सकते थे। पुराने संसद भवन से हमारी यादें जुड़ी हुई हैं। हम सभी पुराने संसद भवन से प्यार करते हैं, वह भारत की आज़ादी का वास्तविक इतिहास है।”

विपक्षों दलों से हटकर देशवासी नए संसद भवन को लेकर उत्साहित हैं। शाहरुख खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किए गए संसद भवन के वीडियो में वॉइस-ओवर डालकर शेयर किया है। वहीं, उनकी फिल्म ‘स्वदेस’ का थीम संगीत बैकग्राउंड में बजता है।

वीडियो के साथ शाहरुख खान ने लिखा है, “हमारे संविधान को बनाए रखने वाले, इस महान राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करने वाले और उसके एक व्यक्ति की विविधता की रक्षा करने वाले लोगों के लिए कितना शानदार नया घर है नरेंद्र मोदी जी। नए भारत के लिए एक नया संसद भवन, लेकिन भारत के गौरव के सदियों पुराने सपने के साथ। जय हिन्द! #MyParliamentMyPride”

प्रधानमंत्री नरेंद्र के शेयर किए गए वीडियो में अपनी आवाज के जरिए बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी नए संसद भवन की विशेषता बताई है। इसके साथ ही अक्षय कुमार ने लिखा है, “संसद के इस शानदार नए भवन को देखकर गर्व होता है। यह सदैव भारत की विकास गाथा का प्रतिष्ठित प्रतीक बना रहे। #MyParliamentMyPride”

इन लोगों के अलावा बड़ी संख्या में देशवासियों और प्रमुख हस्तियों द्वारा इस वीडियो को अपनी-अपनी आवाज में शेयर किया गया। इनमें से कुछ वीडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर भी किया है।

खाप पंचायतों के दिल्ली कूच करने की घोषणा के बाद दिल्ली बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा, पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात: पहलवानों के संसद मार्च को लेकर भी पुलिस सतर्क

देश को मिले नए संसद भवन के ऐतिहासिक मौके पर किसान नेताओं और हरियाणा के जाट समुदाय से जुड़ीं खाप पंचायतों के दिल्ली कूच करने की घोषणा के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई। सिंघु बॉर्डर सहित दिल्ली के हर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया है।

दरअसल, भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों को इन लोगों ने अपना समर्थन दिया है। इसके साथ खाप पंचायतें और राकेश टिकैत ने दिल्ली पहुँचने की बात कही है।

इधर धरने पर बैठे पहलवानों ने भी जंतर-मंतर से संसद भवन तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके अलावा, महिला खाप पंचायत की भी घोषणा की गई है। इसको देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र से लेकर दिल्ली की सीमाओं तक सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर सहित दिल्ली के हर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी है। इसके साथ ही आने-जाने हर व्यक्ति की भी जाँच की जा रही है। महिला खाप पंचायत को देखते हुए सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में महिला जवानों को भी तैनात किया गया है।

हरियाणा के सोनीपत नेशनल हाईवे 44 पर दिल्ली के कुंडली बॉर्डर पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। वहाँ पर वाटर कैनन, बज्र वाहन के अलावा डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों के साथ हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

दिल्ली के लिए रवाना होने वाले किसान संगठनों एवं खाप पंचायतों के कार्यकर्ताओं को पुलिस जगह-जगह रोक रही है। पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्यों को अंबाला बॉर्डर पर रोक दिया गया है। वहीं, दिल्ली बॉर्डर पर पहुँचे कुछ लोगों को भी पुलिस ने रोक दिया है।

शनिवार (27 मई 2023) को राकेश टिकैत ने दिल्ली पहुँचने का ऐलान किया था। टिकैत ने कहा था, “पुलिस ज्यादा तंग ना करे। हम आएँगे जरूर। अगर हमें यहाँ (बॉर्डर पर) रोका गया तो हम यहीं बैठ जाएँगे।” उन्होंने कहा था कि किसान ट्रैक्टर की जगह अन्य वाहनों से दिल्ली बॉर्डर जाएँगे।

दरअसल, तीन सप्ताह पहले किसान संगठन और खाप पंचायत पहलवानों के समर्थन में जंतर मंतर पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस और मोदी सरकार को 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम देते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी। बताते चलें कि उनका अल्टीमेटम 21 मई 2023 को ही पूरा हो गया है।

स्कूल में छात्राओं को टीचर ने करवाई नमाज पढ़ने की प्रैक्टिस, पुरानी Video वायरल: पुलिस कर रही जाँच, प्रिंसिपल ने कहा- ये नाटक की रिहर्सल थी

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक क्लास के अंदर कुछ छात्राओं को नमाज़ पढ़ने की मुद्रा में देखा जा सकता है। वीडियो में एक टीचर भी दिखाई दे रहीं हैं, जिनके आगे ये सब चल रहा है।

हिन्दू संगठनों ने इस वीडियो पर कार्रवाई की माँग की है। स्कूल द्वारा जारी बयान में इसे पिछले साल अक्टूबर महीने में एक नाटक की प्रैक्टिस का हिस्सा बताया। फ़िलहाल जाँच के आधार पर बागपत पुलिस ने ट्वीट किया है कि स्कूल में नमाज कराए जाने की बात सत्य नहीं है बल्कि यह एक नाटक के मंचन का हिस्सा था, इसे ही किसी ने रिकॉर्डिंग कर वायरल कर दिया।

जानकारी के मुताबिक वायरल हो रहा वीडियो बागपत के थानाक्षेत्र छपरौली में आने वाले होशियारी देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज राठैड़ा का है। इसे सबसे पहले एक हिन्दू संगठन के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया गया। कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर कर के कार्रवाई की माँग की जाने लगी। 33 सेकेंड के इस वीडियो में एक टीचर चेयर पर बैठी हैं। सामने स्कूल की ड्रेस में कुछ छात्राएँ मौजूद हैं जो टीचर के डायरेक्शन पर सामूहिक तौर पर नमाज़ की प्रैक्टिस करती दिख रहीं हैं। इस वीडियो को किसी ने चुपके से पीछे से बनाया है।

वीडियो में टीचर छात्राओं को बाकायदा नमाज़ के तौर-तरीके भी सिखाती सुनाई दे रहीं हैं। शनिवार (27 मई 2023) को बागपत पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया और जाँच के लिए थाना प्रभारी छपरौली को निर्देश दिया। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो के वायरल होने पर स्कूल के प्रिंसिपल का बयान सामने आया है। प्रिंसिपल मुनेश चौधरी ने यह वीडियो अक्टूबर 2022 का बताया है। उन्होंने कहा कि तब स्कूल में होने वाले एक नाटक की सीन का ये रिहर्सल था। हालाँकि उन्होंने जानकारी दी कि बाद में इस हिस्से को नाटक से हटा दिया गया था।

चित्र साभार – बागपत पुलिस

हालाँकि बागपत पुलिस ने अख़बार की यह कटिंग शेयर कर के बाद में उस ट्वीट को डिलीट कर लिया है।

PM मोदी ने ‘सेंगोल’ को किया ‘साष्टांग दंडवत प्रणाम’, नए संसद भवन में हाथ जोड़कर पहुँचे: उद्घाटन के बाद सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन, मजदूरों को भी सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (28 मई 2023) को सुबह तमिलनाडु से आए पुजारियों (अधीनम) की उपस्थिति में हवन-पूजन किया। उसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास राजदंड या राजदंड को स्थापित किया। इस अवसर पर अधीनमों ने मंत्रोच्चार किया। पीएम ने महात्मा गाँधी को पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

संगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राजदंड को सांष्टांग प्रणाम किया। उसके बाद अधीनमों के साथ उसे लेकर स्पीकर के आसन के पास गए। इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी उनके साथ मौजूद थे।

सदन में घुसने के दौरान पारंपरिक तमिल वाद्य बजाया जा रहा था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री से आगे-आगे शहनाई बजाई जा रही है। नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पूजा-पाठ के दौरान मंत्रोच्चार होते रहे। अंदर भी अधीनम मंत्रोच्चार करते रहे।

सेंगोल को स्थापित करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन के बाहर कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे। यहाँ पर उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। यहाँ पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम स्थल पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सहित विभिन्न धर्मों के आचार्य मौजूद थे। इस दौरान इन धर्माचार्यों ने अपने-अपने धर्मों के अनुसार पाठ किया। यहाँ पर एक आचार्य ने गीता का पाठ किया। इस दौरान पीएम मोदी ने संसद भवन बनाने वाले श्रमिकों से भी मुलाकात की।

बताते चलें कि नए संसद भवन के निर्माण के लिए देश भर से सामग्रियाँ जुटाई गई हैं। जैसे कि नागपुर से सागौन की लकड़ी, राजस्थान के सरमथुरा से सैंडस्टोन, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कालीन, अगरतला से बाँस की लकड़ी और महाराष्ट्र के औरंगाबाद और जयपुर से अशोक प्रतीक को मँगवाया गया है।  

‘हम पहलवान थे, अर्जुन अवॉर्ड लाए’: कभी अधिकारियों से जूते साफ़ करवाने की बात करते थे आजम खान, ‘एहसान’ याद दिलाया तो SP ने दिया करारा जवाब

हेट स्पीच से जुड़े एक मामले में बरी होने के बाद सपा नेता आजम खान के तेवर आसमान पर हैं। शनिवार (27 मई, 2023) को आजम खान रामपुर के सीओ सिटी अनुज चौधरी को तथाकथित एहसान याद दिला रहे थे। आजम के तंज पर सीओ अनुज चौधरी ने भी शानदार पलटवार किया। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। बहस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

रिपोर्टों के मुताबिक सपा नेता आजम खान शनिवार को रामपुर स्थित पार्टी ऑफिस जा रहे थे। यूपी पुलिस सपा कार्यालय की तरफ जा रही गाड़ियों को रोक कर चेक कर रही थी। आजम खान की गाड़ी भी कतार में थी जिससे वे असहज हो गए। आजम खान खुद गाड़ी से उतर कर पुलिस वालों के पास पहुँच गए। जहाँ अनुज चौधरी भी मौजूद थे। आजम खान ने अनुज चौधरी से कहा, “आप सीओ सीटी हैं? आप तो पहलवान हैं। सपा ने ही आपको ऑर्गनाइज किया था, हमारा एहसान याद नहीं आपको?

इस पर अनुज चौधरी ने कहा, “एहसान की कौन सी बात है इसमें? हम पहलवान थे… अर्जुन अवॉर्ड लाए। एहसान की क्या बात है? हम अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। पहले भी करते थे अब भी कर रहे हैं।” किसी एहसान से अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिलता। अवॉर्ड एहसान से नहीं मेहनत से मिला है।”

जवाब सुनकर तिलमिलाए आजम खान ने कहा, “मैं कह रहा हूँ कि हम लोग अपने बड़ों का एहसान याद रखते हैं। आपको तो मैंने सुंदर कहा है। इस पर सीओ सिटी ने आजम खान से पूछा कि हमने ऐसा क्या किया कि आप हमपर नाराज हो रहे हैं? तो आजम खान यह कहते हुए रवाना हो गए कि आप के कारनामे हमारे मोबाइल में हैं।”

सपा नेता आजम खान का अधिकारियों के साथ विवाद नया नहीं है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों के वक्त आजम खान का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह एक गाड़ी में खड़े होकर चुनाव प्रचार कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कलेक्टर -लेक्टर से मत डरियो, यह तनखईया हैं। तनखईयों से नहीं डरते हैं। और देखें हैं मायावती जी के फोटो, कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं। हाँ, उन्हीं से है गठबंधन। उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा इनसे अल्लाह ने चाहा तो।

राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया, तब नहीं था उनकी गरिमा का ख्याल? जनजातीय समाज की महिला पर बदजुबानी करने वालों की पार्टी, अब खेल रही गंदी राजनीति

आज कॉन्ग्रेस पार्टी खुद को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सबसे बड़ा हितैषी दिखा रही है। पार्टी के नेता लगातार उनका नाम लेकर बयान दे रहे हैं और भाजपा सरकार पर उन्हें अपमानित करने के आरोप मढ़ रहे हैं। ये गंदी राजनीति नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर खेली जा रही है। नए संसद भवन में चोल साम्राज्य का राजदंड ‘सेंगोल’ स्थापित हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन कर रहे हैं – इससे कॉन्ग्रेस पार्टी को खासी पीड़ा हो रही है।

ये वही कॉन्ग्रेस है, जिसने राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया था, आज पार्टी चाहती हैं कि संसद भवन के उद्घाटन पर राष्ट्रपति का भाषण हो, सारे कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करें। अगर राष्ट्रपति के लिए पार्टी के मन में इतना ही सम्मान होता तो क्या संसद में उनके अभिभाषण का बहिष्कार किया जाता? तब नहीं याद आया कि संसद में सबसे पहले राष्ट्रपति होती हैं? आज ये सारा का सारा ज्ञान उड़ेलने में लगे हुए हैं।

सबसे पहले बात करते हैं राहुल गाँधी की। एक सांसद के रूप में अयोग्य साबित हो चुके राहुल गाँधी ने ट्विटर पर लिखा कि राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना – यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। साथ ही उन्होंने ज्ञान दिया कि संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है। 2 साल की सज़ा मिलने के बाद राहुल गाँधी की सांसदी चली गई है और वो सदन के सदस्य नहीं है।

अब कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान को लीजिए। उन्होंने दावा कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नए संसद भवन के उद्घाटन का अधिकार छीन लिया है। फिर उन्होंने कह दिया कि मोदी सरकार की अहंकार की प्रणाली ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने संसद को जनता द्वारा स्थापित लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद संसद का प्रथम अंग है।

इतना ही नहीं, 19 विपक्षी दलों ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के बहिष्कार का भी ऐलान कर दिया। लोकतंत्र के खतरे में होने का रोना रोया गया और निरंकुश तरीके से इसके निर्माण की बातें की गईं। संविधान का ज्ञान लेते हुए संयुक्त बयान में राष्ट्रपति के पद के अपमान का आरोप लगाया गया। साथ ही देश की राष्ट्रपति के जनजातीय समाज की महिला होने की दुहाई देते हुए उनके अपमान का आरोप लगाया गया।

सामान्य तौर पर कोई भी इन बयानों को देखेगा तो ऐसा ही मान बैठेगा जैसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने ही द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया हो और उन्हें राष्ट्रपति बनाया हो। कम से कम इतना तो मान ही लेगा कि कॉन्ग्रेस ने चुनाव के ज़रूर उनका समर्थन किया होगा। अगर ये दोनों नहीं हुआ, तो कम से कम जनजातीय समाज की महिला राष्ट्रपति का अपमान तो नहीं ही किया होगा। लेकिन, सच्चाई ये है कि कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस मामले में नीचता की सारी पराकाष्ठा पार कर दी।

कॉन्ग्रेस ने एक बार नहीं, बल्कि बार-बार द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया और आज खुद को उनका सबसे बड़ा हितैषी दिखा रही है। ‘अखिल भारतीय संगठित कामगाए एवं कर्मचारी कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष उदित राज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बारे में कहा था, “द्रौपदी मुर्मू जी जैसा राष्ट्रपति किसी देश को न मिले। चमचागिरी की भी हद्द है । कहती हैं 70% लोग गुजरात का नमक खाते हैं । खुद नमक खाकर ज़िंदगी जिएँ तो पता लगेगा।”

कॉन्ग्रेस नेता कल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ ‘चमचागिरी’ और ‘नमक खाने’ जैसे शब्दों को जोड़ते थे, आज उस भाजपा पर उनके अपमान का आरोप लगा रहे जिसने न सिर्फ उन्हें राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया बल्कि मजबूती से उनके पीछे खड़े रह कर उनकी जीत भी सुनिश्चित की। द्रौपदी मुर्मू को झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी भाजपा की सरकार ने ही नियुक्त किया था। ओडिशा में उन्हें मंत्री भी भाजपा ने ही बनाया था।

ऐसा नहीं है कि कॉन्ग्रेस की याददाश्त कमजोर है, बल्कि पार्टी जानबूझकर ऐसा करती आई है। अब चलते हैं एक और नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की तरफ, जो पंजाब से सांसद हैं। उन्होंने तो राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन पर ही सवाल उठा दिया था। उन्होंने दावा कर दिया था कि राष्ट्रपति को अपने मन की बोलने ही नहीं दिया जाता, ऐसे में वो हमेशा सोचते हैं कि संसद को संबोधित करने का औचित्य ही क्या है?

ये अलग बात है कि प्रतिभा पाटिल और फिर प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहने के दौरान उनके मन में ये विचार नहीं कौंधा और न ही उन्होंने ऐसा कोई ट्वीट किया। यानी, जनजातीय समाज की एक महिला के लिए उनकी कुढ़न और उनकी पार्टी की विचारधारा का संयुक्त प्रदर्शन उन्होंने इस ट्वीट से किया। नहीं तो कोई नेता ऐसा कैसे पूछ सकता है कि राष्ट्रपति को अभिव्यक्ति और बोलने की आज़ादी का अधिकार नहीं है? उन्होंने इस विषय पर गंभर बहस की ज़रूर जताई थी।

क्या कॉन्ग्रेस इस पर कभी बहस कर सकती है कि प्रणब मुखर्जी और प्रतिभा पाटिल को अपने मन की बोलने का अधिकार है या नहीं? ये चीजें द्रौपदी मुर्मू के समय ही याद आईं, इसका अर्थ है कि जनजातीय समाज की महिलाओं को लेकर उसकी सोच ठीक नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने मनीष तिवारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? आज राष्ट्रपति के संसद का हिस्सा होने से लेकर उनके अधिकार तक की बातें जो याद आ रही हैं, अपने नेता के बयान के समय ये चीजें क्यों नहीं याद आईं?

ये अलग बात है कि इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता अनुच्छेद-87 को भूल गए, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्र सरकार की नीतियों का वर्णन होता है और उसी हिसाब से चीजें तय होती हैं। बदजुबानी की बात आए तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी का नाम कैसे भूला जा सकता है। वो पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष में हैं। उन्होंने राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कह दिया था। ये अलग बात है कि उनके बयान पर कोई कार्रवाई नहीं की पार्टी ने।

कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए। यशवंत सिन्हा जैसे बदजुबान को द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ उतारने वाले आज द्रौपदी मुर्मू का नाम लेकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। अगर जनजातीय समाज की महिला को लेकर इतनी ही गंभीरता थी तो उनके खिलाफ उम्मीदवार क्यों उतारा गया? दुष्प्रचार क्यों किया गया? पार्टी जब तक इन सवालों के जवाब नहीं देती, उसे कोई अधिकार नहीं है राष्ट्रपति पद की गरिमा की बात करने की।